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CAA को लेकर 9 बड़े प्रश्न और उनके उत्तर: वामपंथियों के हर प्रपंची सवाल का जवाब जानें यहाँ

प्रश्न 1 – क्या पाकिस्तान में बलूचियों, अहमदिया और म्यांमार में रोहिंग्याओं को इस कानून के अंतर्गत रियायत नहीं दी जानी चाहिए?

नागरिकता अधिनियम-1955 के तहत नागरिकता संशोधन कानून किसी भी देश के किसी भी नागरिक को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने से नहीं रोकता है। बलूच, अहमदिया और रोहिंग्या कभी भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं बशर्ते वो नागरिकता अधिनियम-1955 से संबंधित वर्गों में प्रदत्त योग्यता को पूरा करें।

प्रश्न 2 – पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान, इन तीन देशों से आने वाले हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को इससे कैसे फायदा होगा?

यदि इन तीन देशों से आए शरणार्थियों के पास पासपोर्ट, वीजा जैसे दस्तावेजों का अभाव है और वहाँ उनका उत्पीड़न हुआ हो तो वह भी भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं। नागरिकता संशोधन कानून ऐसे लोगों को नागरिकता का अधिकार देता है। इसके अलावा ऐसे लोगों को जटिल प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी और जल्द भारत की नागरिकता मिलेगी। इसके लिए भारत में 1 से लेकर 6 साल तक की रिहाइश की जरूरत होगी। हालाँकि, अन्य लोगों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने के लिए 11 साल भारत में रहना जरूरी है।

प्रश्न 3 – क्या शरणार्थियों की देखभाल के लिए ‘संयुक्त राष्ट्र’ के तहत भारत का दायित्व नहीं है ?

हाँ, यह शरणार्थियों की देखभाल करता है और भारत इस कानून के तहत अन्य शरणार्थियों को दूर नहीं भेज रहा है। भारत सहित प्रत्येक देश के प्राकृतिकीकरण के अपने नियम हैं। भारत में 2 लाख से अधिक श्रीलंकाई तमिल और तिब्बती और 15,000 से अधिक अफगानी, 20-25 हजार रोहिंग्या और विदेशों से सैकड़ों अन्य शरणार्थी वर्तमान में भारत में रह रहे हैं। यह उम्मीद की जाती है कि किसी दिन जब वहाँ की स्थिति में सुधार होगा तो यह शरणार्थी अपने घर वापस लौट जाएँगे। लेकिन, इन 3 देशों के हिंदुओं के मामले में, यह कानून इस वास्तविकता को स्वीकार करता है कि इन 3 देशों में उत्पीड़न का माहौल कभी नहीं सुधरने वाला है।

प्रश्न 4- क्या इन तीन देशों से गैर-कानूनी रूप से भारत आए मुस्लिम अप्रवासियों को नागरिकता संशोधन कानून के अंतर्गत वापस भेजा जाएगा?

नहीं। नागरिकता संशोधन कानून का किसी भी विदेशी को भारत से बाहर भेजने से कोई लेना-देना नहीं है। किसी भी विदेशी नागरिक को देश से बाहर भेजने, चाहे वह किसी भी धर्म या देश का हो, की प्रक्रिया फॉरनर्स ऐक्ट 1946 और /अथवा पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) ऐक्ट 1920 के तहत की जाती है। ये दोनों कानून, सभी विदेशियों- चाहे वे किसी भी देश अथवा धर्म के हों, देश में प्रवेश करने, रिहाइश, भारत में घूमने-फिरने और देश से बाहर जाने की प्रक्रिया को देखते हैं।

इसीलिए, सामान्य निर्वासन प्रक्रिया सिर्फ गैरकानूनी रूप से भारत में रह रहे विदेशियों पर लागू होगी। यह पूरी तरह सोच-समझ कर बनाई गई कानूनी प्रक्रिया है जो स्थानीय पुलिस अथवा प्रशासनिक प्राधिकारियों द्वारा गैरकानूनी रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने के लिए की गई जाँच के बाद तैयार की गई है। इस बात का ध्यान रखा गया है कि ऐसे गैरकानूनी विदेशी को उसके देश के दूतावास/उच्चायोग ने उचित यात्रा दस्तावेज दिए गए हों ताकि जब उन्हें डिपोर्ट किया जाए तो उनके देश के अधिकारियों द्वारा उन्हें सही प्रकार से रिसीव किया जा सके।

असल में, ऐसे लोगों को देश से बाहर भेजने की प्रक्रिया तभी शुरू होगी जब कोई व्यक्ति को द फॉरनर्स ऐक्ट, 1946 के तहत ‘विदेशी’ साबित हो जाएगा। इसलिए पूरी प्रक्रिया में स्वचालित, मशीनी या भेदभावपूर्ण नहीं है। राज्य सरकारों और उनके जिला प्रशासन के पास फॉरनर्स ऐक्ट के सेक्शन 3 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) ऐक्ट 1920 के सेक्शन 5 के तहत केंद्र सरकार द्वारा प्रदुत्त शक्तियाँ होती हैं, जिससे वे गैरकानूनी रूप से रह रहे विदेशी की पहचान कर सकता है, हिरासत में रख सकता है और उसके देश भेज सकता है।

प्रश्न 5- क्या नागरिक संशोधन कानून भारतीयों हिंदू, मुस्लिम, किसी को भी प्रभावित करता है ?

नहीं। इसका किसी भी भारतीय नागरिक के साथ किसी भी तरह से कोई लेना-देना नहीं है। भारतीय नागरिक भारत के संविधान द्वारा उन्हें प्रदत्त मौलिक अधिकारों का आनंद लेते हैं। कोई भी राज्य नागरिक संशोधन कानून को निरस्त नहीं कर सकता है। नागरिक संशोधन कानून से संबंधित गलत सूचना देने वाला अभियान चलाया जा रहा है। यह कानून मुस्लिम नागरिकों सहित किसी भी भारतीय नागरिक को प्रभावित नहीं करता है।

प्रश्न 6 – श्रीलंका के तमिलों का क्या होगा ?

1964 और 1971 में प्रधानमंत्री स्तरीय करार के बाद भारत ने 4 लाख 61 हज़ार तमिल लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान की है। वर्तमान में 95 हज़ार तमिल लोग तमिलनाडु में रह रहे हैं और केंद्र और राज्य से अनुवृत्ति ले रहे हैं। ये लोग अपनी पात्रता पूर्ण होते ही नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

प्रश्न 7 – ये तीन देश ही क्यों? और उपरोक्त अधिसूचित संप्रदाय का केवल धार्मिक उत्पीड़न ही क्यों?

नागरिक संशोधन कानून तीन पड़ोसी देशों में धार्मिक आधार पर हुए उत्पीड़न से संबंधित है, जहाँ संविधान एक विशिष्ट राज्य धर्म के लिए प्रदान करता है। इन तीनों देशों में अन्य धर्मों के अनुयायियों का धार्मिक उत्पीड़न किया गया है। यह कानून एक केंद्रित कानून है जो इन छह अल्पसंख्यक समुदायों के लिए एक विशेष स्थिति में एक उपाय के तौर पर कार्य करेगा ।

प्रश्न 8- क्या इसका मतलब यह है कि इन 3 देशों के मुस्लिमों को भारतीय नागरिकता कभी नहीं मिल सकती है?

नहीं, इन तीनों और अन्य सभी देशों के मुस्लिम हमेशा भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं, यदि वो इसके पात्र हैं। नागरिक संशोधन कानून ने किसी भी देश के किसी भी विदेशी को भारत की नागरिकता लेने से नहीं रोका है बशर्ते कि वह कानून के तहत मौजूदा योग्यता को पूरा करे। पिछले 6 वर्षों के दौरान, लगभग 2830 पाकिस्तानी नागरिकों, 912 अफगानी नागरिकों और 172 बांग्लादेशी नागरिकों को भारतीय नागरिकता दी गई है।

इनमें से कई लोग इन तीन देशों में बहुसंख्यक समुदाय से हैं। इस तरह के प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त होती रहती है और यह तब भी जारी रहेगी जब वे पंजीकरण या प्राकृतिककरण के लिए कानून में पहले से दी गई पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। 2014 में दोनों देशों के बीच सीमा समझौते के बाद बांग्लादेश के पचास से अधिक हिस्सों को भारतीय क्षेत्र में शामिल करने के बाद बहुसंख्यक समुदाय के लगभग 14,864 बांग्लादेशी नागरिकों को भी भारतीय नागरिकता प्रदान की गई।

प्रश्न 9- नागरिक संशोधन कानून किस पर लागू होता है ?

यह केवल हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई विदेशियों के लिए प्रासंगिक है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत में 31.12.2014 तक धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर पलायन कर चुके हैं। यह मुस्लिमों सहित किसी भी अन्य विदेशी पर लागू नहीं होता है, इन तीन देशों सहित किसी भी देश से भारत में पलायन कर रहे हैं।

(लेख साभार: PIB INDIA)

जिग्नेश मेवाणी के नेतृत्व में विरोध-प्रदर्शन करती मुस्लिमों की भीड़ हुई हिंसक, पुलिस वैन पर हमला

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) का विरोध करने वाली एक मुस्लिम भीड़ ने जिग्नेश मेवाणी के वडगाम निर्वाचन क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन किया और उसने छपी-पालनपुर राजमार्ग को भी अवरुद्ध कर दिया। जल्द ही भीड़ हिंसक हो गई और उसने एक पुलिस वैन पर हमला कर दिया।

यह वही जगह है जहाँ गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी विरोध-प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे।

पहले वीडियो में, देखा जा सकता है कि ‘Taj Sweets & Bakers’ के बाहर विरोध में खड़ी मुस्लिम भीड़ के बीच एक पुलिस वैन खड़ी है जिसे आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा और लगातार उसे धक्का मारा जा रहा है। 

वीडियो में ‘Taj sweets and bakers’ जहाँ मुस्लिम भीड़ पुलिस वैन पर हमला कर रही है।

यह वीडियो पुराना नहीं बल्कि CAA के विरोध-प्रदर्शन का है क्योंकि इसी वीडियो को गुजरात के वडगाम के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने भी शेयर किया है, जो लगभग 18 सेकंड का है। इसमें भी उसी ‘Taj Sweets & Bakers’ दुकान को देखा जा सकता है। इससे यह स्पष्टतौर पर पता चलता है कि यह वीडियो पुराना नहीं है। 

जिग्नेश मेवाणी द्वारा साझा किए गए वीडियो में ‘Taj sweets and bakers’

यह उसी जगह और उसी भीड़ का एक वीडियो है, जहाँ पुलिस वैन पर हमला किया जा रहा था। इस वीडियो को शेयर करते हुए जिग्नेश मेवाणी बड़ा गर्व महसूस कर रहे थे।

देशव्यापी विरोधों के चलते, देश के कई हिस्सों में प्रशासन की तरफ़ से धारा-144 लागू की गई। लेकिन, विपक्षी नेताओं के उकसाने पर लोगों ने क़ानून का उल्लंघन किया और क़ानून को हाथों में लेते हुए ‘शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन’ की आड़ में पुलिस पर हमला भी किया।

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CAA विरोधी मेधा पाटेकर को शरणार्थियों ने खदेड़ कर भगाया, कहा- हिम्मत है तो Pak में रह कर दिखाओ

नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर पाकिस्तान से भारत आए पीड़ित शरणार्थियों में ख़ुशी की लहर है। इस क़ानून से उन सभी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता मिलने का राह प्रशस्त हो गया, जिन्हें अल्पसंख्यक होने की वजह से तीनों पड़ोसी इस्लामिक देशों अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके तहत ऐसे शरणार्थी आएँगे, जो दिसंबर 31, 2014 के पहले से भारत में रह रहे हैं। इस क़ानून को लेकर विपक्षी नेतागण पूरे देश में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली में कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है और उपद्रवियों व पुलिस के बीच कई जगह झड़प हुई है।

गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) को वामपंथी नेताओं ने जगह-जगह निकल कर विरोध प्रदर्शन किया। कथित इतिहासकार रामचंद्र गुहा और ख़ुद को किसान नेता बताने वाले योगेंद्र यादव को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसी क्रम में पर्यावरण एक्टिविस्ट मेधा पाटेकर भी विरोध करने पहुँचीं, लेकिन पाक से आए हिन्दू शरणार्थियों ने उन्हें खदेड़ दिया। शरणार्थियों ने मेधा पाटेकर को खदेड़ते हुए कहा कि जो लोग सीएए का विरोध कर रहे हैं, वो पाकिस्तान में रह कर दिखाएँ। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में देखें:

यहाँ तक कि वहाँ उपस्थित एक बच्चे ने भी मेधा पाटेकर की बात नहीं सुनी और उन्हें ज़ोर से फटकारा। पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर भारत आए शरणार्थियों के बीच मोदी सरकार के इस क़ानून को लेकर ख़ुशी का माहौल है क्योंकि उन्हें वही सारे अधिकार मिलने जा रहे हैं, जो एक आम भारतीय नागरिक को मिलता है।

मुशर्रफ की लाश को घसीटते हुए लाओ और D-चौक पर 3 दिन लटकाए रखो: पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को वहाँ के सुप्रीम कोर्ट ने सज़ा-ए-मौत दी है। पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट अपने फ़ैसले में यहीं नहीं रुका बल्कि उसने मरने के बाद भी मुशर्रफ के साथ क्या किया जाना है, इसे लेकर भी आदेश दिया। पाक सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए गए फ़ैसले के पॉइंट नंबर 66 के अनुसार, मरने के बाद मुशर्रफ की लाश को घसीट कर इस्लामाबाद के डेमोक्रेसी चौक तक लाया जाना चाहिए। बता दें कि इसे डी-चौक भी कहा जाता है, जो पाकिस्तान के राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री दफ्तर, संसद और सुप्रीम कोर्ट के नजदीक ही है।

पाक सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि फाँसी देकर मारे जाने के बाद मुशर्रफ की लाश को घसीटते हुए डी-चौक तक लाया जाना चाहिए और वहाँ 3 दिनों तक उसे लटका कर रखा जाना चाहिए। विशेषकों का मानना है कि पाक सुप्रीम कोर्ट ने वहाँ की फौज को नीचा दिखाने के लिए ऐसा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व पाक सेनाध्यक्ष जनरल मुशर्रफ को भगोड़ा बताते हुए कहा कि उसे सज़ा देना मुश्किल है क्योंकि वो भी काफ़ी ताक़तवर है। 167 पेज के फ़ैसले को कोर्ट ने लिखा है कि मुशर्रफ ने हमेशा अपनी बीमारी और सुरक्षा का हवाला देते हुए कोर्ट की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।

पाक सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फौज के जिन लोगों ने मुशर्रफ को बचाने का प्रयास किया, वो सब भी इस मामले में बराबर के दोषी हैं। कोर्ट ने कहा कि यूनिफार्म और बूट पहने कुछ लोगों ने हमेशा मुशर्रफ का बचाव किया है। कोर्ट ने पाकिस्तानी एजेंसियों को निर्देश देते हुए कहा कि वो सज़ा की तामील के लिए मुशर्रफ को किसी तरह धर-दबोचें। पाकिस्तान की फौज इसीलिए भी सदमे में है क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब वहाँ के किसी सेनाध्यक्ष को फाँसी की सज़ा सुनाई गई है। पाक सेना के प्रवक्ता आशिफ गफूर पहले ही कह चुके हैं कि मुशर्रफ को मिली सज़ा को लेकर फौज में गम का माहौल है।

पाक फौज ने कहा कि 40 सालों तक देश के लिए लड़ने वाला इंसान कभी भी देशद्रोही नहीं हो सकता। फौज ने कोर्ट की कार्यवाही को त्रुटिपूर्ण करार दिया। फौज के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें अब भी उम्मीद है कि इस मामले में पाकिस्तान के संविधान के अनुसार न्याय किया जाएगा। मुशर्रफ फ़िलहाल यूएई के दुबई में हैं। इस महीने उनकी तबियत भी ख़राब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हॉस्पिटल बेड से ही जारी किए गए एक वीडियो में उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को आधारहीन बताया था।

उग्र हुए मुस्लिम प्रदर्शनकारी: पत्थरबाजी के साथ लगाई कई बसों में आग, लखनऊ में पुलिस चौकी फूँकी

नागरिकता संशोधन एक्ट के खिलाफ कई राज्यों में उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं। कई जगह हिंसक प्रदर्शन भी सामने आ रहे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक हिंसक प्रदर्शनों और आगजनी की खबरें सामने आईं हैं। प्रदर्शन करने वालों में ज़्यादातर को कपड़ों से पहचाना जा सकता है। ये बहुतायत में मुस्लिम प्रदर्शनकारी है। जो भारी मात्रा में नुकसान की मकसद से पूरी तैयारी के साथ निकले हैं ऐसा कई प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है।

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने उग्र होते हुए 2 सरकारी बसों को आग के हवाले कर दिया। इसके बाद पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रदर्शन हिंसक होने के बाद संभल जिला कलेक्टर ने अगले आदेश तक जिले की मोबाइल सेवाएँ बंद कर दी हैं।

वहीं दूसरी ओर लखनऊ हसनगंज इलाके में भी CAA के खिलाफ प्रदर्शन उग्र हो गया। यहाँ के मुस्लिम बहुल हसनगंज में उग्र भीड़ ने कई वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए उनमें आग लगा दी। मुस्लिमों की भीड़ ने इस दौरान जमकर पथराव भी किए। अलग-अलग गलियों से निकलकर ताबड़तोड़ पत्थरबाजी की है।

लखनऊ के मुस्लिम बहुल हसनगंज इलाके में मुस्लिम भीड़ ने विरोध प्रदर्शन के नाम पर कई पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया। यहाँ तक मुस्लिम प्रदर्शनकारियों ने पुलिस चौकी में भी आग लगा दी है। हालाँकि अभी तक घायलों और हुए नुकसान की पूरी रिपोर्ट नहीं आई है लेकिन भरी मात्रा में हिंसा और उत्पात मचने की कोशिश हुई है।

इस हिंसक घटना के बाद पूरे प्रदेश की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हालाँकि, दूसरी ओर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपी के डीजीपी ओ पी सिंह ने वर्तमान में हालात पूरी तरह से नियंत्रण में होने की बात कही है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन किया जा रहा है। इस दौरान कई जगहों से भारी हिंसा होने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। पूर्वोत्तर राज्यों के साथ ही पश्चिम बंगाल, बिहार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में भी प्रदर्शन किए जाने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

हिंसक विरोध प्रदर्शनों को हवा देने और लोगों को बहकाकर हिंसा के लिए उकसाने के कई नेता और कार्यकर्त्ता गिरफ्तार भी हो चुके हैं।

डाक्यूमेंट्स जला दो पर सरकार को मत दिखाओ : हिंसक प्रदर्शन में ‘ISIS का हाथ’

बिहार के दरभंगा से दो लोगों की बातचीत का एक ऑडियो सामने आया है। 11 मिनट 41 सेकंड के ऑडियो से पता चलता है कि किस कदर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के ख़िलाफ़ लोगों के दिलों में ज़हर भरा जा रहा है। ये बातचीत दो मुस्लिमों के बीच की है। इसमें पहला व्यक्ति दूसरे को कॉल कर के कहता है कि स्थिति बहुत भयावह हो गई है और उन सब को एक होकर कुछ करने का वक़्त आ गया है। आप “कुछ करने का समय आ गया है” से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये किसी बड़े साजिश की बात हो रही है। आगे बातचीत करने से पहले वो आदमी इसकी पुष्टि कर लेता है कि दूसरे व्यक्ति के आसपास जो लोग हैं वो मुस्लिम ही हैं, ताकि इस बातचीत की भनक किसी और को न लगे।

इस फोन कॉल में पहला व्यक्ति बताता है कि मुस्लिम डाक्यूमेंट्स के चक्कर में पड़े हैं और सभी अपना डाक्यूमेंट्स खोजने में लग गए हैं। आगे बढ़ने से पहले बताते चलें कि सरकार ने अभी ऐसा कोई नियम-क़ानून नहीं बनाया है, जिसमें देश भर के मुस्लिमों को उनकी नागरिकता साबित करने के लिए डाक्यूमेंट्स दिखाने की बात कही जाए। असम में एनआरसी लागू हुआ है लेकिन इसमें किसी मजहब या जाति की बात नहीं है। इस बातचीत में पहला व्यक्ति कहता है कि सीएए के तहत हिन्दुओं को तो नागरिकता मिल जाएगी लेकिन मुस्लिमों को साबित करना पड़ेगा।

यहाँ ये भी जानना ज़रूरी है कि सीएए भारत के नागरिकों के लिए है ही नहीं। इसीलिए, इसके द्वारा भारतीय हिन्दुओं के नागरिकता साबित होने की बात ही झूठ है। फोन कॉल पर पहला व्यक्ति आगे कहता है कि मुस्लिमों को कोई भी डाक्यूमेंट्स सरकार को दिखाना ही नहीं चाहिए। साथ ही वो भड़काते हुए आगे बताता है कि मुस्लिम सरकार से कहें कि अगर उनके पास डाक्यूमेंट्स हो भी तो उसे जला दिया जाएगा, सरकार जो करना चाहे, कर ले। वो कहता है कि किसी भी मुस्लिम को कागज़ात के चक्कर में पड़ना ही नहीं चाहिए। अपनी बात के पीछे दलील देते हुए उक्त मुस्लिम व्यक्ति कहता है:

“हम सरकार को अपने डाक्यूमेंट्स क्यों दिखाएँ? इसका सीधा अर्थ है कि सरकार को हमारी नागरिकता पर शक है। सरकार पता लगाए कि कौन लोग बाहरी हैं, हम क्यों कागज़ात दिखाएँ? जब हमें जेल में डाल दिया जाएगा, तब हम कोर्ट को कागज़ दिखा कर अपनी नागरिकता साबित कर देंगे। हम हिन्दू भाइयों को भी समझाएँगे कि तुम्हारे हिंदुस्तानी होने पर लानत है कि सरकार तुम्हें नागरिकता साबित करने को कह रही है। हिन्दुओं से सीएए पर बात नहीं करनी है। इस चीज को मास लेवल पर ले जाने के लिए सभी मुस्लिमों को समझना ज़रूरी है। मैं 3 दिन से यही कर रहा हूँ। अपने उस मामा को फोन कर के भी एनआरसी के बारे में बताया, जिनसे मेरा 3 साल से झगड़ा चल रहा था।”

पहले मुस्लिम व्यक्ति की इन बातों का समर्थन करते हुए दूसरा व्यक्ति कहता है कि ये योजना एकदम सही है क्योंकि इससे सरकार की परेशानी बढ़ जाएगी। पहला व्यक्ति कहता है कि मुस्लिम भाइयों को हिम्मत देना है और इस काम में फोन बहुत बड़ी ताक़त है, इसका पूरा इस्तेमाल करना है। वह फोन की ताकत आगे समझाते हुए कहता है कि चुनाव के दौरान किसे वोट देना है, ये उसके परिवार ने तय ही नहीं किया था। इसके बाद एक-दो हिन्दू लोगों ने उसे कॉल कर के बताया कि किसे वोट देने से फायदा होगा।

जिस ऑडियो को आप सुन रहे हैं वो सिर्फ दो आदमियों के बीच बातचीत भर का ऑडियो नहीं है। यह इंटेलिजेंस एजेंसी के सूत्रों से मिला ऑडियो है। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की आड़ में केंद्र सरकार को अस्थिर करने के लिए इस साजिश की प्लानिंग लंबे समय से की गई है। इस ऑडियो के अलावा ऑपइंडिया के सूत्र ने जो बताया है, वो और भी खौफनाक है। ऐसा इसलिए क्योंकि विरोध को स्थानीय और कानून-विशेष के खिलाफ गुस्से के तौर पर दिखाने के लिए जो साजिश की गई है, दरअसल उसके पीछे हाथ इस्लामिक स्टेट का है। बिहार-झारखंड और उसके बाहर के अपने परिचितों तथा दोस्त-यार को फोन करके सरकार के खिलाफ भड़काने, उन्हें समझाने-बरगलाने के साजिश की पूरी फंडिंग ISIS के द्वारा की गई है।

इंटेलिजेंस एजेंसी के हमारे सूत्र ने यह भी बताया कि इस ऑडियो के आधार पर देश के दूसरे राज्यों में, दूसरी भाषाओं में भी घूम रहे ऐसे ही ऑडियो पर उन लोगों द्वारा जाँच-पड़ताल की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को इसके बारे में बता दिया गया है। और यही वजह है कि ऑर्गेनिक (स्वतः) दिखने वाले विरोध-प्रदर्शन के पहले से ही प्रशासन मुस्तैद है और जहाँ-जहाँ से उन्हें हिंसक प्रदर्शन होने के इनपुट मिले हैं, वहाँ-वहाँ धारा 144 लगाकर पहले से ही सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।

एक और उदाहरण का जिक्र करते हुए उसने बताया कि कुछ हिन्दू छात्रों ने न चाहते हुए भी भाजपा को वोट दिया, क्योंकि उनके रिश्तेदारों में से किसी ने फोन कर के उन्हें कसम दिलाई कि उनका वोट भाजपा को ही जाएगा। वह आगे समझाते हुए कहता है कि देखिए, हिन्दू लोग कैसे फोन का इस्तेमाल करते हैं। इस पर दूसरे व्यक्ति ने उसे टोकते हुए कहा कि हिन्दू जो भी कर रहे हैं, ये सिर्फ़ फोन का ही कमाल नहीं है, इसके पीछे और भी बहुत सारी चीजें हैं। वो लोग विचार करते हैं कि उन्हें एक दिन सड़क पर निकल कर लाठी-डंडा नहीं खाना है बल्कि मुस्लिमों को जगाना है, ताकि वो योजना बना कर सड़क पर निकलें।

वो लोग आगे योजना बनाते हैं कि अगर कोई भी मुस्लिम सरकार को डॉक्यूमेंट दिखाने की बात करे तो उसे ये बोलना है कि ऐसा होने पर हम मुस्लिम मिल कर ही तुम्हें मारेंगे। साथ ही वो दोनों इस बात पर चर्चा करते हैं कि डॉक्यूमेंट्स न दिखाने पर सरकार की परेशानी बढ़ेगी और इतने लोगों को जेल में या कैम्प में डालने में सक्षम नहीं हो पाएगी। पहले व्यक्ति ने बताया कि वो जगह-जगह कॉल कर के मुस्लिमों को सीएए विरोधी रैलियों में शामिल होने को कह रहा है। पहला व्यक्ति बताता है कि सीएए और एनआरसी को हर मुस्लिमों को इन दो पॉइंट्स में समझाया जाना चाहिए:

  • सीएए के द्वारा मुस्लिमों को छोड़ कर बाकी सभी लोगों को नागरिकता दे दी जाएगी।
  • एनआरसी का इस्तेमाल करते हुए सभी मुस्लिमों को डिटेंशन कैम्पस में डाल दिया जाएगा।

वो लोग योजना बनाते हैं कि हर मुस्लिम कम से कम रोज़ 10 लोगों को सीएए और एनआरसी को लेकर समझाए। साथ ही कसम खिलाने की भी योजना बनाई जाए। पहला व्यक्ति आगे कहता है कि सिर्फ़ समझाना ही नहीं है बल्कि लोगों के ख़ून में ग़ुस्सा भरना है कि सीएए और एनआरसी खतरनाक है। वो कहता है- “यही हमारा ईमान है, यही रोज़ा है और यही नमाज़ है।”

इस बातचीत से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मुस्लिमों में किस तरह से सीएए को लेकर नकारात्मकता पूरे योजनाबद्ध तरीके से फैलाई जा रही है। ग़लत बातों का प्रचार किया जा रहा है और उन्हें जबरन समझाया जा रहा है कि किस तरह ये क़ानून उनके ख़िलाफ़ है। इसके लिए जो दलीलें दी जा रही हैं, वो भी ग़लत हैं। अगर सिर्फ़ एक फोन कॉल से ऐसी साज़िश रची जा सकती है तो इंटरनेट का इस्तेमाल कर के और क्या-क्या होता होगा, ये आप ख़ुद ही सोचिए।

यह कितना खतरनाक है कि जो ISIS पहले हमारे देश से सिर्फ धर्म के नाम पर आतंकियों की भर्ती करता था, वो अब हमारे देश के भीतर घुसपैठ कर चुका है। पहले ISIS के आतंकी हमारी सुरक्षा के लिए खतरा थे लेकिन बाहरी तौर पर, अब वही हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गए हैं। और यह सब संभव हुआ है क्योंकि कुछ मीडिया गिरोह, कुछ राजनीतिक दल और कुछ भ्रमित-भटके हुए लोग खुद अपनी ही सरकार पर भरोसा न करके अपने देश के खिलाफ सोच रखते हैं, अपने फायदे की रोटी सेंकते हैं।

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नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के विरोध में लगातार हो रहे हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को कॉन्ग्रेस और कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों द्वारा भड़काया जा रहा है। इनमें कुछ व्हाट्सअप ग्रुप भी शामिल हैं जो इन दंगों को हवा देने का काम कर रहे हैं। ऐसा ही एक व्हाट्सअप ग्रुप है जो मंडी हाउस से मार्च निकालने की योजना बना रहा था और फिर अंततः लाल किला रैली में शामिल हो गया।


व्हाट्सअप ग्रुप की डिस्प्ले पिक्चर

दरअसल, यह व्हाट्सअप ग्रुप अपेक्षाकृत छोटा था, इनके बीच आपस में बातचीत हो रही थी कि वे कैसे मंडी हाउस या लाल किला “विरोध प्रदर्शन” तक पहुँचेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि धारा-144 लागू कर दी गई थी और कई मार्गों को दिल्ली पुलिस द्वारा बंद कर दिया गया था।

व्हाट्सअप ग्रुप के सदस्यों में से एक ने इस योजनाबद्ध बातचीत की पुष्टि के लिए स्क्रीनशॉट शेयर किया।


व्हाट्सअप ग्रुप के मैसेज

इस मैसेज में सबसे पहले पाठकों से ‘संदेश फैलाने’ के लिए कहा गया। इसमें कहा गया कि 19 दिसंबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन के लिए मौक़े पर एक क़ानूनी टीम मौजूद है। यह टीम प्रशांत भूषण की देख-रेख में काम करेगी और अगर किसी को हिरासत या क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा, तो वे नीलेश नामक व्यक्ति (श्री नीलेश के नंबर पर लाल पट्टी का प्रयोग किया गया है।) से सम्पर्क कर सकते हैं।

बता दें कि नीलेश जैन स्वराज इंडिया के लीगल सेल से जुड़े एक वकील हैं।


नीलेश जैन प्रोफ़ाइल

नीलेश जैन DailyO प्रोफ़ाइल

इसके अलावा, DailyO के प्रोफ़ाइल से पता चलता है कि नीलेश जैन दिल्ली विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ़ लॉ के छात्र है। वो सामाजिक-राजनीतिक संगठन स्वराज अभियान के शोधकर्ता भी हैं, जो कि योगेंद्र यादव की पार्टी है।

जब हमने पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का जोखिम उठाने वाले प्रदर्शनकारियों में से एक नीलेश जैन से बात की। नीलेश जैन ने कहा कि वो पहले 50 बंदियों के बैच के साथ है। इसके आगे नीलेश ने बताया कि अगर हमें हिरासत में लिया गया, तो हमें बस की संख्या और हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या पर ध्यान देना होगा और मदद के लिए उन्हें संदेश देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि बंदियों की मदद के लिए वहाँ कई वकील मौजूद हैं और हमें किसी भी चीज की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।

ज्ञात हो कि ऑपइंडिया ने इससे पहले भी इस बात का ख़ुलासा किया कि कैसे एक अलग व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस एनएसयूआई और कॉन्ग्रेस के पदाधिकारियों द्वारा चलाए जा रहे इस व्हाट्सअप ग्रुप के ज़रिए पूरे देश में अराजकता फैलाने का आह्वान किया गया था। इस व्हाट्सअप ग्रुप में एक ऋषव रंजन नामक व्यक्ति भी शामिल था जो स्वराज्य अभियान का सदस्य था।

स्वराज्य अभियान और प्रशांत भूषण दंगाईयों को क़ानूनी मदद उपलब्ध कराते हैं। इसका एकमात्र उद्देश्य यह है कि दंगाई किसी भी डर के चलते इन विरोध-प्रदर्शनों से भागकर कहीं न जाएँ। नागरिकता क़ानून के नाम पर देश में अराजकता फैलाने के लिए इन विरोध प्रदर्शनों को और जारी रखना स्वराज्य अभियान और प्रशांत भूषण जैसे लोगों का कुचक्र है।

इन सबसे एक बात तो साफ़ हो चली है कि इस पूरे हिंसात्मक घटनाक्रम को बढ़ावा देने में कॉन्ग्रेस, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे तत्व संगठित होकर देश में अराजकता फैलाने के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक रखी है। इन विरोध-प्रदर्शनों में से मुस्लिम भीड़ को नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में हिंसा, आगजनी और बर्बरता फैलाते देखा गया। इनका ग़ुस्सा पड़ोसी इस्लामिक राष्ट्रों से हिन्दुओं, बौद्धों, सिखों, जैनियों, पारसियों और यहाँ तक ​​कि ईसाइयों जैसे अल्पसंख्यकों को सताया जाने वाली नागरिकता प्रदान करने पर था।

इन सबमें सबसे भयावह बात यह है कि नागरिकता क़ानून के विरोधी में खड़े दंगाई किस तरह से राजनीतिक पार्टियों के हाथ की कठपुतली बन गए और वो किस तरह से उनके बहकावे में आकर देशभर में हिंसात्मक विरोध-प्रदर्शनों को अंजाम दे रहे हैं, वो भी यह जाने बगैर की इस क़ानून में विरोध करने जैसी कोई बात है ही नहीं।

यह मूल ख़बर OpIndia English की एडिटर नुपुर जे शर्मा की है, जिसका अनुवाद प्रीति कमल ने किया है।

CAA पर भारत के साथ खड़ा हुआ अमेरिका, कहा- पीड़ित अल्पसंख्यकों को मिल रहा है न्याय

नागरिकता संशोधन क़ानून पर अमेरिका ने भारत के लोकतंत्र में विश्वास जताया है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अमेरिका के ‘सेक्रटरी ऑफ स्टेट’ माइक पोम्पिओ ने कहा कि जिस सीएए को लेकर बातें की जा रही हैं, उसे लेकर पूरे भारत में लोकतान्त्रिक तरीके से बहस हुई है। उन्होंने कहा कि ये बहस एकदम ठोस रूप में हुई है। माइक ने भारत के लोकतंत्र में विश्वास जताया और सीएए के ख़िलाफ़ बोलने से इनकार कर दिया।

अमेरिका ने कहा कि वो दुनिया में हर जगह अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है और साथ ही सभी धर्मों को उनके धार्मिक अधिकारों का पालन करने की स्वतंत्रता का भी समर्थन करता है। माइक ने कहा कि अमेरिका इन चीजों के लिए आगे भी मुस्तैद रहेगा। भारत और अमेरिका के 2+2 डायलॉग के इतर मीडिया ने बात करते हुए उन्होंने ये बातें कही।

माइक के साथ डिफेंस सेक्रटरी मार्क इस्पर ने भी इस बातचीत में हिस्सा लिया। भारत की तरफ से विदेश मंत्री जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बातचीत में हिंसा लिया। न्यूज़ कांफ्रेंस में किसी ने दावा किया कि सीएए अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ है और इस क़ानून के तहत धार्मिक आधार पर नागरिकता प्रदान की जा रही है। इसपर माइक ने कहा कि सीएए को लेकर संसद में हुई लम्बी बहस को जिसने भी देखा-सुना होगा, उसे पता होगा कि इस क़ानून के द्वारा पड़ोसी देशों के पीड़ित अल्पसंख्यकों को अधिकार मिल रहा है।

इस बातचीत में भारत और अमेरिका ने हिन्द महासागर में चीन के दखल को रोकने और क्षेत्र को सुरक्षित बनाने पर चर्चा की। मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए अमेरिकी नेताओं ने कहा कि सीएए में क्यों पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के कुछ धर्मों के लोगों को शामिल किया गया है, इसका कारण स्पष्ट रूप से बताया जा चुका है।

…16 साल पुराना मनमोहन सिंह का वो वीडियो, CAA पर भ्रम फैलाने से पहले कॉन्ग्रेस को देखना चाहिए

नागरिकता संशोधन क़ानून को विपक्षी धड़े ने बेवजह ही तूल दे रखा है। एक तरफ़ देश भर में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं तो वहीं, दूसरी तरफ़ वामदलों ने आज भारत बंद का आह्वान किया है, जिसका समर्थन कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी किया है। इस बीच, बीजेपी कॉन्ग्रेस को आइना दिखाने के मक़सद से एक ऐसे वीडियो को सामने लेकर आई है, जिसमें ख़ुद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर हिंसा के शिकार हुए शरणार्थियों के लिए सरकार को सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने का सुझाव देते नज़र आ रहे हैं।

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दरअसल, यह वीडियो 2003 का है जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में NDA की सरकार थी और संसद के उच्च सदन राज्यसभा में डॉ मनमोहन सिंह ने शरणार्थियों के सन्दर्भ में इस प्रकार का बयान दिया था। उस दौरान संसद में उपस्थित तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को संबोधित करते हुए डॉ मनमोहन सिंह ने कहा था,

“मैं शरणार्थियों के संकट को आपके सामने रखना चाहता हूँ। बँटवारे के बाद हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर नागरिकों का उत्पीड़न किया गया। अगर ये प्रताड़ित लोग हमारे देश में शरण के लिए पहुँचते हैं तो इन्हें शरण देना हमारा नैतिक दायित्व है। इन लोगों को शरण देने के लिए हमारा व्यवहार उदारपूर्ण होना चाहिए। मैं गंभीरता से नागरिकता संशोधन विधेयक की ओर डेप्युटी पीएम का ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूँ।”

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी बन पड़ता है कि जो कॉन्ग्रेस आज नागरिकता क़ानून के विपक्ष में खड़ी है, उसने 2003 में नागरिकता क़ानून की पैरवी क्यों थी? इससे कॉन्ग्रेस की यह मंशा साफ़ हो जाती है कि असल में वो देश की जनता के हित से परे बेवजह के मुद्दों का केवल राजनीतिकरण करने में विश्वास रखती है। आज नागरिकता संशोधन क़ानून पर जहाँ-तहाँ हिंसात्मक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि इस क़ानून का विरोध करने जैसी कोई बात ही नहीं है। आए दिन होने वाले विरोध-प्रदर्शनों में जुटी भीड़ को वास्तव में इस क़ानून के बारे में कुछ पता ही नहीं है, जो इसका सबसे दु:खद पहलू है।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने छात्रों से अपील भी की थी कि वो वेबसाइट पर जाकर नागरिकता संशोधन क़ानून के बारे में पढ़ें, जानें और समझें। इससे उन्हें पता चलेगा कि आख़िर यह क़ानून है क्या, क्योंकि इस क़ानून के बारे में छात्रों को सही जानकारी नहीं है और वो भ्रमित हैं।

नागरिकता क़ानून को लेकर हो रहे लगातार विवादों के बीच भारत सरकार ने पाकिस्तान से आई एक मुस्लिम महिला हसीना बेन को बिना किसी तामझाम के केवल मेरिट और मानवता के आधार पर भारत की नागरिकता प्रदान की है। हसीना बेन ने दो साल पहले ही भारत की नागरिकता के लिए गुजरात में द्वारका के कलेक्टर को पत्र लिखा था। द्वारका के कलेक्टर डॉ नरेंद्र कुमार मीणा ने उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र प्रदान किया।

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मध्य प्रदेश में 1 साल में 7 लाख नए बेरोजगार, बेरोजगारी भत्ते वाले वादे से मुकरी कमलनाथ सरकार

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार आने के बाद से ही बेरोजगारी की समस्या लगातार बढ़ते ही जा रही है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ताज़ा आँकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। इस महीने अपना 1 साल पूरा कर रही कमलनाथ सरकार कर्जमाफी से लेकर आतंरिक कलह तक, कई मुद्दों पर पहले से ही विवादों में है। अब पता चला है कि राज्य में सिर्फ़ पिछले 1 साल में बेरोजगारों की संख्या 7 लाख बढ़ गई है। ये आँकड़े रजिस्टर्ड बेरोजगारों के हैं। इसके साथ ही राज्य में बेरोजगार युवकों की संख्या 28 लाख तक पहुँच गई है, जो स्थिति की भयावहता की ओर इशारा करती है।

कमलनाथ सरकार के शासनकाल में बेरोजगारी की समस्या का बढ़ना कॉन्ग्रेस के लिए इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि पार्टी इसी मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार को लगातार घेरती आई है। पिछले 1 साल में मात्र 34,000 लोगों को ही रोजगार मिल सका है। अगर अनुपात देखें तो प्रत्येक 20 नए बेरोजगारों पर मात्र 1 व्यक्ति को रोजगार प्राप्त हुआ। एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ को बताया कि मौजूदा सरकार से रोजगार की आस में नए लोग बेरोजगार के रूप में रजिस्टर करवा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस ने बेरोजगार युवकों को 4000 रुपए प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था।

कई राजनीतिक विश्लेषकों ने बताया कि बेरोजगारी भत्ते की उम्मीद में नए लोग अपना नाम रजिस्टर करा रहे हैं और इसी कारण बेरोजगारों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस अपने वादे से मुकर गई और विधानसभा सत्र में कहा कि अभी ऐसी कोई योजना तैयार ही नहीं की गई है। इस बारे में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अधिक जानकारी देते हुए बताया:

“अक्टूबर 2018 में मध्य प्रदेश में रजिस्टर्ड शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 20,77,222 थी, जो एक साल बाद अक्टूबर 2019 में 27,79,725 हो गई है। पिछले एक वर्षों में कई रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है। इनमें 17,506 युवकों को रोजगार दिया गया। इसी अवधि में 2520 ऐसे युवक भी हैं, जिन्हें प्लेसमेन्ट के माध्यम से रोजगार मिला। मध्य प्रदेश में 25 नई इंडस्ट्रीज की स्थापना की गई है और साथ ही 13,740 लोगों को रोजगार मिला है।”

कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता शोभा ओझा ने बेरोजगारी बढ़ने की बातों को नकारते हुए पूर्ववर्ती शिवराज सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के दौरान पिछले 15 सालों में मध्य प्रदेश बेरोजगारी के मामले में टॉप पर था। उन्होंने दावा किया कि सीएम कमलनाथ की सबसे बड़ी प्राथमिकता जॉब क्रिएशन ही है। वहीं भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने बताया कि राज्य में विभिन्न सरकारी पदों में 3 लाख रिक्तियाँ हैं, जिनके लिए बहाली की ही नहीं जा रही है। भाजपा आईटी से के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस को बेरोजगारी भत्ते वाला चुनावी वादा याद दिलाया।

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