महाराष्ट्र में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठबंधन की सरकार बनने के बाद से ही कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम अलग ही सुर अलाप रहे हैं। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मेट्रो परियोजना की समीक्षा की बात कही तो दूसरी ओर उन्हें समर्थन देने वाली कॉन्ग्रेस के नेता संजय निरुपम ने मुंबई मेट्रो का कंस्ट्रक्शन उखाड़ देने की बात कह डाली।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संजय ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुंबई मेट्रो परियोजना की समीक्षा के आदेश पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि इस मामले में यह एक अस्थायी कदम है जबकि उनका मत है कि इस पूरी परियोजना को ही उखाड़ फेंकना चाहिए।
संजय ने कहा कि यह फैसला मुम्बई के हर एक आदमी का है। विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले कॉन्ग्रेसी नेता ने कहा कि आधी रात को आरे के जंगलों में पेड़ काटे जाने के खिलाफ प्रदर्शन का फैसला राजनीतिक नहीं था, न ही यह किसी राजनीतिक दल द्वारा बुलाया गया था। लेकिन, मुंबई के सब लोगों ने इसके लिए समर्थन दिया था। संजय ने कहा कि सभी मुंबई वालों के साथ उनकी भी यही डिमांड है कि इस निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त कर देना चाहिए। गौरतलब है कि आरे में मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ काटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है।
I welcome Maha Govt’s decision to stop work of Metro Carshed in #Aarey
But only stopping will not help, the proposed car shed should be scrapped.
Protest against #metro carshed was not politically motivated but every Mumbaikar’s demand to #SaveAareyForest
29 नवम्बर को उद्धव ठाकरे ने मेट्रो का काम यह कहकर रुकवा दिया था कि इसके लिए एक पत्ता भी नहीं काटने दिया जाएगा। हालाँकि यह बात पहले ही स्पष्ट हो चुकी है कि इस परियोजना के लिए जो पेड़ काटे जाने थे, वह पहले ही काटे जा चुके हैं और अब आगे इन्हें काटा नहीं जाएगा।
पहले नए सीएम ने मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट स्थगित करने का ऐलान किया और फिर उन्ही की समर्थक पार्टी ने एकाएक इसे गिराने की योजना पेश करना शुरू कर दिया। हालाँकि जिस कंस्ट्रक्शन को लेकर विवाद हो रहा है वह पूरा मामले एक मेट्रो शेड को लेकर है। इस मामले में पार्टियों के बदलते बयानों को देख मुंबईवासी खुद भी परेशान हैं। बता दें कि 4 अक्टूबर की मध्यरात्रि को ही उस इलाके में करीब 2185 पेड़ काट दिए गए थे। इस सम्बन्ध में मुंबई मेट्रो कारपोरेशन को ट्री अथॉरिटी ने एक पत्र भी जारी किया था जिसमें उसने इन पेड़ों को काटने के लिए अपनी मंजूरी दी थी।
इस आदेश को अमल में लाने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी थी जिसके तहत इलाके में धारा 144 लगा दी गई थी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में स्टे लगने से पहले 2185 में 2141 पेड़ काटे जा चुके हैं जबकि मेट्रो कारपोरेशन का कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरत के हिसाब से पेड़ काटे जा चुके हैं।
तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने हैदराबाद में डॉक्टर रेड्डी के बलात्कार और हत्या पर दुःख जताया है। मिमी ने कहा कि बलात्कारियों को अदालत तक ले जाने की कोई ज़रूरत ही नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरी सुरक्षा के साथ बलात्कारियों को अदालत ले जाया जाता है और फिर न्याय के लिए काफ़ी दिन इंतजार करना पड़ता है। मिनी ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को तुरंत सज़ा मिलनी ज़रूरी है। मिनी चक्रवर्ती ने सरकार से निवेदन करते हुए कहा:
“मैं सम्बंधित मंत्रालयों से दरख्वास्त करती हूँ कि इतने कठोर क़ानून बनाए जाएँ कि कोई व्यक्ति किसी की बलात्कार करना तो दूर, किसी महिला की तरफ़ गलत नज़र से देखने से पहले भी 100 बार सोचे। मैं जया बच्चन के बयान का समर्थन करती हूँ।”
बता दें कि हैदराबाद में डॉक्टर रेड्डी का 4 लोगों ने मिल कर बलात्कार किया और फिर जान से मार डाला। यहाँ तक कि महिला डॉक्टर की लाश के साथ भी बलात्कार किया गया। मुख्य आरोपित मोहम्मद आरिफ ने पीड़िता का नाक और मुँह दबा कर मार डाला। उसके बाद आरोपितों ने पीड़िता के शरीर पर पेट्रोल और डीजल डाल कर आग लगा दी। सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को संसद में ये मामला गूँजा। समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने कहा कि बलात्कारियों की लिंचिंग होनी चाहिए और उन्हें भीड़ के हवाले कर देना चाहिए।
TMC MP Mimi Chakraborty on Jaya Bachchan’s statement in Rajya Sabha “rapists should be lynched” after rape & murder of veterinarian: I agree with her. I don’t think we need to take rapists to courts with protection and then wait for justice. Immediate punishment is needed. https://t.co/e4aMx2MJSspic.twitter.com/Jzn9QYl5yI
पश्चिम बंगाल स्थित जाधवपुर की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने जया बच्चन की बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे कुकृत्य करने वाले लोग मानसिक रूप से विकृत होते हैं। मिमी ने कहा कि लड़की हैदराबाद की हो, दिल्ली की हो, या फिर कोलकाता की- उनकी सुरक्षा के लिए सरकार को क़दम उठाने चाहिए। राज्यसभा में चर्चा के दौरान एआईएडीएमके की सांसद विजिला भावुक हो गईं और उन्होंने दोषियों के लिए कड़ी सज़ा की माँग की। उन्होंने महात्मा गाँधी को याद करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता ने कहा था कि जब आधी रात में भी महिलाएँ बिना किसी भय के कहीं भी जा सकेंगी, तब असली स्वतंत्रता आएगी।
विजिला ने नशीली दवाइयों पर रोक लगाने, बलात्कारियों के ख़िलाफ़ सुनवाई जल्द पूरी करने और उन्हें मृत्युदंड देने की माँग की। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सरकार बलात्कार को लेकर हरसंभव क़ानून बनाने को तैयार है।
काशी हिन्दू विश्विद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति की उच्च स्तरीय जाँच की माँग चल ही रही थी। इस बीच आज जब विश्विद्यालय प्रशासन द्वारा छात्रों से माँगी गई 10 दिन की समय सीमा भी समाप्त हो गई। तो छात्र संकाय प्रमुख के पास अपनी माँगों के लिखित जवाब के लिए के लिए पहुँचे, जहाँ प्रशासन ने पहले अनसुना किया फिर संकाय के गेट का घेराव कर बैठे छात्रों को प्रशासन के कहने पर SVDV के ही साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष उमाकांत चतुर्वेदी द्वारा कुछ आधे-अधूरे जवाब थमाए गए। इससे नाराज और असंतुष्ट छात्र पुनः धरने पर बैठ गए हैं।
अब SVDV के छात्रों का कहना है कि यह धरना तभी समाप्त होगा जब उनकी माँग पूरी होगी क्योंकि वे कुछ अनुचित नहीं माँग रहे हैं। वो परंपरा और धर्म की रक्षा के लिए जीने वाले छात्र हैं। हिन्दू धर्म और इसकी सनातन परम्पराएँ उनके लिए सब कुछ हैं अतः प्रशासन द्वारा थोपे गए किसी गैर हिन्दू को गुरु मानने को तैयार नहीं है।
बता दें कि बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉक्टर फिरोज खान की नियुक्ति पर दस दिन बाद भी सही जवाब न मिलने के विरोध में छात्रों ने संकाय के गेट पर ही धरना शुरू कर दिया है। इस दौरान संकाय प्रमुख और साहित्य विभागाध्यक्ष पर नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए छात्रों ने नारे लगाते हुए कार्रवाई की माँग की।
#BHU प्रशासन से समुचित जवाब न मिलने पर #SVDV के छात्र पुनः धरने पर बैठे…..
इससे पहले डॉ. फिरोज खान की SVDV में नियुक्ति में गड़बड़ी के विरोध में 7 से 21 नवंबर तक कुलपति आवास के सामने बैठे छात्रों को बीएचयू प्रशासन ने दस दिन के भीतर जवाब देने की लिखित सहमति दी थी। 30 नवंबर को दस दिन बीतने के बाद सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को संकाय प्रमुख ने जो अधूरा जवाब दिया, उससे छात्र सहमत नहीं हुए और विरोध में पुनः धरने पर बैठ गए। संकाय में पठन-पाठन पहले से ही बंद है। साथ ही छात्रों ने 5 दिसंबर से होने वाली परीक्षा का बहिष्कार करने की भी चेतावनी दी है।
SVDV के छात्रों के प्रश्नों पर साहित्य विभाग का जवाब
संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान के साहित्य विभाग में क्या अन्य सभी विभागों के सदृश ही शॉर्ट लिस्टिंग हुई?
जवाब- हाँ, वैसे ही हुई।
क्या शॉर्ट लिस्टिंग में सम्मिलित व्यक्ति संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के पारंपरिक (सनातन धर्म) संबंधित नियमों को ध्यान में रखकर किया गया?
जवाब- साहित्य विभाग में नियुक्ति हेतु आवेदनों की शॉर्ट लिस्टिंग विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में शिक्षकों और अन्य शैक्षिककर्मियों की नियुक्ति हेतु न्यूनतम अर्हता और उच्चतर शिक्षा में मानकों के रख-रखाव हेतु अन्य उपाय संबंधी विनियम, 2018 के अनुसार की गई है।
इस शॉर्ट लिस्टिंग में यूजीसी के किस नियम को अपनाया गया?
जवाब- शॉर्ट लिस्टिंग प्रक्रिया में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में शिक्षकों और अन्य शैक्षिक कर्मियों की नियुक्ति हेतु न्यूनतम अर्हता तथा उच्चतर शिक्षा में मानकों के रख-रखाव हेतु अन्य उपाय संबंधी विनियम, 2018 के खंड 3 एवं 4 और परिशिष्ट द्वितीय तालिका 3 (ए) के प्रावधानों को अपनाया गया है।
इस नियुक्ति में क्या विश्वविद्यालय प्रशासन ने विश्वविद्यालय संविधान के अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न की है?
जवाब- इसका उत्तर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिया जाएगा।
क्या बीएचयू संविधान के 1904, 1906, 1915, 1951, 1966 एवं 1969 को केंद्र में रखकर नियुक्ति किया गया है?
जवाब- इसका उत्तर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिया जाएगा।
प्रशासन के कहने पर साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष द्वारा दिया गया जवाब
संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय द्वारा जारी उत्तर को आंदोलकारी छात्रों ने मजाक बताया। ऑपइंडिया से हुई बातचीत में चक्रपाणि ओझा का कहना है, “आज 11 दिन बाद प्रशासन ने SVDV के ही साहित्य विभाग के विभागाध्यक्ष को उत्तर देने के लिए भेजा किन्तु वह पूरे प्रश्नों का उत्तर ही नहीं दे पाए और जिसका दिया वह भी अस्पष्ट तथा बिना प्रमाण के।“
छात्रों ने असंतुष्टि जाहिर करते हुए पुनः धरने पर बैठ गए
प्रशासन के कहने पर विभागाध्यक्ष द्वारा दिए गए जवाबों पर शशिकांत मिश्र, आनंद मोहन झा, कृष्ण कुमार सहित कई छात्रों ने कई गंभीर प्रश्न खड़े किए। छात्रों ने इन जवाबों पर जब काउंटर सवाल किए तो प्रशासन की तरफ से अभी तक इन प्रतिप्रश्नों और पहले के प्रश्नों का कोई जवाब नहीं आया है।
SVDV के छात्रों द्वारा पूछे गए प्रति प्रश्न
अगर हर विभागों में शॉर्टलिस्टिंग की एक ही प्रक्रिया अपनाई गई है तो, एक ही व्यक्ति की अलग-अलग विभागों में स्कोरिंग पॉइंट्स में अंतर क्यों है?
धर्म विज्ञान संकाय के पारंपरिक (सनातन धर्म) के नियमों को शॉर्टलिस्टिंग में ध्यान रखा गया या नहीं? इसके उत्तर में UGC 1018 के अधिनियम का हवाला दिया गया। मतलब पूछा आम और बताया इमली।
अगर UGC के 2018 अधिनियम के तहत नियुक्ति हुई तो साक्षात्कार में 0 व 100% नम्बर कैसे दिए गये? क्योंकि 0 व फुल नम्बर देने का कोई प्रावधान नहीं है।
इस प्रश्न का उत्तर अभी तक प्रशासन खोज नहीं पाया।
इसका भी उत्तर नहीं मिला।
SVDV के छात्रों ने ऑपइंडिया को बताया, “हमारे सवाल वही है किसी भी प्रश्न का प्रशासन ने सही जवाब नहीं दिया, बस गोलमोल जवाब देकर अपनी बात रखनी चाही जिसे हमने नामंजूर कर दिया और पुनः संघर्ष का रास्ता चुना है। अब भी मूल सवाल वही है कि क्या BHU एक्ट के नियमों को ताक पर रखकर नियुक्ति की गई है?
धरना समाप्त करने के लिए प्रशासन ने छात्रों से 10 दिन की मोहलत माँगी गई थी। छात्रों ने प्रशासन की बात मानते हुए और समुचित कार्रवाई के आश्वासन पर धरना बेशक समाप्त कर दिया लेकिन अपने आंदोलन को जारी रखा और अब जब छात्रों द्वारा दी गई 10 दिन की मोहलत समाप्त हो गई तो छात्र एक बार फिर से अपनी माँगों पर अडिग हैं।
डॉ. मुनीश मिश्र ने ऑपइंडिया से बात करते हुए प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए साथ ही इस समस्या के दूरगामी परिणाम की तरफ इशारा करते हुए एक और बात बताई। डॉ.मिश्र ने कहा,
“विश्वविद्यालय के एक्ट के अनुसार लॉ फैकल्टी में पहले हिन्दू लॉ (न्याय व मीमांसा दर्शन) को बतौर सब्जेक्ट पढ़ाया जाता था। आर के मिश्रा के डीन के रूप में कार्यकाल के दौरान इसको कोर्स से हटवा दिया गया। कुछ अध्यापक विरोध करते रहे पर उनकी बात नही सुनी गई और महामना व विश्वविद्यालय के संविधान को बदल दिया गया। वह परम्परा ही समाप्त हो गयी। जबकि अलीगढ़ में अभी भी मुस्लिम लॉ की पढ़ाई होती है।”
उन्होंने एक गंभीर प्रश्न खड़ा किया:
“क्या लॉ कॉलेज की तरह धर्म विज्ञान संकाय की परम्पराओं को खत्म करने की कहीं साजिश तो नही की जा रही है? पहले भी कई बार इस संकाय व संकाय के छात्रावास को परिसर से हटाने का यहीं के लोगों के द्वारा प्रयास किया गया है। यह संकाय हमेशा से प्रशासन की दृष्टि में उपेक्षित रहा है। जिसकी वजह से यहाँ अध्यापकों की संख्या एकदम न्यून है। 19 विषय पढ़ाने के लिए मात्र 37 अध्यापक। किसी किसी विषय मे मात्र एक ही अध्यापक हैं, जबकि यहाँ स्नातक, स्नातकोत्तर व पीएचडी के कोर्स के साथ ही 5 डिप्लोमा कोर्स भी हैं व सभी मे छात्र पढ़ रहे हैं। पढ़ाई को कवर करने के लिए 50 से ऊपर अतिथि अध्यापक व उतने ही शोध छात्रो के बदौलत कक्षाओं के संचालन किया जाता है। जिससे ये संस्थान प्रशासन की उपेक्षा के बाद भी चलता रहा।”
उन्होंने आरोप लगाया, “प्रशासन की उपेक्षा से ये ख़त्म नहीं हुआ, उपेक्षा का एकमात्र कारण ऐसे कुलपतियों का यहाँ आना भी रहा जो वामपंथी विचारधारा से प्रेरित थे। जिनकी हिन्दू धर्म और सनातन परम्पराओं में कोई रूचि नहीं रही। कॉन्ग्रेस के शासन के दौरान जब वामपंथ का बोलबाला रहा तभी BHU के संविधान से काफी छेड़छाड़ हुआ। इसे सेक्युलर बनाने के चक्कर में BHU के मूल ताने-बाने से भी छेड़छाड़ हुआ।”
चक्रपाणि ओझा ने इसमें एक और बात जोड़ी, “अब जब केंद्र में कहने को हिन्दू धर्म समर्थक सरकार है तो भी विश्विद्यालय के सनातन धर्म को समर्पित एक विभाग में मालवीय जी के मूल्यों और भावनाओं के खिलाफ एक गैर-हिन्दू की नियुक्ति कर यहाँ के पारम्परिक छात्रों को जिनका उद्देश्य ही पूजा-पाठ, कर्मकांड, हिन्दू धर्म के सिद्धांतों और सनातन परम्पराओं का प्रचार-प्रसार है। उन छात्रों को बाध्य किया जा रहा है कि वे एक मुस्लिम व्यक्ति को अपने शास्त्रों से जुड़े साहित्य और सनातन मूल्यों को शिक्षित करने का अधिकारी माने उसे अपने गुरु के रूप में स्वीकार करें।”
एक और छात्र शशिकांत मिश्र ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा, “आने वाले समय में अगर ऐसा ही रहा तो नित्य जीवन में भी परंपरा का पालन करने वाले छात्र यहाँ आना छोड़ देंगे तो शायद प्रशासन की मंशा फलित हो जाए लेकिन आज जिस तरह से हम संघर्ष कर रहे हैं इसके पीछे भी हमारे गुरुओं का आशीर्वाद, उनकी सीख और परंपरा ही है। हम इतनी आसानी से नहीं सब कुछ नष्ट नहीं होने देंगे।”
छात्रों का यह भी कहना है कि जब हम क्या चाहते हैं इसकी अधिकांश को समझ भी नहीं थी तो हम अपनी बात समझाने के लिए धरने पर बैठे तो आज जब धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए जागरूक शंकराचार्यों, पूर्व प्रोफेसरों, काशी विद्वत परिषद से लेकर तमाम विद्वानों, संतो-महंतों और देश के हिन्दू मान्यताओं में भरोसा रखने वाले लोगों का समर्थन और साथ हमारे साथ है तो भला पीछे कैसे हट सकते हैं। बता दें कि उक्त सभी द्वारा डॉ. फिरोज खान की धर्म विज्ञान संकाय में इस नियुक्ति के खिलाफ और मालवीय मूल्यों के संरक्षण के लिए मुखर विरोध दर्ज कराते हुए सभी छात्रों के समर्थन और नियुक्ति रद्द करने से लेकर इस पूरे मामले के समाधान के लिए विश्विद्यालय के विजिटर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को कई पत्र लिखे गए हैं। हाल ही में संकाय के छात्रों ने भी अपनी तरफ से प्रधानमंत्री मोदी और मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखा। तो वे अब इस समस्या के समाधान तक डटें रहने के निर्णय पर अडिग हैं, ऐसा ऑपइंडिया को आनंद मोहन झा ने बताया।
अब जब एक तरफ छात्र पुनः धरने पर बैठ गए हैं और उधर फिरोज खान आयुर्वेद संकाय के संस्कृत विभाग में इंटरव्यू दे चुके हैं और सूत्रों ने वहाँ उनके चयन की भी पुष्टि की है। फिरोज खान का एक और इंटरव्यू 4 दिसंबर को कला संकाय के संस्कृत विभाग में है तो ऐसे में बीएचयू में 7 दिसंबर को होने वाली कार्यकारिणी परिषद की बैठक को अहम माना जा रहा है। हालाँकि, अभी यह तय नहीं हो पाया है कि बैठक दिल्ली में होगी या बीएचयू परिसर में, लेकिन ऑपइंडिया सूत्रों के अनुसार बैठक में आगामी 23 दिसंबर को होने वाले विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पदक, उपाधि, मुख्य अतिथि के नाम सहित संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति पर चर्चा अहम एजेंडा है। तो देखते हैं आगे क्या होगा? क्या प्रशासन अपनी गलती मानते हुए उसमे सुधर करेगा या छात्रों पर ही दबाव डालकर उन्हें तोड़ना चाहेगा? जो भी होगा अब छात्रों का आंदोलन एक नए मोड़ पर है। जो भी होगा उसका सभी को इंतजार है।
प्रशासन के अधूरे जवाबों से असंतुष्ट धरने पर बैठे छात्र
महाराष्ट्र में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार के सत्ता में आते ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ‘आरे वन’ के प्रदर्शनकारियों पर हुए केस वापस लेने का ऐलान किया था। इसी मौके का फायदा उठाते हुए उन्होंने एक ऐसे शख्स की पैरवी करने की कोशिश की है, जिसने कभी बालासाहेब का अपमान किया था।
दरअसल एनसीपी विधायक जीतेंद्र आहवाद ने सुधीर धावले नाम के एक शख्स को जेल से रिहा करने के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से सिफारिश की है। सुधीर इन दिनों भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले में जेल के अन्दर बंद है। एक जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगाँव में हुए जातीय संघर्ष के दौरान गिरफ्तार हुए 10 लोगों में शामिल था। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उस हिंसक घटना के पीछे असली मास्टरमाइंड सुधीर धावले ही था।
गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे से जिस सुधीर धावले को जेल से रिहा करने सिफारिश हो रही है, उसी धावले ने अपनी किताब में उद्धव के पिता और शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे को हिटलर की संज्ञा दी थी। उस किताब में सुधीर ने जर्मन तानाशाह हिटलर से बालासाहेब का मिलान करते हुए सुधीर ने उनके बारे में लिखते हुए उन्हें “पूंजीपतियों का फासीवादी नौकर” कहा था। हालाँकि हिटलर से बालासाहेब का प्रेम किसी से छिपा नहीं था, यही वजह है कि देश में आपातकाल की घोषणा होने पर सबसे पहले बालासाहेब ने इसका समर्थन किया था। अपनी किताब में सुधीर ने बालासाहेब को फासीवादी, ब्राह्मणवादी लिखा था।
अपनी किताब में उसने दावा किया कि हिंदुत्व को बढाने के लिए बालासाहेब ने दलितों की हत्या तक करवा दी थी। सुधीर ने अपनी इस किताब में 1974 के वर्ली दंगे का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि इस दौरान मराठवाड़ा की दलित महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुआ था। इस दौरान बहुत लोगों को मारा गया और उनके घर लूट लिए गए थे। धावले ने ठाकरे पर महाराष्ट्र में दलितों के नरसंहार का आरोप लगाया था। अपनी किताब के ज़रिये धावले ने कहा कि यह सब करके ही ठाकरे स्थापित हुए।
उद्धव ठाकरे के सामने उनके पिता का अपमान करने वाले धावले को रिहा करने की माँग एक ऐसे वक़्त में आई है, जब वह एक गठबंधन सरकार के मुखिया हैं। उनकी सरकार को एनसीपी और कॉन्ग्रेस दोनों का समर्थन प्राप्त है, जिसके लिए उन्हें काफी आलोचना भी झेलनी पड़ी थी।
हैदराबाद के साइबराबाद क्षेत्र में डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) का गैंगरेप और उनकी हत्या को लेकर जनाक्रोश अभी थमा नहीं है। लोग बलात्कारियों को फाँसी देने से लेकर उन्हें भीड़ के हवाले करने तक की माँग कर रहे हैं। हैदराबाद में जिस जेल में उनलोगों को रखा गया था, उसके बाहर लोगों की भारी भीड़ जुट गई थी। ‘न्याय’ की माँग करते हुए लोगों ने जेल में घुस कर बलात्कारियों को अपने शिकंजे में लेने की कोशिश की। पुलिस ने लाठीचार्ज कर लोगों को वहाँ से भगाया। मुख्य आरोपित मोहम्मद आरिफ और जोल्लू शिवा सहित इस मामले में 4 आरोपितों को 14 दिनों की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।
ख़बर आई है कि चारों बलात्कार आरोपितों को जेल में मटन करी-खिलाई गई। चेरापल्ली की हाई सिक्योरिटी जेल में रखे गए चारों दरिंदों को रात के खाने में मटन-करी दिए जाने की सूचना के बाद लोगों ने पुलिस एवं प्रशासन के प्रति गुस्सा जताया। आरोपितों को दिन के खाने में चावल दाल दिया गया था। हालाँकि, जेल प्रशासन ने कहा है कि ऐसा जेल के मेनू के अनुरूप ही किया गया। जेल की मेनू में उस दिन मटन-करी था, इसीलिए इन आरोपितों को भी वही खिलाया गया।
चारों ने बुधवार (नवंबर 27, 2019) को इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। डॉक्टर रेड्डी के साथ न सिर्फ़ गैंगरेप किया गया बल्कि उसके बाद उन्हें मार भी डाला गया। दरिंदगी का आलम ये था कि आरोपितों ने लाश के साथ भी बलात्कार किया। इसके बाद डेड बॉडी पर पेट्रोल व डीजल छिड़क कर आग लगा दी गई। शुक्रवार को जली हुई बॉडी मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और चारों आरोपितों की गिरफ़्तारी हुई।
घटना के 4 दिन बाद मुख्यमंत्री केसीआर ने अपनी चुप्पी तोड़ी और कहा कि वो इस ख़बर से व्यथित हैं। मुख्यमंत्री ने फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के बाद दोषियों को जल्द से जल्द सज़ा दिलाए जाने की बात कही है। उससे पहले पीड़िता के चाचा ने आरोप लगाया था कि सीएम केसीआर के पास परिजनों को एक कोंडोलेंस लेटर तक भेजने का समय नहीं है। इस घटना के सामने आने के अगले दिन केसीआर एक हाई प्रोफाइल शादी अटेंड करते दिखे थे।
आरे में मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट को उद्धव ठाकरे की सरकार ने रोक दिया है। शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार ने पर्यावरण एक्टिविस्ट्स की माँगों पर मुहर लगाते हुए कहा है कि आरे में अब एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। इधर उद्धव सरकार पर्यावरण बचाने का दावा कर रही है, उधर शिवसेना नेता की कार ने हिरण को कुचल डाला। संजय गाँधी नेशनल पार्क में शिवसेना सांसद राजेंद्र गावित की एसयूवी गाड़ी से कुचल कर एक स्पॉटेड हिरन की मौत हो गई।
जंगल के मुख्य कंजर्वेटर और पार्क के डायरेक्टर अनवर अहमद ने बताया कि एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ अंधाधुंध गाडी चलाने का मामला दर्ज किया गया है। जाँच अभी भी जारी है। ये घटना बुधवार (नवंबर 30, 2019) को हुई। राजेंद्र गावित की गाड़ी त्रिमूर्ति स्टेशन के पास से गुजर रही थी। तभी एक स्पॉटेड डियर वहाँ से सड़क पार कर रहा था। शिवसेना सांसद की गाड़ी ने हिरण को कुचल डाला, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। ये घटना शाम के 6-6.30 बजे हुई। हिरण को नेशनल पार्क में स्थित वेटेरनरी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।
पार्क के डायरेक्टर अनवर ने अपील की है कि गाड़ी चलाने वाले उद्यान के भीतर ट्रैफिक नियमों का पालन करें। एसयूवी को जब्त कर लिया गया है। उजले रंग की एसयूवी को डायरेक्टर के दफ्तर के बाहर पार्क किया गया था। फॉरेस्ट ऑफेंस का मामला भी दर्ज किया गया है।
Shiv Sena’s Environmental love
Pic 1: Politics over development, showing fake love for the environment
आरे जंगलों पर पर्यावरण संरक्षण का दावा कर रहे शिवसेना ने अभी तक अपने सांसद की गाड़ी से कुचल कर मारे गए हिरण को लेकर अभी तक कोई बयान नहीं दिया है। राजेंद्र गावित की जिस गाड़ी से ये घटना हुई, उसका नंबर है- MH 48 BH 9909। रविवार तक इस गाड़ी को जब्त कर के नेशनल पार्क के डायरेक्टर के दफ्तर के बाहर रखा गया था।
लंदन में जून 2017 में हुए आतंकी हमले में 11 लोग मारे गए थे और लगभग 50 घायल हुए थे। उस हमले के बाद यूरोप में पाँव पसारते इस्लामिक आतंकवाद को लेकर चिंता जताई जाने लगी थी। उस हमले में एक व्यक्ति ने आतंकियों के साथ संघर्ष किया था। उसे 8 बार चाकू गोदा गया था लेकिन फिर भी उसने कई लोगों की जान बचाई थी। यूके में उसे हीरो कहा जाने लगा था। इस्लामिक जिहादियों ने एक वैन को भीड़ के बीच में घुसा दिया था और चाकू लेकर लोगों को मारने लगे थे। 49 वर्षीय रॉय लर्नर को उनसे मुक़ाबला करने के बाद लोगों ने ‘लायन ऑफ द लंदन’ कहना शुरू कर दिया था।
यूके पुलिस को डर था कि कहीं इस्लामिक आतंकियों के इस कृत्य के शिकार बने लर्नर इस्लाम विरोधी न हो जाएँ। उन्हें जबरन ‘डीरैडिकलाइजेशन क्लासेज’ में भेजा गया, ताकि वो इस्लाम विरोधी होने से बच सकें। जब वो हमला हुआ था, तब 7 लोगों को कुचलती हुई वो वैन आगे बढ़ी चली जा रही थी। उस समय लर्नर एक पब में बैठ कर शराब पी रहे थे। तभी ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए आतंकियों ने लोगों को ताबड़तोड़ चाकुओं से गोदना शुरू कर दिया।
आतंकी वहाँ पर ‘इस्लाम, इस्लाम, इस्लाम’ के नारे भी लगा रहे थे। इसके बाद लर्नर ने चिल्लाते हुए उन आतंकियों पर झपट्टा मारा। उन्होंने निहत्थे उन आतंकियों का समाना किया, जिससे वहाँ उपस्थित बाकी लोग अपनी जान बचा कर भाग सकें। हालाँकि, इस दौरान उनके शरीर पर 8 बार चाकू के वार हुए। बीबीसी ने उन्हें ‘हीरो’ बताया। इंग्लैंड ने उन्हें जॉर्ज क्रॉस मैडल से सम्मानित किया। स्वीडेन के एक ब्रेवरी ने एक शराब का नाम उनके नाम पर रखा।
लर्नर को यूके ने टेररिस्ट वॉचलिस्ट ‘प्रिवेंट’ प्रोग्राम के अंतर्गत ‘डी रैडिकलाइजेशन’ क्लास का हिस्सा बनाया। लर्नर ने बताया कि इस दौरान उनके साथ एक आतंकी की तरह व्यवहार किया गया। आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बाद उनके शरीर पर 80 टाँके लगे थे। लंदन पुलिस ने उन पर अवैध पेनकिलर रखने का मामला चलाया। वो एक बार जेल जाते-जाते बचे। लंदन के मेयर सादिक़ खान पर अक्सर इस्लामिक कट्टरपंथियों के प्रति नरम रवैया अख्तियार करने के आरोप लगते रहते हैं।
अपने बयानों के चलते आए दिन चर्चा में रहने वाले कॉन्ग्रेसी नेता अधीर रंजन चौधरी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को घुपैठिया बताने वाले अधीर रंजन चौधरी ने इस बार केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। दरअसल कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन ने लोकसभा की कार्यवाही के दौरान कोर्पोरेट टैक्स में होने वाली कटौती का विरोध कर रहे थे। इसी दौरान बोलते हुए अधीर कह गए कि “आपको निर्बला सीतारमण कहने का मन करता है।”
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक संसद में बोलते हुए चौधरी ने कहा कि हम आपका सम्मान करते हैं मगर कभी-कभी आपको ‘निर्बला सीतारमण’ कहने का मन करता है, क्योंकि आप मंत्री पद पर तो हैं, लेकिन जो आपके मन में है वह कह भी नहीं पाती हैं।
यह कोई पहला मौका नहीं है कि जब अधीर होकर उन्होंने ऐसा बयान दिया हो। इससे पहले वह पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को घुसपैठिया तक कह चुके हैं। संसद में पहले ही दिन एनआरसी का विरोध करते हुए उन्होंने कहा था कि मोदी और शाह दोनों खुद गुजरात से आकर दिल्ली में बस गए। वहीं उनके इससे पहले दिए बयान पर भी संसद में खूब हंगामा हुआ था। इसके जवाब में केन्द्रीय मंत्री प्रह्लालाद जोशी ने पलटकर कॉन्ग्रेस पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को घुसपैठिया कह दिया था।
कॉरपोरेट टैक्स पर संसद में बहस के दौरान अधीर रंजन चौधरी –
आपका बहुत सम्मान है पर आपके हालात देखकर मुझे दिल करता है कि आपको निर्मला सीतारमण के बदले ‘निर्बला सीतारमण’ कहना ठीक होगा, क्योंकि आप मंत्री पद पर हैं लेकिन आप जो चाहती हैं वो आप कर भी पाती हैं या नहीं, मुझे मालूम नहीं’
बता दें कि कोर्पोरेट टैक्स पर केन्द्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बयान देते हुए कहा कि यूएस-चीन के बीच व्यापार युद्ध के संकेत मिल रहे हैं जिसके चलते कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ और कॉर्पोरेट चीन से बाहर निकलना चाह रही हैं। ऐसे में सरकार द्वारा कॉर्पोरेट टैक्स कम करने का समय आ गया है।
लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी के ‘निर्बला’ वाले बयान पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा- ‘हमारी पार्टी में कोई ‘निर्बला’ नहीं है, हमारी पार्टी में हर महिला ‘सबला’ है।’
ओडिशा में, भौतिकी विषय की लेक्चरर (रेप पीड़िता) ने पुलिस की लापरवाही के चलते ख़ुदकुशी कर ली। महिला की आत्महत्या के बाद, पुलिस ने एक इंस्पेक्टर का तबादला कर दिया और ASI को निलंबित करते हुए मामले की कार्रवाई शुरू कर दी।
झार्पोखरिया थाने के SI प्रशांत स्वाइन को जाँच में देरी के लिए निलंबित कर दिया गया है और उनका ट्रांसफर IIC शरत महली ज़िला मुख्यालय में कर दिया गया। पीड़िता, जो भौतिकी विषय की लेक्चरर थीं, वो रायरंगपुर कॉलेज में एक छात्रावास के कमरे में शनिवार (29 नवंबर) को करीब 8.30 बजे पंखे से फाँसी पर लटकी पाई गईं।
ख़बर के मुताबिक, ओडिशा के मयूरभंज ज़िले के पंधड़ा गाँव की रहने वाली महिला 26 अक्टूबर को काली पूजा मनाने के लिए अपनी भाभी और भाई के घर गई थी। उसी दौरान उनकी भाभी के भाई सौम्य रंजन साहू ने उनके साथ कथित तौर पर बलात्कार किया। इस बारे में जब उन्होंने अपनी भाभी को बताया तो उन्होंने इस मुद्दे पर चुप्पी बनाए रखने को कहा।
लेकिन, आरोपित ने पीड़िता से सम्पर्क किया और कथित तौर पर घटना के दौरान दर्ज उनकी अश्लील तस्वीरें भेजीं, उन्हें डराया-धमकाया और इस बारे में किसी को कुछ न बताने को कहा, नहीं तो वो उनकी सारी तस्वीरें इंटरनेट पर अपलोड कर देगा। महिला ने 30 अक्टूबर को झार्पोखरिया पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा-376 और 506 के तहत FIR दर्ज की और पीड़िता को पीआरएम मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में मेडिकल टेस्ट के लिए भेजा। पीड़िता का बयान भी दर्ज किया गया, लेकिन एक महीने तक अपराधी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं होने से आहत होकर उन्होंने आत्महत्या कर ली।
पीड़िता के पिता के अनुसार, उनकी बेटी के छात्रावास के कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद किया गया था। घटना से आहत पीड़िता के पिता के अलावा कॉलेज के कुछ अन्य छात्रों ने शव को लगभग 12 घंटे तक पोस्टमार्टम के लिए नहीं ले जाने दिया। आंदोलनकारियों को रायरंगपुर टाउन IIC रंजन कुमार सेठी और SDPO स्नेहाशीष साहू द्वारा गिरफ़्तार कर लिया गया, इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।
चूँकि, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है, इसलिए एसपी ने कहा कि प्राथमिक अभियुक्तों को उनके अन्य दो साथियों, देवव्रत मंडल और सुजीत मंडल को कटक ज़िले के धनमंडल से गिरफ़्तार कर लिया गया है। देवव्रत और सुजीत ने कथित तौर पर पीड़िता को धमकी दी थी। पीड़िता के पिता द्वारा दायर शिक़ायत में 6 लोगों को आरोपित बताया गया है। पुलिस ने उनमें से तीन को पकड़ लिया है जबकि बाकी तीन को गिरफ़्तार किया जाना बाकी है।
हैदराबाद में हुई बलात्कार की दर्दनाक घटना पर राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने कहा है कि बलात्कारियों को सरे-आम मार देना चाहिए। समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सांसद और पूर्व अभिनेत्री जया बच्चन ने इस घटना पर संसद में अपनी बात रखते हुए कड़े शब्दों में इसकी निंदा की। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि हमें ऐसे लोगों को सरे-आम सबके सामने लाना चाहिए, जिन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया है। साथ ही उन्होंने कहा- “महिलाओं के साथ आपराधिक कृत्य करने वालों को पब्लिक में लिंच कर दिया जाना चाहिए। इससे ऐसी घटनाओं पर भी रोक लगेगी।”
#WATCH “People now want Govt to give a definite answer. These type of people (the accused in rape case) need to be brought out in public and lynched,” Rajya Sabha MP Jaya Bachchan on rape & murder of woman veterinary doctor in Telangana pic.twitter.com/HFNjUHtSHB
उन्होंने इस घटना पर बोलते हुए घटनास्थल के सम्बंधित सिक्योरिटी इंचार्ज को भी लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि मैं नाम नहीं लूँगी मगर जो भी हैं उनसे भी इस मामले पर सवाल किया जाना चाहिए। सरे-आम उनसे उनकी इस लापरवाही पर सवाल किया जाना चाहिए।
Defence Minister Rajnath Singh in Lok Sabha on rape & murder of woman veterinary doctor: To control and eliminate such crimes against women, we are ready to make the kind of law which the entire House agrees to. https://t.co/yFtLdDZOVy
हैदराबाद की इस घटना के बाद पूरे देशभर में प्रदर्शन और आक्रोश का माहौल है। इसका असर सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को संसद के दोनों सदनों में भी देखने को मिला। दोनों सदनों में इस वीभत्स घटना को लेकर सभी पार्टियों के सांसदों ने क्षोभ प्रकट किया। संसद के शून्य काल में बोलते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस प्रकार के जघन्य अपराधों की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार सुझावों का स्वागत करती है।