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‘गोली मारी गई, झूठे केस में फँसाने की हुई कोशिश’: कौन है मोनू मानेसर, जिसका पुलिस से भी तगड़ा है नेटवर्क, भिवानी मामले में आया नाम

हरियाणा के भिवानी में जुनैद और नासिर की जलकर हुई मौत के मामले में मोनू मानेसर नाम के गौरक्षक को आरोपित बनाया गया है। हालाँकि, मोनू ने खुद को बेगुनाह बताया और हा कि घटना के समय वह कहीं और था। मोनू मानेसर पर इस प्रकार के आरोप पहली बार नहीं लगे हैं। कुछ ही समय पूर्व ऑपइंडिया से बात करते हुए मोनू ने खुद को गौतस्करों की साजिश के निशाने पर बताया था।

इस मामले में पुलिस ने रिंकू सैनी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने रिंकू को मोनू मानेसर का करीबी बताया है। मोनू को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है। उधर, मोनू मानेसर ने आरोपों पर कहा कि जिस दिन वारदात को अंजाम दिया गया, उस दिन वह गुरुग्राम में एक होटल में था। होटल के सीसीटीवी में इसका प्रूव उपलब्ध है। मोनू ने कहा कि उसका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है। विहिप के केंद्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा है कि इस मामले में अनावश्क रूप से बजरंग दल का नाम घसीटा जा रहा है। राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार को माफी माँगनी चाहिए। बता दें कि मामला राजस्थान में दर्ज किया गया है।

कौन है मोनू मानेसर

मोनू मानेसर गोतस्करी और गोहत्या के लिए कुख्यात क्षेत्र मेवात के आसपास गोरक्षा में सक्रिय एक युवक है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोनू मानेसर का असली नाम मोहित यादव है। शादीशुदा मोनू 2 बच्चों का पिता है। मेवात और आसपास जहाँ एक तरफ कुछ नई उम्र के लड़कों को गोहत्या और गोतस्करी की तरफ धकेल दिया जाता है। वहीं कई युवा ऐसे हैं जो मोनू के साथ मिल कर गोसेवा और गोरक्षा का काम कर रहे हैं।

झूठे केस में फँसाने और हत्या की कोशिश

मोनू मानेसर ने पिछले माह ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा था कि गोतस्करों के खिलाफ हमेशा सक्रिय रहने के चलते वो कई असामाजिक तत्वों के निशाने पर हैं। तब उन्होंने हमें बताया था कि उनके चलते कई बड़े गोहत्यारे जेलों में हैं। इसलिए उन्हें फँसाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

बात जनवरी 2023 की है, जब एक अन्य मुस्लिम की ही गाड़ी से एक्सीडेंट में मरे वारिस नाम के कथित गौतस्कर की मौत का जिम्मेदार मोनू मानेसर को बताया गया था। उस दौरान ना सिर्फ शिकायत दर्ज करवाई गई थी, बल्कि हंगामा भी किया गया था। हालाँकि, पुलिस जाँच में ये आरोप बेबुनियाद निकले थे।

वहीं, इसी माह 7 फरवरी को मुस्लिम आबादी से घिरे एक दलित परिवार की मदद करने गुरुग्राम के पटौदी पहुँचे मोनू मानेसर और उनके साथियों को घेर लिया गया था। इस दौरान न सिर्फ पत्थर चले गए, बल्कि फायरिंग की भी शिकायत की गई थी। इस घटना में मोनू और उनकी टीम ने दलित परिवार को मुस्लिम भीड़ के हमले से बचाया था। बाद में दोनों तरफ से पुलिस में शिकायत दी गई थी।

साल 2019 में गोतस्करों का पीछा करते समय तस्करों ने मोनू को गोली मार दी थी। गोली लगने से मोनू गंभीर रूप से घायल हो गया था। ठीक होने के बाद मोनू ने गोरक्षा के अपने अभियान को और तेज किया और अपने नेटवर्क को राजस्थान तक फैलाया।

गोतस्करों के विरुद्ध बेहद तगड़ा नेटवर्क

हरियाणा और राजस्थान में गोतस्करों के खिलाफ मोनू मानेसर का बेहद तगड़ा नेटवर्क माना जाता है। कहा जाता है कि कहाँ से गोवंश उठाकर कहाँ ले जाया जा रहा है, इसकी जानकारी मोनू और उनकी टीम को पुलिस से पहले मिल जाती है।

गोतस्करों को पुलिस से पकड़वाने के बाद यह टीम गायों को देखभाल के लिए गोशाला भेज देती थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक एक दर्जन से ज्यादा गोतस्करी के केस में खुद मोनू वादी बने हुए हैं। मोनू मानेसर सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं और अपने गोरक्षा के कामों को अक्सर शेयर किया करते हैं।

पेशेवर गोतस्करों के होते हैं कई दुश्मन

ऑपइंडिया ने इस मामले पर गुरुग्राम निवासी और शिवसेना युवा प्रदेश अध्यक्ष रितुराज से बात की। रितुराज के मुताबिक जलकर मरे दोनों व्यक्ति पेशेवर गोतस्कर थे, जिनके कई दुश्मन रहे होंगे। हमें बताया गया कि मोनू को लगातार फँसाने की साजिश में एक दाँव ये भी लग रहा, जिसकी SIT जाँच करवा कर ही कोई कदम उठाया जाना चाहिए।

अलग-अलग काम करने वालों को एक साथ लपेटा

शिवसेना पदाधिकारी रितुराज ने हमें बताया कि जिन मोनू मानेसर या श्रीकांत आदि का नाम FIR में डाला गया है वो अलग-अलग टीमें बना कर काम करते हैं। उनका यह भी कहना था कि इन टीमों में आपस में कम्पटीशन जैसा माहौल रहता था फिर भी इन सभी को सामूहिक तौर पर दिखाकर गुरुग्राम और आस-पास के सभी गोरक्षकों को एक साथ फँसाने की साजिश चल रही है।

गोतस्करों को तो मुआवजा, लेकिन गोरक्षक मरे तो उनका क्या

शिवसेना नेता रितुराज ने राजस्थान सरकार द्वारा मृत गोतस्करों के परिजनों को लाखों रुपए मुआवजा देने पर अशोक गहलोत की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इसी क्षेत्र में कई गोरक्षकों को गोतस्करों के हाथों जान गँवानी पड़ी थी, लेकिन उनके घर वालों को कुछ नहीं दिया गया। रितुराज ने सवाल उठाया कि क्या कोई उन परिवारों की भी सुध लेगा, जिनके परिजन गाय बचाते हुए अब दुनिया में नहीं हैं।

लगातार साजिशों के खिलाफ राष्ट्रपति को ज्ञापन

ऑपइंडिया ने गुरुग्राम के बजरंग दल पदाधिकारी प्रवीण हिंदुस्तानी से बात की। उन्होंने कहा कि आए दिन बेवजह नए-नए मामलों में मोनू को फँसाने की साजिश चल रही है इसके खिलाफ अब यहाँ का हिन्दू समाज एकजुट है। प्रवीण के अनुसार इन साजिशों के खिलाफ आज 18 फरवरी को गुरुग्राम के DC के माध्यम से राष्ट्रपति को सारे हिन्दू संगठन मिल कर ज्ञापन प्रेषित करेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भिवानी के लोहारू में जली हुई कार और दो जले हुए कंकाल मिले थे। जुनैद के चचेरे भाई इस्माइल ने गुरुवार (16 फरवरी 2023) को गोपालगढ़ थाने में दोनों की अपहरण और मारपीट की FIR दर्ज कराई। एफआईआर में इस्माइल ने कहा है कि बुधवार (15 फरवरी 2023) की सुबह करीब 5 बजे जुनैद और नासिर बोलेरो से बाहर गए थे। लेकिन वे लौट कर घर नहीं आए।

बाद में पुलिस को एक बोलेरो गाड़ी में दो जली हुई लाश मिली। कहा जा रहा है कि ये दोनों लाशें जुनैद और नासिर की है। स्थानीय लोग दोनों को गोतस्कर के रूप में जानते हैं। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने मोनू मानेसर, रिंकू सैनी सहित कुछ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान के बाद इसमें राजनीति होने लगी है।

अमेरिका में फिर मास शूटिंग: सौतेले पिता और पूर्व पत्नी सहित 6 लोगों की गोली मारकर हत्या, पुलिस ने हमलावर को किया गिरफ्तार

अमेरिका में एक बार फिर से मास शूटिंग की घटना सामने आई है। टेनेसी राज्य के मिसिसिपी के ग्रामीण इलाके अर्काबुतला काउंटी में शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) को एक शख्स ने लोगों पर अंधाधुन फायरिंग कर दी। फायरिंग में 6 लोगों के मारे जाने की खबर है। हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हमलावर की पहचान रिचर्ड डेल क्रुम (52) के तौर पर हुई है। हमलावर ने शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह लगभग 11 बजे एक स्टोर के पास एक व्यक्ति को गोली मार दी। इसके बाद वह अपनी पूर्व पत्नी के घर पहुँचा और उसकी हत्या कर दी। उसने पूर्व पत्नी के घर पर मौजूद शख्स पर बंदूक से हमला किया, लेकिन गोली नहीं मारी।

पूर्व पत्नी की हत्या के बाद रिचर्ड ने अपने सौतेले पिता और उनके घर पर मौजूद एक महिला की हत्या कर दी। पुलिस ने बताया कि सौतेले पिता समेत 2 लोगों की हत्या के बाद रिचर्ड एक चर्च के पास पहुँचा, जहाँ उसने 2 और लोगों की हत्या की। इस तरह उसने कुल 6 लोगों की हत्या कर दी। वहीं, फायरिंग में एक शख्स के जख्मी होने की खबर है, जिसे अस्पताल में दाखिल कराया गया है। रिचर्ड से पूछताछ की जा रही है और हत्या की वजहों का पता लगाया जा रहा है। पुलिस के अनुसार आरोपित के पास से कई हैंडगन और शॉटगन बरामद हुए हैं।

बता दें कि अमेरिका के अलग-अलग शहरों में मास शूटिंग की घटनाएँ सामने आती रहती हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया में 21-22 जनवरी 2023 की रात मास शूटिंग की घटना में 10 लोगों की मौत हो गई थी। मोंटेरी पार्क इलाके में चीनी नववर्ष को लेकर जश्न मनाया जा रहा था, तभी एक हमलावर ने आंधाधुन गोलियाँ चला दीं। नवंबर 2022 में वर्जीनिया के वालमार्ट के एक स्टोर में हुई फायरिंग में 10 लोगों की मौत हो गई थी।

इसके पहले टेक्सास में 18 साल एक युवक ने AK-47 से अपनी दादी को गोली मारी। फिर स्कूल पहुँचकर अंधाधुंध फायरिंग की। अमेरिका को हिला देने वाली यह घटना 24 मई 2022 को हुई थी। जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी। अमेरिका में मास शूटिंग जैसी घटनाओं के पिछे यहाँ के गन कल्चर को दोषी ठहराया जाता रहा है। जिसे बदलने के लिए खास प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

पलामू के पांकी में महाशिवरात्रि पर हिंदुओं को शिव बारात निकालने की इजाजत नहीं: तोरणद्वार बनाने को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने की थी हिंसा

झारखंड के पलामू स्थित पांकी के हिंदू अब महाशिवरात्रि नहीं मना सकेंगे। तोरणद्वार बनाने पर कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा के बाद इलाके में धारा 144 लागू कर दिया गया है। धारा 144 का हवाला देकर प्रशासन ने हिंदुओं को शिव बारात निकालने की इजाजत नहीं दी है।

बता दें कि महाशिवरात्रि हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है। इस दिन पूरे भक्तिभाव से हिंदू भगवान शिव की आराधना करते हैं और उनकी बारात निकालते हैं। पांकी को लेकर भी अपनी आस्था के साथ इस बारात को धूमधाम से मनाते आ रहे थे, लेकिन इस बार वे ऐसा नहीं कर सकेंगे।

पलामू के जिलाधिकारी ए दोड्डे, एसपी चंदन सिन्हा और राँची से आए एक आईपीएस अधिकारी ने मस्जिद के इलाके वाले शहीद भगत सिंह चौक का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों ने शिव बारात निकालने पर रोक लगाने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने हिंदुओं से कहा कि शिवरात्रि को लेकर भावुक होने की जरूरत नहीं है।

बता दें कि हिंसा को लेकर पूरे इलाके में जवानों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही ड्रोन से इलाके के निगरानी की जा रही है। जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी पांकी में कैंप कर रहे हैं। इसके साथ ही शुक्रवार को जिलाधिकारी ने दोनों समुदायों के साथ बैठक की थी।

बता दें कि महाशिवरात्रि को लेकर बनाए जा रहे तोरणद्वार को लेकर मुस्लिमों ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने हिंदुओं को मस्जिद के सामने गेट बनाने से रोका था। इसके बाद हुए विवाद में हिंदुओं पर पथराव किया गया था और उन पर पेट्रोल ब फेेंके गए थे। इस हमले में कई हिंदू घायल हो गए थे।

स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा की तैयारी बहुत पहले से की जा रही थी और महाशिवरात्री को लेकर बनाया जा रहा तोरणद्वार के रूप में एक बहाना मिल गया। लोगों का कहना है कि मस्जिद, जिसे स्थानीय मुस्लिम जामा मस्जिद कहते हैं, से लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक प्राचीन हनुमान मंदिर है। यहाँ हर मंगलवार को आरती होती थी। इसकी महिमा को सुनकर लोगों की भीड़ बढ़ती गई।

एक समय ऐसा भी आया कि मंगलवार को मंदिर में 200 लोग तक जुटने लगे। आरती के दौरान लोगों तक आरती आवाज पहुँचाने के लिए मंदिर पर लाउडस्पीकर की व्यवस्था की गई। इसके बाद से मस्जिद कमिटी के लोग इस पर आपत्ति उठाने लगे। उनका कहना था कि इससे उन्हें नमाज पढ़ने में दिक्कत होती है।

वहीं लोगों का कहना था कि उनकी सामूहिक आरती सप्ताह में एक बार होती है और नमाज दिन में पाँच बार। उन्होंने नमाज पर कभी आपत्ति नहीं उठाई तो आरती पर आपत्ति उठाने के कोई औचित्य नहीं है। हिंदुओं का कहना था कि मस्जिद पर 36 मस्जिद हैं, फिर भी नमाज में दिक्कत कैसे हो सकती है।

हालाँकि, हिंदुओं के आग्रह को मस्जिद कमिटी के लोग नहीं माने और एनामुल, महबूब आदि थाने में लगातार शिकायत देते रहे। इतना ही नहीं, नमाज के वक्त लाउडस्पीकर का वॉल्युम भी फुल कर दिया जाता था। इससे लोगों को कई तरह की परेशानी होने लगी। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि नमाज की आवाज के कारण दुकान में कस्टमर से बात करना मुश्किल हो जाता था। इधर शिकायत और दबाव के बाद पुलिस हिंदुओं को थाने बुलाने लगी।

इसी बात पर आगे चलकर मस्जिद कमिटी के लोगों द्वारा हिंसा को अंजाम दिया गया। हिंसा के लिए हारुन नाम के व्यक्ति के टैक्टर से हिंसा से एक दिन पहले ईंट-पत्थर जुटाए गए थे और उन्हें घरों और मस्जिद की छतों पर रखा गया था। हिंसा के दिन इन्हीं छतों से पथराव किया था।

स्थानीय भाजपा नेत्री मंजूलता दुबे का कहना है कि हिंदुओं के त्योहारों में मुस्लिमों द्वारा अक्सर खलल डाली जाती है। वे शादी-ब्याह तक में किसी ना किसी बहाने से उपद्रव करने की कोशिश करते हैं। लोगों का कहना है कि इस कारण से वहाँ के हिंदुओं को अपना पर्व-त्योहार मानना मुश्किल हो गया है।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश सिंह का दावा है कि प्री प्लानिंग के तहत हिन्दुओं पर हमला करने वालों ने अपनी दुकानों में तोड़फोड़ की और कुछ वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया है। ऐसा करने के पीछे कमलेश सिंह ने हमलावरों द्वारा लोगों की हमदर्दी बटोरने के साथ हिन्दुओं को फँसाने की साजिश बताया।

कैसे हुई हिंसा की शुरुआत

इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों ने बताया कि 14 फरवरी की रात को तोरणद्वार बनाने के लिए कुछ मजदूर सड़क पर गड्ढे खोद रहे थे। कुछ छह गड्ढे खोदने थे। इनमें से एक गड्ढा एक मुस्कान मोबाइल नाम के दुकान के सामने पड़ रहा था। इस दुकान का मालिक कलीम आलम है। उसने गड्ढा खोदने से रोक दिया।

इसके बाद टेंट वाले ने तोरणद्वार लगवाने को बुलाया। स्थानीय हिंदुओं ने पूछा कि द्वार क्यों नहीं लगाने दे रहे हैं तो कलीम बोला कि वह उसके दुकान के सामने पड़ रहा है। इस पर स्थानीय हिंदुओं ने बोला कि जब मुस्लिम कोई कार्यक्रम करते हैं और टेंट लगाते हैं तब दुकान के सामने नहीं पड़ता है? चार का मामला है, उसके बाद द्वार को हटा लिया जाएगा। इस पर कलीम बोला कि यहाँ खुंटा वह नहीं गड़ने देगा। जिसको जो करना है कर ले।

स्थानीय हिंदुओं ने ऑपइंडिया को बताया कि इस पर हिंदुओं ने कहा कि यह सरकारी जमीन है और यहाँ आप नहीं रोक सकते। इसके बाद कलीम वहीं के महबूब को लेकर मस्जिद के पास चला गया। इसके बाद वे लोग आपस में बातचीत करने लगे और धीरे-धीरे वहाँ 50-60 लोग जमा हो गए।

इसके बाद हिंदुओं ने थाने को सूचित किया। थानेदार यहाँ आए तो उन्होंने पूछा कि क्या हो रहा है। थानेदार ने कहा कि अगर यहाँ पहले नहीं द्वार नहीं लगाया गया है तो अब क्यों लगा रहे हो। इस पर स्थानीय लोगों ने उनसे पूछा कि सर आप ही बताइए कि यहाँ नहीं गाड़ें तो कहाँ खूँटा गाड़ें?’ आप जहाँ कहेंगे वहाँ गाड़ेंगे। इस पर थानेदार ने कहा कि यहाँ छोड़कर दूसरी जगह जाओ। इसके बाद थानेदार चले गए।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी दौरान मुस्लिम आए और खूँटा उखाड़ने लगे और एक हिंदू के सिर पर डंडा मारा। इस हमले में पीड़ित को 8 टाँके लगे। लोगों का कहना है कि मुस्लिम वहाँ से अपने-अपने घर में जाकर छतों से पथराव करने लगे। मस्जिद से भी पथराव करने लगे। लोगों का कहना है कि ट्रैक्टर से लाकर पत्थर को छतों पर रखा गया था। इसे हिंसा के दौरान इस्तेमाल किया गया।

तीर्थ यात्रा की, चर्च गया और बाइबिल भी पढ़ा… फिर महसूस हुआ कि धर्म एक प्रकार का शोषण है: एसएस राजामौली

फिल्म आरआरआर (RRR) ने दक्षिण भारतीय फिल्मों के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर एसएस राजामौली (SS Rajamouli) को दुनिया भर में अलग पहचान दिलाई है। इंटरनेशनल मीडिया ‘द न्यू यॉर्कर’ को दिए अपने इंटरव्यू में राजामौली ने धर्म और अपनी फिल्मों पर रामायण और महाभारत जैसे धर्मग्रन्थों के प्रभाव पर चर्चा की।

इंटरव्यू के दौरान राजामौली ने बताया कि उन्होंने कई धर्मग्रन्थों का अध्ययन किया है। तीर्थयात्रा की है। भगवा वस्त्र धारण किया है। चर्च में भी गए हैं और बाइबिल भी पढ़ा है। उन्होंने कहा, “इन सभी चीजों ने मुझे किसी तरह यह महसूस कराया कि धर्म एक प्रकार का शोषण है।” हालाँकि, एसएस राजामौली ने यह भी कहा कि उनकी फिल्में किसी न किसी तरह हिंदू धर्मग्रन्थ रामायण और महाभारत से प्रभावित होती हैं। उन्होंने खुद को नास्तिक बताया और कहा,

“रामायण और महाभारत से मेरा प्यार कभी कम नहीं होगा। दोनों ग्रन्थ महासागर की तरह हैं। जब भी मैं इन्हें पढ़ता हूँ तो कुछ न कुछ नया सीखता हूँ।”

राजामौली ने कहा, “मैंने इन कहानियों को तब से पढ़ा है, जब मैं एक बच्चा था। शुरुआत में वे सिर्फ अच्छी और आकर्षक कहानियाँ लगती थीं। जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मैंने पाठ के विभिन्न संस्करणों को पढ़ा और कहानी मेरे लिए कुछ बहुत बड़ी बनने लगी। मैं पात्रों, पात्रों के भीतर के संघर्षों और उनकी प्रेरक भावनाओं को देख सकता था। मुझसे जो कुछ भी निकलता है, वह किसी न किसी तरह से इन ग्रंथों से प्रभावित होता है। वे ग्रंथ महासागरों की तरह हैं।”

द न्यू यॉर्कर के साथ साक्षात्कार के दौरान राजामौली से यह भी पूछा गया था कि क्या उन पर आरएसएस या बीजेपी समर्थक मुस्लिम विरोधी या राष्ट्रवादी फिल्में बनाने के लिए दबाव बनाते हैं। इस पर निर्देशक ने जवाब दिया कि ऐसा कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि किसी तरह का एजेंडा फिल्म बनाने के लिए उनसे कभी संपर्क नहीं किया गया।

बता दें कि एसएस राजामौली की फिल्म आरआरआर देश के साथ-साथ विदेशों में भी खूब सराही गई थी। आरआरआर के अलावा राजामौली की फिल्म बाहुबली और बाहुबली 2 को भी लोगों ने खूब पसंद किया था और उनकी एक अलग पहचान बनी थी।

जनवरी 2023 में राजामौली ने न्यूयॉर्क फिल्म क्रिटिक्स सर्कल अवार्ड्स में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीता था। उनकी फिल्म का गीत ‘नातु नातु’ को अंतर्राष्ट्रीय वायरल हिट के लिए उनकी फिल्म को सर्वश्रेष्ठ मूल गीत की श्रेणी में ऑस्कर के लिए नामांकित किया गया है। इस गाने को 2023 का गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड्स में स्वर्ण पदक मिला था।

‘BBC की डॉक्यूमेंट्री प्रॉपगेंडा… गलत समय पर गलत सूचना देने वाला’ – ब्रिटिश सांसद रामी रेंजर ने लताड़ा

गुजरात दंगों पर बनाए गए बीबीसी की प्रॉपगेंडा डॉक्यूमेंट्री की आलोचना ब्रिटेन में भी हो रही है। ब्रिटेन की संसद के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य लॉर्ड रामी रेंजर ने बीबीसी की आलोचना करते हुए डॉक्यूमेंट्री को दुर्भाग्यपूर्ण, गलत समय पर और गलत सूचना देने वाला बताया है। रामी रेंजर ने कहा है कि यह डॉक्यूमेंट्री मुट्ठी भर मोदी विरोधी लोगों के बयानों पर आधारित है।

ब्रिटिश सांसद रामी रेंजर ने कहा कि पीएम मोदी और भारत की सफलता कुछ लोगों से देखी नहीं जा रही है। उन्होंने कहा कि इस बार भारत बदला हुआ है, इसलिए प्रॉपगेंडा की कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। उन्होंने बीबीसी पर 2 महान देशों के बीच संबंध खराब करने की कोशिश का आरोप लगाया।

रमी रेंजर ने कहा कि भारत और ब्रिटेन कई मामलों में दूसरे देशों के मुकाबले एक दूसरे के ज्यादा करीब हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 2 बार चुनावों में भारी बहुमत से जीतकर आए हैं और विरोधियों को गलत साबित किया है।

इसके पहले ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने भी बीबीसी की प्रोपेगेंडा डॉक्यूमेंट्री की आलोचना की थी। ब्लैकमैन ने मंगलवार (14 फरवरी, 2023) को न्यूज 18 से कहा था, “बीबीसी ब्रिटिश सरकार के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। पीएम मोदी को लेकर ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई डॉक्यूमेंट्री स्तरहीन पत्रकारिता का परिणाम है। डॉक्यूमेंट्री के लिए उचित शोध नहीं किया गया है।” ब्लैकमैन ने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बनी बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री में तथ्यों को पूरी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

उल्लेखनीय है कि बीबीसी ने ‘इंडिया : द मोदी क्वेश्चन’ शीर्षक से दो पार्ट में बनाई गई विवादित डॉक्यूमेंट्री सीरीज में गुजरात दंगों को लेकर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊपर आरोप लगाया है। इसको लेकर केंद्र सरकार ने ट्विटर और यूट्यूब से डॉक्यूमेंट्री से संबंधित लिंक हटाने का आदेश जारी किया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूट्यूब वीडियो के लिंक वाले 50 से ज्यादा ट्वीट्स को ब्लॉक किया गया था। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करार दिया था।

इस डॉक्यूमेंट्री में गोधरा कांड में शामिल रहे कट्टर इस्लामी लोगों की भूमिका पर पर्दा डालने की कोशिश की गई। आपको बता दें कि गोधरा कांड में 59 हिंदू मारे गए थे। यही नहीं, BBC की विवादित डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग को लेकर दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी और जेएनयू (JNU) में काफी बवाल भी हुआ था।

‘एक बार नाम गया तो कभी वापस नहीं आएगा’: उद्धव से शिवसेना छीन जाने के बाद राज ठाकरे ने बाला साहब का वीडियो किया शेयर

शिवसेना का नाम और निशान एकनाथ शिंदे गुट को सौंपने के चुनाव आयोग के निर्णय के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। चुनाव आयोग के निर्णय आने के बाद उद्धव ठाकरे से अलग हुए उनके चचेरे भाई राज ठाकरे ने पार्टी के संस्थापक बाला साहब ठाकरे का एक वीडियो साझा किया है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के संस्थापक राज ठाकरे ने वीडियो को ट्वीट करते हुए कहा, “बालासाहेब द्वारा दिया गया ‘शिवसेना’ का विचार कितना सही था, आज हम एक बार फिर जानते हैं…” दरअसल इस वीडियो में बाला साहब के भाषण का एक अंश है।

बाला साहब अपने भाषण में कह रहे हैं, “पैसा आता है, जाता है। अगर पैसा चला गया तो कमा लिया जाएगा, लेकिन एक बार नाम गया तो कभी वापस नहीं आएगा। इसलिए नाम बड़ा करो। नाम ही सब कुछ है।”

राज ठाकरे को बाला साहब का असली उत्तराधिकारी माना जाता था। वे युवा अवस्था में ही शिवसेना की रैलियों में बाला साहेब के साथ जाया करते हैं। उन्होंने बाला साहेब के साथ रहकर राजनीति के दाँव-पेंच को बहुत गहराई से सीख लिया था। हालाँकि, पुत्रमोह या जो भी कारण रहा हो, बाला साहब ने उद्धव ठाकरे को शिवसेना का उत्तराधिकारी बना दिया। कुछ समय के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के रास्ते अलग हो गए।

राज ठाकरे ने बाला साहब के बयान के माध्यम से शिवसेना के उस दौर को याद किया है। शिवसेना अब महाराष्ट्र के कद्दावर ठाकरे परिवार के पास नहीं है। जिस ठाकरे परिवार ने इस पार्टी की स्थापना करके इसे राजनीति की ऊँचाई पर पहुँचाया था, उसे राजनीतिक समझ की कमी के कारण कोई दूसरा छीन ले गया।

चुनाव आयोग के इस फैसले का शिंदे गुट ने स्वागत किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया है। वहीं, शिवसेना ने इसे लोकतंत्र की हत्या कहा है। पार्टी का नाम और निशान मिलने के बाद एकनाथ शिंदे गुट जश्न मना रहा है।

वहीं, महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि बाला साहेब ठाकरे के विचारों पर चलने वाली शिवसेना का मतलब एकनाथ शिंदे। उन्होंने कहा कि अब असली शिवसेना एकनाथ शिंदे जी की शिवसेना बनी है। उन्होंने इसके लिए एकनाथ शिंदे और उनके सहयोगियों को बधाई दी।

उद्धव ठाकरे की नहीं रही शिवसेना, एकनाथ शिंदे ग्रुप को मिला पार्टी का नाम-निशान: चुनाव आयोग का फैसला

महाराष्ट्र (Maharashtra) में एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट को शिवसेना (Shiv Sena) का नाम और चुनाव चिह्न मिल गया है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार (17 फरवरी 2023) को यह फैसला देते हुए कहा कि शिवसेना (उद्धव ठाकरे) का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है। उद्धव ठाकरे गुट ने बिना चुनाव कराए अपने लोगों को अलोकतांत्रिक ढँग से पदाधिकारी नियुक्त किया।

चुनाव आयोग ने पाया कि 2018 में पार्टी के संविधान को गुपचुप रूप से संशोधित कर दिया गया और इसे चुनाव आयोग को नहीं दिया गया। चुनाव आयोग ने कहा कि इसके कारण यह पार्टी निजी जागीर जैसी हो गई।

आयोग ने कहा कि इन तरीकों को चुनाव आयोग 1999 में ही नामंजूर कर चुका था। इसके बाद बाला साहेब ठाकरे ने इसमें लोकतांत्रिक नॉर्म्स को जोड़ा था। पार्टी की ऐसी संरचना अलोकतांत्रिक होती है और भरोसा जगाने में नाकाम रहती है।

अब शिंदे गुट को शिवसेना के नाम से जाना जाएगा। इसके पहले जून 2022 में एकनाथ शिंदे के बागी हो जाने के कारण शिवसेना दो गुट- शिंदे और ठाकरे गुटों में विभाजित हो गई थी। शिंदे के साथ कुल 55 में से 40 विधायकों के आए गए थे। इसके साथ ही शिंदे गुट को 18 में से 13 सांसदों का भी समर्थन मिल गया। आयोग ने अपने फैसले में इसे भी आधार बनाया।

इसके बाद उद्धव ठाकरे की सरकार अल्पमत में आ गई थी और उन्हें महाराष्ट्र सीएम का पद छोड़ना पड़ा था। बाद में शिंदे गुट ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई और एकनाथ शिंदे खुद मुख्यमंत्री बने। शिवसेना पार्टी पर दोनों गुटों ने अपना-अपना दावा ठोका था।

फैसला आने के पहले तक शिवसेना शिंदे गुट और शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नाम से जानी जाती थी। चुनाव आयोग ने अपने फैसले में अब शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और निशान तीर-कमान इस्तेमाल करने की मंजूरी दी है।

चुनाव आयोग के इस फैसले पर उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने सवाल उठाया है। संजय राउत ने कहा है कि फिक्र की कोई बात नहीं है। जनता उद्धव ठाकरे के साथ है। उन्होंने कहा कि वह नए नाम और प्रतीक के साथ जनता के बीच जाएँगे और नई शिवसेना खड़ी करके दिखाएँगे।

अडानी मामले की खुद जाँच कराएगी सुप्रीम कोर्ट: सीलबंद लिफाफे में नाम का केंद्र का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- पारदर्शिता का है मामला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में शुक्रवार (17 फरवरी, 2023) को उद्योगपति गौतम अदानी (Gautam Adani) और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg Research) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में विशेषज्ञों की कमेटी खुद बनाएगी, ताकि पारदर्शिता रहे।

अडानी-हिंडनबर्ग विवाद पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा सीलबंद लिफाफे में सुझाए गए नामों की सूची को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने समिति की नियुक्ति से संबंधित मुद्दे पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। प्रधान न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने सरकार के सुझाव पर टिप्पणी की।

पीठ ने कहा कि वह मामले में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखना चाहती है। इसलिए सीलबंद कवर में दिए गए सुझाव को स्वीकार नहीं किया सकता। कोर्ट का कहना है कि यदि इन सुझावों को स्वीकार किया गया तो लोग यह समझेंगे कि समिति कोर्ट द्वारा नहीं, बल्कि सरकार द्वारा गठित की गई है। इसलिए समिति कोर्ट द्वारा गठित की जाएगी।

इसके पहले कोर्ट में सेबी (SEBI) की तरफ से कहा गया था, “हम चाहते हैं कि मामले में सच बाहर आए और बाजार पर इसका असर भी न हो।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की निगरानी किसी वर्तमान जज को नहीं दिया सकता। सकते। इस मामले में वकील मनोहरलाल शर्मा, विशाल तिवारी, कॉन्ग्रेस नेता जया ठाकुर और अनामिका जायसवाल ने अलग-अलग चार जनहित याचिकाएँ दायर की हैं।

मनोहरलाल शर्मा ने अपनी याचिका में हिंडनबर्ग रिसर्च के संस्थापक नाथन एंडरसन और भारत में उनके सहयोगियों के खिलाफ जाँच और प्राथमिकी दर्ज कराने की माँग की है। एडवोकेट विशाल तिवारी ने शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा हिंडनबर्ग रिपोर्ट की जाँच की माँग की है। वहीं, जया ठाकुर ने अडानी समूह की कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने, एलआईसी व एसबीआई के निवेश की जाँच कराने की माँग की है।

गौरतलब है कि अमेरिकी शॉर्ट-सेलिंग फर्म हिंडनबर्ग रिपोर्ट की अदानी ग्रुप के खिलाफ कई आरोप लगाए जाने के बाद ग्रुप के शेयरों में काफी गिरावट आई है। अडानी ग्रुप ने रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है।

पलामू के पांकी में जहाँ हुई पत्थरबाजी वहाँ की मस्जिद पर 36 लाउडस्पीकर, शहीद भगत सिंह चौक को ‘मस्जिद चौक’ बताकर करते हैं प्रचारित

झारखंड के पलामू स्थित पांकी बाजार में तोरणद्वार लगाने को लेकर हुई हिंसा के मामले में ऑपइंडिया को ग्राउंड रिपोर्टिंग में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि हिंसा की तैयारी बहुत पहले से की जा रही थी और महाशिवरात्री को लेकर बनाया जा रहा तोरणद्वार के रूप में एक बहाना मिल गया।

लोगों का कहना है कि मस्जिद, जिसे स्थानीय मुस्लिम जामा मस्जिद कहते हैं, से लगभग 200 मीटर की दूरी पर एक प्राचीन हनुमान मंदिर है। यहाँ हर मंगलवार को आरती होती थी। इसकी महिमा को सुनकर लोगों की भीड़ बढ़ती गई। एक समय ऐसा भी आया कि मंगलवार को मंदिर में 200 लोग तक जुटने लगे।

आरती के दौरान लोगों तक आरती आवाज पहुँचाने के लिए मंदिर पर लाउडस्पीकर की व्यवस्था की गई। आसपास के लोग भी भक्तिभाव से भजन आदि बजाने लगे। इसके बाद से मस्जिद कमिटी के लोग इस पर आपत्ति उठाने लगे। उनका कहना था कि इससे उन्हें नमाज पढ़ने में दिक्कत होती है।

वहीं लोगों का कहना था कि उनकी सामूहिक आरती सप्ताह में एक बार होती है और नमाज दिन में पाँच बार। उन्होंने नमाज पर कभी आपत्ति नहीं उठाई तो आरती पर आपत्ति उठाने के कोई औचित्य नहीं है। हिंदुओं का कहना था कि मस्जिद पर 36 लाउडस्पीकर हैं, फिर भी नमाज में दिक्कत कैसे हो सकती है।

हालाँकि, हिंदुओं के आग्रह को मस्जिद कमिटी के लोग नहीं माने और एनामुल, महबूब आदि थाने में लगातार शिकायत देते रहे। इतना ही नहीं, नमाज के वक्त लाउडस्पीकर का वॉल्युम भी फुल कर दिया जाता था। इससे लोगों को कई तरह की परेशानी होने लगी। नाम नहीं बताने की शर्त पर एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि नमाज की आवाज के कारण दुकान में कस्टमर से बात करना मुश्किल हो जाता था। इधर शिकायत और दबाव के बाद पुलिस हिंदुओं को थाने बुलाने लगी।

इसी बात पर आगे चलकर मस्जिद कमिटी के लोगों द्वारा हिंसा को अंजाम दिया गया। हिंसा के लिए हारुन नाम के व्यक्ति के टैक्टर से हिंसा से एक दिन पहले ईंट-पत्थर जुटाए गए थे और उन्हें घरों और मस्जिद की छतों पर रखा गया था। हिंसा के दिन इन्हीं छतों से पथराव किया था।

लोगों का कहना है कि आसपास का सवर्णों का इलाका नहीं है, इसलिए मुस्लिम लगातार वहाँ के हिंदुओं को प्रताड़ित और परेशान करते रहते हैं। हिंदुओं के त्योहारों से लेकर उनकी शादी-ब्याहों में खलल डालते रहते हैं। इस कारण वहाँ के हिंदुओं को डर के साए में जीना पड़ता है।

लोगों का यहाँ तक कहना है कि जिस चौराहे पर मस्जिद बनी है, उसे कट्टरपंथी जबरन मस्जिद चौक करना चाहते हैं। इस नाम को वे लगातार प्रसारित करते हैं। लोगों का कहना है कि इस चौक का नाम शहीद भगत सिंह चौक है और यहाँ भगत सिंह प्रतिमा भी लगी है। इसके बावजूद मस्जिद से जुड़े मुस्लिम इसका नाम बदलने में लगे हैं।

पांकी के हिंदुओं का हालात ये है कि वे अपना नाम तक डर से सार्वजनिक करना नहीं चाहते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति ने बताया कि इस मस्जिद में संदिग्ध लोगों का आना-जाना लगा रहता है। मस्जिद में मदरसा भी है और यहाँ मुस्लिम बच्चे पढ़ते हैं। यहाँ आने वाले संदिग्ध लोगों स्थानीय मुस्लिमों को कट्टरपंथी बना रहे हैं।

एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने ऑपइंडिया को बताया कि लगभग एक साल पहले केरल से एक मुस्लिम यहाँ मस्जिद के मदरसे में आकर रहता था। उसकी गतिविधियाँ संदिग्ध थी। इसकी सूचना लोगों ने पुलिस को दी और पुलिस उस मौलवी को गिरफ्तार करके ले गई। लोगों का कहना है कि वह कट्टरपंथी बनने की ट्रेनिंग दे रहा था।

बता दें कि पांकी हिंसा में एक और बाहरी मुस्लिम को गिरफ्तार किया गया है। दंगों में शामिल रजीउल्लाह को पुलिस छत्तीसगढ़ के बलरामपुर का रहना वाला है। स्थानीय हिंदुओं को शक है कि रजीउल्लाह भी कट्टरपंथी हो सकता है, जो मदरसा के छात्रों को कट्टरपंथी बनाने की कोशिश कर रहा होगा।

पांकी बाजार में घटी घटना को कमलेश सिंह ने गज़वा-ए-हिन्द का ट्रायल बताया। उन्होंने कहा कि कट्टरपंथी पूरे देश में अपनी ताकत को तौल रहे हैं और जहाँ कमी-अधिकता है, उसकी तैयारी कर रहे हैं। भाजपा नेत्री मंजूलता दुबे ने बताया कि मस्जिद से आए दिन हिन्दुओं के कार्यक्रम में खलल डाला जाता रहा है। 

एलन मस्क ने बंद किया ट्विटर का दिल्ली-मुंबई ऑफिस: रिपोर्ट में बताया- भारतीय टीम में बचे अब केवल 3 कर्मचारी, घर से काम करेंगे

माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर को खरीदने के बाद से एलन मस्क (Elon Musk) ने कई चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। इसी कड़ी में अब भारत में ट्विटर के दो ऑफिस बंद कर दिए गए हैं। कर्मचारियों को घर से काम (Work from Home) करने को कहा गया है। भारत में ट्विटर के दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में तीन ऑफिस हैं। इनमें दिल्ली और मुंबई के ऑफिस बंद किए गए हैं।

बेंगलुरु का ऑफिस पहले की तरह काम करता रहेगा। ध्यान रखने वाली बात यह है कि बेंगलुरु ऑफिस से जुड़े कर्मचारी सीधे अमेरिकी दफ्तर को रिपोर्ट करते हैं और वे कंपनी के इंडियन टीम के हिस्सा नहीं हैं। सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार ट्विटर की इंडियन टीम में अब केवल तीन कर्मचारी ही बचे रह गए हैं।

ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एलन मस्क ट्विटर के खर्चों को कम करने के लिए लगातार कंपनी में बदलाव कर रहे हैं। साल 2023 के अंत तक वह ट्विटर को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने पर फोकस कर रहे हैं। इसके तहत उन्होंने ना केवल बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की है, बल्कि ट्विटर के ऑफिस सर्विसेज में भी कटौती की है। इसलिए अब उन्होंने दिल्ली और मुंबई के दफ्तर को बंद करने का फैसला किया है।

CNBC ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत की टीम में अब केवल तीन कर्मचारी बचे हैं। इनमें एक कंट्री हेड हैं। एक के पास उत्तर और पूर्व तथा दूसरे के पास दक्षिण और पश्चिम की जिम्मेदारी है। ये सभी अब वर्क फ्रॉम होम पर रहेंगे। बताया जा रहा है कि भारत में तीन में से दो ऑफिस को बंद करने का फैसला 2022 के अंत में ट्विटर इंडिया में बड़े पैमाने पर की गई छंटनी का ही हिस्सा है। पिछले साल ट्विटर ने भारत में अपने 90 फीसदी यानी करीब 200 कर्मचारियों को निकाल दिया था।

गौरतलब है कि टेस्ला और स्पेसएक्स के मालिक एलन मस्क ने ट्विटर को 27 अक्टूबर 2022 को करीब 44 बिलियन डॉलर में खरीदा था। ट्विटर का माई-बाप बनते ही मस्क ने सीईओ पराग अग्रवाल (Parag Agrawal) सहित कई अधिकारियों की छुट्टी कर दी थी। साथ ही ट्वीट कर कहा था- द बर्ड इज फ्रीड (the bird is freed) यानी आजाद हुई चिड़िया। मस्क ने जिन अधिकारियों की छुट्टी की थी, उनमें अग्रवाल के अलावा CFO नेड सेगल और लीगल अफेयर-पॉलिसी हेड विजया गाड्डे शामिल थीं। इन्हें कंपनी हेडक्वार्टर से भी बाहर निकलवा दिया गया था। इसके बाद से वह बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा चुके हैं।