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कविता ने प्रेमी इरशाद के साथ मिल कर बुजुर्ग ससुर को मार डाला, ईद के लिए चाहिए था पैसा: दोस्त परवेज, नौशाद और साजिद ने दिया साथ

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के टीला मोड़ थाना क्षेत्र के पसौंडा गाँव में रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग जसवंत शर्मा की हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। जसवंत की हत्या उसकी बहू कविता ने अपने बॉयफ्रेंड इरशाद और उसके दोस्तों परवेज, नौशाद एवं साजिद के साथ मिलकर की थी। वह प्रॉपर्टी में हिस्सा नहीं मिलने से नाराज थी।

पुलिस ने रविवार (17 जुलाई 2022) को कविता और उसके प्रेमी इरशाद समेत 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने इरशाद, नौशाद और साजिद को कोयल एन्क्लेव से गिरफ्तार किया था। 

एक और आरोपित परवेज को पुलिस ने सोमवार (18 जुलाई 2022) को गोलीबारी के बाद गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परवेज ने गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते हुए पुलिस पर फायरिंग की। पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की। इस दौरान परवेज के पैर में गोली लग गई। उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इरशाद ने ईद मनाने के लिए कविता से पैसा माँगा था। इस पर कविता ने अपने पास पैसा न होने की बात कहकर उसे अपने ससुर को मारने का आइडिया दिया था।

साहिबाबाद के सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) अभिजीत आर शंकर ने कहा, “परवेज को सोमवार तड़के लोनी रोड के बंथला कैनाल कट के पास एक काले रंग की स्प्लेंडर प्लस मोटरसाइकिल पर देखा गया। जब उसे एक पुलिस चौकी पर रोका गया तो उसने गिरफ्तारी से बचने की कोशिश करते हुए गोलियाँ चलानी शुरू कर दी। अपनी जाँच में हमने पाया कि परवेज टीला मोड़ में हुई घटना के बाद मृतक के बेटे के नाम पर रजिस्टर्ड मोटरसाइकिल से फरार हो गया था।

एसपी सिटी ज्ञानेंद्र ने कहा कि जसवंत की हत्या संपत्ति के लिए की गई थी। वे जिस घर में रह रहे थे, उसकी कीमत एक करोड़ रुपए थी। घर में कई गोदाम थे जिन्हें जसवंत ने किराए पर दिया था।

‘जसवंत शर्मा की हत्या की साजिश उनकी बहू कविता ने रची थी’

पुलिस के मुताबिक कविता की शादी जसवंत शर्मा के बड़े बेटे से हुई थी। सात साल पहले उसके पति का देहांत हो गया था। वह शर्मा के दूसरे बेटे पंकज और उसके परिवार समेत अपने ससुराल के पसौदा के एक मकान में रह रही थी। एएसपी (सिटी-2) ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने कहा, “हमारी जाँच में सामने आया है कि मृतक की बड़ी बहू कविता ने अपने प्रेमी इरशाद के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी।”

कविता से पूछताछ करने पर कविता ने कबूल किया कि उसने अपने ससुर की हत्या की योजना बनाना और अपने प्रेमी इरशाद एवं परवेज की मदद से अपराध को अंजाम दिया। कविता ने पुलिस को आगे बताया कि उसके पति की मौत के बाद उसके ससुर का व्यवहार बदल गया था। वह इससे खुश नहीं थी। दो साल पहले उसकी मुलाकात एक टैक्सी ड्राइवर परवेज से हुई थी। मगर एक मामले में परवेज को जेल भेज दिया गया था। उस दौरान परवेज का मोबाइल इरशाद इस्तेमाल कर रहा था। कविता इस नंबर पर इरशाद से बात करने लगी और उसके प्यार में पड़ गई। वे 2 साल से अधिक समय से रिलेशनशिप में हैं।

जसवंत को जब कविता और इरशाद के बीच लगातार मुलाकातों के बारे में पता चला तो उन्होंने इसका विरोध किया। उसने दावा किया कि जसवंत ने उसे पैसा देने से इनकार कर दिया था और कहा था कि उसे पारिवारिक संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं मिलेगा।

पुलिस ने अपनी जाँच में पाया कि 14 जुलाई और 15 जुलाई की रात को चारों युवक परवेज, इरशाद, नौशाद और साजिद जसवंत के घर पहुँचे, जहाँ कविता ने ताला खोलकर उन्हें अंदर घुसाया। जब जसवंत ने शोर मचाया, तो उन्होंने उसे बिस्तर से बाँध दिया और उसे पीट-पीट कर मार डाला। इतना ही नहीं, इसे लूटपाट का मामला दिखाने के लिए कविता ने अन्य आरोपितों से खुद को बँधवा लिया था। इसके बाद अन्य आरोपित लूटपाट कर घटनास्थल से फरार हो गए। पुलिस के अनुसार, कविता ने शुरू में आरोप लगाया कि जब वह उठी तो उसने देखा कि उसके हाथ और पैर बँधे हुए हैं। उसने कहा कि उसे नहीं पता कि जब वह सो रही थी तब क्या हुआ।

ट्राईसिटी टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कविता के बेटे तुषार ने पुलिस को बताया कि कुछ लुटेरे घर आए थे और उसे बंदूक की नोक पर दूसरे कमरे में ले गए। उन्होंने एक लाख के जेवर चुराए और 7500 रुपए नकद ले गए। एसएसपी मुनिराज ने बताया कि तुषार ने दोपहर करीब दो बजे 112 पर फोन किया था। पुलिस जब घटना स्थल पर पहुँची तो उन्हें जसवंत का शव मिला।

पंकज ने कविता के खिलाफ दर्ज कराया केस

जब घटना हुई उस वक्त जसवंत का छोटा बेटा पंकज घर पर नहीं था। कविता ने उसे फोन किया था और जल्द से जल्द लौटने को कहा था। जब पंकज वापस आया और पूरी बात सुनने के बाद उसने कविता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई क्योंकि उसे उसके घटना में शामिल होने का संदेह था।

पंकज की शिकायत के आधार पर आरोपित के खिलाफ धारा 394 और 302 के तहत FIR दर्ज की गई थी। इसके अलावा, बाद में FIR में आईपीसी की धारा 457, 396, 120 बी, 34 और 412 को जोड़ा गया।

उसने अपनी शिकायत में कहा था कि कुछ अज्ञात लोग जबरदस्ती उसके घर में घुसे थे। उन्होंने जसवंत को बाँध दिया और बुरी तरह पीटा। पिटाई के दौरान लगी चोट के कारण जसवंत ने दम तोड़ दिया। घटना के समय कविता भी घर में मौजूद थी और उसने दावा किया कि उसके ससुर की हत्या करने वाले लोगों ने गहने और नकदी ले ली। हालाँकि, जाँच के दौरान, पुलिस ने पाया कि जबरन अंदर घुसने के कोई संकेत नहीं थे।

सिम कार्ड ने मामले को सुलझाने में पुलिस की मदद की

जाँच के दौरान पुलिस को कविता के कमरे में एक सिम कार्ड मिला। जब कविता से इस बारे में पूछा गया तो उसने इसके बारे में किसी तरह की जानकारी होने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने नंबर की कॉल डिटेल निकाली तो पाया कि घटना की रात एक नंबर पर कई बार कॉल किया गया था। इसी कॉल डिटेल हत्या में कविता की भूमिका का खुलासा हुआ।

गाजियाबाद पुलिस ने बताया कि आरोपितों के पास से चूड़ियाँ, बालियाँ, दो सोने के सिक्के, मंगलसूत्र, 5600 रुपए नकद, तीन मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। इसके अलावा पुलिस ने परवेज के पास से एक अवैध 315 बोर की पिस्तौल, जिंदा कारतूस, एक बाइक और कुछ जेवर भी बरामद किया है।

‘यहाँ पहले शाम में हिंदू ही हिंदू दिखते, अनाज-पैसा बाँटते, लेकिन अब…’: दिल्ली में निजामुद्दीन की दरगाह पर आने वाले हिंदू 60% तक हुए कम

यहाँ शाम होते ही हिंदू ही हिंदू दिखते थे। दो बजे से रात के 11 बजे तक हिंदू खूब आते थे। लेकिन अब कम आने लगे हैं। आप बाहर देखिए कोई नजर आ रहा है…

यह कहना है अली मूसा निजामी का। वे दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह के दीवान हैं। निजामी के अनुसार वे 84 साल के हैं और उन्होंने कई दौर देखे। पर ऐसा दौर नहीं देखा। उनके मुताबिक ये ‘नफरत’ अभी और बढ़ेगी। उनका दावा है कि इसी नफरत के प्रचार ने दरगाह पर आने वाले हिंदू कम कर दिए हैं।

निजामी के अनुसार निजामुद्दीन की दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या में सालभर के भीतर करीब 60 फीसदी गिरावट आई है। वे बताते हैं कि पहले यहाँ खूब हिंदू आते थे। हर रोज। दोपहर के 2 बजे से रात के 11 बजे तक दरगाह पर आने वालों में खूब हिंदू होते थे। लेकिन अब इक्का-दुक्का हिंदू ही आते रहते हैं। उन्होंने बताया कि पहले यहाँ हिंदू भंडारे भी करते थे। करीब-करीब रोज। अन्न-पैसा बाँटते थे। लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रही।

निजामुद्दीन की गली से हिंदू गायब

निजामी जो बता रहे थे वह रविवार (17 जुलाई 2022) को जब ऑपइंडिया की टीम दरगाह पर गई तो दिख भी रहा था। मुख्य सड़क से उतरकर हमने जब दरगाह का रास्ता पकड़ा तो चहल-पहल थी। पर हिंदू नजर नहीं आ रहे थे। न रास्ते में, न दरगाह के भीतर। दरगाह में करीब 2 घंटे बिताने के बाद जब हम लौट रहे थे तब भी यही हाल था।

दीवान अली मूसा के अनुसार दरगाह पर आने वाले हिंदू सालभर में 60 फीसदी कम

हमें यह बताने वाले कई मिले कि रात के 2 बजे तक यहाँ इस तरह की चहल-पहल रहती है। लेकिन, कोई यह कैमरे पर कबूल करने को तैयार नहीं था कि अजमेर की दरगाह की तरह यहाँ आने वाले भी कम हुए हैं और उसका असर रोजी-रोजगार पर भी पड़ रहा। खुद निजामी भी शुरुआत में सूफीवाद की शान में कसीदे पढ़ते हुए हमें बताते रहे कि यहाँ हर कौम के लोग आते हैं। हिंदू-मुस्लिम, सरदार भी। लेकिन सवाल दर सवाल जब वे खुलने लगे तो यह सच स्वीकार कर लिया कि दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या घटी है।

निजामी के अनुसार दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या में गिरावट अचानक नहीं हुई है। करीब सालभर से ऐसा दिख रहा है। उनका कहना है कि हिंदुओं के बीच प्रचार किया जा रहा है कि ये कब्र है। यहाँ सजदा करने से कुछ नहीं होता। मंदिर जाओ (अपनी बात को वजनदार बनाने के लिए वे किसी दुबे जी का हवाला देते हैं। जो उनके अनुसार अमेरिका में रहते हैं। उनके मित्र हैं। दरगाह पर आते रहते हैं। ​दीवान के अनुसार उन्हें दुबे जी ने भी इस तरह के प्रचार की बातें बताई थी)।

कभी शाम होते ही दरगाह परिसर में हिंदू ही हिंदू आते थे नजर

निजामी आगे बताते हैं कि हिंदू भाई अच्छे लोग हैं, लेकिन ये जो प्रचार चल रहा वह उनमें नफरत पैदा कर रहा है। जब हमने उनसे नूपुर शर्मा को लेकर हुए हालिया विवाद, उदयपुर में कन्हैया लाल की निर्मम हत्या, अजमेर दरगाह से जुड़े लोगों की भड़काऊ बयानबाजी के असर को लेकर सवाल किया तो उनका कहना था कि ये सब होता रहता है। हमेशा मजहब को लड़ाने में लोग लगे रहते हैं। लेकिन, ये दरगाह अमन का पैगाम देता है। मोहब्बत का पैगाम देता है। इन जगहों पर हिंदुओं का आना इसलिए कम हुआ है कि काफी समय से उनके बीच नफरत का प्रचार हो रहा। दरगाह के रास्ते में ही तबलीगी जमात का वह​ मरकज है जो कोरोना काल में कुख्यात हुआ था। उस घटना के असर को भी निजामी नकार देते हैं। वे कहते हैं कि उसका असर नहीं है। मरकज में केवल मुस्लिम आते हैं। ये हर कौम के लोगों की जगह है। लेकिन, इसका भी गलत तरीके से प्रचार हो रहा है।

हमने निजामी से पूछा कि जब कभी यहाँ हिंदू इतनी तादाद में आते थे तो क्या दरगाह वाली गली में उनकी भी दुकानें हैं? क्या वे दुकानें आज भी चल रही हैं? हँसते हुए निजामी ने हमारे सवाल का जवाब तो नहीं दिया, लेकिन ये बताया- मेरा नौकर हिंदू है। यहाँ सेवा करने वाले कई हिंदू हैं।

ज़ुबैर की याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, यूपी में दर्ज 6 FIR रद्द कराने पहुँचा था: बोली वकील- एक में बेल मिलते दूसरे में हो जाता है गिरफ्तार

ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने सुप्रीम कोर्ट में अपने खिलाफ उत्तर प्रदेश में में दायर 6 एफआईआर को रद्द करने की अपील की है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वह उस बेंच से तारीख माँगे जो पहले से ही इससे जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।

लॉ बीट की रिपोर्ट के अनुसार, CJI एनवी रमना ने AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा दायर याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है, जिसमें यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की गई 6 प्राथमिकी को रद्द करने के लिए निर्देश देने की माँग की गई है। वहीं एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने कहा कि एक में जमानत मिलते ही उन्हें दूसरे में गिरफ्तार कर लिया जाता है।

पीठ ने वकील से कहा है कि वह मामले को उस पीठ के समक्ष रखें जहाँ इसी तरह के अन्य मामले सूचीबद्ध हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसी तरह के केस पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच सुनवाई कर रही है।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जुबैर को आपत्तिजनक ट्वीट ‘हनुमान होटल’ के मामले में जमानत दे दी थी। अदालत ने जुबैर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपए मूल्य के जमानती के आधार पर बेल मंजूर की थी। इससे पहले जुबैर को यूपी के सीतापुर मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी। कोर्ट ने कहा था, “यह जमानत सशर्त दी जा रही है, याचिकाकर्ता कोई भी ट्वीट नहीं करेगा और ना ही दिल्ली छोड़ेगा। बाकी की अन्य शर्तें सीतापुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट तय करेगा।” हालाँकि इसके बाद भी मोहम्मद ज़ुबैर की रिहाई नहीं हो पाएगी क्योंकि उन पर यूपी में कई मामलों में केस दर्ज है।

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को पिछले महीने दिल्ली पुलिस ने एक पुराने ट्वीट के आधार पर गिरफ्तार कर लिया था, उनपर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप था। वहीं जुबैर के खिलाफ यूपी में 6 एफआईआर दर्ज हैं। दो केस हाथरस, एक-एक केस गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में दर्ज किया गया है।

वहीं लखीमपुर खीरी मामले में कोर्ट ने शनिवार (16 जुलाई, 2022) को जुबैर की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। उनके खिलाफ 18 सितंबर 2021 में केस दर्ज किया गया था। जुबैर के खिलाफ यह केस सुदर्शन न्यूज चैनल को लेकर फैक्ट चेक ट्वीट को लेकर किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जुबैर ने लोगों को सुदर्शन चैनल के वीडियो के जरिए गुमराह करने की कोशिश की है। इस मामले में जुबैर को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

जबकि हाथरस पुलिस ने पिछले हफ्ते जुबैर की रिमांड के लिए चीफ ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने याचिका दायर की थी। दिल्ली कोर्ट ने जुबैर से कहा है कि वह इस मामले में पूछताछ के लिए पेश हो, जब उनसे पेश होने के लिए कहा जाए, साथ ही वह बिना इजाजत दिल्ली छोड़कर बाहर ना जाए। कोर्ट ने कहा कि केस के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपित से हिरासत में पूछताछ की कोई जरूरत नहीं है, लिहाजा आरोपित को जमानत दी जाती है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने बीते माह 27 जून को मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने, सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153/295 के तहत केस दर्ज किया था।

‘संजय राउत हाजिर हों’: मानहानि मामले में बढ़ी शिवसेना प्रवक्ता की मुश्किलें, अदालत का आदेश – पेश होकर बताएँ दोषी हैं या नहीं

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने शिवसेना प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत को 6 अगस्त को अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया है। उनके खिलाफ भाजपा नेता किरीट सोमैया की पत्नी ने मानहानि का मामला दर्ज कराया था। अब अदालत ने आदेश दिया है कि शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर 6 अगस्त, 2022 को कोर्ट में पेश होकर अपनी दलीलें रखें। उन्हें उपस्थित होकर अदालत को ये बताना होगा कि वो अपना दोष मानते हैं या नहीं, या फिर खुद को निर्दोष बताते हैं।

अगर संजय राउत खुद अपना दोष स्वीकार कर लेते हैं, इसके बाद अदालत पेनल्टी पर निर्णय लेगी। अगर वो खुद को निर्दोष बताते हैं तो इस मामले की सुनवाई आगे कैसे चलेगी, इस पर मजिस्ट्रेट निर्णय लेंगे। बता दें कि शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के मुख्यमंत्री बनने और उद्धव ठाकरे के पद छोड़ने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में काफी उथल-पुथल चल रही है। अब संजय राउत कह रहे हैं कि उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे एक हो जाते हैं तो शिवसेना के लिए ये एक नया सवेरा होगा और इसकी छवि भी अच्छी होगी।

हालाँकि, अभी भी संजय राउत केंद्र सरकार के खिलाफ ही खुन्नस पाल बैठे हैं। उन्होंने ‘सामना’ के एक लेख के जरिए आरोप लगाया कि केंद्र ने इसीलिए शिवसेना में टूट की साजिश रची, क्योंकि उसे डर था कि भविष्य में उद्धव ठाकरे राष्ट्रीय नेता बन कर उभर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि राजनीति में कुछ भी प्राकृतिक या अप्राकृतिक नहीं होता, क्योंकि भाजपा और अजीत पवार का गठबंधन भी अगर चल जाता तो क्या इस पर सवाल उठाए जाते?

जहाँ तक मानहानि वाले मामले की बात है, संजय राउत के खिलाफ जुलाई में जारी वॉरंट उनकी पेशी के बाद रद्द कर दिया गया था। याद हो कि संजय राउत ने किरीट सोमैया पर 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाले का आरोप लगाया था, जिसके बाद अब सोमैया की पत्नी मेधा किरीट सोमैया ने मई 2022 में राउत के खिलाफ शिवड़ी सेशन कोर्ट में मानहानि की याचिका दायर की थी। अब इस मामले में उनकी मुश्किलें और बढ़ रही हैं।

महिला श्रद्धालुओं से छेड़खानी, पुलिस के सामने कटते हैं पशु: मुस्लिम बहुल इलाके के महंत का दर्द – CM योगी के आने पर ढक दिया जाता है अतिक्रमण

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में हरिद्वार रोड पर हापुड़ चुंगी के पास हिंडन विहार में एक मंदिर है, जिसका नाम ‘शिव मंदिर बालाजी धाम’ है। इस मंदिर के महंत मच्छेंद्र पुरी हैं। यह मंदिर महानिर्वाणी अखाड़े से सम्बंधित है। मंदिर कांवड़ यात्रा के मार्ग में लगभग 150 मीटर अंदर पड़ता है। हमारी नजर इस मंदिर पर गई तो हमने इसके महंत मछेन्द्र पुरी से 14 जुलाई, 2022 (गुरुवार) को मुलाकात की। उन्होंने बताया कि उस स्थान पर मुस्लिम आबादी अधिक होने के चलते उन्हें और वहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को कई समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है।

महिला श्रद्धालुओं के साथ होती है छेड़खानी

महंत मछेन्द्र पुरी ने ऑपइंडिया को बताया, “हमारे यहाँ हिन्दू आबादी न के बराबर होने के चलते मंदिर में दान और अन्य धार्मिक सहयोग काफी कम हो गया है। मंगलवार को परम्परा के मुताबिक यहाँ बाहर से कुछ स्त्री-पुरुष पूजा-पाठ के लिए आते हैं। लेकिन उसमें कई बार महिला श्रद्धालुओं के साथ यहाँ के स्थानीय मुस्लिम अभद्रता करते हैं। हमने इसकी कई बार पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस आती है और उसके जाते ही फिर वही हालत हो जाते हैं। इस से यहाँ लोगों का आवागमन काफी कम हो गया है। जबकि इसी छोटे से क्षेत्र में 7-8 मस्जिदें हैं जिसमें बिलाल मस्जिद मुख्य है।”

24 जून 2022 को अरबाज नाम के आरोपित पर केस भी दर्ज हुआ था।

FIR Copy

बकरीद पर खुलेआम कटे गए बकरे

महंत मछेन्द्र पुरी ने आगे बताया, “मंदिर से कुछ ही दूर पर नूर ए इलाही मस्जिद के पास बकरीद में खुलेआम बकरे काटे गए थे जबकि CM योगी का आदेश था कि खुले में कुर्बानी नहीं होगी। कुर्बानी वाली जगह पर पुलिस मौजूद थी लेकिन उसने किसी को नहीं रोका। हमने एक वीडियो भी प्रशासन को टैग करते हुए ट्वीट करवाया था जिसमें एक कुत्ता बकरे का कटा सिर मुँह में लिए घूम रहा था लेकिन उस पर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया।”

10 जुलाई को वीडियो के साथ हुआ ट्वीट:

क्षेत्र में होते हैं तमाम अवैध काम

हिंडन विहार का जिक्र करते हुए महंत मछेन्द्र पुरी ने कहा, “इस क्षेत्र में अधिकतर घर सरकारी जमीनों पर बसे हुए हैं। यहाँ तमाम प्रकार के अवैध काम होते हैं जो प्रशासन की जानकारी में हैं। किसी भी ब्रांड की कवर पॉलीथिन यहाँ मिल जाएगी। इसके अलावा जुआ और सट्टा भी यहाँ होता है। जब मैंने शुरू में इसका विरोध किया था तब एक महिला को भी मेरे खिलाफ चारित्रिक आरोप लगाने के लिए पैसे दे कर तैयार किया गया था। ईश्वर की दया से उस दिन मैं बाहर था और लांछन से बच गया। अब मैंने हर तरफ CCTV लगवा दिए हैं।”

हिंडन विहार में होने वाले तमाम अवैध कामों और श्रद्धालुओं से बदतमीजी के चलते महंत मछेन्द्र पुरी 9 जून 2022 को आत्मदाह की धमकी भी दे चुके हैं।

मोदी-योगी के दौरे पर ढक दिए जाते हैं अवैध अतिक्रमण

महंत ने आगे बताया, “सड़क के मुख्य मार्ग पर ग्रीन बेल्ट है जो सरकारी की जमीन है। उस पर न जाने कहाँ के मुस्लिमों ने डेरा डाल दिया है। उसमें से एक महिला कुछ समय पहले देह व्यापार भी करवाती पकड़ी गई थी। जब उस अवैध कब्ज़े के ठीक बगल से गुजरी मेट्रो का उद्घाटन करने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी एक साथ आए थे तब प्रशासन ने तिरपाल रख कर मुस्लिमों की उस अवैध बस्ती को ढक दिया था जिस से किसी की नजर न पड़े। जब क्षेत्र में बने अवैध निर्माण को हटाने की माँग की जाती है तब प्रशासन वाले एक हिन्दू के घर के आगे बुलडोजर ले कर पहुँच जाते हैं। तस्लीम नाम के व्यक्ति ने यहाँ कई सरकारी जमीनों पर अवैध इमारतें खड़ी की हैं लेकिन उसको टोकने वाला कोई नहीं।”

मुख्य सड़क से सटी और मेट्रो लाइन के बगल में बनी अवैध झुग्गियाँ

IPS सलमान ताज पाटिल ने हटा ली थी सुरक्षा

महंत मछेन्द्र पुरी का मंदिर नंदग्राम थानक्षेत्र में आता है। महंत ने आगे बताया, “भले ही सुरक्षा के लिए मंदिर में सिपाही तैनात किया गया है लेकिन यहाँ पर तो कई घटनाएँ पुलिस पर भी हाथ उठा देने की हुई हैं। तब हम लोगों ने जा कर वर्दी वालों को बचाया था। अखिलेश यादव की सरकार में यहाँ पर पोस्टेड एक पुलिस अधिकारी सलमान ताज पाटिल ने तो हमारे मंदिर की सुरक्षा भी हटा ली थी।”

मंदिर और वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मी

हम पर ही बनाया जाता है दबाव

महंत मछेन्द्र पुरी ने आगे कहा, “मात्र 20 साल पहले यहाँ 98% हिन्दू थे जो अब पलायन कर गए हैं। मैं यहाँ से चला गया तो इस कॉलोनी के बचे लगभग 2% हिन्दू भी यहाँ से चले जाएँगे। इसलिए मैं न सिर्फ कट्टरपंथियों बल्कि भू माफियाओं की आँखों में भी खटकता हूँ। मैं आर्थिक रूप से कमजोर हूँ इसलिए मैं किसी को पैसे नहीं दे पाता। कई बार मुझ पर ही दबाव बनाया जाता है और प्रशासन के कुछ अधिकारियों ने मुझे ही कई बार गलत ठहरा दिया। मैंने सुना है कि अबकी किसी बवाल में मेरी हत्या की भी साजिश रची गई है लेकिन मैं अपना काम जारी रखूँगा।”

बचे ग्रीन बेल्ट को बचाए रखने के लिए महंत ने लगाए राष्ट्रध्वज

ऑपइंडिया ने इस पूरे मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए गाजियाबाद के SSP मुनिराज को सम्पर्क किया तो फोन उनके जनसम्पर्क अधिकारी (PRO) ने उठाया। उन्होंने बताया, “सर अभी काफी व्यस्त हैं और भीड़ बहुत है। अभी उनका वर्जन नहीं मिल पाएगा।” पुलिस का वर्जन आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

4800 वोटर, 1086431 वोट: राष्ट्रपति चुनने के लिए हो रहा मतदान, यशवंत सिन्हा पर भारी है द्रौपदी मुर्मू का गणित

देश के 15वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए सोमवार (18 जुलाई 2022) को मतदान शुरू हो चुका है। वोटिंग शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। चुनाव में NDA की तरफ से द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) तो पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) विपक्ष से साझा उम्मीदवार हैं। देश भर के करीब 4,800 विधायक और सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालेंगे।

वोटों के गणित में पक्ष और विपक्ष के बीच बने बड़े फासले को देखते हुए राजग (NDA) उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का देश की अगली राष्ट्रपति चुना जाना तय माना जा रहा है। अगर द्रौपदी मुर्मू जीतती हैं तो वह देश के शीर्ष संवैधानिक पद पर पहुँचने वाली पहली आदिवासी महिला होंगी।

मुर्मू को सत्ताधारी गठबंधन के अलावा बीजद, वाईएसआर कॉन्ग्रेस, अकाली दल ही नहीं विपक्षी खेमे के कई दलों जैसे जेडीएस, झामुमो, शिवसेना और तेदेपा का समर्थन भी मिला है। इससे साफ है कि द्रौपदी मुर्मू को करीब दो तिहाई मत मिलने की संभावना है। जबकि विपक्ष के साझा उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।

बताया जा रहा है कि मुर्मू की वोट हिस्सेदारी 60 प्रतिशत से ज्यादा हो सकती है। राजग की उम्मीदवार के पास अब कुल 10,86,431 मतों में से 6.67 लाख से अधिक वोट हैं। इनमें 3.08 लाख वोट सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के हैं। बीजू जनता दल के करीब 32,000 वोट हैं, जो कुल मतों का करीब 2.9 प्रतिशत है। लोकसभा में बीजद के 12 और राज्यसभा में 9 सदस्य हैं। मुर्मू को अन्नाद्रमुक (17,200 वोट), वाईएसआर-कॉन्ग्रेस पार्टी (करीब 44,000 वोट), तेलुगु देशम पार्टी (करीब 6,500 वोट), शिवसेना (25,000 वोट) और जनता दल (सेक्युलर) (करीब 5,600 वोट) का भी समर्थन मिल रहा है।

हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के परिणाम के बाद उच्च सदन में भाजपा सदस्यों की संख्या 92 हो गई है। लोकसभा में उसके कुल 301 सदस्य हैं। उत्तर प्रदेश के प्रत्येक विधायक का राष्ट्रपति चुनाव में वोट वैल्यू अन्य किसी राज्य के विधायक से अधिक है। प्रदेश के 403 विधायकों में से प्रत्येक का वोट वैल्यू 208 है, यानी उनका कुल वैल्यू 83,824 है। तमिलनाडु और झारखंड के प्रत्येक विधायक का वोट वैल्यू 176 है। इसके बाद महाराष्ट्र का 175, बिहार का 173 और आंध्र प्रदेश के हरेक विधायक का वोट वैल्यू 159 है। सिक्किम के एक विधायक के वोट का वैल्यू केवल 7 है, जो पूरे देश में सबसे कम है।

सभी निर्वाचित विधायकों के वोटों की कुल वैल्यू (5,43,231) में अगर कुल सांसदों की संख्या (776) का भाग दें तो एक सांसद के वोट की वैल्यू 700 निकलती है। इस तरह सांसदों की कुल वोट वैल्यू 700×776 यानी 5,43,200 होगी। विधायकों और सांसदों के कुल वोट को मिलाकर ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ कहा जाता है। यह संख्या 10,86,431 है। इस तरह जीत के लिए आधे से एक वोट ज्यादा की जरूरत होती है।

राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे गुरुवार (21 जुलाई 2022) को आएँगे। वोटों की गिनती के बाद देश के नए राष्ट्रपति के निर्वाचन की घोषणा कर दी जाएगी। वर्तमान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा।

बाबा बिरयानी वाले मुख्तार के बेटे उमर ने बुलाए थे कानपुर हिंसा के लिए हथियारों से लैस गुंडे, बिल्डर वसी के साथ रची पूरी प्लानिंग: रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश (UP) के कानपुर में 3 जून, 2022 को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मामले में एक नया खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक हिंसा की शुरुआत बेकनगंज से न होकर पेंचबाग़ से हुई थी। बाबा बिरयानी वाले मुख़्तार और बिल्डर हाजी वसी ने पूरी हिंसा की प्लानिंग की थी। हयात जफर और डीटू गैंग को इनसे ही निर्देश मिल रहे थे। हिंसा के बाद मुख़्तार और वसी गायब हो गए थे।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक यह खुलासा कोर्ट में इंस्पेक्टर जैनेन्द्र सिंह तोमर द्वारा पेश की गई केस डायरी से हुआ है। जैनेन्द्र सिंह तोमर फ़िलहाल चमनगंज थाने के SHO हैं। केस डायरी के मुताबिक पहले पेंचबाग़ में पथराव हुआ जो बाद में नई सड़क और दादामियां चौराहे तक फ़ैल गया। बाबा बिरयानी का मालिक मुख्तार बाबा और बिल्डर मोहम्मद वसी हिंसक भीड़ के पीछे से हालात पर नजर रखे हुए थे। इन्ही के इशारे पर हयात जफ़र ने पुलिस को शांति का झूठा आश्वासन दिया था।

केस डायरी में बताया गया है कि हयात जफ़र के साथ इस पूरी साजिश में मोहम्मद सूफियान, इखलाक, निजाम, मोहम्मद राहिल और मोहम्मद जावेद शामिल थे। पथराव का स्थान और समय सब पहले से ही तय था। मुख़्तार के बेटे उमर ने हिंसा को भड़काने के लिए भाड़े के गुंडे बुलाए थे। ये गुंडे हथियारों से लैस थे जिन्होंने न सिर्फ पत्थर फेंके, बल्कि पेट्रोल बम का भी इस्तेमाल किया। हिंसक भीड़ को अफजाल, बशीर और बाबर लीड कर रहे थे। अफ़ज़ाल की भूमिका गुंडों को बुलाने में भी थी।

ध्वस्त होंगी बिल्डर वसी की अवैध इमारतें

उधर कानपुर प्रशासन हिंसा के मास्टरमाइंड हाजी वसी की अवैध इमारतें गिराने की तैयारी कर रहा है। हालाँकि प्रशासन ने इस अभियान की तारीख का खुलासा नहीं किया है। कानपुर विकास प्राधिकरण के मुताबिक वसी की 16 अवैध इमारतों को गिराया जाएगा, जिसमें 10 दुकानें हैं। इन इमारतों में 5 और 7 मंजिला तक के मकान भी हैं। हाजी वसी के साथ उसके बेटे हमजा और सहयोगी आदिल को भी इस बावत प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया गया है।

36 साल का सबसे भयंकर बाढ़ लेकर आई गोदावारी, तेलंगाना के CM ने बताया ‘विदेशी साजिश’: बोले BJP सांसद- KCR खुद साजिशकर्ता

देश में एक के बाद एक कई सारी बादल फटने की घटनाएँ सामने आने के बाद तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने बड़ा अटपटा बयान दिया है। उन्होंने गोदावरी बेसिन में 36 साल बाद आई भयंकर बाढ़ का दौरा करने के बाद इन प्राकृतिक आपदाओं को ‘विदेशी साजिश’ बताया है।

लगातार बादल फटने की घटनाओं पर बोलते हुए तेलंगाना सीएम ने कहा, “देश के कुछ हिस्सों में बादल फटने के पीछे दूसरे देशों की साजिश हो सकती है। हमें नहीं पता कि इसमें कितनी सच्चाई है। पहले लेह, फिर उत्तराखंड में बादल फटे थे और अब गोदावरी के पास से ऐसी खबरें आ रही हैं।”

अधिकारियों से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी लेने के बाद केसीआर ने कहा, “मौजूदा स्थिति लगातार हो रही बारिश का नतीजा है। मौसम विभाग और कुछ प्राइवेट अनुमान लगाने वालों के मुताबिक यह स्थिति (भारी बारिश) 29 जुलाई तक जारी रह सकती है। इसलिए खतरा अभी टला नहीं है।”

केसीआर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राहत कैंप से लोगों को वापस न भेजें। उनका ख्याल रखना है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता के रूप में 10,000 रुपए देने की घोषणा की।

केसीआर के बादल फटने वाले बयान को बीजेपी ने ‘सदी का सबसे बड़ा मजाक’ बताया है। तेलंगाना बीजेपी के अध्यक्ष और करीमनगर से सांसद बंदी संजय कुमार ने कहा कि अपनी नाकामयाबी छिपाने के लिए केसीआर ड्रामा कर रहे हैं। तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष ने आगे केसीआर पर आरोप लगाते हुए कहा कि सीएम लोगों का ध्यान कालेश्वरम परियोजना के ‘डूबने’ से हटाने की कोशिश कर रहे हैं और एक विदेशी साजिश की बात कह रहे हैं। 

उन्होंने कहा, “गोदावरी में बाढ़ कोई नई बात नहीं है। यह पहले भी हुआ है और भविष्य में भी होगा, लेकिन इसे जानबूझकर विदेशी और मानवीय हाथ के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना हास्यास्पद है और सरकार की विफलताओं को कवर करने के लिए उनका एक और ड्रामा है।”

बीजेपी सांसद ने कहा कि केसीआर खुद एक ‘साजिशकर्ता’ हैं, जो खुद के ‘इंजीनियरिंग एक्सपर्ट’ होने का दावा करते हैं, लेकिन कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना की बाढ़ और जल निकायों के बाँधों के बह जाने से उनके दावे का खोखलापन उजागर हो गया।

करीमनगर के सांसद ने बाढ़ को रोकने के लिए टीआरएस सरकार के उपायों पर सवाल उठाया और प्रशासन पर उदासीनता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री को लोगों को प्रभावितों के राहत और पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों के बारे में बताना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक परिवार को ₹10,000 का मुआवजा अपर्याप्त है।”

संजय कुमार ने कहा कि सभी को उम्मीद थी कि सीएम बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए एक पूर्ण वित्तीय पैकेज की घोषणा करेंगे, जिसमें कृषि और संपत्ति के कुल नुकसान का विवरण दिया जाएगा, लेकिन उनकी यात्रा खोखली निकली। उन्होंने पिछले आठ वर्षों में गोदावरी में बाँध को मजबूत करने के बारे में कुछ भी नहीं सोचा।

वहीं तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पार्टी के सांसद एक रेवती ने भी तंज कसते हुए कहा कि अगर केसीआर के पास बादल फटने के पीछे विदेशी साजिश की सूचना है तो उसे इंटेलिजेंस ब्यूरो, रॉ और केंद्र सरकार को देनी चाहिए। यह मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है।

तेलंगाना के कई इलाकों में पानी का प्रकोप

गौरतलब है कि करीब एक हफ्ते से लगातार हो रही बारिश से तेलंगाना के कई इलाकों में पानी भर गया है। मंदिरों के शहर भद्राचलम में जल स्तर 70 फीट तक पहुँच गया था, जो तीसरी और अंतिम बाढ़ चेतावनी से काफी ऊपर था। यह 53 फीट पर दी गई थी। अब यह स्तर घटकर 60 फीट पर आ गया है। 

सावन में प्रगट हुए शिव शंभू: सरयू नदी से निकला 53 किलो का चांदी शिवलिंग, देखने जुटी हजारों की भीड़, लगे- ‘हर-हर महादेव के नारे’

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में सरयू नदी पुल के नीचे से एक भारी भरकम शिवलिंग मिलने की खबर आ रही है। लोग सावन में मिले इस शिवलिंग को देख मान रहे हैं कि स्वयं शिव उन्हें दर्शन देने आए हैं। फिलहाल पुलिस ने इसे अपने कब्जे में लिया हुआ है। लेकिन जाँच के बाद यह स्थानीयों को लौटा दिया जाएगा।

सरयू नदी शिवलिंग
सरयू नदी से निकला शिवलिंग (तस्वीर साभार: पंजाब केसरी)

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि शनिवार (16 जुलाई 2022) को 11 बजे राममिलन साहनी नाम का युवक मातेश्वरी घाट के समीप स्नान करने सरयू नदी पर गया था। वहीं उसे कुछ ठोस पदार्थ दिखा। जब उसने नदी के पास जमे बालू में खुदाई की तो अंदर से डेढ़ फुट लंबा और 1 फुट चौड़ा चांदी का शिवलिंग निकला। सूचना मिलते ही हजारों ग्रामीण शिवदर्शन के लिए इकट्ठा होते गए और जोर-जोर से हर-हर महादेव के नारे लगे।

इसके बाद रामचंद्र निषाद की 14 वर्षीय पुत्री द्वारा इस शिवलिंग की पूजा-अर्चना करवाई गई। फिर इसे मेला राम बाबा मंदिर के बगल में शिव मंदिर में रखा गया। यहाँ शिवलिंग का ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ अभिषेक किया

जब पुलिस को इस तरह नदी के पास से शिवलिंग मिलने का पता चला तो वह शिवलिंग लेकर थाने आ गए। शिवलिंग मिलने की जानकारी देते हुए एसपी मऊ अविनाश पांडे ने बताया कि घाघरा नदी में किसी ने कुछ चमकती चीज देखी। जब इसे निकाला तो पता चला कि ये शिवलिंग है। इसे मलखाना के थाने में सम्मान के साथ रखा गया है। साथ ही जाँच एजेंसियों को सूचना दे दी गई है। जैसे ही पड़ताल पूरी होगी इसे लोगों को वापस कर दिया जाएगा।

बता दें कि कुछ लोग इस शिवलिंग का वजन 30 किलो कह रहे हैं जबकि अधिकांश मीडिया रिपोर्ट दावा कर रही हैं कि ये शिवलिंग 53 किलो का है। सोशल मीडिया पर ये खबर आने के बाद लोगों में शिव के प्रति श्रद्धा और बढ़ गई है। लोग हैरान हैं कि सरयू नदी से निकली दमकती चीज वाकई शिवलिंग ही है। यूजर्स इसे देख कह रहे हैं कि लग रहा है कि अब कलयुग का अंत होने वाला है क्योंकि स्वयं बाबा ने दर्शन दे दिए हैं।

‘बायकॉट इंडिया, इंडिया खत्म हो जाएगा…’: 2023 में जिहाद के लिए बना रखे थे स्लीपर सेल, क्रॉस निशान लगा बदल दिया था तिरंगे का रंग

2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिशों का पर्दाफाश होने के बाद बि​हार पुलिस ने मारगुव/मरगूब अहमद दानिश उर्फ ​​ताहिर को गिरफ्तार किया था। वह 2023 में जेहाद छेड़ने की साजिशों में लगा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए उसने कई व्हाट्सएप ग्रुप और स्लीपर सेल बना रखे थे। वह सोशल मीडिया में लगातार भड़काऊ पोस्ट करता था।

मरगूब ने गजवा-ए- हिंद नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था। इसके जरिए युवाओं को भड़काया जाता था। देश के खिलाफ नफरत पैदा की जाती थी। हिंदुओं को टारगेट करने का पाठ पढ़ाया जाता था। उसने अपनी स्लीपर सेल में भी कई युवाओं की भर्ती कर रखी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मरगूब मूल रूप से पटना से सटे फुलवारी शरीफ की मुनीर कॉलोनी का निवासी है। उसके 3 व्हाट्सएप ग्रुप हैं। इनमें क्रमशः 181, 10 और 11 सदस्य हैं। उसके समूह में कई पाकिस्तानी और बांग्लादेशी भी शामिल बताए जा रहे हैं। तीनों ग्रुपों का नाम गज़वा-ए-हिन्द था जिसकी प्रोफ़ाइल फोटो में भारत के झंडे को हरे रंग से रंगा गया था। उसके ऊपर पाकिस्तान का झंडा लगाया गया था।

12 जून 2022 को मरगूब ने फेसबुक पर बॉयकॉट इंडिया नाम की मुहिम चलाई थी। इस मुहिम में उसने तिरंगे पर क्रॉस का चिन्ह लगा कर नबी से मोहब्बत करने के नाम पर भारतीय सामानों का बहिष्कार करने की अपील की थी। वो अक्सर देश विरोधी करता था, जिसमें भारत के नामोनिशान तक मिट जाने की बातें हुआ करती थी। ऐसे ही एक पोस्ट में उसने लिखा था, “इंडिया खत्म हो जाएगा, मेरे नबी का नाम हमेशा बुलंद रहेगा, इंशा अल्लाह…इंशा अल्लाह।”

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक मरगूब पाकिस्तान के तहरीक ए लब्बैक के संपर्क में भी था। मरगूब की अम्मी की माने तो उनके बेटे की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उनका कहना है, “मेरा बेटा दिन भर फोन चलाया करता था। हम लोग जब भी उस से फोन लेने की कोशिश करते थे तब वह झगड़ा करने लगता था। हम नहीं जान पाते थे कि वो फोन में क्या करता है।” उन्होंने कहा, “मेरा बेटा मानसिक बीमार है। वह बाथरूम में बिना कपड़ों के ही घुस जाता था। उसका इलाज एम्स में चल रहा था। वो कुछ गलत नहीं कर सकता है। वो फोन में गाने सुनता था और गंदी वीडियो और फोटो देखा करता था।”

मरगूब अहमद मदरसे में पढ़ा है और स्थानीय बच्चों को कुरान पढ़ाता था। वह कश्मीर में मारे गए आतंकियों की तारीफ करते हुए उनको शहीद बताता था। उसने अपने व्हाट्सएप ग्रुप में एक पाकिस्तानी को भी एडमिन बना रखा है। SSP पटना के मुताबिक, “26 वर्षीय मरगूब साल 2016 से ही अपनी तैयारियों में जुटा था। वह विदेश में नौकरी भी कर चुका है। पाकिस्तान के अलावा वह कुछ कश्मीरी आतंकी संगठनों से भी जुड़ा है।”