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‘अश्विन बाहर किए जा सकते हैं तो कोहली को भी टीम से हटाया जा सकता है’: बोले कपिल देव – नए खिलाड़ियों के साथ न हो नाइंसाफी

क्रिकेटर विराट कोहली (Virat Kohli) की बल्लेबाजी के लेकर लगातार सवाल उठते जा रहे हैं। ऐसे में पूर्व दिग्गज क्रिकेटर कपिल देव ने बयान देकर उनकी मुश्किल को बढ़ा दिया है। कपिल देव ने कहा है कि जब रविचंद्रन अश्विन को टेस्ट टीम से प्लेइंग 11 से बाहर किया जा सकता है तो विराट कोहली को क्यों नहीं?

कपिल देव ने कहा कि कोहली को टीम से बाहर करना कोई बड़ा मसला नहीं है। उन्होंने कहा कि साल 2019 के बाद से वह कोई बडी पारी नहीं खेल पाए हैं। बता दें कि विराट कोहली ने अपना अंतिम शतक नवंबर 2019 में बांग्लादेश के खिलाफ कोलकाता टेस्ट मैच में मारा था।

कपिल देव ने कहा कि अगर नए खिलाड़ियों को भरपूर मौका नहीं मिलता है तो यह उनके साथ नाइंसाफी होगी। उन्होंने कहा कि अगर कोहली प्रदर्शन नहीं करेंगे तो नए खिलाड़ियों को टीम से बाहर नहीं रखा जा सकता है। अश्विन को बाहर किया जा सकता है तो उन्हें भी बाहर किया जा सकता है।

कपिल देव का यह बयान उस समय सामने आया है, जब भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर है। आज (9 जुलाई) भारत-इंग्लैंड के बीच दूसरा T20 मैच है। इससे पहले इंग्लैंड में ही हुए टेस्ट मैच में भी कोहली कोई कमाल नहीं दिखा पाए थे।

बता दें कि पहले T20 मैच में कई दिग्गजों सहित विराट कोहली रेस्ट पर थे। अब दूसरे T20 मैच में विराट कोहली को प्लेइंग 11 में शामिल किया जाएगा या नहीं, इसको लेकर संशय बरकरार है।

गौरतलब है कि भारत ने इंग्लैंड को 50 रनों से हराकर सीरीज में शानदार शुरुआत की है। भारत ने पहला मैच जीतकर तीन मैचों की T20 सीरीज में 1-0 की बढ़त बढ़ा ली है। वहीं, खबर है कि दूसरे मैच के लिए भारतीय टीम में बड़े बदलाव होने वाले हैं।

दरअसल, बीसीसीआई ने T20 सीरीज के दूसरे और तीसरे मैचों के लिए एक अलग टीम की घोषणा की थी। ऐसे में विराट कोहली को लेकर सवाल बना हुआ है। दीपक हुड्डा, सूर्यकुमार यादव, ऋषभ पंत और श्रेयस अय्यर जैसे खिलाड़ी के सामने कोहली के लिए प्लेइंग इलेवन में जगह बनाना मुश्किल हो रहा है, खासकर अक्टूबर-नवंबर में ऑस्ट्रेलिया में होने वाले पुरुष T20 विश्व कप के लिए।

 

‘देश 1400 साल पुराने शरिया से नहीं चलेगा’: ‘हिन्दू संकल्प मार्च’ में भगवा झंडों के साथ शांतिपूर्ण विशाल रैली, उदयपुर-अमरावती जैसी घटनाओं पर चेताया

राजस्थान (Rajasthan) के उदयपुर और अमरावती जैसी निर्मम हत्याओं के विरोध में हिन्दू संगठनों ने शनिवार (9 जुलाई, 2022) को दिल्ली में ‘हिन्दू संकल्प मार्च’ (Hindu Sankalp March) नाम से एक विशाल रैली निकाली। इसके जरिए हिन्दुओं ने कट्टरपंथी मानसिकता वाले लोगों को ये स्पष्ट संदेश दिया कि देश कानून और संविधान से चलेगा, न कि शरिया (इस्लामी कानून) से।

ये मार्च विश्व हिन्दू परिषद के द्वारा निकाला गया, जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, हिन्दू संगठनों के मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने बाराखंभा रोड, फिरोज शाह रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग, जनपथ, संसद मार्ग, पटेल चौक समेत कई जगहों पर यातायात की विशेष व्यवस्थाएँ कर रखीं थी, ताकि लोगों को किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

ऑपइंडिया ने इसकी ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की है। हिन्दू संगठनों का ये मार्च मंडी हाउस से शुरू हुआ और जंतर-मंतर पर जाकर खत्म हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में हिन्दू भगवा झंडा लेकर भजन गाते हुए चलते रहे।

उदयपुर जैसी हत्याओं के विरोध में हिन्दुओं की एकजुटता ने ये संकेत दिया कि अब हिन्दू समुदाय जिहादी ताकतों के हमलों पर मूक दर्शक बनकर नहीं बैठेगा और कानूनी सीमा के दायरे में रहकर इसका तगड़ा विरोध करेगा। रैली के दौरान लोग तिरंगा लहराते रहे।

रैली में शामिल रहे तेजिंदर पाल सिंह बग्गा

जिहादियों और कट्टरपंथी ताकतों के विरोध में निकाली गई इस रैली में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा भी शामिल रहे। ऑप इंडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में हमने देखा है कि कैसे कुछ लोगों ने भारतीय संविधान को चुनौती दी है, फतवा जारी किया और सिर काटने की धमकी दी। वे लोगों को मारने के लिए इनाम की घोषणा कर रहे हैं। यह मार्च उनके लिए एक संदेश है कि देश भारतीय कानूनों पर चलता है न कि शरिया या जिहाद पर।”

बग्गा ने जोर देकर कहा, “जब-जब वो लोग इस देश को शरीयत और जिहाद के जरिए चलाने की कोशिश करेंगे, हिन्दू समुदाय के लोग सड़कों पर उतरेंगे। गैर-भाजपा शासित राज्यों में हमने पब्लिक प्रॉपर्टी को नष्ट करते, पथराव और आगजनी के हमले देखे हैं, लेकिन यहाँ आपको ऐसा कुछ नहीं देखने को मिलेगा।”

उन्होंने आगे कहा, “यह उनके और हम जैसे शांतिप्रिय लोगों के बीच का अंतर है। यहाँ आपको हिंसा की बात करने वाला कोई भी व्यक्ति नहीं मिलेगा।”

रैली को लेकर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ऑपइंडिया से कहा, “हिन्दू समाज के हर वर्ग के लाखों आज सड़कों पर उतर आए हैं। ये (रैली) लोगों की भावनाओं का परिणाम है। भारत संविधान पर चलेगा, शरिया से नहीं।” वो आगे कहते हैं, “हिन्दू जब सड़क पर उतरता है तो शांतिपूर्ण तरीके से ही उतरता है। वो पत्थरों से लैस नहीं होते। यह रैली जिहादियों, उनके बापों और उनके बच्चों को, जो जिहाद का समर्थन करते हैं, एक तरह का बड़ा मैसेज है। शरिया लागू करने वालों की हार तय है। ये मार्च हिंन्दुओं की एकता की अभिव्यक्ति है।”

मिश्रा ने आगे कहा, “ये पत्थरबाजी और कत्लेआम बंद करो। सिर तन से जुदा की धमकी देना और उसे जायज ठहराना बंद करो। इन अत्याचारों के खिलाफ आज यहाँ लाखों लोग सड़कों पर उतरे हैं।”

इस बीच ‘विश्व हिन्दू परिषद’ के नेता आलोक कुमार ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने कहा कि हिन्दू संकल्प मार्च भारत में भारत में 1400 साल पुरानी शरिया थोपने की कोशिशों का विरोध है। आलोक कुमार कहते हैं कि यह मार्च हिंदू समाज के सभी वर्गों के बीच एकता को दिखाता है। भाईचारे की जीत होगी और जिहादियों की हार होगी। उन्होंने कहा कि हम हिंदुओं के उस आत्मबल को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं कि जब भी उनपर ऐसी ताकते हमले करें, तो वे अपने जीवन और संपत्ति (कानून की सीमा के भीतर) की रक्षा करने में सक्षम हों।”

इस्लामिक हिंसा का शिकार बन रहे हिन्दू

नूपुर शर्मा का समर्थन करने के मामले में इस्लामवादियों द्वारा उदयपुर में रियाज अटारी और मोहम्मद गौस द्वारा की गई हत्या इस्लामिक हिंसा ही है। कन्हैयालाल का सिर तन से जुदा करने से करीब 7 दिन पहले ही महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे नाम के हिन्दू फार्मासिस्ट की हत्या भी नूपुर शर्मा का समर्थन करने को लेकर की गई थी।

इतना ही नहीं भाजपा की पूर्व प्रवक्ता का समर्थन करने पर टीवी एक्ट्रेस समेत कई लोगों को हत्या की धमकियाँ दी गई हैं। इन हत्याओं के अलावा भी देखें तो आए दिन ये कथित शांतिप्रिय इस्लामवादियों ने दंगों में पब्लिक प्रॉपर्टीज में तोड़फोड़, गाड़ियों को आग लगा दी। इनके दंगों के कारण देशभर में कई शहरों में जीवन थम सा गया था। एक आम हिन्दू अपना धार्मिक भावना की पहचान से अनजान बना इन सब को देखकर चुप बैठा रहा, इस्लामवादियों ने सड़कों पर जमकर तबाही मचाई। अपने ही धर्म के लोगों की चुप्पी और इस्लामवादियों के स्ट्रीट पॉवर ने हिन्दुओं के मन में दहशत भर दी।

हालाँकि, ये ज्ञात होना चाहिए कि इस्लामवादियों की हिंसा का एक चलन सा चला है। कन्हैयालाल की हत्या से पहले किशन और उससे पहले कमलेश तिवारी की हत्या कथित ईशनिंदा के आरोप में ही की गई थी। देश का हिन्दू समाज इस दुविधा में फंस सा गया है कि एक तो अहिंसक बहुमत का हिस्सा है और वो अल्पसंख्यकों के अधिकारों से बेखबर होकर खुद को अत्याचारी नहीं कहलवाना चाहता।

कच्चा माँस, स्त्री का दूध और योनि स्राव… इसी खान-पान की वजह से बीमार नहीं होता यह अमेरिकी बाउंसर: वीडियो वायरल

अमेरिका के शिकागो में रहने वाले 40 वर्षीय बाउंसर बोबान सिमिक (Boban Simic) अपने लाइफस्टाइल के कारण चर्चा में हैं। बोबान ने दावा किया है कि वो कच्चे मांस के साथ महिला की योनि से निकले स्राव और उनका दूध पीकर अधिक स्वस्थ महसूस करते हैं।

टिकटॉक पर बोबान सिमिक @IAMFLESHGOD हैंडल से काफी प्रसिद्ध हैं। अपने लाइफस्टाइल को लेकर बोबान ने जो वीडियो बनाया है, वो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल (Boban Simic viral video) हो रहा है। इस वीडियो में उन्होंने अपने खान-पान को लेकर काफी विस्तार में बताया है।

बोबान के मुताबिक कच्चा माँस जब पेट में जाता है तो वो और भी तरोताजा महसूस करते हैं। उनके अनुसार एक जानवर की तरह कच्चा माँस खाना सामान्य के मुकाबले कहीं बेहतर एक्सपीरिएंस है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद आई कई मीडिया रिपोर्ट में 40 वर्षीय बोबान सिमिक की डायट भी बताई गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बोबान सिमिक सुबह के नाश्ते में एक दर्जन कच्चे अंडे, दोपहर के खाने में लगभग 1 किलो (2 पाउंड) कच्चा माँस और रात के खाने में कच्चे अंडे की जर्दी लेते हैं। उन्हें जापानी और इथियोपियाई रेस्टोरेंट पर भी अक्सर देखा जाता है, जहाँ बिना पकाए गए खाने मिलते हैं।

महिला का दूध और योनि का स्राव पीने के मुद्दे पर बोबान ने कहा:

“मैंने एक लड़की का दूध चखा, वो मुझे बहुत स्वादिष्ट लगा। फिर मैंने जानवरों का कच्चा दूध छोड़ कर महिला का दूध पीना शुरू कर दिया। एक बार मैं एक लड़की के साथ सेक्स कर रहा था। तब उसकी योनि से निकले स्राव को मैंने चखा। वो भी मुझे बहुत अच्छा लगा। मैंने उसे महिला के दूध में मिला कर पीने का फैसला किया। ये एक शानदार अनुभव रहा।”

बोबान सिमिक सुअर के कच्चे माँस को नरम बताते हुए कभी-कभार खाने का दावा करते हैं। सबसे अच्छा वो बकरी के कच्चे गोश्त को मानते हैं। बोबान का एक वीडियो अपनी गर्लफ्रेंड के स्तन से निकला दूध और उनकी योनि से निकले स्राव को दही जैसे पीते हुए भी है। उनका दावा है कि उनके इसी खान-पान की वजह से वो बीमार नहीं होते। वो इसी प्रकार हमेशा जवान भी रहना चाहते हैं।

अपने स्वास्थ्य को लेकर बोबान सिमिक बहुत सचेत रहते हैं। उनका कहना है कि वो हर दिन अपने मल को देखते हैं, उसकी जाँच करते हैं। मल में कोई कीड़ा है या नहीं, यह देख कर बोबान संतुष्ट होते हैं।

श्रीलंका में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति भवन पर किया कब्जा, राजपक्षे भागे: स्वीमिंग पुल में नहाते नजर आए लोग

आर्थिक दुष्चक्र में फँसा भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका (Sri Lanka) में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। राजधानी कोलंबो (Colombo) में शनिवार (9 जुलाई 2022) को प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन में घुस गए। इसके बाद राष्ट्रपति गोताबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) वहाँ से भाग गए। वहीं, सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई प्रदर्शनकारियों घायल होने की भी खबर है।

प्रदर्शनकारियों की माँग की राजपक्षे राष्ट्रपति पद से तुरंत इस्तीफा दें। इस्तीफे की माँग को लेकर राजधानी कोलंबो में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ और लोग राष्ट्रपति भवन में घुस गए। गुस्साए प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षाबलों ने हवा में कई राउंड गोलियाँ चलाईं।

लोगों के गुस्से को देखते हुए राष्ट्रपति तुरंत वहाँ से निकल निकल गए। श्रीलंका रक्षा विभाग के सूत्रों के हवाले से अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी AFP ने बताया, “राष्ट्रपति को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।” राष्ट्रपति भवन में घुसने के बाद प्रदर्शनकारी वहाँ के स्वीमिंग पुल में नहाते भी नजर आए।

बता दें कि वहाँ के हालात को लेकर लोग पिछले कई महीनों से सड़कों पर हैं। हिंसा को रोकने के लिए देश के कई हिस्सों में शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को कर्फ्यू लगा दी गई थी। पुलिस प्रमुख चंदना विक्रमरत्ने ने कहा कि राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए हजारों लोगों ने शुक्रवार की रात को कोलंबो में प्रवेश किया था।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उन पर वाटर कैनन और आँसू गैस के गोलों का प्रयोग किया गया, लेकिन गुस्साए प्रदर्शनकारी नहीं माने। इस प्रदर्शन को देश के विभिन्न तबकों का समर्थन हासिल है। इनमें धर्मगुरु से लेकर विपक्षी नेता और व्यवसायी और आम लोग तक शामिल हैं।

वहीं, कोलंबो का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें कहा जा रहा है कि होटल गालादारी ने प्रदर्शनकारियों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। आँसू गैस से पीड़ित प्रदर्शनकारियों के लिए वहाँ पानी की व्यवस्था की गई है, ताकि वे अपना चेहरा आदि धो सकें।

इसके पहले मई महीने में सत्ताधारी पार्टी के एक सांसद ने प्रदर्शनकारियों के डर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। बताया जाता है कि अमरकीर्ति अतुकोराला 10 मई को अपनी गाड़ी से निटंबुआ जा रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की एक भीड़ ने उन्हें घेर लिया।

यह भी कहा जाता है कि भीड़ से घबराकर उन्होंने फायरिंग कर दी, जिसके बाद लोग और भड़क गए। हालाँकि, गाड़ी में से सांसद किसी तरह भागकर एक घर में जा छुपे, लेकिन हजारों की भीड़ ने उस बिल्डिंग को चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद उन्होंने डरकर अपनी रिवॉल्वर से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

दलितों पर कहीं पत्थर फेंकते कट्टरपंथी, कभी हत्या तो कभी रेप और धमकी: ‘जय भीम-जय मीम’ की पोल खोलती 30+ घटनाएँ

हिंदुओं को नीचा दिखाने के लिए वामपंथियों और कट्टरपंथियों द्वारा लगाया जाने वाला ‘जय भीम-जय मीम’ का नारा अक्सर कई मौकों पर सुनाई पड़ता है। कई बार ऐसी कोशिशें की जाती हैं कि ये संदेश फैलाया जाए कि दलितों के असली हितैषी केवल मुस्लिम समुदाय के लोग ही हैं। लेकिन जब खबरों से हम इस नारे की हकीकत को पता लगाने की कोशिश करते हैं तो पता चलता है कि किसी नूरपूर गाँव में दलित की बारात पर अंडे फेंकने की घटना को अंजाम दिया गया है तो किसी राजगढ़ में दलित दूल्हे पर पत्थरबाजी हुई। कहीं दलित राजू बेटियों को बचाने के चक्कर में मार दिया गया तो कहीं नागराजू को मुस्लिम लड़की से शादी की सजा जान देकर भुगतनी पड़ी।

दलित की बारात पर फेंके गए अंडे

सबसे ताजा घटना अलीगढ़ के नूरपूर की है। खबर है कि मुस्लिमों के त्योहार बकरीद के बीच जाटव समाज के धर्मवीर अपनी बेटी की शादी करवा रहे थे। लेकिन जब बारात गाँव में पहुँची तो स्थानीय मुस्लिमों ने बारात के ऊपर अंडे बरसाने शुरू कर दिए। विरोध हुआ तो बारातियों से गाली-गलौच की गई और उन्हें जातिसूचक शब्द भी कहे गए। घटना के संबंध में धर्मवीर ने अंसार, शाहरुख, अमजद और सउमा को नामजद करवाया है। पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही है।

याद दिला दें कि इससे पहले भी नूरपूर गाँव में मुस्लिम समुदाय द्वारा हिंदुओं की बारात रोकने की हरकत सामने आई थी। हिंदू इतने त्रस्त हो गए थे कि उन्हें अपने घर पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ का पोस्टर तक लगाना पड़ा। इसी तरह बीते दिनों ऐसी कई घटनाएँ घटित हुईं जब मजहब विशेष के लोगों ने खुलेआम दलितों को अपना निशाना बनाया और किसी लिबरल गिरोह वाले ने उस घटना का विरोध तो दूर, निंदा तक नहीं की। आइए आज उन्हीं घटनाओं में से कुछ पर चर्चा करें।

दलित युवती से रेप और अश्लील वीडियो का खेल

राजस्थाम के टोंक में जुलाई 2022 में 6 साल से एक युवती के रेप का मामला प्रकाश में आया है। आरोपित का नाम मंसूर अली है। बताया गया है कि मंसूर ने पीड़िता के नाबालिग होने के समय ही उसे खेत में अपना निशाना बनाया था और अश्लील वीडियो बनाने के बाद उसे धमकी दे देकर लगातार 6 साल से उसका शोषण कर रहा था। अब जाकर उसके ऊपर मुकदमा दर्ज हुआ है और उसे पुलिस की हिरासत में लिया गया है।

दलित लड़की का रेप, धर्मांतरण का दबाव, माता-पिता को गाली

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में एक दलित लड़की के साथ अपहरण की घटना का खुलासा इसी महीने 1 जुलाई को हुआ था। खबर थी कि एक दलित लड़की का अपहरण कर जावेद उसे मुंबई ले गया और वहाँ उसका गैंगरेप कराया। इसके बाद अपने दोस्तों के साथ मिल उसने लड़की पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया, जब लड़की नहीं मानी तो उसे पीटा गया और बाद में वापस करनैलगंज स्टेशन छोड़ दिया गया। पीड़िता के पिता को जब इस बारे में पता चला तो उन्हें भी जावेद ने धमकी दी कि अगर उन्होंने शिकायत दी तो उन लोगों के साथ ठीक नहीं होगा।

बेटियों को बचाने गए राजू को कट्टरपंथियों ने मारा

पीलीभीत में भी जून 2022 में ऐसा ही एक घटना घटी। वहाँ मुस्लिम युवकों द्वारा एक दलित की हत्या की घटना प्रकाश में आई। जब पड़ताल हुई तो पता चला कि कुछ मुस्लिम युवक उस व्यक्ति की बेटियों को छेड़ते थे। जब पिता ने इसका विरोध किया तो युवकों ने उन्हें घर में घुस मार डाला। एससी-एसएसटी एक्ट के तहत ये केस फैजान, शोहिल और मोहम्मद सलमान पर दर्ज हुआ। इन्हीं सब ने मिल कर दलित राजू को बुरी तरह पीटा जिसके बाद 18 जून को उनकी मृत्यु हो गई।

मुस्लिम लड़की से प्रेम करने पर दलित कांबले को मिली मौत

कर्नाटक के कुलबुर्गी में मई 2022 में दलित विजय कांबले नाम के युवक की हत्या हुई थी। विजय की गलती बस इतनी थी कि उसने मुस्लिम लड़की से प्रेम कर लिया, जिसके बाद लड़की के भाई शहाबुद्दीन और नवाज ने उसे ईंट-पत्थरों से मार-मार कर मौत के घाट उतार दिया। रिपोर्ट में सामने आया था कि कांबले के गर्दन पर कई वार किए गए थे और उसकी सिर पर भी चोट के निशान थे।

दलित दूल्हे की बारात पर पत्थरबाजी

दलित दूल्हे की बारात पर पत्थरबाजी की घटना मध्यप्रदेश के राजगढ़ से भी सामने आई थी। मई 2022 में वहाँ एक दलित दूल्हा अपनी बारात लेकर आ रहा था कि तभी मस्जिद के सामने डीजे बजाने पर पूरे बारात का विरोध हुआ और जब बारात ने मस्जिद से आगे जाकर मंदिर के पास ढोल बजाया तो उन पर पत्थरबाजी शुरू हो गई।

दलित नागराजू की हत्या

हैदराबाद के सुरूरनगर में हुई नागराजू नामक दलित की हत्या शायद ही कोई भुला पाए। नागराजू ने मुस्लिम लड़की अशरीन से प्रेम किया और उसके लिए वो इस्लाम कबूलने को भी तैयार था। लेकिन अशरीन के घरवालों को ये बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने नागराजू को मौत के घाट उतार दिया। जब खबर मीडिया में आई तो कट्टरपंथियों ने इसका जश्न मनाया और हिंदू लड़कों को चेतावनी दी कि वो मुस्लिम लड़कियों से दूर रहें।

मुरादाबाद में समुदाय विशेष ने दलितों का बाल काटने से इनकार किया

यूपी के मुरादाबाद का पीपलसाना एक समुदाय विशेष बहुल इलाक़ा है। वहाँ मजहब विशेष के हजामों ने दलितों का बाल काटने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अगर वो अपने सैलूनों में दलितों की हजामत करेंगे तो उनके तौलिए गंदे हो जाएँगे। नौशाद नामक एक हजाम ने बताया कि अगर दलित यहाँ बाल कटवाएँगे तो उसके सामुदाय के लोग आना बंद कर देंगे।

समुदाय विशेष ने दलितों के कारण सैलून जाना बंद किया

ये घटना उसी इलाक़े की है। भेदभाव की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और कहा कि दलितों को रोकना सही नहीं है। इसके बाद लोगों ने अपने ही कौम के हजामों के पास बाल कटवाने के लिए जाना छोड़ दिया क्योंकि वो प्रशासन के कहने पर दलितों के भी बाल काट रहे थे।

दलित लड़की से यौन दुर्व्यवहार, उसके भाई की पिटाई

2019 जून की घटना। एक दलित की सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की गई क्योंकि उसने अपनी बहन के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का विरोध किया था। इस मामले में एससी-एसटी लगाने के बाद आरोपितों की गिरफ़्तारी संभव हो सकी।

समुदाय विशेष के हमले, घर बेचने का दबाव

बेगूसराय में मजहब विशेष ने एक दलित परिवार पर हमला किया। ये घटना बिहार के बेगूसराय स्थित नूरपुर की है। मजहबी भीड़ ने हिन्दू परिवार के घर में घुस कर हमला किया और परिवार की दो महिलाओं के साथ बदतमीजी की। एक व्यक्ति की हत्या का प्रयास। परिवार को घर बेच कर भागने की धमकी दी गई।

कन्वर्ट नहीं होने पर दलित की हत्या

अगस्त 2018 की घटना। दिल्ली में संजय कुमार का मृत शरीर कई दिनों बाद मिला। इस मामले में आरोपित का नाम सलीम है, जिसने संजय की हत्या इसीलिए कर दी क्योंकि एक दूसरे समुदाय की लड़की से शादी के बाद उन्होंने इस्लाम कबूल करने से मना कर दिया। उनके गुदाद्वार से कोई चीज घुसा कर उनका मलाशय बाहर निकाल लिया गया था। हत्या बेरहमी पूर्वक की गई थी।

दलित महिला का गैंग रेप

मेरठ की लव जिहाद की घटना। जनवरी 2018 में एक दलित युवती ने आरोप लगाया कि एक दूसरे समुदाय का व्यक्ति उससे जबरन निकाह करने और इस्लाम अपनाने की जिद कर रहा है। मना करने पर उसने अपने दोस्तों के साथ मिल कर लड़की का अपहरण किया और 1 सप्ताह तक उसके साथ गैंगरेप करता रहा। अश्लील वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया गया।

मुदाय विशेष वालों ने दलितों के वैवाहिक समारोह में हमला बोल दिया

जून 2019 की घटना। मध्य प्रदेश के देवास जिले में दूसरे मजहब के लोगों ने एक दलित परिवार के वैवाहिक समारोह पर हमला बोल दिया। रात के 9 बजे बरात जैसे ही पीपलवाड़ा मस्जिद के पास से गुजरी, उस पर हमला कर दिया गया। एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। कई घायल हुए। समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों ने हमले से पहले लाउडस्पीकर की आवाज़ कम करने की धमकी दी थी।

दलित लड़की का यौन शोषण, विरोध करने पर हमला

अप्रैल 2019 में देवरिया के गौरी बाजार में दलितों पर इस्लामी भीड़ ने हमला बोल दिया। रहमत अली ने एक दलित लड़की के साथ छेड़खानी की थी, जिसका दलित विरोध कर रहे थे। रहमत खिड़की से लड़की के कमरे में घुस कर उससे बदतमीजी कर रहा था। विरोध के बावजूद वह अगले रात फिर पहुँचा। हमले के दौरान समुदाय विशेष ने बस्ती में स्थित बाबासाहब आंबेडकर की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर डाला।

आगरा में दलितों पर हमला

मंटोला क्षेत्र के टीला नंदग्राम में प्रमोद नाम का दलित लड़का नजदीकी आरओ प्लांट में पानी लेने गया था। लौटते वक़्त शाहरुख़ और सलमान ने उसे पानी सहित गिरा दिया। जब उसके माता-पिता विरोध करने आए तो अकरम और युसूफ के नेतृत्व में सैकड़ों लोग हिंसक हो उठे और दलितों के घरों को तोड़ा जाने लगा। शीशे के बोतल फेंके गए। गोलीबारी की गई।

दलितों पर जातिवादी टिप्पणी की, फिर हमला बोला

सुनील नामक एक दलित युवक पर पीलीभीत में एक अंडे की दुकान पर कमील रज़ा और उसके दोस्तों ने जातिवादी टिप्पणी की। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई। दोनों पक्षों के दुकानों को क्षति पहुँची।

यूपी में दलित महिलाओं का यौन शोषण

मई 2018 में मिजाज, टप्पू, इजहार, नासिर, अरशद, अल्ताफ और फिरोज ने एक शादी समारोह में घुस कर दलित महिलाओं के साथ छेड़खानी की, उन्हें प्रताड़ित किया। जब उन्होंने विरोध किया तो महिलाओं पर हमला बोल दिया गया। महिलाओं को बचाने अन्य लोग सामने आए तो उनके साथ भी मारपीट की गई।

राजस्थान में दलित की मॉब लिंचिंग

22 साल के खेताराम भील की मोब लिंचिंग कर दी गई। उनका ‘गुनाह’ सिर्फ इतना था कि उनका एक दूसरे मजहब की लड़की के साथ प्रेम सम्बन्ध था। उनके हाथ-पाँव बाँध कर इस्लामी भीड़ ने इतनी पिटाई की कि उनकी मौत हो गई। वो खून से लथपथ होकर भाग रहे थे लेकिन कोई बचाने नहीं आया।

मजहब विशेष ने दलितों के अंतिम संस्कार का विरोध किया

तमिलनाडु के थेनि जिले में मजहब विशेष के लोगों ने अपने बहुलता वाले इलाक़े से एक दलित व्यक्ति की शवयात्रा के गुजरने पर विरोध जताया। हालाँकि, वो शवयात्रा का नियमित रूट ही था, दलितों ने जानबूझ कर वहाँ से गुजरने की योजना नहीं बनाई थी। मजहब विशेष वालों के विरोध के बाद दोनों समुदायों के बीच हिंसा हुई।

उत्तर प्रदेश में दलितों और समुदाय विशेष के बीच सांप्रदायिक झड़प

सरधना के दुरवेशपुर गाँव में मजहब विशेष और दलितों के बीच हुई एक छोटी सी झड़प एक बड़े सांप्रदायिक हिंसा की वारदात में बदल गई। दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी और फायरिंग हुई। फ़रवरी 2018 में हुई इस घटना में दोनों ही पक्षों के कई लोग घायल हो गए।

कटिहार में दलित परिवार को जलाया

बिहार के कटिहार में एक दलित परिवार को जलाने के मामले में अब्दुल और उसकी बीवी को गिरफ्तार किया गया। जून 2018 में आज़मगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई इस घटना में दलित बज्जन दास और उनकी पत्नी का घर इसीलिए जला डाला गया क्योंकि मुसलामानों के कहने पर उन्होंने वहाँ से छोड़ कर जाने का फैसला नहीं लिया। जलाने के समय दोनों अन्दर ही सो रहे थे, इसीलिए बुरी तरह झुलस गए।

तीन दलितों को गोली मारी, एक की मौत

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में लोकसभा चुनाव से पहले एक झड़प के बाद आसिफ, रकीब और रिहान ने मिल कर बुलाकी सिंह व उनके दो अन्य दोस्तों को गोली मार दी। तीनों ने गिरफ़्तारी के बाद अपना गुनाह कबूल कर लिया।

दलित से काम करवाया, पैसे माँगने पर पीटा

ये घटना मेरठ के भगत सिंह बाजार की है’। जनवरी 2019 में दलित सफाईकर्मी अंकुश से शाहरुख़ ने अपनी चाय की दुकान साफ़ कराई लेकिन जब उसने रुपए माँगे तो उसकी पिटाई कर दी। शाहरुख़ ने कई दिनों से उसके रुपए मार रखे थे। वहीं बाजार के बाकी दुकानदार समय पर पेमेंट कर देते थे।

मंदिर में भजन बजाने पर दलितों पर हमला

मेरठ के घसौली की घटना। जून 2019 में जब कुछ दलित मंदिर के अन्दर स्पीकर बजा कर भजन कर रहे थे तो समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए उन पर हमला बोल दिया। मंदिर के अन्दर 6 लोगों की पिटाई की गई। दूसरे समुदाय के लोगों ने चेताया कि मस्जिद के पास ही मंदिर है, इसीलिए लाउडस्पीकर मत बजाओ। अकरम, करीम, सद्दाम, जुल्फिकार, अब्दुल और आरिफ गिरफ्तार।

गौतम नगर का नाम इस्लाम नगर रखने की कोशिश

फ़रवरी 2018 में समुदाय विशेष के प्रभाव वाले अमरोहा में एक जगह का नाम बदल कर गौतम नगर से इस्लाम नगर करने की कोशिश की गई। आज़ादी से पहले से उसे गौतम नगर के नाम पर ही जाना जाता रहा है। वहाँ 1500 दलित रहते हैं और कईयों की दुकानें भी हैं। उन सभी को डरा-धमका कर रखा जाता है।

मस्जिद से दलित युवक की लाश मिली

एक दलित युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, जिसकी लाश एक मस्जिद से बरामद की गई। जनवरी 2018 में यूपी के हाथरस में ये घटना हुई। मृतक अमित कुमार गौतम के परिवार ने आलम, सद्दाम, खालिद, सुकैल और आसू पर मामला दर्ज कराया। अमित किसी कागजी काम से निकला थे लेकिन उसे मार डाला गया।

धर्मान्तरण से किया इनकार तो दलित परिवार की पिटाई

हरियाणा के मेवात स्थित नगीना खंड में जनवरी 2018 में एक दलित परिवार पर मजहबी भीड़ ने इसीलिए हमला बोल दिया क्योंकि उसने इस्लाम में कन्वर्ट होने से इनकार कर दिया था। परिवार पर जातिवादी टिप्पणी भी की गई। 3000 लोगों के उस गाँव में मात्र 7 दलित परिवार हैं और बाकी समुदाय विशेष से हैं, जिससे उन्हें काफ़ी डर कर रहना पड़ता है। हाल ही में एक ख़बर आई थी कि मेवात दलितों का कब्रगाह बनता जा रहा है।

शाहनवाज ने 9 साल की बच्ची का बलात्कार किया

उत्तर प्रदेश की घटना। शाहनवाज नामक व्यक्ति एक 9 साल की दलित बच्ची का बलात्कार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। उसने कपड़े देने के लालच से लड़की को बुलाया और उसे कमरे में ले जाकर बलात्कार किया। उसने घर आकर रोते हुए अपने माँ-बाप को इसके बारे में बताया, जिसके बाद उसी तुरंत दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

नाबालिग दलित बच्ची का गैंगरेप, फिर धमकी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 5 लोगों ने मिल कर एक नाबालिग बच्ची का बलात्कार किया। साथ ही पूरी वारदात को कैमरे में शूट कर के लड़की को धमकाया कि अगर उसने किसी को कुछ भी बताया तो वीडियो वायरल कर दिया जाएगा। फ़रवरी 2019 में हुई इस घटना में सबुर, फरीद, दानिश और माज को गिरफ्तार किया गया।

दलित महिला और नाबालिग के बलात्कार की कोशिश, कुल्हाड़ी से हमला

फ़रवरी 2018 की घटना। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक दलित महिला और एक नाबालिग लड़की के बलात्कार की कोशिश की गई। समुदाय विशेष के लोग एक दलित परिवार के घर में घुस कर ऐसा कर रहे थे। जब वो कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने कुल्हाड़ी से दोनों पर हमला बोल दिया। शकील, शहीद और मुहम्मद को इस मामले में गिरफ्तार किया गया। महिला का काफी दिनों तक इलाज चला। पीडिता की स्थिति गंभीर थी।

युवक ने दलित महिला के साथ बदतमीजी की

आगरा की घटना। जून 2017 में एक दलित महिला दवा खरीदने जा रही थी, तभी समुदाय विशेष के कुछ दबंगों लोगों ने उसका दुपट्टा छीन लिया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगे। महिला ने किसी तरह तेजी से भाग कर अपनी जान बचाई। कुछ लोगों ने महिला को बचाना चाहा तो उनकी भी जम कर पिटाई की गई।

6 साल से दलित युवती से रेप कर रहा था मंसूर अली, अश्लील वीडियो भी बनाया: राजस्थान में FIR दर्ज, पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव

राजस्थान (Rajasthan) के टोंक जिले के मेहंदवास इलाके की रहने वाली एक युवती से रेप (Rape) का मामला प्रकाश में आया है। आरोपित मंसूर अली बीते 6 साल से दलित युवती से रेप कर रहा है। उसने पीड़िता का एक वीडियो भी बना लिया था, जिसे वायरल करने की धमकी देकर वो लगातार पीड़िता से रेप करता रहा। वीडियो वायरल होने के डर से अभी तक युवती चुप रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित मंसूर अली (35) को हिरासत में ले लिया है। दूसरी ओर पीड़िता का मेडिकल कराया गया है। पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने बताया कि करीब 6 साल पहले इस घटना की शुरुआत हुई थी। उस दौरान वो 15 साल की यानि कि नाबालिग थी। एक दिन वो अपने खेत में काम कर रही थी, उसी दौरान वहाँ पहुँचे मंसूर अली ने पीछे से उसे पकड़ लिया और उसका रेप किया। मंसूर अली ने पीड़िता की अश्लील वीडियो भी बना ली थी।

वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने और पीड़िता को परिवार समेत जान से मारने की धमकी देकर वो लगातार 6 साल से उसका रेप करता आ रहा है। पीड़िता का आरोप है कि दो दिन पहले भी आरोपित ने खेत पर उसके साथ मारपीट करने के बाद उसका रेप किया था और जान से मारने की धमकी भी दी थी। मंसूर अली के बढ़ते अत्याचार से तंग युवती ने ये बात अपने माता-पिता को बताई। इसके बाद उन्होंने मेहंदवास थाने में जाकर आरोपित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

फिलहाल मामले की जाँच एससी/एसटी सेल के डीएसपी प्रदीप गोयल को सौंपी गई है। वहीं मामले के सामने आने के बाद ‘भीम सेना’ के जिलाध्यक्ष अशोक बैरवा ने इसे ‘लव जिहाद’ जैसा प्रकरण बताते हुए सख्त कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केस दर्ज कराने के बाद इससे नाराज मंसूर अली के परिजन लगातार पीड़िता और परिजनों पर केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।

हिन्दुओं का पलायन, त्योहारों पर पाबंदी, जुलूस पर हमला, सरस्वती पूजा ‘हराम’: भारत में जहाँ भी मुस्लिम बहुल इलाके, वहाँ शरिया ही कानून

डेमोग्राफी में बदलाव के भयंकर परिणाम होते हैं। भारत में कई ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं, जहाँ किसी इलाके में मुस्लिमों की जनसंख्या अधिक हो जाने के बाद सारे नियम-कानून उनके ही मुताबिक चलने लगे हैं। स्पष्ट है, जोर-जबरदस्ती के दम पर ऐसा कराया जा रहा है। यहाँ तक कि स्कूल-कॉलेजों को भी वो अपने हिसाब से ही चलाना चाह रहे हैं। ऐसा लग रहा है, जैसे भारत के इन हिस्सों में शरिया लागू हो गया हो। जैसे भारत में कई छोटे-छोटे पाकिस्तान बन गए हों।’

आइए, सबसे पहले इस तरह की कुछ घटनाओं पर नजर डालते हैं, जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या अधिक होने पर उस इलाके में रह रहे हिन्दुओं को भी उनके ही हिसाब से चलने के लिए बाध्य होना पड़ा। अगर किसी ने आनाकानी की, तो इसका दुष्परिणाम हिंसा के रूप में भुगतना पड़ा। भारत से अलग हुए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हिन्दुओं की स्थिति बदतर है ही, अब भारत में भी हालात कुछ उसी तरफ जाते दिख रहे हैं।

नया मीडिया रिपोर्ट: अब रविवार नहीं, झारखंड के कई स्कूलों में जुमे के दिन छुट्टियाँ

झारखंड के जामताड़ा जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में रविवार के बजाय शुक्रवार की छुट्टी दिए जाने की खबर है। दावा किया गया है कि स्कूल के नोटिस बोर्ड पर बाकयदा शुक्रवार को जुमे का दिन घोषित कर के अवकाश लिखा गया है। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा उन स्कूलों को उर्दू स्कूल बताते हुए ऐसा कदम शिक्षकों की सुविधा को देख कर उठाया जाना बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार की छुट्टी उन स्कूलों में हो रही है, जहाँ मुस्लिम छात्रों की संख्या 70% से अधिक है।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा, “पहले गढ़वा में हाथ जोड़ कर प्रार्थना की पद्धति को रोकने की खबर। अब जामताड़ा ज़िले में रविवार के बदले जबरन शुक्रवार को स्कूल बंद कराने के साथ ही सामान्य विद्यालयों पर खुद से उर्दू विद्यालय का बोर्ड लिखवा देना। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, आप झारखंड को किस ओर ले जा रहे हैं?” ‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट का कहना है कि शुक्रवार को बंद होने वाले स्कूलों की संख्या 100 से भी अधिक है।

75 हो गए गाँव में, बदलवा रहे स्कूलों के नियम-कानून

ये घटना ताज़ा है, झारखंड की है। घटना गढ़वा के मध्य विद्यालय की है, जहाँ स्कूल प्रिंसिपल युगेश राम के ऊपर क्षेत्र की बहुल आबादी ने स्कूल प्रार्थना बदलने का दबाव बनाया। मुस्लिम समुदाय ने प्रिंसिपल को कहा कि क्षेत्र में उनकी आबादी 75% है। इसलिए नियम भी उन्हीं के हिसाब से होंगे। समुदाय के दबाव के चलते स्कूल की प्रार्थना बदल गई। प्रिंसिपल ने कहा कि लंबे समय से मुस्लिम समुदाय के लोग 75 फीसदी आबादी का हवाला देकर स्कूलों के नियमों में बदलाव का दबाव बना रहे थे।

कुछ समय पहले इन लोगों ने मिलकर स्कूल में प्रार्थना का ढंग बदलवा दिया। उन्होंने इसकी जानकारी कोरवाडीह पंचायत के मुखिया और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दी। हालाँकि, हम सब जानते हैं कि झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो, कॉन्ग्रेस और राजद की सरकार है। ये दल मुस्लिम तुष्टिकरण में दक्ष हैं। जब गढ़वा के मुस्लिम युवक स्कूल में आकर हंगामा करते थे तो इस बारे में मुखिया शरीफ अंसारी को जानकारी दी गई थी। दावा किया गया कि उन्होंने आकर ग्रामीणों को समझाया भी था लेकिन न मानने पर स्कूल को ही मजबूर कर दिया गया।

झारखंड में सरस्वती पूजा विसर्जन में हिंसा

वैसे तो रामनवमी से लेकर दुर्गा पूजा तक, कई त्योहारों के दौरान हिन्दुओं के जुलूस पर हमले की खबरें आती हैं। अब तो हिन्दू नव वर्ष मनाने पर भी आफत है। इस साल सरस्वती पूजा विसर्जन के दौरान हजारीबाग, कोडरमा और जामताड़ा – इन तीन जिलों में अशांति रही। हजारीबाग में 17 साल के रूपेश कुमार की हत्या कर दी गई। कोडरमा जिले में मरकच्चो नाम का एक थाना है। यहीं के कर्बलानगर से सरस्वती माता का विसर्जन करने जा रहे जुलूस के साथ कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ ने झड़प की।

जिला जामताड़ा, करमाटांड़ थाना, गाँव फिटकोरिया। सरस्वती माता की मूर्ति का विसर्जन करने इस गाँव के लोग जाने वाले थे – सरकारी सड़क से सरकारी तालाब की ओर। बीच रास्ते में मस्जिद पड़ती है। कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा धमकी दी गई कि विसर्जन के लिए मस्जिद का रास्ता चुना गया तो अच्छा नहीं होगा। रास्ता बदल दिया गया, डीजे नहीं बजा – कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ इतने पर भी लेकिन नहीं मानी। मस्जिद से अलग हट कर जो रास्ता तय हुआ था, विसर्जन के लिए जब उस गली की तरफ से सरस्वती माता की मूर्ति छायटांड मोड़ पहुँची तो फिर से बवाल कर दिया गया।

मुस्लिम ये माँग लेकर उच्च न्यायालय पहुँच गए कि ‘उनकी’ गलियों से हिन्दुओं के जुलूस न निकलें

तमिलनाडु के पेरंबलुर जिले के मुस्लिम बहुल इलाके वी कलाथुर में इलाके के कुछ स्थानीय मुस्लिम 2012 से हिंदू जुलूसों को निकाले जाने का विरोध कर रहे थे। इन इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदू त्योहारों को ‘पाप’ करार दे रखा था। यहाँ का बहुसंख्यक समुदाय हिंदू मंदिरों से जुलूस या भ्रमण निकालने का लंबे समय से विरोध करता रहा है। इसी को लेकर मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हालाँकि, वहाँ से उन्हें निराशा मिली।

मई 2021 में मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले के दौरान टिप्पणी की, “केवल इसलिए कि एक धार्मिक समूह विशेष इलाके में हावी है, इसलिए दूसरे धार्मिक समुदाय को त्योहारों को मनाने या उस एरिया की सड़कों पर जुलूस निकालने से नहीं रोका जा सकता है। अगर धार्मिक असहिष्णुता की अनुमति दी जाती है, तो यह एक धर्मनिरपेक्ष देश के लिए अच्छा नहीं है। किसी भी धार्मिक समूह द्वारा किसी भी रूप में असहिष्णुता पर रोक लगाई जानी चाहिए।”

अलीगढ़ का नूरपुर: हिन्दुओं के बरात पर हमले की घटनाएँ, AIMIM नेता का भड़काऊ बयान

जून 2021 में एक कट्टरपंथी नेता का बयान भी इस पैटर्न की ओर इशारा करता है कि जहाँ मुस्लिमों की जनसंख्या अधिक होगी, वहाँ सारे नियम-कानून उन्हीं के हिसाब से चलेंगे। उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ के टप्पल के नूरपुर गाँव में 150 हिंदू परिवारों के पलायन की खबर के बाद AIMIM ओवैसी की यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष सैयद नाजिम अली ने धमकी देते हुए कहा कि नूरपुर में नमाज तो होगी, लेकिन हिंदुओं को वहाँ बारात नहीं निकालने दिया जाएगा।

इससे कुछ दिन पहले ही हिन्दू बारातियों पर हमले की खबर सामने आई थी। 26 मई 2021 को एक दलित घर में दो बेटियों की एक साथ बारात जा रही थी। आरोप है कि बारात लाते वक्त बीच में मस्जिद पड़ी। वहाँ मुस्लिम समुदाय से जुड़े कुछ लोगों ने बारातियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। बारातियों से कहा कि अगर बारात ले जाना है तो मस्जिद से पैदल ही जाना होगा। इस पर बारात वापस लौट गई। घटना के बाद से नूरपुर में रहने वाले 150 हिंदू परिवारों ने अपने घर बेचकर पलायन का ऐलान कर दिया।

इसी गाँव से अब एक ताज़ा घटना भी सामने आई है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक बार फिर हिंदू लड़की की शादी में मस्जिद के सामने बारातियों पर अंडे फेंकने की घटना मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है। इतना ही नहीं, बारातियों से गाली-गलौज की गई और जातिसूचक शब्द कहे गए। कट्टरपंथी मुस्लिमों की इस करतूत के बाद गाँव में तनाव का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है। जाटव समाज के धर्मवीर अपनी दोनों बेटियों की शादी एक साथ ही कर रहे थे। आरोप है कि मुस्लिमों ने अपनी छतों से अंडे फेंके।

भरूच का एक सोसायटी हुआ मुस्लिम बहुल तो घर बेचने को विवश हुए हिन्दू

हर गुरुवार को, जलाराम बापा मंदिर में शाम की आरती होती थी। फिर एक दिन शौकत अली ने मंदिर के ठीक सामने एक घर खरीदा। उसने आरती का विरोध करना शुरू किया। धीरे-धीरे सोसाइटी के 28 घरों को मुसलमानों ने खरीद लिया और अब मंदिर में आरती बंद हो गई है। इतना ही नहीं, मंदिर को भी बेचने की भी तैयारी शुरू हो गई। ये मामला अक्टूबर 2021 में सामने आया था। भरूच के कुछ हिस्सों में 2019 में अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू किया गया था, लेकिन प्रशासन सहित कुछ लोगों ने इसमें छिपी खामियों का फायदा उठाते हुए कुछ क्षेत्रों में पूरी जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) ही बदल डाला।

तब इलाके के एक व्यक्ति ने बताया था, “जब वहाँ के निवासियों ने इन खामियों का फायदा उठाकर मुस्लिमों द्वारा संपत्ति पर कब्जा करने का विरोध किया, तो पुलिस और प्रशासन ने उन पर शांति भंग करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ ही मामला दर्ज करने की धमकी दी। सरकार हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए चुनी गई थी, यही वजह है कि वे जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून, अशांत क्षेत्र अधिनियम जैसे कानून भी लाए, लेकिन इस तरह की खामियों का फायदा उठाया जा रहा है और प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है।”

मुस्लिम कट्टरपंथियों के कारण 50 साल से गाँव में नहीं हुई सरस्वती पूजा

घटना झारखंड की ही है। जिस देश में माँ सरस्वती को विद्या की देवी माना जाता हो और सरस्वती पूजा हर एक विद्यार्थी के लिए सबसे बड़ा त्योहार हो, वहाँ इस तरह की घटना डेमोग्राफ़ी में बदलाव के भयंकर परिणामों की ओर इशारा करती हैं। झारखंड के गिद्धौर में एक हाई स्कूल में लगभग 50 साल बाद धूमधाम से सरस्वती पूजा मनाई गई। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल को मौजूद रहना पड़ा। इस विद्यालय में सालों से सरस्वती पूजा को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद चल रहा था।

स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र मुस्लिम थे। इस वजह से हिंदू छात्र सालों तक सरस्वती पूजा नहीं मना सके। विद्यालय के बच्चों ने सरस्वती पूजा मनाने को लेकर 28 जनवरी 2020 को ब्लॉक ऑफिस और स्थानीय पुलिस स्टेशन में आवेदन दिया। जिसके बाद प्रशासन ने सरस्वती पूजा के एक दिन पहले ही विद्यालय में पुलिस के जवान तैनात कर दिया। तब जाकर कड़ी सुरक्षा के बीच हिन्दू छात्रों की माँग पूरी हुई और सरस्वती पूजा का आयोजन हो पाया।

हिन्दू परिवार को दिवाली मनाने से रोका: प्रताड़ित किया, घर की लाइट्स तोड़ीं

ये घटना अक्टूबर 2019 की है। एक अभिनेता के रूप में फ़िल्म उद्योग से जुड़े मुंबई के मलाड पश्चिम के रहने वाले विश्व भानू ने फेसबुक पर अपने पड़ोसियों, जो कि दूसरे मजहब से हैं, की असहिष्णुता के बारे में लिखा। अपनी फेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि दिवाली के मौक़े पर सोसायटी के लोग उन्हें और उनकी पत्नी को घर में दीये जलाकर रोशनी करने और रंगोली बनाने की अनुमति नहीं दे रहे थे। नकी सोसायटी के लोगों ने न सिर्फ उनके घर की लाइट्स को नष्ट किया बल्कि बाक़ी लगी लाइट्स को हटाने के लिए मजबूर भी किया। 

तब भानु ने बताया था कि वह मलाड पश्चिम की सोसायटी में रहते हैं, जो मालवानी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है। जिस सोसायटी में वो रहते हैं वो कथित अल्पसंख्यक बहुल इलाका है वहाँ सिर्फ़ उसी का एकमात्र हिन्दू परिवार रहता है। कट्टरपंथियों के अत्याचार का यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब भानु की पत्नी दिवाली के त्योहार पर घर सजाने के लिए नई लाइट्स ख़रीद कर लाईं। लेकिन जैसे ही उन्होंने घर सजाने के लिए लाइट्स लगाईं, वैसे ही इलाक़े के कट्टरपंथी उसी जगह पर आ गए और जलती हुई इलेक्ट्रिक लाइट्स हटा दीं।

कॉलोनी में रहना है, तो असलम भाई कहना है, समझ गए ना, यहाँ मोदी जी नहीं आएँगे: बंद कराया भजन

ये घटना भी 2019 के अक्टूबर महीने की ही है। महाराष्ट्र के मलाड से एक वीडियो सामने आया था, जहाँ एक मुस्लिम युवक असलम अपने कुछ साथियों के साथ दुर्गा पंडाल में बज रहे भजन को न सिर्फ़ बंद करने का हुक़्म दिया बल्कि पंडाल में मौजूद लोगों को धमकीभरे लहज़े में चेतावनी देते हुए कहा, “कॉलोनी में रहना है, तो असलम भाई-असलम भाई कहना है, समझ गए ना। यहाँ मोदी जी नहीं आएँगे, यहाँ असलम भाई ही आएँगे…बस।”

इलाक़े के लोगों पर असलम का काफ़ी दबदबा था क्योंकि जैसे ही उसने भजन बंद करने को कहा तो उन्होंने बज रहे भजन को डरकर तुरंत बंद कर दिया। और यह पूछे जाने पर कि क्या कहना तो डरकर जवाब दिया कि ‘असलम भाई-असलम भाई कहना है’। क्या यही है भारत के सेक्युलरिज्म, जहाँ एक मुस्लिम गुंडा किसी इलाके में देश के सबसे बड़े त्योहारों में से एक हिन्दुओं को नहीं मनाने देगा? भजन-कीर्तन भी अब उनसे पूछ कर होगा?

जगह-जगह से आती हैं हिन्दुओं के पलायन की खबरें, क्योंकि मुस्लिम बहुसंख्यक बन कर करते हैं परेशान

कैराना से हिन्दुओं के पलयान की खबरें सुर्खियाँ बनी थीं, लेकिन ऐसा भारत के कई हिस्सों में हो रहा है। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के मुस्लिम बहुल मोहल्ले ‘महाजनी टोला’ में हिन्दुओं पर पत्थरबाजी करने का मामला प्रकाश में आया। पीड़ितों का आरोप था कि इलाके में मुस्लिम कट्टरपंथी आए दिन ऐसा करते हैं। इसी कारण से इससे पहले भी कई हिन्दू परिवार मजबूरन पलायन कर गए हैं। कई हिन्दू परिवार वहाँ से घर बेच कर निकल गए।

हाल ही में कानपुर में हुई हिंसा के पीछे भी डेमोग्राफी में बदलाव को भी वजह माना जा सकता है। पीड़ितों ने बताया था, “हम गिने-चुने हिन्दू इस एक खास क्षेत्र में हैं। हमारे मोहल्ले का नाम चंद्रेश्वर है, जहाँ कुछ सौ हिन्दू रहते हैं। घटना के दिन प्रदर्शन के नाम पर हमारे मोहल्ले को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। वो तो फ़ोर्स की सक्रियता थी कि हम बच गए। 3% हिन्दू ही हैं यहाँ, लेकिन इलाके के 97% मुस्लिमों की आँखों में वो चुभ रहे हैं।”

जहाँगीरपुरी में हुए दंगों के बाद मीडिया वहाँ गई तो पता चला कि किस तरह कबाड़ का कारोबार करने वाले मुस्लिमों ने सरकारी जमीनों से लेकर सड़कों तक को कबाड़ से भर दिया है और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। ‘हनुमान जयंती’ के जुलूस पर हमले वाले इस इलाके में पीड़ितों का कहना था कि अगर पुलिस घटना के दिन सक्रिय न होती तो शायद यहाँ लाशें बिछ जातीं। महिलाएँ आभूषण पहन कर घर से नहीं निकलती हैं। उनके हाथों से मोबाइल भी छीन लिया जाता है। मस्जिद से लेकर कई घर अतिक्रमण कर के बने हैं।

रामनवमी पर गुजरात के हिम्मतनगर में मुस्लिम भीड़ की हिंसा के बाद वहाँ के हिंदू परिवार जान बचाने के लिए वो जगह छोड़ दी। कई ने मंदिरों में शरण ली। होली में बदायूँ के अल्लापुर भोगी में हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच विवाद के बाद पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगा। 30 हिन्दू परिवारों के पलायन की खबर आई। मध्य प्रदेश में रतलाम के सुराना गाँव के हिंदू समुदाय के पलायन की खबरों के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने रिपोर्ट माँगी। राजस्थान के टोंक में 600 हिन्दू परिवारों के पलायन का मुद्दा विधानसभा तक में गूँजा।

इसका खामियाजा अधिकतर दलित हिन्दुओं को भुगतना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में एक मुस्लिम समाज की लड़की गायब हो गई, जिसके बाद कोरी समुदाय के लोगों ने अपने घर के बाहर पलायन के पोस्टर लगाए। उन्हें प्रताड़ित किया गया। उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित कर्नलगंज में 10 हिन्दू परिवारों ने अपने घर छोड़ने का निर्णय लिया, क्योंकि उन पर इस्लाम अपनाने या इलाका छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा था। याद कीजिए, कश्मीर से पंडितों का नरसंहार कर उन्हें पलायन को मजबूर किया गया था। आज भी वहाँ हत्याएँ हो रही हैं।

जुमे (शुक्रवार) को स्कूल में छुट्टियाँ… क्योंकि 70% से अधिक मुस्लिम छात्र: झारखंड के जामताड़ा के 100 स्कूलों में अलग कानून – मीडिया रिपोर्ट

झारखंड के जामताड़ा जिले के कुछ सरकारी स्कूलों में रविवार के बजाय शुक्रवार की छुट्टी दिए जाने की खबर है। दावा किया गया है कि स्कूल के नोटिस बोर्ड पर बाकयदा शुक्रवार को जुमे का दिन घोषित कर के अवकाश लिखा गया है। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा उन स्कूलों को उर्दू स्कूल बताते हुए ऐसा कदम शिक्षकों की सुविधा को देख कर उठाया जाना बताया गया है।

दैनिक जागरण के संवाददाता कौशल सिंह ने इस पूरे मामले की ग्राउंड रिपोर्ट का दावा किया है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार की छुट्टी उन स्कूलों में हो रही है, जहाँ मुस्लिम छात्रों की संख्या 70% से अधिक है। दावे के मुताबिक शासन से उन स्कूलों को शुक्रवार को बंद रखने के आदेश नहीं हैं लेकिन मैनेजमेंट कमिटी के दबाव में वहाँ शुक्रवार को छुट्टी होना एक स्थाई चलन बन चुका है।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा, “पहले गढ़वा में हाथ जोड़ कर प्रार्थना की पद्धति को रोकने की खबर। अब जामताड़ा ज़िले में रविवार के बदले जबरन शुक्रवार को स्कूल बंद कराने के साथ ही सामान्य विद्यालयों पर खुद से उर्दू विद्यालय का बोर्ड लिखवा देना। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, आप झारखंड को किस ओर ले जा रहे हैं?”

जिले के शिक्षा विभाग के दावे के मुताबिक कुल 1084 स्कूलों में मात्र 15 उर्दू स्कूलों में शुक्रवार की छुट्टी हो रही है। लेकिन जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को बंद होने वाले स्कूलों की संख्या 100 से भी अधिक है। इन स्कूलों के मुस्लिम बहुल इलाकों में होने के दावे के साथ आस-पास के लोगों द्वारा स्कूल प्रबंधन पर दबाव भी बनाने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक अनधिकृत रूप से कई स्कूलों के बोर्ड के आगे खुद से ‘उर्दू’ शब्द जोड़ दिया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक बिराजपुर उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय के सचिव दीप नारायण मंडल ने कहा, “लगभग 8 माह पहले स्थानीय ग्रामीणों ने शुक्रवार की छुट्टी के लिए हंगामा किया था। तब हमने विभाग के बड़े अधिकारियों को पत्र भेज कर इसकी जानकारी दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब गाँव वालों के प्रेशर में शुक्रवार को छुट्टी दी जा रही है।” वहीं नावाडीह पंचायत मुखिया के शौहर सज्जाद अंसारी ने शुक्रवार को छुट्टी की व्यवस्था क्षेत्र में काफी लम्बे अरसे से चलना बताया।

जागरण की रिपोर्ट के हवाले से जामताड़ा के जिला शिक्षा पदाधिकारी अभय शंकर ने कहा, “किसी स्कूल के शुक्रवार को बंद होने की जानकारी उन्हें नहीं है। अगर कहीं ऐसा हो रहा होगा तो उसे रोकते हुए आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

ऑपइंडिया ने इन आरोपों की पुष्टि के लिए जामताड़ा के अधिकारियों को सम्पर्क करना चाहा लेकिन वहाँ के DC का फोन नॉट रीचबल आया। जिले के AC और SDO जामताड़ा ने फोन उठाया नहीं और जिला सूचना अधिकारी के पास इस बावत जानकारी न होना बताया गया। उपरोक्त में से किसी का भी अधिकारिक़ वर्जन आने पर हम खबर में उसे अपडेट करेंगे।

आपको बता दें कि झारखंड के ही गढ़वा में एक स्कूल में मुस्लिम समुदाय द्वारा प्रिंसिपल पर इस्लामी नियम लागू करवाने के लिए दबाव बनाया गया। समुदाय के दबाव के चलते स्कूल की प्रार्थना बदल गई है। पहले यहाँ ‘दया का दान विद्या का…’ प्रार्थना करवाई जाती थी। हालाँकि अब ‘तू ही राम है तू ही रहीम’ प्रार्थना स्कूल में होने लगी है। इसके साथ स्कूल में बच्चों को हाथ जोड़ कर प्रार्थना करने से भी मना कर दिया गया है।

बकरीद है बर्बर और घिनौना इस्लामी हत्याकांड: डच सांसद गीर्ट, पैगंबर मुहम्मद और कुरान पर भी उठाए सवाल

आतंक और धार्मिक असहिष्णुता को लेकर बेहद मुखर रहने वाले डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders) ने पशु हिंसा को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है। उन्होंने कहा कि बकरीद के नाम पर मुस्लिमों द्वारा पशुओं की खिलाफ की जाने वाली हिंसा बंद होनी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद (Prophet Muhammad) और मजहबी किताब कुरान (Quran) के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की अपील की।

गीर्ट ने मुस्लिमों के त्योहार बकरीद को लेकर ट्वीट कर कहा, “आज से शुरू हो रहे घिनौने बर्बर इस्लामी बलिदान का त्योहार #ईद हत्याकांड पर रोक लगाओ।” गीर्ट ने इसके साथ ही एक भेड़ की हत्या का वीभत्स फोटो भी साझा किया है।

अपने अन्य ट्वीट में गीर्ट ने कहा कि पैगंबर मुहम्मद और कुरान के खिलाफ लोगों को शिकायत दर्ज करानी चाहिए और अदालत में साबित करना चाहिए कि इसके मूल में हिंसा, भेदभाव और असहिष्णुता है। इसके बिना समाज अधिक स्वतंत्र और सुरक्षित रहेगा।

गीर्ट इस्लाम और जिहाद के नाम पर हिंसक रूप के आलोचक रहे हैं। देश में नूपुर शर्मा को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन और उदयपुर में कन्हैया लाल एवं अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या पर उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ पर सवाल उठाए थे।

गीर्ट ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्हें आग में जलता दिखाया गया है। वीडियो में लिखा हुआ है ‘गीर्ट वाइल्डर्स को सजा दो। हम उसे कभी माफ नहीं करेंगे।’ इसके लिए उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथियों पर निशाना साधा और कहा कि वे कभी किसी के सामने नहीं झुकेंगे।

अपने ट्वीट में गीर्ट ने लिखा, “वे मुझे ये भेजते हैं क्योंकि मैं नूपुर शर्मा और हिंदुत्व का समर्थन करता हूँ तथा हिंसक एवं अधिनायकवादी इस्लामी अवधारणा ईशनिंदा के खिलाफ खड़ा हूँ। लेकिन, मैं इस तरह की बर्बरता के आगे कभी नहीं झुकूँगा और आजादी के लिए अपनी लड़ाई जारी रखूँगा। हमेशा!”

उदयपुर में कन्हैया लाल की गला काटकर हत्या पर गीर्ट ने कहा था कि कट्टरवाद, आतंकवाद और जिहादियों से हिंदुत्व को बचाना जरूरी है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “एक दोस्त होने के नाते मैं भारत को सलाह दे रहा हूँ कि असहिष्णुता के प्रति सहिष्णु होना बंद कीजिए। जिहादियों, आतंकवादियों और कट्टरपंथियों से हिंदुत्व की रक्षा कीजिए। इस्लाम का तुष्टिकरण नहीं करिए, नहीं तो यह बहुत भारी पड़ेगा। हिंदुओं को ऐसे नेता चाहिए जो शत प्रतिशत उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हों।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा है, “भारत में हिंदुओं को सुरक्षित होना चाहिए। यह उनका देश है। उनकी मातृभूमि है। भारत उनका है। भारत कोई इस्लामिक देश नहीं है।” गौरतलब है कि जून की शुरुआत में वाइल्डर्स ने नूपुर शर्मा का समर्थन करते हुए कहा था कि अपराधी और आतंकवादी अपनी धार्मिक असहिष्णुता और घृणा व्यक्त करने के लिए सड़क पर हिंसा करते हैं।

इसके बाद उन्हें कट्टरपंथियों की ओर से धमकी भी मिली थी। इसके स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उन्होंने लिखा था, “यही कारण है कि मैं बहादुर नूपुर शर्मा का समर्थन कर रहा हूँ। जान से मारने की सैकड़ों धमकियाँ। यह मुझे उनका समर्थन करने के लिए और भी अधिक दृढ़ बनाता है। क्योंकि, बुराई कभी नहीं जीत सकती। कभी नहीं।”

गीर्ट ने कहा था कि इस्लाम (Islam) असहिष्णु है और इसकी विचारधारा दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने कहा था कि भारत से माफी माँगने वाले मुल्क देश बेहद क्रूर शरिया शासन से संचालित होतेे हैं और उनका मानवाधिकार का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब है।

वाइल्डर्स ने कहा था कि जो मुल्क अपने यहाँ के अल्पसंख्यकों की हत्या कर देते हैं और उन्हें जेल में डाल देते हैं, वे कानून द्वारा शासित एक लोकतांत्रिक देश से माफी की माँग करते हैं तो यह सबसे बड़ा पाखंड है। उन्होंने कहा कि दुनिया जानती है कि ईरान, कतर, सऊदी अरब जैसे इस्लामिक अपने अल्पसंख्यकों को कितना प्रताड़ित करते हैं। उन्होंने इस्लामिक देशों को सबसे बड़ा पाखंडी बताया।

हॉलैंड की सबसे बड़़ी पार्टी के प्रमुख और वहाँ की संसद में विपक्ष के नेता वाइल्डर्स ने एक अन्य ट्वीट में कहा था, “केवल अपराधी और आतंकवादी अपनी धार्मिक असहिष्णुता और घृणा व्यक्त करने के लिए सड़क पर हिंसा का उपयोग करते हैं। असहिष्णु के प्रति सहिष्णु होना बंद करो। हम जीवन को संजोते हैं, वे मृत्यु को संजोते हैं।”

अलीगढ़ के नूरपुर में मस्जिद के सामने से गुजरी हिंदुओं की बारात, कट्टरपंथी मुस्लिमों ने फेंके अंडे: UP पुलिस ने मस्जिद वाली बात नकारी

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ (Aligarh, Uttar Pradesh) में एक बार फिर हिंदू (Hindu) लड़की की शादी में मस्जिद (Masjid) के सामने बारातियों पर अंडे फेंकने की घटना मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है। इतना ही नहीं, बारातियों से गाली-गलौज की गई और जातिसूचक शब्द कहे गए। कट्टरपंथी मुस्लिमों की इस करतूत के बाद गाँव में तनाव का माहौल बन गया है। स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात है।

मामला अलीगढ़ के टप्पल के नूरपुर गाँव का है। यहाँ गुरुवार (7 जुलाई 2022) को हिंदू परिवार की दो लड़कियों की बारात आई हुई थी। जाटव समाज के धर्मवीर अपनी दोनों बेटियों की शादी एक साथ ही कर रहे थे। एक बारात दनकौर के गाँव अच्छेजा और दूसरी बारात दनकौर के ही खरेली गाँव से आई थी।

रात 10 बजे बाराती बारात लेकर लड़की के घर जा रहे थे और रास्ते में बाजा बजा रहे थे और नाच-गान हो रहा था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसी दौरान जब बारात एक मस्जिद के सामने से गुजरी तो कुछ कट्टरपंथी मुस्लिमों ने अपने छतों से बारातियों पर अंडे फेंकने शुरू कर दिए। इससे लोगों के कपड़े खराब हो गए और उनमें अफरा-तफरी मच गई।

लोगों ने जब इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। इतना ही नहीं, मुस्लिम समाज के दंगाइयों ने जाटव समाज के लोगों पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उनके लिए अपमानजनक बातें कहीं।

स्थिति को देखते हुए लोगों ने पुलिस को सूचना दी। बकरीद से पहले माहौल को बिगाड़ने की कोशिश को देखते हुए पुलिस प्रशासन तुरंत मौके पर पहुँच गया। स्थिति को भाँपते हुए प्रशासन ने लोगों को समझा-बुझाकर लोगों को शांत कराया। मीडिया रिपोर्टों के उलट यूपी पुलिस का कहना है कि बारात जिस मार्ग से गई, उसमें कहीं भी मस्जिद नहीं है।

गाँव के राजवीर सिंह ने चार लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। टप्पल थाने में दी गई तहरीर में अंसार, शाहरुख, अमजद और सउआ नामजद किया गया है। तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ एससी-एसटी ऐक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। एसपी देहात पलाश बंसल ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

गाँव के लोगों का कहना है कि मुस्लिम मस्जिद के सामने से बारात ले जाने का विरोध करते रहते हैं। बता दें कि केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में भी टप्पल-जट्टारी में हिंसा हुई थी।

बता दें कि यह पहली बार नहीं है मुस्लिमों ने हिंदुओं की बारात पर हमला किया। इससे पहले भी कई बार मुस्लिमों ने हिंदू समाज की बेटियों की बारात का विरोध किया था। उन्होंने मस्जिद के सामने से बारात निकालने, दुल्हा को घोड़ी पर चढ़ने, बैंड वालों को बाजा बजाने और बारातियों को नाचने-गाने से रोक दी थी। इसके बाद जमकर मारपीट की गई थी।

इसके बाद हिंदू समाज के कई लोगों ने अपने घरों के सामने ‘मकान बिकाऊ है’ के बोर्ड लगा दिए थे। इसके बाद यह गाँव देश भर में चर्चा में आ गया था। हालाँकि, इस घटना को बार-बार दोहराया जा रहा है।