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‘हिजाब के लिए लड़कियों का प्रदर्शन राजनीति, शिक्षा का केंद्र मजहबी जगह नहीं’: बुर्के को मौलिक अधिकार बताने पर भड़के कर्नाटक के शिक्षा मंत्री

कर्नाटक (Karnataka) के उडुपी जिले के प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज की कुछ मुस्लिम छात्राएँ क्लास के अंदर हिजाब (Hijab) पहनने की जिद पर अड़ी हुई हैं और इसके लिए लगातार प्रदर्शन कर रही हैं। ये छात्राएँ इस्लामीकरण के प्रतीक हिजाब को अपना मौलिक अधिकार बता रही हैं। वहीं, कक्षा में हिजाब पहनने को अनुशासनहीनता बताते हुए राज्य के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश ने कहा है कि छात्राओं को बहकाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि कॉलेज में 30 साल से यूनिफॉर्म की व्यवस्था लागू है, लेकिन कभी कोई दिक्कत नहीं हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार (20 जनवरी 2022 ) को भी हिजाब पहनने की माँग को लेकर कॉलेज के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए मुस्लिम छात्राएँ कॉलेज के गेट पर खड़ी रहीं। इन्होंने अपने हाथ में प्लेकार्ड ले रखे थे। छात्राओं में से एक हाजरा ने कहा, “हिजाब पहनना हमारा मौलिक अधिकार है और कॉलेज के अधिकारियों को हमें रोकना नहीं चाहिए।” लड़कियों ने कहा कि उन्हें 31 दिसंबर से कक्षाओं में जाने की अनुमति नहीं दी गई।

लड़कियों के इस विरोध प्रदर्शन पर राज्य के प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री बीसी नागेश (BC Nagesh) ने हिजाब के मुद्दे को पूरी तरह से राजनीतिक करार दिया। उन्होंने छात्राओं से यूनीफॉर्म के संबंध में नियमों का पालन करने की अपील करते हुए कहा कि वर्ष 1985 से इस नियम का पालन अनवरत रूप से किया जा रहा है। कॉलेज और स्कूल धर्म का पालन करने की जगह नहीं है। मंत्री के मुताबिक, अगर कक्षा के अंदर छात्राओं का हिजाब पहनना अनुशासनहीनता होगी, क्योंकि अगर ऐसा करने की इजाजत दी गई तो दूसरे स्टूडेंट भी ऐसी ही माँग कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “संस्था में सौ से अधिक मुस्लिम बच्चे पढ़ रहे हैं, जिन्हें कोई समस्या नहीं है। केवल कुछ ही विद्यार्थी विरोध कर रहे हैं। स्कूलों और कॉलेजों को धार्मिक केंद्रों में नहीं बदलना चाहिए।” मंत्री ने ये भी कहा कि सिर्फ मुस्लिमों को ही नहीं केसरिया शॉल भी कक्षा में प्रतिबंध है। बहरहाल, छात्राओं के इस विरोध प्रदर्शन के बीच कॉलेज प्रशासन के अधिकारियों ने एक बार फिर से छात्राओं से बात की, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

गौड़ा ने कहा कि इन छात्राओं को 1.5 साल पहले तक कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन अब होने लगी। उन्होंने कहा कि कक्षा सुबह 9.30 बजे से शाम 4 बजे तक होती है। कक्षा शुरू से पहले और बाद में छात्राएँ हिजाब या बुर्का पहन सकती हैं, लेकिन जैसे ही कक्षा शुरू होगी, इन्हें उतारना होगा। यूनीफॉर्म पॉलिसी का पिछले 37 सालों से पालन किया जा रहा है।

छात्राओं का यह भी आरोप है कि उन्हें उर्दू में बात करने की अनुमति ना देकर उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 1985 में शुरू हुए इस कॉलेज में 700 विद्यार्थी हैं, जिनमें 70 मुस्लिम हैं। ये कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम में पढ़ाई कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारी छात्राओं का समर्थन कर रहा इस्लामिक संगठन

इस्लामिक संगठन कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया के स्टेट कमेटी के सदस्य मसूद मन्ना ने इसे धार्मिक भेदभाव बताया है। इस मामले में कहना है कि उन्होंने कॉलेज प्रशासन से इस मामले में मिलकर बात की थी। उन लोगों ने उडुपी के कलेक्टर से भी बात की है। केवल कॉलेज के प्रिंसिपल को हिजाब पहनने से दिक्कत है। मसूद ने कहा कि मुस्लिमों के साथ धार्मिक भेदभाव किया जा रहा है।

कब से चल रहा है यह मामला

पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा किया गया है।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

‘सलमान खान के फार्म हाउस में गड़ी हैं लाशें, बच्चों की तस्करी में भी शामिल’: अभिनेता के वकील ने कहा- झगड़े में मजहब को घसीट रहे पड़ोसी

अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) और उनके पड़ोसी केतन कक्कड़ के बीच विवाद चर्चा में है। अभिनेता का कहना है कि कक्कड़ बिना मतलब इस झगड़े में उनके मजहब को घसीट रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कर रखा है। मुंबई सिटी सिविल कोर्ट में एडिशनल सेशन जज अनिल एच लड्ढा ने गुरुवार (20 जनवरी 2022) को इस पर सुनवाई की। इस दौरान सलमान खान की ओर से पेश वकील प्रदीप गाँधी ने कोर्ट के सामने कक्कड़ द्वारा लगाए गए आरोप रखे और आपत्तिजनक सामग्रियों को सोशल मीडिया से हटाने के लिए निर्देश देने की अपील की।

असल में पनवेल में सलमान का एक फार्म हाउस है। यहीं पिछले दिनों उन्हें साँप ने काट लिया था। कक्कड़ का भी इसके बगल में एक प्लॉट है। उनका दावा है कि प्लॉट तक जाने के रास्ते को अभिनेता ने ब्लॉक कर दिया है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक वकील प्रदीप गाँधी ने अदालत में कक्कड़ के पोस्ट और इंटरव्यू पढ़कर सुनाए। उन्होंने बताया कि केतन ने आरोप लगाया है कि सलमान ‘डी गैंग के फ्रंट मैन’ हैं। सलमान के धर्म पर टिप्पणी की। उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर के नेताओं का करीबी बताया। यह भी दावा किया कि सलमान बच्चों की तस्करी में शामिल हैं और उनके फार्म हाउस में कई फिल्म स्टार्स की लाशें दफन हैं।

गाँधी ने कहा, “बिना किसी सबूत ये आरोप लगाए गए। ये सारे आरोप केतन कक्कड़ की कल्पना की उपज हैं।” उन्होंने कहा कि एक शिक्षित व्यक्ति होने के बावजूद कक्कड़ उनके मुवक्किल पर इस तरह के गुंडाछाप आरोप लगा रहे हैं। उनकी व्यक्ति प्रतिष्ठा को खराब कर रहे हैं। उनके धर्म को झगड़े के बीच में ला रहे हैं, जबकि सलमान की माँ एक हिंदू हैं। उनके भाइयों ने हिंदुओं से शादी की है। उनका परिवार सारे त्योहार मनाता है।

यह बताते हुए कि सलमान खान का राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है, गाँधी ने कहा, “आजकल सबसे आसान काम कुछ लोगों को इकट्ठा करना, सोशल मीडिया पर आना और अपना सारा गुस्सा निकालना है।” उन्होंने मामले में यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर और सर्च इंजन गूगल को पक्षकार बनाने तथा ‘अपमानजनक सामग्री’ को हटाने का निर्देश देने की अपील अदालत से कह। कहा कि अभिनेता या उनके फार्महाउस के बारे में अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने या प्रकाशित करने से रोकने के लिए वे एक स्थायी आदेश चाहते हैं।

‘मेरी पत्नी को मौलानाओं ने मारपीट कर घर से निकाल दिया, जिहादी उसकी हत्या भी कर सकते हैं’: जितेंद्र त्यागी (वसीम रिजवी) ने जेल से लगाई गुहार

हरिद्वार धर्म संसद मामले में जेल में बंद जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी ने आरोप लगाया है कि उनके परिवार को तंग किया जा रहा है और कुछ जिहादी लोग उनकी पत्नी की हत्या करना चाहते हैं। जितेंद्र त्यागी ने ट्वीट कर लोगों से मदद माँगी है।

जितेंद्र त्यागी ने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए लिखा, “मैं जेल में हूँ, उधर मेरी पत्नी को मौलानाओं ने मारपीट कर अपने घर से बाहर निकाल दिया। उनका साथ दिया यूपी पुलिस के ASI ज़ैदी ने। आप लोग मेरे परिवार का साथ दें, जिहादी मेरी पत्नी की हत्या भी कर सकते हैं। वे मेरे परिवार को डरा रहे हैं। मैं जेल में बंद हूँ, आप लोग ही न्याय करें।”

इसके साथ ही जितेंद्र त्यागी ने ट्वीट में उनकी पत्नी फरहा फातिमा के द्वारा पुलिस के सामने की गई शिकायत की फोटो कॉपी भी साझा की है। फरहा फातिमा ने इस बारे में सआदतगंज थाना अध्यक्ष को पत्र लिखा है।

पत्र में कहा गया है, “20 जनवरी शाम साढ़े 5 बजे के आसपास मेरे घर में कुछ काम चल रहा था, जिसमें मेरी ममेरी बहन निदा फातिमा (पुत्री रईस हुसैन) व अन्य घर में कुछ काम करवा रही थी। अचानक से शमील शम्सी, मीसम रिजवी, शबाब असगर, नकी हुसैन उर्फ अमित, गुलशन अब्बास, शहजाद, कियान रिजवी फैजी व सलमान मेरे घर में घुस आए और मेरी ममेरी बहन निदा का काम करने वाले बढाई से गाली- गलौज करने लगे।”

जितेंद्र त्यागी द्वारा शेयर किया गया शिकायत पत्र

उन्होंने शिकायत पत्र में लिखा, “मेरी बहन ने इसकी सूचना मुझे दी। मैंने तुरंत थाना सआदतगंज को फोन करके बता दिया और घर की तरफ भागी। मेरे समर्थन में मेरी छोटी बहन अमरीन पत्नी नूर आलम व भाभी उजमा बानो पत्नी सईद रिजवी भी पहुँची। वहाँ पहुँचते ही जो लोग वहाँ पहले से मौजूद थे जिनके नाम मैं पहले लिख चुकी हूँ, मेरे साथ भी धक्का मुक्की व गाली-गलौज करने लगे, जबकि वहाँ मौजूद SI जैदी खड़े मूकदर्शक बने देखते रहे और मैं मिन्नतें करती रही।”

फरहा फातिमा ने आगे बताया है, “SI जैदी ने जबरन मुझसे मेरे घर की चाबी ले ली और हम सबको घर से निकाल बाहर कर दिया। मैं एक मजबूर महिला मेरे एक सात साल का पुत्र है और मैं अकेली रहती हूँ। मेरा पति जेल में है मेरा कोई सहारा नहीं हैं, मैं किसी तरह अपना जीवन यापन कर रही हूँ। इन हालातों में ऐसी घटना मेरे साथ होना घोर निंदनीय है। अतः श्रीमान जी से निवेदन यह है कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्यवाही करने की कृपा करें।”

आपको बता दें कि जितेंद्र नारायण त्यागी पूर्व के वसीम रिजवी हैं तथा इस्लाम त्याग कर सनातन में घर वापसी कर चुके हैं। ते दिनों हरिद्वार पुलिस ने जितेंद्र त्यागी उर्फ़ वसीम रिजवी को रुड़की के नारसन बॉर्डर से हरिद्वार की सीमा में प्रवेश करने पर गिरफ़्तार कर लिया था। रिजवी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153A के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। वसीम रिजवी के खिलाफ एक किताब के विमोचन कार्यक्रम के दौरान पैगंबर मुहम्मद को लेकर विवादित टिप्पणी करने को लेकर एक मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में उनके खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए गए थे। हरिद्वार में भड़काऊ भाषण देने के मामले में कोर्ट ने वसीम रिजवी उर्फ ​​जितेंद्र त्यागी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। गुरुवार (20 जनवरी 2022) को हरिद्वार कोर्ट में जितेंद्र त्यागी की याचिका भी खारिज कर दी गई।  

‘मेरे अलावा कोई और दिख रहा है’: यूपी में कॉन्ग्रेस के CM फेस पर बोलीं प्रियंका गाँधी, सरकार बनने पर 20 लाख नौकरियों का वादा

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस (Congress) पार्टी ने घोषणा-पत्र (Election Manifesto) जारी कर दिया है। राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी (Rahul Gandhi And Priyanka Gandhi) द्वारा जारी इस घोषणा-पत्र में पार्टी ने 8 सूत्रीय एजेंडा सेट किया है और इसे ‘भर्ती विधान’ नाम दिया है। इस दौरान प्रियंका गाँधी ने कहा कि प्रदेश में भर्ती सबसे बड़ी समस्या है, इसलिए अपने घोषणा-पत्र को भर्ती विधान नाम दिया है।

प्रियंका गाँधी ने कहा, “हम प्रदेश के 20 लाख युवाओं को नौकरियाँ देंगे, जिनमें से 8 लाख नौकरियाँ आरक्षण के तहत महिलाओं को दी जाएँगी।” उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी ने आम लोगों से बातचीत कर इस घोषणा-पत्र को तैयार किया है। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में धाँधली से लोग परेशान हैं। घोषणापत्र में एक अलग से सेक्शन बनाया गया है, जो युवाओं के भविष्य निर्माण का कार्य करेगा।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि कुछ सालों से प्रदेश के विश्वविद्यालयों में चुनाव नहीं हो रहे हैं, जिससे युवाओं को मौका नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने घोषणा-पत्र को प्रदेश के 7 करोड़ युवाओं की आकांक्षाओं का दस्तावेज बताया। वहीं, राहुल गाँधी ने प्रतियोगी परीक्षाओं में लगने वाले शुल्क को खत्म करने का वादा किया है।

वीडियो के 38वें मिनट में कॉन्ग्रेस के सीएम फेस को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रियंका गाँधी ने कहा, “आपको किसी और का चेहरा दिख रहा है?” उन्होंने कहा कि ‘हर तरफ मेरा चेहरा दिख रहा है।’ इस दौरान उन्होंने तौकीर रजा के बयान से भी किनारा कर लिया। प्रियंका गाँधी ने कहा कि हमारी विचारधारा अलग है। तौकीर रजा कॉन्ग्रेस पार्टी में नहीं हैं।

पत्रकारों ने कॉन्ग्रेस महासचिव से सवाल किया कि वो केवल यूपी में महिलाओं की बात करती हैं, बाकी राज्यों में इस पर बात क्यों नहीं करती हैं? इस पर प्रियंका गाँधी ने गोलमोल जवाब दिया और कहा कि वो केवल यूपी की प्रभारी हैं।

रोजगार पर राहुल का ज्ञान

वीडियो के 31वें मिनट के दौरान राहुल गाँधी ने रोजगार के मुद्दे पर बात की। उन्होंने कहा कि रोजगार दो तरह के होते हैं सरकारी और प्राइवेट सेक्टर। राहुल गाँधी ये बताने की बजाय कि रोजगार कैसे मिलेगा? उन्होंने कॉन्ग्रेस शासित राज्यों का हवाला दिया और कहा, “वहाँ आप देख सकते हैं कि हम वादा करते हैं और सरकारी नौकरियाँ देते हैं।”

प्राइवेट सेक्टर पर उन्होंने कहा कि ये छोटे सेक्टर से आता है, जिसे मोदी सरकार खत्म करने में लगी है। जबकि, छोटे कारोबारियों, दुकानदारों को बढ़ावा देने के लिए ही मोदी सरकार ने मुद्रा लोन और स्टार्टअप्स योजना की शुरुआत की थी, जिसके जरिए युवा भी अपने कारोबार की शुरुआत कर सकते हैं।

‘यह मकान बिकाऊ है, मुसलमानों के आतंक से’: मार डाले गए दलित हीरालाल के घर पर लगा पोस्टर, दावा- हत्यारा इरफान AAP का वर्कर

दिल्ली के सुल्तानपुरी में दलित हीरालाल गुजराती की इरफान सिद्दीकी और उसके भाई सानू ने 17 जनवरी 2022 को हत्या कर दी। इरफान कुछ दिन पहले ही जेल से बाहर निकला था। हीरालाल की बहन के साथ रेप करने के आरोप में वह जेल में बंद था। पीड़ित परिवार का कहना है कि आरोपितों के संबंध आम आदमी पार्टी (AAP) के स्थानीय विधायक मुकेश अहलावत से हैं। हालाँकि ऑपइंडिया से बातचीत में आप विधायक ने दावा किया है कि उन्होंने इरफान को छह महीने पहले ही पार्टी से निकाल दिया था। इलाके में इरफान के खौफ का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि हीरालाल की हत्या के बाद उनके घर पर एक पोस्टर चिपका दिया गया है। इस पर लिखा हुआ है- यह मकान बिकाऊ है, मुसलमानों के आतंक से।

सुल्तानपुर माज़रा से आप के विधायक मुकेश अहलावत ने ऑपइंडिया से कहा, “इरफ़ान हमारा कार्यकर्ता था। पर हमने उसको 6 महीने पहले ही निकाल दिया था। मेरे साथ उसकी वायरल हो रही फोटो पुरानी है।” वहीं बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने एक ट्वीट कर कहा है कि हत्यारा AAP का नेता है। उन्होंने एक बोर्ड की तस्वीर भी शेयर की है, जिस पर इरफान सिद्दीकी को आप के माइनॉरिटी विंग का अध्यक्ष बताया गया है। मिश्रा ने लिखा है, “अपनी सगी बहन की इज्जत-आबरू के लिए आवाज उठाना भी अब मुश्किल? दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में 17 जनवरी को हीरा गुजराती को सरेआम चाकू से और गोलियों से मोहम्मद इरफान ने मार दिया। इरफान अपराध के अन्य मामलों में जेल से पैरोल पर बाहर आया था।”

इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों ने प्रदर्शन भी किया है। बीजेपी के युवा नेता विशाल सिंह ने सुल्तानपुरी थाने के पास विरोध प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया में शेयर किया है।

हीरालाल के घर पर जो ऑपइंडिया ने देखा

ऑपइंडिया ने इस मामले की जमीनी पड़ताल की। ऑपइंडिया की टीम 20 जनवरी (गुरुवार) शाम लगभग 5.30 पर मृतक हीरालाल के घर पहुँची। मृतक का घर सुल्तानपुरी के बी ब्लॉक में पड़ता है। बगल की ही गली में आरोपितों का भी घर है। पीड़ित के घर से लगी सड़क पर सरकारी गर्ल्स स्कूल भी है।

बी ब्लॉक चौराहे पर विश्व हिन्दू परिषद ने हीरालाल की हत्या के विरोध में एक बोर्ड लगा रखा है। उस बोर्ड में 20 जनवरी को 11 बजे जनआक्रोश प्रदर्शन का आह्वान था। साथ ही बड़े-बड़े शब्दों में ‘हीरा के हत्यारों को फाँसी दो’ और ‘नरसिंह को इन्साफ दो’ लिखा हुआ था। उल्लेखनीय है कि जब हीरालाल की हत्या की गई तब 42 वर्षीय न​रसिंह भी उनके साथ थे। उन्हें भी गोली लगी है और उनका इलाज चल रहा है।

बी ब्लॉक चौराहे सुल्तानपुरी पर लगा VHP का बोर्ड

जिस गली में हीरालाल का घर है वहाँ दिल्ली पुलिस के कुछ जवान तैनात दिखे। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि इनकी तैनाती घटना के बाद की गई है। मौके पर PCR गश्त लगाती दिखी। जवानों की तैनाती गली के अंदर और बाहर सड़क पर थी।

मृतक का घर हरे रंग में रंगा हुआ है। घर के आगे महादेव शिव की तस्वीर लगी हुई है। भगवान की तस्वीर से ऊपर अरविन्द केजरीवाल का स्टीकर दिखाई दिया। उसमें लिखा था, “अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल”। घर के दूसरी तरफ लाल रंग के पोस्टर में लिखा था, “यह मकान बिकाऊ है। मुसलमानों के आतंक से। हीरा की हत्या के डर के कारण।” दोनों पोस्टरों के बारे में जब मृतक के परिवार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि केजरीवाल का स्टीकर काफी पहले से लगा है। पलायन वाला पोस्टर हीरालाल की हत्या के बाद लगाया गया है।

मृतक के घर पर लगा पोस्टर

हीरालाल की माँ कुछ महिलाओं के साथ घर के आगे मौजूद खाली जगह में लगे टेंट में बैठी थीं। उन्होंने बताया, “यहाँ के नेता मदद करवा रहे हैं। उसी ने जमानत करवाई है। यहाँ का विधायक है मुकेश अहलावत। मेरे बेटे को मारने वाले इरफान और सानू उसी के वर्कर हैं।” आसपास के लोग भी मौके पर जमा थे। घर के अंदर से महिलाओं के रोने की आवाजें आ रही थी।

हीरालाल का घर

‘इरफान यहाँ के लिए कैंसर से ज्यादा बड़ी समस्या’

ऑपइंडिया ने मृतक हीरालाल के भतीजे और हत्या मामले के शिकायतकर्ता अर्जुन से बात की। अर्जुन ने बताया, “इरफ़ान और शानू पीछे गली में रहते हैं। वो सट्टा चलाते थे। मेरी बुआ के रेप केस में इरफान 4 महीने में छूट गया। इरफान यहाँ के लिए कैंसर से ज्यादा बड़ी समस्या बना हुआ है। इसे यहाँ के आम आदमी पार्टी विधायक मुकेश अहलावत का पूरा सपोर्ट है। हमें बताया गया कि इरफान को कोरोना के चक्कर में छोड़ा गया है। यहाँ पर सिर्फ इरफान का ही घर मुस्लिम का है। बाकी सभी हमारी बिरादरी गुजराती समाज के लोग हैं। हम SC समुदाय से हैं। हमें अभी तक दिल्ली सरकार से कोई भी सहयोग नहीं मिला। हमारे समाज के ही दूसरे व्यक्ति को भी गोली मारी गई है। उसे एम्स में भर्ती करवाया गया है।”

‘इरफान सट्टा चलाता था, बंदूकें बेचता था’

अर्जुन ने आगे बताया, “हत्या के बाद इरफान के घर वालों द्वारा माफ़ी माँगना तो दूर उनके परिवार वाले हमारे घर पर मारने तक पहुँच गए थे।” इसी केस में घायल नरसिंह के भाई ने बताया, “उन (इरफ़ान) की माँ, उनके 2 भाई, उसने 8-10 बाहरी आदमी बुला रखे थे। उनके हाथों में लट्ठ थे। उस समय हम अस्पताल में थे। हम अपने आदमियों को देखते या लड़ाई-झगड़ा करते।” मृतक हीरालाल की बड़ी बहन तोशी ने ऑपइंडिया को बताया, “इरफ़ान सट्टा चलाता था और UP से बंदूकें लाकर इधर बेचता था। उसे इरफान और सानू ने मार डाला।”

गौरतलब है कि 38 वर्षीय हीरालाल तीन बच्चों के पिता थे। चिड़ियों को बेचने का कारोबार कर परिवार को पालते थे। उनका परिवार मूल रूप से गुजरात के अहमदाबाद का रहने वाला है और करीब तीन दशक से दिल्ली में रह रहा है। मृतक की पत्नी ने ऑपइंडिया को बताया कि इरफान का उनके घर आना-जाना था। इसी का फायदा उठाकर पहले उसने उनकी ननद से रेप किया। इस मामले में जेल जाने के बाद से वह उनके परिवार को लगातार धमका रहा था।

सायना नेहवाल पर सेक्सुअल कमेंट कर माफी माँगने के बाद भी सिद्धार्थ की कम नहीं हो रही मुश्किलें, चेन्नई पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया

बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल (Saina Nehwal) के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में एक्टर सिद्धार्थ सूर्यनारायण (Siddharth Suryanarayan) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। एक्टर के खिलाफ दो शिकायतें मिलने के बाद गुरुवार (20 जनवरी 2022) को तमिलनाडु की चेन्नई पुलिस (Chennai Police) ने सिद्धार्थ को तलब किया। इस मामले में हैदराबाद में एक्टर के खिलाफ दर्ज शिकायतों का हावाला देते हुए चेन्नई के पुलिस कमिश्नर शंकर जीवाल ने कहा कि इस प्रकरण में केवल अभिनेता के खिलाफ मानहानि की कार्रवाई की जा सकती है, कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं हो सकता।

पुलिस कमिश्नर ने कहा, “बयान दर्ज कराने के लिए हमने एक्टर सिद्धार्थ को समन जारी किया है।” उन्होंने कहा कि अभिनेता की विवादित टिप्पणियों के लिए दो शिकायतें मिली हैं, जिनमें उनके खिलाफ मानहानि का केस किया जा सकता है।

सायना नेहवाल पर सेक्सुअल कमेंट करने के मामले में 12 जनवरी 2022 को हैदराबाद साइबर पुलिस ने सिद्धार्थ के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 67 और आईपीसी की धारा 509 (एक महिला के शील का अपमान) के तहत एफआईआर दर्ज किया था। उनके खिलाफ ये शिकायत प्रेरणा तिरुवैपति और नीलम भार्गव राम ने करवाई थी।

क्या कहा था एक्टर सिद्धार्थ सूर्यनारायण ने

गौरतलब है कि 5 जनवरी 2022 को पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र की सुरक्षा में चूक को गंभीर बताते हुए सायना ने ट्वीट किया था। उनके इस ट्वीट के बाद एक्टर सिद्धार्थ ने सायना के खिलाफ अश्लील और सेक्सुअल कमेंट किया था। सिद्धार्थ ने लिखा था, “दुनिया की छोटी कॉक चैंपियन… ईश्वर का शुक्र है हमारे पास भारत के रक्षक हैं।”

मालूम हो कि ‘कॉक’ शब्द का प्रयोग अमूमन लिंग के लिए भी किया जाता है, बावजूद इसके सिद्धार्थ का इस शब्द को इस्तेमाल करना बताता है कि उनकी मंशा बदजुबानी की ही थी। उन्होंने कॉक शब्द का यूज नेहवाल के साथ उनके खेल का मजाक उड़ाने के लिए प्रयोग किया था।

हालाँकि, सिद्धार्थ के इस घटिया कमेंट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें खूब लताड़ा। आलोचना के बाद सिद्धार्थ ने अपने ट्वीट को जस्टिफाई करने की कोशिश भी की। इसके साथ ही उन्होंने बैडमिंटन चैंपियन को एक ओपन लेटर लिखकर अपने व्यवहार के लिए माफी भी माँगी।

खुद को नारीवादी अभियान का भागीदार बताते हुए सिद्धार्थ ने कहा था कि उन्होंने मजाक किया था और किसी का अपमान करना उनका इरादा नहीं था। एक्टर ने पत्र में लिखा, “सायना, मैं अपने कठोर जोक के लिए आपसे माफी माँगना चाहता हूँ, जिसे मैंने आपके ट्वीट की प्रतिक्रिया में कुछ दिन पहले लिखा था। मैं आपकी कई बातों पर सहमत नहीं होता हूँ, लेकिन आपका ट्वीट पढ़ने के बाद मेरी नाराजगी या गुस्सा, मेरे शब्दों या लहजे को जस्टिफाई नहीं कर सकता। मुझे मालूम है कि मैं उससे अच्छा कह सकता था। रही बात मजाक की तो अगर उस मजाक को समझाना पड़े तो जाहिर है वो अच्छा जोक नहीं है। मैं उस मजाक की माफी माँगता हूँ जो सही से नहीं पहुँच पाया।”

वहीं, सायना नेहवाल ने इस मामले को वहीं पर रोकने की कोशिश करते हुए सिद्धार्थ के माफीनामे पर कहा था कि मामला महिलाओं का है। सायना ने कहा, “उन्होंने पहले कहा और अब माफी माँग रहे हैं। उन्हें महिलाओं को इस तरह से टारगेट नहीं करना चाहिए, लेकिन कोई बात नहीं। मैं अपनी जगह खुश हूँ। भगवान उनका भला करें।”

हालाँकि, यह मामला यहीं नहीं शांत हुआ। इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी ट्विटर इंडिया से सिद्धार्थ के अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए लिखा था। इसके साथ ही NCW ने महाराष्ट्र पुलिस को पत्र लिखकर अभिनेता सिद्धार्थ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की थी।

इंडिया गेट पर अब होंगे नेताजी सुभाष चंद्र बोस, PM मोदी ने दिखाई झलक: ‘अमर जवान ज्योति’ पर भी राहुल गाँधी ने फैलाया झूठ

हाल ही में विदेश से लौटे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने शुक्रवार (21 जनवरी। 2022) को, इंडिया गेट पर 50 वर्षों से जल रही ‘अमर जवान ज्योति’ की अनवरत जलने वाली अग्नि को लेकर झूठ और अफवाह फैलाने के लिए एक ट्वीट किया। वहीं अमर जवान ज्योति को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विलय किए जाने के फैसले पर मचे विवाद के बीच पीएम मोदी ने एक और बड़ा ऐलान करते हुए देश को बताया कि इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य प्रतिमा लगाई जाएगी।

जहाँ राहुल गाँधी ने ट्वीट कर मोदी सरकार पर यह आरोप लगाया, “बहुत दुख की बात है कि हमारे वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी, उसे आज बुझा दिया जाएगा। कुछ लोग देशप्रेम व बलिदान नहीं समझ सकते- कोई बात नहीं… हम अपने सैनिकों के लिए अमर जवान ज्योति एक बार फिर जलाएँगे!” वहीं पीएम मोदी ने ट्वीट कर इंडिया गेट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भव्य मूर्ति लगाए जाने जानकारी दी है।

PM मोदी ने ट्वीट में कहा, “ऐसे समय जब पूरा देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती मना रहा है, मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ग्रेनाइट से बनी उनकी भव्य प्रतिमा इंडिया गेट पर स्थापित की जाएगी। यह उनके प्रति भारत के ऋणी होने का प्रतीक होगा।” साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा, “जब तक नेताजी की भव्य प्रतिमा का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक उनकी होलोग्राम प्रतिमा उसी स्थान पर मौजूद रहेगी। मैं नेताजी की जयंती 23 जनवरी को होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करूँगा।

वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने भी राहुल गाँधी की सुर में सुर मिलाते हुए विरोध किया है। महाविकास अघाड़ी सरकार में कॉन्ग्रेस की सहयोगी शिवसेना ने भी अमर जवान ज्योति को लेकर सवाल किया। शिवसेना नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने एक ट्वीट में दावा किया, “अमर ज्योति कुछ समय में बुझ जाएगी। एक ‘नए भारत’ के लिए रास्ता बनाने के लिए ऐसे कितने विचार और स्मारक पर काम होना बाकी है? उदास और व्यथित हूँ। #अमर जवान ज्योति। कृपया कोई युद्ध स्मारक में इसे एक और लौ के साथ मिलाने वाला ज्ञान मुझे न दें। हम दोनों को क्यों नहीं रख सकते?”

यहाँ यह उल्लेख करना जरूरी है कि इंडिया गेट का अनावरण ब्रिटिश सरकार द्वारा 12 फरवरी, 1931 को ब्रिटिश भारतीय सेना के 70,000 सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया था, जिनकी मृत्यु 1914-1921 के बीच हुई थी। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद, इंदिरा गाँधी सरकार ने अमर जवान ज्योति को इंडिया गेट स्थापित करवाया।

भारत सरकार ने राहुल गाँधी के फर्जी दावों को खारिज किया

राहुल गाँधी के आरोप के बाद कि मोदी सरकार अमर जवान ज्योति की अमर लौ को बुझा देगी, सरकार के सूत्रों ने कॉन्ग्रेस नेता और उनके समर्थकों के दावों को खारिज कर दिया। डीडी न्यूज से बात करते हुए, एक सूत्र ने बताया, “#AmarJawanJyoti की लौ के बारे में बहुत सारी गलत सूचनाएँ फैल रही हैं, अमर जवान ज्योति की लौ को बुझाया नहीं जा रहा है। इसे #नेशनल वॉर मेमोरियल की ज्वाला से मिलाया जा रहा है।”

सूत्र ने आगे कहा, “इंडिया गेट पर अंकित नाम केवल कुछ शहीदों के हैं जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध और एंग्लो अफगान युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़ाई लड़ी थी और इस तरह यह हमारे औपनिवेशिक अतीत का प्रतीक है। 1971 और उसके पहले और बाद के युद्धों सहित सभी युद्धों के सभी भारतीय शहीदों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में अंकित किए गए हैं। इसलिए वहाँ शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करना एक सच्ची श्रद्धांजलि है।”

सेवानिवृत्त सेना जनरल सतीश दुआ, जो राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (एनडब्ल्यूएम) के डिजाइन चयन और निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा थे, इंडिया गेट और एनडब्ल्यूएम की अमर जवान ज्योति के विलय के प्रबल समर्थक रहे हैं।

उन्होंने कहा, “इंडिया गेट प्रथम विश्व युद्ध के बलिदान हुए नायकों का स्मारक है। अमर जवान ज्योति को 1972 में जोड़ा गया क्योंकि हमारे पास दूसरा स्मारक नहीं था। राष्ट्रीय युद्ध स्मारक स्वतंत्रता के बाद शहीद हुए वीरों को श्रद्धांजलि देता है। सभी श्रद्धांजलि समारोह पहले ही NWM में स्थानांतरित हो गए थे।”

बता दें कि पिछली सरकारों के लंबे इंतजार और नाकामी के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने इंडिया गेट परिसर के पास राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण कराया। जिसका फरवरी 2019 में उद्घाटन किया गया, यह स्मारक भारत की स्वतंत्रता के बाद शहीद हुए 22,500 से अधिक भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देता है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के उद्घाटन के बाद से, सभी सैन्य औपचारिक कार्यक्रमों को इंडिया गेट से स्थानांतरित कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, प्रत्येक गणतंत्र दिवस पर, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और तीनों सेवा स्टाफ प्रमुख अमर जवान ज्योति पर माल्यार्पण करते थे और मृत और अज्ञात सैनिकों को श्रद्धांजलि देते थे।

हालाँकि, 2020 से अमर जवान ज्योति के बजाय राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर माल्यार्पण किया जाता है। शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए सेवा प्रमुख अपने-अपने सेवा दिवसों पर नए स्मारक का भी दौरा करते हैं। इसी से, NWM और इंडिया गेट की अमर ज्योति को मिलाना समझा जा सकता है।

जिस यासीन की दूसरी बीवी बनने के लिए शिवा से बनी जारा, उसी ने तकिए से मुँह दबाकर कर दी हत्या: 3 साल की बेटी को छोड़ हुआ फरार

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) से धर्मांतरण के बाद महिला की हत्या करने की खौफनाक खबर सामने आई है। यहाँ के पारा के कांशीराम कॉलोनी में गुरुवार (20 जनवरी 2022) देर शाम पति मोहम्मद यासीन ने बीवी जारा खान उर्फ शिवा विश्वकर्मा की दम घोंटकर हत्या (Murder) कर दी। इस दौरान उसने अपनी 3 साल की बेटी को फ्लैट के बाहर खड़ा कर दिया था। 

हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद यासीन अपनी बेटी को फ्लैट के बाहर ही रोता-बिलखता छोड़कर भाग गया। इस घटना की जानकारी तब हुई जब मृतका का ंभाई वहाँ पहुँचा। भाई ने तुरंत इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस के मुताबिक, जारा खान उर्फ शिवा विश्वकर्मा की उसके चेहरे पर तकिया लगाकर बेरहमी से उसकी हत्या की गई है। वहीं, इलाके के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से यासीन की पहली पत्नी इलाके में घूम रही थी।

ज़ारा यासीन की दूसरी पत्नी थीं और उसने धर्म बदलकर मुस्लिम बनने के बाद यासीन से शादी की थी। वहीं जब जारा का फोन रिसीव नहीं हुआ तो उसका भाई उसके घर पहुँचा और फ्लैट का दरवाजा खोलकर अंदर पहुँचा तो उसने देखा कि बहन का शव गद्दे में लिपटा हुआ था। उसके बाद उनसे पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस का कहना है कि हत्यारे यासीन की तलाश में पुलिस टीमें छापेमारी कर रही हैं और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

कुछ साल पहले धर्म बदलकर यासीन से की थी शादी

पुलिस का कहना है कि आयुर्वेदिक दवाओं के सेल्समैन का काम करने वाला यासीन बहराइच के नानपारा का रहने वाला है और वह पारा के कांशीराम आवासीय कॉलोनी के ब्लॉक नंबर दो में दूसरी पत्नी जारा खान उर्फ शिवा और तीन साल की बेटी सारा के साथ रहता था। वहीं यासीन और जारा के बीच विवाद हुआ और उसने अंदर से दरवाजा बंद कर जारा की हत्या कर दी, जबकि वहाँ पर उसकी तीन साल की बच्ची भी मौजूद थी। जारा के भाई ने बताया कि उसकी बहन ने कुछ साल पहले यासीन से शादी कर ली थी और धर्मांतरण कर लिया था। इसके बाद उसने शिवा से अपना नाम जारा रख लिया था।

हत्या के वक्त इलाके में टहल रही थी पहली बीबी

पुलिस का कहना है कि यासीन की पहली बीबी शहराबानो है और यासीन ने उससे आठ साल पहले शादी की थी। शाहबानो बहराइच में रहती है। बताया जा रहा है कि शाहबानो तीन-चार दिन पहले अपने बेटे के साथ यहाँ आई थी और वह भी फ्लैट में ही रह रही थी। हत्या के वारदात के समय वह इलाके में अपने बेटे के साथ टहल रही थी। पुलिस फिलहाल उसकी पहली बीबी से पूछताछ कर रही है।

‘पुष्पा’ देख 3 नाबालिगों ने युवक को घेरकर मार डाला: भौकाल बनाने के लिए इंस्टाग्राम पर अपलोड करने वाले थे मर्डर का Video, पर पकड़े गए

दिल्ली पुलिस ने 24 साल के एक युवक की हत्या के मामले में 3 नाबालिग लड़कों पकड़ा है। बताया जाता है कि फिल्म पुष्पा से प्रभावित हो इन्होंने इस हत्या को अंजाम दिया। वे इससे लोगों के मन में डर बिठाना चाहते थे। तीनों ने मर्डर का वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड करने की भी योजना बनाई थी। लेकिन उससे पहले ही पकड़े गए।

हत्या की इस घटना को 19 जनवरी 2022 (बुधवार) को जहाँगीरपुरी इलाके में अंजाम दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मृतक की पहचान शीबू के तौर पर हुई है। वह जहाँगीरपुरी में ही रहता था। जाँच के दौरान पुलिस को एक CCTV फुटेज में तीन लड़के शीबू से उलझते दिखे। पुलिस ने इसी आधार पर तलाश शुरू की तो स्थानीय निवासियों ने एक आरोपित को पहचान लिया। उससे हुई पूछताछ के आधार पर 24 घंटों में तीनों आरोपितों को पकड़ लिया गया। पुलिस ने आरोपितों के पास से मोबाइल और छुरा भी बरामद किया है।

पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपितों ने इस पूरी घटना की वीडियो रिकार्डिंग की थी। इसे वे इंस्टाग्राम पर अपलोड करना चाह रहे थे। वे पुष्पा और भौकाल जैसी फिल्मों में दिखाए गए गैंगस्टर के रोल से बेहद प्रभावित थे। फिल्म देख उन्होंने अपना गैंग बनाने की योजना बनाई। अपने गैंग की धमक दिखाने और दोस्तों पर असर डालने के लिए हत्या करने का फैसला किया था।

घटना के दिन तीनों ने सामने से आते शीबू पर पहले डंडे से वार किया। शीबू कुछ समझ पाता तब तक दूसरे नाबालिग ने उसे पीछे से पकड़ लिया। इसी दौरान तीसरे ने शीबू के पेट में छुरा घोंप दिया। घटना को अंजाम दे तीनों आरोपित फरार हो गए। दिल्ली नार्थ ईस्ट की DCP उषा रंगनानी ने बताया कि शीबू को बाबू जगजीवन राम अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत ने उठाया ‘हिंदूफोबिया’ का मुद्दा, कहा- दुनिया को हिन्दू, सिख और बौद्ध विरोधी खतरों को समझना होगा

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दुनिया का ध्यान ‘हिंदूफोबिया’ की ओर दिलाया है। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में बौद्ध और सिख धर्म के खिलाफ घृणा के साथ-साथ ‘हिंदूफोबिया’ का मसला उठाते हुए भारत ने संयुक्‍त राष्‍ट्र (UN) के सदस्‍य देशों से इसे पहचानने की अपील की। गुरुवार (20 जनवरी, 2022) को यूएन में भारत के स्‍थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि यूएन ने अन्‍य तरह के धार्मिक फोबिया पर तो बात की है, मगर हिंदू, सिख और बौद्ध विरोधी खतरों को स्‍वीकार नहीं किया गया है। भारत ने कहा कि इस खतरे पर दुनिया को बात करनी ही होगी ताकि ऐसे विषयों पर चर्चा में ‘और संतुलन’ सुनिश्चित किया जा सके।

तिरुमूर्ति ने दिल्ली स्थित ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म सेंटर (जीसीटीसी) द्वारा आयोजित एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में यह बयान दिया। UN में भारत के राजदूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा, “संयुक्त राष्ट्र की नई वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति (जीसीटीएस) में कई खामियाँ हैं। धार्मिक भय के मौजूदा रूपों विशेष रूप से हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी और सिख विरोधी भय चिंता का विषय है। इस खतरे से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र और सभी सदस्य देशों को ध्यान देने की जरूरत है।”

दुनिया को देना चाहिए हिंदूफोबिया पर ध्‍यान

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तिरुमूर्ति जून 2021 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पारित जीसीटीएस की सातवीं समीक्षा का जिक्र कर रहे थे। उन्होंने आगे अपने बयान में यह भी कहा, “एक और ट्रेंड जो पिछले कुछ वक्‍त में बढ़ा है, वह है खास तरह के धार्मिक फोबिया को हाईलाइट करने का। यूएन ने पिछले कुछ वर्षों में उनमें से कुछ को हाईलाइट किया है, खासतौर से इस्‍लामोफोबिया, क्रिश्‍चनोफोबिया और एंटी-सेमिटिज्‍म। वैश्विक आतंकी रणनीति में इस्लाम, ईसाई और यहूदी धर्म के खिलाफ धार्मिक भय को ही जगह मिली है। लेकिन पिछले दो सालों से कई देश अपने राजनीतिक और धार्मिक वजहों से आतंकवाद को नस्लीय व जातीय रूप से प्रेरित हिंसक उग्रवाद, हिंसक राष्ट्रवाद, दक्षिणपंथी उग्रवाद जैसी कैटेगरी दे रहे हैं। यह प्रवृत्ति कई कारणों से खतरनाक है।” तिरुमूर्ति ने इसकी भर्त्‍सना की।

तिरुमूर्ति ने UN के कुछ सदस्‍य देशों के उस कदम का भी कड़ा विरोध किया जिसमें उन्‍होंने आतंकवाद को घटनाओं के पीछे की प्रेरणा के आधार पर वर्गीकृत करने का प्रस्‍ताव रखा था। उन्होंने कहा कि इससे उस सिद्धांत कि आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा होनी चाहिए, की अवहेलना होगा।

तिरुमूर्ति ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को आगाह करते हुए कहा, “UNSC को नई शब्दावली और झूठी प्राथमिकताओं से सावधान रहना चाहिए, जो हमारे फोकस को कमजोर कर सकती हैं।” उन्होंने जोर देते हुए कहा, “आतंकवादी आतंकवादी होते हैं। इसमें अच्छे और बुरे नहीं होते हैं। इस अंतर का प्रचार करने वालों का एजेंडा होता है। जो उनके लिए कवर करते हैं, वे उतने ही दोषी हैं।”