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ईसाई से हिंदू बन गईं लालू यादव की छोटी बहू, तेजस्वी यादव की पत्नी रिचेल को मिला ‘राजेश्वरी यादव’ नाम: रिपोर्ट

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की छोटी बहू रिचेल को नया नाम मिलने की खबर आ रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तेजस्वी यादव की पत्नी का नया नाम राजेश्वरी यादव होगा। कहा जा रहा है कि उनकी पत्नी रिचेल ईसाई से हिंदू बन गईं हैं। ऐसा इस शादी को लेकर परिजनों की नाराजगी दूर करने के लिए किया गया है। हालाँकि लालू के परिवार से जुड़े किसी सदस्य ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

तेजस्वी और रिचेल की शादी (Tejashwi Yadav Marriage) 9 दिसंबर 2021 को दिल्ली में हुई थी। दोनों बचपन के दोस्त बताए जा रहे। दैनिक भास्कर ने पारिवारिक सूत्रों के हवाले से बताया है कि लालू परिवार में शामिल होने के लिए रेचल को हिंदू धर्म कबूल करना पड़ा है। वह रेचल से राजेश्वरी यादव हो गई हैं। रिपोर्ट में राजद के वरिष्ठ नेताओं के हवाले से बताया गया है कि इससे लालू-राबड़ी की नाराजगी कम हुई है।

वैसे दोनों की शादी हिंदू रीति-रिवाज से ही हुई थी। टाइम्स नाउ नवभारत की रिपोर्ट में भी रिचेल के हिंदू बनने और उनका नया नाम राजेश्वरी यादव होने की बात कही गई है।

गौरतलब है कि तेजस्वी यादव का विवाह  दिल्ली के एक फार्म हाउस में सम्पन्न हुआ था। सार्वजानिक रूप से तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य ने ट्विटर से इसकी जानकारी दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लालू और राबड़ी देवी सहित परिवार और रिश्तेदारी में कई लोग इस शादी से खुश नहीं थे। रिपोर्ट के मुताबिक इस शादी में स्वयं लालू यादव भी आने को तैयार नहीं थे। बहुत मनाने के बाद वह राबड़ी के साथ इस शादी में शामिल हुए।

लालू यादव के साले साधु यादव तो खुल कर विरोध में सामने आ गए थे। उन्होंने तेजस्वी को ‘भकचोंहर’ करार दिया और कहा कि उनके इस कृत्य से पूरे यादव समाज का नाम खराब हो गया है। उनका ये भी कहना है कि क्या देश में यादव लड़कियों की कमी थी। साधु यादव ने कहा था कि तेजस्वी एक ईसाई लड़की के साथ 8 साल से रिलेशन में था और समाज तथा बिहार को ठगने का काम कर रहा था। लालू ने अपने बच्चों को संस्कार नहीं दिया, जिस कारण सारे बच्चे बिगड़ गए। उन्होंने सभी की पोल खोलने की धमकी देते हुए कहा था कि अब बर्दाश्त की सीमा समाप्त हो गई है।

‘मीडिया से परेशानी’: हर शुक्रवार को NCB ऑफिस में हाजिरी से शाहरुख खान के बेटे आर्यन ने माँगी छूट, 13 शर्तों पर हाई कोर्ट ने दी थी बेल

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान (Shah rukh Khan) के बेटे और क्रूज शिप ड्रग मामले के मुख्य आरोपित आर्यन खान ने जमानत की शर्तों में छूट के लिए शुक्रवार (10 दिसंबर 2021) को बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आर्यन खान ने कोर्ट में कहा कि वे हर शुक्रवार को NCB के ऑफिस में हाजिरी लगाने के लिए पेश हुए हैं, इसी शर्त पर उनकी जनामत की शर्त में ढील दी जाए।

आर्यन खान (Aryan Khan) ने कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि ड्रग्स मामले की जाँच अब दिल्ली NCB की खास टीम को सौंप दी गई है। इसीलिए उन्हें अब मुंबई NCB ऑफिस में पेश होने की शर्त में ढील दी जाए, क्योंकि एनसीबी ऑफिस (NCB Office) के बाहर बड़ी संख्या में मीडियाकर्मियों की मौजूदगी में उन्हें पुलिस के साथ एनसीबी ऑफिस जाना पड़ता है। इस दौरान उनके बड़ी संख्या में फोटो खींचे जाते हैं। बताया जा रहा है कि इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस नितिन साम्ब्रे 13 दिसंबर को सुनवाई कर सकते हैं।

मालूम हो कि मुंबई क्रूज ड्रग्स मामले में आर्यन खान को 28 अक्टूबर 2021 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। हाईकोर्ट के जस्टिस नितिन साम्ब्रे ने आर्यन खान और दो अन्य आरोपितों- मुनमुन धमेचा और अरबाज मर्चेंट को जमानत देते हुए 14 शर्तें भी लगाई थीं। इसमें कहा गया था कि उन्हें हर शुक्रवार को NCB ऑफिस में पेश होना होगा। इसके अलावा, बिना अनुमति के वे देश से बाहर नहीं जा सकते हैं।  

बता दें कि आर्यन खान को एनसीबी ने 3 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। उस पर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत धारा 8 (सी), 20 (बी), 27, 28, 29 और 35 के तहत मामला दर्ज किया गया था। जाँच एजेंसी ने आर्यन पर अपने लेंस के डिब्बे में ड्रग्स छुपाकर रखने का आरोप लगाया था।

हिमाचल प्रदेश में बनेगा ‘सवर्ण आयोग’: मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का ऐलान, गंगाजल और मंत्रोच्चार के साथ प्रदर्शन समाप्त

हिमाचल प्रदेश सरकार ने आंदोलनकारियों की माँगों को मानते हुए शुक्रवार (10 दिसंबर) को आखिरकार सामान्य वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर गई है। राज्य के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विधानसभा में बताया कि ‘सामान्य वर्ग आयोग’ का अगले तीन महीने में गठन कर दिया जाएगा। इस आयोग के गठन की माँग को लेकर हजारों प्रदर्शनकारी लगातार आंदोलन कर रहे थे।

नोटिफिकेशन

विधानसभा में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा, ‘”हिमाचल प्रदेश में सामान्य वर्ग के लोग लम्बे समय से माँग कर रहे थे कि सामान्य वर्ग के लोगों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए के लिए प्रदेश में सामान्य वर्ग आयोग का गठन किया जाए। वर्तमान प्रदेश सरकार समाज के हर वर्ग के आर्थिक व सामाजिक उत्थान के प्रति वचनबद्ध है। सरकार ने हर वर्ग के विकास के लिए योजनाएँ चलाई हैं, जिससे उन्हें प्रगति व विकास के समान अवसर मिल सके।”

उन्होंने प्रदेश के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि वे राज्य में शांति और सौहार्द्र बनाए रखें और कोई ऐसा काम ना करें, जिससे हिमाचल प्रदेश के शांतिपूर्ण माहौल व शांतिप्रिय लोगों की छवि धूमिल हो।

जयराम ठाकुर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान धर्मशाला का जोरावर स्टेडियम सामान्य वर्ग आयोग के गठन की माँग को लेकर लोगों ने उग्र प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन में पूरे प्रदेश के लोग जमा थे। पुलिस ने उन पर पानी की बौछार और हल्का बल प्रयोग किया था, फिर भी प्रदर्शनकारी अड़े रहे। इस दौरान बैरिकेड तोड़ दिए गए और विधानसभा में घुसने का प्रयास किया गया। DGP व कई अन्य अधिकारियों ने मामले को शांत करने की कोशिश की पर प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री से मिलने की जिद पर अड़े थे। आख़िरकार मुख्यमंत्री को वार्ता के लिए आना पड़ा और उन्होंने प्रदर्शन कर रहे लोगों की माँगे मान ली।

मुख्यमंत्री ने प्रक्रिया पूरी होने में 3 माह का समय लगने की बात कही है। दरअसल, प्रदर्शनकारियों ने हरिद्वार से लाए गंगाजल को लेकर विधानसभा में घुसकर विधायक विक्रमादित्य सिंह को छोड़कर बाकी सभी विधायकों के शुद्धिकरण का ऐलान किया था। उनके मुताबिक, सिर्फ विक्रमादित्य सिंह ने उनकी माँगों का समर्थन किया था। हालाँकि, मुख्यमंत्री के ऐलान के बाद प्रदर्शनकारियों ने मंत्रोच्चार और गंगाजल को छिड़ककर प्रदर्शन खत्म कर दिया। इससे पहले इस आयोग की माँग को लेकर सवर्ण समाज ने 800 किलोमीटर की पद यात्रा भी की थी।

इस दौरान देवभूमि क्षत्रिय संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रुमित सिंह ठाकुर और देवभूमि स्वर्ण मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल ठाकुर ने कहा कि आज तक सभी राजनीतिक दलों ने सवर्ण समाज के साथ छल-कपट और भेदभाव की राजनीति ही की है। उन्होंने कहा कि जातिगत आरक्षण को जल्द खत्म किया जाना चाहिए।

‘केरल CM विजयन की बेटी वीना और मोहम्मद रियास की शादी नाजायज’: मुस्लिम लीग नेता ने समर्थकों को उकसाया, CM के खिलाफ जातिवादी नारे लगाए गए

केरल में कॉन्ग्रेस की सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (Indian Union Muslim League – IUML) के नेता अब्दुलर्रहमान कल्लई ने राज्य के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की बेटी वीना की PWD मंत्री मोहम्मद रियास से शादी को अवैध संबंध बताया है। गुरुवार (9 दिसंबर) को कोझिकोड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कल्लई ने यह विवादास्पद बयान दिया। इस दौरान उनके समर्थकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ जातिवादी नारे भी लगाए।

राज्य की सीपीएम सरकार के खिलाफ बोलते हुए IUML के राज्य सचिव कल्लई ने कहा, “डीवाईएफआई (डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया) के पूर्व अध्यक्ष (मोहम्मद रियास) मेरे क्षेत्र के पुथियापला (दूल्हे) हैं। उनकी पत्नी कौन है? यह भी कोई शादी है? यह तो अवैध संबंध है। ऐसा कहने का हम में साहस होना चाहिए। हम में सीएच मोहम्मद कोया जैसा साहस होना चाहिए।” दरअसल, कोया आईयूएमएल के नेता और वे राज्य के मुख्यमंत्री भी थे।

बता दें कि वीना और रियास ने पिछले साल जून में केरल के तिरुवनंतपुरम में शादी की थी। यह दोनों की दूसरी शादी थी। शादी के दौरान रियास डीवाईएफआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। रियास ने इस साल अप्रैल में हुए विधानसभा चुनावों में कोझीकोड की बेपोर विधानसभा सीट से जीतकर विधायक बने और अपने ससुर विजयन की अध्यक्षता वाले राज्य मंत्रिमंडल में पीडब्ल्यूडी मंत्री के रूप में शामिल हुए।

दरअसल, सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों का जिम्मा राज्य लोक सेवा आयोग को सौंपने का निर्णय लिया था। इसको लेकर राज्य भर में मुस्लिम और उनके संगठन विरोध कर रहे थे। इस विरोध को भूनाने के लिए कल्लई ने इस रैली का आयोजन किया था। इस दौरान उन्होंने आईयूएमएल कार्यकर्ताओं से इस शादी को अवैध कहने का साहस दिखाने की अपील की। कल्लई के ऐसा कहने के बाद रैली में शामिल मुस्लिम लीग के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री विजयन के खिलाफ जमकर जातिवादी नारे लगाए।

हालाँकि, विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री विजयन ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि सरकार के इस कदम को जल्दी में लागू नहीं किया जाएगा। आईयूएमएल समर्थकों और अन्य मुस्लिम संगठनों से मुलाकात के बाद विजयन ने कहा था कि भर्ती पर यथास्थिति बनी रहेगी।

कल्लई का बयान देने के बाद उनकी चारों तरफ निंदा होने लगी। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने उन्हें खूब लताड़ा। वहीं, डीवाईएफआई ने भी रियास और वीना के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी के लिए मुस्लिम लीग की आलोचना की। चारों तरफ से अपनी दुर्गति होती देख कल्लई ने शुक्रवार (10 दिसंबर) को माफी माँग ली। अपने बयान पर खेद जताते हुए कल्लई ने कहा कि वह अपने भाषण में केवल निजी जीवन के धार्मिक पक्ष का जिक्र कर रहे थे। इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।

 

हेलिकॉप्टर क्रैश: 6 और जवानों के पार्थिव शरीर की पहचान हुई, सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार

तमिलनाडु (Tamil nadu) के कुन्नूर में 8 दिसंबर को हेलिकॉप्टर क्रैश में जान गँवाने वाले 6 और भारतीय वायु सेना के जवानों के पार्थिव शरीर की पहचान कर ली गई है। इसमें एयरफोर्स के चारों जवान भी शामिल हैं। भारतीय सेना के मुताबिक, विंग कमांडर पीएस चौहान, हवलदार प्रदीप ए, लांस नायक बी साई तेजा, हवलदार दास, स्क्वॉड्रन लीडर कुलदीप सिंह और लांस नायक विवेक कुमार के पार्थिव शरीर की पहचान हो गई है। शनिवार (11 दिसंबर 2021) को पार्थिव शरीर इनके परिजनों को सौंप दिए जाएँगे।

सेना ने कहा कि उचित सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार के लिए पार्थिव शरीर को हवाई मार्ग से ले जाया जाएगा। इससे पहले दिल्ली कैंट के बेस हॉस्पिटल में पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके बाद परिजनों को पार्थिव शरीर सौंप दिए जाएँगे। भारतीय सेना के अनुसार, बाकी पार्थिव शरीरों की पहचान भी जारी है। 

भारतीय वायुसेना ने 8 दिसंबर को हुए हेलिकॉप्टर क्रैश के कारणों की जाँच के लिए एक ट्री-सर्विस कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (tri-service Court of Inquiry) का गठन भी किया है। उन्होंने ट्वीट कर बताया कि जाँच तेजी से पूरी की जाएगी और इस मामले से जुड़े तथ्यों को सामने लाया जाएगा। तब तक, मृतकों की गरिमा का सम्मान करते हुए बेबुनियाद अटकलों से बचा जा सकता है।

बता दें कि शुक्रवार (10 दिसंबर 2021) को देश के पहले सीडीएस बिपिन रावत को राजकीय सम्मान के साथ दिल्ली छावनी के बरार स्क्वायर श्मशान घाट पर अंतिम विदाई दी गई थी। बिपिन रावत (Bipin Rawat) और उनकी मधुलिका रावत की बेटियों कृतिका और तारिणी ने अपने माता-पिता का अंतिम संस्कार किया था। उन्हें 17 तोपों की सलामी दी गई थी। इस दौरान 800 सेना के जवान वहाँ मौजूद थे। इस हादसे में बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत 13 लोगों की जान चली गई थी।

‘भारत में 2500 साल पहले भी विकसित था लोकतंत्र’: समिट फॉर डेमोक्रेसी के मंच से पीएम मोदी का दुनिया को संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra modi) ने शुक्रवार (10 दिसंबर 2021) को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन (Joe biden) द्वारा आयोजित ‘लोकतंत्र के लिए शिखर सम्मेलन’ में भाग लिया और कहा कि भारत विश्व स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए भागीदारों के साथ काम करने के लिए तैयार है। पीएम ने कहा कि लोकतंत्र की भावना हमारी सभ्यता का अभिन्न अंग रहा है और भारत में लोकतंत्र रहा है और आगे भी रहेगा।

इसके साथ ही पीएम ने समिट फॉर डेमोक्रेसी (Summit for democracy) के मंच से दुनिया को भारत में लोकतंत्र की प्राचीनता से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि 2,500 साल पहले भारत में लिच्छवि और शाक्य वंश (Licchavi and shakya dynasty) के दौरान विकसित अवस्था में था। इसी तरह की लोकतांत्रिक व्यवस्था प्राचीन भारत में 10वीं सदी के दौरान उत्तिरमेरु शिलालेख में मिला था। भारत की ये प्राचीन लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ सर्वाधिक संपन्न सभ्यताओं में से एक थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन लोकतांत्रिक व्यवस्था को सदियों का औपनिवेशिक शासन डिगा नहीं सका।

स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति देश को फिर से मिली और लोकतांत्रिक राष्ट्र के निर्माण में बीते 75 सालों से अद्वितीय कहानी सामने रखी। उन्होंने इसे सभी क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक समावेश की कहानी बताया और कहा कि भारतीय लोकतंत्र स्वास्थ्य, शिक्षा और मानव जीवन में निरंतर सुधार की कहानी है, जिसकी कल्पना कर पाना मुश्किल है। पीएम ने कहा कि भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकतंत्र दे सकता है, लोकतंत्र ने दिया है और लोकतंत्र ने देना जारी रखा है।

पीएम मोदी ने ये भी कहा कि देश में बहुदलीय चुनाव, स्वतंत्र न्यायपालिका और फ्री मीडिया के ढाँचे लोकतंत्र के महत्वपूर्ण उपकरण हैं। लोकतंत्र की मूल भावना और ताकत हमारे नागरिकों और समाज में समाया हुआ है।

गौरतलब है कि इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिका की ओर से दुनियाभर के 110 देशों को आमंत्रित किया गया था। इसमें पाकिस्तान भी शामिल था। लेकिन बाद में वह खुद ही इससे बाहर हो गया था। हालाँकि, चीन और रूस को इस सम्मलेन में शामिल होने के लिए कहा ही नहीं गया था।

मलयाली फिल्म निर्देशक अली अकबर ने किया इस्लाम छोड़ने का फैसला, CDS रावत के बलिदान पर कट्टरपंथियों के रवैए से थे आहत

सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत 13 वीरों की वीरगति पर एक तरफ पूरा देश रो रहा है, तो दूसरी ओर कुछ कट्टर इस्लामी देश के असली हीरो के जाने पर अट्टाहास कर रहे हैं। इससे निराश केरल के मलयाली फिल्मों के फिल्म निर्देशक अली अकबर ने इस्लाम को छोड़ हिंदू धर्म में वापसी करने का ऐलान कर दिया है। फेसबुक लाइव पर निर्देशक ने कहा कि वे इस्लाम का परित्याग कर रहे हैं।

अली अकबर ने कहा कि सेना प्रमुख सीडीएस बिपिन रावत की वीरगति के बाद कई लोग फेसबुक पर जश्न मना रहे थे, जिसके विरोध में वो इस्लाम को ही छोड़ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 8 दिसंबर 2021 को सीडीएस बिपिन रावत की मौत के बाद अकबर ने फेसबुक पर एक लाइव वीडियो शूट किया था, लेकिन फेसबुक ने उसे नस्लीय बताकर फिल्म निर्देशक के अकाउंट को एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया। इसके बाद फिल्म निर्देशक ने दूसरा फेसबुक अकाउंट बनाया और उसके जरिए लाइव आकर इस्लाम छोड़ने का ऐलान कर दिया।

फेसबुक के जरिए सीडीएस रावत को श्रद्धांजलि देने वाले फिल्म निर्देशक ने कहा, “यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए मैं अपना धर्म छोड़ रहा हूँ, न मेरा और न ही मेरे परिवार का कोई और धर्म है।” उन्होंने लाइव में कहा, “मैं उन कपड़ों का एक टुकड़ा फेंक रहा हूँ, जिनके साथ मैं पैदा हुआ था।” दरअसल, जब फिल्म निर्देशक ने सीडीएस रावत की वीरगति पर लाइव वीडियो बनाना शुरू किया तो कट्टर इस्लामियों ने उनके वीडियो पर हजारों की संख्या में लॉफिंग की इमोजी लगाकर इसका मजाक उड़ाया, जिससे उनकी भावनाएँ आहत हुईं।

इस मामले पर ट्विटर यूजर प्रतीश विश्वनाथ ने कहा कि मलयालम के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अली अकबर हिंदू धर्म अपना रहे हैं और अपना नाम बदलकर रामसिम्हन रख रहे हैं। इस्लाम की वर्तमान पीढ़ी को देखकर बहुत अच्छा लगा, जिनके पूर्वजों को बलपूर्वक परिवर्तित किया गया था, वे वापस जड़ों की ओर आ रहे हैं।

‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ के तहत 110 अफगान सिखों का भारत आगमन, सिर पर गुरु ग्रंथ साहिब लिए आ रहे सिखों का वीडियो आया सामने

अफगानिस्तान में तालिबान शासन शुरू होने के बाद से वहाँ फँसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए सरकार अभियान चला रही है। ऑपरेशन देवी शक्ति’ (Operation Devi shakti) के तहत भारतीय वायुसेना (Indian air force) और विदेश मंत्रालय अफगानिस्तान फँसे 110 सिखों को भारत ला रहा है और वे आज (10 दिसंबर) को दिल्ली पहुँचेंगे। अकाली दल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा (Manjinder singh sirsa) ने विशेष विमान से सिखों के काबुल से नई दिल्ली पहुँचने की जानकारी दी है।

सिरसा के मुताबिक, विशेष विमान से भारत आने वाले अफगानिस्तान के सिखों को फिलहाल गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब में ठहराया जाएगा। सिरसा ने युद्धग्रस्त देश से फँसे सिखों को निकालने के लिए पीएम मोदी (PM modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit shah) को धन्यवाद दिया।

वहीं, भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा (Tejinder pal singh bagga) ने भी अफगानिस्तान से भारत लाए गए सिखों को लेकर ट्वीट के जरिए जानकारी दी है। बग्गा ने बताया कि सिखों का यह दल अपने साथ गुरु ग्रंथ साहिब को भी लेकर आया है।

बग्गा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में एक सिख युवक को अफगानिस्तान से एय़रलिफ्ट करने के लिए भारत सरकार को धन्यवाद देते हुए देखा जा सकता है। सिरसा ने पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को एक सूटकेस में रखकर अपने सिर पर लेकर भारत के लिए फ्लाइट में चढ़ते एक सिख और उसके साथियों का वीडियो शेयर किया है।

इससे पहले जलालाबाद, गजनी और काबुल में फँसे अफगान सिखों ने अक्टूबर के अंत में भारत सरकार और सिख नेताओं से अनुरोध किया था कि उन्हें अफगानिस्तान से निकालने में उनकी मदद करें। इसके बाद मनजिंदर सिंह सिरसा ने अफगान सिखों को रेस्क्यू करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से अपील की थी और कहा था कि भारत ही उनकी एकमात्र आशा है।

अगस्त 2021 में अफगानिस्तान से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के तीन हस्तलिखित स्वरूप को सिख भारत लेकर आए थे। खास बात ये थी कि इन सिखों का एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश राज्य मंत्री के वी मुरलीधरन ने उनका स्वागत किया। भारतीय वायु सेना ने 20 अन्य सिखों सहित अफगानिस्तान के सांसद नरेंद्र सिंह खालसा को भी बचाया था।

‘खुले में नमाज पढ़ने की प्रथा बर्दाश्त नहीं’: CM खट्टर ने नमाज के लिए 37 जगहों पर दी गई परमिशन को भी किया रद्द

हरियाणा के गुरुग्राम में सार्वजनिक जगहों पर नमाज़ पढ़ने को लेकर जारी विवाद के बीच राज्य के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि खुले में नमाज पढ़ने की प्रथा को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने शुक्रवार (10 दिसंबर) को कहा कि खुले में नमाज किसी भी हाल में नहीं होना चाहिए। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की अपील की। मुख्यमंत्री खट्टर ने इसके लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश भी दिए।

एक कार्यक्रम के दौरान मीडियाकर्मी द्वारा पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा, “हमने यहाँ पुलिस को भी कहा है और डिप्टी कमिश्नर को भी कहा है। इस विषय का समाधान निकालना है। कोई अपनी जगह पर नमाज़ पढ़े या पूजा पाठ करे, इससे हमें कोई दिक्क्त नहीं है। धार्मिक स्थल इसीलिए बने होते हैं। खुले में ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। ये नमाज़ पढ़ने की जो प्रथा यहाँ खुले में शुरू की गई है, वो कतई सहन नहीं की जाएगी। सबके साथ बैठकर इसका समाधान निकाला जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि मुस्लिम समुदाय के पास बहुत सारी जमीनें हैं। वे वक्फ की जमीनों पर नमाज़ पढ़ें या फिर अपने घर में नमाज़ पढ़ें। खुले में नमाज़ और आपसी टकराव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तय होगा कि सबको सुविधा मिले और किसी के भी अधिकारों में हस्तक्षेप न हो, लेकिन किसी को जबरदस्ती नहीं करने दिया जाएगा।

उन्होंने कहा, “हमने जिन 37 स्थानों को खुले में नमाज पढ़ने के लिए चिन्हित किया था, उन तमाम स्थानों की परमिशन को रद्द कर दिया गया है। बीच में कुछ फैसला लिया गया था, लेकिन उन फैसलों में जो स्थान दिए गए थे उन्हें हमने वापस ले लिया है। अब सारी बातचीत नए सिरे से होगी।”

गौरतलब है कि गुरुग्राम इमाम एसोशिएशन के चिन्हित स्थानों पर नमाज़ करने के फैसले के खिलाफ ही मुस्लिमों के ही 2 धड़े खड़े हो गए थे। अल्ताफ समूह और शहज़ाद समूह ने सभी 37 स्थानों पर नमाज़ पढ़ने की अनुमति माँगते हुए इमाम एसोशिएशन को RSS का एजेंट तक कह डाला था। इसी के साथ आज शुक्रवार को हिन्दू संगठनों के भारी विरोध और प्रशासन के कड़े आदेश के बाद भी गुरुग्राम के अलग-अलग स्थानों पर नमाज़ के लिए तमाम नमाज़ी जमा हुए थे। इसमें उन्होंने कुछ स्थानों पर नमाज़ भी पढ़ी थी।

‘पप्पू से 2 कदम ऊपर’ : CDS रावत को जब देश दे रहा था श्रद्धांजलि तब प्रियंका गाँधी ने किया डांस, दाँत चियारने का वीडियो देख भड़के लोग

तमिलनाडु में हुए हादसे के बाद से पूरा देश गम में डूबा हुआ है। बड़े-बड़े नेता से लेकर सामान्य जन सभी सीडीएस जनरल रावत की मौत की खबर से दुखी हैं। ऐसी स्थिति में प्रियंका गाँधी के डांस की एक वीडियो सामने आई है जिसे देख नेटिजन्स भड़क गए हैं। इस वीडियो में वह नाचती-गाती खुशी मनाती दिखाई दे रही हैं। वीडियो को देखने के बाद लोगों ने उनकी मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उनसे कहा है कि उन्हें देश से कोई मतलब नहीं है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने शहजाद जय हिंद ने ट्वीट कर कहा, “एक ओर पूरा देश हमारे बहादुरों के जाने से रो रहा है। अभी तक सीडीएस बिपिन रावत के अंतिम दर्शन करके पूरे देश की आँखे नम हैं और दूसरी ओर प्रियंका गाँधी हँस रही हैं, नाच रही हैं, जश्न मना रही हैं… वो इन चीजों को टाल सकती थीं… उन्होंने ये नहीं किया जानबूझकर।”

वहीं शलभ मणि त्रिपाठी लिखते हैं, “राष्ट्रीय क्षति पर जब पूरा देश ग़मज़दा हो, दुखी हो, रो रहा हो, तभी गोवा से आ रही जश्न की ये तस्वीरें दिल को कचोटती हैं, देश और वीर सेना के लिए आपकी भावनाओं पर शक पैदा करती हैं!”

इन ट्विट्स के अलावा कई यूजर्स ने प्रियंका गाँधी की हरकत को शर्मनाक कहा। वह बोले, “जिस समय देश के बेटों की अंतिम यात्रा शुरू हुई और पूरा भारत अश्रूपूर्ण श्रद्धांजलि दे रहा था , ठीक उसी समय प्रियंका गाँधी गोवा में खिलखिलाके नाच रही थी। पर चिंता मत करो सब याद रखा जाएगा।”

एक ट्विटर यूजर ने याद दिलाया कि जब 26/11 हुआ था तो राहुल गाँधी रात से सुबह तक पार्टी कर रहे थे और जब पूरा देश सीडीएस जनरल बिपिन रावत के अंतिम संस्कार के चलते शोक और दु:ख में डूबा हुआ था, तो उसी समय भाई के पद्चिह्नों पर चलती हुईं प्रियंका वाड्रा भी गोवा में डांस कर रही थीं। क्या इससे भी ज्यादा कुछ शर्मनाक को सकता है?

अभिनव वर्मा लिखते हैं, “गजब जाहिल हो यार प्रियंका गाँधी। आप तो पप्पू से दो कदम ऊपर हो।”

बता दें कि गोवा विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी प्रियंका गाँधी ने शुक्रवार को गोवा में पहुँचकर आदिवासी महिलाओं के साथ डांस किया। दुखद बात ये है कि उन्होंने ये हरकत उसी समय की जब पूरा देश सीडीएस जनरल बिपिन रावत और अन्य सैन्य अधिकारियों की मौत के कारण गम में था। जब जगह-जगह इस हरकत के लिए उनकी फजीहत होने लगी तो उन्होंने गोवा में महिला कन्वेंशन के पहले श्री बिपिन रावत, उनकी पत्नी एवं सेना के अफसरों को श्रद्धांजलि दी।