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इजरायल में ‘लोन वुल्फ अटैक’: फिलिस्तीनी लड़की ने यहूदी महिला की पीठ में छूरा घोंपा, लोगों ने मार्च निकाल कहा- आतंकियों को मारा जाए

इजरायल में बुधवार (8 दिसंबर 2021) को पूर्वी येरुशलम में एक हमलावर ने अपने बच्चों के साथ जा रही एक महिला को एक फिलिस्तीनी हमलावर चाकू मारकर घायल कर दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपित वहाँ से फरार हो गया। घटना में 26 वर्षीय पीड़ित महिला बुरी तरह से घायल हो गई और उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद इजरायल के लोगों में आक्रोश फैल गया है और उन्होंने मार्च निकालकर आतंकियों को खत्म करने की माँग की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चाकू घोंपने की घटना पूर्वी येरुशलम के शेख जर्राह में उस वक्त हुई जब मारिया कोहेन (26) नाम की एक यहूदी महिला अपने 5 बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी। पुलिस का कहना है कि पीड़िता जब अपने बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी, उसी दौरान फिलिस्तीनी हमलावर ने पीछे से उसके पीठ में चाकू घोंप दिया। बुधवार को इस मामले में चैनल 12 न्यूज को कोहेन ने बताया, “मैं दर्द से चिल्लाई, जिसके बाद मेरे बेटे ने कहा कि माँ आपकी पीठ में चाकू लगी है।” इस मामले में पुलिस ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें देखने पर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हमला करने वाली एक लड़की है। उसकी उम्र लगभग 15 साल बताई जा रही है।

ज्ञात हो कि यहाँ पर इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दशकों से जंग चल रही है। यहाँ रहने वाले फिलिस्तीनियों को इस बात का डर सताता रहता है कि इजरायल उन्हें यहाँ से कभी भी बेदखल कर सकता है। कहा जा रहा है कि पिछले वसंत में फिलिस्तानी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष के बाद ही 11 दिवसीय गाजा युद्ध हुआ था।

इसी तरह पिछले महीने आतंकी संगठन हमास के एक आतंकवादी ने येरुशलम के ओल्ड सिटी में अंधाधुन गोलियाँ बरसाया था, जिसमें इस्राइली नागरिक की मौत हो गई थी और चार अन्य लोग घायल हो गए थे। उसके बाद काउंटर अटैक में पुलिस ने हमलावर को मार गिराया था।

बहरहाल, इस घटना के बाद सैकड़ों इजरायली सैकड़ों पर उतर आए हैं। इनमें अधिकतर किशोर और युवा इजरायली शामिल हैं। मार्च के दौरान लोगों ने आतंकियों की मौत की माँग की।

इन प्रदर्शनकारियों का नारा था ‘मुझे फिलिस्तीनियों से बदला लेने दो’। मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ हाथापाई भी हुई। बाद में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया। बता दें कि शेख जर्राह में इजरायल और फिलिस्तीन के बीच विवाद का फ्लैश प्वाइंट बनकर उभरा है। हमले के मामले में 14 साल की एक फिलिस्तीनी लड़की को गिरफ्तार किया गया है। इस बात की जानकारी उसके वकील मोहम्मद महमूद ने द टाइम्स ऑफ इज़राइल को दी है। गौरतलब है कि बीते कुछ समय से इजरायल में ‘लोन वुल्फ’ अटैक के मामले बढ़े हैं।

आधे से अधिक इजरायली चाहते हैं ईरान पर हो हमला

वहीं, इजरायली लोगों का मन जानने के लिए इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट ने हाल ही में एक सर्वे किया था। बुधवार को प्रकाशित इस सर्वे के मुताबिक, इजरायल की आधी से अधिक आबादी का मानना है कि अगर अमेरिका का साथ नहीं मिलता है तब भी इजरायल को ईरान पर हमला करना चाहिए। सर्वे के मुताबिक, 51 फीसदी लोगों का मानना है कि अगर इजरायल ईरान पर एकतरफा स्ट्राइक करता है तो वे उसका समर्थन करेंगे, जबकि, 31% ने कहा कि वे ऐसा नहीं करेंगे।

सर्वेक्षण के अनुसार, 54% इजरायलियों का मानना ​​है कि ईरान उसके अस्तित्व के लिए खतरा है। वहीं, 25% लोगों ने ईरान को ‘मध्यम खतरे’ के रूप में देखा, जबकि 13% लोग इस्लामी गणराज्य को केवल ‘छोटा खतरा’ मानते हैं। उधर, देश के प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने ईरान के संबंध में अपने एक्शन को लेकर वाशिंगटन को अवगत कराने पर सहमति व्यक्त की है।

पश्चिम बंगाल सरकार ने OpIndia की प्रधान संपादक नूपुर जे शर्मा पर किए थे 4 FIR, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सब वापस लो

पश्चिम बंगाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर 2021 को ऑपइंडिया की प्रधान संपादक नुपुर जे शर्मा के खिलाफ सभी 4 FIR वापस लेने का आदेश दिया। इस आदेश के साथ सुप्रीम कोर्ट ने विचारों की असहमति और उसके प्रति सहनशीलता के कम होते स्तर को लेकर चिंता भी व्यक्त की। कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से जो जानकारी पहले से उपलब्ध है, उसका परिणाम भुगतना पड़ता है।

नूपुर जे शर्मा और ऑपइंडिया के अन्य संपादकों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और वकील रवि शर्मा कर रहे थे। पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे कर रहे थे।

पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सभी FIR वापस लेने पर नूपुर जे शर्मा का बयान

प्रिय पाठकों,

यह थोड़ा भावनात्मक हो सकता है, क्योंकि यह मैंने भोगा है। 2020 में मेरे खिलाफ 3 FIR दर्ज की गई। घंटों तक मुझसे पूछताछ की गई। सारी FIR ऑपइंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट पर की गई। एक रिपोर्ट – जो हमने दुर्गा पूजा पंडाल में अजान बजाने पर की थी। दूसरी रिपोर्ट – बंगाल में COVID से उबरने और उसके प्रबंधन पर थी। तीसरी रिपोर्ट थी – तेलिनीपारा दंगों पर, जहाँ हिंदुओं पर हमला किया गया था।

उस दौरान, मेरे पति, जिनका ऑपइंडिया से कोई लेना-देना नहीं है, से भी पूछताछ की गई। मेरे पिता तक को धमकी दी गई। ऑपइंडिया के CEO राहुल रौशन को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन एफआईआर पर रोक लगाने के एक साल बाद, बंगाल की सरकार ने एक और एफआईआर कर दी थी। इसके बारे में तो हमें कोई जानकारी भी नहीं दी गई थी। यह FIR तेलिनीपारा दंगों पर ऑपइंडिया में प्रकाशित की गई 3 रिपोर्टों से संबंधित थी। बंगाल सरकार ने ‘तेजी’ दिखाते हुए इस मामले को CID को सौंप दिया था और तब से ऑपइंडिया के खिलाफ उनका दुर्भावनापूर्ण अभियान जारी था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस एफआईआर पर भी रोक लगा दी है और बंगाल सरकार से जवाब माँगा है।

यह पढ़ने में जितना आसान है, जीना उतना ही कठिन। क्योंकि इन सब के बीच मुझे धमकियाँ भी आती रहीं। धमकियाँ ऐसी-ऐसी कि अंततः मुझे पश्चिम बंगाल छोड़ना ही पड़ा।

आज इन सभी चीजों का अंत हो गया। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ तीखी टिप्पणियाँ की हैं। यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि बंगाल सरकार मेरे खिलाफ सभी 4 FIR वापस ले ले।

मौका मिलेगा तो मैं शायद इस यात्रा को व्यक्त करने के लिए एक लंबा लेख लिखूँगी। फिलहाल मैं अपने पाठकों को धन्यवाद देना चाहती हूँ, जो हमारे साथ तब खड़े थे, जब मुझे खुद पर संदेह हो रहा था। मैं ऑपइंडिया की टीम को धन्यवाद देना चाहती हूँ, जो हमेशा की तरह मजबूती से खड़ी रही। मैं अपने उन दोस्तों को धन्यवाद देना चाहती हूँ, जिन्होंने बंगाल छोड़ने के बाद मेरा साथ तब नहीं छोड़ा, जब मेरा दिमाग खुद ही मेरा साथ छोड़ दे रहा था।

वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी और वकील रवि शर्मा को हम पर विश्वास था। इन दो लोगों ने मुझे मेरी आजादी वापस दिलाने में मदद की… बिना एक पैसा लिए। उन्होंने यह सब इसलिए किया क्योंकि उन्हें हम पर विश्वास था। ऑपइंडिया और मैं (व्यक्तिगत रूप) से सदैव इन दोनों का ऋणी रहूँगी।

सबसे बड़ी बात… मैं भारत के सर्वोच्च न्यायालय को धन्यवाद देना चाहती हूँ। उन्होंने आज फिर से सच्चाई को बचाए रखा, विश्वास बनाए रखा।

ऑपइंडिया विजयी हुआ – उनसे जिन्होंने द्वेषपूर्ण भावना से और सत्ता के नशे में चूर होकर हमें चुप कराना चाहा, शांत कराना चाहा… ताकि सच कहीं दब जाए, मर जाए… लेकिन हमारी जीत से ऐसा हो न सका। यह जीत हर उस धार्मिक आवाज की जीत है, जो हमारे लिए लड़ी, हमारे साथ खड़ी रही और हमारा साथ दिया।

हम जो काम करते हैं, जो कर रहे हैं, उसे करना जारी रखेंगे और मुझे पता है कि आप हमेशा की तरह हमारे लिए खड़े रहेंगे, डटे रहेंगे।

जय सिया राम।

सत्यमेव जयते।

बचपन की दोस्त क्रिश्चियन लड़की से शादी करेंगे तेजस्वी यादव, बहन रोहिणी ने लिखा- खुशियों से गुलजार आँगन है होने वाला

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव आज गुरुवार (9 दिसंबर) को दिल्ली में राजश्री के साथ वैवाहिक बंधन में बंधने जा रहे हैं। तेजस्वी की शादी की तमाम अटकलों पर विराम देते हुए उनकी बहन रोहिणी आचार्य ने ट्वीट कर इसकी पुष्टि की। अपने ट्वीट में रोहिणी ने लिखा, “भाई के सिर पर सेहरा है सजने वाला, खुशियों से गुलजार घर का आँगन है होने वाला।” हालाँकि, मीडिया में खबरें आने के बाद मीसा भारती ने इसका खंडन किया था, जिसको लेकर अटकलें शुरू हो गई थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेजस्वी की होने वाली पत्नी राजश्री का पैतृक घर हरियाणा के रेवाड़ी जिले में है। कुछ रिपोर्ट में उन्हें बंगाल की बताया जा रहा है। राजश्री दिल्ली के एक बड़े उद्योगपति की बेटी हैं और दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में रहती हैं। बताया जा रहा है कि राजश्री का परिवार कुछ समय के लिए कोलकाता में भी रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक लड़की का परिवार ईसाई धर्म मानता है जिसे लालू यादव के परिवार ने सार्वजनिक नहीं किया है।

तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप ने भी ट्विटर पर गाना लिख कर अपने भाई को सगाई की शुभकामना दी थी। उन्होंने लिखा था, “बचपन का प्यार मेरा भूल नहीं जाना रे”। हालाँकि, बाद में उन्होंने इसे अपने सोशल मीडिया हैंडल से डिलीट कर दिया था। बताया ये भी जा रहा है कि सगाई कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए लालू यादव का पूरा परिवार दिल्ली पहुँच चुका है।

तेजस्वी और राजश्री दिल्ली स्थित आरकेपुरम दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) में एक साथ पढ़ते थे। दोनों पहले से ही एक दूसरे के अच्छे दोस्त बताए जा रहे हैं। तेजस्वी कक्षा 9 पास हैं, जबकि राजश्री उच्च शिक्षित बताई जा रही हैं। समारोह में शामिल होने वाले मेहमानों की संख्या बहुत सीमित रहने की संभावना है। बताया जा रहा है कि तेजस्वी के परिवार के अलावा कुछ गिने चुने नेता और रिश्तेदार ही इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।

माना ये भी जा रहा है कि सगाई और विवाह की रस्म साथ ही पूरी की जाएगी। यह आयोजन दिल्ली के एक फार्म हाउस में होगा। इस प्रबंधन उनकी बड़ी बहन मीसा भारती खुद देख रही हैं। एक तस्वीर भी सोशल मीडिया पर राजश्री की बता कर शेयर हो रही है। हालाँकि, तस्वीर की प्रमाणिकता की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। तेजस्वी की सगाई की खबर पर राजद कार्यालयों में मिठाई भी बाँटी गई।

900 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने वाला CEO अब माँग रहा माफी, हो रही थी ग्लोबल बदनामी

डिजिटल फर्स्ट होम ओनरशिप कम्पनी better.com के CEO विशाल गर्ग ने उन सभी 900 कर्मचारियों से माफ़ी माँगी है जिन्हे उन्होंने ज़ूम कॉल पर ही नौकरी से निकाल दिया था। उनके बर्ताव का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इसी के चलते उनकी सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हो रही थी। यह माफ़ी उन्होंने मंगलवार (7 दिसंबर) को एक पत्र जारी कर के माँगी है। यह ज़ूम कॉल बुधवार (1 दिसंबर) को हुई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अपने बयान में विशाल गर्ग ने कहा, “मुझे एहसास हुआ है कि मेरा ये संदेश देने का तरीका सही नहीं था। मैंने कर्मचारियों के मुश्किल समय को और भी ज्यादा कठिन कर दिया। मैं अपनी गलती स्वीकार कर रहा हूँ।”

गौरतलब है कि विशाल गर्ग ने तब स्टाफ को नौकरी से निकालते हुए कहा था, ‘“अगर आप इस कॉल से जुड़े हैं, तो आप उस बदकिस्तम ग्रुप के सदस्य हैं, जिनकी छँटनी की जा रही है। आपकी सेवा को यहाँ तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है। एचआर की ओर से आपको मेल आ जाएगा।”

इस व्यवहार के बाद सोशल मीडिया पर विशाल गर्ग को खड़ूस बॉस कहा जा रहा था। लोगों को कंपनी से निकाले गए कर्मचारियों के लिए बुरा लग रहा है। वहीं कुछ का पूछना है कि अगर ये आदमी ऐसा है तो इसकी कंपनी में कौन निवेश करना चाहेगा। विशाल गर्ग Better.com के संस्थापक और सीईओ हैं। इसके अलावा गर्ग के लिंक्डइन बायो के अनुसार वो निवेश करने वाली कंपनी वन जीरो कैपिटल के फाउंडिंग पार्टनर भी हैं। उन्होंने 7 साल की उम्र में भारत छोड़ा था। इसके बाद वह न्यूयॉर्क गए थे।

ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह को बचाने की हर संभव कोशिश, सभी अधिकारियों का पार्थिव शरीर आएगा दिल्ली, जाँच शुरू: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

हेलीकॉप्टर हादसे में जान गँवाने वाले CDS जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका सहित सभी पार्थिव शरीर को आज गुरुवार (9 दिसंबर) को दिल्ली लाया जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस हादसे को लेकर लोकसभा में बयान दिया। राजनाथ सिंह ने बताया कि सुबह 11.48 बजे पर सुलूर के लिए उड़ान भरने वाले Mi 17 V 5 हेलिकॉप्टर को दोपहर 12:15 बजे वेलिंगटन में लैंड करना था, लेकिन लगभग 12.08 बजे हेलीकॉप्टर से सम्पर्क टूट गया। कुछ स्थानीय लोगों ने कुन्नूर के पास जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर को जलते हुए देखा।

रक्षा मंत्री ने आगे बताया, “सूचना मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन ने बचाव कार्य शुरू किया। मलबे से जितने भी लोगों को निकाला जा सका, उन्हें वेलिंगट के मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया। हेलीकॉप्टर में सवार 14 में से 13 लोगों की मृत्यु हो गई। एकमात्र जीवित व्यक्ति ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह हैं, जो अभी लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं। उन्हें बचाने के सभी संभव प्रयास किए जा रहे हैं। एयर चीफ़ मार्शल (विवेक राम चौधरी) को सूचना प्राप्त होने पर कल ही भेज दिया गया। उन्होंने घटनास्थल और वेलिंगटन हॉस्पिटल जाकर स्थिति का जायजा लिया।”

राजनाथ सिंह का बयान

रक्षामंत्री ने कहा, “इस दुर्घटना के संबंध में इंडियन एयर फोर्स द्वारा एयर मार्शल मानवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में एक इन्क्वायरी के आदेश दे दिए गए हैं। इन्क्वायरी के टीम के ऑफिसर्स ने कल ही वेलिंगटन पहुँचकर अपना कार्य भी प्रारंभ कर दिया। चीफ ऑफ डिफेेंस स्टाफ का अंतिम संस्कार फुल मिलिट्री ऑनर्स के साथ किया जाएगा। अन्य सभी ऑफिसर्स का अंतिम संस्कार भी एप्रोप्रिएट मिलिट्री ऑनर्स के साथ किया जाएगा।”

रक्षा मंत्री देश की ओर सभी दिवंगत अधिकारियों को देश की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। वहीं, दुर्घटना में मारे सभी अधिकारियों के पार्थिव शरीर को वेलिंगटन के मिलिट्री अस्पताल से सम्मान के साथ तमिलनाडु के मद्रास रेजिमेंटल सेंटर लाया गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पार्थिव शरीर को दिवंगत CDS बिपिन रावत के घर पर लाया जाएगा, जहाँ लोग उनका अंतिम दर्शन कर सकेंगे।

CDS बिपिन रावत के लिए जिन सैनिकों (रिटायर्ड) ने दिखाई नफरत… पढ़ें आर्मी वाले शाहबेग सिंह को, जो बन गया था खालिस्तानी

भारतीय वायु सेना का Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर बुधवार (8 दिसंबर 2021) को तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के कुन्नूर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में भारत ने अपने पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी मधुलिका रावत के अलावा अन्य 11 सैनिकों को खो दिया।

हेलीकॉप्टर सुलूर से वेलिंगटन के लिए उड़ान भर रहा था। उस पर 14 लोग सवार थे। यात्रियों में सीडीएस रावत के साथ उनकी पत्नी मधुलिका रावत, ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, एनके गुरसेवक सिंह, एनके जितेंद्र, लांस नायक विवेक कुमार, लांस नायक बी साई तेजा और हवलदार सतपाल शामिल थे।

हालाँकि, जब बिपिन रावत की मौत की कोई पुष्टि नहीं हुई थी, तब भी वर्दी पहन चुके (अब रिटायर हो चुके) कुछ लोग देश के पहले सीडीएस के लिए अपनी नफरत नहीं छिपा सके। ऐसे समय में जब पूरा देश जनरल बिपिन रावत की सुरक्षा और भलाई के लिए प्रार्थना कर रहा था, कुछ सेना के जवान (रिटायर्ड) ऐसे भी थे, जिन्होंने उनकी मृत्यु की बात ट्वीट कर दी। कुछ अन्य लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया कि बिपिन रावत के साथ वही हुआ, जिसके वह हकदार थे।

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) एचएस पनाग ने ट्वीट किया था, ‘RIP General Bipin Rawat’ ट्वीट कर दिया, जबकि उस समय सेना या केंद्र सरकार की तरफ से उनकी मौत की पुष्टि नहीं की गई थी।

एक अन्य रिटायर्ड कर्नल बलजीत बख्शी ने ट्वीट किया, “लोगों के साथ डील करने का कर्म (Karma) का अपना तरीका होता है।” उनके ट्वीट ने सोशल मीडिया पर आक्रोश फैला दिया। नेटिज़न्स ने जनरल बिपिन रावत पर निंदनीय कमेंट करने के लिए उन पर हमला किया।

Retired armymen hating on CDS reminds one of army officer turned Khalistan Shahbeg Singh

बख्शी ने बाद में ट्वीट को डिलीट कर दिया और माफी माँगते हुए कहा कि उनके ट्वीट को कई लोगों ने पसंद नहीं किया। उनका किसी के प्रति कोई बुरा इरादा नहीं था। हालाँकि कुछ ही मिनट बाद उन्होंने अपनी माफी वाली ट्वीट भी डिलीट कर दी।

As retired armymen express their hate for country's CDS, read who was Shahbeg Singh

उल्लेखनीय है कि रिटायर्ड कर्नल बलजीत बख्शी ने खालिस्तानियों के समर्थन वाले प्रतिबंधित ‘सिख फॉर जस्टिस’ जैसे संगठनों के लिए अपना पुरजोर समर्थन दिखाया था, जिन्होंने तथाकथित किसानों के आंदोलन को हाइजैक कर लिया था।

19 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा की थी, जिसके बाद रिटायर्ड कर्नल बलजीत बख्शीत ने एक व्यक्ति की तस्वीर पोस्ट की थी, जिसका चेहरा खून से लथपथ था और लिखा था, “आखिरकार, खून रंग लाया। अभी तो मोदी ने जुर्म कबूल किया है, सजा मिलना तो बाकी है।

शाहबेग सिंह कौन थे?

वर्दी पहनने वाले और देश के प्रतिष्ठित और सम्माननीय सशस्त्र बलों में सेवा करने वाले लोगों के ये अविवेकपूर्ण कथन भारतीय सेना के एक अधिकारी शाहबेग सिंह की याद दिलाते हैं, जिन्होंने बाद में खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के सैन्य सलाहकार के रूप में काम किया।

खालिस्तानी आंदोलन शुरू होने से पहले शाहबेग सिंह भारतीय सेना में कार्यरत थे और बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान पाकिस्तान समर्थित इस्लामवादियों द्वारा उत्पन्न खतरों को दूर करने के लिए मुक्ति वाहिनी स्वयंसेवकों की ट्रेनिंग में शामिल थे। उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में सेना से बर्खास्त कर दिया गया था और उनके रिटायर होने से ठीक एक दिन पहले उनकी पेंशन रोक दी गई थी।

शाहबेग और जरनैल सिंह भिंडरावाले

सशस्त्र बलों से बर्खास्त होने के बाद, शाहबेग सिंह खालिस्तान आंदोलन में शामिल हो गए और समूह के आतंकवादियों के लिए एक सैन्य सलाहकार और ट्रेनर के रूप में कार्य किया। रॉ की काउंटर-खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, खालिस्तान सेना के तीन प्रमुख व्यक्ति मेजर जनरल शाहबेग सिंह, बलबीर सिंह और अमरीक सिंह थे।

दिसंबर 1983 में, सिख राजनीतिक दल अकाली दल के अध्यक्ष हरचरण सिंह लोंगोवाल ने जरनैल सिंह भिंडरावाले को स्वर्ण मंदिर परिसर में रहने के लिए आमंत्रित किया था। शाहबेग सिंह को व्यापक रूप से मंदिर परिसर की सुरक्षा को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है, जिसने पैदल कमांडो ऑपरेशन की संभावना को असंभव बना दिया था।

कहा जाता है कि शाहबेग सिंह ने जून 1984 में अमृतसर के हरमंदिर साहिब में मौजूद सिख आतंकवादियों को संगठित किया था। उसी महीने भारत सरकार ने खालिस्तानी आतंकवाद के खतरे को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया था। सिंह ऑपरेशन के शुरुआती चरणों के दौरान अकाल तख्त और दर्शिनी देवरी के बीच गोलीबारी के दौरान मारे गए थे। बाद में उसका शव मिला और ऑपरेशन खत्म होने पर उसकी पहचान की गई। देश के साथ विश्वासघात के बावजूद, सिंह का अंतिम संस्कार सिख रीति-रिवाजों और पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया।

ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर… CDS बिपिन रावत के हेलिकॉप्टर के महत्वपूर्ण उपकरण बरामद: लोकसभा में श्रद्धांजलि

भारत के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत का बुधवार (8 दिसंबर 2021) को तमिलनाडु के कुन्नूर में विमान हादसे में निधन हो गया। सीडीएस बिपिन रावत, उनकी पत्नी और हेलिकॉप्टर क्रैश में मारे गए सभी लोगों के पार्थिव शरीर को वेलिंग्टन मिलिट्री हॉस्पिटल से मद्रास रेजिमेंट सेंटर लाया गया। यहाँ सैन्य अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी।  

हेलिकॉप्टर क्रैश वाली साइट को घेर दिया गया है। भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने तमिलनाडु के डीजीपी सी सिलेंद्र बाबू के साथ नीलगिरी जिले में कुन्नूर के पास हेलिकॉप्टर दुर्घटना स्थल का दौरा किया। यहाँ उन्होंने पूरे इलाके का मुआयना किया और अधिकारियों से घटनाक्रम पर बात की। डायरेक्टर श्रीनिवासन के नेतृत्व में तमिलनाडु फोरेंसिक विज्ञान विभाग की एक टीम कुन्नूर में कैटरी के पास दुर्घटनास्थल पर पहुँची।

वायु सेना के अधिकारियों ने तमिलनाडु के पास कुन्नूर के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए Mi-17 के महत्वपूर्ण उपकरण मौके से बरामद किए हैं।

बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त हुए Mi-17 हेलिकॉप्टर का फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर साइट से बरामद किया गया है। इसके अलावा एक ब्लैक बॉक्स मिलने की भी बात कही जा रही है। माना जा रहा है कि इसकी जाँच से हादसे की वजह का पता लगाने में आसानी होगी। 

वहीं कछ वीडियो भी सामने आया है, जिसे स्थानीय लोगों ने क्रैश से पहले बनाया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोकसभा में इसके बारे में बात करते हुए बताया कि सबसे पहले स्थानीय लोगों को इस घटना की जानकारी हुई। 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हेलिकॉप्टर हादसे की पूरी जानकारी लोकसभा में दी। उन्होंने बताया कि Mi 17 हेलिकॉप्टर ने सुबह 11:48 पर सुलूर से उड़ान भरी। इसे 12:15 पर वेलिंगटन में लैंड करना था, लेकिन 12:08 मिनट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया। इस दौरान लोगों ने आवाज सुनी तो मौके पर पहुँचे और तुरंत ही रेस्क्यू शुरू किया।

उन्होंने बताया कि हेलिकॉप्टर में सवार 14 में से 13 लोगों की मृत्यु हो गई। इनमें सीडीएस बिपिन रावत एवं उनकी पत्नी मधुलिका रावत भी शामिल थीं। जनरल बिपिन रावत वेलिंगटन के डिफेंस कॉलेज के छात्रों से बातचीत के लिए अपने एक शेड्यूल्ड कार्यक्रम पर थे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा कि कल सुबह 11:20 बजे विमान से संपर्क टूट गया था। उन्होंने कहा कि वायुसेना के चीफ को मौके पर भेजा गया है। आज शाम तक सीडीएस समेत सभी लोगों के शव दिल्ली लाए जाएँगे और पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।

…तो राम मंदिर की सुनवाई टल जाती: पूर्व CJI रंजन गोगोई ने नहीं घुसने दिया उस शख्स को, जो पहुँचाना चाहता था बाधा

पूर्व चीफ जस्टिस और अयोध्या के राम जन्मभूमि मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की आत्मकथा ‘जस्टिस फॉर द जज’ (Justice for the Judge) का लोकार्पण बुधवार (8 दिसंबर 2021) को हुआ। इस किताब को लेकर उन्होंने एक ऐसे शख्स का जिक्र किया, जिसको उन्होंने राम जन्मभूमि मामले के फैसले में बाधा डालने से रोका था।

पूर्व चीफ जस्टिस ने बताया कि 16 अक्टूबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन उस दिन एक शख्स ने सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश कर इस फैसले पर रुकावट डालने का प्रयास किया था। हालाँकि, 9 नवंबर 2019 को इस मामले पर सुनवाई हुई और हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया गया।

वर्तमान में राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने इसका भी खुलासा​ किया है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पेश हुए वकीलों में से एक न्यायपालिका के कार्य में बाधा डाल रहा था। उसे जस्टिस गोगोई के आदेश के बाद अदालत में आने से रोक दिया गया था। जस्टिस गोगोई ने बताया कि ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन्हें आभास हो गया था कि उस शख्स का उद्देश्य केवल सुनवाई को बाधित करना था।

पूर्व सीजेआई ने कहा कि अगर वह शख्स अदालत में प्रवेश कर जाता, तो इससे कोर्ट का कामकाज प्रभावित होता और कोर्ट को इस मामले को स्थगित करना पड़ सकता था। अयोध्या मामले पर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाले गोगोई ने उस शख्स को लेकर टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया, “मैं उसकी पहचान कभी नहीं बताऊँगा।”

लोहे के पेन और हीरे की निब से लिखी गई पुस्तक

बता दें कि नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी में पूर्व सीजेआई की आत्मकथा का लोकार्पण हुआ। उस समय उनके साथ पूर्व चीफ जस्टिस एसए बोबडे भी थे। जस्टिस बोबडे ने कहा कि यह पुस्तक लोहे के पेन और हीरे की निब से लिखी गई है।

17 नवंबर, 2019 को रिटायर हुए रंजन गोगोई की आत्मकथा के लोकार्पण पर बोबडे के अलावा सुप्रीम कोर्ट के जज, पूर्व कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद व अन्य लोग भी मौजूद थे। इस दौरान गोगोई ने अयोध्या मामले को प्राथमिकता देने और कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के मामले और अनुच्छेद-370 को हटाए जाने के मामले को प्राथमिकता न दिए जाने के सवालों पर कहा कि अयोध्या का मुकदमा लंबे समय से लंबित था। उन्होंने उसकी सुनवाई की पीठ गठित की और तय समय में इसे पूरा किया।

मॉडल करवाने आई फोटोशूट… सलीम, अजमल और शमीर ने किया गैंगरेप: केरल पुलिस पर ढिलाई का आरोप

केरल के कोच्चि में फोटोशूट करवाने आई एक मॉडल के साथ गैंगरेप किया गया। गैंगरेप करने वाले आरोपितों के नाम सलीम, मोहम्मद अजमल और शमीर हैं। सलीम और अजमल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

गैंगरेप पीड़िता को क्रिस्टीना रेसीडेंसी नाम के लॉज में बंधक बनाया गया था। बंधक बना कर उनके साथ दुष्कर्म 1 दिसंबर से 3 दिसंबर 2021 तक किया गया। पीड़िता का अश्लील वीडियो भी बनाया गया। साथ ही उन्हें ब्लैकमेल भी किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित मॉडल मलप्पुरम से कोच्चि किसी परिचित के पास आई थीं। वह 28 नवम्बर को कोच्चि पहुँची थीं। यहाँ वो एक लॉज में ठहरीं, जिसका नाम क्रिस्टीना रेसीडेंसी है और यहीं उनके साथ दुष्कर्म किया गया।। यह लॉज ककनाथ में एदाचिरा के पास है।

क्रिस्टीना रेसीडेंसी लॉज में पीड़िता के ठहरने के बाद आरोपितों ने रात में फोटोशूट के बहाने उन्हें अपने कमरे में भी बुलाया। हालाँकि पीड़िता ने मना कर दिया था। इसके बाद लॉज की मालकिन क्रिस्टीना ने अपने साथियों (सलीम, मोहम्मद अजमल और शमीर) के साथ मिल कर इस कृत्य को अंजाम दिया। इसके लिए इन लोगों ने पीड़िता की कोल्डड्रिंग में नशा मिला दिया था। जब उन्हें होश आया, तब उनका अश्लील वीडियो दिखा कर उनके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया।

पीड़ित मॉडल की उम्र 27 साल है। पीड़िता के मुताबिक पहले वो डर से चुप रहीं लेकिन बाद में हिम्मत कर के शिकायत का फैसला किया। यह केस इंफोपार्क पुलिस स्टेशन में दर्ज है। पीड़िता के मजिस्ट्रेट के सामने भी बयान दर्ज हो चुके हैं।

बयान में पीड़िता ने बताया है कि उन्हें कमरे में बंद रखा जाता था। मॉडलिंग और फोटोशूट के नाम पर पीड़िता ने आरोप लगाया कि ये आरोपित केरल और दूसरे राज्यों की लड़कियों को इन्हीं मकसद (गैंगरेप) से अपने यहाँ रखते हैं। पीड़िता ने केरल पुलिस पर भी ढिलाई बरतने के आरोप लगाए। मॉडल के अनुसार पुलिस का व्यवहार संतोषजनक नहीं रहा। उन्होंने आरोपितों को भागने का मौका दिया।

आरोपित सलीम की उम्र लगभग 33 साल है। पुलिस ने चौथे आरोपित के रूप में लॉज की मालकिन क्रिस्टीना को नामजद किया है। पुलिस फरार क्रिस्टीना और शमीर की तलाश कर रही है।

कलावा बाँध खुद को विशाल बताता था नवाजिश, हिंदू युवती का यौन शोषण कर ₹2.5 लाख ऐंठे: लैपटॉप से मिले कई लड़कियों के डिटेल

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में लव जिहाद के हालिया मामले में नवाजिश नाम के एक मुस्लिम युवक ने खुद को विशाल ठाकुर बताकर एक लड़की से दोस्ती की, उसके बाद उसका शारीरिक शोषण करने लगा। इस दौरान उसने लड़की से ढाई लाख रुपये भी ऐंठ लिए। पीड़िता ने इस संबंध में अलीगंड थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके लैपटॉप और मोबाइल से कई अन्य लड़कियों की तस्वीरें और मोबाइल नंबर पुलिस ने बरामद किए हैं।

मामला लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र का है। यहाँ बीटेक करने के बाद केवाईसी वेरिफिकेशन का काम करने वाले नवाजिश के हाथ एक युवती का मोबाइल नंबर लगा। इसके बाद वह उस लड़की से बात करने लगा। इस दौरान वह अपना नाम विशाल ठाकुर बताता था। इस तरह उसने युवती से दोस्ती कर ली और फिर प्रेम के जाल में फँसा लिया। वह दिखावा के लिए हाथ में कलवा बाँधता था और खुद को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार दिखाता था।

युवक को देखकर लड़की को किसी का संदेह नहीं हुआ और वह आरोपी को हिंदू को समझने लगी। इसी दौरान शादी का झाँसा देकर आरोपित ने युवती से दुष्कर्म भी किया। अपनी आर्थिक स्तिथि का हवाला देकर वह युवती से ढाई लाख रुपये भी ऐंठ लिया। जब लड़की को सच्चाई पता चली तो उसने थाने में नवाजिश के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

गाजीपुर के इंस्पेक्टर अनिल कुमार ने बताया कि आरोपित युवक का नाम नवाजिश पुत्र शम्शुल है और वह मूल रूप से अंबेडकर नगर के बसखारी का रहने वाला है। वह एक निजी कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहा है।

पुलिस ने बताया कि नवाजिश के लैपटॉप और लैपटॉप से कई अन्य लड़कियों की तस्वीरें और मोबाइल नंबर मिले हैं। पुलिस को अशंका है कि आरोपित ने कई और लड़कियों को भी अपने प्रेम जाल में फँसाकर रखा है। इन लड़कियों के साथ भी शादी के नाम पर वह शारीरिक शोषण करता होगा और उनसे पैसे ऐंठता होगा।