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70% अप्रूवल के साथ PM मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन को सिर्फ 44%

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बार फिर से दुनिया का सबसे लोकप्रिय नेता चुना गया है। अमेरिकी कंपनी ‘द मॉर्निंग कंसल्ट’ की ओर से जारी ग्लोबल लीडर अप्रूवल रेटिंग में पीएम मोदी 70 फीसदी अप्रूवल के साथ टॉप पर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया के 13 राष्ट्र प्रमुखों की लिस्ट में पीएम मोदी ने अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। इस रेटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन छठे पायदान पर हैं।

पीएम मोदी के बाद मैक्सिकन राष्ट्रपति एंड्रेस मैनुअल लोपेज ओब्राडोर 66 फीसदी रेटिंग के साथ दूसरे नंबर पर हैं। इसके बाद इटली के प्रधानमंत्री मारियो द्रागी 58 फीसदी रेटिंग के साथ तीसरे नंबर पर, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल 54 फीसदी के साथ चौथे नंबर पर और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन 47 फीसदी के साथ पाँचवें नंबर पर हैं।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन 44 फीसदी के साथ छठे स्थान पर हैं। कनाडा के जस्टिन ट्रूडो 43 फीसदी के साथ सातवें स्थान पर, फुमियो किशिदा 42 फीसदी के साथ आठवें स्थान पर, मून जे-इन 41 फीसदी के साथ नौवें स्थान पर और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन 40 फीसदी के साथ दसवें स्थान पर हैं। वहीं, पेड्रो सांचेज 37 फीसदी के साथ 11वें, इमैनुएल मैक्रों 36 फीसदी के साथ 12वें, जायर बोल्सोनारो 35 फीसदी के साथ 13वें स्थान पर हैं।

बता दें कि मॉर्निंग कंसल्ट एक पॉलिटिकल इंटेलिजेंस रेटिंग कंपनी है। यह ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इटली, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, स्पेन, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में सरकारी नेताओं की रेटिंग को ट्रैक करती है। यह कंपनी 13 देशों के डेटा को साप्ताहिक आधार पर अपडेट करती है।

इस साल अप्रैल-मई में कोरोना की दूसरी लहर के कारण पीएम मोदी की रेटिंग में गिरावट दर्ज की गई थी। अप्रैल के बाद से जुलाई तक पीएम मोदी की अप्रूवल रेटिंग 70% से नीचे रही है, लेकिन अगस्त 2021 से फिर यह रेटिंग 70% से ऊपर बनी हुई है।

बीजेपी को दफना देंगे, ‘जिन्ना प्रेमी’ अखिलेश यादव को CM बनाएँगे: UP चुनाव से पहले असंसदीय हुए ओमप्रकाश राजभर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही नेताओं की बयानबाजी धारदार होने के साथ-साथ स्तरहीन होती भी दिख रही है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर अब इसी कड़ी में ‘मारने-दफनाने’ जैसे शब्दों के साथ मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देश की सबसे बड़ी पार्टी यानी BJP को जमीन में दफन करने की धमकी दी है।

ओमप्रकाश राजभर ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर भी हमला करते हुए विवादित बयान दिया। राजभर ने कहा, ”अगर हिम्मत है तो केशव प्रसाद मौर्य जातिगत जनगणना पर बोलकर दिखाएँ, भाजपा उनको हटा देगी।” बोलते-बोलते उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात भी कह डाली।

विवादित छवि वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओपी राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह पर भी सियासी वार किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने 2017 में पिछड़ा सीएम बनाने की बात कही थी, लेकिन उत्तराखंडी को सीएम बना दिया और केशव को ‘शिखंडी’ बना दिया।

‘शिखंडी’ जैसे असंसदीय शब्द के प्रयोग पर भी ओमप्रकाश राजभर रुके नहीं। उन्होंने कड़े शब्दों का प्रयोग करते हुए आगे कहा कि बीजेपी में जितने भी पिछड़े लोग हैं, पीएम मोदी और अमित शाह से मिलकर माँग करें कि उत्तर प्रदेश में किसी पिछड़े को सीएम पद के लिए घोषित करें।

अखिलेश ‘जिन्ना प्रेमी’ यादव

जिस अखिलेश यादव को ओमप्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, वो मो. अली जिन्ना को सरदार पटेल के समकक्ष देखते हैं। न सिर्फ देखते हैं बल्कि जनता के बीच उस दिन यह बात करते हैं, जब सरदार पटेल का जन्मदिन (31 अक्टूबर) होता है। मजहब के नाम पर जिस शख्स ने भारत के दो टुकड़े किए, आजादी के बाद भी उस शख्स को चंद वोटों की खातिर लोग याद करते हैं।

आश्चर्य की बात यह कि जब अखिलेश यादव से जिन्ना बयान का संदर्भ पूछा गया तो उन्होंने किताब पढ़ने की सलाह दे डाली। अखिलेश यादव ने जिन्ना के ऊपर दिए अपने बयान पर कायम रहते हुए कहा – “मुझे संदर्भ क्यों क्लियर करना चाहिए? मैं चाहता हूँ कि लोग फिर से इतिहास की किताबें पढ़ें।”

ओमप्रकाश राजभर और विवाद

गौरतलब है कि ओमप्रकाश राजभर ने इससे पहले भी कई विवादित ​बयान दिए हैं। ओवैसी के साथी ने इस साल जुलाई में महिलाओं को बीजेपी के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया था। ओमप्रकाश राजभर ने आपत्तिजनक बयान देते हुए महिलाओं से वोट माँगने के लिए आने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करने के लिए कहा था। वाराणसी में पार्टी मीटिंग में भाग लेते हुए राजभर ने कहा था, ”भाजपा वाले वोट माँगने दो पैर पर आएँ तो उन्हें चारपाई पर वापस भेजो।”

इसके अलावा जनवरी 2019 में राजभर ने साम्प्रदायिक दंगों को लेकर कहा था कि जो नेता तुम्हें मजहब के नाम पर लड़ाने का काम करें, उन्हें वहीं आग लगाकर जला दो, ताकि वो समझ जाएँ कि हम एक-दूसरे को नहीं जलाने देंगे।

बलात्कार, घरेलू हिंसा और घटती नौकरियाँ… कारण जनसंख्या विस्फोट: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राज्यों को पार्टी बनाने की माँग

जनसंख्या नियंत्रण एक ऐसा मुद्दा है, जिस पर आए दिन बहस होती रहती है और इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई बार जनहित याचिका दायर कर देश में सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून को लागू करने की माँग भी की जाती रही है। हालाँकि, इसको लेकर अभी तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। इसी क्रम में बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की है। उन्होंने ‘टू चाइल्ड पॉलिसी’ सहित कुछ कदम उठाने की माँग वाली इस जनहित याचिका में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पार्टी बनाने की माँग की है।

वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिका में जनसंख्या विस्फोट को कई समस्याओं की जड़ बताया गया है। इनमें देश के प्राकृतिक संसाधनों पर अत्यधिक बोझ भी एक कारण है। उपाध्याय ने इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट में ऐसी ही याचिका दायर की थी, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की है।

इससे पहले देश में फैमिली प्लानिंग का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि फैमिली प्लानिंग परिवारों पर थोपना ठीक नहीं होगा। सरकार का यह मानना था कि ऐसा करने का विपरीत असर ये होगा कि क्षेत्र विशेष की डेमोग्राफी बदल सकती है, जो चिंता की बात होगी।

शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में केंद्र ने फैमिली प्लानिंग को लेकर अदालत को बताया था कि देश में परिवार कल्याण कार्यक्रम स्वैच्छिक प्रकृति का है। इसलिए लोग अपनी समझ से परिवार नियोजन करें और उनपर किसी तरह का कोई दबाव न हो।

देश में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को मिलाएँ तो हम चीन से आगे

बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट स्वच्छ हवा के अधिकार, पेयजल, स्वास्थ्य, शांतिपूर्ण नींद, शेल्टर, आजीविका और सुरक्षा की गारंटी देने वाले संविधान के अनुच्छेद 21 और 21ए को मजबूत कर पाने में पूरी तरह से असफल रहा है। उन्होंने कहा कि 20 फीसदी आबादी के पास तो आधार कार्ड ही नहीं है। देश में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को जोड़ लिया जाए तो यह संख्या चीन से ज्यादा हो जाती है।

उपाध्याय का कहना है कि जनसंख्या विस्फोट बलात्कार और घरेलू हिंसा जैसे जघन्य अपराधों के साथ-साथ भष्ट्राचार के बढ़ने का बड़ा कारण है। उन्होंने नौकरियों में कमी के अलावा प्रदूषण के लिए भी बढ़ती जनसंख्या को जिम्मेदार ठहराया है।

महाराष्ट्र के अस्पताल में फिर लगी आग: कोरोना का इलाज करा रहे 11 मरीजों की मौत, मृतकों को ₹5 लाख के मुआवजे का ऐलान

महाराष्ट्र में 6 नवम्बर 2021 (शनिवार) को एक बार फिर अस्पताल में आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है। इस बार अहमदनगर जिले का जिला अस्पताल आग की चपेट में आया है। इस घटना में कम-से-कम 11 मरीजों की मौत हो गई है, जबकि 6 अन्य मरीज झुलस गए हैं। ये सभी मरीज कोरोना का इलाज करवा रहे थे। इस घटना के बाद महाराष्ट्र सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि का ऐलान किया है। वहीं, मुंबई के हंसा हेरिटेज बिल्डिंग में भी आग लगी है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह आग जिला अस्पताल के ICU वार्ड में लगी। घटना के समय वार्ड में लगभग 25 मरीज मौजूद थे। आग लगने की वजह शार्ट सर्किट को बताया जा रहा है। हालाँकि, इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जाँच के बाद ही सामने आएगा। आग लगने का समय सुबह 11 बजे के आसपास का बताया जा रहा है।

महाराष्ट्र सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस घटना पर शोक जताया है। उन्होंने इस घटना की जाँच के भी आदेश दिए हैं। यह जाँच जिलाधिकारी राजेंद्र भोंसले करेंगे। जाँच की रिपोर्ट सप्ताह भर में देने की समय सीमा तय की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आग लगते ही घटनास्थल पर धुएँ का गुबार फैल गया। इसी के साथ ही मरीजों में चीख-पुकार मच गई। अस्पताल के अन्य कर्मियों में भी अफरा-तफरी फैल गई। स्थानीय सांसद इम्तियाज जलील ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए बताया कि घटना में 11 मरीजों की जान चली गई।

वहीं, मुंबई के कांदिवली के हंसा हेरिटेज बिल्डिंग में भी आग लगने की सूचना है। हालाँकि, इस घटना में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। मुंबई के फायर ब्रिगेड विभाग के बताया कि आग पर नियंत्रण करने के लिए दमकल की 7 गाड़ियाँ मौके पर पहुँच गई हैं। खबर लिखे जाने तक आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश जारी है।

महाराष्ट्र के अस्पतालों में आग लगने की लगातार घटनाओं ने वहाँ के स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानिए इस वर्ष की ऐसी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में –

28 अप्रैल 2021 को मुम्ब्रा के प्राइम क्रिटिकेयर अस्पताल में अचानक आग लग गई थी। इस घटना में 4 मरीजों की मृत्यु हो गई थी। घटना के समय वहाँ 20 मरीज भर्ती थे। कुछ ही समय में आग 2 मंजिल तक फ़ैल गई थी। इस घटना में भी आग की वजह शार्ट सर्किट बताया गया था।

इसी वर्ष 23 अप्रैल 2021 को मुंबई के पश्चिम विरार के विजय वल्लभ कोविड केयर अस्पताल में आग लग गई थी। इस अग्निकांड में लगभग 13 मरीजों की जान गई थी। मौत की वजह जहरीले धुएँ से घुटन बताई गई थी। यह आग सुबह 3 बजे के आसपास लगी थी। उस समय कई लोग सो रहे थे। आग की शुरुआत अस्पताल के एयरकंडीशन यूनिट से हुई थी। घटना के समय वार्ड में करीब 17 मरीजों का इलाज चल रहा था।

21 अप्रैल 2021 को नासिक के डॉ ज़ाकिर हुसैन अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडर लीक होने से लगभग 24 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा था। यह सिलेंडर भरने के दौरान लीक हुआ था। इसी लीकेज के चलते वेंटिलेटर पर रखे गए रोगियों को लगभग आधे घंटे तक ऑक्सीजन नहीं मिल पाई थी।

इसी वर्ष मार्च के महीने में मुंबई के भांडुप क्षेत्र में सनराइज अस्पताल में आग लगने की घटना हुई थी। आग अस्पताल के टॉप फ्लोर पर लगी थी। इस घटना में 10 मरीजों की मौत हो गई थी। ये सभी कोरोना का इलाज़ करवा रहे थे। घटना के समय वहाँ 76 मरीज इलाज करवा रहे थे।

इस साल जनवरी के शुरू में भंडारा जिला अस्पताल में आग लगने से 10 नवजात शिशुओं की जान चली गई थी। इन सभी की उम्र 1 से 2 माह के बीच थी। जन्म के समय कमजोर पैदा हुए कुल 17 बच्चों को यहाँ इलाज के लिए रखा गया था। उनमे मात्र 7 बच्चों की जान बच पाई। अधिकांश बच्चों की मौत घुटन की वजह से हुई थी।

लाल झंडा और हँसिया छाप ही आदिवासियों का रहनुमा, माँ लक्ष्मी की तस्वीर वाला गुंडा: हिंदीभाषी निर्माता की ‘जय भीम’ में हिंदी पर थप्पड़

बॉलीवुड तो अक्सर अपने हिन्दू विरोधी कंटेंट्स के कारण विवादों में रहता है। देश के अन्य हिस्सों की सिनेमा भी इससे अछूती नहीं है। यूँ तो दक्षिण भारत की फिल्मों में परंपरा और धर्म का सम्मान किया जाता रहा है, मंदिरों के इर्दगिर्द दृश्य फिल्माए जाते रहे हैं और स्थानीय देवी-देवताओं को उच्च दृश्य से देखा जाता रहा है। लेकिन, बीच-बीच में ‘एक्सपेरिमेंट्स’ के नाम पर ‘कुछ भी’ करने की प्रथा हर जगह है। सूर्या की फिल्म ‘जय भीम’ इसका एक अच्छा उदाहरण है।

‘जय भीम’ एक ऐसी फिल्म है, जिसमें थ्रिल को जातिवाद और पुलिस क्रूरता के इर्दगिर्द बुनते हुए कहानी जरूर 90 के दशक के मध्य की ली गई है, लेकिन इसमें आपको हर दृश्य में ऐसा लगेगा कि कहीं इसके जरिए आज के किसी प्रोपेगंडा को तो आगे नहीं बढ़ाया जा रहा? प्रकाश राज जैसे अभिनेता का इसमें होना इस तथ्य को और बलवती बनाता है। वनवासियों की पीड़ा और पुलिस क्रूरता दिखाने के नाम पर वामपंथ का जो महिमामंडन किया गया है, वो तो बर्दाश्त के काबिल नहीं ही है।

इस फिल्म में मुख्य किरदार में जो अभिनेता हैं, वो और उनकी पत्नी ज्योतिका इस फिल्म का निर्माता भी हैं। ज्योतिका तमिल फिल्मों की एक लोकप्रिय अभिनेत्री रही हैं। फिल्म का एक दृश्य सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस अधिकारी का किरदार निभा रहे प्रकाश राज तिलक लगाए एक व्यक्ति को थप्पड़ मार कर कहते हैं कि तमिल में बोलो। वो हिंदी में बोलने का प्रयास करता है, इसीलिए उसे थप्पड़ मारा जाता है। कथित रूप से जातिवाद के विरुद्ध बनाई फिल्म ने क्षेत्रवाद को ज़रूर आगे बढ़ाया है।

आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि फिल्म की निर्माता ज्योतिका खुद एक उत्तर भारतीय हैं और उनका जन्म पंजाब में हुआ था। अभिनेत्री नगमा उनकी बहन हैं। अभिनय की दुनिया में कदम भी उन्होंने ‘डोली सजा के रखना’ नाम की एक हिंदी फिल्म से ही की थी, जिसका निर्देशन प्रियदर्शन ने किया था। ऐसे में एक हिंदी भाषी निर्माता द्वारा बनाई गई फिल्म में हिंदी भाषा को लेकर इस तरह घृणा के भाव दिखाना पचता नहीं है, लेकिन तुष्टिकरण भला क्या न कराए! और तो और, इस फिल्म को हिंदी में भी डब कर के व्यापार किया जा रहा है।

प्रकाश राज अब सफाई दे रहे हैं कि लोगों को ‘आदिवासियों की पीड़ा’ की जगह थप्पड़ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को ST समुदाय की समस्या की जगह, यही समझ में आया। लोगों की बुद्धिमत्ता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहे प्रकाश राज का ये भी कहना है कि 90 के दशक का कोई तमिल पुलिस अधिकारी हिंदी सुन कर ऐसी ही प्रतिक्रिया देगा, क्योंकि उसे ऐसा लगेगा कि सामने वाला तमिल जानते हुए भी दूसरी भाषा में बात कर जाँच को भटका रहा है।

फिल्म में मुख्य अभिनेता मद्रास हाईकोर्ट में एक अधिवक्ता होता है। खुद को दलितों के करीब दिखाए जाने के लिए उलझे हुए घुँघराले बाल होते हैं उसके। वो ‘मानवाधिकार मामलों’ की फीस भी नहीं लेता है। पुलिस की क्रूरता से लॉकअप कस्टडी में एक मौत का मामला सामने आता है और यही फिल्म की कहानी भी है कि कैसे कानून के जरिए दोषी पुलिसकर्मियों को सज़ा मिलती है। एक्शन के लिए जानी जाने वाली इंडस्ट्री और अभिनेता के लिए ऐसी कहानियाँ नई ही होती हैं।

हिंसा को ज्यादा से ज्यादा बोल्ड तरीके से दिखाने के लिए बॉलीवुड में अनुराग कश्यप जाने जाते हैं। इस फिल्म में पीड़ितों के विरुद्ध हिंसा को उसी तरह से प्रदर्शित किया गया है, ताकि दर्शकों के मन में सहानुभूति का भाव उत्पन्न हो और आरोपित पुलिसकर्मियों से वो घृणा करें। पुलिस जाति देख कर क्रूरता करती है, इसमें ये दिखाया गया है। अब तक के वास्तविक उदाहरणों में यही देखा गया है कि पद और रुपए में मदांध इंसान गरीबों पर अत्याचार करता है। यहाँ जाति ही सब कुछ है।

फिल्म में जब भी कहीं किसी गरीब के साथ अन्याय, या यूँ कहिए कि वनवासी समुदाय या दलितों के साथ अन्याय होता है तो लाल रंग का कम्युनिस्ट झंडा उठाए लोग ही सड़क पर मिलते हैं, जो उनके हक़ में न्याय की माँग करते हैं। झंडे पर हँसिया (हँसुआ) का निशान बना होता है। 90 के दशक के वनवासी समुदाय को साँप पकड़ते हुए, चूहे खाते हुए, ‘बड़ी जाति वालों’ को उनसे घृणा करते हुए और टूटे-फूटे कच्चे घरों में रहते हुए दिखाया गया है। लेकिन, दिक्कत गरीबी के प्रदर्शन से नहीं है।

एक कार्यक्रम में बच्चे विभिन्न स्वतंत्रता सेनानियों की वेशभूषा में बच्चे होते हैं।वहाँ मुख्य अभिनेता पूछता है कि इतने अच्छे कार्यक्रम में गाँधी-नेहरू हैं लेकिन आंबेडकर क्यों नहीं हैं? सड़क पर कहीं भी बैठ कर किए जाने वाले विरोध प्रदर्शनों, बात-बात में पुलिस से उलझने की बातें, ‘सरकार के खिलाफ लड़ाई’ वाले नैरेटिव और वामपंथियों को गरीबों के हक़ में आवाज़ उठाते दिखाना – इससे साफ़ है कि इस फिल्म की पृष्ठभूमि आज के परिदृश्य को देखते हुए लिखी गई है।

कई लोगों को इस फिल्म को देखते हुए भीमा-कोरेगाँव में हिंसा कराने वाले अर्बन नक्सलियों की याद आ सकती है। आखिर वो भी तो सामाजिक कार्यकर्ता, वकील और नेता की भूमिका में ही थे न? वनवासी समुदाय की आवाज़ उठाने के नाम पर उन्होंने हिंसा भड़काई और तख्तापलट की साजिश रची। कहीं इस फिल्म के माध्यम से ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति पैदा करने की कोशिश तो नहीं की गई है? अदालत कार्यवाही और वक वकील के इन्वेस्टीगेशन का तानाबाना अच्छे से बना गया है और उसमें उलझा दर्शक प्रोपेगंडा को सच ही मान बैठता है।

फिल्म के सबसे क्रूर किरदार, जो एक पुलिस इंस्पेक्टर का है – उसकी दीवार पर माँ लक्ष्मी की तस्वीर वाला एक कैलेंडर टँगा होता है। अर्थात, गुंडे हिन्दू धर्म को मानने वाले होते हैं। हालाँकि, अब ‘सांप्रदायिक सद्भाव को बरकरार रखने’ और ‘समावेशिता’ की बात करते हुए इस दृश्य को हटा दिया गया है। कहा गया है कि कोई समुदाय कहीं इसे सन्दर्भ से हट कर न ले ले, इसीलिए ऐसा किया गया है। उनका कहना है कि वो किसी की धार्मिक या राजनीतिक विचारधारा को ठेस नहीं पहुँचाना चाहते। राजनीतिक रूप से ठेस वो पहुँचा भी नहीं सकते थे, क्योंकि तमिलनाडु का एक छोटा दल भी उनकी हेकड़ी गुम करने की ताकत रखता है।

मद्रास उच्च-न्यायालय में एक बुजुर्ग अधिवक्ता को दिखाया गया है, जो हमेशा ‘शिवाय नमः’ कहता रहता है। जाहिर है, भगवान का नाम लेने वाले फिल्मों में कभी अच्छे आदमी हो भी नहीं सकते। इस फिल्म में उसका कोई किरदार खास तो नहीं, एल्कीन एक मजाकिया और नकारात्मक व्यक्ति के रूप में उसका चित्रण किया गया है। अब ‘मूलनिवासियों’ और ‘द्रविड़ों’ को खुश करने के लिए ब्राह्मणों को गाली नहीं तो कम से कम उन्हें इस तरह से प्रदर्शित किया ही जा सकता है।

अंत में ये ज़रूर बता दें कि फिल्म अच्छी बनी है और तकनीकी रूप से इसमें सब कुछ ठीक है, लेकिन प्रोपेगंडा का छौंक इसकी पटकथा को ज़रूर प्रभावित करता है। वनवासी समुदाय को मुख्यधारा में लाने, उन्हें मिलने वाली सुविधाएँ उन तक पहुँचाने और सरकार व उनके बीच माध्यम का काम करने की प्रेरणा सबको मिलनी चाहिए, लेकिन वामपंथी और नक्सली इसमें कहीं नहीं आने चाहिए। उनका लाल झंडा खून का परिचायक है। सरकार को हमें अपदस्थ नहीं करना है, हम सिर्फ उन्हें बदल सकते हैं। यही संविधान है।

कॉन्ग्रेस के शादीशुदा नेता ने महिला अधिकारी को प्रेमजाल में फँसाया, फिर किया दुष्कर्म: पीड़िता ने रेप व वसूली का मामला कराया दर्ज

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के नेता गिरिराज शर्मा ऐछवाड़ा (45) पर पुलिस ने एक कानून अधिकारी से शादी का वादा करने और फिर उससे पैसे वसूलने के आरोप में मामला दर्ज किया है। 32 वर्षीय पीड़िता की ने लिखित शिकायत के बाद शिवपुरी जिले के कोतवाली थाने में ऐछवाड़ा के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 506 (आपराधिक धमकी के लिए सजा) और 384 (जबरन वसूली की सजा) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

कोतवाली थाने के प्रभारी अधिकारी सुनील खेमरिया ने फोन पर ऑपइंडिया को बताया, “चार नवंबर को आईपीसी की तीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। हम उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रहे हैं। वह एक शादीशुदा व्यक्ति हैं और ऐछवाड़ा के मूल निवासी हैं।”

पुलिस टीम ने जब आरोपी के घर पर छापा मारा तो मुख्य गेट बाहर से बंद मिला, जबकि उसकी पत्नी और तीन बच्चे अंदर थे। पत्नी ने पुलिस को बताया कि ऐछवाड़ा ने गेट पर ताला लगा दिया और बिना किसी सूचना के घर से निकल गए।

पीड़ित वकील मध्य प्रदेश सरकार के सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी के पद पर तैनात है। वह रेत खनन से जुड़े एक मामले में 2019 में वकील के संपर्क में आए थे। ऐछवाड़ा ने शादीशुुदा होने की बात को छुपाते हुए वकील को प्रेमजाल में फँसाया था। आरोप है कि ऐछवाड़ा शादी का झाँसा देकर वकील के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसे ब्लैकमेल कर जबरन वसूली करने लगा।

आरोपित ने कुछ महीने पहले व्हाट्सएप चैट लीक करके उसे बदनाम करने की धमकी दी, क्योंकि पीड़िता ने पैसे की उसकी माँग को पूरा करने से इनकार कर दिया था। पीड़िता ने बताया कि उसने बेहोशी की हालत में उसकी चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था।

करीब आठ दिन पहले ऐछवाड़ा ने वकील और कुछ अन्य के खिलाफ उनके आवास पर गड़बड़ी करने के आरोप लगाते हुए FIR  दर्ज कराई थी। हालाँकि पुलिस जाँच में उनके आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। पीड़िता ने FIR भी दर्ज कराई और सबूत पेश किए। प्रभारी अधिकारी ने कहा, “हम पीड़िता द्वारा मुहैया कराए गए सबूतों की जाँच कर रहे हैं।”

आरोपित गिरिराज शर्मा ऐछवाड़ा का यौन शोषण और धोखाधड़ी का पुराना इतिहास रहा है। दो साल पहले छतरपुर जिला पुलिस ने बालू खनन के नाम पर अभय भदौरिया नाम के एक व्यक्ति से 67 लाख रुपए की ठगी करने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया था।

पूर्व में भी उसने कॉन्ग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की बेटी को झूठे प्रेम प्रसंग में फँसाया था। शिवपुरी कॉन्ग्रेस जिलाध्यक्ष श्रीप्रकाश शर्मा ने मीडिया को बताया कि गिरिराज कॉन्ग्रेस पार्टी के सदस्य थे, लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति के बारे में पता नहीं है।

‘हम सब लंग्स के साथ साँस लेता है’: पटाखा विरोधी ‘कार्यकर्ता’ रोशनी अली ने ‘रक्तहीन ईद’ को समर्थन देने वाले यूजर को दिया ‘ज्ञान’

हाल ही में एक ट्विटर यूजर ने ईद को निशाने पर लेते हुए ‘रक्तहीन ईद’ (‘Bloodless Eid’) मनाने का आह्वान किया। उन्होंने इसके लिए पटाखा विरोधी एक्टिविस्ट रोशनी अली को समर्थन देने का भी वचन दिया। ट्विटर यूजर रमणीक सिंह मान ने कहा, “पटाखा रहित दिवाली के असफल प्रयास के बाद मैं #BloodlessEid के लिए रोशनी अली को अपना समर्थन देने का वचन देता हूँ।”

इसके बाद रोशनी अली ने शनिवार (6 नवंबर 2021) को 34 सेकेंड का एक वीडियो शेयर कर यूजर को जवाब दिया। उन्होंने वीडियो में कहा, “जब कुछ ही महीने पहले ऑक्सीजन नहीं मिल रहा था, जब आदमी लोग मर रहा था रस्ता पे, फिर क्या कोविड पूछा कि आप हिंदू हैं, मुस्लिम हैं, क्रिश्चियन हैं, बुद्धिस्ट हैं? ये नहीं पूछा ना? हम लोग सब लंग्स (फेफड़े) के साथ साँस लेता है। ये एक सच्चाई है।”

उन्होंने आगे कहा, “आप इस मामले को ज्यादा पॉलिटिकल या कम्युनल मत कीजिए। सबके लिए सोचिए न कि कैसे हम एक नया भारत लेकर जा सकते हैं। जहाँ पर क्लिन, रिनुएवल एर्जी और अच्छा नया सोच रहे।”

बता दें कि तथाकथित ‘कार्यकर्ता’ रोशनी अली हाल ही में एक न्यूज चैनल पर डिबेट के दौरान ‘नागिन डांस’ करने लगी थीं। रिपब्लिक बांग्ला पर एक पैनल में शामिल अली को जब अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला तो उन्होंने डांस करना (31:50 मिनट पर) शुरू कर दिया।

उस डिबेट में अली ने पटाखों पर प्रतिबंध की जरूरत के बारे में बताते हुए कहा था, “कुछ महीने पहले हम ऑक्सीजन के लिए परेशान थे और ऑक्सीमीटर पर अपने ऑक्सीजन के स्तर की जाँच कर रहे थे।” वह हवा की गुणवत्ता के साथ महामारी के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता को आपस में लिंक कर रही थीं। हालाँकि, पैनल में शामिल अन्य लोगों ने उन्हें बीच में ही रोक दिया, तभी वह डांस करने लगीं।

उल्लेखनीय है कि अली पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध को खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नाराज हैं। उन्होंने कहा कि वह फिर से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील करने वाली हैं।

बिहार में ईसाई धर्मांतरण कराते धराए केरल के दो पादरी, कई गाँवों में लोगों को बनाया ईसाई: महीने के मिलते हैं ₹12000

ईसाईयों के धर्मांतरण का रैकेट बिहार में दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। अब बिहार के सुपौल जिले से केरल के दो पादरियों को ईसाई धर्मांतरण की कोशिश करते हुए पकड़ा गया है। शनिवार (6 नवम्बर, 2021) को इन दोनों को धर्मांतरण कराते हुए दबोचा गया। ये दोनों आमलोगों के बीच बाइबिल का वितरण कर रहे थे। साथ ही लोगों को ईसाई मजहब से जुड़ने के लिए लालच दे रहे थे। इसी बीच आम लोगों ने हिन्दू संगठनों को इनके कृत्यों के बारे में सूचित कर दिया।

सुपौल के भीमपुर के केवला गाँव में ये दोनों गरीबों को बहला-फुसला रहे थे। दोनों पादरियों में एक महिला भी है। पादरी जार्ज और रिषू सुपौल शहर के भेलाही मोहल्ले में किराए के मकान में रहते हैं। पूछताछ में पादरी जॉर्ज ने खुलासा किया है कि उसे इस काम के लिए प्रति महीने 12,000 रुपए दिए जाते हैं। ईसाई मजहब अपनाने वालों को भी इनकी तरफ से कुछ रुपए दिए जाते थे। अब तक इन दोनों ने मिल कर कइयों का ईसाई धर्मांतरण कराया है।

भीमपुर पुलिस ने दोनों पादरियों को हिरासत में लेकर जाँच शुरू कर दी है। उनके आधार कार्ड सहित अन्य कागजात जुटाए जा रहे हैं और उनकी जाँच की जा रही है। इस मामले में अब तक किसी ने लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। ये दोनों बीते कई वर्षों से यहाँ रह कर धर्मांतरण का काम कर रहे थे, लेकिन किसी को खबर तक नहीं हुई। इलाके में कई परिवारों को ईसाई बनाया गया है। आक्रोशित हिन्दू संगठनों ने इसे रोकने के लिए आंदोलन की चेतावनी दी है।

हिन्दू संगठनों ने कहा है कि जिस तरह से लोगों को लोभ-लालच देकर ईसाई बनाया जा रहा है, उसके खिलाफ केंद्र सरकार को कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। ऊपर डाले गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे पूछे जाने पर दोनों पादरी खुद अपना पर्दाफाश कर रहे हैं।

Swiggy ने नहीं की डिलीवरी तो बंगाली अभिनेता ने पीएम मोदी को किया ट्वीट: लोगों ने कहा- मामला अंतर्राष्ट्रीय का, UN को टैग करो

पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ बहुत बुरा बर्ताव किया गया, लेकिन किसी ने उस पर सवाल नहीं उठाया। शनिवार (6 नवंबर 2021) को बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी ने एक ऐसी समस्या के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद माँगी, जिसको लेकर वो ट्रोल हो गए। एक्टर ने स्विगी से अपने ‘अनडिलीवर’ भोजन को लेकर ट्वीट किया और देश के प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की।

ट्वीट में प्रोसेनजीत चटर्जी ने लिखा, “3 नवंबर को मैंने फूड डिलीवरी ऐप स्विगी पर एक ऑर्डर दिया। ऑर्डर करने के कुछ देर बाद ही उसका स्टेटस डिलिवर्ड दिखाने लगा, लेकिन मुझे मेरा खाना नहीं मिला। जब इस मामले में स्विगी से शिकायत की तो उसने मुझे पैसे वापस कर दिए, क्योंकि ऑर्डर प्रीपेड था। मैं आपका ध्यान इस ओर खींचना चाहता हूँ, क्योंकि मुझे लगता है कि कोई भी इस मुद्दे का सामना कर सकता है।” ऐक्टर ने प्रधानमंत्री के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी ट्वीट में किया है।

प्रोसेनजीत चटर्जी के ट्वीट का स्क्रीनग्रैब

बंगाली अभिनेता ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और देश के प्रधानमंत्री से उन असुविधाओं पर ध्यान देने की माँग की, जो कि खाना ऑर्डर करते समय किसी भी डिलीवरी ऐप से हो सकती हैं। एक्टर ने लिखा, “अगर कोई अपने मेहमानों के खाने के लिए फूड डिलिवरी ऐप पर निर्भर हो और खाना कभी न आए तो क्या होगा? क्या होगा यदि कोई अपने खाने के लिए इन फूड ऐप्स पर निर्भर हो? क्या वे भूखे रहेंगे? ऐसी कई स्थितियाँ हो सकती हैं। इसलिए मुझे लगा कि इसके बारे में बात करना जरूरी है।”

हालाँकि, इस तरह की गैर-जरूरी चीजों के लिए राज्य के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करने के लिए नेटिजन्स ने अभिनेता को फटकार लगाई है। राजीव दास नाम के एक ट्विटर यूजर ने कहा, “वास्तव में यह एक राष्ट्रीय समस्या है बुंबा दा!! जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमला किया गया था तो उनके लिए आवाज उठाना इस समस्या की तुलना में छोटी है … अच्छा… अब उपभोक्ता अदालत का मुद्दा माननीय प्रधानमंत्री हल करेंगे। तालियाँ…।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

एक अन्य ट्विटर यूजर ने चटर्जी पर तंज कसते हुए इस समस्या के लिए संयुक्त राष्ट्र को भी टैग करने का सुझाव दिया। यूजर ने ट्वीट किया, “पीएम और सीएम को टैग करने के लिए आपका मजाक उड़ाने वालों को शर्म आनी चाहिए। मैं कहना चाहता हूँ कि यह राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समस्या है। संयुक्त राष्ट्र को ध्यान देना चाहिए।”

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वहीं, डॉ सुमन डे नाम के एक यूजर ने आश्चर्य व्यक्त किया कि बंगाली अभिनेता ने स्विगी और जोमैटो के बजाय ममता बनर्जी और नरेंद्र मोदी को टैग किया। यूजर ने लिखा, “शनिवार की रात का प्रभाव। वह रात में जो बिडेन को भी टैग कर सकते हैं। ये गंभीर बहुत ही गंभीर बात है। ये डिलीवरी ऐप हैं और इस तरह की समस्याएँ हो सकती हैं, क्योंकि वे ऑर्डर जनरेट नहीं करते हैं। वे केवल उसे बाँटते हैं।”

ट्विटर का स्क्रीनशॉट

हालाँकि, ये कोई पहली बार नहीं है जब बंगाली एक्टर चर्चा में हैं। इसी साल जनवरी में भी वो इसी तरह के हास्यास्पद कारणों से चर्चा में थे। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का मजाक उड़ाने के लिए विपक्षी दलों और लिबरल ‘पत्रकारों’ ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी की पेंटिंग का उद्घाटन किया था, जिन्होंने फिल्म ‘गुमनामी’ में नेताजी की भूमिका निभाई थी। हालाँकि, ये पूरी तरह स्पष्ट था कि पद्मश्री से सम्मानित परेश मैती द्वारा बनाई गई तस्वीर नेताजी सुभाषचंद्र बोस के ओरिजिनल फोटोग्राफ पर आधारित थी।

इस बात की पुष्टि इस तथ्य से हुई कि महान स्वतंत्रता सेनानी के पोते ने जनवरी 2020 में वही तस्वीर साझा की थी। बाद में प्रोसेनजीत चटर्जी ने कलाकार को बधाई दी और कहा कि वह एक अभिनेता के रूप में उत्साहित थे कि लोगों का मानना ​​​​था कि नेताजी की पेंटिंग उनके निभाए गए रोल से मिलती जुलती है।

₹50 करोड़ से अधिक कालेधन का मालिक निकला कॉन्ग्रेस नेता, इनकम टैक्स विभाग की हफ्तों चली छापेमारी में हुआ खुलासा

राजस्थान के श्रीगंगानगर में कॉन्ग्रेस के नेता अशोक चांडक और बिल्डर समूह रिद्धि सिद्धि ग्रुप के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान 50 करोड़ के कालाधन का खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, यह छापेमारी लगभग 33 अलग-अलग ठिकानों हुई है। सप्ताह भर चली छापेमारी में+ आयकर विभाग ने 2.31 करोड़ की नकदी और 2.48 करोड़ की ज्वैलरी जब्त की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अशोक चांडक और बिल्डर से संबंधित कंपनियों का रेत खनन, शराब और रियल स्टेट के से जुड़ा कारोबार है। इस छापेमारी में मिली राशि में से 35 करोड़ को अघोषित आय के रूप में स्वीकार करते इस पर इनकम टैक्स देने की पेशकश की गई है। वहीं, आयकर विभाग का कहना है कि अघोषित आय 50 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इस वजह से पेशकश को स्वीकृति नहीं मिल पाई।

छापेमारी की कार्रवाई के लिए आयकर विभाग ने व्यापक स्तर पर तैयारियाँ की थीं। छापेमारी में 250 से अधिक कर्मचारियों व अधिकारियों ने अलग-अलग ठिकानों को खँगाला। मुंबई की भी आयकर टीम ने राजस्थान की टीम को कुछ इनपुट दिए थे। इस दौरान यह पाया गया कि वास्तविक आय और कागज़ों में दिखाई गई कमाई में अंतर है।

छापेमारी के दौरान यह भी पाया गया कि टैक्स चोरी के लिए कैश बिक्री को अकाउंट बुक में दर्ज नहीं किया गया था। इसके लिए अलग रजिस्टर बना पाया गया। नकद मिले पैसे से जमीन खरीदने की बात सामने आ रही है। आयकर विभाग ने इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में दस्तावेज जब्त किए हैं। तलाशी के दौरान बेहिसाब नकदी लेने और उससे जमीन खरीदने के दस्तावेज भी मिले हैं।