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पंजाब में 4 बिहारी छात्रों को हॉस्टल खाली करने का आदेश, कश्मीरियों की ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ की नारेबाजी का किया था विरोध

पंजाब के बठिंडा में स्थित बाबा फरीद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने शनिवार (30 अक्टूबर 2021) को बिहार के रहने वाले चार छात्रों को 24 घंटे के अंदर सामान सहित हॉस्टल खाली करने का नोटिस दिया था। उनके खिलाफ कथित रूप से छात्रावास में अनुशासनात्मक गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगाया गया है। यह नोटिस आज (31 अक्टूबर,2021) सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालाँकि, इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 30 अक्टूबर को वास्तव में क्या हुआ था।

बाबा फरीद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में छात्रावास छोड़ने के आदेश वाला नोटिस। साभार: लाइव अदालत

इसको लेकर ऑपइंडिया ने छात्रों से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हमारे सूत्रों के अनुसार, 24 अक्टूबर की रात को हुई घटना को लेकर इन छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। दरअसल, चारों छात्र बीते रविवार को भारत और पाकिस्तान का मैच देख रहे थे। जब भारत टी-20 वर्ल्ड कप में मैच हार गया, तभी उन्होंने जहाँ कश्मीरी छात्र रहते थे वहाँ से पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे सुने। छात्रों ने वार्डन से शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ था। उसके बाद, कुछ छात्र बल्ले और विकेट लेकर उस गलियारे में गए, यह पता लगाने के लिए कि कौन नारे लगा रहा था। हमारे सूत्रों ने कहा कि छात्र बल्ले और विकेट लेकर गए, लेकिन दोनों समूहों के बीच कोई लड़ाई नहीं हुई।

अगले दिन वार्डन ने उन चार छात्रों को बुलाया जिन्हें उन्होंने सीसीटीवी फुटेज से पहचाना था। उन्हें माफी माँगने और भविष्य में ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होने का वादा करने के लिए कहा गया। छात्रों के अनुसार, यह मामला वहीं पर खत्म हो गया था। हालाँकि, हमारे सूत्र ने बताया कि 30 अक्टूबर की सुबह चार छात्रों कुमार कार्तिकेय ओझा, आयुष कुमार तिवारी, उज्जवल पांडे और आयुष कुमार जायसवाल को वार्डन ने बुलाया और उन्हें तत्काल छात्रावास खाली करने का नोटिस दिया गया। सूत्र ने कहा कि छात्रों को अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं दिया गया। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने नोटिस पर संज्ञान लेते हुए बिहारी छात्रों को अपना समर्थन देने का वादा किया।

संस्थान ने ब्यौरा देने से किया इनकार

ऑपइंडिया ने लड़कों के छात्रावास के वार्डन लखबीर सिंह से संपर्क किया, जिसने नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे। जब हमने उनसे पूछा कि नोटिस क्यों जारी किया गया, तो सिंह ने इस मामले पर बात करने से इनकार कर दिया। उसने कहा, ”हम इस बारे में बात नहीं कर सकते। मुझे उसका नंबर दीजिए जिसने आपको नोटिस दिया है।” हमने वार्डन को बताया कि यह नोटिस ट्विटर पर वायरल हो रहा है और यदि वह चाहें तो हम उसे नोटिस की एक कॉपी भेज सकते हैं। इस पर उसने कहा, “नहीं, मुझे कॉपी की जरूरत नहीं है।” वार्डन ने इस तरह के किसी भी नोटिस के बारे में जानकारी से देने से इनकार किया और कहा, ”ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। मैं इसके बारे में बात नहीं करना चाहता।” हमें सूत्रों ने बताया कि वार्डन ने छात्रों को सोशल मीडिया पर नोटिस साझा करने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी।

पंजाब में यूपी-बिहार और कश्मीर के छात्रों के बीच हाथापाई

पंजाब के संगरूर में इसी तरह की एक और घटना 24 अक्टूबर को यूपी-बिहार और कश्मीर के छात्रों के बीच भाई गुरदास इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में हुई थी। ऐसी खबरें थीं कि भारत-पाक टी20 वर्ल्ड कप मैच में भारत की हार के बाद भाई गुरदास इंस्टिट्यूट ऑफ इंजिनियरिंग एंड टेक्नॉलजी में कथित तौर पर यूपी बिहार के छात्रों ने कुछ कश्मीरी छात्रों को जमकर पीटा। सबका कहना था कि ये कश्मीरी छात्र पाकिस्तान की जीत की खुशी मना रहे थे और आजादी के नारे लगा रहे थे।

दीवाली से पहले Pak के शिव मंदिर में तोड़फोड़, ₹25 लाख के आभूषण और रुपए भी ले गए: इलाके के लोगों की ही करतूत

पाकिस्तान में हिंदूओं और मंदिरों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। ताजा मामला सिंध प्रांत के कोटरी का है। यहाँ एक प्राचीन हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने मंदिर भगवान की मूर्तियों को खंडित कर चोरी की घटना को अंजाम दिया है। पाकिस्तानी न्यूज वेबसाइट डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, हैदराबाद के जमशोरो के कोटरी में बुधवार (28 अक्टूबर 2021) देर रात प्राचीन शिव मंदिर का ताला तोड़कर अज्ञात हमलावरों ने सोने के जेवर, चाँदी के तीन हार, मंदिर की दान पेटी से लगभग 25,000 रुपए और अन्य कीमती सामान चुरा लिए। मंदिर की देखरेख करने वाले ने बताया कि हार का वजन 10 तोले था।

पुलिस ने अज्ञात चोरों के खिलाफ मंदिर की देखरेख करने वाले भगवानदास की शिकायत पर धारा 457, 380, 295 और 297 पीपीसी के तहत मामला दर्ज किया है। जमशोरो के एसएसपी जावेद बलोच ने बताया कि मंदिर प्रबंधन को पास के आवासीय इलाके से कुछ लोगों पर मंदिर में लूटपाट करने का शक है। हालाँकि, उन्होंने प्रतिमाओं के खंडित होने से इनकार किया है, लेकिन बताया गया है कि दीवाली के मौके पर क्षेत्र में तनाव फैलाने के मकसद से इस घटना को अंजाम दिया गया है। पुलिस ने चारों तरफ मंदिरों की सुरक्षा बढ़ा दी है।

इस बीच, सिंध के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ज्ञानचंद इसरानी ने एसएसपी को एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब हिंदू समुदाय दीवाली का त्योहार मनाने में व्यस्त था। यह बेहद शर्मनाक है। उन्होंने एसएसपी को जिले में मंदिरों के चारों ओर सुरक्षा कड़ी करने का निर्देश दिया है, ताकि इस तरह की घटना दोबारा ना हो। बताया जा रहा है कि चोरी किए गए जेवर और अन्य सामान की कीमत 20 से 25 लाख रुपए है।

गौरतलब है कि इसी साल अगस्त में पाकिस्तान में हिंदू मंदिर को निशाना गया था। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवादी हिंदुओं के मंदिर में घुसकर भगवान गणेश, शिव-पार्वती की मूर्तियों को तोड़ते हुए नजर आ रहे थे। इसके साथ ही उन्होंने मंदिर में लगे झूमर, घंटे को भी तहस-नहस कर दिया और मंदिर परिसर को भी काफी नुकसान पहुँचाया था।

शाहनवाज को पसंद नहीं आया बहन का दूसरे धर्म में शादी करना, जीजा को मार दी गोली: दिल्ली पुलिस ने दबोचा

दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके में शनिवार (30 अक्टूबर, 2021) की देर रात साले ने ही दोस्त के साथ मिलकर अपने ही जीजा को गोली मार दी। घायल को शालीमार बाग के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। इस बाबत फिलहाल मॉडल टाउन थाने में हत्या के प्रयास व आर्म्स एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर वारदात के 6 घंटे के अंदर ही मुख्य आरोपित शाहनवाज उर्फ ​​शाहबाज व उसके दोस्त हर्षित उर्फ ​​ऋतिक को गिरफ्तार कर लिया गया है।

फिलहाल, पुलिस दोनों आरोपितों से पूछताछ कर रही है। ऐसे में पुलिस अधिकारी अभी वारदात के पीछे के कारणों के बारे में कुछ नहीं बता रहे हैं। हालाँकि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम समुदाय का मुख्य आराेपित अपनी बहन के दूसरे धर्म के युवक से शादी कर लेना पसंद नहीं था। जिसके चलते उसने हत्या की नियत से अपने जीजा को गोली मार दी। जानकारी के अनुसार पेशे से जिम संचालक 26 वर्षीय देवा परिवार के साथ आदर्श नगर इलाके में रहते हैं। उन्होंने जहाँगीरपुरी के रहने वाले आरोपित 21 वर्षीय शाहनवाज उर्फ ​​शाहबाज की बहन से तकरीबन तीन-चार महीने पहले प्रेम विवाह किया किया था।

बताया जाता है कि इस रिश्ते से घरवाले खुश नहीं थे। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई थी। जिसके चलते बहन का अपने भाई आदि से बातचीत बंद थी। ऐसे में युवती का भाई शहबाज इसके लिए अपने पीड़िता देवा को जिम्मेदार मानता था। बताया जाता है कि शनिवार की रात को आरोपित ने अपने बहनोई को बात करने के लिए मॉडल टाउन के बिग बाजार के निकट में बुलाया। इसके बाद देवा अपनी बुलेट से वहाँ पहुँच गए। जहाँ आरोपित शहबाज व उसका दोस्त हर्षित मौजूद था।

जहाँ से बातचीत के लिए तीनों बुलेट पर सवार होकर कुछ दूर आगे शालीमार पार्क के निकट पहुँचे, जहाँ शहबाज व उसके दोस्त ने कट्टे से देवा के सिर व सीने में गोली मार दी और माैके से फरार हो गए। गोली लगने से लहुलुहान देवा सड़क पर ही गिर पड़े। इसी दौरान वहाँ गश्त करते हुए कॉन्स्टेबल संताेष कपूर पहुँचे तो उन्होंने मामले की सूचना एसएचओ को देकर घायल को अस्पताल में भर्ती कराया।

उत्तर पश्चिम जिले की डीसीपी उषा रंगनानी ने बताया कि मामले की जाँच के दौरान जिले की स्पेशल स्टाफ पुलिस ने छह घंटे के भीतर ही दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक आरोपित 20 वर्षीय हर्षित उर्फ ऋतिक मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बदायूँ जिले के बिसौली तहसील का रहने वाला है। दोनों वारदात के बाद दिल्ली छोड़कर कर कहीं और भागने की फिराक में थे।

पत्नी नहीं बन पाई मुखिया तो पोस्टमैन पति ने निकाली खुन्नस, गाँव वालों के आधार कार्ड जला तापी आग: वीडियो हुआ वायरल

बिहार के सारण जिले में एक वायरल वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। इस वीडियो में एक व्यक्ति कुछ कागजों को जला रहा है। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति पोस्टमैन है। जलाए जा रहे कागजों को आधार कार्ड बताया जा रहा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो बिहार के सारण जिले का है। यहाँ के इसुआपुर प्रखंड अंतर्गत आने वाले छपिया पंचायत में कुछ समय पूर्व मुखिया का चुनाव हुआ था। इन्ही चुनावों में पोस्टमैन शैलेन्द्र सिंह की पत्नी सुमन ने भी नामांकन किया था। चुनाव 24 अक्टूबर 2021 (रविवार) को हुए थे। इनके परिणाम 26 अक्टूबर 2021 (मंगलवार) को आए।

काफी मशक्क्त के बाद भी शैलेन्द्र सिंह की पत्नी सुमन महज 144 वोट हासिल कर पाईं। अंतिम चुनाव परिणाम में उनकी हार हुई। बताया जा रहा है कि इसी से नाराज हो कर पोस्टमैन ने गाँव वालों के सैकड़ों आधार कार्ड जला दिए। दावा किया जा रहा है कि जलाए गए आधार कार्ड का उपयोग आग तापने के लिए किया गया है।

हालाँकि पोस्टमैन ने ऐसा करने से इनकार किया है। पोस्टमैन के अनुसार, वायरल हो रहे वीडियो में वो नहीं बल्कि कोई और है। बताया जा रहा कि सभी आधार कार्ड डाकिया ने डाकघर से 27 अक्टूबर 2021 (बुधवार) को निकाले और उसी दिन उन्हें आग लगा दी। इस घटना पर छपरा मुख्य डाकघर के पोस्ट मास्टर एस एन प्रसाद ने संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी मिली है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की विभागीय जाँच करवाई जाएगी। दोषी पाए जाने पर पोस्टमैन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मदरसे में दलित युवक को बनाया बंधक, कराया इस्लामी धर्मांतरण: शहबान और मुकीम सहित 5 गिरफ्तार, मौलाना फरार

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी कोतवाली क्षेत्र में एक दलित युुवक को रोजगार दिलाने का प्रलोभन देकर धर्मांतरण करा कर पाँच माह तक बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। पिता की शिकायत पर पुलिस 20 वर्षीय युवक को मदरसे से निकाल कर लाई।

पुलिस ने इस मामले में पिता की तहरीर पर 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पाँच आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हालाँकि घटना का मुख्य आरोपित मदरसे का मौलाना यूनुस फरार हो गया। फिलहाल गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ की जा रही है और मौलाना की तलाश की जा रही है। 

गारबपुर गाँव के निवासी दामोदर ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि वह और उसका बेटा ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करते हैं। पाँच माह पहले उसके पुत्र अनुज को रोजगार दिलाने का बहाना बना कर कुछ लोग उसे दिल्ली ले गए थे। इसके बाद सभी ने मोबाइल ऑफ कर लिया। उसका अपने बेटे से संपर्क नहीं हो पाया। 

काफी दिनों तक बेटे से संपर्क न हो पाने के बाद उसने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान उसे पता चला कि उसके बेटे को मोहल्ला सरैयां के मदरसा में बंधक बना कर रखा गया है। दामोदर ने बताया कि उसके बेटे अनुज का जबरन धर्मांतरण कर दिया गया है। जब वह मदरसा पहुँचा तो उसे भगा दिया गया। तब उसने पुलिस को सूचना दी। कस्बा चौकी इंचार्ज कस्बा राजेश यादव पुलिस बल के साथ मदरसा पहुँचे। वहाँ से अनुज को बाहर निकाला।

पुलिस अनुज और मदरसे में मिले अन्य लोगों को लेकर कोतवाली पहुँची। अनुज ने बताया कि उसे मदरसे में बिलाल रजा नाम दिया गया था। एएसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में एससी-एसटी एक्ट, अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन समेत कई धाराओं में 6 लोगों पर नामजद मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने शहबान रजा, मुकीम, अकलीम रजा, अफसर अली, इशहाक व मदरसा संचालक यूनुस निवासी महमदपुर थाना मोहम्मदी पर मुकदमा दर्ज किया है। मामले में जाँच की जा रही है।

‘दलित हैं समीर वानखड़े, उन्हें कुछ नहीं होने दूँगा’: केंद्रीय मंत्री ने नवाब मलिक को घेरा, दामाद ड्रग्स केस में गया था जेल

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के ड्रग्स केस की जाँच कर रहे नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े को एनसीबी के नेता और मंत्री नवाब मलिक लगातार निशाना बना रहे हैं। वह उन पर एक के बाद एक आरोप लगा रहे हैं। इस बीच रविवार को समीर वानखेड़े का परिवार केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले से मिला। केंद्रीय मंत्री ने समीर वानखेड़े के खिलाफ मलिक के आरोपों को निराधार करार दिया है।

समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव वानखेड़े और उनकी पत्नी क्रांति ने रामदास अठावले से मुलाकात की। अठावले ने समीर वानखेड़े को दलित बताते हुए कहा कि उनपर जानबूझकर आरोप लगाकर पूरे दलित समाज को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी वानखेड़े का समर्थन करेगी। हम उन्हें कुछ नहीं होने देंगे।

अठावले ने कहा कि नवाब मलिक ये आरोप इसलिए लगा रहे थे क्योंकि उनका दामाद ड्रग मामले में जेल में था। उन्होंने आगे कहा, “समीर वानखेड़े दलित हैं। अगर आर्यन ने ड्रग्स का सेवन नहीं किया था और कोई मामला नहीं था, तो अदालतों ने उन्हें इतने लंबे समय तक जमानत क्यों नहीं दिया।” उनके साथ अन्याय किया जा रहा है, इसलिए मुझे एक स्टैंड लेने और उनका समर्थन करने की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, नवाब मलिक समीर वानखेड़े को मुस्लिम बता रहे हैं। अगर सच में समीर मुस्लिम हैं तो वे फिर उन्हें क्यों परेशान कर रहे हैं।

इस मामले में समीर वानखेड़े की पत्नी क्रांति रेडकर ने कहा, “केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले हमारा समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि हमने उन्हें सभी दस्तावेज दिखाए हैं। वह हमारे राज्य के लिए सहानुभूति रखते हैं। नवाब मलिक द्वारा किए गए सभी दावे झूठे साबित हुए हैं।”

वहीं इस मामले में समीर वानखेड़े के पिता ज्ञानदेव ने नवाब मलिक पर निशाना साधते हुए कहा कि मलिक हम पर ये आरोप लगाते हैं कि हमने एक दलित की सीट छीनी है, जबकि हम खुद ही दलित हैं। मेरे बेटे ने उनके दामाद को गिरफ्तार किया है, इसलिए मलिक ऐसे आरोप लगा रहे हैं। अगर उन्हें कुछ कहना हैं तो कोर्ट जाएँ।

गौरतलब है कि इससे पहले नवाब मलिक ने समीर वानखेड़े को मुस्लिम बताया था। उन्होंने निकाहनामा भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था।

नेहरू ने राष्ट्रपति डॉ प्रसाद को सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में जाने से रोका था, बेटी से थैले भर रुपए ले लिए पर हाल तक न पूछा

कॉन्ग्रेस पार्टी में शुरू से एक परंपरा रही है कि वो अपने वरिष्ठ नेताओं को भूल जाते हैं, या फिर निधन के बाद उनका अपमान किया जाता है। बस वो नेता नेहरू-गाँधी परिवार का नहीं होना चाहिए। अपने दादा फिरोज गाँधी को राहुल और प्रियंका याद तक नहीं करते। उनकी कब्र धूल फाँक रही है। पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहा राव के शव के लिए कॉन्ग्रेस का दिल्ली दफ्तर नहीं खुला। हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के साथ दूरी बना ली गई। यहाँ तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को सलाह दी थी कि वो सरदार वल्लभभाई पटेल के अंतिम संस्कार में न जाएँ।

देश के प्रथम उप-प्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल हों या दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, आज मोदी सरकार में कॉन्ग्रेस के साथ आजीवन जुड़े रहे इन नेताओं को कॉन्ग्रेस सरकारों से ज्यादा सम्मान व प्राथमिकता मिल रही है। उन्हें याद किया जाता है। उनके सम्मान में फ़िल्में बन रही हैं, पुस्तकें लिखी जा रही है, प्रतिमाओं का अनावरण हो रहा है और सबसे महत्वपूर्ण कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इनकी शिक्षाओं की बात करते हैं और अपने सम्बोधनों के जरिए जनता तक इनका संदेश पहुँचाते हैं।

वो 15 दिसंबर, 1950 का दिन था। देश के गृह मंत्री सरदार पटेल के निधन की खबर जंगल में आग की तरह देश भर में फैली और लोगों की ऑंखें नम हो गईं। वो बीमार चल रहे थे, लेकिन देश के लिए उनकी सक्रियता वैसी ही थी। भारत के ‘लौह पुरुष’, जिन्होंने पूरे देश को एकता के सूत्र में पिरोया और आज़ादी के बाद एकीकरण का सबसे कठिन काम अपने हाथों में लेकर पूरा किया। वो नेता, कश्मीर और तिब्बत पर जिनकी बात मानी जाती तो आज भारत ज्यादा शांत और सुरक्षित होता।

सरदार पटेल ने 565 राज्यों को मिला कर जिस गणतंत्र को बना, उसे ही भारतीय गणराज्य के नाम से जाना जाता है। निधन से पहले उन्हें डॉक्टर से लेकर उनके करीबी तक आराम की सलाह दे रहे थे, लेकिन वो काम करते रहे। करीबियों की जिद पर वो 12 दिसंबर, 1950 को स्वास्थ्य लाभ के लिए मुंबई के बिरला हाउस आए। यहीं हार्ट अटक के कारण उनका निधन हुआ। कहते हैं, कई लोगों को तभी इसका पूर्वाभास हो गया था कि शायद अब सरदार पटेल से मिलना न हो पाए।

सरदार पटेल ने वेलिंग्टन हवाई अड्डा (अब सफदरगंज एयरपोर्ट) से मुंबई के लिए उड़ान भरी थी। उस समय तक उनका शरीर इतना कमजोर हो गया था कि उन्हें व्हील चेयर पर विमान में बिठाना पड़ा था। विदा लेते समय हल्की मुस्कान के साथ उन्होंने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। निधन से पहले जब उन्हें हार अटैक आया तो वहाँ गीता पाठ भी हो रहा था। उन्होंने पानी माँगा तो उन्हें गंगाजल पिलाया गया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि ये मीठा लग रहा है। निधन के बाद क्या हुआ, इस बारे में कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी ने अपनी पुस्तक ‘Pilgrimage to freedomमें लिखा है

KM मुंशी ने अगर कुछ लिखा है तो इसमें वजन होगा ही, क्योंकि वो साधारण व्यक्ति नहीं थे। इतिहास पर गुजरे, अंग्रेजी और हिंदी में कई पुस्तकें लिख चुके केएम मुंशी को सोमनाथ मंदिर जीर्णोद्धार करने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने ‘भारतीय विद्या भवन’ जैसे शैक्षिक संस्थान की स्थापना की और ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे। संविधान सभा के सदस्य रहे केएम मुंशी ने बाद में नेहरू सरकार में कृषि मंत्री और फिर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल रहे।

उन्होंने लिखा है, “जब बॉम्बे में सरदार पटेल का निधन हुआ, तब प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने मंत्रियों और सचिवों के लिए दिशानिर्देश जारी किया कि वो अंतिम संस्कार में भाग लेने बॉम्बे न जाएँ। उस समय मैं भी केंद्रीय मंत्री था। मैं उस समय महाराष्ट्र के माथेरान में था। एनवी गाडगिल, सत्येंद्र नाथ सिन्हा, और वीपी मेनन ने पीएम नेहरू के दिशानिर्देशों को न मान कर सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। यहाँ तक कि जवाहरलाल नेहरू ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद से भी निवेदन किया कि वो बॉम्बे न जाएँ।”

बकौल केएम मुंशी, ये एक विचित्र निवेदन था और डॉक्टर प्रसाद ने इसे नहीं माना। उन्होंने बॉम्बे जाकर सरदार वल्लभभाई पटेल के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। केएम मुंशी बताते हैं कि उनके अलावा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, गोविन्द वल्लभ पंत और चक्रवर्ती राजगोपालचारी ने सरदार पटेल के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया। तारा सिन्हा के कलेक्शन ‘राजेंद्र प्रसाद – पत्रों के आईने में’ में भी इसकी पुष्टि मिलती है। तारा सिन्हा देश के प्रथम राष्ट्रपति की पोती थीं।

ये भी जानने लायक बात है कि 28 फरवरी, 1963 में जब बिहार की राजधानी पटना में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद का निधन हुआ, तब उस समय के लगभग सभी बड़े नेताओं ने उनके अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया लेकिन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू नहीं आए थे। इतिहासकार जगदीश चंद्र शर्मा कहते हैं कि नेहरू ने तत्कालीन राष्ट्रपति एस राधाकृष्णन को भी सलाह दी थी कि वो डॉक्टर प्रसाद के अंतिम संस्कार में न जाएँ। जैसा कि अपेक्षित था, राधाकृष्णन ने नेहरू की बातों पर ध्यान नहीं दिया और पटना गए।

इतिहासकार व पत्रकार हिंडोल सेनगुप्ता ने अपनी पुस्तक ‘अखंड भारत के शिल्पकार सरदार पटेल’ में लिखा है कि सरदार पटेल के निधन के कुछ दिनों बात भारत में ‘श्वेत क्रांति’ के जनक कहे जाने वाले गुजरात में डेयरी सहकारी समितियों के संस्थापक वर्गीज कुरियन सरदार पटेल की बेटी मणिबेन से मिले थे। मणिबेन पटेल ने उन्हें बताया था कि पिता के निधन के बाद वो रुपए से भरे एक थैला लेकर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात करने गई थीं।

ये रुपए लोगों ने कॉन्ग्रेस पार्टी को चंदा में दिया था, इसीलिए वो इन्हें पार्टी को सौंपने गई थीं। इस दौरान नेहरू ने उनसे ये तक नहीं पूछा कि आजकल वो कहाँ रह रही हैं या फिर उनका गुजर-बसर कैसे चल रहा है। नेहरू का मानना था कि अगर राष्ट्रपति एक मंत्री के अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं तो इससे एक गलत उदाहरण बनेगा। वो ये भूल गए कि पटेल सिर्फ एक ‘मंत्री’ नहीं थे, एक महान स्वतंत्रता सेनानी और आधुनिक भारत के शिल्पी थे। एक किसान नेता था, जो बाद में पूरे देश का नेता बने।

इंदिरा गाँधी के लिए पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार से श्रद्धांजलि नहीं, सीनियर कॉन्ग्रेसी नेता ने शेयर की पिछले साल की फोटो

पंजाब के पूर्व कॉन्ग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ ने इंदिरा गाँधी की पुण्यतिथि के मौके पर अपनी ही सरकार पर हमला बोला है। जाखड़ ने पंजाब में किसी भी नेता द्वारा आज के दिन कोई भी पोस्ट शेयर नहीं करने पर नाराजगी व्यक्त की है। जाखड़ ने अपने ट्वीट में पिछले साल के पंजाब सरकार के एक विज्ञापन को पोस्ट किया है, जिसमें कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इंदिरा गाँधी को श्रद्धांजलि दी थी।

उन्होंने ट्वीट किया, ”मैं समझ सकता हूँ कि बीजेपी भारत के इतिहास से ‘आयरन लेडी ऑफ इंडिया’ को मिटाने की कोशिश कर रही है। लेकिन क्या अभी भी पंजाब में कॉन्ग्रेस की सरकार नहीं है।” उन्होंने कहा, ”मुझे पता है कि कैप्टन साहब पिछले साल के पंजाब सरकार के विज्ञापन का इस्तेमाल करने से एतराज नहीं करेंगे, क्योंकि आज कोई भी विज्ञापन नहीं है।”

कॉन्ग्रेस ने रविवार को पूर्व प्रधानमंत्री को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। राहुल गाँधी ने दिल्ली में उनके स्मारक ‘शक्ति स्थल’ पर पुष्पांजलि अर्पित की। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने हिंदी में ट्वीट किया, ”मेरी दादी अंतिम घड़ी तक निडरता से देश सेवा में लगी रहीं, उनका जीवन हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है। नारी शक्ति की बेहतरीन उदाहरण श्रीमती इंदिरा गाँधी जी के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।” तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की 31 अक्टूबर 1984 को दो सिख सुरक्षा गार्डों ने हत्या कर दी थी।

बता दें कि पंजाब सरकार में ​​पिछले कई महीनों से अंर्तकलह जारी है। यही कारण है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने सार्वजनिक तौर पर अपनी पार्टी पर हमला किया है। इसी वजह से इंदिरा गाँधी की पुण्यतिथि के मौके पर पंजाब सरकार के पिछले साल के विज्ञापन को साझा किया है।

‘OTT प्लेटफॉर्म्स अब धंधा बन गया है… देखने लायक नहीं हैं शो’: नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा – नहीं करूँगा काम

नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ से बॉलीवुड में काम करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू किया था। अब खबर है कि उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म और उसके कंटेंट को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।

सलमान खान वाली ‘बजरंगी भाईजान’ फिल्म में काम करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने एक इंटरव्यू में कहा, ”ओटीटी प्लेटफॉर्म्स बड़े प्रोडक्शन हाउस के लिए धंधा बन गए हैं।” इसी कारण को बता कर नवाजुद्दीन ने ऐलान किया है कि वह अब ओटीटी पर काम नहीं करेंगे।

बॉलीवुड हंगामा से बात करते हुए नवाजुद्दीन ने कहा, “यह मंच अनावश्यक​ शो के लिए एक डंपिंग ग्राउंड बन गया है। हमारे पास या तो ऐसे शो हैं, जो देखने लायक नहीं हैं। या फिर ऐसे सीक्वल हैं, जिनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है।” 

अभिनेता ने आगे कहा, ”जब मैंने नेटफ्लिक्स के लिए ‘सेक्रेड गेम्स’ में काम किया, तो डिजिटल प्लेटफॉर्म में काम करने का एक उत्साह और चुनौती थी, लेकिन अब वह ताजगी चली गई है। यह बड़े प्रोडक्शन हाउस और एक्टर्स के लिए धंधा बन गया है। जो अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सो-कॉल्ड स्टार्स हैं, बॉलीवुड के जाने माने फिल्म निर्माताओं ने सभी बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म के साथ आकर्षक सौदे किए हैं। अनलिमिटेड कंटेंट बनाने के लिए निर्माताओं को भारी कीमत मिलती है। इसकी वजह से उन्होंने कंटेंट की गुणवत्ता को भी मार दिया है।”

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में काम कर चुके नवाजुद्दीन का कहना है कि अब ओटीटी के शो में कोई दम नहीं रहा। उन्होंने कहा, “जब मैं उन्हें देख नहीं सकता, तो उनमें काम कैसे कर सकता हूँ। अब ओटीटी पर हमारे पास केवल सो-कॉल्ड स्टार्स हैं, जो बड़ी रकम माँग रहे हैं और ए-लिस्ट स्टार्स की तरह नखरे दिखा रहे हैं। वो भूल जाते हैं कि कंटेंट ही सब कुछ है। वो जमाना चला गया जब कंटेंट दमदार हुआ करता था। इस लॉकडाउन और डिजिटल डोमिनेशन से पहले ए-लिस्ट के सितारे 3000 सिनेमाघरों में अपनी फिल्में रिलीज करते थे। लोगों को पास उन्हें देखने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था, लेकिन अब उनके पास कई विकल्प हैं।”

ओटीटी प्लेटफॉर्म से तौबा करने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने साल 2018 में नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ में काम कर अपने फैन्स के बीच वाहवाही लूटी थी। ‘सेक्रेड गेम्स’ को दो पार्ट में रिलीज किया गया था। यही नहीं, इस वेब सीरीज के अलावा नवाजुद्दीन सिद्दीकी सीरियस मैन, रात अकेली है और घूमकेतू में भी नजर आ चुके हैं।

‘सबसे शिक्षित राज्य’ के 2282 शिक्षकों ने नहीं लगवाया कोरोना का टीका, आड़े आ गया मजहब: केरल के मंत्री ने ही बताया

कोरोना वायरस के संकट से देश को बाहर निकालने के लिए भारत सरकार टीकाकरण अभियान चला रही है और इसके तहत देश में 106 करोड़ से अधिक कोरोना वायरस वैक्सीनेशन कर रिकॉर्ड भी बनाया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि देश के सबसे अधिक शिक्षित राज्यों में शुमार केरल राज्य के कई शिक्षकों ने अभी तक वैक्सीन नहीं लगवाई है। उनकी हिचकिचाहट है कि जाने का नाम ही नहीं ले रही है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने शनिवार (30 अक्टूबर 2021) को जानकारी दी कि राज्य में करीब 2282 शिक्षकों को वुहान कोरोना वायरस का टीका नहीं लगाया गया है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षकों ने अपनी ‘धार्मिक आस्था’ को टीका नहीं लगवाने का कारण बताया है। शिवनकुट्टी ने जोर देकर कहा कि जिन शिक्षकों ने वैक्सीन की डोज नहीं ली, उन्हें 1 नवंबर को स्कूल खुलने के बाद शारीरिक कक्षाएँ (कक्षा में उपस्थित रहकर) लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उन्होंने बताया, “वैक्सीन लगवाने वालों में से एक समूह ने एलर्जी जैसे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, जबकि अन्य विश्वास के नाम पर कोविड -19 वैक्सीन से नहीं लगवा रहे हैं। सरकार चाहती है कि सभी शिक्षक छात्रों के भविष्य को देखते हुए वैक्सीन शॉट लें। लेकिन हम कोई आदेश जारी नहीं करने जा रहे हैं। बेहतर होगा कि ऐसे शिक्षक स्कूल परिसर से दूर रहें। वे ऑनलाइन क्लास ले सकते हैं।”

केरल में 20,000 से अधिक गैर-शिक्षण कर्मचारी और 1.60 लाख शिक्षक हैं। राज्य सरकार ने सभी टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए टीकाकरण अनिवार्य कर दिया था। उनका मानना ​​है कि इस तरह के सरकारी निर्देश से कोरोनावायरस के प्रकोप को रोका जा सकेगा और यह बायो-बबल के रूप में काम करेगा। रविवार (31 अक्टूबर) तक केरल ने कुल 3.89 करोड़ टीके के डोज लिए हैं, जिसमें 1.36 करोड़ लोगों ने कोरोना वैक्सीन के सभी डोज ले लिए हैं।

हाल ही में हुए सर्वेक्षणों से पता चला है कि मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा कोरोना वैक्सीन पर भरोसा ही नहीं करता है। मुस्लिमों के टीकाकरण की हिंदुओं से तुलना करें तो यह काफी कम है।