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UP में भी बढ़ रहे ‘पगड़ी वाले ईसाई’, नेपाल से आकर पादरी करवा रहे धर्मांतरण: सिख संगठन बोले- पीलीभीत में 3000+ का बदलवाया धर्म, गाँवों में घरों पर लगे क्रॉस

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे सिख बहुल गाँवों में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण का मामला सामने आया है। यह मुद्दा न केवल धार्मिक पहचान से जुड़ा है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित एक सुनियोजित साजिश की आशंका को भी जन्म देता है। ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल के अनुसार, बीते कुछ साल में 3,000 से ज्यादा सिखों का धर्मांतरण कर उन्हें ईसाई बनाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीलीभीत के हजारा थाना क्षेत्र के गाँवों – बैल्हा, टाटरगंज, बम्मनपुरा भगीरथ और सिंघाड़ा में सिख समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है। इन गाँवों में लगभग 20,000 से 30,000 सिख रहते हैं, जो मुख्य रूप से खेती और छोटे-मोटे व्यवसायों पर निर्भर हैं। स्थानीय लोगों और सिख संगठनों के अनुसार, 2020 से नेपाल सीमा से सटे इन क्षेत्रों में धर्मांतरण की गतिविधियाँ तेज हुई हैं। इन गतिविधियों का केंद्र नेपाल से आए प्रोटेस्टेंट पादरी और कुछ स्थानीय लोगों को बनाए गए पास्टर हैं, जो कथित तौर पर आर्थिक प्रलोभन, अंधविश्वास और रोग निवारण सभाओं के जरिए सिखों को ईसाई मजहब अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

मामले का खुलासा तब हुआ जब बैल्हा गाँव की एक सिख महिला मंजीत कौर ने 13 मई 2025 को पीलीभीत के हजारा थाने में शिकायत दर्ज कराई। मंजीत ने आरोप लगाया कि उसके पति को पहले ही बहला-फुसलाकर ईसाई बनाया जा चुका है, और अब उस पर और उसके बच्चों पर भी धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा है। उसने बताया कि जब उसने धर्म परिवर्तन से इनकार किया, तो उसके खेतों को नुकसान पहुँचाया गया और बच्चों के साथ मारपीट की गई। मंजीत के अनुसार, आरोपितों ने सरकारी योजनाओं का लाभ और दो लाख रुपये का लालच दिया, लेकिन कोई वादा पूरा नहीं किया गया। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने आठ नामजद और दर्जनों अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

ऑल इंडिया सिख पंजाबी वेलफेयर काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष हरपाल सिंह जग्गी ने इस मामले को गंभीरता से उठाया। उन्होंने स्थानीय गुरुद्वारा श्री सिंह सभा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि पीलीभीत के सिख बहुल गाँवों में करीब 3,000 सिखों का धर्म परिवर्तन हो चुका है। उन्होंने जिला प्रशासन को 160 परिवारों की सूची सौंपी, जिनके धर्म परिवर्तन की पुष्टि हुई है। जग्गी ने आरोप लगाया कि नेपाल से आए पादरी और कुछ स्थानीय पास्टर गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास का फायदा उठाकर सिखों को ईसाई बना रहे हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ परिवारों के घरों पर क्रॉस के निशान बनाए गए हैं, जो धर्मांतरण का प्रतीक माने जा रहे हैं। हालाँकि, प्रशासनिक सख्ती के बाद कई परिवारों ने इन निशानों को हटा लिया है, लेकिन वे अब भी ईसाईयत का पालन कर रहे हैं। जग्गी ने कहा कि यह सिख समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर हमला है और इसके पीछे विदेशी ताकतों का हाथ हो सकता है, जो नेपाल के रास्ते इस साजिश को अंजाम दे रही हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और जिला प्रशासन से निष्पक्ष जाँच और सख्त कार्रवाई की माँग की।

आजतक की एक ग्राउंड रिपोर्ट ने इस मामले को और गहराई से उजागर किया। उनकी टीम ने बैल्हा गाँव का दौरा किया और स्थानीय लोगों, पीड़ितों और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से बातचीत की। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। स्थानीय लोगों ने बताया कि नेपाल से आने वाले पास्टर और पंजाब के कुछ मिशनरी लोग ‘चंगाई प्रार्थना सभाओं’ के जरिए सिखों को लुभा रहे हैं। ये सभाएँ बीमारी ठीक करने और आर्थिक मदद का वादा करती हैं, जिससे गरीब और अशिक्षित लोग आसानी से प्रभावित हो जाते हैं।

रिपोर्ट में एक पीड़ित परमिंदर सिंह ने बताया कि मिशनरी लोग बाहरी तौर पर यह नहीं दिखाते कि कोई धर्म परिवर्तन कर चुका है। वे सिखों को उनकी पारंपरिक वेशभूषा और नाम बरकरार रखने की सलाह देते हैं, ताकि धर्मांतरण का पता न चले। फिर भी कई लोग ‘उपचार सत्रों’ और आर्थिक लालच के कारण ईसाईयत की ओर झुक रहे हैं। हालाँकि लखविंदर सिंह और बलजीत सिंह जैसे लोग धर्म परिवर्तन के बाद ‘घर वापसी’ कर सिख धर्म में लौट आए हैं। लखविंदर ने बताया कि उनके बेटे की बीमारी ठीक न होने पर वे प्रार्थना सभाओं में गए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, जिसके बाद उन्होंने सिख धर्म में वापसी की।

गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने बताया कि अब तक 160 परिवारों की ‘घर वापसी’ कराई जा चुकी है। इसके लिए कमेटी ने ‘अमृतपान’ जैसे धार्मिक कार्यक्रम शुरू किए हैं। साथ ही नौ ऐसे लोगों की सूची सार्वजनिक की गई है, जो सिख से ईसाई बनकर अब दूसरों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इन लोगों का सामाजिक बहिष्कार करने के लिए गुरुद्वारे में उनकी सूची लगाई गई है।

पीलीभीत की भौगोलिक स्थिति इस मामले को और जटिल बनाती है। नेपाल सीमा से सटा होने के कारण यह क्षेत्र लंबे समय से सीमापार गतिविधियों का केंद्र रहा है। जाँच एजेंसियों को शक है कि नेपाल से संचालित कुछ एनजीओ और मिशनरी संगठन धर्मांतरण की गतिविधियों में लिप्त हैं। हरपाल सिंह जग्गी ने दावा किया कि 2012 से नेपाल के पादरी इस क्षेत्र में सक्रिय हैं और विदेशी ताकतों के इशारे पर सिखों को निशाना बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि यह केवल धार्मिक मामला नहीं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है।

स्थानीय सिख नेताओं ने शिक्षा की कमी और गरीबी को धर्मांतरण का प्रमुख कारण बताया। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर और सामाजिक रूप से हाशिए पर रहने वाले लोग आसानी से प्रलोभनों का शिकार हो जाते हैं। कई पीड़ितों ने शपथपत्र देकर बताया कि उन्हें दो लाख रुपये, आवास, शौचालय और अन्य सरकारी योजनाओं का लालच दिया गया, लेकिन बाद में कोई लाभ नहीं मिला।

पीलीभीत प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। डीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि एक विशेष जाँच टीम (SIT) गठित की गई है, जो मामले की तह तक जाएगी। एसपी अभिषेक यादव ने कहा कि मंजीत कौर की शिकायत पर आठ नामजद और दर्जनों अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही एक अवैध चर्च को भी हटाया गया है। प्रशासन ने उन गाँवों में काउंसलिंग कैंप शुरू किए हैं, जहाँ धर्मांतरण की शिकायतें मिली हैं।

हालाँकि, पूरनपुर तहसील के SDM अजीत प्रताप सिंह का कहना है कि बड़े पैमाने पर सुनियोजित धर्मांतरण का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है। उनका कहना है कि कुछ लोग अपनी आस्था के कारण प्रार्थना सभाओं में जा रहे हैं, जिन्हें रोका नहीं जा सकता। हालाँकि लोगों के शपथपत्र और गुरुद्वारा कमेटी की सूची इस दावे को चुनौती देते हैं।

इस बीच, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का संज्ञान लिया है और सभी सीमावर्ती जिलों में सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने ‘उत्तर प्रदेश धर्म स्वतंत्रता कानून’ के तहत सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है, जिसके तहत जबरन या प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण पर रोक लगाई गई है।

सिख संगठनों का कहना है कि यह मामला उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर हमला है। वे माँग कर रहे हैं कि जिन लोगों ने खुद अपनी मर्जी से धर्मांतरण किया है, उन्हें अपने दस्तावेजों में धर्म बदलने की जानकारी दर्ज करानी चाहिए। साथ ही वे दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और उच्चस्तरीय जाँच की माँग कर रहे हैं। गुरुद्वारा कमेटियों ने ‘घर वापसी’ के लिए बड़े पैमाने पर धार्मिक जागरूकता अभियान शुरू किया है।

बता दें कि ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट्स में बताया था कि कैसे नेपाल से सटे सीमावर्ती जिलों में ईसाई मिशनरियाँ धर्मांतरण का जाल फैला रही हैं। नेपाल से सटे 7 सीमावर्ती जिलों में ईसाई धर्मांतरण के मामलों के मामलों पर कार्रवाई भी हो चुकी है। बीते साल यूपी से लोगों को नेपाल ले जाने का मामला सामने आया था, जिसमें हिंदू संगठनों ने आरोपित पादरियों को पकड़कर न सिर्फ पीटा था, बल्कि उनके चेहरों पर कालिख भी पोत दी थी। ईसाई मिशनरियों के अयोध्या तक फैले जाल पर भी हमने रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

70 साल का इंजीनियर जो हमेशा साथ में रखता था AK-47, उसका अबूझमाड़ में सुरक्षा बलों ने किया काम तमाम: जानिए कौन था वामपंथी आतंकी नंवबल्ला केशव राव

बुधवार (21 मई 2025) को, छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ में सुरक्षाबलों ने नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। एक एंटी-नक्सल ऑपरेशन में पुलिस ने नक्सलियों के चीफ नम्बाला केशव राव उर्फ बसवराजू उर्फ गगन्ना को मार गिराया है। यह भारत में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में एक मील का पत्थर है, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब नक्सलियों के सर्वोच्च नेता को सुरक्षाबलों ने ढेर किया है।

कौन था बसवराजू?

बसवराजू (असली नाम नम्बाला केशव राव) भारत में नक्सली संगठन सीपीआई-माओवादी का चीफ और मास्टरमाइंड था।उसे नक्सली आंदोलन की रीढ़ माना जाता था और पूरे देश में नक्सल संगठन के संचालन की जिम्मेदारी उसी पर थ।. जिस तरह अलकायदा का चीफ ओसामा बिन लादेन या लिट्टे का चीफ प्रभाकरण था, उसी तरह भारत में नक्सलियों का चीफ बसवराजू था। उसकी मौत को अबूझमाड़ में नक्सलवाद पर सुरक्षाबलों की सबसे गहरी चोट माना जा रहा है।

कितने करोड़ का था इनाम?

भारत सरकार ने बसवराजू पर 1.5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था, हालाँकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार यह इनाम 1 करोड़ तक था। यह राशि उसकी खतरनाक गतिविधियों और देश के लिए खतरे को दर्शाती है।

कहाँ की थी पढ़ाई?

बसवराजू एक पढ़ा-लिखा माओवादी था। उसने वारंगल के रिजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (REC) से B.Tech (इंजीनियरिंग) की पढ़ाई की थी। यह विरोधाभास है कि एक इंजीनियरिंग ग्रेजुएट देश के सबसे बड़े आंतरिक सुरक्षा खतरों में से एक का नेतृत्व कर रहा था।

किन हथियारों का करता था इस्तेमाल?

बसवराजू हमेशा अपनी सुरक्षा के लिए AK-47 राइफल साथ रखता था। वह छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के इलाकों में एक्टिव था। उसे युद्ध कला (वारफेयर) में माहिर माना जाता था और वह सैन्य कमान संभालने और आक्रामक हमलों की रणनीति बनाने में विशेषज्ञ था। वह पार्टी के केंद्रीय सैन्य आयोग के प्रभारी के तौर पर भी काम करता रहा था।

संगठन में भूमिका और अन्य नाम

बसवराजू 24 सालों से पोलित ब्यूरो सदस्य के तौर पर काम कर रहा था। 2018 में गणपति के बाद उसे संगठन के महासचिव की जिम्मेदारी मिली थी। उसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता था, जैसे नंवबल्ला केशव राव गनगन्ना, विजय, दरपू नरसिम्हा रेड्डी, नरसिम्हा, प्रकाश और कृष्णा. बताया जाता है कि उसने साल 1970 में अपना घर छोड़ दिया था।

ऑपरेशन का परिणाम

इस मुठभेड़ में बसवराजू सहित कुल 27 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें कई अन्य (CC) सेंट्रल कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं। इस ऑपरेशन में पुलिस बल का 1 सहयोगी शहीद हुआ है, जबकि 1 जवान घायल हुआ है, जिसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त होगा भारत – अमित शाह

गृहमंत्री अमित शाह ने X (पहले ट्विटर) पर इस सफलता की सराहना की है और कहा कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त होगा भारत।

अमित शाह ने लिखा, “यह पिछले तीन दशकों में पहली बार है जब भारत में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में महासचिव स्तर का कोई शीर्ष नेता सुरक्षाबलों के हाथों मारा गया है. यह हमारे बहादुर सुरक्षाबलों और एजेंसियों के लिए एक बहुत बड़ी सफलता है।”

साला, ब&नचो#, हरा&जा$, कुत्ता, माद&चो$… राहुल गाँधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ से पत्रकार के लिए निकली भाषा सुनी आपने? ‘कश्मीर फाइल्स’ को इन्होंने ही बताया था प्रोपेगेंडा

निकालो इसको साले को, हटा…बहन चो% कौन? कौन साला हरामजा#$ बोल रहा था? कौन कुत्त& बोल रहा था? कौन था वो? मालूम है मैं कौन हूँ? कौन कह रहा था? मादरचो% तुम समझते क्या हो अपने आप को, मादरचो% सिंधी…पागल समझ रहे हो? तेरी माँ चो% दूँगा मैं, बहनचो%…

ये शब्द रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के पूर्व चीफ अमरजीत सिंह दुलत के हैं। ‘भारत रफ्तार टीवी’ के पत्रकार जितेश जेठानंदानी ने हाल में उनका पॉडकास्ट किया। इस दौरान उनसे उनके पाकिस्तान जाने को लेकर भी प्रश्न हुआ, जिसे सुन दुलत विफर गए।

नाराजगी इतनी बढ़ गई कि ऑन कैमरा उन्होंने हाथापाई और गाली-गलौच शुरू कर दिया। वीडियो अब चैनल पर मौजूद है। देख सकते हैं कि पत्रकार ने दुलत से पाकिस्तान के अलावा POK समेत अन्य मुद्दों पर भी सवाल पूछे, जिसे देते हुए वह हिचकते दिखे और पाकिस्तान जाने वाली बात पर भड़क गए।

पॉडकास्ट में पत्रकार ने एएस दुलत से पहला सवाल पूछा, “आप राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा में दिखाई दिए, कैसे आप उस यात्रा में जुड़े थे, क्या कारण थे?” इस पर दुलत जवाब देते हैं, “राहुल गाँधी जी का फोन आया था। मैं यात्रा में गया था। हाँ, मेरा विचार कॉन्ग्रेस से मिलता है। कॉन्ग्रेस राज के अंदर ही मैंने नौकरी की है। हम तो हमेशा कॉन्ग्रेस के साथ थे।”

अगला सवाल पूछा जाता है, “90 के दशक में कट्टपंथियों ने कश्मीरी पंडितों का नरसंहार किया था, उस पर आपका क्या कहना है?” दुलत कहते हैं, “वो यही लोग थे, जो दिल्ली से खफा थे और सिर्फ पंडितों को नहीं मारा है। मुसलमान ज्यादा मारे गए थे तब।” जवाब से लगता है कि उनकी नजर में मारने वाले इस्लामी कट्टरपंथी नहीं थे।

POK के मुद्दे पर सवाल किया जाता है तो दुलत कहते हैं, “कोई मुद्दा नहीं, क्या मुद्दा है?” फिर पत्रकार विस्तारित करते हैं, तब एएस दुलत जवाब देते हैं, “अगर कोई हल है तो वही है, LOC पर समझौता कर लो। जो आपके पास है, वो आपका है। जो हमारे पास है वो हमारा है।”

अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में पर्यटन बढ़ने के सवाल पर दुलत कहते हैं, “हाँ-हाँ… पर्यटन बढ़ा है, मैंने तो कहा था कि कश्मीर के स्थानीय नेताओं की बात सुननी चाहिए थी।” बताया जाए कि उस समय कश्मीर के स्थानीय नेता अनुच्छेद 370 हटने का विरोध कर रहे थे। दुलत अपने जवाब में इसका समर्थन करते हैं और कहते हैं कि पर्यटन बढ़ना परेशानी है।

हाल ही में भारत द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी पत्रकार ने सवाल किए। पूछा गया “10-15 दिन पहले भारत-पाकिस्तान में तनाव थे”…इतने में दुलत कहते हैं, “मैं तो कहता हूँ। लाहौर ले लेना चाहिए था। मुझे तो लाहौर पसंद है।”

इससे अगला सवाल दुलत के पाकिस्तान में संपर्क को लेकर होता है। दुलत जवाब में कहते हैं कि उनके संपर्क तो हैं। कुछ दिन पहले पाकिस्तान जाने के सवाल पर दुलत विफर जाते हैं और मारपीट शुरू कर देते हैं। पत्रकार का यह सवाल एएस दुलत की हाल ही की किताब ‘स्पाय क्रॉनिकल्स रॉ ISI’ के संबंध में पूछा गया था। यह किताब दुलत ने पूर्व पाकिस्तानी जासूस असद दुर्रानी संग मिलकर लिखी है।

जब कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को प्रोपेंगेडा करार दिया

बता दें कि एएस दुलत हमेशा देश में गलत कारणों से जाने जाते रहे हैं। उन्होंने अक्सर कॉन्ग्रेस के बीजेपी विरोधी और पाकिस्तान समर्थक प्रचार का समर्थन किया है। साल 2023 में कॉन्ग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गाँधी के हाथों में हाथ डालकर फोटो भी खिंचवाई।

इसके अलावा साल 2019 में निर्मित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’, जिसमें कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को दिखाया गया। दुलत ने फिल्म को प्रोपेगेंडा करार दिया। उन्होंने घाटी से कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन को धो-पोंछने का काम किया था। यह कहते हुए कि कश्मीरी हिंदुओं के पलायन की लोकप्रिय धारणा वास्तविकता से अलग है।

एएस दुलत ने पुलवामा आतंकी हमले को लेकर बीजेपी पर सवाल उठाए थे। साल 2019 में आम चुनावों से पहले दुलत ने पुलवामा आतंकी हमले को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए तोहफा बताया। इसके बाद उनकी खूब आलोचना हुई थी।

कोई यूट्यूबर-कोई छात्र, कोई तस्कर-कोई मजदूर… देश के अलग-अलग शहरों से पकड़े गए हैं ‘गद्दार’, जानिए गजाला से लेकर ज्योति तक कैसे बने पाकिस्तानी एजेंट

पुलगाम आतंकी हमले के बाद और ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के बाद कई राज्यों से 13 जासूस गिरफ्तार किए गए हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के इशारे पर काम करने वाले एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पता लगाया है। अब तक की जाँच में पता चला है कि जासूसी से लेकर सीमा पार तस्करी और दुश्मन के अभियानों में सहायता पहुँचाने का काम इनलोगों ने किया है।

शहजाद, बिजनेस के नाम पर तस्करी और जासूसी

19 मई को यूपी एसटीएफ ने मुरादाबाद से शहजाद को गिरफ्तार किया। एटीएस के मुताबिक शहजाद भारत में आतंकी हमले की साजिश में शामिल था। भारत- पाक सीमा पर अवैध रूप से वह कॉस्मेटिक, मसाले, कपड़े और दूसरे सामान की तस्करी करता था। इसी दौरान आईएसआई के संपर्क में आया।
शहजाद रामपुर के कई युवाओं को पाकिस्तान भेज चुका है। वहाँ उन्हें जासूसी और हिंसक गतिविधियों की ट्रेनिंग दी गई। इन सभी का वीजा खुद शहजाद ने लगवाया जिसमें ISI एजेंट्स की उसे मदद मिली। शहजाद पाकिस्तान उच्चायोग में काम करने वाले अधिकारी एहसान उर रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में था। दानिश का नाम हरियाणा की ज्योति मल्होत्रा समेत कई जासूसों से संपर्क सूत्र के तौर पर आ चुका है और भारत सरकार ने 13 मई 2025 को उसे भारत छोड़ने का आदेश जारी कर दिया था।

ज्योति मल्होत्रा, यूट्यूबर

यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा हरियाणा की ट्रेवल ब्लॉगर है जिसके यूट्यूब पर 3.7 लाख और इंस्टाग्राम पर 1.3 लाख फॉलोवर्स हैं। ज्योति को हिसार के सिविल लाइन से गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तान जाने के लिए वीजा बनवाने के दौरान ज्योति पाकिस्तान हाई कमीशन में अहसान उर रहीम उर्फ दानिश से मिली। दो बार ज्योति पाकिस्तान गई और दानिश के कहने पर अली हसन से मिली जिसने पाकिस्तानी अधिकारी और आईएसआई के अधिकारियों से मुलाकात करवाई।

इस दौरान शाकिर और राणा शहबाज से मिली। शाकिर का नंबर जट रंधावा के नाम से सेव कर ज्योति उसे सोशल मीडिया जैसे व्हाट्सएप, स्नैप चैट और टेलीग्राम के माध्यम से देश से जुड़ी सूचनाएं और खुफिया जानकारी शेयर करने लगी। ज्योति और पंजाब के सीएम मरियम नवाज के साथ का वीडियो भी सामने आया है। उसने अपनी डायरी में भी पाकिस्तान जाने का जिक्र किया है।

गजाला एक विधवा महिला जिसे दानिश ने फँसाया

एक और महिला जिसने देश से गद्दारी की है वो है पंजाब की 32 साल की विधवा महिला गजाला। 2025 में पाकिस्तानी वीजा के लिए आवेदन करने के दौरान वो दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाईकमीशन गई थी जहाँ वो दानिश से मिली। पुलिस जाँच में पता चला है कि आरोपित गजाला खुफिया जानकारियाँ आईएसआई को देती थी।

गजाला के पैसों की लेनदेन से जुड़ी जानकारियाँ और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की जाँच की जा रही है। उसका पाकिस्तानी अधिकारी एहसान उर रहीम से कनेक्शन भी सामने आया है। गजाला की गिरफ्तारी के बाद ज्योति मल्होत्रा का पता पुलिस को चला।

मजदूर शेर मसीह और सूरज मसीह

जासूसी के मामले में सबसे पहले 3 मई 2025 को पंजाब के अमृतसर से पलक शेर मसीह और सूरज मसीह की गिरफ्तारी हुई। इनलोगों को अमृतसर की सेना छावनी इलाके में वायु सेना के अड्डों की संवेदनशील सूचनाएँ और तस्वीरें लीक करने पर गिरफ्तार किया गया।

जाँच में पाया गया कि दोनों के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध थे। अमृतसर की जेल में बंद हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी ने इनका संपर्क करवाया था। ये दोनों दिहाड़ी मजदूर हैं।

यासीन मोहम्मद

8 मई 2025 को पंजाब के मलेरकोटला से यासीन मोहम्मद को गिरफ्तार किया गया। ये पाकिस्तानी हाई कमीशन के अधिकारी दानिश के संपर्क में था। यासीन ऑनलाइन पैसे लेकर खुफिया जानकारियाँ दानिश से शेयर करता था। इतना ही नहीं वो दूसरे लोगों को भी पैसे लेकर दानिश से संपर्क कराने का काम करता था।

उसने भी गजाला के खाते में 10,000 ट्रांसफर किए थे। यासीन कीटनाशक का कारोबार करता था। वो 2013 में पहली बार पाकिस्तान गया। वीजा लेने के लिए जब वो पाकिस्तान हाई कमीशन पहुँचा तो उसकी मुलाकात दानिश से हुई। दानिश की मदद से उसे तीन और वीजा मिले। दानिश के कहने पर उसने सिम उपलब्ध करवाए। वह दानिश को क्लाइंट लाकर देता था जो पाकिस्तानी वीजा बनवाने के इच्छुक होते थे। उन सब से दानिश एक वीजा के बदले 5000 रुपए लेता था।

देवेंदर सिंह ढिल्लों, छात्र

25 साल का देवेन्दर सिंह ढिल्लों को पंजाब से गिरफ्तार किया गया। उसने पटियाला छावनी के बाहर की तस्वीरें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को भेजी थी। अधिकारी उसके स्नैपचैट अकाउंट से डिलीट किए गए डेटा को फिर से प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, हालाँकि उसके इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप प्रोफाइल से पहले ही आपत्तिजनक सबूत बरामद मिल चुके हैं।

उसे दूसरे केस में गिरफ्तार किया गया था जिसमें फेसबुक पर उसने बंदूक की तस्वीर पोस्ट की थी , लेकिन पूछताछ में उसके जासूस होने का पता पुलिस को चला। उसे आईएसआई ने हनी ट्रैप में फँसाकर जासूसी के लिए तैयार किया था। वो आईएसआई के 5 एजेंट्स के संपर्क में था। उसे आईएसआई ने लड़की का लालच भी दिया था, जिसके बदले में उसने सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़ी तस्वीरें भी भेजी थी।

मोहम्मद मुर्तजा अली, मोबाइल ऐप डेवलपर

मोहम्मद मुर्तजा अली को जालंधर से गुजरात पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर गिरफ्तार किया। उसने मोबाइल ऐप डेवलप किया था जिसके द्वारा वो खुफिया जानकारियाँ आईएसआई तक पहुँचाता था। उसके पास से चार मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। इनसे कई आपत्तिजनक खुफिया जानकारियाँ शेयर करने के सबूत मिले हैं।

मोहम्मद तारीफ 2018 में आईएसआई के संपर्क में आया

17 मई 2025 को हरियाणा के नूँह से मोहम्मद तारीफ को गिरफ्तार किया है। तारीफ पाकिस्तानी हाई कमीशन के आसिफ बलौच और जाफर के संपर्क में था। उसने यह बात भी मानी है कि आसिफ बालौच और जाफर के कहने पर उसने पाकिस्तान को सिरसा एयरपोर्ट स्टेशन की जानकारी भेजी। तारीफ 2018 में वीजा के लिए पाकिस्तान हाई कमीशन गया था और इस दौरान उससे फोन नंबर और डीटेल लिया गया। उसे फोन आया और उसे वीजा के बदले दो सिम देने के लिए कहा गया। सिम देने के बाद वीजा दिया गया। इस तरह वो आईएसआई के संपर्क में भी आया।

अरमान

हरियाणा के नूँह के राजाका गाँव से सुरक्षा जाँच एजेंसी टीम ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले अरमान को गिरफ्तार किया। पुलिस का मानना है कि अरमान स्लीपर सेल की तरह काम करता था और आईएसआई का नेटवर्क बढ़ाने में लगा था। भारतीय सिम कार्ड खरीदकर पाकिस्तानी अधिकारियों तक भी इनलोगों ने पहुँचाया था। पुलिस ने कई व्हाट्सएप चैट, तस्वीरें और वीडियो भी बरामद किये हैं जिन्हें पाकिस्तानी नंबर पर शेयर किये गए थे। उसने भारतीय सैन्य एक्टिविटज की जानकारी भी उन नंबरों पर दी थी।

अरमान पाकिस्तानी वीजा बनाने के लिए पाकिस्तान हाई कमीशन गया था। इस दौरान वो दानिश के संपर्क में आया। दानिश के कहने पर वो आईएसआई के लिए काम करने लगा।

नोमान इलाही

15 मई को हरियाणा के पानीपत से नोमान इलाही को पुलिस ने गिरफ्तार किया और उससे पूछताछ की। वह 5 बार पाकिस्तान जा चुका है। माँ-बाप की मौत के 5 साल बाद भी उनके पासपोर्ट इलाही के पास हैं। उत्तर प्रदेश का रहनेवाला इलाही पानीपत में एक फैक्ट्री में सुरक्षा गार्ड का काम करता था और पाकिस्तान को संवेदनशील जानकारियाँ भेजता था। उसके फोन से कई संवेदनशील सैन्य जानकारियाँ भी मिली हैं जिसे जब्त कर लिया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ISI सक्रिय थी और वह भारतीय सेना की गतिविधियों की जानकारी मोबाइल और सोशल मीडिया के जरिए भेजता था।

नोमान पहले बेरोजगार था और अपने अब्बू के साथ पासपोर्ट और दस्तावेज बनवाने का काम करता था। अब्बू की मौत के बाद उसने यह धंधा संभाला, लेकिन लालच में आकर ISI के जासूसी नेटवर्क से जुड़ गया। जाँच एजेंसियों के अनुसार, नोमान पासपोर्ट सेवा केंद्र की आड़ में उन लोगों के दस्तावेज तैयार करता था, जो सऊदी अरब, पाकिस्तान या अन्य देशों में जाने की योजना बनाते थे।

सुखप्रीत सिंह और करणबीर सिंह

पंजाब पुलिस ने गुरदासपुर से सुखप्रीत सिंह और करणबीर सिंह को गिरफ्तार किया है। दोनों नशे की तस्करी करते- करते आईएसआई हैंडलर्स के संपर्क में आए। इनलोगों ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी को मुहैया करवाई। इसके बदले में इनलोगों को 1लाख रुपए मिले। उसके मोबाइल की फोरेंसिक जाँच से खुफिया जानकारी के भेजे जाने की पुष्टि हुई है। दोनों 2018 से पाकिस्तानी हाई कमीशन के संपर्क में था।

ज्योति ने लिखा- मेरी शादी पाकिस्तान में ही करवा दो, जवाब मिला- जो यार मेरे दिल…ISI एजेंट अली हसन के भी काफी ‘करीब’ थी जासूस यूट्यूबर, चैट से खुलासा

पाकिस्तान के लिए जासूसी करती पकड़ी गई भारत की यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को लेकर नया खुलासा हुआ है। ज्योति पाकिस्तान के व्यक्ति से शादी करना चाहती थी। यूट्यूबर की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एजेंट अली हसन के साथ व्हाट्सएप चैट्स सामने आई हैं, जिसमें वह पाकिस्तान के प्रति अपना लगाव जाहिर कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हसन से बात करते हुए यूट्यूबर कहती है, “मेरी शादी पाकिस्तान में ही किसी से करवा दो।” पुलिस के मुताबिक ज्योति से अली हसन लगातार संपर्क बनाए हुए थीं। उनके बीच लंबी बातचीत के सबूत मिले हैं। एक चैट में हसन ज्योति से कहता है, “जो (ज्योति) यार, मैं दिल से दुआ करता हूँ कि तुम हमेशा खुश रहो, तुम हमेशा मुस्कुराती रहो और तुम्हें जिंदगी में कभी भी निराशा हासिल न हो।”

ये चैट्स तब सामने आई है जब सोशल मीडिया पर नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में काम करने वाले दानिश और ज्योति के बीच संबंधों के कयास लगाए जा रहे थे। लेकिन अब लगता है कि ISI एजेंट अली हसन के साथ भी यूट्यूबर की काफी नज़दीकियाँ बनी हैं। हालाँकि, ये व्हाट्एप चैट्स किस समय की हैं, इसको लेकर पुख्ता जानकारी नहीं है।

इससे पहले यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा की पर्सनल डायरी सामने आई थी, जिसमें उसका पाकिस्तान प्रेम नजर आया था। ज्योति ने लाहौर की तारीफ की थी और भारत-पाकिस्तान के बीच सरहदों की दूरी खत्म होने की इच्छा जताई थी। लिखा था, “पाकिस्तान की बस और ट्रक के बारे में जितना कहूँ, उतना कम। क्रेजी और कलरफुल।” पुलिस ने ज्योति की पर्सनल डायरी को हिरासत में ले लिया है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय भी ज्योति पाकिस्तान से लगातार संपर्क में थी। उसने भारत में ब्लैकआउट और मॉक ड्रिल से संबंधित सभी जानकारी पाकिस्तान को दी थी। पुलिस का कहना बै कि ऑपरेशन के दौरान वह दानिश के संपर्क में थी। जाँच में सामने आया है कि ज्योति ने दानिश के साथ कथित कुछ चैट्स को डिलीट भी किया है। फोन में आखिरी बातचीत मार्च 2025 की हैं।

गौरतलब है कि यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को 17 मई 2025 को जासूसी के आरोप में हरियाणा के हिसार जिले से गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उसे 5 दिन की रिमांड में हिरासत में लिया है। NIA, IB और हरियाणा पुलिस लगातार उससे पूछताछ कर रही हैं। ज्योति के तीन मोबाइल फोन और लैपटॉप को भी सीज कर लिया गया है। इनका डाटा खंगाला जा रहा है।

हमास के ‘मदरसा’ में प्रोपेगेंडा की ट्रेनिंग ले रहा पाकिस्तान, जानिए कैसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से हुई तबाही के बाद भी फैलाया गया आतंकी मुल्क की ‘जीत’ का झूठ: NCRI की स्टडी से खुलासा

अमेरिका में रहने वाला हमास समर्थक और यहूदी विरोधी एक्टिविस्ट जैक्सन हिंकल, हाल ही में भारत के खिलाफ चलाए जा रहे पाकिस्तान प्रायोजित दुष्प्रचार अभियान में अग्रणी भूमिका निभाता पाया गया। यह अभियान विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद तेज़ हुआ।

‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ में सोमवार, (19 मई 2025) को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हिंकल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को भारत के खिलाफ झूठी और भ्रामक खबरें फैलाने में सक्रिय रूप से मदद कर रहा है।

इस रिपोर्ट में नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया गया है, जिसमें हिंकल की भारत-विरोधी गतिविधियों और पाकिस्तानी एजेंसियों से उसकी संभावित साँठगाँठ को उजागर किया गया है।

इसमें नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनसीआरआई) द्वारा किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया गया।

द न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

न्यूयॉर्क पोस्ट ने रिपोर्ट किया, “हिंकल ने भारत में पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित के साथ उनके कार्यक्रम लेजिटिमेट टारगेट पर साक्षात्कार के एक सप्ताह बाद भारत पर कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ़ झूठा अभियान चलाने का आरोप लगाया। एनसीआरआई अध्ययन में दावा किया गया है कि यह पाकिस्तान की प्राथमिक खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस द्वारा फैलाया गया दुष्प्रचार था।”

रिपोर्ट के अनुसार, जैक्सन हिंकल द्वारा फैलाए गए झूठ को सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी बॉट्स द्वारा बढ़ावा दिया गया। एनसीआरआई द्वारा किए गए अध्ययन में इस बात पर प्रकाश डाला गया।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने के लिए अप्रमाणिक नेटवर्क सक्रिय हो गए। इन नेटवर्क्स ने जनरेटिव एआई और बॉट्स का इस्तेमाल करते हुए ऐसे भड़काऊ मीम्स तैयार किए और प्रसारित किए, जिनमें भारतीय प्रतीकों, राजनीतिक नेताओं और भड़काने वाले नारों के ज़रिए झूठी कहानी को बढ़ावा दिया गया।

नेटवर्क कॉन्टैगियन रिसर्च इंस्टीट्यूट (NCRI) के अनुसार, ये ‘अप्रमाणिक’ बॉट्स जैक्सन हिंकल के भारत-विरोधी संदेशों को लाखों सोशल मीडिया यूज़र्स तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

जैक्सन हिंकल के झूठ को पाकिस्तानी बॉट्स द्वारा बढ़ावा दिया गया, छवि न्यूयॉर्क पोस्ट से ली गई

ऑपइंडिया, द्वारा किए गए विश्लेषण में सामने आया है कि जैक्सन हिंकल की सोशल मीडिया गतिविधियों, खासकर एक्सपर, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अचानक तेज़ी आई। उसने अपने पोस्ट्स में ‘भारत पर पाकिस्तान की जीत’ का झूठा दावा किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन फर्जी कहानियों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों का मजबूत समर्थन मिला, जो वास्तविकता में भारतीय सेना द्वारा अपने सैन्य ठिकानों और आतंकी शिविरों पर किए गए हमलों को रोकने में असफल रही थीं।

जैक्सन हिंकल के कुछ ट्वीट –

  1. “भारत ने बहुत बड़ी गलती की”
  2. “भारत, पाकिस्तान की सैन्य क्षमताओं से इतना हैरान था कि उसने कल रात ट्रम्प से युद्ध विराम की भीख माँगी। ऐसा युद्ध शुरू न करें जिसे आप जीत न सकें…।”
  3. “ब्रिक्स के साथ डॉलरीकरण को आगे बढ़ाने के बजाय, भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध शुरू कर दिया। पश्चिमी वित्तीय पूंजी के अच्छे गुलाम।”
  4. “शायद भारत के पास बेहतर हवाई सुरक्षा होती अगर उनके सभी इंजीनियर अमेरिका में न होते…।”
  5. “पाकिस्तान भारत को अपमानित कर रहा है…मोदी को ऐसा कभी नहीं करना चाहिए था।”
  6. “भारत ने पाकिस्तान को कम आंका…।”
  7. “ट्रम्प ने भारत को शांति के लिए सहमत होने के लिए मजबूर नहीं किया। चीनी हवाई सुरक्षा ने भारत को अधीनता में आने के लिए मजबूर किया।”
  8. “पाकिस्तान जीता, भारत हारा।”
  9. “पाकिस्तान ने भारत को शर्मिंदा किया।”
जैक्सन हिंकल द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि जैक्सन हिंकल के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल को भारतीय अधिकारियों द्वारा प्रतिबंधित कर दिया गया था। हालाँकि, भारत में उसकी पहुँच पर लगाया गया यह अस्थायी प्रतिबंध सोमवार, (19 मई 2025) को हटा लिया गया।

जैक्सन हिंकल के झूठ का पर्दाफाश

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत अपनी सैन्य शक्ति का जोरदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान को गहरी क्षति पहुँचाई। इस अभियान में भारतीय सशस्त्र बलों ने 9 पाकिस्तानी आतंकी शिविरों, कई वायु रक्षाप्रणालियों, 10 सैन्य ठिकानों, और 2 रेडियो स्टेशनों को निशाना बनाया।

यह सैन्य अभियान 7 मई 2025 को शुरू हुआ और पाकिस्तान को इतना बड़ा नुकसान हुआ कि उसे संयुक्त राज्य अमेरिका से मदद की गुहार लगानी पड़ी। भारत की सैन्य कार्रवाई ने पाकिस्तान की सेना को इस कदर हिला दिया कि उसे तुरंत युद्धविराम  की अपील करनी पड़ी।

ऑपइंडिया की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया कि कैसे भारत ने इस हमले से पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से झुका दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और सेना की क्षमताओं खासकर दुश्मन क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों ने पाकिस्तानी सेना और उसके जनरलों में गहरी दहशत पैदा कर दी।

भारत पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार को नष्ट करने के बेहद करीब पहुँच गया था वही रणनीतिक सौदेबाजी की चिप जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान लंबे समय से, खासकर 2014 से पहले की भारतीय सरकारों पर दबाव बनाने और छद्म आतंकवादी हमलों के बाद भारत की सैन्य प्रतिक्रिया को रोकने के लिए करता रहा है।

जब पाकिस्तान ने महसूस किया कि वह युद्ध में हार की कगार पर है और उसके महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने तबाह होने वाले हैं, तो उसे मजबूरन अमेरिका के माध्यम से भारत से ‘युद्धविराम समझौते’ के लिए संपर्क करना पड़ा।

पाकिस्तानी सेना द्वारा लिया गया यह समय पर फैसला उन्हें न केवल घरेलू स्तर पर शर्मिंदगी से बचाने में मददगार रहा, बल्कि अपनी असफलताओं के लिए जवाबदेही से भी बचा।

इस तरह, उन्हें 1971 की तरह सार्वजनिक आत्मसमर्पण और जनता के आक्रोश का सामना करने की नौबत नहीं आई। यह पूरी स्थिति इस सदियों पुरानी सच्चाई की पुष्टि करती है कि शांति केवल ताकत के आधार पर ही संभव है।

जब तक भारत आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक रूप से  मजबूत बना रहेगा, तब तक वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपनी क्षमता को कायम रखेगा हर बार पाकिस्तान को उसकी सीमा दिखाकर, जो अब भी आतंक और अस्थिरता फैलाने के लिए कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों  पर निर्भर है।

जैक्सन हिंकल का अकाउंट भारत में हो चुका बैन

जैक्सन हिंकल अमेरिका में रहने वाले एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जिनके एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 3 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हैं। झूठी खबरें और षड्यंत्र के सिद्धांत फैलाने के लिए बदनाम हिंकल को इंस्टाग्राम, यूट्यूब और ट्विच जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स से प्रतिबंधित किया जा चुका है।

हिंकल ने यमन में हौथियों द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में भाषण दिया था और बेरूत में हिज़्बुल्लाह के आतंकवादी नेता हसन नसरल्लाह के अंतिम संस्कार में भी भाग लिया। उन्होंने हिज़्बुल्लाह के नियंत्रण वाले चैनलों अल-मनार टीवी और चैनल3 को इंटरव्यू दिए, और हमास के आतंकवादी बासम नैम का भी साक्षात्कार लिया।

एंटी डिफेमेशन लीग (ADL) ने हिंकल पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इज़राइल-हमास युद्ध की शुरुआत से ही लगातार यहूदी विरोधी और इज़राइल विरोधी बयानबाज़ी फैलाई है।

भारत के लड़ाकू विमानों की आवाज सुनते ही बंकर में घुस गया था मुल्ला मुनीर, अब खुद को ही दे दिया प्रमोशन: जानिए क्या होता है ‘फील्ड मार्शल’ जो बन गया पाकिस्तानी आर्मी चीफ

पाकिस्तान की फौज का मुख्या जनरल आसिम मुनीर, जिसे मुल्ला मुनीर भी कहते है, ने खुद को फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट कर लिया है। यह सर्वोच्च फौजी पद होता है। मुल्ला मुनीर का खुद को प्रमोशन देना चौकाने वाला नहीं है, क्योंकि पाकिस्तानी फौज चुनी गई सरकारों का तख्तापलत करने के लिए कुख्यात रही है। लेकिन इस समय का चयन बेहद हास्यस्पद है।

उल्लेखनीय है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर 9 आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। हमले में बहावलपुर और मुरीदके के शिविरों में पुलवामा हमले और IC-814 अपहरण के मास्टरमाइंड सहित 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया और इसमें पाकिस्तान को भारी नुकसान हुआ। भारतीय सेना के इस सटीक हमले में करीब 40 पाकिस्तानी फौजी भी मारे गए और पाकिस्तान की हवाई रक्षा प्रणाली भी पस्त हो गई थी। 

युद्ध के दौरान बंकर में छिप गया था मुल्ला मुनीर!

जानकारी के अनुसार, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जब भारतीय मिसाइलें और ड्रोन पाकिस्तान के घर में घुसकर एयरबेस पर कहर बरपा रही थी, तब पाकिस्तानी फौज प्रमुख आसिम मुनीर कथित तौर पर एक बंकर में छिपे हुए थे। उनकी इस ‘वीरता’ के बावजूद, उन्हें फील्ड मार्शल जैसे प्रतिष्ठित पद पर प्रमोट करना पाकिस्तान की फौजी और राजनीतिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सोशल मीडिया पर इसकी खिल्ली उड़ाई जा रही है। एक यूजर ने लिखा कि ‘फील्ड मार्शल ऑफ सरेंडर।’ इसके अलावा एक अन्य यूजर ने पूछा, “क्या उन्होंने उसे छिपने के लिए सबसे गहरा बंकर खोजने के लिए प्रमोट किया?”

इसके अलावा एक यूजर ने पोस्ट शेयर कर लिखा कि ‘इजरायल ने सभी युद्ध जीते मगर कोई मेडल नहीं।’ दूसरी फोटो में लिखा है, “पाकिस्तान सभी युद्ध हारे, मेडल लाहौर मार्केट से लिया।”

दूसरे मीम में रणवीर सिंह की फिल्म पद्मावत की एक फोटो है जिसमें रणवीर सिंह कहते हैं, “यह तोहफा हमने खुद को दिया है।” इसे शेयर करते हुए लिखा है कि फील्ड मार्शल रैंक पर आसिम मुनीर ऐसा कह रहा होगा।

तीसरे मीम में आसिम मुनीर खुद को प्रमोट करते नजर आ रहे हैं।

क्या होता है फील्ड मार्शल का पद?

दरअसल फील्ड मार्शल सेना का सर्वोच्च पद होता है, जिसे अक्सर ‘5 स्टार’ रैंक के रूप में जाना जाता है। यह एक सम्मानजनक पद होता है, जो आमतौर पर युद्ध में असाधारण जीत या देश के लिए विशेष योगदान के लिए दिया जाता है। इस पद को प्राप्त करने वाला अधिकारी जीवन भर सक्रिय सूची में रहता है, हालाँकि सेवानिवृत्ति के बाद उसे कोई सक्रिय कमांड भूमिका नहीं निभानी होती। यह ब्रिटिश सैन्य परंपराओं का हिस्सा है, जिसे पाकिस्तान ने भी अपनाया है।

वैसे तो आधिकारिक तौर पर किसी भी फील्ड मार्शल का चुनाव देश का राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्रालय और सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के द्वारा होता है, लेकिन पाकिस्तान में सभी तंत्रों पर वहाँ की फौज हावी रही है और सभी फैसले भी फौज खुद कर लेती है।

क्या इससे पहले भी पाकिस्तान में कोई फील्ड मार्शल था?

जी हाँ, आसिम मुनीर से पहले पाकिस्तान के इतिहास में केवल एक ही व्यक्ति फील्ड मार्शल रहा है। वह थे जनरल मुहम्मद अयूब खान, जिन्होंने 1958 में सैन्य तख्तापलट के बाद सत्ता संभाली और 1959 में खुद को यह पद दिया था। अयूब खान पाकिस्तानी फौज के कमांडर-इन-चीफ और बाद में देश के राष्ट्रपति भी बने।

आसिम मुनीर का मामला अलग है, क्योंकि उन्हें नागरिक सरकार द्वारा प्रमोट किया गया है, और वह 2027 में अपनी सेवानिवृत्ति तक सेवारत सेना प्रमुख बने रहेंगे।

भारत ने जिस नेतृत्व वाली फौज को धूल चटाई है, उसके मुखिया को खुद को प्रमोट कर लेना बताता है, कि पाकिस्तान एक मुल्क के तौर पर कितना असफल है। माना जा रहा है कि मुल्ला मुनीर ने आंतरिक चुनौतियों से बचने और फौज में बगावत की स्थिति पर काबू करने के मकसद से यह फैसला किया है।

गिफ्ट-गाड़ियों से बिछाया जाल, फिर ड्रग्स देकर लड़कियों को बनाया शिकार: NCW की रिपोर्ट से खुलासा, हिंदू लड़कियों से रेप को ‘सवाब’ मानता था भोपाल का ‘मुस्लिम गैंग’

भोपाल के कॉलेज में ‘मुस्लिम गैंग’ ने कई छात्राओं से रेप किया। उनका वीडियो बनाया। वायरल करने की धमकी दी। इस मामले की शिकायत के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने जाँच कमेटी बनाई। उनकी रिपोर्ट में धर्मांतरण और फंडिंग जैसी कई गंभीर बातें सामने आई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, NCW ने अपना जाँच रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सौंप दी है। इसमें बताया गया कि लड़कियों को महंगे तोहफे दिए जाते थे। लग्जरी गाड़ियों में घुमाया जाता था। फिर नशा देकर उनके साथ रेप किया गया।

NCW का कहना है कि ये पूरा मामला सिर्फ उत्पीड़न का नहीं बल्कि धर्मांतरण, ड्रग तस्करी और संगठित अपराध के नेटवर्क की फंडिंग से जुड़ा हुआ भी लगता है।

क्या है पूरा मामला

भोपाल में 11 अप्रैल 2025 को कुछ छात्राओं ने बागसेवनिया में पुलिस में शिकायत की कि उनके साथ मुस्लिम गैंग ने रेप कर वीडियो वायरल करने को लेकर ब्लैकमेल किया।

इसके बाद से आरोपितों की गिरफ्तारी शुरू की गई। इसमें फरहान, साद, साहिल, अली और नबी को जाँच के दौरान गिरप्तार किया गया। पुलिस जाँच के दौरान फरहान को स्पॉट वेरिफिकेशन के लिए ले जाया गया जहाँ उसने भागने और पुलिस वालों से रिवाल्वर छीनने की भी कोशिश की। इस दौरान SI की बंदूक से गोली चल गई और फरहान घायल हो गया।

फरहान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे हिन्दू लड़कियों का रेप करने, उन्हें फँसाने और वीडियो के बहाने धमकाने का कोई भी पछतावा नहीं है। इस्लाम के हिसाब से ये सब उसके लिए सवाब का काम है।

फरहान ने यह भी बताया है ‘मुस्लिम गैंग’ हिन्दू लड़कियों का जीवन बर्बाद करना चाहता था और इस काम को जिहाद मानता था, इसलिए हिंदू लड़कियों को ही निशाना बनाया जाता था। फरहान ने तो पुलिस से ये तक कहा कि हिन्दू लड़कियों को फँसा कर रेप करने का उसे गर्व है।

इसके बाद 3 मई 2025 को NCW ने पूरे मामले की जाँच शुरू की। 5 मई 2025 तक भोपाल दौरे पर रही टीम ने पीड़ितों और उनके घरवालों के साथ कॉलेज प्रशासन और पुलिस कर्मियों से भी बात की।

क्या है NCW की रिपोर्ट

महिला आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आरोपितों ने छात्राओं को महँगे गिफ्ट और लग्जरी गाड़ियों का लालच देकर उन्हें फँसाया। उनका रेप कर वीडियो वायरल करने की धमकी दकर अन्य लड़कियों कोभी इस कृत्या का मोहरा बनाया।

NCW ने रिपोर्ट में ये भी शामिल किया कि आरोपित सामान्य आर्थिक स्थिति से थे लेकिन उनके रहन- सहन, महँगी बाइक, गैजेट्स का इस्तेमाल को देख कर उनके ड्रग रैकेट या किसी तरह की आपराधिक गतिविधियों से जुड़े होने का भी अंदेशा जताया जा सकता है।

NCW ने राज्य सरकार को यह सुझाव दिया है कि इस पूरे मामले की गहन पड़ताल करवाई जाए। इसके तहत किसी तरह की फंडिंग, धर्मांतरण के दबाव और सरकारी संस्थानों द्वारा शिक्षा निधियों और सरकारी योजनाओं के दुरूपयोग के पहलुओं पर भी जाँच की जाए।

आयोग ने कहा है कि पीड़ित छात्राओं को न्याय मिले इसे पूरी तरह से सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही दोषियों को अधिकतम दंड देने तक NCW मामले से जुड़ा रहेगा। फिलहाल ये रिपोर्ट सीएम और राज्यपाल तक पहुँची है। अब इस पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी ये प्रशासन तय करेगा।

‘सोनिया-राहुल गाँधी ने बनाए ₹142 करोड़’: नेशनल हेराल्ड केस में ED ने कोर्ट को बताया, 2 जुलाई से मनी लॉन्ड्रिंग मामले की होगी रोजाना सुनवाई

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई बुधवार (21 मई 2025) को हुई। इस हाई-प्रोफाइल मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कॉन्ग्रेस नेताओं सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी ने कोर्ट को बताया कि आरोपितों ने अपराध की आय से 142 करोड़ रुपए का फायदा उठाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह राशि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए नेशनल हेराल्ड अखबार चलाने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) से प्राप्त किराये की आय से जुड़ी है। ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने कोर्ट में दावा किया कि यंग इंडियन के 76% मालिक सोनिया और राहुल गाँधी ने केवल 50 लाख रुपए का भुगतान करके 90.25 करोड़ रुपए की संपत्ति हासिल की।

ईडी ने जबतक संपत्तियाँ जब्त नहीं की, तब तक सोनिया-राहुल ने उठाया फायदा

ईडी ने कोर्ट में यह भी कहा कि गाँधी परिवार ने न सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग की, बल्कि अपराध की आय को अपने पास रखकर इस अपराध को और बढ़ाया। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट को बताया कि यंग इंडियन ने एजेएल के शेयरों का दुरुपयोग किया, जिसके जरिए भारी मुनाफा कमाया गया।

नवंबर 2023 में ईडी ने नेशनल हेराल्ड से जुड़ी 751.9 करोड़ रुपए की संपत्तियों को जब्त किया था, जिसके बाद यह मामला और सुर्खियों में आ गया। राजू ने कोर्ट में यह भी स्पष्ट किया कि आरोपितों ने तब तक इस आय का लाभ उठाया, जब तक ईडी ने कार्रवाई नहीं की।

साल 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी ने की थी शिकायत

यह मामला मूल रूप से 2012 में सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत से शुरू हुआ था। स्वामी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि गाँधी परिवार ने यंग इंडियन के जरिए एजेएल को धोखाधड़ी, आपराधिक दुरुपयोग और विश्वासघात के जरिए हासिल किया। 2010 में एजेएल में 1,057 शेयरधारक थे, लेकिन स्वामी का दावा है कि यंग इंडियन ने गलत तरीके से कंपनी पर नियंत्रण हासिल कर लिया।

ईडी ने इस मामले की जाँच 2014 में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शुरू की थी, जब एक ट्रायल कोर्ट ने स्वामी की निजी आपराधिक शिकायत के आधार पर आयकर जाँच में अनियमितताओं का संज्ञान लिया।

राहुल-सोनिया के वकील ने समय माँग कर मामले को आगे बढ़वाया

कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वरिष्ठ वकीलों अभिषेक मनु सिंघवी और आरएस चीमा ने दस्तावेजों की जाँच के लिए और समय माँगा। उन्होंने कहा कि उन्हें हाल ही में करीब 5,000 पन्नों के दस्तावेज मिले हैं और मई का महीना कोर्ट और वकीलों के लिए व्यस्त रहता है। इसलिए उन्होंने जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय माँगा। कोर्ट ने उनकी माँग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मामले को 2 जुलाई से 8 जुलाई तक रोजाना सुनवाई के लिए स्थगित कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला एमपी-एमएलए कोर्ट के दायरे में आता है, इसलिए नियमित सुनवाई जरूरी है।

सुब्रमण्यम स्वामी ने माँगी चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी

इसके अलावा कोर्ट ने सुब्रमण्यम स्वामी की उस याचिका को भी मंजूरी दे दी, जिसमें उन्होंने नेशनल हेराल्ड केस की चार्जशीट और अन्य दस्तावेजों की कॉपी माँगी थी। ईडी ने सुनवाई के दौरान यह दलील दी कि सरकारी मँजूरी की जरूरत नहीं है, क्योंकि चार्जशीट एक अधिकृत अधिकारी के जरिए दायर की गई है, जो ईडी में सहायक निदेशक के पद पर है। राजू ने एक सरकारी आदेश का हवाला देते हुए कहा कि सरकार किसी अधिकारी को धारा 45 के तहत शिकायत दायर करने के लिए अधिकृत कर सकती है।

रामपुर के कई युवाओं को पाकिस्तान में मिली आतंकी ट्रेनिंग, भेजता था शहजाद: सिरसा के जिस एयरबेस पर दागी मिसाइल, उसकी जानकारी तारीफ ने भेजी थी सीमा पार

पाकिस्तान के खिलाफ भारत के ऑपरेशन सिंदूर एयर स्ट्राइक के बाद से हरियाणा और पंजाब से अब तक 8 पाकिस्तानी जासूस पकड़े जा चुके हैं। इस कड़ी में उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से पकड़े गए जासूस शहजाद को लेकर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (ATS) ने बड़ा खुलासा किया है।

ATS के अनुसार, शहजाद भारत में एक बड़े आतंकी हमले की तैयारी में था। कई दिनों तक निगरानी रखने के बाद उसे पकड़ा गया।

शहजाद को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में 18 मई 2025 को गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शहजाद भारत-पाकिस्तान की सीमा पर अवैध रूप से कॉस्मेटिक, मसाले, कपड़े समेत अन्य चीजों के तस्करी करता था।

इसी दौरान वह ISI एजेंट के संपर्क में आया और पाकिस्तान के लिए काम करने लगा। शहजाद के साथ-साथ 17 मई 2025 को हरियाणा के नूँह से पकड़े गए मोहम्मद तारीफ का भी बयान सामने आया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक वायरल वीडियो में तारीफ ने इस बात को माना है कि पाकिस्तानी दूतावास में काम करने वाले आसिफ बालौच और जाफर से उसने भारतीय सिम कार्ड के जरिए बातचीत की और व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क में था ताकि सुरक्षा एजेंसी के सर्विलांस पर न आ सके।

तारीफ ने यह बात भी मानी है कि आसिफ बालौच और जाफर के कहने पर ही उसने पाकिस्तान को सिरसा एयरपोर्ट स्टेशन की जानकारी भेजी।

नूँह से ही राजाका गाँव से सुरक्षा जाँच एजेंसी टीम ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले अरमान को गिरफ्तार किया था। इसके बाद बावला गाँव से मोहम्मद तारीफ को गिरफ्तार किया गया। दोनों को पुलिस टीम ने सप्ताह भर की रिमांड पर लिया है। उनसे और जानकारियाँ जुटाई जा रही हैं।

लोगों का नेटवर्क तैयार कर रहे थे शहजाद और तारीफ

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का मानना है कि तारीफ और अरमान स्लीपर सेल की तरह काम करते थे और ISI का नेटवर्क बढ़ाने के लिए लोगों को तैयार करते थे। सुरक्षा एजेंसियाँ उस दुकान की भी खोज में हैं जहाँ से अरमान और तारीफ ने सिमकार्ड खरीदे थे।

एटीएस की मानें तो शहजाद रामपुर के कई युवाओं को पाकिस्तान भेज चुका था। वहाँ उन्हें जासूसी और हिंसक गतिविधियों की ट्रेनिंग दी गई। इन सभी का वीजा खुद शहजाद ने लगवाया जिसमें ISI एजेंट्स की उसे मदद मिली।

पुलिस को यह भी पता चला है कि शहजाद पाकिस्तान उच्चायोग में काम करने वाले अधिकारी एहसान उर रहीम उर्फ दानिश के संपर्क में था। दानिश का नाम पहले ही ISI एजेंट के तौर पर काम करने में सामने आ चुका है। उसके संपर्क में हरियाणा की ज्योति मल्होत्रा भी रही है जिसे गिरफ्तार किया गया है।

तस्करी के बहाने जासूसी की तैयारी

शहजाद कॉस्मेटिकेस, नकली आभूषण, महिलाओं के कपड़े जैसे तस्करी का काम करता था। इसमें उसने रामपुर के कुछ युवकों को भी शामिल किया और धीरे-धीरे सभी को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजने की पूरी तैयारी की।

पाकिस्तान जासूसी एजेंसियों ने सोशल मीडिया और इंक्रिप्टेड एप्लीकेशंस का भरपूर उपयोग किया। व्हाट्सएप के कॉल और इंक्रिप्टेड मैसेज के जरिए जासूसी करने से लेकर सोशल मीडिया को लोगों से जुड़ने का जरिया बनाया जिससे सुरक्षा एजेंसी के रडार पर न आ सकें। सुरक्षा एजेंसियाँ इस पर भी अपनी जाँच कर रही हैं।