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जम्मू के शंभू मंदिर के भीतर नहीं घुस पाई पाकिस्तानी मिसाइल, दरवाजे पर ही हुए टुकड़े: दिल्ली को दहलाने की कोशिश भी नाकाम, भारतीय सेना ने सिरसा में ही ‘फतेह-2’ को मार गिराया

शुक्रवार (9 मई 2025) की रात अचानक एक खबर फैली कि पाकिस्तान ने दिल्ली एयरपोर्ट की तरफ फतेह-2 नाम की एक बैलिस्टिक मिसाइल दागी है। इस खबर से लोगों में डर और गलत जानकारी फैलने लगी। इसकी पुष्टि दिल्ली एयरपोर्ट के अधिकारियों ने तुरंत की और इस खबर को गलत साथ ही गैर-जिम्मेदाराना बताया है।

उन्होंने लोगों से अपील की है, कि हमले से जुड़ी अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। इसके अलावा सही खबरों के लिए सिर्फ आधिकारिक सोर्स पर ही भरोसा करें। एयरपोर्ट पर उड़ानें सामान्य रूप से जारी रहीं और कामकाज में कोई रुकावट नहीं आई।

रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान ने जो मिसाइल दागी थी, वह दिल्ली तक पहुँची ही नहीं। उसे हरियाणा के सिरसा के ऊपर ही भारत के हवाई सुरक्षा सिस्टम से मार गिराया गया है। इससे किसी भी आम नागरिक या जरूरी जगह को कोई खतरा नहीं हुआ।

पाकिस्तान माहौल खराब करने के लिए ऐसी झूठी अफवाह फैला रहा है। भारतीय सेना ने यह भी बताया कि नियंत्रण रेखा (LoC) पर ड्रोन की गतिविधियाँ और गोलाबारी भी बढ़ गई है।

सेना के सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायुसेना के कई ठिकानों को भी निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन हर बार उनके हमले नाकाम कर दिए गए। कड़ी निगरानी और तैयारी की वजह से पंजाब और जम्मू में हमारे हवाई सुरक्षा सिस्टम ने दुश्मन के ड्रोन और दूसरे हवाई खतरों को मार गिराया।

जम्मू कश्मीर के आप शंभु मंदिर पर भी पाकिस्तान द्वारा हमले की खबर सामने आई है। ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने शंभु मंदिर के ठीक सामने गेट पर मिसाइल से हमले कर दिया। लेकिन फिलहाल किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं मिली है।

सोशल मीडिया पर भी एक वीडियो काफी वायरल हो रही है। शुकवार (9 मई 2025) को ही पाकिस्तान ने लगातार दूसरी रात जम्मू कश्मीर से लेकर गुजरात तक के 26 स्थानों पर ड्रोन से हमला किया। रक्षा मंत्रालय का दावा है कि हवाई अड्डों और वायुसेना ठिकानों किए गए हमलों को हवा में ही विफल कर दिया गया। इसकी वीडियो भी जारी हुई है। वीडियो में स्थान जम्मू कश्मीर बताया गया है और उधमपुर के डिब्बर इलाके से जोरदार धमाके के बाद धुआँ उठता दिखाई दे रहा है। इसके बाद हवाई सायरन बजाए गए।

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और जम्मू में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कुछ संवेदनशील इलाकों में रात के समय ब्लैकआउट के नियम लागू कर दिए गए हैं और निगरानी ड्रोन लगातार संदिग्ध इलाकों पर नजर रख रहे हैं।

हालाँकि, रक्षा अधिकारियों ने लोगों को विश्वाश दिलाया कि भारत के सभी हवाई ठिकाने सुरक्षित हैं और एयरपोर्ट समेत भीड़भाड़ वाले एरिया को किसी भी प्रकार का सीधा खतरा नहीं है।

जिन लॉन्चपैड से पाकिस्तान छोड़ रहा था ड्रोन और मिसाइल, भारत ने उन्हें ही उड़ाया: कम से कम 4 एयरबेस पर हमला; घबराए PM शहबाज शरीफ ने ‘परमाणु’ कमेटी संग की बैठक

भारतीय सेना की ओर से शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की लगातार कार्रवाई और हर रोज अपनी हार से पाकिस्तान बौखला गया है। शुक्रवार (9 मई 2025) की रात आतंकी मुल्क ने भारत के राजस्थान, गुजरात, पंजाब, जम्मू और कश्मीर के 26 शहरों पर ड्रोन से हमले किए। इसके जवाब में सेना ने न केवल ड्रोन्स मार गिराए बल्कि पाकिस्तान के ड्रोन और और आतंकी लॉन्च पैड भी ध्वस्त कर दिए। डिफेंस सोर्सेज ने इसका वीडियो भी जारी किया गया है।

इससे पहले 9 मई 2025 को भारतीय सेना ने अपनी जवाबी कार्रवाई में ड्रोन से हमला किया था। इसकी जद में पाक पीएम शहबाज शरीफ का लाहौर स्थित घर भी आया था। हालाँकि शरीफ उस समय इस्लामाबाद में थे।

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमलों की जवाबी कार्रवाई में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। 7 मई 2025 की तड़के शुरू हुए इस मिशन में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके के 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान का लाहौर एयरबेस उड़ा दिया गया।

अपने ऊपर हुए एक्शन से आतंकी मुल्क तिलमिला गया। इसके बाद पाकिस्तान की और से जम्मू कश्मीर, पंजाब और गुजरात के कई शहरों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए। हालाँकि भारतीय सेना ने पूरी तैयारी कर रखी है। पाक के अब तक के सभी हमलों का अपने युद्ध कौशल और नई तकनीक से लैस भारतीय सेना ने बेहतर जवाब दिया है और कवच बन सीमा पर तैनात है।

शुक्रवार को भी एक बार फिर पाक ने भारतीय शहरों को निशाने पर लिया तो भारत ने अपना कड़ा रुख दिखला दिया। पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस, मुरीदके और शोरकोट में पाक वायुसेना के ठिकानों पर सेना ने हमला कर तबाह कर दिया है।

पाकिस्तान ने बंद किये पेट्रोल स्टेशन

भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तान डर और सकते में है। इसी के चलते इस्लामाबाद के सभी पेट्रोल स्टेशनों को अगले 48 घंटों तक बंद कर दिया गया। पाक ने ये फरमान शनिवार की अलसुबह 6 बजे ही जारी कर दिया।

इस्लामाबाद की ओर से जारी आदेश का स्क्रीनशॉट

पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने ये स्वीकार किया कि भारत ने उनके तीन वायुसेना ठिकानों को निशाना बनाया है। हालाँकि उन्होंने ये भी जोड़ा कि हमलों में पाकिस्तान की वायुसेना को कोई नुकसान नहीं हुआ और पाकिस्तान ने भी भारत के एस एक्शन का जवाब दिया है।

इसके बाद पाकिस्तान की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने 10 मई 2025 की सुबह 3:15 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक सभी उड़ानों को बंद करने की घोषणा कर दी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की लगातार जवाबी सैन्य कार्रवाई से पाकिस्तान की सरकार में काफी उथल पुथल मची हुई है। पाक पीएम शहबाज शरीफ ने अब परमाणु हथियार चलाने वाले कमांड की बैठक भी बुलाई है।

मंदिरों पर हमले, खालिस्तानी दे रहे हिन्दुओं को कनाडा छोड़ने की धमकी: ट्रूडो के हटने के बाद भी नहीं पड़ा कोई फर्क, कार्नी के शासन में भी जारी है हिन्दू घृणा

कनाडा के टोरंटो में रविवार (4 मई, 2025) को खालिस्तान समर्थकों ने एक हिंदू विरोधी परेड का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने खुलेआम कनाडा में रह रहे करीब 8 लाख हिंदुओं को देश से बाहर निकालने का आह्वान किया। यह परेड माल्टन गुरुद्वारे के बाहर आयोजित की गई थी और इसकी तीव्र आलोचना हुई। खालिस्तानियों ने यह ऐसे समय में किया है जब हाल ही में कनाडा में सत्ता परिवर्तन हुआ है और मार्क कार्नी को नया प्रधानमंत्री चुना गया है।

लिबरल पार्टी के भीतर जारी अंदरूनी कलह और जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व पर जनता के घटते भरोसे के चलते मार्क कार्नी ने लिबरल पार्टी के नेता के रूप में ट्रूडो की जगह ली थी। हालाँकि, शुरुआती संकेतों से ऐसा लग रहा है कि कार्नी सरकार भी ट्रूडो की तरह ही खालिस्तानियों पर नरम रहेंगे। इसमें कोई बदलाव की संभावना नहीं है।

खालिस्तानी परेड के दौरान पिंजरे में बंद दिखे थे भारतीय नेता

टोरंटो में आयोजित हिंदू विरोधी परेड के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस जयशंकर के पुतलों को हथकड़ियों और पिंजरे में बंद करके प्रदर्शित किया गया था। इनको देख के लगा कि खालिस्तान समर्थक भारतीय नेताओं का मखौल उड़ाना चाहते थे।

यह घटना जून 2023 में खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की सरे, कनाडा में हत्या के बाद बढ़ती भारत विरोधी भावनाओं की एक कड़ी के रूप में देखी जा रही है। निज्जर की हत्या के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इसके लिए भारतीय एजेंटों को जिम्मेदार ठहराया था। हालाँकि, कनाडा इस पर कोई भी सबूत नहीं दे पाया है।

इस परेड में शामिल लोगों ने पंजाब को भारत से अलग कर सिखों के लिए खालिस्तान की माँग करते हुए नारे लगाए। हालाँकि इस तरह की रैलियाँ कनाडा में पहले भी होती रही हैं, लेकिन लिबरल पार्टी के नए नेता मार्क कार्नी के हाल ही में पदभार संभालने के ठीक बाद इस परेड का आयोजन गुस्से का कारण बना है।

इसने इस सवाल को भी जन्म दिया है कि क्या कार्नी भी ट्रूडो की तरह खालिस्तानी तत्वों के प्रति तुष्टिकरण की नीति अपनाएंगे या फिर कनाडा में खाद पानी पाने वाले खालिस्तानियों पर कोई कार्रवाई करेंगे।

इससे पहले एक खालसा परेड के दौरान खालिस्तानी आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा के कार्यकर्ता और अमृतपाल सिंह के मिलिशिया समूह आनंदपुर खालसा फोर्स (AKF) के सदस्य भी नजर आए। इस परेड में फ्लाइट AI-112 पर बम विस्फोट की साजिश में दोषी ठहराए गए बब्बर खालसा से जुड़े आतंकवादी संतोख सिंह खालसा को भी भाषण देते हुए देखा गया।

पत्रकारों और नागरिकों ने कार्नी की चुप्पी पर उठाए सवाल

परेड के वीडियो कनाडाई पत्रकार डैनियल बोर्डमैन ने साझा किए। उन्होंने इसे ‘हिंदू विरोधी घृणा’ का एक स्पष्ट उदाहरण बताया। एक्स (पहले ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा, “हमारी सड़कों पर उत्पात मचाने वाले जिहादी पहले ही सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा चुके हैं,और अब खालिस्तानी समाज उनके मुकाबले एक विदेशी-वित्तपोषित, वैसे ही खतरे के रूप में उभर रहा है। क्या मार्क कार्नी का कनाडा, जस्टिन ट्रूडो के कनाडा से अलग होगा?”

बोर्डमैन की यह टिप्पणी शॉन बिंदा की एक पोस्ट के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने बताया कि टोरंटो के माल्टन गुरुद्वारे में खालिस्तानी गिरोह खुलेआम 8 लाख हिंदुओं को कनाडा से निर्वासित करने की माँग कर रहे हैं। शॉन ने लिखा, “यह भारत सरकार के खिलाफ कोई विरोध नहीं है, बल्कि खालिस्तानी आतंकवादी समूह की हिंदू विरोधी घृणा है, वही समूह जो कनाडा के सबसे घातक आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार रहा है, फिर भी यहाँ अहंकार से रहने के अधिकार का दावा कर रहा है।”

बिंदा द्वारा शेयर किए गए वीडियो में एक व्यक्ति कहते हुए सुनाई दे रहा है, “भारत कहता है कि कनाडा में उसके लिए कुछ नहीं बचा है। यह यहाँ रह रहे 8 लाख भारतीयों के लिए संदेश है, उन्हें वापस हिंदुस्तान ले जाओ।”

भारत नहीं हिन्दुओं के खिलाफ हैं खालिस्तानी

यह साफ़ है कि टोरंटो में आयोजित हालिया परेड भारत सरकार के खिलाफ कोई सामान्य राजनीतिक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह विशेष रूप से हिंदुओं को निशाना बनाकर किया गया आयोजन था। कनाडा में सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने यह दिखा दिया है कि नई सरकार आने के बाद भी उनकी भारत और हिंदू समुदाय के खिलाफ ज़हर फैलाने की गतिविधियाँ नहीं रुकी हैं।

भले ही कनाडा में राजनीतिक चैप्टर बदल गया हो, लेकिन उसकी नीति वैसी ही है। खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान का समर्थन करते हुए भारत के खिलाफ बयानबाज़ी की। थी इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे, द रेजिस्टेंस फ्रंट ने 26 निर्दोष हिंदुओं की हत्या कर दी थी।

भारत ने इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई एक्शन लिए थे। इसके बाद पन्नू ने एक पाकिस्तानी चैनल पर कहा था कि यदि पाकिस्तान खुलकर खालिस्तान का समर्थन करता है, तो पंजाब के सिख भारतीय सेना को पंजाब से पाकिस्तान पर हमला नहीं करने देंगे।

कनाडा में खालिस्तानी तत्वों ने हाल के वर्षों में विभिन्न शहरों में कई हिंदू मंदिरों पर हमले किए हैं। वे मंदिरों की दीवारों पर भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारे भी लिखते हैं। नवंबर 2024 में ब्रैम्पटन में एक हिंदू मंदिर पर खालिस्तानी गुंडों द्वारा हमला किया गया था, इसके चलते ट्रूडो सरकार की काफी फजीहत हुई थी।

इन घटनाओं के कारण भारत सरकार के लिए आवश्यक हो गया है कि वह कनाडा सरकार पर दबाव बनाए, ताकि वह अपनी जमीन पर सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे। ट्रूडो सरकार भारत के बार-बार किए जा रहे अनुरोधों के बावजूद इस मोर्चे पर विफल रही थी, इसका पीछे वोटबैंक की राजनीति रही थी।

अब जब कनाडा में नेतृत्व बदल गया है तो भारत मार्क कार्नी से अपेक्षा कर सकता है कि वह इस प्रकार की भारत विरोधी और हिंदू विरोधी घृणा के विरुद्ध सख्त कदम उठाएँ। हालाँकि, हाल ही में हुई परेड और उसमें शामिल गतिविधियों ने इस पर प्रश्न उठाए हैं कि क्या कार्नी सरकार वाकई इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई करेगी।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अनुराग ने अंग्रेजी में लिखी है इसको पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

क्या भारत के एयर डिफेंस पावर की थाह ले रहा था पाकिस्तान? हमास स्टाइल में ड्रोन-मिसाइल अटैक का मकसद बेहद शातिराना

ऑपरेशन सिंदूर से बौखलाए पाकिस्तान ने गुरुवार (8 मई 2025) को जम्मू-कश्मीर, पंजाब और राजस्थान में हमास की स्टाइल में हमले किए। पाकिस्तानियों ने ड्रोन उड़ाए, मिसाइलें दागीं, तोपें गरजाईं। मगर भारत की फौज ने आँखें तरेरते हुए सारे हमले नाकाम कर दिए। हालाँकि विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से 400-500 एयर अटैक सिर्फ हमले के लिए नहीं थे, बल्कि पाकिस्तान की ये चाल थी भारत की एयर डिफेंस को चेक करने की। यानी भारत का डिफेंस सिस्टम कितना और कहाँ प्रभावी है और कहाँ कमजोर।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की प्लानिंग ये देखने की थी कि पश्चिम की पूरी सीमा पर भारत किस तरह से मुस्तैद है। ये सब 7 मई 2025 को भारत के जबरदस्त ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुआ। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान और पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था। वो कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हिंदुओं के नरसंहार के जवाब में की गई थी।

ऑपरेशन सिंदूर से तिलमिलाए पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के पुंछ में गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें 16 लोग मरे। फिर उसने भारत के 15 फौजी ठिकानों पर हमले की कोशिश की, लेकिन सारी कोशिशें धरी रह गईं। उल्टा, लाहौर में उनका एक डिफेंस सिस्टम ही खराब हो गया।

पाकिस्तान ने क्या चक्कर चलाया?

रक्षा सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान की ओर से गुरुवार (8 मई 2025) के हमले भारत की ताकत को टटोलने की चाल थी। पाकिस्तान ने 40 से ज्यादा जगहों पर हमले किए, लेकिन उनके ड्रोन और मिसाइलों में या तो बारूद था ही नहीं, या बहुत कमजोर था। एक सूत्र ने कहा, “दुश्मन ऐसा करके देखता है कि उसका ड्रोन कहाँ बिना पकड़े घुस जाता है। अगर ड्रोन वापस आ जाए, तो उन्हें लगता है कि वहाँ हमारा डिफेंस कमजोर है। अगर पकड़ा जाए, तो समझ जाते हैं कि हमारा सिस्टम टाइट है।”

बहरहाल, पाकिस्तान के हमलों के बाद भारत ने कोई मौका नहीं छोड़ा। हमारे ड्रोन सियालकोट, लाहौर और कराची जैसे बड़े ठिकानों पर मंडराए। डिफेंस सिस्टम चालू किए गए और नियंत्रण रेखा पर जमकर जवाबी फायरिंग हुई।

पाकिस्तान और हमास की दोस्ती

भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच एक तरफ ध्यान देना जरूरी हो जाता है, वो इस साल हमास के कुछ लोग पाकिस्तान और पीओके पहुँचे थे। उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद के बहावलपुर वाले अड्डे और पाकिस्तानी फौज के एक वॉर ट्रेनिंग सेंटर को देखा। ये सेंटर बहावलपुर कोर के नीचे है, जो राजस्थान की सीमा के पास पाकिस्तान का तेज हमला करने वाला दस्ता है।

यही वहीं, फरवरी में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के बड़े आतंकी रावलाकोट, पीओके में ‘कश्मीर सॉलिडेटरी डे’ के मौके पर जमा हुए थे। वहाँ हमास के एक नेता खालिद काद्दौमी ने ‘अल अक्सा फ्लड’ के नाम से भाषण भी दिया था। भारतीय एजेंसियों को शक है कि ये कश्मीर और फिलिस्तीन के मुद्दों को मिलाकर ‘कब्जे के खिलाफ जंग’ का नया ड्रामा रचने की कोशिश थी।

फौजी भाषा में पाकिस्तान की इस चाल को क्या बोलते हैं?

फौजी भाषा में टटोलना यानी ऐसा खेल, जिसमें दुश्मन की डिफेंस को चेक करने के लिए छोटे-मोटे हमले किए जाते हैं। मकसद जमीन जीतना नहीं, बल्कि उसकी ताकत-कमजोरी भाँपना होता है। इस बार पाकिस्तान शायद भारत के रडार की रेंज और जवाब देने की स्पीड को समझना चाहता था।

भले ही इन हमलों से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन मामला गंभीर है। अगर ये टटोलने की चाल थी, तो पाकिस्तान किसी बड़े हमले की प्लानिंग कर सकता है। भारत को हर वक्त चौकस रहना पड़ेगा।

36 जगह, 400 ड्रोन… तुर्की का ‘माल’ लेकर भारत से लड़ने आया था भिखमंगा पाकिस्तान, सारे हुए फुस्स: राडार स्टेशन उड़ाकर सेना ने दिया जवाब, प्रेस कॉन्फ्रेंस में वीरांगनाओं ने बताया सब कुछ

पाकिस्तान ने 8-9 मई, 2025 की रात को भारत के कई शहरों पर हमला किया था। इसके लिए पाकिस्तान ने तुर्की के ड्रोन इस्तेमाल किए थे। पाकिस्तान के यह ड्रोन भारतीय सेनाओं ने नाकाम कर दिए। भारत ने भी जवाब में पाकिस्तान में 4 जगह हमला किया है। भारत ने पाकिस्तान में राडार भी उड़ा दिया है। यह सभी जानकारी विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी हैं।

शुक्रवार (9 मई, 2025) को विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया है कि पाकिस्तान ने 8-9 मई की रात को भारत के भीतर 300-400 जगह पर ड्रोन के माध्यम से घुसपैठ किया। भारत ने बताया है कि इसका उद्देश्य खुफिया जानकारी इकट्ठा करना और भारतीय सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुँचाना था।

कर्नल सोफिया कुरैशी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि ड्रोन के मलबे की जाँच की गई है। उन्होंने बताया कि यह तुर्की में बने हुए असीसगार्ड सोंगर ड्रोन हैं। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर से लेकर गुजरात में सर क्रीक तक हमला किया है। उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने भटिंडा के सैन्य अड्डे को भी निशाना बनाया है।

कर्नल कुरैशी ने बताया है कि इन हमलों के जवाब में भारत ने भी पाकिस्तान के 4 एयर डिफेन्स सिस्टम पर हमले किए हैं। उन्होंने बताया कि इन 4 में से 1 जगह पर किया गया ड्रोन हमला सफल रहा है और पाकिस्तान के एक राडार को तबाह कर दिया है। पूरी प्रेस कॉन्फ्रेंस को आप नीचे लगे लिंक में देख सकते हैं।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान की हरकतें इस इलाके के हवाई क्षेत्र में खतरा पैदा कर रही हैं। भारत ने इसमें एक फ्लाईट का उदाहरण भी दिया है। भारत ने साफ़ कर दिया है कि पाकिस्तान ने जानबूझ कर भारत पर हवाई हमले किए हैं जिसके जवाब मिल सकते हैं।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कर दिया गया है कि पाकिस्तान की हरकत का स्पष्ट जवाब दिया जाएगा। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया है कि पाकिस्तान के हमले में जम्मू कश्मीर में एक गुरुद्वारे के ग्रंथी की मौत हो गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान लगातार हमलों को लेकर भ्रामक सूचनाएँ फैला रहा है, जिसका भारत लगातार जवाब दे रहा है।

दिल्ली में AAP के साफ होते ही ‘पवित्र’ होने लगी यमुना, कहीं कूड़ा निकाल रहीं मशीनें-कहीं सिल्ट हटा रही JCB: मिशन मोड में काम करवा रही BJP सरकार

8 फरवरी, 2025 को दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। इन नतीजों में आम आदमी पार्टी (AAP) की करारी हार हुई। भाजपा इसी के साथ 26 वर्षों बाद सत्ता में लौटी। जब दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री आतिशी अपना इस्तीफा देने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को देने पहुँची तो उन्होंने कहा, “आपको यमुना मैया का श्राप लगा है।”

भाजपा ने दिल्ली चुनाव में यमुना की सफाई को बड़ा मुद्दा बनाया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर सभी नेताओं ने AAP की इस विफलता को हर रैली में गिनाया था। सरकार में आने के बाद भाजपा ने स्पष्ट कर दिया था कि वह यमुना सफाई को अपनी प्राथमिकता बनाएगी।

दिल्ली में सत्ता परिवर्तन को लगभग 3 महीने हो चुके हैं। इन 90 दिनों में यमुना की सफाई को लेकर कितना काम हुआ है, इसको जाँचने के लिए ऑपइंडिया ने दिल्ली में यमुना के घाटों और उन जगहों पर पहुँचे जहाँ पहले इसकी हालत बेहद खराब थी। ऑपइंडिया ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि आखिर दिल्ली सरकार यमुना सफाई पर क्या एक्शन ले रही है।

कालिंदी कुंज में मशीने-कर्मचारी सफाई में जुटे

ऑपइंडिया ने इस दौरान उन लोगों से बातचीत भी की जो सालों से यमुना के घाटों पर या तो रह रहे हैं या इससे जुड़े हुए हैं। ऑपइंडिया गुरूवार (8 मई, 2025) दोपहर को यमुना नदी के कालिंदी कुंज स्थित घाट पर पहुँचा। यहाँ यमुना दूर से काफी हद तक पहले की अपेक्षा साफ दिखाई दे रही थी।

यहाँ दूर से दिखने वाला यमुना का पानी घाट किनारे जाने पर थोड़ा गंदा दिखाई दे रहा था और कालिंदी कुंज के पुल से पहले लगे फाटक में कचरा दिखाई दे रहा। लेकिन यहीं आगे बढ़ने पर दिखा कि यमुना से कचरा बाहर निकालने के लिए एक मशीन घाट किनारे खड़ी थी।

कालिंदी कुंज घाट पर यमुना से कूड़ा निकलने के लिए मशीन लगी हुई है

यहाँ पर इस मशीन पर काम करने वाले लोग जी मौजूद थे। ऑपइंडिया से उन्होंने बताया कि कई महीनों से यमुना की सफाई में जुटे हुए हैं। यहीं मौजूद एक और कर्मचारी ने बताया कि दिल्ली में नई सरकार आने के बाद से यमुना सफाई में तेजी आई है। उसने बताया कि समय-समय पर अब अधिकारी भी उसे दिशानिर्देश देते रहते हैं।

यहाँ पर यमुना किनारे बने पक्के व सुंदर से दिखने वाले घाट पर चारों और साफ-सफाई के साथ हरियाली भी दिखाई दी।

यमुना में भाजपा सरकार के बाद बढ़ा पानी

ऑपइंडिया कालिंदी कुंज घाट के बाद ITO स्थित यमुना घाट पर भी पहुँचा। यहाँ पर एक छोर पर बड़ी JCB घाट बनाने में जुटी थी जबकि दूसरे छोर पर एक मशीन यमुना से कचरा निकालने में लगी हुई थी। यहाँ भी यमुना सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा था। लगातार यहाँ JCB की मदद से गाद (सिल्ट) निकाली जा रहा है व कचरा निकालकर पानी को साफ किया जा रहा है।

यहाँ भी पहले की अपेक्षा यमुना काफी साफ दिखाई दे रही थी। घाट पर सालों से मौजूद सुनील गिरी ने बताया कि दिल्ली में भाजपा सरकार बनने के बाद यमुना में पानी बढ़ा है जो कि पहले कम रहता था। उन्होंने बताया कि पहले कई बार यमुना सूखी भी रहती थी।

ITO घाट पर यमुना से गाद निकाल रही है

सुनील गिरी ने बताया कि इस घाट पर अब यहाँ छठ घाट पर नियमित रूप से यमुना जी की आरती होती है, उन्होंने बताया कि इसमें बड़ी संख्या में भक्त एकत्र होते हैं। घाट पर मौजूद गोताखोर जुम्मन ने बताया कि दिल्ली सरकार वर्तमान में यमुना सफाई पर काफी पैसा खर्च करवा रही है।

उन्होंने सलाह दी कि यहाँ मौजूद सभी 32 डैम की सफाई कराए और फिर उनको नीचे करके पानी छोड़ा जाए तो इस पूरी कवायद का असर दिखाई पड़ेगा। घाट पर मौजूद सेवादार राजू ठाकुर ने बताया कि लोग पूरी श्रद्धा के साथ यमुना में नहाने के मन से आते हैं लेकिन गंदा पानी देखकर दूर से ही हाथ जोड़कर लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन अब सफाई का प्रयास सराहनीय है।

इसी तरह यमुना के और घाटों पर भी लगातार सफाई चल रही है। कई जगह पर कूड़ा निकाला जा रहा तो कहीं जमी हुई गाद हट रही है। यमुना का वैभव लौटाने के लिए घाट भी सुधारे जा रहे हैं। उन नालों को भी बंद किया जा रहा है, जो लगातार यमुना में गंदगी लाते हैं।

दिल्ली में ही सबसे अधिक गंदी होती है यमुना

यमुना नदी उत्तराखंड से हरियाणा होते हुए दिल्ली आती है। यह प्रयागराज में जाकर गंगा से मिलती है। इसकी कुल लम्बाई 1376 किलोमीटर है। राजधानी दिल्ली में यह 54 किलोमीटर बहती है। लेकिन यह सबसे अधिक गंदी दिल्ली में होती है। यह बात राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने एक रिपोर्ट में कहा था। राजधानी दिल्ली में यह 54 किलोमीटर बहती है।

NGT के अनुसार, “वजीराबाद और ओखला के बीच का हिस्सा 22 किलोमीटर का है, जो यमुनोत्री से इलाहाबाद तक नदी की कुल लंबाई 1370 किलोमीटर का 2% भी नहीं है। लेकिन इसका हिस्सा नदी के प्रदूषण में लगभग 76% है।”

नजफगढ़ नाले में होती सफाई (फोटो साभार: @ayush9050/X)

NGT ने बताया था कि मानसून के सीजन के अतिरिक्त 9 महीने दिल्ली में वजीराबाद में यमुना में सीवेज ही बहता है। रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ 22 नाले यमुना में आकर मिलते हैं, यही दिल्ली को सर्वाधिक गंदा करते हैं। NGT ने इन पर काम करने की बात कही थी।

दिल्ली सरकार ने मंजूर किए ₹3100 करोड़

दिल्ली में रेखा गुप्ता की सरकार ने हाल ही में एक्सपेंडिचर फाइनेंस कमिटी की एक अहम बैठक सचिवालय में बुलाई थी। इस बैठक में दिल्ली के विकास के लिए कई अहम परियोजनाओं के बारे में चर्चा की गई थी। इसमें यमुना की सफाई के लिए ₹3140 करोड़ की मंजूरी यमुना नदी की सफाई के लिए दी गई थी।

यमुना आरती करतीं दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता

दिल्ली सरकार ने बताया था कि इस खर्च से 27 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जाएगा। इससे पहले बजट 2025-26 में यमुना सफाई के लिए ₹500 करोड़ दिए गए थे। इसके अलावा जो योजनाएँ पहले यमुना की सफाई के लिए बनाई गई थीं, उन्हें भी अब अमलीजामा पहनाए जाने के लिए मेहनत हो रही है।

सिर्फ दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र की मोदी सरकार भी लगातार यमुना सफाई को लेकर गंभीर है। अप्रैल, 2025 में ही पीएम मोदी ने यमुना की सफाई को लेकर एक बैठक की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि जनता को यमुना की सफाई में हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने छठ को लेकर भी बात की थी।

आज भारतीय सेना के शौर्य की प्रतीक बनीं सोफिया कुरैशी-व्योमिका सिंह, 1971 में सहमत ने लिखी थी देशभक्ति की पटकथा: पाकिस्तानी ब्रिगेडियर की बहू बन पाकिस्तान की लगा दी लंका

पहलगाम नरसंहार के बाद भारत द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत की बेटियाँ चर्चा में हैं। कारण – इतने बड़े ऑपेरशन के बारे में देश-दुनिया को जानकारी देने के लिए जो 2 महिलाएँ सामने आईं, वो साधारण नहीं थीं। कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह – इन्होंने प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के हर प्रपंच को ध्वस्त किया। लेकिन, क्या आपको पता है इनसे पहले भी एक ‘भारत की बेटी’ थी जो भले ही इतिहास में गुमनाम रह गई लेकिन उसका योगदान ऐसा था जो आज बह प्रेरित करती है।

भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में 1971 का वर्ष एक निर्णायक मोड़ था। इसी दौरान भारत की एक बहादुर बेटी ने न केवल देश को न केवल अपने सीने से लगाया, बल्कि अपने जीवन, प्रेम और सपनों की कुर्बानी देकर मातृभूमि को सर्वोपरि रखा। यह कहानी है सहमत नाम की एक कश्मीरी लड़की की, जो पाकिस्तान में एक सैन्य अधिकारी की पत्नी बनकर गई, लेकिन असल में वह एक जासूस थी। भारत को जासूस, जिसने अपने देश के लिए ख़तरा मोल लिया।

सहमत का परिचय: एक आम लड़की, असाधारण संकल्प

सहमत एक शिक्षित, समझदार और संवेदनशील लड़की थी, जो श्रीनगर में एक राजनीतिक और सामाजिक रूप से सक्रिय मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती थी। उसके पिता हिंदुस्तान से बेहद प्रेम करते थे। वे भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े हुए थे और सीमा पार पाकिस्तान में भी उनके कई संपर्क थे।

जब उन्हें पता चला कि वे कैंसर से ग्रसित हैं और अब जीवन के दिन गिने-चुने हैं, तो उन्होंने देश की सेवा का बीड़ा अपनी बेटी को सौंपा। यह कोई साधारण ज़िम्मेदारी नहीं थी बल्कि एक आत्मघाती मिशन जैसा था।

शादी, जो सिर्फ़ एक ‘कवर स्टोरी’ थी

सहमत की शादी एक पाकिस्तानी ब्रिगेडियर के बेटे से कर दी गई। वह ब्रिगेडियर पाकिस्तान की सेना में एक अहम पद पर था, जिससे देश की खुफिया जानकारियाँ निकल सकती थीं। यह शादी असल में एक रणनीतिक चाल थी, जिससे वह पाकिस्तान की सेना के घर के भीतर रहकर सूचनाएँ जुटा सके।

इससे पहले भारत में सहमत को ‘रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’ (R&AW) द्वारा गुप्त प्रशिक्षण दिया गया। इसमें गुप्तचरी, रेडियो संचार, छिपे तरीके से संदेश भेजना और मानसिक मजबूती की कड़ी ट्रेनिंग शामिल थी।

पाकिस्तान में जीवन: हर पल डर और कर्तव्य का संघर्ष

पाकिस्तान में सहमत को हर पल अपने अस्तित्व को छिपाना पड़ता था। एक जवान महिला, अनजाने देश में, जहाँ हर गलती मौत को न्योता दे सकती थी। फिर भी, उसने अपने देश के लिए हर जोखिम उठाया। उसे ब्रिगेडियर के दस्तावेज़ों, बैठकों, और बातचीत से भारतीय नौसेना पर होने वाले हमले की जानकारी मिली।

वह जानकारी भारत भेजी गई और इस आधार पर भारतीय नौसेना ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ और ‘ऑपरेशन पाइथन’ जैसी सफल कार्रवाइयाँ कीं, जिनसे कराची बंदरगाह को भारी नुकसान पहुँचा। इसमें सहमत की भूमिका निर्णायक थी। यह वही जंग थी, जिससे बांग्लादेश का जन्म हुआ। सहमत के लिए ये ऑपरेशन आसान नहीं था। उन्हें पाकिस्तान में हत्या तक करवानी पड़ी, एक शख्स को ट्रक से भी कुचलवाना पड़ा।

प्रेम जो अधूरा रह गया, एक बलिदान जो अमर हो गया

पाकिस्तानी पति ने सहमत से सच्चा प्रेम किया, लेकिन सहमत के लिए प्रेम से ऊपर उसका देश था। जब उसका मिशन लगभग उजागर होने लगा, तब उसे भारत लौटना पड़ा।

वह अपने पति को, उस जीवन को – सब कुछ पीछे छोड़ आई। इस दौरान वह गर्भवती भी थी। कुछ स्रोतों के अनुसार, उसने अपने बच्चे को भारत में जन्म दिया और अकेले उसका पालन-पोषण किया।

भारत लौटने के बाद: गुमनामी की ज़िंदगी

सहमत ने अपने देश लौटने के बाद कभी प्रचार नहीं चाहा। न पुरस्कार, न सम्मान, सिर्फ शांति और अपने अंदर सहेजे गए दर्द के साथ गुमनाम जीवन। लेखक हरींदर सिक्का, जो पहले भारतीय नौसेना में अधिकारी थे, उन्होंने जब उनकी कहानी सुनी, तो वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर ‘Calling Sehmat’ नामक उपन्यास लिखा।

बाद में इसी उपन्यास पर बनी फिल्म ‘राज़ी’ (2018) ने सहमत की कहानी को करोड़ों दिलों तक पहुँचाया। फिल्म में आलिया भट्ट ने सहमत का किरदार निभाया और इस वीर महिला की भूमिका को जीवंत कर दिया।

सहमत का संदेश: देश सबसे ऊपर

सहमत की कहानी केवल एक जासूसी मिशन नहीं है, यह उस नारी शक्ति का प्रतीक है जो चुपचाप देश की रक्षा के लिए अपने सारे सपनों को कुर्बान कर देती है। एक बेटी, जो दुश्मन की ज़मीन पर जाकर अपनी मातृभूमि की रक्षा करती है। देशभक्ति के इस तरह के उदाहरण बहुत कम मिलते हैं।

आज भी भारतीय खुफिया एजेंसी में सहमत की कहानी एक मिसाल की तरह देखी जाती है। भले ही सरकार ने कभी आधिकारिक रूप से इसे स्वीकार नहीं किया, लेकिन वे सभी जो इस मिशन से जुड़े थे, जानते हैं कि एक लड़की ने अकेले दुश्मन देश में ऐसा कार्य किया जिसे करने के लिए फौजों को बरसों की तैयारी करनी पड़ती है। सहमत ने न केवल अपने कर्तव्यों का निर्वहन पाकिस्तान की धरती पर रहते हुए किया, बल्कि उसने अपने बेटे को भी वही संस्कार दिए, जो उसे अपने पिता से विरासत में मिले थे – देश के लिए जीना और मर मिटना।

यही कारण है कि उनके बाद उनके बेटे में भी वही देशभक्ति की भवन थी, जिसके बाद वो भी आगे चलकर भारतीय सेना में अधिकारी बना, और यह इस बात का प्रतीक है कि देशभक्ति उसके रक्त में रची-बसी थी। जैसे माँ ने परदे के पीछे रहकर राष्ट्र की रक्षा की, वैसे ही उसका बेटा वर्दी पहनकर सीमाओं की रक्षा करता रहा। यह सिलसिला एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक देश के प्रति समर्पण की विरासत बन गया। एक ऐसी अमर गाथा, जहाँ माँ ने छाया बनकर राष्ट्र की सेवा की और बेटे ने सशरीर भारत माँ की गोद की रक्षा की।

रोहिंग्या घुसपैठियों को नहीं बचा पाया प्रशांत भूषण, सुप्रीम कोर्ट ने निर्वासन में दखल देने से किया इनकार: कहा- ये दूसरे देश के, इन पर विदेशी अधिनियम के तहत हो एक्शन

सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों के डिपोर्टेशन और उनकी रहने की स्थिति से जुड़े मामलों में गुरुवार (8 मई 2025) को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर कोई रोक नहीं लगाई और मामले को 31 जुलाई, 2025 को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। सुनवाई के दौरान कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आरोप लगाया कि सुनवाई से ठीक एक रात पहले कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों (महिलाएँ और बच्चे भी शामिल) को पुलिस ने हिरासत में लिया और संभवतः म्यांमार डिपोर्ट कर दिया गया। ये शरणार्थी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR) के कार्डधारक थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह शामिल थे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 8 अप्रैल, 2021 के एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि डिपोर्टेशन केवल कानून के अनुसार होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस और प्रशांत भूषण ने दावा किया कि रात में शरणार्थियों को हिरासत में लिया गया और यह कोर्ट की अवमानना है। गोंसाल्वेस ने कहा कि यह घटना ‘चौंकाने वाली’ है और पिछले 10 साल से कोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों को संरक्षण दिया था।

प्रशांत भूषण ने बताया कि मणिपुर सरकार ने हाल ही में एक हलफनामा दायर कर कहा कि म्यांमार रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस स्वीकार नहीं कर रहा, क्योंकि उन्हें वहाँ ‘राज्यविहीन नागरिक’ माना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि UNHCR संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है, जो भारत में दो दशक से काम कर रही है। हालाँकि, सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि भारत शरणार्थी संधि का हिस्सा नहीं है और 2021 के आदेश के आधार पर डिपोर्टेशन का अधिकार है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने 2021 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि रोहिंग्या शरणार्थी UNHCR कार्ड के आधार पर कोई विशेष अधिकार नहीं माँग सकते। उन्होंने यह भी कहा कि एक अंतरिम आदेश बाद के चरणों में रेस ज्यूडिकाटा (पहले तय हो चुका मामला) के रूप में काम करता है। भूषण ने तर्क दिया कि मामला केवल शरणार्थी संधि तक सीमित नहीं है, बल्कि नरसंहार संधि (जिसे भारत ने स्वीकार किया है) को भी देखना होगा।

जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, “हम इन मामलों की अंतिम सुनवाई करेंगे। यह बेहतर होगा कि अंतरिम आदेश (स्टे ऑर्डर) देने के बजाय हम यह तय करें कि क्या उनके पास यहाँ रहने का अधिकार है। अगर है, तो इसे स्वीकार किया जाएगा, और अगर नहीं, तो कानून के अनुसार डिपोर्टेशन होगा।”

जस्टिस दत्ता ने असम में रोहिंग्या डिपोर्टेशन से जुड़े एक पुराने मामले का जिक्र किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में खारिज कर दिया था। गोंसाल्वेस ने इसे ‘प्रवासियों’ का मामला बताया, लेकिन जस्टिस दत्ता ने इसे शरणार्थियों का मामला माना। जस्टिस दत्ता ने कहा, “रोहिंग्या विदेशी हैं और अगर वे विदेशी अधिनियम के दायरे में आते हैं, तो उनके साथ उसी के अनुसार व्यवहार होगा।” गोंसाल्वेस ने NHRC बनाम अरुणाचल प्रदेश मामले का हवाला दिया, लेकिन जस्टिस दत्ता ने कहा कि यह दो जजों की बेंच का फैसला था, जो मौजूदा तीन जजों की बेंच पर बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार तो हैं, लेकिन अनुच्छेद 19(1)(e) के तहत भारत में बसने का अधिकार नहीं है।

बता दें कि कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या बच्चों के दिल्ली के स्कूलों में दाखिले से जुड़ी एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि बच्चों को पहले सरकारी स्कूलों में आवेदन करना चाहिए। अगर दाखिला नहीं मिलता, तो वे दिल्ली हाई कोर्ट जा सकते हैं। एक अन्य जनहित याचिका में कोर्ट ने कहा कि सभी बच्चों को बिना भेदभाव शिक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन पहले रोहिंग्या परिवारों की निवास स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

पहलगाम नरसंहार, भारत की 9 स्ट्राइक, ढाई मोर्चा और जम्मू पर पाकिस्तान का हमला… जानिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में कब क्या हुआ, कैसे युद्ध के मुहाने पर पहुँचे दोनों देश

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है, देश के स्वतंत्र होने के साथ ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का कारण जम्मू कश्मीर बना था। पाकिस्तान जब सीधे युद्ध से जीत नहीं पाया तो उसने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया पाकिस्तान ने भारत में एक के बाद एक आतंकी हमले किए। 2008 में मुंबई में 26/11 के हमले में 166 जानें ले लीं। भारत डोजियर पर डोजियर देता रहा,वैश्विक मंच पर कोई भाव नहीं मिला। उधर पाकिस्तान की हिम्मत और बढ़ती ही चली गई।

इस पैटर्न में शिफ्ट तब देखने को मिला, जब सितंबर 2016 में उरी में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया गया। पाकिस्तान को एक बार और सबक सिखाया गया फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद। उरी में हमारे 19 जवान बलिदान हुए थे, पुलवामा में 40 जवानों का बलिदान हुआ। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक किया। पाकिस्तान को बता दिया गया कि अब भारत की भूमि को लहूलुहान किया जाएगा तो हम भी चुप बैठने वालों में से नहीं हैं।

इसके बावजूद पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला किया। धर्म पूछ-पूछकर 26 पर्यटकों को मार डाला गया। पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई। जम्मू कश्मीर में कारोबार ठप्प होने लगा। वहाँ हुए शांतिपूर्ण चुनाव और सरकार गठन से बौखलाए आतंकियों की इस करतूत के बाद भारत ने भी ठान लिया कि इस बार ऐसा जवाब दिया जाएगा कि दुश्मन फिर से ऐसी हिमाकत करने की सोचे भी नहीं। ऐसा हुआ भी। भारत के जवाब के बारे में जानेंगे, लेकिन उससे पहले आइए जानते हैं कि पहलगाम में क्या हुआ।

पहलगाम में क्या हुआ था, कैसे धर्म पूछ-पूछकर मारा

जम्मू कश्मीर का पहलगाम वो जिला है, जहाँ अमरनाथ धाम है, जहाँ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू होती है। यहाँ की बैसरन घाटी पर्यटकों के आकर्षण का एक मुख्य केंद्र है। 22 अप्रैल के दिन भी यहाँ बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। कई घोड़े से यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान भीड़ में आतंकी घुस गए और इन सबको फ़ूड कोर्ट की तरफ ले गए। वहाँ से एग्जिट का रास्ता संकरा था। आतंकियों ने हिन्दुओं और मुस्लिमों को अलग-अलग किया, पैंट खोल-खोलकर चेक किया कि खतना हुआ है या नहीं – फिर मारा। महिलाओं को जीवित छोड़कर कहा गया, “जाओ, मोदी से बता देना।”

NIA इस मामले की जाँच कर रही है। शेख सज्जाद गुल को इस घटना के मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित किया गया। वो लश्कर-ए-तैय्यबा के मुखौटे ‘द रजिस्टेंस फोर्स’ का कमांडर है। TRF ने इस हमले के तुरंत बाद इसकी जिम्मेदारी ले ली थी, लेकिन भारत के सख़्त रवैये को देखते हुए इसने अपना बयान वापस ले लिया था। शेख बेंगलुरु से MBA कर चुका है। कई स्थानीय लोगों के भी आतंकियों से मिले होने की बात सामने आई। हाशिम मूसा इस आतंकी हमले में शामिल था, जो दक्षिणी कश्मीर के जंगलों में अब भी छिपा हुआ है।

पहलगाम में हमला करने वाले आतंकियों ने AK47 राइफल और M4 कार्बाइन रखे हुए थे। वो मिलिट्री यूनिफॉर्म में थे। मृतकों में कई ऐसे थे, जो नई-नई शादी के बाद हनीमून के लिए यहाँ पहुँचे थे। पहलगाम हमले में मारे जाने वालों में महाराष्ट्र के 6, गुजरात व कर्नाटक के 3, पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश के 2 पर्यटक शामिल थे। इनके अलावा आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, केरल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के एक-एक पर्यटक शामिल थे। अनुच्छेद-370 और 35A को निरस्त कर जम्मू कश्मीर व लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद ये सबसे बड़ा आतंकी हमला था।

‘ऑपरेशन सिंदूर’: पाकिस्तान में घुसकर भारत ने दिया करारा जवाब

पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले के 13 दिनों बाद भारत ने बुधवार (6 मई, 2025) की रात पाकिस्तान में 9 ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। इनमें PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) के अलावा पाकिस्तान के भीतर के कई इलाक़े भी शामिल थे। इस कार्रवाई को उन महिलाओं के सम्मान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया, आतंकियों ने जिनके सुहाग उजाड़े थे। भारतीय संस्कृति में सिंदूर का महिलाओं के लिए विशेष महत्व है, विवाहित स्त्रियों के लिए ये सुहाग की सुरक्षा का प्रतीक है। विवाह कार्यक्रम भी सिंदूर के बिना पूरा नहीं होता। इसीलिए, भारतीय महिलाओं के सम्मान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया।

अब आपको बताते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने इसे ‘अकारण’ हुआ हमला बताया। वहाँ के प्रधानमंत्री ने इसे जघन्य अपराध बताते हुए धमकाया कि बिना दण्डित किए नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को ऐसे अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जो उसने किया ही नहीं। भारत की कार्रवाई रात के समय 2 बजे के आसपास शुरू हुई और लगभग आधे घंटे तक चली। पाकिस्तानी हुक्मरान बैठकों के लिए सुबह का इंतजार करते रहे। पाकिस्तान ने 31 आम नागरिकों के मारे जाने का दावा किया, भारत ने 2 दिन बाद स्पष्ट कर दिया कि 100 आतंकियों को मार गिराया गया है।

पाकिस्तान ने 5 भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया। हालाँकि, ये झूठा साबित हो गया क्योंकि ख़ुद उसके पीएम ने माना था कि भारतीय विमानों ने सीमा पार ही नहीं किया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री से जब CNN पर सबूत माँगा गया तो उन्होंने सोशल मीडिया का नाम लिया। परिणामस्वरूप उन्हें एंकर से बेइज्जत होना पड़ा। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उन ठिकानों को निशाना बनाया जहाँ आतंकियों को प्रशिक्षण मिलता था, जहाँ से भारत में हमलों की साजिशें रची जाती थीं।

कौन से 9 ठिकाने, जिन्हें भारतीय मिसाइलों ने कर दिया तबाह

आइए, अब आपको बताते हैं कि वो कौन-कौन से 9 ठिकाने थे, जहाँ भारत की मिसाइलों ने आतंकियों को तबाह किया। इनमें प्रमुख है बहावलपुर का मरकज़ सुभान अल्लाह मस्जिद। ये जमात-ए-इस्लामी का मुख्यालय था। यहीं से पुलवामा हमले की साजिश रची गई थी। आतंकी मौलाना मसूद अज़हर यहीं रह रहा था। इस हमले में उसके परिवार के 10 लोग और 4 सबसे करीबी सहयोगी मारे गए। 18 एकड़ में फैले इस परिसर में आतंकी सरगना अपने परिवार वालों को भी साथ रखते थे। उसकी बहन, बहनोई, बीवी, भतीजा, भांजा और भाई ढेर हुए। मसूद अज़हर कहने लगा कि काश वो भी इस हमले में मारा जाता। ये वही मसूद अजहर है जिसे छुड़ाने के लिए पाकिस्तानी आतंकियों ने दिसंबर 1999 में भारत के विमान एयर इंडिया IC814 को हाईजैक किया था।

बहावलपुर की स्ट्राइक इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान की सीमा में 100 किलोमीटर भीतर घुसकर इसे अंजाम दिया गया। हमले का दूसरा ठिकाना बना पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के मुरीदके स्थित मरकज़ तैबा। अंतरराष्ट्रीय सीमा में 25 किलोमीटर भीतर स्थित यही वो जगह है जहाँ 26/11 मुंबई हमले के आतंकियों को ट्रेनिंग दी गई थी। इसके निर्माण के लिए अलकायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन ने भी 1 करोड़ रुपए दिए थे। अमेरिका ने ऐब्टाबाद में घुसकर लादेन को मार कर 2001 के 9/11 हमले का बदला लिया और उसकी लाश को समुद्र में दफ़न कर दिया। मरकज़ तैबा में 1000 से अधिक छात्रों को रखा गया था और उनका ब्रेनवॉश किया जा रहा था। अजमल कसाब सहित 26/11 के अन्य आतंकियों को ‘दौरा-ए-रिब्बत’, यानी ख़ुफ़िया प्रशिक्षण यहीं दी गई थी। 26/11 के अन्य साजिशकर्ता डेविड हेडली और तहव्वुर राणा यहाँ आए थे। वो अब्दुल रहमान सैयद पाशा, हारून और खुर्रम सहित अन्य साजिशकर्ताओं के साथ यहाँ आए थे। उन्हें आतंकी सरगना जकीउर्रहमान लखवी से निर्देश प्राप्त होते थे।

सरजल में चल रहा जैश-ए-मोहम्मद का संचार नेटवर्क भी ध्वस्त कर दिया गया। ये नरोवाल जिले के शकरगढ़ तहसील में स्थित था। जैश-ए-मुहम्मद कई वर्षों से भारत के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इंटरनेशनल बॉर्डर से 6 km भीतर स्थित सरजल के तेहरा कलाँ गाँव में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बनाकर उसकी आड़ में आतंकी शिविर चलाया जा रहा था। मार्च 2025 में जम्मू कश्मीर में हमला कर 4 पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी गई थी। 2 आतंकी भी मारे गए थे। इस हमले की पूरी साजिश सरजल में ही रची गई थी। यहीं से सीमा पर सुरंग बनाने का काम किया जाता था। घाटी में घुसपैठ कराए जाते थे। ड्रग्स भेजने के लिए भी इस जगह का इस्तेमाल होता था। भारत की सीमा में ड्रोन भेजे जाते थे। यानी, ये हथियार तस्करी का भी एक अड्डा था। जम्मू कश्मीर का संबा सेक्टर इससे नज़दीक ही है, ऐसे में ये जगह महत्वपूर्ण थी।

इसके बाद नंबर आता है सियालकोट स्थित मेहमूना जोया का, जो सीमा से 12 किलोमीटर भीतर स्थित है। यहाँ हिज़्बुल मुजाहिद्दीन का ट्रेनिंग कैम्प था। आतंकी सरगना मोहम्मद इरफ़ान खान, या इरफ़ान टांडा यहाँ का पूरा कामकाज देखते थे। यहाँ किसी भी समय पर 20-25 आतंकी मौजूद रहते थे।

हिज़्बुल का भी भारत में हुए कई आतंकी हमलों में हाथ रहा है। जम्मू कश्मीर में जिस बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उसके जनाजे में लाखों लोग उमड़े थे, वो इसी आतंकी संगठन का कमांडर था। जनवरी 2016 में भारतीय वायुसेना के पठानकोट एयर बेस पर हुए हमले की साजिश यहीं रची गई थी। इसके बाद चौथा ठिकाना जहाँ भारत ने स्ट्राइक किया वो था भिम्बर का मरकज़ अहले हदीथ बरनाला। LoC से 9 km भीतर स्थित इसी जगह पर IED बमों को लेकर आतंकियों को प्रशिक्षित किया जाता था। जंगलों में इन आतंकियों को कैसे सर्वाइव करने है, ये भी यहीं सिखाया जाता था। उन्हें कई ख़तरनाक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। अब इसे समतल कर दिया गया है। यहाँ 100-150 आतंकी कैडर मौजूद हुआ करते थे।

भारत का छठा निशाना बना – कोटली का अब्बास। LoC से 13 किलोमीटर अंदर। LeT (लश्कर-ए-तैय्यबा) के आतंकियों को आत्मघाती बनने की ट्रेनिंग यहाँ दी जाती थी। यहाँ का पूरा प्रबंधन सँभालता था मुफ़्ती अब्दुल रउफ असगर। उसका साथ देता था हाफिज अब्दुल सकूर उर्फ़ काज़ी जर्रार। वो NIA की लिस्ट में भी वॉन्टेड है। उनका ब्रेनवॉश होता था, 72 हूर का लालच दिया जाता था और फिर भारत में भेज दिया जाता था। यहाँ भी 100-125 आतंकी मौजूद रहते थे। LoC से 13 किलोमीटर भीतर स्थित कोटली का गुलपुर सातवाँ निशाना बना। जम्मू कश्मीर के राजौरी और पुँछ में जो भी आतंकी ऑपरेट करते हैं, उन्हें यहीं से दिशानिर्देश मिलते थे। पुँछ में अप्रैल 2023 में हुए हमले की साजिश यहीं रची गई थी। इसी तरह, रियासी में वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं से भरी बस पर गोलीबारी की साजिश यहीं रची गई थी। इसमें मरने वालों में महिलाओं और छोटे बच्चे भी शामिल थे। 9 श्रद्धालु मारे गए थे। यहाँ आतंकियों को पहाड़ियों में हमलों की ट्रेनिंग दी जाती थी।

इन 7 ठिकानों के अलावा भारत ने मुज़फ़्फ़राबाद स्थित सवाई नाला को निशाना बनाया, यहाँ भी LeT वालों ने अपना एक बड़ा ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करके रखा हुआ था। इसे बैत-उल-मुजाहिद्दीन के नाम से भी जाना जाता है। ये मुज़फ़्फ़राबाद-नीलम रोड पर चेलाबन्दी पुल के पास स्थित था। 21वीं सदी की शुरुआत से ही ये सेंटर लगातार चल रहा था। यहाँ LeT कमांडरों का पंजीकरण होता था। यहाँ दौरा-ए-आम की ट्रेनिंग होती थी, जिसके तहत इस्लामी से लेकर GPS-मैप तक की ट्रेनिंग दी जाती थी। ये LoC से 30 किलोमीटर भीतर स्थित है। 200-250 आतंकियों वाले इस सेंटर से उत्तरी कश्मीर में आतंकी भेजे जाते थे। मुज़फ़्फ़राबाद का ही सैयद बिलाल 9वाँ और अंतिम निशाना बना। यहाँ भी JeM के आतंकियों को गोला-बारूद और हथियारों का प्रशिक्षण दिया जाता था। ये मुजफ्फराबाद के लाल किले के पास स्थित था। अब्दुल्लाह जिहादी उर्फ़ अब्दुल्लाह कश्मीरी और भारतीय भगोड़ा आशिक नांगरू यहीं मौजूद रहता था। पाकिस्तानी सेना का ‘स्पेशल सर्विस ग्रुप’ (SSG) भी यहाँ आतंकियों को ट्रेनिंग देता था।

इन निशानों में JeM के 4, LeT के 3 और हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के 2 ठिकाने शामिल थे। इनमें से 4 पाकिस्तान में थे, जबकि 5 पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जो हिस्सा तो भारत का ही है लेकिन पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा रखा है। इन सारे ट्रेनिंग सेंटरों पर आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी फ़ौज और ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से लगातार सहयोग मिलता रहता था। फंडिंग से लेकर प्रोपेगंडा तक के लिए आतंकियों ने यहाँ सेंटर बना रखे थे। मरकज़ सुभान अल्लाह 2015 से आतंकियों का गढ़ बना हुआ था, वहीं मुरीदके स्थित मरकज़ तैबा से मुल्ले-मौलवी ब्रेनवॉश का अभियान भी चलाते थे।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सक्रिय हुआ भारत का ‘ढाई मोर्चा’

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत में बैठे कुछ लोगों को भी मिर्ची लग गई। जब कॉन्ग्रेस पार्टी के लोग मीडिया के सामने आए तो राहुल गाँधी समेत सभी नेताओं के चेहरे उतरे हुए थे। पत्रकार व फिल्मकार अविनाश दास सोशल मीडिया पर युद्ध के ख़िलाफ़ कविताएँ लिखने लगे। वहीं ईरान की अभिनेत्री व मॉडल मंदाना करीमी ने हिन्दू धर्म को भला-बुरा कहा, जबकि उन्होंने ख़ुद गौरव गुप्ता से शादी के लिए हिन्दू धर्म अपनाया था। हालाँकि, उनका तलाक़ हो चुका है। कॉन्ग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने कहा कि भारत अपने स्ट्राइक में पाकिस्तान में चील-कौवे मार गिराता है।

जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की ख़बर आई थी, उसी समय कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कह दिया था कि सुरक्षा बलों को इसके बारे में नहीं बताया गया है। कॉन्ग्रेस पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी उदित राज ने सिंदूर को एक धर्म विशेष का चिह्न बता दिया। ‘The Hindu’ समूह की पत्रिका Frontline की संपादक वैष्णा रॉय ने सिंदूर को ‘जुनूनी हिंदुत्व’ से जोड़ते हुए इसे पितृसत्तामक प्रतीक बता दिया। इस दौरान ये सभी लोग ये भूल गए कि पहलगाम में आतंकियों ने धर्म पूछकर निशाना बनाया था, शुरू पाकिस्तान ने किया था। भारत ने तो केवल ‘न्याय’ किया, जवाबी कार्रवाई की।

‘The Wire’ की आरफा खानम शेरवानी ने पाकिस्तानी प्रोपेगंडा चलाते हुए दावा किया कि भारत ने आम नागरिकों की हत्या की है, आतंकियों को नहीं मारा है। शायद ये वही भीतर ‘ढाई मोर्चा’ है जिससे देश की लड़ाई है, जिसका जिक्र दिवंगत CDS जनरल बिपिन रावत ने किया था। वैसे विदेशी मीडिया भी पीछे नहीं रहा। पहलगाम के आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ और ‘बाग़ी’ बताने वाले DW, BBC और ग्लोबल टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों ने भी पाकिस्तानी नैरेटिव को आगे बढ़ाने की कोशिश की। पाकिस्तान ने जमकर झूठे प्रचार-प्रसार का बहाना बनाया।

दिन में शांति, रात में तनाव: युद्ध के मुहाने पर भारत-पाकिस्तान

भारत की स्ट्राइक के बाद ही पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ी हुई है। पाकिस्तानी जाग रहे हैं, क्योंकि उन्हें भारत की जवाबी कार्रवाई से भय है। भारतीय जाग रहे हैं, क्योंकि उन्हें ‘गुड न्यूज़’ का इंतज़ार है। गुरुवार (8 मई, 2025) को पाकिस्तान ने जम्मू, पंजाब और राजस्थान पर मिसाइल एवं ड्रोन्स से हमला बोल दिया। वो तो भला हो रूस के साथ सौदे में मिले S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का, जिसने उन सभी को मार गिराया। जम्मू एयरपोर्ट और यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया गया। अमृतसर को निशाना बनाया गया। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में चल रहे IPL के मैच को रोकना पड़ गया।

इससे पहले दिन में भारत ने लाहौर का एयर डिफेंस सिस्टम उड़ा दिया था। पाकिस्तान इस्लामाबाद और लाहौर से वीडियो बना-बना कर ये साबित करने की कोशिश में लगे रहे कि उनके यहाँ सब ठीक है। राजस्थान के जैसलमेर में भारत ने पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट को भी मार गिराया। जम्मू कश्मीर के साम्बा में घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया गया। कश्मीर में बॉर्डर के कई इलाक़ों में देर रात तक भारी गोलीबारी चलती रही। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि पूरे चंडीगढ़ में ब्लैकआउट करना पड़ा था। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में स्कूल भी बंद करने पड़े।

उधर पूरा का पूरा वामपंथी गिरोह एक नया शब्द लेकर आ गया – De-escalation. ये लोग लगातार युद्ध के खिलाफ लिखने लगे, जैसे भारत ने ही सबकुछ शुरू किया हो। विनोद कापड़ी से लेकर आरफा खानम शेरवानी तक ये भूल गए कि वो पाकिस्तान ही था जिसने 1947, 1965, 1971 और 1999 में भारत पर हमला किया और हमेशा मुँह की खाई। वो पाकिस्तान ही था जिसने 26/11 मुंबई हमले को अंजाम दिया और 166 निर्दोष लोग मारे गए। पठानकोट, पुलवामा, उरी, रियासी और पहलगाम में हमले किए गए। यूपीए काल में दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, जयपुर, असम, पटना और वाराणसी तक में बम धमाके हुए – इन सबके पीछे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद ही था।

पाकिस्तान परस्तों को एक और झटका? वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ का दावा- भारत सरकार ने ब्लॉक किया उसका प्लेटफॉर्म

पाकिस्तान ने भारत के पश्चिमी बॉर्डर पर बसे शहरों पर एक सुनियोजित और सटीक हवाई हमला किया। इसके ठीक एक दिन बाद लेफ्टविंग मैगजीन ‘द वायर’ ने दावा किया कि भारत सरकार ने पूरे देश में उसके प्लेटफॉर्म तक पहुँच को ब्लॉक कर दिया है।

‘द वायर’ ने अपने बयान में कहा, “भारत सरकार ने संविधान में दी गई प्रेस की आजादी की गारंटी का खुला उल्लंघन करते हुए thewire.in को पूरे भारत में ब्लॉक कर दिया है। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स का कहना है कि ‘द वायर’ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश के तहत आईटी एक्ट, 2000 के आधार पर ब्लॉक किया गया है।”

हालाँकि, ‘द वायर’ ने आरोप लगाया कि सरकार ने उसका प्लेटफॉर्म ब्लॉक किया, लेकिन कई यूजर्स ने बताया कि उनकी वेबसाइट अब भी Accessible है। यह ‘द वायर’ की पुरानी रणनीति मानी जा रही है, जिसमें वह खुद को पीड़ित दिखाकर सरकार पर दबाव बनाती है और नीतियों को बदलवाने की कोशिश करती है।

‘ऑपइंडिया’ ने पाया कि ‘द वायर’ की वेबसाइट भारत में अब भी खुल रही है, जैसा कि नीचे दिखाया गया है।

The Wire की वेबसाइठ का स्क्रीनशॉट

शायद ‘द वायर’ ने सरकार के उस निर्देश को भाँप लिया, जिसमें एक दिन पहले पाकिस्तान से आने वाले कंटेंट को स्ट्रीम करने पर रोक लगाई गई थी।

‘द वायर’ ने अपने बयान में कहा, “हम इस खुली सेंसरशिप का विरोध करते हैं, खासकर ऐसे नाजुक वक्त में जब भारत के लिए सच्ची, निष्पक्ष और तर्कसंगत खबरें और सूचनाएँ सबसे बड़ी ताकत हैं।”

हालाँकि, कई यूजर्स ने दावा किया कि वे ‘द वायर’ की वेबसाइट नहीं खोल पा रहे हैं।

‘द वायर’ ने कहा कि वह इस कदम को चुनौती देगा, लेकिन कैसे और कब, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

भारत ने पाकिस्तानी कंटेंट पर लगाई रोक

केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान में बने सभी कंटेंट – वेब सीरीज, फिल्में, पॉडकास्ट और गानों को भारत में चलने वाले सभी ओटीटी और मीडिया स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैन कर दिया। यह आदेश 8 मई 2025 से लागू हो गया है। मंत्रालय ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के हित में उठाया गया कदम बताया।

यह फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद और गहरा गया। इस कदम को सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति का संकेत माना जा रहा है। यह आदेश ठीक उस दिन आया, जब पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान की फिल्म ‘अबीर गुलाल’ भारत में रिलीज होने वाली थी।

यह कोई इकलौता कदम नहीं है। कुछ दिन पहले ही भारत सरकार ने पाकिस्तानी डिजिटल मौजूदगी पर सख्ती की थी। करीब 16 यूट्यूब चैनल, कई इंस्टाग्राम अकाउंट्स खासकर हानिया आमिर और माहिरा खान जैसे सेलेब्रिटीज के अकाउंट्स को बैन किया गया। साथ ही पाकिस्तानी कलाकारों के साथ किसी भी तरह के सहयोग पर रोक लगा दी गई।