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नर्स निहा खान ने 29 कोविड वैक्सीन से भरी सिरिंज फेंक दी, पकड़े जाने पर कहा- ‘मूड खराब था’, अब होगी सेवा समाप्त

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में Covid-19 वैक्सीन से भरी सिरिंज को कूड़ेदान में फेंकने का मामला सामने आया है। इस मामले में आरोपित एएनएम/नर्स निहा खान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और आरोपित की सेवा समाप्त करने का निर्देश भी दिया गया है। साथ ही टीकाकरण केंद्र की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आफ़रीन के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है क्योंकि डॉ. आफ़रीन, निहा द्वारा की जा रही लापरवाही से अवगत थी।

क्या है मामला?

मामला तब सामने आया जब सोमवार (24 मई) को अलीगढ़ के जमालपुर अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) में निरीक्षण के दौरान कूड़ेदान में Covid-19 वैक्सीन से भरी 29 सिरिंज पाई गईं। इसके बाद मामले की सूचना तत्काल मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भानु प्रताप कल्याणी को दी गई जिनके द्वारा जाँच का आदेश दिया गया। जाँच में केंद्र में तैनात सभी लोगों के बयान दर्ज किए गए। स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित अन्य स्टाफ का कहना है कि एएनएम निहा खान टीकाकरण करने के बजाय वैक्सीन से भरी सिरिंज तोड़कर कूड़ेदान में फेंक रही थी। इसके बाद जब स्टाफ ने निहा से बात की तो उसने कहा कि ‘मूड खराब’ है।

दूसरी तरफ यह भी खबर मिली है कि जमालपुर UPHC की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आफ़रीन, एएनएम निहा के द्वारा की जा रही लापरवाही से अवगत थीं। लेकिन डॉ. आफ़रीन ने न तो आरोपित एएनएम के खिलाफ खुद कोई कार्रवाई की और न विभाग को इसकी सूचना दी।

मामला सामने आने के बाद बुधवार (26 मई) को जाँच के लिए समिति गठित की गई जिसकी रिपोर्ट शुक्रवार (28 मई) को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रखी गई। रिपोर्ट के बाद निहा खान की सेवा समाप्त करने का आदेश दे दिया गया है और तथ्यों को छुपाने के आरोप में डॉ. आफ़रीन को जमालपुर UPHC से हटाकर हरदुआगंज भेजा जा सकता है।

अलीगढ़ जिलाधीश चंद्र भूषण सिंह ने कहा है कि जाँच के आधार पर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दे दिया गया है। आपको बता दें कि जमालपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में कोरोना वायरस संक्रमण के मरीज मिले थे। जिसके बाद इस क्षेत्र में हर दिन 250 लोगों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा गया था।

भारत का वो जगह जहाँ महात्मा गाँधी की मूर्ति 11 सालों से नहीं लगाई जा सकी: लक्षद्वीप में अलिखित ‘इस्लामी कानून’?

हाल ही में लक्षद्वीप राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी मुख्य धारा की चर्चा से दूर रहने वाला लक्षद्वीप विपक्षी नेताओं द्वारा भाजपा सरकार और लक्षद्वीप के प्रशासक की आलोचना का माध्यम बन गया है। दरअसल लक्षद्वीप के प्रशासन ने कुछ कानूनों को मंजूरी दी है, जिसके कारण भारतीय द्वीप समूह के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ विपक्षी नेता और लक्षद्वीप के स्थानीय लोग लामबंद हो रहे हैं। इन कानूनों में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो संतान का नियम, गाय और बैल के अवैध कत्ल पर बैन और पर्यटन को बढ़ाने के लिए शराब की बिक्री शुरू करने की बातें शामिल हैं।

विरोध करने वालों में कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी प्रमुख रूप से शामिल हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा कि लक्षद्वीप के प्रशासन ने जिन कानूनी परिवर्तनों को मंजूरी दी है वो लक्षद्वीप के स्थानीय समुदाय के ‘सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं’ पर एक आघात है। इस मामले पर कॉन्ग्रेस ने केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की और लक्षद्वीप में किए जाने वाले सुधारों पर रोक लगाने की माँग की लेकिन शुक्रवार (28 मई) को कॉन्ग्रेस की याचिका खारिज कर दी गई।  

हालाँकि अचानक से यह विरोध नहीं शुरू हुआ है। इस विरोध के पीछे एक बड़ी वजह है। लक्षद्वीप में मुस्लिमों की बहुसंख्यक आबादी है, जो कि लक्षद्वीप की कुल आबादी का लगभग 98% है। जहाँ इतनी बड़ी संख्या में मुस्लिम होंगे, वहाँ विपक्षी नेताओं को अवसर दिख ही जाएगा, सो दिख गया।

लक्षद्वीप के मुस्लिमों के विरोध से जुड़ा एक और किस्सा है। किस्सा 11 साल पुराना है। तब यूपीए के शासनकाल में मुसलमानों के विरोध के कारण लक्षद्वीप की राजधानी कवरत्ती में महात्मा गाँधी का पुतला स्थापित नहीं हो सका था क्योंकि पुतला इस्लाम में हराम है।  

यूपीए सरकार ने गाँधी जयंती के दिन लक्षद्वीप की राजधानी कवरत्ती में महात्मा गाँधी का पुतला स्थापित करने का निर्णय लिया था। इसके लिए सितंबर 2010 में एमवी अमीनदीवी जलयान में महात्मा गाँधी का 2 लाख रुपए की लागत से बना पुतला लक्षद्वीप भेजा गया। महात्मा गाँधी की वह अर्ध-मूर्ति लक्षद्वीप में जलयान से उतारी भी नहीं जा सकी क्योंकि लक्षद्वीप के मुस्लिमों ने ऐसे किसी भी पुतले को लक्षद्वीप में स्थापित करने का विरोध कर दिया था। लक्षद्वीप में 98% जनसंख्या मुस्लिमों की है।

हालाँकि प्रशासन ने ‘खराब मौसम’ का हवाला दिया था लेकिन सच तो यह है कि महात्मा गाँधी के पुतले का विरोध मुस्लिमों ने इसलिए किया था क्योंकि उनका कहना था कि किसी भी पुतले या मूर्ति को स्थापित करने से समुदाय की मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचेगी।

केरल के कुछ स्थानीय मीडिया समूहों की रिपोर्ट्स के अनुसार स्थानीय मुस्लिम यह मानते हैं कि यदि कोई पुतला स्थापित कर दिया गया तो मुस्लिमों को उसे सम्मान देना और फूलों से सजाना होगा जो कि हिन्दुत्व का एक हिस्सा है और शरिया कानून का उल्लंघन करता है। यही कारण था कि लक्षद्वीप के मुस्लिमों ने कवरत्ती में महात्मा गाँधी की अर्ध-मूर्ति की स्थापना का विरोध किया था।

आपको बता दें कि किसी मूर्ति या पुतले की पूजा करना इस्लाम में वर्जित है। चूँकि इस्लाम मात्र एक अल्लाह को मानता है, ऐसे में किसी मूर्ति की पूजा करना इस्लाम में ‘हराम’ या पाप माना गया है।

लक्षद्वीप में मुस्लिमों के विरोध के बाद जलयान एमवी अमीनदीवी महात्मा गाँधी की अर्ध-मूर्ति के साथ वापस कोच्चि आ गया और एक दिन बाद फिर यह कवरत्ती भेजा गया। तब इस मामले पर लक्षद्वीप के कलेक्टर एन वसंत कुमार ने किसी भी प्रकार के मजहबी पहलू से इनकार किया था लेकिन तभी यह जानकारी भी सामने आई थी कि प्रशासन ने मुस्लिमों के कड़े विरोध के चलते कवरत्ती में महात्मा गाँधी के पुतले की स्थापना की योजना रद्द कर दी थी।

11 साल होने को आए लेकिन महात्मा गाँधी की वह अर्ध-मूर्ति लक्षद्वीप में स्थापित नहीं हो सकी है। इस दौरान कई बार महात्मा गाँधी की वह अर्ध-मूर्ति कोच्चि से कवरत्ती के बीच भटकती रही। अब ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि अर्ध-मूर्ति लक्षद्वीप के प्रशासनिक कार्यालय में रखी हुई है और स्थापित होने की राह देख रही है। लक्षद्वीप में मुस्लिमों का विरोध बढ़ता जा रहा और धर्मनिरपेक्षता एवं अहिंसा की पहचान महात्मा गाँधी का वह पुतला अभी भी इस उम्मीद में है कि शायद कभी उसे वहाँ ले जाया जाएगा, जिसके लिए उसे लक्षद्वीप लाया गया था।

26% टीकाकरण के साथ नंबर वन नोएडा, लखनऊ दूसरे पर: कोरोना कर्फ्यू में छूट का स्वास्थ्य मंत्री ने किया इशारा

कोरोना से बचाव को लेकर यूपी के गौतम बुद्ध नगर जिले में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा जागरूक हैं। अब तक नोएडा-ग्रेटर नोएडा में 26 फीसदी लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। इसी के तहत जिले ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। टीकाकरण के प्रतिशत के मामले में गौतम बुद्ध नगर ने प्रदेश की राजधानी लखनऊ को भी पछाड़ दिया है।

बताते चलें कि जिले में 1648000 लोगों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य है। अब तक जिले में 436000 लोगों को कोरोना वैक्सीन लग चुकी है। वहीं, 14 प्रतिशत वैक्सीनेशन के साथ लखनऊ दूसरे स्थान पर है। लखनऊ में 45 लाख आबादी में से 656000 से ज्यादा लोगों को अब तक वैक्सीन लगी है।

ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन से बढ़ी रफ्तार

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में लगातार वैक्सीनेशन केंद्रों में इजाफा हो रहा है। यही वजह है कि टीकाकरण की रफ्तार भी बढ़ रही है। अब तक जिले में 83 केंद्रों पर टीकाकरण हो रहा है। इससे पहले 81, 67 और 56 केंद्रों पर वैक्सीन लगाई जा रही थी। 

इन सबके बीच जिले में कोरोना को देखते हुए लोगों को सुरक्षित तरह से वैक्सीन लगवाने के लिए ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन की शुरुआत की गई है। ड्राइव थ्रू वैक्सीनेशन में जिले के लोग भारी संख्या में वैक्सीनेशन लगवाने के लिए पहुँच रहे हैं। कई बार तो हालत यह हो जाते हैं कि वैक्सीनेशन लगवाने के लिए आने वाले लोगों के वाहनों की लाइन एक किलोमीटर से अधिक तक पहुँच रही है।

कोरोना कर्फ्यू में ढील देने की तैयारी में योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट के बाद लॉकडाउन में छूट के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि एक जून से प्रदेश में थोड़ी ढील दी जा सकती है। यूपी के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कोरोना कर्फ्यू में ढील की ओर साफ इशारा किया है। बताते चलें कि अभी 31 मई तक के लिए प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू लागू है।

प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा, “हमारे यहाँ कोरोना के मामलों की संख्या काफी कम हो चुकी है। इसलिए आंशिक कोरोना कर्फ्यू में कुछ ढील हो सकती है।” इस बीच कोरोना को लेकर राहत की खबर है। बीते 24 घंटों के दौरान राज्य में करीब 2200 नए मामले सामने आए हैं। यह आँकड़ा तब है जबकि 3.30 लाख कोविड टेस्ट किए गए हैं। वहीं प्रदेश में कोरोना से रिकवरी रेट अब 96.1% तक पहुँच गया है।

जून में एक करोड़ टीके लगाएगी योगी सरकार

योगी सरकार ने जून महीने में एक करोड़ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा है। इसमें 45 साल से अधिक उम्र वाले हैं और 18 से 44 साल के आयु वाले भी। जून महीने से राज्य के सभी 75 ज़िलों में टीकाकरण का काम शुरू हो जाएगा। हर ज़िले में पत्रकारों, शिक्षकों और कचहरी में काम करने वाले लोगों के लिए अलग से वैक्सीन सेंटर बनेगा। 12 साल से कम उम्र के बच्चों के अभिभावकों को भी प्राथमिकता के आधार पर टीका लगाया जाएगा।

चीन के वैज्ञानिकों ने ही वुहान लैब में तैयार किया कोरोना वायरस, वैज्ञानिकों को सैंपल पर मिले फिंगरप्रिंट से सनसनीखेज खुलासा

दुनियाभर में कोरोना महामारी का प्रकोप जारी है। भारत समेत हर देश अपने नागरिकों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए जीतोड़ कोशिशें कर रहा है। इसी बीच एक बार फिर पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के वुहान लैब से लीक होने की खबर सुर्खियों में है। इसको लेकर डेली मेल ने शनिवार (29 मई 2021) को सनसनीखेज खुलासा किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के वैज्ञानिकों ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (Wuhan Institute of Virology) में कोविड-19 वायरस को तैयार किया है। वैज्ञानिकों को कोविड-19 सैंपल पर फिंगरप्रिंट मिले हैं। इसके अलावा दावा किया गया है कि चीनी वैज्ञानिकों (Chinese Scientist) ने कोरोना वायरस को तैयार करने के बाद इसे रिवर्स-इंजीनियरिंग वर्जन से बदलने की कोशिश की, ताकि ऐसा लगे कि ये वायरस चमगादड़ से विकसित हुआ है। वहीं, अमेरिका और ब्रिटेन डब्ल्यूएचओ (WHO) पर इस मामले की जाँच के लिए दबाव बना रहे हैं।

बीबीसी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुता​बिक, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस मामले की तुरंत जाँच का ऐलान किया है। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि आखिर यह वायरस कहाँ से आया है। क्या यह चीन की वुहान प्रयोगशाला से लीक हुआ है या कहीं और से आया है? उन्होंने 90 दिनों के भीतर जाँच रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

डेली मेल के अनुसार, इस स्टडी को ब्रिटिश प्रोफेसर एंगस डल्गलिश (Angus Dalgleish) और नॉवे के वैज्ञानिक डॉ. बिर्गर सोरेनसेन (Dr. Birger Sørensen) ने किया है। उन्हें इस संबंध में वैज्ञानिकों द्वारा लिखे गए 22-पृष्ठ की रिपोर्ट मिली है, जिसे बायोफिजिक्स डिस्कवरी की तिमाही समीक्षा में प्रकाशित किया जाना है।

इस स्टडी में उन्होंने लिखा है कि उनके पास एक साल से भी अधिक समय से चीन में वायरस पर रेट्रो-इंजीनियरिंग के सबूत हैं, लेकिन शिक्षाविदों और प्रमुख मैगजीन ने इसे नजरअंदाज कर दिया। प्रोफेसर डल्गलिश लंदन में सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी में कैंसर विज्ञान के प्रोफेसर हैं। इन्हें ‘एचआईवी वैक्सीन’ बनाने के लिए भी जाना जाता है। वहीं, डॉ सोरेनसेन एक वायरोलॉजिस्ट और Immunor नामक कंपनी के अध्यक्ष हैं, जो कोरोना की वैक्सीन तैयार कर रही है।

वुहान लैब में जानबूझकर सारा डाटा नष्ट किया गया

स्टडी में खुलासा किया गया है कि वुहान लैब में जानबूझकर सारा डाटा नष्ट किया गया। जिन वैज्ञानिकों ने इसे लेकर अपनी आवाज उठाई, उन्हें चीन द्वारा या तो चुप करा दिया या फिर गायब कर दिया गया। बताया जा रहा है कि जब डल्गलिश और सोरेनसेन वैक्सीन बनाने के लिए कोरोना के सैंपल्स का अध्ययन कर रहे थे, उसी दौरान उन्होंने वायरस में एक ‘खास फिंगरप्रिंट’ को खोजा। इसको लेकर उनका कहना है कि ऐसा लैब में वायरस के साथ छेड़छाड़ करने के बाद ही संभव है। दोनों वैज्ञानिकों का कहना है कि जब उन्होंने इस रिजल्ट को जर्नल में प्रकाशित करना चाहा तो कई साइंटिफिक जर्नल ने इसे खारिज कर दिया।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिटायर्ड साइंस एडिटर ने लगाई थी पत्रकारों को लताड़

बीते दिनों (25 मई 2021) अमेरिकी समाचार पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिटायर्ड साइंस एडिटर निकोलस वेड ने उन पत्रकारों को लताड़ लगाई थी, जिन्होंने कोरोना वायरस के चीन के वुहान स्थित लैब से लीक होने की संभावनाओं को एकदम से नकार दिया या नजरंदाज कर दिया था। निकोलस वेड का मानना है कि मीडिया के लोग चीन के प्रोपेगेंडा के चक्कर में आ गए और उन्होंने खुद का रिसर्च करने की बजाए चीन की बात मानने में ही भलाई समझी।

उन्होंने ‘फॉक्स न्यूज’ के एक इंटरव्यू में कहा था कि कोरोना वायरस का मूल स्रोत क्या है, इस संबंध में अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है, क्योंकि चीन पर शासन करने वाली कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे दबा दिया है। उन्होंने कहा कि चीन द्वारा इस सम्बन्ध में एक बृहद प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है। साथ ही उन्होंने मीडिया के अंधेपन को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया, जिसने वैज्ञानिक चीजों में भी राजनीति घुसाई।

कोरोना केस सामने आने से पहले ही ‘वुहान लैब के शोधकर्ता पड़ गए थे बीमार’

हाल ही में (24 मई, 2021) एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि चीन में कोरोना वायरस के पहले मामले की पुष्टि से हफ्तों पहले ही ‘वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ के कई शोधकर्ता बीमार पड़ गए थे जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चीन ने कहा था कि वुहान में कोरोना का पहला मामला 8 दिसंबर 2020 को सामने आया था, लेकिन इस अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक वुहान लैब के तीन शोधकर्ता उससे पहले ही नवंबर 2019 में बीमार पड़ गए थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।

चर्च चलाता था सबसे बड़ा बोर्डिंग स्कूल: 215 आदिवासी बच्चों के मिले अवशेष, 4100+ की मौत का है रिकॉर्ड

कनाडा के एक बंद पड़े बोर्डिंग स्कूल के परिसर में 215 आदिवासी बच्चों के अवशेष बरामद हुए हैं। इनमें से कुछ की उम्र तीन साल तक की बताई जा रही है। शुक्रवार (मई 28, 2021) को कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस संबंध में जानकारी देते हुए इसे हृदयविदारक बताया।

Tk’emlups te Secwepemc जनजाति ने बताया कि ब्रिटिश कोलंबिया में 1978 से बंद पड़े कमलूप्स इंडियन रेजीडेंशियल स्कूल (KIRS) में बच्चों के अवशेषों की बरामदगी हुई है। इन्हें रडार विशेषज्ञों की मदद से जमीन से निकाला गया। समुदाय के प्रमुख रोसने कासिमिर ने अपना एक बयान जारी कर कहा, “हमें समुदाय के बारे में एक जानकारी थी जिसे हम सत्यापित करने में सक्षम थे।” उन्होंने बताया कि इस समय हमारे पास उत्तर से अधिक प्रश्न हैं।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस संबंध में ट्वीट कर कहा, “Kamloops Indian Residential School से जो खबर मिली, वह हृदय विदारक है। यह हमारे देश के इतिहास के उस काले और शर्मनाक अध्याय की दर्दनाक याद दिलाता है। मैं इस दुखद समाचार से प्रभावित सभी लोगों के बारे में सोच रहा हूँ। हम आपके लिए यहाँ हैं।”

ईसाइयत के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्कूल के बारे में जानकारी

जानकारी के मुताबिक ईसाई चर्चों और कनैडियन सरकार द्वारा संचलित किया जाने वाले कनाडा आवासीय स्कूल तंत्र का KIRS सबसे बड़े बोर्डिंग स्कूलों में से एक था। इस स्कूल के बारे में मौजूद जानकारी बताती है कि यहाँ आदिवासी बच्चों को सभ्य बनाने के नाम पर ईसाइयत का पाठ पढ़ाया जाता था और उनकी भाषा व संस्कृति को नष्ट किया जाता था।

रिपोर्ट कहती हैं कि सन् 1883 से 1998 में यहाँ 1.5 लाख आदिवासी बच्चे अपने परिवारों से अलग करके इन स्कूलों में डाले गए। इसके बाद इन स्कूलों में सांस्कृतिक नरसंहार हुआ। ये सारे खुलासे Truth and Reconciliation Commission की 2015 की एक रिपोर्ट में होते हैं।

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बच्चों को यहाँ शारीरिक शोषण, बलात्कार, कुपोषण व अन्य अत्याचारों से गुजरना होता था। रिपोर्ट कहती है कि इस आवासीय स्कूल में रहने के दौरान 4100 बच्चों की मौत हुई। लेकिन कनाडा के सबसे बड़े आवासीय स्कूल में दफनाए गए इन 215 बच्चों का रिकॉर्ड इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया।

बता दें कि इससे पहले इस आवासीय स्कूल प्रणाली के लिए कनाडा की सरकार ने 2008 में माफी माँगी थी। वहीं इस संबंध में Tk’emlúps te Secwepemc Nation ने कहा कि वह उन लोगों से जुड़े है जिनके बच्चे इस में स्कूल गए थे। जाँच को लेकर उन्हें लग रहा है कि जून के मध्य तक प्रारंभिक निष्कर्ष मिलने की उम्मीद है।

केरल हाईकोर्ट का लक्षद्वीप में प्रशासनिक सुधारों पर रोक से इनकार, कॉन्ग्रेस नेता नौशाद अली ने दायर की थी याचिका

केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार (28 मई, 2021) को लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन (एलडीएआर) 2021, असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम (PASA) के मसौदे के कार्यान्वयन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हाल ही में लक्षद्वीप प्रशासन ने गोमांस प्रतिबंध सहित अन्य प्रशासनिक उपायों को पेश किया था।

लाइव लॉ की रिपोर्ट्स के मुताबिक, केरल हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और प्रदेश प्रशासन को नोटिस जारी कर जनहित याचिका पर अगले दो हफ्ते में जवाब देने को कहा है। बता दें कि लक्षद्वीप में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए सुधारों के खिलाफ कॉन्ग्रेस नेता केपी नौशाद अली ने केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।

कॉन्ग्रेस नेता ने याचिका में दावा किया था कि प्रशासन इस नियम के जरिए अरब सागर में स्थिति इस द्वीप समूह की अनूठी संस्कृति और परंपरा को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है। अली का दावा है कि नए नियम लक्षद्वीप के प्रशासन को व्यापक, मनमानी और अनियंत्रित शक्तियाँ देते हैं। इससे द्वीपवासियों द्वारा संपत्ति पर कब्जा भी प्रभावित होगा।

कॉन्ग्रेस नेता की याचिका पर सुनवाई करते हुए केरल हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद चंद्रन और जस्टिस एमआर अनीता ने इसे नीतिगत मामला बताया और सभी हितधारकों से अदालत के साथ अपने विचार साझा करने को कहा। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार और द्वीप प्रशासन को नोटिस भेजकर दो सप्ताह में जवाब देने को कहा और कोर्ट स्थगित कर दी।

गौरतलब है कि लक्षद्वीप के नए प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल द्वारा नए सुधारों और नए नियमों को लाने का आदेश जारी करने के बाद से इस केंद्रशासित प्रदेश में सियासी भूचाल आ गया है। लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा द्वारा द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों का कॉन्ग्रेस समेत सभी विपक्षी दल कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि नए नियम द्वीप पर रहने वाली मुस्लिम आबादी की धार्मिक भावनाओं को आहत करेंगे।

लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल सहित विपक्षी दलों ने दावा किया है कि नए सुधारों का उद्देश्य द्वीपों की ‘अद्वितीय संस्कृति और परंपरा को नष्ट करन’ है।

26 ‘आतंकी आयतों’ को हटा कर नया कुरान: वसीम रिजवी ने मदरसे में पढ़ाने को लेकर PM मोदी को लिखा पत्र

शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने कुरान के 26 विवादित आयतों को हटा कर नया कुरान-ए-मजीद तैयार किया है। इसको लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। वसीम रिजवी ने बताया कि कुरान की 26 आयतों में अत्याचार, धार्मिक उन्माद फैलाने वाली बातों का जिक्र है, इसलिए उन्होंने नई कुरान लिखी और प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिख माँग की है कि पुरानी को बैन करें। 

पत्र में उन्होंने लिखा कि उनके द्वारा कुरान का अध्ययन किया गया। इस में पाया गया कि कुरान-ए-मजीद में 26 मजीद (आयत) ऐसी हैं, जो कि अल्लाह का कथन नहीं हो सकता क्योंकि उक्त आयत आतंकवाद/चरमपंथी/कट्टरपंथी मानसिकता को बढ़ावा देती है। 

वसीम रिजवी द्वारा लिखा गया पत्र (साभार: सोशल मीडिया)

उन्होंने आगे लिखा कि इन कुरान की आयतों के कारण मुस्लिम समाज में आतंकी विचारधारा पैदा हो रही है। यही कारण है कि पूरे विश्व में मुस्लिम आतंकवाद चरम सीमा पर है। गहन अध्ययन के बाद पूर्व में लिखे गए व लिखवाए गए कुरान-ए-मजीद के सूरोह को सही क्रम में लगाया गया है और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली 26 आयतों को कुरान-ए-मजीद से हटा दिया गया है।

गौरतलब है कि वसीम रिजवी ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में कुरान से 26 आयतों को हटवाने संबंधी याचिका लगाई थी। वसीम रिज़वी ने सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दाखिल की थी, उसके पीछे तर्क था कि कुरान की इन 26 आयतों में से कुछ आयतें आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली हैं, जिन्हें बाद में शामिल किया गया।

उनका कहना था कि जब पूरे कुरान पाक में अल्लाहताला ने भाईचारे, प्रेम, खुलूस, न्याय, समानता, क्षमा, सहिष्णुता की बातें कही हैं तो इन 26 आयतों में कत्ल व गारत, नफरत और कट्टरपन बढ़ाने वाली बातें कैसे कह सकते हैं।

हालाँकि कोर्ट ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने रिजवी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। उनके इस कदम के बाद मुस्लिम समाज ने उनके खिलाफ काफी नाराजगी व्यक्त की थी। उनके परिवार के लोगों ने भी उनसे रिश्ता तोड़ लिया था।

‘सॉरी मम्मी-पापा.. मनीराम ने बार-बार मेरा रेप किया, मैं आत्महत्या कर रही हूँ’: राजस्थान में खाकी ने फिर किया शर्मसार

राजस्थान में एक बार फिर खाकी को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। राज्य के मटीली थाने के सिपाही मनीराम पर कई बार बलात्कार करने का आरोप लगाकर एक महिला ने शुक्रवार (मई 28, 2021) को एफ माइनर नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली। अपने आखिरी संदेश में महिला ने मनीराम और उसकी पत्नी को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पूरा मामला केसरीसिंहपुर कस्बे का है। यहाँ 30 वर्षीय शादीशुदा महिला ने मनीराम नामक सिपाही द्वारा सताए जाने के बाद नहर में कूदकर आत्महत्या की। महिला के तीन बच्चे भी हैं। वीडियो के मुताबिक मनीराम ने उसका बार बार दुष्कर्म किया और सिपाही की पत्नी भी उसे तंग करती थी। अब पुलिस का कहना है कि महिला के पति की शिकायत पर मटीली थाने के सिपाही पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

एसपी राजन दुष्यंत ने बताया कि सिपाही मनीराम पर मुकदमा दर्ज कर उसको निलंबित कर दिया गया है। अभी वह थाने से फरार है। मामले में छानबीन के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी। पुलिस को दी रिपोर्ट में मृतिका के पति ने बताया कि उसका व उसकी पत्नी का सिपाही मनीराम के बीच कुछ दिनों से विवाद चल रहा था। इससे वह बेहद परेशान रहने लगी थी। इसको लेकर गाँव में कई बार पंचायत भी हुई, लेकिन समस्या का कोई हल नहीं निकल पाया। इससे दुखी होकर उसकी पत्नी ने नहर में कूदकर अपनी जान दे दी।

बता दें कि इस केस में महिला ने सुसाइड करने से पहले अपनी वीडियो बनाकर कहा, “मैं बस आज अपनी जिंदगी खत्म करने जा रही हूँ। सॉरी मम्मी-पापा, भैया-भाभी सबको। (रोते हुए) मैं आज अपने बच्चों को छोड़कर जा रही हूँ क्योंकि मैं अपनी जिंदगी से तंग आ गई हूँ। मेरे मरने की वजह मनीराम चौहान जो पुलिस में है और उसकी पत्नी दोनों हैं। सिर्फ और सिर्फ मैं उनकी वजह से आत्महत्या करने जा रही हूँ। मनीराम चौहान ने मेरा बार-बार दुष्कर्म किया, मुझे ब्लैक मेल किया। मेरा शारीरिक शोषण किया और उसकी पत्नी ने मुझे परेशान कर दिया। इसमें किसी की कोई गलती नहीं है। सिर्फ और सिर्फ मनीराम चौहान व उनकी पत्नी जिम्मेदार है। सबको मेरी तरफ से राम-राम।”

गौरतलब है कि राजस्थान में खाकी को शर्मसार करने वाला यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले ACP कैलाश बोहरा को एक रेप पीड़िता से रिश्वत माँगने और उसका यौन उत्पीड़न करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और उससे पूर्व एक सब इंस्पेक्टर द्वारा शिकायत दर्ज कराने आई महिला का तीन दिन तक थाना परिसर में ​ही रेप करने का मामला सामने आया था। इसके अलावा 2019 में राजस्थान के चुरु जिले में एक दलित युवक की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में भी पुलिस पर रेप के आरोप लगे थे। मृतक की 35 वर्षीय भाभी और परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया था।

पुलवामा में आतंकियों को मार बलिदान हुए थे मेजर विभूति ढौंडियाल, अब पत्नी निकिता बनीं लेफ्टिनेंट: देखें वीडियो

पुलवामा हमले में बलिदान हुए मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की पत्नी ने शनिवार (29 मई 2021) को लेफ्टिनेंट निकिता कौल ढौंडियाल के तौर पर आर्मी ज्वॉइन की। साल 2019 में कश्मीर में 55 राष्ट्रीय राइफल्स में पोस्टेड मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल पुलवामा अटैक का बदला लेते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। बलिदान के समय उनकी शादी को केवल 9 महीने ही हुए थे।

मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की मौत के बाद उनकी 27 वर्षीय पत्नी निकिता कौल ढौंडियाल ने हार नहीं मानी। उन्होंने मन बना लिया था कि वो आर्मी में जाएँगी करेंगी और दो साल बाद उन्होंने पूरे जोश के साथ भारतीय सेना को ज्वॉइन कर लिया है।

कौन हैं निकिता कौल ढौंडियाल

निकिता कौल ढौंडियाल ने 2020 में सेना में भर्ती होने के लिए वुमेन इंट्री स्कीम (डब्लूईएस) की परीक्षा दी थी, जिसमें वह उत्तीर्ण हुई थीं। निकिता इससे पहले टाटा कंसल्टेंसी में सेवारत थीं। मेजर की वीरगति के बाद उन्होंने सेना में भर्ती होने की ठानी, ताकि वह अपने पति के अधूरे सपने को साकार कर सकें। उन्होंने परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए जी तोड़ मेहनत की थी। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, अथक मेहनत और मजबूत इरादों के बल पर आखिरकार आज (29 मई 2021) वह सेना की वर्दी में नजर आ ही गईं।

पुलवामा में आतंकी हमला

पुलवामा में 14 फरवरी, 2019 को आतंकी हमला हुआ था, जिसमें सीआरपीएफ के 40 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इसके बाद 18 फरवरी को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों से साथ पुलवामा में मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए थे और 5 जवान बलिदान हुए थे। बलिदान होने वाले जवानों में मेजर विभूति ढौंडियाल भी थे। इन्हें 19 फरवरी की सुबह देहरादून में अंतिम विदाई दी गई थी। विभूति सेना के 55 आरआर (राष्ट्रीय राइफल) में तैनात थे।

बलिदानी मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की विदाई के वक्त का एक वीडियो उस समय काफी वायरल हुआ था, जिसे देखकर हर देशवासी की आँखे नम हो गई थीं। इसमें निकिता अपने पति के शव के बगल में खड़ी दिखाई दे रही थीं। वो लगातार अपने पति की तरफ देख रही थीं। कुछ देर बाद वो धीरे से अपने पति के शव की तरफ झुकीं और उन्होंने धीरे से I LOVE YOU कहा। इसके बाद उन्होंने कहा था कि वह खुद अपने वीरगति को प्राप्त हुए पति के सपनों को पूरा करेंगी।

मालूम हो कि जब मेजर ढौंडियाल का शव तिरंगे में लपेटकर देहरादून लाया गया था, तब अंतिम दर्शन में उनकी पत्नी निकिता ने सैल्यूट कर अपने पति को अंतिम विदाई दी थी और तभी सेना में सेवा करने का मन बना लिया था।

चेन्नई में अपनी ट्रेनिंग पूरी की

बताया जा रहा है कि पति की मौत के कुछ महीने के बाद ही निकिता ने शार्ट सर्विस कमीशन (SSC) का फार्म भरा और एग्जाम पास कर सर्विस सेलेक्शन बोर्ड में इंटरव्यू दिया। इंटरव्यू और एग्जाम क्लियर करने के बाद निकिता ने कमीशन के लिए ऑफिसर ट्रेनिंग एकेडमी चेन्नई में अपनी ट्रेनिंग पूरी की और अब सेना में शामिल हुई हैं।

2018 में हुई थी निकिता की शादी

बता दें कि पुलवामा में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में बलिदान हुए मेजर की उम्र उस वक्त महज 35 साल ही थी। इनकी शादी साल 2018 में हुई थी। ऐसे में निकिता कौल ने आज सभी के लिए एक नजीर पेश ​की है। उनका यह कदम काबिलेतारीफ है। निकिता के इस फैसले से उनके ससुराल वाले और माता-पिता भी बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि बेटे की शहादत के बाद निकिता ने सेना ज्वॉइन कर हमें गौरवान्वित किया है। वो जरूर अपना और देश का नाम रौशन करेंगी।

‘मेरा भारत महान नहीं, बदनाम है’ – भारतीय संविधान की कसम खाकर मुख्यमंत्री बनने वाले कॉन्ग्रेसी नेता का बयान

कोरोना पर विवादित टिप्पणी के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बमुश्किल से एक सप्ताह बाद उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से किसान विरोध के नाम पर देश में आग लगाने के लिए कहा था। अब ताजा मामले में कमलनाथ ने शुक्रवार ( 28 मई, 2021) एक बार फिर से भारत को ”महान नहीं, बदनाम” बताया है।

कमलनाथ ने प्रदेश के सतना जिले के मैहर में एक धार्मिक यात्रा के दौरान मीडिया से बात करते हुए यह विवादित टिप्पणी की। कॉन्ग्रेस नेता भारत में कोरोना की स्थिति पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “मेरा भारत महान नहीं है, बदनाम है। भारत में कोरोना वायरस के सबसे बुरे हालात को दुनिया देख रही है। अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों को भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। एक व्यक्ति ने मुझे बताया कि न्यू यॉर्क के लोग भारतीयों द्वारा चलाई जा रही टैक्सियों में बैठने से डरते हैं।”

वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी और मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता कमलनाथ राज्य की शिवराज सरकार पर निशाना साधते हुए कोरोना से होने वाली मौतों के आँकड़े को छुपाने का भी आरोप लगाया है।

कॉन्ग्रेस नेता पर बरसे शिवराज

कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ की विवादित टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेस प्रमुख भारत को बदनाम कर रहे हैं। क्या कॉन्ग्रेस बेशर्म है? इस धरती पर जन्म लेने के बाद आप भारत को बदनाम कर रहे हैं। क्या ये देशद्रोही नहीं है, या यह कॉन्ग्रेस की विचारधारा है?”

मुख्यमंत्री ने कहा कि कमलनाथ ने सरकार खोने के कारण अपना मानसिक संतुलन खो दिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी से यह स्पष्ट करने की माँग की कि क्या पार्टी (कॉन्ग्रेस) कमलनाथ के साथ है। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी को या तो स्वीकार करना चाहिए कि वह कमलनाथ से सहमत हैं या वह मध्य प्रदेश के कॉन्ग्रेस प्रमुख को बर्खास्त करें।

इससे पहले, पूर्व कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री ने दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी फैलाने के लिए चीन को कोसने के बजाय भारत को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी। सामने आए एक वीडियो में कमलनाथ को यह कहते हुए सुना गया था, “आज दुनिया इसे इंडियन कोरोना कहती है।”

दिलचस्प बात यह है कि कमलनाथ की टिप्पणी 18 मई को सामने आए टूलकिट में दिए गए निर्देशों के साथ सटीक रूप से व्यंग्य करती है। सोशल मीडिया पर सामने हुई “कॉन्ग्रेस टूलकिट” से केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत की छवि को खराब करने के लिए कॉन्ग्रेस के दुर्भावनापूर्ण प्रयासों को सामने ला दिया है। हालाँकि, मामला खुल जाने के बाद कॉन्ग्रेस ने इसे नकली बताते हुए कानूनी कार्रवाई की धमकी भी दी थी।