Home Blog Page 3918

नाममात्र के पैसे में ज्यादा काम करे यूपी-बिहार के मजदूर, इसलिए देते हैं ड्रग्स: पंजाब को चिट्ठी लिख केंद्र ने जताई चिंता

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को एक पत्र लिखा है। इसमें राज्य में काम कर रहे उत्तर प्रदेश और बिहार के मजदूरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। पत्र के मुताबिक इन मजदूरों को बंधुआ बनाकर रखा जाता है। ज्यादा काम लेने के लिए उन्हें ड्रग्स दिया जाता है। काम के एवज में उन्हें नाम मात्र का पैसा दिया जाता है।

पत्र के मुताबिक विशेषकर पंजाब के सीमावर्ती गाँवों में इन बंधुआ मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा ह। केंद्र ने राज्य सरकार से इस गंभीर समस्या पर विचार करने को कहा है।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 17 मार्च को यह पत्र पंजाब के मुख्य सचिव और डीजीपी को लिखा गया। इसमें कहा गया है कि अच्छे वेतन के वादे पर यूपी और बिहार के गरीब मजदूर अपने घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर पंजाब में काम करने के लिए जाते हैं। लेकिन, वहाँ पहुँचने के बाद उनका शोषण किया जाता है। बंधुआ मजदूरों को खेतों में लंबे समय तक काम करवाने के लिए अक्सर ड्रग्स दिया जाता है। इससे उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मंत्रालय पत्र में कहा है, “इस गंभीर समस्या पर ध्यान दें। इसमें मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और मानवाधिकारों का उल्लंघन शामिल है। आपसे अनुरोध है कि इस मामले के समाधान के लिए उचित कदम उठाएँ।” साथ ही मंत्रालय ने इस मामले में राज्य सरकार से प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए कहा है।

गृह मंत्रालय ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय को भी इस मामले पर ध्यान देने को कहा है। सभी राज्यों विशेषकर उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा को विभिन्न स्तरों पर जागरूकता पैदा करने के लिए उपयुक्त निर्देश जारी करने को कहा है। साथ ही इन राज्यों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि बेहतर रोजगार की संभावनाओं और वेतन का झूठा वादा कर गरीबों और कमजोरों को झॉंसा न दिया जा सके।

बता दें कि साल 2019 और 2020 में पंजाब के गुरदासपुर, अमृतसर, फिरोजपुर और अबोहर के सीमावर्ती गाँवों से बचाए गए लोगों की स्थिति के आधार पर यह पत्र लिखा गया है। सीमा सुरक्षा बल ने इन सीमावर्ती क्षेत्रों से 58 बंधुआ मजदूरों को बचाया था। गृह मंत्रालय के मुताबिक, पूछताछ के दौरान यह सामने आया कि इनमें से ज्यादातर की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।

‘बीजेपी ने पूरे सिस्टम पर कब्जा कर लिया है, अमेरिका कुछ बोल नहीं रहा’: राहुल गाँधी ने मोदी विरोध में विदेशी दखल को किया आमंत्रित

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने हार्वर्ड केनेडी स्कूल के प्रोफेसर निकोलस बर्न्स के साथ शुक्रवार (2 अप्रैल 2021) को लाइव चर्चा करते हुए कई मुद्दों को लेकर मोदी सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया। उन्होंने अमेरिका से भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की माँग की। बावजूद इसके कि केंद्र सरकार कई बार ये स्पष्ट कर चुकी है कि देश के अंदरूनी मामलों में न तो किसी विदेशी ताकत का हस्तक्षेप है और न ही भविष्य में ऐसा होने दिया जाएगा।

लेकिन, वायनाड के सांसद तो जैसे एक मिशन पर हों कि किसी भी सूरत में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को धूमिल करना है। हार्वर्ड केनेडी स्कूल के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड पब्लिक सर्विस’ की ओर से राहुल गाँधी को ‘भारतीय राजनीति और लोक सेवा में चुनौतियाँ, अवसर और प्रभाव’ विषय पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया था।

राहुल ने जिन निकोलस बर्न्स के साथ चर्चा की वे ग्रीस में अमेरिका के पूर्व राजदूत रहे हैं। वर्तमान में वे हार्वर्ड के जॉन एफ कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के प्रोफेसर हैं।

कार्यक्रम के अंत में जब निकोलस बर्न्स चर्चा के निष्कर्ष पर पहुँचे थे, तभी कॉन्ग्रेस नेता ने भारत में अमेरिका के हस्तक्षेप न करने को लेकर सवाल किया, जिसने कुछ देर के लिए अमेरिकी प्रोफेसर को भी स्तब्ध कर दिया। राहुल ने कहा कि वह बहुत जल्दी अपनी बात कहेंगे। उन्होंने कहा, “भारत में जो कुछ भी चल रहा है, उसके बारे में अमेरिकी सरकार की ओर से अब तक मैंने कोई टिप्पणी नहीं। अगर आप कहते हैं कि लोकतंत्र में भागीदारी है, मेरा मतलब है, यहाँ (भारत) जो भी हो रहा है उस पर आपके क्या विचार हैं?”

भारतीय अस्मिता और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के राहुल गाँधी के सवाल ने निकोलस बर्न्स को भी कुछ देर के लिए स्तब्ध कर दिया। राहुल गाँधी ने यह भी कहा, “मैं बुनियादी तौर पर मानता हूँ कि अमेरिका इस पर गहराई से विचार करेगा। स्वतंत्रता का विचार, आपके संविधान में निहित है जो बहुत ही शक्तिशाली है। लेकिन, आपको स्वतंत्रता की उस विचारधारा का बचाव करना पड़ा। यही असली सवाल है।” हालाँकि, राहुल के इस सवाल को ज्यादा तवज्जो नहीं देते हुए बर्न्स ने कहा कि वे अगले सप्ताह दूसरे भारतीय अतिथियों के साथ अगला सत्र करेंगे तो इस सवाल का जवाब देंगे।

इस चर्चा के दौरान राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी जमकर आलोचना की। उन्होंने कृषि कानून, लॉकडाउन के साथ ही असम में बीजेपी नेता की कार में मिले ईवीएम तक का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह एक बहुत ही गंभीर मामला है, लेकिन कोई भी नेशनल चैनल इसे कवर नहीं कर रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पूरे सिस्टम पर कब्जा कर लिया है। यही कारण है कि कॉन्ग्रेस तो क्या कोई भी विपक्षी दल बीजेपी का मुकाबला नहीं कर पा रहा है।

कॉन्ग्रेस MLA के बेटे ने पार्टी की महिला नेता से किया रेप, गैंगस्टर से पूरे परिवार को मरवाने की धमकी: FIR दर्ज

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले की बड़नगर विधानसभा के कॉन्ग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के बेटे पर दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला इंदौर के महिला थाने में एक युवती ने दर्ज करवाया है। युवती ने आरोप लगाया है कि शादी का झाँसा देकर उसके साथ रेप किया गया है। आरोपित करण मोरवाल उज्जैन के युवा कॉन्ग्रेस के पूर्व जिला कार्यकारी अध्यक्ष रह चुके हैं। युवती की शिकायत पर पुलिस ने धारा 376 के तहत करण मोरवाल पर मामला दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है।

युवा कॉन्ग्रेस की पदाधिकारी है युवती

बताया गया है कि जिस युवती ने विधायक मुरली मोरवाल के बेटे पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है, वो युवा कॉन्ग्रेस की पदाधिकारी है। युवती बीते साल दिसंबर में करण मोरवाल के संपर्क में आई थी। इससे पहले युवती ने गुरुवार (अप्रैल 1, 2021) को डीआईजी से मामले की शिकायत की थी और फिर शुक्रवार (अप्रैल 2, 2021) को पुलिस ने युवती की शिकायत पर विधायक के बेटे के खिलाफ धारा 376 के तहत मामला कर लिया।

पीड़िता का आरोप है कि कुछ महीनों पहले करण भवरकुआं थाना क्षेत्र में किसी होटल में लेकर उसे गया था। वहाँ उसने कई बार युवती के साथ दुष्कर्म किया। युवती पुलिस से शिकायत ना करे, इसके लिए कई बार जान से मारने की धमकी भी दे चुका है।

थाना प्रभारी ज्योति शर्मा के मुताबिक पीड़िता की कैंट रोड पर कुछ वर्षों पहले करण से मुलाकात हुई थी। उसने वैलेंटाइन डे के दिन युवती को प्रपोज करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती ने दावा किया है कि विधायक के बेटे के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग उसके पास हैं, जिसमें वह उसे धमकियाँ दे रहा है। आरोपित विधायक पिता का रौब झाड़ कर धमकाता था।

युवती का आरोप है कि विधायक के बेटे ने उसे शादी का झाँसा दिया और नशीला पदार्थ पिला कर घर लाकर भी उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने जब शादी की बात की तो वह उसे उल्टा धमकाने लगा। विधायक के बेटे ने एक गैंगस्टर से भी उसे व उसके परिवार को मरवा देने की सुपारी देने की धमकी दी। पीड़िता ने पुलिस में शिकायत करने की बात कही तो उसे पैसे देकर मामला निपटाने को कहा।

पीड़िता को पता चला कि करण इसी तरह से और लड़कियों का शोषण कर चुका है। जिसके बाद वह होटल गई और वहाँ से मौजूदगी के सबूत इकट्ठे किए। इसके बाद उसकी इमारत में लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज भी निकाले। इन फुटेज में करण उसे सहारा देकर ले जाते हुए दिखाई दे रहा है। इससे स्पष्ट हो गया कि करण ने नशे की हालत में उसके साथ संबंध बनाए थे।

कॉन्ग्रेस विधायक ने आरोपों को बताया झूठा

इस पूरे मामले में कॉन्ग्रेस विधायक मुरली मोरवाल व उनके बेट करण मोरवाल की तरफ से भी इंदौर पुलिस महानिरीक्षक को एक लिखित में आवेदन दिया गया है। जिसमें बताया गया है कि युवती द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत हैं, क्योंकि युवती खुद करण मोरवाल पर शादी करने के लिए दबाव बना रही थी और पूर्व में युवती ने उसे झूठे रेप के मामले में फँसाने की धमकी भी दी थी। इसके साथ ही मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग भी की गई है।

पहले भी चर्चा में आ चुके हैं करण मोरवाल

कुछ महीने पहले करण मोरवाल का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह एक महिला पटवारी को धमकाते सुनाई दे रहे थे। वायरल हुए ऑडियो में MLA पुत्र और महिला पटवारी के बीच बातचीत हो रही थी। बताया गया था कि शहर की सरकारी जमीन पर एक ग्रामीण कब्जा कर मकान बना रहा था, जिसे MLA पुत्र बनने देने के लिए कह रहा था, जबकि महिला पटवारी कार्रवाई करने की बात कह रही थी।

‘नेशन ऑफ इस्लाम’ के नेता का समर्थक, मुहम्मद नाम रखने के लिए पेटिशन: कैपिटल हिल के हमलावर को जानिए

वॉशिंगटन में अमेरिकी संसद (कैपिटल हिल) के बाहर भारतीय समयानुसार शुक्रवार देर रात हमला। हमलावर ने पहले कार से बैरिकेड को टक्कर मारी और फिर चाकू से पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। एक पुलिस अफसर की मौत हो गई और एक अन्य जख्मी हैं। संदिग्ध हमलावर भी पुलिस की गोली लगने से मारा गया।

हमलावर की पहचान नोआह ग्रीन के रूप में हुई है। उसकी उम्र 25 वर्ष के करीब बताई जा रही। हमले का मकसद साफ नहीं है। पुलिस ने इसके आतंकी घटना होने से इनकार किया है। मारे गए पुलिस अफसर की पहचान विलियम एफ इवांस के तौर पर हुई है। वे कैपिटल पुलिस फोर्स में 18 साल से सेवा दे रहे थे।

कैपिटल पुलिस चीफ वाईडी पिटमैन ने एक बयान में कहा है कि डिपार्टमेंट के फर्स्ट रिस्पॉन्डर यूनिट में तैनात बिली हमले में जख्मी हो गए और कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। दूसरे पुलिस अधिकारी की स्थिति स्थिर है और वे खतरे से बाहर हैं। पिटमैन ने बताया कि बैरिकेड को टक्कर मारने के बाद हमलावर हाथ में चाकू लिए कार से बाहर निकला।

वाशिंगटन मेट्रोपोलिटन पुलिस डिपाटमेंर्ट के मुखिया राबॅर्ट जे कोंटी ने बताया कि जाँचकर्ताओं के सामने फिलहाल हमले का मकसद स्पष्ट नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि यह हमला आतंकवाद से जुड़ा नहीं है। संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी ने इवांस को लोकतंत्र के लिए बलिदान होने वाला बताया। राष्ट्रपति जो बिडेन ने इवांस के सम्मान में ह्वाइट हाउस पर और पेलोसी ने कैपिटल हिल बिल्डिंग पर राष्ट्रध्वज को आधा झुकाने का आदेश दिया है।

कौन था हमलावर?

पिटमैन ने हमलावर की पहचान ग्रीन के तौर पर होने की पुष्टि नहीं की, लेकिन बताया कि हमलावर का एजेंसियों के पास कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। लेकिन अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से उसकी पहचान ग्रीन के तौर पर की गई है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार हमलावर ने फेसबुक पेज पर खुद को ‘नेशन ऑफ इस्लाम’ के लीडर लुइस फर्रखान (Louis Farrakhan) का समर्थक बताया था। यह पेज अब हटा लिया गया है। ग्रीन इंडियाना का रहने वाला था और कैपिटल पुलिस की गोली लगने से वह मारा गया। वह वेस्ट वर्जीनिया में पैदा हुआ था और 2019 में फाइनेंस की डिग्री के साथ ग्रेजुएशन पूरा किया था। दिसंबर 2020 में उसने अपना नाम बदलकर नोआह जईम मुहम्मद रखने के लिए पेटिशन दी थी। लेकिन बीते मंगलवार को इसकी सुनवाई के वक्त इंडियाना पुलिस के सामने पेश होने में नाकाम रहा था।

फेसबुक पेज पर उसने फर्रखान और 1934 से 1975 तक नेशन ऑफ इस्लाम की अगुवाई करने वाले एलिजाह मुहम्मद (Elijah Muhammad) के भाषण और लेख शेयर कर रखे थे। फेसबुक पर उसने कोरोना महामारी के कारण अपने जीवन के संघर्षों को लेकर भी पोस्ट कर रखा था। 17 मार्च को उसने नेशन ऑफ इस्लाम के वर्जीनिया चैप्टर को दिए दान की तस्वीर पोस्ट की थी। साथ ही फर्रखान के एक भाषण का वीडियो पोस्ट किया था, जिसका शीर्षक ‘द डिवाइन डिस्ट्रक्शन ऑफ अमेरिका’ था। इसके बाद उसने अपने दोस्तों को इससे जुड़ने और फर्रखान तथा मुहम्मद के बारे में पढ़ने को प्रोत्साहित किया था।

गौरतलब है कि कैपिटल हिल में इससे पहले 6 जनवरी को हुई हिंसा में दर्जनों घायल हो गए थे और 5 की मौत हो गई थी।

‘इस्लामोफोबिया’ से लड़ने के लिए मेगन मर्केल ने दिया दान, संस्था ने नहीं किया सार्वजनिक: जानिए वजह

प्रिंस हैरी की पत्नी मेगन मर्केल फिर से सुर्खियों में हैं। इस्लामोफोबिया से लड़ने का दावा करने वाली ब्रिटेन की संस्थान ‘हिम्माह (Himmah)’ का कहना है कि उसे मर्केल से दान मिला था। लेकिन, उन्होंने इसे सार्वजनिक नहीं किया, क्योंकि आशंका थी कि इससे मर्केल की प्रतिष्ठा को नुकसान हो सकता है।

बीबीसी न्यूज को संस्था के डायरेक्टर साजिद मोहम्मद ने बताया, ”हमारे द्वारा इसे सार्वजनिक नहीं किए जाने का कारण यह है कि ट्रस्टियों का मानना था कि वह काफी चर्चित हैं और ऐसे में रेप्यूटेशॅन से जुड़े विवाद हो सकते हैं। लोग हमारे चैरिटी को पसंद नहीं कर रहे हैं, क्योंकि वे उसे (मेगन मार्केल) पसंद नहीं करते हैं। इसलिए हमने दान गुप्त रखने का फैसला किया।”

उन्होंने कहा कि उन्होंने ओपरा विन्फ्रे के साथ विवादास्पद इंटरव्यू के बाद दंपती के प्रति एकजुटता का भाव दिखाने की आवश्यकता महसूस की। यह इंटरव्यू मार्च में सीबीएस पर प्रसारित हुआ था। उनके अनुसार, अगस्त में द रॉयल फाउंडेशन के माध्यम से $13,000 (£ 10,000) का दान प्राप्त किया गया था।

साजिद मोहम्मद ने कहा, “इंटरव्यू के बाद हमें अहसास हुआ कि हम गरीबी और नस्लवाद के विरुद्ध चलने वाले संगठन हैं। हमें एकजुटता दिखाने की जरूरत है।” उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने शुरू में सोचा था कि यह एक बड़ा झूठ है लेकिन जब उन्हें अहसास हुआ कि यह वास्तविकता है तो वह बहुत रोए। मोहम्मद ने कहा कि हिम्माह के वॉलिंटियर और ट्रस्टी पूर्ण रूप से रानी की दयालु, उदार और विनम्र बातों से ऊपर उठ गए थे।

बता दें कि पिछले दिनों मेगन मर्केल और प्रिंस हैरी के इंटरव्यू ने एक बड़े विवाद को जन्म दिया था। इस इंटरव्यू में दंपती ने ब्रिटिश शाही परिवार पर नस्लीय भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए थे। मेगन ने ओप्रा विन्फ्रे को बताया था कि जब वह गर्भवती थीं, तो शाही परिवार में बहुत सी चर्चाएँ जोरों पर थीं। जैसे- मेगन और प्रिंस हैरी के बच्चे को कोई शाही खिताब नहीं दिया जा सकता है या उनके बच्चे का रंग कैसा होगा।

बता दें कि शाही परिवार से नाता तोड़कर जीवन में आगे बढ़ने का निर्णय लेने के कारण प्रिंस हैरी और उनकी पत्नी मेगन मार्केल (Meghan Markle) लंबे समय से चर्चा में हैं। कथित तौर पर इस जोड़े ने शाही परिवार में बड़ी अजीब परिस्थितियों का सामना किया। मेगन को तो नस्लीय भेदभाव भी झेलना पड़ा। ओप्रा से बात करते हुए, मेगन मर्केल ने बताया था कि वह उस समय बहुत चिंतित थीं जब उन्हें पता चला कि यूके का शाही परिवार हैरी और उनके बच्चे आर्ची को कोई सुरक्षा नहीं दे रहा है।

‘असम में दाढ़ी, टोपी और लुंगी वालों की होगी सरकार’: बदरुद्दीन अजमल के बेटे ने अलापा ‘बुर्का’ और ‘इस्लामी टोपी’ का राग

असम में कॉन्ग्रेस की साझेदार बदरुद्दीन अजमल की AIUDF लगातार विवादों में बनी हुई है। अब AIUDF प्रमुख के बेटे अब्दुर रहीम अजमल ने विवादित बयान दिया है। रहीम ने दावा किया है कि वह दाढ़ी, टोपी और लुंगी पहनने वाले लोगों की सरकार बनाएँगे।

अपनी पार्टी उम्मीदवार फणीधर तालुकदार के लिए असम के बभनीपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, अब्दुर रहीम अजमल ने बंगाली में कहा, “इस बार यह गरीब लोगों की सरकार होगी। सरकार में दाढ़ी, टोपी और लुंगी वाले पुरुष होंगे।”

दूसरी रैली में अजमल ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद लोगों को बुर्का, दाढ़ी और इस्लामी टोपी की इज्जत करनी होगी। AIUDF प्रत्याशी अशरफ्फुल हुसैन के लिए चेंगा विधानसभा में रैली को संबोधित करते हुए अजमल ने कहा, “हमारी माताओं और बहनों के दुपट्टे का सम्मान करना होगा, हमारी माताओं और बहनों के बुर्का का सम्मान करना होगा, हमारी दाढ़ी और टोपी का सम्मान करना होगा।”

बता दें कि अब्दुर रहीम अजमल जमुनामुख निर्वाचन क्षेत्र से AIUDF विधायक हैं। हालाँकि, इस बार एआईयूडीएफ द्वारा बदरुद्दीन अजमल के भाई सिराजुद्दीन अजमल को इस सीट से उम्मीदवार बनाया गया है।

गौरतलब है कि राज्य में दाढ़ी, टोपी और बुर्का बांग्लादेशी घुसपैठियों की ओर इशारा करता है। असम के मुसलमान ऐसी पोशाकों से पहचाने नहीं जाते। वह असमियों की तरह की रहते हैं। ऐसे में बार-बार चुनावी रैली में दाढ़ी, इस्लामी टोपी, लुंगी, बुर्के का नाम लाकर अब्दुर रहीम बता रहे हैं कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन यदि सत्ता में आया तो वह मियाँ मुस्लिमों की सरकार बनवाएँगे और बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए काम करेंगे।

गौरतलब है कि अभी हाल में एक चुनावी रैली में स्वयं ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल असम के सांस्कृतिक प्रतीक ‘गमोसा’ का अपमान करते नजर आए थे। इसके बाद AIUDF मुखिया की हर जगह आलोचना हुई। पीएम ने भी रैली में कहा कि इससे लोगों की भावनाएँ आहत हुई है और उनमें गुस्सा है।

शिखा, तिलक, रुद्राक्ष, अगरबत्ती से होती है बॉलीवुड की कॉमेडी, तभी नेता भी कहते हैं- चोटीवाला राक्षस

क्या आपने किसी फिल्म में किसी मौलवी को कॉमेडी करते हुए देखा है? या फिर लोगों को किसी पादरी का अपमान करते हुए? क्या किसी फिल्म या वेब सीरीज में आपने देखा है कि किसी गुरुद्वारा का ग्रंथी गंदी-गंदी गालियाँ बक रहा हो? लेकिन हाँ, ब्राह्मणों को ऐसे करते हुए अनगिनत फिल्मों में दिखाया गया है। आने वाली फिल्म ‘भूल भुलैया 2’ में भी दिखाया जाएगा, ‘छोटे पंडित’ के जरिए। तभी तो कुछ नेता ‘चोटीवाला राक्षस’ जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं।

आपको ‘भूल भुलैया’ का ‘छोटे पंडित’ याद है? हाँ वही किरदार, जिसे राजपाल यादव ने निभाया था। एक ब्राह्मण, जिसका दिमाग हिला हुआ रहता है और वो अजीबोगरीब हरकतें कर भूत भगाने की चेष्टा करता है। फिर डर के मारे उसका लोटा नीचे जा गिरता है। इसके बाद ‘छोटे पंडित’ पागलों की तरह अजीबोगरीब बातें करता है। साइकिल को गधा कहता है। पानी से डरता है। उछलता-कूदता है।

‘छोटे पंडित’ के किरदार और वेशभूषा को देखिए। वो पूजा-पाठ कराने वाले ब्राह्मण की वेशभूषा में रहता है। शरीर के ऊपरी भाग में कोई कपड़ा नहीं, लेकिन तरह-तरह की मालाएँ लटकी हुई होती हैं। अपने बाल में ही उसने अगरबत्ती का निचला सिरा खोंसा होता है। अगरबत्ती जल रही होती है और उससे धुआँ निकल रहा होता है। शरीर के निचले हिस्से में धोती होती है। धोती को ऊपर उठा कर वो कॉमेडी करता है।

लेकिन, सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात है ‘छोटे पंडित’ की शिखा। उसके बालों के ऊपर से ऊँची उठी हुई शिखा को दिखाया गया है। जाहिर है, उसे कॉमेडी के लिए ही ऐसा डिजाइन किया गया था, क्योंकि बॉलीवुड के लिए शिखा हँसी-मजाक की चीज है, हास्यास्पद विषय-वस्तु है। फिल्म के पहले हिस्से में तो वो रामनामी गमछा डाले हुए भी दिखता है। बाद में उसे एकदम पागल और ‘हिला हुआ’ ही दिखाया गया है।

अब ‘भूल भूलैया 2’ आ रहा है। समय के साथ चीजें बदलती हैं, लेकिन ब्राह्मणों और हिन्दुओं के प्रति बॉलीवुड का भाव वही है। इसमें अक्षय कुमार की जगह युवा कार्तिक आर्यन मुख्य किरदार में हैं। पोस्टर में उन्हें भी हिन्दू साधु की ‘कॉमिक’ वेशभूषा में दिखाया गया था। अब उन्होंने इसी फिल्म से राजपाल यादव का लुक पोस्ट किया। इसमें कपड़े भले ही भगवा से सफ़ेद हो गए हों, लेकिन तिलक और शिखा ज़रूर है कॉमेडी के लिए।

साथ ही इस बार बाहों और गले में रुद्राक्ष की मालाएँ दिख रही हैं। कॉमेडी के लिए इन चीजों का मिश्रण बॉलीवुड वालों के लिए काफी अच्छा होता है। कार्तिक आर्यन ने होली के दिन इस तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा था, “छोटे पंडित और मेरी तरफ से हैप्पी होली। पानी से बच कर रहना इस साल।” ‘भूल भुलैया’ में ‘छोटे पंडित’ को बताया जाता है कि पानी ठीक नहीं है उसके लिए, इसीलिए वो पानी से डरता है।

जैसा कि स्पष्ट है, बॉलीवुड का कोई अभिनेता किसी मौलवी की वेशभूषा वाले व्यक्ति के साथ तस्वीर पोस्ट कर के ईद पर माँस से बच के रहने को नहीं लिखेगा। किसी पादरी की वेशभूषा में एक्टर के साथ तस्वीर पोस्ट कर के क्रिसमस पर कैन्डल से दूर रहने का ज्ञान भी नहीं देगा। होली पर पानी बचाने से लेकर रंगों का उपयोग न करने तक, ज्ञान ही ज्ञान दिया जाता है। वो भी एक ऐसे फिल्म के सेट से, जिसमें हिन्दू क्रियाकर्म और ब्राह्मणों का मजाक बनाया जाना है।

अभी आशुतोष राणा और सान्या मल्होत्रा की वेब सीरीज ‘Pagglait (पगलैट)’ भी आई है। उसमें आशुतोष राणा अपने बेटे की अस्थि लेकर अंतिम क्रियाकर्म के लिए किसी मंदिर में जाते हैं और पंडितों से डिस्काउंट की बात करते हैं। उसमें ब्राह्मणों को उनके कार के आसपास बड़ी संख्या में आकर उनसे क्रियाकर्म करवाने के लिए हंगामा करते हुए दिखाया गया है। ये सब तो बस ताज़ा उदाहरण हैं।

बस यहीं से ‘चोटीवाला राक्षस’ सेंटीमेंट जन्म लेता है। शिखा रखने वाले भाजपाई, विरोधी नेताओं के लिए राक्षस इसीलिए हो जाता है, क्योंकि बॉलीवुड में उसे चुगलखोर, धोखेबाज और जोकर बना कर ही दिखाया गया है। उसे राक्षस कह देने पर किसी की भावनाएँ आहत नहीं होंगी, ऐसा ग्रांटेड मान कर चला जाता है। तभी TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी कह दिया कि ‘चोटीवाला राक्षस गोत्र’ से बेहतर है कि रोहिंग्या ही हो।

फराह खान, भारती सिंह और रवीना टंडन जैसी हस्तियों को बाइबिल के एक शब्द को लेकर कॉमेडी करने के बाद कई बार माफ़ी माँगनी पड़ी थी। सोशल मीडिया की माफी से काम नहीं चला तो सबने वेटिकन के पादरी के पास जाकर हस्तलिखित माफ़ी माँगी थी। इस्लाम पर टिप्पणियों से भारत में कमलेश तिवारी और फ़्रांस में सैमुअल पैटी जैसा हाल किया जाता है। ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं। अब तो खालिस्तानी भी खासा डर का माहौल क्रिएट कर रहे हैं।

क्या ये ज़रूरी है कि अगर कोई धर्म सहिष्णु है, गाली सह कर भी चुप है और अपने देवी-देवताओं पर गलत टिप्पणियों के कारण आहत होकर भी उग्र नहीं होता है तो सब खुल कर यही सब करने लगें? ऐसी चीजों का आज कड़ा विरोध नहीं हुआ तो कल को ‘भूल भुलैया 3’ में भी शिखा-तिलक से कॉमेडी होगी और कोई नेता बाह्मणों को फिर से ‘राक्षस’ कहेगा।

रॉबर्ट वाड्रा कोरोना पॉजिटिव, उद्धव ठाकरे ने कहा- हालात नहीं सुधरे तो महाराष्ट्र में लग सकता है लॉकडाउन

देश में कोरोना वायरस का संक्रमण फिर से बढ़ता जा रहा है। पिछले 24 घंटों में देश में 81,000 नए मामले आए हैं। राज्यों की बात करें तो सबसे खराब स्थिति में महाराष्ट्र है, जहाँ शुक्रवार (02, अप्रैल) को लगभग 47,000 नए संक्रमित मिले हैं और 202 मरीजों की मृत्यु हुई है। महाराष्ट्र में अब पुनः लॉकडाउन की स्थिति निर्मित हो रही है।

महाराष्ट्र में बढ़ते संक्रमण के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का बयान भी सामने आया है। ठाकरे ने कहा है कि यदि महाराष्ट्र में संक्रमण की ऐसी ही स्थिति बनी रही तो वे लॉकडाउन की स्थिति इनकार नहीं करेंगे। इसका मतलब हुआ कि यदि महाराष्ट्र में आने वाले कुछ दिनों में संक्रमण की रफ्तार कम नहीं हुई तो एक बार फिर लॉकडाउन लग सकता है। महाराष्ट्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से संबंधित खबरों पर उद्धव ने कहा कि यदि संक्रमण की स्थिति ऐसी ही बनी रही तो अगले 15-20 दिनों में स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी आ जाएगी। मुंबई शहर में भी आठ हजार से अधिक नए संक्रमित मिले हैं और 20 मरीजों की मौत हुई है।

महाराष्ट्र के पुणे शहर में कल (3 अप्रैल) से मिनी लॉकडाउन प्रारंभ हो रहा है। अगले सात दिनों तक पुणे में रेस्टोरेंट, सिनेमाघर, मॉल और धार्मिक स्थल पूरी तरह से बंद रहेंगे। साथ ही अगले सात दिनों के लिए पुणे में शाम को 6 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगा रहेगा। पिछले दो दिनों से पुणे में लगभग 8000 नए मरीज सामने आए हैं।

इस बीच कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा भी कोविड-19 से संक्रमित हो गए हैं। प्रियंका ने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए बताया कि कोरोना संक्रमण के संपर्क में आने के कारण उन्हें अपना असम का चुनावी दौरा रद्द करना पड़ा। हालाँकि प्रियंका की रिपोर्ट निगेटिव आई है किन्तु उन्हें आइसोलेशन में रहने की सलाह दी गई है। इससे पहले रॉबर्ट वाड्रा ने ट्वीट करके अपने संक्रमित होने की जानकारी दी थी।

जवाब ममता बनर्जी को, निशाने पर हिंदू: इशारों में हिंदुओं को ‘बिकाऊ’ बता गए ओवैसी

बंगाल विधानसभा चुनाव में अब असदुद्दीन ओवैसी भी चर्चा में हैं। ममता बनर्जी को जवाब देते हुए ओवैसी ‘गोत्र’ के विषय में कुछ ऐसा कह गए, जिसे लेकर उनकी तीव्र आलोचना हो रही है। ममता ने ओवैसी के विषय में कहा कि भाजपा से पैसे लेकर हैदराबाद से एक आदमी मुस्लिम वोट काटने आया है। इसके जवाब में ओवैसी ने कहा कि आप उस व्यक्ति को नहीं खरीद सकते जिसका कोई गोत्र नहीं है।

कुछ समय से ममता बनर्जी लगातार अपने ऊपर लगाए जाने वाले मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को नकारने का प्रयास करती रही हैं। उन्हें अब अपनी ‘हिन्दू पहचान’ भी याद आ रही है। चुनावी लाभ लेने के इसी प्रयास में कूच बिहार में ममता बनर्जी ने असदुद्दीन ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि हैदराबाद से एक आदमी बंगाल आया है जिसने भाजपा से पैसे लिए हैं और वह बंगाल में मुस्लिम वोट काटने का काम करेगा।

ओवैसी ने ट्विटर के माध्यम से ममता बनर्जी को जवाब दिया। 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए ओवैसी ने कहा कि ममता ने गुजरात में ‘मुस्लिमों के नरसंहार’ के विरुद्ध लाए गए प्रस्ताव के विरुद्ध मतदान किया था। ओवैसी ने पूछा कि क्या ममता ने यह मुफ्त में किया था, इसके पैसे लिए थे अथवा मंत्री पद के लिए चुप रहीं थी?   

ओवैसी ने आगे कहा कि आप उस व्यक्ति को नहीं खरीद सकते जिसका कोई गोत्र नहीं है। ओवैसी ने यह बात ममता बनर्जी के उस बयान के जवाब में कही, जिसमें उन्होंने कहा था कि हालाँकि उनका गोत्र ‘शांडिल्य’ है किन्तु फिर भी एक मंदिर में पुजारी द्वारा गोत्र पूछे जाने पर उन्होंने ‘माँ-माटी-मानुष’ को ही अपना गोत्र बताया था। इस बयान पर भाजपा और ओवैसी दोनों ने ही ममता बनर्जी की आलोचना की। भाजपा ने जहाँ ममता को ‘सीजनल हिन्दू’ बताया वहीं ओवैसी ने कहा कि बंगाल में खुद को ज्यादा हिन्दू दिखाने की रेस लगी हुई है।

हालाँकि ओवैसी का यह बयान कि जिसका गोत्र नहीं होता उसे ‘खरीदा’ नहीं जा सकता है, कहीं अधिक सांप्रदायिक है, क्योंकि इसका मतलब यही है कि सभी हिन्दू (क्योंकि गोत्र तो हिंदुओं के ही होते हैं) खरीदे-बेचे जा सकते हैं, लेकिन मुसलमान नहीं। ओवैसी भले ही अन्य नेताओं पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाते हों, किन्तु उनका यह बयान बताता है कि वे किसी भी अन्य नेता से कहीं अधिक सांप्रदायिक हैं।

सोशल मीडिया में भी कई यूजर्स ने ओवैसी के इस बयान के बाद उनकी आलोचना की।

हिंदुओं के लिए ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM की घृणा किसी से भी छुपी नहीं है। कुछ ही दिनों पहले तेलंगाना के भैंसा में हुए हिन्दू-मुस्लिम दंगों के बाद पुलिस ने 22 लोगों को गिरफ्तार किया, जिसमें ओवैसी की पार्टी का एक काउन्सलर भी शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार AIMIM का एक नेता पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज हुआ है।

2020 में कर्नाटक के गुलबर्ग में एक सीएए विरोधी रैली में AIMIM के नेता वारिस पठान मुसलमानों से यह अपील करते पाए गए कि अब मुसलमानों के संगठित होने और ‘स्वतंत्रता’ प्राप्त करने का समय आ गया है। पठान ने यह भी कहा था कि भले ही हिन्दू संख्या मे 100 करोड़ हैं किन्तु 15 करोड़ मुसलमान उन पर भारी पड़ सकते हैं। इस रैली में AIMIM अध्यक्ष ओवैसी भी मौजूद थे।  

बिहार की जिस ‘लखटकिया खेती’ की चर्चा से बाजार गर्म, वह जमीन पर मिली ही नहीं: रिपोर्ट

बिहार के एक युवा किसान अमरेश सिंह पिछले कुछ दिनों से मीडिया में छाए हुए हैं। इसकी वजह विश्व की सबसे कीमती सब्जी की खेती है। अमरेश औरंगाबाद जिले के नवीनगर प्रखंड के करमडीह गाँव के निवासी हैं।

रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि अमरेश सिंह ने बड़ी मेहनत के बाद लखटकिया सब्जी की खेती की है। इसका नाम हॉप शूट्स है और कीमत लगभग 1 लाख रुपए प्रति किलो है। 

खबरों में यह भी कहा गया कि अमरेश ने दो माह पहले हॉप शूट्स का पौधा हिमाचल प्रदेश से मँगवाया था, जो अब धीरे-धीरे बड़ा हो रहा है। अगर वह कामयाब हुए तो बिहार के किसान उम्मीद से ज्यादा कमाई कर अपनी किस्मत पलट सकते हैं।

दैनिक जागरण ने इस लखटकिया खेती को लेकर मीडिया में किए जा रहे सभी दावों को खारिज किया। पोर्टल पर प्रकाशित एक्सक्लूसिव खबर के अनुसार जागरण को जमीनी तहकीकात में न तो कोई खेत मिला और न ही ऐसी कोई सब्जी।

पूछने पर अमरेश ने कहा कि उन्होंने ट्रॉयल के तौर पर खेती शुरू की थी। लेकिन साथी के बीमार पड़ जाने के चलते वह उसकी देखरेख नहीं कर सके और फसल सूख गई। अब वे फिर से खेती करेंगे।

जागरण का कहना है कि विभिन्न समाचार माध्यमों से बताया जा रहा था कि खेती 60 फीसद सफल रही। लेकिन वास्तविकता में उन्हें हॉपशूट्स कहीं नजर नहीं आया। अमरेश ने काले चावल और काले गेंहूँ उगाए थे, जिसकी खेती बिहार में कई जगह हो रही है।

ग्रामीणों ने जताई खेती से अनभिज्ञता

ग्रामीणों ने भी ऐसी किसी खेती को लेकर अपनी अनभिज्ञता जाहिर की। परिजनों से बात करने पर उन्होंने अमरेश से फोन पर बात करवाई। जहाँ उन्होंने ये कह दिया कि वे नालंदा में खेती कर रहे हैं। जब नालंदा में जगह को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कुछ नहीं बताया। बाद में नालंदा में भी पता किया गया तो ऐसी कोई खेती की सूचना नहीं मिली।

जागरण ने पड़ताल के दौरान जब अमरेश से पूछताछ की तो उन्होंने अपने बीमार होने का हवाला दिया। वह बोले कि उन्‍होंने उत्‍तर प्रदेश के गाेंडा में 20 एकड़ जमीन लीज पर ली है, जिसमें 5 कट्ठे में हॉप शूट्स की खेती कर रहे हैं। इस खेती के लिए वाराणसी में डॉ. लाल से प्रशिक्षण लिया है।

अमरेश की बात की पुष्टि के लिए जब वाराणसी के भारतीय सब्जी अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. जगदीश सिंह बात की गई, तो उन्‍होंने पूरी खबर को फर्जी बताया। वह बोले कि यहाँ न कोई डॉ. लाल हैं और न ही हॉप शूट्स नाम की दुनिया की सबसे महँगी सब्जी का बीज तैयार किया गया है।

फर्जी खेती का मामला निकला तो होगी कार्रवाई: उद्यान निदेशक

खबर के अनुसार, सहायक उद्यान निदेशक जितेंद्र कुमार ने बताया कि जब उन्होंने पड़ताल की तो पता चला कि ऐसी कोई खेती औरंगाबाद में नहीं की गई है। उद्यान निदेशक ने कहा कि अमरेश के दावे की उच्चस्तरीय जाँच की जा रही है। अगर फर्जी खेती का मामला निकला तो कार्रवाई भी की जाएगी। जिला कृषि कार्यालय के अधिकारी इस पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।

हॉप शूट्स क्या है?

हॉप शूट्स एक ऐसी सब्जी है जिसके फूलों का प्रयोग बीयर बनाने में किया जाता है। इससे कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों की दवाएँ बनती हैं। इसकी टहनी खाई जाती है और आचार भी तैयार किया जाता है। सर्वप्रथम इसकी खेती जर्मनी ने शुरू की थी। बाद में यूरोपीय देशों में इसकी पैदावार होने लगी।