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पिंजड़ा तोड़ की नताशा नरवाल पर UAPA के तहत मामला दर्ज: देवांगना के साथ मिल मुस्लिमों को दंगों के लिए उकसाया था

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के आरोप में गिरफ्तार लेफ्ट एक्टिविस्ट ग्रुप ‘पिंजरा तोड़’ की सदस्य और जेएनयू की छात्रा नताशा नरवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया है।

फरवरी में हुई हिंसा के मामले में नताशा नरवाल ओर देवांगना कलिता को 23 मई को गिरफ्तार किया था। 24 मई को दोनों को कोर्ट में पेश किया गया था। लेकिन दोनों को जमानत मिल गई थी। इसके फौरन बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दोनों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और आपराधिक साजिश के आरोप में गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए दो दिन का रिमांड ले लिया था। 

जाँच के बाद पुलिस ने नताशा के खिलाफ UAPA के तहत कार्रवाई का फैसला किया है। पुलिस ने बताया कि देवांगना भी दंगों में भूमिका के मद्देनजर अपराध शाखा की जाँच के दायरे में हैं और 11 जून तक न्यायिक हिरासत में है। फिलहाल दोनों मंडोली जेल में बंद हैं।

नताशा नरवाल और देवांगना कलीता जेएनयू की छात्राएँ हैं। कलीता सेंटर फॉर वीमेन स्टडीज में एमफिल, जबकि नरवाल सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज की पीएचडी की छात्रा है। दोनों पिंजरा तोड़ संगठन की संस्थापक सदस्य हैं, जिसे 2015 में स्थापित किया गया था। इन दोनों के खिलाफ दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल, जाफराबाद पुलिस और क्राइम ब्रांच द्वारा मामले की जाँच की जा रही है।

पिंजरा तोड़ के सदस्यों ने 22 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के लिए स्थानीय निवासियों को भड़काया और उन्हें जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा होने के लिए कहा। पूछताछ में खुलासा हुआ था कि नताशा और देवांगना ने मुस्लिमों को भड़काने के लिए पूरी रणनीति तैयार की थी। 

नताशा और देवांगना ने साजिश रच के 66 फूटा सड़क को ठप्प करवाया था। दोनों का काम जाफराबाद तक ही सीमित नहीं था। इन्होंने कई अन्य इलाकों में घूम-घूम कर मुस्लिमों को भड़काया और दंगों में भाग लेने को उकसाया।

नताशा नरवाल ने वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के लिए तीन लेख लिखे थे। उसने ‘न्यूजलॉन्ड्री’ के लिए भी लेख लिखा था। बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 53 लोगों की मौत हो गई थी और 400 से अधिक घायल हुए थे।

J&K: कुलगाम में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद

कुलगाम जिले के वानपोरा इलाके में शनिवार (30मई 2020) को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराया। सुरक्षाबलों को आतंकियों के छुपे होने की खुफ़िया जानकारी मिली थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार दक्षिण कश्मीर के वानपुरा इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने ज्वाइंट ऑपरेशन शुरू किया। इस दौरान दो आतंकवादियों को मार गिराया। ढेर किए गए आतंकवादियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद हुए हैं।

सुरक्षाबलों को जानकारी मिली थी कि दो आतंकी वामपोरा इलाके में किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए छुपे हुए है। लेकिन वे घटना को अंजाम दे पाते इससे पहले ही सुरक्षाबलों इलाके की घेराबंदी करते हुए सर्च ऑपरेशन के तहत उनका खात्मा कर दिया।

मारे गए दोनों आतंकियों को लश्कर-ए-तैयबा का बताया जा रहा था। मगर अब अधिकारियों ने साफ किया है कि दोनों आतंकी हिज्बुल मुजाहिदीन के हैं। उनकी फिलहाल पहचान नहीं हो पाई है। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है।

इससे पहले कुलगाम सेक्टर के मंजगाम में 25 मई की सुबह सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में दो आतंकियों को मार गिराया था। 6 मई को सुरक्षाबलों ने पुलवामा में हिजबुल के कश्मीर कमांडर रियाज नायकू को मार गिराया था। इसके बाद 16 मई को डोडा में हुए एनकाउंटर में खोत्रा गाँव में ताहिर के होने की सूचना मिली थी। सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 17 मई को वह भी मारा गया था।

बीते दिनों सुरक्षाबलों ने पुलवामा में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को नाकाम कर दिया था। सुरक्षाबलों ने पुलवामा के पास एक सैंट्रो गाड़ी की पहचान की थी। इसमें IED प्लांट की गई थी।

‘मरीज मर जाएँ तो हमें दोष मत दीजिएगा’: उद्धव राज में बाल ठाकरे ट्रॉमा सेंटर की उखड़ी साँसें, ऑक्सीजन की कमी से 12 मरे

महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्य है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मुंबई के जोगेश्वरी स्थित HBT (हिंदूहृदयसम्राट बाला साहेब ठाकरे) ट्रॉमा सेंटर भर्ती संक्रमितों के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति नहीं की जा रही है।

इस अस्पताल का संचालन बीएमसी के जिम्मे है। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण दो सप्ताह के भीतर यहॉं कम से कम 12 लोगों की मौत हुई है।

मुंबई मिरर ने हॉस्पिटल में काम कर रहे डॉक्टरों के हवाले से यह जानकारी दी है। मुंबई मिरर की लता मिश्रा ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हालात देखते हुए ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने को पत्र लिखा है।

पत्र में डॉक्टरों ने लिखा है कि उन्हें आईसीयू में हुई मौतों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र में यह भी कहा है कि साँस के लिए हाँफते हुए मरीजों को मरते देखने के बाद उनका मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक 200 बेड पर लगभग 90 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की आपूर्ति की आवश्यकता होती है। एक रेजिडेंट डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर मुंबई मिरर को बताया कि ICU की 25 बेड में से 15 मशीनें ऐसी होती हैं, जिसमें Low O2 Pressure की शिकायत रहती है।

एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर, जो पिछले हफ्ते ICU में ड्यूटी पर थे, ने भयावह दृश्य को याद करते हुए कहा, “दो मरीज साँस के लिए हाँफ रहे थे और उन्हें प्रति मिनट 8 से 10 लीटर ऑक्सीजन की जरूरत थी। हालाँकि, आपूर्ति इतनी धीमी थी कि स्क्रीन लगातार कम दबाव वाले O2 का अलर्ट दे रही थी और जब तक मैंने अस्पताल के टेक्नीशियन के साथ दबाव को ठीक करने की कोशिश की, तब तक दोनों मरीजों की मृत्यु हो चुकी थी।”

एक अन्य रेजिडेंट डॉक्टर 51 वर्षीय मरीज की मौत से काफी आहत थे। उन्होंने उस घटना को याद करते हुए बताया, वह आईसीयू में उनका चौथा दिन था। उसकी स्थिति में काफी सुधार आ रहा था। मुझे यकीन था कि वह जल्द ही आईसीयू से बाहर निकल कर आ जाएगा। वे आगे कहते हैं, “उस दिन कम से कम सात वेंटिलेटर लो प्रेशर दिखा रहे थे, इसलिए मैं टेक्नीशियन को बुलाने गया। जब मैं पाँच मिनट में वापस आया, तब तक इमरान की मौत हो चुकी थी। उसकी स्क्रीन पर ‘लो ऑक्सीजन प्रेशर’ दिखाई दे रहा था। उसकी मृत्यु ने मुझे बहुत दुखी किया। आईसीयू हमारे लिए एक निराशाजनक स्थान बन गया है। इन परिस्थितियों की वजह से कोई भी यहाँ ड्यूटी पर नहीं करना चाहता।”

उन्होंने कहा कि अगर वो इस तरह के मामलों की वजह से मरीजों मरीजों की जान नहीं बचा सकते हैं, तो भी इतना प्रयास करने की क्या आवश्यकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि गुरुवार को एक 51 वर्षीय वकोला निवासी अस्पताल में हाँफता हुआ आया। एक रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा कि वे उसे एडमिट नहीं कर सकते हैं, क्योंकि अस्पताल में ऑक्सीजन की आपूर्ति के साथ कोई बेड उपलब्ध नहीं था। आधे घंटे बाद उसकी मौत हो गई।

कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के अनुसार, ज्यादातर मरीज जो भर्ती होते हैं वे गंभीर रूप से साँस लेने में कठिनाई से पीड़ित होते हैं। प्रत्येक मरीज को प्रति मिनट 3 से 10 लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। एक आईसीयू डॉक्टर ने कहा, “अब आप अस्पताल में ऑक्सीजन की आवश्यकता की कल्पना कर सकते हैं।”

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विद्या माने ने स्वीकार किया कि वर्तमान में अस्पताल ऑक्सीजन की माँग को पूरा करने के लिए जूझ रहा है, लेकिन उन्होंने कम आपूर्ति के कारण किसी भी मौत से इनकार कर दिया।

डॉक्टर माने ने कहा, “जब हमने 50 कोविड -19 बेड शुरू किए थे तब 100 जंबो ऑक्सीजन सिलेंडर की आवश्यकता थी। अब 200 बेड के साथ हमने सिलेंडर की संख्या 350 तक बढ़ा दिया है। यह सच है कि हमारी माँग अधिक है, क्योंकि वर्तमान में हमें कई गंभीर मामले मिल रहे हैं। इनमें से लगभग सभी को ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता होती है। मरीजों की मौत इसलिए हो गई है क्योंकि वे गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुँचे थे।”

उन्होंने कहा कि गुरुवार को रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा इस मुद्दे को उनके संज्ञान में लाने के बाद अस्पताल ने 500 सिलेंडरों के लिए ऑर्डर दिया है। डॉ. माने ने आगे कहा कि एचबीटी ट्रॉमा हॉस्पिटल फायर सेफ्टी मानदंडों के अनुसार एक बड़े ऑक्सीजन लिक्विड टैंक लगाने के लिए फिट नहीं है। उन्होंने कहा, “हम मेडिकल ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाकर इस समस्या को हल करने की कोशिश कर रहे हैं।”

चीन के पर कतरे, WHO से रिश्ते तोड़े, हांगकांग का विशेष दर्जा छीना जाएगा: ट्रंप के ताबड़तोड़ फैसले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई सख्त फैसले लिए हैं। उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से सारे संबंध खत्म करने का ऐलान किया है। चीन पर कई पाबंदियॉं लगाई गई है। हांगकांग का विशेष दर्जा भी वापस लिया जाएगा।

ट्रंप ने शुक्रवार (मई 29, 2020) को WHO की फंडिंग वापस लेने के साथ ही सभी सम्बन्ध तोड़ने की घोषणा की। हांगकांग का विशेष व्यापार स्टेट्स समाप्त करने और ऐसे चीनी स्नातक छात्रों के वीजा को निलंबित करने का भी ऐलान किया है, जो उनकी सरकार की नजर में संदेहास्पद शोध में शामिल हैं।

कोरोना वायरस को फैलाने को लेकर चीन का संरक्षण करने को लेकर अमेरिका निरंतर WHO की निंदा कर रहा है। इसके पहले ट्रंप ने WHO की फंडिंग रोकने की भी धमकी दी थी।

ट्रंप ने पिछले साल के अंत में चीन के वुहान प्रांत से पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस को लेकर WHO की अपर्याप्त प्रतिक्रिया पर रोष व्यक्त किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ अमेरिका के संबंधों को समाप्त करने की घोषणा करते हुए WHO पर कोरोना वायरस संकट के प्रबंधन में चीन समर्थक और पूर्वाग्रही होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इसके पहले WHO से सुधर को लेकर सिफारिशें की गईं, लेकिन संगठन ने इस पर ध्यान नहीं दिया और सुधार के लिए किसी भी सुझाव को नहीं माना।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने हृवाइट हाउस में कहा कि चीनी अधिकारियों ने डब्ल्यूएचओ के लिए अपने रिपोर्टिंग दायित्वों को ‘नजरअंदाज’ किया और संगठन पर दबाव बनाया कि वह इस महामारी के बारे में जनता को गुमराह करे जिसने अब 1 लाख से अधिक अमेरिकियों को मार दिया है।

उन्होंने कहा कि चीन WHO को साल भर में 40 मिलियन डॉलर का अनुदान देकर अपने नियंत्रण में रखता है, तो वहीं अमेरिका हर साल स्वास्थ्य संगठन को करीब 450 मिलियन डॉलर का अनुदान देता है।

उल्लेखनीय है कि ट्रम्प ने पहले भी कई बार नाराजगी जताते हुए WHO को दी जाने वाली सहायता राशि पर भी रोक लगा दी थी। इसके साथ उन्होंने संस्था के डायरेक्टर को पत्र लिखकर 30 दिन के अंदर बड़े बदलाव करने के सुझाव दिए थे। ऐसा न किए जाने पर फंडिंग रोकने की धमकी भी दी थी।

इसके साथ ही चीन और हांगकांग को लेकर अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कल ही अहम बयान में बताया कि अमेरिका ने बुधवार (मई 27, 2020) को अमेरिकी कानून के तहत हांगकांग के विशेष दर्जे को निरस्त कर दिया।

अमेरिका ने चीन पर हांगकांग की स्वायत्तता का हनन करने का आरोप लगाया और कहा कि अब इसे चीन से स्वायत्त नहीं कहा जा सकता है। अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने अमेरिकी संसद में कहा कि हांगकांग अब अमेरिकी कानून के तहत अपनी विशेष स्थिति के लिए योग्य नहीं है।

उन्होंने ट्वीट के जरिए बताया कि अमेरिका के विशेष दर्जे से हांगकांग को लाभ मिलता है और अब अमेरिका को लगता है कि वास्तव में चीन इसका फायदा उठा रहा है। दरअसल चीन की संसद में नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस ने हांगकांग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रस्ताव को मँजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को चीन के वरिष्ठ नेतृत्व के पास भेजा जाएगा। इस नए कानून के लागू हो जाने से हांगकांग अपनी स्वायतत्ता खो सकता है और हांगकांग का विशेष दर्जा खत्म हो जाएगा।

साल 1997 में ब्रिटेन ने जब हांगकांग चीन को सौंपा था, उस समय कुछ कथित कानून बनाए गए जिनके तहत हांगकांग में कुछ खास तरह की आजादी थी जो आम चीनी लोगों को हासिल नहीं है। चीन का यह प्रस्ताव इतना विवादित है कि संसद से मंजूरी मिलने के बाद दुनियाभर में कई देश चीन के खिलाफ बोलते नजर आ रहे हैं। इस नए कानून के खिलाफ हांगकांग में काफी पहले से विरोध-प्रदर्शन चल रहा है। इससे पहले बुधवार को सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच कई झड़पें हुई।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात के संकेत दिए हैं कि अगर यह कानून लागू हो जाएगा तो अमेरिका और हांगकांग के बीच होने वाले विशेष व्यापार का अंत हो सकता है।

राजस्थान: अब दौसा में हेड कॉन्स्टेबल ने लगाई फाँसी, 7 दिन में तीसरे पुलिसकर्मी ने की आत्महत्या

राजस्थान के दौसा के सैंथल में एक हेड कॉन्स्टेबल ने शुक्रवार (29 मई 2020) को आत्महत्या कर ली। राज्य में सात दिनों के भीतर सुसाइड करने वाले वे तीसरे पुलिसकर्मी हैं। इस मामले में भी दबाव की आशंका जताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार हेड कॉन्स्टेबल गिरिराज सिंह ने रात के लगभग 8:00 बजे अपने क्वार्टर में गमछे का फंदा बना कर फाँसी लगा ली। वे घर में अकेले ही रहते थे। सुसाइड की खबर तब लगी जब सैंथल थाने का स्टाफ उन्हें खाना देने पहुॅंचा।

घटना की जानकारी लगते ही गिरिराज को पुलिस स्टाफ ने पास के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। आत्महत्या की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी सैंथल थाने और जिला अस्पताल पहुँच गए। हेड कांस्टेबल के कमरे को सील कर दिया गया।

मामले में अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं बरामद किया गया है। गिरिराज सिंह की मौत में भी दबाव की आशंका जताई जा रही है। मौके पर पहुँचे एडिशनल एसपी अनिल सिंह चौहान ने बताया कि आत्महत्या के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं लग पाया है। फिलहाल पुलिस मामले की तहकीकात कर रही है।

बता दें हेड कॉन्स्टेबल गिरिराज सिंह मूल रूप से अलवर जिले के श्यामपुरा गाँव के रहने वाले थे। गिरिराज को दौसा कोतवाली से अक्टूबर महीने में सैंथल थाना तैनात किया गया था। मौत की जानकारी मिलते ही उनके परिजन दौसा पहुँच गए हैं।

राज्यसभा सांसद किरोड़ीलाल ने ट्वीट इस मामले मैं भी सीआई विष्णुदत्त विश्नोई की तरह दबाव की आशंका जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मामले की सीबीआई जाँच की माँग की है।

उल्लेखनीय है कि शनिवार (मई 23, 2020) को चूरू के राजगढ़ थाने में थानाप्रभारी विष्णुदत्त विश्नोई अपने सरकारी क्वार्टर फंदे से लटके मिले थे। विश्नोई दो सुसाइड नोट भी छोड़कर गए थे। इनमें से एक जिले की एसपी तेजस्विनी गौतम के नाम लिखा था और दूसरा सुसाइड नोट उन्होंने अपने माता-पिता के नाम से लिखा था।

सुसाइड नोट में विश्नोई ने खुद के दवाब में होने की बात लिखी थी। इसके बाद से इस मामले की सीबीआई जॉंच की मॉंग की जा रही है। इस मामले में कॉन्ग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया सवालों के घेरे में हैं। विश्नोई के बाद 26 मई को श्रीगंगानगर में गार्ड कमांडर जसविंदर सिंह ने खुद को गोली मार खुदकुशी कर ली थी।

जायरा वसीम का ट्विटर और इंस्टाग्राम से तौबा, टिड्डियों के हमले को बताया था अल्लाह का कहर

इस्लाम का हवाला देकर फिल्मों को अलविदा कहने वाली जायरा वसीम ने ट्विटर और इंस्टाग्राम अकाउंट डिलीट कर लिया है। बुधवार (मई 27, 2020) को उन्होंने भारत में टिड्डियों के हमले को घमंडी लोगों पर अल्लाह का कहर बताया था। इस ट्वीट को लेकर उनकी तीखी आलोचना हो रही थी।

इसके बाद जायरा वसीम ने अपने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपने अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर दिया। कुछ समय बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट को भी डिलीट कर दिया

27 मई को जायरा ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर कुरान की एक आयत लिखी जिसमें इन हमलों को चेतावनी और अल्लाह का कहर बताया गया था। जायरा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “इसलिए हमने उन पर बाढ़ भेजे, और टिड्डे भेजे, और भेजे जूएँ-चीलड़, और मेंढक भेजे, खून भेजा: ये वैसी चेतावनियाँ हैं जो स्वविश्लेषित हैं: लेकिन वो सब अपने अज्ञान में गहरे डूबे हुए थे- वैसे लोग जो पापी हैं।”

जायरा इस ट्वीट में बाद लोगों के निशाने पर आ गईं और लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल कर दिया। लोग जायरा पर जमकर भड़के। लोगों ने तो ये तक कह दिया कि इस्लाम में ट्विटर का इस्तेमाल करना भी हराम है तो उन्हें ट्विटर छोड़ देना चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में जायरा की सोशल मीडिया पर भारतीय कुश्ती पहलवान बबीता फोगाट से ट्विटर पर अप्रत्यक्ष रूप से वार छिड़ गया था। इस पर भी उन्हें ट्रोल होना पड़ा था। दरअसल, तबलीगी जमात को लेकर बबीता फोगाट ने एक ट्वीट किया था, जिसकी आलोचना हो रही थी। इस अलोचना को देखते हुए बबीता फोगाट ने एक वीडियो शेयर किया और कहा कि वह जायरा वसीम नहीं हैं, जो किसी के कहने पर चुप बैठ जाएँगी।

उल्लेखनीय है कि जायरा वसीम ने पिछले साल फिल्मों से संन्यास लेने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि एक्टिंग और फिल्में उनके मजहब के आड़े आ रहे हैं। जायरा ने अपने करियर की शुरुआत आमिर खान की फिल्म दंगल से की थी और उनकी आखिरी फिल्म प्रियंका चोपड़ा के साथ द स्काई इज पिंक थी। ये फिल्म उनके संन्यास लेने के बाद रिलीज हुई।

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक्टिंग छोड़ने का ऐलान करते हुए लिखा था कि वो भले यहाँ फिट हो रही हैं, लेकिन मैं यहाँ की नहीं हैं। यह उन्हें उनके ईमान से दूर कर रहा है। उनका कहना था कि यह रास्ता उन्हें अल्लाह से दूर कर रहा है। इसके बाद जायरा ने कश्मीर के मुद्दे पर गलत जानकारी देकर अपने फॉलोवर्स को बरगलाया। साथ ही एक दिन अपने प्रशंसकों से ये भी अपील की कि उसकी सराहना करनी बंद की जाए, क्योंकि इससे उनका इमान खतरे में पड़ता है।

भारत का भविष्य कोई आपदा नहीं तय कर सकती, एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है: PM मोदी का खुला खत

आज से ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगातार दूसरी बार देश की ज़िम्मेदारी सँभाली थी। अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरा होने के अवसर पर PM मोदी ने देश की जनता के नाम एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में जनता को धन्यवाद देते हुए देश के लोकतंत्र की सामूहिक शक्ति को पूरे विश्व के लिए मिसाल बताया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस खुले पत्र में लिखा है कि इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है और यह अवसर जनता को नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति इस निष्ठा को प्रणाम करने का है।

‘मैं आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ’

मेरे प्रिय स्नेहीजन,

आज से एक साल पहले भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ा। देश में दशकों बाद पूर्ण बहुमत की किसी सरकार को लगातार दूसरी बार जनता ने ज़िम्मेदारी सौंपी थी। इस अध्याय को रचने में आपकी बहुत बड़ी भूमिका रही है। ऐसे में आज का यह दिन मेरे लिए, अवसर है आपको नमन करने का, भारत और भारतीय लोकतंत्र के प्रति आपकी इस निष्ठा को प्रणाम करने का।

यदि सामान्य स्थिति होती तो मुझे आपके बीच आकर आपके दर्शन का सौभाग्य मिलता। लेकिन, वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से जो परिस्थितियाँ बनी हैं, उन परिस्थितियों में, मैं इस पत्र के द्वारा आपके चरणों में प्रणाम करने और आपका आशीर्वाद लेने आया हूँ। बीते वर्ष में आपके स्नेह, शुभाशीष और आपके सक्रिय सहयोग ने मुझे निरंतर एक नई ऊर्जा, प्रेरणा दी है।

इस दौरान आपने लोकतंत्र की जिस सामूहिक शक्ति के दर्शन कराए वह आज विश्व के लिए एक मिसाल बन चुकी है। वर्ष 2014 में आपने, देश की जनता ने, देश में एक बड़े परिवर्तन के लिए वोट किया था, देश की नीति और रीति बदलने के लिए वोट किया था। उन पाँच वर्षों में देश ने व्यवस्थाओं को जड़ता और भ्रष्टाचार के दलदल से बाहर निकलते हुए देखा है।

उन पाँच वर्षों में देश ने अंत्योदय की भावना के साथ गरीबों का जीवन आसान बनाने के लिए गवर्नेंस को परिवर्तित होते देखा है। उस कार्यकाल में जहाँ विश्व में भारत की आन-बान-शान बढ़ी, वहीं हमने गरीबों के बैंक खाते खोलकर, उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन देकर, मुफ्त बिजली कनेक्शन देकर, शौचालय बनवाकर, घर बनवाकर, गरीब की गरिमा भी बढ़ाई।

उस कार्यकाल में जहाँ सर्जिकल स्ट्राइक हुई, एयर स्ट्राइक हुई, वहीं हमने वन रैंक वन पेंशन, वन नेशन वन टैक्स- GST, किसानों की MSP की बरसों पुरानी माँगों को भी पूरा करने का काम किया। वह कार्यकाल देश की अनेकों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहा। वर्ष 2019 में आपका आशीर्वाद, देश की जनता का आशीर्वाद, देश के बड़े सपनों के लिए था, आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए था।

भारत की ऐतिहासिक यात्रा में जनता का योगदान

और इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान है। आज जन-जन से जुड़ी जन-मन की जनशक्ति, राष्ट्रशक्ति की चेतना को प्रज्वलित कर रही है। गत एक वर्ष में देश ने सतत नए स्वप्न देखे, नए संकल्प लिए और इन संकल्पों को सिद्ध करने के लिए कदम भी बढ़ाए। भारत की इस ऐतिहासिक यात्रा में देश के हर समाज, हर वर्ग और हर व्यक्ति ने बखूबी अपना दायित्व निभाया है।

‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ इस मंत्र को लेकर आज देश सामाजिक हो या आर्थिक, वैश्विक हो या आंतरिक, हर दिशा में आगे बढ़ रहा है। बीते एक वर्ष में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे और इस वजह से इन उपलब्धियों का स्मृति में रहना भी बहुत स्वाभाविक है।

अनुच्छेद-370, राम मंदिर, तीन तलाक, CAA जैसे ऐतिहासिक फ़ैसले

राष्ट्रीय एकता-अखंडता के लिए आर्टिकल 370 की बात हो, सदियों पुराने संघर्ष के सुखद परिणाम- राम मंदिर निर्माण की बात हो, आधुनिक समाज व्यवस्था में रुकावट बना ट्रिपल तलाक हो, या फिर भारत की करुणा का प्रतीक नागरिकता संशोधन कानून हो, ये सारी उपलब्धियाँ आप सभी को स्मरण हैं।

इन ऐतिहासिक निर्णयों के बीच अनेक फैसले, अनेक बदलाव ऐसे भी हैं जिन्होंने भारत की विकास यात्रा को नई गति दी है, नए लक्ष्य दिए हैं, लोगों की अपेक्षाओं को पूरा किया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के गठन ने जहाँ सेनाओं में समन्वय को बढ़ाया है, वहीं मिशन गगनयान के लिए भी भारत ने अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं।

इस दौरान गरीबों, किसानों, महिलाओं-युवाओं को सशक्त करना हमारी प्राथमिकता रही है। अब पीएम किसान सम्मान निधि के दायरे में देश का प्रत्येक किसान आ चुका है। बीते एक वर्ष में इस योजना के तहत 9 करोड़ 50 लाख से ज्यादा किसानों के खातों में 72 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि जमा कराई गई है।

देश के 15 करोड़ से अधिक ग्रामीण घरों में पीने का शुद्ध पानी पाइप से मिले, इसके लिए जल जीवन मिशन शुरू किया गया है। हमारे 50 करोड़ से अधिक के पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मुफ्त टीकाकरण का बहुत बड़ा अभियान भी चलाया जा रहा है।

देश के इतिहास में यह भी पहली बार हुआ है जब, किसान, खेत मजदूर, छोटे दुकानदार और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक साथियों, सभी के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद 3 हज़ार रुपए की नियमित मासिक पेंशन की सुविधा सुनिश्चित हुई है।

मछुआरों की सहूलियत बढ़ाने के लिए, उनको मिलने वाली सुविधाएँ बढ़ाने और ब्लू इकॉनॉमी को मजबूत करने के लिए विशेष योजनाओं के साथ-साथ अलग से विभाग भी बनाया गया है। इसी तरह व्यापारियों की समस्याओं के समय पर समाधान के लिए व्यापारी कल्याण बोर्ड के निर्माण का निर्णय लिया गया है।

स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी लगभग 7 करोड़ बहनों को भी अब ज्यादा वित्तीय सहायता दी जा रही है। हाल में ही स्वयं सहायता समूहों के लिए बिना गारंटी के ऋण को 10 लाख से बढ़ाकर दोगुना यानी 20 लाख कर दिया गया है। आदिवासी बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए, देश में 450 से ज्यादा नए एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूलों के निर्माण का अभियान भी शुरू किया गया है।

सामान्य जन के हित से जुड़े बेहतर कानून बनें, इसके लिए भी तेज गति से कार्य हुआ है। संसद ने अपने कामकाज से दशकों पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इसी का परिणाम है कि चाहे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट हो, चिटफंड कानून में संशोधन हो, दिव्यांगों, महिलाओं और बच्चों को अधिक सुरक्षा देने वाले कानून हों, ये सब तेज़ी से बन पाए हैं।

कम हुआ रूरल और अर्बन के बीच का अंतर

सरकार की नीतियों और निर्णयों की वजह से शहरों और गाँवों के बीच की खाई कम हो रही है। पहली बार ऐसा हुआ है जब गाँव में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों की संख्या, शहर में इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों से 10% ज्यादा हो गई है। देशहित में किए गए ऐतिहासिक कार्यों और निर्णयों की सूची बहुत लंबी है। इस पत्र में सभी को विस्तार से बता पाना संभव नहीं।

लेकिन, मैं इतना अवश्य कहूँगा कि एक साल के कार्यकाल के प्रत्येक दिन चौबीसों घंटे पूरी सजगता से काम हुआ है, संवेदनशीलता से काम हुआ है, निर्णय लिए गए हैं। देशवासियों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना ने भारत को भी घेर लिया।

एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी

आज सभी देशवासियों ने ये सिद्ध करके दिखाया है कि विश्व के सामर्थ्यवान और संपन्न देशों की तुलना में भी भारतवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और क्षमता अभूतपूर्व है। ताली-थाली बजाने और दीया जलाने से लेकर भारत की सेनाओं द्वारा कोरोना वॉरियर्स का सम्मान हो, जनता कर्फ्यू या लॉकडाउन के दौरान नियमों का निष्ठा से पालन हो, हर अवसर पर आपने ये दिखाया है कि एक भारत ही श्रेष्ठ भारत की गारंटी है।

निश्चित तौर पर, इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ और असुविधा न हुई हो। हमारे श्रमिक साथी, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले, रेहड़ी-ठेला लगाने वाले, हमारे दुकानदार भाई-बहन, लघु उद्यमी, ऐसे साथियों ने असीमित कष्ट सहा है।

इनकी परेशानियाँ दूर करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें ये भी ध्यान रखना है कि जीवन में हो रही असुविधा, जीवन पर आफत में न बदल जाए। इसके लिए प्रत्येक भारतीय के लिए प्रत्येक दिशा-निर्देश का पालन करना बहुत आवश्यक है। जैसे अभी तक हमने धैर्य और जीवटता को बनाए रखा है, वैसे ही उसे आगे भी बनाए रखना है।

ये लड़ाई लंबी है लेकिन हम विजय पथ पर चल पड़े हैं और विजयी होना हम सबका सामूहिक संकल्प है। अभी पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए अम्फान चक्रवात के दौरान जिस हौसले के साथ वहाँ के लोगों ने स्थितियों का मुकाबला किया, चक्रवात से होने वाले नुकसान को कम किया, वह भी हम सभी के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

इन परिस्थितियों में, आज यह चर्चा भी बहुत व्यापक है कि भारत समेत तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाएँ कैसे उबरेंगी? लेकिन दूसरी ओर ये विश्वास भी है कि जैसे भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी दुनिया को अचंभित किया है, वैसे ही आर्थिक क्षेत्र में भी हम नई मिसाल कायम करेंगे। 130 करोड़ भारतीय, अपने सामर्थ्य से आर्थिक क्षेत्र में भी विश्व को चकित ही नहीं, बल्कि प्रेरित भी कर सकते हैं।

आत्मनिर्भर भारत : भारत को अपने पैरों पर खड़ा होना है

आज समय की माँग है कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना ही होगा। अपने बलबूते पर चलना ही होगा और इसके लिए एक ही मार्ग है- आत्मनिर्भर भारत। अभी हाल में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए दिया गया 20 लाख करोड़ रुपए का पैकेज, इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है।

यह अभियान, हर एक देशवासी के लिए, हमारे किसान, हमारे श्रमिक, हमारे लघु उद्यमी, हमारे स्टार्टअप्स से जुड़े नौजवान, सभी के लिए, नए अवसरों का दौर लेकर आएगा। भारतीयों के पसीने से, परिश्रम से और उनकी प्रतिभा से बने लोकल उत्पादों के दम पर भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा और आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ेगा।

‘अभी बहुत कुछ करना बाकी, मुझ में कमी हो सकती हैं, देश में नहीं’

बीते छह वर्षों की इस यात्रा में आपने निरंतर मुझ पर आशीर्वाद बनाए रखा है, अपना प्रेम बढ़ाया है। आपके आशीर्वाद की शक्ति से ही, देश पिछले एक साल में ऐतिहासिक निर्णयों और विकास की अभूतपूर्व गति के साथ आगे बढ़ा है। लेकिन फिर भी मुझे पता है कि अब भी बहुत कुछ करना बाकी है।

देश के सामने चुनौतियाँ अनेक हैं, समस्याएँ अनेक हैं। मैं दिन-रात प्रयास कर रहा हूँ। मुझ में कमी हो सकती है लेकिन देश में कोई कमी नहीं है। इसलिए, मेरा विश्वास स्वयं से ज्यादा आप पर है, आपकी शक्ति, आपके सामर्थ्य पर है।

भारत का भविष्य कोई आपदा तय नहीं कर सकती

मेरे संकल्प की ऊर्जा आप ही हैं, आपका समर्थन, आपका आशीर्वाद, आपका स्नेह ही है। वैश्विक महामारी के कारण, यह संकट की घड़ी तो है ही, लेकिन हम देशवासियों के लिए यह संकल्प की घड़ी भी है।

हमें यह हमेशा याद रखना है कि 130 करोड़ भारतीयों का वर्तमान और भविष्य कोई आपदा या कोई विपत्ति तय नहीं कर सकती।

हम अपना वर्तमान भी खुद तय करेंगे और अपना भविष्य भी। हम आगे बढ़ेंगे, हम प्रगति पथ पर दौड़ेंगे, हम विजयी होंगे। देश की निरंतर सफलता की इसी कामना के साथ मैं आपको पुन: नमन करता हूँ। आपको और आपके परिवार को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।

स्वस्थ रहिए, सुरक्षित रहिए !!!
जागृत रहिए, जागरूक रखिए !!!

आपका प्रधानसेवक
नरेंद्र मोदी

कॉन्ग्रेस नेता पंकज पुनिया पर दर्ज FIR खारिज करने से SC का इनकार, भगवान राम और भगवा पर किया था अमर्यादित ट्वीट

भगवान राम और भगवा पर अमर्यादित ट्वीट करने वाले कॉन्ग्रेस नेता नेता पंकज पुनिया को को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट (SC) ने शुक्रवार (मई 29, 2020) को पुनिया के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने से इनकार कर दिया

न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति एस अब्दुल नज़ीर और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश के नोएडा और लखनऊ तथा मध्य प्रदेश के सिवनी में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी निरस्त करने से इनकार कर दिया।

बता दें कि पंकज पुनिया को सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से हिंदुओं के “धार्मिक भावनाओं को आहत करने” के आरोप में हरियाणा के करनाल में दर्ज FIR के आधार पर गिरफ्तार किया गया था।

पुनिया ने गिरफ्तारी का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में दर्ज FIR रद्द की माँग की थी। परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने FIR खारिज करने से इनकार कर दिया। पुनिया की तरफ से ये याचिका वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, “हम भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस याचिका पर विचार करने के लिए तैयार नहीं हैं। इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है।” हालाँकि सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि पुनिया चाहें तो इस मामले पर हाई कोर्ट में अर्जी लगा सकते हैं।

पंकज पुनिया के खिलाफ “धार्मिक भावनाओं को आहत करने” के आरोप में हरियाणा के करनाल के अलावा उत्तर प्रदेश के नोएडा और लखनऊ एवं मध्य प्रदेश में भी FIR दर्ज है। पुनिया को 20 मई को गिरफ्तार किया गया था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस नेता पंकज पुनिया ने मंगलवार (मई 19, 2020) को ट्वीट करके ‘संघियों’ को बलात्कारी बताया था। साथ ही भगवान राम के नाम का गलत इस्तेमाल किया और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना करते हुए उनके खिलाफ बेहद ही आपत्तिजनक शब्द लिखे थे।

पुनिया ने यूपी सरकार की आलोचना करते हुए लिखा था, “कॉन्ग्रेस सिर्फ़ मजदूरों को अपने खर्च पर उनके घरों तक पहुँचाना चाहती थी। बिष्ट सरकार ने राजनीति शुरू की। भगवा लपेटकर नीच काम संघी ही कर सकते हैं। ये कब्र से निकालकर लाशों का बलात्कार करने वाले लोग हैं। बेटियों के सामने पैंट उतारकर जय श्रीराम के नारे लगाने वाले हस्तमैथुन करने वाले लोग हैं।”

इसको लेकर उनकी तीखी आलोचना हुई और गिरफ्तारी की माँग की जाने लगी। पंकज पुनिया के खिलाफ उत्तर प्रदेश के हजरतगंज और नोएडा पुलिस ने आईटी एक्ट सहित कई मामलो में FIR दर्ज की गई। ये मुकदमा धारा 295ए, 500, 505, 153ए और 66 आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया है।

सुरलीन कौर के ‘सब हरामी पोर्न वाले’ वीडियो पर शेमारू की माफी कबूल, कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी इस्कॉन: रिपोर्ट

एक नाटकीय घटनाक्रम में इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) ने सुरलीन कौर के विवादित वीडियो पर शेमारू प्राइवेट लिमिटेड की माफी स्वीकार कर ली है। स्वराज्य ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है। इसके मुताबिक इस्कॉन अब कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे नहीं बढ़ाएगी।

इससे पहले खबर आई थी कि इस्कॉन ने शेमारू की माफी अस्वीकार कर दी है। स्टैंडअप कॉमेडियन सुरलीन कौर के विवादित वीडियो के लिए शेमारू ने बिना शर्त माफी मॉंगी थी और सुरलीन से असहमति जताई थी। सुरलीन ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कंपनी द्वारा जारी किए गए एक वीडियो में कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की थी।

इसे लेकर कंपनी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि हिंदू संगठनों का पोर्न से संबंध बताना न केवल गलत है, बल्कि इसकी प्रतिष्ठा को हानि पहुँचाता है और इनके द्वारा किए जा रहे अच्छे कामों को नजरअंदाज करता है। इस्कॉन ने बताया कि शेमारू के सीईओ ने वरिष्ठ प्रबंधन की ओर से खेद व्यक्त किया है और स्वीकार किया है कि इस तरह के मानहानि वाले वीडियो को अपनी जानकारी में रहते हुए कभी प्रकाशित नहीं किया जाएगा। स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने अपने ट्विटर अकाउंट पर इस्कॉन द्वारा जारी किए गए बयान को पोस्ट किया है।

आधिकारिक माफी के बाद इस्कॉन ने कहा कि वह टकराव में विश्वास नहीं करता है, बल्कि वह नैतिक और कानूनी मूल्यों के अनुसार कार्य करता है। इस प्रकार इस्कॉन ने उनके खिलाफ मामले को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है। संगठन ने एक बार फिर दोहराया है कि इस्कॉन के बारे में झूठ फैलाना न केवल उसकी प्रतिष्ठा के लिए हानिकारक है, बल्कि बड़े स्तर पर समाज के लिए किए गए अच्छे कार्यों को धूमिल करता है।

हालांकि इस्कॉन ने कहा है कि उन्होंने शेमारू के खिलाफ मामले से अपने हाथ पीछे नहीं किए हैं। लेकिन कॉमेडियन सुरलीन कौर के खिलाफ शिकायत के बारे में कुछ नहीं कहा है। सुरलीन कौर ने इस मुद्दे पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही कोई माफी नहीं माँगी है। इसलिए भी माना जा रहा है कि इस्कॉन उनके खिलाफ मामले को आगे बढ़ा सकता है।

वहीं आपत्ति जताने के बाद ‘शेमारू’ ने पहले ही विभिन्न प्लेटफार्मों से यह वीडियो हटा दिया है। लेकिन कई लोगों ने पहले ही इसे डाउनलोड कर लिया था और बाद में विभिन्न सोशल मीडिया साइटों पर अपलोड कर दिया गया, जिसके कारण यह वायरल हुआ।

आपको बता दें कि धार्मिक संस्था ISKCON ने सुरलीन कौर ग्रोवर के एक विवादास्पद वीडियो को लेकर एंटरटेनमेंट कंपनी शेमारू के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपित कॉमेडियन सिमरन कौर पर उस वीडियो में इस्कॉन, ऋषि-मुनियों और हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करते हुए उनका मजाक उड़ाने का आरोप था।

शिकायती पत्र में इस्कॉन प्रवक्ता राधारमन दास ने बताया था कि सुरलीन कौर इस वीडियो में कह रही हैं, “बेशक हम सब इस्कॉन वाले हैं, पर अंदर से सब ‘हरामी पोर्न वाले’ हैं।” इसके अलावा सिमरन कौर ने आस्था को ठेस पहुँचाते हुए यह भी कहा है कि धन्य है हमारे ऋषि-मुनि जिन्होंने थोड़ी सी संस्कृत के जरिए अपने बड़े-बड़े कांड छुपा लिए हैं। यही नहीं सिमरन कौर ने कामसूत्र और खुजराहो का भी उपहास उड़ाया।

सुरलीन कौर के विवादित वीडियो से शुरू हुआ मामला

सुरलीन कौर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस्कॉन ने शिकायत दर्ज करने का फैसला किया था। हालाँकि, यह वीडियो कुछ महीने पहले ही प्रकाशित किया गया था। लेकिन वीडियो को हाल ही में सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से शेयर किया गया, जिसके कारण यह हिंदू संगठन की नजरों में आया।

सुरलीन कौर ने इस वीडियो में यह भी कहा कि प्राचीन हिंदू संतों ने अपनी ख़ुफ़िया हरकतों को छिपाने के लिए संस्कृत के अपने छोटे से ज्ञान का उपयोग किया। कामसूत्र का उदाहरण देते हुए उसने कहा कि ऋषियों ने कामुक ग्रंथों को लिखने के लिए संस्कृत भाषा का उपयोग किया।

साथ ही कौर ने खजुराहो की मूर्तियों का मज़ाक बनाते हुए कहा कि हिंदू अश्लीलता (पोर्न) पसंद करते हैं। इस वीडियो में सुरलीन कहती हुई नजर आती है कि ‘बेशक हम सब इस्कॉन वाले हैं, पर अंदर से सब हरामी पोर्न वाले हैं।’

पाताल लोक में सिखों को दिखाया बलात्कारी: वेब सीरिज के निर्देशकों और अमेजन को लीगल नोटिस

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रशासन कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने अमेजन सेलर सर्विसेज और पाताल लोक के निर्देशक अविनाश अरुण तथा प्रोसित रॉय को लीगल नोटिस भेजा है। DSGMC अध्यक्ष सिरसा ने आरोप लगाया है कि पाताल लोक वेब सीरिज में सिखों को बलात्कारी दिखाया गया। इससे समुदाय के लोगों की भावनाएँ आहत हुई है।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस नोटिस की सूचना अपने ट्विटर पर साझा की। उन्होंने लीगल नोटिस संबंधी कागज ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “विवादास्पद सीरीयल के माध्यम से सिखों को बलात्कारी के रूप में दिखाए जाने के बाद सिखों की भावनाओं को ठेस पहुँची। आज हमने इसके लिए अमेजन और निर्देशकों अविनाश अरुण और प्रोसित रॉय को कानूनी नोटिस भेजा है।”

इस नोटिस में आरोप लगाया गया कि अमेजन प्राइम पर ब्रॉडकॉस्ट होने वाली इस सीरिज में सिखों को बलात्कारी बताया गया है। नोटिस के मुताबिक, इस सीरिज के एक एपिसोड में दिखाया गया है कि एक सिख एक बुजुर्ग महिला के साथ कई अन्य समुदाय के सदस्यों की उपस्थिति में बलात्कार कर रहा है, जहाँ उसके पति और ससुर भी मौजूद हैं।

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि पाताल लोक का दृश्य स्पष्ट रूप से अवैध, गैरकानूनी और धार्मिक संस्कृति और आस्था का दुरुपयोग है जो कि अमेजन प्राइम के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा है। नोटिस में कहा गया कि ये सीन न केवल अपमानजनक है, बल्कि इस सीन से पूरे सिख समुदाय में आक्रोश है।

नोटिस में मनजिंदर सिंह सिरसा लिखते हैं कि सिखों के इतिहास में हमेशा से महिला को पुरुषों के बराबर दिखाया गया है। फिर चाहे वो सेवा में हो, भक्ति में हो, बलिदान में हो, या बहादुरी में हो। इसके अलावा सिख परंपरा में महिलाओं की नैतिक गरिमा, सेवा और आत्म-बलिदान के उदाहरण भी देखे गए हैं।

नोटिस में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि इस तरह के प्रयास कदापि बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे। DSGMC ने नोटिस के जरिए बिना किसी शर्त के माफी की माँग की है। साथ ही इस बात की गारंटी भी माँगी है कि वे आगे से ऐसी भ्रामक सामग्री बनाने से परहेज करेंगे, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करती हो।

इसके अलावा इस नोटिस में अमेजन प्राइम के अधिकारियों और निर्देशकों को 3 दिन के भीतर उपस्थित होने के लिए कहा गया है। साथ ही 24 घंटे के भीतर सीरीज से रेप सीन को हटाने की माँग की गई हैऔर उन विज्ञापनों को भी हटाने की बात लिखी गई, जिसमें इन अपमानजनक सीन को दर्शाया गया।

गौरतलब है कि इससे पहले पाताल लोक में अपनी तस्वीर का गलत इस्तेमाल देखकर बीते दिनों लोनी विधानसभा से बीजेपी के विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने इसकी प्रोड्यूसर अभिनेत्री अनुष्का शर्मा के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत में उन्होंने विवादित सीरिज में अपनी तस्वीर बिना अनुमति इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। इस शिकायत के बाद निर्माता ने उनकी तस्वीर हटा दी थी।

इससे पूर्व, पिछले दिनों लॉयर गिल्ड मेंबर वीरेन सिंह गुरुंग ने भी सीरीज के प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा को लीगल नोटिस भेजा था। वीरेन ने बताया था कि पाताल लोक के दूसरे एपिसोड में एक सीन है, जिसमें पूछताछ के दौरान एक महिला पुलिस नेपाली किरदार पर जातिवादी शब्दों का इस्तेमाल करती है। अगर केवल नेपाली शब्द का इस्तेमाल किया गया होता तो कोई दिक्कत नहीं थी पर इसके बाद का जो शब्द है उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।