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कोरोना की हकीकत जानने में न मदद कर रही, न सुरक्षा दे रही बंगाल सरकार: IMCT

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर कोरोना संक्रमण से जुड़े तथ्य दबाने और लॉकडाउन के कायदों का सही तरीके से पालन नहीं करने के आरोप हैं। वह केंद्र की इंटर मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम (IMCT) के साथ भी सहयोग नहीं कर रही है।

इस बाबत आईएमसीटी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को लिखित शिकायत दी है। इसमें सहयोग नहीं मिलने की बात कही गई है। साथ ही कहा गया है कि राज्य सरकार आईएमसीटी को संक्रमण से बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा भी नहीं दे रही।

आईएमटीसी ने कहा है कि राज्य में स्थापित कोविड-19 अस्पतालों, क्वारंटाइन सेंटर और कंटेनमेंट जोन के संबंध में उसे समुचित जानकारी नहीं दी जा रही है। इसके लिए वह चार बार पत्र लिख चुका है। केंद्र सरकार की ओर आईएमटीसी राज्यों में कोरोना पर काबू पाने के लिए किए गए प्रबंधों की समीक्षा कर रहा है।

आईएमसीटी ने बंगाल के मुख्य सचिव से पूछा है कि राज्य में किसकी मौत कोरोना की वजह से हुई है, यह किस प्रक्रिया के तहत तय किया जा रहा। उसने निरीक्षण के दौरान पाया कि जॉंच के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसको लेकर भी नाखुशी जताई गई है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइंस के अनुसार, राज्यों को पीपीई किट का इंतजाम करना है। लेकिन अब ताज IMCT को पीपीई किट नहीं दी गई। आईएमसीटी का कहना है कि वह राज्य में कोरोना की जमीनी हकीकत का पता लगाना चाहती है ताकि केंद्र के पास राज्य के कोरोना मरीजों और संसाधनों को लेकर सटीक जानकारी हो।

इससे पहले बंगाल में लॉकडाउन का सही तरीके से पालन नहीं किए जाने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को पत्र लिखकर सख्त आपत्ति जताई थी। पत्र में कहा गया था कि राज्य में सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों से मिल रहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन का असर धीरे-धीरे घट रहा है। राज्य सरकार की तरफ से दी जा रही छूट का दायरा बढ़ता ही जा रहा है।

गौरतलब है कि ममता सरकार पर जमीनी हकीकत छिपाने के आरोप लगातार लग रहे हैं। बंगाल बीजेपी ने एक वीडियो ट्वीट कर दावा किया है कि संक्रमण से जान गॅंवाने वाले लोगों का शव रात के अंधेरे में रिहायशी इलाकों में ठिकाने लगाने की कोशिश की जा रही है। उससे पहले केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने एक वीडियो ट्वीट किया था जिसमें क्वारंटाइन वार्ड में अव्यवस्था और बदइंतजामी दिख रही थी।

आदिवासियों का ब्रेनवाश किया गया, CAA का भी हुआ था विरोध: पालघर मॉब लिंंचिंग पर आचार्य सभा ने गवर्नर को लिखा पत्र

हिन्दू धर्म आचार्य सभा ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पत्र लिख कर पालघर में भीड़ द्वारा साधुओं की निर्मम हत्या की निंदा की है। शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) को लिखे गए पत्र में राज्य सरकार पर इस हत्याकांड के दोषियों को बचाने का आरोप लगाया है।

साथ ही कहा है कि इस क्षेत्र का जिस तरह का इतिहास रहा है, उससे लगता है कि इसके पीछे बड़ी साज़िश है। सभा ने पुलिस पर भी सवाल उठाए हैं, जिसने इस केस को ठीक से हैंडल नहीं किया और बार-बार बयान बदले।

पालघर हत्याकांड पर क्या कहा हिन्दू धर्म आचार्य सभा ने

सभा ने सवाल उठाया है कि जैसा इस क्षेत्र का इतिहास रहा है, यहाँ के लोगों में हिन्दुओं के प्रति दुर्भावना घर कर गई है। उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं के जरिए अपनी बात रखी:

  • इस इलाक़े में रह रहे आदिवासियों ने सीएए का पुरजोर विरोध किया था।
  • दिसंबर 2019 में 12 अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों को यहाँ से गिरफ़्तार किया गया, जबकि इसी साल फ़रवरी में 23 अवैध बांग्लादेशी नागरिक गिरफ्तार किए गए थे।
  • यहाँ के अशिक्षित लोगों का ब्रेनवाश किया गया और हिन्दू धर्म के प्रति उनके मन में गलत-गलत बातें भर घृणा पैदा की गई। इनके दिमाग में सनातन-विरोधी बातें डाल दी गई हैं।
  • पूरे धनुआ तालुका के आदिवासी साधु-संतों को ग़लत नज़र से देखते हैं। जबकि, साधु-संत ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की राह पर चलते हैं, अर्थात ये पूरा विश्व एक ही परिवार है।

सभा ने कहा है कि इन सब बातों को देखते हुए लगता है कि साधुओं की मॉब लिंचिंग कोई साधारण घटना या अपराध नहीं था। इसके पीछे बहुत बड़ी साज़िश है। इस पत्र में महाराष्ट्र सरकार से भी जवाब माँगे गए हैं। कहा गया है कि केन्दीय गृह मंत्री अमित शाह के हस्तक्षेप के बाद और वीडियो वायरल होने बाद जनाक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने कुछ गिरफ्तारियाँ तो की लेकिन असली गुनहगार अभी भी बचे हुए हैं।

हिन्दू धर्म आचार्य सभा ने राज्यपाल को लिखा पत्र

पुलिस ने जो शिकायत दर्ज की है और वीडियो में जो दिख रहा है, इन दोनों में अंतर है। यह बताता है कि पुलिस इस मामले को ठीक से नहीं हैंडल कर रही है। हिन्दू धर्म आचार्य सभा ने पूछा है कि पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ अब तक कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया? विश्व हिन्दू परिषद ने भी एक दिन पहले इस हत्याकांड को निर्मम बताते हुए कहा था कि इस क्षेत्र में वामपंथियों का इस तरह से हिंसा करने का इतिहास रहा है। वीएचपी ने पूछा था कि अगर किसी अल्पसंख्यक के साथ ऐसा होता तो क्या मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इसी तरह चुप रहते?

पालघर: मिशनरी, शारब माफिया और रावण एंगल

पालघर मॉब लिंचिंग को लेकर एक चौंकाने वाली बात ये पता चली है कि इस क्षेत्र में शराब माफियाओं का बोलबाला है। शराब का व्यापार धड़ल्ले से चलता है। सामाजिक सेवा में लगे लोग और साधु-संत इन चीजों का विरोध करते हैं। शराब माफिया ऐसे लोगों को दुश्मन समझते हैं।

पालघर में सक्रिय सामाजिक संस्थाओं ने बताया कि पिछले कई महीनों से ये क्षेत्र धर्मान्तरण और ईसाई मिशनरियों के दुष्प्रचार का गढ़ बन गया है। हिन्दू संगठन इसका विरोध करते हैं और इसलिए साधुओं से वे दुश्मनी पालते हैं। उग्र भीड़ के साथ एनसीपी नेता काशीनाथ चौधरी भी खड़ा था। कहा जा रहा है कि यहाँ के ईसाई मिशनरियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और एनसीपी नेता का वहाँ होना इस बात की पुष्टि करता है। सीपीएम के नेता भी उस भीड़ में शामिल थे। 

उत्तर प्रदेश: शामली में लॉकडाउन का उल्लंघन कर ‘निकाह का मुद्दा’ सुलझाने के लिए बुलाई पंचायत, 28 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के शामली जिले में लॉकडाउन का उल्लंधन कर पंचायत में हिस्सा लेने के आरोप में 28 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि ये पंचायत इसलिए बुलाई गई थी, ताकि गाँव के एक शख्स को लेकर यह तय किया जा सके कि उसका बहिष्कार किया जाए या नहीं।

जानकारी के मुताबिक आरोपित जलालाबाद शहर का रहने वाला है। कथित तौर पर खुर्शीद कुरैशी द्वारा अपने बेटे जावेद के निकाह को रद्द कर दिए जाने के बाद वो क्रोधित था। खुर्शीद कुरैशी के बेटे जावेद की शादी 22 अप्रैल को पड़ोसी गाँव में होने वाली थी।

आरोपित ने खुद को ठगा हुआ महसूस करते हुए आरोप लगाया कि कुरैशी ने बिना उसे सूचना दिए जान-बूझकर अपने बेटे की निकाह रद्द करवाकर किसी और परिवार में उसकी शादी तय कर दी।

हालाँकि, शामली के कुरैशी के परिवार ने कहा कि पुलिस ने उन्हें समारोह के लिए अनुमति नहीं दी, जबकि पुलिस ने दावा किया कि उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया था।

डीएसपी अमित सक्सेना ने इस बाबत कहा कि एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें कई लोगों को विवाह विवाद को सुलझाने के लिए बुलाई गई सामुदायिक पंचायत में भाग लेते देखा गया था। इस सभा में अचानक से अपने बेटे जावेद का विवाह कैंसिल कर देने की वजह से खुर्शीद कुरैशी के खिलाफ फैसला सुनाया गया।

लॉकडाउन के उल्लंघन में 28 गिरफ्तार

उन्होंने आगे बताया कि इस दौरान गाँव के कई लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर एक जगह पर इकट्ठे हुए थे। इनके खिलाफ FIR दर्ज की गई है और 28 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269, 270 और महामारी रोग अधिनियम की धारा 3 के तहत FIR दर्ज की गई है।

गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस के मद्देनजर 3 मई तक लॉकडाउन जारी है। मगर कुछ लोग लगातार इसका उल्लंघन कर रहे हैं। पिछले दिनों केरल के कासरगोड जिले के एक मस्जिद में लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करके नमाज अता करवाने वाले इमाम और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया था।

बिहार के गया जिले में लॉकडाउन के दौरान नियमों का उल्लंघन कर खुली दुकानों को बंद करवाने जब पुलिस की टीम पहुँची तो स्थानीय लोगों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। हमले में एसआइ ददन प्रसाद व एक अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो महिलाओं समेत छह हमलावरों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद तत्काल पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते दस नामजद और 10 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। वहीं पुलिस ने गिरफ्तार किए सभी छह आरोपितों को जेल भेज दिया। 

पत्रकारों का टेस्ट करोगे तो और फैलेगा कोरोना: कर्नाटक में कुमारस्वामी के MLC ने काटा बवाल

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पार्टी जेडीएस के नेता के ख़िलाफ़ पत्रकारों की कोरोना स्क्रीनिंग में व्यवधान डालने का मामला दर्ज किया गया है। जेडीएस के एमएलसी केटी श्रीकांत गौड़ा, उनके बेटे और तीन अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ शनिवार (अप्रैल 25, 2020) को मांड्या वेस्ट पुलिस स्टेशन में मामले दर्ज किया गया।

ये सभी पत्रकारों के कोविड-19 टेस्टिंग के दौरान आंबेडकर भवन में हंगामा कर रहे थे। उनका कहना था कि इससे कोरोना वायरस का संक्रमण और ज्यादा फैलेगा, इसलिए वे विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

वहाँ पत्रकारों की टेस्टिंग के दौरान ही जेडीएस नेता समर्थकों सहित पहुँच गए और वायरस के फैलने की बात करने लगे। उन्होंने पत्रकारों की टेस्टिंग का विरोध किया। इसके बाद पुलिस और जेडीएस नेताओं में झड़प हुई। इसके बाद पुलिस को एमएलसी गौड़ा को हिरासत में लेना पड़ा।

बता दें कि महाराष्ट्र में कई पत्रकारों के संक्रमित होने के बाद अन्य राज्य भी सतर्क हो गए हैं। इसी के तहत पत्रकारों की जॉंच की जा रही है।

देश भर में कई पत्रकार निकले कोरोना पॉजिटिव

कर्नाटक सरकार ने सभी जिलों में कार्यरत पत्रकारों का कोरोना टेस्ट कराने का आदेश दिया था। मांड्या में इस काम के लिए आंबेडकर भवन का प्रयोग किया जा रहा था। मुंबई में 53 पत्रकार कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, जिनमें कई फोटो जर्नलिस्ट भी हैं। अब तक वहाँ 167 पत्रकारों की टेस्टिंग हो चुकी है।

मुंबई की मेयर किशोरी पडनेकर ने ख़ुद को क्वारंटाइन कर लिया है, क्योंकि वो इनमें से कई पत्रकारों के संपर्क में आई थीं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश और असम ने भी पत्रकारों की टेस्टिंग का निर्णय लिया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी कहा है कि कन्टेनमेंट जोन से रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार सभी प्रकार के सावधानी व बचाव के उपाय करें। केंद्र सरकार ने मीडिया संस्थानों को भी ऑफिस व फील्ड कर्मचारियों का ध्यान रखने को कहा है।

कर्नाटक में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 489 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 126 मामले अकेले बेंगलुरु और 88 मैसूर के हैं। 153 लोग ठीक भी हो चुके हैं। राज्य में 18 लोगों की अब तक कोरोना के कारण जान गई है।

ज्ञात हो कि कर्नाटक के पदरायणपुरा इलाके में स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वाले आरोपितों में से 5 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। ये 5 उन 126 लोगों की सूची में से थे, जिन्हें स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। इनके साथ पकड़े गए अन्य 119 को जेल में रखा गया था।

मस्जिदों में सघन तलाशी के बाद भी सैकड़ों लापता तबलीगी जमातियों की वजह से बढ़ सकता हैं संक्रमितों का आँकड़ा: रिपोर्टस

कोरोना महामारी से लड़ने के लिए पूरा विश्व लॉकडाउन व क्वारंटाइन के कड़े नियमों का पालन कर रहा है। जबकि भारत में लॉकडाउन और क्वारंटाइन के कड़े उपाय अपनाने के बाद भी यहाँ मुख्य रूप से तबलीगी जमात के कार्यक्रम के बाद कुछ के लापता होने से केसों में वृद्धि हुई। इसके बाद ही देश में हजारों की संख्या में नए मामले आने शुरू हो गए। जिनका संबंध दिल्ली मरकज़ से जुड़ा था। कई दिनों तक की गई कड़ी मशक्कत और अलग-अलग मस्जिदों में छिपे तबलीगी जमात के सदस्यों की खोज के बाद, भारत अब एक अनिश्चित स्थिति में खड़ा है। जहाँ कई लापता तबलीगी जमात के सदस्य कोरोनावायरस संक्रमण को आने वाले दिनों में भी तेज़ी से बढ़ा सकते है।

अभी भी तबलीगी जमात के सैकड़ों लापता जमाती खुफिया एजेंसियों, विभिन्न राज्यों और यहाँ तक ​​कि केंद्र सरकार की पुलिस के लिए काफी सिरदर्द बने हुए हैं।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तबलीगी जमात के सैकड़ों सदस्य अभी भी लापता हैं। इन सदस्यों को ट्रैक किया जा रहा है और एजेंसियाँ ​​इन्हें ढूँढने की पुरजोर कोशिश में लगी है। इसके बावजूद भी इनका पता लगाना काफ़ी मुश्किल हो रहा हैं। मार्च में निजामुद्दीन मरकज में भाग लेने वाले तबलीगी जमात के सदस्यों ने विभिन्न राज्यों की यात्रा की जिसकी वजह से देश में कोरोना वायरस के कारण कई लोग संक्रमित हो गए।

गृह मंत्रालय के बयान के अनुसार, देश के 23 राज्यों में 4,291 से अधिक संक्रमण के मामलें ऐसे हैं जो तबलीगी जमात के सदस्यों से जुड़े हैं। 40,000 से अधिक लोगों को विभिन्न राज्यों में सारी सुविधाओं के साथ क्वारंटाइन भी किया गया है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न राज्यों में जैसे महाराष्ट्र में तबलीगी जमात के संपर्क में आने वाले 40-50 सदस्य लापता हैं, उत्तर प्रदेश में लगभग 25 से 30 लोगों का पता नही लगाया जा पा रहा हैं। वहीं 25 से 30 लोग बिहार में खोजे गए हैं, 20 से 25 लोग तमिलनाडु में लापता हैं और कर्नाटक में भी 15 से 20 लोगो का पता नही लगाया जा पा रहा हैं।

बताया यह जा रहा है कि लापता तबलीगी जमात के सदस्यों की संख्या 200 से अधिक हो सकती है, इसके साथ ही, वे जिन लोगों के संपर्क में आए है अगर उन्हें जल्द ही
क्वारंटाइन नहीं किया गया तो इसके परिणामस्वरूप देश में कोरोनावायरस के सकारात्मक मामलों की संख्या को हजारों में बढ़ने से कोई नही रोक सकता।

कथित तौर पर, तबलीगी जमात के सदस्यों ने अपना फोन बंद कर दिया है, पुलिस लापता सदस्यों को ट्रैक करने के लिए टॉवर रिकॉर्ड और फोन डेटा से पता लगाने की कोशिश कर रही है। तबलीगी को खोजने के लिए पुलिस द्वारा स्थानीय मुखबिरों को भी सक्रिय किया गया है। मस्जिद के ट्रस्टियों को पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए अलग-अलग समुदायों के नेता उन्हें मनाने में लगे हैं।

200 से ऊपर तबलीगी जमात के लोग है लापता

हालाँकि, संदेह यह है कि लापता तबलीगी जमात के सदस्यों की संख्या 200 से अधिक हो सकती है। क्योंकि रिपोर्ट्स के अनुसार दो दिन पहले यह बताया गया था कि केरल में अकेले 284 सदस्य तबलीगी जमात के लापता हो सकते हैं।

महामारी से प्रभावित होने वाला केरल देश का पहला राज्य था। जहाँ 408 कुल मामले दर्ज किए गए जिसमे तीन लोगों की मौत और 288 लोग अब तक ठीक हुए हैं। हालाँकि, राज्य पुलिस को अब डर है कि कुल 1,311 में से कुछ 284 लापता जमातियों की वजह से संक्रमित लोगों का आँकड़ा बढ़ सकता है।

केरल पुलिस तबलीगी जमात में उपस्थित लोगों को ढूँढने की कोशिश कर रही है क्योंकि मार्च के अंत तक संक्रमण के फैलने का सिलसिला राज्य में जारी रहा। कॉल रिकॉर्ड के बाद यह बात सामने आई कि राज्य के 1,311 लोग निज़ामुद्दीन मरकज़ के कार्यक्रम में शामिल थे।

तबलीगी मरकज़ के जमाती अब कोरोनावायरस के हॉटस्पॉट

निज़ामुद्दीन मरकज़ में हुए तब्लीगी जमात के कार्यक्रम, से जुड़े लोग भारत में कोरोनावायरस का हॉटस्पॉट बन गए है, क्योंकि भारत में एक-तिहाई से अधिक मामले अब उस घटना से जुड़े हुए हैं। जिन व्यक्तियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया था, उनके परिवार के सदस्य और उनके संपर्क में आए लोगों का टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आ रहा हैं। जिससे देश में कोरोनावायरस के मामलों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।

तबलीगी जमात के कार्यक्रम में न केवल भारतीय मौलवियों ने, बल्कि विदेशी नागरिकों ने भी भाग लिया था। उसके बाद दिल्ली के करीमनगर से इज्तिमा के लिए यात्रा करने के बाद जब तेलंगाना में संगठन से जुड़े सात इंडोनेशियाई नागरिकों का टेस्ट पॉजिटिव आया तभी सबको सचेत हो जाना चाहिए था। हालाँकि, बाद में जमात के द्वारा वायरस को फैलाने की पूरी गुंजाइश तब बन गई जब दिल्ली के चूड़ीवाली मस्जिद में लगभग 300 जमाती को संदिग्ध कोरोनोवायरस लक्षणों के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा, जिनमें कई लोगों के टेस्ट पॉजिटिव आए थे।

अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ ईसाई संगठन ने भी दर्ज कराई FIR: ‘मोमबत्ती गैंग’ और ‘पादरी’ जैसे शब्दों पर आपत्ति

पंजाब के लुधियाना में ‘क्रिश्चियन यूनाइटेड फेडरेशन’ ने अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई है। उसने कहा है कि अर्नब ने ईसाइयों की भावनाओं को ठेस पहुँचाया। फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि अर्नब ने ‘मोमबत्ती गैंग’ और ‘पादरी’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया। इससे ईसाइयों की भावनाओं को ठेस पहुँची है।

फेडरेशन के अध्यक्ष अल्बर्ट दुआ ने इन बयानों के लिए अर्नब की निंदा की। सोनिया गाँधी मामले में अर्नब पहले ही घिरे हुए हैं।

FIR दर्ज कराने से बाज नहीं आ रही कॉन्ग्रेस

रिपब्लिक टीवी के संस्थापक-संपादक अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बावजूद उनके ख़िलाफ़ कई और एफआईआर दर्ज किए गए हैं। कॉन्ग्रेस नेताओं ने अलग-अलग जगहों पर सोनिया गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में ये एफआईआर दर्ज कराए हैं।

उधर, अर्नब गोस्वामी पर हमले के आरोप में गिरफ़्तार दोनों आरोपितों ने बताया है कि वो लगभग एक दशक से भी ज्यादा से ‘यूथ कॉन्ग्रेस’ से जुड़े हुए हैं। अरुण बोराडे और प्रतीक मिश्रा को गणपतराव कदम मार्ग से गिरफ़्तार किया गया था। दोनों को गोस्वामी के सिक्योरिटी गार्ड्स ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया था।

महाराष्ट्र, दिल्ली, छत्तीसगढ़, दिल्ली और पंजाब में अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया गया है। इन सभी में भड़काऊ बयान देने और आपत्तिजनक टिप्प्णी करने का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी एफआईआर पर कार्रवाई करने से 3 हफ्ते की रोक लगा दी थी, लेकिन उसके बाद भी कॉन्ग्रेस के लोग विभिन्न इलाक़ों में लगातार एफआईआर दर्ज करा रहे हैं।

हमलावरों की कॉन्ग्रेस में सक्रियता

अर्नब पर हमले का आरोपित 26 वर्षीय बोराडे खुद को दलित कार्यकर्ता भी कहता है। वह 2010 से ही यूथ कॉन्ग्रेस से जुड़ा हुआ है। वह मुंबई यूथ कॉन्ग्रेस के मुखिया गणेश यादव का सबसे क़रीबी सिपहसालार है। बोराडे को 2016 सिओन कोलीवाड़ा में यूथ कॉन्ग्रेस का वार्ड अध्यक्ष बनाया गया था।

हालिया विधानसभा चुनावों तक बोराडे यूथ कॉन्ग्रेस का उपाध्यक्ष था, जबकि मिश्रा सदस्य था। बोराडे अपनी बीकॉम की पढ़ाई पूरी कर एलएलबी कर रहा है। मिश्रा ने 12वीं से आगे पढ़ाई ही नहीं की है। दोनों ही अपने क्षत्रों में राजननीतिक कार्यक्रमों में ख़ासे सक्रिय रहते थे।

दोनों कॉन्ग्रेस पार्टी के विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन करते थे और ब्लड डोनेशन कैम्प भी लगाते थे। लॉकडाउन के बाद उन दोनों ने कॉन्ग्रेस की तरफ से कुछेक समाजिक कार्य भी किए थे। दोनों बार-बार यही कह रहे हैं कि इस हमले की साज़िश और अंजाम देने में उन दोनों के अलावा और कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं है।

बोराडे ने बताया है कि उसने अपने घर से स्याही लाई थी। उन्होंने अपने एक दोस्त की बाइक माँग कर इस घटना को अंजाम दिया था। इस मामले में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

पहले इसे इंस्पेक्टर लेवल पर हैंडल किया जा रहा था लेकिन अब इसकी जाँच वर्ली असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर द्वारा की जा रही है। डिफेन्स के वकील ने दावा किया कि राजनैतिक दबाव के कारण केस रजिस्टर किया गया है और जो धाराएँ लगाई गई हैं, उनके तहत 3 साल से ज्यादा की सज़ा नहीं हो सकती। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुलिस को पहले आरोपितों को नोटिस देना चाहिए था। उन्होंने सीधे गिरफ़्तार किए जाने को ग़लत बताया। कॉन्ग्रेस का कहना है कि इन नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से हमला किया, इसमें पार्टी का कोई रोल नहीं है।

अर्नब गोस्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

दोनों पक्ष के मत सुनकर, SC ने माना था कि अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एक ही मामले में कई राज्यों में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। लिहाजा सभी एफआईआऱ को एक साथ जोड़ा जाए। अदालत ने अर्नब को जाँच में सहयोग करने को कहा था। अब इस मामले पर सुनवाई 8 हफ्तों के बाद होने की बात कही गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता अर्नब को भी याचिका में संशोधन करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता कोर्ट से सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़े जाने का आग्रह करें। अर्नब के ख़िलाफ़ कपिल सिब्बल ने पैरवी की थी।

सरकार ने लॉकडाउन में दी बड़ी राहत: इन दुकानों को है खोलने की इजाजत, शराब की दुकान-शॉपिंग मॉल नहीं खुलेंगे

केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के दौरान कुछ शर्तों के साथ दुकानें खोलने की इजाजत दी है। इसे लेकर गृह मंत्रालय ने शनिवार (अप्रैल 25, 2020) को स्पष्टीकरण जारी किया। इस स्‍पष्‍टीकरण के जरिए यह साफ-साफ समझाया गया है कि कहाँ-कहाँ और कौन-कौन सी दुकानें खुलेंगी। गृह मंत्रालय के शुक्रवार के आदेश के बाद ऐसी खबरें फैल गई थीं कि सरकार ने सभी तरह की दुकानों को खोलने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद गृह मंत्रालय को यह स्‍पष्‍टीकरण देना पड़ा है।

इन दुकानों को सरकार ने दी राहत

मंत्रालय ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में, शॉपिंग मॉल की दुकानों को छोड़कर सभी दुकानें खुलेंगी। वहीं, शहरों क्षेत्रों में सभी स्टैंडलोन (अकेली) दुकानों, पड़ोस की दुकानों और आवासीय परिसरों में स्थित दुकानों को खोलने की अनुमति है। यानी कि अगर आप किसी कॉलोनी या सोसाइटी में रहते हैं तो आपके मोहल्ले की दुकानें अब खुल जाएँगी। अब आप जरूरत का सामान पड़ोस के किराना स्टोर्स से खरीद सकते हैं। हालाँकि, जब भी आप दुकान पर जाएँ तो मास्क लगाकर जाएँ और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करें।

मॉल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अभी भी बंद

आदेश में कहा गया है कि बाजार में स्थित दुकानों, मार्केट कॉम्प्लेक्स और शॉपिंग मॉल को खोलने की इजाजत नहीं है। शराब, सिगरेट, तंबाकू समेत सभी नशीली चीजों की बिक्री पर रोक पहले की तरह जारी रहेगी। इसके अलावा ई-कॉमर्स कंपनियाँ अभी गैरजरूरी सामानों की डिलिवरी नहीं कर सकेंगी। वह सिर्फ जरूरी सामानों की ही डिलीवरी जारी रखेंगी।

हॉटस्पॉट इलाकों में छूट नहीं

हालाँकि, गृह मंत्रालय द्वारा जारी छूट उन इलाकों में प्रभावी नहीं होगा, जिसे कोरोना वायरस की वजह से हॉटस्पॉट जोन या फिर कन्टेनमेंट जोन घोषित किया गया है। गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि हॉटस्पॉट्स में कोई छूट नहीं दी जाएगी। यहाँ सभी तरह की दुकानों पर लागू प्रतिबंध जारी रहेगा। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने केवल जरूरी सामान की दुकानों को खोलने की इजाजत दी है। जिसमें राशन, सब्जी और फल की दुकानें शामिल हैं।

नहीं खुलेंगी हेयर सैलून और नाई की दुकानें

गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा, “हेयर सैलून और नाई की दुकानें नहीं खुलेंगी। हमारा आदेश उन दुकानों पर लागू होता है जो वस्तुओं की बिक्री करते हैं। नाई की दुकानों और हेयर सैलून को खोलने का कोई आदेश नहीं है। शराब की दुकानें भी नहीं खुलेंगी। मंत्रालय के नए आदेश के अनुसार किसी भी तरह के रेस्टोरेंट को खोलने की इजाजत नहीं है।”

दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने डिजास्टर मैनेजमेंट ऐक्ट 2005 के तहत 15 अप्रैल को जारी अपने आदेश में बदलाव किया है। इस बदलाव के तहत अब गैरजरूरी सामानों की दुकानों को भी कुछ शर्तों के साथ खोलने की इजाजत दी है। मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा था कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना अधिनियम के तहत पंजीकृत सभी दुकानें खोली जा सकती हैं। लेकिन इन्‍हें भी सोशल डिस्‍टेंसिंग और सैनेटाइजेशन का पूरा ख्‍याल रखना अनिवार्य होगा।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए 3 मई तक के लिए देशव्यापी लॉकडाउन किया गया है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लॉकडाउन को सही कदम बताते हुए कहा कि देश के 15 जिलों में 28 दिनों में कोराना वायरस का नया मामला नहीं आया है। वहीं देश के 80 जिले हैं जहाँ पिछले 14 दिनों से कोई मामला नहीं आया है। उन्होंने कहा कि जो महामारी तेज गति से फैल रही थी, लॉकडाउन कि वजह हम उसे काफी हद तक रोक लगा पाने मे सफल हैं।

कश्मीर: अब परिवार के हवाले नहीं होगा आतंकियों का शव, प्रशासन खुद दफनाएगा

जम्मू कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियाँ लगातार जारी हैं। इस बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में मारे जाने वाले आतंकवादियों के शवों को उनके परिवारों को ना सौंपकर दफन करने का निर्णय लिया है। इसके पीछे कारण जनाजे में उमड़ने वाली भीड़ और उनके द्व्रारा लगाए जाने वाले इस्लामिक नारे बताए जा रहे हैं।

साथ ही, कोरोना वायरस के खतरे के बीच उमड़ने वाली भीड़ भी चिंता का विषय बताई जा रही है। अब पुलिस के अधिकारी आतंकवादियों के शवों को स्वयं दफना रहे हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार आतंकवादियों के शवों का अंतिम संस्कार मजिस्ट्रेट की देखरेख में स्थानीय प्रशासन की तरफ से किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के ही एक सीनियर ऑफिसर ने बताया है कि आतंकवादियों के घरवालों की मौजूदगी में सारे मजहबी रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाता है।

आतंकवादियों को दफनाने में भीड़ के उमड़ने की शुरुआत 2015 में देखी गई थी, जब कश्मीर में अंतिम संस्कार के लिए लश्कर-ए-तैयबा के जिहादी अब्दुल रहमान के साथ बड़ी भीड़ जमा होने लगी थी, जिसे अबू कासिम के नाम से भी जाना जाता है। वहीं घाटी से आर्टिकल 370 को निरस्त करने के बाद जिहादियों के अंतिम संस्कार में फिर से भारी मात्रा में भीड़ जुटने लगी थी।

अफजल गुरु को दफनाया गया था तिहाड़ जेल में

अंतिम संस्कार के अलावा उनके DNA के सैंपल भी सुरक्षित रखे जाते हैं और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल होने की सिर्फ परिवार के लोगों को ही इजाजत दी जाती है। पुलिस अधिकारी ने संसद हमले के दोषी अफजल गुरु का जिक्र करते हुए कहा कि वो कानूनी तौर पर परिवारवालों को आतंकवादियों का शव देने के लिए बाध्य नहीं हैं, जैसा कि अफजल गुरु को फाँसी देने के बाद दिल्ली के तिहाड़ जेल में दफना दिया गया था।

दरअसल, इसी माह सोपोर में जैश-ए-मुहम्मद के आतंकवादी सज्जाद नवाब, कुलगाम में हिजबुल के आतंकियों को दफनाने में सैकड़ों की तादाद में लोग उमड़ आए थे। जिसके बाद यह फैसला लिया गया है।

सेना ने किया 3 आतंकियों का खात्मा

जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस की महामारी के बीच भी आतंकवादियों का सफाया जारी है। आज शनिवार (अप्रैल 25, 2020) सुबह पुलवामा जिले के अवंतिपुरा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो आतंकवादियों और उसके एक सहयोगी को मार गिराया है। माना जा रहा है कि कुछ आतंकवादी अब भी छिपे हो सकते हैं।

आतंकवादियों के खिलाफ सर्च अभियान अब भी जारी है। मारे गए आतंकवादियों की पहचान नहीं हो पाई है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ही अधिकारियों ने यह जानकारी दी थी कि साल 2020 में अब तक सुरक्षाबलों ने पचास आतंकवादियों को मार गिराया है। वहीं, पुलिस ने कहा कि इस मुठभेड़ से पहले देशव्यापी बंद के बीच अब तक 18 आतंकवादी घाटी से मारे जा चुके हैं।

दीपिका के साथ ‘छपाक’ में किया था काम, कैंसर पीड़ित पिता के इलाज के लिए दर-दर भटक रही एसिड अटैक पीड़िता

एक एसिड अटैक पीड़िता अपने पिता की बीमारी के कारण मदद के लिए गुहार लगा रही है। दीपिका पादुकोण ने जब ‘छपाक’ में अभिनय किया था तो दावा किया गया था कि ये एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं के दुःख को दुनिया को सामने लाने का एक उपक्रम है। फ़िल्म फ्लॉप हुई सो अलग लेकिन फ़िल्म के निर्माताओं और इससे जुड़े बॉलीवुड के बड़े लोगों ने उस एसिड अटैक पीड़िता की भी मदद नहीं की, जिसने ‘छपाक’ में अभिनय किया था। उनका नाम जीतू शर्मा है, जिनके पिता गले की कैंसर से पीड़ित हैं लेकिन इलाज के लिए रुपए नहीं हैं।

जीतू का परिवार अलीगढ़ के बरौला जफराबाद क्षेत्र में रहता है। 23 वर्षीय जीतू के पिता मैनपुरी में बतौर हेड कांस्टेबल पदस्थापित थे। 55 वर्षीय सोमदत्त शर्मा पिछले 5 दिनों से पानी तक पीने में असमर्थ हैं क्योंकि उनकी बीमारी ने एक गंभीर रूप ले लिया है। उनकी हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। जनवरी में उन्हें नोएडा के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए दाखिल कराया गया था। अब लॉकडाउन की वजह से उन्हें वहाँ ले जाना संभव नहीं हो पा रहा है। कोरोना संक्रमण आपदा के बीच जीतू और उनका परिवार परेशान है।

कैंसर पीड़िता पिता के इलाज में धन की समस्या

अलीगढ़ मुस्लिम कॉलेज के अस्पताल में भी उन्हें दाखिल कराने की कोशिश की गई लेकिन वहाँ बताया कि वो अब नए मरीजों को नहीं ले रहे हैं। सोमदत्त का अंतिम केमो मार्च 19 को हुआ था। इसके बाद मार्च 26 को भी उनका केमो होना था, जो नहीं हो पाया। तब तक लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की घोषणा की जा चुकी थी। जीतू ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन और पुलिस से भी मदद माँगी है लेकिन कोई आगे नहीं आया। उनकी परेशानी ये है कि बिना अनुमति के जिला की सीमा को पार कर के अपने पिता को कैसे ले जाएँगी।

वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे जीतू के परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मदद की गुहार लगाई है। परिवार ने 3 लाख रुपए का लोन लिया था, जिसके लिए उन्हें अपने घर को गिरवी रखना पड़ा था। वो सारे रुपए अब तक के इलाज में ख़र्च हो चुके हैं। जनवरी से उनके पिता को वेतन नहीं मिला है क्योंकि अब तक मेडिकल कागज़ात सबमिट नहीं किए जा सके हैं। जीतू एक कैफे में काम करती हैं, जिसे एसिड अटैक पीड़ितों द्वारा ही चलाया जाता है।

जीतू का कहना है कि उनका परिवार अभी तत्काल प्रभाव से मदद के लिए गुहार लगा रहा है क्योंकि उनके पिता की तबियत काफी अस्थिर है। जनवरी 2014 में एक 55 साल के व्यक्ति ने जीतू पर तेज़ाब फेंक दिया था, जो उनका पीछा करता रहता था। जीतू को फ़िल्म में आधे घंटे का किरदार मिला था, जिसके लिए फिल्म, पार्टी और प्रचार से जुड़े कार्यक्रमों में शूटिंग की गई थी। इसके लिए उन्हें महज 1 लाख रुपए मिले थे।

विवादित थी दीपिका पादुकोण की ‘छपाक’

दीपिका पादुकोण की ‘छपाक’ जनवरी 2020 में रिलीज हुई थी। इसके प्रमोशन के लिए वो जेएनयू के वामपंथी छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुई थीं, जिसके बाद फिल्म विवादों में फँस गई थी। फ़िल्म ‘छपाक’ के प्रमोशन के लिए पब्लिसिटी स्टंट के चक्कर में जेएनयू जाने वाली दीपिका पादुकोण को बॉक्स ऑफिस पर तगड़ा झटका तो लगा ही था, साथ ही उनकी ब्रांड वैल्यू को भी चोट पहुँची थी। दीपिका पादुकोण जिन ब्रांड्स का प्रचार करती थीं, उनकी विजिबिलिटी में कमी आ गई थी। 

ठीक मारा गोली उसने… सारे हिंदू की मॉं***: आदिल ने सन्नी गुप्ता मर्डर की आड़ में पटना को जलाने की रची साजिश

लॉकडाउन विवाद में पटना सिटी में 20 अप्रैल को सन्नी गुप्ता की चॉंद मोहम्मद ने गोली मार हत्या कर दी। इसका फायदा उठाकर आदिल मिर्जा ने शहर का माहौल खराब करने की साजिश रची। उसने शहजाद नाम से फेसबुक पर फर्जी अकाउंट बनाए और भड़काऊ पोस्ट किए। आदिल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

आदिल ने शहजाद सिद्दिकी नाम से बनाए प्रोफाइल से पोस्ट करते हुए लिखा,”ठीक मारा गोली उसने। हम होते तो हम भी मारते। सारे हिंदुओं की माँ***ये लोग सब***का बच्चा हम लोगों को कमजोर समझता है। सब बड़ा*** ये आरएसएस वाला है। …आरएसएस वाला सब के घर में घुस के मारेंगे। सब को गोली मारना चाहिए।”

खाजेकलाँ थानाध्यक्ष सनोवर खाँ ने आपइंडिया को बताया कि आदिल ने सन्नी की हत्या को लेकर आपत्तिजनक और माहौल को खराब करने के इरादे से सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। इसकी जानकारी मिलते ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार खाजेकलाँ थाना क्षेत्र के फौजदारी मोहल्ला निवासी मोहम्मद आदिल मिर्जा ने सन्नी गुप्ता की हत्या का फायदा उठाते हुए दो फर्जी एकाउंट बनाए और मामले को तूल देने के इरादे से आपत्तिजनक पोस्ट की। फर्जी एकाउंट से बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव और एक पूर्व पार्षद को टार्गेट करते हुए उन्हें गोली मारने की धमकी दी। पोस्ट वायरल होने पर पुलिस एक्शन में आई और आदिल को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से एक लैपटॉप और मोबाइल भी बरामद किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आदिल अक्टूबर में सउदी अरब से आया था। इसी दौरान शहजाद की बाइक चोरी हो गई जो आदिल के पास मिली थी। इसके बाद शहजाद ने आदिल को पीट दिया था। इसका बदला लेने के लिए आदिल ने उसके नाम से फर्जी अकाउंट बना भड़काऊ पोस्ट किए। सिटी एसपी के हवाले से हिन्दुस्तान ने बताया है कि आदिल के पोस्ट के कारण माहौल खराब हो सकता था। वह संप्रदाय विशेष के खिलाफ लगातार पोस्ट डाल रहा था।

गौरतलब है कि सन्नी गुप्ता को बीते सोमवार को लॉकडाउन विवाद के दौरान गोली मारी गई थी। असल में लॉकडाउन पालन कराने को लेकर स्थानीय युवकों का एनसीसी कैडेट के साथ विवाद हो गया था। कैडेट्स पर पथराव किया गया, जिसका सन्नी ने विरोध किया था।

सन्नी के भाई दीपक गुप्ता ने ऑपइंडिया को बताया था कि चॉंद हथियारों का तस्कर है। उनका परिवार उसकी गुंडई का विरोध करते रहे हैं। इस कारण वे लोग उसके निशाने पर थे। दीपक के अनुसार घटना वाले दिन भी सन्नी के सिर में गोली चॉंद ने घर में घुसकर मारी थी।