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लॉकडाउन में मनचलों को डराने का नया तरीका: पुलिस ने कोरोना ‘मरीज’ वाली एंबुलेंस में डाल दिया

देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान सड़कों पर उतरकर नियमों का उल्लंघन करने वाले मनचलों को सबक सिखाने के लिए अब पुलिस नए-नए तरीके खोज रही है। पिछले दिनों कुछ वायरल वीडियोज़ में हमने देखा कि कहीं पर डंडों के बूते तो कहीं उठक-बैठक करा लोगों को सड़कों पर आने से रोका जा रहा था।

कुछ वीडियो में पुलिस गाना गाकर, फूल-माला पहनाकर लोगों से लॉकडाउन का पालन करने की गुजारिश करती दिखी। कई कोशिशों के बावजूद भी जब ऐसे लोग बाज नहीं आए, तो पुलिस ने एक नया तरीका खोजा। जिसका वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल है।

इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि पुलिस सड़क पर आ रहे लोगों को एक फर्जी मरीज के साथ एंबुलेंस में बंद कर डरा रही है। ताकि उन्हें समझ आ सके कि इस समय सड़क पर बिना मास्क आदि के उतरना कितना खतरनाक है।

हालाँकि ये वीडियो कहाँ की है, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। लेकिन वीडियो की भाषा को सुनकर ये साउथ के किसी राज्य की मालूम होती है। इसे देखकर कुछ लोगों को ये तरीका नागरिकों में डर व्याप्त करने वाला लग सकता है। लेकिन वीडियो देखने पर मालूम चलेगा कि इससे दिलचस्प तरीका और कुछ नहीं है।

इस वीडियो में पुलिस जो काम सड़क पर बेवजह घूम रहे लोगों के साथ करती दिख रही है, उसे देखकर लगता है कि यदि हर राज्य की पुलिस ऐसा तरीका अपना ले, तो शायद सड़कों पर दिखने वाले अन्य लोग भी घर पर बैठे दिखें।

हम देख सकते है कि इस वीडियो में पुलिस ने पहले मनचले लड़कों को पकड़ा। फिर उन्हें सबक सिखाने के लिए एक ऐसी एम्बुलेंस में बंद करने का नाटक किया, जिसमें एक फर्जी मरीज था और जो मनचलों को एंबुलेंस में देखते ही उन्हें छूने की कोशिश करने लगा। इसके बाद लड़के खिड़की, दरवाजा खोल खोलकर भागने लगे और अपने मुँह पर कपड़ा बाँधने लगे।

गौरतलब है कि जिस तरह पिछले दिनों सड़क पर उतर रहे लोग पुलिसकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सिरदर्द बने, उन सब घटनाओं को देखकर लगता है कि इस तरह के प्रयास सराहे जाने चाहिए। हर राज्य की पुलिस ने अपनी ओर से अलग तरीके आजमाएँ, लेकिन जरूरत मुताबिक परिणाम नहीं मिला। ज्यादा सख्ती किए जाने पर सुरक्षाकर्मियों पर पत्थरबाजी तक की घटनाएँ सामने आईं। जैसे अलीगढ के भुजपुरा में पुलिसकर्मियों पर तब हमला हुआ जब वह लॉकडाउन का पालन कराने पहुँचे थे।

कानपुर: तबलीगी जमात के संपर्क में आए मदरसे के 13 छात्र कोरोना वायरस से संक्रमित

उत्तर प्रदेश के सबसे अधिक आबादी वाले जिले कानपुर में कोरोना संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। यहाँ पर एक मदरसे के 13 छात्र कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इनके तार भी तबलीगी जमात के लोगों के साथ जुड़ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि ये छात्र कोरोना वायरस से संक्रमित तबलीगी जमात के लोगों के साथ संपर्क में आए थे। 13 नए मामले के सामने आने के साथ ही कानपुर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर 107 हो गए हैं। 

कुली बाजार स्थित मदरसे से 50 लोगों के सैम्पल लिए गए थे। इनमें से 13 सैम्पल पॉजिटिव आए हैं। सीएमओ डॉ. एके शुक्ला ने बताया कि अधिकतर केस सीलिंग इलाके से आ रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि लोग अब भी लाॅकडाउन का पालन नहीं कर रहे हैं।

डॉ. शुक्ला ने बताया कि इन मरीजों को क्वारंटाइन कर दिया गया था। अब उन्हें सरकारी अस्पतालों के कोविड-19 क्वारंटाइन वार्डों में भर्ती कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह हॉटस्पॉट क्षेत्र है। यहीं के 30 लोग पहले संक्रमित पाए गए थे।

केजीएमयू और जीएसवीएम से गुरुवार देर रात आई रिपोर्ट में 24 लोग संक्रमित पाए गए थे। इनमें अनवरगंज थाने में तैनात एक हेड कांस्टेबल भी शामिल थे। यह हॉटस्पॉट क्षेत्र है। यहीं के 30 लोग पहले संक्रमित पाए गए थे।

हेड कांस्टेबल की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद यहाँ के स्टाफ में हड़कंप मच गया। सूचना पर डीएम एसएसपी मौके पर पहुँचे। अपनी निगरानी में सभी पुलिसकर्मियों की जाँच करवाई।

स्वास्थ्य विभाग ने कांस्टेबल के संपर्क में आए थाना प्रभारी, दो दरोगा समेत 14 पुलिस वालों के सैंपल जाँच के लिए भेजे हैं। इनसे थाने में ही रहने और सावधानी बरतने को कहा गया है। थाने और वहाँ बने आवास परिसर को सैनिटाइज कराया गया और फिर थाने को सील कर दिया गया।

कानपुर में कोरोना संक्रमित तीन मरीजों की मौत होने के साथ ही 7 लोग ठीक होकर अपने-अपने घर चले गए हैं। मरने वालों में तीनों हाॅटस्पाॅट इलाके के रहने वाले हैं। तबलीगी जमात से जुड़े छह सदस्य 14 दिन के इलाज के बाद स्वस्थ्य होकर मंधना स्थित क्वारंटाइन सेंटर में रुके हुए हैं। डीएम ब्रम्हादेव तिवारी ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि लाॅकडाउन का इमानदारी से पालन करें। यदि वह बेवजह घर से बाहर निकलते हैं तो उन पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। डीएम ने बताया कि हाॅटस्पाॅट इलाकों की निगरानी ड्रोन के जरिए की जा रही है।

गौरतलब है कि कानपुर में  गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में जमाती सोशल डिस्टेंसिंग को ताक पर रखकर एक साथ नमाज अदा करते नजर आए थे। इन लोगों ने डॉक्टरों के साथ बदतमीजी करने के साथ ही क्वारंटाइन वार्ड में थूक-थूक कर गंदगी भी फैलाई थी। बाद में यही जमाती डॉक्टरों के सामने रो-रोकर उनसे अपने जीवन की भीख माँग रहे थे

डिलीवरी बॉय बरकत उस्मान से सामान लौटाने की बात निकली झूठी, गजानन चतुर्वेदी ने वीडियो में बताई पूरी बात

महाराष्ट्र के ठाणे स्थित कशीमिरा इलाके में दूसरे मजहब के डिलीवरी बॉय से सामान लेने से मना करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए गजानन (Gajanan) चतुर्वेदी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने बताया है कि उस डिलीवरी बॉय बरकत उस्मान ने खुद ही यह बात कही थी कि उसके मजहब के कारण उससे सामान लेने से मना किया जा रहा है जबकि गजानन चतुर्वेदी ने उसके धर्म का जिक्र नहीं किया था।

डिलीवरी बॉय 32 वर्षीय बरकत उस्मान ने आरोप लगाया कि गजानन ने उसके हाथ से किराने का सामान लेने से मना कर दिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ और NDTV ने भी इसे शेयर किया था, जिसके बाद 51 वर्षीय गजानन को गिरफ्तार भी कर लिया गया।

मजहब के कारण नहीं लौटाया सामान: गजानन चतुर्वेदी

गजानन चतुर्वेदी का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि बरकत उस्मान के द्वारा लगाए गए आरोप एकदम बेबुनियाद हैं क्योंकि उन्होंने सामान लेने से इसलिए इनकार किया क्योंकि वह लगातार अपने ग्लव्स से अपने मुँह, नाक को साफ़ कर रहा था। वीडियो में वह कहते हुए देखे जा सकते हैं कि कोरोना वायरस के संक्रमण से आज जब आदमी खुद अपने नाक और मुँह को छूने से डर रहा है, ऐसे में आप किसी बाहरी आदमी के ऐसा करने पर उससे कोई सामान कैसे ले सकते हैं?

गजानन इस वीडियो में कहते हैं –

“मुझ पर FIR बिना हकीकत और मेरी राय जाने बिना किसी के दबाव में दर्ज की गई है। उसका व्यवहार देखकर मुझे ठीक नहीं लगा। वह स्कूटी में झुक कर बैठा हुआ था, वह खुजली कर रहा था ग्लव्स अपने मुँह पर बार-बार ले जा रहा था। मुझे टेंशन हुई, ऐसी महामारी के समय आदमी खुद अपना हाथ चेहरे पर नहीं ले जा रहा। मैंने उससे पूछा कि कहाँ से आए हो तो उसने कहा कि नया नगर से आया हूँ। मैंने उससे कहा कि वहाँ से कैसे आ सकते हो, वहाँ इतना सीरियस मामला है कोरोना का। उसके बाद तुम बार-बार मुँह पर हाथ लगा रहे हो। मैं नहीं लूँगा…”

“…इतना कहकर मैं चल दिया तो वो पीछे से कहने लगा कि मैं मुस्लिम हूँ इसलिए नहीं ले रहे हो। जबकि मैंने मुस्लिम कहीं भी नहीं कहा। वह वीडियो बना रहा था। मैंने उसे कहा तुम्हें कुछ भी कहना है कह लो लेकिन हमें अपना ध्यान रखना जरुरी है। अगर मैं कोरोना से पॉजिटिव हो जाउँगा तो मेरे परिवार के सदस्य भी हो जाएँगे। मैंने सुरक्षा की दृष्टि से मना किया।”

इसके आगे गजानन ने कहा डिलीवरी बॉय लगातार यही दोहराता रहा कि उसके मजहब के कारण उससे सामान नहीं लिया जा रहा है जबकी उन्होंने उसके मजहब का कोई जिक्र ही नहीं किया और संक्रमण के कारण उसे लौटने को कहा। इसके बाद उसने जाकर FIR की।

गजानन चतुर्वेदी पर इकतरफा आरोपों के आधार पर कार्रवाई

सोशल मीडिया पर भी यह बात जोर पकड़ रही है कि यह मात्र मीडिया द्वारा बनाई गई एक सनसनी का ही नतीजा है और इस बारे में गजानन चतुर्वेदी का पक्ष सुने बिना ही उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया।

डिलीवरी बॉय बरकत उस्मान द्वारा बनाए गए इस वीडियो को कई मुख्यधारा के मीडिया संस्थानों और प्रोपेगेंडा वेबसाइट्स ने कहानी बनाकर प्रकाशित किया क्योंकि। और इसमें डिलीवरी बॉय के दूसरे समुदाय से होने को बताया गया। जिसके बाद गजानन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 295 ए (धार्मिक भावना को आहत करने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण हरकत करना) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया।

ज्ञात हो कि बीते दिनों सोशल मीडिया पर समुदाय विशेष के लोगों की कैमरे में कैद करतूत खूब वायरल हुआ। कहीं फलों में थूक लगाकर उसे सजाते हुए देखा गया, तो कहीं 500 के नोट पर थूक लगाते। ऐसे में एक कारण ये भी कि संकट की घड़ी में आमजन को चाहते न चाहते हुए संदेह करना पड़ रहा है।

महाराष्ट्र में सामने आए हैं हिन्दुओं को निशाना बनाने के मामले

उल्लेखनीय है कि हाल ही में महाराष्ट्र में एक के बाद एक ऐसे कई मामले प्रकाश में आए हैं जिनमें हिन्दुओं को निशाना बनाया जा रहा है। पालघर में संतों की मॉब लिंचिंग से लेकर सोनिया गाँधी से सवाल करने पर रिपब्लिक भारत टीवी के संस्थापक Arnab Goswami पर हुआ हमला और अब गजानन चतुर्वेदी की गिरफ्तारी ने यह संदेश दिया है कि महाराष्ट्र सरकार किसी तय एजेंडा के तहत इस प्रकार की गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।

सोशल मीडिया पर यह भी अनुमान लगाए जा रहे हैं कि कोरोना वायरस से निपटने में असफल रही महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार उसी पर पर्दा डालने के लिए संस्थाओं को इस प्रकार के निर्देश दे रही है।

पथराव का विरोध करने पर चाँद मोहम्मद ने घर में घुस मारी गोली: पटना में मारे गए सन्नी गुप्ता का भाई

पटना में सोमवार (20 अप्रैल 2020) को लॉकडाउन को लेकर हुए विवाद में मारे गए सन्नी गुप्ता के परिजनों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके मुताबिक मुख्य आरोपित चॉंद मोहम्मद हथियारों का तस्कर है। उनका परिवार उसकी गुंडई का विरोध करते था। इसके कारण वे लोग पहले से ही उसके निशाने पर थे।

सन्नी के परिजनों का यह भी आरोप है कि पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। हालॉंकि पुलिस ने इन आरोपों को खारिज किया है। सन्नी के भाई दीपक गुप्ता ने बताया कि चॉंद मोहम्मद ने घर में घुसकर उनके भाई के सिर में गोली मारी थी।

इस घटना में पॉंच लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं, लेकिन चॉंद मोहम्मद अभी भी गिरफ्त से बाहर है। सन्नी के परिवार की सुरक्षा के लिए प्रशासन की तरफ से उसके घर के बाहर फोर्स की तैनाती की गई है। लेकिन, दीपक के अनुसार वे अभी भी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। परिवार बेहद डरा हुआ है। यही कारण है सन्नी के पिता गोपाल प्रसाद ने घर के बाहर ‘यह मकान बिक्री का है’ लिखा बोर्ड टॉंग दिया है।

दीपक गुप्ता ने बताया कि चॉंद और उसके साथियों की योजना पुलिस को निशाना बनाने की थी। एनसीसी कैडेट्स के साथ विवाद होने पर उन्होंने पथराव किया था। सन्नी ने इसका विरोध किया। यही बात आरोपितों को नागवार गुजरी और कुछ देर बाद घर में घुस उनके भाई को गोली मार दी।

दीपक गुप्ता ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब पूरे देश में लॉकडाउन है तो आरोपित कैसे फरार हो गया? उनके अनुसार पुलिस गलती से गोली चलने की बात कह मामले को दबाने में लगी है। लेकिन, खाजेकलाँ थानाध्यक्ष सनोवर खां ने इसे गलत बताया है। उन्होंने बताया कि छह लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया था। इनमें से पॉंच को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया। चॉंद मोहम्मद की तलाश जारी है। उन्होंने माना कि चॉंद का आपराधिक अतीत रहा है और उसे जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामला गंभीर होने की बात कहकर उन्होंने विस्तृत जानकारी देने से इनकार कर दिया।

जिस इलाके की यह घटना है वह मुस्लिम बहुल है। दीपक के अनुसार यहॉं रहने वाले हिंदू परिवार खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने बताया कि चॉंद हथियारों की तस्करी करता है। आए दिन फायरिंग कर हथियार चेक करता रहता है। वह स्थानीय लोगों पर अपना रौब भी जमाता रहता था। इसका सन्नी और उसके परिजन विरोध करते थे। इसकी वजह से वे लोग चॉंद के टारगेट पर थे।

गौरतलब है कि सन्नी गुप्ता टेंट का व्यवसाय करते थे। तीन साल पहले ही उनकी शादी हुई थी। दो साल का बेटा अनुराग और 4 महीने की एक बेटी आराध्या है। इस घटना के बाद से उनकी पत्नी सदमे में है।

अर्नब गोस्वामी पर कण्ट्रोल के लिए कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में दर्ज हुए सैकड़ों FIR: SC ने कहा- मीडिया पर नहीं होना चाहिए अंकुश

सुप्रीम कोर्ट ने आज (अप्रैल 24, 2020) रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी (Arnab Goswami) की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ़्तारी पर 3 सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। इस दौरान वे अग्रिम जमानत भी माँग सकते हैं। अपने खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर (FIR) को लेकर अर्नब ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी ओर से वकील मुकुल रोहतगी ने राहत के लिए याचिका दायर की थी।

मुकल रोहतगी ने आज मामले की सुनवाई शुरु होने पर कहा, अर्नब ने अपने प्रोग्राम में पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की खामोशी पर सवाल खड़े करते हुए पूछा था कि अगर मरने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के होते तो क्या तब भी वो यूँ ही खामोश रहतीं। मगर, 21 अप्रैल को प्रसारित हुए इस प्रोग्राम के बाद ही कई राज्‍यों में उन पर एफआईआऱ दर्ज करवा दी गई। 

रोहतगी ने कहा, अर्नब के खिलाफ दर्ज इन FIR की भाषा एक जैसी है। कॉन्गेस नेता ऐसे ट्वीट कर रहे हैं, जैसे वो मानहानि का मुकदमा दायर करने जा रहे हैं, जबकि मानहानि का मुकदमा सिर्फ पीड़ित पक्ष की ओर से किया जा सकता है।

बता दें, आज (शुक्रवार) को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। जहाँ रोहतगी ने अपने मुवक्किल की ओर से कहा कि रात को घर लौटते वक्त अर्नब और उनकी पत्नी पर मोटरसाइकिल सवार दो लोगों ने हमला किया। यह अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने की कोशिश है।

उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट हमेशा अभिव्यक्ति की आजादी का पक्षधर रहा है। दो साधुओं की हत्या के बाद हिंदू समाज में रोष था। क्या उस गुस्से को सामने रखना, सवाल पूछना गलत है? रोहतगी ने यह भी कहा, अर्नब की डिबेट में कोई धार्मिल एंगल नहीं था। उन्होंने सिर्फ़ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की खामोशी, साधु समाज में रोष और पुलिस की अकर्मण्यता को लेकर सवाल किए थे।

इसके बाद विपक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने भी अपना पक्ष रखा। सिब्बल ने कोर्ट में आर्टिकल 32 का हवाला दिया। उन्होंने कहा यह मामला सुप्रीम कोर्ट के दखल का नहीं है। इसलिए, मुकदमा दर्ज हुआ है, तो पुलिस को अपना काम करने देना चाहिए। हाँ, सभी एफआईआर को एक साथ जोड़ा जा सकता है, ताकि एक साथ जाँच हो पर ऐसे एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। 

सिब्बल ने ये भी कहा कि अगर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने एफआईआर दर्ज कराई है, तो उसमें दिक्कत क्या है? राहुल गाँधी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं की ओर से दायर मानहानि के मुकदमों को झेला है। छत्तीसगढ़ के वकील विवेक तन्‍खा ने भी कहा कि अर्नब ने ब्रॉडकास्ट लाइसेंस का उल्लंघन कर सांप्रदायिक उन्माद फैलाया। उन्हें इसके लिए कोई रियायत नहीं दी जानी चाहिए।

दोनों पक्ष के मत सुनकर, SC ने माना कि अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एक ही मामले में कई राज्यों में मुकदमा नही चलाया जा सकता। लिहाजा सभी एफआईआऱ को एक साथ जोड़ा जाए। अदालत ने अर्नब को जाँच में सहयोग करने को कहा। अब इस मामले पर सुनवाई 8 हफ्तों के बाद होगी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता अर्नब को भी याचिका में संशोधन करने को कहा। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता कोर्ट से सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़े जाने का आग्रह करें।

इसके अलावा, बता दें, इस मामले की सुनवाई में जस्टिस चंद्रचूड़ ने एक महत्तवपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि मीडिया पर कोई अंकुश नहीं होना चाहिए। मैं मीडिया पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाने का विरोधी हूँ।

गौरतलब है कि बीते दिनों कॉन्ग्रेस नेताओं ने अर्नब गोस्वामी के डिबेट के बाद उनपर आरोप लगाया था कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की । जिसे लेकर उनके ख़िलाफ़ महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस पदाधिकारियों ने अर्नब के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और रात में यूथ कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने उनपर हमला भी किया था।

इस आफत को तू ही दूर करेगा अल्लाह: TV पर रोते मौलाना जमील की दुआ से कोरोना भगा रहा पाकिस्तान

पूरी दुनिया कोरोना वायरस संक्रमण का इलाज खोजने में लगी है। लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश को दुआ के ​जरिए कोरोना से मुक्ति दिलाना चाहते हैं। इसके लिए तबलीगी जमात के एक मौलाना ने लाइव शो के दौरान बकायदा रोते हुए दुआ पढ़ी। उसके साथ पाकिस्तानी भी रो रहे थे।

गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) को पीएम की एहसास टेलीथॉन के समापन पर मौलाना तारिक जमील ने दुआ पढ़ी। इस दौरान मौलाना ने पाकिस्तान से कोरोना संकट को पाकिस्तान से हटाने के लिए दुआ माँगी। मौलाना के साथ-साथ प्रधानमंत्री इमरान खान और मौजूदा सभी लोगों ने दुआ माँगी।

पाकिस्तान को कोरोना से मुक्ति दिलाने के लिए मौलाना तारिक जमील रोते हुए कहते हैं,”हमारे मुसीबत हटा दे अल्लाह। हमारे पास कुछ नहीं है, न दवा है, न अस्पताल है, न डॉक्टर है। कुछ भी नहीं है हमारे पास, एक सिर्फ तू ही है। आ जा मेरे मौला। सारी दुनिया इससे परेशान हो गई है। अब तो आ जा। अल्लाह तेरे आने से काम बन जाएगा। इसे हटा दे अल्लाह। या अल्लाह जिन चीजों से तू नाराज होता है, हम उससे तौबा करते हैं। मैं 22 करोड़ आवाम की तरफ से तेरे से तौबा करता हूँ।”

मौलाना आगे कहते हैं, “तूने मुझे अपना नुमाइंदा बनाया। मेरे साथ हजारों लोग रो रहे होंगे। मेरे आँसू तो टीवी पर नजर आ रहे होंगे, लेकिन अल्लाह जो बच्चे-बच्चियाँ, बूढे-जवान घरों में बैठे रो रहे हैं, उनके आँसू तो पाकीज हैं। या मौला अपने फकीरों की तो सुन, उन नेक बंदों की तो सुन जो रातों को तुझे याद करते हैं, जिनके दामन गुनाहों से साफ हैं। ऐसे बंदों से हमारा देश भरा हुआ है, खाली नहीं है।”

मौलाना तारिक दुआ पढ़ते हुए कहते हैं, “या अल्लाह, तू हमें माफ कर इस आफत को टाल दे। इसका इलाज हमें दे दे। इसे हटा दे। हम पर रहम कर मेरे अल्लाह। या अल्लाह लॉकडाउन में भी एक कमरे में 10-10 लोग बैठे हैं। लॉकडाउन का क्या फायदा। इस आफत को तू ही दूर करेगा अल्लाह। ये लॉकडाउन से नहीं जाएगा।”

फिर वो कहते हैं, “मेरे मौला जैसे बच्चा अपनी माँ के सामने रो-रोकर कहता है कि मैं रो-रोकर थक गया, अब तो मान जा। मेरे मालिक मैं भी रो-रोकर थक गया हूँ। मान जा यार। हमारे पास कुछ भी नहीं है। या अल्लाह पूरी दुनिया से इस आफत को हटा दे। गैर मुस्लिमों को भी इससे निजात फरमा। वो भी तेरे बंदे हैं। तूने उसे बनाया है।”

बता दें कि इस प्रोग्राम में पीएम इमरान खान के साथ कासिफ अब्बासी, कामरान खान और मुनीबा मिजारी आदि भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस से पूरी दुनिया तबाह है और जिसे भी जरा सा भी इसके लक्षण दिख रहे हैं, उसे तुरंत अस्पताल में चेकअप कराने की सलाह दी गई है। मगर पिछले दिनों पाकिस्तान में इसका उलटा देखने को मिला। वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान का कहना था कि जिसे भी कोरोना वायरस हो, वो अपने घर में ही रहे और बाहर न निकले।

लोगों का पूछना था कि अगर ऐसा तो फिर मरीज अपना इलाज कैसे कराएँगे? इमरान ख़ान ने अपने लोगों को न घबराने की सलाह देते हुए चेताया था कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकना असंभव है। इसके साथ ही उन्होंने लॉकडाउन को लागू करने से मना करते हुए कहा था कि हम अमेरिका जितने अमीर नहीं है, लेकिन हमारे पास इस्लाम है। आज एक बार फिर से उनका ये रवैया जाहिर हो रहा है।

शोपियाँ में आतंकियों ने पुलिसकर्मी जावेद जब्बार को किया अगवा, सुरक्षा बलों ने कुछ ही घंटों में छुड़ाया

जम्मू कश्मीर के शोपियाँ जिले में आतंकियों द्वारा अगवा किए गए पुलिस कॉन्सटेबल जावेद जब्बार को सुरक्षाकर्मियों ने बचाने में सफलता हासिल की है। बता दें कि पुलिस कॉन्सटेबल जावेद जब्बार को गुरुवार (अप्रैल 23, 2020) रात 9.40 बजे शोपियाँ जिले के वायिल इलाके में स्थित उनके घर से अगवा कर लिया गया था। 

जिसके बाद उनकी तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया और उन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। जावेद जब्बार श्रीनगर के हजरतबल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की एस्कॉर्ड यूनिट का हिस्सा हैं। वह छुट्टी पर अपने घर गए थे, इसी दौरान उन्हें अगवा कर लिया गया था।

गुरुवार रात पुलिस कांस्टेबल जावेद जब्बार का पूरा परिवार खाना खाकर सोने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान अचानक स्वचालित हथियारों से लैस तीन आतंकी गाँव में आए और सिपाही जावेद जब्बार के घर में घुस गए। आतंकियों ने महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग खड़ा किया। इसके बाद उन्होंने पुलिस कांस्टेबल जावेद जब्बार को अपने साथ चलने के लिए कहा।

परिजनों को धमकी देकर आतंकी उन्हें घर से अगवा कर अपने साथ ले गए। आतंकियों के जाने के बाद परिजनों ने तुरंत निकटवर्ती पुलिस चौकी में सूचित करने के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों को भी जानकारी दी। सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया और चप्पे-चप्पे की तलाशी आंरभ कर दी। कुछ ही समय में आतंकियों से पुलिसकर्मी को छुड़ा लिया गया।

बता दें कि हाल ही में शोपियाँ जिले में सेना की आतंकियों के साथ बड़ी मुठभेड़ हुई थी। सेना ने इस एनकाउंटर में चार आतंकियों को ढेर कर दिया था। यह एनकाउंटर बुधवार को जम्मू कश्मीर के शोपियाँ जिले के मेल्होरा इलाके में हुआ था। एनकाउंटर में सेना ने चार आतंकियों को में मार गिराया था। कश्मीर जोन पुलिस ने एनकाउंटर की जानकारी देते हुए बताया कि 4 अज्ञात आतंकियों को मार गिराया गया है। उनके पास से हथियार, गोला-बारूद बरामद किया गया है।

पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा, “एक विशेष सूचना के आधार पर पुलिस ने कुलगाम से आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया है।’” उन्होंने कहा कि निहामा पर बनी जाँच चौकी पर अधिकारियों ने कुलगाम के दमहाल हाँजीपुरा क्षेत्र के निवासी शाकिर अली को गिरफ्तार किया। प्रवक्ता ने बताया कि अली 14 अप्रैल से लापता था और आतंकवादी संगठन में शामिल हो गया था।

गौरतलब है कि पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ जिले में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में 2 आतंकवादियों को मार गिराया था। इस मुठभेड़ में मरने वाले दोनों आतंकियों के संबंध हिजबुल मुजाहिद्दीन से जुड़े मिले। इनमें से एक पाकिस्तानी था और दूसरे की पहचान इशफाक अहमद के रूप में हुई थी। वहीं 20 जनवरी को हिजबुल के 3 आतंकियों को ढेर कर दिया गया था।

पंचायती राज दिवस पर PM मोदी ने शुरू किए 2 अहम प्रोजेक्ट, कहा-ग्रामीणों ने विश्व को दिया 2 गज का संदेश

राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के मौके पर आज यानी 24 अप्रैल को PM नरेंद्र मोदी ने देशभर के सरपंचों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पहले उन्होंने ई-ग्राम स्वराज पोर्टल व मोबाइल ऐप लॉन्च किया। यह ऐप पंचायती राज मंत्रालय की तरफ से की गई अनोखी पहल है। इसमें ग्राम पंचायतों के फंड और उनके कामकाज की पूरी जानकारी होगी।

पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भी शुरू किए। एक तो ई ग्राम स्वराज और दूसरा स्वामित्व योजना। ग्राम स्वराज पोर्टल को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि इससे पारदर्शिता और परियोजना में तेजी आएगी। वहीं, स्वामित्व योजना को लेकर कहा कि ग्रामीणों को इससे एक नहीं अनेक लाभ होंगे। उन्होंने बताया कि इससे संपत्ति को लेकर भ्रम और झगड़े खत्म होंगे। इससे गाँव में विकास योजनाओं की प्लानिंग में मदद मिलेगी। इससे शहरों की तरह गाँवों में भी लोग बैंकों से लोन ले सकेंगे।

इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट के बीच ग्रामीणों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने विश्व को 2 गज दूरी का संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “आप सभी ने दुनिया को बहुत सरल शब्दों में मंत्र दिया है- ‘दो गज दूरी’ का, या कहें ‘दो गज देह की दूरी’ का। इस मंत्र के पालन पर गाँवों में बहुत ध्यान दिया जा रहा है। ये आपके ही प्रयास हैं कि आज दुनिया में चर्चा हो रही है कि कोरोना को भारत ने किस तरह जवाब दिया है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान कहा कि पंचायती राज व्यवस्था के सभी सदस्य प्रेरणा के स्रोत हैं, क्योंकि उन्होंने संक्रमण को रोकने में बहादुर योद्धाओं की भांति पूरे समर्पण से अपनी भूमिका निभाई है। PM मोदी ने कहा कि इस लड़ाई में सामूहिक एकता भारत की शक्ति है।

देशभर के सरपंचों से बात करने के दौरान उन्होंने कहा, “कोरोना ने हम सभी के काम करने के तरीके को बहुत बदल दिया है। पहले हम किसी कार्यक्रम को आमने-सामने रहकर करते थे। लेकिन आज वही कार्यक्रम वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से करना पड़ रहा है। आज इस कार्यक्रम में जुड़े सभी लोगों का मैं स्वागत करता हूँ।”

उन्होंने कोरोना महामारी के बीच पैदा हुए संकट में भी सभी सरपंचों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने माना कि कोरोना महामारी ने अनेकों मुसीबतें पैदा की हैं। इनकी कल्पना तक नहीं हो सकती। लेकिन इससे भी बड़ी बात ये है कि इस महामारी ने हमें नई शिक्षा और संदेश भी दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर आत्मनिर्भरता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि ये जरूरी है कि गाँव, जिला, राज्य और पूरा देश अपनी-अपनी जरूरतों पर आत्मनिर्भर बनें। अब ये बहुत आवश्यक हो गया है।

उन्होंने पंचायत ब्रॉडबैंड का मुद्दा उठाया और बताया कि 5-6 साल पहले एक दौर वो भी था जब देश की सौ से भी कम पंचायतें ब्रॉडबैंड से जुड़ी थीं। अब सवा लाख से ज्यादा पंचायतों तक ब्रॉडबैंड पहुँच चुका है। इतना ही नहीं, गाँवों में कॉमन सर्विस सेंटरों की संख्या भी तीन लाख को पार कर रही है। सरकार ने भारत में ही मोबाइल बनाने का जो अभियान चलाया है, उसी का परिणाम है कि आज गाँव-गाँव तक कम दामों वाले स्मार्टफोन पहुँच चुके हैं। ये आज जो इतने बड़े स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंस हो रही है, ये सब इसी के कारण संभव हो पाया है।

देश भर के सरपंचों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए पीएम मोदी ने किसानों के स्वस्थ रहने का मुद्दा उठाया और कहा कि वे हमारे अन्नदाता हैं, जो निस्वार्थ भाव से देशवासियों का पेट पालते हैं। उनकी वजह से ही इस दौरान देश को अनाज, दूध, दही, फल की कमी नहीं हुई। उन्होंने गलतफहमियों से लोगों को बाहर निकालने की बात की और गावों में सैनिटाइजेशन, क्वारंटाइन सेंटर जल्द से जल्द बनाने पर भी बल दिया।

बता दें, इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अप्रैल को सभी मुख्यमंत्रियों से बात की थी। उनसे लॉकडाउन पर राय-मशविरा लिया था। इसके बाद उन्होंने 14 अप्रैल को देश को संबोधित करते हुए लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाया था।

सुप्रीम कोर्ट से अर्नब गोस्वामी को राहत, तीन सप्ताह तक नहीं होगी कार्रवाई, ले सकते हैं बेल

सुप्रीम कोर्ट ने रिपब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी पर 3 सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। इस दौरान वे अग्रिम जमानत भी माँग सकते हैं। अपने खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज एफआईआर को लेकर अर्नब ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने और साम्प्रदायिकता फैलाने के आरोप में सौ से अधिक FIR अर्नब के खिलाफ दर्ज कराया गया था ।

कोर्ट में अर्नब गोस्वामी की तरफ से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और एडवोकेट सिद्धार्थ भटनागर ने पक्ष रखा, तो महाराष्ट्र राज्य की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने। इसके अलावा राजस्थान राज्य के लिए मनीष सिंघवी और छत्तीसगढ़ के लिए विवेक तन्खा ने पक्ष रखा।

अर्नब गोस्वामी ने याचिका दायर करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत भाषण की अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का एक प्रयास किया गया है। इस याचिका पर शुक्रवार (अप्रैल 24, 2020) को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने सुनवाई की।

बता दें कि एक शो के दौरान अर्नब गोस्वामी की टिप्पणी से बौखलाए कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में बताई गई कि छत्तीसगढ़ के 27 जिलों में ही 101 FIR दर्ज कराई गई है। इसके अलावा अर्नब गोस्वामी के खिलाफ पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड के अलग-अलग थानों में एक दर्जन से अधिक FIR कॉन्ग्रेस नेताओं के द्वारा दर्ज कराई गईं थी। नागपुर में दंगे भड़काने के आरोप में अर्नब के खिलाफ आईपीसी की धारा 153, 153A, 153B, 295A, 208, 500, 504, 505(2), 506, 120B और 117 में केस दर्ज किया गया।

कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब गाेस्वामी पर आराेप लगाया था कि महाराष्ट्र के पालघर जिले में दाे साधुओं समेत तीन की लिचिंग मामले में उन्होंने अपने टीवी चैनल के कार्यक्रम में देश के लोगों को गुमराह किया। धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास भाषा के आधार पर नफरत फैलाने की काेशिश की है।

दो कॉन्ग्रेसियों ने किया था अर्नब पर हमला

गौरतलब है कि 22-23 अप्रैल की रात एडिट कॉल निपटा कर लौटते हुए अर्नब गोस्वामी और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस के दो मोटरसाइकिल सवार गुंडों ने हमला किया था। रिपब्लिक टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी ने खुद इस हमले की जानकारी देते हुए बताया कि उनकी कार के आगे अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर दी और फिर हमला किया।

अर्नब ने कहा कि उनके सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि दोनों हमलावर युवा कॉन्ग्रेस के सदस्य थे और वो उन्हें सबक सिखाने आए थे। रिपब्लिक भारत के ही स्तम्भकार अजित दत्ता (Ajit Datta) ने एक ट्वीट के जरिए दावा किया था कि हमलावरों के पास स्पेशल लॉकडाउन पास थे। इसी लॉकडाउन पास के नाम पर हमलावरों ने बाहर निकलकर अर्नब और उनकी पत्नी पर हमला किया।

क्या है मामला?

दरअसल पिछले दिनों महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ ने निर्मम तरीके से हत्या कर दी थी। लेकिन कॉन्ग्रेस चुप रही। राज्य सरकार में वह शिवसेना के साथ सत्ता में साझीदार है। इस मॉब लिंंचिंग पर चुप्पी को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को घेरते हुए ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने तीखे सवाल पूछे थे।

अर्नब ने कहा था कि इस मामले में मीडिया का रवैया काफ़ी पक्षतापूर्ण है। कोरोना वायरस पर तो सभी न्यूज़ चैनल कार्यक्रम कर रहे हैं। लेकिन साधुओं की मॉब लिंचिंग पर सारे के सारे मौन धारण किए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर भी निशाना साधा था और उनसे सवाल पूछे।

क्या कहा था अर्नब गोस्वामी ने?

मॉब लिंचिंग पर सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर अर्नब ने कहा था, “सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इनलोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

उद्धव सरकार में मंत्री जितेंद्र आव्हाड कोरोना पॉजिटिव, स्टाफ के 14 लोग भी हो चुके हैं संक्रमित

महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण से सर्वाधिक प्रभावित राज्य है। अब राज्य की उद्धव सरकार में मंत्री जितेंद्र आव्हाड कोरोना पॉजीटिव पाए गए हैं। 54 वर्षीय मंत्री को एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इससे प्रदेश की सरकार में इससे हड़कंप मच गया है। इससे पहले मंत्री के 14 स्टाफ संक्रमित पाए गए थे।

ठाणे जिले के कालवा-मुंद्रा से विधायक और NCP नेता जितेंद्र आव्हाड ने जानकारी देते हुए बताया था कि वे एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आए थे जो बाद में कोरोना पॉजिटिव निकला था। इसके बाद उन्होंने क्वारंटीन में जाने की घोषणा की थी। हालाँकि 13 अप्रैल को ही मंत्री को जाँच में कोरोना निगेटिव पाया गया था, जिसके बाद वह अपने आवास पर ही थे।

इसके एक हफ्ते बाद यानी कि मंगलवार को फिर से एक अस्पताल में जाँच कराई, जिसकी गुरुवार को आई रिपोर्ट में मंत्री को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। हाल ही में आव्हाड के 14 निजी स्टाफ कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें 14 स्टाफ में 5 पुलिस कॉन्स्टेबल थे, जो उनकी सुरक्षा में तैनात हैं, जबकि बाकी 9 लोगों में उनके निजी स्टाफ, घर के नौकर और पार्टी के कार्यकर्ता शामिल थे।

दरअसल आव्हाड एक पुलिस अधिकारी के संपर्क में आए थे, जो बाद में कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इस अधिकारी ने मुंब्रा क्षेत्र में तबलीगी जमात के सदस्यों को पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया था। इसके तहत 13 बांग्लादेशी और 8 मलेशियाई नागरिकों को पकड़ा गया था।

इतना ही नहीं पुलिस अधिकारी के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मुंब्रा पुलिस स्टेशन के 90 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों को होम क्वारंटाइन किया गया था। इससे पहले मुंबई में केन्द्रीय सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले के बंगले पर तैनात एक कॉन्स्टेबल को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। वहीं मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के मालाबार हिल्स पर तैनात दो महिला पुलिसकर्मी को भी कोरोना पॉजिटिव पाया गया था। इसके बाद वहाँ तैनात 6 पुलिसकर्मियों को क्वारंटाइन कर दिया गया था।

आपको बता दें कि देश में सबसे अधिक कोरोना के मरीज महाराष्ट्र में हैं। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या 283, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 6430 हो गई है। मुंबई में कोरोना के 4205 मामले हो गए हैं, जबकि यहाँ पर अब तक 167 लोगों की मौत हो चुकी है।