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फैक्ट चेक: क्या मोहन भागवत ने राष्ट्रवाद को नाज़ीवाद और हिटलर से जोड़ा?

सोशल मीडिया और सेलेक्टिव मीडिया किस तरह से अपने हिस्से के सच को जनता के सामने रख कर अपना उल्लू सीधा करता है इसका आज एक और उदाहरण सामने आया है। अमेरिका के मशहूर समाचार पत्र वॉशिंगटन पोस्ट की पूर्व मशहूर प्रकाशक कैथरीन ग्राहम ने पत्रकारिता और ख़बरों को लेकर कहा था- “News is what someone wants suppressed. Everything else is advertising. The power is to set the agenda. What we print and what we don’t print matter a lot.”

इसका हिंदी में अर्थ है- “खबर वह होती है, जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मुद्दे तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते।”

हाल ही में जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी ने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में छात्रों द्वारा की गई पत्थरबाजी के आधे वीडियो दिखाने वाले पत्रकारों ने खुद ही खुद को जनता के सामने बेनकाब किया है। और कम से कम इस बात का प्रमाण दे दिया है कि वो दर्शकों को क्या दिखाना चाहते हैं और क्या छुपाना चाहते हैं।

क्या है मामला –

देश का मीडिया गिरोह अपनी धुन पर सवार है और उसने आज यही प्रयोग आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान के साथ दोबारा किया है। हाल ही में उनके एक और बयान को, जिसमें उन्होंने कहा था, “तलाक के अधिक मामले शिक्षित और सम्पन्न परिवारों से सामने आ रहे हैं, क्योंकि शिक्षा और संपन्नता अहंकार पैदा करती है, जिससे परिवार टूट रहे हैं।” मीडिया ने उसे मरोड़कर यह प्रपंच फैलाया कि भागवत ने यह कहा कि पढ़ने-लिखने से तलाक ज़्यादा होता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत आज बृहस्पतिवार (फरवरी 20, 2020) को झारखंड के राँची में एक कार्यक्रम के दौरान जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। मीडिया गिरोह ने मोहन भागवत के इसी कार्यक्रम के दौरान दिए गए भाषण के सिर्फ एक हिस्से को प्रमुखता से प्रकाशित किया है और बताया है कि मोहन भागवत ने ‘राष्ट्रवाद’ को लेकर बड़ा बयान दिया है।

मीडिया गिरोह प्रमुख NDTV ने मोहन भागवत का सीधा-सा अर्थ निकालते हुए अपनी भाषा में हेडलाइन देते हुए लिखा- “RSS चीफ मोहन भागवत बोले- नेशनलिज्म न कहो, क्योंकि नेशनलिज्म का मतलब होता है हिटलर।”

क्या है मोहन भागवत के बयान का सच

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने राँची में कार्यक्रम में हिस्सा लिया, इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में अपनी ब्रिटेन यात्रा का जिक्र करते हुए एक किस्से के माध्यम से राष्ट्रीयता (नेशनलिज़्म/Nationalism) शब्द की व्याख्या करते हुए लोगों से कहा कि शब्दों का चयन अच्छी प्रकार से करना चाहिए क्योंकि इनके अर्थ भिन्न हो सकते हैं।

मोहन भागवत ने अपने भाषण में बताया कि ब्रिटेन में आरएसएस कार्यकर्ताओं से उस दौरान जब उनकी बातचीत हुई, उसी में यह बात निकलकर सामने आई कि बातचीत में शब्दों के अर्थ भिन्न हो जाते हैं। मोहन भागवत ने कहा- “…इसलिए आप नेशनलिज़्म/Nationalism (राष्ट्रवाद) इस शब्द का उपयोग करने से बचें। आप नेशन (राष्ट्र) कहेंगे चलेगा, नेशनल (राष्ट्रीय) कहेंगे चलेगा, नेशनलिटी (राष्ट्रीयता) कहेंगे तो भी चलेगा, मगर नेशनलिज्म (राष्ट्रवाद) न कहो क्योंकि नेशनलिज्म का मतलब होता है हिटलर, नाजीवाद, फासीवाद। ऐसे ही शब्दों का बदलाव हुआ है।”

ब्रिटेन में एक आरएसएस कार्यकर्ता के साथ अपनी बातचीत को याद करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि वहाँ 40 से 50 लोगों से संघ के बारे में उनकी बातचीत हुई थी। उन्होंने कहा- “संघ के कार्यकर्ता ने मुझे कहा कि अंग्रेजी आपकी भाषा नहीं है और इसलिए शब्दों का इस्तेमाल बचकर कीजिएगा। यहाँ पर नेशनलिज्म शब्द की जगह नेशनल कहेंगे तो चलेगा, नेशन कहेंगे तो चलेगा, नेशनलिटी कहेंगे तो चलेगा पर नेशनलिज्म मत कहिएगा। नेशनलिज्म का मतलब हिटलर और नाजीवाद होता है।” 

गौरतलब है कि यह कहने से पहले ही मोहन भागवत यह स्पष्ट कर चुके थे कि शब्दों का अर्थ आज के समय में बदल दिए गए हैं। साथ ही, हमें यह भी देखना होगा कि एक ही शब्द अलग-अलग देश, काल और परिस्थिति में अलग-अलग अर्थ पाते है। ध्यान देने की बात यह है कि भारत में ही विगत कुछ वर्षों में राष्ट्रवाद और फासीवाद शब्दों को वामपंथी मीडिया गैंग से लेकर देश के कथित विचारक वर्ग ने खूब इस्तेमाल किया है। इन शब्दों को इतना इस्तेमाल किया गया है कि ये अब अपने मूल और शाब्दिक अर्थ से अलग माने जाने लगे हैं।

देश के कुछ कथित निष्पक्ष पत्रकार नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर भी अपने प्राइम टाइम में लोगों को फासीवादियों की तरह ही ‘गैस चैंबर’ में बंद कर दिए जाने जैसे रटे-रटाए वाक्यों को रोजाना 9-10 PM के बीच जनता के कानों में ठूँसते देखे गए थे। जाहिर सी बात है कि भ्रामक हेडलाइंस का उदेश्य एक विचारधारा के विरुद्ध लोगों को भर्मित कर अपना उल्लू सीधा करना ही होता है।

इसी के प्रकाश में मोहन भागवत ने राँची में बयान दिया कि उन शब्दों से बचिए, जिनका अर्थ कुछ और ही कर दिया गया है। निश्चित तौर पर मोहन भागवत द्वारा यह बात एक तरह से वहाँ मौजूद जनसभा को दिशा-निर्देशित करने के उद्देश्य से कही गई थी।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का पूरा भाषण नीचे दिए गए वीडियो में सुन सकते हैं। भाषण के शुरू में ही मोहन भागवत स्पष्ट कहते सुने जा सकते हैं कि शब्दों का अर्थ बदलता जा रहा है। इसके बाद ही उन्होंने बताया है कि राष्ट्रवाद शब्द के इस्तेमाल करने पर आपके कथन का सीधा अर्थ फासीवाद और नाजीवाद से जोड़ दिया जाता है। इसलिए इसके प्रयोग से बचना चाहिए। हम अक्सर खबरों में देखते आए हैं कि राष्ट्रवाद या नेशनलिज़्म जैसे शब्दों का प्रयोग करते ही विरोधी अपने एजेंडे को अक्सर आगे कर देते हैं।

यह वीडियो देखने से पता चलता है कि मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा चलाई जा रही हेडलाइन भ्रामक और बेहद चालाकी से संघ के खिलाफ इस्तेमाल करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।

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कन्हैया कुमार को क्यों बचा रही केजरीवाल सरकार?: दिल्ली पुलिस ने कहा- देशद्रोह का मामला चलाने की दें इजाजत

जेएनयू में 2016 में देश विरोधी नारे लगाने के मामले में तत्कालीन छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके साथियों के खिलाफ देशद्रोह का मामला चलाने की अनुमति दिल्ली सरकार नहीं दे रही है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केजरीवाल सरकार के गृह मंत्रालय को पत्र लिखा है। पत्र दिल्ली की एक अदालत द्वारा इस संबंध में राज्य सरकार को रिमाइंडर भेजने का निर्देश दिए जाने के बाद लिखी गई है।

पत्र में कन्हैया कुमार, उमर खालिद समेत अन्य के खिलाफ मुक़दमा चलाने की जल्द से जल्द अनुमति देने की अपील दिल्ली सरकार से की गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल की सरकार से इस संबंध में उसकी लंबित पड़ी फाइल पर जल्द सहमति देने की गुजारिश की है ताकि वे देशद्रोह के आरोप में कन्हैया कुमार और अन्य पर अभियोग चला सके।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस प्रमोद सिंह कुशवाहा ने दिल्ली सरकार को लिखी चिट्ठी में कहा है, “आपसे प्रार्थना की जाती है कि CrPC के सेक्शन 196 के अंतर्गत केस दर्ज करने के लिए जरूरी अनुमति प्रदान करने की प्रक्रिया तेज करें जैसा कि आईपीसी चैप्टर VI, सेक्शन 124 A आईपीसी के अंतर्गत जरूरी विधान है।”

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट (सीएमएम) पुरुषोत्तम पाठक ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि वह दिल्ली सरकार को कन्हैया पर अभियोजन के लिए जरूरी मॅंजूरी के बारे में याद दिलाए। इससे पहले पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि मुकदमा चलाने की मॅंजूरी अभी तक नहीं दी गई है। मॅंजूरी का अनुरोध करने वाला पत्र जीएनसीटीडी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र सरकार) के पास लंबित है। अदालत ने इस संबंध में दिल्ली सरकार से 3 अप्रैल तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा था।

उल्लेखनीय है 9 फरवरी 2016 को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी परिसर में देश विरोधी नारे लगाने के कई वीडियो सामने आए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने तत्कालीन जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उमर खालिद समेत कई अन्य आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जाँच की थी। इसी आधार पर पिछले साल अदालत में चार्जशीट दायर की थी जिसमें कन्हैया कुमार समेत अन्य आरोपितों पर देशद्रोह की धारा लगाई गई थी। इन पर आरोप है इन्होंने जेएनयू परिसर में हुए कार्यक्रम में इन्होंने एक जुलूस की अगुवाई की थी और देशद्रोही नारे लगाए थे।

दिल्ली पुलिस ने 14 जनवरी 2019 को करीब 1200 पन्ने का चार्जशीट अदालत में दाखिल किया था। इसमें कन्हैया कुमार और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन के सदस्य उमर खालिद को मुख्य आरोपित बनाया था। वहीं, सात अन्य आरोपितों में आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उतर गुल, रईस रसूल, बसरत अली व खालिद बशीर भट का नाम शामिल है। इसके अलावा रामा नागा, आशुतोष, शहला राशिद, डी राजा की बेटी अपराजिता राजा, रुबैना सैफी, समर खान समेत 36 छात्रों को भी आरोपित बताया गया है।

लेकिन केजरीवाल सरकार की अनुमति नहीं मिलने के कारण इस मामले में अभियोग शुरू नहीं हो सका है। दिल्ली सरकार का रुख इस मामले में बेहद चौंकाने वाला है। वह न केवल देस विरोधी नारे लगाए जाने को ख़ारिज करती रही है, बल्कि दिल्ली पुलिस के साक्ष्यों को मनगढ़ंत और दोषपूर्ण भी करार देती है। बुधवार को इस संबंध में दिल्ली दिल्ली सचिवालय में हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केजरीवाल से सवाल भी पूछा गया था। जवाब में उन्होंने कहा कि इस संबंध में फैसला लेना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। लेकिन, वे इस पर संबंधित विभाग को जल्द फैसला लेने को कहेंगे।

गौरतलब है कि देशद्रोह के मामले में अभियोग चलाने के लिए सीआरपीसी की धारा 196 के तहत दिल्ली सरकार की मॅंजूरी जरूरी है। बिना इसके कोर्ट दिल्ली पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान नहीं ले सकती।

हर दूसरे दिन पिट रहे हैं कन्हैया कुमार, जूता-चप्पल, अंडा, मोबिल, पत्थर… सब बरसा रहे बिहारी

कन्हैया कुमार ये बि​​हारी हैं सब पबित्तर कर देंगे, मैदान से लेकर वामपं​थी प्रोपेगेंडा की दुकान तक

बिग BC का नया चुटकुला: ‘कन्हैया कुमार की लोकप्रियता से मोदी ही नहीं, पूरी सरकार चिंतित है’

‘तेरी माँ ने #€ से तुझे जन्म दिया साले, योनि की पूजा कर’ – हिंदुत्व को गरियाने के बाद, अब माँ-बहन पर उतरे

हिंदुओं के ख़िलाफ़ और महिलाओं के लिए अक्सर सोशल मीडिया पर अपशब्दों का इस्तेमाल करके उन्हें अपमानित करने वाले फर्जी माइथोलॉजी एक्सपर्ट देवदत्त पटनायक एक बार फिर से ट्विटर पर लताड़े जा रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि ट्विटर पर हमेशा गलत जानकारी फैलाने का प्रयास करते पाए जाते हैं देवदत्त नामक यह शख्स। और जब अन्य यूजर्स ने उनके झूठ का पर्दाफाश करके उनकी आलोचना करते हैं, तो वो गाली-गलौच पर उतर आते हैं। माँ-बहन के लिए आपत्तिजनक शब्द इस्तेमाल करने लगते हैं।

दरअसल, देवदत्त पटनायक ने कल फिर CAA के ख़िलाफ़ तंज भरे अंदाज में ट्विटर पर लिखा था कि भारत में कागज़ मुस्लिम शासकों की देन है। अब हिंदुत्व उस कागज़ का इस्तेमाल गरीबों को डराने के लिए कर रहा है और मुस्लिम महिलाएँ सामने आकर उसे जमा कराने से मना कर रही हैं। हिंदुत्व हास्यास्पद बात करता है।

इस 4 पंक्ति के ट्वीट में देवदत्त पटनायक ने आखिरी शब्द तक सिर्फ़ झूठ परोसा और हिंदुत्व को मोदी सरकार की जगह लिखकर अपना नैरेटिव गढ़ा। तो सोशल मीडिया यूजर्स ने भी उन्हें फौरन आड़े हाथों ले लिया। सबसे पहले तो पटनायक के इस वाक्य को खारिज किया गया कि भारत में कागज मुस्लिम शासकों की देन हैं।

ट्रू इंडोलॉडी नामक हैंडल ने जानकारी दी कि 6 ई. में संस्कृत हस्तलिपी कागज़ पर लिखी गई थी, जिसकी खोज जम्मू-कश्मीर के गिलगिट में साल 1931 में हुई थी। उनमें से कई हस्तलिपियाँ अब भी श्रीनगर म्यूजियम में हैं। जिसका मतलब है कि ये हस्तलिपियाँ कागज पर उस समय लिखी जा चुकी थीं, जब इस्लाम का जन्म भी नहीं हुआ था।

इसके बाद एक यूजर ने ऐसी निराधार बातें करने के लिए उनकी तुलना राहुल गाँधी से की और कहा कि राहुल गाँधी भी देवदत्त पटनायक से ज्यादा समझदार हैं। साथ ही पटनायक के झूठ की कागज़ से संबंधित एक जानकारी भी शेयर की। धीरे-धीरे अधिकतर ट्वीट पर प्रतिक्रिया देने वाले पटनायक को उनकी बेवकूफी के लिए ट्रोल करने लगे। ऐसे में अपने गलीज़ व्यक्तित्व के लिए कुख्यात देवदत्त पटनायक से आइना देखा न गया और उन्होंने एक बार फिर अपना ओछा व्यक्त्त्वि का प्रदर्शन सरेआम कर दिया।

पटनायक ने ट्विटर यूजर्स का गुस्सा देख रिप्लाई तो सुनील नाम के यूजर को दिया, लेकिन गाली ट्रू इंडोलॉडी को दी। क्योंकि ट्रू इंडोलॉजी के अकॉउंट से अक्सर तथ्यों के जरिए देवदत्त के झूठों का पर्दाफाश होता रहता है।

पटनायक ने लिखा, “तुम लोगों को बेवकूफ बनाना कितना आसान है। जिन्हें ये भी नहीं पता कि INVENTION और POPULARISING में क्या फर्क होता है। क्या तुम्हारी माँ ने अपने पीरियड के दौरान ट्रू इंडोलॉजी की कुत्तियों को खाना खिलाया था?”

इसके बाद पटनायक ने एक और ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “देखो, हिंदुत्व ट्रोल को INVENTION और POPULARISING के बीच का फर्क़ तक नहीं पता। शायद इन लोगों को पीरियड्स से गुजर रहे ट्रू इंडोलॉजी ने खाना बना कर खिलाया होगा!”

अब ये टिप्पणियाँ, किसी भी स्तर पर एक महिला के लिए कितनी शर्मनाक बात है, यहाँ ये बताने की जरूरत नहीं है। सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को देखने के बाद पटनायक के ख़िलाफ़ एक्शन लेने की माँग उठाई जा रही हैं। ट्रू इंडोलॉजी को टैग करके कहा जा रहा है कि वो इस बेवकूफ के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें। लोगों का कहना है कि उन्हें खुद पर शर्म आ रही है कि उन्होंने कभी पटनायक की किताब को खरीदकर पढ़ा। उन्हें तरह-तरह से कोसा जा रहा है, उनकी कुंद बुद्धि के लिए उन्हें धिक्कारा जा रहा है।

वहीं, ट्रू इंडोलॉजी ने भी ऐसे सेक्सिस्ट कमेंट के आने के बाद उद्योगपति आनंद महिंद्रा को टैग करके पटनायक को नौकरी देने पर सवाल उठाए। उनसे पूछा है कि क्या पटनायक उनकी माँ और पत्नी के बारे में भी ऐसी बातें करता है, क्या उनमें कोई शर्म नहीं है। उनका इंप्लॉय आम नागरिकों को गाली देता है, महिलाओं का अपमान करता है और वो चुप हैं?

बता दें कि ट्रू इंडोलॉजी के साथ बेहूदगी करने के अलावा पटनायक का एक और ट्वीट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें पटनायक एक यूजर का रिप्लाई देने के लिए बेशर्मी से योनि पर भद्दा कमेंट करते हैं।

‘देवी’ से ‘चुप चुड़ैल’: वामपंथी जोकर देवदत्त पटनायक ने महिलाओं को लिखे बेहूदे ट्वीट, दी गाली

‘तुम्हारी माँ के साथ…’ – फर्जी मिथोलॉजिस्ट देवदत्त पटनायक को इस अश्लील जवाब पर लोगों ने जमकर लताड़ा

हिंदुत्व कहता है कि सीता को क़ैद करने के लिए बनी थी लक्ष्मण रेखा: देवदत्त ‘नालायक’ ने मारी पलटी

‘कहाँ है वेदों में शिव?’ देवदत्त ‘नालायक’ ने जब यह पूछा तो वेद का उदाहरण दे लोगों ने रगड़ दिया

FACT CHECK: ट्रंप के आगे देश को बदनाम करने के लिए AAP समेत लिबरल गिरोह ने फैलाया झूठ, हुआ पर्दाफाश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप के भारत दौरे की खबर सुनने के बाद से देश का लिबरल गिरोह हैरान-परेशान है। अपनी सारी युक्तियाँ लगाकर ये गिरोह इस समय डोनॉल्ड ट्रंप के आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि के साथ देश की छवि मटियामेट करना चाहता है। अभी पिछले दिनों अपनी मूढ़ता का परिचय देते हुए इस कड़ी में एक प्रयास अतुल खत्री ने किया था। मगर अब कुछ और मूर्खों की लिस्ट निकलकर सामने आई है।

दरअसल, डोनॉल्ड ट्रंप के भारत दौरे से ठीक कुछ दिन पहले एक तस्वीर को सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है। तस्वीर में दिखाया जा रहा है कि जिन दीवारों पर ट्रंप के स्वागत के लिए उनके पोस्टर बने हुए हैं, वहाँ तो भारतीय लोग पेशाब करके जा रहे हैं।

इस तस्वीर को 38 हजार फॉलोवर्स वाली आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम की इंचार्ज एश्वरी वर्मा ने भी शेयर किया है। साथ ही 20 हजार फॉलोवर्स वाले फिल्म निर्देशक और पत्रकार अविनाश दास ने भी शेयर किया है।

अब हालाँकि, ये गिरोह कितना ही खुद को चालाक समझे, लेकिन जरा सी गलती के कारण इसे हर बार अपनी फजीहत करवानी पड़ती है। कुछ ऐसा ही इस बार भी हुआ। क्योंकि जिस तस्वीर को सोशल मीडिया पर डालकर ट्रंप के सामने भारत की बदनामी करने कोशिश हो रही थी, वो डॉक्टर्ड निकली। अब इस बात की पुष्टि कैसे होती है। आइए समझते हैं…

दरअसल, लिबरल गिरोह जिस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर करके मजे ले रहा है। उस तस्वीर में एक व्यक्ति दीवार पर पेशाब करता दिख रहा, दीवार पर साइड में नरेंद्र मोदी और डोनॉल्ड ट्रंप की तस्वीर है और रास्ते से एक युवक अपनी बाइक लेकर जा रहा है।

अब हालाँकि, एक नजर में कोई भी इस फोटो के झूठ को कैप्शन देखकर सच मान लेगा। लेकिन उसी समय की वास्तविक तस्वीर को देखा जाए तो, पता चलेगा कि गिरोह का प्रोपगेंडा 10 मिनट से ज़्यादा नहीं चल पाता। याद ही होगा कि जामिया लाइब्रेरी के वीडियो का प्रपंच कितने मिनट में फुस्स हो गया था।

मोदी-ट्रंप के पोस्टर के रूप में भारत-अमेरीका के रिश्ते को दर्शाने के लिए तैयार की गई इस दीवार पर रिपोर्ट हुई थी। जिसमें वही तस्वीर बतौर फीचर इमेज इस्तेमाल की गई। तस्वीर में वही कड़ाके की दोपहर थी, हरे रंग की दीवार पर ट्रंप-मोदी का पोस्टर था। साथ ही वो वहीं बाइक वाला व्यक्ति भी था, जिसे डॉक्टर्ड फोटो में क्रॉप करके आधा दिखाया गया। लेकिन, इसमें वो शख्स गायब था, जो दीवार पर पेशाब कर रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि उसे तो वहाँ तकनीक का इस्तेमाल करके जोड़ा गया था।

इसके अलावा, बता दें सच्चाई का पता बिना असली फोटो को देखे भी लगाया जा सकता है, क्योंकि डॉक्टर्ड तस्वीर में पेशाब कर रहे व्यक्ति को ध्यान से देखा जाए तो मालूम चलेगा कि उसके साइड में मौजूद पेड़ की छाया, जमीन पर साफ दिख रही है, लेकिन व्यक्ति की कोई छाया नज़र नहीं आ रही।

जाहिर है, कि नरेंद्र मोदी को बदनाम करने के लिए ये तस्वीर गढ़ी गई और बिना जाँच-परख किए अपने ट्विटर से इसे शेयर करने वालों ने भी अपने हजारों की संख्या में फॉलोवर्स को झूठ परोसा। साथ ही सार्वजनिक रूप से अपनी कुंठा निकालने के लिए देश को बदनाम करने का भरपूर प्रयास हुआ।

डिटेंशन सेंटरों में लोग न सेक्स कर पाएँगे, न ही बढ़ा पाएँगे अपनी जनसंख्या: सुशांत सिंह का ‘दर्द-भरा’ विडियो

अभिनेता सुशांत सिंह ने एक विडियो जारी किया है। वही CAA और NRC के बारे में घिसी-पिटी बात करते हुए। इसके विरोध में प्रोपेगेंडा फैलाते हुए। और यह कहते हुए कि वो इसके ख़िलाफ हैं। विडियो में सुशांत सिंह ने CAA, NPR और NRC के विरोध के साथ चिंता भी जाहिर की है। उनकी चिंता बड़ी अजीब है। उनका कहना है कि इस कानून के तहत समुदाय विशेष को डिटेंशन सेंटरों में रखा जाएगा। वहाँ उनको सेक्स करने का भी अधिकार नहीं होगा, वह अपनी जनससंख्या भी नहीं बढ़ा पाएँगे। यानी कि उनको जेल के कैदियों की तरह रखा जाएगा।

सुशांत सिंह ने NRC और NPR पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए इस विडियो के माध्यम से सरकार से कई सवाल भी किए। उन्होंने कहा, “अगर एक मुस्लिम परिवार के सभी सदस्य अवैध प्रवासी पाए जाते हैं, तो क्या उन्हें एक साथ हिरासत केंद्रों में रखा जाएगा? उनको डिटेंशन सेंटरों में रखा जाएगा, क्योंकि वह मुस्लिम हैं। अब सवाल खड़ा होता है कि क्या उस परिवार को जनसंख्या बढ़ाने का अधिकार होगा? यह सवाल इसलिए उठता है कि डिटेंशन सेंटरों में स्थान सीमित हैं। ज़ाहिर है कि आप वहाँ आबादी नहीं बढ़ा सकते।”

सुशांत सिंह ने CAA, NRC और NPR के बारे में अपनी आशंकाओं को जारी रखा और आधे-अधूरे झूठ के साथ वीडियो के माध्यम से अपनी बात रखते गए। इतना ही नहीं, सुशांत ने अमित शाह और पीएम मोदी के द्वारा दिए गए बयान को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि NRC पूरे देश में लागू नहीं की जाएगी। सुशांत ने दावा किया कि NRC न केवल मुस्लिमों को बदनाम करेगा, बल्कि यह देश के हिंदुओं को भी प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि जो गैर-मुस्लिम अपनी नागरिकता साबित करने में विफल होंगे, उनके पास अभी भी CAA के माध्यम से भारत की नागरिकता के लिए आवेदन करने का मौक़ा होगा, लेकिन आश्चर्य की बात यह कि यह मौक़ा मुस्लिमों के पास नहीं होगा।

सुशांत सिंह ने कहा कि जो लोग अपनी भारतीय नागरिकता को साबित नहीं कर पाएँगे, उनको भारत की नागरिकता के लिए CAA के माध्यम से आवेदन करना होगा। फिर इसके बाद उनको यह भी स्वीकार करना होगा कि वे भारतीय नहीं हैं और पाकिस्तान, बांग्लादेश या अफगानिस्तान से आए हैं।

सुशांत सिंह ने सवाल किया, “आपके इतिहास के बारे में क्या? चूँकि आपने पहले ही स्वीकार कर लिया है कि आप भारतीय नहीं हैं, तो क्या आपकी नौकरी वैध मानी जाएगी? क्या आपकी शादी को कानूनी माना जाएगा? आपके बच्चों की नागरिकता की स्थिति क्या होगी? ”

सुशांत ने NPR के खिलाफ भी बात की। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि यह NRC को लागू करने की दिशा में पहला कदम है। बात आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “NRC और NPR पर लोगों को बहुत भ्रम की स्थिति है। सरकार ने इस बात से इनकार किया है कि NRC को लागू किया जाएगा, लेकिन गृह मंत्री ने अपनी कई रैलियों में घोषणा की थी कि इसे पूरे देश में लागू किया जाएगा।”

सुशांत ने आख़िर में केंद्र सरकार को निशाने पर रखकर कहा कि लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा करने से बेहतर है कि सरकार के सभी मंत्री आपस में बैठकर एक राय बना लें कि हमें लोगों के बीच क्या बोलना है। मतलब इसे लागू करना है या नहीं और लागू करना है तो इसकी एक लिस्ट जारी करें कि इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। ताकि हम उसकी तैयारी में जुट जाएँ।

मुस्लिम युवक ने मुंडन करा ली दीक्षा, बनेंगे मुख्य पुरोहित: पिता ने भी मठ के लिए दी थी 2 एकड़ जमीन

एक लिंगायत मठ ने मुस्लिम युवक के लिए अपनी परंपराओं को तोड़ने का फैसला किया है। मठ ने 33 साल के दीवान शरीफ रहमानसाब मुल्ला को मुख्य पुरोहित बनाने का फैसला किया है। शरीफ ने बीते साल नवंबर में दीक्षा ली थी। यह मठ कर्नाटक के गडग ​जिले में स्थित है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शरीफ के पिता ने कई साल पहले मठ के लिए दो एकड़ जमीन दान थी।

आसुति गॉंव स्थित मुरुगराजेंद्र कोरानेश्वरा शांतिधाम मठ के मुख्य पुजारी के तौर पर शरीफ का अभिषेक 26 फरवरी को किया जाएगा। इसको लेकर मठ में जोर-शोर से तैयारियॉं चल रही है। मठ के इस फैसले को हिंदुओं में व्याप्त धार्मिक सहिष्णुता के तौर पर देखा जा रहा है। बकौल शरीफ, वह बचपन से ही बसवन्ना के मूल्यों से प्रभावित थे। बसवन्ना 12वीं सदी के सुधारक थे। शरीफ ने कहा है कि वे उनके दिखाए सामाजिक न्याय तथा सद्भाव के मार्ग पर काम करेंगे।

उन्होंने कहा, “मैं पास के मेनासगी गॉंव में आटा चक्की चलाता था। खाली समय में बसवन्ना और 12 वीं शताब्दी के अन्य साधुओं द्वारा लिखे गए वचनों पर प्रवचन देता था।” शरीफ ने बताया स्वामीजी ने उसकी इस सेवा को पहचाना और मुझे प्रशिक्षित करने के लिए अपनी शरण में ले लिया।

आसुति गॉंव का मठ कलबुर्गी के खजुरी गॉंव के 350 साल पुराने कोरानेश्वर संस्थान मठ से जुड़ा हुआ है।
मठ चित्रदुर्ग के श्री जगद्गुरु मुरुगराजेंद्र मठ के 361 मठों में से एक है, जिसमें देश के अन्य हिस्सों के अलावा कर्नाटक और महाराष्ट्र के लाखों अनुयायी आते हैं। खजूरी मठ के पुजारी मुरुगराजेंद्र कोरानेश्वर शिवयोगी ने बताया, “10 नवंबर, 2019 को शरीफ ने दीक्षा ली थी। हमने उन्हें पिछले तीन वर्षों में लिंगायत धर्म और बासवन्ना की शिक्षाओं के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया है। शरीफ बचपन से ही 12 वीं सदी के सुधारक बासवन्ना की शिक्षाओं से प्रभावित थे और उम्मीद है कि वह सामाजिक न्याय और सद्भाव के साथ उनके आदर्शों की दिशा में काम करेंगे।”

उन्होंने बताया, “बसव का दर्शन सार्वभौमिक है। हम अनुयायियों को जाति और धर्म की भिन्नता के बावजूद गले लगाते हैं। उन्होंने 12 वीं शताब्दी में सामाजिक न्याय और सद्भाव का सपना देखा था और उनकी शिक्षाओं का पालन करते हुए, मठ ने सभी के लिए अपने दरवाजे खोले हैं।”

शिवयोगी ने कहा, “लिंगायत धर्म संसार (परिवार) के माध्यम से मोक्ष में विश्वास करता है। पारिवारिक व्यक्ति एक स्वामी बन सकता है और सामाजिक तथा आध्यात्मिक कार्य कर सकता है।” उन्होंने कहा, “मठ के सभी भक्तों ने शरीफ को पुजारी बनाने का समर्थन किया है। यह हमारे लिए बासवन्ना के आदर्श और कल्याण राज्य को बनाए रखने का एक बेहतर अवसर है।”

मठ के सभी प्रमुख सदस्य डायमन्ना हडली, शरणप्पा कार्कीत्ती और संतोष बालूटगी ने कहा कि यह उदाहरण गर्व करने वाला है। सदस्यों ने आगे कहा कि, हमने जाति और धर्म के आधार पर घृणा और हिंसक संघर्ष को होते हुए देखा है, लेकिन हमारे कुरानेश्वर मठ एक मुस्लिम को लिंगायत मठ के प्रमुख के रूप में नियुक्त करके एक प्रेरणादायक मार्ग पर काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं जाति और धर्म के बावजूद गाँव के सभी भक्त इस मठ के अनुयायी हैं। सभी ने मठ के इस फैसले का समर्थन किया है।

शरीफ शादीशुदा और चार बच्चों के पिता भी हैं। लिंगायत मठों में पारिवारिक व्यक्ति की पुजारी के तौर पर नियुक्ति भी असामान्य है। हालांकि, मठ ने कहा है कि शरीफ एक समर्पित अनुयायी है। वे मठाधीश भी बन सकते हैं।

सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी से जल्द छीनी जाएगी भारत की नागरिकता- सुब्रमण्यम स्वामी

देश की बड़ी और सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कॉन्ग्रेस को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी जल्द ही भारत की नागरिकता खो सकते हैं। इस बात का खुलासा बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने दिए एक भाषण में किया है।

हैदराबाद में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित एक सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में पहुँचे बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा, “फाइल गृह मंत्री अमित शाह की मेज पर है और जल्द ही वे अपनी नागरिकता खो देंग।” संविधान की बात करते हुए स्वामी ने कहा कि भारतीय नागरिक होने के दौरान दूसरे देश की नागरिकता लेने वाले लोग स्वतः ही अपनी भारतीय नागरिकता खो देंगे।

दरअसल बीजेपी सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी हैदराबाद विश्वविद्यालय में आयोजित “सीएए– एक समकालीन राजनीति से परे एक ऐतिहासिक अनिवार्यता” विषय पर छात्रों को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान स्वामी ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने इंग्लैंड में व्यवसाय शुरू करने के लिए ब्रिटिश नागरिकता का विकल्प चुना था। हालाँकि, राहुल गाँधी नागरिकता के लिए नए सिरे से आवेदन कर सकते हैं, क्योंकि उनके पिता राजीव गाँधी एक भारतीय थे। लेकिन वह अपनी माँ सोनिया गाँधी की साख का इस्तेमाल करते हुए आवेदन नहीं कर सकते, क्योंकि वह भारतीय नागरिक नहीं थीं।

वहीं, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) पर बोलते हुए स्वामी ने कहा, “सीएए को ठीक से समझा नहीं गया है, यहाँ तक कि इसका विरोध करने वालों ने भी खुद इस अधिनियम को नहीं पढ़ा है। इस कानून से भारतीय मुस्लिमों को कोई प्रभाव नहीं पढ़ने वाला है। रही बात यह तर्क देने की कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले मुस्लिमों को भी नागरिकता दी जानी चाहिए, तो यह हास्यापद है।” उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक उत्पीड़न झेल रहे अल्पसंख्यकों के बचने के लिए एकमात्र स्थान भारत है। वहीं पाकिस्तान रोहिंग्याओं को अपने देश में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे रहा है और यहाँ कुछ लोग चाहते हैं कि पाकिस्तानी यहाँ आएँ।

संख्या में भले कम… लेकिन हिंदुओं को अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं! सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने भारत के 8 राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित करने वाली याचिका को खारिज करने के बाद इस मामले पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को आज एक छूट दी। कोर्ट ने कहा, “जिन राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं, याचिकाकर्ता उन राज्यों के उच्च न्यायालयों में अलग-अलग जाकर इस मामले पर अपनी गुहार लगा सकते हैं।”

बता दें कि बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका को दायर किया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मॉइनॉरिटी कमीशन की राय माँगी थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी अपना फैसला सुनाया।

कमीशन ने भी इस मामले पर अपनी राय यही दी थी कि फिलहाल इस मामले पर गौर करना सही नहीं है। क्योंकि सरकार ने अभी ऐसी कोई पॉलिसी नहीं बनाई है, जिसमें हिंदुओं को अल्पसंख्यकों का दर्जा दिया जाए। ऐसे में अब याचिकाकर्ता कोर्ट से छूट मिलने के बाद हाइकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

गौरतलब है कि भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई इस याचिका में माँग की गई थी कि राष्ट्रीय स्तर पर अल्पसंख्यक दर्जे का निर्धारण न हो बल्कि राज्य में उस समुदाय की जनसंख्या को देखते हुए नियम बनाने के निर्देश दिए जाएँ।

उपाध्याय ने अल्पसंख्यकों से जुड़े इस अध्यादेश को स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास जैसे मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि राष्ट्रीय स्तर पर हिंदू भले बहुसंख्यक हों लेकिन आठ राज्यों में वे अल्पसंख्यक हैं, इसलिए उन्हें इसका दर्जा दिया जाना चाहिए।

वो 8 राज्य, जहाँ हिंदुओं की जनसंख्या कम है, जिसके लिए SC में डाली गई थी याचिका:

  1. लक्षद्वीप में हिंदू आबादी 2.5%
  2. मिजोरम में हिंदू आबादी 2.75%,
  3. नागालैंड में हिंदू आबादी 8.75%,
  4. मेघालय में हिंदू आबादी 11.53%,
  5. जम्मू-कश्मीर में हिंदू आबादी 28.44%,
  6. अरुणाचल प्रदेश में हिंदू आबादी 29%,
  7. मणिपुर में हिंदू आबादी 31.39%
  8. पंजाब में हिंदू आबादी 38.4%

राजस्थान में दलित के साथ हैवानियत: प्राइवेट पार्ट्स में पेट्रोल, स्क्रू डाइवर भी घुसाया – रोंगटे खड़े करने वाला Video

कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में 2 दलित भाइयों के साथ बर्बरतापूर्ण मारपीट का मामला उजागर हुआ है। घटना रविवार की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, एक पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने 500 रुपए (कुछ ट्वीटर अकॉउंट के मुताबिक) की चोरी के आरोप में दोनों भाइयों की बुरी तरह से पिटाई की और बाद में उन्हें तड़पाने के लिए उनके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डाला और उसमें स्क्रू ड्राइवर भी घुसाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य की राजधानी जयपुर से 230 किलोमीटर दूर नागौर में दोनों भाई बाइक सर्विसिंग के लिए पेट्रोल पंप के पास गए थे। लेकिन वहाँ उन पर चोरी का इल्जाम लगाते हुए उनसे मारपीट शुरू कर दी गई।

इंसानियत को शर्मसार करने वाली इस घटना की दो वीडियो सोशल मीडिया पर आ गई है। वायरल हुए इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे दोनों पीड़ितों के साथ बर्बरता की जा रही है। पीड़ितों के मुताबिक उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी राजपाल सिंह के मुताबिक पंप के कर्मचारियों ने दो भाइयों को चोरी के आरोप में बुरी तरह से पीटा और इस घटना का वीडियो वायरल हुआ। पीड़ित भाइयों ने इस संबंध में बुधवार को शिकायत दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में पाँच लोगों को हिरासत में लिया और अब आगे मामले की जाँच चल रही है।

सोशल मीडिया पर लोग कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए पार्टी के दलित प्रेम पर सवाल उठा रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि हमेशा मीडिया में इंसाफ की बातें होती हैं लेकिन यहाँ सब चुप्पी साधे बैठे हैं। अगर भाजपा शासित प्रदेश में ये घटना होती तो मीडिया में अब तक प्राइम टाइम हो चुका होता। लेकिन घटना कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान में हुई है, इसलिए शांति बनाए बैठे हैं।

राजस्थान: ससुर के महिला से रेप के बाद शिकायत करने पर पति ने बेल्ट से पीटा, ननद ने गर्म सलाखों से दागा

राजस्थान पुलिस की सुस्ती की भेंट चढ़ा रेप पीड़िता का पिता, घर में घुस तलवार से काटा

रेप के मामले: मध्य प्रदेश देश में सबसे आगे, दूसरे नंबर पर भी कॉन्ग्रेस शासित राजस्थान

‘हिंदुओं को हिलाना है, मोदी-शाह को गिराना है’ – जिस MLA ने नहीं कही भारत माता की जय, अब दे रहा धमकी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पूर्व एमएलए वारिस पठान के भाषण की एक वीडियो सामने आई है। वीडियो गुलबर्ग रैली के दौरान दिए भाषण की है। भाषण में वारिस पठान सीएए के ख़िलाफ़ बोलते हुए वहाँ मौजूद भीड़ को मोदी-शाह के अलावा हिंदुओं के ख़िलाफ़ भड़काते दिख रहे हैं। वीडियो में वारिस को कहते सुना जा सकता है कि उनकी संख्या अभी 15 करोड़ है, लेकिन ये 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी है। अगर ये 15 करोड़ साथ में आ गए, तो सोच लो उन 100 करोड़ का क्या होगा?

वारिस पठान 15 मिनट की अपनी बातचीत में ओवैसी को शेर बताते हैं और सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही महिलाओं को शेरनियाँ। उन्हें पूरी वीडियो की शुरुआत में ही भीड़ को उकसाने के लिए कहते सुना जा सकता है कि हिंदुओं को हिलाना है न, मोदी-अमित शाह के तख्त को गिराना है न? तो आवाज ऐसी बनानी है कि आवाज यहाँ से निकले और सीधे जाकर दिल्ली के अंदर गिरे।

‘अगर यहाँ के 30 करोड़ मुस्लिम आतंकी बन गए तो क्या हाल होगा, खून की नदियाँ बहेंगी’

वीडियो में वारिस पठान मोदी शाह के ख़िलाफ़ जमकर जहर उगलने के बाद ये कहते भी नजर आते हैं कि सीने पर गोली खाएँगे, मगर कागज़ नहीं दिखाएँगे। उन्हें वीडियो में ये भी कहते सुना जा सकता है कि आज जो लोग सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं, वो लोग इस देश के संविधान को बचाने निकले हैं। वे लोग इस देश के लोकतंत्र को बचाने निकले हैं और वे लोग इस देश के सेकुलरिज्म को बचाने निकले हैं।

अपने भाषण में वारिस पठान इस बात को एक सिरे से खारिज करते दिखते हैं कि मदरसों से आतंकवादी नहीं निकलते बल्कि उनके मुताबिक आतंकी तो आरएसएस से आते हैं। उन्हें वीडियो में पूछते देखा जा सकता है कि आखिर महात्मा गाँधी पर गोली चलाने वाला आतंकी गोडसे किस शाखा का था? गुजरात में माँ-बहन की इज्जत लूटी, वो किस शाखा से आते थे? जामिया और शाहीन बाग में जो पिस्तौल लेकर गया, वो किसकी बात सुनकर आया और किस शाखा से आया?

अपनी बात को खत्म करते-करते वारिस पठान वहाँ मौजूद भीड़ को आजादी के मायने बताते हैं और वीडियो की शुरुआत में सेकुलरिज्म की बात करने वाले अपने भाषण के अंत तक 100 करोड़ हिंदुओं पर हावी होने की बात खुलेआम कहते हैं और मुस्लिमों से संगठित होने की गुहार लगाते हैं।

वारिस कहते हैं, “आजादी लेनी पड़ेगी..और जो चीज माँगने से नहीं मिलती उसे छीनना पड़ेगा। अब वक्त आ गया है।” वे महिलाओं के प्रदर्शन की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि अभी तो सिर्फ़ शेरनियाँ बाहर निकली हैं। अगर हम लोग बाहर आ गए तो सोचो क्या होगा, हम 15 करोड़ है लेकिन 100 करोड़ पर भारी हैं, ये बात याद रख लेना।

गौरतलब है कि जिस मंच से AIMIM के पूर्व विधायक और वकील वारिस पठान ने मोदी-शाह समेत हिंदुओं के बारे में जमकर जहर उगला, उस मंच पर उनकी पार्टी प्रमुख ओवैसी भी मौजूद थे। जो साल 2018 में सेकुलरिज्म के नाम पर समुदाय विशेष से अपील करते हैं कि मुस्लिम सिर्फ़ मुस्लिमों को ही वोट दें, तभी धर्मनिरपेक्षता मजबूत होगी और साल 2019 में मुस्लिमों को कहते हैं कि अब खुदा के लिए सेकुलरिज्म को भूल जाओ और एकजुट होने का काम करो।

पाठकों को यह जानना बहुत जरूरी है कि वारिस पठान वही नेता हैं, जिनकी 2016 में महाराष्ट्र विधानसभा से सदस्यता इसलिए खत्म कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने सदन में भारत माता की जय बोलने से इनकार कर दिया था।

‘जो मोदी-शाह के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएगा वो मर्द-ए-मुजाहिद कह लाएगा’ – ओवैसी ने CAA को जिहाद से जोड़ा

शाहीन बाग में फ्री लंगर का AIMIM कनेक्शन: AAP, कॉन्ग्रेस, PFI के बाद अब ओवैसी का भी साथ

महाकाल एक्सप्रेस में महादेव को देख ओवैसी की सुलगी, लोगों ने कहा- एकतरफा सेकुलरिज्म नहीं चलेगा

…जिसका दादा हिंदू नरसंहार का सहयोगी, छोटा भाई 15 मिनट में हिंदुओं को देख लेने की धमकी दे – वो ओवैसी ‘झूठा’