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डॉ शाहीन खान ने कराया मुंडन, कॉन्ग्रेस और कमलनाथ के झूठ से तंग: राहुल गाँधी को भेजे गए बाल

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के झूठे वादों से तंग आकर बुधवार (फरवरी 19, 2020) को एक महिला अतिथि प्रोफेसर ने विरोध स्वरूप अपना मुंडन करवा लिया। महिला का नाम डॉक्टर शाहीन खान है। बीते 72 दिनों से अपनी माँगों को लेकर धरने पर बैठे अतिथि विद्वानों में से एक शाहीन ने यह कदम कॉन्ग्रेस द्वारा पूर्ण रूप से नजरअंदाज किए जाने के बाद उठाया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक रूप से मुंडन करवाने के बाद शाहीन ने बेहद भावुक होते हुए कहा, “चुनाव के बाद अतिथि विद्वानों से कॉन्ग्रेस ने वादा किया था कि सरकार बनने पर हमारी माँगों को पूरा किया जाएगा। हमने साल भर तक इंतजार किया। उसके बाद ही हमने अपना आंदोलन शुरू किया। मगर, आंदोलन शुरू होते ही अतिथि विद्वानों को फालेन आउट नोटिस मिलने शुरू हो गए।”

शाहीन के अनुसार, वे दो महीने से ठंड में धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनकी कोई सुध नहीं ली। उन्होंने बच्चों को पढ़ाकर उनका भविष्य बनाया लेकिन अब खुद उनका भविष्य अंधकारमय है, इसलिए अब वह प्रदर्शनस्थल से लिखित आर्डर मिलने तक नहीं उठेंगे।

इसके अलावा, अतिथि विद्वान नियमतिकरण संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवराज सिंह ने भी मीडिया से बात की। उन्होंने डॉ शाहीन खान द्वारा मुंडन कराए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे दुखदाई दिन अतिथि विद्वानों के लिए नहीं हो सकता, क्योंकि एक महिला ने अपने केश त्याग दिए। डॉक्टर शाहीन ने जो बाल मुंडवाए हैं, उसे हम राहुल गाँधी के पास भेजेंगे ताकि उन्हें पता चल सके कि उनके दिए गए वचन का यहाँ पालन नहीं हो रहा है।

गौरतलब है कि साल 2018 में कमलनाथ ने भाजपा पर निशाना साधने के लिए केशों को महिलाओं का सम्मान बताया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरते हुए महिला विद्वानों द्वारा केश त्यागने की घटना को दिल झकझोर देने वाली घटना कहा था। मगर, आज जब कॉन्ग्रेस के शासनकाल में अतिथि विद्वानों के साथ ऐसा अन्याय हो रहा है, तब इसकी सुध न कमलनाथ ले रहे हैं और न ही राहुल गाँधी।

कॉन्ग्रेस और प्रदेश सीएम के इसी रवैये को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा है, “मुख्यमंत्री जी, आज भी केश नारी के सम्मान का प्रतीक हैं। अतिथि विद्वान बहनों ने आपकी सोती हुई सरकार को नींद से जगाने के लिए अपने केश त्यागे, क्या आज आपको उनकी पीड़ा का अंदाज़ा है? क्या आपकी नज़र में आज प्रदेश शर्मसार हुआ? क्या उनकी भलाई के लिए आप कोई कदम उठाएँगे?”

जब ‘मासूम’ मुस्लिम महिला ने आँसुओं से DCP मारिया को फाँसा और दुबई भाग गया अबू सलेम

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने हाल ही में रिलीज हुई अपनी पुस्तक ‘लेट मी से इट नाउ’ में कई बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने इसी पुस्तक में बताया है कि कैसे अजमल कसाब को हिन्दू साबित करने की पूरी तैयार थी, जिससे 26/11 मुंबई हमले को ‘भगवा आतंकवाद’ का रंग दिया जाए। इसके बाद से कॉन्ग्रेस पर कई आरोप लगने शुरू हो गए थे, क्योंकि उस समय यूपीए-2 की सरकार थी। मारिया ने अपनी क़िताब में अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर अबू सलेम के बारे में भी बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए बताया है कि अगर वो उस समय ठीक फ़ैसला लेते तो अबू सलेम डॉन नहीं बन पाता।

या मामला तब का है, जब अवैध हथियारों को रखने के आरोप में बॉलीवुड के अभिनेता संजय दत्त से पूछताछ हुई थी। पुलिस को सूचना मिली थी कि संजय दत्त के पास हथियार आए थे और उनमें से कुछ उन्होंने ख़ुद भी रख लिया था। जाँच के दौरान बांद्रा के माउंट मैरी के पास रहने वाली जेबुनिसा काजी नामक महिला का नाम सामने आया। संजय दत्त के पास से हथियार लाकर उसके पास ही रखे गए थे। मारिया ने जेबुनिसा को भी पूछताछ के लिए बुलाया। हालाँकि, जेबुनिसा ने पुलिस स्टेशन में ही रोना शुरू कर दिया। वो अपनी तीन बेटियों का हवाला देकर ख़ुद के निर्दोष होने की बात करने लगी।

वो ख़ुद को काफ़ी मासूम दिखा रही थी। दुर्भाग्य से तब डिप्टी कमिश्नर रहे राकेश मारिया उसकी बातों में आ गए। उसे जाने दिया गया। इसके बाद उस व्यक्ति से पूछताछ की गई, जिसकी गाड़ी में हथियार लाया गया था। उसका नाम मंजूर अहमद था, जिसने पुलिस को बताया कि जेबुनिसा मासूम नहीं है। उसने ही बताया कि जेबुनिसा इस वारदात में शामिल थी और उसने अपने आँसुओं से पुलिस को चकमा दे दिया। राकेश मारिया को तब अपनी ग़लती का एहसास हुआ लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। ज़ेबुसिना को पुलिस ने दोबारा शिकंजे में लिया, लेकिन तब तक उसने अपना काम कर दिया था।

उसे पूछताछ के बाद तुरंत जाकर अबू सलेम को सारी बातें बता दी थी। अबू सलेम वहाँ से सीधा नेपाल पहुँचा और बाद में दुबई से अपना कारोबार चलाने लगा। वह वहीं से व्यापारियों और फ़िल्मी हस्तियों से वसूली करता। दोबारा पूछताछ के दौरान राकेश मारिया ने जेबुनिसा को तमाचा जड़ने का मन बनाया, लेकिन उसने तुरंत सब कुछ बक दिया। दुबई जाकर अबू सलेम ने अंडरवर्ल्ड में और गहरी पैठ जमाई, जिसके बाद मुंबई में उसकी तूती बोलने लगी। वह 2002 तक बेख़ौफ़ होकर अपराधों को अंजाम देता रहा।

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जिसने 70 साल लड़ी रामलला की लड़ाई उनके उत्तराधिकारी चुने गए राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बनाए गए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली बैठक बुधवार को दिल्ली में हुई। इस ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र की मोदी सरकार ने किया था। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष और विहिप के चंपत राय को महासचिव चुना गया है। मोदी के प्रधान सचिव रहे नृपेंद्र मिश्रा को मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

उल्लेखनीय है कि महंत नृत्य गोपाल दास रामजन्भूमि न्यास के भी अध्यक्ष हैं। परमहंस रामचंद्र दास के निधन के बाद वे न्यास के अध्यक्ष चुने गए थे। परमहंस रामचंद्र दास ने करीब 70 साल तक रामलला की लड़ाई थी।

ट्रस्ट की पहली औपचारिक बैठक में 9 प्रस्ताव पारित हुए। बैठक में बसुदेवनन्द जी सरस्वती ने प्रस्ताव दिया कि नृत्यगोपाल दास को अध्यक्ष बनाया जाए। इसके बाद महंत नृत्यगोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया। वहीं गोविंद देव गिरी को कोषाध्यक्ष बनाया गया। ट्रस्ट की अगली बैठक अयोध्या में 15 दिनों के अंदर होगी। इस बैठक में मंदिर निर्माण की तारीख तय की जा सकती है।

आज सम्पन्न हुई बैठक में निर्माण कार्य पूरा करने की समयसीमा निर्धारित करने के मसलों पर भी चर्चा की गई। बैठक में हिस्सा लेने के लिए महंत धीरेंद्र दास, स्वामी परमानंद जी महाराज, वासुदेवानंद जी महाराज, चंपत राय, महंत नृत्य गोपाल दास, कामेश्वर चौपाल, अवनीश अवस्थी, महंत गोविंद गोविंद देव जी महाराज प्रसन्ना तीर्थ पहुँचे।

उत्‍तर प्रदेश सरकार की ओर से दो IAS अधिकरियों ने ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की बैठक में भाग लिया। इन अधिकारियों में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी और अयोध्या के जिला मजिस्ट्रेट अनुज झा शामिल थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, उक्‍त दोनों अधिकारी ट्रस्ट में पदेन सदस्य होंगे और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में कानून और व्यवस्था की स्थितियों की देखरेख करते हुए मदद करेंगे। भविष्य में होने वाली बैठकों में भी पारदर्शी तरीकों पर खास तौर पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि ‌भविष्य में किसी तरह का विवाद पैदा नहीं हो।

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने महंत नृत्य गोपाल दास और चंपत राय को ट्वीट कर बधाई दी।

बैठक में फैसला लिया गया है कि राम मंदिर का प्रारूप वही होगा जिस प्रारूप को विश्व हिंदू परिषद (VHP) और श्री राम जन्मभूमि न्यास ने पूरे देश में प्रसारित किया है। इसी प्रारूप पर विश्वास करके जनता ने सवा-सवा रुपए अंशदान करके सवा आठ करोड़ रुपए राम जन्मभूमि न्यास को दिया था। इस योगदान से 30 करोड़ रुपए के पत्थर बन कर तैयार हैं।

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फ्रांस ने इमामों के प्रवेश पर लगाई रोक, राष्ट्रपति बोले- आतंकी गतिविधियों पर लगेगी लगाम

दुनियाभर में आतंकवाद का तमगा लिए घूम रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों को अलग-अलग देशों में लगे प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। मुस्लिमों को अपने देश में प्रतिबंधित करने वाले देशों की सूची में एक नाम और जुड़ गयी है। यह नाम है फ्रांस। फ्रांस ने अपने देश में विदेशी इमामों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि इस निर्णय के बाद देश में आतंकी घटनाओं में कमी आएगी।

मैक्रों ने मीडिया से बात करते हुए बताया, “हमने 2020 के बाद अपने देश में किसी भी अन्य देश से इमामों के आने पर रोक लगा दी है।” उन्होंने कहा कि इस फैसले से फ्रांस में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लगेगी।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब जर्मनी में समुदाय विशेष को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। राष्ट्रपति मैक्रों ने फ्रेंच मुस्लिम काउंसिल से भी यह सुनिश्चित करने को कहा कि इस बात पर विशेष नज़र रहे कि 2020 के बाद कोई भी विदेशी इमाम फ्रांस में प्रवेश न कर सके। यह आदेश सितंबर के बाद से देशभर में लागू हो जाएगा।

राष्ट्रपति मैक्रों ने यह भी आदेश जारी किया है कि जो भी देश में विदेशी इमाम हैं, वह सभी फ्रेंच भाषा सीखें। साथ ही चेतावनी दी कि कोई कट्टरपंथी भावनाएँ न भड़काएँ और न ही किसी प्रकार की आतंकी गतिविधियों में हिस्सा लें। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि हर मुस्लिम आतंकी नहीं है, लेकिन अधिकतर मामलों में इस्लामिक आतंकवाद ही सामने आता है। इसलिए देश की रक्षा करने के लिए ऐसा कद़म उठाया गया है। आतंकवाद का समर्थन करने वालों को हम किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे।

दरअसल राष्ट्रपति मैक्रों की योजना 1977 में बनाए गए एक प्रोग्राम को समाप्त करने की है, जिसके तहत नौ देशों को फ्रांस में फ्रेंच भाषा सिखाने के लिए शिक्षक भेजने की अनुमति थी। इस प्रोग्राम के तहत फ्रांस में हर वर्ष आने वाले करीब 300 इमाम करीब 80,000 छात्रों तक पहुँचते हैं। इनमें ज्यादातर इमाम अल्जीरिया, मोरक्को और तुर्की से आते हैं। साथ ही फ्रांस अब मस्जिदों को विदेशों से मिलने वाले धन को पारदर्शी बनाने के लिए एक नया कानून बनाने की तैयारी में है।

अगर कोई मरने के लिए आ ही रहा है तो वह जिंदा कैसे हो जाएगा: CAA विरोधी हिंसा पर CM योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राज्य में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुई हिंसा के दौरान किसी की भी जान पुलिस की गोली से नहीं गई। ​जो भी मरे वे उपद्रवियों की गोली से ही मरे हैं। उन्होंने बुधवार (फरवरी 19, 2020) को विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही।

रिपोर्ट्स के अनुसार, योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अगर कोई व्यक्ति किसी निर्दोष को मारने के लिए निकला है और वह पुलिस की चपेट में आता है, तो या तो पुलिसकर्मी मरे, या फिर वह मरे। किसी एक को तो मरना होगा, लेकिन एक भी मामले में पुलिस की गोली से कोई नहीं मरा है।” मुख्यमंत्री ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस कार्रवाई की तारीफ करते हुए कहा, “अगर कोई मरने के लिए आ ही रहा है तो वह जिंदा कैसे हो जाएगा।”

ज्ञात हो कि CAA के विरोध में बीते दिसंबर महीने में उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन हुए थे। इस दौरान कई जगहों पर हिंसा हुई थी। इस पर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि कोई लोगों को निशाना बनाने के इरादे से सड़क पर उतरता है तो या तो वह मरता है या फिर पुलिसकर्मी मरता है। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियाँ चलवाकर अयोध्या की मान्यता को दूषित करने का प्रयास किया वो आज हमसे उपद्रवियों पर होने वाली कार्रवाई का जवाब माँग रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, “CAA के खिलाफ हिंसा हमें इस बारे में फिर सोचने को मजबूर करती है। आंदोलन में पीछे से हिंसा कर रहे लोगों को राजनीतिक संरक्षण मिला था। गत 15 दिसंबर को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हिंसा हुई, तो मैंने अलीगढ़ प्रशासन को सतर्क रहने को कहा। उस रात 15 हजार छात्र सड़क पर उतरकर अलीगढ़ को जलाना चाहते थे। अंदर से पहले पत्थर और फिर पेट्रोल बम फेंके गए। उसके बाद असलहे चले। कुलपति के लिखित अनुमति देने पर ही पुलिस अंदर गई और हल्का बल प्रयोग किया।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, “अब तक तो मैं सोचता था कि अपराधी भी अपने पुत्र-पुत्रियों को अपराधी नहीं बनाना चाहते हैं। मगर यहाँ कुछ नेता अपने पुत्र-पुत्रियों को देश विरोधी नारे लगाने वालों के बीच भेजते हैं। आप किस तरफ ले जा रहे हैं? आपको तय करना होगा। आपको बापू के सपने को साकार करना है या जिन्ना के सपने को?”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में CAA के विरोध में हुई हिंसा में देशविरोधियों के षड्यंत्र का पर्दाफाश हुआ है। उन्होंने कहा कि हिंसा फैलाने वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के लोग हैं। PFI सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) का नया वर्जन है।

PM मोदी के लिट्टी-चोखा खाते ही इंटरनेट लिबरल्स को लगे लूज़ मोशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी चीज से जुड़ें और देश के आदर्श लिबरल गिरोह को परेशानी ना हो, यह मुमकिन नहीं। इसको लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर चुटकुले भी शेयर किए जाते हैं कि अगर नरेंद्र मोदी कह दें कि जहर खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है, तो इंटरनेट पर बैठा हुआ आदर्श लिबरल गिरोह जहर खा लेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (फरवरी 19, 2020) को दिल्ली के राजपथ के हुनर हाट पहुँचे। इसकी जानकारी अपने ट्विटर एकाउंट पर शेयर करते हुए पीएम मोदी ने बताया कि वो हुनर हाट में न सिर्फ कई कलाकारों से मिले बल्कि वहाँ उन्होंने लिट्टी-चोखा खाया और कुल्हड़ में चाय भी पी।

हुनर हाट में देश के कोने-कोने से आए कारीगरों, शिल्पकारों एवं दस्तकारों के उत्पादों की तारीफ करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मंत्रालय के इस प्रयास से बहुत सारे लोगों को बाजार उपलब्ध हुआ है। ‘हुनर हाट’ का आयोजन अल्पसंख्यक मंत्रालय कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट बैठक के बाद अचानक हुनर हाट पहुँचकर सबको चौंका दिया। इसके बाद ट्विटर पर #HunarHaat ट्रेंड करने लगा।

पीएम मोदी के ट्विटर पर तस्वीरें शेयर करते ही सोशल मीडिया लिट्टी-चोखा की चर्चा में डूब गया। लेकिन इसके बाद ट्विटर पर ही एक गिरोह विशेष के बीच नरेंद्र मोदी के चर्चा बन जाने से खलबली मच गई। जहाँ देशभर के लोग लिट्टी-चोखा पर चर्चा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लिबरल गिरोह को इससे भी आपत्ति हो रही है और उन्होंने ट्वीट चालू कर दिए।

@RoflGandhi_ नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा- “पंजाब के चुनाव आ रहे होते तो भठूरे के साथ फोटो आती, राजस्थान के होते तो दाल-भाटी, ओडिसा के होते तो व्रत रखते।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिट्टी-चोखा खाने में भी चुनाव की महक सूँघ लेने वाले लिबरल गिरोह के लिए पीएम मोदी के किसी भी कार्यक्रम को किसी दूसरे नजरिए से देख पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी हो चुका है। कुछ समय पहले ही बॉलीवुड कलाकारों ने पीएम नरेंद्र मोदी के साथ सेल्फी लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर प्रकाशित किया था, आदर्श लिबरल वर्ग ने इस बात पर भी जमकर उत्पात मचाया था।

वहीं हुनर हाट में पीएम मोदी ने संगीत की धुन पर भी अपने हाथ आजमाए।

कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने मोदी के इस कार्यक्रम से जुड़े फोटो के साथ अपनी कलाकारी को भी मौका दिया

गौरतलब है कि ‘कौशल को काम’ थीम पर आधारित यह ‘हुनर हाट’ 23 फरवरी तक चलेगा। इसमें देश भर के ‘हुनर के उस्ताद’ दस्तकार, शिल्पकार, खानसामे भाग ले रहे हैं। इनमे 50% से अधिक महिला दस्तकार शामिल हैं।

श्रद्धालुओं के लिए दुनिया का सबसे विशाल मंदिर तैयार, 10 साल से चल रहा था निर्माण

पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में स्थित मायापुर में विश्व के सबसे बड़े मंदिर परिसर का पहला फ्लोर बन कर तैयार हो गया है। इसके अगले महीने श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने की योजना बनाई गई है। ‘द टेम्पल ऑफ वैदिक प्लैनेटेरियम’ अपने-आप में दुनिया का सबसे अनोखा मंदिर है। इसे आप आधुनिक समय का एक विशाल महल कह सकते है, जो अनोखे झूमरों से सुशोभित है। तकनीक के इस्तेमाल से यहाँ हो रहे पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का दुनिया-भर में सीधा लाइव प्रसारण होगा।

मंदिर का ‘पुजारी फ्लोर’ आकर्षण का विषय है। 1 लाख स्क्वायर फ़ीट में फैले परिसर में 2022 तक निर्माण कार्य पूरी तरह ख़त्म कर लिया जाएगा। मयापुर इस्कॉन (इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ कृष्णा कन्शियनस) का मुख्यालय है और यहाँ इस मंदिर का निर्माण भी उसी का एक भाग है। इस मंदिर के निर्माण का कामकाज आज से एक दशक पहले शुरू हुआ था। इसका मुख्य गुम्बद विश्व के किसी भी मंदिर का सबसे बड़ा गुम्बद होगा। मंदिर के निर्माण में अब तक 2 करोड़ किलो सीमेंट का प्रयोग किया जा चुका है। फ़िलहाल मंदिर के ‘पुजारी सेवा केंद्र’ को खोला गया है।

इस मंदिर का उद्देश्य है कि तकनीक के माध्यम से पूरी दुनिया में वैदिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया जाए। 380 फ़ीट के इस मंदिर में स्पेशल ब्लू बोलिवियन मार्बल का प्रयोग किया जा रहा है। इससे इसे पश्चिमी कलाकृतियों के नमूने की भी झलक मिलेगी। मंदिर के मैनेजिंग डायरेक्टर सदभुजा दास ने बताया कि ये मंदिर पूर्वी और पश्चिमी कलाकृतियों का मिश्रण होगा। इसमें वियतनाम के अलावा भारतीय पत्थरों का प्रयोग भी किया गया है। मंदिर के फ्लोर का डायमीटर 60 मीटर का है। देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी विशेष कक्षों में रखी जाएँगी।

इस्कॉन मंदिरों की ख़ासियत रही है कि यहाँ एक बार में कई श्रद्धालु भजन-कीर्तन में मगन करते हैं, कई ध्यान करते रहते हैं, कुछ नृत्य में आनंद पाते हैं और कई पूजा-पाठ में भी व्यस्त रहते हैं। इस मंदिर में एक समय में एक फ्लोर पर 10,000 श्रद्धालु पूजा-पाठ, नृत्य, ध्यान और भजन-कीर्तन का कार्य कर सकते हैं। इस्कॉन के पदाधिकारियों का कहना है कि संस्था के संस्थापक आचार्य प्रभुपाद हमेशा से चाहते थे कि मायापुर में कुछ ऐसा हो, जो पूरी दुनिया को आकर्षित कर यहाँ खींच लाए। यही वो क्षेत्र है, जहाँ चैतन्य महाप्रभु का जन्म हुआ था। मंदिर में एक साथ 20,000 लोगों के रुकने-ठहरने की व्यवस्था होगी।

संस्था का कहना है कि इस मंदिर में हर धर्म, जाति-संप्रदाय और समुदाय के लोग आ सकते हैं, किसी के लिए भी मंदिर के दरवाजे बंद नहीं रहेंगे। इस्कॉन ने लोगों से आह्वान किया है कि वो इस मंदिर में आएँ और ‘संत कीर्तन मूवमेंट’ का हिस्सा बनें। ताज़ा आँकड़ों के अनुसार, मायापुर में 70 लाख लोग प्रत्येक वर्ष आते हैं। इस्कॉन का कहना है कि मंदिर के पूर्णरूपेण तैयार हो जाने के बाद पश्चिम बंगाल के उस क्षेत्र में पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। हाल ही में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मायापुर को ‘हेरिटेज सिटी’ घोषित किया है।

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बसंत सिर्फ ऋतु नहीं, ज्ञान की उपासना से लेकर काम और मोक्ष का जीवंत उत्सव भी है

ईसा मसीह का बौद्ध कनेक्शन, भारत में मिला था ज्ञान!

फराह खान नहीं चाहती थी कि ‘मैं हूँ ना’ फिल्म का विलेन मुस्लिम हो

बॉलीवुड में हिन्दुओं को बदनाम करने का खेल दशकों से चल रहा है। जहाँ एक तरफ पंडितों को चुगली करने वाला दिखाया जाता है वहीं दूसरी तरफ मौलवियों को एक सीधा-सादा ईमानदार इंसान के तौर पर चित्रित किया जाता है। ‘ओम शांति ओम’ और ‘हैप्पी न्यू ईयर’ जैसी फ़िल्मों का निर्देशन कर चुकीं फराह ख़ान ने 2004 में आई अपनी फ़िल्म ‘मैं हूँ ना’ को लेकर बड़ा खुलासा किया है। इस फ़िल्म में शाहरुख़ ख़ान और सुष्मिता सेन ने लीड रोल निभाया था, वहीं सुनील शेट्टी विलेन के किरादर में नज़र आए थे। जाएद ख़ान, नसीरुद्दीन शाह और अमृता राव इस फ़िल्म में सहायक किरदारों में नज़र आए थे।

फराह ख़ान ने ‘ऑडिबल सुनो’ के पॉडकास्ट ‘पिक्चर के पीछे’ में कहा कि उन्होंने ये सुनिश्चित किया था कि ‘मैं हूँ ना’ का मुख्य विलेन वाला किरदार मुस्लिम न हो। फराह नहीं चाहती थीं कि इस फ़िल्म का विलेन मुस्लिम हो। इसमें मुख्य विलेन के सहायक विलेन का सरनेम ख़ान होता है, जिसे अंत में पता चलता है कि उसे बहकाया जा रहा था। फिर वो देश के प्रति अपने प्यार को प्रदर्शित करता है और आतंकवाद को अलविदा कह देता है। इस फ़िल्म में सुनील शेट्टी के किरदार का नाम ‘राघवन’ था। फ़िल्म में दिखाया गया था कि ‘मुट्ठी भर लोग’ भारत-पाकिस्तान के रिश्ते को ख़राब करना चाहते हैं, जिनसे शाहरुख़ ख़ान का किरदार निपटता है।

इसमें ज़ाएद ख़ान की भूमिका के लिए ऋतिक रोशन को एप्रोच किया गया था, लेकिन उन्होंने सहायक किरदार निभाने से इनकार कर दिया था। फराह ख़ान ने बताया कि वो इस फ़िल्म का दूसरा भाग भी बनाना चाहती हैं लेकिन उनके पास लंबे समय से कोई कहानी ही नहीं आई है।

कुल मिलकर देखें तो फराह ख़ान ने कुछ नया नहीं कहा है। ईसाइयों और मुस्लिमों को लेकर तो बॉलीवुड ख़ासा संजीदा रहता है, लेकिन जहाँ बात हिन्दुओं की आती है तो उनकी भावनाओं का सम्मान नहीं किया जाता। जैसे, हाल ही में फराह ख़ान, रवीना टंडन और भारती सिंह ने ईसाइयों की पवित्र पुस्तक ‘बाइबिल’ के एक शब्द को लेकर कॉमेडी किया था। इसके बाद देश भर में ईसाइयों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। सोशल मीडिया पर माफ़ी माँगने से भी जब काम नहीं चला तब तीनों हस्तियों ने रोमन कैथोलिक चर्च के भारतीय कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस से मिल कर लिखित में माफ़ीनामा सौंपा था। क्यों?

क्योंकि विवाद ईसाई समुदाय से जुड़ा था। लेकिन जैन मुनि तरुण सागर पर विवादित टिप्पणी करने वाला संगीतकार तब उनकी चौखट पर पहुॅंचा जब उसे पुलिसिया कार्रवाई का डर सताने लगा। लेकिन, जब मामला ईसाई या मुस्लिम धर्म से जुड़ा रहता है तो इन्हें माफी मॉंगने में सेकेंड भर देरी नहीं लगती। विवाद मुस्लिम अथवा ईसाई समुदाय से जुड़ा हो अथवा उनके विरोध का डर हो तो एक भी बॉलीवुड सितारा रिस्क नहीं लेना चाहता। वहीं जब बात बहुसंख्यक समुदाय की हो, तब लाख प्रदर्शनों के बावजूद वो माफ़ी नहीं माँगते और दिखाते हैं कि ‘देखो, हम उपद्रवियों के सामने नहीं झुक रहे।’ वो ऐसा क्यों करते हैं? सोचिए!

रवीना, फराह और भारती ने पादरी से मिल कर सौंपी लिखित क्षमा-प्रार्थना, ट्विटर पर माफ़ी से नहीं चला काम

बॉलीवुड की रीत पुरानी: ‘उन्हें’ रखो सिर-माथे पर, हिंदुओं की भावना ठेंगे पर

जब कश्मीरी बैंड की लड़कियों को रेप की धमकी मिलती रही, CM अब्दुल्ला पलट कर कठमुल्लों की गोद में बैठ गए

वैज्ञानिक अल्बर्ट सिसोदिया की मदद से पहाड़ की हवा खींचकर दिल्ली की जनता को साफ़ हवा देंगे केजरीवाल

दिल्ली को सिंगापुर बनाने के लिए उत्तराखंड और हिमाचल की साफ हवा का रुख दिल्ली की ओर करेंगे केजरीवाल।

दिल्ली चुनाव में अपनी प्रचंड जीत के बाद आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल जी ने अपने तीसरे कार्यकाल के लक्ष्य तय कर लिए हैं। इस बार के प्रमुख मुद्दों में प्राथमिकता दिल्ली को लंदन की जगह सिंगापुर में बदल देने को दी गई है। केजरीवाल जी ने स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मीडिया और दिल्ली की जनता को यह खुशखबरी सुनाई।

पिछले कार्यकाल के ‘ऑड-इवन’ जैसी योजना की कथित सफलता से उत्साहित केजरीवाल जी ने दिल्ली की हवा को साफ़ करने को अपना प्रथम लक्ष्य बताया है। लगातार तीसरे कार्यकाल में आम आदमी पार्टी की सरकार ने स्वच्छ हवा को प्राथमिकता दी है, लेकिन अभी तक दिल्ली के लोगों को सरकार पॉल्यूशन से राहत दिला पाने में नाकाम रही है।

इस बाबत सवाल किए जाने पर केजरीवाल जी ने सारा दोष हवा पर ही मढ़ते हुए कहा- “दिल्ली की हवा बहुत ही ढीठ है और मेरी लगातार विनती करने के बावजूद भी दिल्ली की हवा ने साफ़ होने से इनकार कर दिया है। आखिरी बार इतनी ढीठ हमारे साथ सिर्फ कॉन्ग्रेस पार्टी ही नजर आई थी, जिसने हमारे गठबंधन करने की सलाह पर कान तक नहीं रखे थे।”

प्रेस को सम्बोधित करते हुए श्री केजरीवाल जी ने कहा, “जिस प्रकार भगवान श्रीराम के तीन दिन तक समुद्र से लंका तक रास्ता देने की विनती करने के बावजूद समुद्र ने अपनी हठ नहीं छोड़ी थी, उसी प्रकार दिल्ली की हवा ने भी केजरीवाल जी, यानी मेरी अभी तक एक नहीं सुनी है। इस कारण मैं अब कठोर कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।”

चूँकि केजरीवाल जी ताजा-ताजा बने हनुमान भक्त हैं और भगवान श्री राम हनुमान जी के आराध्य हैं, इसलिए केजरीवाल जी ने दिल्ली की हवा को बिलकुल उसी तरह दण्ड देने का निर्णय लिया है, जिस प्रकार श्री राम ने समुद्र को सुखाने का निर्णय लिया था।

केजरीवाल जी ने आगे जोड़ते हुए कहा, “यह आइडिया मुझे मेरे हनुमान स्वरूप सखा अल्बर्ट मनीष सिसोदिया जी ने दिया। निगम की लाइन से दूषित पानी आने के कॉन्सेप्ट को वैज्ञानिक अल्बर्ट सिसोदिया ने जिस तरह से एक्सप्लेन किया, उस हिसाब से हमें पड़ोसी राज्यों से हवा खींच लाने के इस विचार की सफलता का पूरा भरोसा है।”

केजरीवाल जी ने मीडिया को बताया कि दिल्ली की हवा को स्वच्छ करने के लिए कई चरणों में कार्य संपन्न कराया जाएगा। प्रथम चरण में पड़ोस के पहाड़ी राज्यों, हिमाचल और उत्तराखंड में मोटर से चलने वाले बड़े-बड़े पंखे लगाए जाएँगे, जिससे कि हवा का रुख दिल्ली की ओर किया जा सके।

केजरीवाल जी ने तर्क दिया कि हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पलायन होने की वजह से वहाँ की साफ हवा व्यर्थ जा रही है, इसलिए दिल्ली सरकार ने उस हवा के इस्तेमाल के लिए साइंटिस्ट अल्बर्ट सिसोदिया के इस धाँसू आइडिया पर अमल करने का बेहतरीन निर्णय ले लिया है।

दूसरे चरण में दिल्ली में घर-घर तक हवा के कनेक्शन दिए जाएँगे। साफ़ हवा के पहले 200 यूनिट जनता के लिए फ्री होंगे। सार्वजनिक स्थानों पर केजरीवाल सरकार द्वारा दिए गए ‘कुदरती वाई-फाई’ और ‘कुदरती सीसीटीवी’ की भाँति ही जनता स्वच्छ प्राणवायु का लाभ उठा सकेगी। कॉर्पोरेट ऑफिस को स्वच्छ हवा की सप्लाई के बारे में पूछे जाने पर केजरीवाल जी से पहले ही साइंटिस्ट सिसोदिया जी ने बीच में कूदते हुए कहा कि कॉर्पोरेट साफ हवा के लिए अलग से अप्लाई कर सकेंगे, लेकिन उन्हें कॉर्पोरेट टैक्स भी चुकाना होगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए केजरीवाल जी ने यह भी बताया कि जिस तरह कोई भी बटन दबा देने से वोट भाजपा को ही चला जाया करता था, उसी प्रकार पहाड़ों से दिल्ली की तरफ मोड़ी गई साफ हवा राजस्थान की तरफ न चली जाए, इस पर आम आदमी पार्टी के ‘प्रतिभाशाली ईवीएम हैकर’ सदस्य ने चिंता जताई थी।

इस समस्या का हल भी ‘प्रतिभाशाली हैकर’ ने ही बताया कि साफ हवा पड़ोसी राज्यों में न जाकर सिर्फ दिल्ली के लोगों को ही मिल सके, इसके लिए दिल्ली की दक्षिण और पूर्वी सीमा पर ऊँची-ऊँची टिन की आसमानी चादरें लगाई जाएँगी, क्योंकि उत्तर-पश्चिम से दिल्ली में पहाड़ों की ओर से साफ़ हवा का प्रवाह होगा।

हालाँकि इस पर राजस्थान और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एक साजिश के तहत आम आदमी पार्टी के नेता साफ हवा का प्रवाह उनके राज्यों में रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लोगों को भी साफ हवा पर उतना ही अधिकार है जितना कि दिल्ली के लोगों का।

इस बारे में उत्तराखंड और हिमाचल के राजनैतिक दलों की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बीजेपी और कॉन्ग्रेस, दोनों ही दलों के नेताओं का कहना है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि पहाड़ की हवा को किस तरफ मोड़ा जा रहा है। उन्हें न पलायन से मतलब था, न अवैध खनन से, न युवाओं की बेरोजगारी से, और न ही जीव-जंगल-जमीन के संरक्षण से। उनका काम बस दिन भर विरोधी दलों से भिड़ना है और शाम ढलने पर उन्हीं के साथ मिलकर ‘हिलटॉप ब्रांड’ बनाना है, ताकि जनता को लग सके कि दिनभर वे उन्हीं के अधिकारों की लड़ाई लड़ते हैं।

साफ हवा को मोड़े जाने के सवाल पर राहुल गाँधी ने कहा कि इस बारे में उनकी राय वही है जो मनमोहन सिंह जी की होगी। क्योंकि मनमोहन जी भारत के सबसे बड़े अर्थशास्त्री हैं, इसलिए वही उनका और कॉन्ग्रेस पार्टी का भी अधिकृत विचार रहेगा। राहुल गाँधी ने आस्तीन ऊपर सरकाते हुए कहा, “देख लो जी, एक बात साफ़-साफ़ बता दूँ। इंडिया की हवा को हिन्दुस्तान ले जाने वालों के खिलाफ कॉन्ग्रेस हमेशा से ही रही है। 2014 के बाद से हम हर बात के खिलाफ ही तो रहे हैं।” इसके बाद उन्होंने अपनी वाणी को वहीं पर विराम दे दिया।

राहुल गाँधी ने यह भी कहा कि वैज्ञानिक अल्बर्ट मनीष सिसोदिया और केजरीवाल की पहाड़ की हवा दिल्ली खींचकर लाना उन्हीं के एक तरफ से आलू से डालकर दूसरी तरफ से सोना निकालने वाली स्कीम की नकल है।वहीं, तेज प्रताप यादव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे पहले शिव-रूप धरकर हिमालय जाएँगे और उसके बाद दिल्ली के वायु प्रदूषण को गले में रोककर आम आदमी पार्टी की इस फर्जी स्कीम को फ्लॉप कर देंगे। उनकी इस घोषणा ने लालटेन वाली पार्टी को ईंधन देने का काम किया है और पार्टी कैडर में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

आम आदमी पार्टी के शपथग्रहण के बाद ही इस कालजयी घोषणा से अब दिल्ली और शेष भारत की जनता में दिल्ली के जल्द ही सिंगापुर बनने की नई उम्मीद जगी है।

नोट: यह पूरा व्यंग्य फैक्ट चेक से पत्थर को वॉलेट में तब्दील कर देने वाले सॉल्ट न्यूज़ और न्यूज़लौंडी के खबरों को सूंघकर सच्चाई पता कर लेने वाले झबरा कुत्ते द्वारा पहले से ही सत्यापित है।

AAP ने शाहीन बाग को उसके हाल पर छोड़ा, अमित शाह से मिल केजरीवाल ने नहीं की कोई बात

दिल्ली के हालिया विधानसभा चुनावों में मुसलमानों का जबर्दस्त ध्रुवीकरण दिखा था। उन्होंने आम आदमी पार्टी के पक्ष में एकमुश्त होकर वोट डाले थे। उन 16 विधानसभा सीटों पर जहॉं 15 से 50 फीसदी मुस्लिम आबादी है 12 आप के खाते में गई। लेकिन, ऐसा लगता है कि सत्ता में वापसी के बाद अब आप के लिए शाहीन बाग बेमानी हो गया है। इसके संकेत मुख्यमंत्री केजरीवाल ने खुद बुधवार को दिए।

केजरीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर जाकर भेंट की। विधानसभा चुनाव के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। करीब 20 मिनट तक चली मुलाकात के बाद केजरीवाल ने बताया कि इस दौरान दिल्ली के तमाम मसलों पर चर्चा हुई। उन्होंने ट्वीट किया, “गृह मंत्री अमित शाह जी से मिला। बहुत ही फलदायी मुलाकात रही। दिल्ली से जुड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई। हम दोनों सहमत हुए कि दिल्ली के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे।” यह पूछे जाने पर कि क्या इस दौरान शाहीन बाग पर कोई बात हुई तो केजरीवाल ने कहा- इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।

केजरीवाल ने शाहीन बाग के मसले से ऐसे वक्त में दूरी बनाई है जब विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही वहॉं से भीड़ छंटने की खबरें लगातार आ रही है। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि धरने को जारी रखने के लिए इसके सूत्रधारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है और अब वे इससे पीछा छुड़ने की जुगत में लगे हैं। शाहीन बाग में सीएए के विरोध में दो महीने से ज्यादा समय से धरना चल रहा है। इनसे बातचीत के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वार्ताकारों की एक टीम बनाई है।

चुनाव का दौरान दिल्ली के डिप्टी CM मनीष सिसोदिया ने खुलेआम कहा था कि उनकी पार्टी शाहीन बाग के साथ है। लेकिन बाद में आप ने शाहीन बाग से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। ऐसा मुकाबले में बीजेपी के लौटने के अनुमानों के बाद किया गया था। इसके बाद केजरीवाल ने खुद को हनुमान भक्त के तौर पर प्रोजेक्ट करना शुरू किया था। एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ी और मतदान के दिन हनुमान जी के दर्शन भी किए। इतना ही नहीं शपथ लेते वक्त भी उन्होंने आम आदमी की टोपी को विदाई दे टीका लगा रखा था। आप ने हर महीने के पहले मंगलवार को हर विधानसभा क्षेत्र में सुंदर कांड का पाठ करने का फैसला भी किया है।

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