Home Blog Page 5075

पंजाब में SC वर्ग के कई लोगों को मिल रही फ्री बिजली पर लगी रोक, अब किसानों की बारी?

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह की सरकार ने अब पिछड़े वर्गों के लिए बिजली बिल बढ़ाने का फ़ैसला लिया है। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने तय किया है कि अब उन एससी, बैकवार्ड क्लास और नॉन-एससी बीपीएल परिवारों को बिजली मुफ़्त में नहीं मिलेगी। पहले इन लोगों को 200 यूनिट तक की बिजली प्रतिमाह मुफ़्त में मिलती थी। इसके अलावा उपर्युक्त वर्ग में आने वाले ऐसे लोगों को भी फ्री बिजली का लाभ नहीं मिलेगा, जो किसी संवैधानिक पद पर हों अथवा रिटायर हो गए हों। एससी सहित पिछड़े वर्ग के सरकारी कर्मचारियों पर भी ये नियम लागू होता है।

अभी तक इन ग्राहकों को इ किलोवाट लोड तक की पावर सप्लाई दी जाती थी। केवल उन्हें सूची में नहीं रखा गया था, जो इनकम टैक्स भरते हैं। गुरुवार (फरवरी 20, 2020) को जारी किए गए एक कमर्शियल सर्कुलर के अनुसार, पीएसपीसीएल ने कहा है कि किसी भी सरकारी पद पर रहने वाली लोगों को 200 यूनिट फ्री बिजली का लाभ नहीं मिलेगा।

लोग तो यहाँ तक कयास लगा रहे हैं कि पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार किसानों के लिए भी इसी तरह का कोई फ़ैसला ले सकती है। कहा जा रहा है कि दस एकड़ से ज्यादा मध्यम और बड़े किसानों को अगर सब्सिडी से बाहर कर दिया जाता है तो सरकार 3907 करोड़ रुपए बचाने में कामयाब होगी। दिसंबर 2019 में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने वित्त विभाग के साथ बैठक कर राज्य की बिगड़ती माली हालत को लेकर चर्चा की थी। अन्य विभागों को भी ख़र्च कम करने को कहा गया है क्योंकि पंजाब राज्य की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।

बता दें कि इस समय किसानों, एससी और उद्योगों को कुल 9674 करोड़ रुपए की बिजली सब्सिडी दी जा रही है। ‘दैनिक जागरण’ की ख़बर के अनुसार, इसमें किसानों को 6060 करोड़ रुपए, एससी, बीसी समुदाय को 200 यूनिट फ्री देने में 1623 करोड़ रुपए और इंडस्ट्री को 1990 करोड़ रुपए की सब्सिडी मिल रही है। मुख्यमंत्री की बैठक में माध्यम किसानों की भी बिजली सब्सिडी छीन लेने का सुझाव दिया गया। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि पिछड़े वर्ग के बाद अब किसानों की बारी है?

GSI का दावा, सोनभद्र में मिले स्वर्ण अयस्क से निकल सकेगा महज 160 किलो सोना

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में जिस विशाल स्वर्ण अयस्क भण्डार मिलने की खबर सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया में खूब जोरों से चर्चा का विषय रही उस पर GSI ने स्पष्टीकरण जारी किया है। जियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) ने शनिवार (फरवरी 22, 2020) को दावा किया है कि सोनभद्र की खदान में सिर्फ 160 किलो सोना मिला है और 3000 टन सोना निकलने की बात अफवाह मात्र है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, GSI के निदेशक डॉ. जीएस तिवारी ने बताया कि सोनभद्र की खदान में 3000 टन सोना होने की बात GSI नहीं मानता है। हालाँकि तिवारी ने कहा कि सोनभद्र में सोने की तलाश अभी भी जारी है और वहाँ जीएसआई का सर्वे अभी चल रहा है।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में सोनभद्र के जिलाधिकारी से भूमि संबंधी रिपोर्ट प्राप्त की जा रही है, उसके बाद क्षेत्र को भूराजस्व मानचित्र पर अंकित कर खनन के लिए उपयुक्त क्षेत्र की आवश्यक औपचारिकता पूरी करते हुए नीलामी की कार्यवाही की जाएगी।

डॉ. तिवारी ने कहा कि सोनभद्र में और सोना मिलने की संभावना से अभी इनकार नहीं किया जा सकता है, लेकिन अभी जो अयस्क मिला है, उससे 160 किलो सोना ही निकलेगा। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में 52806.25 टन स्वर्ण अयस्क होने की बात कही गई है, न कि शुद्ध सोना। इस प्रकार से GSI के दावे के अनुसार सोनभद्र में मिले स्वर्ण अयस्क से प्रति टन मात्र 3.03 ग्राम सोना ही निकल सकेगा।

वर्तमान में भारत में सबसे ज्यादा सोना कर्नाटक की हुत्ती खदान से निकाला जाता है। इस लिहाज से भारत में फिलहाल कर्नाटक ही सोने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। इसके बाद आंध्रप्रदेश, दूसरा सबसे बड़ा सोना उत्पादक राज्य है। इनके अलावा झारखंड, केरल और मध्यप्रदेश में भी सोना की छोटी-बड़ी खदानें हैं।

संगठन ने ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ कहने वाली एक्टिविस्ट पर रखा ₹10 लाख का इनाम, देशद्रोह को बताया कैंसर

खुद को श्री राम सेना का लीडर बता रहे एक व्यक्ति ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ कहने वाली अमूल्य नामक कथित एक्टिविस्ट पर 10 लाख रुपए का ईनाम देने की घोषणा की। शुक्रवार को आए बल्लारी के इस वीडियो में श्रीराम सेना का यह स्वयंभू नेता कहता है कि इस तरह की देश विरोधी हरकतें कैंसर की तरह बढ़ती जा रही हैं।

संजीव मराडी नामक इस व्यक्ति मीडिया के सामने राज्य सरकार से अमूल्य नामक इस “छात्र एक्टिविस्ट” को जमानत पर न छोड़ने की अपील करते हुए कहा कि इसे जमानत पर न छोड़ा जाए अन्यथा हम इसका एनकाउंटर करेंगे या जो भी ऐसा करेगा उसको 10 लाख रुपए ईनाम देंगे। हालाँकि, संजीव मराडी के पास खड़े दिखाई दे रहे व्यक्ति के गले में बीजेपी का पटका दिख रहा है लेकिन बल्लारी के बीजेपी जिला अध्यक्ष ने संजीव मराडी के बीजेपी कार्यकर्ता होने से इंकार किया है।

अमूल्य लियोना नामक इस छात्रा को ओवैसी की एक पब्लिक मीटिंग में पकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने के बाद देशद्रोह के केस में गिरफ्तार किया गया है।

इससे पहले श्रीराम सेना के ही एक सदस्य सिद्दालिंगा स्वामी ने हुबली में देशद्रोह के चार्ज के अंतर्गत गिरफ्तार किये गए तीन कश्मीरी स्टूडेंट्स की जीभ काट के लाने वालों के लिए 3 लाख रुपए के ईनाम की घोषणा की थी।

RaGA हमारे लीडर हैं क्योंकि सब उन्हीं पर करते हैं हमला, सलमान खुर्शीद ने बताया गाँधी परिवार को पार्टी का आधार

एक लम्बे अरसे से कॉन्ग्रेस में अध्यक्ष पद और पार्टी में राहुल गाँधी के रोल को लेकर चर्चा बंद थीं। लेकिन हर चुनाव नतीजे के बाद यह कॉन्ग्रेस द्वारा नियमित रूप से दोहराए जाने वाली बात बनती जा रही है। यह भी देखा गया है कि जब भी राहुल गाँधी को पार्टी में फिर से कोई बड़ी जिम्मेदारी देने की बात आती है तो देश की सबसे पुरानी पार्टी कॉन्ग्रेस का कोई वरिष्ठ नेता ही पहल करते हुए देखा जाता है। इस बार यह पहल सलमान खुर्शीद ने की है।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने शनिवार (फरवरी 22, 2020) को कहा है कि कॉन्ग्रेस पार्टी में एक बड़ा धड़ा हमेशा महसूस करता है कि राहुल गाँधी को पार्टी का अध्यक्ष बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह शीर्ष नेता हैं। यह पूछे जाने पर कि गाँधी परिवार अब भी कॉन्ग्रेस का आधार है? तो उन्होंने कहा कि सच्चाई यही है, जिससे आप हट नहीं सकते हैं।

एक इंटरव्यू के दौरान सलमान खुर्शीद ने कहा कि कॉन्ग्रेस ‘संक्रमणकालीन प्रक्रिया’ से गुजर रही है और राहुल को यह निर्णय अपने हिसाब से करने देना चाहिए। साथ ही सलमान खुर्शीद ने यह भी कहा कि पार्टी में नेतृत्व का कोई संकट नहीं है क्योंकि सोनिया गाँधी कमान संभाल रही हैं।

सलमान खुर्शीद का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कॉन्ग्रेस के ही कुछ अन्य बड़े नेता नेतृत्व के मुद्दे पर बात करते देखे जा रहे हैं। शशि थरूर ने भी बृहस्पतिवार को कॉन्ग्रेस कार्य समिति से ‘कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और मतदाताओं को प्रेरित करने के लिए’ नेतृत्व का चुनाव कराने का आग्रह किया था।

इससे पूर्व दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र और कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित भी एक इंटरव्यू में कहते देखे गए कि इतने महीनों के बाद भी कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता नया अध्यक्ष नहीं नियुक्त कर सके हैं।

पार्टी नेतृत्व पर शशि थरूर और अन्य नेताओं के दृष्टिकोण के बारे में पूछे जाने पर खुर्शीद ने कहा, ‘‘हमने अतीत में चुनाव कराया था। हमारे पास ऐसे भी लोग हैं जो कहते हैं कि जरूरी नहीं कि चुनाव बेहतर विकल्प हों। दो तरह के विचार हैं। जब हम उस बिंदू पर पहुँचेंगे, तब हम इस बारे में तय कर लेंगे।’’

उन्होंने कहा कि ऐसे मसलों पर मीडिया में बातचीत करने से कॉन्ग्रेस को मदद नहीं मिलेगी। खुर्शीद से जब यह सवाल किया गया कि क्या राहुल गाँधी पार्टी का नेतृत्व करने के लिए सबसे बेहतर उम्मीदवार हैं? तो उन्होंने जवाब में कहा, ‘‘हम सबने ऐसा कहा है। अब यह पत्थर की लकीर है, यह स्पष्ट है। लेकिन अगर हम उन्हें अपना नेता स्वीकार करते हैं तो इसका निर्णय उन्हें अपने हिसाब से करने दें। हम उन पर अपना विचार क्यों थोपना चाहते हैं?’’

खुर्शीद ने कहा कि अगर आपको विश्वास है कि राहुल गाँधी एक नेता हैं तो आपको कुछ निर्णय उन पर ही छोड़ने होंगे। चुनावों में मिल रही हार के विषय पर खुर्शीद ने कहा कि उन पर समय मत थोपिए, निर्णय उन पर नहीं थोपना चाहिए, उन्हें निर्णय करने दीजिए।

उन्होंने कहा कि वह (राहुल गाँधी) शीर्ष नेता है और कोई शीर्ष नेता नहीं है। लेकिन कई और नेता हैं जिनका अपना महत्व है।’’ इसके लिए खुर्शीद ने तर्क देते हुए कहा कि चूँकि कॉन्ग्रेस का विरोध करने वाले दल लगातार किसी अन्य नेता के मुकाबले राहुल गाँधी पर ही ज्यादा हमला करते हैं इससे यही साबित होता है कि वह शीर्ष नेता हैं।

ईद पर मटन ठीक, क्रिसमस पर ‘गोमूत्र नहीं शराब पियो’, पर महाशिवरात्रि पर निकल रहा है लेखिका का ज्ञान

ख़ुद को लेखिका बताने वाली रुचि कोकचा ने महाशिवरात्रि को लेकर ‘ज्ञान देने’ वाली परंपरा निभाई। यहाँ ज्ञान से वेद-पुराणों का तात्पर्य नहीं है बलि हिन्दुओं को उलटी-सीधी सलाह देने वाली बात है। होली पर पानी बचाने, जन्माष्टमी पर हाँडी की ऊँचाई कम रखने और दीपावली पर पटाखे न जलाने की सलाह देना वामपंथियों का फेवरिट शौक हैं। इसी तरह महाशिवरात्रि पर दूध बचाने, शिवलिंग की जगह ग़रीबों को चढाने और भगवान शिव क्या चाहते हैं- ये सब वही लोग बताते हैं, जिन्हें ये तक नहीं पता कि भगवान शिव के बारे में हमारे धर्म-ग्रंथों में क्या लिखा हुआ है। इसी तरह ‘ऑब्सेस्ड’ नामक पुस्तक की लेखिका रुचि ने भी उटपटांग सलाह दी।

रुचि ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की। इस तस्वीर में भगवान शिव एक बच्चे को दूध पिला रहे होते हैं और लोग लाइन में लग कर मंदिर में शिवलिंग पर दूध चढ़ा रहे होते हैं। रुचि ने साथ ही लिखा कि समझने वाले समझ जाएँगे। हालाँकि, ये सब वामपंथियों के फ़र्ज़ी ज्ञान की उपज होती है क्योंकि ऐसा कहीं कुछ भी वर्णित नहीं है। रुचि इस तस्वीर के माध्यम से ये बताना चाहती थी कि हिन्दू मंदिर में शिवलिंग पर दूध अर्पित कर के उसे ‘बर्बाद’ करते हैं और भगवान शिव ‘नहीं चाहते’ कि उन्हें कोई दूध चढ़ाए क्योंकि वो ग़रीबों को लेकर चिंतित हैं।

जबकि, हमारे शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है कि भगवान शिव को फल-फूल, जल, दूध और बेलपत्र अर्पित किया जाना चाहिए। लेकिन वामपंथी चाहते हैं कि हिन्दू अपने प्राचीन ग्रंथों व परम्पराओं को नहीं, बल्कि उनके हिसाब से चलें। रुचि भले ही महाशिवरात्रि पर ज्ञान बाँचती हों, वो ईद और क्रिसमस पर गुलछर्रे उड़ाने का एक भी मौका नहीं छोड़तीं। ईद मुस्लिमों का त्यौहार है जबकि क्रिसमस ईसाईयों का, इसीलिए उस समय रुचि ख़ासा एन्जॉय करती हैं और सारा ज्ञान हिन्दू त्योहारों के लिए बचा के रखती हैं। ईद और क्रिसमस पर खुशियाँ मनाती हुई उनकी तस्वीरों को देख कर ये स्पष्ट हो जाता है।

अगस्त 2018 में ईद के मौके पर रुचि ने मुबारकबाद देते हुए लिखा कि सभी को मटन-बिरयानी खानी चाहिए, युद्ध जैसे हालात नहीं क्रिएट करने चाहिए। हालाँकि, उन्होंने मटन के लिए बकरों को मारे जाने पर कोई ज्ञान नहीं दिया। इस दौरान उन्होंने पशु अधिकार की बातें नहीं की और न ही मुस्लिमों को जीवहत्या न करने की सलाह दी क्योंकि ये सारे सलाह हिन्दुओं के लिए बचा कर रखे जाते हैं। इसी तरह सितम्बर 2017 में भी ईद के मौके पर रुचि ने मटन-बियानी खाई थी।

ईद पर कोई ज्ञान या सलाह नहीं देती रुचि: ख़ूब एन्जॉय करती हैं

वहीं ईसाईयों के त्यौहार क्रिसमस के मौके पर 25 से भी अधिक ट्वीट्स करने वाली रुचि महाशिवरात्रि पर लोगों को उलटे-पुलटे सलाह देती हैं। रुचि ने क्रिसमस 2015 के मौके पर ‘भक्तों’ को ‘गोमूत्र की जगह’ वाइन पीने की सलाह दी थी। इस दौरान वो सांता की मीठी-मीठी बातें करती हैं और अपनी तस्वीरें क्लिक कर-कर के लोगों को दिखाती हैं।

क्रिसमस पर ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहता जबकि हिन्दू त्योहारों पर नाराज़ रहती हैं रुचि

दोहरा रवैया वाले ये वामपंथी कभी भी क्रिसमस पर ये नहीं कहते कि शराब पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है या हानिकारक। इसी तरह ये ईद के मौके पर लाखों पशुओं की हत्या को लेकर भी अपना रोना नहीं दिखाते। लेकिन, अपने प्राचीन धर्म-ग्रंथों का अनुसरण करते हुए जब हिन्दू हज़ारों वर्षों की परंपरा का निर्वहन करते हैं, इन्हें परेशानी हो उठती है। छोटी-छोटी चीजों को बड़ा बना कर पेश किया जाता है और ऐसा दिखाया जाता है जैसे कि मुस्लिमों व ईसाईयों के त्यौहार प्यार के लिए होते हैं जबकि हिन्दू पर्व-त्योहारों से सिर्फ़ घृणा फैलती है। ये अलग बात है कि रुचि जैसों के बयानों में अब कोई रुचि नहीं दिखाता।

नागरिकता साबित करो: घर में घुस कर कागज़ देख रहे MNS कार्यकर्ता, पुलिस भी साथ

जहाँ एक तरफ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सीएए का समर्थन और एनआरसी के विरोध के बीच पेंडुलम बन कर झूल रहे हैं, राज ठाकरे ने विदेशी घुसपैठियों के ख़िलाफ़ अपना रुख स्पष्ट कर दिया है और कहा है कि उन्हें खदेड़े बिना देश का कल्याण नहीं हो सकता। अपनी पार्टी ‘महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना’ का झंडा भगवा रंग का करने वाले राज ठाकरे की पार्टी हिंदुत्ववादी मुद्दों पर वही रुख रख रही है, जैसा कॉन्ग्रेस और एनसीपी से गठबंधन से पहले शिवसेना का था। अब शिवसेना इस मामले में फँस गई है और कभी इधर तो कभी उधर की बातें कर के हिंदुत्ववादी छवि भी बचाना चाहती है और साथ ही सत्ता की मलाई भी चाभना चाहती है।

महाराष्ट्र के दूसरे सबसे बड़े महानगर पुणे में मनसे कार्यकर्ताओं ने एक अभियान शुरू किया है। उद्धव ठाकरे के महाराष्ट्र में राज ठाकरे के कार्यकर्ता अब घुसपैठियों को चिह्नित कर उन्हें खदेड़ने में लगे हुए हैं। मनसे उन क्षेत्रों को चिह्नित कर रहे हैं, जहाँ बांग्लादेशी लोग रहते हैं। वहाँ राज ठाकरे की पार्टी के कार्यकर्ता जाकर उनसे नागरिकता के सबूत माँग रहे हैं। धनकवड़ी इलाक़े में बड़ी संख्या में लोग किराए पर रहते हैं, जहाँ मनसे कार्यकर्ताओं ने सक्रियता बढ़ा दी है और लोगों से अपनी नागरिकता साबित करने को कही है।

सबसे बड़ी बात तो ये है कि मनसे कार्यकर्ताओं के साथ पुलिस अधिकारी भी रहते हैं, जो लोगों द्वारा दिखाए गए कागज़ातों की सत्यता की जाँच करते हैं। मनसे के पुणे प्रमुख अजय शिंदे ने भी पार्टी के इस अभियान की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पार्टी लगातार ऐसे लोगों पर नज़र रखे हुए है, जो बांग्लादेशी घुसपैठियों वाले इलाक़ों में रखते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और प्रशासन ने साथ नहीं दिया तो पार्टी ‘अपने स्टाइल में’ आंदोलन करेगी।

शनिवार (फरवरी 22, 2020) की सुबह भी मनसे कार्यकर्ताओं ने पुलिस के साथ मिल कर जाँच अभियान चलाया और लोगों से पूछताछ की। जाँच के दौरान एक युवक के पास से 2 वोटर आईडी कार्ड मिले, जिसे लेकर मनसे कार्यकर्ता पुलिस स्टेशन पहुँचे।

इसी साल 9 फरवरी को मनसे ने सीएए और एनआरसी के समर्थन में विशाल रैली आयोजित की थी। राज ठाकरे ने चेतावनी दी थी कि देश को साफ़-सुथरा बनाने के लिए घुसपैठियों को खदेड़ना ज़रूरी है। उन्होंने सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ हिंसक विरोध प्रदर्शन में संलग्न उपद्रवियों को करारा जवाब देने की भी बात कही थी। 13 फरवरी को मुंबई के बोरीवली ईस्ट चीकुवाड़ी में धरना देते हुए मनसे नेताओं ने आरोप लगाया था कि इस क्षेत्र के लोगों की पोशाक एवं बोली बांग्लादेशियों जैसी है।

‘राहुल गाँधी हमारे शीर्ष नेता, पार्टी का एक बड़ा धड़ा हमेशा चाहता है कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए’

कॉन्ग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर घमासान तेज हो गया है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुत्र और कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने एक इंटरव्यू में कहा कि इतने महीनों के बाद भी पार्टी के वरिष्ठ नेता नया अध्यक्ष नहीं नियुक्त कर सके। संदीप दीक्षित के बयान को कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी समर्थन किया था।

अब इस पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के ‘शीर्ष नेता’ बने हुए हैं, पार्टी का एक बड़ा धड़ा हमेशा चाहता है कि उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए। उन्होंने ये बातें PTI के साथ हुए एक इंटरव्यू में कही।

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस संक्रमणकालीन प्रक्रिया से गुजर रही थी, लेकिन पार्टी में कोई संकट पैदा नहीं हुआ क्योंकि पार्टी सोनिया गाँधी के नेतृत्व में थी। पिछले कुछ दिनों से कॉन्ग्रेस के भीतर से शशि थरूर और संदीप दीक्षित समेत कई नेताओं द्वारा नेतृत्व का मुद्दा उठाए जाने के बाद खुर्शीद का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि बयानबाजी करने वाले नेता ज्ञान देने की बजाय अपने क्षेत्र में ध्यान दें और इस बारे में सोचें कि वे चुनावों क्यों हारे। उन्होंने कहा कि मीडिया में इस तरह का बयान देना कॉन्ग्रेस की मदद नहीं करती है।

यह पूछे जाने पर कि क्या राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस का नेतृत्व करने के लिए सबसे उपयुक्त थे, खुर्शीद ने कहा, “हम सबने यह कहा है। यह तो स्पष्ट है कि अब यह पत्थर की लकीर बन गई है। लेकिन अगर हम उन्हें हमारे नेता के रूप में स्वीकार करते हैं, तो हमें उन्हें निर्णय लेने के लिए समय देना चाहिए। हम उन पर अपने विचार क्यों थोपना चाहते हैं।”

खुर्शीद ने आगे कहा, “राहुल गाँधी कहीं नहीं जा रहे हैं। वो यहीं पर हैं। अगर आज उनके पास लेबल नहीं है तो इसलिए नहीं है, क्योंकि वो इसे लेना नहीं चाहते। हमें इसका सम्मान करना चाहिए और हमने इसका सम्मान किया है। यह मीडिया है जो इसके बारे में बात करना बंद नहीं करता है।”

खुर्शीद ने कहा कि राहुल गाँधी अभी भी शीर्ष नेता बने हुए हैं। और कोई और शीर्ष नेता नहीं है। लेकिन पार्टी में ऐसे अन्य नेता हैं, जिनका अपना महत्व है, जिन्होंने कॉन्ग्रेस पार्टी में अपना योगदान दिया है। उन्होंने कहा कॉन्ग्रेस का विरोध करने वाली पार्टियाँ उन पर किसी और से ज्यादा हमला करती रहती हैं, यह दर्शाता है कि वह अभी भी शीर्ष नेता बने हुए हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या गाँधी परिवार कॉन्ग्रेस का केंद्र बना हुआ है, उन्होंने कहा कि यह एक सच्चाई है जिसे दूर नहीं किया जा सकता है।

‘बम बाँध कर कौन फटता है? – एयरलाइन के CEO का बयान, लिबरल्स आग बबूला

लंदन में टाइम्स न्यूज़ पेपर से बात करते हुए एयरलाइन्स रेनएयर (Ryanair) के चीफ एग्जीक्यूटिव अफसर माइकल ओ’ लियरी ने “सच को कहने की जरूरत” पर जोर देते हुआ कहा, “आज बम बाँध कर फटने वाले ज्यादातर आतंकी आखिर और किस मजहब को मानने वाले हैं? अगर इन में से ज्यादातर मुस्लिम ही हैं तो क्यों नहीं इनकी प्रोफाइलिंग की जाए?”

माइकल ओ’ लियरी ने यह बात एयरपोर्ट सुरक्षा पर टिप्पणी करते हुए टाइम्स से बातचीत में कही।

रिपोर्ट्स के अनुसार शनिवार को पब्लिश हुए इस इंटरव्यू में एयरलाइन के बॉस ने कहा, “ज्यादातर बॉम्बर्स अकेले यात्रा करने वाले मुस्लिम पुरुष ही हैं… यदि आप अपने बच्चों के साथ परिवार समेत यात्रा कर रहे हैं तो इस बात की सम्भावना बहुत कम है कि आप बम बाँध कर फटेंगे।”

58 साल के एयरलाइन चीफ ने अपने इंटरव्यू में कहा कि आप सच बोलने से इसलिए नहीं कतरा सकते हैं कि यह नस्लीय कहा जाएगा। 30 साल पहले ऐसा करने वाले आयरिश थे, आज मुस्लिम हैं, यही सच है। सीईओ ने आगे कहा, “जहाँ से खतरा है, डील वहाँ करना होगा।”

इस ‘पॉलिटिकली नॉट सो करेक्ट’ बयान पर जो बवाल होने अपेक्षित थे, वे हुए ही। लेबर पार्टी के एमपी खालिद महमूद ने अखबार से कहा,”ओ’ लियरी नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा दे रहे।”

ब्रिटिश मुस्लिम कॉउन्सिल के प्रवक्ता ने भी ओ’ लियरी पर इस्लामोफ़ोबिक होने का आरोप लगाया।


सुबह करतारपुर जाने वाला शाम तक आतंकी बनकर लौटता है, देश की सुरक्षा को खतरा: पंजाब DGP

पंजाब के डीजीपी ने करतारपुर कोरिडोर खुलने के बाद वहाँ बिना किसी वीजा के जाने वाले तीर्थ यात्रियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पंजाब के डीजीपी ने कहा है कि यहाँ से सुबह को जाने वाला व्यक्ति शाम को वहाँ से आतंकी बनकर लौटता है। यह देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंता का विषय है। वहीं डीजीपी के बयान को लेकर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बिना वीज़ा के करतारपुर में एंट्री को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एंट्री फ्री होने से सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं। डीजीपी के मुताबिक पाकिस्तान में कुछ ऐसे लोग हैं जो श्रद्धालुओं को लगातार रिझाने की कोशिश में लगे हुए हैं और यही वजह है कि इतने सालों से इस कॉरिडोर को खोला नहीं जा रहा था।

पंचकुला में इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में बोलते हुए डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कहा, “करतारपुर में ऐसी क्षमता है कि अगर आप किसी साधारण शख्स को भी सुबह भेजते हैं तो शाम तक वो ट्रेंड आतंकी के तौर पर लौटता है। आप वहाँ छह घंटे तक रहते हैं। आपको वहाँ फायरिंग रेंज तक ले जाया जा सकता है। आपको वहाँ IED बनाना भी सिखाया जा सकता है।

ये बड़ी चिंता की बात है। मैं इंटेलिजेंस ब्यूरो में 8 सालों तक रहा और इन चीजों को देखता था। हम लोग ये सोचते थे कि सुरक्षा को देखते हुए कॉरिडोर को खोलना बड़ी चुनौती होगी। लेकिन बाद में सिख समुदाय के लोगों की माँग पर इसे खोल दिया, सुरक्षा चिंताओं को हमने ठंडे बस्ते में डाल दिया। सुरक्षा को लेकर ये बड़ी चिंता की बात है।

वहीं डीजीपी के इस बयान को शिरोमणि अकाली दल के बिक्रम मजीठिया ने एक बड़ी साजिश करार दिया है।
बिक्रम मजीठिया ने कहा, “दिनकर गुप्ता का बयान पूरी तरह से अस्वीकार्य है। दिनकर का बयान हर सिख को आतंकवादी बताने की इंदिरा गाँधी की विचारधारा को आगे बढ़ा रहा है। यह एक गहरी साजिश है।”

वहीं एसएडी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी करतारपुर कोरिडोर पर पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता द्वारा दिए गए बयान की घोर निंदा की है। साथ ही पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से डीजीपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

गौरतलब है कि करतारपुर साहिब कोरिडोर को पिछले साल 9 नंवबर को गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाशोत्सव के मौके पर खोला गया था। भारत की तरफ पड़ने वाले हिस्से का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने, जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसका उद्घाटन किया था। दरअसल भारत की सीमा से करतारपुर साहिब पाकिस्तान की सीमा ने 3-4 किलोमीटर अंदर है। पिछले काफी समय से सिख समुदाय के लोग इसे वीजा मुक्त खोलने की माँग कर रहे थे। इससे पहले लोग भारत की सीमा में ही खड़े होकर दूरबीन के माध्यम से इस पवित्र स्थान का दर्शन किया करते थे।

महिला कॉन्ग्रेस नेता ने कहा – नागाओं के पास CAA के कागज़ नहीं, जो दिखाएँगे वो चलेगा? लोगों ने कहा- देख पाओगी?

शायद कॉन्ग्रेस में कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर होड़ लगी रहती है कि कौन कितना हिन्दू विरोधी बयान देकर अपने आकाओं की नजरों में आ सकता है। और हो सकता है कि कॉन्ग्रेस में तरक्की करने की यही पहली योग्यता रखी गई हो कि वह हिन्दुओं की आस्था को कितना अपमानित कर सकता है या फिर वह ‘गाली’ देने में कितना कर्मठ है।

सेकुलरिज्म का राग अलापने वाली कॉन्ग्रेस हिन्दुओं को अपमानित करने का कोई भी मौक़ा नहीं चूकती है। एक ओर जहाँ कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह अक्सर हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्द को स्थापित करने की पुरजोर मेहनत करते देखे जाते हैं वहीं अब नई पीढ़ी में भी कॉन्ग्रेस ऐसे लोगों को तैयार करते हुए देखी जा रही है। इस बार राजस्थान महिला कॉन्ग्रेस सचिव रीना मिमरोत ने ट्विटर पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ ट्ववीट करते हुए नागा साधुओं के खिलाफ अपमानजनक ट्वीट किया है।

रीमा मिमरोत ने नागरिकता कानून के लिए कागज ना होने की बात को लेकर चुटकुला बनाने की कोशिश की लेकिन वह हिन्दू नागा साधुओं को अपमानित करने का प्रयास करते नजर आ रही हैं। रीना मिमरोत ने एक ट्वीट शेयर किया- “नागा साधु भी CAA के खिलाफ, बोले हमारे पास काग़ज़ नहीं है, जो है वही दिखाएँगे, चलेगा क्या।?”

ट्ववीट में रीना मिमरोत ने भाजपा के राष्ट्रीय आईटी सेल इन चार्ज मालवीय को भी टैग है। रीना मिमरोत का यह ट्वीट दिल्ली भाजपा प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने भी शेयर किया है।

रीना मिमरोत के इस ट्वीट पर एक अन्य ट्विटर यूजर ने जवाब देते हुए लिखा है- “हमारा सवाल- तुम देख पाओगी?”

ज्ञात हो कि शरीर पर कोई कपड़ा ना पहनने के कारण शिव भक्त नागा साधु दिगंबर भी कहलाते हैं, यानी जो आकाश को ही अपना वस्त्र मानते हैं। शिव भक्त नागा कपड़ों के नाम पर पूरे शरीर पर धूनी की राख लपेटे ये साधु कुम्भ मेले में सिर्फ शाही स्नान के समय ही खुलकर श्रद्धालुओं के सामने आते हैं। आमतौर पर मीडिया से ये दूरी ही बनाए रहते हैं।

कॉन्ग्रेस नेता रीना मिमरोत सोशल मीडिया पर सस्ती लोकप्रियता के लिए पहले भी फर्जी खबरों के द्वारा घटिया और बेहद मूर्खतापूर्ण हरकतें करते हुए देखी गई है। सितंबर 2019 में भी रीना मिमरोत यूएस के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जैसे दिखने वाले किसी आदमी की महिलाओं के साथ तस्वीरें शेयर करते हुए देखी गई थी। रीना का कहना था कि यह अमेरिका का राष्ट्रपति है। साथ ही रीना ने अपने ट्वीट में लिखा था- “नागपुरिया संघियों की शाखा से ज्ञान प्राप्त कर के, अपने संस्कारों को सार्वजनिक करते अंधभक्तों के ज्येष्ठ पिताजी, जिनके प्रचार के इनके पापा लगे हैं।”