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पिछली सीट पर अकेली लड़की, कैब ड्राइवर गाड़ी चलाते-चलाते करने लगा अश्लील हरकत: पुलिस ने किया अरेस्ट

लड़कियाँ, महिलाएँ कहाँ सुरक्षित हैं? घर में, दफ्तर में, स्कूल-कॉलेज में, ट्रेन या बस में या फिर कैब में? शायद कहीं नहीं! हर जगह इन्हें सतर्क रहने की जरूरत है। भीड़-भाड़ से बचने के लिए बुक किए गए कैब में तो खासकर। क्योंकि यह पहला मामला नहीं, जब किसी लड़की को देखकर कैब ड्राइवर ने अश्लील हरकत की हो। ऐसा अक्सर कैब में सवार लड़कियों के साथ हुआ है, हो ही रहा है।

गुड़गाँव की एक लड़की के साथ कुछ ऐसा ही। लेकिन उन्होंने तत्काल उस कैब ड्राइवर के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर आरोपित कैब ड्राइवर को गिरफ्तार भी कर लिया। साथ ही पुलिस ने गाड़ी को भी जब्त कर लिया है। आरोपित की पहचान 38 वर्षीय कैब चालक सतीश शर्मा के रूप में हुई है।

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक गुड़गाँव की एक वकील युवती ने अपने मोबाइल से गुड़गाँव से दिल्ली कोर्ट के लिए कैब बुक की। जब कैब चल पड़ी तो कैब ड्राइवर ने गाड़ी में लगे शीशे की मदद से सवार युवती को घूरना शुरू कर दिया। फिर कुछ देर बाद वो अश्लील हरकतें (हस्तमैथुन) भी करने लगा। कैब ड्राइवर की इन हरकतों को देख युवती दंग रह गई। हालाँकि युवती उस समय ड्राइवर की सारी हरकतों को देखती रही और ड्राइवर को कुछ नहीं बोला, लेकिन कैब से उतरते ही युवती ने पुलिस को कॉल कर सारी बातें बताई।

इसके बाद हरकत में आई पुलिस ने गाड़ी नंबर और बुकिंग के रिकॉर्ड के जरिए आरोपित के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया। इतना ही नहीं पुलिस ने आरोपित को बीते शुक्रवार को ही गिरफ्तार भी कर लिया।

नई दिल्ली के अडिशनल डीसीपी दीपक कुमार यादव ने बताया कि पेशे से वकील और गुड़गाँव में रहने वाली 25 साल की एक युवती ने गुरुवार दोपहर दिल्ली हाई कोर्ट आने के लिए मोबाइल से कैब बुक कराई थी। युवती ने पुलिस को यह भी बताया कि ड्राइवर ने उसके साथ को छेड़खानी नहीं की।

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वेलेंटाइन-डे पर भिड़े कॉन्ग्रेसी और वामपंथी, जमकर चले लाठी-डंडे: केरल में लॉ कॉलेज के 20 छात्र घायल

केरल के एक लॉ कॉलेज में वेलेंटाइन-डे पर आयोजित कार्यक्रमों को लेकर दो गुट आमने-सामने आ गए। विवाद इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते दोने गुट हिंसक हो गए। इस हिंसक लड़ाई में 20 छात्रों के घायल होने की खबर है। इनमें से 12 घायल छात्रों को शहर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। साथ ही कानून व्यवस्था को संभालने के लिए कॉलेज में परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

घटना की सामने आई एक वीडियो में कॉलेज परिसर के अंदर मौजूद सैकड़ों छात्रों को आपस में मारते-पीटते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में दिख रहा है कि छात्र एक-दूसरे का कॉलर पकड़कर लात-घूँसे और लाठी-डंडे बरसाने में लगे हुए हैं। वहीं कुछ छात्र पीछे की ओर से पत्थर फेंकते भी देखे जा सकते हैं। नज़दीक खड़ी कॉलेज की छात्राएँ घटना को देख चीखती-चिल्लाती और वहाँ से दौड़ती हुई नजर आ रही हैं।

यह दृश्य किसी फिल्मी सीन से कम नहीं है। लेकिन यह वास्तव में हुआ है। शुक्रवार को केरल के एर्नाकुलम के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में कॉलेज यूनियन के सदस्यों ने वेलेंटाइन-डे पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किय था, जिसमें SFI के सदस्य भी शामिल थे।

इसी बीच KSU (कॉन्ग्रेस की छात्र इकाई) के सदस्यों ने भी शुक्रवार को ही कॉलेज परिसर के अंदर अलग से वेलेंटाइन-डे पर एक दूसरा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया। इसे लेकर SFI सदस्यों ने सवाल खड़ा किया कि जब छात्र संघ पूरे कॉलेज के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, तो कैंपस में दूसरा कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता क्याें? इसके बाद दोनों पक्षों में पैदा हुआ मतभेद और यह बदल गया हिंसक लड़ाई में।

खबर के मुताबिक इस घटना में 20 छात्र घायल हुए हैं। गंभीर रूप से घायल 12 छात्रों में से KSU के आठ जबकि SFI के चार सदस्य शामिल हैं। इस घटना के बाद शहर की पुलिस ने कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए कॉलेज परिसर में और आसपास के इलाके में बड़ी संख्य में पुलिस बल तैनात कर दिया है। हालाँकि इस मामले में अभी तक पुलिस में कोई रिपोर्ट दर्ज कराने जैसी खबर सामने नहीं आई है।

…वो मामला, जिससे ढाई महीने पुरानी ठाकरे सरकार संकट में: NCP और कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता हुए नाराज

एल्गार परिषद केस को लेकर राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस (NCP) के प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। बता दें कि इस मामले की जाँच अब केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई है, जिसको लेकर शरद पवार ने उद्धव ठाकरे सरकार की आलोचना की है। शरद पवार का कहना है कि कानून व्यवस्था का मामला राज्य का है और राज्य सरकार को केंद्र के ऐसे निर्णय का समर्थन नहीं करना चाहिए।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर में शरद पवार ने इस मसले पर खुलकर बात की। उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जाँच को राज्य से वापस अपने हाथ में लेने का आरोप लगाया। शरद पवार का कहना है कि भीमा कोरेगाँव मामले में महाराष्ट्र सरकार कुछ एक्शन लेने वाली थी, इसलिए केंद्र ने एल्गार परिषद के मामले को अपने हाथ में ले लिया।

एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा, “मामले की जाँच NIA को सौंपकर केंद्र सरकार ने ठीक नहीं किया और इससे भी ज्यादा गलत बात यह हुई कि राज्य सरकार ने इसका समर्थन किया।” गौरतलब है कि एनसीपी, शिवसेना के नेतृत्व वाले महा विकास आघाड़ी सरकार की सहयोगी है और इसके नेता अनिल देशमुख राज्य के गृहमंत्री हैं।

बता दें कि शरद पवार इस मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग उठा चुके थे। शिवसेना के साथ सरकार बनने के बाद इसकी संभावना भी दिखने लगी थी, मगर अचानक से महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में यू टर्न ले लिया और पुणे की कोर्ट ने मामला NIA कोर्ट के सुपुर्द कर दिया। इस कदम के बाद अब गृह मंत्री अनिल देशमुख कह रहे हैं कि इस पर आखिरी फैसला मुख्यमंत्री का ही होता है। हालाँकि एनसीपी प्रमुख इसको लेकर काफी खफा हो गए हैं।

वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता भी एल्गार परिषद केस की जाँच को लेकर अपने आलाकमान पर निशाना साध रहे हैं। कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम पहले NPR को लेकर ट्वीट करते हुए पार्टी में कनफ्यूज बताया था और फिर उसके बाद उन्होंने एल्गार परिषद केस को लेकर भी इसी तरह की कनफ्यूजन की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस को एनसीपी SIT से जाँच करवाना चाहती है। केंद्र सरकार ने इसे NIA को सौंप दी है और महाराष्ट्र के सीएम (शिवसेना) भी बीजेपी के लाइन पर चलते हुए इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। क्या दिल्ली में कॉन्ग्रेस नेतृत्व को इसकी जानकारी है?

संजय निरुपम की बातों से साफ मतलब निकलता है कि अगर उन्हें इसकी जानकारी नहीं है तो क्यों नहीं है? क्या वे सत्ता में नहीं हैं? या फिर उनका इस गठबंधन में कोई अस्तित्व ही नहीं है कि वो इन्हें कुछ बताना या फिर इस पर सलाह-मशविरा करना जरूरी नहीं समझते? और यदि कॉन्ग्रेस को इस बात की जानकारी है फिर वो गठबंधन में क्या कर रहे हैं? एक तरफ वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम NPR का विरोध करने की बात कह रहे हैं और महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने एक मई से 15 जून के बीच NPR कराने का ऐलान किया है। या तो पार्टी टोटल कनफ्यूज है या फिर अब इनकी प्रासंगिकता ही इतनी रह गई है।

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नाम बदल कर प्यार, धर्म परिवर्तन के बाद निकाह, फिर खिलाया गोमांस: शिमला से दिल्ली तक हिंदू लड़की का दर्द

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में धर्म परिवर्तन कराकर जबरन निकाह करने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक एक मुस्लिम लड़का हिंदू लड़की को नौकरी और शादी का झाँसा देकर दिल्ली ले गया। लड़की ने पुलिस को इसकी शिकायत करते हुए कहा कि लड़के ने उसका धर्म परिवर्तन कराकर जबरन उसके साथ निकाह किया। 

लड़की ने आरोप लगाया कि लड़के ने उससे अपना धर्म छुपाया था। दिल्ली ले जाने के बाद लड़के ने बताया कि वह पहले से ही शादीशुदा है और दो बच्चों का बाप है, साथ ही मुस्लिम धर्म का है। यह सुनकर लड़की ने शादी से मना कर दिया। जिसके बाद लड़के ने युवती का जबरन धर्म परिवर्तन करवा कर जोर-जबरदस्ती के साथ निकाह कर लिया। इस दौरान लड़के और उसकी बहन ने लड़की से मारपीट भी की। लड़के का नाम शामी बताया जा रहा है। 

इतना ही नहीं शामी के परिवारवालों ने पीड़िता को गोमांस भी खिलाया और औलाद प्राप्ति की नीयत से एक दिन के लिए कब्रिस्तान में भी रखा। हालाँकि पीड़िता 7 फरवरी को जैसे-तैसे लड़के के चंगुल से भाग कर शिमला अपने माता-पिता के पास पहुँची और लड़के के खिलाफ शिमला डीसी कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है।

वहीं, मामला सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद लड़की के साथ खड़ा हो गया है और मुस्लिम लड़के के खिलाफ कड़ी कारवाई करने की माँग की है। विश्व हिंदू परिषद के जिला संगठन मंत्री कुशल चंद ने कहा कि प्रदेश में बाहरी राज्यों से लोग बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन के रह रहे हैं, जो इस तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में दलित, महिला या नाबालिग का जबरन धर्मांतरण कराने पर 2 से 7 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है। अगस्त 2019 में यह कानून लाया गया। इस कानून के मुताबिक अगर कोई शख्स अपना मजहब बदलना चाहता है तो उसे कम से कम एक महीने पहले जिलाधिकारी को लिखकर देना होगा। उसे यह बताना होगा कि वह स्वेच्छा से ऐसा कर रहा है। धर्मांतरण कराने वाले पुरोहित/पादरी या किसी धर्माचार्य को भी एक महीने पहले इसकी सूचना देनी होगी।

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‘माफ़ कर दो, हम लोन माफ़ी का राहुल गाँधी वाला वादा पूरा नहीं कर पाए’

किसानों की कर्ज माफ़ी का वायदा न पूरा कर सकने के लिए कमलनाथ सरकार में मंत्री गोविन्द सिंह ने आम जनता से माफ़ी माँगी है। 2018 में हुए मध्य प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान तब के कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने सरकार बनने के 10 दिन के भीतर किसानों के 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ़ करने का वादा किया था। उन्होंने तब यह भी कहा था कि ऐसा न कर पाने की स्थिति में वो अपने मुख्यमंत्री को बदले देंगे।

सामान्य प्रशासन मंत्री गोविन्द सिंह ने राहुल गाँधी के इसी वादे को याद करते हुए, इसके पूरे न होने पर जनता से माफ़ी माँगी। हालाँकि उन्होंने इसके लिए प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि पिछली सरकार हमारे ऊपर 14,000 करोड़ रुपए का कर्जा छोड़ गई है, जिस कारण से हमारी कमलनाथ सरकार वित्तीय दबावों से जूझ रही है।

तमाम जतन के बाद मध्य प्रदेश में वापसी कर पाई कॉन्ग्रेस ने कमलनाथ के नेतृत्व में पहले चरण में कुल 7,154 करोड़ तथा दिसंबर 2019 लोन माफ़ी के दूसरे चरण में 11,675 करोड़ रुपए की कर्ज माफ़ी की गई, जिसमें से ज्यादातर किसानों पर कर्ज 50,000 रुपए से कम था जबकि वादा 2 लाख रुपए तक के कर्ज को माफ़ करने का किया गया था।

कॉन्ग्रेस सरकार की इस कर्जमाफी पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस सरकार बनने के साल भर से ज्यादा होने के बावजूद भी अब तक राहुल गाँधी द्वारा किया गया कर्जमाफी का वादा आधा ही पूरा हो सका है।

TMC विधायक अमीरुल इस्लाम अपनी ही पार्टी नेता के 2 बच्चों की करवा रहे थे किडनैपिंग! लगा गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के मुर्शिदाबाद जिले के पदाधिकारी अनारुल हक ने शुक्रवार को अपनी ही पार्टी के विधायक पर बेटों को किडनैप करने की कोशिश का आरोप लगाया। अनारूल हक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय विधायक ने उस वक्त सुबह उनके 11 वर्षीय और 14 वर्षीय बेटे को किडनैप करने की कोशिश की, जब उन दोनों को मेरा एक कर्मचारी मोटरसाइकिल से स्कूल लेकर जा रहा था। अपहरण की यह कोशिश धुलियां टाउन में हुई जहां पर अनारूल हक का परिवार रहता है।

लाइव हिंदुस्तान में छपी खबर के अनुसार हक ने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि किडनैप करने वाले उस वक्त भाग गए, जब बच्चों ने शोर मचाया। हक ने आरोप लगाया कि ये सभी छह लोग शमशेरगंज विधान सभा के तृणमूल विधायक अमीरुल इस्लाम से जुड़े हुए हैं। इस घटना के बाद हक के समर्थकों ने शमशेरगंज पुलिस स्टेशन के पास सड़क को बंद कर विरोध दर्ज कराया।

अमीरुल इस्लाम तृणमूल की यूथ विंग की जिला ईकाई के अध्यक्ष भी हैं। आरोपी विधायक ने कहा – “यह आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद है। अनारुल हक हमारी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे उनका कुछ छिपा हुआ एजेंडा है।”

अनारूल हक जो जिला परिषद के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण विभाग प्रमुख हैं, ने कहा- “मेरे दोनों बच्चों को मेरा एक कर्मचारी बाइक पर स्कूल लेकर जा रहा था। इस्लाम के छह लोग एक कार से आए और डाक बांग्लो इंटरसेक्शन के पास बाइक का रास्ता रोक दिया। उन्होंने मेरे बेटे का अपहरण की कोशिश की और कर्मचारी से कहा कि उन बच्चों को तब वापस किया जाएगा जब वे इस्लाम को दस लाख रुपए की फिरौती देंगे।”

हक ने कहा- “इस्लाम के लोग रफीकुल, नवाज, लतीफ, सैदुल और दो अन्य उस कार में सवार थे। मैंने पुलिस शिकायत दर्ज कराई है।” हक ने हालाँकि शिकायत में विधायक का नाम नहीं लिया है। जब उनसे इस विषय में सवाल किया गया तो उन्होंने इसके उत्तर में कहा – “विधायक मौका-ए-वारदात पर मौजूद नहीं थे इसलिए उनका नाम नहीं लिया गया है। लेकिन, मै जानता हूं कि इसका मास्टरमाइंड वही हैं।”

1.47 लाख करोड़ रुपए आज रात 11:59 तक चुकाओ – SC ने टेलीकॉम कंपनियों पर चलाया चाबुक

सुप्रीम कोर्ट ने आज AGR मामले में अपना फैसला सुनाते हुए टेलीकॉम कंपनियों को तगड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भारती एयरटेल और वोडाफोन जैसी कंपनियों को आज शुक्रवार रात 11.59 PM (फरवरी 14, 2020) तक पूरा बकाया चुकाने के सख्त निर्देश दिए हैं।

इसके बाद भारती एयरटेल ने शुक्रवार को दूरसंचार विभाग को 10,000 करोड़ रुपए का बकाया फरवरी 20, 2020 तक देने, और सुप्रीम कोर्ट में AGR मामले की अगली सुनवाई से पहले बाकी बकाया चुकाने की पेशकश की है। सभी 15 इकाइयों पर लाइसेंस शुल्क के रूप में 92,642 करोड़ रुपए और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के रूप में 55,054 करोड़ रुपए बकाया है। यानी, इन टेलीकॉम कंपनियों के ऊपर सरकार के 1.47 लाख करोड़ रुपए बकाया हैं। ये आदेश सर्किल के संचार लेखा नियंत्रक ने जारी किए हैं।

एयरटेल ने दूरसंचार विभाग के सदस्य को भेजे पत्र में कहा है- “माननीय उच्चतम न्यायालय के फैसले और उनके निर्देश के अनुपालन में हम फरवरी 20, 2020 तक भारती समूह की कंपनियों की ओर से 10,000 करोड़ रुपए जमा कर देंगे।” एयरटेल पर सरकार का करीब 35,586 करोड़ रुपए बकाया है, जिसमें लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क शामिल हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर माह में टेलीकॉम ऑपरेटर्स को 1.33 लाख करोड़ रुपए का बकाया चुकाने के लिए जनवरी 23, 2020 तक का समय दिया था, जो कि कब का गुजर चुका है।

टेलिकॉम कंपनियों की ओर से बरती गई लापरवाही पर केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस अरुण मिश्रा ने गुस्से में कहा कि अगर कोर्ट के आदेश की अवमानना एक डेस्क ऑफिसर तक कर रहा है, तो फिर सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दीजिए। कोर्ट ने अपने आदेशों की अवमानना पर हैरानी जताते हुए कहा- “आखिर क्या हो रहा है देश में? कोर्ट के आदेशों का पालन क्यों नहीं हो रहा?”

ज्ञात हो कि भारत के टेलीकॉम मार्केट में वोडाफोन, आइडिया, एयरटेल और रिलायंस जियो की 90% हिस्सेदारी है। एयरटेल और वोडाफोन ने अदालत के आदेश को लेकर चिंता जताते हुए कहा था कि इससे उनके सामने संकट पैदा हो जाएगा। कोर्ट के इस फैसले के चलते अब वोडाफोन, आइडिया के लिए अस्तित्व का संकट पैदा हो सकता है। पहले ही वोडाफोन और आइडिया पर 3.9 अरब रुपये का कर्ज है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उच्चतम न्यायलय ने शुक्रवार (फरवरी 14, 2020) को केस की सुनवाई करते हुए वोडाफोन, आइडिया और भारती एयरटेल को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वो 17 मार्च तक यह राशि नहीं चुकाते हैं तो यह अदालत की अवमानना होगी।

इससे पहले अदालत ने वोडोफोन, आइडिया और एयरटेल समेत टेलीकॉम कंपनियों को सरकार के 920 अरब रुपए चुकाने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछा कि एजीआर बकाए के भुगतान के फैसले को न मानने पर अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वोडाफोन, आइडिया के शेयरों में 19% की बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इस साल गत बृहस्पतिवार तक कंपनी की वैल्यूएशन में 27% की कमी आ चुकी है। वहीं, प्रतिस्पर्धी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो ने जनवरी 31, 2020 तक एजीआर से जुड़े सभी बकाया भुगतान के लिए दूरसंचार विभाग को 195 करोड़ रुपए दिया था।

टेलीकॉम कंपनियों और दूरसंचार विभाग को कारण बताओ नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दूरसंचार विभाग की भी खिंचाई की है। बकाया राशि होल्ड पर रखने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को लताड़ लगाई। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों और दूरसंचार विभाग को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऑर्डर में फरवरी 14, 2020 शुक्रवार की रात 11.59 PM से पहले बकाया रकम चुकाने को कहा है। भारती एयरटेल पर 35,586 करोड़ रुपए का बकाया है। वहीं वोडाफोन को 50,000 करोड़ रुपए 23 जनवरी से पहले चुकाना है।

‘पत्रकार’ आतंकी कर सकता है CM योगी पर हमला: खुफिया विभाग की रिपोर्ट, UP पुलिस ने जारी किया अलर्ट

खुफिया विभाग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आतंकी हमले की आशंका जताई है। साथ ही बताया गया है कि इस हमले को किसी भी वीवीआईपी कार्यक्रम में पत्रकार के द्वारा (या पत्रकार के छद्म रूप में) भी अंजाम दिया जा सकता है। इसे लेकर यूपी पुलिस ने अलर्ट जारी कर दिया है। साथ ही गोरखपुर पुलिस ने निर्णय लिया है कि जिले के पत्रकारों के लिए आई कार्ड जारी किए जाएँगे।

खुफिया विभाग ने पुलिस को जानकारी दी है कि सीएम योगी आदित्यनाथ पर गोरखपुर में या गोरखनाथ मंदिर में आतंकी हमला कर सकते हैं। यह आतंकी पत्रकार के वेष में भी हो सकते हैं। इसके बाद यूपी पुलिस गोरखपुर जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। साथ ही मामले को गंभीरता से लेते हुए गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा बड़ा दी गई है। उधर गोरखपुर पुलिस ने निर्णय लिया है कि जिले में पत्रकारों के लिए आईकार्ड जारी किए जाएँगे। वहीं पुलिस ने साफ किया है कि किसी भी मीडिया से जुड़े पत्रकार की पहले जाँच के बाद ही आईकार्ड जारी की जाएगी। साथ ही यह आईकार्ड सीएम की कवरेज के लिए मान्य होंगे।

दरअसल माना जा रहा है कि गोरखपुर में पत्रकारों का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुँचना बहुत आसान रहता है, क्योंकि सीएम योगी मंदिर में क्षेत्रीय पत्रकारों के साथ सहजता से मिलते हैं। इसीलिए आतंकी इसी का फायदा उठा सकते हैं। वहीं सीएम योगी गोरखपुर में रहने के दौरान गोरखनाथ मंदिर परिसर में जनता दरबार लगाते हैं। इस दौरान भी योगी आदित्यनाथ स्थानीय लोगों से आसानी से मुलाकात करते हैं। एडीजी जोन दावा शेरप्पा ने बताया कि पत्रकारों को असुविधा न हो और उनकी पहचान भी हो सके, इसके लिए पहचान पत्र बनवाए जा रहे हैं। जल्द ही अधिकृत पत्रकारों को फोटोयुक्त पहचान पत्र मुहैया कराए जाएँगे।

आपको बता दें कि पिछले काफी समय से हिंदूवादी संगठन और हिंदू नेता आतंकियों के निशाने पर हैं। लखनऊ में पहले हुई कमलेश तिवारी की हत्या और फिर हत्या रंजीत बच्चन की हत्या इस बात का सटीक उदाहरण है। वहीं पिछले दिनों आई खबर के मुताबिक संघ प्रमुख मोहन भागवत पर आतंकी हमले की आशंका को लेकर संघ के प्रमुख केन्दों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

‘ठीक से रहो, वर्ना औकात दिखा दूँगी’ – महिला कॉन्ग्रेस विधायक ने ट्रेनी IPS को ऐसे दी धमकी

छत्तीसगढ़ के कसडोल से कॉन्ग्रेस विधायक शकुंतला साहू और बलोदा बाजार जिले में तैनात ट्रेनी आईपीएस अंकिता शर्मा के बीच होती तीखी बहस से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। यह घटना शुक्रवार शाम की है। पूरा मामला सीमेंट फैक्ट्री में हुए हादसे के बाद विधायक के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान का है।

विधायक शकुंतला साहू और आईपीएस अंकिता शर्मा

मीडिया खबरों के अनुसार बलोदा बाजार जिले स्थित सीमेंट फैक्ट्री में हुए इस हादसे में गत बुधवार को एक मजदूर की मौत हो गई थी। जिसके परिजनों को मुआवजा दिलाने के लिए कॉन्ग्रेस विधायक शकुंतला साहू धरना दे रहीं थीं।

जानकारी के अनुसार प्रदर्शन की सूचना पा ट्रेनी आईपीएस अंकिता शर्मा मौके पर पहुँचीं हुईं थीं, जहाँ प्रशासन की उपस्थिति में मृतक के परिजनों और सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन के बीच हर्जाने पर सहमति हो गई थी। जिसके बाद परिजन अंतिम संस्कार को राजी हो वहाँ से चले गए थे लेकिन कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन जारी रहा, जो शाम होते होते उग्र हो गया।

एएनआई के अनुसार इस पर महिला आईपीएस ने प्रदर्शनकारियों को समझाते हुए, पुलिस वालों को कोई नुकसान न पहुँचाने और शांति पूर्ण प्रदर्शन करने की हिदायत दी थी। इस बात की खबर मिलते ही कॉन्ग्रेस की महिला विधायक शकुंतला साहू वहाँ पहुँच गईं, जिन्होंने आईपीएस अधिकारी को, “ठीक से रहो वर्ना औकात दिखा दूँगी” की धमकी दी।

फिर थूरे गए कन्हैया कुमार: दो हफ्ते में 8वीं बार हुआ काफिले पर हमला, बिहार के आरा में हुआ यह

देश में चल रही तमाम चर्चा से अलग जेएनयू के भूतपूर्व नेता कन्हैया कुमार को आज एक बार फिर जनता के विरोध का सामना करना पड़ा। दो सप्ताह में बिहार में कन्हैया कुमार के काफिले पर यह 8वीं बार हमला हुआ है।

शुक्रवार (फरवरी 14, 2020) को एक बार फिर कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला हुआ। दरअसल, कन्हैया कुमार बिहार में आरा के रमना मैदान जा रहे थे। इसी दौरान स्थानीय लोगों ने कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला कर दिया। हमले में कई वाहन क्षतिग्रस्त भी हो गए।

दरअसल CPI नेता कन्हैया कुमार इन दिनों नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के खिलाफ ‘जन-गण-मन यात्रा’ पर निकले हुए हैं लेकिन उन्हें लगातार विरोध का सामना करना पड़ रहा है। बिहार के जिस भी जिले में वह अब तक पहुँचे हैं, उनमें से अधिकतर जगहों पर कन्हैया कुमार के काफिले पर हमला बोला गया है।

बिहार के आरा में आज जब उनके काफिले पर हमला हुआ है तो इसमें ईंट-पत्थर इस्तेमाल किया गया जिससे उनकी गाड़ियाँ भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इससे पहले भी कन्हैया कुमार पर जमुई से नवादा जाते वक़्त उनके काफिले पर अंडे और मोबिल ऑयल फेंके गए थे। कन्हैया कुमार के समर्थकों और स्थानीय लोगों में इस बात पर झड़प भी हुई थी। हालाँकि, कन्हैया कुमार को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ था।

कन्हैया कुमार ने 30 जनवरी को यह ‘जन-गण-मन यात्रा’ शुरू की थी। एक महीने तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान कन्हैया कुमार बिहार के लगभग सभी प्रमुख शहरों में पहुँच रहे हैं। अब तक उनकी यह यात्रा 10 के आसपास शहरों में पहुँची है, जिनमें से आठ में वो अपने काफिले समेत कूटे जा चुके हैं।

हर दूसरे दिन पिट रहे हैं कन्हैया कुमार, जूता-चप्पल, अंडा, मोबिल, पत्थर… सब बरसा रहे बिहारी

कन्हैया कुमार के काफिले पर 5वीं बार हमला: फेंके गए अंडे और मोबिल, बाउंसरों ने की बदतमीजी

कन्हैया कुमार ये बि​​हारी हैं सब पबित्तर कर देंगे, मैदान से लेकर वामपं​थी प्रोपेगेंडा की दुकान तक