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औरंगजेब के छक्के छुड़ाने वाले शिवाजी का अपमान बर्दाश्त नहीं: कमलनाथ सरकार पर बरसे शिवराज

बीते दिनों मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह क्षेत्र छिंदवाड़ा में शिवाजी की प्रतिमा हटा दी गई थी। छिंदवाड़ा के सौंसर के मोहगॉंव तिराहे पर लगी इस प्रतिमा को जेसीबी से तोड़ने के मसले पर शिवसेना ने भले चुप्पी साध रखी हो, लेकिन बीजेपी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। शनिवार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुद सौंसर पहुॅंचे। उन्होंने उस जगह भूमिपूजन किया जहॉं से शिवाजी की प्रतिमा हटाई गई।

यहॉं सभा को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम ने कमलनाथ सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज का तुम अपमान करते रहो और हम चुप बैठे रहें यह हो नहीं सकता। कमलनाथ जी, जरूरत पड़ी तो अपने महापुरुषों के सम्मान में खून के बदले खून दे देंगे।” शिवराज ने कहा, “छत्रपति शिवाजी महाराज, जिन्होंने औरंगजेब के छक्के छुड़ा दिए थे, जो भारत के गौरव का प्रतीक हैं, उनका अपमान किया गया। उनकी प्रतिमा को गिराने के लिए जेसीबी मशीन। देश अपने महापुरुषों का अपमान सहन नहीं करेगा।”

शिवराज ने ट्वीट कर बताया, “छिंदवाड़ा के सौंसर में मोहगाँव चौराहे पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा की पुनर्स्थापना के लिए भूमिपूजन किया। हर देशवासी और प्रदेशवासी के लिए वह गौरव व सम्मान का प्रतीक हैं। भारत में शौर्य, साहस, पराक्रम के प्रतीक वीर शिवाजी के चरणों में नमन।”

शिवराज सिंह ने कहा, “हिन्दवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्रीय गौरव हैं और हमारी प्रेरणा के स्रोत हैं। देश के करोड़ों लोग उनको अपना आराध्य मानते हैं। ऐसे महापुरुष का अपमान यह कॉन्ग्रेस सरकार कर रही है।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “पहले तो मूर्ति गिराकर छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया गया और उसके बाद पैसों का दम्भ भरा गया! सौंसर की जनता में इतना सामर्थ्य है कि वे जनभागीदारी से प्रतिमा को ससम्मान पुनर्स्थापित कर सकें।”

बीजेपी नेता ने कहा, “छत्रपति शिवाजी देश का गौरव हैं। कॉन्ग्रेस सरकार ने उनकी मूर्ति हटाकर उनका अनादर किया है। प्रतिमा के ऊपरी हिस्से को हटाने के लिए जेसीबी का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने मूर्ति को खंडित करने की कोशिश की। महान व्यक्तित्वों का अपमान करने की कॉन्ग्रेस की परंपरा बन गई है। मध्य प्रदेश और भारत इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। छत्रपति शिवाजी का अपमान करने वालों पर जाँच होनी चाहिए।”

बता दें कि इससे पहले भी बीजेपी नेता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्र का गौरव हैं, हमारे आराध्य हैं व देश की प्रेरणा के स्रोत हैं। उनका अपमान किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। अगर आपत्ति थी तो उनकी प्रतिमा को सम्मानजनक तरीके से भी हटाया जा सकता था लेकिन यह सरकार तो महापुरुषों का अपमान करने में गर्व का अनुभव करती है।”

वहीं बीजेपी नेता मेजर सुरेंद्र पुनिया ने इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए ट्वीट किया था, “मध्य प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज, जो पूरे राष्ट्र के गौरव हैं उनकी प्रतिमा को छिन्दवाड़ा में गिरा दिया। क्या  कमलनाथ जी कभी नेहरू जी इंदिरा जी या राजीव जी की मूर्ति को इस तरह गिराएँगे ??? नहीं, तो फिर शिवाजी की क्यों? उद्धव जी, आप कॉन्ग्रेस को कुछ कहोगे?”

गौरतलब है कि जो कॉन्ग्रेस दिन रात नेहरू और गाँधी परिवार की आराधना करती रहती है और उनकी वैधानिक आलोचना तक सहन नहीं कर पाती वो कॉन्ग्रेस अक्सर महापुरुषों का अपमान करती है। वीर सावरकर पर तो राहुल गाँधी खुद कई बार अभद्र बयान दे चुके हैं। इससे पहले कमलनाथ सरकार के दौरान ही महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की मूर्ति के साथ छेड़छाड़ हुई थी।

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7 मई 2016 में छत्तीसगढ़ की रायगढ़ पुलिस को दो लाशें मिली। चेहरा बुरी तरह कुचला हुआ था। बाद में इन शवों की पहचान कल्पना दास (32) और उसकी बेटी पार्वती दास उर्फ बबली (14) के तौर पर हुई। अब इस मामले में पूर्व ओडिशा के विधायक अनूप कुमार साय की गिरफ्तारी हुई है। साय ओडिशा के ब्रजराजनगर क्षेत्र से तीन बार कॉन्ग्रेस का विधायक रह चुका है। फिलहाल वह सत्ताधारी बीजद से जुड़ा हुआ है।

रायगढ़ के एसपी ने बताया कि अपना राजनीतिक करियर बचाने के लिए साय ने महिला वकील कल्पना दास और उसकी बेटी की हत्या की थी। असल में, कल्पना के साथ पूर्व एमएलए साय लिव इन रिलेशन में थे। कल्पना उन पर लगातार शादी के लिए दबाव बना रही थी। इससे आजिज आकर उसने कल्पना और उसकी बेटी की छत्तीसगढ़ ले जाकर हत्या कर दी और इसे दुर्घटना का रूप देने का प्रयास किया गया।

पूर्व एमएलए ने पुलिस को बताया है कि कल्पना लगातार शादी और संपत्ति में हिस्से की माँग कर रही थी। हत्या वाले दिन वे उसको अर्दना स्थित साईं मंदिर शादी करने की बात कहकर लाया था। वहाँ लोहे की राड से उसने कल्पना और उसकी बेटी के सिर पर वार किया और फिर लाश की पहचान छिपाने के लिए उनके चहरे को गाड़ी से कुचल दिया।

हत्या में उसके चालक बर्मन टेप्पो भी शामिल था। वारदात में प्रयुक्त हथियार और गाड़ी अभी तक बरामद नहीं हुए हैं। दोनों के शव छत्तीसगढ़ के चक्रधर नगर क्षेत्र के संबलपुरी में मिले थे। शुरुआत में पुलिस के पास इस मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था। लेकिन डीएनए टेस्ट के बाद जैसे ही शवों की पहचान हुई पुलिस को सुराग मिलते गए। इनके सहारे जाँच आगे बढ़ी जो अनूप साय के दरवाजे पर जा पूरी हुई।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने बुधवार रात को ओडिशा के पूर्व विधायक को हिरासत में लिया। साय बीजद का ताकतवर नेता है। कॉन्ग्रेस छोड़ने के बाद उसने 2014 का चुनाव बीजद की टिकट पर लड़ा था, लेकिन हार गया। 2019 चुनावों के दौरान वह बीजद प्रमुख नवीन पटनायक की सीट बीजेपुर की कैम्पेन कमेटी का चेयरमैन था। अगस्त 2019 में उसे ओडिशा वेयरहाउस कॉर्पोरेशन का चेयरमैन बना दिया गया। मर्डर केस में गिरफ्तारी के बाद उसे बीजद और कॉर्पोरेशन की चेयरमैनशिप से हटा दिया गया है।

राज्य बीजेपी के उपाध्यक्ष ने इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि नवीन पटनायक कार्रवाई करते हैं। उन्होंने न सिर्फ राज्य में महिलाओं के खिलाफ माहौल तैयार कर दिया है, बल्कि ज्यादातर मामलों में स्त्रियों के खिलाफ हिंसा और अपराध के आरोपी उनकी ही पार्टी से डायरेक्ट जुड़े हुए निकलते हैं। इनको अंतिम क्षण तक राज्य की पुलिस बचाने का प्रयास करती है।

मृतक महिला के पूर्व पति सुनील श्रीवास्तव ने पूर्व विधायक को फाँसी देने की मांग की है। सुनील ने बताया कि उसने नवंबर 2000 में कल्पना दास के साथ प्रेम विवाह किया था। लेकिन शादी के चार साल बाद ही पारिवारिक झगड़े के चलते उन लोगों ने तलाक ले लिय। बेटी के लिए उसने कई बार कल्पना से मिलने की कोशिश की पर वह उससे बात नहीं करती थी। 2006 में उसे कल्पना और अनूप साय के बीच संबंधों की जानकारी मिली। पता चला कि साय ने कल्पना को सुंदरपदा में एक फ्लैट में रहने के लिए दिया था। उसने एक बार बेटी से मिलने की कोशिश भी की पर साय ने मिलने नहीं दिया। 

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धर्म को ‘अछूत’ मानने वाले वामपंथियों ने गंगाजल से धोई अंबेडकर प्रतिमा… गिरिराज के छूने से वो हुई थी ‘मैली’

बिहार में गंगाजल से धोकर बाबा साहब अम्बेडकर की प्रतिमा के शुद्धिकरण का एक मामला सामने आया है।
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह काम किसी और ने नहीं बल्कि बहुजन क्रांति मोर्चा, राजद और वाम दलों ने किया है।

यह मामला बिहार में बेगूसराय जिले के बलिया प्रखंड का है। यहाँ केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह द्वारा भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद विपक्षी पार्टियों ने प्रतिमा सहित पूरे मंदिर परिसर को धोकर अपना विरोध जताया। ज्ञात हो कि गिरिराज सिंह बेगूसराय लोकसभा सीट से सांसद हैं और उन्होंने CPI नेता कन्हैया कुमार को हराया था।

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के समर्थन और पुलवामा आतंकी हमले की बरसी पर पुलवामा के बलिदानी जवानों की याद में साहेबपुर कमाल से बलिया तक केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ‘भारतवंशी जागृति यात्रा’ निकाली थी। यात्रा के दौरान उन्होंने बलिया प्रखंड कार्यालय स्थित अंबेडकर पार्क में लगी भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का माल्यार्पण किया। लेकिन इसके बाद शनिवार (फरवरी 15, 2020) को बहुजन क्रांति मोर्चा, राजद (RJD) और वाम दल के कार्यकर्ताओं ने पानी से धोकर उसका शुद्धीकरण किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अंबेडकर की प्रतिमा को धोने वाले कार्यकर्ताओं ने ऐसा करने के पीछे तर्क देते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह नफरत की राजनीति करते हैं और बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके उन्होंने बाबा साहब की मूर्ति को अशुद्ध किया है।

Oops Sorry शेखर गुप्ता! वित्त मंत्री ने बताया द प्रिंट की रिपोर्ट को फर्जी, कहा- नहीं दिए ऐसे बयान

सरकार और उसके मंत्रालयों के खिलाफ आम जनता तक सबसे ज्यादा गुमराह करने का काम आज के समय में यदि कोई कर रहा है तो वह हमारे देश की कथित लिबरल मीडिया ही है। यही वजह है कि आम लोग नागरिकता संशोधन कानून से लेकर आधार कार्ड जैसे विषयों पर भी अक्सर गुमराह ही नजर आते हैं। और इसमें सबसे बड़ा योगदान होता है अपने मन से सिर्फ सत्ता के विरोध के लिए काल्पनिक, बेबुनियाद दावे करने वाले मीडिया गिरोहों का।

शेखर गुप्ता के प्रोपेगंडा वेबसाइट ‘दी प्रिंट’ ने फरवरी 14, 2020 को ही एक ऐसी खबर प्रकाशित की, जिसने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस पर स्पष्टीकरण देने पर मजबूर कर दिया। दरअसल, दी प्रिंट ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सम्बन्धित एक ऐसी रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसे वित्त मंत्री ने एकदम मजाक और काल्पनिक कहते हुए कहा कि उन्होंने कभी इस तरह के कोई बयान दिए ही नहीं।

इसके बाद ट्विटर पर ही ‘दी प्रिंट’ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को जवाब देते हुए कहा कि वो इस रिपोर्ट को एक बार फिर जाँचेंगे कि वास्तव में ऐसा कुछ हुआ भी है या नहीं। इसके बाद दी प्रिंट द्वारा इस पूरी रिपोर्ट की काया ही पलट दी गई और रिपोर्ट के ‘सत्यापित होने तक’ छुपा दिया।

दी प्रिंट की एक रिपोर्ट का शीर्षक था- “Why Nirmala Sitharaman doesn’t understand ‘Bombay people’” जिसका हिंदी अर्थ है – “निर्मला सीतारमण बॉम्बे के लोगों को क्यों नहीं समझती हैं?”

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी प्रिंट की यह खबर ट्वीट करते हुए पुछा- “क्या यह कोई मजाक है? अगर यह मजाक न होकर गंभीर है तो फिर यह बदनाम करने के लिए और दुर्भावनापूर्ण है क्योंकि इस रिपोर्ट में जो कुछ मेरे हवाले से लिखा गया है वो शब्द मेरे नहीं हैं।”

‘दी प्रिंट’ की इस खबर में बताया गया था कि वित्त मंत्री ने मुंबई के उद्योगपतियों का अपमान किया है। इसके बाद वित्त मंत्री के व्यवहार पर ज्ञान देते हुए दी प्रिंट ने लिखा है कि निर्मला सीतारमण लोगों की खिंचाई करने के लिए जानी जाती हैं, खासतौर पर जब वो किसी मुद्दे पर हाशिए पर हों।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बजट के बाद मुंबई में शीर्ष व्यवसायियों के साथ एक मीटिंग के दौरान उनसे डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स सम्बन्धी सवाल पूछे गए। रिपोर्ट में बताया गया था कि इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वहीं मौजूद इन्वेस्टमेंट बैंकिंग के एक नामी व्यक्ति को अपमानित करते हुए कहा- “मैंने तुम लोगों के लिए सब कुछ किया, इससे ज्यादा तुम लोग क्या चाहते हो?”

‘दी प्रिंट’ ने लिखा है कि वित्त मंत्री यहीं पर नहीं रुकीं और उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से कहा- “मैं बॉम्बे के लोगों को नहीं समझ पाती हूँ। हमने सब कुछ कर रखा है लेकिन यह तीसरे क्वार्टर की विकास दर अभी भी 4.3% पर ही अटकी हुई है। तुम लोग कर क्या रहे हो?”

मीडिया गिरोह की ‘बेस्ट कोटेशंस’ के प्रति लगाव, चाहे वो फैज़ हो या फिर कोई विदेशी द्वारा कही गई हो, कोई नई बात नहीं है। वित्त मंत्री द्वारा कहे गए इस (दी प्रिंट के अनुसार) घटना पर दी प्रिंट ने यूएस के एक पूर्व राष्ट्रपति जॉन कैनेडी की एक उक्ति को भी लिखा है- ““Ask not what your country can do for you…” यानी, यह मत पूछिए कि आपका देश क्या कर सकता है?

‘दी प्रिंट’ की इस खबर का स्क्रीनशॉट आप यहाँ पढ़ सकते हैं, यह अब उनकी वेबसाइट पर मौजूद नहीं है –

लेकिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की आपत्ति के बाद ‘दी प्रिंट’ ने रिपोर्ट के इस हिस्से को फ़ौरन एडिट करते हुए काट दिया और अंत में एक अस्वीकरण के साथ लिखा है- “इस खबर के सत्यापन तक इसे वापस ले लिया गया है।”

जब मीडिया ही सूचना की जगह अफवाह का स्रोत बन जाए

हम एक ऐसे समय में रह रहे हैं, जब हमारे ‘मीडिया प्रमुख’ खबर छापने के बाद उसके सत्यापन के लिए दौड़ते हैं। ऐसा करने वालों में ‘दी प्रिंट’ अकेला महारथी नहीं है, बल्कि इसके जैसे ही और कई बार कहीं बड़े मीडिया प्रमुखों की घातक टुकड़ियाँ यही काम सदियों से करती आ रही है।

जब मीडिया ही, जो कि लोकत्नत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, सूचनाओं के बजाए अफवाहों का प्रमुख स्रोत बन जाए तो फिर क्या किया जा सकता है? वामपंथी मीडिया का यह पुराना शगल है। रवीश कुमार जैसे पत्रकार यह कहते हुए भी सुने गए हैं कि मीडिया द्वारा लगाए गए आरोपों पर मानहानि नहीं की जानी चाहिए। रवीश कुमार, मीडिया के प्रोपेगेंडा प्रमुख, इस बात के समर्थन में कहते हैं कि मानहानी मीडिया की स्वतन्त्रता में बाधक है।

वास्तव में मनगढ़ंत आरोपों के खिलाफ मानहानि मीडिया की स्वतन्त्रता नहीं बल्कि कुछ चुनिंदा पत्रकारों की चुगलखोरी की स्वतन्त्रता में बाधक है। लेकिन गद्य और पद्य शैली में प्रोपेगेंडा को पत्रकारिता नाम देने वाले कभी भी अपनी स्पष्ट जुबान से यह स्वीकार नहीं करना चाहेंगे कि उन्हें पत्रकारिता नहीं बल्कि राजनीतिक द्वेष के लिए चुगलखोरी की आजादी चाहिए।

हर दूसरे दिन मीडिया ऐसी सैकड़ों खबरें प्रकाशित कर रहा होता है, जिनकी प्रमाणिकता हमेशा संदेहास्पद ही होती है और इसके कई सबूत भी मौजूद हैं। लेकिन भारतीय मीडिया यदि ऐसे हवा में तीर छोड़ना बंद कर दे तो फिर वह सनसनी कैसे कर सकेगा?

फिलहाल, ‘दी प्रिंट’ ने अपने आर्टिकल को छुपा दिया है। लगता नहीं है कि सत्यापन जैसी कोई चीज बाहर आ सकेगी। यह जरूर हो सकता है कि स्पष्टीकरण के बदले सरकार और मंत्रालय पर नया कोई मनगढ़ंत आरोप लगाते हुए ‘दी प्रिंट’ की कोई नई रिपोर्ट प्रकाशित हो जाए।

‘द प्रिंट’ का नया फ़र्ज़ीवाड़ा: ऐसी कोई ‘IB रिपोर्ट’ मौजूद नहीं है, जो संस्थानों के मोदी-विरोधी होने की बात करती हो

‘पगला गए हो क्या?’ दि प्रिंट के शिवम विज ने पहले फ़र्ज़ी बयान छापा, पकड़े जाने पर की बेहूदगी

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौड़ ने ‘द प्रिंट’ के भ्रामक लेख का दिया करारा जवाब

16 फरवरी को रामलीला मैदान में हाजिरी लगाएँगे मास्टर साहब: शपथ ग्रहण में शिक्षकों को बुलाने पर विवाद

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली शानदार जीत के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 16 फरवरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इसके लिए आम आदमी पार्टी (AAP) की तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी है। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन रामलीला मैदान में होगा। कई बड़े नेताओं को न्योता भेजा गया है। साथ ही शपथ ग्रहण समारोह में सरकारी स्कूल के शिक्षकों को भी शामिल होने का आदेश दिया गया है।

इसको लेकर दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें सभी स्कूलों को आदेश दिया गया है कि वे अपने यहाँ से 20 शिक्षकों को शपथ ग्रहण स्थल पर भेजें। सर्कुलर जारी होते ही भाजपा और कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल सरकार पर हमला बोला है।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने इस पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, “सरकार के शपथ ग्रहण में टीचर्स आए ये अच्छी बात है। लेकिन सरकारी ऑर्डर निकालकर जबरदस्ती टीचर्स को लाया जाए। टीचर्स की हाजिरी रामलीला मैदान में लगाई जाए। ये एक गलत परंपरा की शुरुआत है। शपथ ग्रहण को ऐसे ‘अनावश्यक ग्रहणों’ से मुक्त रखना चाहिए।”

बीजेपी नेता मेजर सुरेंद्र पुनिया ने ट्वीट करते हुए लिखा, “तुग़लकी फ़रमान। केजरीवाल सरकार ने दिल्ली के शिक्षकों को आदेश दिया कि वो उनके शपथ ग्रहण में पहुँचे वरना…लोकतंत्र का यह कौन सा मॉडल है? सरकारी खर्चे/तानाशाही आदेश से भीड़ इकट्ठी की जाएगी? मीडिया इस शिक्षा क्रांति पर बोलेगी? ज़ोर ज़बर्दस्ती या तो तानाशाह करते हैं या फिर गुण्डे।”

बीजेपी विधायक विजेंदर गुप्ता ने इस बाबत अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में उन्होंने शिक्षकों को रामलीला मैदान में बुलाए जाने वाले ऑर्डर को तुगलकी फरमान बताया है। गुप्ता ने यह ऑर्डर वापस लेने की माँग की है।

वहीं कॉन्ग्रेस प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि शपथ ग्रहण में भीड़ जुटाने के लिए शक्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है। शर्मा ने उपराज्यपाल से इसकी जाँच कराने की माँग की है। उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 70 में से 62 सीटें जीती हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री की सलाह पर 6 विधायकों को मंत्री भी नियुक्त किया है। 16 फरवरी को अरविंद केजरीवाल के साथ जो 6 मंत्री भी शपथ लेंगे। ये हैं- मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, गोपाल राय, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन और राजेंद्र गौतम।

दिल्ली में शिक्षा क्रांति के दावे ऊँचे, हकीकत फीकी: 500 स्कूल नहीं खुले, कमरे गिनवा रही केजरीवाल सरकार

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राहुल गाँधी ने कहा था- मंदिर जाने वाले लड़की छेड़ते हैं, कॉन्ग्रेसी मंत्री ने कहा- तीर्थ पर घूमने जाते हैं बुजुर्ग

मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार ने 2012 में तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत बुजुर्गों को सरकारी खर्चे पर धार्मिक यात्राएँ कराई जाती है। लेकिन, कमलनाथ के नेतृत्व में चल ही कॉन्ग्रेस की मौजूदा सरकार ने हजारों बुजुर्गों की यात्रा को अचानक रद्द कर दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बुजुर्गों को इस योजना के तहत वैष्णो देवी, रामेश्वरम्, तिरुपति, काशी और द्वारका धाम की यात्रा कराने का कार्यक्रम बना था। लेकिन, दो दिन पहले ट्रेनों को निरस्त कर दिया गया। इनमें 15 फरवरी को भोपाल से वैष्णोदेवी जाने वाली तीर्थयात्रियों की विशेष ट्रेन भी शामिल है।

कमलनाथ सरकार के एक मंत्री ने इस योजना पर सवाल खड़े करते हुए इसे बंद करने की वकालत की है। मंत्री ने कहा है कि सरकार का काम लोगों को तीर्थ यात्रा कराना नहीं है। इतना ही नहीं मंत्री महोदय के अनुसार आईफा अवॉर्ड जैसे आयोजनों से प्रदेश का विकास होगा।

गौरतलब है कि तीर्थयात्रा के लिए बुक की गई पाँच ट्रेनों में से पहली ट्रेन को 15 फरवरी को 800 यात्रियों के साथ भोपाल से वैष्णो देवी के लिए रवाना होनी थी। इसके लिए चुने गए यात्रियों ने सामान वगैरह की पेकिंग के साथ सभी जरूरी तैयारियाँ कर ली थी। लेकिन 12 फरवरी को अचानक सरकार ने आख़िरी समय में इस यात्रा को रद्द कर दिया। इसके बाद से तीर्थ यात्रा को लेकर उत्साहित बुजुर्ग मायूस हैं।

कमलनाथ सरकार के सहकारिता मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता गोविंद सिंह ने इस योजना को ही फालतू बताया है। उन्होंने तीर्थ स्थल जाने वालों के श्रद्धा पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा, “तीर्थ दर्शन योजना में लोग भक्ति भाव से नहीं, बल्कि घूमने-फिरने के लिए जाते हैं। खुद के मेहनत के रुपयों से भगवान के दर पर जाएँगे तो उनके जीवन में खुशहाली आएगी। ऐसी योजनाएँ विकास के बजाय सिर्फ वोटरों को लुभाने के लिए शुरू की गई हैं। अब उन्हें बंद किया जाना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी भी कह चुके हैं कि मंदिर जाने वाले लोग ही छेड़खानी करते हैं। राहुल ने यह बयान 2014 में दिया था। दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राजीव गॉंधी की 70वीं जयंती पर महिला कॉन्ग्रेस के अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, “जो लोग मंदिर जाते हैं, मंदिर में जाकर मत्था टेकते हैं और जो आपको मॉं-बहन कहते हैं वही लोग आपको बस में छेड़ते हैं।”

साथ ही मंत्री गोविंद सिंह ने आईफा अवॉर्ड पर खर्च होने वाली राशि को लेकर कहा कि इसके जरिए प्रदेश के पर्यटन स्थलों को एक अलग पहचान मिलेगी और हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। आईफा अवॉर्ड प्रदेश के विकास के लिए जरूरी है।

ट्रेनें रद्द किए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कमलनाथ सरकार की आलोचना की है। शिवराज सिंह ने ट्वीट कर कहा है, “भावनात्मक संबंधों को समझना कॉन्ग्रेस के बस की बात नहीं है। बुज़ुर्गों को तीर्थयात्रा कराना पवित्र और पुनीत कार्य है, ऐसे अच्छे कार्यों को कॉन्ग्रेस सरकार बंद कर रही है।”

तीर्थ दर्शन योजना के तहत 4000 बुजुर्गों को वैष्णो देवी, काशी, द्वारका और रामेश्वरम की यात्रा करनी थी। ऐसा पहली बार हुआ है जब इस यात्रा को आख़िरी समय में रद्द किया गया है। इस यात्रा को रद्द करने के पीछे राज्य के लगातार बढ़ते वित्तीय संकट को माना जा रहा है। साथ ही सरकार IRCTC के 17 करोड़ रुपए का भुगतान अभी तक नहीं कर पाई है।

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सिर्फ टेलिकॉम ही नहीं, इन सरकारी कंपनियों को भी चुकाना होगा AGR बकाया: SC की फटकार के बाद सब लाइन में

सुप्रीम कोर्ट ने AGR बकाए (Adjusted Gross Revenue dues) का भुगतान करने के आदेश का अनुपालन न करने पर शुक्रवार (फरवरी 14, 2020) को दूरसंचार कंपनियों को फटकार लगाई। उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार एवं अन्य कंपनियों के निदेशकों, प्रबंध निदेशकों से यह बताने को कहा कि AGR बकाए के भुगतान के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने को लेकर उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

इसके बाद दूरसंचार विभाग ने शुक्रवार की आधी रात को निजी दूरसंचार कंपनियों के लिए समय सीमा तय की और साथ ही कुछ बड़े पब्लिक सेक्टरों को भी सरकार को 4 लाख करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। जानकारी के मुताबिक इन टेलीकॉम कंपनियों ने पिछले चार महीनों से एक पैसा भी नहीं चुकाया था। जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कंपनी के साथ-साथ उनके निदेशकों को अवमानना नोटिस जारी किया और सुनवाई की अगली तारीख 17 मार्च तय की। इस दौरान बेंच ने कहा, “उस समय तक राशि निश्चित रूप से जमा हो जानी चाहिए, वरना फिर हम आपको दिखाएँगे कि हम कितने कठोर हो सकते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट की इस फटकार ने कुछ घंटों के भीतर अपना असर दिखा दिया। पब्लिक टेलीकॉम कंपनियों ने जल्द ही रकम चुकाने की बात कही। एयरटेल, जिसके ऊपर 35,000 करोड़ रुपए का बकाया है, उसने कहा कि वो 20 फरवरी तक 10,000 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान कर देगी और बाकी की बकाया राशि कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले यानी कि 17 मार्च से पहले कर देगी। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि टाटा भी कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले बकाया राशि 14,000 करोड़ रुपए चुका देगी। हालाँकि घाटे में चल रही टाटा टेलीसर्विसेज को 13,823 करोड़ रुपए के AGR बकाया के भुगतान के लिए पेरेंट कंपनी टाटा संस पर निर्भर रहना होगा। बता दें कि टाटा ने अपना टेलीकॉम बिजनेस एयरटेल को बेच दिया है।

वहीं वोडाफोन आइडिया पर 53,000 करोड़ रुपए का बकाया है। बताया जा रहा है कि कंपनी के मालिक कुमार मंगलम बिरला ने दूरसंचार मंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाया था। मगर अब इस बात में संशय है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार इसमें कोई दखलअंदाज़ी करेगी या नहीं। 

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कड़ी प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि यह दूरसंचार विभाग के ‘डेस्क अधिकारी’ का दुस्साहस है कि उसने न्यायालय के आदेश को काटने की कोशिश की। न्यायालय ने भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को सरकार का सांविधिक बकाया 23 जनवरी तक चुकाने का आदेश दिया था। लेकिन डेस्क अधिकारी ने 23 जनवरी को ही उपरोक्त आदेश पारित किया, जिसे लेकर न्यायालय ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की भी बात कही गई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने फटकार लगाते हुए कहा, “क्या यह सर्वोच्च न्यायालय के लिए सम्मान है? एक डेस्क अधिकारी कैसे कह सकता है कि हमारे आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई? अगर आपके मन में कोर्ट के आदेश के प्रति यही सम्मान है तो फिर बंद कर दीजिए सुप्रीम कोर्ट… देश में कानून का कोई राज नहीं है। इससे तो अच्छा है कि देश ही छोड़ दिया जाए। ऐसा लगता है कि मुझे इस देश में इस तरह काम नहीं करना चाहिए। मैं ये बातें जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ। क्या सुप्रीम कोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है? ये मनी पावर का परिणाम है। ये इस देश में क्या हो रहा है?”

आगे बेंच ने सॉलिसीटर तुषार मेहता से कहा, “वह (डीओटी अधिकारी) कहते हैं कि अगले आदेश तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाएगी। उसने हमारे आदेश को रद्द कर दिया है। क्या आपने उसे उस आदेश को वापस लेने के लिए कहा है? इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है और हम इस तरह से कार्य नहीं कर सकते हैं।”

जिसके बाद तुषार मेहता ने अदालत से माफी माँगी और आश्वासन दिया कि आदेश को वापस ले लिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद शाम में दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम और पब्लिक सेक्टर कंपनियों के दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। बता दें कि पब्लिक सेक्टर की जिन कंपनियों पर भारी मात्रा में बकाया है, उनमें गैस ऑथोरिटी ऑफ इंडिया, ऑयल इंडिया, पावरग्रिड कॉर्पोरेशन और दिल्ली मेट्रो शामिल हैं। बता दें कि GAIL के ऊपर 1,72,656 करोड़ रुपए का बकाया है, तो वहीं ऑयल इंडिया के ऊपर 48,489 करोड़ रुपए का बकाया है। इसके साथ ही पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन को 22,063 करोड़ राशि का भुगतान करना होगा।

‘मैं कसम खाती हूँ कि मैं प्रेम में नहीं पड़ूँगी और ना ही प्रेम विवाह करूँगी’ – पंकजा मुंडे ने जताई आपत्ति, देखें Video

वैलेंटाइन डे यानी 14 फरवरी को महाराष्ट्र के अमरावती जिले के महिला व कला महाविद्यालय की छात्राओं ने एक बेतुकी शपथ ली। वैलेंटाइन डे के दिन छात्राओं ने अपने प्रोफेसर के सामने यह शपथ ली कि वह किसी लड़के से प्रेम नहीं करेंगी। इसके साथ ही वह प्रेम विवाह भी नहीं करेंगी।

छात्राओं को ये शपथ उस वक्त दिलाई गई, जब वो एनएसएस कैंप में हिस्सा लेने के लिए गई थी। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि एक पुरुष और कुछ महिला टीचर छात्राओं को लव मैरिज न करने की शपथ दिला रहे हैं। बता दें कि इस कॉलेज को विदर्भ यूथ वेलफ़ेयर सोसायटी नाम की संस्था द्वारा चलाया जाता है। इसके स्थापना कॉन्ग्रेस नेता और राज्य सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री रहे स्वर्गीय राम मेघे ने की थी।

स्कूल की इस हरकत के खिलाफ बीजेपी नेता और राज्य की पूर्व महिला एवं बाल कल्याण मंत्री पंकजा मुंडे ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने ट्वीट कर पूछा कि सिर्फ लड़कियाँ ही क्यों इस तरह की शपथ लेंगी? उन्होंने लिखा, “ये निहायत ही बकवास भरा है। चिंतूर के एक स्कूल में छात्राओं से कहा जा रहा है वो किसी से प्यार न करें और लव मैरिज भी न करें। ये कसम सिर्फ छात्राएँ ही क्यों लें?”

पंकजा ने आगे कहा, “लड़कियों के बजाय लड़कों को शपथ दिलाएँ कि वो एकतरफा प्यार में लड़की पर तेजाब नहीं फेंकेंगे और उसे जिंदा नहीं जलाएँगे। उन्हें शपथ लेना चाहिए कि वो कभी भी लड़कियों को गंदी नजर से नहीं देखेंगे और वो कभी भी किसी के साथ ऐसा नहीं होने देंगे।”

बता दें कि शपथ ग्रहण करते वक्त छात्राओं ने कहा, “मैं कसम खाती हूँ कि मैं अपने माता-पिता में पूरा विश्वास रखूँगी। मैं प्रेम में नहीं पड़ूँगी और ना ही प्रेम विवाह करूँगी। इसके साथ ही मैं दहेज के लिए भी शादी नहीं करूँगी, यदि मेरे माता-पिता सामाजिक बंधनों के चलते मेरी शादी में दहेज देते हैं तो भविष्य में मैं जब माँ बनूँगी तो ना तो मैं अपने बेटे या बेटी की शादी में दहेज दूँगी और ना ही लूँगी। मैं यह शपथ एक मजबूत और स्वस्थ भारत के लिए ले रही हूँ।”

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पूर्व IAS शाह फैसल पर और कसा शिकंजा, अब PSA के तहत मुकदमा दर्ज

पूर्व IAS अधिकारी रहे शाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत कार्रवाई की है। सरकार द्वारा राज्य से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद 14 अगस्त को पुलिस ने शाह फैसल को दिल्ली के एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। इसके बाद फैसल को श्रीनगर के एमएलए हॉस्टल में रखा गया था।

पूर्व IAS शाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अब PSA लगाया है। इसके तहत शाह फैसल के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। हालाँकि अभी तक यह साफ़ नहीं हुआ है कि फैसल को कहाँ रखा जाएगा। बता दें कि IAS की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए शाह फैसल ने जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) का गठन किया, जिसके वह अध्यक्ष भी हैं।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद फैसल ने एक ट्वीट किया था, “राजनीतिक अधिकारों को फिर से पाने के लिए कश्मीर को लंबे, निरंतर और अहिंसक राजनीतिक आंदोलन की जरूरत है।” इसके अलावा शाह फैसल ने एक फेसबुक पोस्ट में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए लिखा था, “घाटी में पुलिस की कार्रवाई से करीब 80 लाख लोग बंदी के समान रहने को मजबूर हो गए हैं।”

शाह फैसल से पहले राज्य के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला, पीडीपी नेता और पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती, अली मोहम्मद सागर, सरताज मदनी, हिलाल लोन और नईम अख्तर पर भी पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। आपको बता दें कि पिछले साल 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर देने के बाद, वहाँ के हालातों को संभालने के लिए घाटी के तमाम दिग्गज नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया था।

आपको बता दें कि पब्लिक सेफ्टी एक्ट जम्मू कश्मीर का एक विशेष कानून है। इसे 1978 में फारूक अब्दुल्ला के पिता शेख अब्दुल्ला ने ही राज्य में लागू किया था। इस कानून के तहत किसी भी शख्स को अचानक से हिरासत में लिया जा सकता है। इतना ही नहीं इस कानून के प्रावधानों के मुताबिक राज्य सरकार किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ बिना केस चलाए उसे दो साल तक जेल में रख सकती है।

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हिंदू रहीं महिला के शव को दफनाने जा रहा था ईसाई परिवार, गिरिराज सिंह ने हाथ जोड़कर कराया दाह संस्‍कार

केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह ने अपने संसदीय क्षेत्र में हिंदू से ईसाई बने परिवार की महिला का अंतिम संस्‍कार हिंदू रीति-रिवाज से कराकर एक विवाद का शांतिपूर्ण तरीके से समाधान कराया। इस दौरान गिर‍िराज सिंह ने हाथ जोड़कर महिला के परिवार से अपील की कि वे हिंदू रही महिला का दाह संस्‍कार करें। केंद्रीय मंत्री की अपील को परिवार ने मान लिया और महिला का सिमरिया घाट पर दाह संस्‍कार किया गया।

इस मौके पर मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि कोई लोभ देकर धर्म का परिवर्तन न करे। उन्‍होंने कहा, “कोई लोभ देकर किसी का धर्म परिवर्तन न करे। मैं हाथ जोड़कर विनती करता हूँ कि धर्म से बड़ा कोई चीज नहीं होता है। किसी धर्म में चचेरे भाई-बहन में शादी होता है। मगर हमारे धर्म में ऐसा नहीं होता है… यही मेरा धर्म है। आदमी हम भी हैं और वे भी हैं। हम अपने धर्म की रक्षा करें। मैं आप लोगों से अपील करता हूँ कि धर्म से बड़ा कुछ नहीं है।”

दरअसल, एक हिंदू महिला के शव को उसके परिवार वाले ईसाई धर्म के रीति रिवाज मुताबिक दफनाने ले जा रहे थे। इसकी खबर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को लग गई। बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुँच गए और महिला को दफनाने का विरोध किया। उन्होंने महिला का दाह-संस्कार हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार करने की विनती की, लेकिन वे नहीं माने। जिसके बाद बजरंग दल के कार्यकर्ता गिर‍िराज सिंह के पास गए। गिरिराज सिंह के समझाने पर महिला के परिवार वाले मान गए और शव का दाह संस्‍कार किया गया। 

इस दौरान गिरिराज सिंह ने धर्म परिवर्तन के खिलाफ सख्त कानून बनाने की माँग की, ताकि प्रलोभन देकर किसी का धर्म परिवर्तन न किया जा सके। उन्होंने दावा किया कि बिहार में हिंदुओं को जबरन ईसाई बनाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों खबर आई थी कि बिहार के नवादा जिले के 15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया है। नवादा के ताराटाड टोला में अब हिदू धर्म को मानने वाले महज तीन परिवार ही बचे हैं, लेकिन उन पर भी धर्मातरण के लिए दबाव है।

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