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इंडिया टुडे का एक और झूठ: ‘जेम्स बॉन्ड पत्रकार’ ने लेफ्टिस्ट गुंडों को बचाने के लिए दिया JNU-सर्वर पर ‘ज्ञान’

ऐसा लगता है जैसे इंडिया टुडे समूह ने ‘सोशल मीडिया ट्रोल्स’ के साथ-साथ सामान्य विज्ञान के खिलाफ भी जंग छेड़ दी है। JNU में 5 जनवरी को हुई हिंसा के बाद इंडिया टुडे समूह रोजाना अपनी सहूलियत के अनुसार इस घटना को नया रंग देने की कोशिश करता हुआ नजर आ रहा है। दरअसल दिल्ली पुलिस द्वारा हिंसा में शामिल JNU के लेफ्टिस्ट गुंडों की पहचान करने के तुरंत बाद ही इंडिया टुडे समूह अपने कुछ खोजी वीडियोज़ लेकर सामने आया। लेकिन इन वीडियोज की विश्वसनीयता इसके फैक्ट चेक में ही संदेह के घेरे में आ गई।

फिर भी इंडिया टुडे समूह के ही जर्नलिस्ट और कुछ अन्य लोग इस वीडियो पर सफाई देते हुए नजर आ रहे हैं। इंडिया टुडे द्वारा यहाँ तक भी स्पष्टीकरण दिए जा रहे हैं कि स्टिंग जिस कैमरे से किया गया, उसकी सेटिंग खराब थी

रविवार (जनवरी 12, 2019) की सुबह ही इंडिया टुडे समूह JNU में हुई हिंसा से जुड़ा हुआ एक नया प्रकरण सामने आया है। इस प्रकरण में इंडिया टुडे की ही एक जर्नलिस्ट ने लेफ्ट विंग की गुंडई को बचाने के लिए अपनी विज्ञान और प्रौद्योगिकी में कम समझ का परिचय दिया है।

तनुश्री पांडेय, जो कि इंडिया टुडे समूह की ही पत्रकार हैं, एक ट्वीट के साथ रविवार सुबह की शुरुआत करते हुए दावा करती हैं कि उन्होंने सूचना एवं संचार के सर्वर से भेजे गए ई-मेल्स को निकाल लिया है। ज्ञात हो कि JNU प्रशासन पहले ही बता चुका है कि यह सर्वर 4 जनवरी को लेफ्टिस्ट गुंडों द्वारा तोड़ दिया गया था। तनुश्री ने यह दावा करते हुए कि यह ई-मेल्स JNU प्रशासन द्वारा भेजी गईं थीं, इशारा किया है कि सर्वर नहीं टूटे थे, जैसा कि दिल्ली पुलिस द्वारा बताया गया है।

हालाँकि, तनुश्री पांडेय जिन्हें कि इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि ई-मेल्स किस तरह से काम करती है, का कहना है कि वह ई-मेल्स उसी सर्वर से भेजी गई होंगी। अपने ट्वीट में तनुश्री ने लिखा है- “इंडिया टुडे ने संचार एवं सूचना के सर्वर से भेजी गई उन ई-मेल्स को एक्सेस कर लिया है, जिसे JNU प्रशासन ने लेफ्टिस्ट गुंडों द्वारा तोड़े जाने का दावा किया था। प्रशासन (JNU) ने कहा था कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया सर्वर को नुकसान पहुँचाए जाने के कारण बाधित रही। तो फिर यह (ई) मेल्स कैसे गईं?”

तनुश्री के इस ट्वीट के तुरंत बाद NDTV के एक पत्रकार अरविन्द गुणसेखर ने भी ट्वीट कर के सवाल किया कि आखिर ये ई-मेल्स किस तरह से गईं अगर सर्वर टूट चुका था? गुणसेखर स्वयं JNU के पूर्व छात्र रह चुके हैं, इसलिए कम से कम उनसे तो यह उम्मीद की जा सकती थी कि उन्हें सर्वर और ई-मेल्स के बीच के सामान्य ज्ञान की समझ होगी।

वास्तव में, इंडिया टुडे की पत्रकार तनुश्री के इस ट्वीट के दो उद्देश्य हैं- पहला, यह साबित करना कि JNU के सर्वर को लेफ्टिस्ट छात्रों द्वारा नहीं तोड़ा गया और दूसरा, दिल्ली पुलिस के दावे को झूठा साबित करना। यह ई-मेल्स JNU प्रशासन द्वारा 5 जनवरी 2020 को भेजी गईं थीं, यानी JNU में हुई तोड़-फोड़ के अगले दिन।

तनुश्री के दावों से यह पता चलता है कि उन्हें वेब सर्वर (Web Server) और मेल सर्वर (Mail Server) के बीच का अंतर स्पष्ट नहीं है। दरअसल, JNU प्रशासन दैनिक गतिविधियों के लिए कम से कम दो सर्वर इस्तेमाल कर रहा है। जैसे कि- CCTV, वेबसाइट्स, WiFi इत्यादि। हो सकता है कि JNU प्रशासन ने ई-मेल सेवा के लिए कोई थर्ड-पार्टी सर्वर भी लगाया हो, जो कि आवश्यक रूप से कैम्पस के ही भीतर मौजूद हो, ऐसा नहीं है।

सोशल मीडिया पर ही कुछ तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों ने तनुश्री को याद दिलाया कि JNU अकादमिक ई-मेल्स जैसी आवश्यकताओं के लिए गूगल सूट इस्तेमाल करता है, जिस कारण ई-मेल्स का सर्वर कैम्पस में मौजूद ही नहीं है।

यह प्रतीत होता है कि JNU प्रशासन अपना Gmail अकाउंट “jnu.ac.in” साइट पर चला रहा है जो कि किसी अन्य सर्वर से इस्तेमाल किया जा रहा है ना कि 3 और 4 जनवरी 2020 को रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किए जा रहे सर्वर से।

MXtoolweb site के अनुसार, “jnu.ac.in” साइट, जिससे कि इंडिया टुडे समूह की ‘जेम्स बांड जर्नलिस्ट’ के अनुसार ई-मेल भेजे गए थे, गूगल सर्वर द्वारा होस्ट की जाती है, ना कि लेफ्टिस्ट गुंडों द्वारा तोड़े गए सर्वर से।

“JNU.ac.in” की डिटेल्स

ultratools.com के अनुसार, JNU का ई-मेल सर्वर US में है –

JNU मेल सर्वर टेस्ट

इस तरह हमें पता चलता है कि JNU अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए कम से कम 2 सर्वर का इस्तेमाल करता है- पहला, रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रियाओं के लिए, जिसे की लेफ्टिस्ट गुंडों ने 3-4 जनवरी, 2020 हुई हिंसा में तोड़ दिया था और दूसरा, ई-मेल जैसी सुविधाओं के लिए, जो कि कैम्पस से बाहर है। इसका सामान्य सा अर्थ है कि JNU प्रशासन अभी भी, यानी पहले सर्वर के नष्ट होने के बाद भी ई-मेल भेज सकता था, जिसे कि इंडिया टुडे की जर्नलिस्ट ने ‘सनसनीखेज खुलासे’ का नाम दिया है।

लेफ्टिस्ट गुंडों को बचाने का प्रयास कर रहा है इंडिया टुडे समूह

इंडिया टुडे और इसके पत्रकार इस घटना के बाद से एक झूठ को छुपाने के लिए दूसरे झूठ को गढ़ रहा है या फिर इस घटना के तथ्यों को सनसनी के रूप में पेश कर रहा है।

दिल्ली पुलिस द्वारा JNU हिंसा में शामिल अपराधियों की पहचान कर लिए जाने के बाद इंडिया टुडे समूह के पत्रकार राहुल कंवल ने एक ‘मेगा इन्वेस्टिगेशन’ स्टिंग वीडियो जारी करते हुए कहा था कि उन्होंने इस हिंसा के मुख्य आरोपितों को पकड़ लिया है। इंडिया टुडे समूह ने दावा किया कि उनके द्वारा किए गए इस खोजी स्टिंग में अक्षत अवस्थी नाम के किसी ABVP कार्यकर्ता ने स्वयं स्वीकारा है कि वह हिंसा में शामिल था।

इंडिया टुडे के इस वीडियो पर काफी लोगों ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यह वीडियो फेक है। यहाँ तक कि खुद ABVP ने भी किसी अक्षत अवस्थी के ABVP से जुड़े होने की खबर से साफ़ इनकार कर दिया। इंडिया टुडे इन्वेस्टिगेशन के फैक्ट चेक से जो बात सामने आई, उसके कारण इस वीडियो की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा हो गया है।

इस पर इंडिया टुडे समूह ने एक ट्वीट के माध्यम से स्पष्टीकरण देते हुए लिखा है कि उनके कैमरा की सेटिंग अपडेट न होने की वजह से ही 5 जनवरी को रिकॉर्ड किया गया वीडियो अक्टूबर 2019 दिखा रहा है।

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BJP सत्ता में कैसे? और वो 2 सवाल… ‘पढ़े-लिखे’ कॉन्ग्रेसी नेता थरूर ने जवाब देने के बजाय फैलाया भ्रम

जब से मोदी सरकार ने तीन पड़ोसी देशों के उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिए ऐतिहासिक नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित कर क़ानून बनाया, तब से कॉन्ग्रेस पार्टी सरकार को बदनाम करने पर उतारू है। और इसके लिए CAA के ख़िलाफ़ लगातार ग़लत जानकारी के प्रचार-प्रसार में जुटी हुई है। इसी कड़ी में, कॉनग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने शनिवार को नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के प्रावधानों पर जनता को गुमराह करने के लिए आधे-अधूरे सच का प्रचार किया।

इसके लिए उन्होंने ट्विटर पर हाथ में पोस्टर पकड़े हुए एक प्रदर्शनकारी की इमेज पोस्ट की। इसमें वो प्रदर्शनकारी स्पष्ट रूप से मोदी सरकार से कुछ सवाल पूछ रहा है। शशि थरूर ने उस भ्रमित युवक को सही जानकारी देने के बजाए उसके फ़ोटो का इस्तेमाल सरकार के ख़िलाफ़ प्रचार-प्रसार करने के लिए किया, ताकि लोगों में हमेशा भ्रम की ही स्थिति बनी रहे।

अब आपको बताते हैं कि उस प्रदर्शनकारी के हाथ में जो पोस्टर था, उसमें मोदी सरकार से कौन से तीन सवाल पूछे गए थे।

पहला सवाल- अगर वोटर आईडी नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो भाजपा सत्ता में कैसे है? 

दूसरा सवाल- अगर आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो इसे बैंक खाते क्यों जोड़ा गया?

तीसरा सवाल- अगर पैन कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो इसका इस्तेमाल सरकार द्वारा आयकर जमा करने के लिए क्यों किया जा रहा है?

नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध-प्रदर्शन के दौरान इस तरह के पोस्टर्स को देखकर हँसी आती है। ऐसे प्रदर्शनकारियों के बारे में यही कहा जा सकता है कि उन्हें CAA के बारे में पहले पढ़ लेना चाहिए, ताकि उन्हें सच्चाई का पता चल सके। अगर उन्होंने CAA से जुड़ी जानकारी को पढ़ा होता तो वे इस तरह के बचकाने सवाल ही न पूछते। ऐसा इसलिए क्योंकि पूरे नागरिकता संशोधन क़ानून में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है, जहाँ भारतीय नागरिकों से उनकी नागरिकता साबित करने का प्रमाण माँगा गया हो। जबकि सच्चाई यह है कि नागरिकता संशोधन क़ानून भारत की संसद द्वारा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिए पारित किया गया है।

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता थरुर उस प्रदर्शनकारी युवक को अगर सही जानकारी से अवगत कराना चाहते तो करा सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। आपको बता दें कि केवल वही लोग जो 18 वर्ष से अधिक आयु के हैं, वोटर आईडी पाने की योग्यता रखते हैं। इसलिए, सिर्फ़ मतदाता पहचान पत्र को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। और रही बात इस सवाल की कि भाजपा सत्ता में क्यों है, तो इसका जवाब है – 18 साल से अधिक आयु के अधिकांश भारतीयों ने इसके लिए मतदान किया। अब एक संसद सदस्य के रूप में अपने तीसरे कार्यकाल में पहुँचने वाले व्यक्ति (शशि थरूर) को निश्चित रूप से इस बारे में पता ही होगा कि चुनाव प्रक्रिया काम कैसे करती है। और उन्हें यह भी पता होगा कि वो और उनकी पार्टी सत्ता से बाहर क्यों है!

इसके अलावा, आधार कार्ड देश के हर निवासी को दिया जाता है, न कि केवल नागरिकों को। इसका दूसरा पहलू यह है कि वित्तीय धोखाधड़ी को ख़त्म करने के लिए इसे बैंक खातों से जोड़ा गया। इसके अलावा, आधार को बैंकों से जोड़ने से ऐसे खाताधारकों को मदद मिलती है, जिनका खाता प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत खोला गया और इसके लिए पैन कार्ड की ज़रूरत नहीं होती और इस तरह, ग़रीबों के लिए सब्सिडी सीधे बैंक उनके खातों में जाती है। इससे ग़रीबों को बिचौलियों से छुटकारा मिलता है।

अब बात अंतिम सवाल का। पैन कार्ड का संबंध आयकर रिटर्न से है, आयकर का भुगतान करने के लिए इसकी ज़रूरत भारतीयों के अलावा विदेशियों को भी पड़ती है। आयकर अधिनियम 1961 के अनुसार, अगर कोई भारत में धन कमाता है तो उसे आयकर का भुगतान करना होता है। ख़ुद एक विधिवेत्ता होने के नाते शशि थरूर से यह उम्मीद तो लगाई ही जा सकती है कि उन्हें भारत में काम करने के तरीके से जुड़ी मूल बातें पता होंगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल उनसे ही है कि आखिर वो बताएँगे कैसे? उन्हें तो प्रोपेगेंडा फैलाना है!

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सब पर चाय वाले की नजर: पूर्व जज और उनके साथी कोड वर्ड में करते थे डीलिंग

बहुचर्चित मेडिकल कॉलेज रिश्वत मामले में सीबीआई की चार्जशीट से कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इसके मुताबिक आरोपित आपस में पेड़, गमला, समान और प्रसाद जैसे कोड वर्ड के जरिए बात करते थे। घूस का एक बड़ा हिस्सा “कैप्टन” को गया। न्यायिक भ्रष्टाचार के इस मामले में सितंबर 2017 में ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व जज आईएस कुद्दुसी को गिरफ्तार किया गया था।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार जॉंच एजेंसी ने बीते साल जुलाई में चार्जशीट दायर की थी। इसमें कुद्दुसी सहित अन्य लोगों के नाम हैं। चार्जशीट में ओडिशा के कारोबारी विश्वनाथ अग्रवाल जो कथित तौर पर न्यायपालिका में ऊँचे संपर्क होने का दावा करता था के अलावे भावना पांडे, सुधीर गिरि, राम देव सारस्वत और प्रसाद एजुकेशनल ट्रस्ट के शीर्ष अधिकारी बीपी यादव तथा पलाश यादव का उल्लेख है।

एजेंसी के अनुसार गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने लखनऊ स्थित प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में 2017-18 और 2018-19 के सत्र में छात्रों के एडमिशन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद राहत पाने के लिए यादव ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चार्जशीट के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सीबीआई ने कुद्दुसी और उसके सहयोगियों के 80 टेलीफोन इंटरसेप्ट हासिल किए जिससे पूरे मामले से पर्दा उठा। इसके अनुसार गिरि, बीपी यादव और अग्रवाल ने 23 अगस्त, 2017 को कुद्दुसी के साथ उनके घर पर बैठक की थी। इसके दो दिन बाद ही इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अगली सुनवाई तक कॉलेज को डिलिस्ट करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। बेंच में जस्टिस नारायण शुक्ला भी थे।

इस आदेश को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। चार्जशीट के अनुसार इस बीच कुद्दुसी और पांडे ने बीपी यादव को भरोसा दिलाया की शीर्ष अदालत में वे उसका काम करवा देंगे। इसके बाद सीबीआई ने प्रसाद मेडिकल कॉलेज के पक्ष में फैसला सुनाने के लिए रिश्वत लेने के आरोप में जस्टिस शुक्ला के खिलाफ नया मामला दर्ज किया। 2018 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने मामले का संज्ञान लेते हुए जस्टिस शुक्ला से इस्तीफा देने या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने को कहा। बहरहाल जस्टिस शुक्ला ने मुख्य न्यायाधीश की सलाह को नज़रंदाज़ कर दिया। इसके बाद सीजेआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को जस्टिस शुक्ला को न्यायिक मामले नहीं सौंपने को कहा।

चार्जशीट में इस बात का भी उल्लेख है कि पूर्व जज कुद्दुसी ने अग्रवाल से 3 करोड़ रुपए में डील फाइनल की। इसमें से 2.5 करोड़ रुपए “कैप्टन” को गए। अग्रवाल कुद्दुसी से कहता है, “अभी जो हमारा कैप्टन है न, उसका ऑल ओवर इंडिया है, जो भी काम हो करने के लिए तैयार है।” चार्जशीट में इस बात का भी उल्लेख है कि एक मौके पर बीपी यादव से अग्रवाल कहता है, “चायवाले की सरकार की हरेक पर नजर है। इसलिए ‘कैप्टन’ आपसे सीधे नहीं मिल सकता। लेकिन पैसा देने पर आपका काम हो जाएगा।”

चार्जशीट के अनुसार कुद्दुसी यादवों के इशारे पर काम कर रहा था और अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट से पक्ष में फैसला करवाने का भरोसा दिलवाया था। रिपोर्ट के अनुसार आरोपित ने सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के लिए ‘मंदिर’ कोड वर्ड का इस्तेमाल किया। हवाला लेन-देन को लेकर भी चर्चा हुई। अग्रवाल से कहा गया कि चॉंदनी चौक के एक हवाला ऑपरेटर से से ‘दस रुपए का नोट’ कोड वर्ड इस्तेमाल कर वह पैसा ले ले।

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‘सचिन मेरे भगवान कृष्ण, मैं उनका सुदामा’ – मो. कैफ की इस बात पर कट्टरपंथियों ने कहा: मुस्लिम हो, शर्म करो

पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने क्रिकेट के भगवान कहे जाने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के साथ शानदार पोस्ट शेयर किया। उन्होंने इस शानदार पोस्ट का कैप्शन दिया है- भगवान कृष्ण के साथ मेरा सुदामा पल। उनके इस पोस्ट को लोगों ने काफी सराहा और साथ ही उनकी इस विनम्रता के लिए तारीफ भी कर रहे हैं।

हालाँकि इस तस्वीर पर सोशल मीडिया पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएँ आने के साथ गालियाँ पड़नी भी शुरू हो गई हैं। मोहम्मद उमर लतीफ नाम के यूजर ने लिखा, “शर्म करो कैफ, मुस्लिम हो इस तरह कहने से पहले तुम्हें सोचना चाहिए।”

फार्रूख खान नाम के एक यूजर ने लिखा, “अल्लाह तुमको हिदायत दे।” एक ने उन्हें संघी कैफ करते हुए कहा कि उनके भगवा के खिलाफ लड़ने की उम्मीद थी, लेकिन वो तो संघी निकला।

कई लोगों ने इस तस्वीर पर कमेंट किया कि जल्द ही मुस्लिम कट्टरपंथियों की तरफ से उनके खिलाफ फतवा जारी हो सकता है। एक ने लिखा कि फतवा जारी होने वाला है कैफू भाई।

एक अन्य ने लिखा, “कैफ सर! आप पर फतवा जारी हो सकता है…दोस्ती तो दिलों से होती है। उसमें कभी अमीरी-गरीबी नहीं होती तभी तो भगवान श्री कृष्ण व सुदामा की मित्रता आज भी प्रासंगिक है।” सिद्धार्थ तिवारी ने लिखा कि कैफ के पीछे अब काफिर के लुल्ले।

गौरतलब है कि इससे पहले भी पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर जहीर खान को दिवाली की शुभकामनाएँ देने को लेकर गालियाँ पड़ी थी। मुहम्मद फारूक असद ने जहीर के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था कि इस तरह से दिवाली मनाने के बाद अल्लाह को क्या मुँह दिखाओगे। इसी तरह से फोटो शेयरिंग वेबसाइट इंस्टाग्राम पर भी लोगों ने जहीर खान को गालियाँ दी। वहीं बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को भी इस्लामिक कट्टरपंथियों ने तिलक लगाते हुए एक तस्वीर साझा करने और दिवाली की बधाई देने के लिए गाली दी थी।

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2 मुस्लिम नाम, जिनको लेकर मो. कैफ ने किया राम मंदिर पर ट्वीट और हो गया Viral

तिलक लगाने वाला शाहरुख है ‘ग़लत मुस्लिम’, SRK की दीवाली शुभकामना पर टूट पड़े कट्टर मुस्लिम

बुलंदशहर में कॉलेज से लौट रही छात्राओं से छेड़खानी, बिलाल और साजेब गिरफ्तार: सांप्रदायिक तनाव

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के दो गॉंव में छेड़खानी की घटना की वजह से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया। समुदाय विशेष के लड़कों ने कॉलेज से लौट रही छात्राओं से छेड़खानी की। छात्राओं ने घर पहुॅंचकर इसकी जानकारी परिजनों को दी तो उन्होंने आरोपित लड़कों की उनके गॉंव में जाकर पिटाई कर दी। तनाव के बीच पुलिस ने बिलाल और साजेब नाम के दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना जिले के औरंगाबाद क्षेत्र की है। दो छात्राएँ शनिवार को कॉलेज से घर लौट रही थीं। इसी दौरान सरेराह कुछ युवकों ने उनके साथ छेड़खानी की। साथ ही धमकी दी कि इसके बारे में किसी को बताया तो जान से मार देंगे। घर पहुँच कर छात्राओं ने घटना की जानकारी परिजनों को दी। इसके बाद छात्राओं के परिजन आरोपितों के गॉंव पहुँच गए और उनकी पिटाई कर दी। आरोपितों के समुदाय विशेष से होने के कारण मामले ने साम्प्रदायिक रंग ले लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची।

दैनिक जागरण के बुलंदशहर संस्करण में 12 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर

औरंगाबाद इंस्पेक्टर के पुलिस फोर्स के साथ पहुँचने से पहले की दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए। पीड़ित छात्राओं के परिजनों ने दो आरोपियों के ख़िलाफ़ थाने में नामजद तहरीर कराई। इसके बाद आरोपित के परिजन पीड़ित छात्राओं के गॉंव पहुँच गए और वहां पंचायत कर छात्राओं के परिजनों पर फैसले का दबाव बनाने लगे। इससे गुस्साए पीड़िता के परिजनों ने आरोपितों के घर वालों को बंधक बना लिया। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस गॉंव में पहुँची और आरोपित के परिजनों को मुक्त कराकर अपने साथ थाने ले आई।

औरंगाबाद थाने के इंस्पेक्टर ध्रुव भूषण दुबे के मुताबिक पीड़ित पक्ष की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर आरोपित बिलाल और साजेब को गिरफ्तार कर लिया गया है।

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वामपंथियों की फालतू नारेबाजी, और बर्बाद होता JNU: राहुल कँवल पढ़ें ‘इंडिया टुडे’ की 40 साल पुरानी रिपोर्ट

जो इंडिया टुडे आज ‘स्टिंग ऑपरेशन’ के नाम पर लगातार झूठ फैला रहा है और जेएनयू के वामपंथी छात्रों के बचाव के लिए सारे पैंतरे आजमा रहा है, उसी ‘इंडिया टुडे’ ने आज से लगभग 40 साल पहले जेएनयू को ब्लैक होल करार दिया था। पत्रिका ने सम्भावना जताई थी कि अगर स्थितियाँ नहीं बदलीं तो ये ब्लैक होल बन जाएगा। पत्रिका ने लिखा था कि 12 वर्षों में 100 करोड़ रुपए डकारने के बावजूद जेएनयू अकादमिक कुचक्र, वैचारिक कलह और छात्रों की अराजकता का गढ़ बन गया है। दरअसल, नवंबर 1980 में जेएनयू के छात्र राजन जी जेम्स ने तत्कालीन कार्यकारी कुलपति को अपशब्द कहे थे, जिसके बाद उसे निष्काषित कर दिया। इसके बाद ही सारा बवाल शुरू हुआ था।

इसके बाद 46 दिनों तक यूनिवर्सिटी को बंद रखा गया। ‘इंडिया टुडे’ ने तब फरवरी 1981 के संस्करण में जेएनयू के वामपंथी नेताओं की आलोचना करते हुए लिखा था कि यूनिवर्सिटी को एक अराजक स्थान के रूप में तब्दील कर दिया गया है, जिसके लिए ख़ुद को बुद्धिजीवी मानने वाले लोग जिम्मेदार हैं। ‘इंडिया टुडे’ ने तब वामपंथियों की नारेबाजी को पतनशील और बिना सिर-पैर वाला बताया था। पत्रिका ने लिखा था कि इस अराजकता के जरिए वामपंथी यहाँ अपना पाँव जमाना चाहते हैं।

उस घटना को कवर करने जब ‘इंडिया टुडे’ का पत्रकार जेएनयू पहुँचा था, तब उसने पाया था कि यूनिवर्सिटी की दीवारें चुनावी पोस्टरों और नारों से भरी हुई थीं। तब हज़ार एकड़ में फैले जेएनयू में 2 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष सिर्फ़ मेंटेनेंस के लिए दिए जाते थे। एक बात और ग़ौर करने लायक है कि इस यूनिवर्सिटी पर उन्हीं इंदिरा गाँधी के कार्यकाल में ताला लगाया गया था, जो कभी इसकी चांसलर हुआ करती थीं। इस यूनिवर्सिटी को क्या नहीं मिला? वित्त व अन्य संसाधनों के साथ-साथ दुनिया में सबसे बेहतर छात्र-शिक्षक अनुपात को सुनिश्चित किया गया। प्रति 10 छात्रों पर एक शिक्षक का अनुपात उस समय कहीं भी नहीं था।

वहाँ के छात्रों द्वारा फैलाई गई अराजकता का माहौल ये था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने जेएनयू के कुलाधिपति के पद से किनारा कर लिया था। ‘इंडिया टुडे’ ने तब आश्चर्य जताया था कि ये कैसी यूनिवर्सिटी है, जहाँ मात्र एक अराजक छात्र भी महीनों तक पूरे विश्वविद्यालय का कामकाज ठप्प कर के रख सकता है। उस समय एक प्रोफेसर ने ही कहा था कि जिस यूनिवर्सिटी के बारे में ये चर्चा थी कि ये भारत का हार्वर्ड बनेगा, वो यूनिवर्सिटी एक ब्लैक होल बनने की और अग्रसर है। एक प्रोफेसर का कहना था कि ये यूनिवर्सिटी जन्म से ही परिवारवाद, भ्रष्टाचार, नेतृत्वविहीनता, अराजकता और गुटबंदी से जूझ रही है।

कई विशेषज्ञों का तब मानना था कि जेएनयू के प्रोफेसरों का राजनीतिक रुझान रखना यूनिवर्सिटी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। तब भी जेएनयू छात्र संगठन की कमान वामपंथियों के पास ही थी। एसएफआई ही सभी महत्वपूर्ण पदों पर काबिज थी। एक प्रोफेसर ने कहा था कि जिस तरह से मार्क्सवादी अन्य छात्रों से लड़ते रहते हैं, उससे पता चलता है कि यहाँ किसी को भी ‘मजदूरों और सत्ता के बीच संघर्ष’ और ‘शोषण’ की परिभाषा तक नहीं पता है।

निष्काषित किए गए छात्र जेम्स त्रावणकोर के एक ईसाई परिवार से आते थे, जहाँ पादरियों व ननों का दबदबा था। वो केरल में ट्रेड यूनियनों पर पीएचडी कर रहे थे। ‘इंडिया टुडे’ ने उन्हें एक नासमझ बड़बोला करार दिया था, जो हमेशा उतावलेपन में रहता था। जेम्स ने कुलपति के दफ़्तर के बाहर नारेबाजी करते हुए अपशब्द कहे थे। उन्हें सस्पेंड किए जाने के अगले दिन बाद से ही धरना-प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया। बाद में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के कुलपति को जाँच के लिए भेजा गया था, जिन्होंने जेम्स सहित 6 छात्रों को 2 साल तक निष्काषित करने का फ़ैसला लिया।

इसके बाद जेम्स ने कुछ लड़कियों को आगे कर के उनके साथ आमरण अनशन शुरू कर दिया। छात्राओं की तबियत ख़राब होने के बाद प्रदर्शनकारियों को वहाँ से हटाया गया। इसके लिए पुलिस को एक्शन लेना पड़ा। जहाँ आज जेएनयू के छात्रों द्वारा पीएचडी के किए अजीबोगरीब विषयों को चुनने की ख़बरें आती हैं, उस समय भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। ‘इंडिया टुडे’ ने ही स्वीकारा था कि पीएचडी छात्रों ने रिसर्च के लिए अधिकतर संदिग्ध विषय चुन रखे हैं। सभी प्रोफेसरों को उनके वेतन का मात्र 10% ख़र्च करने पर सारी सुख-सुविधाओं वाले फ्लैट्स वगैरह मिलते थे।

‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट से न सिर्फ़ ये पता चलता है कि जेएनयू हमेशा से विवादों में रहा है, बल्कि ये भी सिद्ध हो जाता है कि पठन-पाठन की जगह अराजकता यहाँ शुरू से ही हावी रही है। वही नारेबाजी, वही फालतू वाद-विवाद, नेताओं के साथ संघर्ष, प्रोफेसरों द्वारा छात्रों को बहकाना और वामपंथियों द्वारा माहौल बिगाड़ना, ये सब जेएनयू में हमेशा से रहा है। ये आश्चर्य वाली बात है कि कभी जेएनयू की सच्चाई बाहर लाने वाले और यूनिवर्सिटी को जी भर ‘गालियाँ’ देने वाले ‘इंडिया टुडे’ ने अब वामपंथियों को बचाने का ठेका ले रखा है।

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दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश में 1300 साल पुरानी गणेश भगवान की मूर्ति, सिर और हाथ ग़ायब

इंडोनेशिया में भगवान गणेश की करीब 1300 साल पुरानी मूर्ति मिली है। मध्य जावा के वोनोसोबो ज़िले के डेंग (Dieng) वेटन गाँव में खुदाई के दौरान यह मूर्ति मिली। सेंट्रल जावा इंस्टीट्यूट फॉर प्रिजर्वेशन ऑफ कल्चरल हेरिटेज (BPCB) ने 12 जनवरी को खुदाई कर यह मूर्ति निकाली।

इंडोनेशिया सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है। यहॉं की करीब 90 फीसदी आबादी इस्लाम धर्म को मानती है। बावजूद उसके करेंसी पर गणपति विराजमान हैं। दरअसल, भगवान गणेश को इंडोनेशिया में शिक्षा, कला और विज्ञान का देवता माना जाता है।

खुदाई में मिली भगवान गणेश की मूर्ति एंडीसाइट धातु से बनी हुई है। मूर्ति की ऊँचाई 140 सेमी और चौड़ाई 120 सेमी है। लेकिन, मूर्ति के सिर और हाथ का हिस्सा ग़ायब है। डेंग मंदिर इकाई संस्थान के प्रमुख, एरी बुदिर्तो (Eri Budiarto) ने बताया,

“गणेश भगवान की यह सबसे बड़ी मूर्ति है, जो डेंग में पाई गई है। लेकिन हमें अभी तक इसका सिर और हाथ नहीं मिले हैं। पहले हम इसका पता लगाएँगे। फिर मूर्ति को डेंग संग्रहालय के स्थल के आसपास पाए जाने वाले अन्य पत्थरों के साथ ले जाएँगे।”

ख़बर के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्ति एक किसान ने खोजी थी। दिसंबर 2019 में जब वह अपने धान के खेत की जुताई कर रहा था तो 50 सेमी की गहराई में उसे मूर्ति का पता चला। डेंग पठार कलिंगा साम्राज्य से हिन्दू मंदिरों का स्थान रहा है, जो जावा के सबसे पुराने हिन्दू-बौद्ध राज्यों में से एक है। इस मूर्ति को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि इसका निर्माण 7वीं से 8वीं शताब्दी के बीच हुआ होगा।

इसके बाद इस द्वीपीय राष्ट्र में इस्लाम ने प्रवेश किया और आज जावा की 90 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है। लेकिन, इस्लाम के बावजूद अभी भी यहाँ हिन्दू-बौद्ध का प्रभाव है। खुदाई के दौरान मिली भगवान गणेश की मूर्ति के मिलने के बाद से साइट से और भी महत्वपूर्ण वस्तुओं के मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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जय श्री राम बोलने और गोहत्या से रोकने पर सैनिक को मुस्लिम युवकों ने पीटा, नफीस गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में सेना के एक जवान की कुछ मुस्लिम युवकों ने पिटाई कर दी। जवान ने गाय को काटने पर आपत्ति जताई थी। साथ ही जय श्री राम का नारा लगाया था। पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पीड़ित जवान रामनरेश उर्फ फौजी ने इस संबंध में FIR दर्ज करवाई है।

रामनरेश द्वारा कराए गए FIR की कॉपी

FIR में रामनरेश ने कहा है कि 6 जनवरी को तकरीबन 12 बजे वह अपने घर से खानपुर स्थित प्लॉट पर जा रहा था। तभी कटरा मुहल्ला के शकरा कसाई, टुण्डे कसाई, जग्गू कसाई, तौसीब कसाई और इन्तयाज खान दो गायों को मारते-पीटते काटने के लिए ले जा रहे थे। रामनरेश ने उन्हें रोका तो उन लोगों ने गाली-गलौज करते हुए कहा कि तू बड़ा मोदी, योगी का भक्त बनता है, आज तुझे देख लेते हैं। इतना कह कर उन लोगों ने और पास खड़े नफीस, राहत अली शाह, शोहराब, वसीम, बसीर और मोहम्मद मियाँ के साथ ही कई अन्य लोग उसे घेरकर मार-पीट करने लगे। इस दौरान शोहराब ने रामनरेश की लाइसेंसी राइफल छीन ली और मोहम्मद मियाँ व टुण्डे कसाई ने सोने की चेन व 3,000 रुपए नगद छीन लिए।

औरैया पुलिस ने इस पर कार्रवाई करते हुए 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साथ ही रामनरेश उर्फ फौजी के साथ हुए विवाद में वांछित मुख्य अभियुक्त संकरा उर्फ नफीस को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

औरैया अपर पुलिस अधीक्षक ने इस संबंध में बताया कि फौजी के साथ हुए विवाद में पहले दो अभियुक्तों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। मुख्य अभियुक्त संकरा भी गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके ऊपर पूर्व से ही गोकशी सहित अन्य मुकदमे पंजीकृत हैं। शेष अभियुक्तों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर जाना जाएगा कोलकाता पोर्ट: PM मोदी का बड़ा ऐलान

पश्चिम बंगाल का कोलकाता पोर्ट अब श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम से जाना जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के 150 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम बदलकर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऊपर करने की घोषणा की।

पीएम मोदी ने कोलकाता पोर्ट के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि कोलकाता पोर्ट के विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए आज सैकड़ों करोड़ रुपए के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया गया है। पीएम ने इस मौके पर पश्चिम बंगाल की सरकार पर भी जोरदार वार किया। हालाँकि इस कार्यक्रम में राज्य की सीएम ममता बनर्जी ने शिरकत नहीं की।

कोलकाता पोर्ट के महत्व के बारे में बोलते हुए पीएम ने कहा, “इस पोर्ट ने भारत को विदेशी राज से स्वराज पाते देखा है। सत्याग्रह से लेकर स्वच्छाग्रह तक इस पोर्ट ने देश को बदलते हुए देखा है। ये पोर्ट सिर्फ मालवाहकों का ही स्थान नहीं रहा, बल्कि देश और दुनिया पर छाप छोड़ने वाले ज्ञानवाहकों के चरण भी यहाँ पड़े हैं। एक प्रकार से कोलकाता का ये पोर्ट भारत की औद्योगिक, आध्यात्मिक और आत्मनिर्भरता की आकांक्षा का प्रतीक है। ऐसे में जब ये पोर्ट डेढ़ सौवें साल में प्रवेश कर रहा है, तब इसको न्यू इंडिया के निर्माण का भी एक प्रतीक बनाना आवश्यक है।”

पीएम ने कहा, “पश्चिम बंगाल की, देश की इसी भावना को नमन करते हुए मैं कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट का नाम, भारत के औद्योगीकरण के प्रणेता, बंगाल के विकास का सपना लेकर जीने वाले और एक देश, एक विधान के लिए बलिदान देने वाले डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने की घोषणा करता हूँ। बंगाल के सपूत, डॉक्टर मुखर्जी ने देश में औद्योगीकरण की नींव रखी थी। चितरंजन लोकोमोटिव फैक्ट्री, हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट फैक्ट्री, सिंदरी फर्टिलाइज़र कारखाना और दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, ऐसे अनेक बड़ी परियोजनाओं के विकास में डॉक्टर मुखर्जी का बहुत योगदान रहा है।”

इससे पहले वे बेलूर मठ गए थे। वहाँ उन्होंने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही सीएए पर भी अपनी बातें दोहराईं। इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लिए बिना उन पर और उनकी सरकार पर जोरदार वार किया। उन्होंने अपने भाषण में कट मनी और चिट फंड का जिक्र किया। उन्होंने आगे कहा, “मेरे दिल में हमेशा दर्द रहेगा और मैं चाहूँगा, ईश्वर से प्रार्थना करूँगा की बंगाल के नीति निर्धारकों को सद्बुद्धि दें। गरीबों की मदद के लिए आयुष्मान योजना और किसानों की जिंदगी में पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मेरे बंगाल के गरीबों और किसानों को मिले।”

संसद चाहे तो PoK वापस लेने को हैं तैयार: सेना प्रमुख ने पाकिस्तान की नींद उड़ाई

भारतीय सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने सेना प्रमुख बनाए जाने के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेन्स आयोजित की। इस दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर संसद निर्देश जारी कर दे, तो भारतीय सेना पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) को वापस लेने के लिए उचित कार्रवाई करने को तैयार है।

सेना प्रमुख ने कहा, “जहाँ तक ​​पीओके का सवाल है, वर्षों पहले, संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया कि पूरा जम्मू-कश्मीर, पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर हमारा हिस्सा है। एक संसदीय संकल्प है। अगर संसद चाहती है कि वह क्षेत्र भी हमारा हिस्सा हो, और अगर हमें इसके लिए निर्देश दिए जाते हैं, तो हम निश्चित रूप से उचित कार्रवाई करेंगे।”

दरअसल, 1994 में संसद में एक प्रस्ताव लाया गया था, इस प्रस्ताव में कहा गया था कि पूरा जम्मू और कश्मीर, भारत का एक अभिन्न अंग है। पीओके में सैन्य अभियानों की व्यवहार्यता पर, जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि भारतीय सेना को सभी सीमाओं पर तैनात किया गया है और इससे जुड़ी कई योजनाएँ भी हैं। यदि ज़रूरत पड़ी, तो इन योजनाओं पर कार्रवाई कर लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा तभी संभव है, अगर संसद हमें ऐसा करने का निर्देश जारी करे।

ख़बर के अनुसार, प्रेस कॉन्फ्रेन्स में अपनी बात रखते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हर कोई अच्छा काम रहा है, चाहे वह एलओसी हो या भीतरी इलाक़े हों। हमें जनता का पूरा समर्थन मिल रहा है। हम स्थानीय पुलिस और प्रशासन के भी शुक्रगुज़ार हैं। उन्हें भारतीय सेना से किसी भी तरह की कोई शिक़ायत नहीं है। सीमाओं पर तैनात कमांडर के फ़ैसले का सम्मान करना होगा। जो भी शिक़ायतें दर्ज हुईं, वे निराधार साबित हुईं।

इसके अलावा, सेना प्रमुख नरवणे ने कहा कि पश्चिमी सीमाओं पर हमें सबसे अधिक ख़तरा है, इसलिए वहाँ भारतीय सेना की एक यूनिट छ: अपाचे हेलिकॉप्टर के साथ तैनात रहती है। उन्होंने सियाचिन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र हमारे लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। दो मोर्चों पर जंग को लेकर दो तरह की तैयारियाँ हैं। पहला- ऐसा होने पर प्राथमिक तौर पर हम बड़ी संख्या में बलों की तैनाती करेंगे। दूसरा- हम ऐसी स्थिति में पीछे नज़र नहीं आएँगे। 

उधर, भारतीय सेना प्रमुख एमएम नरवणे के PoK वाले बयान पर पाकिस्तान तिलमिला उठा है। पाकिस्तान ने गीदड़भभकी देते हुए कहा कि उसकी सेना नियंत्रण रेखा (LoC) पर किसी भी तरह की भारतीय कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

बता दें कि भारत-चीन की सेनाओं के बीच हॉटलाइन प्रस्तावित है। जल्द ही भारत के सैन्य ऑपरेशन्स के महानिदेशक और चीन की पश्चिमी कमान के बीच हॉटलाइन शुरू होगी। इसी के साथ-साथ पाकिस्तान और चीन सीमा पर बलों की तैनाती को लेकर री-बैलेंसिंग ज़रूरी है। 

प्रेस कॉन्फ्रेन्स में सेना प्रमुख ने इस बात पर बल दिया कि देश की उत्तरी और पश्चिमी सीमा पर समान रूप से ध्यान देने की ज़रूरत है। जहाँ तक भारतीय सेना का संबंध है, हमारे लिए कम समय का ख़तरा उग्रवादियों के ख़िलाफ़ अभियान चलाना है और लंबे समय का ख़तरा पारम्परिक युद्ध है। हम इसी तैयारी में जुटे हुए हैं।

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