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डाक्यूमेंट्स जला दो पर सरकार को मत दिखाओ : हिंसक प्रदर्शन में ‘ISIS का हाथ’

बिहार के दरभंगा से दो लोगों की बातचीत का एक ऑडियो सामने आया है। 11 मिनट 41 सेकंड के ऑडियो से पता चलता है कि किस कदर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के ख़िलाफ़ लोगों के दिलों में ज़हर भरा जा रहा है। ये बातचीत दो मुस्लिमों के बीच की है। इसमें पहला व्यक्ति दूसरे को कॉल कर के कहता है कि स्थिति बहुत भयावह हो गई है और उन सब को एक होकर कुछ करने का वक़्त आ गया है। आप “कुछ करने का समय आ गया है” से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये किसी बड़े साजिश की बात हो रही है। आगे बातचीत करने से पहले वो आदमी इसकी पुष्टि कर लेता है कि दूसरे व्यक्ति के आसपास जो लोग हैं वो मुस्लिम ही हैं, ताकि इस बातचीत की भनक किसी और को न लगे।

इस फोन कॉल में पहला व्यक्ति बताता है कि मुस्लिम डाक्यूमेंट्स के चक्कर में पड़े हैं और सभी अपना डाक्यूमेंट्स खोजने में लग गए हैं। आगे बढ़ने से पहले बताते चलें कि सरकार ने अभी ऐसा कोई नियम-क़ानून नहीं बनाया है, जिसमें देश भर के मुस्लिमों को उनकी नागरिकता साबित करने के लिए डाक्यूमेंट्स दिखाने की बात कही जाए। असम में एनआरसी लागू हुआ है लेकिन इसमें किसी मजहब या जाति की बात नहीं है। इस बातचीत में पहला व्यक्ति कहता है कि सीएए के तहत हिन्दुओं को तो नागरिकता मिल जाएगी लेकिन मुस्लिमों को साबित करना पड़ेगा।

यहाँ ये भी जानना ज़रूरी है कि सीएए भारत के नागरिकों के लिए है ही नहीं। इसीलिए, इसके द्वारा भारतीय हिन्दुओं के नागरिकता साबित होने की बात ही झूठ है। फोन कॉल पर पहला व्यक्ति आगे कहता है कि मुस्लिमों को कोई भी डाक्यूमेंट्स सरकार को दिखाना ही नहीं चाहिए। साथ ही वो भड़काते हुए आगे बताता है कि मुस्लिम सरकार से कहें कि अगर उनके पास डाक्यूमेंट्स हो भी तो उसे जला दिया जाएगा, सरकार जो करना चाहे, कर ले। वो कहता है कि किसी भी मुस्लिम को कागज़ात के चक्कर में पड़ना ही नहीं चाहिए। अपनी बात के पीछे दलील देते हुए उक्त मुस्लिम व्यक्ति कहता है:

“हम सरकार को अपने डाक्यूमेंट्स क्यों दिखाएँ? इसका सीधा अर्थ है कि सरकार को हमारी नागरिकता पर शक है। सरकार पता लगाए कि कौन लोग बाहरी हैं, हम क्यों कागज़ात दिखाएँ? जब हमें जेल में डाल दिया जाएगा, तब हम कोर्ट को कागज़ दिखा कर अपनी नागरिकता साबित कर देंगे। हम हिन्दू भाइयों को भी समझाएँगे कि तुम्हारे हिंदुस्तानी होने पर लानत है कि सरकार तुम्हें नागरिकता साबित करने को कह रही है। हिन्दुओं से सीएए पर बात नहीं करनी है। इस चीज को मास लेवल पर ले जाने के लिए सभी मुस्लिमों को समझना ज़रूरी है। मैं 3 दिन से यही कर रहा हूँ। अपने उस मामा को फोन कर के भी एनआरसी के बारे में बताया, जिनसे मेरा 3 साल से झगड़ा चल रहा था।”

पहले मुस्लिम व्यक्ति की इन बातों का समर्थन करते हुए दूसरा व्यक्ति कहता है कि ये योजना एकदम सही है क्योंकि इससे सरकार की परेशानी बढ़ जाएगी। पहला व्यक्ति कहता है कि मुस्लिम भाइयों को हिम्मत देना है और इस काम में फोन बहुत बड़ी ताक़त है, इसका पूरा इस्तेमाल करना है। वह फोन की ताकत आगे समझाते हुए कहता है कि चुनाव के दौरान किसे वोट देना है, ये उसके परिवार ने तय ही नहीं किया था। इसके बाद एक-दो हिन्दू लोगों ने उसे कॉल कर के बताया कि किसे वोट देने से फायदा होगा।

जिस ऑडियो को आप सुन रहे हैं वो सिर्फ दो आदमियों के बीच बातचीत भर का ऑडियो नहीं है। यह इंटेलिजेंस एजेंसी के सूत्रों से मिला ऑडियो है। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध की आड़ में केंद्र सरकार को अस्थिर करने के लिए इस साजिश की प्लानिंग लंबे समय से की गई है। इस ऑडियो के अलावा ऑपइंडिया के सूत्र ने जो बताया है, वो और भी खौफनाक है। ऐसा इसलिए क्योंकि विरोध को स्थानीय और कानून-विशेष के खिलाफ गुस्से के तौर पर दिखाने के लिए जो साजिश की गई है, दरअसल उसके पीछे हाथ इस्लामिक स्टेट का है। बिहार-झारखंड और उसके बाहर के अपने परिचितों तथा दोस्त-यार को फोन करके सरकार के खिलाफ भड़काने, उन्हें समझाने-बरगलाने के साजिश की पूरी फंडिंग ISIS के द्वारा की गई है।

इंटेलिजेंस एजेंसी के हमारे सूत्र ने यह भी बताया कि इस ऑडियो के आधार पर देश के दूसरे राज्यों में, दूसरी भाषाओं में भी घूम रहे ऐसे ही ऑडियो पर उन लोगों द्वारा जाँच-पड़ताल की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को इसके बारे में बता दिया गया है। और यही वजह है कि ऑर्गेनिक (स्वतः) दिखने वाले विरोध-प्रदर्शन के पहले से ही प्रशासन मुस्तैद है और जहाँ-जहाँ से उन्हें हिंसक प्रदर्शन होने के इनपुट मिले हैं, वहाँ-वहाँ धारा 144 लगाकर पहले से ही सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं।

एक और उदाहरण का जिक्र करते हुए उसने बताया कि कुछ हिन्दू छात्रों ने न चाहते हुए भी भाजपा को वोट दिया, क्योंकि उनके रिश्तेदारों में से किसी ने फोन कर के उन्हें कसम दिलाई कि उनका वोट भाजपा को ही जाएगा। वह आगे समझाते हुए कहता है कि देखिए, हिन्दू लोग कैसे फोन का इस्तेमाल करते हैं। इस पर दूसरे व्यक्ति ने उसे टोकते हुए कहा कि हिन्दू जो भी कर रहे हैं, ये सिर्फ़ फोन का ही कमाल नहीं है, इसके पीछे और भी बहुत सारी चीजें हैं। वो लोग विचार करते हैं कि उन्हें एक दिन सड़क पर निकल कर लाठी-डंडा नहीं खाना है बल्कि मुस्लिमों को जगाना है, ताकि वो योजना बना कर सड़क पर निकलें।

वो लोग आगे योजना बनाते हैं कि अगर कोई भी मुस्लिम सरकार को डॉक्यूमेंट दिखाने की बात करे तो उसे ये बोलना है कि ऐसा होने पर हम मुस्लिम मिल कर ही तुम्हें मारेंगे। साथ ही वो दोनों इस बात पर चर्चा करते हैं कि डॉक्यूमेंट्स न दिखाने पर सरकार की परेशानी बढ़ेगी और इतने लोगों को जेल में या कैम्प में डालने में सक्षम नहीं हो पाएगी। पहले व्यक्ति ने बताया कि वो जगह-जगह कॉल कर के मुस्लिमों को सीएए विरोधी रैलियों में शामिल होने को कह रहा है। पहला व्यक्ति बताता है कि सीएए और एनआरसी को हर मुस्लिमों को इन दो पॉइंट्स में समझाया जाना चाहिए:

  • सीएए के द्वारा मुस्लिमों को छोड़ कर बाकी सभी लोगों को नागरिकता दे दी जाएगी।
  • एनआरसी का इस्तेमाल करते हुए सभी मुस्लिमों को डिटेंशन कैम्पस में डाल दिया जाएगा।

वो लोग योजना बनाते हैं कि हर मुस्लिम कम से कम रोज़ 10 लोगों को सीएए और एनआरसी को लेकर समझाए। साथ ही कसम खिलाने की भी योजना बनाई जाए। पहला व्यक्ति आगे कहता है कि सिर्फ़ समझाना ही नहीं है बल्कि लोगों के ख़ून में ग़ुस्सा भरना है कि सीएए और एनआरसी खतरनाक है। वो कहता है- “यही हमारा ईमान है, यही रोज़ा है और यही नमाज़ है।

इस बातचीत से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मुस्लिमों में किस तरह से सीएए को लेकर नकारात्मकता पूरे योजनाबद्ध तरीके से फैलाई जा रही है। ग़लत बातों का प्रचार किया जा रहा है और उन्हें जबरन समझाया जा रहा है कि किस तरह ये क़ानून उनके ख़िलाफ़ है। इसके लिए जो दलीलें दी जा रही हैं, वो भी ग़लत हैं। अगर सिर्फ़ एक फोन कॉल से ऐसी साज़िश रची जा सकती है तो इंटरनेट का इस्तेमाल कर के और क्या-क्या होता होगा, ये आप ख़ुद ही सोचिए।

यह कितना खतरनाक है कि जो ISIS पहले हमारे देश से सिर्फ धर्म के नाम पर आतंकियों की भर्ती करता था, वो अब हमारे देश के भीतर घुसपैठ कर चुका है। पहले ISIS के आतंकी हमारी सुरक्षा के लिए खतरा थे लेकिन बाहरी तौर पर, अब वही हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन गए हैं। और यह सब संभव हुआ है क्योंकि कुछ मीडिया गिरोह, कुछ राजनीतिक दल और कुछ भ्रमित-भटके हुए लोग खुद अपनी ही सरकार पर भरोसा न करके अपने देश के खिलाफ सोच रखते हैं, अपने फायदे की रोटी सेंकते हैं।

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नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के विरोध में लगातार हो रहे हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को कॉन्ग्रेस और कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों द्वारा भड़काया जा रहा है। इनमें कुछ व्हाट्सअप ग्रुप भी शामिल हैं जो इन दंगों को हवा देने का काम कर रहे हैं। ऐसा ही एक व्हाट्सअप ग्रुप है जो मंडी हाउस से मार्च निकालने की योजना बना रहा था और फिर अंततः लाल किला रैली में शामिल हो गया।


व्हाट्सअप ग्रुप की डिस्प्ले पिक्चर

दरअसल, यह व्हाट्सअप ग्रुप अपेक्षाकृत छोटा था, इनके बीच आपस में बातचीत हो रही थी कि वे कैसे मंडी हाउस या लाल किला “विरोध प्रदर्शन” तक पहुँचेंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि धारा-144 लागू कर दी गई थी और कई मार्गों को दिल्ली पुलिस द्वारा बंद कर दिया गया था।

व्हाट्सअप ग्रुप के सदस्यों में से एक ने इस योजनाबद्ध बातचीत की पुष्टि के लिए स्क्रीनशॉट शेयर किया।


व्हाट्सअप ग्रुप के मैसेज

इस मैसेज में सबसे पहले पाठकों से ‘संदेश फैलाने’ के लिए कहा गया। इसमें कहा गया कि 19 दिसंबर को होने वाले विरोध-प्रदर्शन के लिए मौक़े पर एक क़ानूनी टीम मौजूद है। यह टीम प्रशांत भूषण की देख-रेख में काम करेगी और अगर किसी को हिरासत या क़ानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा, तो वे नीलेश नामक व्यक्ति (श्री नीलेश के नंबर पर लाल पट्टी का प्रयोग किया गया है।) से सम्पर्क कर सकते हैं।

बता दें कि नीलेश जैन स्वराज इंडिया के लीगल सेल से जुड़े एक वकील हैं।


नीलेश जैन प्रोफ़ाइल

नीलेश जैन DailyO प्रोफ़ाइल

इसके अलावा, DailyO के प्रोफ़ाइल से पता चलता है कि नीलेश जैन दिल्ली विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ़ लॉ के छात्र है। वो सामाजिक-राजनीतिक संगठन स्वराज अभियान के शोधकर्ता भी हैं, जो कि योगेंद्र यादव की पार्टी है।

जब हमने पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का जोखिम उठाने वाले प्रदर्शनकारियों में से एक नीलेश जैन से बात की। नीलेश जैन ने कहा कि वो पहले 50 बंदियों के बैच के साथ है। इसके आगे नीलेश ने बताया कि अगर हमें हिरासत में लिया गया, तो हमें बस की संख्या और हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या पर ध्यान देना होगा और मदद के लिए उन्हें संदेश देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि बंदियों की मदद के लिए वहाँ कई वकील मौजूद हैं और हमें किसी भी चीज की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।

ज्ञात हो कि ऑपइंडिया ने इससे पहले भी इस बात का ख़ुलासा किया कि कैसे एक अलग व्हाट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस एनएसयूआई और कॉन्ग्रेस के पदाधिकारियों द्वारा चलाए जा रहे इस व्हाट्सअप ग्रुप के ज़रिए पूरे देश में अराजकता फैलाने का आह्वान किया गया था। इस व्हाट्सअप ग्रुप में एक ऋषव रंजन नामक व्यक्ति भी शामिल था जो स्वराज्य अभियान का सदस्य था।

स्वराज्य अभियान और प्रशांत भूषण दंगाईयों को क़ानूनी मदद उपलब्ध कराते हैं। इसका एकमात्र उद्देश्य यह है कि दंगाई किसी भी डर के चलते इन विरोध-प्रदर्शनों से भागकर कहीं न जाएँ। नागरिकता क़ानून के नाम पर देश में अराजकता फैलाने के लिए इन विरोध प्रदर्शनों को और जारी रखना स्वराज्य अभियान और प्रशांत भूषण जैसे लोगों का कुचक्र है।

इन सबसे एक बात तो साफ़ हो चली है कि इस पूरे हिंसात्मक घटनाक्रम को बढ़ावा देने में कॉन्ग्रेस, योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण जैसे तत्व संगठित होकर देश में अराजकता फैलाने के लिए अपनी पूरी ताक़त झोंक रखी है। इन विरोध-प्रदर्शनों में से मुस्लिम भीड़ को नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में हिंसा, आगजनी और बर्बरता फैलाते देखा गया। इनका ग़ुस्सा पड़ोसी इस्लामिक राष्ट्रों से हिन्दुओं, बौद्धों, सिखों, जैनियों, पारसियों और यहाँ तक ​​कि ईसाइयों जैसे अल्पसंख्यकों को सताया जाने वाली नागरिकता प्रदान करने पर था।

इन सबमें सबसे भयावह बात यह है कि नागरिकता क़ानून के विरोधी में खड़े दंगाई किस तरह से राजनीतिक पार्टियों के हाथ की कठपुतली बन गए और वो किस तरह से उनके बहकावे में आकर देशभर में हिंसात्मक विरोध-प्रदर्शनों को अंजाम दे रहे हैं, वो भी यह जाने बगैर की इस क़ानून में विरोध करने जैसी कोई बात है ही नहीं।

यह मूल ख़बर OpIndia English की एडिटर नुपुर जे शर्मा की है, जिसका अनुवाद प्रीति कमल ने किया है।

CAA पर भारत के साथ खड़ा हुआ अमेरिका, कहा- पीड़ित अल्पसंख्यकों को मिल रहा है न्याय

नागरिकता संशोधन क़ानून पर अमेरिका ने भारत के लोकतंत्र में विश्वास जताया है। मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अमेरिका के ‘सेक्रटरी ऑफ स्टेट’ माइक पोम्पिओ ने कहा कि जिस सीएए को लेकर बातें की जा रही हैं, उसे लेकर पूरे भारत में लोकतान्त्रिक तरीके से बहस हुई है। उन्होंने कहा कि ये बहस एकदम ठोस रूप में हुई है। माइक ने भारत के लोकतंत्र में विश्वास जताया और सीएए के ख़िलाफ़ बोलने से इनकार कर दिया।

अमेरिका ने कहा कि वो दुनिया में हर जगह अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है और साथ ही सभी धर्मों को उनके धार्मिक अधिकारों का पालन करने की स्वतंत्रता का भी समर्थन करता है। माइक ने कहा कि अमेरिका इन चीजों के लिए आगे भी मुस्तैद रहेगा। भारत और अमेरिका के 2+2 डायलॉग के इतर मीडिया ने बात करते हुए उन्होंने ये बातें कही।

माइक के साथ डिफेंस सेक्रटरी मार्क इस्पर ने भी इस बातचीत में हिस्सा लिया। भारत की तरफ से विदेश मंत्री जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बातचीत में हिंसा लिया। न्यूज़ कांफ्रेंस में किसी ने दावा किया कि सीएए अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ है और इस क़ानून के तहत धार्मिक आधार पर नागरिकता प्रदान की जा रही है। इसपर माइक ने कहा कि सीएए को लेकर संसद में हुई लम्बी बहस को जिसने भी देखा-सुना होगा, उसे पता होगा कि इस क़ानून के द्वारा पड़ोसी देशों के पीड़ित अल्पसंख्यकों को अधिकार मिल रहा है।

इस बातचीत में भारत और अमेरिका ने हिन्द महासागर में चीन के दखल को रोकने और क्षेत्र को सुरक्षित बनाने पर चर्चा की। मीडिया के सवाल का जवाब देते हुए अमेरिकी नेताओं ने कहा कि सीएए में क्यों पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के कुछ धर्मों के लोगों को शामिल किया गया है, इसका कारण स्पष्ट रूप से बताया जा चुका है।

…16 साल पुराना मनमोहन सिंह का वो वीडियो, CAA पर भ्रम फैलाने से पहले कॉन्ग्रेस को देखना चाहिए

नागरिकता संशोधन क़ानून को विपक्षी धड़े ने बेवजह ही तूल दे रखा है। एक तरफ़ देश भर में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं तो वहीं, दूसरी तरफ़ वामदलों ने आज भारत बंद का आह्वान किया है, जिसका समर्थन कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी किया है। इस बीच, बीजेपी कॉन्ग्रेस को आइना दिखाने के मक़सद से एक ऐसे वीडियो को सामने लेकर आई है, जिसमें ख़ुद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर हिंसा के शिकार हुए शरणार्थियों के लिए सरकार को सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाने का सुझाव देते नज़र आ रहे हैं।

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दरअसल, यह वीडियो 2003 का है जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में NDA की सरकार थी और संसद के उच्च सदन राज्यसभा में डॉ मनमोहन सिंह ने शरणार्थियों के सन्दर्भ में इस प्रकार का बयान दिया था। उस दौरान संसद में उपस्थित तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को संबोधित करते हुए डॉ मनमोहन सिंह ने कहा था,

“मैं शरणार्थियों के संकट को आपके सामने रखना चाहता हूँ। बँटवारे के बाद हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर नागरिकों का उत्पीड़न किया गया। अगर ये प्रताड़ित लोग हमारे देश में शरण के लिए पहुँचते हैं तो इन्हें शरण देना हमारा नैतिक दायित्व है। इन लोगों को शरण देने के लिए हमारा व्यवहार उदारपूर्ण होना चाहिए। मैं गंभीरता से नागरिकता संशोधन विधेयक की ओर डेप्युटी पीएम का ध्यान इस ओर दिलाना चाहता हूँ।”

ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी बन पड़ता है कि जो कॉन्ग्रेस आज नागरिकता क़ानून के विपक्ष में खड़ी है, उसने 2003 में नागरिकता क़ानून की पैरवी क्यों थी? इससे कॉन्ग्रेस की यह मंशा साफ़ हो जाती है कि असल में वो देश की जनता के हित से परे बेवजह के मुद्दों का केवल राजनीतिकरण करने में विश्वास रखती है। आज नागरिकता संशोधन क़ानून पर जहाँ-तहाँ हिंसात्मक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि इस क़ानून का विरोध करने जैसी कोई बात ही नहीं है। आए दिन होने वाले विरोध-प्रदर्शनों में जुटी भीड़ को वास्तव में इस क़ानून के बारे में कुछ पता ही नहीं है, जो इसका सबसे दु:खद पहलू है।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने छात्रों से अपील भी की थी कि वो वेबसाइट पर जाकर नागरिकता संशोधन क़ानून के बारे में पढ़ें, जानें और समझें। इससे उन्हें पता चलेगा कि आख़िर यह क़ानून है क्या, क्योंकि इस क़ानून के बारे में छात्रों को सही जानकारी नहीं है और वो भ्रमित हैं।

नागरिकता क़ानून को लेकर हो रहे लगातार विवादों के बीच भारत सरकार ने पाकिस्तान से आई एक मुस्लिम महिला हसीना बेन को बिना किसी तामझाम के केवल मेरिट और मानवता के आधार पर भारत की नागरिकता प्रदान की है। हसीना बेन ने दो साल पहले ही भारत की नागरिकता के लिए गुजरात में द्वारका के कलेक्टर को पत्र लिखा था। द्वारका के कलेक्टर डॉ नरेंद्र कुमार मीणा ने उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र प्रदान किया।

यह भी पढ़ें: Pak मुस्लिम महिला हसीना बेन को मिली भारतीय नागरिकता: CAA के विरोध पर आँख खोलती खबर

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मध्य प्रदेश में 1 साल में 7 लाख नए बेरोजगार, बेरोजगारी भत्ते वाले वादे से मुकरी कमलनाथ सरकार

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार आने के बाद से ही बेरोजगारी की समस्या लगातार बढ़ते ही जा रही है। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ताज़ा आँकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। इस महीने अपना 1 साल पूरा कर रही कमलनाथ सरकार कर्जमाफी से लेकर आतंरिक कलह तक, कई मुद्दों पर पहले से ही विवादों में है। अब पता चला है कि राज्य में सिर्फ़ पिछले 1 साल में बेरोजगारों की संख्या 7 लाख बढ़ गई है। ये आँकड़े रजिस्टर्ड बेरोजगारों के हैं। इसके साथ ही राज्य में बेरोजगार युवकों की संख्या 28 लाख तक पहुँच गई है, जो स्थिति की भयावहता की ओर इशारा करती है।

कमलनाथ सरकार के शासनकाल में बेरोजगारी की समस्या का बढ़ना कॉन्ग्रेस के लिए इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि पार्टी इसी मुद्दे पर केंद्र की भाजपा सरकार को लगातार घेरती आई है। पिछले 1 साल में मात्र 34,000 लोगों को ही रोजगार मिल सका है। अगर अनुपात देखें तो प्रत्येक 20 नए बेरोजगारों पर मात्र 1 व्यक्ति को रोजगार प्राप्त हुआ। एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ को बताया कि मौजूदा सरकार से रोजगार की आस में नए लोग बेरोजगार के रूप में रजिस्टर करवा रहे हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस ने बेरोजगार युवकों को 4000 रुपए प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था।

कई राजनीतिक विश्लेषकों ने बताया कि बेरोजगारी भत्ते की उम्मीद में नए लोग अपना नाम रजिस्टर करा रहे हैं और इसी कारण बेरोजगारों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस अपने वादे से मुकर गई और विधानसभा सत्र में कहा कि अभी ऐसी कोई योजना तैयार ही नहीं की गई है। इस बारे में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अधिक जानकारी देते हुए बताया:

“अक्टूबर 2018 में मध्य प्रदेश में रजिस्टर्ड शिक्षित बेरोजगारों की संख्या 20,77,222 थी, जो एक साल बाद अक्टूबर 2019 में 27,79,725 हो गई है। पिछले एक वर्षों में कई रोजगार मेलों का आयोजन किया गया है। इनमें 17,506 युवकों को रोजगार दिया गया। इसी अवधि में 2520 ऐसे युवक भी हैं, जिन्हें प्लेसमेन्ट के माध्यम से रोजगार मिला। मध्य प्रदेश में 25 नई इंडस्ट्रीज की स्थापना की गई है और साथ ही 13,740 लोगों को रोजगार मिला है।”

कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता शोभा ओझा ने बेरोजगारी बढ़ने की बातों को नकारते हुए पूर्ववर्ती शिवराज सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के दौरान पिछले 15 सालों में मध्य प्रदेश बेरोजगारी के मामले में टॉप पर था। उन्होंने दावा किया कि सीएम कमलनाथ की सबसे बड़ी प्राथमिकता जॉब क्रिएशन ही है। वहीं भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने बताया कि राज्य में विभिन्न सरकारी पदों में 3 लाख रिक्तियाँ हैं, जिनके लिए बहाली की ही नहीं जा रही है। भाजपा आईटी से के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस को बेरोजगारी भत्ते वाला चुनावी वादा याद दिलाया।

विकास के लिए पैसे चाहिए तो कॉन्ग्रेस में शामिल होना होगा: कमलनाथ के मंत्री का वीडियो वायरल

कमलनाथ के खिलाफ 5000 शिक्षकों का प्रदर्शन, सैलरी नहीं दे रही कॉन्ग्रेस सरकार

महिला कमिश्नर (IAS) ने झुक कर छुआ कमलनाथ के मंत्री का पैर, हो गया Video Viral

CAA पर फिर पलटी शिवसेना: कॉन्ग्रेस-UPA को दिया गच्चा, कहा – ‘हमारी खुद की पहचान, हम तुम्हारे साथ नहीं’

‘हिंदू हृदय सम्राट’ बाल ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में सरकार बना चुके हैं। उद्धव ठाकरे की सरकार मतलब BJP से अलग होकर तीन पहियों वाली सरकार। वही सरकार जो CAB मतलब नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में लोकसभा में अपने सासंदों से वोटिंग करवाती है, फिर वही राज्यसभा से मुँह फुला कर गायब हो जाती है। अब जबकि बिल ने एक्ट का रूप ले लिया है तो CAA (नागरिकता संशोधन कानून) पर एक बार फिर से शिवसेना ने पलटी मारी है।

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बुधवार को विपक्षी पार्टियों का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मिलने गया। जैसा कि प्रत्याशित था, शिवसेना इससे गायब रही। कॉन्ग्रेस और NCP के साथ वाली शिवसेना ने न सिर्फ इन दोनों को बल्कि पूरे विपक्ष को धोखा दिया है। इस धोखे के बाद संजय राउत ने जो बयान दिया है, वो मजेदार है। बयान क्या है, सफाई है – वो भी कॉन्ग्रेस को संदेश देती हुई। अपनी ठसक दिखाती हुई।

शिवसेना नेता और मुखपत्र सामना के एडिटर संजय राउत ने सफाई देते हुए कहा कि नागरिकता कानून पर विपक्षी दलों के समूह से अलग रहने का कोई कारण नहीं था। “विपक्षी नेताओं के साथ जाना चाहिए था” वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि यह एक तरह का बेकार सवाल है। इसके बाद तो उन्होंने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक की राजनीति पर बात कर डाली।

संजय राउत ने स्पष्ट कहा कि महाराष्ट्र में भले ही शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी का गठबंधन है, लेकिन दिल्ली में अभी भी उनकी पार्टी की अपनी अलग पहचान है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “शिवसेना कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले UPA का हिस्सा नहीं है, हम एनडीए से बाहर जरूर हैं, मगर यूपीए के साथ नहीं। संसद में हमारी अपनी पहचान है।”

आपको याद दिला दें कि लोकसभा में शिवसेना के सांसदों ने नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में अपना समर्थन दिया था। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी के ‘गुस्से भरे ट्वीट’ के बाद राजनीतिक समीकरण बदला था और इसी बिल पर राज्यसभा में वोटिंग के दौरान शिवसेना ने वॉकआउट किया था।

अब नागरिकता संशोधन बिल कानून बन चुका है। इसके खिलाफ देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं, भ्रम फैलाया जा रहा है। कथित अल्पसंख्यकों के दिलों में डर का माहौल बनाया जा रहा है। इसके लिए वामपंथी, मीडिया गिरोह और राष्ट्रविरोधी राजनीतिक पार्टियाँ कमर कस कर लगी हुई हैं। लेकिन शिवसेना अपने ‘हिंदू हृदय सम्राट’ के साये से बाहर आए तो कैसे आए!

लोकसभा में हाँ, राज्यसभा में ना: नागरिकता संशोधन विधेयक पर शिव सेना का ‘पेंडुलम हिंदुत्व’

‘हिन्दू फासिस्ट’ से लिबरल-दुलारी हुई शिव सेना, उद्धव बने आँख के तारे: ‘मीडिया गिरोह’ ने जमकर उड़ेला प्यार

कॉन्ग्रेस ने तोड़ा संजय राउत का गोवा ड्रीम, कहा- भाजपा सरकार गिरने की संभावना नहीं

शायरी से श्राप तक: क्लर्क से संपादक और नेता बने संजय राउत ने जब फैलाया था रायता, आज खुद फैल गए!

रामचंद्र गुहा हिरासत में: CAA के ख़िलाफ़ करने गए थे प्रदर्शन, पुलिस ने धर लिया

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ देशभर में जगह-जगह लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इस क़ानून के विरोध में वामदलों और कुछ मुस्लिम संगठनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया था। इसी विरोध-प्रदर्शन में पहुँचे इतिहासकार रामचंद्र गुहा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। गुहा को कर्नाटक के बेंगलुरु में विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया।

पुलिस हिरासत में लिए जाने से रामचंद्र गुहा काफ़ी नाराज़ भी नज़र आए। बता दें कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विपक्ष और मुस्लिम संगठनों द्वारा बुलाए गए एक दिन के बंद को लेकर बेंगलुरु में तीन दिनों के लिए धारा-144 लागू कर दी गई है। वामदलों और मुस्लिम संगठनों ने कलबुर्गी में नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।

ग़ौरतलब है कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए दक्षिण कन्नड़ ज़िले में 21 दिसंबर की मध्यरात्रि तक निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है। दक्षिण कन्नड़ ज़िले के उपायुक्त सिंधू बी रूपेश ने क़ानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पूरे ज़िले में ही निषेधाज्ञा लागू कर दी।

जानकारी के अनुसार, मंगलुरु शहर के पुलिस उपायुक्त पी एस हर्ष ने बुधवार (18 दिसंबर) को कमिश्नरी क्षेत्र में ही 18 दिसंबर से 20 दिसंबर तक निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। पुलिस को जानकारी मिली थी कि कुछ संगठनों ने बृहस्पतिवार (19 दिसंबर) और शुक्रवार (20 दिसंबर) को संशोधित नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन का आह्वान किया है।

हाल ही में सम्पन्न हुए एक कार्यक्रम के दौरान रामचंद्र गुहा ने कहा था कि हिन्दुत्व देश को नुक़सान पहुँचा रहा है और यह देश को बर्बाद करके रख देगा। इसके अलावा, उन्होंने असहिष्णुता के मसले पर देश के प्रबुद्ध लोगों के साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक खुला पत्र भी लिखा था। इसके बाद गुहा ने गो हत्या के बढ़ते मामलों पर विरोध जताने के लिए बीफ़ खाते हुए अपनी एक फ़ोटो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक तौर पर पोस्ट की थी।

बता दें कि एक समय रामचंद्र गुहा ने कॉन्ग्रेस को देश में विद्यमान तमाम समस्याओं के लिए ज़िम्मेवार ठहराया था। उन्होंने ‘इंडिया आफ़्टर गाँधी’ और ‘इंडिया बिफोर गाँधी’ किताबें भी लिखीं हैं।

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Pak मुस्लिम महिला हसीना बेन को मिली भारतीय नागरिकता: CAA के विरोध पर आँख खोलती खबर

देश भर में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर इस क़ानून को वापस लिए जाने का दवाब बना रहा है। इस बीच, भारत सरकार ने पाकिस्तान से आई एक मुस्लिम महिला हसीना बेन को बिना किसी तामझाम के केवल मेरिट और मानवता के आधार पर भारत की नागरिकता प्रदान की है।

दरअसल, पाकिस्तान से वापस लौटकर भारत आई हसीना बेन ने दो साल पहले भारत की नागरिकता के लिए गुजरात में द्वारका के कलेक्टर को पत्र लिखा था। द्वारका के कलेक्टर डॉ नरेंद्र कुमार मीणा ने उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र प्रदान किया। 

बता दें कि हसीना बेन मूलरूप से भारत की ही रहने वाली थीं, लेकिन 1999 में निक़ाह हो जाने के बाद वो पाकिस्तान चली गईं थी। पाकिस्तान में उनके शौहर की मृत्यु हो जाने पर उन्होंने भारत वापस आने का फ़ैसला किया। दो साल पहले ही उन्होंने भारत की नागरिकता के लिए आवेदन किया था। अब 18 दिसंबर 2019 को भारत सरकार की तरफ़ से उन्हें भारतीय नागरिकता का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। 

भारत सरकार के द्वारा हाल ही में नागरिकता संशोधन क़ानून लागू किया गया है, जिसकी वजह से देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी है। दूसरी तरफ़ विपक्षी पार्टियाँ यह कहकर इस क़ानून का विरोध कर रही हैं कि ये क़ानून संविधान के अनुच्छेद-14 का उल्लंघन करता है और इसके साथ ही कई अन्य बातों का भी उल्लंघन करता है। विपक्ष का आरोप ये भी है केंद्र सरकार का ये क़ानून देश में अल्पसंख्यकों के प्रति भय पैदा करता है। 

वहीं, नागरिकता संशोधन क़ानून पर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि ये क़ानून वापस नहीं लिया जाएगा और मोदी सरकार इन शरणार्थियों को नागरिकता देकर रहेगी। नागरिकता क़ानून का विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं से अमित शाह ने अपील की है कि वह लोग क़ानून के बारे में पूरी जानकारी लें। अमित शाह ने कहा कि क़ानून के बारे में छात्रों की जानकारी सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार की वेबसाइट पर क़ानून को पढ़ा जा सकता है। अमित शाह ने दावा किया कि मोदी सरकार किसी के ख़िलाफ़ अन्याय नहीं करती है और छात्रों और युवाओं को अगर नागरिकता संशोधन क़ानून में किसी के ख़िलाफ़ कोई अन्याय जैसी बात दिखती है तो वो सरकार को बता सकते हैं।

ग़ौरतलब है कि विपक्ष के विरोध के बावजूद नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार (11 दिसंबर) को राज्यसभा द्वारा और सोमवार (9 दिसंबर) को लोकसभा द्वारा पारित किया गया। मौजूदा क़ानून के मुताबिक किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता लेने के लिए कम से कम 11 साल यहाँ रहना अनिवार्य था। नए कानून में पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों के लिए यह अवधि घटाकर 6 साल कर दी गई है। मौजूदा क़ानून के तहत भारत में अवैध तरीके से दाखिल होने वाले लोगों को नागरिकता नहीं मिल सकती थी और उन्हें वापस उनके देश भेजने या हिरासत में रखने का प्रावधान था।

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गंदी गालियों के साथ ‘ओम’ का उच्चारण, जानबूझकर हिंदू धर्म का अपमान: रॉक बैंड के 4 सदस्य गिरफ़्तार

एक रॉक बैंड है, नाम है – दस्तान लाइव। इसके चार सदस्यों को पणजी पुलिस ने बुधवार (18 दिसंबर) को शहर में चल रहे सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल में उनके प्रदर्शन के दौरान हिंदू धर्म का अपमान करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया।

ख़बर के अनुसार, दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट के वकील वेंकट कृष्ण कुंदरू की शिक़ायत पर बुधवार दोपहर 2 बजे बैंड के चारों सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया, लेकिन फिर बाद में उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया गया। गिरप़्तार किए गए बैंड के सदस्यों में सुमंत चंद्रशेखर बालाकृष्णन (34), दिल्ली के अनिर्बान घोष (37) बेंगलुरु से निर्मला रविंद्रन (45) और शिवा पाठक (40) शामिल थे।

कुंदरू ने कहा कि दास्तान लाइव समूह ने “सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल 2019 के मंच का दुरुपयोग किया।” उन्होंने एक ऐसे गाने का प्रदर्शन किया, जिसमें हिंदू धर्म का “अपमान” किया गया। इस समूह ने मंगलवार (17 दिसंबर) को 8 से 10 बजे के बीच कैम्पल स्थित दयानंद बंदोदकर ग्राउंड में प्रदर्शन किया।

शिक़ायत में कहा गया है कि दास्तान लाइव रॉक बैंड के समूह ने अपमानजनक (गालियाँ) शब्दों के साथ “ओम” का उच्चारण किया। इसके अलावा, उन्होंने जानबूझकर हिंदू धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत किया और सेरेंडिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल 2019 के मंच का दुरुपयोग किया।

इस मामले पर पुलिस ने बताया कि प्रत्येक को 20,000 रुपए के बॉण्ड पर ज़मानत दी गई है। इसके साथ ही अब वे गोवा से बाहर जाने के लिए आज़ाद हैं। पुलिस ने कहा कि आगे की जाँच के लिए अगर ज़रूरत पड़ी तो इन चारों सदस्यों को पेश होना पड़ेगा। इस मामले की जाँच पुलिस निरीक्षक सुभाष गोदकर कर रहे हैं।

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‘हम मांदर बजाएँगे… रेणुका सिंह को नचाएँगे’ – केंद्रीय मंत्री और BJP महिला नेता के लिए कॉन्ग्रेसी मंत्री के बोल

छत्तीसगढ़ में नगरीय चुनाव की सरगर्मियाँ तेज़ हैं, वहीं दूसरी तरफ़ बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बड़े नेता एक दूसरे के ख़िलाफ़ जमकर बयानबाज़ी करते नज़र आ रहे हैं। नगरीय निकाय चुनाव के घोषणा पत्र के विमोचन के लिए अंबिकापुर पहुँची केंद्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रदेश में हो रहे आदिवासी नृत्य महोत्सव में उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया है। 

रेणुका सिंह ने इस बात पर आपत्ति जताई कि घूम-घूम कर सभी को निमंत्रित किया जा रहा है, आमंत्रित किया जा रहा है, लेकिन उन्हें इसकी सूचना तक नहीं मिली है। इसके अलावा उन्होंने यह दावा भी किया कि वो इससे बड़ा आदिवासी महोत्सव आयोजित करेंगी और उस महोत्सव में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाएँगी।

निमंत्रण न मिलने की बात पर रेणुका सिंह ने प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत पर भी निशाना साधा। इसके पलटवार में अमरजीत भगत ने जो जवाब दिया, उससे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई। उन्होंने कहा, ”उन्हें इतनी जल्दबाज़ी क्यों है, हम उन्हें नहीं भूल सकते, ज़रूर बुलाएँगे, वो तैयार रहें, उन्हें नचाएँगे और हम मांदर बजाएँगे।”

इसके अलावा, मंत्री अमरजीत भगत ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के लोग अपने प्रधानमंत्री की तरह सिर्फ़ बड़ी-बड़ी बातें करना जानते हैं। दरअसल, प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन करने जा रही है। इसमें शामिल होने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया जा रहा है। पिछले दिनों केन्द्रीय मंत्री रेणुका सिंह सरगुजा के दौरे पर थीं, इस दौरान उन्होंने भाजपा के निकाय चुनाव के घोषणा पत्र का विमोचन किया और पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कॉन्ग्रेस ने जो आदिवासी नृत्य समारोह रखा है, उसमें सरगुजा के आदिवासी नेताओं को निमंत्रण ना देकर देश-विदेश के नेता मंत्रियों को आमंत्रित किया जा रहा है।

वहीं, बुधवार (18 दिसंबर) को जब पत्रकारों ने रेणुका सिंह की इस नाराज़गी की जानकारी संस्कृति मंत्री को दी तो उन्होंने कहा:

“जब पूरे देश के आदिवासी नृत्य को यहाँ आमंत्रित किया जा रहा है, देश की कला को यहाँ आमंत्रित किया जा रहा है तो रेणुका सिंह को क्यों छोड़ेंगे, रेणुका सिंह को भी नचाएँगे और हम मांदर झोलेंगे (बजाएँगे)।”

इसके आगे उन्होंने रेणुका सिंह को ललकारते हुए कहा कि वो इस समारोह में आने की तैयारी कर लें, यहाँ आने के लिए साहस होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो कई बार लोगों को न्योता भेजते हैं, लेकिन समारोह में आने का उनमें साहस ही नहीं रहता। केवल राजनीतिक बात करना अच्छी बात नहीं होती।

प्रदेश सरकार के संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत के इस बयान के केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने पलटवार करते हुए कहा कि वो आदिवासी महोत्सव में नाचेंगी, अगर अमरजीत भगत मांदर बजाएँगे। उन्होंने कहा, “अमरजीत सिंह मांदर बजाएँ, मैं नाचूँगी। अपनी परंपरा और संस्कृति के बढ़ावे के लिए नृत्य करने से मैं छोटी नहीं हो जाऊँगी। अपनी संस्कृति को प्रसारित करने के लिए कई लोग नाचते हैं, तो उसमें बुरा क्या है?”

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