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स्टेशन पर ट्रेन जैसे ही रुकी, जुमे की नमाज़ के बाद 700 लोगों की भीड़ एक मस्जिद से निकली और…

नागरिकता संशोधन कानून (CAB) के विरोध के नाम पर देश के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। ज्यादातर हिंसा में समुदाय विशेष के लोगों की संलिप्तता देखी जा रही है। हालाँकि, मीडिया का एक बड़ा वर्ग इस हिंसा पर परदा डालने के लिए इसकी भयावहता की चर्चा न कर इसे CAB का विरोध भर बता प्रचारित कर रहा है है। इनमें कुणाल कमरा जैसे कथित हास्य कलाकार भी शामिल हैं। ख़ुद को स्टैंड-अप कॉमेडियन बताने वाले कमरा अक़्सर हिन्दू देवी-देवताओं का मज़ाक बनाने और पीएम मोदी का अपमान करने के लिए चर्चा में रहते हैं।

पश्चिम बंगाल के एक वकील ने कैब के ख़िलाफ़ विरो- प्रदर्शन के नाम पर हो रही हिंसक वारदातों पर कुणाल कमरा का एक फेसबुक पोस्ट शेयर किया। इसमें दिखाया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद माचिस और तेल से देश में आग लगाने के बाद चिंता व्यक्त कर रहे होते हैं कि मेरा देश जल रहा है। कुणाल कमरा के इस पोस्ट को पश्चिम बंगाल के वकील शंखदीप सोम ने शेयर किया। शंखदीप को शायद पता नहीं था कि जिस आगजनी के लिए वो पीएम मोदी को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं, जल्द ही उसके असली गुनहगारों से उनका पाला पड़ने वाला है।

शुक्रवार (दिसंबर 13, 2019) को सुबह 10 बजे कुणाल कमरा के पोस्ट को शेयर करने के 24 घंटे के भीतर शंखदीप ने अपने-आप को कैब के नाम पर प्रदर्शन लोगों से घिरा पाया। रात साढ़े 9 बजे के क़रीब उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से अपनी आपबीती शेयर की। उन्होंने लिखा कि ये पहली बार है जब वो किसी बड़े दंगे की चपेट में आ गए हैं और उन्हें बहुत डर लग रहा है। हावड़ा-चेन्नई एक्सप्रेस जब उलूबेरिया स्टेशन पर पहुँची, तब उन्होने मजहबी भीड़ को दंगा जैसे हालात पैदा करते हुए देखा। उस ट्रेन में वो भी सवार थे। उन्हीं की शब्दों में पढ़ें कि कैसे क्या हुआ:

“स्टेशन पर ट्रेन जैसे ही रुकी, जुमे की नमाज़ के बाद 700 लोगों की भीड़ बगल की एक मस्जिद से निकली और उस असामाजिक तत्वों ने रेलवे लाइन को ही पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। उनके हाथों में कैब और एनआरसी विरोधी पोस्टर्स थे। उन दंगाइयों में अधिकतर युवा थे, कई तो 7-8 साल के बच्चे भी थे। उन्होंने कुरता-पायजामा और इस्लामी टोपी पहन रखी थी। उनके हाथों में डंडे, पत्थर और रॉड थे। सबसे पहले तो उन्होंने ‘हमसफ़र एक्सप्रेस’ की खिड़कियों को तोड़ डाला। इसके बाद उन्होंने हमारे ट्रेन पर पत्थरबाजी शुरू की। बुजुर्ग यात्री सहमे हुए थे और बच्चे रो रहे थे। ये दृश्य देख कर मेरा दिल दहल उठा। दंगाई भीड़ रॉड से खिड़कियों को तोड़ते हुए यात्रियों को डरा-सहमा देख कर ठहाके लगा रही थी।”

मुस्लिम भीड़ का उपद्रव: शंखदीप की आपबीती

सहमे शंखदीप ने बताया कि यह सब देख उनकी हालत जिन्दा लाश जैसी हो गई। उन्हें डर था कि एक पत्थर या फिर रॉड के एक प्रहार भी उनकी तरफ आया तो उससे कुछ भी हो सकता है। स्थानीय पुलिस कहीं भी नहीं दिख रही थी और न ही उसने दंगाइयों को रोकने की कोशिश की। शंखदीप ने लिखा कि काफ़ी देर के बाद आरपीएफ की एक बटालियन आई, जिसने दंगाइयों पर लाठीचार्ज किया और उन्हें खदेड़ा। भीड़ को खदेड़ने के लिए आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े।

लेकिन, तब तक ट्रेन के इंजन को ख़ासा नुकसान पहुँचाया जा चुका था। ड्राइवर घायल हो चुका था। दंगाइयों ने क़रीब 4 घंटे तक सभी यात्रियों को बंधक बना कर रखा। शंखदीप की इस आपबीती को सोशल मीडिया पर ख़ूब शेयर किया गया। ये भी ध्यान देने वाली बात है कि सुबह में यही वकील मीम शेयर कर रहा था कि पीएम मोदी चारों तरफ़ आग लगा रहे हैं, लेकिन शाम तक जब उसे ख़ुद अनुभव हुआ और वो डर के उस माहौल से गुजरा, तब उसे समझ आया कि कुर्ता-पायजामा और इस्लामी स्कल-कैप पहनी भीड़ जुमे के नमाज के बाद मस्जिद से निकल कर आतंक मचा रही है।

ख़ुद से सहानुभूति जताने वाली की तुलना दंगाई भीड़ से!

शंखदीप को लोगों की सहानुभूति भी रास नहीं आई। उसने बाद में लिखा कि भाजपा आईटी सेल उसकी बातों का ग़लत इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने लिखा कि कैब और एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शन को बदनाम करने के लिए उनके फेसबुक पोस्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं पर आक्रमण करते हुए कहा कि उनलोगों ने अपने फ़ायदे के लिए उन्हें ट्विटर पर ट्रेंड कराया। उन्होंने लिखा कि उनके साथ हुई घटनाओं को एक ‘सिकुलर व्यक्ति की घर-वापसी’ के तर्ज पर पेश किया गया। इसके बाद उन्होंने भाजपा को भी मजहबी दंगाइयों की तरह ही विभाजनकारी और दुष्ट ताक़त करार दिया।

कुणाल कमरा के फैन शंखदीप ने अजीबोगरीब तर्क देते हुए 4 घंटे तक रेलवे स्टेशन को बंधक बना कर रखने वाली दंगाई भीड़ की तुलना ट्वीट करने वाले लोगों से कर दी। उन्होंने लिखा कि फेक न्यूज़ फैलाने वाली उन्हीं दंगाइयों की तरह हैं। जहाँ एक तरफ़ उलूबेरिया स्टेशन पर पत्थर और रॉड के डर से उन्हें अपनी जान की चिंता सता रही थी, वहाँ से निकलते ही उन्होंने सोशल मीडिया पर उनसे सहानुभूति जताने वाले लोगों से उसी भीड़ की तुलना करनी शुरू कर दी, जिसने रेलवे स्टेशन पर डर का माहौल बनाया और सार्वजनिक संपत्ति को जम कर नुक़सान पहुँचाया।

शंखदीप ने फिर बराबरी और सेकुलरिज्म की बातें शुरू कर दी। हो सकता है कि तब तक उनके मन से वो डर निकल गया हो, जो उन्हें तब लग रहा था जब वो उलूबेरिया स्टेशन पर खड़ी ट्रेन के किसी कोने में जान बचाने के लिए दुबके हुए थे। सोशल मीडिया पर चंद पोस्ट शेयर करने वाले की तुलना महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को नुकसान पहुँचाने वाले दंगाइयों से करने वाले वकील शंखदीप शायद भूल गए कि जुमे की नमाज़ के बाद हिंसा होना और उस हिंसा का शिकार बने व्यक्ति से सहानुभति जताना, दोनों एक नहीं है। सेकुलरिज्म का नंगा नाच देखने के बाद फिर से सेकुलरिज्म का राग अलापने वाले वकील साहब फिर से कुणाल कमरा मोड में लौट आए ऑपइंडिया तक पर भी निशाना साधा।

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बलात्कारी और हत्यारों समेत 161 को माफी, 419 की सजा कम: इस्तीफे से पहले ये कैसी रहमदिली

एक गवर्नर ने पद छोड़ने से पहले विभिन्न मामलों में दोषी 161 अपराधियों की सजा माफ कर दी। मामला अमेरिका के केंटकी का है। केंटकी के पूर्व गवर्नर मैट बेविन ने पद छोड़ने से ठीक पहले इन अपराधियों को माफी दी। बेविन ने जिनकी सजा माफ़ की उनमें रेप और हत्या जैसे मामलों के दोषी भी शामिल हैं।

इसके अलावा बेविन ने 419 लोगों की सजा भी कम कर दी। जानकारी के मुताबिक सजा माफ किए जाने वालों में वह हत्यारा भी शामिल है, जिसके भाई ने रिपब्लिकन पार्टी के लिए फंड इकट्ठा किया था। बता दें कि पिछले महीने नवंबर में ही रिपब्लिकन पार्टी के गवर्नर मैट बेविन, डेमोक्रेटिक पार्टी के एंडी बेशिअर से चुनाव हार गए थे। 5 नवंबर को अमेरिका के केंटकी में चुनाव हुआ था और गवर्नर ने हार के बाद इसी महीने पद छोड़ा।

9 साल की नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार के एक दोषी को भी माफी दी गई है। दोषी को पिछले साल 23 साल के लिए जेल की सजा सुनाई गई थी। हत्या के दोषी पैट्रिक ब्रिआन बेकर को भी माफी दी गई है। पैट्रिक को 17 साल की सजा हुई थी, लेकिन अभी उसने जेल में सिर्फ 2 साल ही बिताए थे कि गवर्नर ने उसे 9 दिसंबर को माफी दे दी। खबर के अनुसार, पैट्रिक ब्रिआन के परिवार ने मैट बेविन को प्रचार के लिए 15 लाख से अधिक का चंदा दिया था। पैट्रिक ब्रिआन को 2017 में दोषी ठहराया गया था। जिसमें अंधाधुंध नरसंहार, डकैती, पुलिस अधिकारी की हत्या जैसे कई अपराध शामिल हैं।

इसके अलावा अपने ही माता-पिता की हत्या के दोषी ब्लेक वॉकर को भी माफी दी गई है। माफी पाने वालों में डेटन जोन्स भी शामिल है, जो 15 साल के लड़के के साथ यौन उत्पीड़न करने का दोषी है। मैट बेविन ने अपने 6 हफ्ते के बेटे की हत्या के दोषी कर्ट स्मिथ, एक महिला की हत्या कर उसका सिर काट देने वाले डेलमर पार्टिन और अपने नवजात बेटे को घर के बाहर मरने के लिए छोड़ देने वाली एन हारलेस भी माफी दे दी।

इस तरह अचानक से दोषियों की सजा माफ कर देने से कानूनी प्रक्रिया को तगड़ा झटका लगा है। राज्य अभियोजकों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि उन्हें बेविन के फैसले पर परामर्श नहीं दिया था और पीड़ितों के परिवारों को भी अग्रिम रूप से सूचित नहीं किया गया था। बेविन के इस फैसले से पीड़ितों के परिजनों में नाराजगी है। वहीं बेविन ने कई ट्वीट कर अपने फैसले का बचाव किया और कहा कि उन्होंने माफी दिए जाने वाले हर केस का खुद अध्ययन किया है।

पैट्रिक ब्रिआन बेकर की सजा माफ करने को लेकर कहा कि उसके खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे। लेकिन जज डेविड विलियम्स ने इससे असहमति जताई है। जज का कहना है कि 30 साल की सर्विस में उन्होंने इससे दमदार केस नहीं देखा। सबूत काफी अधिक थे। इतने बड़े पैमाने पर अपराधियों की किसी एक गवर्नर द्वारा सजा माफ करने का ये अनूठा मामला है।

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सावरकर पर जाएगी उद्धव सरकार! मायावती ने कॉन्ग्रेस को ललकारा, राहुल गाँधी के बचाव में एनसीपी

सावरकर पर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के बयान से शुरू हुई सियासी लड़ाई में बसपा सुप्रीमो मायावती की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने कहा है कि शिवसेना अपने मूल एजेंडे पर कायम है। नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB) का समर्थन कर भी उसने यह संदेश दिया था। अब सावरकर पर भी उसने साफ कर दिया है कि उसे कॉन्ग्रेस का रुख बर्दाश्त नहीं है। ऐसे में उसके साथ कॉन्ग्रेस का बना रहना नौटंकी के सिवा कुछ नहीं है।

इधर, शरद पवार की पार्टी एनसीपी राहुल गॉंधी के बचाव में आगे आई है। एनसीपी नेता और उद्धव ठाकरे के कैबिनेट सहयोगी छगन भुजबल ने कहा है कि जरूरी नहीं है कि हरेक व्यक्ति सभी बातों से सहमत ही हो। सावरकर को लेकर राहुल गॉंधी के अपने विचार हैं। भुजबल ने कहा कि सावरकर गाय को माता नहीं मानते थे, लेकिन बीजेपी मानती है। वहीं, शरद पवार के भतीजे और पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने उम्मीद जताई है कि सोनिया गॉंधी, उद्धव ठाकरे और शरद पवार मिलकर इसका समाधान खोज लेंगे।

महाराष्ट्र में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के महाविकास अघाड़ी की सरकार चल रही है। इसके मुखिया शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे हैं। लेकिन, सरकार गठन के बाद से ही तीनों दलों के मतभेद जाहिर होते रहे हैं। इसके कारण साथ लेने वाले मंत्रियों को विभाग बॉंटने में ​उद्धव को करीब 15 दिन लग गए थे।

लोकसभा में जब शिवसेना ने कैब का समर्थन किया था तो कॉन्ग्रेस ने इसको लेकर आपत्ति जताई थी। इसके बाद राज्यसभा में शिवसेना ने इस बिल पर मतदान के दौरान वॉक आउट कर अप्रत्यक्ष तौर पर सरकार का समर्थन किया था। अब सावरकर को लेकर दोनों पार्टियॉं आमने-सामने हैं। कॉन्ग्रेस की दुविधा देखते हुए मायावती ने उसे अपनी स्थिति स्पष्ट करने की चुनौती दी है।

मायावती ने ट्वीट कर कहा है, “शिवसेना अपने मूल एजेंडे पर अभी भी कायम है। उसने नागरिकता संशोधन बिल पर केंद्र सरकार का साथ दिया और अब सावरकर को भी लेकर इनको कॉन्ग्रेस का रवैया बर्दाश्त नहीं है। किन्तु फिर भी कांग्रेस पार्टी महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना के साथ अभी भी बनी हुई है। यह कॉन्ग्रेस का दोहरा चरित्र नहीं है तो और क्या है?”

उन्होंने कहा है, “कॉन्ग्रेस को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वरना यह अपनी पार्टी की कमजोरियों पर से जनता का ध्यान बॉंटने की उसकी कोरी नाटकबाजी ही मानी जाएगी।” इससे पहले सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने कहा है कि इस बयान के लिए उद्धव ठाकरे को राहुल गॉंधी की सार्वजनिक रूप से पिटाई करनी चाहिए।

गौरतलब है कि राहुल गॉंधी ने सावरकर को लेकर टिप्पणी शनिवार (दिसंबर 14, 2019) को रामलीला मैदान में कॉन्ग्रेस की रैली के दौरान की थी। ‘रेप इन इंडिया’ वाली टिप्पणी के लिए भाजपा की माफी की मॉंग पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘संसद में शुक्रवार को भाजपा के लोगों ने कहा कि मैं अपने भाषण के लिए माफी मॉंगूॅं। मुझे कहते हैं कि सही बात बोलने के लिए माफी मॉंगो। मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मेरा नाम राहुल गॉंधी है। मैं सच्चाई के लिए कभी माफी नहीं मॉंगूॅंगा। मर जाऊँगा मगर माफी नहीं मॉंगूॅंगा और न कोई कॉन्ग्रेस वाला माफी मॉंगेगा।’’

इसके बाद से ही वे भाजपा और शिवसेना के निशाने पर हैं। दोनों दलों के सुर एक जैसे हैं। शिवसेना सांसद संजय राउत ने सावरकर को देश का आदर्श बताते हुए कहा था कि इस पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने सावरकर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियॉं “सावरकर माने तेज, सावरकर माने त्याग, सावरकर माने तप, सावरकर माने तत्व” भी ट्वीट की है।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गॉंधी के बयान को शर्मनाक बताया है। भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्ह राव ने कहा है, “राहुल गॉंधी के लिए अधिक उपयुक्त नाम ‘राहुल जिन्ना’ है। मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति और सोच उन्हें मोहम्मद अली जिन्ना का वारिस बनाती है, सावरकर का नहीं।’’ भाजपा और शिवसेना के एक सुर में बोलने के बाद से दोनों दलों के फिर से साथ आने को लेकर अटकलें लगनी भी शुरू हो गई है। बीते दिनों शिवसेना के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी ने इसके संकेत भी दिए थे।

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कौन हैं वे ‘बाहरी’ जिनके हाथों में खेले जामिया के छात्र: लगाए मजहबी नारे, किया बलवा

नागरिकता संशोधन कानून (CAB) से भारतीयों का कोई लेना देना नहीं है। बावजूद इसके जामिया मिलिया इस्लामिया में शुक्रवार को हिंसक प्रदर्शन हुआ और मजहबी नारे लगाए गए। जामिया प्रशासन के एक बयान से इस घटना के पीछे गहरी साजिश होने के संकेत मिले हैं। प्रशासन का कहना है कि विरोध-प्रदर्शन में बाहरी लोग घुस आए थे जिसके कारण हिंसक हो गया।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि वे कौन लोग हैं जो बाहर से आकर जामिया के छात्रों के प्रदर्शन में शामिल हुए थे? प्रदर्शन को हिंसक बनाने के पीछे किनका हाथ है? किनके इशारे पर उन्मादी नारे लगे? उल्लेखनीय है कि यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाकों में समुदाय विशेष के लोगों की घनी आबादी है।

रविवार (15 दिसंबर) को जामिया के जनसम्पर्क अधिकारी अहमद अज़ीम ने कहा, “विश्वविद्यालय परिसर में न तो प्रदर्शन हुआ और न ही यह विरोध जामिया का था। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने इसमें भाग लिया। हमने छात्रों के साथ बातचीत की, अब वे शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे हैं।”

इससे पहले शनिवार को विश्वविद्यालय ने कहा था, “सभी परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया है। शीतकालीन अवकाश 16 दिसंबर, 2019 से 5 जनवरी, 2020 तक घोषित किया गया है। विश्वविद्यालय 6 जनवरी 2020 को खुलेगा।”

जामिया में शुक्रवार को हुए प्रदर्शन में 12 से अधिक लोग घायल हो गए थे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया था। छात्रों ने कैंपस और बाहर सड़क पर फजर (सुबह की पहली नमाज) की नमाज के बाद 8 से 10 बजे के बीच सेमेस्टर परीक्षाएँ लेने पहुँचे शिक्षकों को विभागों से बाहर निकाल ताला लगा दिया था। लेकिन, प्रशासन का दावा है कि इन प्रदर्शनकारियों में छात्रों की संख्या बेहद कम थी। ज्यादातर बाहरी थे।

प्रदर्शन के कुछ वीडियो सामने आए थे। इसमें छात्र ‘अल्लाहु अकबर‘ और ‘नारा-ए-तकबीर’ के नारे लगाते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। “तेरा मेरा रिश्ता क्या- ला इलाहा इल्लल्लाह, ये शहर जगमगाएगा- नूर-ए-इलाहा से”, जैसे भी नारे लगे थे। अमूमन ऐसे नारे कश्मीर में पाकिस्तान के समर्थन में आतंकी लगाते सुनाई पड़ते रहे हैं।

छात्रों की हिंसक भीड़ पुलिस को उकसाते और गाली दे रही थी। स्थिति को नियंत्रित करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा था।

जामिया में मजहबी नारे ‘नारा-ए-तकबीर’, ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ क्यों लग रहे? विरोध तो सरकार का है न?

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कॉन्ग्रेसी मंत्री ने DSP को दी जान से मारने की धमकी, कहा- बंद करो जाँच: बात नहीं मानी तो सस्पेंड करवाया

पंजाब में जनता की सुरक्षा करने वाली पुलिस ख़ुद ही सुरक्षित नहीं है। लुधियाना के डीएसपी बीएस सेखों ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के एक मंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा वो कभी भी उनकी हत्या करवा सकते हैं। हाउसिंग सोसायटी मामले की जाँच के दौरान राज्य मंत्री भारत भूषण आशू ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। डीएसपी ने कहा, “मंत्री चाहते थे कि मामला बंद हो जाए। जब मैंने इनकार किया, तो मुझे जान से मारने की धमकी देने लगे। अब मुझे निलंबित कर दिया गया है।”

डीएसपी का कहना है कि इस मामले से संबंधित शिक़ायत 10 महीने पहले दर्ज कराई थी, लेकिन अभी तक मंत्री के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि अब वो डीजीपी से बात करेंगे। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस बारे में सब कुछ मालूम है।

इस मामले को विस्तार से बताते हुए डीसीपी ने बताया कि जब वो लुधियाना कॉरपोरेशन में तैनात थे, तब उन्होंने एक हाउसिंग सोसायटी का घोटाला पकड़ा था। इसमें कई बड़े अफ़सर और लैंड माफ़ियाओं के नाम सामने आए थे। इसके बाद राज्य मंत्री भारत भूषण आशू ने मामले को बंद करने की धमकी दी। इस धमकी का एक ऑडियो डीसीपी ने वायरल कर दिया था, जिसके बाद से ही मंत्री आशू उनकी जान के पीछे हाथ धोकर पड़ गए।

डीसीपी ने बताया कि उन्हें निलंबित का परेशान किया जा रहा है। उनका गनमैन हटा दिया गया। पुलिस विभाग की ओर से दी हुई गाड़ी वापस ले ली गई। इसके अलावा उनके हथियार भी विभाग ने ले लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब इसलिए किया गया जिससे उनकी हत्या करवाई जा सके।

उन्होंने कहा कि जब पंजाब में मिलिटेंसी थी तब उनका इन लोगों (मंत्री) से संबंध था। इस मामले में उनके ख़िलाफ़ FIR भी दर्ज हुई थी और उस केस में वे सज़ा भी काट कर आए। डीएसपी ने कहा कि मिलिटेंसी के टाइम पर भारत भूषण आशू ने खूँखार मिलिटेंट को अपने डेयरी फार्म में छुपाया था। उन्होंने इसके समर्थन में पुराने पेपर की कटिंग भी दिखाई। इसके अलावा उन्होंने कहा, “मैंने डीजीपी को कई बार बताया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा मुझे ही ही सस्पेंड कर दिया गया”

ख़बर के अनुसार, डीएसपी बीएस सेखों ने इस मामले में ह्यूमन राइट्स और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा है कि यदि उन्हें या उनके परिवार में किसी को कुछ होता है तो इसकी सारी ज़िम्मेदारी राज्य मंत्री भारत भूषण और पंजाब सरकार की होगी।

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ऐसा दिखता था मोस्टवांटेड नक्सली: 30 साल बाद सामने आई तस्वीर, ₹1.37 करोड़ का इनामी

कई भीषण हमलों के मास्टरमाइंड रहे नक्सली रमन्ना के मरने की पुष्टि हो गई है। वह सीपीआई माओवादी की केंद्रीय कमेटी का सदस्य और दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव था। शनिवार (दिसंबर 14, 2019) को नक्सलियों के केंद्रीय प्रवक्ता विकल्प ने एक प्रेसनोट जारी कर उसकी मौत की पुष्टि की। प्रेसनोट के साथ उसकी एक तस्वीर भी जारी की गई है। करीब 30 साल उसकी कोई तस्वीर सामने आई है। पुलिस रिकॉर्ड में भी उसकी 30 साल पुरानी फोटो ही थी। 

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर में हुए ताड़मेटला और झीरम जैसे कई बड़े घटनाओं का मास्टरमाइंड कुख्यात नक्सली कमांडर रमन्ना की मौत हार्ट अटैक से हुई। नक्सल नेताओं ने लंबी चुप्पी के बाद उसके मरने की पुष्टि की है।


माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी द्वारा जारी किया गया प्रेसनोट

बता दें कि रमन्ना पर कुल 1.37 करोड़ रुपए का ईनाम था। उस पर महाराष्ट्र ने 60 लाख रुपए, छत्तीसगढ़ ने 40 लाख रुपए, तेलंगाना ने 25 लाख रुपए और झारखंड पुलिस ने 12 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया था। वह 2010 में छत्‍तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 76 सीआरपीएफ जवानों की मौत और झीरम घाटी में कॉन्ग्रेस नेताओं पर हुए भीषण हमले के लिए जिम्‍मेदार माना जाता है। रमन्ना जगदलपुर जिला जेल से 25 जून 1989 को दो अन्य नक्सलियों के साथ फरार हो गया था। इसके बाद पुलिस न तो उसे ढूँढ़ पाई न ही उसकी कोई तस्वीर हासिल कर पाई।


माओवादी दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी द्वारा जारी किया गया प्रेसनोट

रमन्ना की तस्वीर लाने वाले को भी पुलिस ने लाखों रुपए का ईनाम देने की बात कही थी। वह देश का सबसे बड़ा ईनामी नक्सली था। रमन्ना के ऊपर कई बड़ी वारदातों के साथ ही बड़ी संख्या में लोगों को मौत के घाट उतारने का आरोप है।

तेलंगाना के वारंगल जिले के रमन्ना ने 15 साल की उम्र में हथियार उठा लिया था। तभी से वह दक्षिण बस्तर के सुकमा व बीजापुर जिले के बीच के जंगलों में सक्रिय रहा। रमन्ना का बेटा श्रीकांत उर्फ रंजीत भी पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बटालियन में काम करता है। रमन्ना का भाई परशरामुलु भी एक नक्सली नेता था और 1994 में मारा गया। उसकी पत्नी भी एक नक्सली थी और वह भी मुठभेड़ में मारी गई थी।

नक्सल कमांडर रमन्ना की मौत पर सस्पेंस बना हुआ था। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के पास यह सूचना थी कि तेलंगाना से सटे बीजापुर जिले के जंगल में रमन्ना का अंतिम संस्कार किया गया, लेकिन नक्सली इस मामले में चुप्पी साधे हुए थे। मगर अब माओवादी प्रवक्ता विकल्प ने रमन्ना की मौत की पुष्टि कर दी है।

BJP, संघ और बजरंग दल के विस्तार से सहमे नक्सली, हिंदूवादी संगठनों के ख़िलाफ़ रच रहे बड़ी साज़िश

सीताराम! नक्सली आतंकियों के नाजायज बापों को राम से इतनी एलर्जी क्यों है…

आतंकियों से भी ज्यादा लोगों की जान लेते हैं नक्सली, इसलिए अमित शाह ने लाल आतंक के खिलाफ खोला मोर्चा

पाकिस्तान जिंदाबाद पर बाबरी पक्षकार को पीटने वाली शूटर ने कहा- मैं दूँगी निर्भया के गुनहगारों को फाँसी

‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने पर बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इक़बाल अंसारी की पिटाई करने वाली इंटरनेशनल शूटर वर्तिका सिंह ने निर्भया रेप केस के चारों दोषियों को फाँसी के फंदे पर लटकाने की इच्छा जाहिर की है। वर्तिका सिंह ने इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को खून से पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि निर्भया के दोषियों को फाँसी पर लटकने का मौका एक महिला को मिलना चाहिए।

वर्तिका सिंह ने लिखा है, “निर्भया केस के गुनहगारों को मेरे हाथों फाँसी होनी चाहिए। इससे देश भर में यह संदेश जाएगा कि एक महिला भी फाँसी दे सकती है। मैं चाहती हूँ कि महिला कलाकार और सांसद मेरा समर्थन करें। मैं उम्मीद करती हूँ कि इससे समाज में बदलाव आएगा।” वर्तिका के इस सुझाव को सोशल मीडिया पर भी समर्थन मिल रहा है।

बता दें कि कि निर्भया गैंगरेप-हत्या मामले में चारों दोषियों पवन, मुकेश, अक्षय और विनय को जल्द फाँसी देने की याचिका पर 18 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। निर्भया की माँ ने कहा कि चारों दोषी फाँसी की सजा से बचने के लिए कानूनी दांवपेंच अपना रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि 18 दिसंबर को अंतिम फैसला आएगा और डेथ वारंट जारी होने के बाद जल्द चारों को फाँसी दी जाएगी।

बताया जा रहा है कि कि फाँसी के डर से चारों दोषियों की भूख-प्यास खत्म हो गई है। दोषियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। तिहाड़ जेल में पिछले कुछ दिनों से फाँसी घर में डमी को फंदे पर लटकाने की प्रैक्टिस की जा रही थी। फिलहाल कानूनी प्रक्रियाओं को देखते हुए इसे रोक दिया गया है।

गौरतलब है कि सात साल पहले 16 दिसंबर 2012 को निर्भया के साथ 6 दरिंदों ने चलती बस में गैंगरेप किया था। 6 में से एक दोषी नाबालिग था, जो जुवेनाइल एक्ट के तहत अब छूट चुका है। वहीं एक आरोपित राम सिंह ने तिहाड़ में ही आत्महत्या कर ली थी। बाकी बचे चार दरिंदे फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। जघन्य अपराध के जुर्म में चारों को निचली अदालत ने फाँसी की सजा सुनाई थी, जिसे ऊपरी अदालतों ने भी कायम रखा था।

बता दें कि कुछ महीने पहले इक़बाल अंसारी के घर वर्तिका सिंह तीन तलाक़ सहित अन्य गंभीर मुद्दों पर चर्चा करने के लिए गई थी। इस दौरान दोनों के बीच गर्मागर्म बहस होने लगी और इकबाल अंसारी ने आरोप लगाया कि गुस्से में वर्तिका ने उन पर हमला कर दिया। हालाँकि, वर्तिका ने कहा है कि बातचीत के दौरान अंसारी ने ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे लगाए। वर्तिका सिंह ने कहा था कि बातचीत के दौरान इक़बाल अंसारी ने न सिर्फ़ पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को लेकर अपशब्द भी कहे थे।

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सावरकर के पोते ने कहा- राहुल गाँधी की सार्वजनिक रूप से पिटाई करें उद्धव ठाकरे

वीर सावरकर पर राहुल गॉंधी की टिप्पणी को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता जा रहा है। इस बयान के बाद से महाराष्ट्र में मिलकर सरकार चला रही शिवसेना और कॉन्ग्रेस के बीच तल्खी बढ़ गई है। वहीं, सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने कहा है कि इस बयान के लिए उद्धव ठाकरे को राहुल गॉंधी की सार्वजनिक रूप से पिटाई करनी चाहिए।

उन्होंने कहा, “यह अच्छा है कि राहुल गॉंधी, राहुल सावरकर नहीं हैं। ऐसा होता हम सबको अपना मुॅंह छिपाना पड़ता। अब हम उम्मीद करते हैं कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपना वादा निभाएँगे। वे कई बार कह चुके हैं कि यदि किसी ने सावरकर का अपमान किया तो वे उसे सार्वजनिक रूप से पीटेंगे। मैं उम्मीद करता हूॅं कि शिवसेना ने सावरकर पर अपना स्टैंड नहीं बदला होगा।”

बताया जा रहा है कि राहुल गाँधी के इस बयान से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे बेहद नाराज हैं। इस मसले पर वे कॉन्ग्रेस आलाकमान से बात करेंगे। उद्धव का कहना है कि ऐसे बयानों से बचा जाए जो गठबंधन के लिए ठीक नहीं है। इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने सावरकर को देश का आदर्श बताते हुए कहा था कि इस पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने सावरकर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियॉं “सावरकर माने तेज, सावरकर माने त्याग, सावरकर माने तप, सावरकर माने तत्व” भी ट्वीट की है।

संजय राउत ने कहा, “वीर सावरकर को लेकर राहुल गाँधी ने जो कुछ भी कहा, वो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेताओं से अपील करता हूँ कि वो वीर सावरकर के साहित्य को राहुल गाँधी को भेजें। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेताओं को दिल्ली जाकर राहुल गाँधी को सावरकर की किताबें गिफ्ट करनी चाहिए, ताकि वो सावरकर को समझ सकें और उनकी गलतफहमी दूर हो सके। कॉन्ग्रेस नेताओं को राहुल गाँधी को यह भी बताना चाहिए कि वीर सावरकर ने अंग्रेजों के खिलाफ किस तरह संघर्ष किया था और लड़ाई लड़ी थी।”

इससे पहले भी संजय राउत राहुल गाँधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि हिंदुत्व विचारक के प्रति श्रद्धा को लेकर कोई “समझौता” नहीं किया जा सकता। उन्होंने ट्वीट किया था, ‘‘वीर सावरकर न सिर्फ महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश के लिए आदर्श हैं। सावरकर का नाम राष्ट्र और स्वयं के बारे में गौरव को दर्शाता है। नेहरू और गाँधी की तरह सावरकर ने भी देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया। ऐसे प्रत्येक आदर्श को पूजनीय मानना चाहिए। इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता।”

गौरतलब है कि राहुल गॉंधी ने सावरकर को लेकर टिप्पणी शनिवार (दिसंबर 14, 2019) को रामलीला मैदान में कॉन्ग्रेस की रैली के दौरान की थी। ‘रेप इन इंडिया’ वाली टिप्पणी के लिए भाजपा की माफी की मॉंग पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘संसद में शुक्रवार को भाजपा के लोगों ने कहा कि मैं अपने भाषण के लिए माफी मॉंगूॅं। मुझे कहते हैं कि सही बात बोलने के लिए माफी मॉंगो। मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मेरा नाम राहुल गॉंधी है। मैं सच्चाई के लिए कभी माफी नहीं मॉंगूॅंगा। मर जाऊँगा मगर माफी नहीं मॉंगूॅंगा और न कोई कॉन्ग्रेस वाला माफी मॉंगेगा।’’

इसके बाद से ही वे भाजपा और शिवसेना के निशाने पर हैं। दोनों दलों के सुर एक जैसे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गॉंधी के बयान को शर्मनाक बताया है। भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्ह राव ने कहा है, “राहुल गॉंधी के लिए अधिक उपयुक्त नाम ‘राहुल जिन्ना’ है। मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति और सोच उन्हें मोहम्मद अली जिन्ना का वारिस बनाती है, सावरकर का नहीं।’’

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बंगाल: BJP सांसद अर्जुन सिंह की कार पर फेंका बम, विजयवर्गीय बोले- इन्हें खदेड़ने के लिए NRC जरूरी

नागरिकता संशोधन कानून (CAB) के खिलाफ पश्चिम बंगाल में हिंसक प्रदर्शन के बीच बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह पर हमले की खबर है। हालाँकि हमले में सांसद बाल-बाल बच गए, लेकिन इस अन्य शख्स जख्मी हो गया। घायल का नाम गणेश सिंह बताया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल के बैरकपुर से बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने बताया, “मैं कनकिनारा से लौट रहा था। मेरी कार के ऊपर ईंट से हमला किया गया और उसके बाद गाड़ी के नजदीक बम फेंका गया। पश्चिम बंगाल में कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा देना चाहिए।”

हमले में घायल गणेश सिंह को सांसद अर्जुन सिंह ने ही भाटपाड़ा स्टेट जनरल अस्पताल पहुँचाया। हालत गंभीर होने पर उसे कल्याणी जेएनएम हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है।

बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने हमले के लिए टीएमसी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने तृणमूल कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा, “टीएमसी के गुंडों ने मेरी कार पर ईंट फेंके। इसके बाद मैं अपनी कार से बाहर आया और देखा कि एक व्यक्ति जमीन पर पड़ा है। उस व्यक्ति का नाम गणेश सिंह है। वह शराब के नशे में था। इसके बाद अचानक मेरी कार पर बम फेंका गया।” बता दें कि अर्जुन सिंह जब गणेश सिंह को लेकर हॉस्पिटल पहुँचे थे, तो उस समय भी उनकी टीएमसी के कार्यकर्ताओं के साथ बहस हुई थी।

इस घटना के बाद से भाटपाड़ा में एक बार फिर तनाव पसर गया है। तनाव को देखते हुए यहाँ रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना ना हो। गौरतलब है कि इससे पहले भी भाजपा सांसद अर्जुन सिंह पर जानलेवा हमला हुआ हो चुका है। जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थीं।

इसी साल सितंबर में उत्तरी-24 परगना जिले में भी एक हमले में अर्जुन सिंह घायल हो गए थे, जिसमें उनके माथे पर कुछ टाँके लगे थे। दरअसल टीएमसी के लोग भाजपा के कार्यालय पर कब्जे की कोशिश कर रहे थे। इसकी जानकारी मिलने पर जब सिंह मौके पर पहुॅंचे तो उनकी कार में तोड़फोड़ की गई। इस हमले के पीछे भी उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं हाथ बताया था। 

इसके अलावा जुलाई में भी अर्जुन सिंह के उत्तर-24 परगना के भाटपाड़ा स्थिति आवास के बाहर बम फेंके जाने का मामला सामने आया था। सिंह ने इस हमले के पीछे भी टीएमसी कार्यकर्ताओं का हाथ होने का आरोप लगाया था। वहीं मई में लोकसभा चुनावों के दौरान भी अर्जुन सिंह ने बैरकपुर में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा उन पर हमले का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि CAB के विरोध में बंगाल में जुमे की नमाज के बाद कई जगहों पर हिंसा देखने को मिली थी।मुर्शिदाबाद जिले में एक रेलवे स्टेशन परिसर में शुक्रवार शाम हजारों की भीड़ ने आगजनी की थी। पूर्वी मिदनापुर जिले में भाजपा महासचिव सायंतन बसु की कार पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया था। हिंसा का हवाला देते हुए भाजपा महासचिव और बंगाल के पार्टी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इन्हीं हालातों से निपटने के लिए एनआरसी जरूरी है।

हिंसा का एक वीडियो ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा है, “जो ये सवाल उठा रहे हैं कि एनआरसी क्यों जरूरी है, उन्हें बंगाल की हालत पर नजर डालनी चाहिए। यहाँ हिंसा और आगजनी की घटनाओं में वही घुसपैठिए संलग्न हैं, जिन्हें ममता बनर्जी ने वोट बैंक की खातिर राज्य में बसा रखा है। इन्हें खदेड़ने के लिए ही ऐसा कानून जरूरी है।”

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सहयोगी दल एनसीपी के कोटे से मंत्री बनाए गए जयंत पाटिल और छगन भुजबल के विभाग बदल दिए हैं। अब जल संसाधन और क्षेत्रीय विकास मंत्रालय जयंत पाटिल के जिम्मे होगा। वहीं भुजबल को खाद्य और नागरिक आपूर्ति, अल्पसंख्यक विकास और कल्याण मंत्रालय मिला है। पहले जल संसाधन मंत्रालय भुजबल को और खाद्य पाटिल को दिया गया था।

राज्य में शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की गठबंधन सरकार बनने के करीब 15 दिन बाद उद्धव ने गुरुवार को मंत्रालयों का बॅंटवारा किया था। पाटिल के पास वित्त मंत्रालय भी है। माना जा रहा है कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजित पवार को यदि कैबिनेट विस्तार में जगह मिली तो वित्त मंत्रालय के साथ उन्हें उपमुख्यमंत्री का पद मिल सकता है।

दूसरी ओर, कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के सावरकर को लेकर दिए गए बयान ने भी प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। इस मसले पर भाजपा और शिवसेना के सुर एक जैसे हैं। इससे दोनों के जल्द साथ आने की अटकलों को बल मिला है। ये अटकलें बीते दिनों शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर जोशी के बयान से शुरू हुई थी। इससे पहले नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर भी कॉन्ग्रेस और शिवसेना का मतभेद सामने आ गया था।

शिवसेना सांसद संजय राउत ने राहुल गॉंधी के बयान को लेकर कहा है कि सावरकर पूरे देश के आदर्श हैं और उन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राहुल गॉंधी के बयान को शर्मनाक बताया है। उन्होंने कहा है कि राहुल गॉंधी को सावरकर के बारे में पता नहीं है। उन्होंने अंडमान जेल में 12 साल प्रताड़ना झेली थी, राहुल गॉंधी 12 घंटे भी नही झेल पाएँगे। फडणवीस ने कहा कि अपने नाम में गॉंधी लगाने से ही कोई गॉंधी नहीं बन जाता।

राहुल गॉंधी ने सावरकर को लेकर टिप्पणी शनिवार को रामलीला मैदान में कॉन्ग्रेस की रैली के दौरान की थी। ‘रेप इन इंडिया’ वाली टिप्पणी पर भाजपा माफी की मॉंग पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि उनका नाम ‘राहुल सावरकर’ नहीं है। वह सच बोलने के लिए कभी माफी नहीं मॉंगेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘संसद में शुक्रवार को भाजपा के लोगों ने कहा कि मैं अपने भाषण के लिए माफी मॉंगूॅं। मुझे कहते हैं कि सही बात बोलने के लिए माफी मॉंगो। मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मेरा नाम राहुल गॉंधी है। मैं सच्चाई के लिए कभी माफी नहीं मॉंगूॅंगा। मर जाऊँगा मगर माफी नहीं मॉंगूॅंगा औऱ न कोई कांग्रेस वाला माफी मॉंगेगा।’’

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि झूठे आरोप लगाना राहुल गॉंधी की पुरानी आदत हैं। उन्होंने कहा कि राहुल ने राफेल को लेकर भी झूठे दावे किए थे और बाद में माफी मॉंगी थी। आरएसएस पर बयान को लेकर उनके खिलाफ अदालत में मामला चल रहा है। बचकाना बयान देकर माफी नहीं मॉंगने पर अड़ना ये उनके व्यक्तित्व का हिस्सा है।

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