BHU पिछले काफी दिनों से सुर्ख़ियों में है। कभी अपने साफ-सुथरे छवि के लिए जाना जाने वाला महामना का ये परिसर कुछ सालों से आंदोलनों, प्रदर्शन, मारपीट और लाठीचार्ज का अड्डा बनता जा रहा है। ऐसा क्यों है, जब हमने इस पर वहाँ के विभिन्न संकायों के छात्रों से बात करने की कोशिश की, तो छात्रों ने कुछ चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
छात्रों का कहना है कि जब से BHU में वामपंथ का प्रकोप बढ़ना शुरू हुआ तब से यहाँ पढ़ाई कम और बेमतलब के लफड़े ज़्यादा हो रहे हैं। चाहे दो साल पहले का छेड़छाड़ का फर्जी मामला हो या यहाँ के छात्रों का चरित्रहनन, सबमें यहाँ के वामपंथी धड़े का बहुत बड़ा हाथ है। इन्हें शुरू से ही कॉन्ग्रेस का साथ मिलता रहा। अब तो यहाँ के सभी देश-विरोधी छोटे-छोटे संगठन मिलकर जॉइंट एक्शन कमिटी के बैनर तले आकर हर स्थापित व्यवस्था का विरोध करने लगे हैं, जिससे यहाँ पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर वहाँ के कई छात्रों ने बताया कि BHU में JNU के लोगों और वामपंथ समर्थकों की नियुक्ति तेज हुई है तभी से यहाँ भी वामपंथ का कोढ़ फ़ैल गया है। जिसके उपचार के लिए राष्ट्र, यहाँ के नागरिकों और मातृभूमि के लिए समर्पित छात्रों ने एक व्हाट्सअप ग्रुप बनाया है जिसे नाम दिया है ‘अखिल भारतीय बाँस योजना।’
जब ऑपइंडिया ने योजना के मकसद या प्रयोजन के बारे में तहकीकात की तो हमें BHU के छात्रों ने ही बताया, “इस परिसर को वामपंथी प्रकोप से, जहरीले वामपंथ से बचाने के लिए बनाया गया है। क्योंकि अब यहाँ भी आजादी के नारे लगने लगे हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में वामपंथियों को हिंदुत्व से ही आजादी चाहिए। इन्हें ब्राह्मणों से आजादी चाहिए। जितनी भी तरह की आए दिन इनकी आजादी की माँग है, उसे देखते हुए हम छात्रों ने वामपंथियों को ही यहाँ से खदेड़ने के लिए यह स्वयं सहायता समूह बनाया हैं।”
“लेकिन उसके लिए हम गाँधीवादी तरीका ही अपनाएँगे। शांतिपूर्ण तरीके से इनके हर नैरेटिव को काटना यहाँ के राष्ट्रवादी छात्रों का महामना प्रदत्त कर्तव्य है, जिसका हम तहे दिल से पालन करने के लिए वचनबद्ध हैं। क्योंकि हमें इस देश से प्यार है। महामना के उद्देश्यों और उनके आदर्शों से मुहब्बत है। यहाँ हम जातिवाद की विषबेल नहीं पनपने देंगे। इसीलिए जहरीले वामपंथ को विषहीन बना कर छोड़ना है।”
जब हमने इस योजना के संस्थापक सदस्यों से बात की तो उन्होंने इस पर थोड़ा और प्रकाश डाला। ‘अखिल भारतीय बाँस योजना’ दरअसल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा शुरू किया गया एक निकाय है। जब जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाए गए और उसके बाद देश के अन्य शिक्षण संस्थानों को अस्थिर और देशद्रोह के विष से व्याप्त करने की कोशिश की गई तब BHU के छात्रों ने तय किया कि एक ऐसा छात्र समूह बनाया जाए जो कि शिक्षण संस्थानो में जेहादी, नक्सली और देशद्रोही प्रवृत्ति का विरोध हर स्तर पर कर सके।
संस्थापकों ने अपने स्वयंसेवक छात्रों के बारे में बताया, “बाँस योजना के छात्र सोशल मीडिया से लेकर जमीनी विरोध तक हर स्तर पर ऐसे तत्वों का विरोध करने से नही चुकते। इनका मुख्य नारा है ‘जय बाँस-तय बाँस।’ बाँस को चूँकि आदिशस्त्र माना जाता है इसलिए उस प्रतीक को हमने अपनाया है।”
“बौद्धिक विमर्श, सोशल मीडिया के अभियान और जमीनी कार्रवाई सभी के लिए इनकी अपनी टीम है। राष्ट्रवादी संगठन जहाँ छवि, पहल और श्रेय के बारे में सोचते हुए कई बार अपने दायित्वों से चूक जाते है इसलिए बाँस योजना ने अपनी कार्यपद्धति भी ईजाद की है। इसमें जुड़ा हर व्यक्ति राष्ट्रीय पदाधिकारी होता है और इसमें सभी के अधिकार और निर्णय की शक्ति एक समान है ताकि कोई बड़ा और कोई छोटा न हो। इसका मूल मर्म यह है कि जब हम भारत माता की सेवा में लगे हो तो सभी सेवक और सेनानी है इसमें कोई बड़ा और छोटा हो ही नही सकता।”
“बाँस योजना की सैद्धान्तिक दृष्टि यह है कि देश और देश की संस्कृति से बड़ा कुछ नहीं होता इसलिए सभी कार्यक्रम और कार्य लक्ष्य आधारित होने चाहिए। इसलिए मार्ग कौन-सा अपनाया जाए यह विमर्श का विषय नही होना चाहिए।”
नोट-ऑपइंडिया इस तरह के किसी भी समूह और उसकी गतिविधियों का समर्थन नहीं करता है।
आज भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दो-दो खबरिया चैनलों को इंटरव्यू देते हुए कई बड़ी बातें कहीं। जहाँ CAA को लेकर चल रहे मौजूदा बवाल के बारे में उन्होंने दिल्ली पुलिस का पक्ष लेते हुए कहा कि अगर कोई आगजनी कर रहा हो तो पुलिस एक्शन नहीं लेगी तो क्या करेगी, वहीं राम जन्मभूमि मंदिर के ट्रस्ट के बारे में उन्होंने घोषणा की कि भाजपा का कोई सदस्य इसका सदस्य नहीं बनेगा।
राम जन्मभूमि मंदिर, जिसके लिए भाजपा ने दशकों और हिन्दुओं ने सैकड़ों साल लड़ाई लड़ी, के ट्रस्ट के बारे में अमित शाह ने कहा कि न भाजपाई इस ट्रस्ट के सदस्य बनेंगे, न ही मंदिर के निर्माण में सरकार का पैसा खर्च होगा। इसके लिए पैसा समाज से ही जुटाकर खर्च किया जाएगा।
श्री राम मंदिर ट्रस्ट में BJP का कोई सदस्य ट्रस्टी नहीं होगा और सरकार इसके लिए कोई पैसा भी खर्च नहीं करेगी l
नागरिकता संशोधन एक्ट के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें नरमी की “किंचित मात्र भी संभावना नहीं है।” साथ ही उन्होंने “लाखों-करोड़ों लोग जो अपना धर्म बचाने के लिए देश की शरण में आए हैं” के प्रति भारत का नैतिक दायित्व “नेहरू-लियाकत अली पैक्ट के अनुसार” बताया।
नागरिकता संशोधन एक्ट जरा भी वापस नहीं होगा, किंचित मात्र भी संभावना नहीं है।
हम मानते हैं कि ये लाखों-करोड़ों लोग जो अपना धर्म बचाने के लिए देश की शरण में आए हैं, उनको नेहरू-लियाकत अली पैक्ट के अनुसार देश का दायित्व है कि इसे हम करें: श्री अमित शाह #AmitShahOnTimesNowpic.twitter.com/lCHdO469mb
जामिया, JNU आदि के बवाल और पुलिस की कार्रवाई पर अमित शाह पूरी तरह अपने मातहतों (दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंतर्गत आती है) के साथ खड़े नज़र आए। उन्होंने बल्कि यह तक कहा कि अगर कहीं आगजनी या अव्यवस्था हो जाती है तो उनके हिसाब से यह पुलिस का काम ठीक से न करना होगा।
मैं इतना पूछना चाहता हूं कि आप पथराव करोगे, आग लगाओगे, नागरिकों का नुकसान करोगे तो पुलिस एक्शन नहीं लेगी तो क्या करेगी?
मैं अभी भी कह रहा हूं कि इसका मेन कारण एक अपप्रचार है जो कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आप पार्टी और कम्युनिस्टों ने चलाया है: श्री अमित शाह #AmitShahOnTimesNowpic.twitter.com/Zf7Rtnbx45
जब यूनिवर्सिटी के अंदर से पथराव होता है, कुछ छात्र या आगजनी करने वाले लोग बाहर निकलकर बसों को जलाते हैं और आगजनी करते हैं, अगर उस समय पुलिस कुछ नहीं करती है, तो मैं मानता हूं कि पुलिस सही से अपनी ड्यूटी नहीं कर रही: श्री अमित शाह #ShahOnAajTak
राहुल गाँधी द्वारा वीर सावरकर का अपमान करने पर उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी सावरकर के बराबर बन भी नहीं सकते। “सावरकर बनने के लिए बहुत बड़ी तपस्या, बहुत बड़ा त्याग और बहुत तीव्र देशभक्ति चाहिए। इन तीनों में से कुछ भी राहुल गांधी के व्यक्तित्व में झलकता नहीं है।”
राहुल गांधी सावरकार बन भी नहीं सकते,
सावरकर बनने के लिए बहुत बड़ी तपस्या, बहुत बड़ा त्याग और बहुत तीव्र देशभक्ति चाहिए।
नागरिकता विधेयक संशोधन के खिलाफ उतरे छात्रों से उन्होंने अपील की कि वे इस एक्ट को “अच्छी तरह से स्टडी करें।” उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि अगर एक्ट का अध्ययन करने के बाद भी किसी को कोई समस्या है तो “जरूर सरकार के साथ चर्चा करनी चाहिए, हम तैयार हैं।”
मैं स्टूडेंट से अपील करता हूं कि आपसब नागरिक संशोधन एक्ट का अच्छी तरह से स्टडी करें।
उनको कुछ लगता है कि वो किसी के भी खिलाफ है तो जरूर सरकार के साथ चर्चा करनी चाहिए, हम तैयार हैं: श्री अमित शाह #ShahOnAajTak
“तेरे को फ़ोटो लेना है, वीडियो बनाना है, जो मर्ज़ी आए करना हो कर।”
“हमें वीडियो से डराने की कोशिश मत कर।”
ये गुंडागर्दी और धमकी भरी भाषा और किसी की नहीं, आम आदमी के सबसे बड़े संगी-साथी बनने का ढोंग करने वाले वामपंथियों की है, जो एक बाप को अपने बीमार बेटे और डरी हुई पत्नी को अस्पताल पहुँचाने से रोकने की पूरी कोशिश कर रहे थे। क्यों? क्योंकि इस बाप ने उस सड़क से गुज़र कर अस्पताल पहुँचने की कोशिश कर दी, जिसे इन वामपंथियों ने “फ़ासिस्ट कानून” के विरोध के लिए ‘खरीद’ लिया था।
On Tuesday, two members of SDPI blocked the car of a couple who were reportedly taking their ill child to a hospital. Around 40 organisations had called for a hartal to oppose the #CAApic.twitter.com/9vzOfdU4L4
लैबों को बंधक बनाना, प्रोफ़ेसरों के लाखों रुपए के प्रयोग मिट्टी कर देना, दिल्ली-अलीगढ़-लखनऊ में हिंसा, आगजनी, पत्थरबाज़ी, असम में असमीभाषी लोगों को बरगलाना, मुंबई में छुट्टियों में खाली हुई यूनिवर्सिटी में इकट्ठे होकर उसे पूरे विश्वविद्यालय का मत बताना- नागरिकता विधेयक के विरोध के इन्हीं ओछे हथकण्डों की फेहरिस्त में एक और है 4-5 साल के रोते बच्चे और उसकी रुआँसी माँ के आगे न पसीजना।
वामपंथ के अंतिम दुर्गों में से एक केरल में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) नामक इस संगठन के सदस्यों ने अरुण नामक पिता की कार को सड़क पर रोक लिया। अरुण ने जब उनके आगे हाथ जोड़े कि उनका छोटा-सा बेटा बीमार है और उसे अस्पताल ले जाया जाना ज़रूरी है, तो कुछ कार्यकर्ता तो पसीज गए लेकिन 5 ‘क्रांतिकारी’ फिर भी अड़े रहे।
जब अरुण ने अपना फ़ोन निकाल कर उनका वीडियो बनाना शुरू किया तो वे कथित तौर पर और भी आक्रामक हो गए। इस रिपोर्ट की शुरुआत में जो संवाद हैं, वो उन्हीं के कहे गए शब्दों का अनुवाद है। जब तक अपनी चल सकी, तब तक उन्होंने अरुण को नहीं ही जाने दिया। 15 मिनट बाद जब पुलिस आई, तभी पुलिस के डर से वे तितर-बितर हुए और अरुण निकल पाए।
केरल में लगभग 40 संगठनों के नागरिकता विधेयक संशोधन का विरोध करने की खबर सामने आई है। इनमें स्थानीय दलों के अलावा उत्तर प्रदेश में लगभग जड़ से उखाड़ी जा चुकी मायावती की पार्टी बसपा भी शामिल है।
NIA के रडार पर SDPI
जिस पार्टी SDPI के यह सदस्य बताए जा रहे हैं, उसे न केवल हिंसक, चरमपंथी, लगभग-आतंकवादी अति-वामपंथी विचारधारा का अनुगामी माना जाता है, बल्कि पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए किसी भी हद तक जा सकने के लिए भी बदनाम है। 2016 में मुस्लिमों के हज़रत माने जाने वाले पैगम्बर मुहम्मद की आलोचना वाला एक फेसबुक कमेंट भर प्रकाशित होने पर इस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने ‘मातृभूमि’ समाचारपत्र के दफ़्तर के बाहर जमकर बवाल काटा।
इसके अलावा कन्नूर जिले में पॉप्युलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) नामक एक और संदिग्ध संगठन के साथ SDPI के कार्यकर्ता हथियारों के जखीरे ऊपर बैठे हुए पकड़े गए थे। पुलिस को इनके पास से देसी बम, लोहे की कीलों का ढेर, तलवार आदि मिले थे। मामले में दोनों संगठनों के कुल मिलाकर 24 सदस्यों पर NIA ने प्राथमिकी दर्ज की थी, जिनमें मुख्य आरोपित थे पीवी अब्दुल अज़ीज़ और एवी फ़हद। इसके अलावा अज़हरुद्दीन उर्फ़ अज़हर, खमरुद्दीन और जलील फ़रार हो गए थे।
बिहार के मुजफ्फपुर में रेप की कोशिश में नाकाम होने पर जिंदा जला देने के बाद एक और दरिंदगी सामने आ रही है। बिहार के रोहतास में एक युवती के साथ गैंगरेप करने में नाकाम होने पर आरोपितों ने पीड़िता को गोली मार दी। गोली लड़की के गले के पास लगी है। पीड़िता को जख्मी हालत में इलाज के लिए राजपुर के पीएचसी लाया गया है। जहाँ वो जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है।
इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित आजाद खान समेत चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के मुताबिक पीड़िता 10वीं की छात्रा है। पीड़ित छात्रा के साथ गाँव के ही चार युवकों ने उस समय गैंगरेप का प्रयास किया, जब वो रविवार (दिसंबर 15, 2019) को अपनी दादी के साथ शौच कर के लौट रही थी। कोहरा और बरसात का फायदा उठाकर मनचलों ने लड़की को जबरन खींच लिया और एक कमरे में ले जाकर गैंगरेप का प्रयास किया। आरोपित यहीं पर नहीं रुके। वारदात के दो दिन बाद मंगलवार (दिसंबर 17, 2019) को पीड़िता को गोली मार दी। इस घटना से पूरे इलाके में तनाव का माहौल है। हालाँकि पुलिस अधीक्षक सत्यवीर सिंह के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित आजाद खान सहित चार लोगों को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है।
पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी लड़की सुबह अपनी दादी के साथ घर के पास के शौचालय के लिए निकली थी। इस दौरान वहाँ पहले से घात लगाए अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि धमाका इतना जोरदार हुआ कि सभी लोग डर गए, फिर उन्होंने देखा तो उनकी बेटी जमीन पर गिरी छटपटा रही थी। शोर मचाने पर गाँव के अन्य लोग वहाँ जुट गए। घटना को लेकर गाँव में पहले से मौजूद पुलिस और गाँव वाले आनन-फानन में लड़की को लेकर राजपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आए जहाँ उसका इलाज किया जा रहा है।
बता दें कि इससे पहले मुजफ्फरपुर में युवती को जलाने का मामला सामने आया था। आरोपित ने युवती के साथ रेप करने की कोशिश की, लेकिन जब वह ऐसा करने में विफल रहा तो उसने पीड़िता को जला दिया। परिवार ने आरोप लगाया था कि आरोपित शख्स ने घर में घुसकर पीड़िता के साथ रेप का प्रयास किया था लेकिन पीड़िता के विरोध के बाद जब वह नाकाम रहा तो उसने केरोसिन तेल छिड़कर पीड़िता को जिंदा जलाने की कोशिश की। जिसके बाद तुरंत ही पीड़िता को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहाँ वो करीब दस दिन तक वह जिंदगी की जंग लड़ती रही, लेकिन मंगलवार (दिसंबर 17, 2019) को जिंदगी की जंग हार गई।
बिजनौर की दिल दहला देने वाली घटना में एक मृतक के बेटे ने अब्बा के कथित कातिलों को सीजेएम के सामने ही मौत के घाट उतार दिया है। वारदात में मृतक हत्यारोपित का दूसरा साथी भाग निकला है, और एक न्यायिक अधिकारी भी गोली लगने से घायल हो गए हैं। दिन-दहाड़े हुए इस हत्याकाण्ड के बाद हमलावर और उसके साथियों को पुलिस ने अदालत में ही कैद कर दिया है। अदालत के परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।
अक्टूबर में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अंसारी गैंग के ‘किंगपिन’/सरगना शाहनवाज अंसारी और उसके शार्प शूटर जब्बार अंसारी को गिरफ्तार कर लिया था। दोनों ही शातिर अपराधी बहुजन समाजवादी पार्टी के नेता हाजी अहसान और उनके भाँजे शादाब के डबल मर्डर मामले में उत्तर प्रदेश में वांछित थे।
हाजी अहसान और शादाब के दोहरे हत्याकांड की पोल तब खुली जब उनकी हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप में शूटरों को बाइक से ले जाने वाले दानिश को पुलिस ने धर दबोचा। उसने शाहनवाज और शादाब के बारे में पुलिस को बताया। उसकी दी गई जानकारी के अनुसार इस हत्या की सुपारी के पीछे शाहनवाज का न केवल संपत्ति विवाद, बल्कि उसकी ‘डॉन’ बनने की चाह भी कारक थे। पुलिस तब से दोनों शूटरों के अतिरिक्त शाहनवाज की भी खोज में थी। अंततः दिल्ली में 12 अक्टूबर को शाहनवाज व जब्बार पुलिस की हिरासत में आ गए थे। तब से दिल्ली जेल में बंद शाहनवाज को इस पेशी के लिए ही बिजनौर लाया गया था।
मीडिया खबरों के अनुसार आज सीजेएम योगेश कुमार के सामने शाहनवाज अंसारी की हत्या करने वाला साहिल हाजी अहसान का ही बेटा बताया जा रहा है। वह वहाँ दो अन्य शार्प शूटरों के साथ मौजूद था। बताया जा रहा है कि तीनों ने मिलकर तकरीबन 20 राउंड फायरिंग की है। इसमें हेड मोहर्रिर मनीश भी गोली लगने से घायल हो गए हैं। इसके अतिरिक्त दो पुलिस वाले भी घायल हुए हैं, जिन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
नवभारत टाइम्स ने एसपी संजीव त्यागी के हवाले से लिखा है कि साहिल ने इस हत्याकाण्ड को अंजाम जज के सामने देने के पहले कोर्टरूम के दरवाजे भी बंद करा दिए थे।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा के नेता विपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और शिव सेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे पर निशाना साधा है। ठाकरे द्वारा जामिया के (हुड़दंगी और हिंसक) छात्रों को रोकने के लिए की गई सीमित पुलिस कार्रवाई की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकाण्ड से करने को महाराष्ट्र भाजपा के शीर्ष नेता ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। साथ ही फडणवीस ने कहा है कि इससे ठाकरे ने देश के लिए प्राणोत्सर्ग करने वाले वीरों का अपमान किया है।
Equating Jamia University incident with Jallianwala bagh massacre by CM Uddhav ji Thackeray is big big insult to all the martyrs who have sacrificed their life for our Nation.
Entire Nation & Maharashtra wants to know if Uddhav ji agrees with these slogans? pic.twitter.com/qFZ823AGLC
गौरतलब है कि आज ही (17 दिसंबर, 2019 को) उद्धव ठाकरे ने जामिया में विरोध प्रदर्शन के नाम पर हिंसा के ख़िलाफ़ कार्रवाई की तुलना जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड से कर दी थी। 1919 में हुआ यह हत्याकाण्ड जनरल डायर की ब्रिटिश-हिंदुस्तानी फ़ौज द्वारा निहत्थे भारतीयों पर लोहड़ी के दिन किया गया लोमहर्षक अत्याचार था।
‘सेक्युलर’ कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ सरकार चला रहे उद्धव ठाकरे लगातार नागरिकता विधेयक पर अपना स्टैंड बदलते आए हैं। लोक सभा में उनकी पार्टी ने बिना कॉन्ग्रेस से कोई सलाह-मशविरा किए विधेयक को समर्थन दे दिया। लेकिन फिर कॉन्ग्रेस के आँख दिखाने पर अपना स्टैंड बदलते हुए ठाकरे राज्य सभा में इसके समर्थन के लिए तीन-पाँच करने लगे। और उस पर भी कोर वोटबैंक की प्रतिक्रिया नकारात्मक होने पर अंततः उनकी पार्टी ने वॉक आउट कर बीच का रास्ता अपनाया- ताकि न ही विधेयक की खुल कर मुख़ालफ़त करनी पड़े, न ही इसके समर्थन से कॉन्ग्रेस का महाराष्ट्र राज्य सरकार को समर्थन छूट जाए।
उद्धव के इस बयान के बाद खबर यह भी आई कि शिवसेना ने सभी विपक्षी दलों को झटका देते हुए राष्ट्रपति से मिलने जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। मंगलवार शाम (दिसंबर 17, 2019) को ‘ऑल पार्टी डेलीगेशन’ की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात की। इसमें कॉन्ग्रेस समेत सभी विपक्षी दल राष्ट्रपति के समक्ष सीएए को लेकर अपनी चिंताएँ जाहिर की। लेकिन विपक्षी पार्टी बन चुकने के बाद भी शिव सेना इससे दूर ही रही।
जम्मू-कश्मीर की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की नापाक हरकतों का आज भारतीय सेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया। सुंदरबनी सेक्टर में घुसपैठ करते हुए सेना के जवानों ने पाकिस्तान के कम से कम 2 एसएसजी के कमांडो को ढेर किया। जबकि दस्ते के अन्य सदस्य अपनी जान बचाकर मौक़े से भाग निकले। इस कार्रवाई में 1 भारतीय जवान के शहीद होने की भी खबर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (दिसंबर 16, 2019) की शाम, भारतीय जवानों की मुस्तैदी के बावजूद, सुंदरबनी सेक्टर में पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) द्वारा घुसपैठ की कोशिश की जा रही थी। लेकिन संदिग्ध गतिविधियों का पता चलते ही भारत ने जवाबी कार्रवाई की और पाकिस्तान की एसएसजी यूनिट के कम से कम 2 एलीट कमांडो को मार गिराया।
At least two Pakistani elite commandos of SSG (Special Service Group) unit killed in Indian Army retaliation after a Pakistan Border Action Team (BAT) infiltration attempt was thwarted in Sunderbani sector, Jammu and Kashmir. pic.twitter.com/Hiup7NoBTU
जानकारी के अनुसार, सोमवार को राजौरी के सुंदरबनी सेक्टर के अंतर्गत केरी बट्टल इलाके में एलओसी पर स्थित ललयाली चौकी पर पाकिस्तानी सेना के बैट दस्ते ने हमला किया। हालाँकि, फायरिंग होने से भारतीय सेना समझ गई कि या तो घुसपैठ की कोशिश हो रही है या फिर पाकिस्तानी सेना किसी बड़े बैट हमले को अंजाम दे रही है। सेना ने उसी समय सभी नाका पार्टियों और अग्रिम चौकियों को सचेत कर दिया।
इसके बाद पाकिस्तानी की ओर से हो रही गोलाबारी के थोड़ा धीमा पड़ते ही पाकिस्तानी सेना का बैट दस्ता एलओसी पार कर ललियाली चौकी की तरफ बढ़ा, लेकिन वहाँ मौजूद जवानों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए बैट दस्ते के 2 कमांडों को ढेर कर दिया। जिसके बाद उनके अन्य साथी उन शवों को अपने साथ अपने इलाके में ले गए।
बता दें कि पाकिस्तान की ओर से हुई इस नापाक हरकत पर रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कर्नल देवेंद्र आनंद ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि संघर्ष विराम का उल्लंघन करते हुए पाकिस्तानी सेना ने भारतीय ठिकानों पर गोलाबारी की। इसमें एक जवान शहीद हो गया।
उन्होंने ये भी बताया कि इसी दौरान अग्रिम इलाके में नाका पार्टी ने कुछ संदिग्ध तत्वों को भारतीय इलाके में घुसते देखा। जवानों द्वारा ललकारे जाने पर उन्होंने फायरिग शुरू कर दी और वापस भागने लगे। जवानों ने भी जवाबी फायर किया और उन्हें वापस भागने पर मजबूर कर दिया।
अब मीडिया गिरोह द्वारा ‘शीरोज’ के रूप में उछाली गई लड़कियों की सच्चाई सामने आ चुकी है। जिहाद और आतंकवाद समर्थक केरल की लदीदा और आयशा रेना की पोल खुल चुकी है और उनकी भी जिन्होंने बाकायदा इसकी प्लानिंग की थी। जिन जामिया और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के समर्थन में देश के अन्य छात्रों को ये मीडिया गिरोह खड़ा कर, उनके कन्धों पर बंदूक रखकर हिंसा और सत्ता विरोध का नाटक करने वाला था, उसकी भी हवा निकल चुकी है लेकिन वामपंथी और कॉन्ग्रेसी तंत्र ने हार नहीं मानी है। आखिरी जोर आजमाइस जारी है और देश के खासतौर से गुमराह मजहबी लोग और छात्र इनके द्वारा फैलाए झूठ का शिकार होकर खुद को ही नुकसान पहुँचा रहे हैं।
Varanasi: Students of Banaras Hindu University (BHU) held a rally in support of Citizenship Amendment Act, today. One of the participants (pic3) says,”We are in support of the Citizenship Amendment Act and the centre”. pic.twitter.com/b1ySWCsoLA
इसे समझने के लिए आपको कल काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बाहर का नज़ारा दिखाना चाहता हूँ। सोमवार (16 दिसंबर) को BHU के सिंहद्वार पर जॉइंट एक्शन कमिटी के बैनर तले कुछ वामपंथी संगठनों के लोग थे जो CAA के विरोध में जुलुस निकाल रहे थे। उसी समय बहुत से BHU के छात्र ऐसे भी थे, जो देश के इस कानून के साथ थे। ऐसे समर्थक छात्रों ने एक बड़ी सभा की, कानून के समर्थन में अपनी बात रखी लेकिन दूसरों को गोदी मीडिया कहने वाली यह वामपंथी-कॉन्ग्रेसी विचारधारा से पोषित गिरोह ऐसे छात्रों को नजरअंदाज करती है और कल भी यही किया। उन्हें जो करना था, वही किया। वामपंथी-कॉन्ग्रेसी एजेंडे के तहत उस विरोध के आंदोलन को उन्होंने हाईलाइट किया, जिसे वामपंथी छात्रों द्वारा आयोजित किया गया था। छात्रों ने ही ऑपइंडिया को बताया कि यह पूरा विरोध प्रदर्शन वामपंथी संगठन जॉइंट एक्शन कमिटी के द्वारा चलाया गया।
CAA और NRC के समर्थन में BHU के छात्र
जॉइंट एक्शन कमिटी सिर्फ BHU में ही नहीं बल्कि कई और विश्वविद्यालयों में भी है। जिसका काम ही है देशविरोधी गतिविधियों को संचालित करते हुए विरोध प्रदर्शन करना। इस जॉइंट एक्शन कमिटी में वामपंथी संगठन भगत सिंह छात्र मोर्चा, आइसा और कॉन्ग्रेस का छात्र संगठन जो अब BHU में पूरी तरह बिखरा हुआ है, के लोग शामिल हैं। BHU के ही विभिन्न विभागों के CAA समर्थक छात्रों ने बताया कि इनका सपोर्ट कर रहे विश्विद्यालय के ही कुछ वामपंथी और JNU के प्रोफ़ेसर हैं, जो ऐसे विरोध प्रदर्शनों को अक्सर हवा देते हैं।
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बीएचयू के सिंहद्वार पर सोमवार को जिन संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया, उनके नाम से ही आप काफी कुछ समझ जाएँगे, ये नाम हैं- आइसा, भगत सिंह छात्र मोर्चा आदि। इनसे जुड़े छात्रों ने कहा कि छात्रों पर पुलिसिया कार्रवाई पूरी तरह गलत है। इस दौरान ‘हमें चाहिए आजादी’ के चिर-परिचित नारे भी लगाए गए। किससे-किसको आजादी चाहिए, ये आप कई और मंचों से भी सुन चुके हैं।
जॉइंट एक्शन कमिटी के बैनर तले प्रदर्शन करते वामपंथी संगठन
जॉइंट एक्शन कमिटी के तहत ये वही लोग हैं, जो कुछ दिन पहले ही डॉ. फिरोज खान के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में नियुक्ति के समर्थन में भी जुलुस निकाल रहे थे। जिसे तब भी मीडिया के एक धड़े ने भारी समर्थन देते हुए लाइव दिखाया था और जो खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे; उन्हें धर्मान्ध, ब्राह्मणवाद समर्थक से लेकर, छात्र के नाम पर कलंक भी कहा गया था।
कल शाम को फिर से ‘प्रोफेशनल’ धरना-विरोध-प्रदर्शन करने वाले छात्रों द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में ब्राह्मणवाद से लेकर आजादी और कई तरह की डिमांड की जा रही थी। इन 10-12 ‘प्रोफेशनल’ प्रदर्शनकारियों का साथ किसने दिया, वो भी मुख्यद्वार पर? इन्हें साथ मिला ऐसे छात्रों का, जो मुख्यद्वार पर खड़े थे और जो मुद्दे और सच से ही अनजान थे।
जॉइंट एक्शन कमिटी के सदस्य
ज़्यादातर छात्र कल जामिया में पुलिस के द्वारा किए गए लाठीचार्ज के कारण इस आशंका में बुलाए गए थे कि कल आपको भी पुलिस पिटेगी तो आप क्या करेंगे? और तो और, विरोध करने वाले अधिकांश छात्र-छात्राएँ, BHU के न होकर बाहरी थे। ऐसा BHU के छात्रों ने ही ऑपइंडिया को बताया और कइयों के नाम भी गिनाए जैसे- इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वालों में आम आदमी पार्टी से जुड़े हुए संदीप पांडेय, आइसा के आशुतोष कुमार, प्रियांक मणि, अनुपम कुमार, आदर्श पांडेय और शुभम सुभाष राव से लेकर आयुषी जैसे जॉइंट एक्शन कमिटी के कई लोग थे।
विरोध कर रहे वामपंथी संगठन के सदस्य
विरोध कर रहे जॉइंट एक्शन कमिटी के सदस्यों ने वहाँ मौजूद छात्रों को भी अधूरा सच बताया। उन्होंने कहा, “कई दिनों से छात्र जामिया मिलिया, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी समेत देश भर में आंदोलन चला रहे हैं। इस क्रम में पुलिस ने जामिया के अंदर घुसकर लाइब्रेरी, हॉस्टल और बाथरूम में भी लाठी चार्ज किया। गोलियाँ चलाई गई। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में पुलिस द्वारा इस तरह की गुंडागर्दी बहुत ही शर्मनाक है।” जबकि इसका सच कल ही सामने आ गया था कि तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा की शुरुआत किसने की। किसने देशविरोधी और जिहादी नारे लगाए। लेकिन वामपंथी मीडिया गिरोह को सच बोलना कहाँ हैं!
आइसा के नेतृत्व में भी यही लोग प्रदर्शन करते हैं , तस्वीर हाल ही की है , यहाँ भी इन्हें ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए
इनके पूरे विरोध-प्रदर्शन को मीडिया ने इस तरह से चलाया मानो दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बाद अब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र भी नागरिकता संशोधन अधिनियम और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि पूरा सच यह नहीं है। पूरा सच यह है कि इसी कानून के समर्थन में विरोध वालों के मुकाबले ज्यादा छात्र थे।
दूसरी सच्चाई यह है कि कल इस विरोध प्रदर्शन की स्पीच सुनेंगे तो सच की कई और परतें भी खुलेंगी। विरोध करने वालों ने जो कहा वो भी पढ़िए, “पुलिस ने जामिया के छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार भी किया है। यह लड़ाई देश बचाने की लड़ाई है, जिसमें सभी को साथ आना चाहिए। देश को हिटलर की जर्मनी की तरह बनाया जा रहा है। आज मुस्लिमों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, सरकार उन्हें आतंकवादी बता रही है और उन पर गोलियाँ चलाई जा रही है। अगर आज हम खड़े न हुए तो कल देश बर्बाद हो जाएगा। यह सरकार जब तक साम्प्रदायिक फासीवादी नागरिकता संसोधन कानून को वापस नहीं लेती है, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।” अब इस स्पीच को पढ़कर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि ये कौन लोग हैं। और ऐसा कब से करते आ रहे हैं और क्यों?
BHU में विरोध प्रदर्शन के उलट दूसरी तस्वीर भी देखी जाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान ही नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में भी BHU के तमाम दूसरे छात्र भी आ गए। इन्होंने इस कानून के समर्थन में और वामपंथी संगठन जॉइंट एक्शन कमिटी के विरोध में प्रदर्शन किया। मामला बढ़ते-बढ़ते दोनों ग्रुप में नोकझोंक तक पहुँच गई। हालाँकि, किसी तरह पुलिस ने स्थिति को काबू में किया। CAA कानून के समर्थन में भी BHU के बड़े ग्रुप ने मार्च निकाला। उन्होंने कहा, “CAA देशहित में है और इसका स्वागत होना चाहिए। विरोध करने वाले संविधान का विरोध कर रहे हैं और इन्हें ब्राह्मणवाद से आजादी चाहिए, इन्हें हिंदुत्व से आजादी चाहिए। ऐसे लोगों को देशहित से कोई मतलब नहीं है। हर अच्छी चीज का विरोध करना ही इनका काम है।”
अब बात मीडिया की। फिरोज खान के समर्थन में निकले जुलुस को मीडिया के एक धड़े ने महान आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया था। उसी मीडिया गिरोह ने CAA विरोध के जुलूस को कवर भी किया और यह भी कहा कि विरोध करने वाले सभी BHU के छात्र हैं। जबकि सच यह है कि जॉइंट एक्शन कमिटी में ज़्यादातर प्रोफेशनल विरोध प्रदर्शन करने वाले वामपंथी छात्र थे। उनमें से BHU के कुछ ही गिने-चुने। सच्चाई यह भी है कि ज़्यादातर विरोध करने वाले महात्मा गाँधी काशी विद्यापीठ और हरिश्चंद पीजी कॉलेज के वामपंथी संगठनों के छात्र थे, जो BHU गेट पर मौजूद थे।
मीडिया गिरोह को ये नैरेटिव शूट करता है। इसलिए पहले पूरा तंत्र मिलकर अफवाह उड़ाता है। लोगों को भरमाता है। जब झूठ अपनी जड़ें जमा लेता है तो उसे इस तरह से पेश करता है, जैसे ये उन्हीं की आवाज हो, जो खुद शिकार हुए हैं।
कल शाम विरोध-प्रदर्शन में जो भी थे, उनमें उन सभी अफवाहों के बैनर-पोस्टर लहरा रहे थे, जो दरअसल हुआ ही नहीं। न जामिया में कोई मरा और न ही पुलिस के लाइब्रेरी में घूसकर तोड़फोड़ और बस के आगजनी की बात सच थी। मनीष सिसोदिया, अमानतुल्लाह जैसे लोग जो भ्रम और झूठ फैलाए थे, उन पर FIR दर्ज हुआ है। लेकिन वामपंथी तंत्र की तरह सच सामने आने पर भी इन नेताओं ने माफ़ी नहीं माँगी है। बाकी मीडिया गिरोह भी भ्रमित छात्रों के विरोध को जनता की आवाज बता चुका है। लेकिन किसी ने भी छात्रों को सच बताना ज़रूरी नहीं समझा। स्टूडियो से रैली वाले दौर में मीडिया गिरोह खुद ही नफ़रत और झूठ को हवा देने में लगा है और दूसरों से ये अपील करता है कि टीवी मत देखिए, अखबार मत पढ़िए। हालाँकि इसमें भी उनका प्रोपेगेंडा है। प्रोपेगेंडा यह है कि अगर आप TV देखेंगे, पेपर या वेबसाइट पढ़ेंगे तो उन्हें सच पता चल जाएगा और फिर वो गिरोह के झूठ और अर्धसत्य की दुकान से मुँह फेर लेंगे, जो यह नहीं चाहते।
ये पूरा वामपंथी तंत्र इतना मजबूत है कि पूरे देश में आसानी से मैनेज कर लेता है कि कब विरोध होगा और कब हिंसा और तोड़फोड़। क्या दिखाना है और क्या छिपाना है, ये भी बड़ी चालाकी से तय हो जाता है फिर बाकी लोग इस झूठ का पूरे जी-जान से प्रचार करते हैं।
ये पूरा गिरोह आपको कभी ये नहीं बताएगा कि ये खुद ही मजहब विशेष में डर पैदा कर रहे हैं। ये नहीं बताएँगे कि उन जेहादी लड़कियों को जो कभी याकूब मेमन से लेकर जिहाद का खुला आह्वान कर चुकी हैं, जिनके नेतृत्व में पुलिस और पत्रकारों पर हमले भी हुए हैं, उन्हें ‘शीरोज’ बनाकर ये क्यों प्रस्तुत करते हैं। इनका तरीका बहुत सिंपल है – जो बात जिस तक पहुँचानी थी, वो पहुँच गई, अब जब सारा सच सामने आ गया तो चुप्पी साध लो। झूठ को सच की तरह परोस दो। सच को झूठ कहना है क्योंकि सत्ता के खिलाफ नैरेटिव बिल्डिंग में इस तरह का मैनेजमेंट जरूरी है। यह गिरोह इस वर्किंग कल्चर को ठीक से जानता है।
ऑपइंडिया ने BHU के विभिन्न छात्रों से इस पूरे मुद्दे पर बात की। कई छात्रों से हमने पूछा कि CAA में ऐसा क्या है, जिसका विरोध किया जाए? इस सवाल पर ज़्यादातर छात्रों का कहना था कि वे तो समर्थन में हैं। देश के साथ हैं। जो छात्र इसके विरोध में दिखे, उनसे भी हमने बात की। उनसे पता चला कि ज़्यादातर एक प्रचलित प्राइम टाइम से फैलाए गए अफवाहों के शिकार हुए हैं। यह वही प्राइम टाइम है, जो स्टूडियो से देश विरोधी प्रोग्राम के लिए जाना जाता है। जहाँ से झूठ को भविष्य और उसके काल्पनिक डर की खोल में लपेटकर छात्रों को ही नहीं बल्कि पूरे देश को बहकाया जाता है। इस बात को कई छात्रों ने भी स्वीकारा।
प्रोपेगेंडा में फँस गए छात्रों ने बताया कि मुस्लिमों को मोदी सरकार देश से बाहर कर रही है और उनकी नागरिकता छीन रही है। जबकि इस कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है। लेकिन सच से किसे वास्ता! गिरोह का प्रोपेगेंडा प्रचार तंत्र इतना मजबूत है कि बहुत कम समय में झूठ को देश का सच बनाने में माहिर है। कुछ पूछने पर वही हिटलर की बात करते मिलेंगे और उसके नाम पर डर फैलाते कि ऐसा भारत में भी होने जा रहा है। जबकि उन्हें पता है कि ये डर उन्होंने ही पैदा किया है और इस डर के बल पर ही हर तरह की हिंसा को जायज ठहराया है।
कल BHU के सिंहद्वार पर ही CAA के समर्थन कर रहे छात्रों ने माइक मीटिंग के दौरान ही, इस पूरे अफवाह तंत्र और देश विरोधी गतिविधि की पोल खोल दी। पतंजलि पांडेय, अरुण चौबे, अक्षय, देवेश ठाकुर, आनंद मोहन, शशिकांत जैसे BHU के सोशल साइंस और कला संकाय, विज्ञान संकाय, SVDV के कई छात्रों ने बताया कि वे कौन-कौन लोग हैं, जो BHU के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं। इन छात्रों ने बताया कि जॉइंट एक्शन कमिटी के कई लोग BHU के बाहर के हैं और इनका BHU से कोई लेना देना नहीं है। जबकि मीडिया गिरोह ने जिस तरह से इन्हें कवर किया, वो आपको इस तंत्र के फैले हुए विस्तृत जाल के बारे में बताता है।
BHU के मुख्यद्वार पर CAA के समर्थन में माइक मीटिंग करते BHU के छात्र
चंद छात्रों को छोड़कर ज़्यादातर BHU के छात्र CAA के समर्थन में हैं। आज भी छात्रों ने CAA के समर्थन में जुलुस निकाला, जिसे प्रशासन ने मुख्य द्वार बंद कर रोक दिया लेकिन छात्रों ने कैंपस में ही महिला महाविद्यालय से मुख्य द्वार तक समर्थन रैली की। यह जुलुस कैंपस में ही महिला महाविद्यालय से छात्र संघ भवन होते हुए चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा के सामने आकर रुकी और यहीं पर एक सभा के साथ कार्यक्रम संपन्न किया गया।
मीडिया गिरोह ने इसे आज भी रिपोर्ट नहीं किया क्योंकि ये उनके नैरेटिव को शूट नहीं करता। छात्रों ने बताया, “BHU कभी भी देश विरोधी गतिविधियों का अड्डा नहीं रहा और न आज है।” वहाँ के ज़्यादातर छात्रों से बातचीत में हमने पाया कि उन्होंने इस कानून को पढ़ा है, न ये किसी विशेष मजहब के खिलाफ है और न ही देश के नागरिकों के खिलाफ। जो भी ऐसा कह रहे हैं वो झूठ फैला रहे हैं और वो ऐसे वामपंथी और कॉन्ग्रेसी संगठनों के विरोध में तथा देश एवं संविधान के साथ हैं। उनका कहना है कि वे किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते और न करेंगे बल्कि कैंपस में अगर कोई ऐसा करने की कोशिश भी करता है तो उसे कामयाब नहीं होने देंगे।
वैसे तो सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का आए दिन पर्दाफाश होता रहता है और दुनिया को पता चलता रहता है कि कॉन्ग्रेस खुद को पाक साफ दिखाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। लेकिन, इस बार मामला सिर्फ़ झूठ का नहीं है। इस बार मामला नारी सम्मान का है। इस बार मामला एक मंत्री पद पर आसित महिला की छवि धूमिल करने का है और साथ ही उसके चरित्र पर सवालिया निशान लगाने का है…
बीते दिनों राहुल गाँधी ने ‘रेप इन इंडिया’ पर एक विवादित बयान दिया। जिसके बाद संसद में हंगामा हुआ और स्मृति ईरानी समेत कई महिला सांसदों ने उनके माफी माँगने की बात की। लेकिन कॉन्ग्रेस की बेशर्मी देखिए, माफी माँगना तो दूर उन्होंने स्मृति ईरानी को ही बदनाम करना शुरू कर दिया।
दरअसल, महिला कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और AICC की सदस्य इंद्राणी मिश्रा ने स्मृति ईरानी की एक तस्वीर को ट्वीट किया, जिसमें वे संसद के बाहर पद्म भूषण से सम्मानित हुकुमदेव नारायण यादव के सामने हाथ जोड़कर उनसे आशीर्वाद ले रही हैं। लेकिन इंद्राणी ने इस तस्वीर को ऐसे पेश किया है जैसे स्मृति ईरानी कोई बहुत गलत काम कर रही हैं और उन्हें उसके लिए शर्म भी नहीं आ रही।
इंद्राणी इस तस्वीर में सांसद हुकुमदेव को ‘रेप गुरु’ का चेहरा बता रही हैं और कह रही है स्मृति ईरानी इनके आगे हाथ जोड़े खड़ी हैं। हालाँकि उनकी इस हरकत से साफ पता चलता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी से जुड़ने के बावजूद भी उन्हें विरोधी पार्टी से जुड़े नेताओं की बिलकुल पहचान नहीं है। या ये कहें कि वो एक महिला मंत्री को गिराने के लिए जानबूझकर ऐसा कर रही है। लेकिन हैरानी की बात है कि वो अकेली ऐसी कॉन्ग्रेसी नहीं हैं…
कॉन्ग्रेस की छात्र संगठन ईकाई NSUI की सोशल मीडिया कॉर्डिनेटर पंपी बघेल ने भी इसी तस्वीर को पोस्ट किया है और चिन्मयानंद की जय करते हुए बोला है कि जिसके आगे मैडम (स्मृति ईरानी) हाथ जोड़ती हैं, उसके लिए सजा की माँग कैसे करेंगी।
अब, इन दोनों कॉन्ग्रेसी महिलाओं द्वारा भ्रम फैलाने के लिए अपलोड की गई तस्वीर के बाद सोशल मीडिया पर ये मामला तूल पकड़ने लगा। देखते ही देखते कॉन्ग्रेसी समर्थकों ने स्मृति ईरानी पर तरह-तरह की बातें करनी शुरू कर दीं।
किसी ने इस तस्वीर में दिख रही स्मृति ईरानी को नौटंकी बताया और किसी ने उनके चाल-चरित्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि देखो आशीर्वाद कौन ले रहा है और आशीर्वाद कौन दे रहा है। इन कॉन्ग्रेसी टुटपूंजिए नेताओं को पता ही नहीं कि हुकुमदेव नारायण वही सांसद हैं, जिन्हें 2014-17 तक आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंट्रियन अवॉर्ड मिल चुका है।
संसद में बलात्कार के नाम पर नौटंकी करने वाली स्मृति ईरानी
कॉन्ग्रेस समर्थकों ने इस बीच बार-बार यह दर्शाने की कोशिश की कि भाजपा की महिला मंत्री चिन्मयानंद से आशीर्वाद ले रही है और संसद में, जनता के सामने बार-बार झूठ बोल रही हैं।
इसके बाद, छत्तीसगढ़ से युवा कॉन्ग्रेस नेता संजय अजगल्ले ने भी इस पर ट्वीट किया और स्मृति ईरानी पर निशाना साधते हुए लिखा कि नौटंकी करना हो तो कोई इनसे सीखें?
राजनीता मेहता, जो खुद को ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस की नेशनल कॉर्डिनेटर और हरियाणा राज्य की मीडिया प्रवक्ता बताती हैं, वे भी इस तस्वीर को शेयर करती हैं और स्मृति ईरानी को कहती हैं कि अब जनता को मैडम क्या मुँह दिखाएँगी?
गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की मूढ़ता देखने के बाद सोशल मीडिया पर स्मृति ने खुद ट्वीट किया और सबको ये बताया कि वे लोग जिस सज्जन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, उनका नाम चिन्मयानंद नहीं है, बल्कि हुकुमदेव नारायण यादव है। जिन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया है और जो दलित समाज के लिए काम कर चुके हैं।
जिस सज्जन को आप इस चित्र में बदनाम कर रही हैं उनका नाम हुकुमदेव नारायण यादव है । पद्म भूषण से सम्मानित हुकुमदेव जी 1960 से लगातार देश सेवा में समर्पित हैं। दलित समाज एवं ग़रीब कल्याण के प्रति हुकुम देव जी ने अभूतपूर्व काम किया है।मेरा प्रणाम इन्होंने स्वीकार किया ये सौभाग्य है। https://t.co/NFIxWEoL1L
बता दें कि ये पहली बार नहीं है, जब स्मृति ईरानी को नीचा दिखाने के लिए कॉन्ग्रेस ने इस तरह उन पर हमला किया हो। साल 2014 में भी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता उनके ख़िलाफ़ बोलते नजर आए थे। जिसका जवाब देते हुए उन्होंने इस वर्ष अमेठी में राहुल गाँधी को हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दावा किया है कि नागरिकता विधेयक संशोधन के खिलाफ विरोध के बहाने चल रही हिंसा के दौरान जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के किसी भी छात्र पर दिल्ली पुलिस ने गोली नहीं चलाई है। गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय के ही मातहत आती है।
We want to make it clear that the Delhi Police did not fire any bullet on protesters at Jamia, the Ministry of Home Affairs (MHA) official saidhttps://t.co/e2YBdg2w0M
गौरतलब है कि सफदरजंग और होली फैमिली अस्पतालों में क्रमशः दो और एक ‘प्रदर्शनकारी’ भर्ती किए गए थे। इनमें से होली फैमिली अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारी की चोट गोली से नहीं थी, और उसे डिस्चार्ज भी कर दिया गया है। वहीं सफ़दरजंग अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों के घावों के बारे में अलग-अलग मेडिकल और पुलिस जाँच चल रही है।
Empty cartridge found from violence-hit area in Jamia, but police didn’t fire any bullet on protesters: Home Ministry officials
प्रदर्शन स्थल पर पाए गए खाली कारतूस के बारे में भी पुलिस के एक अधिकारी ने मीडिया से बात करते हुए यह साफ़ कर दिया कि हालाँकि यह बात तो तय है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कोई गोली नहीं चलाई है, लेकिन इसकी फिर भी विस्तृत जाँच चल रही है।