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शौहर ने दिया तीन तलाक, ‘अब्बा’ ने हलाला के नाम पर किया बलात्कार: MP में शर्मनाक घटना

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के ऐशबाग इलाके से तीन तलाक और हलाला से जुड़ा मामला सामने आया है। जहाँ 22 वर्षीय मुस्लिम महिला को पहले उसके शौहर ने तलाक देकर घर से बाहर कर दिया और फिर एक निकाई अब्बा ने उसके साथ संबंध बनाने के लिए उस पर ज्यादती की, उसका बलात्कार किया। पूरे मामले में पुलिस मे महिला की शिकायत पर उसके शौहर और निकाई अब्बा पर दहेज प्रताड़ना, दुष्कर्म और मुस्लिम महिला संरक्षण कानून के तहत के दर्ज कर लिया है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सीएसपी जहाँगीराबाद अलीम खान ने इस मामले पर बताया कि 22 वर्षीय महिला बिस्मिल्लाह कॉलोनी में रहती थी और कुछ समय पहले ही उसका निकाह हुआ था। लेकिन निकाह के कुछ दिन बाद ही उसका शौहर उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा। हद तब हो गई जब 23 नवंबर को उसने महिला को तीन तलाक कहकर घर से बाहर कर दिया। पीड़िता के घरवालों ने कई बार उसे समझाने की कोशिश भी की। मगर समझौता न हो सका।

महिला के अनुसार, शादी के बाद से ही निकाई अब्बा उर्फ अनवर खान, जिसका आना-जाना उसके ससुराल में होता था, उसने महिला पर गंदी निगाह रखनी शुरू कर दी थी। जब भी उसके ससुराल के लोग घर पर मौजूद नहीं होते थे, तो वह उसके पास पहुँच जाता था और उसके सामने अश्लील हरकतें करता था। महिला का कहना है कि अनवर की हरकतों के बारे में उसने अपने शौहर को बताया हुआ था। लेकिन वो अपनी बीवी की बातों पर विश्वास नहीं करता था।

महिला के मुताबिक, उसके निकाह के एक माह बाद ही वो अपने शौहर के साथ ससुराल से अलग रहने लगी थी, लेकिन तब भी अनवर का उसके घर पर आना जाना होता था। ऐसे में बीते 23 नवंबर को महिला का जब अपने शौहर से विवाद हुआ तो शौहर के जोर देने पर अनवर खान को बुलवाया गया। जहाँ उसने पीड़िता से कहा, “तुम्हारे शौहर ने तुम्हें तलाक दे दिया है, अब हलाला करने के लिए तुम्हें मेरे साथ संबंध बनाने होंगे।”

जब महिला ने इस बारे में अपने शौहर से पूछा तो उसने जवाब दिया कि उसने शरीयत के हिसाब से उसे तीन तलाक दिया है। इसलिए उसे वैसा ही करना होगा, जैसा निकाई अब्बा कहता है। इसके बाद उसे मारपीट कर अनवर के पास भेज दिया गया और बिस्मिल्लाह कॉलोनी स्थित अपने घर में उसने महिला के साथ बलात्कार किया। रात में जब उसने शौहर को फोन करके बुलाया तो सब जानने के बाद भी उसने घटना का विरोध नहीं किया।

महिला की मानें तो 26 नवंबर को निकाई अब्बा ने उसे अपने साथ रखा, उसके साथ अश्लील हरकतें की और बाद में उसे उसके मायके भेज दिया। इसके साथ ही उसे धमकी दी कि अगर वह पुलिस के पास गई तो वे उसे जान से मार देंगे। बहुत दिनों तक महिला ने आपबीती किसी को नहीं बताई। लेकिन मंगलवार को हिम्मत करके वह अपने परिजनों को लेकर पुलिस के पास पहुँची और अपने शौहर समेत निकाई अब्बा के घिनौने कारनामों से पर्दा उठाया। जिसके बाद पुलिस ने दोनों आरोपितों पर मामला दर्ज करके उन्हें हिरासत में लिया।

‘GDP ग्रोथ में गिरावट चिंता की बात नहीं’ – प्रणब मुखर्जी की यह लाइन कॉन्ग्रेसी चमचे और मीडिया गिरोह को तमाचा

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार (11 दिसंबर) को कहा कि आर्थिक मंदी को लेकर वे चिंतित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें हो रही हैं, जिनका GDP पर प्रभाव दिख रहा है। यूपीए सरकार में वित्त मंत्री के पद पर रहे प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकारी बैंकों में पूंजी डालने की ज़रूरत है और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है।

भारतीय सांख्यिकी संस्थान के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “देश में जीडीपी वृद्धि की धीमी दर को लेकर मैं चिंतित नहीं हूँ। कुछ चीजें हो रही हैं जिनके अपने प्रभाव होंगे।”

उन्होंने कहा कि 2008 में आर्थिक संकट के दौरान भारतीय बैंकों ने लचीलापन दिखाया था। उन्होंने कहा, “तब मैं वित्त मंत्री था, सार्वजनिक क्षेत्र के एक भी बैंक ने धन के लिए मुझसे सम्पर्क नहीं किया।” इसके आगे उन्होंने कहा कि अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को बड़े पैमाने पर पूंजी की ज़रूरत है और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है।

पूर्व राष्ट्रपति ने संवाद को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में संवाद बेहद ज़रूरी है, इसके साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर डेटा के साथ छेड़छाड़ होती है, तो इसका असर विपरीत पड़ेगा। ख़बर के अनुसार, योजना आयोग के देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान को लेकर उन्होंने कहा, “मुझे ख़ुशी है कि नीति आयोग भी उसकी कुछ नीतियों को आगे बढ़ाने में काम कर रहा है।”

भारतीय रिज़र्व बैंक ने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान देश की GDP बढ़त के अनुमान को 6.1 फ़ीसदी से घटाकर 5 फ़ीसदी कर दिया है। इससे पहले रिजर्व बैंक ने अक्टूबर महीने में नीतिगत समीक्षा में यह अनुमान ज़ाहिर किया था कि वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी बढ़त 6.1 फ़ीसदी हो सकती है, लेकिन अब रिजर्व बैंक ने कहा है कि जोखिम पर संतुलन बनने के बावजूद जीडीपी ग्रोथ अनुमान से कम रह सकती है। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ 6 साल के निचले स्तर 4.5 फ़ीसदी तक पहुँच गई थी।

लोकसभा से लेकर राज्यसभा और सोशल मीडिया पर तक कॉन्ग्रेसी नेता और उनके चमचे (ज्यादातर मीडिया गिरोह वाले) GDP को लेकर केंद्र सरकार को कोसते नजर आते हैं। और अगर BJP का कोई नेता GDP को एकमात्र इंडिकेटर नहीं कहकर कुछ बताना चाहता है तो यही गिरोह उन्हें अर्थव्यवस्था का ज्ञान देने लगते हैं। प्रणब मुखर्जी की छवि आर्थिक मामलों में मजबूत रही है। देखना दिलचस्प होगा कि अब यही गिरोह उन्हें कैसे घेरता है!

बता दें कि कॉन्ग्रेस के लिए हमेशा एक संकटमोचक की भूमिका रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से पार्टी ने काफ़ी दूरी बना ली है। इस बात का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि जब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था तो उस दौरान गाँधी परिवार से एक भी सदस्य वहाँ मौजूद नहीं था। ऐसे में यह सवाल सबकी ज़ुबान पर था कि यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी या पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी इस समारोह से नदारद क्यों थे?

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प्रणब मुखर्जी को ‘भारत रत्न’ दे कर सरकार ने एक कॉन्ग्रेसी का किया है सम्मान: अभिजीत मुखर्जी

₹55,335 करोड़ की सड़क बाल ठाकरे के नाम पर: शिवसेना-NCP-कॉन्ग्रेस सरकार का ‘सेक्युलर’ फैसला

महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार (दिसंबर 11, 2019) को कैबिनेट की बैठक में नागपुर-मुंबई समृद्धि एक्सप्रेस वे का नाम बाला साहेब ठाकरे के नाम पर करने का फैसला किया है। इसके अलावा इस बैठक में राजमार्ग को लेकर कई अन्य घोषणाएँ भी की गई हैं। इन फैसलों में समृद्धि राजमार्ग हेतु लिए जाने वाले लोन के भार को कम करने के लिए 3500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त पूंजी आवंटित करने का फैसला भी शामिल है।

कैबिनेट बैठक के बाद पूर्व पीडब्ल्यूडी के मंत्री एकनाथ शिंदे ने इस पर जानकारी देते हुए बताया कि पूरे परियोजना में लगभग ₹55,335 करोड़ की लागत आने की संभावना है, जबकि इसका निर्माण कार्य आने वाले तीन सालों में पूरा होने का अनुमान है।

जानकारी के मुताबिक इस परियोजना में राज्य की मौजूदा शेयर पूंजी ₹27335 करोड़ है। जिसमें महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से ₹3500 करोड़, सार्वजनिक उपक्रमों से ₹5500 करोड़, ₹2414 करोड़ खनिजों में रॉयल्टी माफ के रूप में, और ₹6396 करोड़ निर्माण के दौरान लोन के ऋण के रूप में भुगतान करना है। इसके अलावा भूमि की कीमत के रूप में ₹9,525 करोड़ हैं, जिसमें मुआवजा भी शामिल है।

इस निर्माण कार्य पर वित्त विभाग के अधिकारी ने बताया कि सरकार बाकी का पैसा बैंक लोन के जरिए लेने का विचार कर रही है। लेकिन जितना ज्यादा लोन होगा, उतना ही उस पर ब्याज होगा। इस कारण इस काम के सफलतापूर्वक समाप्त होने पर सवालिया निशान हैं। इसलिए सरकार ने अपनी ओर ब्याज का भार कम करने के लिए ₹3500 करोड़ आवंटित किए हैं।

उल्लेखनीय है कि 701 किमी लंबे इस सुपर एक्सप्रेस वे के बनने के बाद मुंबई से नागपुर की दूरी को 9 घंटे से कम में पूरा किया जा सकेगा। यानी मुंबई से नागपुर यात्री 150 किमी की रफ्तार से जा सकेंगे और जिस यात्रा में उन्हें 15 घंटे गुजारने पड़ते थे, वो समय लगभग आधा हो जाएगा।

बता दें कि प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र में पूर्व सरकार इस राजमार्ग का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखना चाहती थी। लेकिन, शिवसेना की इच्छा पहले भी इसे बाला साहेब के नाम पर करने का था। और, एकनाथ शिंदे ने तब भी कहा था कि दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे का सपना था कि महाराष्ट्र में द्रुतगति से महामार्गों का जाल फैले। ऐसे में बुधवार को राजमार्ग का नाम शिवसेना संस्थापक के नाम पर होने के बाद भी शिंदे ने कहा कि बाला साहेब के महाराष्ट्र के लिए योगदान को देखते हुए राजमार्ग का नाम उनके नाम पर रखने का प्रस्ताव रखा गया था, जिसे सीएम समेत सभी मंत्रियों ने मंजूर कर लिया।

जिस वकील ने कुरान बाँटने के मामले में ऋचा पटेल को दिलाई थी जमानत, उनकी गोली मारकर हत्या

हत्या की वारदात को अंजाम देने वाले हमलावर बेखौफ़ घूमते हुए किस तरह से घटनाओं को अंजाम देते हैं, इस बात का अंदाज़ा सामने आए एक CCTV फुटेज को देखकर लगाया जा सकता है। झारखंड के रांची में सिविल कोर्ट के अधिवक्ता रामप्रवेश सिंह की गोली मारकर हत्या करने वाले शख़्स का वीडियो सामने आया है। इसमें हमलावर ने हाथ पीछे करके पिस्तौल छिपा रखी थी और वो बड़े आराम से अधिवक्ता की ओर चलकर आ रहा था। इसके बाद बिलकुल नज़दीक जाकर उसने अधिवक्ता की आँख के पास गोली मार दी, इससे वो वहीं ज़मीन पर गिर गए और मौक़े पर ही उनकी मौत हो गई। 

हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित खबर

बता दें कि रामप्रवेश सिंह वही अधिवक्ता थे, जिन्होंने 19 साल की ऋचा भारती के उस मामले की पैरवी की थी, जिसमें कोर्ट द्वारा उन्हें (ऋचा भारती) सोशल मीडिया पर साम्प्रदायिक पोस्ट की सज़ा के रूप में क़ुरान बाँटने का आदेश दिया गया था। इस मामले में ऋचा भारती को ज़मानत दिलाने के बाद वो चर्चा में आ गए थे।

इंडिया टुडे की ख़बर

दरअसल, यह घटना बीते सोमवार (9 दिसंबर) को रात के क़रीब सात बजे कांके थाना क्षेत्र के सर्वोदय नगर रोड नंबर पाँच में घटी। मृत अधिवक्ता का घर भी वहीं है। घटना के बाद मौक़े पर पहुँची पुलिस को घटनास्थल से 7.65 बोर की गोली का एक खोखा मिला, जिसे ज़ब्त कर लिया गया।

ख़बर के अनुसार, बाइक सवार दो बदमाशों ने अधिवक्ता को एक गोली आँख के नीचे मारी। गोली उनके सिर को भेदते हुए आर-पार हो गई। इसके बाद आसपास के लोग उन्हें इलाज के लिए रिम्स ले गए, जहाँ डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। विधानसभा चुनाव की गहमा-गहमी और सुरक्षा अलर्ट के बाद भी राजधानी रांची के पॉश इलाक़े में हुई इस तरह की वारदात ने क़ानून-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 

आसपास के CCTV फुटेज खँगालने से पुलिस को बाइक पर सवार एक अन्य अपराधी का भी पता चला नज़र आया। दरअसल, वो हत्या की वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर को वहाँ से ले जाने के लिए उसके इंतज़ार में खड़ा था। जैसे ही हमलावर ने अधिवक्ता को गोली मारी, उसके तुरंत बाद इंतज़ार कर रहे दूसरा अपराधी उसे वहाँ से लेकर भाग जाता है।

अधिवक्ता के परिजनों का कहना है कि सर्वोदय नगर की एक ज़मीन पर क़ब्ज़े के प्रयास को लेकर रामप्रवेश सिंह निशाने पर थे। उन्होंने बताया कि क़रीब डेढ़ महीने पहले सर्वोदय नगर की 81 डिसमिल ज़मीन पर क़ब्ज़ा करने के मामले में रमेश गाड़ी और उसके साले छोटू लकड़ा ने दो दर्जन से अधिक गुर्गों के ज़रिए राम प्रवेश सिंह पर हमला करवाया था।

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पाकिस्तानी नदीम ख़ान के जाल में फँस दुबई भागी हिन्दू लड़की की हुई ‘घर वापसी’

उत्तर प्रदेश के मेरठ के कंकड़खेड़ा निवासी एक व्यापारी की बेटी पाकिस्तानी युवक नदीम ख़ान के चंगुल में फँस कर दुबई भाग गई थी। लगभग एक महीने के बाद वो हिंदू लड़की वापस घर लौट आई है। 8 नवंबर को घर से कुछेक हज़ार रुपए लेकर निकली युवती ने बताया, “मुझे नौकरी का झाँसा देकर पाकिस्तानी युवक नदीम इक़बाल ने बुलाया था, लेकिन वो मुझे दुबई में नहीं मिला। भारतीय दूतावास और केरल की एक फैमिली की मदद से मैं अपने घर लौट सकी हूँ।”

इसके आगे, युवती ने बताया कि इस साल के अप्रैल में फ़ेसबुक के ज़रिए उसकी जान-पहचान दुबई में रहने वाले नदीम इक़बाल से हुई थी। उसने युवती को अच्छी नौकरी का भरोसा दिलाया। नदीम ने युवती को बताया, “मैं दुबई में 6 हज़ार दिरम पर नौकरी करता हूँ, तुम्हारी (युवती) क्वॉलिफ़िकेशन के लिहाज़ से 10 हज़ार दिरम यानी भारतीय करंसी के अनुसार क़रीब दो लाख रुपया महीना मिल जाएगी।” युवती ने बताया कि नदीम ने किसी कंपनी का कोई ज़िक्र नहीं किया था, लेकिन उसने अकाउंट डिपार्टमेंट में काम करने के बारे में बताया था।

नवभारत टाइम्स के गाजियाबाद संस्करण में प्रकाशित ख़बर

घर वापस लौटी युवती ने बताया, “मैं उस पर विश्वास कर पासपोर्ट बनवाकर दुबई चली गई, लेकिन एयरपोर्ट पर नदीम नहीं मिला। परेशान होकर मैं दुबई में रह रही केरल एक फैमिली के सम्पर्क में आई। केरल की फैमिली से पता चला कि दुबई में नौकरी करने के लिए अरबी और इंग्लिश लैंग्वेज आनी ज़रूरी है।” इसके बाद युवती ने वहाँ किराए का कमरा लेकर अरबी भाषा की क्लास ली, लेकिन वहाँ उनकी नौकरी नहीं लगी और पैसे ख़त्म होने पर उन्होंने भारत वापस आने का फ़ैसला किया।

दरअसल, युवती के लापता होने के इस मामले को लव जेहाद से जोड़कर भी देखा जा रहा था। साथ ही मामला संसद में भी उठाया गया था। युवती के पिता ने ट्विटर पर अपनी बेटी को पाकिस्तानी युवक के चंगुल से छुड़ाने के लिए प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री, विदेश मंत्रालय और प्रदेश के मुख्यमंत्री को संदेश लिखा था। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बेटी का पासपोर्ट नंबर और पाकिस्तानी युवक की फ़ोटो भी शेयर की थी।

इसके बाद दुबई स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने युवती के पिता को कॉल करके पूरे प्रकरण की जानकारी माँगी थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जैसे ही उन्हें भारत से रिपोर्ट मिलेगी, वे आगे की प्रक्रिया के लिए त्वरित कार्रवाई करेंगे। बता दें कि दूतावास के अधिकारियों ने फेसबुक और इंस्टाग्राम मुख्यालय से भी रिपोर्ट माँगने की बात की थी।

18 नवंबर की रात कांसुलेट जनरल ऑफ इंडिया (सीजीआई) दुबई की तरफ से युवती के पिता को ट्वीट कर कहा गया था, “आपकी बेटी को ढूँढने के लिए हमने दुबई की एजेंसियों से बात की है। लेकिन किसी संपर्क नंबर या पते के बगैर सूचना मिलना काफी कठिन रहेगा। हम हरसंभव प्रयास करेंगे।”

ग़ौरतलब है कि युवती का पासपोर्ट 4 नवंबर को बना था। इसके बाद 8 नवंबर की सुबह वो पासपोर्ट, शैक्षिक प्रमाण-पत्र और सात हज़ार रुपए के साथ लापता हो गईं। खोजबीन शुरू हुई तो 10 नवंबर को लड़की के पिता ने सांसद राजेंद्र अग्रवाल से मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई। इसके बाद मेरठ पुलिस सक्रिय हुई और विदेशी क्षेत्रीय पंजीयन कार्यालय (एफआरआरओ) दिल्ली से सम्पर्क किया गया। 15 नवंबर को FRRO ने अपनी रिपोर्ट दी कि 8 नवंबर की रात युवती दिल्ली एयरपोर्ट से दुबई गई है। इसके बाद परिवार ने कयास लगाया कि इसके पीछे नदीम का हाथ है, जो पाक के एक पाँच सितारा होटल का मैनेजर है। उसने अपने प्रोफाइल में आई लव पाकिस्तान लिख रखा था।

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‘रोमियो’ बन मेरठ की युवती को दुबई बुलाने वाला नदीम इकबाल भागा पाकिस्तान

पाकिस्तान ने F-16 का किया था दुरुपयोग, अमेरिका के विदेश विभाग ने पत्र लिखकर लगाई फ़टकार

एक शीर्ष अमेरिकी डिप्लोमेट ने अगस्त में पाकिस्तानी वायु सेना के आला अधिकारियों को लिखित रूप से फ़टकार लगाई है। इसमें अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दिए गए F-16 लड़ाकू जेट का दुरुपयोग करने और उसकी सुरक्षा को ख़तरे में डालने का आरोप लगाया गया है।

अमेरिकी समाचार ने आधिकारिक दस्तावेज़ों का हवाला देते हुए इसकी सूचना दी। वेबसाइट के मुताबिक़, तत्कालीन अस्त्र नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के अंडर सेक्रेटरी एंड्रिया थॉम्पसन ने अगस्त में पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल मुजाहिद अनवर ख़ान को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में F-16 फाइटर जेट्स के इस्तेमाल पर उन्हें फ़टकार लगाई गई थी।

दोनों अधिकारियों के बीच हुई बातचीत में कहा गया था कि भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के साथ हुई झड़प के दौरान एक F-16 जेट को मार गिराया था। हालाँकि, इस पत्र में फरवरी की घटना का उल्लेख नहीं किया गया था, लेकिन इसे अमेरिका के द्वारा एक ऐसी पहल के रूप में देखा जा सकता है कि जिसमें इस बात का उल्लेख है कि पाकिस्तान ने F-16 लड़ाकू जेट का दुरुपयोग किया था और ऐसा करके पाकिस्तान ने अपनी बिक्री के मूल नियमों का उल्लंघन किया था। इस पत्र के बाद पाकिस्तान ने F-16 जेट को स्थानांतरित कर दिया।

अधिकारियों ने बताया कि 27 फरवरी को भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी शिविरों पर हवाई हमले शुरू करने के एक दिन बाद, इस्लामाबाद के लड़ाकू विमानों ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और बम गिराए।

अधिकारियों ने कहा कि कथित तौर पर उन स्थानों पर गड्ढ़े दिखाई दिए जहाँ बमों को पाकिस्तानी जेट द्वारा गिराया गया था, लेकिन इस दौरान किसी के हताहत होने की कोई ख़बर नहीं थी। इसके तुरंत बाद, पाकिस्तान वायु सेना के एक F-16 लड़ाकू विमान को मार गिराया गया था और उसे पाकिस्तान के अंदर लगभग तीन किलोमीटर दूर लाम क्षेत्र में गिरते हुए देखा गया था। हालाँकि पाकिस्तान अभी तक इस तथ्य को इनकार करता रहा है।

दुर्घटनाग्रस्त सेनानी के साथ एक पैराशूट को भी गिरते देखा गया था, लेकिन उसके पायलट के बारे में कुछ पता नहीं चल सका। और यह इसलिए क्योंकि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर F-16 के मार गिराए जाने की बात को छुपा लिया है। लेकिन अब जबकि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा लिखा गया पत्र सबके सामने है तो पाकिस्तान की पोल खुल चुकी है।

मार्च में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने पाकिस्तान पर F-16 लड़ाकू जेट विमान के उपयोग का आरोप लगाया था। हालाँकि, यूएस न्यूज ने एक अधिकारी का हवाला देते हुए कहा, “अमेरिकी रक्षा प्रौद्योगिकियों से जुड़े द्विपक्षीय समझौतों की सामग्री पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं करता है, न ही उनसे हमारी कोई बात हुई है।”

विशेष रूप से, थॉम्पसन, जिन्होंने सरकार छोड़ दी है, उन्होंने पाकिस्तानियों को चेतावनी दी है कि उनके (पाकिस्तान) व्यवहार से यह हथियार घातक लोगों के हाथों लगे, और इससे वो “हमारे साझा सुरक्षा प्लेटफार्मों और बुनियादी ढाँचे को कमज़ोर कर सकते थे।”

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के पास 76 अमेरिकी F-16 लड़ाकू विमान हैं – जो अब तक उनके सैन्य शस्त्रागार में सबसे शक्तिशाली लड़ाकू जेट हैं। पाकिस्तान ने पहली बार 1982 में विमान प्राप्त करना शुरू किया और उन्हें राज्य विभाग, रक्षा विभाग और कॉन्ग्रेस द्वारा लगाए गए सख़्त नियमों के तहत बनाए रखा। नियमों में कहा गया है कि इस्लामाबाद केवल दो विशिष्ट वायु सेना ठिकानों पर इन लड़ाकू विमानों को रख सकता है और इनका उपयोग केवल आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए कर सकता है, न कि दूसरे देशों के ख़िलाफ़।

ग़ौरतलब है कि 27 फ़रवरी की सुबह पाकिस्तान के विमानों ने भारतीय सीमा का उल्लंघन किया। जवाबी कार्रवाई में भारतीय वायु सेना ने उनका F-16 लड़ाकू विमान मार गिराया था।

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F-16 के मिसाइल के टुकड़े ने किया पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश

भारत के खिलाफ F-16 का इस्तेमाल कर पाकिस्तान ने मोल ली मुसीबत, अमेरिका ने मांगा जवाब

पाकिस्तान द्वारा F-16 के दुरुपयोग को US ने बताया गंभीर मुद्दा, जाँच जारी

रंजना से प्यार करता था इबरार आलम, दूसरे लड़के को पसंद करने की बात पर काट डाला गला

बिहार के सीवान में 6 दिसंबर को इंटर की छात्रा रंजना कुमारी की गला रेतकर नृशंस हत्या की गई। घटना हुसैनगंज थाने के माहपुर खजरौनी गाँव में घटी। आरोपित की पहचान इबरार आलम के रूप में हुई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही उसकी खून में सनी टीशर्ट, जींस और हत्या को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया गया चाकू, मोबाइल फोन आदि भी बरामद कर लिया गया है।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधीक्षक ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि रंजना की हत्या आलम के साथ रहे प्रेम प्रसंग के कारण हुई। पुलिस के मुताबिक इबरार रंजना की बेवफाई से तंग था, इसलिए उसने प्लान बनाकर उसको मौत के घाट उतारा।

एसपी के अनुसार पचरुखी थाने की सुपौली निवासी रंजना साल 2017 में माहपुर खजरौनी (गाँव) अपनी नानी के घर मैट्रिक की परीक्षा देने आई थी। इसी दौरान उसे इबरार आलम से प्यार हो गया और दोनों में नजदीकियाँ बढ़ गईं। लेकिन, परीक्षा समाप्त होने के बाद रंजना वापस अपने पिता के पास कोलकाता चली गंई और दोनों के बीच मोबाइल पर बात होने लगीं। मगर 5-6 महीने पहले ये बातचीत का सिलसिला कम हो गया और लड़की किसी और लड़के को पसंद करने की बातें इबरार को बताने लगीं। जिसके कारण इबरार दुखी रहने लगा।

पुलिस के अनुसार 30 नवंबर को रंजना ने इबरार को मैसेज भेजकर बताया कि वे दोबारा अपने नानी के घर आ रही है। जिसके बाद आलम ने उसकी हत्या का पूरा प्लान बनाना शुरू किया। लड़की को मौत के घाट उतारने से पहले ही वे बाजार जाकर पॉलीथीन एवं चाकू खरीद लाया था। जिसे उसने अपने घर में रखा हुआ था।

इसके बाद अपने प्लान के अनुसार वह लड़की पर उससे मिलने का काफी दबाव बनाने लगा। जब 6 दिसंबर रंजना उससे मिलने के लिए राजी हुई तो वह उसे पास की एक झोपड़ी में ले जाकर बैठा और बात करने लगा। इबरार ने इस दौरान लड़की को कहा कि वो कोलकाता वाले लड़के को छोड़ दे और उससे शादी कर ले। लेकिन, बहुत कहने पर भी जब वह नहीं मानी, तो इबरार ने अपने प्लान अनुसार उसे पटककर उसका मुँह दबाया और चाकू से गला रेतकर उसकी हत्या कर दी।

घटना को अंजाम देने के बाद उसने लड़की के शव को बगल के गली में ले जाकर फेंक दिया। जबकि अपने कपड़े, चाकू, मोबाइल को पास की नाली में जाकर फेंका।

बता दें कि रंजना कुछ दिन पहले अपनी छोटी बहन पूनम के साथ कोलकाता से माहपुर इंटर की परीक्षा देने आई थी। लेकिन 6 दिसंबर को बगल की बिल्डिंग के पास मिले उसके शव ने सबको झकझोर के रख दिया। छात्रा के नाना ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया था कि घटना वाली रात उनकी नातिन मकान के दूसरे मंजिल के कमरे में उनकी बहू तथा पोती के साथ सोई हुई थी। रात करीब 2 बजे उनकी बहू ने देखा की सोफा पर सोई रंजना वहाँ से गायब है। जिसके बाद उसकी खोजबीन शुरू हुई। खोजबीन के दौरान घर के लोगों ने मकान के बगल की गली में रंजना को मृत पाया। परिजनों ने बताया कि रंजना को जब उन्होंने देखा तो वो खून से लथपथ पड़ी थी तथा गर्दन शरीर से करीब-करीब अलग था। इसके बाद परिवार के लोगों ने इसकी सूचना हुसैनगंज थाने की पुलिस को दी और पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की। करीब एक हफ्ते बाद इस मामले की परत खुल गई और इबरार पकड़ा गया। पूछताछ में उसने सारी कहानी उगली।

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सास शाहीन के साथ लिव इन में था शाहरुख ख़ान, आपसी विवाद के बाद गला रेत फरार

नाखून कटा के शहीद बन रहा था हिन्दू-विरोधी IPS अब्दुर रहमान, लोगों ने खोली पोल

लोकसभा के बाद राज्यसभा में बुधवार (दिसंबर 11, 2019) की रात नागरिकता विधेयक पास होने के बाद कई लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कुछ ने इसे लेकर खुशी जताई, तो कुछ लोगों ने इसे हिंदुस्तान की धर्मनिरपेक्षता पर खतरा बताया। इसी कड़ी में कल महाराष्ट्र के बड़े पुलिस अधिकारी अब्दुर रहमान ने इस्तीफा दे दिया और कहा कि वे कल अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं होंगे। उन्होंने अपना ये फैसला नागरिकता बिल को मुस्लिम विरोधी बताते हुए लिया। लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उन्हें घेर लिया और उनके इस्तीफे के पीछे असली वजह का पर्दाफाश किया। साथ ही मौक़े का फायदा उठाने वाले अधिकारी को और उनका समर्थन करने वाले तबके को यूजर्स ने रहमान की हकीकत भी सबूतों के साथ दिखाई।

दरअसल, बुधवार को अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए अब्दुर रहमान ने एक ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “मैं इस नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 के विरुद्ध हूँ और मैं इस विधेयक की निंदा करता हूँ। जिसके चलते मैंने कल से कार्यालय में उपस्थित ना होने का फैसला लिया है। और अंततः मैं अपनी सेवा को छोड़ रहा हूँ।”

रहमान ने कहा कि बिल के पारित होने के दौरान, गृहमंत्री अमित शाह ने गलत तथ्य, भ्रामक जानकारी और गलत तर्क पेश किए। उनके मुताबिक बिल के पीछे का विचार मुस्लिमों में भय पैदा करने और राष्ट्र को विभाजित करने के लिए है और ये विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। साथ ही धर्म के आधार पर लोगों के साथ भेदभाव करता है। यह भारत में 200 मिलियन मुस्लिमों को नीचा दिखाने का काम है।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ नागरिकता संशोधन विधेयक के राज्यसभा से पास होने के तुरंत बाद अब्दुर रहमान ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए अपनी नौकरी से इस्तीफा देने की बात की। वहीं, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि रहमान ने अगस्त में ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) के लिए आवेदन किया था और वह केवल अपने आवेदन पर निर्णय का इंतजार कर रहे थे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी रहमान के ट्वीट के तुरंत बाद कुछ यूजर्स अगस्त का वो लेटर पोस्ट करने लगे, जिससे साफ हो गया कि रहमान ने अपना फैसला विरोध में नहीं लिया। बल्कि ये उनकी व्यक्तिगत इच्छा थी। और उनकी यह व्यक्तिगत इच्छा नागरिकता संशोधन विधेयक पास होने के 5 महीने पहले ही जाग गई थी।

रहमान द्वारा किए गए ट्वीट को मीडिया गिरोह के लोगों द्वारा तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। नागरिकता संशोधन विधेयक (CAB, कैब) के विरोध में मीडिया गिरोह के लोग भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। तभी तो अब्दुर रहमान के इस्तीफे को ऐसे दिखाया जा रहा है मानो उन्होंने इसी के विरोध में यह फैसला लिया है। जबकि वास्तविकता यह है कि इस समय में इनके द्वारा किया गया ऐलान मौक़ापरस्ती और प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश है, जिसमें बरखा दत्त जैसै नामी चेहरे उनका समर्थन कर रहे हैं। वरना क्या वजह थी कि बरखा जैसी सीनियर जर्नलिस्ट इस्तीफे के दूसरे पेज को अपने ट्वीट में दिखाती है लेकिन पहले पन्ने को गायब कर देती हैं, जिसमें स्पष्ट लिखा है कि रहमान ने खुद ही व्यक्तिगत कारणों से अगस्त में ही VRS के लिए आवेदन किया था।

बता दें कि मजहब के नाम पर नागरिकता विधेयक के विरुद्ध सवाल उठाने वाले और मानवाधिकारों की दुहाई देकर चर्चा बटोरने वाले अब्दुर रहमान इस तरह पहली बार सुर्खियों में नहीं आए हैं। इससे पहले भी पुलिस भर्ती के दौरान उन पर फर्जीवाड़े के आरोप लग चुके हैं। जिसके संबंध में इसी वर्ष अप्रैल में पूर्व महाराष्ट्र सरकार ने उनके ख़िलाफ़ जाँच के आदेश दिए थे। दरअसल पूरा मामला साल 2007 में हुई पुलिस भर्ती से जुड़ा है। साल 2007 में हुई पुलिस भर्ती की परीक्षा में मराठी में लिखना अनिवार्य था, लेकिन अब्दुर रहमान ने ‘विशेष समुदाय’ के लोगों को उर्दू में लिखने की अनुमति दी थी। साथ ही महिला अभ्यार्थियों का कोटा होने के बावजूद भी उनकी भर्ती नहीं की थी।

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हिन्दू बच्चियों को जबरिया पढ़वाया जाता है कलमा, 95% मंदिर छीन लिए, सिखों के सर होते हैं कलम: ओवैसी जी, ये रहा डेटा

नागरिकता विधेयक पर ही BJP को मिली दोबारा सत्ता, बिना घोषणापत्र पढ़े ही शेखर गुप्ता फैला रहे झूठ-भ्रम

लिबरपंथियो, आँकड़े चाहिए हिन्दुओं पर हुए अत्याचार के? ये लो – रेप, हत्या, मंदिर सब का डेटा है यहाँ

असदुद्दीन ओवैसी को डेटा चाहिए। संख्या चाहिए कि इतने हिन्दू पाकिस्तान में बलात्कृत हो रहे हैं, इतने ईसाईयों को बांग्लादेश में मारा जा रहा है, इतने सिख अफ़ग़ानी तालिबान से त्रस्त हैं। इस डेटा के बिना उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि ‘पाक-इस्तान’ जैसी पाक़, अल्लाह के पवित्र किताब में बताए गए हुक्म की बिना पर बनी और उसी के हिसाब से चल रही ज़मीन पर रह रहे काफ़िरों और धिम्मियों को इतनी दिक्कत है कि उन्हें भारत आने की ज़रूरत पड़ जाए। वो अमित शाह से ‘सटीक संख्या’ माँग रहे हैं। संख्या ऐसे है:

पाकिस्तान: 95% मंदिर छीन लिए, सिखों के सर होते हैं कलम, सबसे ज्यादा चर्चों पर हमले

पाकिस्तान की हालत के बारे में जितना ही बोला जाए, उतना कम है। हिन्दुओं की लगातार घटती जनसंख्या के बीच उनकी संसद के अंदर आँकड़ा रखा गया था कि हर साल एक हज़ार हिन्दू लड़कियों का जबरन धर्मांतरण करवा दिया जाता है। ज़ाहिर सी बात है कि जब वे इसके लिए तैयार नहीं होतीं हैं तो इसके लिए उनसे बलात्कार होता है, मारा-पीटा जाता है। परिवार में वापिस न चली जाएँ, इसके लिए उनसे कलमा पढ़वाने के बाद बलात्कारी से ही निकाह करवा दिया जाता है, और एक कागज़ लिखवा लिया जाता है कि वो अपने माँ-बाप से तंग है और मर्जी से निकाह कर रही है; अगर वे उसके अपहरण की एफआईआर करते हैं, तो यह उसे ढूँढ़ने और वापिस काफिर बनाने का पैंतरा है। अमूमन लड़की नाबालिग होती है, तो उसका नकली जन्म प्रमाणपत्र बनवा लिया जाता है। इसी सब अत्याचार से तंग आ कर 5,000 हिन्दू हर साल अपना घरबार छोड़ कर भारत भाग आते हैं

पाकिस्तान में हिन्दुओं के 95% मंदिरों पर कब्ज़ा कर उनमें दुकानें चलाई जातीं हैं। ईसाईयों के कत्लेआम और चर्चों पर हमले, दोनों में टॉपर रह चुका है पाकिस्तान।

कभी इस्लामी आक्रांताओं और औरंगज़ेब के सिपहसालारों जैसे देसी जिहादियों की मौत कहे जाने वाले सिख समुदाय की हालत भी ऐसी ही है। 2014 से 2018 के बीच 10 बार उन्हें निशाना बनाकर हमले किए गए। तालिबान का लगाया हुआ जज़िया न चुका पाने पर एक सिख का सिर कलम कर दिया गया

बांग्लादेश: हिन्दुओं पर लगता है ‘दोहरी निष्ठा’ का आरोप, हमले के लिए हर समय बहाने की तलाश

बांग्लादेश में दो हिन्दुओं ने फ़ेसबुक पर इस्लाम की आलोचना कर दी, तो इसका अंजाम 3,000 से ज़्यादा हिन्दुओं को घरबार आगजनी में खो कर भुगतना पड़ा। जमात-ए-इस्लाम, जिसने बांग्लादेश के राष्ट्रपिता और तत्कालीन राष्ट्रपति शेख मुजीब की हत्या की, के उपाध्यक्ष को 30 साल बाद मौत की सज़ा, मौत की सज़ा मिली, तो इसका भी गुस्सा 1500 हिन्दू घरों और 50 मंदिरों पर निकला

इससे बड़ा दोहरापन क्या होगा कि जिस पाकिस्तान-बांग्लादेश की नींव में ही मजहब विशेष में दोहरी निष्ठा (अपने निवास का देश, बनाम ख़लीफ़ा की ख़िलाफ़त और इस्लाम की उम्मत) हो, वह किसी अन्य समुदाय पर ‘दोहरी निष्ठा’ का आरोप लगाए? लेकिन बांग्लादेश में यही होता है। और इसे करने वाली भी ‘भारत की मित्र’ कहीं जाने वाली शेख हसीना वाजेद हैं, जिनके पिताजी को (ओवैसी गुस्ताख़ी माफ़ करें, लेकिन सच यही है) पाकिस्तान की सरकार ने बांग्लादेश बनने के पहले ही कुत्ते की मौत मार डाला होता, अगर भारत के हिन्दुओं ने, हिन्दू प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने बांग्लादेशी हिंदुओं के साथ बंगालियों के रोटी-बेटी के संबंध को याद कर शरण न दी होती। आज वही संबंध आँख में खटकता है, और 1 करोड़, 40 लाख हिन्दू दोनों पार्टियों के निशाने पर रहते हैं। शेख हसीना के ऐब अपनी कट्टर जिहादिन विपक्षी खालिदा जिया के आगे बस याद नहीं आते, जैसे इस लेख के मुख्य विषय अकबर ओवैसी अपने भाई की खुद से भी घटिया बदज़ुबानी के चलते ‘अच्छा वाला’ ओवैसी बने घूमते हैं।

केवल हिन्दू ही क्यों, इनके आतंक से अन्य समुदाय भी त्रस्त हैं। केवल 2018 के 11 महीनों में बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों ने खुद पर मज़हबी प्रताड़ना के 1700 से अधिक आरोप लगाए हैं। और अगर किसी को ऐसा लग रहा है कि आरोप भर लगने से कोई दोषी नहीं हो जाता, तो उसे यह भी पता होना चाहिए कि मज़हबी हिंसा के 20,000 दोषी भी खुले घूम रहे हैं उसी देश में। 2012 में बौद्धों के मठों और घरों पर सिलसिलेवार हमले में 25,000 लोगों के शामिल होने का अनुमान लगाया गया है।

दूसरे देशों के आँकड़े जुटाना इतना नहीं आसान

ये आँकड़े बानगी के लिए काफ़ी हैं, क्योंकि पतीली के कुछ चावल से ही खाना पका या नहीं, पता चल जाता है। ओवैसी जिस लाटसाहबी से अमित शाह से ”सटीक आँकड़े” माँग रहे हैं, उन्हें शायद पता नहीं है कि दूसरे देश के बारे में इतने महीन आँकड़े सटीकता से ला पाना आसान नहीं है। या शायद पता है, फिर भी बरगला रहे हैं। लेकिन ये कितना मुश्किल है, इसका एक उदाहरण देता हूँ।

विकिपीडिया पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के बारे में बने पेज पर दावा किया गया है कि पाकिस्तान की जनसंख्या में हिन्दू और अन्य अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी में कमी केवल 1971 के विभाजन के चलते आई है, वरना पाकिस्तान में हिन्दुओं की जनसंख्या और उनका अनुपात तो बढ़े ही हैं। सबूत के तौर पर पाकिस्तान के डॉन अख़बार के ताज़ा जनगणना से जुड़े किसी लेख का हवाला दिया गया है।

केवल पढ़ कर, लिंक लगी देखकर कोई भी धोखा खा जाएगा। लेकिन इसे अगर आप खोलें तो पाएँगे कि जिस दावे का ‘सबूत’ इस लिंक को बताया जा रहा है, वह तो इसमें किया ही नहीं गया है। यानि पाकिस्तान की जिहादी प्रोपेगंडा मशीनरी इतनी सक्रिय है कि एक सच का विकिपिडिया आर्टिकल भी नहीं निकल सकता। ऐसे में ओवैसी किस आधार पर यह उम्मीद कर रहे हैं कि अमित शाह एनआरसी लाने के पहले पाकिस्तान में एनएसएसओ का सर्वे कराएँ, उसे आईएसआई से प्रमाणित कराएँ, और उसके बाद ही वहाँ केवल अपनी कुफ़्र आस्था का ख़मियामाजा भुगत रहे लोगों के लिए कुछ करें?

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नागरिकता संशोधन विधेयक बना कानून, राज्यसभा में 125-105 से पारित, मोदी-शाह ने दी बधाई

नागरिकता संशोधन विधेयक को गृहमंत्री अमित शाह ने आज राज्यसभा में पेश किया। जहाँ से यह लम्बी बहस के बाद पास हो गया है। इस बिल के पक्ष में 125 और विपक्ष में 105 वोट पड़े। इस प्रकार राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) बहुमत से पारित हो गया है। इस बिल के लिए कुल 230 वोट पड़े, जिसमें पक्ष में 125 वोट और विपक्ष में 105 वोट पड़े।

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान वाले इस विधेयक को पेश करते हुए उच्च सदन में गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों के पास समान अधिकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी कम से कम 20 फीसदी कम हुई है।

बता दें कि इस बिल को पेश करते हुए अमित शाह ने कहा कि आज मैं एक ऐतिहासिक बिल लेकर सदन में उपस्थित हुआ हूँ। इस बिल के प्रावधान में, लाखों करोड़ों लोग जो नर्क की यातना का जीवन जी रहे हैं, उन्हें नई आशा दिखाने का ये बिल है। उन्होंने कहा कि ये बिल उन लोगों को, जो धर्म के आधार पर प्रताड़ित होकर भारत आए हैं, उन्हें नागरिकता देने का बिल है। कुछ विशेष छूट भी इस निश्चित वर्ग के लिए हमने सोची हैं। साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों के अधिकारों, उनकी भाषा, संस्कृति और उनकी सामाजिक पहचान को संरक्षित करने के लिए भी हम प्रावधान लेकर आए हैं।

अमित शाह ने राज्यसभा में यह भी कहा कि कभी-कभी कॉन्ग्रेस के कुछ नेता के बयान और पाकिस्तानी नेताओं के बयान घुल-मिल जाते हैं। कॉन्ग्रेस और पाकिस्तान के बयान में कभी-कभी कोई अंतर नहीं होता। आर्टिकल 370 पर यूएन में कॉन्ग्रेस के नेताओं और पाकिस्तान के नेताओं ने जो बयान दिया, वह भी एक है। 

कपिल सिब्बल और चिदंबरम की ओर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि दोनों संसद को डरा रहे हैं कि संसद के दायरे में कोर्ट घुस जाएगा भला। अदालत ओपन है। कोई भी अदालत जा सकता है। हमें इससे डरना नहीं चाहिए। हमारा काम अपनी विवेक, बुद्धि से कानून बनाना है और जो हमने किया है और मुझे विश्वास है कि यह कानून अदालत में भी सही पाया जाएगा।

अमित शाह ने राज्यसभा में जवाब देने के दौरान ममता बनर्जी का नाम लिया, जिस पर टीएमसी सांसदों ने हंगामा कर दिया। दरअसल, अमित शाह घुसपैठ पर ममता बनर्जी के एक बयान को कोट कर रहे थे। अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी का जिक्र करते हुए कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठ का जिक्र ममता बनर्जी ने 2005 में किया था

अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि कपिल सिब्बल जी ने कहा कि आपको कैसे पता कि जो लोग आ रहे हैं वे धार्मिक आधार पर पीड़ित हैं। तो हम उन्हें बताना चाहते हैं कि हमें इसलिए पता हैं क्योंकि हमारे आँख कान खुले हैं, हमने वोटबैंक के लिए अपने आँख कान बंद नहीं कर रखे हैं। अमित शाह ने आगे कहा कि सिब्बल जी ने कहा कि देश का मुस्लिम आपसे नहीं डरता है। मैं कहता हूँ डरना भी नहीं चाहिए, बस आप उन्हें डराने की कोशिश मत कीजिए। वे कहते हैं कि इस बिल से मुस्लिमों का अधिकार छिन जाएगा, मगर मैं सबको भरोसा दिलाना चाहता हूँ कि इस बिल से किसी का भी अधिकार नहीं छिनेगा।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार देश के संविधान पर भरोसा रखती है और मैं भरोसा दिलाता हूँ कि यह देश कभी मुस्लिम मुक्त नहीं होगा। 

अमित शाह ने कहा कि मुझे आइडिया ऑफ इंडिया की बात मत समझाइए। मैं भी यहीं पैदा हुआ हूँ और मेरी सात पुश्तें यहीं पैदा हुई हैं। मैं जन्मा हूँ यहीं और मरूँगा भी यहीं। मैं कोई बाहर से नहीं आया। मुझे आइडिया ऑफ इंडिया का अंदाजा है।

बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए या नहीं, इस पर वोटिंग हुई। वोटिंग में शिवसेना ने हिस्सा नहीं लिया। वोटिंग में सेलेक्ट कमेटी को भेजने के पक्ष में कम मतदान हुए, जबकि नहीं भेजने के पक्ष में ज्यादा वोट आए। इस तरह से  नागरिकता संशोधन बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने का विपक्ष का प्रस्ताव गिर गया और पक्ष में 99 और विपक्ष में 124 वोट पड़े।