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लोकसभा में स्मृति ईरानी से कॉन्ग्रेस के 2 सांसदों ने की अभद्रता, भाजपा माफी पर अड़ी

लोकसभा में शुक्रवार को कॉन्ग्रेस ने उन्नाव में दुष्कर्म पीड़िता को जलाए जाने का मामला उठाया। इस दौरान कॉन्ग्रेस के दो सांसदों पर महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के साथ अभद्रता करने का आरोप भाजपा ने लगाया है। भाजपा ने मॉंग की कि अपनी हरकत के लिए कांग्रेस सांसद टीएम प्रतापन और डीन कोरियाकोस सदन में बिना शर्त माफी माँगें।

भोजनावकाश के बाद लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष के सदस्यों ने यह मामला उठाया और कॉन्ग्रेस के दोनों सांसदों पर ईरानी की सीट के सामने आकर उन्हें धमकाने का आरोप लगाया। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कॉन्ग्रेस सांसदों का धमकी भरे अंदाज में उनके सामने जाकर अपनी बात कहना गलत है। दोनों को इसके लिए बिना शर्त माफी माँगनी चाहिए।

कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि जब यह मामला हुआ उस समय वह सदन में नहीं थे और उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। वह सदस्यों से बात करेंगे। वहीं ईरानी की पीछे वाली सीट पर बैठी भाजपा की संगीता देव ने कहा कि कांग्रेस के दोनों सांसद आस्तीन चढ़ाकर मारने के अंदाज में महिला एवं बाल विकास मंत्री के पास आए थे।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ईरानी के बोलने के दौरान कॉन्ग्रेस के कुछ सांसदों ने जैसे हरकत की वह निंदनीय है और उन्हें इसके लिए माफी मॉंगनी चाहिए। इससे पहले उन्नाव का मामला उठाते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आज हम एक तरफ राम मंदिर बनाने वाले हैं, दूसरी तरफ देश में ‘सीताएं’ जलाई जा रही हैं। जवाब में ईरानी ने कहा कि बलात्कार जैसी घटनाओं पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इस मुद्दे पर ईरानी और कांग्रेस के कुछ सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। ईरानी ने इसका जवाब देते हुए विपक्षी सांसदों से कहा कि आप यहॉं मुझ पर चिल्ला रहे हैं। इसका मतलब है कि आप एक महिला के साथ खड़ा नहीं होना चाहते और न ही मुद्दे पर बात करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जब पंचायत चुनाव के दौरान विरोधियों को चुप कराने के लिए रेप का इस्तेमाल राजनैतिक तौर पर किया गया तब आप चुप थे।

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी ने कहा कि आज बंगाल के एक सांसद यहॉं मंदिर का नाम ले रहे थे। हैदराबाद-उन्नाव की घटना के बारे में बोल रहे थे। लेकिन, मालदा पर क्यों चुप्पी साध कर बैठे हैं। मालदा का जिक्र होते ही विपक्षी सदस्यों ने हॅंगामा शुरू कर दिया। टीएमसी के सदस्यों ने पूछा कि बताइए क्या हुआ? जवाब में ईरानी ने कहा कि बंगाल का अखबार पढ़िए। मालदा में रेप को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

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पीस पार्टी, जमीयत, मिस्बाहुद्दीन समेत अयोध्या मामले में कई याचिकाएँ दायर कर रहा मुस्लिम पक्ष

मीडिया खबरों के अनुसार पीस पार्टी की ओर से अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका दायर की जा चुकी है। पीस पार्टी की 217 पन्ने की याचिका में याचिका में दावा किया गया है कि 1949 तक बाबरी के केंद्रीय गुंबद के नीचे नमाज़ अता होती रहती थी। इसके अलावा 1885 में हिन्दुओं के हिस्से में बाहरी अहाते का राम चबूतरा और मुस्लिमों के कब्जे में आंतरिक हिस्सा होने की बात कही गई है।

गौरतलब है कि 9 नवंबर, 2019 के अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यों वाली संविधान बेंच ने राम जन्मभूमि स्थल का पूरा मालिकाना हक हिन्दुओं दिया था। साथ ही मस्जिद बनाने के लिए अलग से 5 एकड़ ज़मीन देने के निर्देश केंद्र सरकार को दिए थे। इस पीठ की अध्यक्षता तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने की थी और इसमें जज जस्टिस अब्दुल नज़ीर भी शामिल थे। पीठ ने अपना फैसला सर्वसम्मति से दिया था।

पीस पार्टी के अलावा 4 अन्य व्यक्तियों द्वारा भी याचिकाएँ दाखिल किए जाने की बात मीडिया में कही जा रही है। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार इनके नाम मिस्बाहुद्दीन, मौलाना हस्बुल्लाह, हाजी महबूब और रिज़वान अहमद हैं। न केवल इनकी याचिकाओं को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का समर्थन प्राप्त होने की बात कही जा रही है, बल्कि इनका केस भी सुप्रीम कोर्ट में वकील राजीव धवन ही लड़ेंगे।

राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की पैरोकारी करने वाले वकील राजीव धवन ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के ख़िलाफ़ विवादास्पद बयान दिया था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले में विवादित रहे 2.77 एकड़ समेत पूरी 67 एकड़ भूमि हिन्दुओं को रामलला का मंदिर बनाने के लिए दिए जाने को मुस्लिम पक्ष के साथ अदालत का अन्याय करार दिया था, और साथ ही दावा किया कि हिन्दुओं ने माहौल खराब किया और दूसरा पक्ष शांत रहा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी ऐसे ही आरोप लगाए थे।

बता दें कि अन्य मुस्लिम पक्षकारों में सुन्नी केंद्रीय वक़्फ़ बोर्ड ने मामले में आगे क़ानूनी लड़ाई लड़ने से कदम पीछे खींच लिए हैं। वह फैसले में मिले 5 एकड़ को भी स्वीकार करने या न करने पर भी विचार करेगा। एक अन्य मरहूम पक्षकार हाशिम अंसारी के पुत्र इक़बाल अंसारी ने भी कोई क़ानूनी कदम उठाने से इंकार कर दिया है।

वहीं जमीयत उलेमा हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका में राजिव धवन को अधिवक्ता के पद से हटा दिया गया है। इसे लेकर धवन बहुत ‘तकलीफ़ में’ भी बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि मुकदमा जीतने के लिए राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने, औरंगज़ेब को ‘उदारवादी’ शासक बताने जैसे कई पैंतरे धवन ने अदालत में चले थे, जिससे हिन्दू समाज आहत हुआ था।

अयोध्या में मस्जिद के लिए 5 एकड़ क्यों: SC में याचिका दाखिल करेगी हिन्दू महासभा

अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की अंतिम तिथि पास आते ही दिलचस्प मोड़ भी आने लगे हैं। हिन्दूवादी राजनीतिक दल अखिल भारत हिन्दू महासभा ने बाबरी मस्जिद ध्वंस के एवज में मुआवजे के रूप में मुस्लिम पक्ष को मिल रही 5 एकड़ ज़मीन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने जा रही है। इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए महासभा अदालत से इस आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए कहेगी।

पार्टी के वकील विष्णु शंकर जैन के अनुसार, “विवादित इमारत के बाहरी और भीतरी हिस्से पर हिंदू दावा मज़बूत होने के चलते जगह हमें मिली। पूरा इंसाफ करने के नाम पर दूसरे पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने का हम विरोध करेंगे। फैसले में 1949 और 1992 की घटनाओं पर जो टिप्पणी की गई है, उसे भी हटाने की माँग करेंगे।” गौरतलब है कि अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 1949 में 22-23 दिसंबर की रात राम लला की मूर्तियाँ वहाँ प्रकट नहीं हुईं थीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से रखवाईं गईं थीं। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने 1992 में हुए बाबरी ध्वंस (जिसकी कि संयोगवश आज, 6 दिसंबर, 2019 को बरसी है) को भी असंवैधानिक और गैर-क़ानूनी बताया था।

पूरी जमीन दे दी थी राम लला को

9 नवंबर, 2019 के अपने ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यों वाली संविधान बेंच ने राम जन्मभूमि स्थल का पूरा मालिकाना हक हिन्दुओं को दिया था। साथ ही मस्जिद बनाने के लिए अलग से 5 एकड़ ज़मीन देने के निर्देश केंद्र सरकार को दिए थे। इस पीठ की अध्यक्षता तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई ने की थी और इसमें मुस्लिम जज जस्टिस अब्दुल नज़ीर भी शामिल थे। पीठ ने अपना फैसला सर्वसम्मति से दिया था।

लाला लाजपत राय ने बनाई, मालवीय बने पहले अध्यक्ष

याचिकाकर्ता अखिल भारत हिन्दू महासभा 1907 में स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय ने अपने आर्य समाजी साथियों लाल चंद और शादी लाल के साथ मिलकर “पंजाब हिन्दू महासभा” के तौर पर बनाई थी। लाहौर में हुए पहले अधिवेशन की अध्यक्षता महामना पण्डित मदन मोहन मालवीय ने की थी, जो आगे जाकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्थापक हुए। 1921 के 6ठे अधिवेशन में “अखिल भारत हिन्दू महासभा” के रूप में इसका नामकरण हुआ था।

वीर सावरकर के नेतृत्व में इस संगठन को सबसे अधिक विभाजन के दंगों के समय हिन्दुओं की रक्षा के लिए कदम उठाने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा हिन्दू महासभा ने विभाजन के लिए राज़ी हो जाने पर कॉन्ग्रेस और उसके नेताओं गाँधी-नेहरू का भी विरोध किया था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी हिन्दू महासभा के नेता रहे हैं।

फडणवीस ने इस्तीफा दिया, अगले ही दिन सिंचाई घोटाले में अजित पवार को क्लीनचिट

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे अजित पवार को सिंचाई घोटाले में क्लीनचिट मिल गई है। यह घोटाला अजित के महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री रहते हुआ था। 27 नवंबर को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अजित पर लगे सारे आरोप वापस ले लिए। हलफनामा दाखिल होने से एक दिन पहले ही भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। अजित पवार के उप मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर वापस एनसीपी में लौट जाने पर फडणवीस ने अपना पद छोड़ा था।

ह​लफनामा दाखिल करने के अगले दिन 28 नवंबर को राज्य में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महा विकास अघाड़ी की सरकार बनी। इस सरकार में शिवसेना के अलावा एनसीपी और कॉन्ग्रेस भी शामिल है।

हलफनामे में कहा गया है कि जॉंच में वीआईडीसी के चेयरमैन (जल संसाधन मंत्री) की संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले।

महाराष्ट्र एसीबी द्वारा दाखिल हलफनामा

हलफनामे में कहा गया है कि विदर्भ सिंचाई विकास निगम (VIDC) के अध्यक्ष अजीत पवार को क्रियान्वयन एजेंसियों के कृत्यों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।


महाराष्ट्र एसीबी द्वारा दाखिल हलफनामा

गौरतलब है कि साल 1999 से 2009 तक जल संसाधन मंत्री रहे अजित पवार के ख़िलाफ़ ये हलफनामा कई आरोपों से जुड़ा हुआ है। जिसमें विदर्भ में शुरू हुई 32 सिंचाई परियोजनाओं का मामला भी शामिल है, जिनकी लागत 3 महीनों के भीतर 17, 700 करोड़ रुपए तक बढ़ गई थी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार पूर्व एसीबी अध्यक्ष और मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे ने अजित पवार के ख़िलाफ़ हलफनामा दाखिल किया था। जिसमें उनपर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने गोसीखुर्द और जिगाँव में अवैध रूप से टेंडर को एक्स्टेंड करने के लिए हस्ताक्षर किए और महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस एंड इंस्ट्रक्शन के नियम 10 के तहत वे अपने विभाग के सभी कार्यों के लिए जबावदेह हैं।

हालाँकि, नए हलफनामे में संजय बर्वे के आब्जर्वेशन को खारिज करते हुए कहा गया है कि वीआईडीसी द्वारा तय प्रक्रिया का पालन हुआ था और जिस नोट शीट में पवार ने हस्ताक्षर किए थे उसमें कोई भी नकारात्मक टिप्पणी नहीं थी। महाराष्ट्र गवर्नमेंट रूल्स ऑफ बिजनेस ऐंड इंस्ट्रक्शन के नियम 14 का हवाला देते हुए कहा गया कि संबंधित विभाग के सचिव को टेंडर से संबंधित आवश्क मामलों की पड़ताल के बाद ही उसकी जानकारी संबंधित मंत्री और मुख्य सचिव को देनी थी। लेकिन अधिकारी ने ऐसा नहीं किया।

नए हलफनामे में कहा गया कि जल संसाधन विभाग के सचिव और विदर्भ सिंचाई विभाग महामंडल के कार्यकारी संचालक का दर्जा, कर्तव्य तथा जवाबदेही समान है। इसलिए सिंचाई परियोजनाओं के टेंडर व खर्च मंजूरी में अवैधता की पड़ताल करने का दायित्व इन दोनों अधिकारियों का था। उनको संबंधित अवैधता की जानकारी पवार को देनी चाहिए थी। चूँकि उन्होंने अपने दायित्व का निर्वहन नहीं किया, इसलिए घोटाले में पवार की जवाबदेही नहीं तय की जा सकती।

यहाँ बता दें कि साल 2014 के राज्य चुनावों में ये आरोप एक राजनैतिक मुद्दा था। जिससे जुड़े मामले को देवेंद्र फडणवीस ने चुनाव जीतने के बाद ही खोल दिया था। विदर्भ और कोंकण जिले में फैले 44 परियोजनाओं में घोटाले से संबंधित 23 प्राथमिकी और 5 चारशीट दायर हुई थी। इसके बाद कोंकण के बालगंगा परियोजना में पवार की भूमिका हमेशा से जाँच के दायरे में रही। लेकिन इनमें किसी भी मामले पर उन पर आरोप नहीं लगाए गए और न ही उनका नाम किसी एफआईआर में लिया गया।

इस मामले में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि पवार को क्लीनचिट हैरानी की बात है। ऐसा कैसे हो सकता है कि एसीबी के एक अधिकारी द्वारा दाखिल हलफनामे से दूसरा अलग हो। उन्होंने विरोध जताते हुए उम्मीद जताई कि कोर्ट इसे खारिज कर देगा।

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गैंगरेप पीड़िता की अर्ध-नग्न लाश: टूटी उंगलियाँ, आँखें बाहर निकली हुईं – शाबोद्दीन, शेख बाबू, मकदूम ने कबूला जुर्म

हैदराबाद में 26 वर्षीय पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के साथ गैंगरेप और फिर उनके शव को जला देने की ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम देने के तीन दिन पहले, उसी तेलंगाना में एक दलित महिला का बलात्कार किया गया था और बड़ी बेरहमी से पीड़िता की हत्या भी कर दी गई थी।

इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ़्तार किया गया है और उन्होंने अपने अपराध को क़बूल कर भी लिया है। वहीं, पीड़ित परिवार का कहना है कि पुलिस उन्हें पीड़िता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने से मना कर रही है क्योंकि रिपोर्ट में कुछ ऐसा है, जिसे शायद छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। जहाँ एक तरफ हैदराबाद गैंगरेप की घटना पूरे देश को पता है वहीं, यह इस घटना के बारे में शायद बहुत कम लोग ही जानते होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि इस घटना को मीडिया में बहुत कम कवरेज मिली है।

30 वर्षीय गीता (बदला हुआ नाम) का परिवार, निर्मल ज़िले के खानपुर मंडल के गोसम्पल्ली गाँव का रहने वाला है। लेकिन यह अपने पति-बच्चों के साथ यहाँ नहीं रहती थीं। ये खुद, इनके पति और दो बच्चे अपने गाँव से 100 किलोमीटर दूर एक किराए के मकान में रहते थे। आजीविका के लिए इनका परिवार जहाँ रहता था, वो आसिफाबाद ज़िले (पहले इस जिले का नाम आदिलाबाद था) के लिंगापुर मंडल में स्थित है।

पीड़िता अपने पति (38 साल के) की तरह सड़क पर घूम-घूम कर गुब्बारे और महिलाओं के लिए कम दाम वाले साज-सज्जा का सामान बेचती थी। 25 नवंबर की सुबह, उनके पति टेकू गोपी को वो एकांत स्थान पर अर्ध-नग्न अवस्था में मृत मिलीं। शरीर पर कई चोट के निशान भी थे। इससे पहले रात में ही गोपी ने लिंगापुर पुलिस स्टेशन में अपनी पत्नी के लापता होने की शिक़ायत दर्ज कराई थी।

शव मिलने के बाद FIR किया गया। इसमें दर्ज गोपी के बयान के अनुसार वह और पीड़िता (उनकी पत्नी) अपने-अपने काम काम के लिए 24 नवंबर को सुबह 6 बजे घर से निकले थे।

गोपी ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी को एलापेटार में ड्रॉप किया और खुद मोदीगुडा चले गए। हमेशा की तरह जब वो अपनी पत्नी को दोपहर 2 बजे लेने के लिए एलापेटार लौटे, तो वो वहाँ नहीं मिलीं। इस दौरान उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ़ था। उन्होंने अपनी पत्नी की खोजबीन की, लेकिन कहीं कुछ पता नहीं चला। इसके बाद गोपी ने उसी रात, पुलिस में अपनी पत्नी के लापता होने की शिक़ायत दर्ज कराई।

अगली सुबह, वह और कुछ ग्रामीण फिर से तलाश में निकले। आख़िरकार उन्हें सुबह क़रीब 9 बजे लिंगनापुर मंडल के रामनायकटांडा और इलापार गाँवों के बीच उनका शव मिला। उनकी साड़ी घुटनों से ऊपर खींची हुई थी, ऊपरी शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था, उनके सिर, गले और हाथों पर गंभीर चोट के निशान थे।

बयान में आगे कहा गया है कि गीता और गोपी बडगा जंगम (अनुसूचित जाति) से संबंध रखते हैं। गोपी को इस जघन्य अपराध के पीछे शाबोद्दीन, बाबू और मकदूम नाम के तीन लोगों पर शक था, क्योंकि ये तीनों भी उस दौरान अपने घरों से ग़ायब थे।

गोपी अपनी पत्नी के साथ हुए इस जघन्य अपराध के बाद से गोसांपल्ली में रह रहे हैं। उन्होंने स्वराज्य को बताया कि इस ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम देते वक़्त पीड़िता के चेहरे और उनके शरीर पर बुरी तरह से कई वार किए गए। उनकी आँखें उभरी हुई थीं, पत्थर से बार-बार वार के कारण शायद उनकी उंगलियाँ टूट गईं थी। गोपी ने यह भी बताया कि उनकी पत्नी के पैर भी अजीब तरीके से मुड़े हुए थे।

गोपी को घटना-स्थल पर प्लास्टिक के दस्ताने भी मिले। उन्होंने बताया,

“आरोपितों ने उनकी (पीड़िता) गला दबाकर हत्या कर दी, शायद उन्होंने प्लास्टिक के दस्तानों का इस्तेमाल इसलिए किया, जिससे उन्हें पकड़ा नहीं जा सकेगा।”

गोपी ने कहा, “केवल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही उनकी मौत का कारण पता चल सकता है।” लेकिन, लिंगायत पुलिस स्टेशन में उन्होंने जब-जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बारे में पूछा तो उन्हें बार-बार वहाँ से भगा दिया गया।

इस मामले में गोसांपल्ली के सरपंच टेकू गंगाराम ने भी कहा कि पीड़िता की गर्दन में चोट के निशान थे, जिससे यह पता चलता है कि शायद उनकी गला घोंटकर हत्या कर दी गई है। लेकिन, वो इस बात की पुष्टि के लिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं।

समाचार पोर्टल द न्यूज मिनट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस के अनुसार, आरोपित- शेख बाबू (35), शेख शाबोद्दीन (30) और शेख मकदूम (40) ने बलात्कार और हत्या की बात क़बूल कर ली है। पुलिस ने उन पर हत्या और बलात्कार के साथ-साथ अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

लिंगापुर के सब-इंस्पेक्टर ने बताया कि आरोपितों ने पीड़िता पर तब हमला किया, जब वो एक गाँव में अकेले घूम रही थीं। इसके बाद उन्होंने मिलकर बलात्कार और हत्या की वारदात को अंजाम दिया।

स्थानीय बडगा जंगम जाति के संगठन के महासचिव टेकु मधु ने स्वराज्य को बताया कि आरोपित एलापेटार गाँव से ताल्लुक रखते हैं, जो मुस्लिम बहुल है और गोंड भाषा को उर्दू के साथ मिला कर बोलते हैं। उन्होंने बताया, “हम उनके लिए सार्वजनिक फाँसी से कम कुछ नहीं चाहते।”

गोपी ने घटना के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया। गंगाराम और अन्य ग्रामीणों ने कहा कि अपराध के एक दिन बाद, उन्होंने खुद पर मिट्टी का तेल डाला और ख़ुद को आग लगाने की कोशिश की, लेकिन पड़ोसियों ने समय रहते उन्हें बचा लिया।

एक महिला पड़ोसी ने गोपी के बारे में बताया, “उनकी स्थिति अभी भी स्थिर नहीं है। आत्महत्या करने की सोचने से पहले उन्होंने बच्चों के बारे में भी नहीं सोचा।” महिला ने कहा, “ऐसी त्रासदी भला कौन सहन कर सकता है? अब बच्चों का क्या होगा।” उन्होंने बताया कि उनका एक बच्चा आठ साल का है और दूसरा 10 साल का है।

पीड़िता के भाई ने कहा कि ग़रीब परिवार को एक बड़ा झटका लगा है और मीडिया के माध्यम से उन्होंने सरकार से वित्तीय सहायता की अपील की है। वहीं, एक अन्य पड़ोसी ने कहा, “सरकार की ओर से अब तक किसी ने भी हमसे मुलाक़ात नहीं की है।”

ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने लिंगापुर में दंपति के पड़ोसियों से सुना है कि आरोपित शराबी और नशेड़ी थे। एक आरोपित ने कहा कि उसकी शादी पिछले साल हुई थी और उसकी पत्नी सात महीने की गर्भवती थी।

गोसांपल्ली में महिलाओं ने कहा कि उन्हें घर से बाहर निकलने से बहुत डर लगता है। इनमें से कई महिलाएँ पीड़िता की ही तरह सड़क पर घूम-घूम कर काम करती हैं। एक महिला ने बताया कि पीड़िता बहुत सुंदर महिला थीं इसलिए आरोपितों की नज़र उनके ऊपर कई दिनों से थी। इस वारदात को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया है।

मारे गए सभी आरोपित: पुलिस ने वहीं किया एनकाउंटर, जहाँ ‘प्रीति रेड्डी’ के साथ किया था जघन्य अपराध

‘पूरी तरह जली या नहीं’ – स्कूटर से बॉडी को वापस देखने आए थे आरोपित: ‘प्रीति’ रेड्डी केस में नया खुलासा

‘प्रीति’ रेड्डी केस: खेत में घसीट कर बारी-बारी से किया रेप, ट्रक में लाश डाल खरीदा था पेट्रोल-डीजल

प्रीति रेड्डी मर गई फिर भी रेप करते रहे दरिंदे: आरिफ के प्लानिंग की पूरी डिटेल

…वो पेट्रोल पम्प वर्कर, जिसकी मदद से ‘प्रीति रेड्डी’ के बलात्कारी-हत्यारे तक पहुँच पाई पुलिस

आरिफ ने ‘प्रीति रेड्डी’ का मुँह-नाक दबाया, उसी ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला: पुलिस की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

UP पुलिस ने ठोके 103 अपराधी, 17745 का डर से सरेंडर: मायावती ने कहा था हैदराबाद से सीखो

रेप के बाद पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) की जघन्य हत्या करने के मामले के चारों आरोपितों को हैदराबाद पुलिस ने मार गिराया। इसके बाद उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश की पुलिस को हैदराबाद की पुलिस से सीख लेने को कहा। जवाब देने में यूपी पुलिस ने भी देरी नहीं की और आँकड़े जारी कर बताया कि दुर्दांत अपराधियों को मार गिराने में वह भी पीछे नहीं है।

जिन परिस्थितियों में हैदराबाद में एनकाउंटर हुआ उनको लेकर सवाल बने हुए हैं। बावजूद इसके ज्यादातर लोग, जिसमें नेता भी शामिल हैं इसका स्वागत कर रहे हैं। हैदराबाद में गैंग रेप के बाद प्रीति रेड्डी की हत्या कर दी गई थी। उसके बाद आरोपितों ने उनके शव को जला दिया था। हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई का स्वागत करते हुए मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराध पर काबू पाने के लिए इससे सीख लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार सो रही है। यहाँ और दिल्ली में भी हैदराबाद पुलिस से प्रेरणा लेनी चाहिए। लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि यहाँ अपराधियों के साथ मेहमानों जैसा सलूक होता है। उन्होंने कहा कि यूपी में अब जंगलराज है। जब उनकी सरकार थी तो उन्होंने अपनी पार्टी के आरोपितों को भी जेल भेजा।

मायावती के दावों की पोल यूपी पुलिस के आँकड़ों ने खोल दी है। आँकड़ों के मुताबिक़, यूपी में पिछले दो साल में 5,178 मुठभेड़ों में पुलिस ने 103 अपराधियों को मार गिराया है। 1,859 अपराधी पुलिस कार्रवाई में जख्मी हुए। इसके अलावा, 17,745 अपराधियों ने डर से आत्मसमर्पण किया या खुद ही जमानत रद्द करा जेल पहुँच गए। जाहिर है, राज्य में अपराधियों के साथ मेहमान जैसा सलूक नहीं हो रहा।

दिलचस्प यह है कि मायावती की टिप्पणी का हवाला देते हुए अलग-अलग मीडिया हाउस के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी पुलिस ने कई बार इन आँकड़ों को ट्वीट किया है। यूपी में तो कई मामलों में अपराधियों ने योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद ही सरेंडर किया है। इस साल जनवरी में यूपी सरकार की ओर से जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार मार्च 2017 से जुलाई 2018 के बीच 3000 से ज्यादा एनकाउंटर हुए। इनमें 78 अपराधी मारे गए और 800 से ज्यादा जख्मी हुए। इसी दौरान पुलिस के हाथों मारे जाने के डर से 11,981 से ज्यादा अपराधियों ने अपनी जमानत रद्द करवा कोर्ट में सरेंडर किया।

ग़ौरतलब है कि हैदराबाद के बाहरी इलाके शादनगर में पशु चिकित्सक प्रीति रेड्डी के साथ गैंगरेप कर निर्मम हत्या करने वाले चारों आरोपित पुलिस द्वारा गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की देर रात एनकाउंटर में मारे गए। अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार एनकाउंटर उसी जगह पर हुआ, जहाँ उन दरिंदों ने पीड़िता के शव को जलाया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गुरुवार (5 दिसंबर) की देर रात पुलिस पूरे क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिए चारों आरोपितों को एनएच-44 पर लेकर गई थी। लेकिन, वहाँ पर चारों पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने चेतावनी देते हुए उन्हें रोका, लेकिन वो भागते रहे। अंततः पुलिस को उन पर गोली चलानी पड़ी और मौक़ा-ए-वारदात पर ही उन्हें वहीं ढेर कर दिया। खुद तेलंगाना के पुलिस कमिश्नर ने इस खबर की पुष्टि शुक्रवार (6 दिसंबर) की सुबह की।

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5 लड़कियों का गैंगरेप करने वाले पादरी अल्फांसो समेत 6 को उम्रकैद… लेकिन NGO मामले में बरी

पिछले साल 5 लड़कियों के साथ रेप करने के मामले में झारखंड के खूँटी की अदालत में एक पादरी समेत 6 लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इनमें से एक केस पीड़िताओं की ओर से दर्ज करवाया गया था जबकि दूसरा एक एनजीओ की ओर से। युवतियों की शिकायत पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश राजेश कुमार की अदालत ने 17 जून 2019 को स्थानीय चर्च के फादर अल्फांसो आइंद, बाजी सामद उर्फ टकला, अजुब सांडीपूर्ति, जोनास मुंडा, जॉन जुनास तिड़ू और बलराम सामद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन, ताजा जानकारी के मुताबिक एनजीओ की शिकायत पर सुनवाई के दौरान इन सभी आरोपितों को बरी कर दिया गया। कोर्ट ने यह फैसला गवाहों के अदालत में समय से पेश न होने के कारण लिया।

प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक खूँटी के न्यायधीश राजेश कुमार की अदालत ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने वाले गैर सरकारी संगठन के संचालक संजय शर्मा तथा अन्य गवाहों के अदालत में पेश नहीं होने के कारण साक्ष्य के अभाव में इस मामले के आरोपित पादरी अल्फांसो सहित सभी 6 आरोपितों को बुधवार को बरी कर दिया। आरोपितों की ओर से अधिवक्ता सुभाशीष सोरेन ने जानकारी देते हुए बताया कि कोर्ट की ओर से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी अभियोजन पक्ष की ओर से एनजीओ के वाहनचालक के अलावा कोई भी गवाह अदालत में पेश नहीं हुए। जिस कारण कोर्ट ने उनकी गवाही बंद कर दी। सोरेन ने कहा कि मामले के शिकायतकर्ता एनजीओ संचालक संजय शर्मा के पेश न होने से इस मामले में दर्ज कराई गई दूसरी प्राथमिकी की अदालत में पुष्टि ही नहीं हो सकी।

पूरा मामला:

यह मामला 19 जून 2018 का है। जब कोचांग के गाँव स्थित स्कॉट मैन मिडिल स्कूल में नुक्कड़ नाटक करने आई 5 लड़कियों का अपहरण कर उनका बलात्कार किया गया था। एफआईआर के मुताबिक 18 जून 2018 को खूँटी के पिस्टाकोली में आशा किरण नाम की संस्था के कुछ लोग नुक्कड़ नाटक करने पहुँचे थे। इनका उद्देश्य लोगों में सरकारी योजनाओं को लेकर जागरूकता फैलाना था।

नाटक के दौरान टीम की एक सिस्टर को एक व्यक्ति मिला, जिसने खुद को कोचांग का मुखिया बताया। उसने सिस्टर से कहा कि उसे उनका कार्यक्रम पसंद है और वह चाहता है कि कोचांग में भी ऐसे कार्यक्रम किए जाएँ। मीडिया खबरों के मुताबिक पहले तो सिस्टर ने वहाँ नाटक करने से मना कर दिया, लेकिन बाद में व्यक्ति के कहने पर टीम वहाँ जाने को तैयार हो गई। 19 जून को टीम वहाँ पहुँची और बाजार में नुक्कड़ नाटक शुरू हुआ।

इस दौरान टीम की दोनों सिस्टर बगल के स्कूल के फादर से मिलने चली गईं, जहाँ बाद में पूरी टीम को भी बुलाया गया, यहाँ भी टीम ने नुक्कड़ नाटक किया। इसके बाद वहाँ 2 लड़के फादर से बात करने आए। बात खत्म हुई तो फादर ने टीम की लड़कियों को उन लड़कों के साथ जाने के लिए कहा, जब लड़कियों ने विरोध किया तो हथियारों के बल पर लड़कियों को लड़कों के साथ भेजा गया।

इसके बाद सुनसान जगह ले जाकर उनका रेप किया गया। उनके गुप्तांगों पर सुलगती सिगरेट दागी गई। उन्हें पेशाब पिलाया गया। जब लड़कियों ने इसकी शिकायत फादर से की तो अल्फांसो ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने इस घटना का जिक्र किसी से किया तो उनके माता-पिता को मार दिया जाएगा। 20 जून को जब इस बात की जानकारी पुलिस को मिली तो बड़ी मुश्किल से पुलिस ने एक लड़की को बयान के लिए राजी किया। जिसके बाद इस मामले में दो प्राथमिकी दर्ज की गई। अभियोजन की ओर से इस मामले में सिर्फ एक गवाही दर्ज कराई गई थी और एनजीओ की युवतियों और अन्य सहकर्मियों की गाड़ी का ड्राइवर संतोष हेंब्रम ही इस मामले में अपनी गवाही देने अदालत पहुँचा था।

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BJP विधायक के ऊपर बम से हमला, TMC के गुंडो ने की पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडे आए दिन हिंसात्मक घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर 24 परगना का है, जहाँ बीजेपी के भाटपारा विधायक पवन सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की गई और TMC के लोगों द्वारा उन पर बम से हमला किया गया।

उन्होंने कहा, “मुझे पता चला कि मेरे पार्टी कार्यालय में तोड़फोड़ की जा रही है, जब मैं वहाँ पहुँचा तो मैंने देखा कि एक लड़का मेरे ऑफिस को TMC के झंडे वाले रंग से रंग रहा था।”

पश्चिम बंगाल में बीजेपी सदस्यों को तंग करने और उनकी हत्या करने का सिलसिला कोई नया नहीं है। राज्य के विद्युत मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने अपनी ही पार्टी की सांसद माला रॉय के समर्थकों पर मारपीट का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि उन पर यह हमला दक्षिण कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान किया गया।

इसके अलावा, अक्टूबर महीनें में राज्य के बीरभूम में TMC गुंडों ने 47 वर्षीय महिला बीजेपी कार्यकर्ता शंकरी बागड़ी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं, छ: अन्य बीजेपी समर्थक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बताया गया था कि TMC के गुंडों ने बंदूकों और हथियार के साथ शंकरी बागड़ी के घर को पूरी तरह से घेर लिया था। उसके बाद TMC कार्यकर्ताओं द्वारा शुरू की गई गोलीबारी में इस हिंसात्मक घटना को अंजाम दिया गया।   

बता दें कि पश्चिम बंगाल में सूबे की सरकार और राज्यपाल के बीच भी तीखी नोंक-झोंक देखने को मिलती रहती है। राज्यपाल जगदीर धनखड़ ने हाल ही में एक ट्वीट के ज़रिए ममता बनर्जी पर निशाना साधा था। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि दीदी ने उनके बारे में ‘तू चीज बड़ी है मस्त-मस्त’ कहा है। इस बात की पुष्टि के लिए राज्यपाल धनखड़ ने एक बंगाली अख़बार की ख़बर की तस्वीर भी शेयर की थी। 

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हैदराबाद एनकाउंटर के बाद पुलिस पर बरसाए फूल, महिलाओं ने बाँधी राखी… औवैसी ने कहा – ‘जाँच हो’

हैदराबाद के शादनगर में पशु चिकित्सक ‘प्रीति रेड्डी’ (बदला हुआ नाम) की निर्मम हत्या के बाद से सवालों के घेरे में आई राज्य पुलिस को आज आरोपितों का मौक़ा-ए-वारदात पर एनकाउंटर करने के लिए चारों ओर से बधाई दी जा रही है। सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक पुलिस को आभार व्यक्त किया जा रहा है। इसी कड़ी में एक और खबर आई है। एनकाउंटर के बाद घटनास्थल पर पहुँचे हजारों लोगों ने पुलिस पर फूल बरसाए हैं और महिलाओं ने पुलिस की कार्रवाई पर अपनी खुशी प्रकट करते हुए उन्हें राखी बाँधी है। इसके अलावा राज्य में एसीपी और डीसीपी जिंदाबाद के नारे लगाए जाने के वीडियो भी सामने आए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एनकाउंटर की सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। भीड़ को संभालने के लिए वहाँ पुलिस टीम तैनात की गई है। यहाँ जुटी भीड़ पुलिस के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए उन पर फूल बरसा रही है। वहीं, पीड़िता की पड़ोसी महिलाओं ने पुलिस अधिकारियों को राखी बाँधकर अपनी खुशी जाहिर की है।

गौरतलब है कि पीड़िता के पिता और बहन समेत देश भर की कई बड़ी हस्तियों और राजनेताओं ने इस एनकाउंटर का समर्थन किया है। एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए कानून मंत्री रेड्डी ने कहा कि आरोपितों को भगवान ने उनके किए की सजा दी है। जिससे हैदराबाद समेत पूरे देश में खुशी है। उन्होंने दावा भी किया कि वह चारों पुलिस के हथियार लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर फायरिंग की।

इस एनकाउंटर के बाद बता दें AIMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी समेत कई लोगों ने एनकाउंटर पर सवाल भी उठाया है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हर मुठभेड़ की जाँच की जानी चाहिए।

‘मेरी बेटी की आत्मा को अब शांति मिलेगी’ – ‘प्रीति रेड्डी’ के पिताजी ने कही ‘दिल की बात’
मारे गए सभी आरोपित: पुलिस ने वहीं किया एनकाउंटर, जहाँ ‘प्रीति रेड्डी’ के साथ किया था जघन्य अपराध
डॉ. प्रीति रेड्डी का आखिरी फोन कॉल… पहचान हुई उस लॉरी की जहाँ मौत के बाद भी दरिंदों ने उन्हें नोचा था
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महाराष्ट्र में शिवसेना-NCP-कॉन्ग्रेस को लगा झटका, भिवंडी में BJP के हाथों मिली हार

महाराष्ट्र में शिवसेना, राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) और कॉन्ग्रेस गठबंधन के महाविकास अघाड़ी को मेयर चुनाव में करारा झटका लगा है। ठाणे ज़िले की भिवंडी महानगर पालिका के मेयर चुनाव में बीजेपी गठबंधन ने गुरुवार (5 दिसंबर) को चुनाव जीत लिया है। इस चुनाव में महाविकास अघाड़ी की तरफ से कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार रिषिका राका चुनावी मैदान में थीं।

वहीं, ठाणे ज़िले की भिवंडी से मेयर चुनाव में बीजेपी समर्थित कोणार्क विकास अघाड़ी की प्रतिभा पाटिल ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा, कॉन्ग्रेस पार्टी के बागी इमरान ख़ान डिप्टी मेयर बनने में सफल रहे।

ख़बर के अनुसार, कुल 90 सीटों में से कॉन्ग्रेस-शिवसेना के 59 पार्षद थे। वहीं, बीजेपी समर्थित कोणार्क विकास अघाड़ी के पास केवल 31 पार्षद थे। लेकिन, जब अंतिम परिणाम आया तो कॉन्ग्रेस के 47 में से 18 पार्षदों ने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया और कोणार्क विकास अघाड़ी की उम्मीदवार प्रतिभा पाटिल 49 वोटों के साथ मेयर चुनी गईं। वहीं, कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार रिषिका राका को केवल 41 वोट मिले। इस प्रकार पूर्व महापौर प्रतिभा पाटिल एक बार फिर महापौर चुनी गईं, और पूर्व उपमहापौर कॉन्ग्रेस के बागी नगरसेवक इमरान ख़ान दूसरी बार उपमहापौर चुने गए।

बता दें कि 90 नगरसेवकों वाली भिवंडी में कॉन्ग्रेस को को बहुमत प्राप्त था, क्योंकि उसके 47 सदस्य थे। बीजेपी के 20, शिवसेना के 12, कोणार्क विकास अघाड़ी के 4, आरपीआई एकतावादी के 4, समाजवादी पार्टी के 2 और दो निर्दलीय सदस्य हैं।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि संख्या बल के आधार पर कॉन्ग्रेस के पास बहुमत होने के बावजूद महापौर और उपमहापौर के चुनाव में कॉन्ग्रेस ने शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जिससे कॉन्ग्रेस के खाते में 59 नगरसेवक हो गए थे। कॉन्ग्रेस के खाते में बहुमत के आधार पर 13 नगरसेवक ज़्यादा थे, जिसकी वजह से कॉन्ग्रेस-शिवसेना ने महापौर के लिए कॉन्ग्रेस की नगरसेविका रिषिका राका और उपमहापौर के लिए शिवसेना के नगरसेवक बालाराम चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया था।

वहीं दूसरी तरफ, कोणार्क विकास अघाड़ी ने महापौर के लिए प्रतिभा पाटिल और उपमहापौर के लिए कॉन्ग्रेस के बागी नगरसेवक इमरान ख़ान को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन महापौर चुनाव से पहले ही कॉन्ग्रेस के 18 नगरसेवक कोणार्क विकास अघाड़ी के साथ चले गए। यही सबसे बड़ी वजह भी बनी जिसके चलते महापौर पद के चुनाव में कोणार्क विकास अघाड़ी की उम्मीदवार प्रतिभा पाटील को 49 वोट मिले। उधर, कॉन्ग्रेस-शिवसेना की उम्मीदवार रिषिका राका को 41 वोट ही मिल सके। इस वजह से कोणार्क विकास अघाड़ी की प्रतिभा पाटील ने रिषिका राका को आठ वोटों से हराकर दूसरी बार फिर से महापौर चुन ली गईं।

वहीं, उपमहापौर के चुनाव में कॉन्ग्रेस से बगावत कर कोणार्क विकास अघाड़ी के साथ चुनाव लड़ने वाले इमरान ख़ान को भी 49 मत और कॉन्ग्रेस-शिवसेना के उम्मीदवार शिवसेना नगरसेवक बालाराम चौधरी को 41 वोट मिले। शिवसेना नगरसेवक बालाराम चौधरी को आठ वोटों से पराजित कर इमरान ख़ान भी दूसरी बार उपमहापौर चुने गए हैं।

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