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कॉन्ग्रेस को इनकम टैक्स की नोटिस: ₹170 करोड़ हवाला के जरिए पार्टी के अकाउंट में गया

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस (INC) को इनकम टैक्स विभाग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ये नोटिस सोमवार (दिसंबर 3, 2019) को जारी किया गया। ये मामला हैदराबाद की एक कम्पनी से कॉन्ग्रेस के खजाने में रुपए आने से सम्बंधित है। कॉन्ग्रेस इस सम्बन्ध में दस्तावेज पेश करने में विफल रही है और इसीलिए आईटी डिपार्टमेंट ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

इस मामले में कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को समन भेजा गया था। उन्हें 4 नवंबर को आईटी विभाग के समक्ष पेश होने को कहा गया था। इन नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। ये पूरा का पूरा मामला हवाला लेन-देन से जुड़ा है। आयकर विभाग ने जाँच में पाया है कि हैदराबाद की एक कम्पनी ने कॉन्ग्रेस को 170 करोड़ ट्रांसफर किए। ऐसा हवाला नेटवर्क के जरिए किया गया।

इस पूरे फंड को सरकारी प्रोजेक्ट्स से गबन किया गया। इसके लिए बोगस बिलिंग का सहारा लिया गया। फेक बिलिंग का उपयोग कर के सरकारी प्रोजेक्ट के लिए आवंटित धनराशि का गबन किया गया और फिर हवाला नेटवर्क के जरिए 170 करोड़ रुपया भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के अकाउंट में पहुँचा। सरकार ने उक्त कम्पनी को आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों के लिए योजनाओं के संचालन के लिए धनराशि आवंटित की थी, जिसका गबन कर लिया गया।

नेशनल हेराल्ड मामले में गाँधी परिवार सहित कॉन्ग्रेस के कई नेता पहले से ही आरोपित चल रहे हैं। अब पूरी पार्टी ही वित्तीय लेन-देन के मामले में इनकम टैक्स के रडार पर आ गई है।

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100 लड़कियों को अश्लील वीडियो कॉल करने वाला हुसैनकर गिरफ़्तार, दिखाता था अपने प्राइवेट पार्ट्स

मुंबई के वर्ली के रहने वाले एक शख्स को एक या दो नहीं बल्कि 100 से भी अधिक महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है। वह लड़कियों को वीडियो कॉल कर के उन्हें परेशान करता था। उसने अब तक 100 सभी अधिक लड़कियों को वीडियो कॉल किया है। उस पर पोस्को एक्ट (The Protection of Children from Sexual Offences) के तहत मामला चलाया जाएगा। आरोपित का नाम संभाजी हुसैनकर है, जो महिलाओं के साथ अश्लील बातचीत करने के साथ-साथ उन्हें अपने प्राइवेट पार्ट्स दिखाता था। वह वीडियो कॉल पर गन्दी हरकतें करता था।

पुलिस ने बताया कि हुसैनकर महिलाओं को प्रताड़ित करने का आदी है। पुलिस पूरे मामले की छानबीन में जुट गई है। 26 वर्षीय हुसैनकार महिलाओं को अपना शिकार बनाने के लिए एक ऐप के माध्यम से व्हाट्सप्प पर उनकी प्रोफाइल पिक्स चेक करता था और फिर उनमें से किसी को चुनता था। हुसैनकार मूल रूप से कोल्हापुर का रहने वाला है, जहाँ वह ग्रैंड रोड पर स्थित एक गैराज में मैकेनिक का काम करता था। हुसैनकर की गिरफ़्तारी एक नाबालिग लड़की की शिकायत के बाद हुई।

वडाला की 17 वर्षीय बीकॉम की छात्रा को हुसैनकर शनिवार (नवंबर 30, 2019) की शाम से ही लगातार वीडियो कॉल कर के परेशान कर रहा था। शुरुआत में उस लड़की ने अनजान नंबर होने के कारण कॉल नहीं उठाया। जब लगातार वीडियो कॉल आने लगे तो उसे लगा कि उसका कोई सम्बन्धी उससे बात करना चाह रहा है और उसने कॉल रिसीव कर लिया। हुसैनकर ने हाय-हैलो करने के बाद अश्लील बातचीत शुरू कर दी। इससे पहले कि नाबालिग पीड़िता कॉल डिसकनेक्ट करती, हुसैनकार उसे वीडियो कॉल पर अपने प्राइवेट पार्ट्स दिखाने लगा।

पोर्ट जोन की डीसीपी रश्मि रश्मि करंदीकर मने इस बाबत अधिक जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता द्वारा कॉल डिसकनेक्ट करने के बावजूद आरोपित उसे बार-बार वीडियो कॉल करता रहा। परेशान होकर पीड़िता को अपना फोन ही स्विच ऑफ करना पड़ा। उसने अपने माता-पिता को ये बात बताई। पैरेंट्स ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तकनीकी छानबीन कर के आरोपित को वर्ली से धर-दबोचा। आरोपित के आपराधिक इतिहास की छानबीन की गई तो पता चला कि वह पूर्व में भी छेड़खानी के आरोप में गिरफ़्तार किया जा चुका है।

हुसैनकर शादीशुदा है और ऐसे अश्लील वीडियो कॉल करने का आदी है। पुलिस ने बताया कि वह लड़कियों को वीडियो कॉल्स करने का एडिक्टेड हो चुका है। वह सामान्यतः ऐसे कॉल रात को किया करता था। जब भी वह अपने काम से फुर्सत पाता, वह अश्लील हरकतों में लग जाता था। पूर्व में गिरफ़्तारी के बाद उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया गया था।

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करतारपुर साहिब मत्था टेकने गई सिख लड़की को पाकिस्तानी लड़कों ने फुसलाया, 3 दिन बाद मिली, 4 गिरफ्तार

हरियाणा की रहने वाली एक सिख लड़की तीन दिन पहले करतारपुर साहिब में मत्था टेकने के लिए गए एक जत्थे के साथ गई थी, लेकिन पाकिस्तान जाने के बाद पता चला कि वो लड़की गायब हो गई है। तीन दिनों तक लापता रही यह लड़की सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को मिली है। इस बारे में सोमवार देर रात शिरोमणि अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्वीट कर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लड़की किसी पाकिस्तानी युवक से मिलने गई थी, जिसने बहला-फुसला कर लड़की को साथ ले गया था।

इस मामले की जाँच में पाकिस्तान पुलिस ने लाहौर व फैसलाबाद के रहने वाले चार युवकों को गिरफ्तार किया है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने ट्विटर पर लिखा है कि पाकिस्तान में गायब हुई लड़की मिल गई है। पाक रेंजरों के माध्यम से उसे वापस भारत भेज दिया गया है। 

एक अन्य ट्वीट में सिरसा ने लिखा, “पाकिस्तान में हिंदू और सिख लड़कियों को बहकाकर लव जिहाद के जाल में फँसाने और फिर उन्हें इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर करने का चलन जोरों पर है। मैं पाक में श्री करतारपुर साहिब के दर्शकों को सावधान करना चाहता हूँ कि कृपया इस ट्रैप के बारे में जागरूक और सतर्क रहें।”

बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बीच यह करतारपुर कॉरिडोर का ऐतिहासिक गलियारा गुरु नानक देव की 550वीं वर्षगाँठ के अवसर पर खोला गया था। भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब में और पाकिस्तान में इमरान खान ने 9 नवंबर को इसका उद्धाटन किया था। इस गलियारे के रास्ते भारत से रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए वहाँ जा रहे हैं।

डॉ राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए नेहरू ने बोला झूठ तो पटेल ने कहा- शादी नक्की

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे और संविधान सभा के अध्यक्ष भी थे। लेकिन, देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू नहीं चाहते थे कि डॉक्टर प्रसाद भारत के राष्ट्रपति बनें। लेकिन नेहरू के विरोध के बावजूद वो 1950, 1952 और 1957 में लगातार तीन बार देश के राष्ट्रपति चुने गए (पहली बार संविधान सभा द्वारा)। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने जब दूसरी बार राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की, तब नेहरू ने आपत्ति जताई। नेहरू चाहते थे कि एक बार 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाला व्यक्ति दूसरी बार राष्ट्रपति न बने। ये अलग बात है कि खुद नेहरू ख़ुद 1947 से 1964 तक प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे रहे।

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को दूसरी बार राष्ट्रपति बनाने के लिए जब हस्ताक्षर अभियान चल रहा था, तब नेहरू उनसे मिलने पहुँचे। उन्होंने ‘एक पुराने दोस्त होने के नाते’ उनसे आग्रह किया कि वो दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव न लड़ें। हालाँकि, डॉक्टर प्रसाद ने उन्हें किसी प्रकार का भरोसा नहीं दिया। वो चुप रहे। कॉन्ग्रेस की संसदीय समिति की बैठक हुई। इस बैठक में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की उम्मीदवारी का सिर्फ़ एक व्यक्ति ने विरोध किया और वो थे जवाहरलाल नेहरू। पार्लियामेंट्री बोर्ड के 6 सदस्यों में से नेहरू अकेले व्यक्ति थे, जो राजेंद्र प्रसाद को फिर से राष्ट्रपति बनाए जाने के ख़िलाफ़ थे।

हालाँकि, मोरारजी देसाई भी ऐसा नहीं चाहते थे लेकिन बीमार होने के कारण वो उस बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे थे। आज तक देश के इतिहास में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के अलावा कोई दूरी बार राष्ट्रपति नहीं बन पाया। 1957 में जवाहरलाल नेहरू एस राधाकृष्णन को राष्ट्रपति बनाना चाहते थे। इसी तरह वो 1952 में चक्रवर्ती राजगोपालचारी के पक्ष में थे। लेकिन उन्हें दोनों बार निराशा हाथ लगी। 1949 में जब देश के प्रथम राष्ट्रपति के लिए बीतचीत शुरू हुई, तब नेहरू ने राजगोपालचारी के पक्ष में गोलबंदी शुरू की। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने एक बयान जारी कर जनता को प्रोपेगंडा से बचने की सलाह दी और कहा कि ‘राजाजी’ और उनके बीच राष्ट्रपति बनने के लिए कोई प्रतिद्वंद्विता नहीं है।

डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष थे। 1950 में राष्ट्रपति भी इसी सभा को चुनना था। ऐसे में, नेहरू ने प्रसाद को चिट्ठी लिखी कि वो इसके लिए राजाजी का नाम आगे करें। उन्होंने लिखा कि वल्लभभाई पटेल भी इसके लिए अपनी सहमति दे चुके हैं। डॉक्टर प्रसाद दुःखी हुए। वो इस बात से निराश हुए कि नेहरू उन्हें ‘आदेश’ दे रहे हैं। उनका मानना था कि वो तो इन सब में पड़ने के लिए तैयार ही नहीं थे लेकिन जब उन्हें संविधान सभा का अध्यक्ष बनाया गया है तो उनकी विदाई भी सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने नेहरू और पटेल को एक लम्बा-चौड़ा पत्र भेजा।

लेकिन, यहाँ एक बात पता चलती है कि जवहारलाल नेहरू ने झूठ बोला था। उन्होंने राजगोपालचारी को राष्ट्रपति बनाने के लिए सरदार पटेल की सहमति नहीं ली थी। नेहरू ने बिना पटेल की अनुमति के उनका नाम घसीट दिया था। डॉक्टर प्रसाद की चिट्ठी आने के बाद ये भेद खुला और पटेल इस बात से नाराज़ हुए कि नेहरू ने उनका नाम बिना पूछे इस्तेमाल किया। जब पोल खुल गई तो नेहरू ने डॉक्टर प्रसाद को फिर से पत्र लिख कर बताया कि उन्होंने उनसे जो कुछ भी कहा था, उसका पटेल से कुछ लेना-देना नहीं है। नेहरू ने लिखा कि उन्होंने पूरी तरह अपने बात सामने रखी थी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इसके लिए पटेल से उन्होंने कोई चर्चा नहीं की है।‘

नाराज़ डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को नेहरू ने माफ़ी माँगते हुए लिखा कि वो उनका पूरा सम्मान करते हैं और उनकी भावनाओं को चोट पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। नेहरू को यूके और अमेरिका के 6 दिनों के दौरे पर जाना था। वो चाहते थे कि उससे पहले राजाजी के पक्ष में फ़ैसला हो जाए, तो वो निश्चिंत होकर विदेश दौरे पर जा सकें। संविधान सभा की बैठक में जब उन्होंने ये बातें रखी, तो कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई। कुछ ने तो इसका कड़ा विरोध किया। माहौल इतना गर्म हो गया कि सरदार पटेल को मामला थामना पड़ा। उन्होंने शांति की अपील करते हुए कहा के कॉन्ग्रेस हमेशा की तरह मतभेदों से ऊपर उठ कर निर्णय लेगी।

सरदार पटेल ने तब तक डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को लेकर मन बना लिया था। डॉक्टर प्रसाद के राष्ट्रपति बनने से जुड़े एक सवाल के जवाब में पटेल ने कहा- “अगर दूल्हा पालकी छोड़ कर ना भागे तो शादी नक्की।” पटेल का इशारा था कि अगर डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ख़ुद से पीछे हट कर राजाजी के लिए रास्ता नहीं छोड़ते हैं तो उन्हें राष्ट्रपति बनने से कोई नहीं रोक सकता। वो इस तरह से डॉक्टर प्रसाद के सीधे-सादे व्यवहार का भी जिक्र कर रहे थे। चुनाव हुआ और डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को 5,07,400 वोट मिले। उनकी जीत पक्की जान कर कॉन्ग्रेस के 65 सांसदों और 479 विधायकों ने वोट देने की भी जहमत नहीं उठाई।

इसी तरह 1957 में नेहरू एस राधाकृष्णन के पक्ष में गोलबंदी कर रहे थे लेकिन कॉन्ग्रेस डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को लेकर एकमत थी। राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति के रूप में इस्तीफा देने का मन बना लिया था लेकिन उन्हें किसी तरह मनाया गया। नेहरू ने तब कहा था कि वो 1947 के बाद से अब तक इतने खिन्न नहीं थे, जितने अब हैं। नेहरू और प्रसाद के बीच हिन्दू कोड बिल को लेकर भी मतभेद थे। डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने काशी में ब्राह्मणों के पाँव धोए थे। नेहरू ने इस पर आपत्ति जताई थी। नेहरू तो यह भी नहीं चाहते थे कि डॉक्टर प्रसाद सोमनाथ मंदिर का शिलान्यास करने जाएँ।

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महिलाओं को क्या करना है और क्या नहीं… कुल 14 सलाह: हैदराबाद पुलिस की एडवाइजरी, पड़ रही ‘गाली’

हैदराबाद में डॉक्टर प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के गैंगरेप व हत्या के बाद महिला सुरक्षा को लेकर पुलिस व प्रशासन के दावों की पोल खुल रही है। देश भर के कई हिस्सों से लगातार आती ऐसी ख़बरों के बीच हैदराबाद पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि महिलाओं को क्या करना है और क्या नहीं? पुलिस ने कुल 14 सलाह जारी किए हैं, जिनका महिलाओं को पालन करने के लिए कहा गया है। सोशल मीडिया पर इस एडवाइजरी को लेकर लोगों का गुस्सा फूटा। लोगों ने पूछा कि अगर सब कुछ आम नागरिकों व महिलाओं को ही करना है तो फिर पुलिस क्या करेगी?

तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की भी लगातार आलोचना हो रही है। पुलिस की एडवाइजरी ने आग में घी डालने का काम किया है। इस एडवाइजरी में निम्नलिखित 14 सलाह हैं:

  1. महिलाएँ जब भी घर से बाहर निकलें, वो अपने दोस्तों, रिश्तेदारों अथवा परिजनों को बता कर जाएँ कि वो कहाँ जा रही हैं। साथ ही यह भी बताएँ कि वो कब तक वापस लौटेंगी।
  2. अपना अंतिम लोकेशन हमेशा शेयर करते रहें।
  3. ट्रांसपोर्ट का माध्यम: अगर महिलाएँ टैक्सी या ऑटो से जा रही हैं तो उसके नंबर प्लेट की फोटो लेकर शेयर करें। ड्राइवर की बैकसीट पर उसके फोन नंबर इत्यादि का विवरण होता है। उसे भी शेयर करें। टैक्सी के आईडी कार्ड से भी ये जानकारियाँ ली जा सकती हैं।
  4. अगर महिलाएँ किसी अनजान जगह पर जा रही हैं तो वहाँ का रुट पहले से पता कर लें और रास्तों से परिचित हो जाएँ।
  5. अगर महिलाएँ किसी का इंतज़ार कर रही हैं तो हमेशा भीड़भाड़ वाले इलाक़े में ही रहें। जहाँ रौशनी हो या अँधेरा न हो, उसी इलाक़े में इंतज़ार करें। अगर मदद की ज़रूरत हो तो पुलिस की पट्रॉल कार या फिर ब्लू कलर की पुलिस बाइक को इशारा देकर रोकें। वो आपकी ही सुरक्षा और सलामती के लिए हैं।
  6. अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति नहीं है तो नजदीकी दुकान पर चली जाएँ। किसी भी कमर्शियल यूनिट के पास खड़ी हो जाएँ, इससे आसपास की ट्रैफिक में लोग आपको आसानी से देख सकते हैं और मदद कर सकते हैं।
  7. हमेशा अपने-आप को पुलिस की 100 नंबर पर कॉल करने के लिए तैयार रखें।
  8. कृपया ‘हॉक आई’ एप्लिकेशन डाउनलोड करें और लोकेशन सर्विस हमेशा ऑन रखें।
  9. किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में आसपास के लोगों से मदद माँगें।
  10. अगर आपके आसपास कोई व्यक्ति है तो फोन पर अपने किसी सम्बन्धी से बात करने का नाटक करें। ऐसा दिखाएँ कि वो सम्बन्धी कोई पुलिसवाला है और उससे बातचीत का ड्रामा करते हुए अपनी लोकेशन शेयर करें। इससे आप पर ग़लत नज़र रखने वाले डर जाएँगे।
  11. आत्मविश्वासी बनें और कोई कुछ गड़बड़ करता है तो उससे ऊँची व रौबदार आवाज़ में बात करें। अगर स्थिति और ख़राब होती है तो मदद के लिए ज़ोर से चिल्लाएँ।
  12. अगर स्थिति और ख़राब हो जाए तो मदद के लिए चिल्लाते हुए भीड़भाड़ वाले इलाक़े की ओर भागें।
  13. इलाक़े के गड़बड़ लोगों के बारे में पुलिस को सूचित करें। हमें साथ मिल कर अपराध को रोकना है।
  14. अगर आप वेरिफिकेशन के लिए फोटो भेजना चाहते हैं तो 9490616555 पर व्हाट्सप्प के माध्यम से सेंड करें।

ये एडवाइजरी हैदराबाद के पुलिस कमिश्नर अंजनी कुमार ने जारी की है। सोशल मीडिया पर लोगों ने लिखा कि महिलाएँ तो पहले से ही सावधान होकर चलती हैं, ऐसे में उन्हें सलाहों का पुलिंदा थमा देना कहाँ तक उचित है? महिलाएँ अगर हर पल अपनी सुरक्षा और सलामती के बारे में ही सोचती रहें फिर वो और काम कैसे करेंगी? कुछ लोगों ने लिखा कि महिलाओं को घर में ही रहने की एडवाइजरी जारी कर देनी चाहिए। वो न घर से निकलेंगी और न अपराध होगा। एक अन्य यूजर ने इसकी तुलना शरिया क़ानून से कर डाली।

डॉ. प्रीति रेड्डी का आखिरी फोन कॉल… पहचान हुई उस लॉरी की जहाँ मौत के बाद भी दरिंदों ने उन्हें नोचा था

आरिफ ने ‘प्रीति रेड्डी’ का मुँह-नाक दबाया, उसी ने डेड बॉडी पर पेट्रोल डाला: पुलिस की रिपोर्ट में भयावह खुलासे

…वो पेट्रोल पम्प वर्कर, जिसकी मदद से ‘प्रीति रेड्डी’ के बलात्कारी-हत्यारे तक पहुँच पाई पुलिस

प्रीति रेड्डी मर गई फिर भी रेप करते रहे दरिंदे: आरिफ के प्लानिंग की पूरी डिटेल

‘प्रीति’ रेड्डी केस: खेत में घसीट कर बारी-बारी से किया रेप, ट्रक में लाश डाल खरीदा था पेट्रोल-डीजल

जिसने फाड़ा राम जन्मभूमि का नक्शा और की मस्जिद की वकालत, मुस्लिम पक्ष ने उस वकील को ही हटा दिया

अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को केस से हटा दिया गया है। इसकी जानकारी खुद उन्होंने दी। राजीव धवन ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा, “मुझे ये बताया गया कि मुझे केस से हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबियत ठीक नहीं है। ये बिल्कुल बकवास बात है। जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं लेकिन जो वजह दी गई है वह गलत है।” बता दें कि राजीव धवन ने सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम पार्टियों का पक्ष रखा था।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, “मुझे एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड और जमीयत का प्रतिनिधित्व करने वाले एजाज मकबूल ने बाबरी मामले से हटा दिया है। मैंने बिना आपत्ति के उन्हें खुद को हटाए जाने के निर्णय को स्वीकार करते हुए औपचारिक पत्र भेज दिया है।”

आगे उन्होंने कहा कि अब वे इस मामले में शामिल नहीं होंगे। इससे पहले सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल किया है। अपनी याचिका में जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वो 9 नवंबर को सुनाए गए फ़ैसले की समीक्षा करे। इतना ही नहीं, हिन्दुओं के पक्ष में आए उस फ़ैसले पर स्टे लगाने का भी आग्रह किया गया है। इसके साथ ही इस पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले में ’14 गलतियाँ’ गिनाई गई हैं और दावा किया गया है कि समीक्षा का आधार भी यही है।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर को अयोध्या मामले पर अपना फैसला सुनाया था। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पाँच जजों की पीठ ने विवादित जमीन पर रामलला विराजमान के हक में फैसला दिया है। साथ ही सरकार को यह भी आदेश दिया कि वह मस्जिद के लिए सुन्‍नी वक्‍फ बोर्ड को अलग से पाँच एकड़ जमीन मुहैया कराए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को राम मंदिर के लिए 3 महीने में एक्शन रिपोर्ट बनाकर निर्माण कार्य शुरू करने का आदेश दिया है।

जमीयत ने इसे शरीयत के ख़िलाफ़ बताया था। मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि एक बार जिस जगह पर मस्जिद बन गई, क़यामत तक वहाँ सिर्फ़ मस्जिद ही रहती है। जमीयत ने अपनी याचिका में कहा है कि मुस्लिम पक्ष ने मस्जिद के लिए कहीं और जमीन नहीं मॉंगी थी। लेकिन, फैसले में संतुलन बनाने के इरादे से ऐसा आदेश सुनाया गया।

…तो झारखंड के CM होंगे हेमंत सोरेन, लेकिन इनकी संपत्ति 5 साल में दोगुनी से अधिक, 10 साल में 11 गुनी!

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साहेबगंज में बरहेट से पर्चा भरा। हेमंत सोरेन ने 29 नवंबर को दुमका सीट से भी अपना नामांकन किया था। वे इस बार भी दो सीटों से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। बता दें कि 2014 में भी हेमंत सोरेने ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था। बहरेट से सीट से हेमंत सोरेन को जीत मिली थी तो वहीं दुमका सीट पर भाजपा की लुइस मरांडी ने उन्हें हरा दिया था।

हेमंत सोरेन ने नामांकन के दौरान दिए गए शपथ पत्र में अपनी कुल संपत्ति 8 करोड़ 11 लाख 14 हजार 388 रुपए बताई है। जबकि इन्होंने ही 2014 के विधानसभा चुनाव में अपनी कुल संपत्ति 3 करोड़ 50 लाख 76 हजार 527 रुपए बताई थी। वर्ष 2014 में हेमंत की चल-अचल संपत्ति 1 करोड़ 72 लाख 91 हजार 300 थी, जबकि उनकी पत्नी की चल-अचल संपत्ति 1 करोड़ 77 लाख 85 हजार 227 रुपए थी।

वहीं 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपनी और पत्नी की कुल संपत्ति 73 लाख 57 हजार रुपए बताई थी। 2009 के विवरण के हिसाब से दस साल में हेमंत सोरेन की संपत्ति 11 गुना से अधिक हो गई है। वहीं 2014 के हिसाब से 5 साल में इनकी संपत्ति दो गुना से अधिक हो गई। अब 2019 में इनकी चल-अचल संपत्ति बढ़कर 2 करोड़ 29 लाख 29 हजार 153 हो गई है, वहीं उनकी पत्नी की चल-अचल संपत्ति 5 करोड 81 लाख 85 हजार 235 हो गई है।

2019 में हेमंत सोरेन द्वारा दायर किए गए हलफनामे को देखा जाए तो 5 साल में उनकी संपत्ति में तो 56 लाख 37 हजार 853 का ही इजाफा हुआ है, लेकिन उनकी पत्नी की संपत्ति में 4 करोड़ 40 लाख की बढ़ोतरी हुई है। और दोनों को मिला दें तो उनकी संपत्ति में दोगुना से अधिक का इजाफा हुआ है।

अगर कैश की बात करें तो हेमंत सोरेन के पास 25.13 लाख कैश है जबकि उनकी पत्नी के पास 2.55 लाख का कैश है। इसके साथ ही उनके पास 3.50 लाख की एक रायफल है और वाहन में एक सफारी व दो कारें हैं। ज्वेलरी में तो हेमंत के पास कुछ नहीं है, मगर उनकी पत्नी के पास 34 लाख 40 हजार की कीमत की ज्वेलरी है। जिसमें 655 ग्राम सोना और 20 किलो चाँदी है।

बता दें कि 2014 में हेमंत के नाम 62,91,300 की चल संपत्ति और 110 लाख रुपए की अचल संपत्ति थी, जबकि उनकी पत्नी के पास 27,85,227 की चल संपत्ति और 150 लाख रुपए की अचल संपत्ति थी। वहीं 2019 में हेमंत के पास 1,13,10,153 की चल संपत्ति और 1,16,19,000 रुपए की अचल संपत्ति है, जबकि उनकी पत्नी के पास 94,85,235 की चल संपत्ति और 487 लाख रुपए की अचल संपत्ति है।

इसके साथ ही दुमका की प्रत्याशी मंत्री डॉ लुइस मरांडी की संपत्ति में पाँच सालों में लगभग चार गुणा से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। 2014 में मंत्री डॉ लुइस के पास 1.83 करोड़ की चल-अचल संपत्ति थी, जो 2019 में बढकर 7.84 करोड़ हो गई है।

चन्द्रमा पर मिल गया चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर का मलबा, NASA ने जारी की तस्वीरें

आपको याद होगा कि चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर चाँद की सतह पर सफलतापूर्वक नहीं उतर पाया था और उसकी क्रैश लैंडिंग हुई थी। इससे इसरो के बहुचर्चित चंद्रयान-2 मिशन का एक हिस्सा कामयाब नहीं रहा था। सितम्बर 7, 2019 को विक्रम की क्रैश लैंडिंग के बाद इसरो प्रमुख के सिवान भी निराश हो उठे थे, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें गले लगा कर ढाँढस बंधाया था। तभी से चाँद पर विक्रम के मलबे की खोज जारी थी, जिसे अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने ढूँढ निकाला है।

मंगलवार (दिसंबर 3, 2019) को सुबह नासा ने अपने लूनर रेकॉन्सेन्स ऑर्बिटर (एलआरओ) द्वारा ली गई एक तस्वीर जारी की, जिसमें विक्रम लैंडर से प्रभावित जगह नजर आ रही है। नासा ने चाँद के उस सतह की तस्वीर जारी की। उस तस्वीर में नीले व हरे डॉट्स के माध्यम से चाँद की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त विक्रम लैंडर के मलबे को दिखाया गया है। हरे डॉट्स स्पेसक्राफ्ट के मलबे को प्रदर्शित करते हैं। ब्लू डॉट्स दिखाते हैं कि उस मलबे से वहाँ की ज़मीन पर क्या असर पड़ा। ब्लू डॉट्स दिखाते हैं कि किस प्रकार वहाँ क्रैश लैंडिंग होने से चाँद की ऊपरी सतह पर असर पड़ा।

नासा ने बताया है कि शनमुगा सुब्रमण्यन नामक व्यक्ति ने इस मलबे की पहचान की है। हालाँकि, सुब्रमण्यन की पहचान के बारे में नासा ने और कुछ नहीं बताया। नासा के एलआरओसी टीम ने चाँद के सतह के उस भाग की विक्रम के क्रैश लैंडिंग से पहले और बाद की तस्वीर जारी की है। एलआरओ कैमरे ने 26 सितम्बर को ही वहाँ मलबे को देख लिया था और उसके बाद से ही इसकी पहचान करने की कोशिश की जा रही थी। 14-15 अक्टूबर और 11 नवंबर को मिले और भी तस्वीरों के परीक्षण के बाद नासा ने पाया कि ये विक्रम लैंडर का ही मलबा है।

ये मलबा क्रैश साइट के 750 मीटर उत्तर-पश्चिम में मिला। मलबे के तीन सबसे बड़े टुकड़े 2*2 पिक्सल के हैं। वहीं इसरो के ऑर्बिटर ने भी चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर की खोज करने की कोशिश की थी लेकिन उससे प्राप्त तस्वीरों में कुछ नहीं मिला था। बता दें कि चंद्रयान-2 इसरो के बड़े मिशन में से एक था और लैंडिंग के वक़्त पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रसारण किया गया था।

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मेट्रो का काम ही मत रोको, पूरा कंट्रक्शन ही उखाड़ कर फेंक दो: CM उद्धव के फ़ैसले से गदगद हुए संजय निरुपम

महाराष्ट्र में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठबंधन की सरकार बनने के बाद से ही कॉन्ग्रेस नेता संजय निरुपम अलग ही सुर अलाप रहे हैं। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मेट्रो परियोजना की समीक्षा की बात कही तो दूसरी ओर उन्हें समर्थन देने वाली कॉन्ग्रेस के नेता संजय निरुपम ने मुंबई मेट्रो का कंस्ट्रक्शन उखाड़ देने की बात कह डाली।

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, संजय ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा मुंबई मेट्रो परियोजना की समीक्षा के आदेश पर ख़ुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि इस मामले में यह एक अस्थायी कदम है जबकि उनका मत है कि इस पूरी परियोजना को ही उखाड़ फेंकना चाहिए।

संजय ने कहा कि यह फैसला मुम्बई के हर एक आदमी का है। विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहने वाले कॉन्ग्रेसी नेता ने कहा कि आधी रात को आरे के जंगलों में पेड़ काटे जाने के खिलाफ प्रदर्शन का फैसला राजनीतिक नहीं था, न ही यह किसी राजनीतिक दल द्वारा बुलाया गया था। लेकिन, मुंबई के सब लोगों ने इसके लिए समर्थन दिया था। संजय ने कहा कि सभी मुंबई वालों के साथ उनकी भी यही डिमांड है कि इस निर्माण को पूरी तरह से ध्वस्त कर देना चाहिए। गौरतलब है कि आरे में मेट्रो परियोजना के लिए पेड़ काटने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है।

29 नवम्बर को उद्धव ठाकरे ने मेट्रो का काम यह कहकर रुकवा दिया था कि इसके लिए एक पत्ता भी नहीं काटने दिया जाएगा। हालाँकि यह बात पहले ही स्पष्ट हो चुकी है कि इस परियोजना के लिए जो पेड़ काटे जाने थे, वह पहले ही काटे जा चुके हैं और अब आगे इन्हें काटा नहीं जाएगा।

पहले नए सीएम ने मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट स्थगित करने का ऐलान किया और फिर उन्ही की समर्थक पार्टी ने एकाएक इसे गिराने की योजना पेश करना शुरू कर दिया। हालाँकि जिस कंस्ट्रक्शन को लेकर विवाद हो रहा है वह पूरा मामले एक मेट्रो शेड को लेकर है। इस मामले में पार्टियों के बदलते बयानों को देख मुंबईवासी खुद भी परेशान हैं। बता दें कि 4 अक्टूबर की मध्यरात्रि को ही उस इलाके में करीब 2185 पेड़ काट दिए गए थे। इस सम्बन्ध में मुंबई मेट्रो कारपोरेशन को ट्री अथॉरिटी ने एक पत्र भी जारी किया था जिसमें उसने इन पेड़ों को काटने के लिए अपनी मंजूरी दी थी।

इस आदेश को अमल में लाने के लिए पुलिस की मदद लेनी पड़ी थी जिसके तहत इलाके में धारा 144 लगा दी गई थी। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में स्टे लगने से पहले 2185 में 2141 पेड़ काटे जा चुके हैं जबकि मेट्रो कारपोरेशन का कहना है कि प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरत के हिसाब से पेड़ काटे जा चुके हैं।

बलात्कारियों को कोर्ट तक पहुँचने ही मत दो: TMC सांसद ने पूछा- न्याय के लिए इंतज़ार क्यों?

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने हैदराबाद में डॉक्टर रेड्डी के बलात्कार और हत्या पर दुःख जताया है। मिमी ने कहा कि बलात्कारियों को अदालत तक ले जाने की कोई ज़रूरत ही नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरी सुरक्षा के साथ बलात्कारियों को अदालत ले जाया जाता है और फिर न्याय के लिए काफ़ी दिन इंतजार करना पड़ता है। मिनी ने कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को तुरंत सज़ा मिलनी ज़रूरी है। मिनी चक्रवर्ती ने सरकार से निवेदन करते हुए कहा:

“मैं सम्बंधित मंत्रालयों से दरख्वास्त करती हूँ कि इतने कठोर क़ानून बनाए जाएँ कि कोई व्यक्ति किसी की बलात्कार करना तो दूर, किसी महिला की तरफ़ गलत नज़र से देखने से पहले भी 100 बार सोचे। मैं जया बच्चन के बयान का समर्थन करती हूँ।”

बता दें कि हैदराबाद में डॉक्टर रेड्डी का 4 लोगों ने मिल कर बलात्कार किया और फिर जान से मार डाला। यहाँ तक कि महिला डॉक्टर की लाश के साथ भी बलात्कार किया गया। मुख्य आरोपित मोहम्मद आरिफ ने पीड़िता का नाक और मुँह दबा कर मार डाला। उसके बाद आरोपितों ने पीड़िता के शरीर पर पेट्रोल और डीजल डाल कर आग लगा दी। सोमवार (दिसंबर 2, 2019) को संसद में ये मामला गूँजा। समाजवादी पार्टी की राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने कहा कि बलात्कारियों की लिंचिंग होनी चाहिए और उन्हें भीड़ के हवाले कर देना चाहिए।

पश्चिम बंगाल स्थित जाधवपुर की सांसद मिमी चक्रवर्ती ने जया बच्चन की बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि ऐसे कुकृत्य करने वाले लोग मानसिक रूप से विकृत होते हैं। मिमी ने कहा कि लड़की हैदराबाद की हो, दिल्ली की हो, या फिर कोलकाता की- उनकी सुरक्षा के लिए सरकार को क़दम उठाने चाहिए। राज्यसभा में चर्चा के दौरान एआईएडीएमके की सांसद विजिला भावुक हो गईं और उन्होंने दोषियों के लिए कड़ी सज़ा की माँग की। उन्होंने महात्मा गाँधी को याद करते हुए कहा कि राष्ट्रपिता ने कहा था कि जब आधी रात में भी महिलाएँ बिना किसी भय के कहीं भी जा सकेंगी, तब असली स्वतंत्रता आएगी।

विजिला ने नशीली दवाइयों पर रोक लगाने, बलात्कारियों के ख़िलाफ़ सुनवाई जल्द पूरी करने और उन्हें मृत्युदंड देने की माँग की। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सरकार बलात्कार को लेकर हरसंभव क़ानून बनाने को तैयार है।