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ईरान के हिंसक प्रदर्शनों में 700 बैंक तबाह, सेना के 50 बेस भी हुए नष्ट

ईरान में हिंसक प्रदर्शन के चलते पूरे देश की शांति व्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। इस हिंसक और उपद्रवी प्रदर्शन के दौरान कई बैंकों और सरकारी संपत्तियों को निशाना बनाया गया। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस सम्बन्ध में ईरान के एक मंत्री अब्दुल रज़ा रहमानी फ़ज़ली ने जानकारी दी कि अभी तक की इस हिंसा में करीब 731 बैंकों और 140 सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा कि इन्हें जला कर राख कर दिया गया।

फ़ज़ली के मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाबालों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 50 से भी ज्यादा बेस नष्ट कर दिए गए। उन्होंने बताया कि यह प्रदर्शन 15 नवम्बर को तब शुरू हुए जब दामों की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया। इन प्रदर्शनों में तकरीबन दो-लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए थे। इस भीड़ ने 70 गैस स्टेशनों को भी आग के हवाले कर दिया।

लन्दन के एक मानवाधिकार संगठन – एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 25 नवम्बर को इस सम्बन्ध में कहा कि इस प्रदर्शन की हिंसा में अभी तक करीब 143 लोग मारे जा चुके हैं। संस्था ने दावा किया कि सरकार के खिलाफ यह सबसे भीषण क्रांति है। इससे पहले सन् 2009 में भी ऐसी एक क्रांति हुई थी जब ईरान के प्रशासन ने ‘ग्रीन रेवोल्यूशन’ पर प्रदर्शनों को कुचलने की कोशिश की थी।

हालाँकि, ईरान सरकार ने इस संस्था द्वारा पेश किए मौत के आँकड़े से पूरी तरह इनकार किया है। उनका पक्ष है कि इस दौरान सुरक्षाबलों के लोग भी मारे गए और हज़ार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जबकि न्यूयॉर्क की एक मानवाधिकार एजेंसी सेण्टर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान ने दावा किया है कि गिरफ्त में लिए गए लोगों की तादाद 4000 के करीब है।

प्रदर्शनकारियों द्वारा सभी शीर्ष नेताओं के इस्तीफे की माँग के बाद ये प्रदर्शन सियासी हो गए। जबकि स्थानीय सरकार ने इस उग्र प्रदर्शन को भड़काने के लिए अमेरिका, इजराइल तथा सऊदी अरब पर आरोप लगाए हैं। बता दें कि अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए थे, उसके बाद से ही ईरान के तेल निर्यात करने में काफी गिरावट आई है। इसके बाद से ही ईरान तथा लिबनान में कई हथियारबंद गुटों ने सरकार के खिलाफ महँगाई को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिए।

CM योगी पर अभद्र टिप्पणी करने वाले प्रशांत कनौजिया के खिलाफ़ चार्जशीट तैयार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी करने के बाद चर्चा में आए प्रशांत कनौजिया पर हजरतगंज पुलिस जल्द एक्शन लेने वाली है। जानकारी के अनुसार आरोपित कनौजिया के ख़िलाफ़ पुलिस ने चार्जशीट पूरी कर ली है। जिसे जल्द ही पहले शासन के पास भेजा जाएगा और फिर वहाँ से अनुमति लेकर इस हलफनामे को कोर्ट में दाखिल किया जाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले फेसबुक और ट्विटर पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने 8 जून 2019 को स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत जगदीश कनौजिया को उसके आवास से गिरफ्तार किया था। 

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प्रशांत कनौजिया द्वारा शेयर किया गया पोस्ट

उसके ख़िलाफ़ सब इंस्पेक्टर अशोक गुप्ता ने लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपित ने मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास किया। इस मामले में कनौजिया के खिलाफ आईपीसी की धारा 500, 505 और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

यह भी पढ़ें: पत्रकार ने पोस्ट किया ‘CM योगी की प्रेमिका’ वाला फर्जी वीडियो, गिरफ्तार

पूरा मामला

दरअसल, 6 जून को कनौजिया ने फेसबुक और ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें हेमा नाम की एक युवती मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर खड़ी होकर खुद की योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी। साथ ही वो ये भी दावा कर रही थी कि सीएम योगी उसके साथ एक साल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर रहे हैं। प्रशांत ने इस वीडियो को ‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। जिसके बाद यूपी पुलिस ने उसपर एक्शन लेते हुए उसे गिरफ्तार किया था और फिर जमानत के लिए उसकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर आरोपित कनौजिया को 11 जून को जमानत मिली थी। 

अब एक नए मंदिर का मामला कोर्ट में पहुँचा, एक पक्ष ने कहा- यह अनंतकाल से मौजूद है

राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं के पक्ष में फ़ैसला सुनाया। ये विवाद सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा था। अब एक और मंदिर विवाद अदालत की चौखट पर जा पहुँचा है। असम के आईआईटी गुवाहाटी कैम्पस में भी यह मंदिर है। संस्थान और एक प्रोफेसर इस मामले में आमने-सामने खड़े हो गए हैं। अस्सिस्टेंट प्रोफेसर बृजेश राय ने दावा किया कि इस मंदिर को 4 वर्ष पूर्व ही बनाया गया था। आईआईटी गुवाहाटी का कहना है कि मंदिर अनन्तकाल से मौजूद है। मामला गुवाहाटी हाई कोर्ट पहुँच गया है।

राय ने एक पीआईएल दायर किया है, जिसपर हाई कोर्ट अगले कुछ दिनों में फ़ैसला सुनाएगा। असिस्टेंट प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि संस्थान की अनुमति लिए बिना इस मंदिर का निर्माण कर दिया गया। इसके बाद ये अफवाह फ़ैल गई कि राय को आईआईटी गुवाहाटी से निकाला जा सकता है। समर्थक छात्रों ने उनके पक्ष में कैंडल मार्च निकाला। राय ने अदालत में दायर किए गए पीआईएल में कहा है कि ये मंदिर 2015 तक सिर्फ़ एक चबूतरा था, जहाँ पीपल के पेड़ के नीचे कुछ मजदूरों ने देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ रख दी थी।

राय का कहना है कि इसे 2015 के बाद एक मंदिर का रूप दे दिया गया। प्रोफेसर राय द्वारा डाले गए आरटीआई एप्लिकेशन के जवाब में आईआईटी गुवाहाटी ने कहा कि मंदिर के निर्माण के लिए उसने सहायता नहीं दी है और कैम्पस में ऐसे किसी भी निर्माण के लिए संस्थान की अनुमति लेनी ज़रूरी है। एक सवाल के जवाब में आईआईटी गुवाहाटी ने कहा कि ये मंदिर वहाँ तब से है, जब से ये शिक्षण संस्थान भी वहाँ नहीं था। साथ ही आईआईटी ने यह भी कहा कि ये मंदिर अनंतकाल से वहाँ मौजूद है।

राय ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ को गूगल मैप्स से उपलब्ध डेटा दिखाते हुए बताया कि पहले से यहाँ रहा चबूतरा अब एक पक्के मंदिर में बदल गया है। प्रोफ़ेसर राय का अतीत दागदार रहा है। उन्हें 2017 में एक प्रोफ़ेसर के साथ झगड़ा करने के कारण आईआईटी ने सस्पेंड कर दिया था। नवंबर 2018 में उनका सस्पेंशन ख़त्म हो गया, जिसके बाद उन्हें पुनः बहाल किया गया। राय कहते हैं कि ये सब साज़िश है और उनपर लगे आरोप झूठे हैं। उन्होंने कहा कि वो मंदिर के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन पूजा करने के लिए लोगों के पास अपनी व्यक्तिगत जगह होनी चाहिए।

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प्रियंका गॉंधी की करीबी विधायक अदिति सिंह पर कॉन्ग्रेस सख्त, सदस्यता समाप्त करने के लिए भेजा नोटिस

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस ने हाल ही में 10 वरिष्ठ नेताओं को बाहर किया है। अब रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह की सदस्यता खत्म करने को लेकर यूपी विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित को नोटिस दिया। अदिति कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी के संसदीय क्षेत्र की सीट से विधानसभा के लिए चुनी गई हैं। वे कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गॉंधी की करीबी मानी जाती हैं।

लेकिन, 2 अक्टूबर को गॉंधी जयंती के मौके पर विधानसभा के विशेष सत्र में उनके हिस्सा लेने के बाद से पार्टी उनसे नाराज चल रही है। उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए नोटिस भेजे जाने की पुष्टि खुद कॉन्ग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने की है। उन्होंने कहा कि अदिति सिंह ने विशेष सत्र में हिस्सा लेकर पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया था। ऐसे में उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

आराधना मिश्रा ने कहा, “पार्टी ने यूपी विधानसभा अध्यक्ष के सामने याचिका दाखिल कर रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह की सदस्यता खत्म करने को लेकर याचिका भेजी है। उन्होंने सरकार द्वारा यूपी विधानसभा में 2 अक्टूबर को आयोजित विशेष सत्र का बहिष्कार करने के लिए पार्टी व्हिप का अनादर किया था।”

अदिति सिंह के ख़िलाफ़ नोटिस

हाल ही में पंजाब के कॉन्ग्रेस विधायक से शादी करने वाली अदिति ने विशेष सत्र के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर सुरक्षा बढ़ाने की मॉंग भी की थी। योगी आदित्यनाथ से 16 अक्टूबर को मुलाकात के बाद उनके भाजपा में जाने की चर्चा भी चली थी। इतना ही नहीं 24 अक्टूबर को रायबरेली में हुए कॉन्ग्रेस के विशेष प्रशिक्षण सत्र में भी उन्होंने हिस्सा नहीं लिया था।

गौरतलब है कि विधानसभा के विशेष सत्र का कॉन्ग्रेस के अलावा एसपी और बीएसपी ने भी विरोध किया था। लेकिन अदिति सिंह ने न सिर्फ़ सत्र में शामिल हुईं बल्कि स्वच्छता व पानी जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात भी रखी। बता दें कि अदिति सिंह रायबरेली के बाहुबली नेता अखिलेश सिंह की बेटी हैं। उनके पिता भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं।

PM मोदी और RSS पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाला सब-इंस्पेक्टर सस्पेंड

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सेवक संघ (RSS) पर विवादित पोस्ट करने के कारण उत्तरप्रदेश में आनंद गौतम नामक पुलिस सब-इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया गया है। आनंद गौतम की पोस्टिंग सुल्तानपुर के कादीपुर इलाके में थी। उस पर साल 2016-2018 के बीच प्रधानमंत्री और आरएसएस के खिलाफ़ सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। सुल्तानपुर के एसपी हिमांशु कुमार ने उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए पूरे मामले में जाँच के आदेश दिए हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार एसपी ने कहा, “पोस्ट बेहद आपत्तिजनक हैं। यह पुलिस सेवा नियमावली के विपरीत है। अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इसलिए सस्पेंड कर विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।”

बता दें इस मामले में कानूनी कार्रवाई करने से पहले पुलिस उप अधीक्षक की रैंक वाले अधिकारी को गौतम के ट्विटर और फेसबुक पोस्टों पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया है। इसमें प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ 6 पोस्ट और आरएसएस के खिलाफ 4 पोस्ट शामिल हैं।

एसपी हिमांशु कुमार के मुताबिक निलंबित पुलिस अधिकारी आनंद गौतम से सफाई माँगी गई है। साथ ही सभी पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया पोस्टों की समीक्षा करने की जिम्मेदारी जिला पुलिस के सोशल मीडिया सेल को दी गई है। इसके अलावा सभी पुलिस कर्मियों को आपत्तिजनक पोस्ट से पहले परहेज करने की चेतावनी भी जारी की गई है।

बता दें, निलंबित सब-इंस्पेक्टर के आपत्तिजनक पोस्ट को स्थानीय भाजपा नेताओं द्वारा कादीपुर एसएचओ ओम वीर सिंह के संज्ञान में लाया गया। उन्होंने इसकी शिकायत करते हुए इसे प्रधानमंत्री की छवि धूमिल करने की कोशिश बताया।

मोदी का पोस्टर लगा कर जीती शिवसेना, अंत में स्थिर सरकार ही लौटेगी: महाराष्ट्र पर अमित शाह

भाजपा अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र में चल रही राजनीतिक गतिविधियों के बीच भाजपा का रुख स्पष्ट किया है। शाह ने कहा कि भाजपा ने जितनी सीटों पर चुनाव लड़ा था, उसने उसका 70% जीता और फिर भी विपक्ष में बैठ रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि लड़ी गई सीटों में से मात्र 42% सीटें जीत कर शिवसेना के उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 50-50 की सारी बातें चुनाव बाद शुरू हुई, क्योंकि उससे पहले आदित्य ठाकरे और उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में देवेंद्र फडणवीस के नाम की घोषणा की गई थी लेकिन दोनों में से किसी ने भी कभी आपत्ति नहीं जताई।

अमित शाह ने कहा कि शिवसेना के सरे विधायकों ने चुनाव जीतने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का इस्तेमाल किया। शाह ने कहा कि शिवसेना के विधानसभा उम्मीदवारों ने वोटरों को लुभाने के लिए पोस्टरों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो का इस्तेमाल किया और जीत कर उसी जनता को धोखा दे दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनादेश देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने के लिए था, जिसका शिवसेना ने अपमान किया है। शाह ने कहा कि जो लोग शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठबंधन की सराहना कर रहे हैं, उन्होंने ही अजित पवार द्वारा भाजपा को समर्थन दिए जाने की आलोचना की।

अमित शाह ने कहा कि भाजपा ने कभी भी किसी भी रूप में शिवसेना को मुख्यमंत्री पद देने की बात नहीं की। उन्होंने कहा कि देवेंद्र फडणवीस अच्छा काम कर रहे थे और मुख्यमंत्री के रूप में उनका परफॉरमेंस शानदार रहा था, इसीलिए जनता उन्हें वापस लेकर आई। शाह ने बताया कि उन्होंने सभी रैलियों में कहा है कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन की सरकार आने के बाद देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने रिपब्लिक टीवी के कार्यक्रम में कहा,

“शिवसेना को मुख्यमंत्री पद दिया गया है तो क्या ये ख़रीद-फरोख्त नहीं है क्या? अगर महाराष्ट्र के हित की बात है तो कॉन्ग्रेस और एनसीपी अपना मुख्यमंत्री क्यों नहीं बना रहे हैं?”

मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ़ हो गया। अमित शाह ने कहा कि अंत में स्थिर सरकार को ही जनता वापस लेकर आती है और महाराष्ट्र में भी ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता में कौन रहेगा और कौन विपक्ष में, ये जनता तय करती है।

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कश्मीर पर जहर उगलने वाली लेबर पार्टी के साथ आतंकी संगठन JKLF, कॉन्ग्रेस नेता भी कर चुके हैं मुलाकात

ब्रिटेन में 12 दिसंबर को चुनाव होने हैं। उससे पहले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) ने चुनावों में विपक्षी लेबर पार्टी को बिना शर्त समर्थन का ऐलान किया है। जेकेएलएफ एक आतंकी संगठन है और उसे पाकिस्तान की सरपरस्ती हासिल है।

लेबर पार्टी की कमान जेरेमी कोर्बिन के पास है। कोर्बिन अपने भारत विरोधी रुख और कश्मीर पर पाकिस्तानी एजेंडे को हवा देने के लिए जाने जाते हैं। पिछले महीने कोर्बिन से कॉन्ग्रेस के एक प्रतिनिधमंडल ने भी मुलाकात की थी। उसी लेबर पार्टी को चुनावों में समर्थन देने को लेकर जेकेएलएफ की ब्रिटिश शाखा की तरफ से बयान जारी किया गया है।

कोर्बिन को लिखे अपने पत्र में JKLF ने कहा कि यूके में कश्मीरी प्रवासी और विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के हजारों सदस्यों की ओर से उन्होंने अपना समर्थन लेबर पार्टी को देने का निर्णय किया है। पत्र में JKLF ने कश्मीर पर लेबर पार्टी और कोर्बिन की प्रशंसा की है। लेबर पार्टी और कोर्बिन ने कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की वकालत की थी।

कोर्बिन के भारत विरोधी रुख के वाबजूद कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि उनसे मिले थे। इस दौरान कश्मीर में मानवाधिकारों के मुद्दों पर चर्चा भी की थी। हालाँकि जब यह बात उजागर हो गई तो कॉन्ग्रेस ने सफाई देते हुए कहा था कि बैठक में लेबर पार्टी के भारत विरोधी प्रस्ताव की निंदा की गई। मानवाधिकारों पर चर्चा नहीं हुई।

उल्लेखनीय है कि अभी हाल ही में कश्मीर मुद्दे पर भारत का रुख जानने के बाद भी लेबर पार्टी ने कोर्बिन से भारत और पाकिस्तान दोनों के उच्चायुक्तों से मिलने के लिए कहा था। इतना ही नहीं 25 सितंबर को इस मसले पर पार्टी ने एक रेज्यूलेशन भी पास किया था, जिसमें ‘कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप और संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व-जनमत संग्रह के आह्वान’ का समर्थन किया गया था। हालाँकि, भारी विरोध और भारतीय मूल के लोगों की नाराजगी के कारण इस प्रस्ताव को वापस ले लिया और बाद में पार्टी अध्यक्ष ने कश्मीर को द्विपक्षीय मुद्दा बताया।

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छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री से मिले ₹2856 करोड़ कौन गटक गया: कॉन्ग्रेस सरकार ने कहा- इसका रिकॉर्ड नहीं है

छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री से मिला राजस्व सरकारी खजाने के बदले कहॉं गया? ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब राज्य की कॉन्ग्रेसी सरकार के मंत्री तक को ठीक से नहीं पता। राज्य सरकार ने इस वर्ष 31 अक्टूबर तक 11,000 करोड़ की शराब बेची है। नियमानुसार, ये पूरी की पूरी रक़म सरकारी खजाने में जमा होनी चाहिए थी। लेकिन, इसमें से मात्र 8271 करोड़ 42 लाख रुपए ही सरकारी खजाने में पहुँचे। शेष 2855 करोड़ 70 लाख रुपए कहाँ गए, इस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ये धनराशि कोषालय में पहुँची ही नहीं और ख़र्च भी कर दी गई। मंगलवार (नवंबर 26, 2019) को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस मामले ने तूल पकड़ा।

जनता कॉन्ग्रेस छत्तीसगढ़ के विधायक धर्मजीत सिंह ने इस बाबत विधानसभा में सवाल पूछा। सरकार ने बताया कि ये रक़म शराब की नई खेप ख़रीदने, उनके परिवहन, ढुलाई और कर्मचारियों को वेतन देने में ख़र्च हो गई, इसीलिए सरकारी खजाने में इसका रिकॉर्ड नहीं है। विपक्षी विधायकों ने इसे क़ानून के ख़िलाफ़ बताते हुए कहा कि ऐसा नहीं किया जा सकता है। नियमानुसार, इस रक़म को पहले कोषालय में जमा किया जाना चाहिए था और फिर ख़र्च किया जाना था। विपक्षी नेताओं ने कहा कि बिना सरकारी खजाने में रुपए डाले इसे बाहर ही बाहर ख़र्च कर देना मनमानी है।

आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने दावा किया कि ये कोई गड़बड़ी नहीं है, जबकि विधायक धर्मजीत जाँच कराने पर अड़े रहे। मंत्री ने कहा कि जाँच की कोई ज़रूरत ही नहीं है। आबकारी मंत्री ने बताया कि शराब दुकानों में लूटपाट और गबन की वजह से इस वर्ष सरकार को 13 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। सरकार अभी तक 4 करोड़ रुपए ही रिकवर कर सकी है। वहीं भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि जिस तरह से छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा शराब पी जा रही है, सरकार को ‘उड़ता छत्तीसगढ़’ फ़िल्म बनानी चाहिए। बता दें कि शाहिद कपूर अभिनीत ‘उड़ता पंजाब’ में पंजाब की ड्रग्स समस्या दिखाई गई थी। चंद्राकर ने पूरी छत्तीसगढ़ कैबिनेट को ही अवैध करार दिया।

धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने और कर्जमाफी के फ्लॉप होने जैसे मुद्दों को लेकर पहले से ही विपक्ष के विरोध का सामना कर रही भूपेश बघेल सरकार अब शराब से हुई कमाई में गड़बड़ी के सामने आने से चहुँओर से घिर गई है। यहाँ तक कि बसपा विधायकों ने भी सदन में कॉन्ग्रेस सरकार को घेरते हुए कहा कि राज्य में जनप्रतिनिधियों का कोई सम्मान नहीं रह गया है।

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न मैंने एनसीपी छोड़ी और न पार्टी ने मुझे निकाला: सुप्रिया सुले के गले लगने के बाद अजित पवार

महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र बुधवार को शुरू हुआ। सारी नजरें अजित पवार पर टिकी थी। एनसीपी विधायक दल के नेता रहे पवार ने बीते दिनों भाजपा को समर्थन देकर सबको हैरान कर दिया था। उन्होंने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली थी। लेकिन, मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

आज जैसे ही वे विधान भवन के परिसर में पहुॅंचे तो सांसद सुप्रिया सुले ने उन्हें गले लगा लिया। अजित एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के भतीजे तो सुप्रिया बेटी है। सुप्रिया पार्टी विधायकों का स्वागत करने के लिए विधान भवन पहुॅंची थीं।

पत्रकारों से बात करते हुए अजित पवार ने कहा कि वे एनसीपी में थे और अब भी हैं। उन्होंने पार्टी कभी नहीं छोड़ी। पवार ने पत्रकारों से पूछा कि क्या पार्टी ने मुझे निकाला? आपने ऐसी बात कभी सुनी या पढ़ी?

उल्लेखनीय है कि जब अजित भाजपा के साथ चले गए थे तो सुप्रिया ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लिखा था कि पवार परिवार और पार्टी बॅंट गई है। उन्होंने लिखा था, “आप जीवन में किस पर भरोसा करोगे। इतना ठगा हुआ कभी महसूस नहीं हुआ। उनका बचाव किया, उन्हें प्यार दिया। देखो बदले में क्या मिला मुझे।”

पुणे की बारामती सीट से 1.65 लाख मतों के अंतर से विधानसभा चुनाव जीतने वाले अजित के लौटने के बाद एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा है, “आखिर में उन्होंने अपनी गलती कबूल ली। यह पारिवारिक मसला है और पवार साहब ने उन्हें माफ कर दिया है। पार्टी में उनकी भूमिका में कोई बदलाव नहीं होगा।”

…वो शख्स जिसने चूस लिया अजित पवार का पावर: 3 दिन में सरकार गिरने की अंदरुनी कहानी!

‘अजित पवार की बगावत बालू पर गधे के मूतने पर हुई गंदगी जैसी हो गई है’

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इसरो ने लॉन्च किए 13 अमेरिकी नैनो-सैटेलाइट, उच्चतम इमेज गुणवत्ता वाला कॉर्टोसैट-3 भी हुआ लॉन्च

इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाईजेशन (ISRO) ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र के लॉन्च पैड से उच्चतम रिजोल्यूशन वाले उपग्रह कार्टोसैट-3 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर के देश का मस्तक गर्व से ऊँचा कर दिया। कॉर्टोसैट-3 को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक इंजेक्ट भी कर दिया गया है। इसरो ने इस पूरे ऑपरेशन का लाइव टेलीकास्ट किया। इसरो ने इसके साथ ही 13 अमेरिकी नैनो-सैटेलाइट को भी लॉन्च किया। इसरो प्रमुख के. सिवन ने ऑपरेशन के सफल संचालन के बाद प्रसन्नता ज़ाहिर की।

अगर 2005 से 2019 तक के सफर की बात करें तो इसरो ने अब तक 8 कॉर्टोसैट सैटेलाइट लॉन्च करने में सफलता प्राप्त की है। ये रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट होते हैं, जो अर्थ मैपिंग को बेहतर तरीके से अंजाम देते हैं। कॉर्टोसैट और अमेरिकी नैनो-सैटेलाइट्स को लॉन्च करने के लिए 49वीं बार PSLV C-47 का प्रयोग किया गया। इन्हें सतीश धवन अंतरिक्ष सेंटर से बुधवार (नवंबर 27, 2019) सुबह क़रीब साढ़े 9 बजे लॉन्च किया गया। कॉटोसाइट-3 509 किलोमीटर की ऊँचाई पर 97.5 डिग्री झुकाव के साथ पृथ्वी की परिक्रमा करेगा।

इन सैटेलाइट्स और उनसे उपलब्ध डेटा का प्रयोग अर्बन प्लानिंग, रूरल रिसोर्सेज और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए किया जाएगा। इसका उपयोग कोस्टल लैंड यूज और लैंड कवर के लिए भी किया जाएगा। आसान शब्दों में समझें तो ये सैटेलाइट उच्चतम क्वालिटी में इमेज लेने में सक्षम है। इससे उपलब्ध हुए डेटा से सेना को भी लाभ मिलेगा। कॉर्टोसैट-3 का स्पाटिअल रिजोल्यूशन 30 सेंटीमीटर रहने की उम्मीद है। इसके पूर्ववर्ती का स्पाटिअल रिजोल्यूशन 1 मीटर के आसपास था और कॉर्टोसैट-1 का 2.5 मीटर था।

यहाँ ये जानने लायक बात है कि स्पाटिअल रिजोल्यूशन 30 मीटर होने का अर्थ ये है कि इसके द्वारा लिए गए फोटो का एक पिक्सल ज़मीन पर 30*30 के क्षेत्र के बराबर होगा। इसरो प्रमुख ने स्पेस एजेंसी के अन्य प्रोजेक्ट्स के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि उनके पास मार्च तक 13 अंतरिक्ष मिशन हैं, जिनमें से 6 बड़े वाहन मिशन और 7 सैटेलाइट मिशन शामिल हैं।

इसरो निश्चित रूप से चंद्रमा की सतह पर एक और लैंडिंग का प्रयास करेगा, योजना पर काम हो रहा है: के सिवान

इसरो ने जारी की Chandrayaan-2 द्वारा ली गई पृथ्वी की बेहद खूबसूरत तस्वीरें

इसरो का ऐतिहासिक जंप: एक ही रॉकेट से 3 विभिन्न कक्षाओं में अलग-अलग सैटेलाइट करेगा स्थापित