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ममल्लापुरम बीच पर PM मोदी ने की सफाई, उठाया कूड़ा, देखें Video

तमिलनाडु के ममल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक शिखर बैठक कर रहे हैं। कल (अक्टूबर 11, 2019) इस बैठक के पहले दिन उन्होंने राष्ट्रपति जिनपिंग से आतंकवाद से जुड़े मुद्दों पर बात की। इसके बाद वह आज सुबह की सैर के लिए ममल्लापुरम बीच पर गए। वहाँ उन्होंने बीच किनारे पड़े कूड़े को उठाया।

उन्होंने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “आज सुबह ममल्लापुरम में एक बीच पर 30 मिनट Plogging की। ये सब 30 मिनट तक चला।

इस 3 मिनट की वीडियो में प्रधानमंत्री बीच पर कैजुअल कपड़ों में नजर आ रहे हैं। उन्होंने टीशर्ट और ट्रैक पैंट पहनी है और सैर के दौरान वे समुद्र किनारे पड़े कूड़े को अपने हाथ से उठा रहे हैं। अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात की जानकारी दी कि उन्होंने ये कूड़ा एक थैली में एकत्रित करके होटल के स्टाफ जेयाराज को सौंपा। उन्होंने लिखा कि हम सभी लोगों को सुनिश्चित करना चाहिए कि सार्वजनिक स्थान साफ-सुथरा रहें। इसके साथ ही उन्होंने लोगों को स्वस्थ और सेहतमंद रहने का संदेश दिया।

बता दें कि अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री ने सफाई अभियान के लिए PLOGGING शब्द का उपयोग किया।
दरअसल, सुबह की सैर (जॉगिंग) के दौरान कूड़ा उठाने को ‘प्लॉगिंग’ कहते हैं। जहाँ तक इसके बारे में जानकारी उपलब्ध है, इसकी शुरुआत 2016 में स्वीडन से हुई थी। पीएम मोदी ने 2 अक्टूबर को महात्मा गाँधी के जन्मदिवस के अवसर पर प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करने को लेकर शुरू हो रहे अभियान का जिक्र करते हुए
प्लॉगर रिपुदमन बेल्वी देश की तारीफ की थी।

हालाँकि, देश को स्वच्छ बनाने के लिए प्रधानमंत्री अपने पहले कार्यकाल से ही स्वच्छता अभियान के लिए लोगों को जागरूक करते आए हैं। सरकार #HumFitTohIndiaFit movement की शुरुआत भी कर चुकी है। ऐसे में प्रधानमंत्री द्वारा PLOGGING किए जाने को देखकर लगता है कि वो ऐसा करते हुए इन दोनों अभियानों को एक साथ प्रोत्साहित कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत अभियान के तहत भारत के 93% ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय की सुविधा पहुँचा दी गई है और अब तक 9 करोड़ शौचालय बन चुके हैं। इन आँकड़ों की जानकारी खुद पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय ने दी है। उन्होंने बताया है कि उन्होंने साल 2018 के नवंबर से फरवरी 2019 तक एक सर्वे कराया था, जिसमें ये आँकड़े निकलकर आए हैं।

टेरर फंडिंग: उम्मेद अली, समीर सलमानी और एजाज अली समेत 4 गिरफ़्तार, नेपाल से जुड़े तार

टेरर फंडिंग मामले में एटीएस और स्थानीय पुलिस ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से शुक्रवार (11 अक्टूबर) को चार लोगों को गिरफ़्तार किया। इनके पास से भारतीय और नेपाली मुद्रा भी बरामद की गई है जिसे वो नेपाल से ला रहे थे। इसके अलावा, कई सेलफोन भी इनके पास से बरामद किए गए। 

गिरफ़्तार किए गए लोगों में सो दो लोग बरेली के हैं और दो लखीमपुर खीरी के तिकुनियां इलाक़े के हैं। इन चारों आरोपितों के बारे में पता चला है कि ये विदेश से नेपाल की बैंकों में आने वाले धन को भारतीय मुद्रा में तब्दील करके खीरी के रास्ते देश भर में भेजते थे। इस धन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाता था।  

लखनऊ पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेन्स में डीजीपी ओपी सिंह ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग नेपाल से अवैध रूप से धन मँगाकर भारत में आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों तक पहुँचाने का काम कर रहे हैं। सूचना मिली थी कि 10 अक्टूबर को भारी मात्रा में नेपाल से धनराशि लाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर एटीएस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने उम्मेद अली, संजय अग्रवाल, समीर सलमानी और एजाज अली को गिरफ़्तार किया।

डीजीपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान चारों ने बताया कि वे लोग मुमताज, सिराज़ुद्दीन और सदाक़त अली के कहने पर यह काम कमीशन लेकर करते थे। इस काम को अंजाम देने के लिए बाक़ायदा एक योजना थी, जिसके अनुसार ये चारों अभियुक्त विदेशी मुद्रा को नेपाल के बैंकों में जमा करवाते थे और फिर वहाँ के किसी खाताधारक से वो पैसा निकलवा कर भारत लाते थे। भारत लाकर नेपाली मुद्रा को भारतीय मुद्रा में बदलवा दिया जाता था। इस काम के लिए अभियुक्तों को 6 प्रतिशत कमीशन मिलता था।

अभियुक्तों ने इस बात का भी ख़ुलासा किया कि ये धन बरेली के रहने वाले फ़हीम और सदाकत को दिया जाता था और उनसे कमीशन ले लिया जाता था। फ़हीम और सदाकत रक़म को दिल्ली पहुँचाते थे।

अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, गिरफ़्तार किए गए लोगों ने नेपाल के एक बैंक की वेबसाइट हैक करके 49 लाख रुपए निकाले थे। पुलिस ने इनके पास से 4.75 लाख भारतीय रुपए और 1.65 लाख नेपाली रुपए बरामद किए हैं। फ़िलहाल, चारों को जेल में डाल दिया गया है और चार अन्य की तलाशी जारी है।  

एसपी पूनम का कहना है कि मुमताज, फ़हीम, सिराज़ुद्दीन और सदाकत की गिरफ़्तारी के बाद ही पता चल सकेगा कि यह अवैध धन किस आतंकी संगठन तक पहुँचाया जाता था। उन्होंने बताया कि पता चला है कि विदेशों से रक़म मँगाने के बाद उसे बैंक की वेबसाइट हैक करने के बाद ही उस रक़म को निकाला जाता था जिससे किसी को पता न चल सके।

कॉन्ग्रेस के हाथ से छिटक रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया, क्या दादी, बुआ की पार्टी में जाएँगे?

सियासत में बयानों की टाइमिंंग के अपने मायने होते हैं। पोस्टर भी पर्दे के पीछे चल रहे घटनाक्रमों का संदेश देते हैं। इस कसौटी पर कॉन्ग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के हालिया बयानों और भिंड में लगे एक पोस्टर को कसे तो भविष्य की राजनीति के कई संकेत नजर आते हैं।

इनसे सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि क्या ज्योतिरादित्य कॉन्ग्रेस छोड़ने वाले हैं? क्या वे उस भाजपा में शामिल होंगे जिसमें उनकी दादी विजयाराजे सिंधिया रही और जिसके साथ आज भी उनकी बुआ राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे जुड़ी हैं? उनकी दादी तो बीजेपी के संस्थापकों में शामिल थीं। हालॉंकि ज्योतिरादित्य को जब सियासी पारी शुरू करने का मौका मिला तो उन्होंने दादी की पार्टी की बजाए पिता माधवराव सिंधिया की विरासत को कॉन्ग्रेस में रहकर आगे बढ़ाने का फैसला किया।

लेकिन, कहते हैं राजनीति में कुछ भी अंतिम नहीं होता। संभावनाओं का द्वार हमेशा खुला रहता है। शायद यही कारण है कि मध्य प्रदेश के भिंड में लगे एक पोस्टर में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ नजर आते हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह पोस्टर भाजपा कार्यकर्ता और भारत रक्षा मंच के संयोजक हृदयेश शर्मा की ओर से लगाया गया है। हाल में ज्योतिरादित्य ने जिस तरह प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को कई मौकों पर घेरा है उससे भी उनके पार्टी बदलने के कयासों को बल मिलता है। यह दूसरी बात है कि अब तक वे ऐसे कयासों को खारिज करते रहे हैं।

पिछले दिनों ज्योतिरादित्य भिंड के अटेर में बाढ़ पीड़ितों से मुलाकात करने पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने बाढ़ पीड़ितों की तत्काल सहायता करने को लेकर कमलनाथ सरकार को जमकर घेरा और साथ ही नसीहत भी दी।

इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निष्क्रिय होने पर पार्टी लाइन से अलग जाकर इसका समर्थन किया था। अभी हाल में कर्जमाफी को लेकर कमलनाथ सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि 2 लाख रुपए के कर्जमाफी का वादा किया गया था, लेकिन अभी तक सिर्फ 50 हजार रुपयों की ही कर्जमाफी हुई है। 2 लाखों रुपयों की कर्जमाफी होनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि 2018 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की जीत में ​ज्योतिरादित्य की अहम भूमिका मानी जाती है। लेकिन, नतीजों के बाद उन्हें किनारे कर सरकार की कमान कमलनाथ को सौंप दी गई थी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें मध्य प्रदेश की राजनीति से दूर कर कॉन्ग्रेस का महासचिव बना पश्चिमी उत्तर प्रदेश भेज दिया गया। आम चुनावों में पश्चिमी यूपी में कॉन्ग्रेस की दुर्गति तो होनी थी और हुई भी। ज्योतिरादित्य
खुद मध्य प्रदेश की गुना सीट से चुनाव हार गए।

हाल में समर्थकों ने उन्हें मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बनाने के लिए भी आवाज उठाई थी। लेकिन, शीर्ष नेतृत्व की तरफ से अब तक इसे तवज्जो नहीं मिली है। बताया जाता है कि ज्योतिरादित्य पार्टी में खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

कुछ इसी तरह के आरोप लगाकर हरियाणा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे अशोक तंवर ने कॉन्ग्रेस छोड़ी है। मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी के करीबियों को अलग-थलग किए जाने का आरोप लगाया है। ज्योतिरादित्य की गिनती भी उन नेताओं में होती है जो राहुल के करीबी रहे हैं। तो क्या अगली बारी उनकी ही है? जिस दौर में नेताओं को निष्ठा बदलने में पल भर की देरी नहीं लगती है, उस वक़्त में ज्योतिरादित्य के लिए तो यह दादी के घर वापसी जैसा ही होगा।

सेंगर ने नहीं रची थी उन्नाव रेप पीड़िता के कार हादसे की साजिश, सीबीआई चार्जशीट में MLA से हत्या का आरोप हटा

उन्नाव रेप पीड़िता की कार के साथ हादसा साजिश नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जॉंच करते हुए सीबीआई इस निष्कर्ष पर पहुॅंची है। इसके मुताबिक इसके पीछे भाजपा के निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर का हाथ नहीं था। दुर्घटना ट्रक ड्राइवर की लापरवाही से हुई थी।

नतीजतन, सीबीआई ने इस मामले में जो चार्जशीट दाखिल की है उसमें सेंगर और उसके सहयोगियों के खिलाफ हत्या का कोई आरोप दायर नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार आरोप-पत्र में रेप के आरोपित कुलदीप सेंगर और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ केवल पीड़िता को डराने-धमकाने का आरोप लगे है।

इस मामले के संबंध में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के आरोप में ड्राइवर आशीष पाल को आईपीसी की धारा 304-ए, 338 बी और 279 के तहत आरोपी बनाया गया है। ये चार्जशीट लखनऊ की विशेष अदालत में दाखिल हुई है। इसमें कुलदीप एवं उसके अन्य साथियों पर केवल 120 बी के तहत आरोप लगाए गए हैं।

जानकारी के अनुसार सीबीआई ने पहले अपनी प्राथमिकी में पूर्व विधायक और 9 अन्य लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक साजिश, हत्या, हत्या के प्रयास और आपराधिक धमकी से संबंधित आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था, लेकिन कल लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत में दायर हुई चार्जशीट में सिर्फ़ आपराधिक साजि और धमकी से संबंधित आरोप हैं।

गौरतलब है कि इसी साल 28 जुलाई को जब रेप पीड़िता जेल में बंद अपने चाचा से मिलने जा रही थी तो एक ट्रक ने उसकी कार में टक्कर मार दी थी। हादसे में पीड़िता ने अपने 2 परिजनों को खो दिया था जबकि वह खुद और उसका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पीड़िता के परिजनों से पूरी घटना के लिए सेंगर को जिम्मेदार ठहराया था और सीबीआई जाँच के लिए माँग भी की थी।

‘आवारा गोमाता’ लिख दिग्विजय सिंह ने पूछा- कहॉं हैं गोरक्षक? CM कमलनाथ बोले- कर रहे हैं काम

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस नेता आजकल मीडिया के जरिए एक-दूसरे को पाठ पढ़ा रहे हैं। इस कड़ी में राज्य के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ को ट्विटर के जरिए सच्चा गोभक्त बनने के नुस्खे बताए हैं। दिग्विजय सिंह ने अपने एक ट्वीट में भोपाल हाईवे की तस्वीरें शेयर की और कहा कि यहाँ आवारा गोमाता बैठती हैं और लगभग हर दिन एक्सीडेंट से मर जाती हैं। पूर्व मुख्यमंत्री को जवाब देते हुए कमलनाथ ने ट्वीट कर बताया कि दिग्विजय सिंह जिस मामले पर उनका ध्यान केंद्रित करवा रहे हैं, उस पर काम करने के लिए वे पहले से प्रयासरत हैं।

दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ को टैग करते करते हुए 2 ट्वीट किए। एक में उन्होंने भोपाल हाईवे की तस्वीर डाली और लिखा, “यह चित्र है भोपाल इंदौर हाइवे का है, जहॉं आवारा गोमाता बैठी रहती हैं और लगभग हर दिन ऐक्सीडेंट में मर जाती हैं। कहॉं हैं हमारे गोमाता प्रेमी गोरक्षक? मप्र शासन को तत्काल इन आवारा गोमाता को सड़कों से हटा कर गोअभ्यारण्य या गोशालाओं में भेजना चाहिए।

इसके तुरंत बाद उन्होंने दूसरा ट्वीट किया और लिखा, “यदि कमलनाथ जी आपने तत्काल ऐसा कर के दिखा दिया तो आप सच्चे गोभक्तों में गिने जाएँगे और तथाकथित भाजपाई नेताओं को नसीहत मिलेगी।

इस ट्वीट का सीएम कमलनाथ ने नौ घंटे बाद जवाब दिया। कहा कि वे पहले से ही इस कार्य को करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि अभी कुछ दिन पूर्व ही उन्होंने इस विषय पर चिंता जताते हुए अधिकारियों को एक कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया है। उनके अनुसार मध्य प्रदेश में 1,000 गोशालाओं के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। उनका कहना है कि अगले साल तक 3,000 गोशालाएँ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे गायों के सड़कों पर बैठने पर कमी आएगी। उनके मुताबिक गाय उनके लिए सियासी मुद्दा नहीं है।

सीएम कमलनाथ के ट्विट्स का स्क्रीनशॉट

बता दें कि इन ट्वीट्स के बाद सोशल मीडिया पर लोग मध्य प्रदेश की राजनीति पर तरह-तरह की चुटकी ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य ​सिंधिया के बीच ही एक-दूसरे को गलत दिखाने की होड़ लगी हुई है। अगर ऐसा रहा तो विपक्ष क्या करेगा?

लोगों का पूछना है कि अगर आपस में ही बात करनी है तो फोन पर बात नहीं कर सकते हैं? ये सब क्या चल रहा है?

यूजर्स कह रहे हैं कि गोमाता की चिंता कर रहे हो, लेकिन जो व्यापमं में मरे, मंदसौर की फायरिंग में मरे, फर्जी जेल ब्रेक में मरे? सब ठंडे बस्ते में है!

इसके अलावा एक यूजर ने दोनों नेताओं को सलाह दी है कि वे काम करें, नहीं तो पंचायत चुनाव में सब पता चल जाएगा, जब सारे सरपंच भाजपा के बनेंगे।

इस्लाम कबूल करने के लिए बीमार सिख पर डाला दबाव, इनकार करने पर अनवर ने साथियों संग मिलकर पीटा

पंजाब के पटियाला में जबरन धर्म परिवर्तन कराए जाने का मामला सामने आया है। सिख समुदाय के एक बीमार व्यक्ति किरणदीप सिंह को इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया। इंकार करने पर उसकी बेरहमी से पिटाई की गई।

मारपीट होने के तीन दिनों तक चुप रहने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिक़ायत दर्ज कराई। 32 वर्षीय किरणदीप सिंह ने शिक़ायत में बताया कि पटियाला के हीरा बाग में 6 अक्टूबर को उसे कलमा और क़ुरान पढ़ने के लिए मजबूर किया गया और इस्लाम अपनाने के लिए कहा गया। जब किरणदीप सिंह ने इसका विरोध किया तो अनवर और उसके साथियों ने उसे बेरहमी से पीटा। पीड़ित किरणदीप सिंह एक कार शोरूम में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है।

जाँच पूरी कर पुलिस ने आठ लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। आरोपित अनवर ख़ान और उसके सात अज्ञात साथी अभी फ़रार हैं। शिक़ायत में सिंह ने बताया है कि क़रीब एक साल पहले वह बीमार हो गया था। पड़ोस में रहने वाले अनवर ख़ान ने कहा कि किसी ने उसके ऊपर किसी ने काला जादू किया है। इलाज के लिए अनवर उसे कई मजहबी स्थलों पर ले गया और वहाँ सिंह को कलमा पढ़ना सिखाया। इस दौरान सिंह के स्वास्थ्य में थोड़ा-बहुत सुधार भी हुआ।

इसके बाद, मुख्य आरोपित अनवर ने पीड़ित को आश्वासन दिया कि वह क़ुरान पढ़ने के बाद पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। किरणदीप ने कहा कि उसने अनवर की हर बात मानी। इसके बाद, अनवर ने उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया, लेकिन सिंह ने इस्लाम धर्म क़बूल करने से इनकार कर दिया। इस पर अनवर ने कहा कि वह (सिंह) पहले से ही आधा तो

बन गया हैं, इसलिए अब उसे इस्लाम को पूरी तरह से गले लगा लेना चाहिए, लेकिन किरणदीप राजी नहीं हुआ।

ख़बर के अनुसार, क़रीब पाँच महीनों तक अनवर और उसके साथी, सिंह पर इस्लाम क़बूल करने का दबाव बनाते रहे। लेकिन, किरणदीप सिंह द्वारा बार-बार मना करने पर अनवर और उसके साथियों ने रविवार (6 अक्टूबर) को सिंह की पिटाई कर दी।

26/11 जैसे हमले की फिराक में आतंकी: पठानकोट में जवानों का जमावड़ा, बड़े सर्च ऑपेरशन की तैयारी

पंजाब के गुरदासपुर, बटाला और पठानकोट में आतंकी हमले का हाई अलर्ट जारी किया गया है। इस अलर्ट के मद्देनजर पठानकोट के सभी विभागों को इमरजेंसी के दौरान तैयार रहने का आदेश दिया गया है। पूरे क्षेत्र में नाकाबंदी कर दी गई है और अस्‍पतालों में बेड खाली कराकर उन्‍हें रिजर्व किया गया है। बसें भी खाली कराकर तैयार रखी गई हैं। पुलिस व सुरक्षा बलों के जवान सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों के साथ प्रशासन और पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया है। जिला प्रशासन ने शुक्रवार को सभी विभागों को अपनी इमरजेंसी सेवाओं को अलर्ट पर रखने को कहा है।

खबर के मुताबिक, सर्च ऑपरेशन 13 अक्टूबर तक चलेगा। ऑपरेशन में सेवा से अलग हो चुके गनमैन को भी शामिल किया गया है। अलर्ट के मद्देनजर गुरदासपुर, बटाला और पठानकोट तीनों इलाकों में आला पुलिस अधिकारियों की भी तैनाती की गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पठानकोट में 45 एसपी रैंक के अफसर, गुरदासपुर में 33 और बटाला के 22 एसपी तैनात किए हैं। इसके अलावा बटाला में 50, गुरदासपुर में 92 और पठानकोट में 130 डीएसपी भी अभियान में लगाए गए हैं।

वहीं, बटाला में 108 और गुरदासपुर व पठानकोट में 125 इंस्पेक्टर और तीनों हलकों में कुल 197 सब इंस्पेक्टर भी काम कर रहे हैं। इस तरह गुरदासपुर में 360, पठानकोट में 379 और बटाला में 267 अफसर तैनात हैं। इन अधिकारियों को 4,000 से अधिक पुलिसकर्मी भी मुहैया कराए गए हैं। प्रशासन ने इस संबंध में लेटर भी सर्कुलेट किया है। इसके साथ-साथ इंटरस्टेट नाकों में और संवेदनशील चौराहों पर पुलिस फोर्स के साथ बख्तरबंद गाड़ियाँ भी तैनात की गईं हैं।

बता दें कि हाल ही में पंजाब में हाई अलर्ट जारी हुआ था। पिछले महीने पंजाब के तरनतारन में पाकिस्‍तानी ड्रोन देखे जाने के मामले में दर्जन भर खालिस्तानी आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ में सनसनीखेज खुलासा हुआ कि आईएसआई और खालिस्तानी आतंकी पंजाब में 26/11 जैसी बड़ी आतंकवादी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं।

कोमोरोस ने उपराष्ट्रपति नायडू को दिया सर्वोच्च सम्मान ‘दि ऑर्डर ऑफ़ ग्रीन क्रेसेंट’

भारत के उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू इन दिनों अफ्रीका महाद्वीप के एक देश कोमोरोस की यात्रा पर हैं। यहाँ आज (11 अक्टूबर, 2019) उन्हें राजधानी मोरोनि में कोमोरोस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘दि ऑर्डर ऑफ़ ग्रीन क्रेसेंट’ से सम्मानित किया गया। करीब 98 फीसदी सुन्नी समुदाय की आबादी वाले इस देश में रहने वाले 2 % ईसाई वर्ग अल्पसंख्यक हैं।

हर देश में सामान्यतः एक सर्वोच्च नागरिक सम्मान का प्रावधान होता है जैसे हिंदुस्तान में ‘भारत रत्न’ ठीक वैसे ही कोमोरोस में “दि ऑर्डर ऑफ़ ग्रीन क्रीसेंट” नामक सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया जाता है। दरअसल यह सम्मान एक तुर्किश संस्था के ज़रिए संचालित किया जाता था, जिसकी शुरुआत 1920 में हुई थी। नशामुक्ति और ड्रग्स पर प्रतिबन्ध इस संस्था का उद्देश्य है।

दुनिया भर में भारतीय राष्ट्राध्यक्षों का सम्मान इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि कूटनीति के स्तर पर यह बताता है कि अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत का स्थान कितना मज़बूत है। दरअसल सरकार पर कश्मीर से अनुच्छेद 370 के फैसले को लेकर कई लोग यह चिंता जता रहे थे कि पाकिस्तान इस्लामिक देशों की ओर मदद का कटोरा लेकर भाग सकता है लेकिन पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय नीति ने पहले ही खाड़ी देशों में स्थित अधिकतर इस्लामिक देशों और दुनिया के अन्य भू-भाग में बसे इस्लामिक देशों को न सिर्फ भारत के समर्थन में लाकर खड़ा कर दिया बल्कि देश के उच्च पदों पर बैठे लोगों को भी विशेष सम्मान दिया। यही वजह है कभी पीएम मोदी तो कभी देश के उपराष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय जगत में ख़ासा सम्मान मिल रहा है।

बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है कि भारत के उच्च पद पर आसीन किसी व्यक्ति को किसी ऐसे देश में सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा हो जहाँ इस्लाम बहुल आबादी निवास करती है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी संयुक्त अरब अमीरात का सर्वोच्च सम्मान ‘अवार्ड ऑफ ज़ायेद’ मिल चुका है। भारत को विश्वस्तर पर सम्मानित करने और पीएम मोदी को अपने सम्मान से नवाजने की लम्बी फेहरिस्त में कई इस्लामिक देश शामिल हैं, इस लिस्ट में में बहरीन, अफ़ग़ानिस्तान, फलस्तीन जैसे देश प्रमुख हैं।

शशि थरूर ने विदेश मामलों की स्टैंडिंग कमिटी से किया किनारा, व्यस्तता है कारण या ‘demotion’?

पूर्व विदेश राज्य मंत्री और संयुक्त राष्ट्र राजनयिक रह चुके कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने विदेश मामलों की संसदीय प्रवर समिति (स्टैंडिंग कमिटी) से अपना नाम वापस ले लिया है। इसका कारण उन्होंने संसद की ही दूसरी, सूचना प्रौद्योगिकी समिति के कार्यों में व्यस्तता को कारण बताया है। पिछली लोकसभा में वे इस समिति के अध्यक्ष थे।

संसदीय परम्परा का हवाला

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक थरूर ने अपनी नियुक्ति के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को धन्यवाद देने के साथ ही कार्यभार संभालने से इंकार कर दिया है। बकौल न्यूज़ 18, शशि थरूर ने कहा कि वे उस पैनल के महज़ एक सदस्य नहीं बनना चाहते, जिसकी वे अध्यक्षता कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने यह दावा भी किया कि सरकार ने समिति का अध्यक्ष विपक्ष से नियुक्त किए जाने की संसदीय परम्परा का अंत कर दिया है।

उन्होंने इसके अलावा संसदीय सूचना प्रौद्योगिकी समिति के मामलों में अपनी व्यस्तता का भी हवाला दिया। केरल के तिरुवनन्तपुरम से लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीतने वाले थरूर इसके अध्यक्ष गत 14 सितम्बर को नियुक्त हुए हैं।

कॉन्ग्रेस की गुज़ारिश पर ही हुई थी नियुक्ति

यहाँ अजीब बात यह है कि शशि थरूर का समिति से इस्तीफ़ा उनकी नियुक्ति के दो हफ़्ते से ज़्यादा के बाद आ रहा है, जबकि समिति में उनकी नियुक्ति के समय ही यह बात साफ़ हो गई थी कि उन्हें इस बार अध्यक्ष पद नहीं मिलेगा। लोकसभा चुनावों के बाद समितियों के पुनर्गठन में थरूर को शुरू में इस समिति में शामिल ही नहीं किया गया था। हिंदुस्तान टाइम्स में 27 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने बिड़ला से पहले अनौपचारिक मुलाकात कर उन्हें मनाया, उसके बाद कॉन्ग्रेस की ओर से थरूर का नाम शामिल किए जाने का औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया। उस समय कॉन्ग्रेस की ओर से तर्क दिया गया कि चूँकि पार्टी अध्यक्षा सोनिया गाँधी ने किसी समिति की सदस्यता नहीं ली है, इसलिए पार्टी के कोटे में एक पद अभी खाली है, जिस पर थरूर की नियुक्ति हो सकती है।

इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय से जारी बुलेटिन में बकायदा उल्लिखित था, “स्पीकर ने दीपक बैज का नामांकन बदल कर विदेश मामलों की समिति से रसायन और उर्वरक समिति में कर दिया है, और डॉ. शशि थरूर को विदेश मामलों की समिति में नियुक्त किया है।” ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि यदि जिस समिति की उन्होंने अध्यक्षता की, उसका सदस्य बनना थरूर की गरिमा के परे था तो कॉन्ग्रेस ने उन्हें शामिल कराने के लिए इतनी जद्दोजहद क्यों की। और अगर यह मनोभाव अगर बाद में भी उत्पन्न हुआ तो इसमें ढाई सप्ताह कैसे लग गए?

नेहरू खानदान, अवैध संबंध और शादियों को लेकर पायल रोहतगी ने फैलाई अपुष्ट जानकारी, FIR दर्ज

अभिनेत्री पायल रोहतगी को नेहरू खानदान पर बोलने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर बेबाकी से राजनीति और वर्तमान में चल रहे घटनाक्रमों को लेकर मुखर रूप से अपनी राय रखने वाली पायल ने कुछ हफ्ते पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जवाहरलाल नेहरू के पिता पंडित मोतीलाल नेहरू को लेकर एक एक विवादित ट्वीट किया था। इसी ट्वीट को लेकर राजस्थान यूथ कॉन्ग्रेस के नेता चर्मेश शर्मा की तहरीर पर पायल रोहतगी के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66 और 67 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था।

बता दें कि जिस ट्विटर हैंडल के पोस्ट पर विवाद हुआ, उससे पायल अक्सर समसामयिक राजनीतिक घटनाक्रमों पर फोटो, विडियो तथा अपने विचार ट्वीट करती रहती हैं। उनके इस ट्विटर हैंडल का नाम “Payal Rohtagi & Team- Bhagwan Ram Bhakts” है और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पायल इन दिनों सोशल मीडिया पर ख़ासा एक्टिव हैं।

इस विवादित ट्वीट के साथ ही पायल का एक विडियो भी खूब वायरल हुआ, जिसमें वह बता रही हैं कि मोतीलाल नेहरू की पाँच पत्नियाँ थीं। उन्होंने यह दावा प्रधानमंत्री नेहरू के निजी सचिव रहे एमओ मथाई की जीवनी का हवाला देते हुए किया। पायल के मुताबिक यह जीवनी एडिना रामकृष्ण ने लिखी है और उन्होंने इसमें कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। वीडियो में पायल ने बताया कि स्वरुप रानी नेहरू उनकी लीगल वाईफ यानी वैध बीवी थीं मगर इसके अलावा उनकी चार और बीवियाँ भी थीं जिसमें थुस्सू रहमानबाई, श्रीमती मंजरी, एक ईरानी महिला और एक नौकरानी शामिल थीं।

मोतीलाल नेहरू पर बोलीं पायल रोहतगी

इस विडियो में पायल ने एडविना रामकृष्ण की किताब का हवाला देते हुए बताया यह भी बताया कि पकिस्तान बनाने वाले मुहम्मद अली जिन्ना मोतीलाल नेहरू और इरानी महिला की संतान थे वहीं जवाहरलाल नेहरू, मोतीलाल की पत्नी रहमानबाई और उनके पूर्व पति मोबारक अली की संतान थे। पायल ने यह भी बताया कि शेख अब्दुल्ला मोतीलाल नेहरू और उनकी मुस्लिम नौकरानी की संतान थे।

बता दें कि जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल को लेकर उनके निजी सचिव रहे एमओ मथाई ने “माय डेज विथ नेहरू” और “रेमिनिसेंसेज़ ऑफ़ नेहरू ऐज” नामक दो किताबें लिखी हैं। पायल ने एडिन रामकृष्ण द्वारा लिखित एमओ मथाई की जीवनी का ज़िक्र किया है मगर ऐसी किसी भी किताब का कोई ज़िक्र किसी उपलब्ध रिकॉर्ड में नहीं मिलता।

हालांकि नेहरू वंश के अवैध संबंधों को लेकर कही गई यह बातें नई नहीं हैं मगर इनके आधार की पुष्टि नहीं की जा सकती। इन्हें फैलाने में कई ऐसी वेबसाइट्स भी शामिल हैं, जो फेक न्यूज़ को बढ़ाती हैं। मगर असलियत में ऐसी कोई किताब या दस्तावेज़ नहीं है, जिससे इस तरह के दावों की पुष्टि की जा सके।