Home Blog Page 5762

अलवर रेप और हत्‍या मामला: POCSO कोर्ट ने राजकुमार को दी सजा-ए-मौत

अलवर में नाबालिक की रेप और हत्‍या के मामले में पॉक्‍सो कोर्ट ने राजकुमार उर्फ धर्मेंद्र को दोषी करार देते हुए फाँसी की सजा सुनाई है। चार साल पहले 2015 में पाँच वर्षीय एक बच्‍ची से दुष्‍कर्म किया गया था और फिर पत्थर से कूचकर उसकी हत्‍या कर दी गई थी। यह बर्बर घटना राजस्थान के अलवर के बहरोड़ के रिवाली का है।

बता दें कि राजस्थान के बहरोड़ तहसील जिला अलवर के रेवाली गाँव में 1 फरवरी 2015 को राजकुमार द्वारा पड़ोस में रहने वाली 5 वर्षीय बालिका को टॉफी देने के बहाने पास के खंडहर नुमा मकान में ले जाकर दुष्कर्म किया गया। दुष्कर्म के बाद भारी पत्थर से बालिका के सिर में मारकर हत्या कर दी गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह भी आया था कि तेज हथियार से बालिका के प्राइवेट पार्ट को काटकर अलग कर दिया गया था।

घटना में पुलिस थाना बहरोड द्वारा अभियुक्त राजकुमार के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 365, 201, 376 ,302 एवं POCSO अधिनियम की धारा 4/8 में आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस पाशविक दुष्कर्म व जघन्य हत्याकांड के मामले में विशेष न्यायालय अधिनियम अलवर के न्यायाधीश अजय शर्मा ने अपने निर्णय में उक्त कृत्य को पाशविक कृत्य करार देते हुए अपने फैसले में जज ने कहा, “अभियुक्त द्वारा किया गया अपराध अत्यधिक क्रूर और समाज को झकझोर देने वाला है। अपराध और इसको करने के तरीके ने समाज में अत्यधिक रोष फैलाया। इस अपराध को करने का तरीका अत्यंत बर्बर और क्रूरतम था।

केंद्र में मोदी और बंगाल में 18 सांसद झुनझुना बजाने के लिए नहीं… मरते कार्यकर्ताओं को चाहिए न्याय

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसाओं का दौर थमता नज़र नहीं आ रहा है। पंचायत चुनाव के दौरान बड़े स्तर पर हिंसा हुई थी, हालिया लोकसभा चुनाव के दौरान भी हिंसा की वारदातें बढ़ती चली गईं। जैसा कि अब सर्वविदित हो चुका है, इस हिंसा में मरने वाले अधिकतर भाजपा कार्यकर्ता हैं। अधिकतर मामलों में यह एकपक्षीय हिंसा रही है, जहाँ तृणमूल के कार्यकर्ताओं ने भाजपा वालों को मार डाला। कहीं ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए किसी को पेड़ से लटका दिया गया तो कहीं अपने बूथ पर भाजपा को बढ़त दिलाने के लिए कार्य करने का परिणाम किसी भाजपा कार्यकर्ता को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। अब सवाल यह उठता है, हिंसा का यह दौर कब थमेगा?

ममता बनर्जी की पार्टी को इन हिंसक वारदातों के लिए सजा मिली और राज्य में पार्टी का एकछत्र वर्चस्व था, वहाँ भाजपा को 18 सीटें मिलीं। लोकसभा चुनाव में तृणमूल और भाजपा- दोनों का ही वोट शेयर प्रतिशत लगभग सामान रहा। दोनों ही दलों को 40.3% मत मिले। हालाँकि, तृणमूल कॉन्ग्रेस 22 सीटें जीत कर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी तो अभी भी है, लेकिन अब उसके प्रदर्शन में वो बात नहीं रही, जो 2019 लोकसभा चुनाव से पहले थी। भाजपा को जितनी सीटें मिलीं, उतने की उम्मीद शायद पार्टी को भी न रही हों। कैलाश विजयवर्गीय, दिलीप घोष और मुकुल रॉय सहित अन्य नेताओं की मेहनत रंग लाई और भाजपा ने पश्चिम बंगाल में अपना पाँव ऐसा जमाया कि तृणमूल के पाँव उखड़ने लगे।

यह कैसे संभव हुआ? यह किसने किया? यह किसके भरोसे के कारण साकार हो सका? इसके पीछे कौन लोग हैं? मोदी-शाह का चेहरा भले ही वोट आकर्षित करने के मामले में आज टॉप पर हो, लेकिन बंगाल में भाजपा के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय जाता है उन कार्यकर्ताओं को, जिन्होंने अपनी जान हथेली पर रख कर भाजपा के लिए काम किया। जहाँ किसी कार्यक्रम में ‘जय श्री राम’ का नारा लगा देने भर से तृणमूल के गुंडे नाराज़ होकर किसी की हत्या कर देते हों, वहाँ किन परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं ने काम किया होगा, यह सोचने वाली बात है। राष्ट्रीय मीडिया बंगाल में उस तरह से सक्रिय नहीं है, जितना कि हिंदी बेल्ट में। कई ख़बरें तो हम तक पहुँचती ही नहीं।

जब अमित शाह जैसे देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक की रैली में आगजनी की जा सकती है, तो सोचिए कि वहाँ एक सामान्य नेता व कार्यकर्ता के साथ क्या कुछ किया जाता होगा। इन सबके बीच अगर किसी कार्यकर्ता की मृत्यु हो जाती है, उस पार्टी का फ़र्ज़ बनता है कि उस कार्यकर्ता के परिवार की देखभाल करे, उसके बच्चों की अच्छी पढ़ाई सुनिश्चित करे व परिजनों में से किसी के लिए नौकरी की व्यवस्था करे। अगर कोई दल ऐसा करने में विफल रहता है, इसका अर्थ है कि वह अपने कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं करता। जैसा कि हमनें देखा, अमेठी में एक कार्यकर्ता की मृत्यु हो जाने के बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी कंधा देने पहुँची थी। इस बात की सबने तारीफ भी की।

लेकिन, भाजपा के लिए समय आ गया है कि पार्टी अब प्रतीकात्मक कार्यों से आगे बढ़े। हाँ, अगर स्मृति ईरानी जैसे क़द की नेत्री एक साधारण कार्यकर्ता के शव को कंधा देने पहुँचती हैं तो अन्य कार्यकर्ताओं में यह भरोसा जगता है कि पार्टी का शीर्ष आलाकमान उनके लिए सोच रहा है और उनके साथ खड़ा है, लेकिन अगर उसी पार्टी की केंद्र और राज्य में सरकार है, तो यह फ़र्ज़ भी उसी दल का है कि जल्द से जल्द न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाए। हाँ, अधिकतर मुख्य राजनीतिक दलों के पास रुपयों की कमी नहीं है, इसीलिए किसी कार्यकर्ता की हिंसा के दौरान हुई मृत्यु के बाद परिजनों के सुख-दुःख का ख्याल रखने पर भी उसी दल की जवाबदेही बनती है, जिसके लिए उसनें जान दी।

हो सकता है कि 2014 से पहले बंगाल या केरल जैसे जगहों पर भाजपा असहाय रही हो। हो सकता है कि पार्टी नेताओं की बातें उस समय की सरकारें अनसुनी कर देती हों। लेकिन, अब जब जनता ने उसे विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल का दर्जा दिला दिया है, यह भाजपा का कर्तव्य है कि वह इस बात को सुनिश्चित करे कि कार्यकर्ताओं की जानें नहीं जाएँ। आज देश में पूर्ण बहुमत की सरकार है, अधिकतर राज्यों में राजग की सरकारें चल रही हैं। भाजपा अब बेचारी नहीं है और न ही उसे ऐसा दिखावा करना चाहिए। भाजपा के पास अब कोई वजह नहीं है, कोई अधिकार नहीं है, कि पार्टी अब बेचारी होने का दिखावा करे।

अब एक्शन लेने का समय है। पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा हो चुका है और नरेन्द्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने हैं, वो भी पिछली बार से भी अधिक वोट शेयर और सीटों के साथ। यह बहुमत झुनझुना बजाने के लिए नहीं मिला है। विकास के मुद्दों पर अच्छा कार्य कर रही मोदी सरकार को जनता ने स्वीकार किया है तो भाजपा के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं ने भी दोगुनी मेहनत की है। यह सब सिर्फ़ इसीलिए, क्योंकि उन्हें भाजपा पर भरोसा है। यह भरोसा टूट जाएगा, अगर कार्यकर्ता मर रहे हों और पार्टी अध्यक्ष सोते रहें। आज अमित शाह गृह मंत्री हैं, मोदी के बाद देश में शायद ही कोई उनसे ज़्यादा ताक़तवर नेता हो, अब एक्शन लेने का समय है, अपराधियों को जेल पहुँचाने का समय है।

क्या गृह मंत्रालय एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन कर बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसक वारदातों की तेज़ी से एक समय-सीमा के भीतर जाँच करा कर दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं पहुँचा सकता? क्या भाजपा जैसी अमीर पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के केस लड़ने के लिए अदालत में अच्छे और कुशल वकील नहीं खड़ा कर सकती? क्या मोदी सरकार बड़ी संख्या में अतिरिक्त अर्धसैनिक बल भेज कर स्थिति को नियंत्रण में नहीं कर सकती? अगर राजनीतिक हिंसा की वारदातें हो रही हैं, लगातार हो रही हैं, तमाम विरोधों के बावजूद बार-बार हो रही हैं, और इसके रुकने के दूर-दूर तक कोई आसार नज़र नहीं आ रहे हैं, तो इसमें ग़लती भाजपा की भी है, केंद्र सरकार की भी है।

आज बंगाल में तृणमूल के लोग भाजपा ज्वाइन कर रहे हैं। एक-एक कर कई नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं। क्या भारतीय जनता पार्टी इस बात को सुनिश्चित कर रही है कि पार्टी ज्वाइन करने वाले ऐसे तृणमूल नेताओं पर भाजपा कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ हिंसा करने के कोई आरोप नहीं हैं? या फिर हर उस नेता का पार्टी में स्वागत किया जा रहा है, जो तृणमूल छोड़ कर आ रहा हो? कार्यकर्ताओं ने ऐसी बातें उठाई हैं, जहाँ भाजपा में शामिल हो रहे सैकड़ों काउंसलर, नेता, विधायक और कार्यकर्ताओं में से कई ऐसे भी शामिल हैं, जिन पर भाजपा कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ हिंसा के आरोप रहे हैं। भाजपा में आकर वे सारे पवित्र नहीं हो सकते। अगर इसमें लेशमात्र भी सच्चाई है तो यह कार्यकर्ताओं के साथ धोखा है। भाजपा में शामिल होने वाले एक-एक तृणमूल नेताओं का बैकग्राउंड चेक किया जाए।

अगर गृह मंत्रालय कोई उच्च स्तरीय कमेटी बना कर राजनीतिक हिंसक वारदातों की जाँच नहीं करवा रहा है, तो यह न सिर्फ़ भाजपा के मतदाताओं बल्कि जनता के लिए धोखा है। अगर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व बिना देखे-समझे किसी भी तृणमूल नेता का पार्टी में स्वागत कर रहा है, तो यह हिंसक परिस्थितियों में पार्टी के लिए खून बहाने वाले कार्यकर्ताओं के लिए धोखा है। अगर भाजपा मारे गए व घायल हुए कार्यकर्ताओं के लिए अच्छे वकील नहीं खड़ा कर रही है, तो यह पार्टी के कार्यकर्ताओं व उनके परिजनों के साथ धोखा है। अगर मृत कार्यकर्ताओं के परिजनों व बच्चों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है और कुछ प्रतीकात्मक चीजों (जैसे शपथग्रहण समारोह में बुलाना) से काम चलाया जा रहा है, तो यह उन हजारों कार्यकर्ताओं के लिए धोखा है, जो जान हथेली पर लिए घूमते हैं।

बंगाल में जनता ने अपना काम कर दिया है, कार्यकर्ताओं ने अपना काम कर दिया है। 18 सांसदों के साथ भाजपा को एक बड़ी ताक़त जनता के विश्वास और कार्यकर्ताओं की मेहनत ने बनाया है, अब भाजपा को अपना काम करना है। भाजपा को यह सुनिश्चित करना है कि और नए कार्यकर्ताओं की जानें जाएँ, जिसे करने में वह विफल रही है। भाजपा को यह सुनिश्चित करना है कि जो भी कार्यकर्ता मारे गए हैं, उन्हें न्याय मिले, दोषियों को सज़ा मिले, जो वह करती नहीं दिख रही है। अगर भाजपा की राज्य या केंद्र में सरकार बनती है, तो यह उन कार्यकर्ताओं के लिए न्याय नहीं है। यह भाजपा की सफलता है, जिसके लिए उन कार्यकर्ताओं ने मेहनत की है। अब भाजपा की बारी है- उन कार्यकर्ताओं के लिए मेहनत करने की।

अगर 18 सांसदों वाली बंगाल भाजपा को एक अलग दल के रूप में देखें, तो यह लोकसभा सीटों के मामले में देश की शीर्ष 6 पार्टियों में आती है। यह ऐसा ही है, जैसे तमिलनाडु में डीएमके कार्यकर्ताओं की लगातार हत्या होती रहे और पार्टी कुछ न कर पाए। और, भाजपा की तो केंद्र में सरकार है। वो भी पिछले 5 वर्षों से। अगर न्याय दिलाने का समय अब नहीं है तो कब आएगा? क्या कुछ और जानें जाने के बाद? क्या भाजपा को इस बात का डर है कि अगर बंगाल में राष्ट्रपति शासन लग भी जाता है तो ममता बनर्जी अपने पक्ष में एक सहानुभूति वाली लहर तैयार करने में सफल हो जाएगी? क्या भाजपा को डर है कि ममता सरकार के ख़िलाफ़ केंद्र द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई से वह जनता के बीच सहानुभूति का पात्र बनने की कोशिश करेगी?

अगर यह डर एक वास्तविकता है, तो भी पहली और सर्वप्रथम प्राथमिकता मृत कार्यकर्ताओं के परिजनों को न्याय दिलाना और जो जीवित हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना होनी चाहिए। ममता सहानुभूति लहर पैदा करे या न करे, यह बाद की बात है। अभी जो हो रहा है, उसकी रोकथाम करना भाजपा का कर्त्तव्य है, केंद्र सरकार की प्राथमिकता भी यही होनी चाहिए। बहते खून को नज़रअंदाज़ कर रोज़ 40 किलोमीटर सड़कें बन रही हैं, तो इसे विकास कहना ग़लत है। रिकॉर्ड किलोमीटर में सड़कें बनीं हैं लेकिन उन सड़कों पर भाजपा कार्यकर्ताओं का खून बह रहा है- इसे दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी कैसे नज़रंदाज़ कर सकती है?

अगर रिकॉर्ड संख्या में गैस सिलेंडर बाँटे गए हैं, लेकिन कार्यकर्ता आग में जल रहे हैं, ऐसे विकास से भी कोई फायदा नहीं। विकास होता रहेगा, यह मोदी सरकार के अंतर्गत होता रहा है, लेकिन खून की कीमत पर कुछ भी जायज़ नहीं। सत्ता आएगी-जाएगी लेकिन सत्ता दिलाने वाले कार्यकर्ता नहीं रहेंगे तो भाजपा का भी वही हाल होगा, जो आज कॉन्ग्रेस का है। भाजपा देश की चुनिन्दा बड़ी पार्टियों में से एक है, जिसमें एक परिवार का राज नहीं चलता, पूर्ण लोकतान्त्रिक तरीके से कार्य होते हैं। ऐसे में, राजनीतिक हिंसक वारदातों के मामले में प्राथमिकताएँ तय करने का समय आ गया है। इसमें से बहुत समय अब बीत चुका है, अपितु अब हर एक सेकंड का विलम्ब अक्षम्य है। यह खून बहाना कैसे रोकना है, इस बारे में भाजपा और उसके नेता बेहतर समझते हैं। सवाल है, एक्शन का समय कब आएगा?

बेबस महिलाओं को नग्न करके नचाया मजहब विशेष वालों ने, The Hindu-Wire की पत्रकार ने लिखा, ‘हिंदुत्व कल्चर’

हिन्दुओं से नफरत पत्रकारिता के समुदाय विशेष के दिल में इतना अंदर तक घर कर गई है कि हर नकारात्मक चीज़ में इन्हें ‘हिन्दू’ एंगल देखने की बीमारी हो गई है। और जहाँ ‘हिन्दू-एंगल’ नहीं दिख रहा है, वहाँ हर नकारात्मक चीज़ को हिन्दू के ठप्पे के साथ दिखाने की छटपटाहट दिख रही है। The Wire और The Hindu से जुड़ी रहीं ‘वरिष्ठ पत्रकार’ नीना व्यास ने हाल ही में असम के मजहब विशेष वालों द्वारा ईद के मौके पर एक डांस ग्रुप की लड़कियों को नग्न कर नचाने की खबर को ‘हिंदुत्व कल्चर’ के नाम से ‘बेचने’ की कोशिश की।

जब खबर ‘बिकी’ नहीं और गालियाँ बेभाव में पड़नी शुरू हुईं तो सहारा लिया आरएसएस में भी हाशिए पर गई एक पुरानी मान्यता का, कि ‘हिंदुत्व मज़हब नहीं, भौगोलिक पहचान है, और इसलिए हिंदुस्तान का हर निवासी एक तरह से हिन्दू है (चूँकि हिंदुत्व शब्द का तात्पर्य उपासना पद्धति से नहीं, भौगोलिक पहचान से है)।’

हिन्दू घृणा और बेईमानी का अद्भुत घालमेल

ईद के मौके पर असम में कुछ लोगों ने एक डांसर ग्रुप को सामान्य डांस के लिए किराए पर बुलवाया, लेकिन बाद में हवस की भूखी 700-800 लोगों की भीड़ के हवाले कर दिया। आयोजकों ने भीड़ को नग्न नृत्य करने वाली डांसर्स का ही वादा किया था, और इन सामान्य डांसर्स को उस भीड़ के हवाले कर दिया। लड़कियाँ किसी तरह जान बचाकर भाग पाईं।

बाद में जब खबर सोशल मीडिया पर वायरल होनी शुरू हुई तो नीना व्यास ने अपने प्रिय ‘समुदाय विशेष’ के कृत्य पर पर्दा डालने और हिन्दुओं पर कीचड़ उछालने के लिए ट्वीट किया:

इसके बाद जब हिन्दुओं ने ट्विटर पर उनकी भ्रामक/फेक न्यूज़ की ओर ध्यान दिलाना शुरू किया तो गलती मानने की बजाय वह कुतर्क पर उतर आईं। RSS में एक समय प्रचलित लेकिन फ़िलहाल ठंढे बस्ते में पड़ी ‘सभी हिंदुस्तानी हिन्दू हैं’ थ्योरी की आड़ में हिन्दूफ़ोबिया को ढकने की कोशिश की।

लेकिन उनकी सच्चाई सामने आते देर नहीं लगी। लेखक अरविंदन नीलकंदन ने उनके बारे में ट्वीट किया:

पत्रकार शेफ़ाली वैद्य ने भी उनके हिन्दूफ़ोबिया पर से पर्दा खींच दिया:

जैसा कि इस ट्वीट की दूसरी तस्वीर से साफ है, नीना व्यास का मकसद संघ परिवार या उसकी विचारधारा से विरोध जताना नहीं, हिन्दुओं पर कीचड़ उछालना था। उनके हिन्दूफ़ोबिया का एक और उदाहरण: जब ऑपइंडिया (अंग्रेज़ी) की सम्पादिका नूपुर शर्मा और स्वराज्य संवाददाता स्वाति गोयल-शर्मा ने हाल ही में प्रकाश में आए कुछ भयावह आपराधिक मामलों (मसलन तीन साल की बच्ची की हत्या, मासूम से बलात्कार, मेरठ में लस्सी के पैसे माँगने पर विक्रेता की मजहबी भीड़ द्वारा हत्या) पर चिंता प्रकट की, तो नीना व्यास ने उसे तथाकथित “गौरक्षक/हिंदूवादी/शाकाहारवादी हिंसा” से जोड़ कर उपरोक्त अपराधों को उचित ठहराने की कोशिश की:

यानी, यह माना चाहिए कि नीना व्यास जी के विचार में अगर कुछ गौरक्षक अगर कानून अपने हाथ में लेते हैं (जिसके कारण आप विस्तार में यहाँ पढ़ सकते हैं), तो उससे किसी दुकानदार की लस्सी के पैसे माँगने पर “योगी-मोदी से हम नहीं डरते” दहाड़ कर हत्या कर देना, किसी मासूम बच्ची को मार डालना या ऐसी ही किसी भी घटना को अंजाम देने का औचित्य बन सकता है?

दरअसल यह पत्रकारिता का समुदाय विशेष केवल और केवल हिन्दुओं से घृणा से ही प्रेरित है। इनके लिए हर घटना, हर अवसर केवल एक ही ‘एंगल’ लेकर आता है- कैसे हिन्दुओं से घृणा की जाए, कैसे उन्हें नीचा दिखाया जाए, उनके धर्म को भी अन्य कुछ वर्चस्ववादी और विध्वंसक मज़हबी विचारधाराओं के स्तर पर घसीट लाया जाए, और इसके लिए वे झूठ का भी सहारा लेने से नहीं हिचकिचाते।

यही झूठ कभी अक्षय पात्र के बारे में होता है, कभी ईशा फाउंडेशन के सरकारी ज़मीन हड़पने के बारे में, कभी पुरी की रथयात्रा के बारे में; कभी ईसाईयों द्वारा हिन्दुओं की मॉब-लिंचिंग पर भी हिन्दुओं के ही त्यौहार बंद करने को ‘समाधान’ के रूप में सुझाया जाता है, तो कभी नीना व्यास के इस प्रयास की तरह दूसरों की कालिख से हिन्दुओं के चेहरे को मैला करने की कोशिश की जाती है। तरीकों का कोई अंत नहीं है, लेकिन ऐसे विभिन्न प्रयासों के पीछे प्रेरणा एक ही होती है- हिन्दूफ़ोबिया

Viral: माँ की दूसरी शादी पर बेटे ने दी भावुक बधाई, केरल के गोकुल की मार्मिक कहानी

माँ और बेटे का रिश्ता बेहद ही ख़ास होता है, जिसे शब्दों में पिरो पाना शायद ही मुमकिन हो। एक माँ के लिए बेटा जितना अनमोल होता है, बेटे के लिए माँ भी उतनी ही ख़ास होती है। ऐसे ही अटूट रिश्ते की मिसाल क़ायम की है केरल के माँ और बेटे ने। बेटे ने अपनी माँ के दूसरे विवाह के अवसर पर उनके नाम फेसबुक पर ऐसा भावुक पत्र लिखा जो हर किसी के लिए चर्चा का विषय बन गया।

दरअसल, केरल के गोकुल श्रीधर ने अपनी माँ के दूसरे विवाह के अवसर पर मलयालम भाषा में एक भावुक पोस्ट लिखी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई। अपनी पोस्ट में गोकुल ने लिखा कि उनकी माँ ने अपनी पहली शादी में बहुत दु:ख झेले। उन्हें कई बार शारीरिक हिंसाओं का सामना करना पड़ा और यह सब उन्होंने अपने बेटे गोकुल के लिए सहा। ख़बर के अनुसार, गोकुल श्रीधर ने अपनी पोस्ट में लिखा, “ये मेरी माँ का विवाह है। मैंने बहुत सोचा कि क्या इस तरह के नोट को लिखना सही होगा! आख़िरकार ये ऐसा समय है जब बहुत सारे लोग अभी भी दूसरी शादी को स्वीकार नहीं कर सकते हैं। जिन लोगों की नज़र में संदेह हो, जो निर्दयी हों और घृणा की नज़र से देखते हैं, कृपया यहाँ नज़र न डालें। अगर आप देखेंगे भी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”

गोकुल श्रीधर का कहना है कि वो इस नोट को शेयर करने से पहले काफ़ी झिझक रहे थे। उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा लगता था कि मेरे इस विचार को समाज के एक तबके में सही तरीके से नहीं लिया जाएगा।” उन्होंने कहा कि बहुत जल्द उन्हें इस बात का एहसास हो गया कि उन्हें अपनी भावनाएँ किसी से छिपाने की आवश्यकता नहीं है, इसके बाद उन्होंने फ़ैसला लिया कि वो इस ख़ुशी (माँ की दूसरी शादी) को सबसे शेयर करेंगे।

इसके अलावा गोकुल ने लिखा, “एक औरत जिसने मेरे लिए अपने जीवन की क़ुर्बानी दे दी। उन्होंने अपनी पहली शादी में बहुत कुछ झेला है। पिटने के बाद जब उनके माथे से ख़ून टपकने लगता था, तो मैं अक्सर उनसे पूछता था कि वह इसे क्यों झेल रही हैं। मुझे याद है कि उन्होंने मुझे बताया था कि वह मेरे लिए दु:ख सहने को तैयार हैं क्योंकि वह मेरे लिए जी रही थीं। उस दिन, जब मैंने उनके साथ घर छोड़ा, मैंने इस पल के बारे में फ़ैसला कर लिया था। मेरी माँ ने अपनी पूरी जवानी मेरे लिए न्योछावर कर दी, अब उनके सपने मेरे हैं और उन्हें पूरा करने का अवसर मेरा है। मेरे पास कहने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। मुझे ऐसा लगता है कि यह कुछ ऐसा है जिसे मुझे किसी से छिपाने की ज़रूरत नहीं है। माँ! आपकी शादीशुदा ज़िंदगी बहुत ख़ुशहाल रहे।”

गोकुल की इस पोस्ट को कुछ ही देर में 33,000 से अधिक लोगों ने शेयर किया और उस पर बहुत से लोगों ने सकारात्मक जवाब भी दिए। गोकुल ने अपनी पोस्ट के साथ अपनी माँ और उनके दूसरे पति की तस्वीर भी शेयर की। आमतौर पर एक महिला के दूसरे विवाह पर लोगों की सोच एक सी नहीं दिखती, ऐसे में एक बेटे का अपनी माँ के दूसरे विवाह के प्रति इतना सम्मान और ख़ुशी तालियों की हक़दार है।

राजद विधायक के पुत्र ने खोमचे वाले को खाने का स्वाद पसंद न आने पर बुरी तरह पीटा

बिहार में जब लालू यादव की राजद सत्ता में थी तो उस समय के कालखंड को ‘जंगलराज’ कहा जाता था। और अब वही ‘जंगली’ सत्ता से बाहर तो कर दिए गए हैं लेकिन बिहार में उनकी गुंडागर्दी पर इसका फर्क नहीं दिख रहा है। राजद विधायक के बेटे पर आरोप है कि उसने एक खोमचा लगाने वाले युवक को पीट-पीट कर केवल इसलिए मरणासन्न कर दिया क्योंकि उसका बनाया खाना विधायक जी के बेटे को पसंद नहीं आया था। यही नहीं, ‘विधायक-पुत्र’ पर पहले भी ऐसी ही गुंडागर्दी का आरोप लग चुका है।

पिता डॉक्टर, बेटा बना जानलेवा

अंकित कुमार के पिता विधायक अशोक कुमार पेशे से डॉक्टर हैं, यानि जान बचाने वाले- लेकिन बेटा उनका लोगों के लिए प्राणघातक बनता दिख रहा है। आरोप के अनुसार अंकित ने रजत केसरी नामक युवक को इतना मारा कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ गया। रिपोर्टों के अनुसार रजत की ‘गलती’ खाली इतनी थी कि ‘विधायक जी के बेटे’ अंकित को उसका बनाया खाना पसंद नहीं आया था। माथे पर गहरी चोट खाए रजत को डिहरी के जमुहार स्थित नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा

रजत के होश में आने पर उसका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने अंकित और उसके दोस्तों पर हत्या के प्रयास समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दायर किया है। रजत ने बताया कि राजद विधायक के होटल के सामने चल रहे उसके खोमचे पर से अंकित और उसके दोस्तों ने खाने-पीने का कुछ सामान मँगाया था। खाना विधायक-पुत्र को न पसंद आने पर विवाद हुआ जिसके बाद विधायक के बेटे और उसके दोस्तों ने बेरहमी से पीट-पीट कर बेहोश कर दिया। सदर एएसपी राजेश कुमार ने कहा कि मामला दर्ज कर जाँच की जा रही है। जाँच के मुताबिक कार्रवाई होगी।

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियों ने पुलिस पर किया घातक हमला, 3 जवान घायल, 2 की मौत

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में केपी रोड पर बुधवार (जून 12, 2019) को आतंकियों ने पुलिस पर हमला किया है। खबर के मुताबिक इलाके में भारी गोलीबारी अभी भी जारी है।

अभी तक कि ख़बरों के अनुसार, 2 जवान बलिदान हो गए हैं, तीन जवानों के घायल होने की सूचना है। साथ ही एक आतंकी भी मारा गया है।

मीडिया खबरों के मुताबिक इस गोलीबारी में एसएचओ अर्शीद अहमद के छाती पर गोली लगने के कारण गहरे जख्म आए हैं। जिस कारण उन्हें इलाज के लिए श्रीनगर में भर्ती करवा दिया गया है।

इलाके में इस घटना से तनाव बढ़ने के कारण इलाके की घेराबंदी कर दी गई है। गौरतलब है इससे पहले भी जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों पर हमला होते रहे हैं। 30 मार्च को श्रीनगर-जम्मू हाइवे के पास एक कार धमाका हुआ था। ये धमाका सैंट्रो कार में हुआ था, उसके नज़दीक से सुरक्षाबलों का एक काफ़िला गुज़र रहा था। काफ़िले में सीआरपीएफ जवानों की 6-7 बस थीं और उसमें करीब 40 जवान थे। इस घटना में सिर्फ़ राहत की बात इतनी थी कि हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई थी।

गायब AN-32 विमान पर धूर्तता दिखाने वाली BBC को हार्दिक पटेल की बेहूदगी ने दी कड़ी टक्कर

अल्पबुद्धि और दुराग्रह का जब सही मेल मिलता है तब BBC जैसे मीडिया गिरोह जन्म लेते हैं। हालाँकि, जिन लोगों का ध्येयवाक्य ‘हमारा काम सरकार का विरोध करना है’ हो, उनसे किसी भी तरह से तार्किक होने की उम्मीद करना महज स्वयं से छलावा है। लेकिन जब इन लोगों द्वारा किए जा रहे नुकसान का दायरा देखा जाए तो यह आवश्यक होता है कि इनके वर्षों पुराने चले आ रहे इकतरफा संवाद को नकेल लगाई जाए।

BBC ने अपने स्तरहीन होने का सबसे नया परिचय दिया है भारतीय वायुसेना के गायब विमान पर भी सरकार को निशाना बनाकर। भारतीय वायु सेना के AN-32 एयरक्राफ्ट का मलबा अरुणाचल प्रदेश में मिला है। पिछले 8 दिनों से AN-32 गायब था और भारतीय वायु सेना उसे खोजने में जुटी थी।

सरकार एवं सेना के सहयोग से कल ही 8 दिनों बाद इस विमान का मलबा अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी सियांग ज़िले में मिला। भारतीय वायु सेना का कहना है कि विमान का मलबा एमआई-17 हेलिकॉप्टर से 12,000 फुट की ऊँचाई पर देखा गया है।

इस विमान में 13 लोग सवार थे, जिनमें 8 चालक दल के सदस्य थे। मलबा मिलने के बाद इस पर सवार और चालक दल के सदस्यों के बारे में अभी जानकारी जुटाई जा रही है।

लेकिन, इन सभी बातों से हटकर BBC का मर्म कुछ और है। सुन्दर प्रतीत होने वाली बातों के माध्यम से सुबह से शाम तक हिन्दू-मुस्लिम का रंग घोलकर ख़बरें बनाने वाले मीडिया के समुदाय विशेष की ही एक टुकड़ी BBC ने इस खबर में भी नैरेटिव सेट करने का प्रयास बेहद चालाकी से किया है। BBC की हेडलाइन कहती नजर आई है- “AN-32 का मलबा मिला लेकिन 13 सवार लोगों पर अब भी चुप्पी”

ऑड दिनों में सुप्रीम कोर्ट में यकीन करने वाले और इवन दिनों में सुप्रीम कोर्ट को बिकाऊ बताने वाे कुछ लोगों की तरह ही BBC की धूर्तता का विस्तार अब सरकार के साथ ही भारतीय वायसेना तक हो चुका है। ऐसे समय में, जब कि गायब विमान का मलबा तक मिलना भी एक बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है, BBC और मौकापरस्त भेड़ियों का ध्यान सरकार और संस्थाओं को निशाना बनाना है। सवाल यह है कि इन सबके बीच वो सभी मानवीय संवेदनाएँ कहाँ हैं जिनकी सुरक्षा का ये लोग दावा करते हैं?

BBC की क्रांतिकारी ‘पत्थरकारिता’

कॉन्ग्रेस के ‘CD-मंत्री’ हार्दिक पटेल का सामान्य ज्ञान राहुल गाँधी के स्तर का है

वहीं कॉन्ग्रेस के अरविन्द केजरीवाल यानी, हार्दिक पटेल ने भी इस मुद्दे को राजनीतिक बहस बनाने की कोशिश तो की लेकिन इस बीच वो इस बात का परिचय जरूर दे गए कि धीरे-धीरे उनका नेहरूवीकरण सही दिशा में होने लगा है। जनसभाओं में रैपट खाकर चर्चा में आने वाले पाटीदार आंदोलन के प्रमुख हार्दिक पटेल का सामान्य ज्ञान हर दूसरे इंटरनेट सिपाही जितना ही है, या शायद उससे भी कम। हार्दिक पटेल के अनुसार विमान जहाँ गिरा है, वो जगह चीन की है।

लापता विमान AN-32 को लेकर हार्दिक पटेल ने अपने एक ट्वीट में लिखा, “चीन मुर्दाबाद था और मुर्दाबाद ही रहेगा। चीन को कहना चाहते हैं कि हमारा विमान AN-32 और जवान वापस करे। मोदी साहब चिंता मत करो, हम सब आपके साथ हैं। चीन पर सर्जिकल स्ट्राइक कीजिए और हमारे जवान को वापस लाइए।”

हार्दिक पटेल के अनुसार चीन ने भारतीय सेना के विमान को मार गिराया और जवानों को अपने कब्जे में ले लिया है। ऐसे में पीएम मोदी को चीन पर सर्जिकल स्ट्राइक करना चाहिए। हालाँकि राहुल गाँधी की अध्यक्षता वाली पार्टी के सदस्य होने के कारण हार्दिक पटेल की बुद्दिमत्ता पर शक करने का तो सवाल ही नहीं उठता है, लेकिन फिर भी अगर मान लें कि हार्दिक के ट्ववीट को कटाक्ष की तरह देखा जाना चाहिए, तो यह देखना राहत की बात है कि कॉन्ग्रेस की जमात में अगली पीढ़ी में भी सैम पित्रोदा, मणि शंकर अय्यर और कपिल सिब्बलों की कमी नहीं है।

हार्दिक पटेल की इस बेवकूफी पर खेल मंत्री किरण रिजिजू ने सवाल किया, “आप कॉन्ग्रेस पार्टी के एक नेता हैं, क्या आपको पता है अरुणाचल प्रदेश कहाँ है?”

भारतीय वायुसेना की टीम ने AN-32 के मलबे को अरुणाचल प्रदेश के लिपो नाम की जगह से 16 किलोमीटर उत्तर में देखा। एयरफोर्स की टीम अब इन मलबों की जाँच कर रही है। गायब हुए विमान की खोज के लिए 3 दल बनाए गए थे। हर संभावित स्थल पर सर्च ऑपरेशन जारी था और आखिरकार अरुणाचल प्रदेश के लिपो नामक स्थान से 16 किमी उत्तर स्थित घने जंगलों में विमान के पार्ट्स मिले हैं।

पत्रकारिता का ‘पत्थरकार’ बनकर रह गया है BBC

रुपए लेकर कश्मीर में सेना पर पत्थर बरसाने वाले विगत कुछ वर्षों से चर्चा में आए हैं। इसी तरह से देर-सबेर ही सही लेकिन पत्रकारिता के नाम पर पत्थरकारिता करने वाले लोग भी बौखलाहट में खुलकर अपने वास्तविक रुझान दिखाने लगे हैं।

BBC की ‘चुप्पी’ का मतलब तो यही निकलता है कि मलबा मिलते ही वायुसेना के अधिकारियों को तुरंत अपने घर से निकलकर मोटरसाइकिल में किक मार के हादसे वाली जगह तक दौड़ जाना चाहिए था। लेकिन इस बीच मीडिया गिरोह का ये बड़ा प्लेयर ये बात भूल जाना चाहता है कि किसी जिम्मेदार संस्था द्वारा संवेदनशील ऑपरेशन चलाने और BBC के कुछ टुटपूँजियों द्वारा संस्थाओं के खिलाफ नैरेटिव और प्रोपेगैंडा चलाने में अंतर होता है। यह उतना आसान नहीं होता है जितना कमरों में बैठकर भीड़ का मजहब तय कर देना।

घने जंगल, बारिश के बीच लगातार सर्च ऑपरेशन के बावजूद भी एक गायब विमान को तलाशने में ही 8 दिन का समय लग गया तो संसाधनों और मानवीय बाधाओं की सीमाओं में रहकर यह सोचा जाना चाहिए कि आखिर मलबा मिलने के भी करीब 12 घंटे बाद एक अन्य दल को क्रैश साइट पर भेजा जाना तय हुआ है। लेकिन नहीं, BBC को इस तरह की प्लानिंग से मतलब नहीं है। खैर BBC को तो इससे भी मतलब नहीं है कि अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों पर दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लापता हो गए अमेरिकी विमान अब जाकर मिले हैं। अभी के टुटपूँजिए पत्रकार अगर तब BBC में होते तो अमेरिकी सरकार को भी ‘चुप्पी’ का मतलब समझा चुके होते।

भारतीय वायुसेना के C-130J यातायात विमानों, सुखोई Su-30 लड़ाकू विमानों, नौसेना के P8-I तलाशी विमानों तथा वायुसेना व थलसेना के हेलीकॉप्टरों की टुकड़ियों ने पूरे हफ्ते मलबा तलाश करने की भरपूर कोशिश की, और आखिरकार मंगलवार को विमान का कुछ हिस्सा देखा गया। नाइटटाइम सेंसरों से लैस थलसेना, नौसेना तथा ITBP की टीमों ने खराब मौसम के बावजूद दिन-रात घने जंगलों और कठिन माहौल वाली जगहों पर तलाशी को जारी रखा। लापता हुए विमान के क्रू सदस्यों के परिजन जोरहाट में इंतज़ार कर रहे हैं।

BBC जैसे मीडिया गिरोहों को यह जानना चाहिए कि पहाड़ों में जिस जगह विमान का मलबा देखा गया है, वहाँ घना जंगल है, और हवाई यातायात के लिए इसे दुनिया के सबसे कठिन इलाकों में शुमार किया जाता है। AN-32 (पूर्व) सोवियत संघ द्वारा डिज़ाइन किया गया ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप यातायात विमान है, जिसे भारतीय वायुसेना पिछले चार दशक से इस्तेमाल करती आ रही है।

भारतीय वायुसेना के लापता विमान AN-32 का मलबा देखे जाने के बाद सर्च ऑपरेशन और तेज हो गया है। भारतीय सेना के विंग कमांडर रत्नाकर सिंह ने जानकारी देते हुए कहा है कि क्रैश की साइट का पता चलने के बाद भारतीय वायुसेना, थल सेना और पर्वतारोहियों की एक टीम को इस जगह के पास एयरड्रॉप किया गया है। वायुसेना के एक अधिकारी ने बताया कि मंगलवार शाम मलबा दिखाई देने के बाद ही सेना ने मलबे वाले स्थान पर चीता और एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर को उतारने का प्रयास किया था, लेकिन घने पहाड़ी जंगल होने के चलते हेलिकॉप्टर को वहाँ नहीं उतारा जा सका। हालाँकि, मंगलवार देर शाम तक वायुसेना ने एक जगह को चिन्हित किया।

शायद वायसेना को BBC के दल को किसी भी तरह के सर्च ऑपरेशन में भेजना चाहिए ताकि कीबोर्ड के सिपाही कम से कम अपनी दुराग्रही कल्पना और वास्तविकता से तो वाकिफ हों। BBC और हार्दिक पटेल जैसे उदाहरण पुलवामा आतंकी हमले के वक़्त इस तरह के गैर जिम्मेदाराना और अमानवीय नैरेटिव तैयार करते हुए देखे गए हैं और हो सकता है कि यही इनके अस्तित्व का मकसद भी है और बस इसे ही जस्टिफाई करते जा रहे हैं।

डांस न करने पर बठिंडा की 2 बहनों को दुबई के होटल में बनाया बंदी, आरोपित सलमान की तलाश जारी

लोकल ट्रैवल एजेंट द्वारा बठिंडा से टूरिस्ट वीज़ा पर दुबई भेजी गई दो बहनों (प्रिया और प्रीती) को होटल के मालिक ने उस वक्त बंदी बना लिया, जब उन्होंने वहाँ होटलों में डांस करने से मना कर दिया। इस घटना की जानकारी प्रिया ने अपने पति को वॉयस मैसेज के जरिए दी। जिसके बाद मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई।

प्रिया ने बताया कि दुबई पहुँचने पर उन्हें होटल में नाचने को कहा गया, जब उन्होंने ऐसा करने से मना किया तो होटल के मालिक ने उनका पासपोर्ट ले लिया और उन्हें कमरे में बंद कर दिया। मैसेज मिलते ही प्रिया के पति ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने तीन लोगों (सुखदेव सिंह, जोसनप्रीत सिंह और सलमान खान ) के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया और मामले की जाँच शुरू कर दी।

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक अभी तक दो आरोपित सुखदेव सिंह और जोसनप्रीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है और तीसरे आरोपित सलमान खान की खोज जारी है। पीड़ित के पति जसवंत सिंह वासी परसराम नगर बठिंडा ने पुलिस को बताया है कि उनकी पत्नी प्रिया और साली प्रीती को टूरिस्ट वीज़ा पर दुबई भेजा गया था।

जसवंत ने बताया कि 7 जून को उनकी दुबई की फ्लाइट थी। 8 जून को वो करीब 12 बजे दुबई पहुँची और 1 बजे प्रिया ने उन्हें वॉयस मैसेज के जरिए इस घटना की जानकारी दी और बताया कि वो दोनों वहाँ जाकर फँस गई हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक सब-इंस्पेक्टर कुलवंत सिंह का मामले पर कहना है कि उन्होंने होटल मैनेजर से बात की है। महिलाओं को उनके पासपोर्ट लौटा दिए गए हैं और वो भारत जल्द लौट आएँगी।

‘अच्छा वाला ओवैसी’ एक छलावा है, दोनों भाई ही एक ही विकृत मानसिकता के शिकार हैं

आज़म खान के बेहूदे बयानों को अगर कोई बेहतर शब्दों से टक्कर देता है तो वो हैं मजहब विशेष की नई आवाज़ असद-उद-दीन ओवैसी। ये ओवैसी अकबरुद्दीन के ब्रो हैं जिन्होंने ‘पंद्रह मिनट के लिए पुलिस हटा देने पर’ ‘वो’ क्या-क्या कर सकते हैं उसकी एक झलक देने की कोशिश की थी। लेकिन लोगों ने कहा कि ये वाला ओवैसी लम्पट है, इसका ब्रो असद जो है, वो समझदार है।

लोकिन जब आपकी राजनीति मुस्लिम ध्रुवीकरण से चले, और उसमें भी मोदी विरोध का तड़का लगता रहे, तो फिर बयानबाजी में तर्क और मानवीय संवेदना की हदों को पार करना आम बात हो जाती है। असद ओवैसी का ताजा बयान यही दर्शाता है कि नेताओं में मज़े लेने की प्रवृत्ति इतनी प्रबल हो चुकी है कि वो अपनी संवेदना को कहीं परचून की दुकान पर छोड़ आते हैं।

हाल ही में ख़बर आई थी कि भारतीय वायुसेना का एक मालवाहक विमान AN 32 खराब मौसम के कारण रडार से गायब हो गया। उसके बाद कल उसके मलबे के मिलने की ख़बर आई। ऐसा बताया जा रहा है कि ख़राब मौसम में जहाज़ पहाड़ी से टकरा कर क्षतिग्रस्त हुआ। हमारे तेरह वायुसैनिक अभी तक लापता हैं। हृदय नहीं चाहता कि ऐसा मान लूँ लेकिन तर्क यही है कि हमारे वीर अफसर और जवान इस दुर्घटना में शायद बलिदान हो गए।

जब भी ऐसी कोई ख़बर आती है तो लगभग हर भारतीय, धर्म-जाति-क्लास स्टेटस से परे, प्रार्थना करता है कि वो कहीं सुरक्षित मिल जाएँ। अभी भी, जब तक हमारे पास उनके बलिदान हो जाने की पुष्टि नहीं हुई है, तो हम सोचते हैं कि शायद वो जंगलों में कहीं ज़िंदा होंगे और अपने साथियों के आने का इंतज़ार कर रहे होंगे। जिस इलाके में यह विमान क्षतिग्रस्त हुआ है वो दुर्गम है, खोजी दल भी वहाँ जाने में सक्षम नहीं है क्योंकि अभी भी मौसम सही नहीं हुआ है।

इन मौक़ों पर भी छप्पन इंच की बात करने वाले गिरोह के लोग आ जाते हैं कि कहाँ है मोदी, क्यों दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं जहाज़? ऐसे लोग यह बात भूल जाते हैं कि ऐसी दुर्घटनाएँ बस हो जाती हैं, उनसे आप बच नहीं सकते। वैश्विक लिहाज़ से भी देखें तो भारतीय वायु सेना के विमानों के क्षतिग्रस्त होने का प्रतिशत बहुत कम है। इसलिए, इसे एक प्रकृति का कोप कहा जा सकता है, सरकारी या सैन्य ग़लती नहीं।

ऐसे में ओवैसी का जो बयान आया है वो बेहद ख़राब है। जब एयर फ़ोर्स के हवाई खोज अभियान को मौसम के कारण सफलता नहीं मिल रही थी तो वायुसेना ने पाँच लाख रुपए के इनाम की घोषणा की ताकि कोई ग्रामीण व्यक्ति उसकी सूचना दे सके। ऐसा भी नहीं होता कि मौसम ख़राब है और एक लापता विमान की खोज में तीन और विमान वैसे ही मौसम में भेज दिए जाएँ, और वो भी क्षतिग्रस्त हो जाए। इसके लिए मौसम के बेहतर होने से लेकर उस इलाके के मिजाज़ तक को ध्यान में रख कर योजना बनाई जाती है। इसलिए, धैर्य और इंतज़ार ही हमारे वश में होते हैं।

ओवैसी ने वायु सेना के इस घोषणा पर कहा कि मोदी से पूछ लेते क्योंकि उनको तो रडार की बहुत जानकारी है, और वो तो दुश्मनों के इलाके तक में जहाज़ भेज कर एयर स्ट्राइक करते हैं। वायु सेना को तो मोदी को फोन कर लेना चाहिए था, उनके पाँच लाख बच जाते। इस बयान की क्या ज़रूरत थी, मुझे नहीं पता। अभी तो चुनाव भी नहीं हैं कि कहा जाए कि चुनावी जुमलेबाज़ी है।

शायद, मोदी के दोबारा जीतने पर ये कुंठा बाहर आ रही है। दूसरी बात यह है कि रडार के मामले में मोदी ने जो कहा वो तो वैज्ञानिक रूप से भी सही साबित हो चुका है। हालाँकि, इस मामले में ओवैसी का इस तरह से हमला बोलना यही दिखाता है कि उन्हें उन जवानों की कितनी फ़िक्र है या भारतीय सेना को लेकर उनमें कितनी संवेदना है।

अब, नेता हैं तो यह कह कर भी बच जाएँगे कि उनके बयान को संदर्भ से हटा कर बता दिया गया है लेकिन मुझे ऐसे बयानों में संदर्भ की ज़रूरत कहीं नहीं दिखती। ये बयान विशुद्ध रूप से पोलिटिकल प्वाइंट बनाने के लिए दिए जाते हैं ताकि उनके समर्थकों में ख़ुशी की लहर चल जाए कि उनके नेता ने तो मोदी की कह के ले ली!

इस बयान से ओवैसी या उनके तरह के लोगों ने यह भी जताया है कि अनभिज्ञता और अज्ञान तब हावी हो जाते हैं जब आपके मन में घृणा का स्तर बहुत ज़्यादा हो। मोदी को उन मुद्दों पर घेरिए जहाँ उसकी ग़लती हो। मोदी सरकार की नीतियों पर बयानबाज़ी कीजिए। मोदी सरकार के बजट पर घेरिए। सही आँकड़े और तर्क लाकर घेरिए। लेकिन यूनिट के वो वायुसैनिक जो अपने साथियों के लौटने के इंतज़ार में हैं, उस सेना को अपनी घृणा की राह में मत लाइए।

ऐसा करने से सेना या मोदी को नुक़सान नहीं होगा। मोदी ने तो दिखा दिया कि राष्ट्रवाद भी चुनाव का मुद्दा हो सकता है और सेना पर सवाल करने वाले नेताओं को जनता जवाब दे चुकी है। इसलिए नुक़सान घूम-फिर कर आपका ही होगा क्योंकि आपकी वैचारिक नग्नता सबके सामने खुले में आ जाएगी।

ओवैसी जैसे लोगों का भारतीय राजनीति में होना ज़रूरी है। इसके दो कारण हैं। पहला तो यह है कि ऐसे लोग जब भी बोलते हैं तो समझदार लोग जान जाते हैं कि कैसे नेता या कैसी पार्टी से दूरी बना कर रखनी है। दूसरी यह कि जब तक ऐसे लोग बयान देते रहेंगे, इस विचारधारा को व्यापक कवरेज मिलेगी और लोग बेहतर नेताओं को सत्ता में रखेंगे।

इसलिए, चाहे जितना अजीब लगे सुनने में, आज़म खान और ओवैसी जैसे नेताओं की बयानबाज़ी भारतीय राजनीति की ज़रूरत है। ये लोग जितना ज़हर उगलेंगे, राजनीति में लोगों की भागीदारी उतनी ही बढ़ेगी और लोगों के पास एक ख़ास विचारधारा को नकारने के लिए कई विकल्प उपलब्ध होंगे।

गैंग रेप आरोपित सपा मंत्री के घर समेत दिल्ली से यूपी तक 22 ठिकानों पर CBI ने की छापेमारी

अवैध खनन मामले में समाजवादी पार्टी में मंत्री पद पर रहे गायत्री प्रजापति के निवास स्थान समेत लगभग 22 ठिकानों पर CBI ने छापेमारी की। इस दौरान उनके अमेठी स्थित घर में CBI के क़रीब आधे दर्जन अधिकारी मौजूद थे। बता दें कि गायत्री प्रजापति का निवास स्थान अमेठी के आवास विकास कॉलोनी में है।

ख़बर के अनुसार, CBI इस मामले में प्रजापति के भतीजे से भी पूछताछ कर रही है। इसके अलावा सिंचाई विभाग में घोटाले को लेकर कई स्थानों पर CBI ने छापे मारे हैं। दरअसल, खनन घोटाले में लगभग 22 जगहों पर छापेमारी की गई है, जिसके तहत गायत्री प्रजापति के तीन ठिकानों पर भी छापे मारे गए हैं। गायत्री प्रसाद सपा सरकार में खनन मंत्री रह चुके हैं। उन पर अवैध खनन के भी आरोप हैं। साथ ही वो महिला के साथ गैंग रेप मामले में भी आरोपित हैं और फ़िलहाल जेल में बंद हैं। अगले महीने की 8 तारीख को उनकी जमानत पर सुनवाई होनी है।

एक अन्य ख़बर के अनुसार, CBI द्वारा अवैध खनन के मामले में 11 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया जा चुका है। सीबीआई ने हमीरपुर जिले की पूर्व कलेक्टर और आईएएस अधिकारी बी. चंद्रकला, खनिक आदिल खान, भूवैज्ञानिक/खनन अधिकारी मोइनुद्दीन, समाजवादी पार्टी के नेता रमेश कुमार मिश्रा, उनके भाई दिनेश कुमार मिश्रा, राम आश्रय प्रजापति, हमीरपुर के खनन विभाग के पूर्व क्लर्क संजय दीक्षित, उनके पिता सत्यदेव दीक्षित और रामअवतार सिंह के नाम प्राथमिकी में शामिल हैं।