सामाजिक मुद्दे

‘मेरे साथ जाहिल गाँव वाले की तरह बात मत करो’: गाँधी होते तो त्रिपुरा के DM साहब से क्या कहते?

कानून लागू करवाना सरकारी अधिकारी की जिम्मेदारी है। पर उसे कैसे लागू करवाना है, इस बात पर अधिकारियों के विवेक और धैर्य की परीक्षा होती है।

3 घंटे तक तड़पी शोएब-पांडे-पटेल की माँ, नोएडा में मर गए सबके नाना: कोरोना से भी भयंकर है यह ‘महामारी’

स्वाति के नानाजी के देहांत की खबर जैसे ही फैली हिटलर, कल्पना मीना और वेंकट आर के नानाजी लोग भी नोएडा के उसी अस्पताल में पहुँचे ताकि...

ऑक्सीजन प्लांट लगा रहा श्रीराम मंदिर ट्रस्ट: मंदिरों के रुपयों का हिसाब माँगने वाले गायब, मस्जिद से पत्थरबाजी पर चुप्पी

'श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट कोरोना काल में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए आगे आया। दशरथ मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन प्लांट...

हम 1 साल में कितने तैयार हुए? सरकारों की नाकामी के बाद आखिर किस अवतार की बाट जोह रहे हम?

मुफ्त वाई-फाई, मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी से आगे लोगों को सोचने लायक ही नहीं छोड़ती समाजवाद। सरकार के भरोसे हाथ बाँध कर...

हाँ, हम मंदिर के लिए लड़े… क्योंकि वहाँ लाउडस्पीकर से ऐलान कर भीड़ नहीं बुलाई जाती, पेट्रोल बम नहीं बाँधे जाते

हिंदुओं को तीन बातें याद रखनी चाहिए, और जो भी ये मंदिर-अस्पताल की घटिया बाइनरी दे, उसके मुँह पर मार फेंकनी चाहिए।

Pak की मायरा, भारत का हिन्दू लड़का, US में प्यार… ‘इस्लाम कबूल करो’ पर लड़की ने दिखाया ठेंगा: पक्का लव जिहाद?

अंततः फारुकी ने वही कहा जो उसे कहना था - शादी करने के लिए लड़के को अपना धर्म बदलना होगा और इस्लाम अपनाना होगा।

कालीन के अंदर कब तक छिपाते रहेंगे मुहम्मदवाद के खतरे… आज एक वसीम रिजवी है, एक यति नरसिंहानंद हैं; कल लाखों होंगे

2021 में भी समाज को 600 ईस्वी की रिवायतों से चलाने की क्या जिद है, धरती को चपटा मानने की और बुराक घोड़े को जस का तस स्वीकारने की क्या जिद है।

‘शिखर पर जाने का शॉर्ट-कट नहीं, ऊपर जाकर नीचे गिरना सरल’ – युवाओं के लिए ‘गुरुजी’ का मंत्र

"भारतीय युवाओं को उमंग और सामर्थ्य से भरे हुए जीवन जीने की तैयारी करनी चाहिए। सुस्ती, ढिलाई... यह युवा के जीवन को कमजोर करती है और..."

उत्तराखंड के जंगलों में आग: अंग्रेजों की नीति Vs ग्राम समुदाय के पास जंगल का नियंत्रण – क्या है समाधान?

चीड़ के पेड़ हिमालय में आग फैलाने के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी तो हैं पर उन्हें काट देना ही आग रोकने का समाधान नहीं है।

‘पानी तो बहाना है, मंदिर असली निशाना है’: महिलाओं के बाद अब बच्चों को बनाया जा रहा ढाल, नहीं कहेगा ‘सॉरी’ हिन्दू समाज

दोनों पक्षों के सामने आने से पहले ही 'सॉरी आसिफ' ट्रेंड होने लगता है, मीडिया उसका इंटरव्यू लेने लग जाता है, 'भीम आर्मी' उसके घर पहुँच जाती है और मंदिरों के विरोध में प्रोपेगंडा फैलाया जाता है - क्या ये सब कुछ ही देर में अचानक हो गया?

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