कर्पूरी ठाकुर को 'कपटी' कहने वाले लालू यादव आज किस मुँह से उन्हें अपना गुरु बता रहे हैं? श्रेय लूटने की होड़ में भूल गए कि उन्होंने बीमार नेता के साथ क्या किया था।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा, "अगर प्राण प्रतिष्ठा करने से पत्थर सजीव हो जाता है तो इससे मुर्दा क्यों नहीं चल सकता है? यहाँ पर पाखंड है, ढोंग है, आडंबर है।"
स्वामी गोविन्द गिरी ने बताया था कि उस समय उन्हें आश्चर्य हुआ, जब प्राण प्रतिष्ठा के लिए जरूरी नियम एवं व्रत के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे जानकारी माँगी।
कोर्ट ने कहा कि यह याचिका मात्र लड़की और उसके परिवार की छवि खराब करने के उद्देश्य से डाली गई है और इससे याचिकाकर्ता उन पर दबाव डाल कर अपने मन का निर्णय करवाना चाहता है।
अयोध्या में आने वाले श्रद्धालु यहाँ आकर रुके और बाकी जगह भी घूमें इसके लिए भी प्रयास जारी हैं। यहाँ अभी 17 होटल हैं और 73 और बनने हैं। इनमें से लगभग 40 का निर्माण कार्य जारी है।
ममता बनर्जी ने कहा, "जो काफिर हैं, वो डरते हैं, वो मरते हैं, जो लड़ते हैं वो जिंदा रहते हैं, वो बसते हैं, वो काम करते हैं।" मुस्लिमों को दी 'अल्लाह की कसम।'
मेघालय में राहुल गाँधी ने अनानास चखकर ऐसे दिखाने का प्रयास किया जैसे बुनियादी विकास न होने के कारण दूसरे राज्यों में बैठे लोगों इसका स्वाद नहीं ले पा रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की एक वीडियो साझा की है। ट्रस्ट ने रामलला द्वारा धारण किए गए आभूषणों के विषय में भी जानकारी साझा की है।
उज्जैन से पैदल आया व्यक्ति, मुन्नन खाँ का नाम सुन भागते इक़बाल अंसारी, दर्शन करने आए निहंग, राम का मंडप सजाते 'अखिलेश यादव', रथ खींच कर रायबरेली से आए 60 साल के बुजुर्ग, गुड़ बाँटते किसान - अयोध्या से ग्राउंड रिपोर्ट।
जहाँ अमिताभ बच्चन, रजनीकांत और चिरंजीवी परिवार समेत अयोध्या में मौजूद रहे, सुष्मिता सेन राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से भड़क गईं और संविधान की फोटो शेयर की।
दिल्ली, गाजियाबाद, दरभंगा, बाड़मेर, वडोदरा सहित कई जगहों पर हिंदू घृणा का प्रदर्शन हुआ। कहीं शोभा यात्रा पर पथराव हुआ तो कहीं बाबरी के समर्थन में नारे लगे।
नवीन पटनायक ने लिखा, "अयोध्या में आयोजित राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का साक्षी बना। राष्ट्र को प्राण प्रतिष्ठा के लिए उत्साह के साथ एक साथ आते देखकर खुशी हुई।"
वीडियो में देखा जा सकता है कि पीएम मोदी कुर्सी पर बैठे मजदूरों पर फूल बरसा रहे हैं। इन्हीं श्रमवीरों की बदौलत राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा तय समय पर संपन्न हुई।
"पहली बार अपनी उम्र से छोटे गुरुजी से मिली, मुझसे लगभग 10 वर्ष छोटे हैं, मन किया कि छोटे भाई की तरह गले लगा लूँ, लेकिन फिर याद आया कि कोई उम्र से नहीं बल्कि अपने कर्मों से गुरु होता है।"