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हिमंत बिस्वा सरमा की बेटी के साथ फोटो को गलत दावों के साथ फैलाने वाले पत्रकार तौफीकुद्दीन और इकबाल गिरफ्तार

असम पुलिस ने गुवाहाटी स्थित एक वेब पोर्टल से जुड़े दो पत्रकारों को वरिष्ठ मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की उनकी बेटी के साथ तस्वीर के चरित्र पर ऊँगली उठाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने मंत्री की उनकी बेटी के साथ की तस्वीर का इस्तेमाल करके उनके चरित्र को धूमिल करने का प्रयास किया था। ‘प्रतिबिंब लाइव’ नाम के पोर्टल के एडिटर इन चीफ तौफीकुद्दीन अहमद और इसके न्यूज एडिटर आसिफ इकबाल हुसैन को मंत्री के बारे में फर्जी खबरें फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

पोर्टल ने कल एक तस्वीर पब्लिश की। जिसमें हिमंत बिस्वा सरमा अपनी बेटी को गले लगा रहे थे। मगर पोर्टल ने बेहद शातिर तरीके से यह दावा किया कि मंत्री किसी अनजान महिला के साथ हैं। जिसके बाद उन पर संगीन आरोप लगाए गए। इस न्यूज रिपोर्ट के बाद फोटोग्राफ सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और लोग सरमा के चरित्र को लेकर सवाल उठाने लगे।

जब एक सोशल मीडिया यूजर ने फैलाई जा रही अफवाहों को लेकर प्वाइंट आउट किया, तो हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया, “कृपया उन्हें बताएँ कि तस्वीर में छोटी लड़की मेरी बेटी है।”

सोशल मीडिया पर, विशेषकर फेसबुक पर झूठे आरोप के वायरल होने के बाद, पुलिस ने इसे रोकने के लिए कदम बढ़ाया। असम पुलिस के एडीजीपी जीपी सिंह ने बताया कि दोनों पत्रकारों को आईपीसी की धारा 509 (किसी भी महिला की शीलता का अपमान करने का इरादा) के तहत गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा POCSO अधिनियम की धारा 14 और 21 भी लगाई गई है, क्योंकि मंत्री की बेटी नाबालिग है। ऐसी दुर्भावनापूर्ण खबरों को हवा देने के पीछे की साजिश की जाँच के लिए पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है।

‘प्रतिबिंब लाइव’ के तौफीकुद्दीन अहमद और इकबाल के अलावा, पुलिस ने कुछ अन्य ऐसे व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है, जिन्होंने फोटो को उसी भ्रामक दावे के साथ पब्लिश या फॉरवर्ड किया था। बोडोलैंड डिजिटल नामक पोर्टल से जुड़े पुली मुचैरी और स्पॉटलाइट असम नामक पोर्टल से जुड़े नाँग नोयोनमोनी गोगोई को भी पुलिस ने इस मामले में हिरासत में लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके साथ नजारुल हुसैन, नजमुल हक और मिजुल अली नाम के सोशल मीडिया यूजर्स को भी गिरफ्तार किया गया है।

एक साजिश के तहत इस तरह की फर्जी खबरों को न फैलाने की चेतावनी देते हुए, जीपी सिंह ने ट्वीट किया, “निवास स्थान की परवाह किए बिना सभी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी जो इस साजिश को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी तरह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दुर्भावनापूर्ण तरीके से करते हैं।” उन्होंने कहा कि दुर्भावनापूर्ण इरादे से ऐसी तस्वीरें पोस्ट करना POCSO एक्ट और असम पुलिस के प्रावधानों को आकर्षित करता है।

POCSO अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत ऐसे सभी प्रयासों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। दुर्भावनापूर्ण दावे के साथ फोटो प्रसारित करने वाले अधिक लोगों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा सकता है।

दुर्भावनापूर्ण रिपोर्ट को प्रसारित करने के बाद, प्रतिबिंब लाइव ने उस रिपोर्ट को डिलीट कर दिया है और एक अन्य रिपोर्ट में इसके लिए माफी माँगी है। हालाँकि, उन्होंने झूठे दावे को फैलाने के लिए दूसरों को दोषी ठहराया। उन्होंने बताया कि लोग सोशल मीडिया पर फोटो को वायरल करके मंत्री को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। पोर्टल ने ‘अनजाने में हुई गलती’ के लिए माफी माँगी और दावा किया कि शायद किसी निहित स्वार्थी व्यक्ति ने मंत्री की बेटी के साथ इस तस्वीर को वायरल किया हो।

दादी की नाक, डैडी का हेयरकट, गंगा स्नान.. और अब ‘समुद्र के किसानों’ के भरोसे कॉन्ग्रेस का भविष्य

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा अब लगातार मेहनत करते नजर आते हैं। देश में चुनाव हों या ना हों, कल ही होने हों या फिर पाँच साल बाद; वो अब तन, मन और धन से जनता के बीच मौजूद हैं। इसके लिए कभी बहन गंगा स्नान करने लगी हैं, तो कभी भैया राहुल कॉन्ग्रेस के लिए रात-दिन एक करते हुए पार्टी का भूत-भविष्य और वर्तमान एक करते देखे जाते हैं।

आज ही राहुल गाँधी ने पुडुचेरी के मुथियालपेट में कहा कि मछुआरे समुद्र के किसान हैं और उनके लिए मोदी जी ने कोई मंत्रालय नहीं बनाया। एक ओर, जहाँ लोगों को भय है कि युवराज ने आज कहीं किसी दो साल पुराने भाषण को तो नहीं पढ़ लिया तो वहीं दूसरी ओर, राहुल गाँधी के इस बयान के बाद केंद्र सरकार एक ऐसा विधेयक लाने पर भी विचार कर रही है, जिसके बाद तमाम राजनीतिक पार्टी के नेताओं को सामान्य ज्ञान की किताबें पढ़ना आवश्यक कर दिया जाएगा।

उधर, प्रियंका गाँधी वाड्रा ने किसान हितों का समर्थन करने की ऐसी जिम्मेदारी उठा ली है कि इसके लिए अब वो फेक न्यूज़ फ़ैलाने के अलावा राह चलते आदमी को भी ये पूछने लगी हैं कि उसके खाते में गन्ने के रूपए आए या नहीं? गन्ने का जूस बेचने वालों की जेब में तो इंदिरा की पोती ने जबरन रूपए ठूँसकर उन्हें फासीवाद सरकार के दौरान ही मालामाल करने की कसम खा डाली होगी।

समाज में नैरेटिव विकसित करने के लिए कॉन्ग्रेस को पहले इतने प्रयोग करते हुए कभी नहीं देखा गया। एक दौर था, जब सदियों बाद ही ये पार्टी कभी पेड़ गिरने और धरती हिलने जैसा बयान देकर मामला इकतरफा करने का कांफिडेंस लेकर चलती थी, लेकिन अब हालात ये हैं कि एक ही साल के भीतर इसके युवा नेता, जो कि संयोग से भाई-बहन हैं, अपनी दादी की नाक से लेकर पापा का हेयर स्टाइल तक अपनी राजनीति के बीच ले आए मगर ‘पॉलिटिकल ग्रिप’ है कि कमजोर ही हुए जा रही है।

राहुल गाँधी आज ‘समुद्र के किसानों’ से मिलते हुए जिस कॉन्फिडेंस में नजर आए, उसे देखकर तो लगता है कि अगर ‘बाय चांस’ कभी उनकी पार्टी सत्ता में वापसी करती है, तो वो आसमान के किसानों के लिए भी किसी मंत्रालय की घोषणा ना कर बैठें।

किसान हित सर्वोपरी हैं मगर राहुल गाँधी इन हितों के लड़ते-लड़ते ये भूल बैठे हैं कि उनके आए दिन ऐसे बयानों को सुनने और सहन करने वालों के भी कुछ अधिकार होते हैं, जिन्हें कि मानवाधिकार कहा जाता है और वो हैं कि इन अधिकारों की निर्मम हत्या किए जा रहे हैं और पारी की घोषणा करने को भी तैयार नहीं।

फ्रांस में रेडिकल इस्लाम विरोधी कानून पारित: मस्जिदों-मदरसों पर रहेगी कड़ी नजर, बहु विवाह पर पाबन्दी

इस्लामी कट्‌टरवाद के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए फ्रांस की संसद ने विवादास्पद बिल को मंजूरी दे दी है। इस बिल में मस्जिदों और मदरसों पर सरकारी निगरानी बढ़ाने और बहु विवाह और जबरन विवाह पर सख्ती का प्रावधान है। बिल फ्रांस की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं को कमजोर करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की इजाजत देता है। इस बिल के समर्थन में 347 वोट पड़े जबकि 151 सांसदों ने इसका विरोध किया। 

अब उच्च सदन में होगा पेश

पिछले साल हुई शिक्षक सैम्युएल पैटी की हत्या के बाद से फ्रांस में इस्लामिक कट्‌टरवाद के खिलाफ कड़े कानून बनाने की माँग हो रही है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने कई मौकों पर कहा था कि वह जल्द ही इस दिशा में कदम उठाएँगे। माना जा रहा है कि संसद के निचले सदन द्वारा पारित बिल को लेकर आने वाले दिनों में देश में बवाल बढ़ सकता है। क्योंकि यह सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय को प्रभावित करेगा। अब इस बिल को उच्च सदन यानी सीनेट में पेश किया जाएगा।

मैक्रों ने बताया जरूरी

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि जेंडर इक्वेलिटी और सेक्युलरिज्म जैसे फ्रांसीसी मूल्यों की रक्षा किया जाना आवश्यक है, इसलिए ऐसे कानून देश हित में हैं। वहीं फ्रांस में रहने वाले मुस्लिमों का कहना है कि यह कानून ना केवल उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करेगा, बल्कि उन्हें इसके जरिए निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि चूँकि फ्रांस के पास पहले से आतंकवादी हिंसा से लड़ने के लिए पर्याप्त कानून है, इसलिए नया बिल लाने की कोई जरूरत नहीं है।

गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में छात्र को पैगंबर मोहम्मद का कार्टून दिखाने पर एक हमलावर ने टीचर सैम्युएल पैटी का सिर काट दिया था। घटना राजधानी पेरिस से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर कॉनफ्लैंस सेंट-होनोरिन के एक मिडिल स्कूल के बाहर हुई थी।

फ्रांस में शिक्षक पैटी की हत्या के बाद से ही सरकार इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ एक्शन में है। राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने भी कहा था कि आज इस्लाम के नाम पर हिंसा और हत्याओं को बढ़ावा दिया जा रहा है और ऐसे लोग हैं, जो इस्लाम के नाम पर हिंसक अभियान चलाते हुए हत्याओं और नरसंहार को जायज ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि आतंकवाद इस्लाम की भी समस्या है, क्योंकि इसके 80% पीड़ित मुस्लिम ही हैं और वो इसके पहले पीड़ित हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया था कि इस्लामी कट्टरवाद के खिलाफ जंग जारी रहेगी।

ममता बनर्जी के लिए गंदी-गंदी गालियाँ, अश्लील टिप्पणी: ट्वीट वायरल होते ही कॉमेडियन ने किया एकाउंट प्रोटेक्ट

घटिया और बकवास मजाक करने के लिए जाने जाने वाले स्टैंड-अप ‘कॉमेडियन’ अतुल खत्री ने सोशल मीडिया यूज़र्स द्वारा लताड़े जाने पर हाल ही में अपने ट्विटर एकाउंट पर प्रोटेक्शन सुविधा को एक्टिवेट कर लिया है। दरअसल, यूज़र्स ने अतुल खत्री के उन ट्वीट को खोज बाहर निकाला, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

सोशल मीडिया यूज़र्स ने एक नहीं बल्कि ऐसे कई आपत्तिजनक ट्वीट्स का पता लगाया, जिसमें खत्री द्वारा अतीत में तृणमूल कॉन्ग्रेस प्रमुख के खिलाफ बेहद ही अपमानजनक टिप्पणियाँ की गई हैं। नेटीज़न्स द्वारा साझा किए गए एक ट्वीट में खत्री ने ममता बनर्जी को कु*& तक कह दिया था और अपनी गिरफ्तारी के लिए मुख्यमंत्री को ललकारा भी था।

वहीं खत्री द्वारा किए गए एक अन्य ट्वीट में, उन्होंने ममता बनर्जी के चेहरे को ‘एक थी डायन’ फिल्म के पोस्टर के साथ फोटोशॉप करते हुए उन्हें चुड़ैल के रूप में भी संदर्भित किया था।

कॉमेडियन ने एक ट्वीट में मुख्यमंत्री के खिलाफ यौन संबंधी अश्लील टिप्पणी भी की। जहाँ उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल में MILF में M का मतलब कुछ और ही है …”

एक और ट्वीट करते हुए खत्री ने कहा था, “जब सुबह की भूली शाम को वापस आ जाए, उसे भूली नहीं, उसे TMC पार्टी की ममता कहते हैं। TMC का मतलब तेरी माँ की…”

TMC प्रमुख से संभवत: प्रतिशोध की आशंका वाले ट्वीट्स के दोबारा वायरल होते ही खत्री ने घबरा कर तुरंत अपने ट्विटर एकाउंट को प्रोटेक्ट कर दिया, ताकि कोई भी उनके पिछले गड़े कारनामों को दोबारा से उजागर न कर सके। इसके अलावा उन्होंने अपने एकाउंट में लिमिटेड एक्सेस की भी सेटिंग चालू कर दी।

लगातार मोदी सरकार की आलोचना करने वाले कॉमेडियन, ममता बनर्जी के खिलाफ की गई अपनी टिप्पणियों और इसके लिए टीएमसी के गुंडों द्वारा की जाने वाली कार्रवाई से डर गए। गौरतलब है कि वामपंथी झुकाव वाले बुद्धिजीवियों के चहते बने खत्री अब अपने ही द्वारा किए गए कारनामों से बचते फिर रहे हैं।

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी सरकार की आलोचना और पहले ममता बनर्जी का मजाक उड़ाने और उनके खिलाफ किए गए अपमानजनक टिप्पणी ने खत्री की मंशा को सबके सामने खोल कर रख दिया है। जहाँ एक तरफ लिबरल गिरोह राज्य में एक बार फिर ममता सरकार की वापसी चाहते है वहीं खत्री अब अपने पुराने कारनामों को छुपाने पर तुले हैं।

यह ध्यान देने योग्य है कि टीएमसी पश्चिम बंगाल में तेजी से नीचे की तरफ गिरती नजर आ रही है, क्योंकि उनके पार्टी के कद्दावर नेता उन्हें छोड़ कर, धीरे-धीरे विपक्षी दलों में शामिल हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि सिर्फ ममता बनर्जी ही नहीं है, जिनके खिलाफ कॉमेडियन अतुल ने ट्विटर पर अश्लील टिप्पणियाँ की हैं। पिछले साल उन्होंने मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल के खिलाफ भी ‘चांडाल‘ तक लिख दिया था।

आपको बता दें कि चांडाल भी एक अनुसूचित जाति समुदाय है, जो लाशों को डिस्पोज़ करने का काम करती है। साथ ही यह समुदाय अंतिम संस्कार भी करता है। चांडाल को देश के कम से कम छह राज्यों में अनुसूचित जाति के रूप में अधिसूचित किया गया है।

TMC सांसद नुसरत जहां के करीबी बंगाली अभिनेता यश दासगुप्ता हो सकते हैं BJP में शामिल: रिपोर्ट्स

बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 से पहले अटकलें लग रही हैं कि बंगाली अभिनेता यश दासगुप्ता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा/ BJP) से जुड़ सकते है। रिपोर्ट के अनुसार, वह गेरुआ कैंप भाजपा ज्वाइन करेंगे।

यश दासगुप्ता के बारे में बता दें कि वह तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद नुसरत जहां के करीबी हैं। नुसरत के वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियों के बीच उनके और यश के डेटिंग करने की खबरें भी मीडिया में हैं।

बता दें कि नुसरत जहां ने दो साल पहले निखिल जैन से शादी की थी। इसके बाद वह कई पूजा-पाठ कार्यक्रमों में नजर आईं और कट्टरपंथियों के निशाने पर रहीं। मगर, हाल में नुसरत को यश के साथ राजस्थान में ट्रिप पर देखा गया था।

इस हफ्ते से पहले अपनी फिल्म डिक्शनरी के प्रीमियर के लिए भी उन्होंने दासगुप्ता के साथ एंट्री की थी। उस दौरान दोनों ने हाथ पकड़ा हुआ था।

उल्लेखनीय है कि दासगुप्ता ने साल 2016 में बंगाली फिल्म से डेब्यू किया था। उनकी साथी कलाकार भी टीएमसी सांसद मिमी चक्रवर्ती थीं। नुसरत ने दोनों के साथ SOS कोलकाता में अभिनय किया था। जनवरी में नुसरत से उनकी शादी में होने वाली दिक्कतों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया था और जवाब में कहा था कि वो उनकी निजी जिंदगी है।

नुसरत ने अपने सोशल मीडिया अकॉउंट्स से अपने पति जैन के साथ हर तस्वीर को भी डिलीट कर दिया था। वहीं यश दासगुप्ता के साथ लगातार तस्वीरें शेयर कर रही हैं।

गौरतलब है कि साल 2019 में निखिल से शादी के बाद से नुसरत जहां कभी कट्टरपंथियों की टिप्पणियों या फिर भी मौलवियों के फतवों के कारण चर्चा में रह चुकी है। उन्होंने शादी के बाद जब पारंपरिक बंगाली बहु का फर्जी निभाते हुए सिंदूर खेला में हिस्सा लिया था तब वह चलताबागान दुर्गा पूजा पंडाल में गई थीं।

मीडिया से बात में उन्होंने कहा था, “मैं भगवान की सबसे प्यारी बच्ची हूँ। मैं सभी पर्व का आनंद उठा सकती हूँ। मैं अन्य बातों की अपेक्षा प्यार और मानवता को ज्यादा इज्जत देती हूँ। मैं बहुत खुश हूँ और विवादों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।”

प्रियंका गाँधी ने जिस किसान को लेकर फैलाया झूठ, उसी ने खोली पोल, कहा- वाड्रा को सही खबर पढ़कर रिएक्शन देना चाहिए

उत्तर प्रदेश प्रभारी व कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने उत्तर प्रदेश में गन्ने का बकाया भुगतान न होने को लेकर एक बार फिर से झूठ फैलाया। प्रियंका गाँधी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर निशाना साधते हुए ट्विटर पर लिखा कि 14 दिन में भुगतान एवं आय दुगनी का वादा जुमला निकला। प्रियंका गाँधी ने ट्वीट में लखीमपुर खीरी के एक किसान आलोक मिश्रा का भी जिक्र किया। 

प्रियंका गाँधी ने बुधवार (फरवरी 17, 2021) को ट्वीट करते हुए लिखा, “लखीमपुर खीरी के किसान आलोक मिश्रा का 6 लाख रुपए का गन्ना भुगतान बकाया है। उनको खेती, इलाज आदि के लिए 3 लाख का लोन लेना पड़ा। 10,000 करोड़ का भुगतान फँसा होने के चलते यूपी के लाखों किसानों का यही हाल है। 14 दिन में भुगतान एवं आय दुगनी का वादा जुमला निकला।”

इस ट्वीट के सामने आने के बाद एबीपी न्यूज की पत्रकार रुबिका लियाकत ने एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, “प्रियंका के ट्वीट में जिस किसान आलोक मिश्रा का ज़िक्र है वो कह रहे हैं कि प्रियंका वाड्रा को सही खबर पढ़कर रिएक्शन देना चाहिए। मुझे पिछले साल का पूरा भुगतान मिल गया है।”

इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए यूपी कॉन्ग्रेस ने लिखा, “आप जैसे गोदी पत्रकारों को मर्म नहीं दिखता। जिस खबर का जिक्र किया गया है उसमें साफ लिखा है कि किसानों को 14 दिन में भुगतान का वादा किया गया था। साल बीत जाते हैं लेकिन किसानों को भुगतान नहीं मिलता, कर्ज लेना पड़ता है। किसान गन्ना की खेती छोड़ रहे हैं।”

इसके जवाब में रुबिका लियाकत ने आलोक मिश्रा के बयान का वीडियो ट्वीट किया। इस वीडियो में आलोक मिश्रा कह रहे हैं, “प्रियंका जी का क्या है कि उनको राजनीति करनी है, वो वैसे ही करती है। उनको न्यूज तो देखना नहीं है। देखना चाहिए कि पूरी न्यूज कम से कम क्या थी।”

बता दें कि बीते दिनों प्रियंका गाँधी वाड्रा ने फेसबुक पर एक वीडियो डालकर किसान आंदोलन को भड़काने की कोशिश की थी। जिसको PIB Fact Check ने झूठा दावा करार दिया और प्रियंका गाँधी के पोस्ट के साथ उसे फर्जी बताया।

प्रियंका गाँधी ने फेसबुक पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “जिस भारतीय रेलवे को देश के करोड़ों लोगों ने अपनी मेहनत से बनाया। भाजपा सरकार ने उस पर अपने अरबपति मित्र अडानी का ठप्पा लगवा दिया। कल को धीरे-धीरे रेलवे का एक बड़ा हिस्सा मोदी के अरबपति मित्रों को चला जाएगा। देश के किसान खेती-किसानी को भी आज मोदी के अरबपति मित्रों के हाथ में जाने से रोकने की लड़ाई लड़ रहे हैं।” हालाँकि पीआईबी ने इसका खंडन कर दिया था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा फर्जी खबर फैलाना आम बात हो गई है। यहाँ तक कि उनके पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस सूची में शामिल हैं, जो अक्सर अपनी राजनीति को चमकाने के लिए भ्रामक सूचनाओं और फर्जी खबरें फैलाने का सहारा लेते है। 

नीलकंठेश्वर मंदिर का रास्ता हुआ साफ, दूर से दिखने लगा इतिहास: इरफान, महबूब, अहमद ने कर लिया था राजमहल पर कब्जा

57 साल के राजा मियाँ ने अपने हिस्से की आठ फुट ज्यादा जमीन मंदिर के रास्ते को चौड़ा और बेहतर बनाने के लिए आगे आकर दी है। राजा मियाँ ने इस बात का इंतजार नहीं किया कि सरकारी अमला आकर हिदायत या समझाइश दे। जो काम जरूरी है, वह कल पर नहीं टाला।

उनकी पहल ने 40 कारोबारियों को कई दशकों से बने उन दुकान और मकानों को पीछे करने का रास्ता खोल दिया, जिनसे एक 30 फुट चौड़ा रास्ता दस फुट की संकरी और दमघोंटू गली में बदल गया था। यह गली दुनिया भर के लोगों को भारतीय स्थापत्य कला के एक बेमिसाल नमूने की तरफ ले जाती थी।

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में उदयपुर का एक हजार साल पुराना नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर है, जो अब दूर से नजर आने लगा है। वाराणसी तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रचंड बहुमत का केंद्र है। उनका अपना चुनाव क्षेत्र।

ऐसी ही दमघोंटू गलियों में बाबा विश्वनाथ की विरासत सदियों से किसी की राह तक रही थी। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से 150 किलोमीटर दूर विदिशा जिले में आठ हजार आबादी के उदयपुर में बाबा विश्वनाथ नीलकंठेश्वर के नाम से विराजे हैं। परमार राजवंश के शासक शिव के उपासक रहे और अपने ढाई-तीन सौ साल के राज में अपने विशाल राज्य में अनगिनत मंदिर, पाठशालाएँ और छात्रावास बनवाए।

बुंदेलखंड की सीमा पर उदयपुर उनके राज्य के सबसे व्यस्त व्यावसायिक केंद्रों में से एक था, जहाँ चारों तरफ दुर्ग से घिरे नगर में एक राजमहल, कई बावड़ियाँ, दरवाजे, मंदिर, चौक-चबूतरे, कचहरी सदियों तक बनाए गए थे। गूगल मैप से पूरी नगर रचना को आज भी देखा-समझा जा सकता है, जो ऊपर पहाड़ी तक की गई किलेबंदी तक विस्तृत है।

परमारों के बाद भारत के इतिहास की एक लंबी अमावस का दौर है, जब लुटेरों के अंतहीन अंधड़ों ने भारतीय पहचान को जड़ से मिटाने की जिद्दी कोशिशें कीं। इस इलाके में शम्सुद्दीन इल्तुतमिश, अलाउद्दीन खिलजी, मोहम्मद तुगलक, शेर शाह सूरी के हमले, लूट और कब्जे क्रम से हैं। मुगलों के बाद नवाबों के नाम से नए कब्जेदारों की घातें हैं।

बाबर का चंदेरी पर हमला 1528 में हुआ और तब तक दूर से चुपचाप भारत की तबाही देख रहा उदयपुर चंदेरी सूबे का हिस्सा हो गया। पचास साल कोई कुछ न कहे तो किराएदार ही मालिक हो जाता है। फिर यह तो सदियों की खामोशी थी।

उदयपुर चश्मदीद है। भुक्तभोगी है। 1080 का एक शिलालेख महाराजा उदयादित्य से हमारा परिचय कराता है, जो मंदिर प्रांगण में ही है। हर दिन की एक रात है। हर रात की एक सुबह भी है।

एक इतिहासकार की हेरिटेज वॉक के बाद साल 2021 की जनवरी उदयपुर की एक नई भोर लेकर आई। यह एक उदास कस्बे की अँगड़ाई है, जो कुछ सदियों से हमसे कुछ कहना चाहता था। आजादी के बाद कुछ दशकों का इंतजार और किया। लगा कि नीलकंठेश्वर के तीसरे नेत्र की पलक बहुत हल्की सी हिली है।

इंसानों की तरह इतिहास के सब्र भी टूटते हैं। उदयपुर का सब्र टूटना ही था। उदयादित्य तो अब नहीं रहे। लोकतंत्र आ गया। अब हर नागरिक उदयादित्य है, जो अपने सेवकों को सिंहासन तक भेजता है। पुरखों की पुकार सुन ली गई। उदयपुर नींद से जाग गया।

मंदिर के बाहर आते ही गली के बाईं तरफ राजा मियाँ का आशियाना है। और आगे कोई हमीद है। सामने कोई बशीर है। बीच में रमेश हैं। प्रवीण हैं। राजकुमार हैं। सबके महान पुरखों ने एक साथ ये हैरतअंगेज निर्माण कार्य हजार साल पहले ही कर दिखाए थे।

वह सिर्फ मजदूरी या कारीगरी का हुनर नहीं था। उन्होंने पत्थरों पर जादू रच दिया था। आला दरजे की इंजीनियरिंग के साथ गणित, मूर्ति और चित्र कला के फनकारों ने जाने कहाँ-कहाँ से आकर अपने कला-कौशल की नुमाइश की होगी।

विशाल परिसरों में ये पूजास्थल दरअसल शिक्षा, संस्कृति और कला के विकसित और व्यस्त केंद्र होते थे, जहाँ देवताओं की साक्षी में एक संस्कारवान नई पीढ़ी गढ़ी जाती थी। राज्य इन्हें पोषित करता था। समाज सहेजता था। लेकिन यह इतिहास के अंधड़ों के उस पार की गौरव गाथाएँ हैं। बीच में सदियों की अमावस है। शिव के मस्तक का अर्द्धचंद्र उदयपुर में पूरी तरह खिलता हुआ हम देख रहे हैं।

कितने लोग कहाँ-कहाँ से आ रहे हैं। वे अब तक दर्शन करने, फूल-पत्ती अर्पित करने, अपनी कामनाओं के विष की पोटली शिव के कंठ पर टाँगने और तस्वीरें खिंचाने के लिए दमघोंटू गली से ऊपर सरकते हुए सिर पर चढ़े आते थे।

उदयपुर ने अपनी चादर झटकार दी है। सबसे पास का छोटा शहर है गंज बासौदा। उदयपुर के सामने ही जन्मा होगा। उदयपुर ने इसकी किलकारियाँ सुनी होंगी। फिर बड़ा होते हुए देखा होगा। अब वह पढ़-लिखकर कमाने वाला काबिल शहर हो गया है। आसपास के अनगिनत गाँवों के लोग रोजगार पाते हैं।

बच्चे भविष्य के सपने बुनने आते हैं। अपने पड़ोस में जीवन को नए सिरे से विकसित होता हुआ देखकर एक तजुर्बेकार बुजुर्ग की तरह उदयपुर बीते दशकों में कितना खुश हुआ होगा। अपनी दयनीय हालत पर उसने कभी न बासौदा से कुछ माँगा, न बासौदा से कुछ चाहा। विदिशा हो या भोपाल, हर रोज तमाम माँगने वाले ही नीलकंठेश्वर के द्वार तक आते रहे।

किसी की नजर न लगे, उदयपुर की यह अँगड़ाई कितनी हसीन है। इसका स्वागत करने का बासौदा वालों का हक पहला है। वे अब महादेव के समक्ष कुछ माँगने नहीं आ रहे। वे अपने अतीत को टटोल रहे हैं। कोई मधुर शर्मा अपनी टोली के साथ कैमरे लिए पहाड़-जंगल, गली-कूचों में झाँक रहे हैं। उनके सामने उदयपुर अपनी नई परतें खोल रहा है।

यूट्यूब के प्लेटफार्म नंबर-एक पर कोई अमित शुक्ला वैदिक एक्सप्रेस में जानकारियों की शानदार सवारी करा रहे हैं। कोई गगन दुबे मंदिर की भित्तियों पर मौन मूर्तियों से बात कर रहे हैं। उनके पास प्रश्न हैं। खंडित और आहत देवी उनसे अपनी व्यथा कह रही हैं। कोई प्रवीण शर्मा एक पुराने घरों की अंधेरी दीवारों से कान लगाए हैं। हर दीवार कुछ कहती है। हर स्तंभ को अपनी बारी का इंतजार है। हर बावड़ी आपके आने से प्रसन्न है।

मलबे के बड़े से ढेर के पास एक प्राचीन जैन मंदिर में कोई णमोकार मंत्र गुनगुना रहा है। वह साक्षी है कि कभी यह नगर महान तीर्थंकरों के समृद्ध अनुयायियों की व्यावसायिक और सामाजिक सेवा का भी सक्रिय केंद्र रहा होगा। आज सिर्फ तीन परिवार जैनियों के हैं।

मलूकचंद जैन के पास अपने घर के हिस्से के उस टीले की कहानी है, जिसकी खुदाई में दशकों पहले शानदार कलाकृतियों वाला एक पुराना आवास दफन था। श्रद्धा और परिश्रम से उसकी सफाई की गई थी। वही अब उनका घर है, जो कथा उदयपुर का एक प्रकाशित पृष्ठ है।

उदयपुर की इस करवट को निकट से देखने देश के प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. सुरेश मिश्र डेढ़ महीने में दूसरी बार आए तो सबसे ताजा कहानी राजा मियाँ ने सुनाई। खुश होकर बताया कि उन्होंने अपनी ज्यादा जगह खाली की है। बिना किसी आदेश के। उदयपुर की भलाई के लिए कमाया गया यह उनके हिस्से का सवाब है।

आज के नुकसान की भरपाई कल वे लोग कर देंगे, जो दुनिया भर से इस महान विरासत के दर्शन करने आएँगे। बेशक इस काम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन के स्थानीय अधिकारियों, समाज के जागरूक लोगों की भूमिका भी सकारात्मक और प्रेरक है। डॉ. मिश्र ने झूमकर राजा मियाँ को गले लगा लिया। वसंत पंचमी की दोपहर गर्भगृह में भीतर नीलकंठेश्वर महादेव तक सारे शुभ समाचार पहुँच रहे थे।

गौरतलब है कि महल की एक दीवार को तोड़कर सीमेंट और लोहे का दरवाजा लगा दिया गया था और पुरानी दीवार पर एक साइन बोर्ड टाँग दिया गया था- ‘निजी संपत्ति, उदयपुर पैलेस, खसरा नंबर-822, वार्ड नंबर-14।’ इस पर काजी सैयद इरफ़ान अली, महबूब अली और अहमद अली का नाम लिखा था।

अब नीलकंठेश्वर मंदिर तक पहुँचने का रास्ता अब लगातार ठीक होता जा रहा है, क्योंकि निर्माण कार्य ने गति पकड़ ली है। जो रास्ता पहले तक मात्र 10 फ़ीट का था, वो अब 30 फ़ीट का हो गया है। मार्ग को सुगम बनाने में न सिर्फ प्रशासन, बल्कि स्थानीय लोगों ने भी खासी रुचि दिखाई और योगदान दिया। लोगों ने स्वेच्छा से अपने घरों को 10-15 फ़ीट खोद डाला और सड़क व नाली के लिए रास्ता दे दिया।

नोट: ऑपइंडिया के लिए यह लेख विजय मनोहर तिवारी ने लिखा है।

दिशा रवि, दीप सिद्धू जैसों के साथ खुलकर आया खालिस्तानी संगठन, PM मोदी को बैन करवाने के लिए चलाया ई-मेल कैंपेन

खालिस्तानी आतंकी समूह सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का जनरल काउंसल गुरपतवंत सिंह पन्नू भारत में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के इल्जाम में गिरफ्तार दिशा रवि, दीप सिद्धू, नवदीप कौर और निकिता जैकब व अन्य के समर्थन में आया है।

SFJ की वीडियो से लिया गया स्क्रीनशॉट

उसने बताया है कि उसके खालिस्तानी संगठन ने इन कार्यकर्ताओं के समर्थन में एक वेबसाइट बनाई है। उसका मानना है कि इन कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह का चार्ज लगाकर इनसे इनका प्रोटेस्ट का अधिकार छीना गया है।

संगठन द्वारा शेयर किया गया पोस्टर

उसने ट्विटर4फॉर्मर वेबसाइट को लेकर कहा कि इससे अमेरिकी, कनाडाई, ब्रितानी, जर्मनी, अस्ट्रेलिया, इटली, स्वीडन और ईयू जैसे विदेशी राजदूतों पर दबाव बनाने में मदद मिलेगी कि वह पीएम मोदी को कहीं भी आने जाने से बैन करें। पन्नू ने अनुरोध किया है कि प्रदर्शनकारी इस इमेल कैंपेन में सहभागी बनें।

ईमेल फॉरमैट में लिखा है दिशा रवि का नाम

SFJ का पोस्टर वेबसाइट पर देखा जा सकता है। यह बताता है कि ये वेबसाइट टूलकिट के क्रिएटर्स और दंगाइयों के लिए बनाया गया है। इस पर राजदूतों को ईमेल भेजने का लिंक भी है।

वेबसाइट पर पोस्टर

इसमें अलग से दिशा रवि का नाम है। जिसके साथ लिखा गया है, “दिशा रवि एक पर्यावरण एक्टिविस्ट हैं जिन्हें गिरफ्तार किया गया है और टूल किट बनाने व शेयर करने के लिए देशद्रोह की धारा लगाई गई है।”

वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

हमने जब वेबसाइट के बारे में और जानकारी जुटाई तो हमें पता चला कि इसे 16 फरवरी 2021 को ही बनाया गया है।

इसमें कॉन्टैक्ट की जानकारी छिपाई हुई है लेकिन पंजीकृत संगठन का नाम पन्नू लॉ फर्म पीसी है, जिसका दफ्तर न्यूयॉर्क और कैलिफोर्निया में है। ये कंपनी सिख फॉर जस्टिस के गुरपतवंत सिंह पन्नू की है।

टूलकिट का पूरा मामला

बता दें कि 4 फरवरी 2021 को पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने सोशल मीडिया पर टूलकिट पोस्ट किया था। इस टूलकिट से साफ पता चला था कि कैसे भारत के विरोध में एक वैश्विक प्रोपगेंडा चलाया जा रहा है, जिसके लिंक खालिस्तान समर्थक व खालिस्तानी संगठनों से है।

पुलिस ने इस टूलकिट का संबंध 26 जनवरी को हिंसा के साथ देखते हुए  इस केस में मुकदमा दर्ज किया था। बाद में कई लोग इसकी एडिटिंग, इसे बनाने और इसके डिस्ट्रिब्यूट करने के लिए धरे गए। इनमें एक 21 साल की दिशा रवि भी थीं। कथितततौर पर दिशा की ग्रेटा से मैसेज पर बात हुई थी और उससे ये भी कहा था कि उसका ये ट्वीट उनका यूएपीए लगवा सकता है।

बाद में निकिता जैकब और शांतनु के ख़िलाफ़ गैर जमानती वारंट जारी हुआ, जो मामला दर्ज होने के बाद से ही फरार थे। दोनों ने अपनी बेल के लिए उच्च न्यायालयों में आवेदन किया था, जिसमें से निकिता को 10 दिन की ट्रांजिट जमानत दी गई।

पुलिस ने दंगों और पीटर फ्रेडरिक के बीच के लिंक का भी खुलासा किया, जिसके आतंकी संगठनों से जुड़े होने के कारण खूफिया एजेंसी 2006 से नजर बनाए हुए हैं। दिल्ली पुलिस ने बताया कि इन तीन लोगों ने 67 अन्य लोगों के साथ खालिस्तानी संगठन के साथ जूम कॉल की थी, जिसमें ये बात हुई थी कि आखिर दंगों के लिए प्रदर्शनकारियों को कैसे उकसाया जाए।

कुमारस्वामी और सिद्धारमैया ने राम मंदिर निधि समर्पण अभियान को लेकर उगला जहर, कहा- RSS कर रहा नाजियों वाले काम

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अयोध्या श्री राम मंदिर समर्पण निधि अभियान पर सवाल उठाए हैं। जेडीएस नेता और पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी के बयान पर विश्व हिंदू परिषद ने अपनी नाराजगी प्रकट की है। कुमारस्वामी ने आरोप लगाते हुए कहा था कि राम मंदिर निधि समर्पण अभियान के कार्यकर्ता कर्नाटक में राम मंदिर के नाम पर पैसा इकट्ठा कर रहे हैं, लेकिन जो पैसा नहीं दे रहा है उसका नाम लिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि नाजियों ने जो जर्मनी में किया था, वैसा ही RSS यहाँ पर कर रहा है।

इसके बाद कुमारस्वामी ने एक बयान में कहा, “मुझे राम मंदिर के लिए पैसे के योगदान की चिंता नहीं है। यदि आवश्यक हुआ तो मैं भी योगदान दूँगा। लेकिन सही जानकारी कौन दे रहा है? पैसा इकट्ठा करने में पारदर्शिता कहाँ है? कई लोग दूसरों को धमकी देकर पैसा इकट्ठा कर रहे हैं।”

इस बयान पर वीएचपी की नाराजगी के बाद कुमारस्वामी ने सोमवार (फरवरी 16, 2021) कहा कि उन्होंने किसी भी संगठन के नाम का जिक्र नहीं किया है। उन्होंने कहा, “किसने दान देने की अनुमति दी है? इसके लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता होती है। किस आधार पर लोग सड़कों पर और हर गाँव में पैसा इकट्ठा कर रहे हैं? वे किसको हिसाब देंगे? भावनाओं को आहात कर पैसा जुटाया जा रहा है।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, VHP ने कुमारस्वामी के बयान को बेहद गैरजिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि विभिन्न संगठनों के स्वयंसेवक समाज के सभी वर्गों तक पहुँच रहे हैं और उन्हें सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये स्वयंसेवक लोगों से पैसे की माँग भी नहीं करते हैं फिर भी लोग अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए योगदान भी दे रहे हैं क्योंकि सभी का दृढ़ता से मानना ​​है कि श्रीराम भारत की पहचान हैं।

वहीं, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने मंदिर निर्माण के लिए दान को लेकर कहा, “अगर वे चंदा माँगने आएँगे तो मैं बोल दूँगा कि अयोध्या में विवादित राम मंदिर के लिए चंदा नहीं दूँगा। मैं कहीं दूसरी जगह बन रहे राम मंदिर के लिए दान दे दूँगा। भले ही मामला सेटल हो गया है लेकिन विवाद हमेशा बरकरार रहेगा।”

मछुआरों को मूर्ख समझते हैं राहुल गाँधी? मंत्रालय के नाम पर पुडुचेरी में क्यों बोला झूठ… जबकि मौजूद है मत्स्य विभाग

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अक्सर अपने बयानों और आँकड़ों की वजह से चर्चा में रहते हैं, क्योंकि इसका न तो सिर होता है और न ही पैर। पुडुचेरी में अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले 4 दिनों की यात्रा के लिए वहाँ पहुँचे राहुल गाँधी ने तीनों कृषि कानूनों को मछुआरों और मत्स्य पालकों से जोड़ दिया और कहा कि उनके लिए कोई मंत्रालय नहीं। लेकिन, इस दौरान जानकारी के अभाव में उन्होंने अपनी ही किरकिरी कराने वाली बात कह दी।

राहुल गाँधी ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने उन किसानों के खिलाफ तीन कृषि कानून पारित कर दिए, जो इस देश की रीढ़ हैं। उन्होंने आगे कहा, “आपलोग सोच रहे होंगे कि मछुआरों की बैठक में मैं किसानों की बात क्यों कर रहा हूँ। असल में मैं आप लोगों को समुद्र का किसान मानता हूँ। अगर किसानों के लिए दिल्ली में अलग से मंत्रालय हो सकता है तो फिर समुद्र के किसानों के लिए क्यों नहीं?”

सच्चाई ये है कि मत्स्य पालन और बाजार के लिए पहले से ही विभाग है और ये ‘पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन’ मंत्रालय के अंतर्गत आता है। वर्तमान में बिहार के बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह इसके मंत्री हैं। सरकार मत्स्य पालन से जुड़े किसानों के लिए ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ भी लेकर आई है। यही विभाग अंतर्देशीय तथा समुद्री मत्स्यन व मात्स्यिकी से जुड़े मामलों को भी देखता है। इस हिसाब से समुद्री मछुआरों के हित भी इसी में आते हैं।

इस मंत्रालय का लक्ष्य है कि ताजा तथा खारे जल में जलकृषि का विस्तार और मछुआरा समुदाय आदि का कल्याण के लिए कार्य किया जाए। इसीलिए, राहुल गाँधी ने जो कहा कि मछुआरों और मत्स्य पालन के लिए दिल्ली में विभाग नहीं, वो झूठ है। सरकार मछली पालन के लिए ऋण देने की व्यवस्था भी करती है और किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित भी करती है। देश में एक ‘मात्स्यिकी विकास बोर्ड’ भी है, जो इन मामलों को देखता है।

इसी तरह से राहुल गाँधी ने हाल ही में राजस्थान के अजमेर में कहा था कि कृषि दुनिया का सबसे बड़ा बिजनेस है, जो 40 लाख करोड़ रुपए का है। अगले ही दिन असम के शिवसागर में उन्होंने कहा कि पूरा ’80 लाख करोड़ का हिंदुस्तान का सबसे बड़ा बिजनेस’ सिर्फ दो लोगों के हाथ में चला जाएगा। उन्होंने दोनों जगह जाकर अपने आँकड़े बदल दिए।