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दीदी की सत्ता के साथ ही गंगा सागर में डूब जाएगी प्रशांत किशोर की दुकान?

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी टीएमसी में मची भगदड़ के बीच चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि बीजेपी दोहरे अंक में पहुँचने के लिए संघर्ष करेगी। बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा है कि चुनाव के बाद देश एक रणनीतिकार खो देगा। ध्यान रहे पीके 2021 में होने वाले बंगाल चुनाव के लिए टीएमसी की रणनीति बना रहे हैं। हाल में कई नेताओं ने उनके तौर-तरीकों का विरोध करते हुए टीएमसी छोड़ी है।

For all the hype AMPLIFIED by a section of supportive media, in reality BJP will struggle to CROSS DOUBLE DIGITS in #WestBengal

PS: Please save this tweet and if BJP does any better I must quit this space!

— Prashant Kishor (@PrashantKishor) December 21, 2020

आज सुबह ट्वीट कर प्रशांत किशोर ने बताया, “मीडिया का एक वर्ग बीजेपी के समर्थन में माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, हकीकत यह है कि बीजेपी दहाई के आँकड़े के लिए संघर्ष कर रही है। अगर बीजेपी बंगाल में बेहतर प्रदर्शन करती है तो मैं इस जगह को छोड़ दूँगा।”

प्रशांत किशोर के इस ट्वीट के आने के बाद ही सोशल मीडिया पर दिग्गज नेताओं की प्रतिक्रिया आने लगी है। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय लिखते हैं, ”भाजपा की बंगाल में जो सुनामी चल रही है, सरकार बनने के बाद इस देश को एक चुनाव रणनीतिकार खोना पड़ेगा।”

यशवंत देशमुख लिखते हैं, “वाह! तो इनके अनुसार 99 सीटों तक पहुँचना बीजेपी के लिए एक अलग तरह की संभावना है। हकीकत में ये वाकई दिलचस्प है। इस समीकरण के मुताबिक भले ही कॉन्ग्रेस और लेफ्ट 50 % बिखर जाएँ, लेकिन क्या दीदी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार हो रही हैं।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर प्रशांत किशोर को इस समय यूजर्स सस्ता योगेंद्र यादव बता रहे हैं। लोग उन्हें बता रहे हैं कि वो बिहार में तो अपना अस्तित्व बचा नहीं पाए, लेकिन बंगाल में मास्टरगिरी कर रहे हैं।

जेनिश पटेल लिखते हैं, “इस चुनाव के बाद तो वैसे भी आपकी विदाई तय है, घोषणा करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसके बाद आपको कोई सीरियस लेगा ही नहीं।”

बोधगया के पूर्व विधायक हरि मांझी लिखते हैं, “मुझे अंग्रेज़ी नहीं आती, इसलिए मेरे एक साथी ने बताया की प्रशांत किशोर जी क़हिन है कि ‘भाजपा बंगाल में दहाई का आँकड़ा नहीं छू पाएगी’ प्रशांत जी मोटी रक़म लेकर ही आप ममता दी का काम कर रहे तो अब आप चुनाव बाद वो रक़म लौटाने का प्रबंध कीजिए क्यूँकि दीदी ज़ोरदार हार रही है। जय श्री राम।”

एबीपी पत्रकार रुबिका लियाकत प्रशांत किशोर के ट्वीट को लेकर दावा करती हैं कि प्रशांत ने ‘चित भी मेरी पट भी मेरी’ के तहत ट्वीट किया है। उनका कहना है कि उन्होंने वर्तमान राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया लेकिन लोग कह रहे हैं कि उन्होंने ट्विटर छोड़ने की बात की है।

यहाँ गौरतलब हो कि भाजपा का दावा है कि बंगाल चुनावों में वह ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाले हैं लेकिन प्रशांत किशोर जैसे चुनाव रणनीतिकार की बात सामने आने के बाद अब हर भाजपा समर्थक उन्हें चुनौती दे रहा है। उनसे ट्विटर, राजनीति छोड़ने की तैयारी करने को कहा जा रहा है।

बता दें कि प्रशांत किशोर पिछले कई चुनावों से चर्चा में नहीं रहे। साल 2014 के बाद उनकी भूमिका सिर्फ लालू-नीतिश गठबंधन में नजर आई थी। इसके बाद उनकी भूमिका लगभग हर चुनाव में क्षीण रही। यूपी के चुनावों में उन्होंने कॉन्ग्रेस की मदद करने की सोची लेकिन वहाँ पार्टी को बीजेपी से करारी शिकस्त मिली। इसके बाद बिहार में जदयू के जरिए अपनी महत्वाकांक्षा को न साध पाने वाले प्रशांत किशोर काफी समय से राजनैतिक पटल पर गायब चल रहे थे। आज अचानक उन्होंने बंगाल चुनाव को लेकर भविष्यवाणी की है। इसके बाद से मीडिया में उन्हें कवरेज मिल रही है।

कॉन्ग्रेसी नेता हमजा मियाँ से निकाह के बाद आनन्या डागर बनीं शौकत जमानी बेगम, रामपुर के नूर महल में हुईं रस्में

पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खान उर्फ़ उर्फ़ नवेद मियाँ के बेटे एवं कॉन्ग्रेस नेता हैदर अली खान उर्फ़ हमजा मियाँ का शुक्रवार (दिसंबर 18, 2020) को हरियाणा के कारोबारी रोहित सिंह डागर की बेटी आनन्या के साथ निकाह हुआ। निकाह के साथ ही आनन्या डागर अब शौकत जमानी बेगम बन गई हैं। हमजा मियाँ और आनन्या डागर इससे पहले कोर्ट मैरिज कर चुके हैं। नवाब कालिज रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खान के पौत्र हैं।

वहीं हमजा मियाँ को ‘नवाबजादा’ के रूप में जाना जाता है। उनके निकाह से पहले कुरानख्वानी की रस्म पूरी की गई। दुल्हन अपने परिजनों के साथ निकाह के 1 दिन पूर्व ही रामपुर पहुँच गई थी। पूर्व सांसद बेगम नूरबानो, नवाब की बीवी बेगम यासीन अली खान उर्फ़ शाहबानो, बड़े बेटे नवाबजादा अली मोहम्मद खान उर्फ़ कहवान मियाँ, उनकी पत्नी शाज़ली अली खान सहित कई बड़े अतिथि इस मौके पर कार्यक्रम का हिस्सा बने।

मेहंदी, चूड़ी, ढोल छपाई, चौघड़ा, उबटन और दुल्हन की गोद भराई की रस्में पूरे शानो-शौकत के साथ गुरुवार को ही पूरी कर ली गई थी। पूर्व मंत्री के PRO काशिफ खान ने मीडिया को जानकारी दी कि मौलाना शाह खालिद खान और मौलाना अली मौहम्मद नक़वी ने नूर महल में निकाह पढ़ाया। इस नूर महल को नवाब खानदान की शान माना जाता है। इंदिरा गाँधी, एचडी देवेगौड़ा और मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री रहते यहाँ का दौरा कर चुके हैं।

अंग्रेजों के जमाने में जब रामपुर में नवाबों का आज हुआ करता था, तब कोठी खास बाग के पास बनवाए गए राजभवन में नवाब रहते थे, वहीं अंग्रेजों के प्रतिनिधि के रूप में वायसराय इसी नूर महल में रहा करते थे। देश की स्वतंत्रता के बाद इसे गेस्ट हाउस में तब्दील कर दिया गया। नवाब रजा अली खान के बेटे नवाब जुल्फिकार अली खान उर्फ़ मिक्की मियाँ के नाम पर जुल्फिकार मंजिल इसका नाम रखा गया। इसे जुल्फिकार और नूरबानों के प्यार की निशानी भी माना जाता है।

बताया गया है कि हमजा मियाँ की शाही शादी में कोरोना संक्रमण के कारण सिर्फ रिश्तेदार, पारिवारिक मित्र और राजघरानों के प्रतिनिधि ही शामिल हुए। रामपुर में दावत-ए-आम का आयोजन जनवरी के प्रथम सप्ताह में किया जाएगा। निकाह पढ़ाने के लिए शिया और सुन्नी, दोनों समुदाय के मौलाना को रखा गया था। दोनों तरीकों से निकाह पढ़ाया गया। पूरे नूर महल को भव्य रूप से सजाया गया था, जहाँ निकाह की रस्में पूरी की गईं। बता दें कि सपा नेता आजम खान भी रामपुर में राजनीति करते रहे हैं।

चर्च की वेदी पर लिटा कर ननों से रेप, मार डाले सारे पादरी: बातु खान की हँसती फौज और जिंदा जले लोगों की कहानी

पूरी दुनिया के ईसाई क्रिसमस के खुमार में डूबे हैं। लेकिन इससे पहले की कुछ कड़वी यादें भी हैं। जिस ब्रिटिश राज में क्रिसमस दुनिया भर में लोकप्रिय हुआ, इस्लामी आक्रांताओं के राज में इसी दौरान कभी खून की नदियाँ बही थी। पश्चिमी रूस में एक शहर है रियाज़ान (Ryazan), जो ऐतिहासिक इमारतों के लिए जाना जाता है। लेकिन, आज भी ये शहर बातु खान का नाम सुनते ही थर्रा उठता है। मंगोलों का हमला बुरी यादों में बसा है।

रियाज़ान के बारे में बता दें कि ये रूस की राजधानी मॉस्को से 196 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में ओका नदी के किनारे स्थित है। इसके बगल में ही पुराना रियाज़ान स्थित है, जो रूस का पहला शहर था जिसे मंगोलों ने तबाह किया। आज साढ़े 5 लाख की जनससंख्या वाला रियाज़ान सेन्ट्रल रूस के 5 बड़े शहरों में से एक है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र को जर्मनी की बमबारी का भी सामना करना पड़ा था। उससे सैकड़ों वर्ष पहले बातु खान के नेतृत्व में मंगोलों ने रियाज़ान पर हमला किया था।

बात उस समय की है, जब पूरी दुनिया में मंगोल सबसे शक्तिशाली लड़ाका हुआ करते थे और चंगेज खान का नाम सुनते ही सब काँप उठते थे। जिस शहर में वो घुसता, वहाँ के लोगों के पास दो ही विकल्प होता था- या तो उसकी सेना में शामिल हों, या फिर मारे जाएँ। हाँ, महिलाओं के पास कोई विकल्प नहीं होता था। चंगेज खान ने खुद अपने जीवनकाल में दसियों हजार महिलाओं का बलात्कार किया था। मुग़ल तैमूर और चंगेज खान के ही वंशज थे।

अपने सबसे बड़े बेटे जोची की मौत के बाद चंगेज खान ने ‘Golden Horde (उत्तर-पूर्वी मंगोल साम्राज्य)’ का हिस्सा अपने पोते और जोची के बेटे बातु खान को दे दिया। सन 1227 में चंगेज खान की मौत हो गई और वोल्गा नदी के पश्चिमी इलाके पर बातु खान का राज हुआ, जबकि वोल्गा से लेकर दुनिया के सबसे बड़े झीलों में से एक बलख़श तक उसके भाई ओरडा ने शासन किया। इसके बाद मंगोलों ने यूरोप की ओर कदम बढ़ाए।

बातु खान के आक्रमण के डेढ़ दशक पहले के रूस के इतिहास लेखकों से पता चलता है कि इस अचानक आक्रमण के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं था कि ये कौन लोग हैं, कहाँ से आ धमके हैं और किस मजहब का पालन करते हैं। तब के रूसी इतिहासकार लिखते हैं कि भगवान या बहुत विद्वान लोगों को ही पता है कि ये अनजान लोग कौन हैं। वहाँ के जनजातियों ने कई राजाओं से मदद माँगी। रूस के कई इलाकों के शासकों ने कालका नदी के किनारे मंगोलों से युद्ध लड़ा, लेकिन वो हार गए।

ये सब चंगेज खान के जिंदा रहते हुआ था। अब बारी उसे पोते बातु खान की थी। वो 40,000 की सेना के साथ निकला और सबसे पहले बुल्गारिया को अपने अधीन किया। इसके बाद उसने व्लादिमीर के यूरी-II को संदेशा भेजा कि वो मंगोलों की अधीनता स्वीकार करे। तत्पश्चात उसने रियाज़ान में कदम रखा। इसके बाद जो तबाही मचाई गई, उसकी यादें लोकगीतों और लोककथाओं के रूप में रूस में आज भी सुनाई जाती हैं।

सन 1237 में वो पतझड़ का मौसम था, जब कड़ी ठण्ड में भी मंगोल आक्रांताओं की लड़ाई पर कोई फर्क नहीं पड़ता था और वो एक के बाद एक साम्राज्यों को जीतते जा रहे थे। वोरोझेन नदी के किनारे रियाज़ान की रक्षक सेना के साथ मंगोलों का युद्ध हुआ और उन्हें हरा कर वो आगे बढ़ निकले। वहाँ के लोग जीवट थे, उन्होंने मंगोलों के पहले हमले को नाकाम कर दिया। इसके बाद मंगोलों ने उन्नत किस्म के विशाल गुलेलों का प्रयोग किया।

इससे रियाज़ान की रक्षात्मक संरचनाएँ ध्वस्त हो गईं। वो 21 दिसंबर 1237 का दिन था जब शहर में बातु खान के नेतृत्व में मंगोल घुसे। पूरे शहर में आग लगा दिया गया। सब कुछ धू-धू कर जल उठा। प्रिंस यूरी और उसके परिवार पर हमला कर दिया गया। उस समय वहाँ की जनसंख्या क्या थी, इसका अंदाज़ा तो नहीं है, लेकिन इतना ज़रूर कहा जाता है कि पूरे शहर में एक भी व्यक्ति जिंदा नहीं बचा था। सारे के सारे मार डाले गए।

मंगोलों के छोटे घोड़ों (Poneys) के लिए बर्फ की परत सख्त होती थी और वो उस पर सरपट भागते थे। उन घोड़ों को बर्फ को खोद कर घास निकालने का प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे उन्हें भोजन मिलता था। मंगोल सिल्क के कपड़े पहना करते थे और ऐसे कई Poneys रखा करते थे। अंग्रेजों के तीरों से उनके छोटे तीरों का रेंज कुछ अधिक होता था। वो एक इलाका जीतने के बाद तबाही की खबर आगे तक पहुँचने देते थे, तब आगे बढ़ते थे।

इससे दुश्मन कमजोर होता था। 1237 के क्रिसमस से पहले मंगोलों की सेना रियाज़ान के सबसे बड़े चर्च में घुसी। वहाँ का मुख्य बिशप भाग खड़ा हुआ। प्रिंस यूरी की माँ और पत्नी सहित पूरे परिवार को मार डाला गया। वहाँ जितने भी पादरी थे, उन सभी को आग में झोंक दिया गया। रूस के तब के इतिहासकार कहते हैं कि न जाने उन्होंने कौन सा पाप किया था कि शहर में एक भी व्यक्ति जिंदा नहीं बचा।

होली चर्च में ननों के साथ एक-एक कर बलात्कार किया गया। जब आग से जलते हुए लोग चिल्ला रहे थे, तब मंगोल ताली बजा-बजा कर हँस रहे थे। जहाँ चर्च में सारी धार्मिक प्रक्रियाएँ होती हैं, उसी वेदी पर ननों को लिटा कर उनके साथ बलात्कार किया गया। मंगोलों को अब रूस को अधीन करने में कोई रुचि नहीं थी क्योंकि वो जानते थे कि अब वो किसी की भी हत्या कर सकते हैं, कुछ भी लूट सकते हैं।

1915 और 1979 में रियाज़ान के पुराने शहर की खुदाई हुई, जिसमें 97 कटे हुए सिर मिले। इसके अलावा कई बड़े कब्रिस्तान मिले, जिनमें से 143 लाशें निकाली गईं। ये सभी तभी मारे गए थे, जब वहाँ मंगोलों का हमला हुआ था। रूसी इतिहासकार लिखते हैं कि रोने और शोक मनाने तक के लिए कोई नहीं बचा था। मंगोल यहीं नहीं रुके, बल्कि वो और आगे बढे और रूस व ब्लादिमीर के कई क्षेत्रों पर अपना कब्ज़ा जमाया।

कहते हैं कि प्रिंस फेडोर ने बातु खान को खरीदने की भी कोशिश की थी। वो कई गिफ्ट लेकर उसके पास पहुँचा था, लेकिन बातु खान की जिद थी कि उसे एक ही गिफ्ट चाहिए और वो है प्रिंस यूरी की पत्नी। बातु खान मजाक नहीं कर रहा था, उसने मौके पर ही प्रिंस फेडोर को मार डाला। इसके बाद हंगरी, रोमानिया और पोलैंड पर उसने हमला किया। लेकिन, 1237 की क्रिसमस और बातु खान रूस की कड़वी याद बन गया।

400 वर्षों में पहली बार… एक साथ दिखेंगे बृहस्पति और शनि: जानिए कब और कैसे देख सकेंगे आप ये सुनहरा दृश्य!

आज सोमवार (दिसंबर 21, 2020) को आकाश में अलग ही नजारा देखने को मिलने वाला है, जब दो गृह बृहस्पति और शनि एक दूसरे के इतने करीब आ जाएँगे कि पृथ्वी पर दोनों को अलग-अलग देखना मुश्किल हो जाएगा। वो एक ही पिंड की तरह दिखेंगे। इसे ‘Great Conjunction’ कहा जाता है। ये नजारा ‘Winter Solstice’ के दौरान देखने को मिलता है, जब सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में अपने सबसे निचले बिंदु में दिखता है।

ये तब होता है, जब वो पृथ्वी के मकर रेखा के ऊपर सबसे दूर दक्षिणी बिंदु पर दिखाई देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये उत्तरी गोलार्द्ध में रहने वाले लोगों के लिए सबसे छोटा दिन होता है, लेकिन सबसे देरी से सूर्योदय और सबसे पहले सूर्यास्त वाला दिन नहीं होता है। ये दिन इस ‘Winter Solstice’ के दो हफ्ते पहले और दो हफ्ते बाद आता है। इस समय पृथ्वी के दीर्घ वृत्ताकार (पूर्ण वृत्त नहीं) परिक्रमण के कारण सूर्य के साथ उसकी दूरी घटती रहती है।

‘Great Conjunction’: जब ‘एकाकार’ दिखेंगे बृहस्पति और शनि

सूर्य हमेशा आकाश में एक ही बिंदु में स्थित नहीं रहता है। ये गर्मियों में ऊपर और सर्दियों में नीचे होता है। सोमवार को हमें ‘Great Conjunction’ देखने को मिलेगा। बृहस्पति और शनि इतने पास आ जाएँगे कि आप दोनों में भेद पहचान ही नहीं पाएँगे। आप नंगी आँखों से भी इस खगोलीय घटना को देख सकते हैं। लेकिन, ये आपके क्षेत्र में मौसम पर भी निर्भर करेगा। 2000 में भी ऐसा हुआ था, लेकिन तब दोनों ग्रहों के बीच दो पूर्ण चन्द्रमा की दूरी थी, इसीलिए वो इतने पास नहीं दिखे थे।

पिछले 400 वर्षों में ये दोनों ग्रह सबसे करीब आने वाले हैं। इसे ईसाई महजब में ‘क्रिसमस स्टार’ भी कहा गया है। हालाँकि, बृहस्पति और शनि हर 20 वर्षों बाद अपनी मार्गरेखा में करीब आते हैं, लेकिन इससे पहले ये 1623 में ही आज की तरह नजदीक आए थे। ये भी जानने लायक बात है कि यहाँ से दोनों भले करीब दिखें, लेकिन असल में वो इतने करीब आकर भी आकाश में लाखों कोस की दूरी पर स्थित होंगे।

आप सूर्यास्त के बाद इस नज़ारे को देख सकते हैं। ये अचानक से ख़त्म नहीं होगा, बल्कि कुछ दिनों तक रहेगा। गूगल ने भी डूडल बना कर अपने होमपेज पर इस घटना का उल्लेख किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जहाँ ‘Great Conjunction’ इस पर निर्भर करता है कि पृथ्वी, बृहस्पति और शनि की सूर्य के परिक्रमण के मार्ग में उसके साथ स्थिति क्या है, वहीं ‘Winter Solstice’ पृथ्वी की अक्ष पर उसके झुकाव पर निर्भर होता है।

इससे पहले सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को साल 2020 का अंतिम सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) लगा था, लेकिन ये भारत में नहीं दिखा। बता दें कि सूर्यग्रहण भी 3 प्रकार के होते हैं। ‘टोटल’ (पूर्ण) सूर्यग्रहण (Total Solar Eclipse) उसे कहते हैं, जिसे पृथ्वी के एक छोटे हिस्से से ही देखा जा सकता है। आकाश में अँधेरा छा जाता है, जैसे रात हो गई हो। इस दौरान सूर्य, चाँद और पृथ्वी एकदम सीधी रेखा में होते हैं। जबकि दूसरे प्रकार के सूर्यग्रहण को आंशिक (Partial Solar Eclipse) सूर्यग्रहण कहते हैं।

अहमदुल्लाह… सासु माँ का दुपट्टा… सना खान के निकाह का 1 महीना पूरा, शेयर किया वीडियो

बॉलीवुड को छोड़ कर इस्लाम के रास्ते पर निकल गईं पूर्व अभिनेत्री सना खान की नई वीडियो उनके इंस्टाग्राम पर सामने आई है। इस वीडियो में उन्होंने अपने निकाह के एक माह पूरे होने की जानकारी देते हुए अपनी खुशी जाहिर की। सना ने बताया कि मुफ्ती अनस से निकाह करना उनका अब तक का सबसे बेस्ट निर्णय था।

सना खान ने अपने इंस्टाग्राम अकॉउंट पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “पिछले महीने इसी दिन मैंने कुबूल है कहा था। आज एक महीना हो चुका है, बस ऐसे ही हँसते-हँसते पूरी जिंदगी निकल जाए। मैंने जिंदगी का बेस्ट फैसला लिया है। ये दुपट्टा मेरी सासू माँ ने मेरे लिए बनाया था।”

इस वीडियो को देख सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपनी खुशी जाहिर की है। सबीहा अब्दुल्ला ने लिखा, “आपको बदलते देख कर मुझे बहुत बहुत अच्छा लगा।” वहीं अन्य यूजर्स ने माशाल्लाह लिख कर सना खान की तारीफ की।

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले सना खान ने बॉलीवुड छोड़कर इस्लाम के रास्ते पर जाने का ऐलान किया था। इसके बाद खबर आई थी कि उन्होंने गुजरात के मुफ्ती अनस से निकाह कर लिया। कई लोग इस खबर को जानने के बाद काफी शॉक भी हुए और उन्होंने दोनों की जोड़ी में जमीं आसमान का फर्क़ बताया। 

वहीं कई समुदाय विशेष के लोग इस खबर को सुनने के बाद बहुत खुश दिखे और उन्होंने सना खान के नए अवतार को सराहा। इन लोगों का कहना था कि अनस ने सना से निकाह करके उन पर एहसान किया है, उन्हें सही रास्ता दिखाया है।

बता दें कि अनस से निकाह के बाद सना खान लगातार सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें आए दिन शेयर करती रहती हैं, जिसे देख कट्टरपंथी उन पर और मुफ्ती अनस पर सवाल भी उठाते हैं। अभी हाल में अनस को लेकर कहा गया था कि उनकी संगत में सना में आए परिवर्तन अब नहीं दिख रहे, लेकिन वह खुद मुफ्ती से एक्टर बनते जा रहे हैं।

गौरतलब हो कि सना खान सोशल मीडिया पर कभी भी कट्टरपंथियों के प्रश्नों का जवाब देती नजर नहीं आईं। लेकिन हाल में सना ने बताया था कि उन्होंने अनस से निकाह फैसला रातों-रात नहीं किया। उन जैसा इंसान पाने के लिए उन्होंने कई सालों इबादत की है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में सना खान ने अनस से एक मुलाकात के दौरान हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा, “उन्होंने मुझसे कहा था कि अगर कोई चीज गटर में गिर गई हो तो उसके ऊपर आप 10 बाल्टी पानी भी डाल दो, वो साफ नहीं होती। लेकिन आप उसे गटर से बाहर निकालकर एक गिलास पानी डाल दो तो वह साफ हो जाती है। उनकी इस बात ने मुझे काफी प्रभावित किया था।”

अपनी निकाह को लेकर सना ने कहा, “अनस के अंदर जो चीज मुझे सबसे अच्छी लगती है वो ये है कि अनस शरीफ हैं। उनके अंदर हया है। वो जजमेंटल नहीं हैं।” उन्होंने कहा, “ये कोई जल्दबाजी का निर्णय नहीं था। ऐसे इंसान को पाने के लिए मैंने सालों इबादत की है।”

‘किसान’ आंदोलन में भीड़ बढ़ाने का तरीका: लालच देकर लाई गई 3 महिलाओं ने खोला काला चिट्ठा, लौटना चाहती हैं घर

‘किसान’ आंदोलन के नाम पर प्रदर्शन स्थल पर बैठी 3 महिलाओं की पीड़ा जानने के बाद अब इस प्रदर्शन की मंशा पर सवाल उठना लाज़मी हो गया है। इन महिलाओं के नाम वीनू, सुनीता और पप्पी हैं। तीनों का आरोप है कि इन्हें एक व्यक्ति बरेली के फरीदपुर से यूपीगेट तक लाया और फिर वहाँ इन्हें बैठा कर गायब हो गया।

दैनिक जागरण में शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को प्रकाशित हुई खबर के मुताबिक, यूपीगेट पर भीड़ बढ़ाने के लिए इन लोगों को लालच दिया गया और अब तीनों महिलाओं को इस लालच में फँसने का अफसोस हो रहा है।

महिलाएँ आपबीती सुनाते हुए उस व्यक्ति को कोसती हैं, जो उन्हें यूपी गेट तक लाया। वह कहती हैं कि इससे अच्छी तो वह फरीदपुर में ही थीं। सरकार ने उन्हें रहने के लिए घर दिया था। हर महीने राशन मिल रहा था। फैक्ट्री में नौकरी भी चल रही थी। लेकिन अब यूपीगेट में कुछ भी नही हैं। 

महिलाओं के अनुसार उन्हें इलाज के लिए पैसे चाहिए थे, इसलिए जब उन्हें पैसे देने को कहा गया तो वह उस व्यक्ति के साथ चल दीं। हालाँकि अब उनके पास सर्दी में ठिठुरने की बजाय कोई रास्ता नहीं है। खबर के अनुसार, महिलाओं के पास न कंबल है और न उन्हें गर्म कपड़े मिले हैं।

बता दें कि तीनों महिलाओं की अलग-अलग परेशानियाँ हैं, जिसका इस्तेमाल उन्हें यूपीगेट तक लाने के लिए किया गया। जैसे सुनीता के अनुसार, एक हादसे में उनके शरीर के कुछ हिस्से जल गए थे, जिस वजह से वह काफी परेशान हैं। वहीं पप्पी को पथरी हो गई थी और उन्होंने हाल में अपना ऑपरेशन करवाया था। वीनू कहती हैं कि उनके पति के हाथ में फ्रैक्चर है, जिसकी वजह से वह कई दिन से चारपाई पर पड़े हैं।

महिलाएँ बताती हैं कि उन्हें इलाज और रुपया दोनों का लालच दिया गया। इसी कारण वह बरेली से यूपीगेट आ गईं। वह कहती हैं कि जब इस आंदोलन से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनकी कोई मदद भी नहीं हो रही तो आखिर उनको यहाँ क्यों लाया गया। तीनों महिलाएँ सुरक्षित अपने घरों को वापस लौटना चाहती हैं। वहाँ जाकर वह अपना वही जीवन फिर से जीना चाहती हैं।

उल्लेखनीय है कि वीनू, सुनीता और पप्पी नाम की तीनों महिलाएँ एक ओर जहाँ इस आंदोलन के नाम पर ठगा हुआ महसूस कर रही हैं, वहीं केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ ने आज (दिसंबर 21, 2020) से सभी धरना स्थलों पर 24 घंटे की क्रमिक भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है।

‘किसानों’ ने कहा है कि वो 25-27 दिसंबर तक हरियाणा के सभी टोल नाकों को मुफ्त कर देंगे और दो दिनों तक हरियाणा के नाकों पर टोल नहीं वसूलने दिया जाएगा। जबकि, पंजाब में पहले से ही कई नाकों पर टोल की वसूली नहीं हो रही है।

ग्रेजुएट लड़की का गैंगरेप, एहतेशाम और राजा गिरफ्तार: नौकरी का झाँसा देकर बुलाया था इंटरव्यू के लिए

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में दिल्ली की एक महिला के उत्तराखंड के 2 लोगों द्वारा गैंगरेप का मामला सामने आया है। आरोप है कि 23 वर्षीय महिला को जॉब इंटरव्यू के लिए यहाँ बुलाया गया था, जिसके बाद उसके साथ गैंगरेप हुआ। दिल्ली के मीठापुर की रहने वाली पीड़िता ने बताया कि वो आरोपितों में से एक के साथ संपर्क में थी, जिसने उसे जॉब का ऑफर दिया था और मोरादाबाद इंटरव्यू के लिए बुलाया था।

महिला को मेडिकल टेस्ट के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। वहीं दोनों आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रविवार (दिसंबर 20, 2020) को पुलिस ने IPC की धारा 376D (गैंगरेप), 327 (अवैध कार्य कराने को मजबूर करने के लिए स्वेच्छापूर्वक चोट पहुँचाना), 328 (अपराध करने के आशय से क्षति कारित करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत FIR दर्ज कर के कार्रवाई शुरू कर दी है।

दोनों आरोपित एहतेशाम और राजा उत्तराखंड के काशीपुर में रहने वाले हैं। ‘हिन्दू जागरण मंच’ के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि इन दोनों ने छद्म हिन्दू नाम के साथ महिला को धोखे में डाला, इसीलिए उनके खिलाफ जबरन धर्मांतरण के तहत भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस-प्रशासन से माँग की है कि ‘लव जिहाद (ग्रूमिंग जिहाद)’ की धाराएँ लगाई जाएँ। महिला स्नातक है और सोशल मीडिया के जरिए एक आरोपित के जरिए संपर्क में आई थी।

आरोपित ने खुद का परिचय एक ऑनलाइन एक्सपोर्ट कंपनी के मैनेजर के रूप में दिया। शनिवार को महिला जॉब इंटरव्यू के लिए बुलाए जाने पर मुरादाबाद पहुँची और बस स्टैंड पर ही दोनों आरोपित उससे मिलने पहुँचे। इसके बाद वो महिला को कोतवाली पुलिस थानांतर्गत बुद्ध विहार के एक होटल में लेकर गए, जहाँ उन्होंने रुकने के लिए पहले से ही एक कमरा बुक कर रखा था। महिला का आरोप है कि कमरे में उसे कुछ पीने को दिया गया, जिसमें नशीले पदार्थ मिले हुए थे।

इसे पीते ही वो अचेत हो गई। जब उसे होश आया तो पता चला कि उसके साथ बलात्कार किया गया है और दोनों आरोपित भी वहाँ से रफूचक्कर हो गए थे। होटल के कर्मचारियों को भी आरोपितों के बारे में कुछ पता नहीं था। इसके बाद महिला ने अपने परिजनों से संपर्क किया और मामला दर्ज कराया। पुलिस ने CCTV फुटेज और होटल के कर्मचारियों से पूछताछ के बाद पता लगाया कि दोनों आरोपित राजा और एहतेशाम हैं।

महिला के परिजनों ने हिन्दू कार्यकर्ताओं के साथ थाने पहुँच कर न्याय की माँग की। कोतवाली SHO अशोक कुमार ने कहा कि एक आरोपित सेल्स कंपनी में बतौर मैनेजर कार्यरत है और वो कुछ दिनों से पीड़िता के साथ संपर्क में था। पुलिस का कहना है कि धर्मांतरण का कोई मामला सामने नहीं आया है। पीड़िता का बयान दर्ज कर लिया गया है। मुरादाबाद एसपी प्रभाकर चौधरी ने कहा कि शनिवार की रात गिरफ्तार किए गए आरोपितों को अगले ही दिन जेल भेज दिया गया।

बता दें कि कुछ ही दिनों पहले उत्तर प्रदेश में बरेली के बाद मुरादाबाद में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) को रोकने के लिए लागू किए गए अध्यादेश के तहत मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने परिजनों की शिकायत के आधार पर आरोपित राशिद और उसके भाई सलीम को गिरफ्तार किया था। आरोप लगाया गया था कि कि सोनू उर्फ राशिद हिन्दू युवती को बहला-फुसलाकर उसका धर्म परिवर्तन और निक़ाह करने की फिराक में था।

लद्दाख में घुसे चीनी सैनिक, पहन रखे थे आम कपड़े… स्थानीय लोगों ने खदेड़ कर भगाया, वीडियो वायरल

चीनी सैनिक अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। दक्षिणी लद्दाख के न्योमा क्षेत्र स्थित चांगथांग गाँव में कुछ चीनी सैनिक भारतीय सीमा में घुस आए। ये क्षेत्र लेह से 135 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। वहाँ के लोगों ने रविवार (दिसंबर 20, 2020) को चीनी सैनिकों की इस घुसपैठ का वीडियो भी बना कर जारी किया है। ये सभी चीनी सैनिक आम लोगों की वेशभूषा में अंदर घुसे थे। वो चीनी PLA की वर्दी में नहीं थे।

TOI की खबर के अनुसार, उन्होंने भारतीय सीमा में घुस कर यहाँ के पशुपालकों को हड़काना चाहा। चरवाहों को उनके जानवरों को चराने से मना किया गया। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने न सिर्फ उन्हें भगा दिया, बल्कि ITBP को भी इस हरकत की पूरी सूचना दे दी। चीनी सैनिक 2 गाड़ियों में भर कर आए थे। वो सिविल ड्रेस में थे, लेकिन उनके पास कहीं और रुकने पर काम आने वाले सारे साजो-सामान थे। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद उन्हें वापस जाना पड़ा।

इसकी सूचना मिलते ही ITBP के जवान सक्रिय हुए और इन चीनी सैनिकों का सामना करने के लिए पहुँचे। हालाँकि, अभी तक ITBP का इस सम्बन्ध में कोई बयान नहीं आया है। लेकिन, चीनी घुसपैठ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। अब वो सारे चीनी सैनिक वापस अपने क्षेत्र में भाग खड़े हुए हैं। रुषपो वैली में समुद्र तल से 14,600 मीटर की ऊँचाई स्थित चांगथांग में अधिकतर तिब्बती शरणार्थी रहते हैं।

पैंगोंग त्सो में भारत और चीन की सैनिकों के बीच हुए संघर्ष को 8 महीने बीत चुके हैं, ऐसे में चीन अब भी घुसपैठ की कोशिशों में लगा हुआ है। इस दौरान सीमा पर शांति-व्यवस्था कायम करने के लिए दोनों देशों के कूटनीतिज्ञों और सैन्य अधिकारियों के बीच कई स्तरों की बातचीत हुई। LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर स्थिति अब तो शांत है और भारतीय सशस्त्र बलों ने महत्वपूर्ण चोटियों पर डेरा डाला हुआ है, लेकिन चीन अब भी सुधरा नहीं है।

उधर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने जनरल झाओ जोंगकी की जगह जनरल झांग जुडोंग को भेजा है, जिन्हें भारतीय सीमा के पास तैनाती का कोई अनुभव नहीं है। झाओ को ही भारत-चीन सीमा पर पूर्वी लद्दाख में चले 7 महीने के तनाव के लिए जिम्मेदार माना जाता है। 2017 में डोकलाम विवाद के समय भी उनका ही रोल सामने आया था। उन्हें भारत और भूटान का कट्टर विरोधी माना जाता है। फ़िलहाल वो वेस्टर्न थिएटर कमांड में कार्यरत थे।

भारत अब अगली वार्ता का इंतजार कर रहा है, जिसमें चीनी सैन्य अधिकारियों के बातचीत करने के तरीके से पता चलेगा कि उसके रुख में कोई बदलाव आया है या नहीं। फ़िलहाल इस कदम को भारत सकारात्मक रूप में देख रहा है। जनरल झांग की कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है और वो प्रोफेशनल रूप से निर्णय लेंगे, ऐसा चीनी मीडिया का कहना है। झाओ 65 वर्ष की रिटायरमेंट उम्र तक पहुँचने के बावजूद पद पर बने हुए हैं।

हाल ही में केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि ये नहीं हो सकता कि सीमा पर गड़बड़ी हो और बाक़ी रिश्ते सामान्य बने रहें। भारत ने अपनी तरफ से मामले को समेटने की पूरी कोशिश की है। दोनों देशों के बीच कुछ एग्रीमेंट हैं, जिनका चीन द्वारा पालन नहीं किया गया, जिसकी वजह से समस्या उत्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि पिछले 30-40 साल में भारत-चीन के संबंध संभवत: सबसे मुश्किल दौर में हैं। हमारे समझौतों में ये तय था कि दोनों देश में से कोई सीमा पर बड़ी तादाद में सेना को लेकर न आएगा। लेकिन, चीन ने इस सहमति को तोड़ा।

इंग्लैंड में कोरोना वायरस का नया प्रकार Out of Control: कई देशों की फ्लाइट-बॉर्डर बंद, भारत में इमरजेंसी मीटिंग

इंग्लैंड (यूनाइटेड किंग्डम) में कोरोना वायरस के एक नए प्रकार का पता चला है। कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण दर बहुत ज्यादा है। इस कारण से वहाँ एक बार फिर सख्ती के साथ लॉकडाउन लागू किया गया है।

इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण लगभग 70% तेज दर (पहले मिले कोरोना वायरस की तुलना में) से फैलता है। इंग्लैंड की दूसरी संस्थाओं ने तो इसे आउट ऑफ कंट्रोल करार दे दिया है।

प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने सख्त लॉकडाउन की घोषणा की। इस कारण से ‘क्रिसमस बबल’ को भी रद्द कर दिया गया। इससे पहले क्रिसमस के कार्यक्रमों के लिए ढील देने का निर्णय लिया गया था लेकिन अब उस पर भी सख्ती रहेगी।

इंग्लैंड के अलावा कोरोना वायरस के इस नए प्रकार का संक्रमण नीदरलैंड, डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में भी पाया गया है। नीदरलैंड और बेल्जियम ने कोरोना वायरस के नए प्रकार का पता चलने के बाद इंग्लैंड से आने वाली उड़ानों पर रोक लगा दी है। इनके अलावा कई अन्य देश भी इंग्लैंड की उड़ानों पर रोक को लेकर सोच-विचार कर रहे हैं। यूरोप के कई देशों ने इंग्लैंड बॉर्डर को सील कर दिया है।

भारत में इस नए खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है। यह मीटिंग सोमवार (21 दिसंबर 2020) को जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप के साथ होनी है। जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप की मीटिंग की अध्यक्षता डायरेक्टर जेनलर ऑफ हेल्थ सर्विसेज (DGHS) करेंगे। WHO के भारतीय प्रतिनिधि डॉक्टर रॉडरिको एच ऑफरिन भी जॉइंट मॉनिटरिंग ग्रुप के सदस्य हैं। इस इमरजेंसी मीटिंग में उनके भी रहने की संभावना है।

इंग्लैंड के मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रोफेसर क्रिस विट्टी ने कोरोना वायरस के नए प्रकार के बारे में कहा, “हमने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को बता दिया है। साथ ही कोरोना वायरस के नए प्रकार के बारे में समझने के लिए उपलब्ध जानकारी का अध्ययन कर रहे हैं। हालाँकि फिलहाल इस बात को साबित करने का कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है कि वायरस का यह नया प्रकार अधिक घातक है या नहीं।”

कोरोना वायरस के नए प्रकार और इसके खतरे को देखते हुए WHO ने ट्वीट करते हुए कहा कि वो इंग्लैंड के अधिकारियों के साथ मिल कर काम कर रहे हैं।

MSP के नाम पर आज भूख हड़ताल, इधर सरकार ने अकेले पंजाब से आधी धान खरीदी

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसानों ने कल यानी, सोमवार (दिसंबर 21, 2020) से सभी धरना स्थलों पर 24 घंटे की क्रमिक भूख हड़ताल करने का ऐलान किया है।

किसानों ने कहा है कि वो 25-27 दिसंबर तक हरियाणा के सभी टोल नाकों को मुफ्त कर देंगे और दो दिनों तक हरियाणा के नाकों पर टोल नहीं वसूलने दिया जाएगा। जबकि, पंजाब में पहले से ही कई नाकों पर टोल की वसूली नहीं हो रही है।

ऐसे समय में, जब पंजाब के किसानों ने आरोप लगाया कि नए कृषि कानून एमएसपी (न्यनतम समर्थन मूल्य) को समाप्त कर देंगे, केंद्र सरकार ने घोषित किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भुगतान करते हुए कृषि उत्पादों की खरीद जारी रखी है। खरीफ मार्केटिंग सीजन 2020-21 के दौरान, भारत सरकार ने देश भर के किसानों से धान, कपास, दलहन, तिलहन, कपास आदि विभिन्न फसलों को खरीदा, जिससे करोड़ों किसानों को लाभ पहुँचा है।

पंजाब राज्य में विरोध के बावजूद, खरीफ 2020-21 सीजन के लिए धान की खरीद पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर, केरल, गुजरात, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा में सुचारू रूप से चल रही है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, 19 दिसंबर को धान की 412.91 लाख मीट्रिक टन (LMT) खरीद की गई थी, जबकि पिछले साल यह 337.74 LMT थी। इस प्रकार, कोरोनो वायरस महामारी और तथाकथित किसान आंदोलनों के बावजूद इस साल एमएसपी के तहत धान खरीद 22.25% बढ़ी है।

इस वर्ष भारत में 412.91 लाख मीट्रिक टन की खरीद में से, अकेले पंजाब राज्य से खरीद 202.77 लाख मीट्रिक टन थी। जिसका मतलब है, कुल खरीद का लगभग आधा (49.10%), पंजाब से लिया गया।

एमएसपी की कुल 77957.83 करोड़ रुपए की खरीद से लगभग 48.56 लाख किसानों को लाभ हुआ है।

इसके अलावा, मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश से 51 लाख मैट्रिक टन दालों की खरीद की गई। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्यों के लिए कोपरा के 1.23 LMT की खरीद के लिए स्वीकृति भी दी गई।

मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत दलहन, तिलहन और खोपरा (नारियल की सफ़ेद भाग) की खरीद के प्रस्ताव अन्य राज्यों से प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद दिए जा रहे हैं। अगर संबंधित राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में तय की गई फसल अवधि के दौरान उन फसलों के बाजार मूल्य एमएसपी से नीचे जाते हैं, ऐसे में भी इन फसलों की खरीद के लिए पंजीकृत किसानों से सीधे वर्ष 2020-21 के लिए तय एमएसपी पर ही खरीदा जा सकेगा।

दिसंबर 19, 2020 तक, सरकार ने अपनी नोडल एजेंसियों के माध्यम से मूँग, उड़द, मूँगफली और सोयाबीन के 1,95,899.38 मीट्रिक टन की खरीद की है, जिसका एमएसपी मूल्य 1050.08 करोड़ रूपए है। ये सीधे तौर पर तमिलनाडु, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा और राजस्थान में 1,08,310 किसानों को लाभान्वित करते हैं।

इसी प्रकार, कर्नाटक और तमिलनाडु में 3961 किसानों को लाभान्वित करते हुए, 52.40 करोड़ रुपए के एमएसपी मूल्य वाले 5,089 मीट्रिक टन खोपरा खरीदे गए हैं। यहाँ पर ध्यान देने की जरूरत है कि पिछले वर्ष खोपरा की खरीद केवल 293.34 मीट्रिक टन थी।

सीजन के दौरान, 16,65,871 करोड़ रुपए मूल्य के 57,83,122 कपास के बीज की खरीद की गई, जिससे 11,24,252 किसानों को लाभ हुआ। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक में कपास की खरीदारी की गई है।

कॉन्ग्रेस ने किसानों को झूठ बोलकर उकसाया कि एमएसपी को खत्म कर दिया जाएगा

ध्यान देने की बात यह है कि विपक्षी दल, विशेष रूप से कॉन्ग्रेस पंजाब में किसानों को नए कृषि कानूनों के सम्बन्ध में झूठ बोलकर लगातार गुमराह कर रही है। अन्य बातों के अलावा, कॉन्ग्रेस किसानों को उकसा रही है कि केंद्र सरकार अपने नए कृषि कानूनों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को समाप्त कर देगी। जो कि एमएसपी के अनुसार खरीफ फसलों की उपरोक्त खरीद के आँकड़ों के अनुसार एक स्पष्ट झूठ नजर आता है।

कॉन्ग्रेस के ही प्रपंच का नतीजा है कि किसानों ने मोदी सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी इलाके में आंदोलन किया, यह मानते हुए कि नए कानूनों का मतलब है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को समाप्त कर दिया जाना!

मंडियाँ रहेंगी, MSP रहेगा अप्रभावित: मोदी सरकार

आंदोलन के बीच ही केंद्र सरकार ने कई बार स्पष्ट किया है कि वे ना तो मंडियों को खत्म कर रहे हैं और ना ही एमएसपी को निरस्त कर रहे हैं। यानी, विपक्ष के ये दोनों दावे झूठ हैं। वास्तव में, कॉन्ग्रेस ने अपने 2019 के चुनावी घोषणापत्र में, एपीएमसी अधिनियम को पूरी तरह से समाप्त करने का वादा किया था। हालाँकि, मोदी सरकार ने केवल एपीएमसी अधिनियम में संशोधन किया है।

मोदी सरकार ने एपीएमसी अधिनियम को पूरी तरह से निरस्त नहीं किया है। नए कृषि कानून किसानों को राज्य की मंडियों के अलावा अपनी उपज बेचने के लिए एक अतिरिक्त जरिया प्रदान करते हैं। नए विधेयकों में प्रावधान राज्य सरकारों द्वारा लगाए गए किसी भी ‘बाजार शुल्क या उपकर या लेवी’ से एपीएमसी (कृषि उपज बाजार समिति) मंडियों के परिसर के बाहर किए गए लेनदेन की छूट देते हैं। यानी, किसान इस कानून के जरिए अब एपीएमसी मंडियों के बाहर भी अपनी उपज को ऊँचे दामों पर बेच पाएँगे।

पीएम नरेंद्र मोदी, सरकार के मंत्रियों और भाजपा नेताओं ने बार-बार कहा है कि एमएसपी जारी रहेगा। हालाँकि, राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस बार-बार एक ही झूठ को दोहरा रहे हैं।