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‘वसुधैव कुटुम्बकम’ अच्छी चीज… लेकिन स्थानीय पहचान को समाप्त करके नहीं: NRC है देश व समय की माँग

NRC को लेकर देश के कई हिस्सों में लोग गुट बनाकर विरोध में उतर रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं। दरअसल वो प्रदर्शन कर रहे हैं हिंसा का, वो प्रदर्शन कर रहे हैं संख्या बल का। वो दिखा रहे हैं कि “देखो, जहाँ-जहाँ हम जैसे लोगों की संख्या थोड़ी भी अधिक है वहाँ-वहाँ हम तोड़-फोड़ कर सकते हैं, सार्वजनिक संपत्तियों में आग लगा सकते हैं, पुलिसकर्मी को मार सकते हैं, परिवहन और यातायात को रोक सकते हैं, जान-माल को नुकसान पहुँचा सकते हैं।” कुल मिलकर उनका स्पष्ट संदेश यह कि वो अगर संख्या बल में कहीं भी अधिक हैं तो उस स्थान पर पुलिस और लोक व्यवस्था को बर्बाद कर सकते हैं।

अव्वल तो इनका कोई नेता नहीं है फिर भी छिटपुट, सड़क छाप नेताओं की भी बात करें, जो इन हिंसक प्रदर्शनों को सपोर्ट कर रहे हैं तो आपको इसमें सबसे पहले बुद्धिजीवियों का वो धड़ा दिखेगा, जिनकी दुकान सरकार बदलने के साथ ही बंद होने के कगार पर पहुँच चुकी है। इसको समझने में बहुत मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। जैसा कि पूरा देश जानता है कॉन्ग्रेस और सपा जैसी पार्टियाँ पारिवारिक पार्टियाँ हैं, यहाँ उन्ही लोगों को पद या प्रतिष्ठा (?) मिलती है जो चाटुकार किस्म के होते हैं, जो राजा द्वारा दिन को रात कहने पर खुद भी ‘रात है, रात है’ की माला जपने लगने हैं।

अफ़सोस कि बीजेपी ‘नेपोटिज्म’ को सपोर्ट नहीं करती इसलिए बीजेपी की सरकार बनने के कारण उनकी चाटुकारिता की दुकान बंद होने लगी, सरकारी खर्चों पर पलना ख़त्म हो गया, उनके बेटे-बेटियों, सगे-संबंधियों को लाभ मिलना बंद हो गया और कोई व्यक्ति कब तक अपने लाभों से समझौता करते हुए अपने घर मुँह बंद करके बैठा रहे! लेकिन इनकी मजबूरी यह कि सरकार ऐसा कोई मौका दे नहीं रही जिसकी आड़ में ये अपना फ्रस्ट्रेशन निकाल पाएँ। तो इस बार इन्होंने अपने लिए मौका बनाया और NRC के बहाने लोगों में गलत प्रचार कर, चालाकी से सिर्फ एक पक्ष दिखाकर और दूसरे पक्ष को छुपा कर उन्हें भड़काना शुरू किया। न सिर्फ रियल लाइफ में बल्कि सोशल मीडिया पर भी इनका यह एक सूत्री कार्यक्रम चलता रहता है। इनके भड़काने की प्रक्रिया कुछ ऐसी है कि ये लोग गुट बनाकर दो धड़ों में बँट जाते हैं। जहाँ एक गुट सोशल मीडिया पर NRC/ CAB या अन्य बेहतर क़दमों पर सरकार के साथ दिखने वाले लोगों के बारे में झूठी बातें फैलाकर चरित्र हनन करते हैं, उन पर व्यक्तिगत आरोप लगाते हैं, उन्हें कुंठित, भक्त, आईटी सेल वाले, भाड़े पर बिकने वाले कहकर उनकी गरिमा को धूमिल करते हैं तो वहीं दूसरा धड़ा लोगों को मुद्दे के बारे में झूठी बातें गढ़कर भड़काने में लग जाते हैं। जब एक साथ इतने सियार मिलकर हुआ-हुआ करने लग जाएँ तो आम जनता जिन्हें कमाने-खाने से वक़्त नहीं मिल पाता, वो धीरे-धीरे इनकी बातों में आने लगते हैं।

अब दूसरे प्रकार के सपोर्टर पर आते हैं। ये वो हैं, जो इन हिंसक प्रदर्शनों को जनांदोलन का नाम देकर अपनी बुझ चुकी राजनीतिक करियर की राख में चिंगारी खोजते रहते हैं। ये वो लोग हैं जिनको राजनीति की मुख्यधारा में वापस लौटने के लिए किसी कंधे की जरुरत है क्योंकि ये अपनी योगता से खुद को कहीं स्थापित करने में कामयाब नहीं हो सके तो आम लोगों को गलत बातें बताकर सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं।

तीसरे तरह के सपोर्टर को देखें तो ये आपको एक धर्म विशेष के नज़र आएँगे और वो धर्म है- ‘इस्लाम’। लगभग सारे कथित अल्पसंख्यक NRC का विरोध कर रहे हैं और ये उपरोक्त दोनों प्रकार के लोगों से संख्या में कहीं ज्यादा हैं। मजहबी लोग ही इन हिंसक प्रदर्शनों के फ्यूल हैं। कुछ कट्टरपंथी क्यों इस रजिस्टर का विरोध कर रहे हैं इसके लिए उनके पास कोई तर्क नहीं है। उनके पास है तो केवल एक अंधी दौड़, एक झूठा डर, जो उपरोक्त दोनों प्रकार के लोगों द्वारा उनके मन में भरा गया है और निरंतर ये डर बेबुनियादी बातों और गलत तर्कों की सहायता से बढ़ाया जा रहा है। कुछ छद्म बुद्धिजीवी तो अयोध्या विवाद को हल करने और तीन तलाक जैसे स्त्री विरोधी एवं दकियानूसी प्रथाओं पर प्रतिबंध लगाने के नाम पर भी लोगों को भड़का रहे हैं। इसमें सिर्फ भड़काने वालों की ही गलती नहीं है बल्कि भड़कने वालों की भी गलती है। अगर आपसे कोई कहे कि कौवा तुम्हारा कान लेकर उड़ रहा है तो पहले अपना कान देखें न कि कौवे को गुलेल मारने में लग जाएँ।

अब फिर ये सवाल उठ जाएगा यहाँ कि NRC है क्या? कैसे ये समुदाय विशेष के विरुद्ध नहीं है? तो इस तरह के सारे सवालों के लिए हमारा ये लेख पढ़ें और फैसला करें कि NRC कितना किसी मजहब के खिलाफ है!

NRC को लेकर सरकार बार-बार बता रही है कि यह एक रजिस्टर मात्र है, जिसमें राष्ट्र के वैध नागरिकों के नाम दर्ज होंगे। ये सबसे पहले और अब तक सिर्फ असम में इसलिए लागू हुआ है क्योंकि पूर्वोत्तर में स्वतंत्रता प्राप्ति के समय, पाकिस्तान-बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) युद्ध के समय बड़ी संख्या में शरणार्थी तो आते ही रहे, साथ ही शरणार्थियों की आड़ में अवैध घुसपैठिए भी आते रहे। जिस कारण वहाँ की ‘डेमोग्राफी’ यानी आबादी के प्रकार में काफी बदलाव आता गया। पूर्वोत्तर में यही घुसपैठिए बहुसंख्यक बनते जा रहे हैं जबकि वहाँ के मूल निवासी अल्पसंख्यक होते जा रहे हैं, उदाहरण के तौर पर- त्रिपुरा।

ये समझने की कोशिश कीजिए कि भारत जैसे देश में जहाँ पहले से ही विश्व की करीब 17.71 प्रतिशत जनसंख्या निवास कर रही है, जबकि भारत के पास विश्व की भूमि का केवल 2.4 प्रतिशत है वहाँ घुसपैठियों को या अवैध नागरिकों को जगह नहीं दी जा सकती। और तो और, भारत इस समस्या के कारण जब पहले ही एक युद्ध (पाकिस्तान-बांग्लादेश युद्ध, 1971) में भाग ले चुका है फिर क्यों भारत उसी समस्या को बेताल की तरह ढोते रहे? एक युद्ध के बाद भी ये समस्या अगर मौजूद है तो इससे निपटने के लिए भारत जैसे देश को कोई तो कदम उठाना ही पड़ता और यह सबसे बेहतर कदम इसलिए है क्योंकि NRC अपने नेचर में पूरी तरह से सेक्युलर है। दिसम्बर 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद इसे तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। भारत के वैध नागरिकों को चाहे वो किसी भी जाति, धर्म, संप्रदाय के हों, NRC से कोई दिक्कत नहीं होने वाली है।

इस चीज को हमेशा याद रखा जाए कि मंदिर में दिया जलने से पहले घर में दिया जलाया जाता है। अत: ‘ग्लोबलाइजेशन’ या ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ अच्छी चीज हो सकती है, लेकिन स्थानीय पहचान को समाप्त करके नहीं। अपने घर में क्लेश करके पड़ोसियों को रोटी खिलाना किस स्थिति में अच्छा माना गया है? उस पर भी तब तो बिलकुल भी नहीं जब ये अवैध प्रवासी अपने हितों की पूर्ति के लिए स्थानीय लोगों को उनके धर्म, जाति, वर्ग के आधार पर भड़काना शुरू करे, बाँटना शुरू करे और सुरक्षा की दृष्टि से देश के लिए खतरा उत्पन्न करे, कुछ इस तरह से अपना तंत्र फैलाए कि जगह-जगह हिंसा होने लगे और जान-माल को हानि पहुँचे। इसलिए NRC का लागू होना देश के लिए, खासकर पूर्वोत्तर भारत के लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि पूर्वोत्तर भारत सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भारत का महत्त्वपूर्ण भाग है।

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सनातन धर्म को नष्ट करने में लगे हैं वामपंथी: नेपाल के पूर्व डिप्टी पीएम की हिन्दुओं से एकजुट होने की अपील

नेपाल के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय जनता पार्टी के नेता कमल थापा ने शुक्रवार (20 दिसंबर) को ‘सनातन धर्म को वामपंथियों द्वारा नष्ट करने की कोशिश’ के ख़िलाफ़ दुनिया के सभी हिन्दुओं से एकजुट होने का आह्वान किया है।

इस सन्दर्भ पर प्रतिक्रिया स्वरुप वैदिक स्कॉलर डॉ डेविड फ्रॉले, जो पंडित वामदेव शास्त्री के नाम से भी जाने जाते हैं, उन्होंने कहा कि भारत की तरह, वामपंथी दल, मीडिया और नेपाली कॉन्ग्रेस भी सदियों पुराने सनातन धर्म को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।

फ्रॉले ने अपने ट्वीट में कहा कि सदियों से राजनीतिक और धार्मिक आधार पर हिन्दुओं को परेशान किया जा रहा है। भारत के वामपंथी मीडिया, शिक्षाविद और कॉन्ग्रेस से लेकर कम्युनिस्ट राजनीतिक दल हिन्दुओं के मार्ग पर अवरोध पैदा करने का काम कर रहे हैं। हिन्दुओं को अपनी प्रेरणाओं के बारे में किसी भी तरह का कोई भ्रम नहीं होना चाहिए और उन्हें दृढ़ रहना चाहिए।

डॉ फ्रॉले के ट्वीट का जवाब देते हुए नेपाल के पूर्व डिप्टी पीएम ने कहा, “यह नेपाल के सन्दर्भ में भी सच है। नेपाल के लेफ़्ट और नेपाली कॉन्ग्रेस के साथ-साथ कुछ मुख्यधारा की मीडिया, शिक्षाविद सदियों पुराने सनातन धर्म, संस्कृति, नेपाली मर्यादा, परम्परा और पहचान को नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।”

ख़बर के अनुसार, थापा ने दुनिया के हिन्दुओं को वामपंथ के ख़िलाफ़ खड़े होने और सनातन धर्म के गौरव की रक्षा करने का आह्वान किया है। थापा ने कहा, “आइए दुनिया के सभी हिन्दू सनातन धर्म की महिमा को संरक्षित करने के लिए एकजुट हों।”

पाकिस्‍तान से जुड़े जासूसी रैकेट का पर्दाफाश: हवाला ऑपरेटर समेत 7 नौसेना कर्मी गिरफ्तार

आंध्र प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार (दिसंबर 19, 2019) को पाकिस्तान से जुड़े एक जासूसी रैकेट का पर्दाफाश करने का दावा करते हुए नौसेना कर्मियों और हवाला ऑपरेटर समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। आंध्र प्रदेश पुलिस ने मामला दर्ज कर पूरे रैकेट की जाँच शुरू कर दी है। गिरफ्तार किए गए सभी नौसैनिकों से पूछताछ की जा रही है।

आंध्र प्रदेश की खुफिया एजेंसी, केंद्रीय खुफिया एजेंसी और नौसेना की खुफिया एजेंसी ने संयुक्त अभियान चलाकर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया। बताया जा रहा है कि इस रैकेट के तार पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। पुलिस की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है पुलिस की खुफिया शाखा ने केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों और नौसेना के खुफिया विभाग के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन डॉल्फिन्स नोज’ चलाया और इस जासूसी रैकिट का पर्दाफाश किया। पुलिस ने कहा, “प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। नौसेना के 7 कर्मचारियों और एक हवाला ऑपरेटर को देश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया है।”

पुलिस ने बताया कि कुछ अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने कहा कि पूरे मामले की जाँच जारी है। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों को विजयवाड़ा के NIA कोर्ट के समक्ष पेश किया गया। जिसके बाद उन्हें 3 जनवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।  

बेंगलुरु के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौतम सवांग ने बताया, “वे सभी देश के विभिन्न हिस्सों से आते हैं, लेकिन फिलहाल विशाखापत्तनम में हैं। हम इस बारे में और कोई जानकारी शेयर नहीं कर सकते। जाँच चल रही है।” पुलिस को शक है कि इन अधिकारियों ने पाकिस्तान में आतंकी समूहों को सूचनाएँ लीक की थीं। 

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार नौसैनिकों ने भारतीय पनडुब्बियों और जहाजों की जानकारी पाकिस्तानी हैंडलर को दी थी। पुलिस ने तीन नेवी सेलर्स को विशाखापटनम से, दो को कारवार नेवल बेस और दो को मुंबई नेवल बेस से गिरफ्तार किया। खुफिया विभाग पिछले कई दिनों से इनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे थे।

एक अधिकारी ने बताया कि सभी सातों आरोपित 2017 में नौसेना में शामिल हुए थे। सितंबर 2018 में से सोशल नेटवर्किंग साइट की मदद से तीन से चार महिलाओं के संपर्क में आए। इन महिलाओं ने बाद में उनका परिचय पाकिस्तानी हैंडलर से व्यापारी के तौर पर करवाया, जिसने उनसे नौसेना की गोपनीय सूचना लेनी शुरू कर दी। गिरफ्तार नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों से लौटने के बाद इनके लोकेशन की जानकारी दिया करते थे। इन्होंने पिछले साल सितंबर-अक्टूबर के बीच नौसेना से जुड़ी कई संवेदनशील जानकारियों हैंडलर को दी। इन्हें इसके बदले एक हवाला ऑपरेटर की मदद से हर महीने पैसे भी दिए गए।

‘मुस्लिमों हमें आज कर्बला का किरदार निभाना होगा… नहीं तो मिट जाएगा 25 करोड़ मुस्लिमों का नाम’

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के नाम पर मोदी सरकार और उनकी नीतियों को घेरने वाले अब देश में हिंसा भड़काने पर खुलेआम उतर आए हैं। पहले इस कड़ी में केवल फोन, मेल, मैसेज के जरिए समुदाय विशेष के लोगों को समझाया जा रहा था कि ये सरकार उन्हें देश से निकालना चाहती है, उनके ख़िलाफ़ फैसले ले रही है, उनसे उनके अधिकार छीनना चाहती है आदि आदि। लेकिन अब ये कार्य खुलेआम पर्चे बाँटकर किया जाने लगा है। जिसमें कट्टरपंथियों द्वारा न केवल मुस्लिम समुदाय को सरकार की नीतियों के ख़िलाफ़ भड़काने के लिए गलत सूचना छापी जा रही हैं, बल्कि देश में हिंसा करने के लिए कर्बला का किरदार निभाने की भी बात स्पष्ट तौर पर लिखी दिखाई दे रही है।

इस समय ये पर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें आज जुमे की नमाज के बाद चक्का जाम करने की गुजारिश समुदाय विशेष के लोगों से की गई है। साथ ही एनआरसी और सीएए के ख़िलाफ़ लोगों को भड़काने के लिए जमकर झूठ परोसा गया है।

इस पर्चे में शांत बैठे लोगों को घरों से बाहर आकर हड़कंप मचाने के लिए बताया गया कि एनआरसी लागू होने पर देश के हर नागरिक को पहले साबित करना पड़ेगा कि उनके दादा-परदादा भी भारतीय थे। जब लोग ऐसा करने में असफल हो जाएँगे तो उनसे नागरिकता छीन ली जाएगी। फिर बाकी सभी धर्मों के लोगों को सीएए के तहत नागरिकता मिलेगी और मुस्लिमों को घुसपैठिया करार दे दिया जाएगा और सभी मुस्लिमों को डिटेंशन कैंप में डाल दिए जाएँगे।

इसके अलावा इस पर्चे में खुलेआम ये तक दावा किया गया है कि भारत सरकार और आरएसएस चाहती है कि भारतीय मुस्लिमों को रोहिंग्याओं की तरह स्टेटलेस बना दिया जाए। जिसके कारण ही वे ऐसी नीतियाँ लाए हैं। अगर एक बार 30 करोड़ में से 25 करोड़ मुस्लिम नागरिकता साबित करने में फेल हो गए। तो उनसे मतदान करने का अधिकार ले लिया जाएगा। उनके लिए संपत्ति को खऱीदना-बेचना संभव नहीं हो पाएगा, सरकारी सुविधाएँ उन्हें नहीं मिलेंगी। जो कुछ उनपर होगा, उसे जब्त कर लिया जाएगा। सरकारी नौकरी वालों को उनकी नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाएगा आदि आदि।

जाहिर है, ये सब पढ़कर कोई भी नागरिक अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर आएगा और इंसानियत के नाते दूसरे समुदाय के लोग भी उनका समर्थन करने से नहीं चूँकेगे। देखते ही देखते बड़ा तबका सरकार के विरोध में हो जाएगा। जिन्हें सीएए से कोई लेना-देना भी नहीं होगा, वह भी मानवता की लड़ाई समझकर इसका विरोध करेंगे। लेकिन ये कोई नहीं समझेगा कि आखिर ऐसी जानकारी परोसने वाला कौन है और पर्चे में प्रकाशित जानकारी का मूल उद्देश्य क्या है? क्या इस पर्चे में लिखे अनुसार सड़कों पर उतरना और तथाकथित मजहबी ठेकेदारों की बातों में आना सरकार का या उनकी नीतियों का विरोध करना ही कहलाएगा या फिर भीड़ को इकट्ठा करके चक्का जाम के नाम पर सीलमपुर जैसी किसी घटना को अंजाम दिया जाएगा?

खुद पढ़िए, वायरल हुए इस पर्चे के अंत मुस्लिमों को उकसाने के लिए उन्हें करबला का किरदार निभाने तक के लिए कहा जा रहा है। साथ ही मोदी सरकार को दुश्मन बताकर इंगित किया जा रहा। जिसमें लिखा गया है, “दुश्मन हमें हमारे मुल्क से निकालना चाहता है। इस मुल्क को आजाद कराने के लिए हमारे बाप-दादा ने अपनी जानों की क़ुरबानी दी है। अब हमें दोबारा कुर्बानी देनी होगी।”

सैफ, सरवर आजम, सैफुर्रहमान और सलमान को फाँसी की सजा: जयपुर बम ब्लास्ट के थे ये दोषी

जयपुर में साल 2008 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के चारों दोषियों को स्पेशल कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई है। इन बम धमाकों में 71 लोगों की जान चली गई थी, वहीं 185 लोग घायल हो गए थे। गुरुवार (दिसंबर 19, 2019) को विशेष अदालत ने दोषियों की सजा को लेकर बहस सुनी थी। 13 मई, 2008 को पिंकसिटी को सीरियल बम ब्लास्ट से दहलाने वाले गुनाहगारों को विशेष कोर्ट के जज अजय कुमार शर्मा प्रथम ने शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को फाँसी की सजा सुनाई।

बता दें कि स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजम, सैफुर्रहमान और मोहम्मद सलमान को दोषी करार दिया था। इस ब्लास्ट के 2 अन्य आरोपित दिल्ली के बटला हाउस में 2008 में हुए एनकाउंटर में मार गिराए गए थे। एक आरोपित शाहबाज हुसैन को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। धमाकों के सि​लसिले में जयपुर पुलिस ने पॉंच आरोपितो को गिरफ्तार किया था। तीन आरोपित दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं। ये तीनों देश के दूसरे हिस्सों में भी धमाकों के आरोपित हैं। लिहाजा इनके खिलाफ एटीएस जॉंच नहीं कर पाई है।

उल्लेखनीय है कि मामले में कुल 13 लोगों को पुलिस ने आरोपित बनाया था। इनमें से 3 अब भी फरार हैं। इस मामले की सुनवाई में बीते एक साल से तेजी आई थी। सुनवाई के दौरान 1,296 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। जानकारी के मुताबिक दोषियों ने शहर में बम धमाके करने के लिए जिन जगहों व दुकानदारों से साइकिलें खरीदी थीं, उन दुकानदारों ने उनकी पहचान की थी। 13 मई 2008 की शाम परकोटा इलाके में 12 से 15 मिनट के अंतराल में चांदपोल गेट, बड़ी चौपड़, छोटी चौपड़, त्रिपोलिया बाजार, जौहरी बाजार और सांगानेरी गेट पर बम धमाके हुए थे। पहला ब्लास्ट खंदा माणकचौक, हवा महल के सामने शाम 7:20 बजे हुआ था। फिर एक के बाद एक 8 धमाके हुए थे।

इन धमाकों के बाद काफी देर तक जयपुर शहर की मोबाइल और टेलीफोन लाइनें जाम हो गईं थीं। जिससे दूसरे शहरों में मौजूद लोग अपने परिजनों और रिश्तेदारों की खैरियत जानने के लिए परेशान होते रहे थे। बताया जाता है कि हनुमान मंदिर के निकट बम निरोधक दस्ते ने एक बम को निष्क्रिय कर दिया था। लेकिन, जो धमाके हुए थे, वो इतने शक्तिशाली थे कि कुछ लोगों के जिस्म तो कुछ फुट ऊपर तक उड़ गए थे। हमले की साजिश काफी सावधानी से रची गई थी। राजस्थान के तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ए.एस. गिल ने कहा था कि यह आतंकवादी हमला था।

पैगंबर मो. पर सवाल पूछने वाले प्रोफेसर का नजीब ने काटा था हाथ, NIA ने दोबारा किया गिरफ्तार

उन्नाव रेप और अपहरण केस के दोषी कुलदीप सेंगर को उम्र क़ैद, ₹25 लाख का जुर्माना

उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित उन्नाव रेप मामले के दोषी कुलदीप सेंगर को दिल्ली की तीस हज़ारी कोर्ट ने उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई है, साथ ही 25 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया गया है। जिस समय कुलदीप सेंगर को सज़ा सुनाई गई, उस दौरान उसने जज के सामने हाथ जोड़ दिए।

ख़बर के अनुसार, सेंगर के दस्तावेज़ों के आधार पर उसकी कुल चल और अचल सम्पत्ति 44 लाख रुपए आँकी गई। सुनवाई के दौरान सेंगर के वकील ने कहा कि इसका मूल्य फ़िलहाल घट चुका है, क्योंकि उनकी कार की क़ीमत कम हो चुकी है। साथ ही वकील ने यह भी कहा कि आँकी गई सम्पत्ति का मूल्य अभी और कम होगा क्योंकि सेंगर की बेटी का दाखिला मेडिकल में कराया गया है। मेडिकल की फ़ीस देने के बाद सेंगर की रक़म और कम हो जाएगी।

दूसरी तरफ़, रेप पीड़िता के वकील ने पीड़िता का माली हालत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पीड़िता का घर पूरी तरह से टूट चुका है। पीड़िता के पिता के पास तीन भाइयों के बीच कुल तीन बीघे ज़मीन है। पीड़िता के वकील ने कहा कि कुलदीप सेंगर ने अपने अपराध को छिपाने के लिए पीड़िता पर न सिर्फ़ केस वापस लेने का दबाव बनाया बल्कि एक विधायक के तौर पर डराया-धमकाया भी।

ग़ौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने 16 दिसंबर को कुलदीप सिंह सेंगर को बलात्कार के आरोप में दोषी करार दिया था। उसे दुष्कर्म और अपहरण के आरोप में दोषी ठहराया गया। तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में मंगलवार (दिसंबर 10, 2019) को ही फ़ैसला सुरक्षित रख लिया था।

सेंगर को भाजपा ने पहले ही निष्कासित कर दिया था। उस पर 2017 में उन्नाव की एक लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप था। ढाई साल से चल रहे इस मामले में पीड़िता के परिजनों को भी काफ़ी कुछ झेलना पड़ा।

पीड़िता ख़ुद अभी दिल्ली एम्स में भर्ती है। वहीं, उसके चाचा, चाची और मौसी की मौत हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था। 5 अगस्त से ही नियमित सुनवाई शुरू कर दी गई थी। सुनवाई बंद कमरे में हो रही थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 13 गवाहों और बचाव पक्ष के 9 गवाहों के बीच जिरह हुई।

कोर्ट ने भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सेंगर पर आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय किए थे। फिलहाल, वह तिहाड़ जेल में बंद है। अदालत ने मामले में सह आरोपी शशि सिंह के खिलाफ भी आरोप तय किए थे। वह लड़की को सेंगर के पास लेकर गई थी। कोर्ट ने शशि सिंह को बरी कर दिया है। शशि ने कोर्ट में ख़ुद को पीड़ित बताया था।

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BJP ने कुलदीप सेंगर को पार्टी से निकाला, उन्नाव रेप मामले में आरोपित है यह विधायक

CBI ने कहा कुलदीप सेंगर पर बलात्कार के आरोप सही, तीस हजारी कोर्ट में पेश किए पुख्ता सबूत

उन्नाव रेप केस: MLA कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप तय, जानें पूरा घटनाक्रम

फिरोजाबाद में पुलिस पर फायरिंग, इंस्पेक्टर की पिस्टल छीनी: जुमे की नमाज के बाद UP में एक दर्जन+ शहरों में बवाल

नागरिकता कानून के विरोध में उत्तर प्रदेश में फिर से विरोध-प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। जिन शहरों से हिंसक वारदातों की रिपोर्ट आ रही है, उनमें प्रमुख हैं – फिरोजाबाद, हापुड़, कानपुर, बहराइच, सीतापुर, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़, बलरामपुर, बिजनौर, गोंडा और हमीरपुर।

उत्तर प्रदेश में जैसा सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा था, बिल्कुल वैसा ही हुआ। जुमे की नमाज के बाद CAA के विरोध की आड़ में उग्र भीड़ ने इन शहरों में पुलिस के साथ झड़प की और जगह-जगह पथराव से लेकर आगजनी की। यही कारण था कि प्रशासन ने गुरुवार की रात 10 बजे से ही राज्य के 15 जिलों में इंटरनेट को बंद कर दिया था।

अलीगढ़ में स्थित शाह जमाल ईदगाह पर उग्र हुए प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर भी पथराव किया। इसके जवाब में पुलिस ने भी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करके उन्हें तितर-बितर किया। सबसे बुरी खबर फिरोजाबाद जिले से आई है। यहाँ पर भीड़ ने पुलिस की 12 गाड़ियों जला दिया। पुलिस चौकी को भी आग के हवाले कर दिया। इस दौरान पुलिस पर फायरिंग भी की गई।

फिरोजाबाद के नालबंद पुलिस चौकी में दंगाईयों ने आग लगा दी। इसके बाद कानपुर हाईवे पर कब्जा भी कर लिया। जब पुलिस यहाँ पहुँची और उपद्रवियों को शांत करना चाही तो उन पर ही फायरिंग की गई। इन दंगाईयों ने इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार सिंह को घेरकर उनकी पिस्टल भी छीन ली। यहाँ पर इंस्पेक्टर सिंह सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

वहीं दूसरी ओर बुलंदशहर में लगभग 10000 की भीड़ ने नमाज के नारेबाजी और प्रदर्शन शुरू की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को जब रोकने की कोशिश की तो उन पर पथराव किया गया। यहाँ भी पुलिस पर फायरिंग की गई। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की। हालाँकि अभी किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

दंगों से कुछ तस्वीरें, जो बताती हैं पुलिस वाले भी चोट खाते हैं, उनका भी ख़ून बहता है…

कॉन्ग्रेस कॉरपोरेटर शहज़ाद ख़ान समेत 49 दंगाई हिरासत में: शाह-ए-आलम में पुलिस पर हुआ था जानलेवा हमला

…जो सीलमपुर बवाल में बम फेंक भी नहीं पाया, हाथ भी गँवाया, उस रईस को पुलिस ने धर दबोचा

सपा सांसद शफीकुर्रहमान के ख़िलाफ़ मामला दर्ज, 3000 दंगाई हिरासत में: योगी सरकार की सख़्त कार्रवाई

प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा दिल्ली पुलिस की हिरासत में, अमित शाह के घर के बाहर कर रही थी प्रदर्शन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में शुक्रवार (दिसंबर 20, 2019) को गृह मंत्री अमित शाह के आवास के पास प्रदर्शन के दौरान दिल्ली महिला कॉन्ग्रेस की प्रमुख शर्मिष्ठा मुखर्जी को संगठन के कुछ अन्य सदस्यों के साथ हिरासत में लिया गया। कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने बताया कि दिल्ली महिला कॉन्ग्रेस की करीब 50 अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया गया और मंदिर मार्ग पुलिस थाना ले जाया गया। 

पुलिस ने बताया कि उन्होंने अमित शाह के आवास के पास प्रदर्शन मार्च के दौरान शर्मिष्ठा मुखर्जी और संगठन के कुछ अन्य सदस्यों को हिरासत में लिया है। कॉन्ग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल इस कानून के खिलाफ देश भर में हिंसक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनो को देखते हुए एहतियात के तौर पर दिल्ली में कई मेट्रो को बंद कर दिया गया है। वहीं सीआरपीएफ और आरएएफ की 10 कंपनियों सहित पर्याप्त मात्रा में सुरक्षाबलों को उत्तर पूर्वी दिल्ली में तैनात किया गया है।

बता दें कि दिल्ली की जामा मस्जिद में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहा है। जुमे की नमाज के बाद जामा मस्जिद के बाहर मुस्लिम समुदाय के लोगों ने CAA के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान यहाँ पर भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर भी मौजूद रहे और नारेबाजी की। इन चीजों को ध्यान में रखते हुए पुलिस बलों की यहाँ भारी संख्या में तैनाती की गई है और ड्रोन कैमरे से भी प्रदर्शनकारियों पर नजर रखी जा रही है।

जामा मस्जिद में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आज़ाद को हिरासत में लेने की कोशिश की थी, लेकिन समर्थकों की मदद से वो मौके से भाग निकले। बता दें कि भीम आर्मी ने जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक प्रोटेस्ट मार्च निकालने के लिए दिल्ली पुलिस से परमिशन माँगी थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने मना कर दिया। हालाँकि, इसके बावजूद भीम आर्मी के चीफ चन्द्रशेखर आजाद जामा मस्जिद पहुँचे हुए हैं।

दंगों से कुछ तस्वीरें, जो बताती हैं पुलिस वाले भी चोट खाते हैं, उनका भी ख़ून बहता है…

देशभर में नागरिकता क़ानून (CAA) के विरोध में प्रदर्शन जारी हैं। इन विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना एक बड़ी संख्या में पुलिस दल-बल सक्रिय रूप से तैनात है। दंगाईयों द्वारा हिंसात्मक विरोध-प्रदर्शनों से निपटने के दौरान कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। 

गुजरात के अहमदाबाद के शाह-ए-आलम इलाक़े में दंगाईयों ने जमकर हिंसा की। इस दौरान पुलिस वालों पर भीड़ जानवरों की तरह टूट पड़ी। एसीपी राजपाल सिंह राणा की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एसीपी राजपाल सिंह राणा की तस्वीर बहुत कुछ बयाँ कर रही है। इस तस्वीर में आप देख सकते हैं कि सिर में चोट लगने के बावजूद उनके चेहरे पर दर्द का नामो-निशान तक नहीं है। ख़ून से लथपथ होने के बावजूद वो हिंसक हालात पर क़ाबू पाने के लिए अपनी टीम के साथ निकल पड़ते हैं।

इस हमले में डीसीपी, एसीपी, कई इंसपेक्टरों समेत 19 पुलिसकर्मी भी ज़ख़्मी हुए।

नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ दिल्‍ली के जामिया में हिंसक प्रदर्शन हुए, कई बसों में आग लगाई गई। आग बुझाने के लिए दमकल विभाग की 4 गाड़ियाँ मौके पर पहुँची, लेकिन दंगाईयों ने एक दमकल गाड़ी में तोड़फोड़ कर दी, जिसमें 3 फायरमैन चोटिल हो गए।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बाहर नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ उपद्रवियों ने विरोध-प्रदर्शन करते हुए पुलिस पर पत्थरबाज़ी शुरू कर दी थी। इस दौरान दो सुरक्षाकर्मी समेत पुलिसकर्मी घायल हो गए।

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स ने शुक्रवार (13 दिसंबर) को विश्वविद्यालय परिसर से संसद तक मार्च का आह्वान किया। जहाँ पुलिस ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।

इस दौरान दंगाईयों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई जिनमें कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।

दंगाईयों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मियों को लाठीचार्ज करना पड़ा और आँसू गैस के गोले भी दागे। उपद्रवियों ने इस दौरान पुलिसकर्मियों पर जमकर पत्थरबाज़ी की।

घायल पुलिसकर्मियों का उपचार करने के लिए डॉक्टरों की टीम कई बार घटनास्थल पर ही बुलानी पड़ी।

लखनऊ में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में गुरुवार को जमकर हिंसा हुई। इसमें उपद्रवियों ने पुलिसकर्मियों पर जमकर पथराव किया, उनपर काँच की बोतलें बरसाईं। दंगाईयों की भीड़ शहर के मुख्य इलाकों में घुस गई और जमकर आगजनी व पथराव किया। हालात पर क़ाबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। तब कहीं जाकर बवाल शांत हुआ।

पैगंबर मो. पर सवाल पूछने वाले प्रोफेसर का नजीब ने काटा था हाथ, NIA ने दोबारा किया गिरफ्तार

साल 2010 में ईशनिंदा के इल्जाम में केरल के प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर हमला कर उनका दाहिना हाथ काटने वाले आरोपित नजीब को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने दोबारा गिरफ्तार कर लिया। 43 वर्षीय नजीब एर्नाकुलम जिले के अलुवा का निवासी है और साथ ही कट्टरपंथी इस्लामिक समूह पॉपुलर फ्रंट इंडिया का सदस्य भी।

इसी मामले में इससे पहले उसकी गिरफ्तारी 10 अप्रैल 2015 को कोयंबटूर से हुई थी। लेकिन, 23 जुलाई को केरल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान उसे जमानत दे दी। इसके बाद एनआईए ने केरल कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर सुनवाई के बाद केरल कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी गई और नजीब को दोबारा बुधवार को गिरफ्तार किया गया।

गौरतलब है कि 4 जुलाई 2010 को एर्नाकुलम जिले के थोदुपुझा में प्रोफेसर टीजे जोसेफ पर घातक हमले की साजिश रचने और हमलावरों की मदद करने के आरोप में नजीब के खिलाफ आइपीसी की विभिन्न धाराओं, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में एनआईए ने 13 लोगों को आरोपित बनाया था।

जानकारी के अनुसार, टीजे जोसेफ केरल के इदुकी जिले के एक कॉलेज में मलयालम पढ़ाते थे। 2010 में उन पर कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के सदस्य नजीब समेत कुछ युवकों ने चाकुओं से उनका दाहिना हाथ काट दिया था। घटना रविवार के दिन तब घटी थी, जब जोसेफ अपने परिवार के साथ चर्च से प्रार्थना कर लौट रहे थे। आरोपित युवकों ने आरोप लगाया था कि जोसेफ ने एक परीक्षा ली थी, जिसमें उन्होंने छात्रों से ईशनिंदा वाले प्रश्न पूछे थे।

जोसेफ पर आरोप लगा था कि उन्होंने मलयालम भाषा में एक विवादित प्रश्नपत्र तैयार किया था, जिससे समुदाय विशेष की मजहबी भावनाएँ आहत हुईं। हालाँकि इस बीच कई लोगों ने उन पर सवाल उठाए और कॉलेज प्रशासन ने उन्हें नौकरी से भी निकाल दिया था। तब इस मामले पर वहाँ की शिक्षा मंत्री ने उन्हें कहा भी कि वे चाहें तो यूनिवर्सिटी के ट्रिब्यूनल में अपना मामला दर्ज करवा सकते हैं। लेकिन फिर भी उन्होंने फैसला किया कि वे कॉलेज के फैसले के ख़िलाफ़ कोई कानूनी कदम नहीं उठाएँगे।

इतना ही नहीं, अपने ऊपर कट्टरपंथियों के हमले के बाद भी जोसेफ ने तो ये भी कहा था कि उन्होंने सभी आरोपितों को माफ कर दिया है और अपना जीवन सामान्य रूप से जीने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन मजहबी संगठनों के दबाव में कॉलेज प्रशासन के फैसले से उनका जीवन सामान्य नहीं रहने दिया। सामाजिक दबाव और आर्थिक परेशानियों के चलते उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली और बाद में प्रोफेसर को वापस पढ़ाने की इजाजत दी गई। कुछ समय पहले वे रिटायर हो गए।

उनके दोषियों को भले ही उन्होंने अपनी अच्छाई के चलते माफ कर दिया। लेकिन कोर्ट ने उन पर कार्रवाई जारी रखी और कुछ साल पहले उन्हें प्रोफेसर पर हमला करने का दोषी पाया गया। आरोपितों पर फैसला उस समय आया जब 57 साल के जोसेफ की लिखी एक किताब रिलीज हुई है। इदुकी जिले में एक छोटे कार्यक्रम में अपनी किताब को रिलीज करने के दौरान जोसेफ का कहना था, “ये किताब मैंने दाहिने हाथ से लिखी थी, आज मैं आपके सामने इसे बाएँ हाथ से पेश कर रहा हूँ।” बता दें कि हमले के बाद जोसेफ की दाहिनी हथेली को डॉक्टरों ने वापस जोड़ दिया था।