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…जिस बिल्डिंग ने लील लीं 43 जिंदगियाँ, फिर लगी वहीं आग: हर तरफ धुआँ, मौके पर दमकल की 4 गाड़ियाँ

दिल्ली की अनाज मंडी में रविवार (दिसंबर 8, 2019) को लगी आग से 43 लोग काल के गाल में समा गए। दिल्ली सरकार और एमसीडी की तू-तू मैं-मैं के बीच आग लगने के असली कारणों पर चर्चा करने के लिए नेताओं के पास समय ही नहीं बचा। जिस अवैध फैक्ट्री में ये आग लगी, उसके मालिक रेहान ख़ान को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसधर सोमवार को उसी इलाक़े में फिर से आग लग गई। 24 घंटे बाद भी आग का धुआँ ख़त्म नहीं हुआ है। पीड़ित इमारत से अब भी धुआँ निकल रहा है। पुलिस ने जाँच के लिए फक्ट्री सील कर रखी है।

दरअसल, सोमवार को सुबह हुआ यूँ कि ईमारत की तीसरी मंजिल पर आग की लपटें उठने लगी। स्थानीय लोगों ने जैसे ही फिर से तेज़ धुआँ निकलते देखा, उन्होंने पुलिस को सूचित किया। इसके बाद 4 अग्निशमन वाहन व कई दमकलकर्मी वहाँ पहुँचे। बिल्डिंग खाली करा लिए जाने के कारण जान-माल की क्षति नहीं हुई है। रविवार को हुई त्रासदी से अभी तक उबरने की कोशिश कर रहे लोग अभी भी सहमे हुए हैं।

घटनास्थल पर भारी पुलिस फोर्स की तैनाती की गई है। लोगों को बैरिकेडिंग से आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। सोमवार को फिर से आग के जोर पकड़ने की ख़बर के साथ ही दमकल विभाग की 4 आग बुझाने वाली गाड़ियाँ वहाँ पर पहुँचीं। रानी झाँसी रोड में फिल्मिस्तान इलाक़े में हुई इस घटना में 20 से अधिक लोग अभी भी घायल हैं। विभिन्न अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। रविवार की शाम लोग अपने परिजनों को ढूँढ़ते हुए भागदौड़ करते नज़र आए। परिजनों से शवों की पहचान कराई गई। कई लोग अभी भी ऐसे हैं, जिनके परिचितों का कोई अता-पता नहीं है।

ये हादसा बिहार संकरी गली में बानी 5 मंजिला ईमारत में हुई, जहाँ टोपी, बैग इत्यादि की फक्ट्री चलती थी। देर शाम तक 29 शवों की ही पहचान हो पाई थी। मरने वालों में अधिकतर मजदूर हैं। सोमवार को इस शवों का पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। 30 दमकलों और 150 फायर-कर्मियों के पहुँचने के बाद आग पर काबू पाया जा सका था। मृतकों में अधिकतर यूपी-बिहार से हैं। वो सभी मजदूर वहीं पर काम करते थे और उनके रहने की व्यवस्था भी वहीं की गई थी। बिल्डिंग में न तो आग बुझाने के उपकरण थे और न ही फक्ट्री के पास दमकल विभाग की एनओसी थी।

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सुरक्षा परिषद में भारत का न होना हमें मंजूर नहीं, UN में बदलाव वक़्त की माँग: जर्मनी

भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर लिंडनर ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में शामिल किए जाने की जोरदार वकालत की है। भारत और जर्मनी कई वैश्विक मुद्दों पर एक साथ काम कर रहे हैं। वाल्टर ने कहा कि आज की वैश्विक परिस्थितियों को देखे हुए ये दोनों ही देश यूएनएससी में शामिल किए जाने के लिए सबसे योग्य उम्मीदवार हैं। पिछले ही महीने जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल भारत दौरे पर आई थीं। उस दौरान दोनों देशों के बीच 20 से भी अधिक करार (MOU) पर तेज़ी से आगे बढ़ने का फ़ैसला लिया गया था। दोनों देश स्मार्ट सिटी, ग्रीन मोबिलिटी और क्लाइमेट चेंज पर साथ काम कर रहे हैं।

वहीं जम्मू कश्मीर की ताज़ा परिस्थितियों पर अपनी राय रखते हुए जर्मनी के एन्वॉय ने कहा कि वहाँ इंटरनेट पर लगाए गए प्रतिबन्ध स्थायी नहीं हैं और जर्मनी बाकी देशों की तरह चाहता है कि ये सभी प्रतिबन्ध जल्द से जल्द हटाए जाएँ। लिंडनर ने कहा कि अगर यूएन में जल्द ही बदलाव नहीं किया जाता है तो लोग उस पर भरोसा करना छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही विश्व की सबसे बड़ी संस्था में रिफॉर्म नहीं किया जाता है तो लोग ये समझेंगे कि ये वास्तविकता से काफ़ी दूर हैं।

उन्होंने आश्चर्य जताया कि 140 करोड़ की जनसँख्या वाला भारत यूएनएससी का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि ये अस्वीकार्य है। लिंडनर ने कहा कि भारत, ब्राज़ील, जापान और जर्मनी सुरक्षा परिषद की सदस्यता को लेकर एक-दूसरे का समर्थन करते आए हैं। उन्होंने जोड़ा कि भारत को इस संस्था में ज़रूर होना चाहिए। उन्होंने माना कि यूएन कई मुद्दों पर विफल भी रहा है लेकिन यही एक वैश्विक संस्था है, जिसने दुनिया को बाँधे रखा है। उन्होंने कहा कि यूएन में रिफॉर्म का अर्थ होगा इसे और ज्यादा विश्वसनीय और स्वीकार्य बनाना।

जर्मन राजदूत ने कहा कि आज कई मुद्दों पर भारत और जर्मनी समान राय रखते हैं। दिल्ली में प्रदूषण के स्तर के बारे में लिंडनर ने बताया कि क्लाइमेट चेंज और ग्रीन मोबिलिटी के मामले में जर्मनी और भारत एक साथ मिल कर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली एयरपोर्ट के पास स्थित मेट्रो स्टेशन में जर्मनी सोलर पैनल लगवा रहा है। लिंडनर ने जम्मू कश्मीर को भारत का घरेलू मुद्दा बताया लेकिन साथ ही कहा कि पूरे यूरोप का यही रुख है कि प्रतिबन्ध जल्द से जल्द हटाए जाएँ।

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महाभारत में ‘बलात्कार’ की क्या सजा थी? इसे स्त्री की ‘इज्जत लुटने’ जैसी बेहूदी बात से किसने जोड़ा?

महाभारत की द्रौपदी आम तौर पर असहाय सी “मान ली” जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि लोग अपने समय और परिवेश के हिसाब से पूर्वग्रहों से ग्रस्त होकर ही व्याख्या करने बैठते हैं। हाल ही में एक बार जब विख्यात लेखक नरेन्द्र कोहली से श्री राम के विषय में कोई प्रश्न पूछा जाने लगा तो उन्होंने बीच में ही टोककर कहा, ठहरो पहले ये बताओ कि किसके राम? वाल्मीकि के राम अलग है और तुलसी के राम अलग। द्रौपदी को असहाय मानने के पीछे एक बड़ी वजह “गुनाहों के देवता” को कहा जा सकता है। अपने एक नाटक में इस उपन्यास के लेखक ने द्रौपदी के पात्र से “अंधे का पुत्र अँधा” कहलवाया। उनका ये “अँधा युग” नाटक 1954 में भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर लिखा गया था।

प्रयागराज (तब इलाहबाद) रेडियो स्टेशन से इसके प्रसारण के बाद इसे वाम मजहब के लोगों ने “युद्ध विरोधी” क्रन्तिकारी नाटक बताया और 1962 से तो सत्यदेव दूबे और इब्राहीम अल्काजी जैसे रंगमंच से जुड़े लोगों ने इसका मंचन भी शुरू कर दिया था। सन 1963 में खुद नेहरू इसका मंचन देखने पहुँचे। इस नाटक के मंचन के लिए फिरोजशाह कोटला और पुराना किला जैसी जगहें चुनी जाती थी। इतिहास से जोड़ देने के चलते इसने खूब धूम मचाई। इस नाटक से “अँधे का पुत्र अँधा” कहकर द्रौपदी द्वारा दुर्योधन को नीचा दिखाए जाने को महाभारत के युद्ध की वजह बताया गया।

जाहिर है जैसे अंगूठा चूसने वाले बच्चों ने इससे व्याख्या करने की कोशिश की थी उनसे इससे ज्यादा की उम्मीद भी नहीं की जा सकती। कुछ ऐसे भी थे जो धूर्त बुद्धि-पिशाच थे और उन्हें इसके जरिये समाज में स्त्रियों को कलह के कारण के तौर पर स्थापित करने में सुविधा हो रही थी। खुद इस नाटक के लेखक भी अपनी पहली पत्नी को पीटने के लिए जाने जाते थे, इसलिए उनकी निजी कुंठा भी ऐसे विचार का कारण रही होगी। सवाल ये है कि अगर द्रौपदी का ऐसा कहना युद्ध का कारण होता तो भला इससे काफी पहले बचपन में ही भीम को विष देकर नदी में फेंक देने जैसा कृत्य दुर्योधन ने क्यों किया होता? फिर ये भी कि लाक्षागृह में पांडवों को जलाकर मारने का षड्यंत्र भी तो द्रौपदी के विवाह से पहले ही किया गया था!

तो ये माना जा सकता है कि महाभारत की द्रौपदी वैसी नहीं थी जैसा उसे पूर्वग्रहों से ग्रस्त कुछ लोग दर्शाना चाहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वो फैसले लेती नजर आती है? जवाब है हाँ। जैसे आज के भारत में राष्ट्रपति के पास मृत्युदंड को क्षमा करने के अधिकार होते हैं, लगभग वैसे ही द्रौपदी भी मृत्युदंड माफ़ करती नजर आती है। जब पांडव वनवास में थे तो वो ऋषि तृणबिंदु के आश्रम के क्षेत्र में रहते थे। एक दिन जब पांडव समिधा और द्रुवा इकट्ठी करने वन में रवाना हुए तो ऋषि के आश्रम से धात्रेयिका द्रौपदी के पास जा बैठी। थोड़ी देर में उधर से जयद्रथ गुजरा। इतनी सुन्दर स्त्री को आश्रम में देख के उसकी नियत डोली। पहले तो उसने मंत्री से पता करवाया कि स्त्री है कौन, फिर उस से मिलने पहुँचा।

जयद्रथ दुस्शला का पति था यानि कौरव पांडवों की इकलौती बहन का पति। बहनोई का यथासंभव सत्कार हुआ। लेकिन जब द्रौपदी को जयद्रथ के इरादों का पता चला तो वो भड़कीं। अब जो जयद्रथ था वो आज कल के लुच्चों से ज्यादा अलग नहीं सोचता था। जब पाँच पति हैं, तो मुझमें क्या कमी? वो द्रौपदी को उठा ले चला! धात्रेयिका भागी और जंगल में जा रहे पांडवों को सूचित कर दिया। नतीजा क्या हुआ होगा वो अंदाजा लगाना तो मुश्किल नहीं है। भीम और अर्जुन थोड़ी ही देर में जयद्रध के मंत्री-अंगरक्षकों को मार गिराते हैं। वो द्रौपदी को छुड़ाते हैं और जयद्रथ को बाँध कर, घसीटते हुए आश्रम ले आए।

अब द्रौपदी को बलात्कार के प्रयास करने वाले का दंड चुनना था। उस समय की स्थापित नीति के हिसाब से इस अपराध का दंड सीधा मृत्युदंड होता लेकिन द्रौपदी ने कहा इकलौता बहनोई है! मारोगे कैसे? इसका सर मूंड कर छोड़ दो, बेइज्जती मौत के बराबर ही है। कुल जमा पाँच पांडवों ने जयद्रथ की अच्छी खासी सेना ख़त्म करके उसका सर मूंड दिया था। इसी बेइज्जती का बदला लेने के लिए जयद्रथ ने पांडवों को युद्ध में एक दिन रोक लेने का वरदान लिया था। ये वो वरदान था जिस से महाभारत के युद्ध में जयद्रथ ने पांडवों को चक्रव्यूह के बाहर रोका और अभिमन्यु मारा गया था। इस पीढ़ी में आपके दरियादिल होने का नतीजा अगली पीढ़ी में आपके बच्चे झेलेंगे। ऐसा हमेशा होता है, ये भी बिलकुल सीधा हिसाब है।

इसके विपरीत द्रौपदी किसी का मृत्युदंड जारी करती भी आसानी से नजर आ जाती है। ये महाभारत के विराटपर्व में तब दिखता है जब पांडव अज्ञातवास में थे। वहाँ राजा विराट के साले कीचक की नजर द्रौपदी पर होती है और उसके मना करने पर भी जब कीचक नहीं मानता तो द्रौपदी वल्लभ नाम रखकर रसोइया बने हुए भीम के पास जाती है। मल्लयुद्ध में कीचक को हराना उस दौर में नामुमकिन था। भीम के द्वारा कीचक का वध ही वो कारण था, जिसकी वजह से कौरवों को पांडवों के मत्स्य देश में होने का अंदाजा होता है और वो हमला करने वहां पहुँच जाते हैं। यानी जितनी बार भी महाभारत में देखिए, बलात्कार या इसकी कोशिश का नतीजा मृत्युदंड ही दिखेगा।

सिर्फ शब्द पर आएँ तो बलात्कार शब्द में एक और चीज़ भी नजर आती है। ये बलात्कार जहाँ अपराध को स्त्री की अस्मिता से नहीं जोड़ता, वहीँ आज के दौर का “इज्जत लूटना” इसे सीधे अस्मिता, या सम्मान से जोड़ता है। उर्दू जबान में भी इसके लिए “अस्मत-दारी” लफ्ज़ इस्तेमाल होता है। अरबी या फारसी में संभवतः इसे कोई अपराध नहीं माना जाता होगा, इसलिए इसके लिए सिर्फ “जिना” जो अनैतिक यौन संबंधों के लिए प्रयुक्त होता है, सिर्फ वही शब्द याद आता है। समय के साथ आये बदलावों में से एक है भाषा के बदलने से पीड़ित को ही बलात्कार जैसे अपराध में शर्मिंदगी महसूस करवाया जाना।

बाकी रहा सवाल बलात्कार में मृत्युदंड का तो वो उचित तो लगता है, लेकिन फांसी या बिजली के झटके जैसे आसान तरीके नहीं होने चाहिए। बलात्कारी को अंग-भंग के जरिये नपुंसक बनाया जाना चाहिए, उसे कुछ साल जेल में डाला जाए और बुढ़ापे में छोड़ा जाए, ताकि घिसटकर बुढ़ापे, गरीबी, भूख, बीमारी की वजह से मरे। मुकदमा चलाए बिना गोली मारना तो आसान मौत है, इससे तो सिर्फ न्यायिक व्यवस्था में अविश्वास का पता चला!

अहमद, सुल्तान, अली, नज़म और शफीक ने युवती के साथ रेप के बाद किया उसके शरीर पर पेशाब

एक महिला ने यूके की कोर्ट में ऐसा खुलासा किया, जिसे जान कर वहाँ उपस्थित सभी लोगों की रूह काँप गई। उस महिला ने अपना दर्द बयाँ किया, जिसमें उसने बताया कि उसे तभी बेच दिया गया था जब वह मात्र 12 साल की थी। उसके साथ इतना यौन दुर्व्यवहार हुआ था कि उसके बारे में स्कूल में भी बातें चलने लगी थी, जहाँ वह पढ़ती थीं। यहाँ तक कि स्कूल के शिक्षकों ने भी उसकी मदद नहीं की। महिला ने बताया कि 5 लोगों ने उसके साथ रेप किया। इस दौरान उससे कई तरह के ‘सेक्स एक्ट’ परफॉर्म कराए गए। इसके बाद एक आरोपित ने तो उसके ऊपर पेशाब तक कर दिया।

इस मामले में पाँचों आरोपितों के ख़िलाफ़ मामला जूरी सुन रही है। युवती ने बताया कि उसे ‘माँस के टुकड़े’ की तरह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास भेजा गया। महिला ने अपने उस पूरे वाकये की तुलना नरक से की और कहा कि कई बार तो उसे ऐसा लगा कि आत्महत्या कर लेनी चाहिए। उसने बताया कि उसके परिवार को इस सब चीजों के बारे में कुछ नहीं पता था लेकिन स्कूल में उसे लेकर अफवाहों का बाजार गर्म था। उसने बताया कि वो किसी और से ये चीजें शेयर नहीं करना चाहती थी।

आरोपितों में से एक का नाम अली सुल्तान है। अली सुल्तान ने दावा किया कि उक्त महिला जब रेप होने की बात कह रही है, तब वह पाकिस्तान में था। महिला ने कोर्ट में कहा कि अली ने क्या किया, ये वही जानती है। साथ ही पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई। पीड़िता ने बताया कि सबसे पहले उसे अहमद ने बेचा। जब उसकी ज़िंदगी में सब ठीक नहीं चल रहा था तो उसका फायदा उठा कर अहमद ने उसके साथ दोस्ती बढ़ाई और फिर बेच डाला। इसके बाद 33 वर्षीय अली सुल्तान ने उसके साथ बलात्कार किया और फिर सेक्स स्लेव की तरह बेच दिया।

अली सुल्तान के बारे में कोर्ट को बताया गया है कि वो और भी युवतियों के साथ इस तरह की हरकत कर चुका है। एक अन्य आरोपित अमजद हुसैन ने पीड़िता को ‘ओरल सेक्स’ के लिए मजबूर किया और उसने 2 बार ऐसा किया। इसके बाद शफ़ीक़ यूनस ने उसके साथ बलात्कार किया। अंत में नज़म अख्तर ने रेप किया। उसने पीड़िता को विभिन्न मनपसंद ‘सेक्स एक्ट’ परफॉर्म करने को मजबूर किया। आरोपितों में से 2 ‘परफेक्ट पिज़्ज़ा’ में कार्यरत हैं।

न त्वहं कामये राज्यं: ‘गीता जयंती’ में नहीं पहुँचे BHU के कुलपति, परीक्षा का बहिष्कार करेंगे ‘धर्म संकाय’ के छात्र

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय में फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। विश्यविद्यालय प्रशासन ने भले ही मामले को ढकने के लिए तमाम प्रयास किए हों, छात्रों का विरोध-प्रदर्शन अनवरत जारी है। रविवार (दिसंबर 8, 2019) को संकाय के छात्रों ने इस उपलक्ष्य में गीता पाठ का आयोजन किया। छात्रों ने बताया कि बीएचयू के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय प्रत्येक रविवार को गीता का विशेष रूप से प्रवचन किया करते थे। इसकी परम्परा धर्म विज्ञान संकाय आज भी निभा रहा है। प्रत्येक रविवार को मालवीय भवन में गीता प्रवचन अभी भी अनवरत होता चला आ रहा है। संयोग से आज गीता जयंती के साथ रविवार भी है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर राकेश भटनागर रविवार को भी गीता जयंती के अवसर पर पूर्व निर्धारित गीता जयंती महोत्सव’ में नहीं पहुँचे। छात्रों का आरोप है कि हिन्दू धर्म से जुड़े कार्यक्रमों से दूरी बना कर रखने वाले कुलपति ने यह पहली बार नहीं किया है बल्कि अपनी नियुक्ति के समय से ही वह मालवीय भवन से दूरी बनाए हुए हैं। और ऐसे में उनसे मालवीय मूल्यों की रक्षा की उम्मीद रखना बेमानी है।

हालाँकि, अंतिम समय में गीता जयंती के कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के रेक्टर शामिल हुए और कुलपति पास के ही होलकर भवन में व्यस्त रहे। प्रशासन ने जिसकी सूचना आज ही ट्वीट के माध्यम से दी। छात्रों ने कहा गीता जयंती की अध्यक्षता कुलपति की जगह रेक्टर वी. के. शुक्ला ने की। जबकि मालवीय भवन जहाँ गीता जयंती समारोह मनाया जा रहा था वहाँ से चंद कदम की ही दूरी पर कुलपति जी नियुक्तियों के लिए साक्षात्कार लेने में व्यस्त रहे। दिल्ली में कार्यपरिषद की बैठक से आने के बाद रविवार होने पर भी साक्षात्कार कराना तो याद रहा पर 1 महीने से आंदोलन कर रहे छात्रों की माँगों पर कुछ बोलना भी उचित नहीं समझा, कार्यवाही तो दूर की बात रही।

वहीं अगर आज की बात करें तो संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पिछले एक महीने से चल रहे आंदोलन में धर्म व मालवीय मूल्यों के रक्षार्थ गीता जयंती के अवसर पर भगवद्गीता का पाठ किया गया व साथ ही भजन कीर्तन भी किया गया। गीता पाठ कार्यक्रम में उपस्थित संकाय के पूर्व छात्र डॉ. मुनीश कुमार मिश्र ने बताया कि महामना जी को गीता का ग्रंथ सबसे प्रिय था। वह प्रतिदिन गीता का पाठ किया करते थे व रविवार को गीता पर स्वयं ही प्रवचन करते थे, जिसको सुनने के लिए विश्वविद्यालय ही नहीं दूर-दूर से विद्वतजनों का आगमन होता था। आज भी धर्म विज्ञान संकाय के द्वारा वह परंपरा मालवीय भवन में संचालित की जा रही है।

आंदोलनरत छात्रों ने बताया कि महामना को जैसे गीता प्रिय थी, उसी तरह धर्म विज्ञान संकाय भी प्रिय था। छात्रों ने आगे कहा कि उनके द्वारा धर्म की रक्षा के लिए जो आंदोलन किया जा रहा है, उसमें कहीं न कहीं महामना की ही प्रेरणा है। महामना गीता के इस श्लोक को बार-बार दोहराया करते थे:

न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।
कामये दुःखतप्तानां प्राणिनामार्तिनाशनम् ॥

भावार्थ: हे प्रभु! मुझे राज्य की कामना नही, स्वर्ग-सुख की चाह नही तथा मुक्ति की भी इच्छा नही। एकमात्र इच्छा यही है कि दुख से संतप्त प्राणियों का कष्ट समाप्त हो जाये।

धर्म संकाय के छात्रों ने विश्वास जताया कि महामना ने अगर आंदोलन के लिए प्रेरित किया है तो उनकी ही प्रेरणा से इसका उचित समाधान अवश्य ही मिलेगा। प्रदर्शनकारी छात्र शुभम तिवारी ने कहा कि अगर सोमवार तक छात्रों की बात नहीं मानी जाती है तो 10 दिसम्बर से होने वाली सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन के नेतृत्व कर रहे छात्र चक्रपाणि ओझा ने कहा:

“जल्द ही आंदोलन को बड़ा रूप दिया जाएगा। हम शांत हैं तो तो प्रशासन ये न समझे कि चुप हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन हमें हल्के में न ले। हमारी माँगें जल्द मानी जाए अन्यथा हम सभी छात्र बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

शुभम तिवारी ने कहा कि अगर सोमवार तक हमारी बात नहीं मानी जाती है तो छात्र 10 दिसम्बर से होने वाली सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार करेंगे। धरनारत छात्रों में अभिषेक, धीरज मिश्र, शशिकांत मिश्र, प्रिंस, प्रशांत चतुर्वेदी, आनंद मोहन झा, कृष्ण कुमार सहित कई अन्य छात्र भी उपस्थित रहे।

इससे पहले छात्रों ने आरोप लगाया कि फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति के लिए उन्हें विशेषाधिकार के तहत हर जगह जबरदस्ती टॉप कराया गया। ऐसा यह सिद्ध करने के लिए किया गया कि वो 100% योग्य हैं। छात्रों का आरोप है कि इसी कारण उन्हें 10 में 10 नम्बर दिया गया था। बीएचयू प्रशासन की हठधर्मिता को उजागर करते हुए छात्रों ने कहा कि ग़लती सुधारने की बजाय यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि जो चयन समिति ने किया वहीं ठीक था।

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सुबह 43 परिवार उजड़ गए, शाम को ‘बधाई’ कार्यक्रम में दिखे दिल्ली के CM केजरीवाल

नॉर्थ दिल्ली की अनाज मंडी में भीषण आग लगने के कारण रविवार (दिसंबर 8, 2019) की सुबह 43 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे, और इधर उसी दिन मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल शाम को ‘बधाई कार्यक्रम’ में शामिल हुए। दिल्ली की इस त्रासदी के बाद जहाँ दिल्ली भाजपा और आम आदमी पार्टी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में लगी है। आप सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने इस घटना को लेकर शोक जताया। अस्पतालों में अभी भी अपने करीबियों का हालचाल जानने के लिए लोग पहुँच रहे हैं। परिजनों को बुला कर लाशों की पहचान कराई जा रही है।

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि जहाँ एक तरफ पूरी दिल्ली मातम में डूबी है, 43 परिवार उजड़ गए और कई लोग घायल हैं, दिल्ली के मुख्यमंत्री जी ‘बधाई तिमारपुर’ कार्यक्रम कर रहे हैं। तिवारी ने केजरीवाल से पूछा कि वो इतने संवेदन शून्य कैसे हो सकते हैं? रिहायशी इलाक़े की अवैध फैक्ट्री में लगी आग के बाद उस फैक्ट्री के मालिक रेहान को गिरफ़्तार कर लिया गया है। वो फरार हो गया था लेकिन पुलिस ने उसे धर-दबोचा, जिसके बाद उससे पूछताछ की गई।

दरअसल, तिमारपुर में सीवर लाइन प्रोजेक्ट का उद्घाटन होना था, जिसमें केजरीवाल शामिल हुए। भाजपा ने इसे लेकर आपत्ति जताई। पार्टी ने कहा कि इतनी बड़ी त्रासदी के दिन मुख्यमंत्री को शोक-संतप्त परिजनों को ढाँढस बँधाना चाहिए था लेकिन वो जश्न में मशगूल हैं। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा;

“निगम द्वारा कोई भी लाइसेंस नहीं दिया गया है। केजरीवाल ये बताएँ कि फैक्ट्री चलाने वाला रेहान कौन है, जिसे वहाँ के विधायक का संरक्षण प्राप्त है? हम इसकी उच्च स्तरीय जाँच की माँग करते हैं।”

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। राज्य के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन भी घटनास्थल पर पहुँचे। दिल्ली सरकार और एमसीडी के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह चर्चा चल रही है कि दिल्ली में ऐसी कई अनाधिकृत कॉलोनियाँ व फैक्ट्रियाँ हैं, जहाँ ऐसी त्रासदी हो सकती है। उन्हें समय रहते रोका जाना चाहिए।

जिसने राफेल को सुप्रीम कोर्ट में घसीटा, अपने उस बीमार आलोचक का हाल जानने पहुँचे PM मोदी

इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में राफेल सबसे बड़ा मुद्दा बना था। मोदी सरकार के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट से लेकर चुनावी रैलियों तक, हर जगह माहौल बनाने की कोशिश की गई थी। इसमें सबसे प्रमुख नाम भाजपा के ही दो पूर्व दिग्गजों का था। पूर्व केंद्रीय मंत्रीगण अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा मोदी सरकार के सबसे प्रखर आलोचकों में से एक बन गए थे। इन दोनों को मीडिया के तमाम प्रोपेगंडा पोर्टल्स में जगह मिली और उनके बयानों को रोज़ाना प्रकाशित किया जाने लगा। आज जब वही अरुण शौरी बीमार पड़े तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे पहुँच कर अपने पुराने साथी का हालचाल लिया।

अरुण शौरी एक सप्ताह पहले हॉस्पीटलाइज्ड हो गए थे। उन्हें पुणे के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 78 वर्षीय वरिष्ठ नेता रात को अचानक से गिर पड़े थे, जिसके बाद परिवार आनन-फानन में उन्हें लेकर अस्पताल पहुँचा। डॉक्टरों ने विभिन्न टेस्ट करने के बाद कहा था कि उनकी हालत स्थिर है। रविवार (दिसंबर 8, 2019) को उनसे मिलने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ तस्वीरें साझा की। पीएम ने लिखा कि उन्होंने अरुण शौरी के स्वास्थ्य की जानकारी ली। साथ ही उन्होंने बताया कि शौरी से बातचीत काफ़ी अच्छी रही।

ये वही अरुण शौरी हैं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले को ही त्रुटिपूर्ण करार दिया था, जिसमें मोदी सरकार को राफेल मामले में क्लीनचिट दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी उन्होंने समीक्षा याचिका दायर की थी और अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगा कर उनके ख़िलाफ़ भी याचिका दाखिल की थी। मोदी के प्रखर आलोचक रहे अरुण शौरी रविवार को पीएम से मुलाक़ात के दौरान काफ़ी ख़ुश नज़र आए। लेकिन कुछ ही महीनों पहले तक शौरी, प्रशांत भूषण और यशवंत सिन्हा के साथ मिल कर नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे थे।

अरुण शौरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कारोबारी अनिल अम्बानी के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई किए जाने की माँग की थी। उनका आरोप था कि वो सुप्रीम कोर्ट जाने को इसीलिए मजबूर हुए क्योंकि सीबीआई सरकारी दबाव के कारण मामला दर्ज नहीं कर रही थी।

तिलक लगा कर गर्लफ्रेंड के साथ लंदन के मंदिर पहुँचे ब्रिटिश PM, कहा- मोदी बना रहे हैं New India

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को लंदन में स्थित एक हिन्दू मंदिर में दर्शन करने के लिए पहुँचे। यूके के पीएम ने प्रमुख स्वामी महाराज के 98वें जन्मदिवस के अवसर पर लंदन के स्वामीनारायण मंदिर में दर्शन किया और भारतीय समुदाय को सम्बोधित भी किया। उन्होंने ब्रिटेन में भारत-विरोधी और हिन्दू-विरोधी भावनाओं पर लगाम लगाने का आश्वासन देते हुए कहा कि उनके देश में रेसिज्म के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश-भारतीय समुदाय की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि ब्रिटेन में पूर्वाग्रह और भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि मात्र 2% भारतीय समुदाय ब्रिटेन की जीडीपी में 6.5% से भी अधिक का योगदान देता है। उन्होंने वीजा के लिए यूरोपियन यूनियन को प्राथमिकता देने सम्बन्धी नियम-क़ायदों को बदलने की भी बात कही। जॉनसन अपनी गर्लफ्रेंड कैरी सायमंड्स के साथ मंदिर पहुँचे। उन्होंने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिल कर नए भारत के निर्माण की दिशा में काम करना चाहते हैं। गुरुवार को यूके में आम चुनाव होने हैं और ऐसे में भारतीय समुदाय के वोट अहम माने जा रहे हैं।

इंग्लैंड का सबसे लोकप्रिय स्वामीनारायण मंदिर उत्तर-पश्चिम लंदन के नास्डेन में स्थित है। 55 वर्षीय ब्रिटिश पीएम ने कहा कि उन्हें पता है कि पीएम मोदी एक नया भारत बना रहे हैं। जॉनसन ने कहा कि उनकी सरकार मोदी के इस कार्य में पूर्ण सहयोग देगी। ओपिनियन पोल्स में जॉनसन की कंजर्वेटिव पार्टी बाकी दलों से आगे चल रही है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से भारत के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने वाले लेबर पार्टी के नेताओं को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पूर्व में उनकी पार्टी की जीत में भारतीय समुदाय का अहम योगदान रहा है।

उन्होंने कहा कि जब उन्होंने ये बात पीएम मोदी को बताई तो उन्होंने हँस कर कहा कि भारतीय हमेशा विजेता के पक्ष में ही होते हैं। बोरिस जॉनसन ने इस दौरान फूल-माला पहनी और माथे पर तिलक भी धारण किया। स्वामीनारायण मंदिर के बारे में उन्होंने कहा कि ये ब्रिटेन को हिन्दू समुदाय की तरफ़ से दी गई सबसे अमूल्य भेंट है। उन्होंने कहा कि चैरिटी करने में अव्वल इस मंदिर के होने से लंदन और यूके भाग्यशाली है। इस दौरान यूके की गृह सचिव प्रीति पटेल भी उपस्थित रहीं। उन्होंने साड़ी पहन रखी थी।

प्रमुख स्वामी महाराज स्वामीनारायण संस्था के अध्यक्ष हैं। आज इस संस्था के मंदिर कई देशों में हैं और अच्छी कार्यों की वजह से कई देशों की सरकारों ने इसकी प्रशंसा भी की है।

मुस्लिम महिला ने धर्म परिवर्तन कर मंदिर में की शादी, परिजन दे रहे हैं दम्पति को ज़िंदा जलाने की धमकी

उत्तर प्रदेश के मेरठ में शनिवार (7 दिसंबर) को एक नव दंपति ने एसएसपी दफ़्तर में जाकर मदद की गुहार लगाई। नव विवाहिता (जो पहले मुस्लिम थी) ने पुलिस को बताया कि उसने अपना धर्म बदलकर आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली थी। लेकिन अब युवती के परिजन उन्हें कभी ज़िंदा जलाने की धमकी दे रहे हैं, तो कहीं हत्या करने की बात कह रहे हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए एसपी क्राइम ने प्रेमी युगल को सुरक्षा देने के लिए इंस्पेक्टर दौराला को निर्देश दिए हैं।

ख़बर के अनुसार, दौराला क्षेत्र के शाहपुर जदीद गाँव में रहने वाले आबिद अली की बेटी 14 अप्रैल को घर छोड़कर चली गई थी। इसके बाद परिजनों ने थाना दौराला में युवती की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उधर, युवती का कहना था कि उसने 22 अप्रैल को गाँव के अनुजपाल से आर्य समाज मंदिर में देवबंद में धर्म परिवर्तन कर शादी कर ली थी। इसके बाद युवती ने कोर्ट में पेश होकर अपने बयान भी दर्ज करा दिए थे। इसके बाद, कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने युवती को उसके पति के साथ भेज दिया, उसके बाद से ही दोनों एक किराए के मकान में रहने लगे।

मामला तब पुलिस की चौखट पर पहुँचा जब युवती के परिजनों ने उन्हें मारने की धमकी देने लगे। युवती ने पुलिस को बताया कि वो बालिग है और अपने पति के साथ उसके गाँव में ही रहना चाहती है, लेकिन गाँव में घुसने पर उनकी जान को ख़तरा है। इस बात का भी पता चला है कि एक सप्ताह पहले युवती के परिजनों ने दोनों का अपहरण करने की भी कोशिश की थी। युवती ने एसपी क्राइम को अपनी शिक़ायत में बताया कि उनके अब्बू ने गाँव में अन्य लोगों के साथ मिलकर पंचायत की, जिसमें यह तय किया है कि अगर उन्होंने (दंपति) गाँव में पैर रखा तो उनकी हत्या कर दी जाएगी।

एसपी क्राइम रामअर्ज़ ने दौराला थाना पुलिस को दंपति को सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने दंपति को मदद और पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है।

मराठा आंदोलन में हिंसा करने वालों की बल्ले-बल्ले: 3000 लोगों के ख़िलाफ़ केस वापस लेगी ठाकरे सरकार

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार एक के बाद एक देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्रित्व काल में हुए फ़ैसलों को पलटने में लगी हुई है। आरे जंगल में मेट्रो शेड प्रोजेक्ट को रोक दिया गया। भीमा-कोरेगाँव हिंसा भड़काने वालों के ख़िलाफ़ मामला वापस लिया जा रहा है। अब शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़े वर्ग को ख़ुश करने के लिए मराठा आंदोलन में हिंसा फैलाने के आरोपितों के ख़िलाफ़ चल रहे मामलों को ख़त्म करने का निर्णय लिया है। मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर 3000 लोगों के ख़िलाफ़ अदालतों में 288 मामले चल रहे हैं, जिसे सरकार वापस ले लेगी।

इससे पहले उद्धव ठाकरे की सरकार ने आरे जंगल में पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया था। इसी तरह ननर ऑइल रिफाइनरी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों के विरुद्ध चल रहे मामलों को भी ख़त्म करने का फ़ैसला लिया गया। ये आंदोलन जनवरी 2018 में रत्नागिरी में हुआ था। किसान आंदोलन के दौरान जिन्होंने हिंसा फैलाई, उनके ख़िलाफ़ चल रहे मामले भी ख़त्म होंगे। मराठा आंदोलन से जुड़े 3 मामले दस्तावेजों की अनुपलब्धता की वजह से लंबित रहेंगे।

इनमें से 35 केस ऐसे भी हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर हमला किया और उन्हें क्षति पहुँचाई। सरकार के ख़िलाफ़ ऐसी मामलों में सबूत भी हैं। इन मामलों को त्वरित रूप से वापस नहीं लिया जा सकता क्योंकि इन प्रदर्शनकारियों ने 5 लाख रुपए से भी अधिक की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया था। इन प्रदर्शनों में सरकारी अधिकारियों और पुलिसबलों पर हमले किए गए थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई आन्दोलनों में हिंसा फैलाने वालों के ख़िलाफ़ चल रहे मामले वापस लिए जा रहे हैं।

आरे जंगल में मेट्रो प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ चल रहे मामलों में 29 लोगों के विरुद्ध दर्ज विभिन्न केस वापस लिए गए। महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय ने उन सभी मामलों के विवरण मँगाए हैं, जिन्हें वापस लिया जाना है। बुधवार (दिसंबर 4, 2019) को हुई उद्धव कैबिनेट की बैठक में ही ये फ़ैसला ले लिया गया था कि विभिन्न आन्दोलनों में कई लोगों के ख़िलाफ़ चल रहे अदालती केस वापस ले लिए जाएँगे। हालाँकि, जिन मामलों में पुलिस के पास सीसीटीवी फुटेज जैसे मजबूत साक्ष्य हैं, उन्हें वापस नहीं लिया जा सकता।