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कार से निकल रही थी चिंगारी, खून से थे लथपथ, कहा- मैं ऋषभ पंत हूँ… बस ड्राइवर ने अपनी चादर में लपेटा: जानिए कार एक्सीडेंट के बाद कैसे बची जान

भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत (Rishabh Pant) शुक्रवार (30 दिसंबर 2022) को कार दुर्घटना में बाल-बाल बच गए। उनकी कार जलकर राख हो गई। उन्हें गंभीर चोटें आई हैं। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब वे दिल्ली से अपने घर रुड़की जा रहे थे। इस मुश्किल घड़ी में हरियाणा रोडवेज के बस ड्राइवर सुशील कुमार उनके लिए मसीहा बनकर पहुँचे। उन्होंने ही पंत को संभाला। बस कंडक्टर की मदद से पंत को कार से दूर किया और एम्बुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल भिजवाया। सुशील ने बताया कि पंत खून से लथपथ थे और उन्होंने खुद ही बताया था कि वे क्रिकेटर ऋषभ पंत हैं।

‘उनकी जान बचाना जरूरी समझा’

सुशील कुमार ने आज तक से कहा, “मैं हरियाणा रोडवेज में ड्राइवर हूँ। हरिद्वार से आ रहा था। जैसे ही हम नारसन के पास पहुँचे मैंने देखा दिल्ली की तरफ से कार आई और करीब 60-70 की स्पीड में डिवाइडर से टकरा गई। मैंने देखा उस आदमी (ऋषभ पंत) को। मुझे लगा वो बचेगा ही नहीं। कार से चिंगारी निकल रही थी। वह (पंत) कार के पास ही पड़े थे। मैंने बस कंडक्टर की मदद से उन्हें उठाया और कार से दूर ले गया। मैंने उनसे पूछा- कोई और है कार के अंदर। वो बोले मैं अकेला ही था। फिर उन्होंने खुद बताया कि मैं ऋषभ पंत हूँ। मैं क्रिकेट के बारे में इतना नहीं जानता। उन्हें साइड में खड़ा किया। उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे, तो हमने अपनी चादर में उन्हें लपेट दिया।”

सुशील ने आगे कहा, “उन्होंने हमें बताया था कि उनके पैसे भी गिर गए हैं। तो हमने आसपास पड़े उनके 7-8 हजार रुपए इकट्ठा किए और उन्हें दे दिए। मेरे कंडक्टर ने एंबुलेंस को फोन किया। मैंने पुलिस और नेशनल हाइवे को फोन लगाया। 15-20 मिनट के बाद एम्बुलेंस आ गई, तो उन्हें बैठाकर अस्पताल भेज दिया। वो (पंत) खून से लथपथ थे और लंगड़ाकर चल रहे थे। हमने वीडियो नहीं बनाया। उनकी जान बचाना जरूरी समझा।”

पत्रकार अभिषेक त्रिपाठी के मुताबिक, देहरादून मैक्स अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर आशीष याग्निक ने कहा है कि पंत को बाहर से कोई गंभीर चोट नहीं है। कमर, सिर और पैर में वह चोट बता रहे हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ, प्लास्टिक सर्जन,फिजिशियन समेत तमाम डॉक्टरों की टीम उनके उपचार में लगी है। पंत के परिजन भी अस्पताल में पहुँच गए हैं।

वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि पंत के इलाज का पूरा खर्च उनकी सरकार उठाएगी। धामी ने अधिकारियों से पंत की हालत को लेकर ताजा जानकारी ली और उनके इलाज का पूरा बंदोबस्त करने के लिए भी कहा।

गौरतलब है कि 30 दिसंबर 2022 की सुबह भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज और विकेटकीपर ऋषभ पंत की कार नारसन बॉर्डर पर हम्मदपुर झाल के पास अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराई और फिर जलकर राख हो गई।

हावड़ा रेलवे स्टेशन पर लगे जय श्रीराम के नारे, ममता बनर्जी ने मंच पर बैठने से कर दिया इनकार: राज्यपाल और मंत्री के मनाने पर भी नहीं मानीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पश्चिम बंगाल को हावड़ा-जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात दी। यह कार्यक्रम हावड़ा रेलवे स्टेशन में आयोजित था। इस कार्यक्रम में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद थीं। ममता को देखकर वहाँ मौजूद लोगों ने ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। इन नारों को सुनने के बाद, ममता बनर्जी भड़क गईं और उन्होंने मंच पर बैठने से इनकार दिया।

दरअसल, प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार (30 दिसंबर 2022) को पश्चिम बंगाल को 7800 करोड़ रुपए की योजनाओं की सौगात दी है। इस कार्यक्रम से पहले, ममता बनर्जी जब मंच की ओर जा रहीं थीं तब लोगों ने नारेबाजी करना शुरू कर दिया। उस समय उनके साथ खड़े राज्यपाल सीवी आनंद बोस व केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ममता बनर्जी को मनाने की कोशिश करते रहे।

हालाँकि, ‘जय श्रीराम’ के नारों से भड़की हुई ममता बनर्जी मंच पर चढ़ना ही नहीं चाहतीं थीं। राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री समेत अन्य लोगों ने भी काफी देर तक उन्हें मनाने की कोशिश की। हालाँकि, वह नहीं मानीं और प्लेटफॉर्म के पास रखी कुर्सियों में जाकर बैठ गईं। फिर, कार्यक्रम औपचारिक रूप से शुरू हुआ। इस कार्यक्रम में उन्होंने रेलवे परियोजना के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद करने के साथ ही उनकी माँ के निधन को लेकर अपनी संवेदनाएँ भी व्यक्त कीं हैं।

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी ‘जय श्रीराम’ के नारों के कारण भड़कीं हों। इससे पहले उन्होंने, जनवरी 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति वाले एक कार्यक्रम को संबोधित करने से मना कर दिया था। यह कार्यक्रम नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 125वीं जयंती पर आयोजित था।

कार्यक्रम में ममता मंच पर थीं। जब, वह लोगों को संबोधित करने पहुँची तब, वहाँ मौजूद लोगों ने ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। थोड़ा देर बाद पूरा कार्यक्रम स्थल इन नारों से गूँजने लगा। इन नारों के बीच ममता बनर्जी को अपनी बेइज्जती महसूस हुई और वह कार्यक्रम छोड़कर चलीं गईं।

‘जब तक हैं हमारे मस्तक, मूर्ति को स्पर्श नहीं कर पाएगा औरंगजेब’: मथुरा से नाथद्वारा आए थे श्रीनाथ जी, यहीं हुई अनंत-राधिका की सगाई

प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के बेटे अनंत अंबानी (Anant Ambani) और राधिका मर्चेंट (Radhika Merchant) का ‘रोका’ (सगाई) समारोह राजस्थान के श्रीनाथजी मंदिर में गुरुवार (29 दिसंबर 2022) को संपन्न हुआ। राधिका बिजनेसमैन वीरेन मर्चेंट की बेटी हैं।

इस ‘रोका’ समारोह में दोनों परिवार के करीबी लोग शामिल हुए। यंग कपल अनंत और राधिका के मुंबई पहुँचने पर जोरदार स्वागत हुआ। इस दौरान मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ में दोनों पर फूल बरसाए गए और ढोल-नगाड़ों के साथ शानदार स्वागत किया गया।

उल्लेखनीय है कि रोका समारोह में मुकेश अंबानी, कोकिला बेन अंबानी, नीता अंबानी, आकाश अंबानी, आनंद पीरामल सहित परिवार के अन्य लोग शामिल थे। ये लोग गुरुवार (29 दिसंबर 2022) को दोपहर को नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर में पहुँचे थे।

इस मौके पर श्रीनाथजी मंदिर को शानदार तरीके से सजाया गया था। अनंत और राधिका यहाँ पारंपरिक राज-भोग-श्रृंगार समारोहों में भी शामिल हुए। दोनों अब जल्द ही शादी के बंधन में बँधेंगे। राधिका और अनंत बचपन से एक दूसरे को जानते हैं।

क्या है श्रीनाथजी मंदिर का इतिहास

श्रीनाथजी का मंदिर नाथद्वारा के बनास नदी के किनारे स्थित है। श्रीनाथजी को भगवान कृष्ण का 7 वर्षीय बाल स्वरूप माना जाता है। नाथपुरा में श्रीनाथजी की स्थापना के पीछे की कहानी काफी रोचक है। दरअसल पहले यह मंदिर मथुरा में स्थित था। मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब ने 1670 ईस्वी के आसपास हिन्दू मंदिरों को तोड़वाने में लगा था। उसी दौरान वह मथुरा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में भी तोड़-फोड़ करवाने लगा।

औरंगजेब के अत्याचार से बचने के लिए मंदिर के पुजारी भगवान के विग्रह को बैलगाड़ी में रखकर जाने लगे। उन्होंने मेवाड़ के महाराजा महाराणा राजसिंह (Maharana Raj Singh) के पास संदेश भेजवाकर आश्रय देने का आग्रह किया। महाराणा राज सिंह ने उन्हें आश्रय का वचन दिया और कहा था, “जब तक मेरे एक लाख राजपूतों के मस्तक कट नहीं जाते, तब तक औरंगजेब श्रीनाथ जी की मूर्ति को स्पर्श भी नहीं कर पाएगा।”

पुजारियों ने मंदिर निर्माण के लिए उदयपुर से 50 किलोमीटर दूर बनास नदी के किनारे सिहाड़ नाम के ग्राम को चुना। 20 फरवरी 1672 ईस्वी को श्रीनाथ जी को वहाँ स्थापित कर दिया गया। आज वह स्थान ‘नाथद्वारा’ के नाम से दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

इस मंदिर से अंबानी परिवार का खास नाता है। यह परिवार लगातार यहाँ आता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी भी यहाँ अपनी माँ के साथ आते रहे हैं। वहीं कई महत्वपूर्ण व्यापारिक फैसलों से पहले भी यह परिवार श्रीनाथजी के दर्शन करने यहाँ पहुँचता है।

कौन हैं राधिका मर्चेंट

राधिका मर्चेंट उद्योगपति वीरेन मर्चेंट की बेटी हैं। मर्चेंट गुजरात के कच्छ के रहने वाले हैं। वह ‘एनकोर हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड’ के CEO और वाइस चेयरमैन हैं। वहीं राधिका ने राजनीति और अर्थशास्त्र में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया है। राधिका फ़िलहाल एनकोर हेल्थकेयर के बोर्ड में डायरेक्टर हैं। वह इंडियन क्लासिकल डांसर भी हैं। उन्हें ट्रैकिंग और स्विमिंग करने का शौक है।

जहाँ से हुआ वंदे मातरम का जयघोष, वहाँ तक पहुँची वंदे भारत: माँ के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद PM मोदी ने बंगाल को दी ₹7800 करोड़ की सौगात, जनता से माफी भी माँगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने माँ हीराबेन के अंतिम संस्कार के बाद पश्चिम बंगाल को 7800 करोड़ रुपए की योजनाओं की सौगात दी। इसमें, पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने के अलावा कई अन्य योजनाओं का उद्घाटन किया। इस मौके पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौजूद रहीं।

पीएम मोदी इस कार्यक्रम में पहले स्वयं जाने वाले थे। हालाँकि, माँ के निधन के कारण वह बंगाल नहीं जा सके। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वह इस कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है, “बंगाल की पुण्य धरती को नमन। निजी कारणों से आपके बीच नहीं बंगाल नहीं आ पाया। इसके लिए क्षमा माँगता हूँ। रेलवे और मेट्रो प्रोजेक्ट्स के साथ कई प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन हुआ है। वंदे भारत ट्रेन के लिए आप सबको बधाई।”

उन्होंने यह भी कहा, “बंगाल के कण-कण में आजादी के आंदोलन का इतिहास समाहित है। जिस धरती से वंदे मातरम् का जयघोष हुआ। वहाँ अभी वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई है। आज 30 दिसंबर की तारीख का भी इतिहास में अपना बहुत महत्व है। 30 दिसंबर, 1943 के दिन ही नेताजी सुभाष चंद्रबोस ने अंडमान में तिरंगा फहराकर भारत की आजादी का बिगुल फूँका था। इस घटना के 75 वर्ष होने पर साल 2018 में, मैं अंडमान गया था, नेताजी के नाम पर एक द्वीप का नामकरण भी किया था।”

पीएम मोदी ने आगे कहा है कि 21वीं सदी में भारत के तेज विकास के लिए भारतीय रेलवे का तेज विकास, तेज सुधार उतना ही जरूरी है। केंद्र सरकार, भारतीय रेलवे और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए रिकॉर्ड इनवेस्टमेंट कर रही है। आज भारत में भारतीय रेलवे के कायाकल्प का राष्ट्रव्यापी अभियान चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने रेलवे में हो रहे विकास को लेकर कहा है कि देश में वंदेभारत, तेज, हमसफर जैसी आधुनिक ट्रेनें बन रही हैं। विस्टा डोम कोचेस, रेल यात्रियों को नए अनुभव करा रहे हैं। देश में सुरक्षित, आधुनिक कोचेस की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हो रही है। रेलवे स्टेशनों को भी एयरपोर्ट्स की तरह विकसित किया जा रहा है। न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन भी इसी लिस्ट में शामिल है।

पीएम ने जोर देते हुए कहा है कि बीते आठ वर्षों में भारतीय रेलवे ने आधुनिकता की नींव पर काम किया है। अब आने वाले आठ वर्ष में सभी भारतीय, भारतीय रेलवे को आधुनिकता की नई यात्रा पर निकलते हुए देखेंगे। आज पूरी दुनिया भारत को बहुत भरोसे से देख रही है। इस भरोसे को बनाए रखने के लिए हर भारतीय को पूरी शक्ति लगा देनी है। सभी लोगों को मिलकर हर दिन -हर पल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करना है। देश सेवा के कार्यों में रुकना नहीं है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा है, “हम लोग अक्सर प्रीवेंटिव हेल्थकेयर की बात करते हैं। कहते हैं कि दिनचर्या वो होनी चाहिए कि बीमारी की नौबत ही ना आए। ठीक इसी तरह नदी की गंदगी को साफ करने के साथ ही केंद्र सरकार प्रीवेंशन पर बहुत जोर दे रही है। इस प्रीवेंशन का सबसे बड़ा और आधुनिक तरीका है, ज्यादा से ज्यादा आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट। आने वाले 10-15 साल बाद की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए देश में आज ही आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगवाए जा रहे हैं।”

इससे पहले, इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीएम मोदी की माँ के निधन को लेकर कहा है, “मेरी संवेदनाएँ आपके साथ हैं। दु:ख की घड़ी में हम सब आपके साथ हैं। माँ से बढ़कर कुछ और नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री जी आज आपके लिए बहुत दुखद दिन है। मैं भगवान से प्रार्थना करूँगी की आपको यह दु:ख सहन करने की क्षमता प्रदान करें। मैं आपसे अनुरोध करूँगी कि आप इस कार्यक्रम को छोटा रखें क्योंकि आप अभी अपनी माँ के अंतिम संस्कार से आए हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत करने के अलावा, 2550 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अनेक सीवर अवसंरचना परियोजनाओं का शिलान्यास किया। यही नहीं उन्होंने, कोलकाता मेट्रो की जोका-तारातला पर्पल लाइन व डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वॉटर एंड सेनीटेशन का उद्घाटन किया है।

बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ हीराबेन मोदी यूएन मेहता हॉस्पिटल में भर्ती थीं। इसी हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया। माँ के निधन के बाद, प्रधानमंत्री ने अपनी माँ के 100वें जन्मदिन के मौके पर दी उनकी अंतिम शिक्षा को भी याद किया। उन्होंने लिखा, “मैं जब उनसे 100वें जन्मदिन पर मिला तो उन्होंने एक बात कही थी, जो हमेशा याद रहती है- કામ કરો બુદ્ધિથી, જીવન જીવો શુદ્ધિથી यानी काम करो बुद्धि से और जीवन जियो शुद्धि से।”

निधन के बाद हीराबेन मोदी का पार्थिव शरीर उनके छोटे बेटे पंकज मोदी के घर ले जाया गया गया। हीराबेन पंकज मोदी के साथ गाँधीनगर के रायसन गाँव की वृंदावन सोसायटी में रहती थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी माँ हीराबेन के अंतिम दर्शन के लिए पंकज मोदी के घर पहुँचे। अंतिम यात्रा में पीएम माँ के पार्थिव शरीर को कंधा देते हुए भी नजर आए।

माँ को मुखाग्नि दे राजधर्म निभाने निकल पड़े PM मोदी, कभी पत्नी की मौत की खबर मिलने के बाद भी कर्मपथ पर डटे रहे थे सरदार पटेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की माँ हीराबेन (Heera Ben) का 100 साल की उम्र में निधन हो गया। इस दौरान प्रधानमंत्री अपनी माँ को लेकर भावुक रहे। हालाँकि, एक बेटे के रूप में इतने बड़े दुख के बावजूद वे प्रधानमंत्री के रूप में अपने कर्म को नहीं भूले। माँ की अंत्येष्टि करने के कुछ देर बाद वे अपने काम पर काम लग गए।

पीएम मोदी अपनी माँ के पार्थिव शरीर को शुक्रवार (30 दिसंबर 2022) को सुबह 9:40 बजे अहमदाबाद में मुखाग्नि दी। इसके बाद वे अहमदाबाद से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़कर बंगाल में आयोजित कार्यक्रम में जुड़कर हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई और इसका शुभारंभ किया।

इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (West Bengal CM Mamata Banerjee) भी शामिल थीं। पीएम मोदी को देखकर उन्होंने कहा, “यह दिन आपके लिए दुख भरा है। आपकी माँ यानी हमारी भी माँ। ईश्वर आपको अपना काम जारी रखने की शक्ति दें। मेरा अनुरोध है कि आप कुछ समय आराम भी करें।”

कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने कहा, “निजी कारणों की वजह से आपके बीच बंगाल नहीं आ पाया। इसके लिए क्षमा माँगता हूँ। वंदे भारत ट्रेन के लिए आप सबको बधाई। कुछ देर बाद गंगाजी की स्वच्छता और पीने के पानी से जुड़ी परियोजनाएँ पश्चिम बंगाल को सौंपने का अवसर मिलेगा।”

भारत की भूमि ऐसे कर्मयोगियों से भरी रही है, जिनके लिए व्यक्तिगत दुख मायने नहीं रखता, बल्कि देश का दुख ही उनका अपना दुख और देश का सुख ही उनके लिए अपना सुख होता है। वो हर अपने देश के लिए जीते हैं। उनकी हर साँस देश की जनता की जनता की भलाई के लिए होता है।

हमें याद करना होगा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) की पिता के निधन को। अप्रैल 2020 में सीएम योगी के पिता आनंद सिंह बिष्ट का निधन हो गया था। यह वह दौर था, जब देश में कोरोना के कारण हर तरफ निराशा और अफतरा-तफरी का माहौल था। पूरे देश में लॉकडाउन लगा था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जब अपने पिता के निधन की जानकारी मिली थी तब वे कोरोना नियंत्रण को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। जैसे ही यह जानकारी उन्हें मिली वे कुछ समय के लिए स्तब्ध रह गए और उनकी आँखें छलछला आईं। इसके बावजूद भी वे अधिकारियों के साथ बैठक करते रहे। लॉकडाउन के कारण सीएम योगी अपने पिता की अंतिम यात्रा में शामिल भी नहीं हुए और मुख्यमंत्री के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करते रहे।

उस दौरान उन्होंने अपनी माँ को एक पत्र भी लिखा था। पत्र में सीएम योगी ने लिखा था, “अपने पूज्य पिताजी के कैलाशवासी होने पर मैं अत्यंत शोकाकुल हूँ। वे मेरे पूर्वाश्रम के जन्मदाता थे। अंतिम क्षणों में उनके दर्शन की हार्दिक इच्छा थी, लेकिन कोरोना के खिलाफ लड़ाई में यूपी की 23 करोड़ जनता के हित के कर्तव्यबोध के कारण मैं नहीं पहुँच सका। लॉकडाउन को सफल बनाने और कोरोना को परास्त करने की रणनीति के कारण उनके अंतिम संस्कार में मैं भाग नहीं ले पा रहा हूँ। लॉकडाउन के बाद दर्शनार्थ जाऊँगा।”

इस तरह सीएम योगी आदित्यनाथ अंतिम क्षणों में ना ही अपने पिता का दर्शन कर पाए और ना ही उनकी अंत्येष्टि में शामिल हो पाए। भारत की इस पवित्र धरा पर इस तरह के कर्तव्यनिष्ठ और जनसेवक बेहद कम देखने को मिलते हैं। कुछ ऐसा ही क्षण लौह पुरुष कहलाने वाले देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवनकाल में भी देखने को मिला।

सरदार पटेल के कर्तव्यबोध, समर्पण और ईमानदारी की झलक उनके जीवन से मिलती है। सरदार पटेल एक नामी वकील थे। जनवरी 1909 में जब वे कोर्ट में हत्या के आरोपित अपने मुवक्किल का केस लड़ रहे थे, उसी दौरान उन्हें अपनी पत्नी झावेरबा की मृत्यु का तार मिला। इस आपातकालीन पत्र को पढ़कर उसे साधारण भाव से सरदार पटेल ने अपनी जेब में रख लिया और कोर्ट में बहस करते रहे।

बहस के बाद जब इस घटना की जानकारी उनके साथियों और न्यायाधीश को उनकी पत्नी के निधन की जानकारी मिली तो उन्होंने सरदार पटेल पूछा। तब सरदार पटेल ने कहा, “उस समय मैं अपना फर्ज निभा रहा था, जिसका शुल्क मेरे मुवक्किल ने न्याय के लिए मुझे दिया था। मेरे मुवक्किल को झूठे मामले में फँसाया गया है। मैं उसके साथ अन्याय कैसे कर सकता था।”

सरदार पटेल भी ऐसे ही सिद्धांतवादी, निडर और कर्तव्यनिष्ठ जननायक थे। वे अक्सर कहा करते थे कि जो भी व्यक्ति सुख और दुःख का समान रूप से स्वागत करता है, वास्तव में वही सबसे अच्छा जीवन जीता है। वे कहते थे कि जो व्यक्ति अपने जीवन को बहुत गंभीरता से लेता है, उसे एक तुच्छ जीवन के लिए तैयार रहना चाहिए। 

देश व्यक्तिवादी और मौकापरस्त राजनीति के बीच इस तरह के चेहरे भारत की संस्कृति और इसके कर्तव्यबोधता पर निष्ठा रखने वालों के लिए एक विश्वास के रूप में उभरते हैं। समय-समय पर ऐसे लोगों के दिखाए मार्ग देश के लोगों और नेतृत्व का मार्गदर्शन करने का भी काम करते हैं।

हिजाब, हिंसा, दरगाह, इस्लाम… तुनिशा की मौत के पीछे मर्डर देख रही माँ, बताया- शीजान के परिवार ने ट्रैप करके रखा था

एक्ट्रेस तुनिशा शर्मा (Tunisha Sharma) की माँ वनिता ने शीजान मोहम्मद खान और उनके परिजनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि तुनिशा पर इस्लाम कबूलने का दबाव डाला जाता था। मारपीट की जाती थी। 24 दिसंबर 2022 को तुनिशा मृत मिली थी। वनिता शर्मा ने बेटी की हत्या की आशंका जताई है।

वनिता शर्मा ने शुक्रवार (30 दिसंबर 2022) को मीडिया से बात करते हुए बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी आत्महत्या नहीं करने वाली थी। इनका झगड़ा होता था। मारपीट करते थे। इसका भी मैं कुछ नहीं कह सकती, लेकिन जिस दिन उसका ब्रेकअप हुआ, उस दिन उसे शीजान ने थप्पड़ मारा। वह बहुत रोई। उसने कहा कि मम्मी मुझे यूज किया गया है। मेरे साथ धोखा हुआ है।” यह पूछे जाने पर कि क्या शीजान के परिवार वालों को भी इस मामले में आरोपित बनाया जाना चाहिए, वनिता शर्मा ने कहा, “हाँ, बिल्कुल।”

वनिता शर्मा ने आरोप लगाया कि सुसाइड वाले दिन तुनिशा को शीजान कमरे से ले गया, लेकिन एम्बुलेंस को फोन नहीं किया। यह मर्डर भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि शीजान ने उसे हिजाब पहनने के लिए मजबूर किया था। शादी का वादा किया था, जिसकी वजह से तुनिशा मुस्लिम की तरह रहने लगी थी। शीजान से ब्रेकअप के बाद से वह काफी परेशान रहती थी। शीजान उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाता था। शीजान के घरवालों ने तुनिशा को ट्रैप करके रखा था।

उन्होंने यह भी बताया, “उसकी माँ को तुनिशा अम्मा कहती थी। शीजान के परिवार से मिलने के बाद वो मुझसे भी दूर रहने लगी थी और उसके परिवार को अपने परिवार की तरह मानने लगी थी। शीजान तुनिशा का मानसिक और आर्थिक शोषण करता था। शीजान की बहन फलकनाज उसे दरगाह ले जाती थी। शीजान मेरी बेटी से महँगे-महँगे गिफ्ट माँगता था। जब तक शीजान खान को सजा नहीं मिल जाती, तब तक मैं चैन से नहीं बैठूँगी।”

मालूम हो कि तुनिशा की एक्ट्रेस दोस्त रैया लबीब ने भी शीजान को लेकर दावा किया था कि वह गुस्से में आकर तुनिशा के साथ मारपीट करता था। पास रखी हुई चीजों को तोड़ देता था। रैया ने शीजान के कई अन्य लड़कियों से संबंध होने की बात कही थी।

गौरतलब है कि 20 साल की टीवी एक्ट्रेस तुनिशा शर्मा की 24 दिसंबर 2022 को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। तुनिशा की माँ ने आरोप लगाया था कि शीजान के कारण उनकी बेटी ने आत्महत्या की है। वहीं, पुलिस पूछताछ में शीजान खान ने कहा था कि मौत से 15 मिनट पहले दोनों ने साथ में लंच किया था। साथ ही, दावा किया था कि धर्म और उम्र में अंतर होने के कारण उसने तुनिशा से ब्रेकअप किया। शीजान ने पुलिस को यह भी बताया था कि तुनिशा ने मौत से कुछ दिन पहले भी आत्महत्या करने की कोशिश की थी। लेकिन, उसने उसे बचा लिया था। शीजान ने दावा किया था कि उसने इस बारे में कई बार तुनिशा की माँ को बताया था।

‘राहुल गाँधी खुद तोड़ रहे थे सुरक्षा घेरा’ : कॉन्ग्रेस की शिकायतों की फिर खुली पोल, दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्रालय को दी रिपोर्ट

राहुल गाँधी की सुरक्षा को लेकर सीआरपीएफ के बाद दिल्ली पुलिस ने भी अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने राहुल गाँधी पर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने का आरोप लगाया है। गृह मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में उनकी सुरक्षा के पूरे इंतजाम किए गए थे। राहुल ने खुद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। इसके पहले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने भी राहुल गाँधी पर सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी का आरोप लगाया था।

कॉन्ग्रेस की ओर से राहुल गाँधी की सुरक्षा में चूक को लेकर लिखे गए पत्र के बाद गृह मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों से इसपर रिपोर्ट माँगी थी। इसे लेकर दिल्ली पुलिस ने अपने अलग-अलग यूनिट जैसे सिक्यूरिटी, ट्रैफिक व स्पेशल ब्राँच आदि से जानकारी माँगी थी। इसके बाद तैयार की गई रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी गई है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि दिल्ली में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सादी वर्दी में भी काफी संख्या में पुलिसबल तैनात किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली पुलिस के जवानों ने राहुल गाँधी के लिए सुरक्षा घेरा बनाया हुआ था। पुलिस ने एक घेरा रस्सी से भी बनाया हुआ था, जिसे राहुल गाँधी ने खुद ही तोड़ा।

बता दें कि 24 दिसंबर, 2022 को राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा दिल्ली पहुँची थी। दिल्ली में यात्रा का रूट 23 किलोमीटर लंबा था।

इससे पहले CRPF ने भी राहुल गाँधी की सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंपी थी। केन्द्रीय बल ने कहा था कि उनकी तरफ से राहुल की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। CRPF के जवानों की तरफ से राहुल गाँधी पर सिक्योरिटी पोटोकॉल्स की अनदेखी का आरोप भी लगाया गया। सीआरपीएफ ने रिपोर्ट में दावा किया कि वर्ष 2020 के बाद से उन्होंने खुद 113 बार नियमों का उल्लंघन किया है।

साथ ही CRPF ने जानकारी दी थी कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान दिल्ली में भी सभी सुरक्षा दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया था। दिल्ली पुलिस ने भी सुरक्षा कर्मियों की पर्याप्त तैनाती की थी। CRPF ने कहा है कि राहुल गाँधी की ओर से निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कई मौकों पर देखा गया है। केन्द्रीय बल ने यह भी बताया है कि दिल्ली में भी राहुल गाँधी ने इसका उल्लंघन किया था।

आपको बता दें कि राहुल गाँधी की सुरक्षा में सेंध का आरोप लगाते हुए कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने गृहमंत्री को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने राहुल गाँधी की सुरक्षा बढ़ाने की माँग भी की थी। उन्होंने कहा था कि 24 दिसंबर, 2022 को राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ यात्रा के दौरान दिल्ली में सुरक्षा में चूक हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली पुलिस भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सकी। इस दौरान उनकी सुरक्षा में कई बार सेंध लगी। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा।

‘ऋषभ पंत पर माता कृपा रखना’: दानिश कनेरिया का ‘माता रानी’ को याद करना कट्टरपंथियों को नहीं सुहाया, पूछा- तू हिंदू है क्या

भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत के भीषण कार एक्सीडेंट की खबरों ने शुक्रवार को (30 दिसंबर 2022) सबको परेशान कर दिया। उनके चाहने वाले फौरन उनकी तेज रिकवरी की प्रार्थना करने लगे। पाकिस्तान में बैठे दानिश कनेरिया ने भी जब ये सुना तो उन्होंने भी एक ट्वीट में ऋषभ के जल्द ठीक होने की कामना की। हालाँकि हर बार की तरह इस दफा भी कट्टरपंथियों को उनका रवैया रास नहीं आया और वह जुट गए कनेरिया को गाली देने में।

दानिश कनेरिया ने अपने ट्वीट में लिखा था, “माता रानी कृपा रखना ऋषभ पंत पर। माता कृपा रखना ऋषभ पर। मैं उम्मीद करता हूँ कि वो जल्द ही ठीक हो जाए।”

दानिश के इस ट्वीट के बाद जहाँ उनके चाहने वाले भारतीयों ने उन्हें खबर दी कि अब ऋषभ रिकवर कर रहे हैं। वहीं कट्टरपंथियों ने जहर उगलना शुरू कर दिया।

नोमान अजहर ने उनके पोस्ट पर लिखा- “हिंदू है क्या तू।”

ओसामा कुरैशी ने इस साधारण पोस्ट पर दानिश कनेरिया को माँ की गालियाँ देना शुरू कर दीं। वहीं जाहिद अब्बास ने भी दानिश को उनके ट्वीट पर अपशब्द कहे।

इसी तरह दानिश कनेरिया ने आज भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ के देहांत पर भी संवेदना व्यक्त की। उनके इस ट्वीट पर भी कट्टरपंथी चिढ़ने लगे। इब्राहिम अहमद ने इस संवेदना को आरएसएस के लिए की गई प्रार्थना बताया और उनके ट्वीट को बेहद शर्मिंदा करने वाला कहा।

बता दें कि ऋषभ पंत का एक्सीडेंट और हीराबेन का देहांत- ये दोनों खबरें आज सुबह की हैं। ट्विटर पर हर कोई इन दोनों घटनाओं की चर्चा कर रहा है। लोग पीएम मोदी की माँ को जहाँ श्रद्धांजलि दे रहे हैं। वहीं ऋषभ पंत जल्द ठीक हों, इसकी कामना कर रहे हैं।

गोल दागने की मशीन बनने से पहले गोलकीपर थे पेले, फुटबॉल खरीदने के पैसे नहीं ​थे तो पिता के मोजे में कागज डाल बनाते थे गेंद

ब्राजील के महान फुटबॉल खिलाड़ी पेले के निधन से फुटबॉल प्रेमी गम में हैं। पेले के निधन की खबर उनकी बेटी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दी। पेले का असली नाम एडसन एरेंटस डो नेसिमेंटो था। प्रशंसक उन्हें डिको, पेले और द ब्लैक पर्ल के नाम से भी पुकारते थे।

फुटबॉल की दुनिया में महानता को प्राप्त ब्राजील के इस खिलाड़ी की जिंदगी संघर्षपूर्ण रही है। पेले का जन्म 23 अक्टूबर, 1940 को ब्राजील में हुआ था। उनके पिता का नाम डोनडिन्हो तथा माता का नाम सेलेस्टी अरांटेस था। पेले 2 भाइयों में बड़े थे। परिवारवाले उन्हें डिको बुलाते थे। अपने क्लब के लिए खेलते हुए डिको कभी-कभी गोलकीपर की भूमिका भी निभाते थे। उस वक्त ब्राजील टीम के गोलकीपर बिले काफी मशहूर थे। लोग डिको को दूसरा बिले पुकारने लगे। डिको के दोस्त उन्हें छेड़ने के लिए बिले की जगह ‘पेले’ कहते थे। बाद में डिको इसी नाम से प्रसिद्ध हुए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति सही नहीं थी। पेले को बचपन में गरीबी का सामना करना पड़ा था। पेले और उनके भाइयों के पास पहनने को जूते नहीं हुआ करते थे। कई बार उन्हें सिर्फ एक ही बार खाना नसीब होता था। गरीबी के कारण पेले के पास फुटबॉल खरीदने तक के पैसे नहीं थे। वर्ष 2014 में एक इंटरव्यू के दौरान पेले ने अपने शुरुआती दिनों को याद कर बताया था कि उस वक्त लेदर के बॉल काफी महँगे हुआ करते थे। ऐसे में पिता के पुराने मोजे में कागज भर कर उससे खेला करते थे।

पेले ज्यादा पढ़ाई भी नहीं कर पाए। दरअसल, कक्षा के दौरान फुटबॉल खेलने के कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। परिवार की मदद के लिए पेले ने पढ़ाई छोड़कर जूतों की मरम्मत का काम शुरू किया। इसके बाद पेले ने स्थानीय चाय की दुकानों में वेटर का काम भी किया। पेले समय बचा कर फुटबॉल की प्रैक्टिस भी कर लिया करते थे। उनकी मेहनत रंग लाई 15 साल की उम्र में उन्होंने इनडोर लीग खेला और तहलका मचा दिया।

साल 1957 में अर्जेंटीना के खिलाफ अपना पहला मैच खेलने वाले पेले ने साल 1958 में फीफा वर्ल्ड कप में अपनी छाप छोड़ी। इसी साल ब्राजील ने पहली बार फीफा विश्व कप जीता था। इस टूर्नामेंट में पेले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद पेले को अंतरराष्ट्रीय ख्याति मिली। इस वर्ल्डकप में पेले ने फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में हैट्रिक गोल दागे थे। फुटबॉल के जादूगर पेले ने 1958, 1962 और 1970 में ब्राजील को 3 वर्ल्ड कप दिलाए। उन्होंने पूरे करियर में कुल 4 वर्ल्ड कप खेले। इनमें से टीम ने तीन बार खिताब जीता। वर्ष 1971 में पेले ने ब्राजील नेशनल टीम से संन्यास ले लिया था। ब्राजील के फुटबॉल आइकन पेले (Pele) तीन बार फीफा विश्व कप जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी हैं। पेले ने अपने करियर में कुल 92 मैच खेले और 78 गोल दागे।

पेले ने कुल तीन शादियाँ की थी। उनकी पहली शादी साल 1966 में हुई थी। इससे उन्हें 2 बेटियाँ भी हुई, लेकिन 1982 में उनका तलाक हो गया। पेले ने दूसरी शादी 1991 में की। इस शादी से उन्हें जुड़वा बच्चे हुए। साल 2008 में पेले का दूसरी बार तलाक हुआ। इसके बाद 2016 में पेले ने मर्सिया ओकी से तीसरी शादी की थी।

पेले का 82 साल की उम्र में निधन हो गया। पेले की बेटी कैली नैसिमेंटो ​​​​​ने इंस्टाग्राम पर उनके निधन की जानकारी दी। पेले पेट के कैंसर, किडनी और हृदय की समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें 29 नवंबर, 2022 को साओ पाउलो के अल्बर्ट आइंस्टीन अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

पिता के निधन के बाद बेटी ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया। कैली ने लिखा, “हम जो कुछ भी हैं आपकी बदौलत हैं। हम आपको बहुत प्यार करते हैं। रेस्ट इन पीस।”

पेले की बेटी के इंस्टाग्राम पोस्ट का स्क्रीन शॉट

एक्टिविज्म के नाम पर पैसा जुटाया, खुद पर किया खर्च: TMC नेता साकेत गोखले फिर गिरफ्तार, गुजरात पुलिस ने माह भर में तीसरी बार पकड़ा

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेता साकेत गोखले (Saket Gokhle) को गुजरात पुलिस (Gujrat Police) ने एक माह में तीसरी बार गिरफ्तार किया है। साकेत की गिरफ्तारी गुरुवार (29 दिसंबर 2022) शाम को दिल्ली से हुई और गुजरात पुलिस कार से उन्हें गुजरात लेकर गई। एक्टिविज्म के नाम पर क्राउड फंडिंग द्वारा प्राप्त धन का निजी इस्तेमाल करने के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया है।

रिपब्लिक टीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया, साकेत गोखले को इस बार एक्टिविज्म (activism) के नाम पर पैसे की हेराफेरी से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को गोखले से जुड़े खातों का पता चला है, जिसमें वह लोगों से पैसे प्राप्त कर रहे थे। वह इन पैसों का इस्तेमाल अपने खर्च के लिए कर रहे थे। दूसरी ओर गोखले ने दावा है कि एक्टिविज्म से संबंधित मामलों के लिए वह कानूनी शुल्क के रूप में ये पैसे ले रहे थे। उल्लेखनीय है कि TMC से जुड़ने से पहले गोखले को को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का वफादार माना जाता था।

यहाँ यह बताना भी जरूरी है कि पहले भी कई मुस्लिम एक्टिविस्ट ने साकेत गोखले से ऑनलाइन जुटाए गए पैसों को लेकर जवाबदेही की माँग की थी। आरोप लगाया गया था कि साकेत गोखले मुफ्त में ऑनलाइन याचिकाएँ दायर करते हैं और अदालत में उन याचिकाओं का फॉलोअप नहीं करते हैं। उन पर आरोप है कि वह एक्टिविज्म पर कोई पैसा खर्च नहीं करते हैं और कॉन्ग्रेस समर्थकों ने इस बाबत जो भी पैसे दिए, उसे अपने लिए खर्च कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गुजरात पुलिस ने 5 दिसंबर 2022 को गोखले को जयपुर एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। तब उन्होंने मोरबी पुल हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में झूठ फैलाया था। गोखले ने एक गुजराती समाचार पत्र की कथित क्लिपिंग साझा करते हुए दावा किया था कि पीएम मोदी की मोरबी यात्रा पर 30 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। उन्होंने जो क्लिपिंग साझा की थी, वह कथित तौर पर ‘गुजरात समाचार’ का था। ‘गुजरात समाचार’ ने कहा था कि उन्होंने ऐसी कोई रिपोर्ट प्रकाशित ही नहीं की है।

बता दें कि 5 दिसंबर 2022 को गिरफ्तारी के बाद गोखले को अहमदाबाद की एक अदालत ने 8 दिसंबर को जमानत दे दी थी। हालाँकि, जमानत के कुछ ही घंटों बाद उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। दरअसल, मोरबी मामले में ही फर्जी ट्वीट को लेकर अन्य मामला दर्ज किया गया था। इसी के सिलसिले में जमानत के ठीक बाद उनकी दूसरी बार गिरफ्तारी हुई थी।