Home Blog Page 2446

सड़कों पर ही नहीं, मंदिर-गुरुद्वारे में भी नमाज पढ़ना है इस्लामी गिरोह का सपना: गणेश उत्सव से राना अयूब को लगी मिर्ची, हिंदू ही दें सेक्युलरिज्म की आहुति?

देश का सेक्युलरिज्म खतरे में हैं क्योंकि गणेश चतुर्थी के रूप में एक और हिंदू त्योहार आ गया है। कट्टरपंथियों को लग रहा है अभी तक तो इस मौके पर हिंदू केवल सरेआम मूर्ति पूजन से अल्पसंख्यकों की भावना आहत करते थे। लेकिन, इस बार इन लोगों ने हद्द ही कर दी। बेंगलुरु में सामने से आकर त्योहार मनाने के लिए धारवाड़ ईदगाह मैदान माँग लिया और कोर्ट ने भी अनुमति दे दी कि मनाओ अपना पर्व कोई कुछ नहीं कहेगा।

कपिल सिब्बल जैसे वरिष्ठ वकील की बहुत कोशिशों के बाद भी कोर्ट ने एक नहीं सुनी। बेंच ने बस इस बिंदु पर विचार किया कि अगर खाली पड़े मैदान जहाँ बाइक पार्क होती हैं और समय आने पर रमजान-बकरीद मनाया जाता है तो फिर वहाँ गणेश चतुर्थी मनाने से क्या गलत हो जाएगा।

कपिल सिब्बल समझाते रहे कि ऐसा नहीं होना चाहिए- उस जगह को ईदगाह कहते हैं- ईदगाह…। लेकिन कोर्ट ने कोई दलील नहीं सुनी। उलटा त्योहार मनाने की अनुमति के साथ कड़ी सुरक्षा के निर्देश भी दे दिए। अब पुलिस चप्पे-चप्पे पर तैनात है। अल्पसंख्यक समुदाय आहत है तो भी क्या करे! 

वह हमेशा से कहते रहे हैं कि इस देश में उनकी सुनवाई 2014 के बाद से ही नहीं हो रही। इसलिए राना अयूब जैसी पत्रकारों को विदेशी मीडिया में उनकी आवाज बनना पड़ता है। इस बार भी डूबती उम्मीदों को अयूब का सहारा मिला है।

राना अयूब हिंदुओं से हुईं नाराज

अयूब जैसा कि हर बार मुस्लिमों के हित में आवाज उठाती हैं। फिर चाहे वो सड़कों पर नमाज पढ़ने के अधिकार के लिए हो या फिर मंदिर-गुरुद्वारे में इबादत करके भाईचारे की मिसाल देने के लिए…इस बार भी अयूब ने अपना काम बखूबी किया।

सड़कों पर नमाज पढ़ने के अधिकार के लिए लड़तीं रानाअयूब

राना अयूब ने हिंदुओं पर बौखलाहट निकाली कि ये क्या घटियापना है- तुम्हारे पास दुनिया भर की जमीन पड़ी है लेकिन तुम ईदगाह आ रहे हो गणेश चतुर्थी मनाने।

हिंदुओं को फटकारा

बहुसंख्यक समुदाय पर प्रत्यक्ष नाराजगी न दिखे इसलिए उन्होंने अपने ट्वीट में कोई नाम नहीं लिया है, पर हिंदुओं को समझ जाना चाहिए कि ये बात उन्हीं लोगों के लिए है, क्योंकि वही लोग ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी मनाने आगे आए हैं। 

राना अयूब खुद से लिख कर जाहिर नहीं कर सकतीं कि वो चाहती हैं कि मुस्लिम भी मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने की माँग उठाएँ, पर अगर किसी ने उनकी इस मन की बात को अपने ट्वीट में लिखा है तो वो उसे रीट्वीट करने से पीछे नहीं हैं। जैसे द वायर की तारूषी शर्मा का ट्वीट उन्होंने फौरन रीट्वीट किया क्योंकि इसमें यही बात थी जो राना खुले में कहना चाहती हैं।

मुस्लिम ही लेकर आगे बढ़ें ‘गंगा-जमुनी’ तहजीब

शायद अयूब चाहती हैं कि देश में ‘गंगा जमुना तहजीब ( जिसका अर्थ कट्टरपंथियों के लिए हिंदू स्थलों पर नमाज पढ़ने का अधिकार है)’ के वाहक जैसे अब तक मुस्लिम रहे हैं। वैसे ही वही लोग इस अभियान को आगे तक लेकर जाएँ। हिंदुओं पर ज्यादा भार न पड़े। 

आपने ये तस्वीरें देखी हैं क्या- किस तरह देश में सैंकड़ों मस्जिद होने के बाद भी मुस्लिम समुदाय के लोग खुली सड़क, सोसायटी के पार्क, शहर के मॉल में नमाज पढ़ लेते हैं। इतना ही खबरें देखें तो पता चलेगा समुदाय के लोग कई बार अपनी इबादत, हिंदुओं के पूजा स्थल के आस-पास और उसके अंदर घुसकर भी अदा कर देते हैं।

इसके अलावा गणपति पंडाल में जाकर भी समुदाय विशेष नमाज अदा कर चुका है। गुजरात के मंदिर समेत कई मंदिरों में इफ्तार की खबरें भी आती रहती हैं।

हिंदू अपने धार्मिक स्थल को लेकर लिबरल होता है। लेकिन जब ईदगाह में गणपति पंडाल लगाने की माँग करता है तो उसे कोर्ट में लड़ाई लड़नी पड़ती है। मजहबी भावनाएँ आहत करने का इल्जाम उस पर लगाया जाता है। ये भावना तब आहत नहीं होती क्या जब पूजा स्थल पर बकरीद के समय गोश्त फेंका जाता है।

हिंदुओं को क्या करना चाहिए (राना अयूब के अनुसार)

क्या केवल हिंदुओं के कंधे पर ऐसे भाईचारे को बढ़ाने का दबाव है। क्या केवल उन्हें सहिष्णु होने की सलाह दी जाएगी। ईदगाह ऐसी जगह है जहाँ बच्चे क्रिकेट से लेकर फुटबॉल खेलते हैं। समय-समय पर तरह-तरह के कार्यक्रम होते हैं। मगर हिंदू इसमें पंडाल लगाने की माँग कर दे तो केवल मुस्लिम ही नहीं पूरी लिबरल जमात उन पर टूट पड़ती है। उन्हें तब याद नहीं आता कि कैसे हिंदुओं के राम लीला मैदान का प्रयोग वो धरना आदि के लिए सालों से करते रहे हैं। लेकिन हिंदू कभी उन्हें कुछ कहने नहीं गया। क्या सेकुलरिज्म को बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ हिंदुओं पर है कि वो धर्म की आहुति देकर इसकी रक्षा करें। राम नवमी-हनुमान जयंती पर यात्रा निकलने पर पत्थर खाएँ और फिर ये सुनें कि उनके जवाब देने से माहौल बिगड़ा।

बात नहीं किया तो अरमान अली ने नाबालिग हिन्दू छात्रा को मारी गोली: इंस्टाग्राम पर नाम बदल की थी दोस्ती, करता था पीछा

दिल्ली के संगम विहार में 16 साल की एक नाबालिग लड़की की हत्या करने के प्रयास में दो आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, इस घटना का मुख्य आरोपित अरमान अली अभी भी फरार है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए जगह-जगह दबिश दे रही है।

दरअसल, दिल्ली के देवली रोड स्थित कैंब्रिज इंटरनेशनल स्कूल में 11वीं पढ़ने वाली 16 साल की नैना मिश्रा को अरमान अली ने 25 अगस्त 2022 को स्कूल से लौटने के दौरान गोली मार दी थी। गोली लड़की के कंधे में लगी है।

नैना मिश्रा ने पुलिस को बताया कि अरमान अली ने दो साल पहले से उससे सोशल मीडिया साइट इंस्टाग्राम पर नाम बदलकर दोस्ती की थी। लड़की का कहना था कि पिछले 5-6 महीने से वह अली से बात नहीं कर रही थी। इसके बाद अली ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया।

नैना मिश्रा ने पुलिस को बताया कि 25 अगस्त को वह स्कूल से लौट रही थी। उसे लगा कि कुछ लोग उसका पीछा कर रहे हैं। जब वह संगम विहार के बी-ब्लॉक पहुँची तो अरमान अली ने अपने दो अन्य साथियों के साथ उस पर फायरिंग कर दी। इसके बाद वे सब फरार हो गए।

वहीं, सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति खुद को नैना मिश्रा का पिता बता रहा है और अपने दर्द और मजबूरी को लोगों के साथ साझा कर रहा है। वीडियो शख्स कह रहा है, मेरा नाम पंकज मिश्रा है। मैं ब्राह्मण समाज से बिलॉन्ग करता हूँ। मेरी बिटिया नैना मिश्रा स्कूल से अपनी माँ के साथ आ रही थी। अली नाम का एक मुस्लिम लड़का, जो काफी दिनों से उसे तंग करता था, स्कूल से आते वक्त पीछे से उसे गोली मार दी।”

वीडियो में खुद को पीड़िता का पिता कहने वाले शख्स ने समाज से इस मामले में सहयोग माँगा है। वीडियो में शख्सस कहता सुनाई दे रहा है, “समाज से मेरी यही विनती है कि आप ज्यादा से ज्यादा सहयोग करें मुझे।”

घायल नैना को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, हमला करने वाले दो आरोपितों बॉबी और उसके एक साथी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं, अरमान अली फरार है। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 307 और 34 के तहत मुकदमा दायर किया है।

गिरफ्तार आरोपितों के पास से पुलिस ने दो देशी कट्टा, दो जिंदा एवं एक खाली कारतूस बरामद किया है। इस मामले में दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने 26 अगस्त 2022 को दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था और इस मामले में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट माँगी थी।

वहीं, छात्रा के चाचा का कहना है कि जून के अंतिम सप्ताह में इस संबंध में आरोपित के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके चलते आरोपित का हौसला बढ़ता गया और उसने एक दिन गोली मार दी।

पीड़िता के चाचा का कहना है कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो छात्रा पर हमला नहीं होता। बता दें कि मुख्य आरोपित अरमान अली के अभी भी फरार होने को लेकर हिंदू संगठनों में गुस्सा है।  

बता दें कि झारखंड के दुमका में ऐसी एक घटना सामने आई है, जिसमेें दोस्ती नहीं करने पर शाहरुख हुसैन नाम के शख्स ने 16 साल की एक हिंदू लड़की पर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया। कई दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जुझने के बाद अंकिता सिंह नाम की उस लड़की की मौत हो गई।

छात्रों ने पूर्व प्राचार्य समेत शिक्षकों को पेड़ से बाँध कर पीटा: झारखंड CM के गृह जिले में एक और हिंसक घटना, शाहरुख़ ने अंकिता को जला कर मार डाला था

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिले दुमका से एक और हिंसक घटना सामने आई है। दुमका के गोपीकांदर पहाड़िया आवासीय स्कूल के छात्रों ने सोमवार (29 अगस्त, 2022) को शिक्षक और लिपिक की सिर्फ इसलिए पिटाई कर दी क्योंकि उन्हें प्रैक्टिकल में कम नंबर दिए गए थे और वे फेल हो गए थे।

दुमका के गोपीकांदर पहाड़िया आवासीय स्कूल में 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों को प्रैक्टिकल परीक्षा में कम नंबर मिले थे। इस कारण 11 छात्र फेल हो गए थे। फेल हुए ये छात्र स्कूल के पूर्व प्राचार्य एवं वर्तमान में गणित शिक्षक कुमार सुमन से इस बारे में बहस कर रहे थे। लेकिन, इस दौरान हो रही बहस ने हिंसक रूप ले लिया।

इसके बाद इन छात्रों ने गणित के शिक्षक कुमार सुमन, प्रधान लिपिक सुनीराम चौड़े और अचिंतो कुमार मल्लिक को पहले तो आम के पेड़ में बाँध दिया और फिर जमकर पिटाई कर दी। छात्रों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि शिक्षक कुमार सुमन ने प्रैक्टिकल परीक्षा में कम नंबर दिए हैं, जिस कारण 11 छात्र फेल हो गए हैं।

छात्रों और शिक्षकों के बीच हुए इस विवाद और मारपीट की जानकारी जब गोपीकांदर प्रखंड के बीडीओ अनंत कुमार झा और प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सुरेंद्र हेंब्रम तक पहुँची तो दोनों ही हरकत में आ गए। इसके बाद उन्होंने, गोपीकांदर के थाना प्रभारी नित्यानंद भोक्ता व पुलिस बल को साथ लिया और स्कूल पहुँचते हुए स्थिति को नियंत्रित किया।

इस पूरे मामले में प्रशासन ने कार्यवाही करते हुए दोनों कक्षाओं (9वीं और 10वीं) के लगभग 40 छात्रों को निष्कासित कर दिया है और अभिभावकों को बुलावा भेजा है। इसके अलावा, बताया जा रहा है कि विवाद और मारपीट के बाद स्कूल के शिक्षकों के कहने पर पीड़ित शिक्षक, लिपिक तथा छात्रों के बीच आपसी समझौता करवाया गया है।

गोपीकांदर के थाना प्रभारी नित्यानंद भोक्ता ने इस मामले में कहा है कि मारपीट के कारण शिक्षक कुमार सुमन को चोट आई है। उनका प्राथमिक उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपीकांदर में कराया गया है। साथ ही, छात्रों को कड़ी हिदायत दी गई है कि यदि भविष्य में ऐसी कोई भी घटना हुई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

‘कुपोषण से निपटने के लिए भजन-कीर्तन का भी हुआ इस्तेमाल’: PM मोदी ने दिया दतिया का उदाहरण, लिबरल गिरोह फैलाने लगा प्रपंच

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 अगस्त, 2022 को ‘मन की बात (Mann Ki Baat)’ कार्यक्रम में लोगों से कुपोषण उन्मूलन के प्रयासों में शामिल होने का आग्रह किया। उन्होंने देश को संबोधित करते हुए बताया कि भारत में कुपोषण के खतरे से निपटने के लिए क्या-क्या अनोखे प्रयास किए जा रहे हैं। हालाँकि, मध्य प्रदेश के दतिया का उन्होंने एक उदाहरण भी इस दौरान दिया, जिसे लिबरल गिरोह ने गलत ढंग से पेश करने का प्रयास किया।

पीएम मोदी (PM Modi) ने मन की बात कार्यक्रम में असम के बोंगाईगाँव के बारे में बात करते हुए कहा कि वहाँ एक दिलचस्प परियोजना ‘प्रोजक्ट संपूर्ण‘ चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य कुपोषण के खिलाफ लड़ाई है और इस लड़ाई का तरीका बहुत की खास है। इसके तहत किसी आँगनबाड़ी केंद्र के स्वस्थ बच्चे की माँ एक कुपोषित बच्चे की माँ से हर सप्ताह मिलती है और पोषण से संबंधित हर जानकारियों पर उससे चर्चा करती है।

उन्हों कहा, “एक माँ दूसरी माँ की मित्र बनकर उसकी मदद करती है। उसे सीख देती है। इस प्रोजेक्ट की मदद से इस क्षेत्र में एक साल में 90 प्रतिशत से ज्यादा बच्चों में कुपोषण दूर हुआ है।”

इसके बाद पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश के दतिया जिले के बारे में बात की। पीएम मोदी ने कहा कि क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि कुपोषण को दूर करने में गीत, संगीत और भजन का भी इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के दतिया जिले में ‘मेरा बच्चा अभियान‘ में इसका सफलतापूर्वक प्रयोग किया गया। उन्होंने जानकारी दी, “इसके तहत जिले में भजन-कीर्तन आयोजित किए गए, जिसमें पोषण गुरु कहलाने वाले शिक्षकों को बुलाया गया। यहाँ एक मटका कार्यक्रम भी हुआ। इसमें महिलाएँ आँगनबाड़ी केंद्र के लिए मुट्ठीभर अनाज लेकर आती हैं और इसी अनाज से हर शनिवार को बाल भोज का आयोजन होता है। इससे आँगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ने के साथ ही कुपोषण भी कम हुआ है।”

ध्यान दीजिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसा नहीं कहा कि भजन-कीर्तन से कुपोषण ख़त्म हो गया, बल्कि उन्होंने बताया कि कैसे कुपोषण ख़त्म करने और पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए भजन-कीर्तन का भी प्रयोग किया गया।

पीएम मोदी ने कहा कि इसी तरह झारखंड के गिरिडीह में भी कुपोषण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए अनोखा अभियान चल रहा है। गिरीडीह में साँप-सीढ़ी का एक गेम तैयार किया गया है। इसमें बच्चों को खेल के माध्यम से पोषण के बारे में अच्छी और बुरी आदतों के बारे में सिखाया जाता है। पीएम के शब्दों में, “मैं आपकों कुपोषण दूर करने वाले इन नए-नए प्रयोगों के बारे में इसलिए बता रहा हूँ, क्योंकि हम सबको आने वाले महीने में इन अभियानों से जुड़ना है।” 32.5 मिनट के वीडियो में पीएम मोदी ने 12 से 14.23 मिनट के बीच ये बातें कहीं।

पोषण माह


पीएम मोदी ने कहा कि सितंबर का महीना कुपोषण से लड़ने के अभियान के तौर पर ‘पोषण माह’ के तौर पर मनाया जाएगा। प्रौद्योगिकी का बेहतर उपयोग और जन भागीदारी भी पोषण अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। देश में लाखों आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मोबाइल डिवाइस उपलब्ध कराने से लेकर आँगनबाड़ी सेवाओं की पहुँच की निगरानी के लिए एक पोषण ट्रैकर भी लॉन्च किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी ‘आकांक्षी जिलों’ और उत्तर पूर्व के राज्यों में 14 से 18 साल की लड़कियों को भी ‘पोषण अभियान’ के दायरे में लाया गया है। कुपोषण का समाधान सिर्फ इन्हीं तक सीमित नहीं है। इस लड़ाई में कई अन्य पहल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। 

‘धारवाड़ ईदगाह मैदान में होगा गणेशोत्सव’: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा- मुस्लिम पक्ष जमीन का मालिक नहीं पट्टेदार है, कड़ी सुरक्षा के बीच मूर्ति स्थापित

कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) के आदेश के बाद बुधवार (31 अगस्त 2022) को हुबली-धारवाड़ के ईदगाह मैदान (Hubli-Dharwad Idgah Maidan) में भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित की गई। यहाँ कड़ी सुरक्षा के बीच त्योहार मनाया जाएगा। 

दरअसल, कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार (30 अगस्त 2022) की रात 10 बजे सुनवाई करते हुए ईदगाह मैदान में गणेश उत्‍सव मनाने की अनुमति दी। कोर्ट ने धारवाड़ के नगरपालिका आयुक्त के आदेश को बरकरार रखा। नगर आयुक्त ने ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव आयोजित करने की अनुमति दी थी।

जस्टिस अशोक एस किनागी ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित संपत्ति पर धारवाड़ नगरपालिका का मालिकाना हक है। याचिकाकर्ता प्लॉट का लाइसेंसधारी है, जिसके पास केवल रमजान और बकरीद पर नमाज अदा करने की अनुमति है।

अंजुमन-ए-इस्लाम ने नगर आयुक्त के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हिंदू संगठनों को गणेशोत्सव के लिए बुधवार (31 अगस्त 2022) को ईदगाह मैदान में भगवान गणेश की मूर्तियाँ स्थापित करने की अनुमति दी गई थी।

पीठ ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया कि यह संपत्ति पूजा स्थल अधिनियम 1991 के तहत आती है। अदालत के अनुसार, जमीन का उपयोग वाहन पार्किंग और वेंडिंग के लिए किया जाता है। वहीं, याचिकाकर्ता ने इस बात की पुष्टि के लिए कोई रिकॉर्ड पेश नहीं किया कि संपत्ति को पूजा स्थल के रूप में घोषित किया गया है।

कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद श्रीराम सेना प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने अपने समर्थकों के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा-अर्चना की। उन्होंने कहा, “हमने कानून का पालन करते हुए पूजा की। कुछ बदमाशों ने हमें रोकने की कोशिश की, लेकिन हमने भगवान गणेश की पूजा की, जो न केवल हुबली के लोगों के लिए बल्कि पूरे उत्तर कर्नाटक के लोगों के लिए खुशी की बात है।”

गौरतलब है कि कर्नाटक हाईकोर्ट से पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के चामराजपेट ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी के आयोजन को लेकर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। यानी, उस मैदान पर गणेश चतुर्थी त्योहार का आयोजन नहीं किया जाए।

‘सेन्ट्रल मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ कर्नाटक’ ने राज्य सरकार के खिलाफ ये याचिका दायर की थी, ताकि आयोजन को रोका जा सके। मुस्लिम एसोसिएशन के साथ-साथ कर्नाटक सरकार के खिलाफ वहाँ के वक्फ बोर्ड ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

उनका दावा है कि बेंगलुरु का ईदगाह मैदान वक्त की संपत्ति है। फैसला सुनाने वाले जजों में इंदिरा बनर्जी, एएस ओका और एमएम सुंदरेश शामिल थे। शाम के 6:20 बजे इस सम्बन्ध में आदेश दिया गया था।

36 साल का बिजनेसमैन, दिल्ली में कारोबार: गुमनाम अकाउंट से नहीं हुई थी जुबैर की शिकायत, पुलिस के पास शिकायकर्ता की हर डिटेल मौजूद

मोहम्मद जुबैर की गिरफ्तारी जून-जुलाई माह में काफी चर्चा में थी। कुछ लोग इसे सही बता रहे थे और कुछ इसे नाइंसाफी कह रहे थे। जुबैर को बेल दिलाने के लिए करीबन तीन हफ्ते काफी मशक्कत हुई थी। उनकी वकील वृंदा ग्रोवर ने यहाँ तक तर्क दिया था कि जिस अकॉउंट से शिकायत हुई है वो बेनाम है और जुबैर को फँसाने के लिए उसे प्रयोग में लाया गया। वहीं दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में कोर्ट को बताया था कि जुबैर के विरुद्ध शिकायत करने वाला कोई अंजान नहीं था। उसकी हर जानकारी उनके पास है।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार अब उन्हें उसी शिकायतकर्ता से जुड़ी जानकारी का पता चला है। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने बताया वृंदा ग्रोवर ने जिस ‘हनुमान भक्त’ नाम वाली @balajikijaiin आईडी को बेनाम कहा था, वह दिल्ली के एक 36 वर्षीय बिजनेसमैन का अकॉउंट था। दिल्ली पुलिस ने इस अकॉउंट से किए गए ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए 27 जून को जुबैर को गिरफ्तार किया था। इसके बाद ये आईडी 29 जून को बंद कर दी गई और 30 जून को इसे चालू किया गया। फिलहाल, अभी भी ये अकॉउंट ट्विटर की ओर सस्पेंड है।

पुलिस ने इस ट्विटर अकॉउंट से जुड़ी जानकारी निकलवाने के लिए ट्विटर इंडिया को नोटिस भेजा था। ये बात पुलिस ने कोर्ट में बताई। पुलिस ने कहा कि नोटिस में उन्होंने कहा था कि उन्हें शिकायतकर्ता की हर डिटेल दी जाए। ट्विटर ने जैसे ही आईडी से जुड़ी पंजीकृत जानकारी और आईपी एड्रेस उन्हें दिया। पुलिस ने बिजनेसमैन को नोटिस भेजा और कहा कि वो द्वारका के IFSO कार्यालय में आकर बयान दर्ज करवाएँ।

शिकायतकर्ता, निर्देशों का पालन करते हुए कार्यालय पहुँचे। वहाँ पहले उन्होंने अपनी डिटेल्स दीं और उसके बाद यही बयान दिया कि जुबैर के ट्वीट से उनकी भावनाएँ आहत हुईं। पुलिस ने पूछताछ में पाया कि शिकायतकर्ता किसी पार्टी विशेष से नहीं है। वो अजमेर का है और दिल्ली में रहकर बिजनेस करता है।

चूँकि पुलिस के पास सारी जानकारी थी, इसलिए जब वृंदा ग्रोवर ने यह कहकर कोर्ट में जुबैर की बेल माँगी कि जिस ट्विटर से जुबैर की शिकायत हुई संदेहास्पद है। केवल उनके मुअक्किल को फँसाने के लिए उसे बनाया गया। तो, दिल्ली पुलिस ने इस पर उन्हें जवाब दिया। पुलिस की ओर से पेश वकील ने कोर्ट में कहा, “वह एक सूचना देने वाला व्यक्ति था बस। वो कोई गुमनाम शिकायकर्ता नहीं है। उसकी हर जानकारी है। किसी को बिन डिटेल्स दिए ट्विटर अकॉउंट नहीं मिल जाता।”

बता दें कि जुबैर की गिरफ्तारी 2018 के एक विवादित ट्वीट पर 27 जून को हुई थी। यूपी प्रशासन ने उसके विरुद्ध जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया था। पूछताछ में उसने माना था कि वो ट्वीट के बदले पैसा लेता था। गिरफ्तारी के लगभग तीन हफ्ते बाद 20 जुलाई उसे दिल्ली कोर्ट से बेल मिली थी। NDTV के पत्रकार श्रीनिवासन ने उसका बॉन्ड भरा था। जेल से बाहर आते ही उसने पीआर इंटरव्यू दिए थे। मगर अपने किए पर उसने कहीं माफी नहीं माँगी थी।

बुर्के में लाई गई मरियम, गले में फंदा डाल कुर्सी पर खड़ा किया, 19 साल की बेटी से कुर्सी को लात मरवाई ताकि झूलकर मर जाए: ईरान का ये कैसा कानून

ईरान का इस्लामी कानून एक बार फिर विवादों में है। मरियम करीमी नाम की एक महिला को उसकी ही 19 साल की बेटी से फाँसी दिलवाई गई है। मरियम ने प्रताड़नाओं से तंग आकर शौहर का कत्ल कर दिया था। इसके बाद उसे मौत की सजा सुनाई गई थी।

रिपोर्टों के अनुसार फाँसी देने के लिए मरियम को बुर्के में लाया गया। गले में फंदा डाल एक कुर्सी के सहारे खड़ा किया गया। फिर उसकी बेटी से कुर्सी को लात मरवाई गई ताकि फंदे से झूलकर उसकी मौत हो जाए।

रिपोर्ट्स के मुताबिक 2009 में मरियम ने अपने शौहर की हत्या कर दी थी। निकाह के बाद से ही वह मरियम को प्रताड़ित करता था। उसे मारता-पीटता था। भूखा रखता था। शौहर के जुल्म के बारे में मरियम ने अपने अब्बा इब्राहिम को बताया। इब्राहिम ने दामाद को समझाने की काफी कोशिश की। लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यहाँ तक कि वह मरियम को तलाक देने को तैयार नहीं था।

आखिर में मरियम ने अपने अब्बू के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद मरियम करीमी और उसके अब्बा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। शरिया अदालत ने दोनों को फाँसी की सजा सुनाई। फाँसी पर लटकाने से पहले ही इब्राहिम की मौत हो गई। हत्या के वक्त मरियम की बेटी 6 साल की थी। उसे दादा-दादी के घर भेज दिया गया। दादा-दादी उसे बताते रहे कि वह अनाथ है। उसके अम्मी-अब्बू की मौत हो चुकी है। मरियम को फाँसी पर लटकाने से कुछ हफ्ते पहले ही उसकी बेटी को इस घटना के बारे में बताया गया।

‘द सन’ के मुताबिक, मरियम को फाँसी इस साल 13 मार्च में दी गई थी। लेकिन यह बात अब दुनिया के सामने आई है। बताया जा रहा है कि बेटी ने मरियम को माफ करने से इनकार कर दिया था। यह भी कहा जा रहा है कि अपनी ही अम्मी को फाँसी देने का दबाव उस पर प्रशासन ने डाला था।

गौरतलब है कि ईरान में आँख के बदले आँख जैसा कानून है। इस बर्बर कानून को किसास (Qisas Law) कहते हैं। इसके अलावा यहाँ ‘ब्लड मनी’ का भी कानून है। ब्लड मनी के तहत मृतक के रिश्तेदारों से दोषी को दी जाने वाली सजा के बारे में पूछा जाता है। इसमें रिश्तेदार दोषी को फाँसी की सजा दे सकते हैं। इसके अलावा वो मौत के बदले में पैसा भी ले सकते हैं और उनके पास माफी देने का विकल्प भी होता है।

दिनदहाड़े घर में घुसा, आँगन में पटक रेप किया: अब राँची में सहरुद्दीन का शिकार बनी 15 साल की ST लड़की, अंकिता को जलाने वाले शाहरुख की तरह ही पीछे पड़ा था

झारखंड में अंकिता को पेट्रोल डालकर जलाने का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ कि खबर है राज्य में एक और नाबालिग के साथ अत्याचार हुआ है। घटना राँची के नरकोपी थाना क्षेत्र की है। वहाँ मुस्लिम समुदाय के एक युवक ने जनजातीय लड़की को अपना निशाना बनाया। आरोपित की पहचान सहरुद्दीन के तौर पर हुई है। उसे पुलिस ने पकड़कर जेल भेज दिया है।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट बताती है कि 28 अगस्त 2022 को दिन के 10 बजे नाबालिग जनजातीय लड़की से बलात्कार का मामला संज्ञान में आया था। पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि वो रविवार को नहाने के लिए अपने घर से निकलकर खेत की ओर गई थी। लेकिन, तभी वहाँ तेज बारिश होने लगी। लड़की खुद को बचाते-बचाते एक पेड़ के नीचे खड़ी हुई कि तभी वहाँ 23 (कुछ रिपोर्ट में 26) वर्षीय सहरुद्दीन आ गया।

सहरुद्दीन ने पहले लड़की से छेड़छाड़ करनी शुरू की, जिससे घबराकर वह घर की ओर भागी। बाद में सहरुद्दीन लड़की के घर में घुस गया और उसे आंगन में पटक कर उसके साथ दुष्कर्म किया। जिस पहर ये घटना घटित हुई उस समय लड़की के घर पर वह अकेली थी। ऐसे में आस-पड़ोस वालों ने आवाज सुनकर उसकी मदद की। पड़ोसियों ने सहरुद्दीन को पकड़ा और घटना के बारे में नरकोपी पुलिस को बताया। पुलिस ने फौरन सहरुद्दीन को गिरफ्तार किया।

थाने में पूछताछ के दौरान सामने आया कि सहरुद्दीन लड़की का पड़ोसी था। उसका पीछा आए दिन करता था। नाबालिग के घर वालों ने कई बार आरोपित को रोकने का भी प्रयास किया, पर वह नहीं माना। 28 अगस्त को लड़की को घर में अकेला पाकर उसने दुष्कर्म को अंजाम दिया।

सोरेन सरकार पर उठे सवाल

इस संबंध में राज्य के पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “झारखंड में हैवानियत की हद रुकने का का नाम नहीं ले रही। इसी 28 अगस्त को नरकोपी, राँची में एक 15 साल की जनजातीय नाबालिग लड़की के साथ 23 साल के सहरुद्दीन अंसारी ने उसके घर में घुस कर दिन दहाड़े जबरन पटक कर बलात्कार किया। लड़की की शिकायत काफ़ी विचलित करने वाली है।”

भाजपा सांसद संजय सेठ ने घटना पर लिखा, “अभी अंकिता सिंह की चिता ठंडी भी नहीं हुई, दरिंदों को सजा भी नहीं मिली और राँची में नाबालिग जनजातीय लड़की के साथ आरोपित ने घर में घुसकर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। झारखंड में किसी भी बेटी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है। कुछ तो शर्म करो सरकार के रहनुमाओं।”

अंकिता पर शाहरुख ने डाला पेट्रोल, वो भी पहले पीछा ही करता था

बता दें कि झारखंड के राँची में जिस दिन यह घटना हुई है उसी दिन राँची के रिम्स में दुमका की अंकिता ने दम तोड़ा था। अंकिता का पीछा भी उसका पड़ोसी शाहरुख हुसैन लंबे समय से कर रहा था और उसपर दोस्ती, निकाह, धर्मांतरण का दबाव बनाता था। हालाँकि अंकिता इन सबके लिए तैयार नहीं थी। वह शाहरुख को डाँटती थी। इसीलिए शाहरुख ने 23 अगस्त 2022 को अपना बदला लेने के लिए उसके ऊपर पूरी पेट्रोल की कैन उलट दी और माचिस से आग लगा दी।

‘वो सिर्फ खड़ा था’: दंगा आरोपित बाबुद्दीन को HC ने दी जमानत, जहाँगीरपुरी में हनुमान जयंती जुलूस पर हुआ था हमला, लगी थी 12 धाराएँ

दिल्ली के जहाँगीरपुरी इलाके में 16 अप्रैल, 2022 को हनुमान जयंती शोभायात्रा के दौरान हुए दंगे के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक और आरोपित बाबुद्दीन को जमानत दे दी है। बाबुद्दीन की गिरफ्तारी 27 अप्रैल को हुई थी। तभी से वह हिरासत में था।

इस मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस योगेश खन्ना की एकल पीठ ने यह देखते हुए जमानत दे दी है कि उसे आगे की जाँच की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी नोट किया कि इस आरोपित के लिए चार्जशीट पहले ही दायर की जा चुकी है। साथ ही इस मामले के एक अन्य आरोपित को भी हाल ही में जमानत दे दी गई थी।

जहाँगीरपुरी दंगे मामले में बाबुद्दीन पर धारा 147, 148, 149, 186, 353, 332, 323, 427, 436, 307, 120B आईपीसी और आर्म्स एक्ट के सेक्शन 27 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया था कि आरोपित बाबुद्दीन दंगे को भड़का रहा था। दो CCTV फुटेज में उसकी पहचान भी की गई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज देखने पर पता चलता है कि बाबुद्दीन बस खड़ा था और वह भीड़ को उकसाता हुआ नहीं दिखा।

कोर्ट ने यह भी कहा “पुलिस अधिकारी (ASI) जोगिंदर ने बयान दिया है कि वह कथित रूप से भीड़ का नेतृत्व कर रहा था। हालाँकि, प्रशासन की ओर से इसे साबित करने के लिए कुछ सीसीटीवी फुटेज दिखाने के कई तारीखें ली गई हैं, लेकिन अब तक उन्हें पेश नहीं किया गया है।”

बीस हजार रुपए में मिली जमानत

दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबुद्दीन को 20000 रुपए के निजी मुचलके में जमानत दी है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने बाबुद्दीन को जमानत देने से इनकार कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने देखा था कि घटना के दिन सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसकी पहचान की गई थी। यही नहीं, एक चश्मदीद, हेड कॉन्स्टेबल ने भी दंगों में बाबुद्दीन की भूमिका को लेकर बयान दिया था।

हालाँकि, आरोपित ने इस मामले में अपना बचाव करते हुए कहा था कि न तो उसकी दुकान या घर और न ही वह कैमरा जिसे अभियोजन पक्ष ने पेश किया था, उस रास्ते में आता है जहाँ दंगे हुए थे।

जहाँगीरपुरी दंगे के आरोपित बाबुद्दीन की जमानत याचिका में कहा गया है कि आरोपित का सह-आरोपित अंसार से कोई संबंध नहीं था। अभियोजन पक्ष भी उन दोनों के संबंधों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं कर सका है।

क्या है जहांगीरपुरी दंगा…

बता दें दिल्ली के जहाँगीरपुरी में दंगा 16 अप्रैल को हनुमान जयंती के दिन हुआ था। इस दंगे को लेकर पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताया था कि हिन्दुओं द्वारा निकाली जा रही शोभायात्रा पर हमला करने के लिए सी ब्लॉक की मस्जिद के सामने साजिश के तहत भीड़ पहले से मौजूद थी।

इसके बाद शोभायात्रा में मौजूद लोगों पर खतरनाक हथियारों से वहाँ की भीड़ ने हमला कर दिया था। शोभायात्रा में शामिल लोगों पर शीशे की बोतल और पत्थर भी फेंके गए। इसके बाद यात्रा में मौजूद लोगों ने भी विरोध किया और माहौल धीरे-धीरे दंगे में बदल गया। इस दंगे में आठ पुलिसकर्मी और एक स्थानीय निवासी जख्मी हुए थे।

‘लगता है झारखंड में कानून का राज नहीं, अपराधियों को पुलिस का डर नहीं’: अंकिता हत्याकांड पर HC ने लिया संज्ञान, कहा – इलाज में हुई लापरवाही

झारखंड हाईकोर्ट ने दुमका में अंकिता सिंह की हत्या के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के पुलिस प्रमुख को तलब किया और रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। झारखंड उच्च-न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन और जस्टिस एसएन प्रसाद की पीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए जहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य में कानून का राज नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि अपराधियों में प्रशासन और कानून का जरा सा भी डर नहीं रह गया है।

मौखिक टिप्पणी करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने इसे जघन्य अपराध करार देते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस की कार्रवाई भी कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय DSP नूर मुस्तफा ने अपने एक बयान में नूर मुस्तफा को मानसिक रोगी बता दिया था। अदालत ने इस बयान की भी आलोचना की। हाईकोर्ट ने DGP को आदेश दिया कि पीड़ित परिजनों को सुरक्षा प्रदान की जाए। अंकिता सिंह को शाहरुख़ हुसैन पेट्रोल छिड़क कर ने ज़िंदा जला डाला था।

ये भी सामने आया है कि अंकिता सिंह के इलाज में अगर लापरवाही नहीं बरती जाती तो उसकी जान बच सकती थी। इस सम्बन्ध में भी झारखंड हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। पहले राज्य के महाधिवक्ता को हाजिर होने को कहा गया, उसके बाद DGP को तलब किया गया। DGP ने मुख्य आरोपित की गिरफ़्तारी को आधार बनाते हुए कहा कि पुलिस ने कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि जाँच जारी है और राज्य सरकार ने भी फ़ास्ट ट्रैक सुनवाई की अनुशंसा की है।

उन्होंने मृतका को न्याय दिलाने का आश्वासन भी झारखंड हाईकोर्ट को दिया। हालाँकि, अदालत ने कहा कि अब वो खुद इस जाँच की निगरानी करेगा। उच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरती गई है, क्योंकि अंकिता सिंह को त्वरित और बेहतर इलाज दिलाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जल्द उत्तम इलाज के लिए किसी अच्छे अस्पताल में भर्ती कराने को लेकर सरकार ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई।