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‘लव जिहादी’ पत्रकार उमर राशिद के खिलाफ NHRC ने लिया स्वत: संज्ञान, ‘द वायर’ से भी कई सवालों के जवाब माँगे: पीड़िता ने किया था मिलीभगत की ओर इशारा, कहा था- नहीं हो रही निष्पक्ष जाँच

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ‘द वायर’ के पत्रकार उमर राशिद के खिलाफ स्वतः संज्ञान लिया है, जब एक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में एक महिला ने उन पर गंभीर आरोप लगाए। आरोपों में बलात्कार, यौन शोषण, शारीरिक हमला, मानसिक उत्पीड़न, तथा धार्मिक और सांस्कृतिक अपमान शामिल हैं। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह कदम उठाया है।

एनएचआरसी ने उमर रशीद के खिलाफ लगाए गए विस्फोटक आरोपों पर एटीआर माँगी

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए 5 जून 2025 तक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) दाखिल करने का निर्देश दिया है।

यह कदम इंस्टाग्राम पर वायरल हुए बयान की समीक्षा के बाद उठाया गया, जिसमें पत्रकार उमर राशिद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आयोग ने इन दावों को ‘गंभीर’ और ‘बेहद परेशान करने वाला’ करार देते हुए मानवाधिकार उल्लंघन की जाँच के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया है।

शिकायतकर्ता ने ‘द वायर’ की मिलीभगत की ओर इशारा किया

एनएचआरसी में दर्ज शिकायत में शिकायतकर्ता ने ‘द वायर’ के संपादकीय तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में ‘द वायर न्यूज पोर्टल के प्रबंधन’ द्वारा की जा रही आंतरिक जाँच पर अविश्वास जताते हुए कहा गया है कि जाँच निष्पक्ष नहीं है और यह सिर्फ औपचारिकता भर है, जिसका उद्देश्य आरोपितों को बचाना है। साथ ही, शिकायत में हितों के टकराव और संगठन की छवि बचाने के लिए संभावित दबाव और दमन की भी आशंका जताई गई है।

एनएचआरसी ने उमर रशीद पर बलात्कार, यातना और जबरन गोमांस खिलाने के गंभीर आरोपों के संबंध में द वायर से जवाब माँगा

यह मामला ‘द वायर’ की संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लंबे समय से इस पोर्टल पर प्रतिगामी दृष्टिकोणों को ‘असहमति की राय’ के रूप में पेश करने के आरोप लगते रहे हैं। अब यह संस्थान एक कथित सीरियल यौन अपराधी को बचाने के आरोपों के चलते खुद जाँच के दायरे में है, जिससे उसकी नीयत और जवाबदेही दोनों पर संदेह गहराता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने ‘द वायर’ पोर्टल के मैनेजमेंट को निम्नलिखित प्रश्न जारी किए हैं।

पुलिस शिकायत के संबंध में:

क्या द वायर न्यूज़ पोर्टल के प्रबंधन ने आरोपित के खिलाफ लगाए गए यौन, शारीरिक और मानसिक शोषण के गंभीर आरोपों के जवाब में औपचारिक पुलिस शिकायत दर्ज की?

अगर कोई शिकायत दर्ज की गई थी, तो वह किस तारीख को दर्ज की गई थी और किस पुलिस स्टेशन में?

शिकायत दर्ज होने के बाद से संबंधित कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की है?

क्या अधिकारियों को बलात्कार और गंभीर शारीरिक हमले के गंभीर आरोपों के बारे में विशेष रूप से सूचित किया गया था, जैसा कि पीड़िता ने अपने वायरल सोशल मीडिया पोस्ट में बताया है?

पीओएसएच जाँच के संबंध में:

क्या कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (पीओएसएच अधिनियम) के प्रावधानों के तहत द वायर न्यूज पोर्टल के प्रबंधन द्वारा औपचारिक जाँच शुरू की गई है?

यदि हाँ, तो जाँच की वर्तमान स्थिति क्या है? मामले को संभालने के लिए गठित आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सदस्य कौन हैं?

क्या शिकायतकर्ता/पीड़ित से आईसीसी ने संपर्क किया है, और जाँच के दौरान उसकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

इंस्टाग्राम पर आई गवाही से पूरे देश में गुस्सा फैल गया

एक अज्ञात महिला की वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में ‘द वायर’ के पत्रकार उमर राशिद पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें यौन हिंसा, शारीरिक शोषण और मानसिक उत्पीड़न का विस्तृत विवरण शामिल है। महिला ने आरोप लगाया कि राशिद ने दिल्ली के लिब्रल मीडिया जगत में अपनी प्रभावशाली स्थिति का इस्तेमाल कर उसे फंसाया। वह बताती है कि राशिद ने प्रगतिशील राजनीति पर बातचीत और लोधी गार्डन में सैर जैसे प्रतीकात्मक इशारों के ज़रिए उसका विश्वास जीता और दावा किया कि उसने यही रणनीति कई अन्य महिलाओं के साथ भी अपनाई।

उसके अनुसार, भावनात्मक रूप से जुड़ने के बाद रिश्ता हिंसक और अपमानजनक बन गया। उसने आरोप लगाया कि उसे बार-बार बलात्कार, थप्पड़, लात मारने और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, विशेषकर तब जब वह भावनात्मक रूप से कमज़ोर अवस्था में होती थी।

उसने लिखा “जब मैं बीमार थी, तब उसने मेरा बलात्कार किया, जब मैंने उससे ऐसा करने से मना किया। उसने सुरक्षा का उपयोग करने से इनकार कर दिया। मैं क्लीनिक में गई, गर्भपात करवाया, परीक्षण करवाया।”

मानसिक उत्पीड़न और धार्मिक अपमान

पीड़िता ने बहुत भावुक होते हुए अपने साथ हुए अपमान की भी बात की, जिसमें उसके पैरों पर भीख माँगने के लिए मजबूर होना भी शामिल है, जबकि राशिद ने कथित तौर पर उसकी माँ के काल्पनिक यौन शोषण का विस्तृत विवरण दिया है।

उसने आगे आरोप लगाया कि राशिद ने उसे जबरदस्ती गोमाँस खिलाया, जबकि वह उसकी धार्मिक और व्यक्तिगत घृणा से पूरी तरह वाकिफ था। उसने कहा कि ऐसा उसने अपनी कश्मीरी मुस्लिम पहचान को स्थापित करने और उसे एक गैर-मुस्लिम महिला के रूप में अपमानित करने के लिए किया था। पीड़ित के मुताबिक “मैंने इसे उगल दिया, उसने मुझे इसे फिर से खाने को कहा, वह जानता था कि मुझे यह पसंद नहीं है।”

नेट FDI में गिरावट पर कॉन्ग्रेस और मीडिया ने फैलाया भ्रम: जानें 2014 से 2025 के बीच कैसे मजबूत हुई भारतीय अर्थव्यवस्था, मोदी सरकार के प्रयासों से विदेशी कंपनियों का विश्वास बढ़ा

कॉन्ग्रेस पार्टी और भारत के कई मीडिया संस्थानों ने शुक्रवार, (23 मई 2025) को देश में फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (FDI) में आई ‘भारी’ गिरावट को लेकर रिपोर्ट्स की। इन रिपोर्टों में उन्होंने ऐसे दिखाया जैसे भारत में FDI का गिरना मतलब मोदी सरकार की नीतियों में बड़ी गड़बड़ी है जिसके कारण विदेशी कंपनियाँ अब विश्वास नहीं कर रहीं।

कॉन्ग्रेस की केरल इकाई ने मौके का फायदा उठाते हुए इस पर प्रतिक्रिया दी। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, “भारत में विदेशी निवेशकों और देश के भीतर भारतीय निवेशकों के भरोसे में गिरावट एक गंभीर तस्वीर पेश करती है। सभी ने भारत से उम्मीदें छोड़ दी हैं, यह 11 वर्षों की विभाजनकारी राजनीति और अविवेकपूर्ण नीति निर्माण का नतीजा है।”

कॉन्ग्रेस के केरल हैंडल द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

वामपंथी प्रचार आउटलेट ‘द वायर’ से जुड़ी पत्रकार सीमा चिश्ती ने आरोप लगाया कि भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 96.5% की भारी गिरावट के साथ रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँच गया है।

टीएमसी के पूर्व सांसद जवाहर सरकार, जिन्हें फर्जी खबरें फैलाने के लिए जाना जाता है, उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “विदेशी निवेशक संघियों, भक्तों और गोदी मीडिया के दुष्प्रचार से प्रभावित नहीं होते। वे निवेश से पहले देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति का आँकलन करते हैं। मोदी के भारत में उनका विश्वास खत्म हो चुका है, यह नेट एफडीआई में आई भारी गिरावट से साफ झलकता है।”

नेट एफडीआई में 96% की गिरावट की खबर मुख्यधारा मीडिया में व्यापक रूप से छाई रही, लेकिन आम पाठकों को इसके प्रभावों और अर्थ को लेकर बहुत कम या कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुछ रिपोर्टों में यह आरोप लगाया गया कि भारत की अर्थव्यवस्था गिरावट की ओर बढ़ रही है और मौजूदा मोदी सरकार के तहत आर्थिक प्रगति की कोई आशा नहीं बची है।

‘नेट एफडीआई’ में गिरावट के बारे में समाचार रिपोर्टों का स्क्रीनशॉट

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश

इन्वेस्टोपेडिया के अनुसार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किसी कंपनी या सरकार द्वारा किसी विदेशी परियोजना या फर्म में किया गया दीर्घकालिक और महत्वपूर्ण निवेश होता है। भारत में इसका मतलब भारतीय कंपनियों में किया गया विदेशी निवेश है।

वित्तीय वर्ष 2014-2015 से भारत में FDI प्रवाह लगातार बढ़ा है। ऑपइंडिया ने RBI और PIB के आँकड़ों के आधार पर जो चार्ट तैयार किया है, उसके अनुसार 2014-2015 में भारत में FDI प्रवाह 45.15 बिलियन डॉलर (3.75 लाख करोड़) था, जो 2024-2025 में बढ़कर 81 बिलियन डॉलर (6.72 लाख करोड़) हो गया।

वर्ष दर वर्ष तुलना करें तो वित्तीय वर्ष 2015-2016 में FDI में 23.05% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 2024-2025 में यह वृद्धि 13.60% रही।

(स्रोत: प्रेस सूचना ब्यूरो और भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित आंकड़े – यहाँ, यहाँ और यहाँ)

वित्तीय वर्ष 2022-2023 और 2023-2024 में शुद्ध एफडीआई में गिरावट देखी गई, हालाँकि इन वर्षों में सकल एफडीआई प्रवाह अभी भी महत्वपूर्ण था।

इसके बावजूद, कुल मिलाकर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मजबूत बना हुआ है और दीर्घकालिक प्रवृत्ति के अनुसार यह साल-दर-साल बढ़ रहा है, जो दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और बेहतर स्थिति में है।

आरबीआई के अनुसार, “लगभग सभी क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से 100% एफडीआई के लिए खोल दिया गया है। अब लगभग 90% एफडीआई स्वचालित मार्ग के तहत आता है। हाल के वर्षों में हमने रक्षा, बीमा, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, दूरसंचार और अंतरिक्ष जैसे प्रमुख क्षेत्रों में उदारीकरण के कई उपाय लागू किए हैं, ताकि अर्थव्यवस्था को और अधिक खोला जा सके।”

‘नेट एफडीआई’ को लेकर विवाद

नेट एफडीआई वह अंतर होता है जो ग्रोस एफडीआई फ़्लो और भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए विदेशी निवेश, विनिवेश तथा विदेशी संस्थाओं द्वारा धन की वापसी के बाद बचता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मई 2025 के लिए जारी अपने बुलेटिन में बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-2025 में शुद्ध एफडीआई 0.4 बिलियन डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2023-2024 में यह 10.1 बिलियन डॉलर था।

कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इन दोनों आँकड़ों के बीच के अंतर को निकालते हुए दावा किया है कि नेट एफडीआई में 96.5% की गिरावट आई है, और इसे भारत की आर्थिक स्थिति में गंभीर गिरावट के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

आरबीआई द्वारा जारी मई 2025 बुलेटिन का स्क्रीनशॉट

जैसा कि दिए गए ग्राफ से स्पष्ट है, वित्तीय वर्ष 2024-2025 में ग्रोस एफडीआई पफ़्लो 81 बिलियन डॉलर रहा, जो कि 2023-2024 के 71.3 बिलियन डॉलर की तुलना में 13.6% अधिक है।

इसी समय अंतराल में भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशी निवेश और विनिवेश में भी वृद्धि देखी गई। यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियाँ अब विदेशों में रणनीतिक निवेश और अधिग्रहण कर रही हैं, और भारत में निवेश करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए भी निकालना आसान हुआ है, यह दोनों ही आर्थिक परिपक्वता और मजबूती के संकेत हैं।

RBI ने अपने बुलेटिन में बताया, “इस अवधि में नेट FDI फ़्लो में गिरावट अधिक प्रत्यावर्तन और बाहरी निवेश के कारण हुई, जो इस बात का संकेत है कि भारत एक परिपक्व बाजार बन चुका है, जहाँ विदेशी निवेशक आसानी से प्रवेश और निकास कर सकते हैं। यह भारतीय अर्थव्यवस्था की सकारात्मक स्थिति को दर्शाता है।”

निष्कर्ष

उल्लेखनीय ग्रोस एफडीआई फ़्लो भारत में निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है, जो इस तथ्य से और भी पुष्ट होता है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 686.1 बिलियन डॉलर (56.95 लाख करोड़) है, जो 11 महीने से अधिक के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी, उससे जुड़े पत्रकारों और मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र ने भारत में एफडीआई फ़्लो की साल-दर-साल वृद्धि की अनदेखी की। उन्होंने केवल शुद्ध एफडीआई में आई गिरावट को अलग-थलग करके प्रस्तुत किया और इसके आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था की नकारात्मक तस्वीर पेश करने की कोशिश की।

इन चुनिंदा और भ्रामक दावों के बावजूद, सच ये है कि भारतीय अर्थव्यवस्था पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है और देश दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

अमेरिका में जिसने की 2 इजरायलियों की हत्या, उसके लिंक PM मोदी विरोधी गैंग से: वही नेविल राय सिंघम करता है फंडिंग जो भारत में चीनी प्रोपेगेंडा के लिए ‘न्यूजक्लिक’ को देता था पैसे

वाशिंगटन डीसी में बुधवार (22 मई 2025) को हमला हुआ, जिसमें इजरायली दूतावास में काम करने वाले 2 कर्मचारियों की हत्या कर दी गई। इस हत्याकांड ने पूरी दुनिया का ध्यान खीँचा है। इस हत्याकांड को इलियास रोड्रिगेज (31) ने अंजाम दिया, जब उसने कैपिटल ज्यूइश म्यूजियम के बाहर दोनों की हत्याएँ की और ‘फ्री, फ्री फिलिस्तीन’ के नारे लगाए। इस घटना ने न केवल इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव को बढ़ाया है, बल्कि भारत के खिलाफ भी एक गहरी साजिश की ओर इशारा किया है।

दरअसल, हमलावर रोड्रिगेज का कथित संबंध एक ऐसे संगठन से है, जो न सिर्फ इजरायल का कट्टर विरोधी है, बल्कि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी अभियान चलाता रहा है। इस संगठन का नाम है पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन (पीएसएल), जिसके तार अमेरिकी करोड़पति और कथित चीनी समर्थक नेविल रॉय सिंघम और उसकी बीवी जोडी इवांस से जुड़े हैं।

रोड्रिगेज काफी समय से अमेरिकी नीतियों की खिलाफत करता रहा है, यहाँ तक कि उसने अपने पिता का भी विरोध किया था, जब वो इराकी सैनिक की वर्दी से मिनी झंडा लाए थे। रोड्रेगेज ने इसे अमेरिकी सैनिक ‘नरसंहारकारी साम्राज्यवादी युद्धों’ की ट्रॉफी करार दिया था। वो साल 2017-18 में शिकागो में एएनएसडब्ल्यूईआर कोएलिशन के प्रदर्शनों में भी शामिल रहा था।

इस हत्याकांड में इलियास रोड्रिगेज का नाम सामने आते ही पीएसएल सुर्खियों में आ गया। संगठन ने तुरंत सफाई दी कि रोड्रिगेज का उनके साथ संबंध 2017 में खत्म हो चुका था और इस हमले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हालाँकि संदेह है कि रोड्रिगेज अभी भी पीएसएल का सक्रिय सदस्य हो सकता है।

भारत-अमेरिका दोस्ती के समर्थक और सीनेट इंडिया कॉकस के सह-अध्यक्ष रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कार्निन ने इस मामले में गहरी जाँच की माँग की है। कार्निन ने एटॉर्नी जनरल पामेला बोंडी और एफबीआई प्रमुख काश पटेल से पीएसएल और अन्य वामपंथी संगठनों की फंडिंग की जाँच करने को कहा है। उनका कहना है कि यह जानना जरूरी है कि कहीं ये संगठन घरेलू आतंकवाद को बढ़ावा तो नहीं दे रहे।

भारत के खिलाफ चलाता रहा है अभियान

पीएसएल और इसके सहयोगी संगठनों का भारत विरोध भी पुराना है। जून 2023 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की यात्रा पर गए थे, तब पीएसएल ने उनकी यात्रा का कड़ा विरोध किया था। संगठन ने अपनी एक्स पोस्ट में छह कारण गिनाए थे, जिनमें मोदी सरकार पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और अल्पसंख्यकों के खिलाफ नीतियों के आरोप शामिल थे।

इसके अलावा अक्टूबर 2023 में जब भारत में न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को चीनी हितों के लिए काम करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, तब पीएसएल ने न्यूयॉर्क में न्यूयॉर्क टाइम्स के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में संगठन से जुड़े लोगों ने मोदी सरकार और अखबार के खिलाफ नारेबाजी की थी। न्यूज़क्लिक को भी सिंघम की फंडिंग का हिस्सा माना जाता है, जिसके जरिए वह भारत में चीनी प्रचार को बढ़ावा दे रहा था।

ब्रॉन्क्स एंटी-वॉर कोएलिशन ने बताया था एंटी जायनिज्म की अभिव्यक्ति

इजरायली दूतावास कर्मियों की हत्या के बाद ब्रॉन्क्स एंटी-वॉर कोएलिशन ने एक्स पर एक पोस्ट में रोड्रिगेज की कार्रवाई को ‘एंटी-जायनिज्म की सबसे बड़ी अभिव्यक्ति’ बताया। इस संगठन की स्थापना डी नाइट ने की थी, जो एक कट्टर समाजवादी और चीन समर्थक कार्यकर्ता हैं। नाइट की किताब ‘बेफ्रेंडिंग चाइना: पीपल टू पीपल पीसमेकिंग’ का भी जोडी इवांस ने समर्थन किया था। यह संगठन भी पीपल्स फोरम के साथ काम करता है और सिंघम के नेटवर्क का हिस्सा है।

कौन है चीनी एजेंडा चलाने वाला नेविल रॉय सिंघम

श्रीलंकाई मूल का अमेरिकी नागरिक नेविल रॉय सिंघम अब चीन शंघाई में रहता है। वो इस मामले के केंद्र में है। उसकी बीवी जोडी इवांस कोड पिंक नाम का संगठन चलाती है, वो भी चीनी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देती है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सिंघम चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के लिए काम करता है और दुनिया भर में चीनी प्रचार को बढ़ाने के लिए करोड़ों डॉलर खर्च कर रहा है। उनकी फंडिंग गैर-लाभकारी संगठनों और शेल कंपनियों के जरिए दी जाती है, ताकि यह छिपा रहे कि पैसा कहाँ से आ रहा है।

सिंघम का नेटवर्क पीपल्स फोरम, एएनएसडब्ल्यूईआर कोएलिशन और ब्रॉन्क्स एंटी-वॉर कोएलिशन जैसे संगठनों तक फैला है। ये सभी संगठन इजरायल विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रहे हैं। पीपल्स फोरम को सिंघम ने गोल्डमैन सैक्स फिलैंथ्रॉपी फंड के जरिए 20 मिलियन डॉलर से ज्यादा की फंडिंग दी है। नेटवर्क कॉन्टैजियन रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये संगठन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर अमेरिका में फिलिस्तीन समर्थक आंदोलनों को हाईजैक कर रहे हैं, ताकि एक व्यापक अमेरिका-विरोधी, लोकतंत्र-विरोधी और पूँजीवाद-विरोधी एजेंडा चलाया जा सके।

न्यूजक्लिक फंडिंग के खिलाफ भारत में हो चुकी है कार्रवाई

नेविल रॉय सिंघम ने साल 1993 में थॉटवर्क्स नाम की आईटी कंपनी बनाई, जिसे उसने 2017 में 785 मिलियन डॉलर में बेच दिया। इसके बाद वह तेजी से राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गया और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का समर्थक बन गया। वह लीग ऑफ रिवॉल्यूशनरी ब्लैक वर्कर्स जैसे माओवादी संगठनों से भी जुड़ा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की के अनुसार, सिंघम का नेटवर्क दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और भारत जैसे देशों में चीनी प्रचार को बढ़ावा देता है। भारत में न्यूज़क्लिक को दी गई फंडिंग इसका एक उदाहरण है। जिसके खिलाफ भारत सरकार कार्रवाई भी कर रही है।

इजरायली दूतावास के 2 कर्मचारियों की हत्या और इलियास रोड्रिगेज का इसमें नाम आना बेहद खतरनाक बात है। यह घटना न केवल इजरायल और अमेरिका के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक चेतावनी है। नेविल रॉय सिंघम जैसे लोग अपने धन और प्रभाव का इस्तेमाल कर वैश्विक स्तर पर चीनी एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं।

उसके फंड किए पीएसएल और पीपल्स फोरम जैसे संगठन इजरायल और भारत जैसे देशों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। यह जरूरी है कि इन संगठनों की फंडिंग और गतिविधियों की न सिर्फ गहरी जाँच हो, बल्कि उन पर बैन भी लगाया जाए, ताकि वो भारत और इजरायल विरोधी कार्रवाईयों को अंजाम न दे सकें।

7 बेटियों के पिता लालू यादव को बताना चाहिए कि बिहार की 1 बेटी की जिंदगी का ‘तमाशा’ क्यों बना दिया?

बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव विधायक होते हुए भी राजनीतिक कारणों से कम ही चर्चा में रहते हैं। मालदीव में ‘ध्यान’ लगाने गए तेज प्रताप यादव अब अनुष्का यादव के साथ अपनी ‘लव स्टोरी’ को सार्वजनिक कर चर्चा में हैं।

इश्क के इस सार्वजनिक कबूलनामे ने बिहार की ही एक बेटी और राजद की राजनीति के आधार समाज (यादव) से आने वाली बेटी ऐश्वर्या राय को दिए उन ‘जख्मों’ की याद भी ताजा कर दी है, जिसे उसके ससुराल से बेआबरू कर निकाला था। अपने पोस्ट में तेज प्रताप ने 12 साल से चल रही लव स्टोरी के बारे में बताया है। लेकिन बाद में इसे डिलीट या शायद हाइड कर दिया गया। थोड़ी देर बाद पोस्ट फिर से दिखने लगा।

तेज प्रताप यादव ने अपने पोस्ट में लिखा है;

मैं तेज प्रताप यादव और मेरे साथ इस तस्वीर में जो दिख रही हैं, उनका नाम अनुष्का यादव है। हम दोनों पिछले 12 सालों से एक-दूसरे को जानते हैं और प्यार भी करते हैं। हमलोग पिछले 12 सालों से एक रिलेशनशिप में रह रहे हैं। मैं बहुत दिनों से आपलोगों से यह बात कहना चाहता था, पर समझ नहीं आ रहा था कैसे कहूँ… इसलिए आज इस पोस्ट के माध्यम से अपने दिल की बात आप सबके बीच रख रहा हूँ। आशा करता हूँ आप लोग मेरी बातों को समझेंगे।

इस पोस्ट के एक-एक शब्द पर गौर करिए। राजद विधायक तेज प्रताप यादव कबूल रहे हैं कि वे 12 साल से एक लड़की के साथ रिलेशनशिप हैं। दोनों एक-दूसरे से प्यार करते हैं। उन्होंने मई 2025 में यह पोस्ट किया है। यानी इनका संबंध 2013 से है। फिर 12 मई 2018 को उन्होंने ऐश्वर्या राय जो बिहार के ही एक पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय की पौत्री और राजद के पूर्व नेता चंद्रिका राय की बेटी हैं, के साथ शादी क्यों की?

वे कौन से दबाव थे जिसके कारण उन्हें इस संबंध के लिए तैयार होना पड़ा? लालू परिवार को इस रिश्तेदारी से कौन राजनीतिक समीकरण सधने की उम्मीद थी जो 2019 के लोकसभा चुनाव में चंद्रिका राय की हार से पूरी होती नहीं दिखी और ऐश्वर्या राय को घर से निकाल दिया गया?

वैसे भी जिस तरीके से लालू यादव और राबड़ी देवी के छोटे बेटे तेजस्वी यादव ने एक ईसाई महिला से शादी की है, उससे तो लगता नहीं कि यह परिवार सामाजिक या रूढ़िवादी कारणों से प्रेम विवाह का विरोधी है। राजनीतिक तौर पर भी बिहार में ईसाइयों का ऐसा कोई प्रभाव नहीं है, जिससे MY समीकरण को विस्तार मिलने की दूर-दूर तक संभावना भी दिखे। ऐसे में तेजस्वी यादव के प्रेम विवाह के लिए रजामंदी जताने के पीछे लालू और राबड़ी का राजनीतिक कारण तो यकीनी तौर पर नहीं रहा होगा।

फिर तेज प्रताप की लव स्टोरी परिवार को कबूल क्यों नहीं थी? क्या तेज प्रताप ने परिवार को इसके बारे में नहीं बताया था? इन सवालों को घरेलू मामले बताकर खारिज नहीं किया जा सकता है। इनके जवाब बिहार का अधिकार है। वैसे भी प्रेम गुनाह नहीं है। लेकिन एक रिश्ते में रहते हुए किसी और लड़की से शादी (शायद राजनीतिक कारणों से) करना और फिर उसके जीवन को तमाशा (शायद किसी और से प्रेम में होने के कारण) बना देना, कानूनी तौर पर भले अपराध न हो, लेकिन भारत का समाज जिस नैतिकता के धरातल पर खड़ा है, अवश्य ही पाप है।

यह सही है कि बिहार में जंगलराज लाने वाले, पशुओं का चारा गटक जाने वाले, सरकारी नौकरी के बदले जमीन लिखवा लेने वाले, कथित तौर पर बेटी की शादी में शोरूम से गाड़ियों से लेकर फर्नीचर तक उठा लेने वाले परिवार से नैतिकता की अपेक्षा नहीं रखनी चाहिए। लेकिन मीसा भारती, रोहिणी आचार्य, चंदा यादव, रागिनी यादव, हेमा यादव, अनुष्का राव और राज लक्ष्मी यादव के माता-पिता से यह तो जरूर पूछा जाना चाहिए सात बेटियों के रहते हुए भी उन्होंने बिहार की एक बेटी की जिंदगी को तमाशा क्यों बना दिया?

क्या ऐश्वर्या लालू परिवार की राजनीतिक चौसर की केवल चाल मात्र थीं? जिससे अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने पर जैसा कि ऐश्वर्या ने खुद मीडिया को बताया था राबड़ी देवी ने उन्हें बाल खींचकर मारा। राबड़ी देवी के आवास में सुरक्षाकर्मी ने उन्हें मारा। राबड़ी देवी ने उनका फोन छीन लिया। उनके माँ-बाप को जलील किया।

जिस तरीके से इस पोस्ट को डिलीट/हाइड किया गया, संभव है कि फिर से ऐसा कुछ देखने को मिले। यह बात भी फैलाई जा सकती है कि तेज प्रताप यादव का अकाउंट हैक हो गया था। विधानसभा चुनाव तक अनुष्का यादव के साथ रिश्ते को नाम नहीं देने का तेज प्रताप पर दबाव बनाया जाए। लेकिन बिहार को बार-बार कलंकित करने वाले इस परिवार को पता होना चाहिए कि सोशल मीडिया के इस दौर में जब बात निकली है तो दूर तलक जाएगी ही। उस आधार (MY) के Y को हिलाकर जाएगी, जिसकी तेल से लालटेन की लौ अब भी बची हुई है।

(अपडेट: इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के कुछ घंटों बाद तेज प्रताप यादव ने एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट करते हुए अपना अकाउंट हैक होने का दावा किया। कहा कि AI के इस्तेमाल से उनकी तस्वीरों से छेड़छाड़ की है। उनका फेसबुक पोस्ट फिर से डिलीट हो चुका है।)

बांग्लादेश में हिंदुओं पर फिर टूटा मुस्लिम भीड़ का कहर, घरों में लगाई आग-मचाई लूटमार: इस बार लोकल नेता की मौत को बनाया हिंसा का बहाना

बांग्लादेश के जेसोर जिले के मशीहाटी गाँव में गुरुवार (22 मई 2025) को मुस्लिम भीड़ ने हिंदू समुदाय के घरों में आग लगा दी। यह घटना मछली के बाड़े के अधिकार को लेकर हुए विवाद के बाद हुई, जिसमें किसान दल के नेता तारिकुल इस्लाम की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दरअसल, तारिकुल इस्लाम की हत्या को बहाना बनाकर गाँव के हिंदू (मतुआ समुदाय) समाज को निशाना बनाया गया और चुन-चुन कर उनके घरों को आग लगा दी गई।

बांग्लादेशी अखबार प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, तारिकुल इस्लाम के दौरान मशीहाटी गाँव में एक कार्यक्रम चल रहा था। उसी दौरान एक हिंदू के घर में तारिकुल इस्लाम की हत्या की जानकारी सामने आई। इस हत्या को बहाना बनाकर इस्लामी दंगाइयों ने हिंसा भड़का दी। कट्टरपंथियों के झुँड ने गाँव में 20 से अधिक हिंदुओं के घरों में आग लगा दी, 4 दुकानों में तोड़फोड़ की और 2 दुकानों को आग के हवाले कर दिया। इस हमले में 10 से ज्यादा हिंदू लोग घायल हो गए।

जानकारी के मुताबिक, मृतक तारिकुल इस्लाम का मछली पालने के लिए बनाए गए तालाब (बाड़बंदी वाला क्षेत्र) को लेकर पिल्टू बिस्वास नाम के व्यक्ति से तनाव चल रहा था। इसी विवाद की वजह से तारिकुल की हत्या कर दी गई। ये तालाब पहले किसी और के पास था, लेकिन अब तारिकुल इस तालाब पर किसी भी तरह से कब्जा करना चाहता था, ये विवाद उसके लिए जानलेवा साबित हुई। लेकिन इस हत्या को बहाना बनाकर हिंदुओं के घरों को फूँका गया और एक सागर बिश्वास नाम के युवक को भी अगवा कर लिया।

इस हिंसा के दौरान मुस्लिमों ने हिंदू समुदाय के घरों और दुकानों को निशाना बनाया। जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं।

मुस्लिमों के हमले के बाद गाँव के ज्यादा हिंदू पुरुष अपना घर छोड़कर भागने को विवश हो गए। ऐसे में इस्लामी कट्टरपंथियों को हिंसा करने की पूरी छूट मिल गई, क्योंकि उस भीड़ का सामना करने के लिए हिंदू मर्द वहाँ थे ही नहीं। ऐसे में इस्लामी कट्टरपंथियों ने 6 गाड़ियों (एक वैन और 5 बाइकों) को भी आग के हवाले कर दिया।

हिंसा पीड़ित लोग मतुआ समुदाय से हैं। एक पीड़ित ने बताया कि करीब 150 लोगों की भीड़ ने उनके घरों में तोड़फोड़ की, सारा सामान लूट लिया और आग लगा दी। सागर बिस्वास नामक 25 वर्षीय हिंदू युवक को भी मुस्लिम हमलावरों ने अगवा कर लिया। पुलिस, सेना के अधिकारी और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी घटना के करीब दो घंटे बाद पहुँचे।

अभयनगर थाने के प्रभारी अब्दुल आलिम ने बताया कि मछली के घेर (तालाब) को लेकर विवाद में तारीकुल की गोली मारकर और काटकर हत्या की गई। अभी तक इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि डहर मशियाहाटी में स्थिति नियंत्रण में है और वहाँ पुलिस तैनात की गई है। वहीं, सागर बिश्वास को बरामद कर लिया गया है।

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना की सरकार के तख्तापलट के केवल तीन दिनों के भीतर ही बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हुए। इतना ही नहीं 60 हिंदू शिक्षक, प्रोफेसर और सरकारी अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए भी मजबूर किया गया।

चिन्मय कृष्ण दास प्रभु और उनके सहयोगियों की हालिया गिरफ्तारी, इस्कॉन जैसे हिंदू संगठनों पर प्रतिबंध की कोशिशें और ‘देशद्रोह’ के आरोपों का इस्तेमाल कर हिंदू आवाजों को दबाने के प्रयास, ये सब मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के तहत हिंदुओं के प्रति संगठित और योजनाबद्ध उत्पीड़न को उजागर करते हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा देश में अस्थिरता का लाभ उठाया जा रहा है। वो ‘ईशनिंदा‘ के नाम पर हिंदुओं का दमन कर रहे हैं। ईशनिंदा के नाम पर कई हिंदुओं पर हमलों की रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं।

दिल्ली, मुंबई, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक… तेजी से पैर पसार रहा कोरोना का नया वेरिएंट, अस्पतालों में बेड-ऑक्सीजन-दवाओं को लेकर BJP सरकार का अलर्ट: संक्रमितों की होगी जीनोम सीक्वेंसिंग

कोरोना महामारी ने तीन वर्ष के बाद एशिया में एक बार फिर तेजी से पैर पसारना शुरू कर दिया है। दिल्ली में भी कोविड-19 के संक्रमित की संख्या तेजी से बढ़ रही है। यहाँ कोरोना के 23 सक्रिय मामले मिले हैं।

कोविड-19 के मामलों में लगातार वृद्धि के बाद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने शनिवार (24 मई 2025) को संक्रमण की स्थिति के बारे में समीक्षा की। मीडिया ब्रीफिंग में उन्होंने कहा कि दिल्ली में अभी तक सामने आए कोरोना संक्रमितों की जाँच रिपोर्ट निजी टेस्टिंग लैब से आई है।

दिल्ली में स्वास्थ्य संस्थानों और अस्पतालों में आने वाले संक्रमितों में कोरोना के वेरिएंट की पहचान के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग की जाएगी। इसके लिए संक्रमितों के नमूने लोकनायक अस्पताल में भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली स्टेट हेल्थ डेटा मैनेजमेंट पोर्टल पर भी कोरोना से जुड़ी सभी जानकारियों की दैनिक रिपोर्टिंग को अनिवार्य कर दिया गया है।

अस्पतालों में जारी किया गया अलर्ट

दिल्ली सरकार की ओर से सभी सरकारी और निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को कोविड-19 को लेकर सतर्क रहने के साथ दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके तहत अस्पतालों में बिस्तरों, ऑक्सीजन, कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर, दवाइयाँ, बाय-पैप, समेत अन्य जरूरी चीजों की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने की बात शामिल की गई है।

अस्पताल परिसर में मास्क पहनने और अन्य कोरोना के बचाव संबंधी अन्य कदम लागू करने के निर्देश भी शामिल किए गए हैं। बढ़ते मामलों के साथ कोविड ड्यूटी के लिए अस्पताल के कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण देने की एडवाइजरी जारी की गई है।

आईसीएमआर के द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार ही कोरोना संदिग्ध संक्रमितों की जाँच किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके तहत इंफ्लुएंजा लाइक इंफेक्शन (ILI) के 5% और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (SARI) के 100% मामलों की जाँच अनिवार्य कर दी गई है। इन मामलों की दैनिक रिपोर्टिंग इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म (IHIP) पोर्टल पर दिए जाने की बात भी कही गई है।

कहाँ कितने मामले

दिल्ली के साथ साथ भारत के अन्य राज्यों में भी कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, हरियाणा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्य शामिल हैं। केरल में अब तक कोविड के 182 मामले सामने आ चुके हैं। 21 मई तक कर्नाटक में 16 सक्रिय मामले थे। बेंगलुरू में 9 महीने के बच्चे में भी संक्रमण मिला है। 22 मई तक गुजरात में कोरोना के 15 नए मामले सामने आए। हरियाणा के गुरुग्राम और फरीदाबाद में तीन मामले मिले हैं।

वेरिएंट की जानकारी नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने JN.1 को दिसंबर 2023 में ‘वेरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया था। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच नए वेरिएंट को ओमिक्रॉन का सब-वेरिएंट JN.1 और इसके भी उप-वैरिएंट्स LF.7 और NB.1.8 को जिम्मेदार माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि JN.1 वैरिएंट ज्यादा संक्रामक है, लेकिन खतरनाक नहीं है। इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश और शरीर में दर्द और कुछ में डायरिया जैसी परेशानी देखी जा रही है।

एक साबुन के लिए सोशल मीडिया पर फूट रही ‘तमन्ना’, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का निकला झाग: जानिए एक हिरोइन को मैसूर सैंडल का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनाने पर विवाद क्यों?

कर्नाटक में मैसूर सैंडल सोप को लेकर ताजा विवाद ने क्षेत्रीय अस्मिता और कन्नड़ भाषा की भावनाओं को फिर से हवा दे दी है। कर्नाटक सरकार की कंपनी कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) ने बॉलीवुड अभिनेत्री तमन्ना भाटिया को दो साल के लिए 6.2 करोड़ रुपये की डील के साथ मैसूर सैंडल सोप का ब्रांड एंबेसडर बनाया।

इस फैसले ने कन्नड़ समुदाय और विपक्षी दलों में नाराजगी की लहर पैदा कर दी है। आलोचकों का कहना है कि साल 1916 में मैसूर के राजा द्वारा शुरू किया गया मैसूर सैंडल सोप ब्रांड एक सांस्कृतिक प्रतीक है, उसका चेहरा कोई स्थानीय कन्नड़ कलाकार होना चाहिए था।

विरोध का मुख्य कारण तमन्‍ना का कर्नाटक से नाता न होना है। मुंबई में जन्मी तमन्ना ने भले ही दक्षिण भारतीय सिनेमा में काम किया हो, लेकिन कन्नड़ संगठनों का कहना है कि यह नियुक्ति कर्नाटक की सांस्कृतिक विरासत का अपमान है।

कर्नाटक डिफेंस फोरम के प्रमुख नारायण गौड़ा ने इसे ‘अनैतिक’ करार देते हुए कहा कि कर्नाटक में रुक्मिणी वसंत जैसी कई प्रतिभाशाली कन्नड़ अभिनेत्रियाँ हैं, जो इस ब्रांड को बेहतर ढंग से रिप्रेजेंट कर सकती थीं। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब ‘सैंडलवुड’ (कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री) में इतना टैलेंट है, तो बाहरी अभिनेत्री को क्यों चुना गया? कुछ यूजर्स ने तो यहाँ तक कहा कि कई स्थानीय कलाकार मुफ्त में भी यह काम कर सकते थे।

स्थानीय संगठनों का ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया है। उन्होंने सरकार पर कन्नड़ गौरव को ठेस पहुँचाने और स्थानीय प्रतिभाओं की अनदेखी का आरोप लगाया। आलोचकों का यह भी कहना है कि 6.2 करोड़ रुपये की भारी रकम को शिक्षा, स्वास्थ्य या रोजगार जैसे जरूरी क्षेत्रों में खर्च करना चाहिए था। कन्नड़ रक्षण वैदिके जैसे संगठनों ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर तमन्ना की नियुक्ति रद्द करने की माँग की है।

दूसरी ओर कर्नाटक सरकार ने अपने फैसले का बचाव किया है। उद्योग मंत्री एमबी पाटिल ने कहा कि यह निर्णय मार्केटिंग विशेषज्ञों की सलाह पर लिया गया। तमन्ना के 2.8 करोड़ सोशल मीडिया फॉलोअर्स के जरिए ब्रांड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का लक्ष्य है। पाटिल ने बताया कि रश्मिका मंदाना, दीपिका पादुकोण और कियारा आडवाणी जैसे नामों पर भी विचार हुआ, लेकिन तमन्ना को उनकी उपलब्धता और लोकप्रियता के आधार पर चुना गया। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का कहना है कि मैसूर सैंडल सोप की 82% बिक्री कर्नाटक के बाहर होती है, इसलिए ब्रांड को वैश्विक बनाने के लिए यह रणनीति जरूरी थी।

यह विवाद कन्नड़ भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता की जिद को फिर से सामने लाया है। पहले भी कर्नाटक में भाषाई और क्षेत्रीय पहचान को लेकर बहस होती रही है। बीते कुछ समय में कन्नड़ के नाम पर कई विवाद चर्चा में रहे हैं, खासकर सत्ताधारी कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से। ऐसे में एक तरफ तो सत्ताधारी लोग कन्नाडिगा मुद्दा उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ कथित ‘बाहरी’ लोगों को ब्रांड एंबेसडर बनाकर खुद ही बैकफुट पर जा रहे हैं।

खुद Video कॉल पर काशी देखती थी ‘नफीसा’, तुफैल से करवाती थी रेकी… ‘बाबरी का बदला’ लेने को भड़काती रहती थी: 4 मुस्लिम देशों में फैला है ISI एजेंट का नेटवर्क

वाराणसी में पकड़े गए ISI एजेंट तुफैल को लेकर एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड (ATS) की जाँच में रोजाना नई बातें सामने आ रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, तुफैल ने चार देशों में आतंकी नेटवर्क फैला रखा था।

ATS तुफैल के मोबाइल के जरिए कई अहम सुरागों तक पहुँची है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एटीएस ने तुफैल के मोबाइल से लगभग 70% तक डेटा रिकवर किया है। इसमें उसके आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने की कई बातें सामने आई हैं। इसके अलावा तुफैल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बने अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है।

सोशल मीडिया की जाँच में पता चला कि तुफैल सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि 4 अन्य मुस्लिम देशों से भी जुड़ा हुआ है। वहाँ के लोगों से लगातार संपर्क में था। गौरतलब है कि तूफैल एक पाकिस्तानी फौजी की बीवी नसीफा के हनीट्रैप में भी फँसा था।

नफीसा ने वीडियो कॉल के जरिए वाराणसी देखा था। उसके लिए तुफैल ने कपड़े भी पाकिस्तान भिजवाए थे। इन्हें भिजवाने के लिए तुफैल ने नेपाल और पंजाब के रास्ते चुने। पुलिस जाँच में तुफैल के साथ जुड़े 4-5 लोगों के नाम सामने आए हैं। ATS उनसे भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

विदेशी दोस्तों ने तोड़ा नाता

उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी से तुफैल को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गुरुवार (22 मई 2025) को गिरफ्तार किया। एटीएस का शिकंजा जैसे ही तुफैल पर कसा, वैसे ही उसके विदेशी दोस्तों ने उससे सारे संपर्क तोड़ दिए हैं। इसकी जानकारी भी उसके मोबाइल से ही मिली है।

उसने तहरीक-ए-लब्बैक के नेता मौलाना शाह रिज़वी के वीडियो वॉट्सऐप ग्रुप में साझा किए। इन संदेशों में ‘गज़वा-ए-हिंद’ (भारत पर इस्लामी कब्ज़ा), बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने और भारत में शरिया कानून लागू करने जैसी भड़काऊ बातें शामिल थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके गिरफ्तार होने के बाद व्हाट्सएप पर 19 ग्रुपों से में से 7 से उसे हटा दिया गया। साथ ही इस ग्रुप की पूरी हिस्ट्री और चैट्स डिलीट कर दी गई हैं। हालाँकि ATS के पास इसका क्लोन मौजूद है।

इसके अलावा ATS को ये भी पता चलास कि तुफैल ने पाकिस्तान के व्हाट्सएप ग्रुप का लिंक वाराणसी के अन्य लोगों को भी भेजा था। इसके जरिए वह मुस्लिम लोगों से समर्थन माँग रहा था। उसने राजघाट, नमोघाट, ज्ञानवापी, रेलवे स्टेशन, जामा मस्जिद, लाल किला, निजामुद्दीन औलिया की तस्वीरें और उनसे जुड़ी जानकारियों पाकिस्तान के कुछ नंबरों पर शेयर की हैं।

इसी तरह नफीसा से तुफैल की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई। वाराणसी से जुड़े भारतीय होने पर नफीसा ने तुफैल को अपना नंबर दिया और उसे कुछ पाकिस्तानी ग्रुप में जुड़वाया। इसके बाद तुफैल कुछ और लोगों के संपर्क में आ गया। जाँच में सामने आया कि तुफैल 600 से अधिक पाकिस्तानी नंबरों के संपर्क में था। 

तुफैल का संबंध पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से था। वह संगठन के नेता मौलाना शाद रिजवी का समर्थक था और उसके वीडियो व्हाट्सएप ग्रुपों में भेजा करता था। वह ‘गजवा -ए – हिन्द’, शरीयत लागू करने और बाबरी मस्जिद का बदला लेने जैसे उत्तेजक और भड़काऊ मैसेज शेयर करता था।

ऑपरेशन सिंदूर में महिला पायलटों ने लहराया परचम, पाकिस्तान में घुसकर मारे 200+ आतंकी: रिपोर्ट्स; PM भी बोले- जिन्होंने सिंदूर मिटाया, उन्हें हमने मिट्टी में मिलाया

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इस मिशन में 200 से अधिक आतंकवादी और पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया गया। दिलचस्प बात ये है कि भारतीय वायु सेना की महिला पायलटों ने इसमें अहम भूमिका निभाई।

सीएनएन न्यूज18 ने अपनी एक एक्लुसिव रिपोर्ट में रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया है कि ऑपरेशन सिंदूर में किए गए हमलों से कम से कम 42 पाकिस्तानी सैनिक और 170 आतंकवादी मारे गए हैं।

भारतीय सेना की सभी विंग्स ने मिलकर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। इसमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लगभग 100 आतंकी खाक में मिल गए। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें महिला पायलटों ने आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त करने वाली सटीक हवाई कार्रवाई की।

इसके बाद 9 और 10 मई को पाकिस्तान के रहीम यार खान, सरगोधा और नूर खान एयरबेस पर हमले किए गए। इन हमलों से पाकिस्तान के सैन्य प्रणाली को काफी तगड़ा नुकसान हुआ था।

ऑपरेशन सिंदूर अपनी तरह का पहला अभियान था, जिसमें कई भारतीय महिला पायलटों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सैन्य दृष्टिकोण के साथ-साथ सशस्त्र बलों के बीच के समन्वय के लिहाज से भी यह मिशन काफी महत्वपूर्ण रहा।

कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जब पाकिस्तान की ओर से भारतीय शहरों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमले कर रहे थे तो उन हमलों को नाकाम करने की जिम्मेदारी दो महिला सीओ के पास थी। इनमें से एक ने राजस्थान के सूरतगढ़ में और दूसरी सीओ ने पंजाब के पठानकोट में मोर्चा संभाल रखा था।

22 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीकानेर में भी राष्ट्र के नाम संबोधन में इस बात की पुष्टि की कि भारत ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिंदूर जैसी निर्णायक कार्रवाई की। अपने संबोधन में उन्होंने सशस्त्र बलों की सराहना करते हुए इसे भारतीय सुरक्षा की ‘नई रणनीति’ बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “22 अप्रैल के बदले में 7 मई को सिर्फ 22 मिनट में हमने पाकिस्तान के 9 बड़े आतंकी ठिकानों को मिटा दिया। जब सिंदूर बारूद बन जाता है, तो इसका अंजाम क्या होगा ये दुनिया ने देख लिया। जिन्होंने हमारा सिंदूर मिटाने की कोशिश की, हमने उन्हें मिट्टी में मिला दिया।”

पीएम मोदी में भारतीयों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि हमारी सेनाओं ने एक चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसके कारण पाकिस्तान घुटनों पर आ गया।”

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है, सिर्फ कुछ समय के लिए रुका है। अगर पाकिस्तान आगे कोई प्रतिक्रिया करता है तो भारत से भी तुरंत जवाब मिलेगा।

छत्तीसगढ़ से लेकर झारखंड तक वामपंथी आतंकियों पर स्ट्राइक, लातेहार में 2 नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया: बीजापुर में 24 ने किया सरेंडर, ₹87 लाख का था इनाम

झारखंड में सुरक्षाबलों ने शनिवार (24 मई 2025) को 2 बड़े नक्सलियों को मार गिराया है। वहीं छत्तीसगढ़ में 24 नक्सलियों ने हथियार डाले है। इससे पहले 21 मई 2025 को यहाँ 27 नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था।

झारखंड में मारे गए नक्सलियों में झारखंड जन मुक्ति परिषद (JJMP) का सदस्य पप्पू लोहरा शामिल है, जिस पर 10 लाख रुपये का इनाम था। दूसरा नक्सली प्रभात गंझू था, जिस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इस मुठभेड़ में एक और नक्सली घायल हुआ, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है। सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से एक इंसास राइफल बरामद की है और इलाके में तलाशी अभियान अभी भी जारी है।

वहीं, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शनिवार (24 मई 2025) को 24 हार्डकोर नक्सलियों ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन नक्सलियों पर कुल ₹87.5 लाख का इनाम घोषित था, जिसमें से 20 नक्सलियों पर ₹50 हजार से लेकर ₹10 लाख तक का इनाम था।

सरकार ने इसे अपनी पुनर्वास नीति और ‘नियद नेल्ला नार’ योजना की सफलता बताया है। सरकार ने मार्च 2026 तक ‘लाल आतंक’ के समूल नाश का संकल्प दोहराया है।

वहीं, छत्तीसगढ़ के नारायणपुर-दंतेवाड़ा बॉर्डर पर देश का सबसे बड़ा मोस्ट वांटेड नक्सली बसवा राजू मारा गया। बसवा राजू पर 10 करोड़ रुपये का भारी इनाम घोषित था और छह राज्यों की पुलिस को उसकी तलाश थी।

वह नक्सल संगठन में पोलित ब्यूरो मेंबर और महासचिव जैसे बड़े पदों पर था। इस सफलता के बाद DRG के जवानों ने जंगल में ही नाच-गाकर और रंग गुलाल खेलकर जश्न मनाया। नारायणपुर शहर में भी आतिशबाजी की गई।

इससे पहले बुधवार (21 मई 2025) को बीजापुर-नारायणपुर जिले की सीमा पर अभुजमाड़ के जंगलों में एक और बड़ी मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षा बलों ने 27 नक्सलियों को मार गिराया था। इन नक्सलियों पर कुल 3.33 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें जिला रिजर्व गार्ड के जवान जश्न मनाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

मारे गए नक्सलियों में 12 महिला नक्सली भी शामिल थीं। इस कार्रवाई को नक्सलियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। इस ऑपरेशन में माओवादियों के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ ​​बसवराजू भी मारा गया, जिस पर छत्तीसगढ़ में 1.5 करोड़ रुपये का इनाम था।

इस ऑपरेशन में DKSZCM (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर) जंगू नवीन भी मारा गया, जिस पर 25 लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा चार कंपनी पार्टी समिति सदस्य (CYPCM) संगीता, भूमिका, सोमली और रोशन उर्फ ​​टीपू भी मारे गए, जिन पर 10-10 लाख रुपये का इनाम था।

मारे गए अन्य 21 नक्सलियों में तीन प्लाटून पार्टी समिति सदस्य और PLGA कंपनी नंबर 7 के 18 सदस्य शामिल थे, जिन पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।

मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए हैं, जिनमें 3 AK-47 राइफलें, 4 SLR, 6 इंसास राइफलें और विस्फोटक शामिल हैं। इस ऑपरेशन में राज्य पुलिस के दो DRG जवान भी शहीद हो गए थे।