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न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेजन के जंगल में रहने वाले लोगों को बताया ‘पोर्न एडिक्ट’, इंटरनेट यूज देखने गया था पत्रकार: जनजाति समाज ने ठोका मुकदमा, कहा- हमारी छवि बिगाड़ी

ब्राज़ील की अमेज़न क्षेत्र की एक स्वदेशी जनजाति ने अमेरिकी समाचार पत्र द न्यूयॉर्क टाइम्स पर मुकदमा ठोंक दिया है। इस जनजाति का आरोप है कि NYT की एक रिपोर्ट में उन्हें तकनीक से प्रभावित और पोर्न देखने के आदी के रूप में गलत तरीके से दिखाया गया। इस जनजातीय समूह ने आरोप लगाया है कि इस रिपोर्ट से उनकी छवि को नुकसान पहुँचा है।

NYT की रिपोर्ट में किए गए चित्रण और उस पर आई प्रतिक्रियाओं से जनजाति के लोगों में गहरा आक्रोश है। NYT के खिलाफ यह मुकदमा अमेजन के जंगलों की जावरी घाटी में रहने वाली मारुबो जनजाति ने ठोंका है। यह जनजाति लगभग 2,000 लोगों का समुदाय है।

यह मुकदमा लॉस एंजिल्स की एक अदालत में दाखिल किया गया है। इसके अलावा, मुकदमे में TMZ और Yahoo को भी प्रतिवादी बनाया गया है। जनजाति के लोगों का आरोप है कि इन मीडिया संस्थानों ने NYT की रिपोर्ट को बढ़ा-चढ़ाकर और सनसनीखेज तरीके से दिखाया है, इससे उनकी छवि खराब हुई है।

मारुबो जनजाति ब्राज़ील के अमेज़न जंगल के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में से एक में रहती है। यह जनजाति इटुई नदी के किनारे सैकड़ों मील तक फैले 20 अलग-अलग गाँवों में सामुदायिक झोपड़ियों में निवास करती है, और इनका अधिकांश इलाका ऐसा है जहाँ पहुँचना बहुत कठिन होता है।

एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा के आने के बाद अमेज़न की अलग-थलग मारुबो जनजाति की दुनिया बदल गई है। मारुबो लोगों को लगभग 15,000 डॉलर प्रति यूनिट कीमत वाले 20 स्टारलिंक एंटेना मिले, जिनसे उन्हें बाहरी दुनिया से हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन प्राप्त हुआ।

इसके दो साल बाद NYT के पत्रकार जैक निकास वहाँ रिपोर्टिंग के लिए पहुँचे और इस बदलाव को एक दिलचस्प कहानी मानते हुए इसे कवर किया। हालाँकि, मारुबो लोगों द्वारा दायर मानहानि मुकदमे के अनुसार, NYT रिपोर्ट में उन्हें पोर्न का लती बताया गया।

जनजातियों के अनुसार, NYT की रिपोर्ट में मारुबो समुदाय को इस तरह दिखाया गया है जैसे वे इंटरनेट जैसी आधुनिक तकनीक को संभाल नहीं पा रहे हों। रिपोर्ट में विशेष रूप से इस आरोप को उजागर किया गया है कि उनके युवा पोर्नोग्राफी के आदी हो गए हैं, जिससे जनजातियों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है।

मुकदमे में कहा गया, “ये बातें न केवल भड़काऊ थीं बल्कि आम पाठक को यह संदेश देती थीं कि इंटरनेट एक्सेस के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में मारुबो लोग नैतिक और सामाजिक पतन की ओर बढ़ गए हैं। इस तरह के चित्रण सांस्कृतिक टिप्पणी से कहीं आगे जाते हैं, वे सीधे तौर पर पूरे लोगों के चरित्र, नैतिकता और सामाजिक प्रतिष्ठा पर हमला करते हैं और यह दिखाते हैं कि जनजातीय लोगों के पास आधुनिक दुनिया में काम करने के लिए अनुशासन या मूल्यों की कमी है।”

NYT ने कहा है कि वह इस मुकदमे से अपना जोरदार बचाव करेगा। NYT के प्रवक्ता ने कहा, “इस लेख को निष्पक्ष रूप से पढ़ने पर यह स्पष्ट होता है कि यह एक दूर-दराज़ के इलाकों में रहने वाले स्थानीय लोग में नई तकनीक के फायदे और उसकी जटिलताओं की एक संवेदनशील और सूक्ष्म पड़ताल है, जिसकी अपनी गौरवशाली इतिहास और संरक्षित संस्कृति है।”

सिंध, बलूचिस्तान, गिलगित… पाकिस्तान से अलग होना चाहता है हर राज्य: क्या रिपीट होगा ‘बांग्लादेश’ वाला चैप्टर, जानिए इस्लामी मुल्क में चल रहीं आजादी की कितनी लड़ाई

भारत में आतंकी भेजने और पहलगाम में निर्दोषों की हत्या के लिए खाद पानी देने वाला पाकिस्तान खुद विभाजन की तरफ बढ़ रहा है। भारत से युद्ध की गीदड़भभकी देने वाले पाकिस्तान में लगातार कई समूह आजादी की लड़ाई तेज कर रहे हैं। खराब आर्थिक हालातों से जूझता पाकिस्तान इन आवाजों को दबाने में भी विफल है।

पाकिस्तान में सिंधी, बलूच और पश्तून समुदाय लंबे समय से आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह अपना अलग देश बनाना चाहते हैं। इन समुदायों का पाकिस्तान और उसकी फ़ौज लगातार शोषण करती आई है। इनसे लगातार भेदभाव किया जाता है।

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए सैन्य तनाव के बीच, बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने पाकिस्तान से आजादी के लिए अपने आंदोलन को दोबारा चालू कर दिया है। उन्होंने अपनी आजादी की घोषणा भी कर दी है। बलूचों के अलावा अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत से भी आजादी की माँग उठी है।

सिंध प्रांत को पाकिस्तान से आजाद करके सिंधु देश के अलग देश के निर्माण की माँग करने वाले संगठन ‘जय सिंधु स्वतंत्रता आंदोलन’ (JSFM) ने भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अपने आजादी के अभियान को तेज कर दिया है।

इसके अलावा पश्तूनिस्तान नामक अलग देश की माँग करने वाली आवाजें भी उठी हैं। पश्तूनिश्तान की माँग करने वाले खैबर पख्तूनख्वा और उत्तरी बलूचिस्तान के हिस्सों को पाकिस्तान से अलग करके अपना देश बनाना चाहते हैं।

बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई

भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव के दौरान BLA ने पाकिस्तान से आजादी की घोषणा की और संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान के लोकतांत्रिक गणराज्य को मान्यता देने का आग्रह किया। काफी कम आबादी वाले और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर बलूचिस्तान लम्बे समय से उग्रवाद से जूझ रहा है।

ऐतिहासिक रूप से, बलूचिस्तान ‘खान ऑफ कलात’ के अधीन एक स्वतंत्र देश था। हालाँकि, भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद यह मार्च 1948 में यह पाकिस्तान में शामिल हो गया। खान ऑफ कलात ने दबाव में आकर अपनी और बलूच समुदाय की इच्छा के विरुद्ध विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

इससे पहले 11 अगस्त, 1947 को अंग्रेजों की निगरानी में कलात और पाकिस्तान के बीच एक स्टैंडस्टिल समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते में कलात को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी गई थी। कलात को ही अब बलूचिस्तान के नाम से जाना जाता है।

1948 में समझौते के बावजूद पाकिस्तान ने खान ऑफ कलात को बलूचिस्तान को पाकिस्तान में विलय करने के लिए मजबूर किया। पाकिस्तान चाहता था कि बलूचिस्तान उसमे शामिल हो जाए। इस विलय के बाद से बलूचिस्तान में पाँच बार विद्रोह हो चुके हैं।

यह विद्रोह 1948, 1958, 1962, 1973-77 में हुए हैं। इसके बाद 2000 से चालू हुई लड़ाई आज तक जारी है। बलूच खुद को राजनीतिक हाशिए पर धकेले जाने, हिंसक और यातनापूर्ण दमन और संसाधनों के दोहन के चलते हथियार उठाने पर मजबूर हैं।

बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई का नेतृत्व अब BLA कर रही है। हाँलाकि, पाकिस्तान की 2009 में शुरू की गई नीति ‘मारो और फेंको’ के चलते इसके सदस्य लगातार मारे जा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग गायब भी किए गए हैं। हजारों की संख्या में लोगों को पाकिस्तान की फ़ौज ने उठाया और वह फिर कभी वापस नहीं लौटे।

सिंध भी चाहता है स्वतंत्रता

पाकिस्तान के सिंध प्रांत की आजादी की माँग ‘जय सिंधु स्वतंत्रता आंदोलन’ (JSFM) द्वारा की जा रही है। जो सिंधु देश के एक अलग देश के गठन की वकालत करता रहा है। सिंध के लोगों की लंबे समय से माँग रही है कि सिंध का एक अलग स्वतंत्र देश हो।

अल्पसंख्यक सिंधी समुदाय ने इस्लामी मुल्क पाकिस्तान पर उर्दू थोपने और जमीन हड़पने के आरोप लगाए हैं। सिंधियों का कहना है कि पाकिस्तान उनकी स्थानीय संस्कृति को मिटा रहा है। पिछले कुछ सालों में पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा कई स्वतंत्रता समर्थक कार्यकर्ताओं को न सिर्फ मारा और प्रताड़ित किया गया है बल्कि जबरन गायब भी कर दिया गया है।

पश्तूनिश्तान की लड़ाई भी हुई तेज

पंजाबियों के बाद पश्तून पाकिस्तान में दूसरा सबसे बड़ा जातीय समूह है। ये पाकिस्तान की कुल आबादी का 15% हिस्सा हैं। यह समुदाय भी भेदभाव और उत्पीड़न के कारण एक स्वतंत्र देश की माँग कर रहा है।

पश्तूनों की बड़ी आबादी पाकिस्तान के पश्चिमी इलाके में रहती है। यह इलाका पश्तूनिस्तान अख्लाता है। इसका कुछ हिस्सा पाकिस्तान और कुछ हिस्सा अफगानिस्तान में आता है। पाकिस्तान और अफगान पश्तूनों ने 1893 में बनाई गई डूरंड लाइन के सीमांकन को खारिज किया है। यह सीमा अब अफगानिस्तान और पाकिस्तान को विभाजित करती है।

पश्तूनों का कहना है दोनों तरफ उनके लोग रहते हैं, ऐसे में वह इस सीमा को नहीं मान सकते। हाल के दिनों में पश्तून समुदाय के स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व पश्तून तहफुज मूवमेंट (PTM) ने किया है। इसके मुखिया मंजूर पश्तीन हैं। मंजूर पश्तीन की आवाज भी लगातार पाकिस्तान दबाता रहा है।

लोगों की माँगों को उठाने के लिए बनाया गया PTM एक सामाजिक आंदोलन है। यह पाकिस्तान सरकार और पाकिस्तानी फ़ौज की मनमानी और हर तरह के अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाता है। इसके भी कई कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान की फ़ौज ने यातनाएँ दी हैं।

गिलगित और बाल्टिस्तान में भी उठी आवाज

पाकिस्तानी फौज को गिलगित-बाल्टिस्तान में रहने वाले लोगों से भी प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है। गिलगित-बाल्टिस्तान उस पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है, जिसे पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा रखा है।

प्राकृतिक और भौगोलिक रुप से सुंदर इस क्षेत्र को पाकिस्तानी सरकार द्वारा नजरअंदाज किया गया है। गिलगित-बाल्टिस्तान रणनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण क्षेत्र है, क्योंकि यह उत्तर में अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर, उत्तर-पश्चिम में चीन के शिनजियांग प्रांत, पूर्व में लद्दाख और दक्षिण में कश्मीर से घिरा हुआ है।

पाकिस्तानी सरकार की लापरवाही के कारण इस क्षेत्र में रहने वाले लोग मुश्किलों से भरी जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। इस क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ विकास का भी अभाव है। यहाँ के स्थानीय लोगों ने पाकिस्तानी फ़ौज पर उनकी जमीनों पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है।

धार्मिक आधार पर भारत को विभाजित करके बनाए गए इस्लामी देश पाकिस्तान में कई अलगाव की आवाजें उठती आई हैं। इसका कारण पाकिस्तान की अपनी कोई पहचान नहीं होना है। पाकिस्तान के चार प्रदेशों में रहने वाले लोगों को लगातार प्रताड़ित किया जाता है।

इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि पाकिस्तान को उसकी जनता द्वारा चुनी गई सरकार नहीं बल्कि फ़ौज चलाती है। यह फ़ौज इस्लाम के आधार पर चलती है। पाकिस्तानी फ़ौज के हाथों मारे जाने के डर के चलते सिंधी हो या बलूच, सभी आजादी चाहते हैं।

आजादी की यह चिंगारी उत्तर में गिलगित बाल्टिस्तान से लेकर अफगान सीमा पर FATA और सिंध तथा बलूचिस्तान तक लग चुकी है। यह कोई पहली बार नहीं है कि पाकिस्तान की फ़ौज किसी जातीय समूह पर अपनी इस्लामी थोप रही हो।

इससे पहले पूर्वी पाकिस्तान में रहने वाले बंगाली लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा इसी तरह की दमनकारी नीतियाँ लागू की गई थी। इसकी वजह से 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम हुआ और बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र देश का गठन हुआ। इस बार लगी चिंगारी का अंत भी पाकिस्तान के नए विभाजनों के रूप में नजर आ रहा है।



बंगाल में कुल्हाड़ी से काट डाले गए हिंदुओं पर ‘चाय की चुस्की’, पाकिस्तानी गोलाबारी के पीड़ितों का दर्द बाँटने कश्मीर पहुँच गए TMC सांसद: ये पाखंड नहीं तो और क्या?

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) का पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू-कश्मीर गया। दावा है कि वो पाकिस्तानी गोलीबारी से पीड़ित लोगों का दर्द बाँट रहे हैं। यह राजनीतिक पाखंड से अधिक कुछ नहीं है, क्योंकि जिस राज्य के लोगों ने टीएमसी को चुना है, वहाँ संदेशखाली से लेकर मुर्शिदाबाद तक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को लेकर न सिर्फ टीएमसी चुप रही, बल्कि उसके नेताओं का हिंसा की इन घटनाओं में हाथ भी सामने आया।

बंगाल के हिंदुओं का दर्द बाँटने को लेकर टीएमसी की ‘गंभीरता’ इस बात से भी समझी जा सकती है, जब मुर्शिदाबाद में हिंदुओं में कत्लेआम हो रहा था, तब उसके सांसद चाय की चुस्की लेते हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे।

कश्मीर में टीएमसी की दिखावटी सहानुभूति

टीएमसी का पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल 21 मई से 23 मई 2025 तक जम्मू-कश्मीर के दौरे पर रहा। इस प्रतिनिधिमंडल में डेरेक ओ’ब्रायन, सागरिका घोष, नदीमुल हक, ममता ठाकुर और पश्चिम बंगाल के मंत्री मनस रंजन भुनिया शामिल थे। कथित तौर पर ये लोग ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की तरफ से हुई गोलीबारी से प्रभावित लोगों का दर्द बाँटने गए। डेरेक ओ’ब्रायन ने पुंछ में कहा, “हम यहाँ इन परिवारों को यह बताने आए हैं कि हम उनके साथ हैं।”

सागरिका घोष ने भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती गाँवों ने सबसे ज्यादा दुख झेला है और वे यह बताने आए हैं कि वे अकेले नहीं हैं। यह सुनने में तो बहुत अच्छा लगता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या टीएमसी वाकई में इतनी संवेदनशील है, जितना वह दिखाने की कोशिश कर रही है?

मुर्शिदाबाद और संदेशखाली को लेकर चुप्पी

अब जरा पश्चिम बंगाल की तरफ नजर डालें। मुर्शिदाबाद में हाल ही में वक्फ (संशोधन) बिल के विरोध की आड़ में जो हिंसा हुई, उसने हिंदुओं को निशाना बनाया। कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा गठित एक जाँच समिति की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया है कि यह हिंसा टीएमसी नेताओं की शह पर हुई। धुलियन शहर में टीएमसी के स्थानीय पार्षद मेहबूब आलम ने हमलों का नेतृत्व किया।

मेहबूब आलम हमलावरों के साथ समसेरगंज, हिजलतला, शिउलीतला और डिगरी से आए नकाबपोश मुस्लिमों के साथ मौके पर मौजूद था। हमलावरों ने हिंदुओं के घरों, दुकानों और मंदिरों को निशाना बनाया। इसके बाद स्थानीय विधायक अमीरुल इस्लाम भी वहाँ पहुँचा। उसने उन घरों की पहचान की जो अभी तक नहीं जले थे, और हमलावरों ने उन घरों में भी आग लगा दी। अमीरुल इस्लाम ने हिंसा को रोकने की कोई कोशिश नहीं की, बल्कि चुपचाप वहाँ से खिसक गया। यही नहीं, उसने मीडिया में बयान में कहा कि हिंसा में बाहरी लोग शामिल थे, जबकि वो खुद हिंसा में शामिल था।

जाँच समिति ने यह भी बताया कि स्थानीय पुलिस पूरी तरह निष्क्रिय रही। जब पीड़ितों ने मदद के लिए पुलिस को फोन किया, तो कोई जवाब नहीं मिला। यह सब स्थानीय पुलिस स्टेशन से महज 300 मीटर की दूरी पर हुआ। पुलिस पूरी तरह से ‘निष्क्रिय और अनुपस्थित’ रही। इस मामले में बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा भी कि, “हिंदुओं के खिलाफ हिंसा सुनियोजित तरीके से की गई। ममता बनर्जी इन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई कब करेंगी? क्या वे मृतकों के बारे में अपनी पार्टी के नेताओं की अपमानजनक टिप्पणियों के लिए माफी माँगेंगी?”

मुर्शिदाबाद में हिंदुओं के घर जलाए गए, उनकी पानी की पाइपलाइन काट दी गई ताकि आग बुझाई न जा सके, महिलाओं के कपड़े जला दिए गए ताकि वे अपने तन को न ढक सकें। कई लोगों को कुल्हाड़ी से काट डाला गया। कलकत्ता हाई कोर्ट की कमेटी की रिपोर्ट साफ लिखा है कि मुर्शिदाबाद हिंसा में हिंदुओं को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा। ऐसे में सवाल तो पूछा ही जाएगा कि क्या टीएमसी का कोई प्रतिनिधिमंडल वहाँ गया? क्या ममता बनर्जी ने इस हिंसा की निंदा की? नहीं, बल्कि उनकी पार्टी के ही सांसद ने यह कहकर मामले को हल्का करने की कोशिश की कि इसमें बाहरी लोग शामिल थे।

संदेशखाली का मामला भी इससे अलग नहीं है। वहाँ टीएमसी के स्थानीय नेता शेख शाहजहाँ और उसके गुर्गों ने स्थानीय हिंदुओं, खासकर महिलाओं के साथ जो अत्याचार किए, वो किसी से छिपे नहीं हैं। जमीन हड़पने से लेकर यौन शोषण तक के आरोप लगे, लेकिन ममता बनर्जी ने शुरू में इसे ‘बीजेपी की साजिश’ करार दे दिया। बाद में जब जाँच हुई तो शाहजहाँ को गिरफ्तार करना पड़ा, लेकिन टीएमसी ने इस मामले में भी कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। फिर आरजे कर अस्पताल में महिला डॉक्टर की रेप-हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तक हैरानी जताई, लेकिन ममला सरकार को इससे भी फर्क नहीं पड़ा।

ऑपरेशन सिंदूर पर टीएमसी का दोहरा रवैया

ऑपरेशन सिंदूर भारत की तरफ से 7 मई 2025 को शुरू किया गया एक सैन्य अभियान है, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब था। इस हमले में सैलानी बन कर पहुँचे हिंदुओं को मारा गया। भारत ने इसके जवाब में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की और सीमा पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसमें पुंछ, राजौरी और बारामूला जैसे इलाकों में 15 से ज्यादा नागरिक मारे गए और दर्जनों घायल हुए।

इसके बाद भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर दुनिया भर में अपनी बात रखने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया। इसमें टीएमसी के सांसद यूसुफ पठान का नाम भी शामिल था। लेकिन टीएमसी ने इसे लेकर हंगामा खड़ा कर दिया। ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार यह तय नहीं कर सकती कि टीएमसी की तरफ से कौन प्रतिनिधि जाएगा। यूसुफ पठान ने प्रतिनिधिमंडल में जाने से इनकार कर दिया। बाद में जब विवाद बढ़ा तो अभिषेक बनर्जी को भेजा गया, जिसपर बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने सवाल भी उठाए। इन सबके बीच अब उसी ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रभावित इलाकों में जाकर टीएमसी सहानुभूति दिखाने की कोशिश कर रही है। यह साफ तौर पर दोहरा चरित्र है।

ममता बनर्जी की तुष्टिकरण की राजनीति

ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की राजनीति हमेशा से तुष्टिकरण पर आधारित रही है। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के कई मामले सामने आए हैं, लेकिन ममता बनर्जी ने कभी भी इसकी खुलकर निंदा नहीं की। मुर्शिदाबाद में हिंदुओं पर हमले के बाद ममता बनर्जी से कार्रवाई की माँग की गई, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उलटे टीएमसी के कुछ नेताओं ने इसे बाहरी लोगों की साजिश बताकर पल्ला झाड़ लिया।

संदेशखाली में भी ममता बनर्जी ने शुरू में पीड़ितों की बजाय अपने नेताओं का बचाव किया। यहाँ शेख शाहजहाँ के गुंडे खुलेआम हथियार लेकर घूम रहे हैं और अब भी हिंदुओं को आतंकित कर रहे हैं। यही नहीं, टीएमसी ने जिस महिला को लोकसभा चुनाव का टिकट दिया, उसने तो यहाँ तक कह दिया कि संदेशखाली की महिलाएँ पीड़ित ही हैं, ये हम कैसे मान लें।

पश्चिम बंगाल में इतना सब कुछ होने के बाद भी टीएमसी ने ‘प्रतिनिधिमंडल’ भेजना जैसा कदम नहीं उठाया, बल्कि महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग, एससी आयोग तक को पीड़ितों तक पहुँचने से रोका। दूसरी तरफ ‘युद्ध’ के समय पाकिस्तानी गोलाबारी में घायल हुए लोगों से ‘मुलाकात’ के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल भेज दिया।

ऐसे में बीजेपी नेता सुवेंदु अधकारी ने इस दौरे को ‘निजी यात्रा’ करार दिया और कहा, “पश्चिम बंगाल में गर्मी ज्यादा है, इसलिए ये लोग कश्मीर चले गए, जहाँ मौसम सुहाना है। ये लोग पश्चिम बंगाल और हिंदू विरोधी हैं। इन्हें अपने राज्य में कोई दिलचस्पी नहीं है।” सुवेंदु का यह बयान भले ही तीखा लगे, लेकिन इसमें सच्चाई है। टीएमसी ने अपने राज्य के मुर्शिदाबाद और संदेशखाली जैसे इलाकों में पीड़ितों की सुध लेने की बजाय कश्मीर में जाकर सहानुभूति दिखाने का नाटक किया।

आखिर ये नौटंकी क्यों कर रही है टीएमसी?

टीएमसी का यह कश्मीर दौरा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि चमकाने की कोशिश है। ममता बनर्जी हमेशा से खुद को एक राष्ट्रीय नेता के तौर पर पेश करने की कोशिश करती रही हैं। लेकिन उनकी यह कोशिश तब हास्यास्पद लगती है, जब उनके अपने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। मुर्शिदाबाद में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और संदेशखाली में महिलाओं के साथ अत्याचार के बाद भी टीएमसी ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। लेकिन कश्मीर में जाकर वे सहानुभूति का ढोंग कर रहे हैं।

सागरिका घोष ने कहा कि वे अपने अनुभव को पार्टी नेतृत्व के सामने रखेंगी ताकि सीमा क्षेत्रों की समस्याएँ राष्ट्रीय स्तर पर उजागर हो सकें। लेकिन सवाल यह है कि क्या वे मुर्शिदाबाद और संदेशखाली की समस्याओं को भी राष्ट्रीय स्तर पर उठाएँगी? क्या वे अपनी ही पार्टी के उन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगी, जिनके खिलाफ हिंसा में शामिल होने के सबूत हैं? जवाब है- नहीं। क्योंकि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की राजनीति वोटबैंक पर टिकी है, और वे अपने इस वोटबैंक को नाराज नहीं करना चाहतीं।

बतौर पत्रकार के तौर पर मैं यह कह सकता हूँ कि टीएमसी की यह कश्मीर यात्रा महज एक दिखावा है। अगर वाकई में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को पीड़ितों की फिक्र होती, तो वे सबसे पहले अपने राज्य के मुर्शिदाबाद और संदेशखाली में पीड़ितों से मिलने जाते। लेकिन वहाँ जाने की बजाय वे कश्मीर में जाकर सहानुभूति दिखाने का नाटक कर रहे हैं। यह साफ तौर पर उनकी तुष्टिकरण की राजनीति और दोहरे चरित्र को दिखाता है।

बहरहाल, अब ममता बनर्जी को चाहिए कि वे पहले अपने राज्य में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करें। मुर्शिदाबाद में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। संदेशखाली में पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाएँ। अगर वे ऐसा नहीं करतीं, तो कश्मीर में उनकी यह सहानुभूति यात्रा सिर्फ एक नौटंकी ही कहलाएगी। पश्चिम बंगाल की जनता यह सब देख रही है और आने वाले दिनों में वह इसका जवाब जरूर देगी।

सरकारी जमीन पर दुकानें, ₹50 लाख का ट्रांजेक्शन: भोपाल ‘मुस्लिम गैंग’ का सरगना फरहान अवैध कब्जे से करता था ‘कमाई’, फिर उसी पैसों से हिंदू लड़कियों का करता था शिकार

मध्य प्रदेश के भोपाल में कॉलेज छात्राओं के साथ ब्लैकमेल और रेप करने वाले ‘मुस्लिम गैंग’ के मास्टरमाइंड फरहान के बारे में नित नए खुलासे हो रहे हैं। जाँच में पुलिस को पता चला है कि फरहान सरकारी जमीन और नाले पर दुकानें बनाकर उससे हजारों रुपए कमा रहा था। इसके अलावा 2 बैंक अकाउंट्स से लगभग 50 लाख रुपए के लेनदेन की बात भी सामने आई है।

क्या था मामला

11 अप्रैल 2025 को भोपाल के बागसेवनिया थाना में कॉलेज जाने वाली कुछ छात्राओं ने शिकायत की कि उन्हें मुस्लिम लड़कों ने ब्लैकमेल किया, उनका वीडियो बनाया और धमकी देकर रेप किया गया।

FIR के बाद पुलिस ने ‘मुस्लिम गैंग’ के आरोपितों की गिरफ्तारी शुरू की गई। लव जिहाद के इस खेल में पुलिस ने फरहान, साद, साहिल, अली और नबी को गिरफ्तार किया। एक आरोपित अबरार अभी तक फरार है। जाँच में यह भी पता चला कि यह गैंग संगठित तरीके से हिंदू लड़कियों को टारगेट करती थी और धर्मांतरण के लिए भी मजबूर करती थी।

दुकानों से होती थी फरहान की ऐश

इस पूरे मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी अपनी जाँच रिपोर्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगुभाई पटेल को सौंपी थी। इसमें उन्होंने ‘मुस्लिम गैंग’ के लिए हो रही फंडिंग और उनके लाइफस्टाइल के बारे में और गहन पड़ताल करने के सुझाव दिए थे।

पूरे मामले की जाँच के लिए SIT कमेटी गठित की गई। जाँच में सामने आया कि फरहान ने ऐशबाग इलाके में नाले के पास वॉशिंग सेंटर और नाश्ते की दुकान बना रखी थी। जाँच के दौरान प्रशासन ने अतिक्रमण हटाकर इन दुकानों को तोड़ दिया है।

फरहान के 2 बैंक अकाउंट हैं। यूनियन बैंक और एचडीएफसी बैंक में खुले खातों में कुल 50 लाख रुपए से भी अधिक का लेन देन हुआ है। पुलिस बैंक अकाउंट में हुए ट्रांजैक्शन की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मामले की जाँच कर रही डीसीपी जोन-1 प्रियंका शुक्ला ने बताया कि फरहान के पिछले 9 साल के बैंक रिकॉर्ड जा रहे हैं। इसमें लगभग 50 लाख से भी अधिक के लेनदेन की पुष्टि हुई है। पुलिस को जाँच में ये भी सामने आया है कि सेकंड हैंड गाड़ियों की खरीद फरोख्त से फरहान को हर महीने 80,000 से ₹1 लाख तक की कमाई हो रही थी।

ट्रेडिंग के लिए लड़कियों के खाते का इस्तेमाल

मीडिया रिपोर्ट्स में ये बात भी सामने आई है कि फरहान शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने के लिए कई पीड़ित लड़कियों के बैंक खातों का उपयोग करता था। इसके लिए उसके फेर में आई किसी छात्रा का बैंक खाता उपयोग करता था। पुलिस इस एंगल पर भी जाँच कर रही है कि फरहान मनी म्यूल एकाउंट की तरह इन खातों का इस्तेमाल कर रहा था।

फरहान लड़कियों को लुभाने के लिए हाई-फाई लाइफस्टाइल अपनाता था। अवैध दुकानों की कमाई से कई महँगे गैजेट्स और स्पोर्ट बाइक खरीदता था।

मुस्लिम गैंग के सरगना फरहान ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसे हिन्दू लड़कियों का रेप करने, उन्हें फँसाने और वीडियो के बहाने धमकाने का कोई भी पछतावा नहीं है। उसने पुलिस को बताया है कि यह इस्लाम के हिसाब से सवाब का काम है।

बहस वक्फ पर, दलीलों में खूब हुआ हिंदू-मुस्लिम: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, CJI ने की ‘मोक्ष’ की बात; कपिल सिब्बल ने बताया ‘अल्लाह को समर्पण’

वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना अंतरिम आदेश सुरक्षित रखा है। इसमें ‘अदालतों द्वारा वक्फ, वक्फ बाई यूजर या वक्फ बाई डीड’ घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने की शक्ति भी शामिल है।

तीन दिनों तक इस मुद्दे पर सुनवाई हुई और कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता और सरकार का पक्ष जाना। इस दौरान सीजेआई गवई ने कहा कि रजिस्ट्रेशन की जरूरत 1923 और 1954 के कानूनों में भी रही है।

21 मई को सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजातियों की सुरक्षा के लिए प्रावधान बना है, जो अनुसूचित क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली भूमि पर वक्फ के निर्माण पर रोक लगाती है।

सीजेआई गवई ने जब सॉलिसिटर से इस दलील के बारे में पूछा तो तुषार मेहता ने कहा कि वक्फ का निर्माण अपरिवर्तनीय है। इससे आदिवासी समुदाय के लोगों के अधिकारों पर खराब असर पड़ सकता है। मेहता के मुताबिक “जेपीसी का कहना है कि आदिवासी इस्लाम का पालन कर सकते हैं, लेकिन उनकी अपनी अलग सांस्कृतिक पहचान है।”

हालाँकि जस्टिस मसीह ने इससे असहमति जाहिर की। उन्होंने कहा “यह सही नहीं लगता। इस्लाम इस्लाम है! धर्म एक ही है।”

इसपर तुषार मेहता ने कहा कि कि अगर ऐसा है तो अधिनियम पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं दिख रहा है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा, “वक्फ केवल दान है, और इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।” इसका कपिल सिब्बल ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि वक्फ ईश्वर का समर्पण है परलोक के लिए। ये केवल समुदाय के लिए दान नहीं बल्कि ईश्वर के लिए समर्पण है। इसका मकसद अपनी खुशी है। इस पर सीजेआई गवई ने कहा कि हिन्दुओं में मोक्ष की अवधारणा है वहीं जस्टिस मसीह ने कहा कि ईसाई धर्म में भी स्वर्ग की आकांक्षा है।

इससे पहले दलील देते हुए राजीव धवन ने कहा कि वेदों के मुताबिक हिन्दू धर्म में मंदिर अनिवार्य अंग नहीं है बल्कि प्रकृति की पूजा करने का प्रावधान है जैसे पृथ्वी, जल, वायु, समुद्र, आकाश, सूर्य आदि।

गैर मुस्लिमों द्वारा वक्फ बनाने पर रोक को लेकर भी एसजी मेहता ने दलीलें दी। उन्होंने कहा कि केवल 2013 के संशोधन में गैर मुस्लिमों को ऐसे अधिकार दिए गये थे। 1923 के कानून में इसकी मंजूरी नहीं है क्योंकि इसका इस्तेमाल धोखा देने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ” किसी भी मामले में गैर-मुस्लिम वक्फ को दान कर सकते हैं। अगर मैं हिंदू हूँ तो मैं वक्फ को दान कर सकता हूँ। अगर मैं हिंदू हूँ और वास्तव में वक्फ बनाना चाहता हूं तो मैं ट्रस्ट बना सकता हूँ।”

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पहले जब वक्फ अधिनियम 1995 को चुनौती देनेवाली याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाती थी तो उन्हें हाईकोर्ट भेजा जाता था। 2025 के संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं को लेकर भी ऐसा ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रावधान ‘अत्यधिक असंवैधानिक’ नहीं है, जिसे अंतिम चरण में रोक लगाई जा सके।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं के वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन और अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलीलें रखीं। कपिल सिब्बल ने कहा कि अधिनियम की धारा 3सी का प्रावधान सरकार को केवल राजस्व प्रविष्टियों को बदलने का अधिकार देता है और इससे वक्फ संपत्ति का मालिकाना हक या कब्जा पर असर नहीं पड़ेगा।

सिब्बल ने कहा कि प्रावधानों की भाषा साफ है कि संपत्ति को तब तक वक्फ नहीं माना जा सकता जब तक कि सरकारी अधिकारी इस बात की पुष्टि नहीं करता कि सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण हुआ है या नहीं। उन्होंने कहा कि जब कानून की भाषा ऐसी है तो न तो सरकार के हलफनामे से और न ही सॉलिसिटर के समझाने से इसका अर्थ बदलेगा। उन्होने कहा कि प्रावधान का असर ये है कि विवाद की स्थिति में वक्फ बाय यूजर संपत्तियों की मान्यता रद्द की जा सकती है।

अपना तर्क देते हुए सीनियर एडवोकेट राजीव धवन के कहा कि वक्फ जरूरी धार्मिक प्रथा नहीं है। ये जेपीसी की रिपोर्ट के विपरीत है। उन्होने कहा कि दान इस्लामी आस्था का अहम हिस्सा है।

वहीं सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि संशोधित धारा 36 (1) के मुताबिक अधिनियम वक्फ बाय यूजर को अब समाप्त कर दिया गया है ऐसे में इसको रजिस्टर्ड कैसे किया जा सकता है? सिंघवी ने कहा कि ऐसा कोई अधिनियम नहीं है जिसमें ये शर्त रखा गया हो कि मुस्लिम को 5 साल तक धर्म का पालन करना ही चाहिए

नॉर्थ-ईस्ट में ₹1 लाख करोड़ का निवेश करेगा Adani समूह, चेयरमैन गौतम अडानी ने इन्वेस्टर समिट में किया ऐलान: कहा – PM मोदी के विजन ने बदला पूर्वोत्तर भारत

देश का बड़ा कारोबारी समूह अडानी ग्रुप पूर्वोत्तर राज्यों में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है। अडानी समूह ने ऐलान किया है कि वह पूर्वोत्तर राज्यों में ₹1 लाख करोड़ का निवेश करेगा। अडानी समूह यह निवेश अगले 10 वर्षों में करने वाला है। पूर्वोत्तर के 7 राज्यों में यह निवेश स्मार्ट एनर्जी, हाईवे, डिजिटल कनेक्टिविटी और स्किल डेवलपमेंट जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।

इस निवेश योजना का ऐलान ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट’ में अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने किया है। यह समिट पूर्वोत्तर राज्यों में निवेश लाने के लिए की जा रही है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार (23 मई, 2025) को किया है। इस समिट का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हो रहा है।

गौतम अडानी ने इस निवेश का ऐलान करते हुए कहा, “पिछले दशक में पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों और घाटियों में भारत के विकास का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है — विविधता, जिजीविषा और असीम संभावनाओं से भरी यह धरती अब आर्थिक और रणनीतिक उन्नति का केंद्र बन चुका है।”

गौतम अडानी ने पीएम मोदी के पूर्वोत्तर भारत के विकास को लेकर विजन कि सराहना भी की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का ‘एक्ट ईस्ट, एक्ट फास्ट, एक्ट फर्स्ट’ का मंत्र इस क्षेत्र के लिए नींव का पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी की पूर्वोत्तर भारत में हुई 65 व्यक्तिगत यात्राएँ सफलता का अलग स्तर लाई हैं।

पीएम मोदी के कार्यकाल में पूर्वोत्तर राज्यों में ₹6.2 लाख करोड़ का निवेश हुआ है और 16,000 किलोमीटर तक फैला हुआ सड़क नेटवर्क बनाया गया है। इसके अलावा 18 हवाई अड्डों का निर्माण भी हुआ है। इसे गौतम अडानी ने प्रतिबद्धता का द्योतक बताया है।

गौरतलब है कि इससे पहले मार्च 2025 में अडानी समूह ने असम में ₹50,000 करोड़ के निवेश की घोषणा की थी। अब, इस समिट में अडानी ने उस राशि को दोगुना करते हुए कुल निवेश को ₹1 लाख करोड़ तक पहुँचा दिया है।

अडानी समूह का यह निवेश ग्रीन एनर्जी, हाइड्रो और पंप्ड स्टोरेज, पावर ट्रांसमिशन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट मीटर, सड़क और राजमार्ग, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों पर केंद्रित होगा।

अडानी समूह ने यह स्पष्ट किया है कि इस निवेश का फोकस स्थानीय लोग होंगे। समूह ने बताया है कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार, स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा और समुदाय की सहभागिता को प्राथमिकता दी जाएगी।

मोहसिन ने रेप कर खिलाया नॉनवेज, कलावा भी कटवाया: इंदौर में शूटिंग कोच पर 2 और FIR, पीड़िता से कहता था- बुलाने पर नहीं आई तो वायरल कर दूँगा फोटो

इंदौर की ड्रीम ओलंपिक शूटिंग एकेडमी के कोच मोहसिन खान की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र में 2 और महिलाओं ने मोहसिन खान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है, जिनमें से एक पेशे से वकील हैं और दूसरी जनजातीय समाज की महिला है। पुलिस ने दोनों शिकायतों पर तुरंत केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

वकील ने लगाए रेप और ब्लैकमेलिंग के आरोप

पहली पीड़िता एक वकील है, जो LLM की पढ़ाई कर रही है। उसने बताया कि फरवरी 2021 में वह शूटिंग सीखने के लिए मोहसिन खान की एकेडमी गई थी। पीड़िता का आरोप है कि जुलाई 2022 में कोच ने उसे अपने फ्लैट पर बुलाया और जबरदस्ती बलात्कार किया।

पीड़िता ने विरोध किया तो कोच ने धमकी दी कि अगर उसने किसी को बताया तो उसकी बदनामी होगी और कोई उससे शादी नहीं करेगा। पीड़िता के मुताबिक, फरवरी 2022 से दिसंबर 2023 के बीच मोहसिन ने कई बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, शादी के बाद भी मोहसिन उसे ब्लैकमेल करता रहा।

अप्रैल 2025 में जब पीड़िता पति के साथ इंदौर लौटी, तो मोहसिन ने उसे फिर से धमकी देकर रेप किया और कहा कि अगर उसकी बात नहीं मानी तो वह उसके फोटो और वीडियो वायरल कर देगा। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान मोहसिन ने उसे जबरन नॉनवेज खिलाया और उसका कलावा उतरवा लिया।

आदिवासी महिला ने लगाए छेड़छाड़ और जातिसूचक गालियों के आरोप

दूसरी पीड़िता एक जनजातीय समाज की महिला है, जो शूटिंग एकेडमी में काम करने आई थी। पीड़िता का आरोप है कि मोहसिन उसे बार-बार अपने फ्लैट में बुलाता था और 16 मई 2025 को उसके साथ अश्लील बातें करते हुए उसके पैर छूने जैसी हरकतें कीं। जब महिला ने विरोध किया, तो मोहसिन ने उसे नीचे ही बैठने का दबाव डाला।

महिला ने यह भी बताया कि कोच दूसरी लड़कियों से भी गलत बातें करता था और जाति विशेष को लेकर आपत्तिजनक शब्द कहता था। उसने जुलाई 2024 में नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन जब उसने अपनी सैलरी माँगी तो मोहसिन ने उसे जातिसूचक गालियाँ देकर धमकाया।

150 से ज़्यादा हिंदू लड़कियों के फोटो-वीडियो मिले- बजरंग दल

बजरंग दल के जिला मंत्री ने बताया कि उन्हें कुछ समय पहले गुप्त सूचना मिली थी कि ड्रीम ओलंपिक शूटिंग एकेडमी में कुछ गलत हो रहा है। बजरंग दल ने कई दिनों तक एकेडमी पर नजर रखी और जाँच के दौरान उन्हें कई वीडियो और बयान मिले। इन सबूतों से यह साबित होता है कि कोच मोहसिन खान मासूम लड़कियों को अपने जाल में फँसाकर उनका शोषण करता था।

बजरंग दल ने यह भी बताया कि मोहसिन खान एकेडमी के नीचे के फ्लोर पर शूटिंग सीखने वाली लड़कियों को बुलाकर उनके साथ आपत्तिजनक हरकतें करता था और उनके वीडियो भी बनाता था। मोहसिन के फोन में 150 से भी ज़्यादा हिंदू युवतियों के फोटो और वीडियो मिले हैं, जो इस मामले को और गंभीर बनाते हैं।

पुलिस ने महिला वकील की शिकायत पर बलात्कार, धमकी और ब्लैकमेलिंग की धाराओं में केस दर्ज किया है, वहीं आदिवासी महिला की शिकायत पर छेड़छाड़ और जातिगत टिप्पणी की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब आरोपित से और पूछताछ करने के लिए दोबारा रिमांड लेने की तैयारी में है।

27 नक्सली ढेर, एक ₹1.5 करोड़ का इनामी बसावराजू भी… अबूझमाड़ वामपंथी आतंक से हुआ मुक्त तो एक साथ मनी होली-दीवाली: देखिए जश्न मनाते जवानों के Videos

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में हुए एक एनकाउंटर में हाल ही में नक्सलियों का शीर्ष नेता बसावराजू मार गिराया गया। उसके साथ 26 और नक्सली सुरक्षाबलों ने मार गिराए। यह मुठभेड़ अबूझमाड़ के जंगलों में हुई। पिछले कुछ दशकों के सबसे महत्वपूर्ण इस ऑपरेशन को डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के जवानों ने अंजाम दिया।

DRG के भी 2 जवान इस मुठभेड़ में बलिदान हो गए। इस सफल ऑपरेशन के बाद वापस लौटे जवानों का स्वागत आरती और तिलक लगा कर हुआ है। जवानों ने इस सफल ऑपरेशन के बाद नाच-गा कर जश्न भी मनाया। उन्होंने होली भी खेली। इनके वीडियो भी सामने आए हैं।

ऐसे ही एक वीडियो में DRG जवानों के एक समूह का स्वागत महिलाएँ आरती करके कर रही हें। महिलाएँ ऑपरेशन से लौटे जवानों को टीका भी लगाती हैं। उन्हें मालाएँ भी पहनाई जाती हैं। जवान इस वीडियो में नाचते गाते दिखते हैं।

एक और ऐसे ही वीडियो में जवान होली खेलते हुए दिखते हैं। DRG जवान इस वीडियो में एक साथ मिलकर बज रहे गानों पर नाचते हैं। DRG जवानों के साथ इस दौरान और भी परिजन नाचते दिखते हैं। नक्सलियों के सफाए पर प्रसन्न जवान बारिश में भी अपना डांस नहीं रोकते।

ऐसी ही एक और वीडियो अहि जिसमे DRG जवानों का बड़ा समूह नाचता है और बाकी लोग यहाँ उनका वीडियो बनाते हैं। इस दौरान स्थानीय संगीत भी बजता है। DRG जवानों ने ही नक्सलियों के खिलाफ इस सफल ऑपरेशन को अंजाम दिया है।

DRG जवान इस ऑपरेशन में आगे थे जबकि उनके सपोर्ट के लिए CRPF और बाकी सुरक्षाबल मौजूद थे। DRG इससे पहले भी कई सफल ऑपरेशन कर चुकी है। DRG छत्तीसगढ़ की एक विशेष पुलिस यूनिट है। इस नक्सलियों से लड़ने के लिए ही बनाया गया था।

DRG में स्थानीय युवाओं को ही भर्ती किया जाता है। DRG में इसके साथ ही वह नक्सली भी भर्ती किए जाते हैं जो आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह भी बताया जाता है कि DRG में सलवा जुडूम संगठन के उन युवाओं को भी भर्ती किया गया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बैन लगा दिया गया था।

सलवा जुडूम को छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का सामना करने के लिए बनाया गया था। इसमें स्थानीय लोगों को भर्ती किया गया था। गाँव के लोगों को इस दौरान हथियार दिए गए थे। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी। DRG जवान स्थानीय होने के चलते नक्सलियों के तौर तरीके से वाकिफ हैं और वह इनको लगातार खत्म कर रहे हैं।

फरमान जुबैर-जुनैद… उज्जैन में 11 लोगों का ‘मुस्लिम गैंग’, बुलडोजर एक्शन को लेकर 6 घंटे बंद रहा नेशनल हाइवे: डेढ़ साल टारगेट पर थीं हिंदू लड़कियाँ, फोन में मिले थे अश्लील वीडियो

मध्य प्रदेश में भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ के लव जिहाद के बाद अब उज्जैन में भी 11 मुस्लिम लड़कों ने हिंदू लड़कियों के साथ लव जिहाद किया। हिंदू संगठनों और ग्रामीणों ने आरोपितों के घर न तोड़े जाने पर आक्रोश जताया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को 20 मई तक सभी आरोपितों के घर तोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। इसके बाद प्रदर्शन को आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि वह कई दिन से इस मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन पुलिस ध्यान नहीं दे रही है। इसे लेकर गुरुवार (22 मई 2025) को उन्होंने उज्जैन- झालावाड़ नेशनल हाईवे पर उतरकर चक्काजाम कर दिया। 6 घंटे तक वहाँ का यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

सड़क पर धूप तेज होने लगी तो ग्रामीणों ने बीच सड़क पर ही टेंट लगा लिया। चक्काजाम के कारण छोटी गाड़ियों के साथ ट्रकों की भी कतार सड़क पर खड़ी रही। इस दौरान पुलिस के साथ एसडीएम राजाराम करजरे और कई अन्य अधिकारियों ने भी ग्रामीणों के मान मनौव्वल की कोशिश की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एसडीएम ने ग्रामीणों को बताया कि अवैध निर्माण को तोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन की आवश्यकता होती है। उसी के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला

उज्जैन से लगभग 30 किलोमीटर दूर बिछड़ोद गाँव में 6 मई 2025 को एक हिंदू लड़की और एक मुस्लिम लड़के का वीडियो साथ में वायरल हुआ था। गाँव के लोगों ने मुस्लिम लड़के का मोबाइल चेक किया तो उसमें कई अश्लील वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग मिले। ग्रामीणों ने लड़के को घटिया थाने की पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने ने पूरे मामले में अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।

रिपोर्ट के अनुसार पुलिस जाँच में पता चला है कि आरोपितों का सरगना फरमान है। गैंग ने लड़कियों को अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देकर कई बार दुष्कर्म किया था। यह मुस्लिम गैंग पिछले डेढ़ वर्षों से लड़कियों को अपने निशाने पर रखे था।

मामले में अब तक चार लड़कियों के पीड़ित होने का पता चला है। एक 14 वर्ष की नाबालिग लड़की भी पीड़ित है जिसके साथ दुष्कर्म किया गया है।

11 लोगों की ‘मुस्लिम गैंग’

इस मामले में ग्रामीणों और हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए लोगों ने आरोपितों के घरों को आग के हवाले करने की कोशिश की, जिसे पुलिस और फायर ब्रिगेड ने बुझा दिया। फिलहाल तनाव को देखते हुए अब तक गाँव में भारी पुलिस बल तैनात है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने इस लव जिहाद मामले में फरमान, इकरार, उजैर पठान, राजा रंगरेज, जुबेर मंसूरी, जुनैद मंसूरी, फैज खान, मुश्ताक और अल्ताफ समेत 11 लोगों को नामदज किया है। सभी को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक आरोपित रेहान फरार है। उसकी टीम तलाश में पुलिस की टीम राजस्थान के झालावाड़ और आसपास के शहरों में भी दबिश दे रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, फरमान उज्जैन आरटीओ में एजेंट का काम करता है। महँगी गाड़ियों में घूमता है और वीडियो दिखाकर सोशल मीडिया पर लड़कियों से दोस्ती करता है। यह पूरा मुस्लिम गैंग संगठित तौर पर काम करता है। इन लोगों ने बिछड़ोद के बाहर भी कई अन्य लड़कियों से भी संपर्क किया लेकिन सफल नहीं हो पाए।

मोबाइल में 600 पाकिस्तानी नंबर, ख्वाब भारत में ‘गजवा-ए-हिंद’ लाने का: वाराणसी से पकड़े गए जासूस तुफैल का नफीसा से लिंक, कबाड़ी मोहम्मद हारून भी निकला ‘गद्दार’

हाल ही में ATS ने तीन पाकिस्तानी जासूसों को पकड़ा है। ये गिरफ्तारियाँ यूपी के वाराणसी, मुरादाबाद और दिल्ली के सीलमपुर से हुई हैं, और ये तीनों ही मामलों में देश की सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप है।

वाराणसी से तुफैल गिरफ्तार

वाराणसी से तुफैल नाम के एक जासूस को गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि वह पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था और भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारियाँ पाकिस्तान में अपने संपर्कों को भेज रहा था। तुफैल के तार 600 से अधिक पाकिस्तानी फोन नंबरों से जुड़े पाए गए हैं।

तुफैल फेसबुक के जरिए पाकिस्तान के फैसलाबाद की एक महिला नफीसा से भी संपर्क में था, जिसका मियाँ पाकिस्तानी फौज में सेवारत हैं। आरोपित के पास से उसका मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी बरामद कर लिया गया है।

तुफैल ने कथित तौर पर पाकिस्तानी आतंकी समूह तहरीक-ए-लब्बैक के नेता मौलाना शाह रिज़वी के वीडियो वॉट्सऐप ग्रुप में साझा किए। इन संदेशों में ‘गज़वा-ए-हिंद’ (भारत पर इस्लामी कब्ज़ा), बाबरी मस्जिद विध्वंस का बदला लेने और भारत में शरिया कानून लागू करने जैसी भड़काऊ बातें शामिल थीं।

जाँच में यह भी पता चला है कि जासूस तुफैल राजघाट, नमो घाट, ज्ञानवापी, रेलवे स्टेशन और लाल किले जैसे संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें पाकिस्तान में भेज रहा था। इसके अलावा, उसने वाराणसी में ऐसे वॉट्सऐप ग्रुप के लिंक भी बांटे थे, जिनसे स्थानीय लोग पाकिस्तानी नेटवर्क से जुड़ सकें।

मुरादाबाद से शहज़ाद गिरफ्तार

दूसरा मामला मुरादाबाद का है, जहाँ शहज़ाद नाम के एक जासूस को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) के लिए जासूसी करने और सीमा पार तस्करी में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि शहज़ाद भारत-पाकिस्तान सीमा पर सक्रिय है और पाकिस्तानी एजेंसी के समर्थन से तस्करी और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त है। इस सूचना के आधार पर, रामपुर जिले के टांडा इलाके के रहने वाले शहज़ाद को मुरादाबाद से गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने सहित कई आरोप लगाए गए हैं।

जाँच में ये भी पता चला है कि शहज़ाद कथित तौर पर ISI के निर्देश पर भारत में एजेंटों को पैसे देता था। उस पर आरोप है कि वह रामपुर और उत्तर प्रदेश के अन्य हिस्सों से लोगों की भर्ती करता था। वह उन्हें यह कहकर गुमराह करता था कि वे तस्करी के लिए पाकिस्तान जा रहे हैं, जबकि असल में उन्हें ISI के लिए काम करना था। ISI के लोग उनके वीजा और यात्रा दस्तावेजों का इंतज़ाम करते थे। अधिकारियों का कहना है कि शहज़ाद इन एजेंटों को भारतीय सिम कार्ड भी मुहैया कराता था ताकि वे भारत में जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे सकें।

दिल्ली से मोहम्मद हारुन गिरफ्तार

वहीं दिल्ली का रहने वाला मोहम्मद हारुन कबाड़ी का काम करता है और उस पर पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात कर्मचारी मुजम्मल हुसैन के साथ मिलकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है।

एटीएस के मुताबिक, हारुन और मुजम्मल हुसैन मिलकर पाकिस्तान का वीजा दिलाने के नाम पर अलग-अलग खातों से अवैध वसूली भी करते थे। जाँच में पता चला है कि हारुन की पाकिस्तान में रिश्तेदारी है, जिसके चलते वह अक्सर वहाँ आता-जाता रहता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात मुजम्मल हुसैन से हुई। मुजम्मल के कहने पर हारुन ने उसे कई बैंक खाते भी मुहैया कराए थे, जिनमें वीजा चाहने वाले लोगों से पैसे डलवाए जाते थे।

ये तीनों गिरफ्तारियाँ दिखाती हैं कि पाकिस्तान अपनी खुफिया एजेंसियों के ज़रिए भारत में घुसपैठ और जासूसी की लगातार कोशिश कर रहा है। उत्तर प्रदेश ATS इन मामलों की गहराई से जाँच कर रही है ताकि इन नेटवर्कों का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जा सके और देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।