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TOI ने सोफिया कुरैशी-व्योमिका सिंह पर ’52 बीघा’ में छापी फेक न्यूज, माफीनामा ‘चुन्नू’ सा: भाजपा के चेहरा बनाने का किया था दावा, पार्टी ने पकड़ लिया था झूठ

टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) ने भाजपा से जुड़ी एक झूठी खबर प्रकाशित करने के मामले में माफी माँग ली है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक खबर में दावा किया था कि भाजपा कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अपने चुनावी अभियान का चेहरा बनाने वाली है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने यह माफी सोमवार (2 जून, 2025) को प्रकाशित की। TOI ने स्पष्ट किया कि उसकी रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से गलत थी। TOI की तरफ से इस खबर पर खेद व्यक्त किया गया। अखबार ने भाजपा से जुड़ी झूठी खबर छापने के लिए माफ़ी भी माँगी है।

TOI ने लिखा, “TOI के लखनऊ और चेन्नई के 1 जून के संस्करणों में एक रिपोर्ट छपी थी, जिसका शीर्षक था ‘कर्नल कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका भाजपा के प्रचार अभियान का चेहरा बनने वाले हैं’ , फिर हमें पता चला कि भाजपा की ऐसी कोई योजना नहीं है।”

आगे TOI ने बताया, “हाँलाकि यह रिपोर्ट भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के साथ बातचीत पर आधारित थी, लेकिन हमें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से इसकी जाँच करनी चाहिए थी। हम इस गलती के लिए माफी माँगते हैं।”

गौरतलब है कि TOI ने अपनी रिपोर्ट में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था। इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई थी। दरअसल सिद्दीकी ने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को महिलाओं, विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया था।

वहीं TOI रिपोर्ट में इसे इस तरह दिखाया गया कि जैसे भाजपा ऑपरेशन सिंदूर के विषय में दुनिया को बताने वाली इन दोनों महिला अधिकारियों को चुनाव अभियान का चेहरा बनाने जा रही हो। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 9 जून 2025 को मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने के मौके पर भाजपा यह अभियान चालू करेगी।

खबर में बताया गया था कि भाजपा यह अभियान महिला सशक्तिकरण को लेकर चलाएगी। खबर प्रकाशित होने के बाद भाजपा ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था। भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पर इसे फेक न्यूज बताया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा की ऐसी कोई योजना नहीं है।

इससे पहले भाजपा को दैनिक भास्कर की भी ऐसी ही एक झूठी खबर के लिए सफाई देनी पड़ी थी। इस खबर में दावा किया गया था कि पार्टी घर-घर सिंदूर भेजने का अभियान चलाने वाली है। भाजपा ने इस खबर को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था और स्पष्ट किया था कि ऐसी कोई योजना नहीं है।

ध्यान देने वाली बात है कि जब इन अखबारों ने भाजपा से जुड़ी यह खबरें बिना कोई तथ्य जाँचे छापीं, तो उन्होंने इसे मुख पन्नों पर जगह दी। उसे एकदम डिटेल में छापा। इसके चलते भाजपा के खिलाफ खूब दुष्प्रचार भी हुआ। भाजपा को इसके चलते सामने आकर खंडन करना पड़ा।

जब भाजपा ने इन अखबारों की इन खबरों को स्पष्ट तौर पर झूठा बता दिया तो इन्होने माफ़ी के तौर पर एक छोटे से कोने में इसके लिए माफी छाप दी, जिस पर शायद ही किसी की नजर पड़े। ऐसे में यह सन्देश जाता है कि अखबार फर्जी खबर को तो खूब प्रचारित करना चाहते हैं लेकिन अपनी गलती स्वीकार करने में वह बचते हैं।

किसी पार्टी के एजेंडे या अभियान को लेकर ऐसी अफवाह या भ्रामकता फैलाना उस पार्टी की छवि पर भी प्रभाव डालता है। ऐसे में इस इस छवि बिगाड़ने के जिम्मेदार अखबारों को छोटा माफीनामा नहीं बल्कि वापस पूरी खबर सही तथ्यों के साथ छापनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा, तो इसे बेईमानी ही कहा जाएगा।

बंगाल ‘विजय’ को लेकर कोलकाता में BJP का सम्मलेन, अमित शाह ने लिया ‘संकल्प’: कहा- TMC सरकार के जाते ही कार्यकर्ताओं के हत्यारे को देंगे सजा, जमीन में गड़े होंगे तो भी नहीं छोड़ेंगे

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में ममता सरकार पर जमकर निशाना साधा। शाह ने राज्य की तृणमुल कॉन्ग्रेस (TMC) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं की हत्या करने को लेकर घेरा। उन्होंने ममता सरकार को चेतावनी दी कि BJP सरकार आते ही कार्यकर्ताओं की हत्या के अपराधियों को अगर जमीन में भी गाड़ा है, तो भी उन्हें बाहर निकालकर सजा देंगे।

दरअसल, रविवार (01 जून 2025) को केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में ‘विजय संकल्प कार्यकर्ता सम्मेलन’ में शिरकत की। यहाँ बीजेपी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की सरकार में हुए अपराध गिनाए। शाह ने ये भी कहा कि आगामी 2026 बंगाल चुनाव में बीजेपी के वापस आते ही सभी अपराधियों को सजा मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “बंगाल में चुनाव के दौरान और दीदी को विजय मिलने के बाद सैकड़ों बीजेपी के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतार दिया गया। दीदी, कब तक बचाओगी उनको…मेरी बात सुन लो, आपका समय अब समाप्त हो गया है। साल 2026 में बीजेपी की सरकार बनने वाली है।”रहे

अमित शाह ने मुर्शिदाबाद हिंसा और तमाम हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या पर भी बात की। शाह ने ममता सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “TMC की सरकार जाते ही हमारे कार्यकर्ताओं की हत्या के अपराधियों को देखा जाएगा। अगर उन्हें जमीन में भी गाड़ा है, तो भी बाहर निकालकर सजा दिलाएँगे।”

सम्मेलन में शामिल रहे पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी ममता सरकार के खिलाफ मोर्चा संभाला। सुवेंदु ने कहा कि मुर्शिदाबाद दंगों के दौरान हिंदुओं पर हुए हमलों का बदला लिया जाएगा। पार्टी उन लोगों को सबक सिखाएगी, जिन्होंने हत्या की साजिश रची।

बीजेपी नेता ने आगे कहा, “TMC ने अप्रैल 2025 में धुलियान, शमशेरगंज और जिले के अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर आगजनी और हिंदुओं पर सशस्त्र हमलों के दौरान चुपचाप बैठकर देखा। अगर सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने लोगों की जान बचाई, अगर ऐसा नहीं होता तो हालत बदतर हो सकते थे।”

‘ऑपरेशन पुश-बैक’ से डरे बांग्लादेशी घुसपैठिए, 2000 खुद ही बॉर्डर पर पहुँचे: कहा- जाना चाहते हैं वापस, सुरक्षा एजेंसियों ने 2000+ को पहले ही सीमा पार धकेला

ऑपरेशन सिंदूर के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ का असर सामने आ रहा है। अब तक 2000 अवैध घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा जा चुका है। इसके अलावा देश के अलग-अलग जगहों पर छुपकर रह रहे लगभग 2000 घुसपैठिए अब सामने से सीमा पर आकर वतन वापसी के लिए तैयार हो गए हैं।

भारत के कई राज्यों ने अवैध घुसपैठियों की पहचान की प्रक्रिया को तेज कर दी है। भारत ने बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाल बाहर करने के लिए एक नई तरकीब निकाली है। अनाधिकारिक रूप से इसे ऑपरेशन पुश-बैक का नाम दिया गया है।

अकेले दिल्ली में ही 900 से अधिक अवैध बांग्लादेशियों की पहचान की गई थी। बीते 6 महीने में 700 घुसपैठिय़ों को दिल्ली से खदेड़ा भी जा चुका है। इसी तरह गुजरात से भी सबसे अधिक संख्या में घुसपैठियों पर कार्रवाई हुई है। इसके अलावा महाराष्ट्र, असम, हरियाणा समेत कुछ अन्य राज्यों में भी घुसपैठियों के पहचान की प्रक्रिया तेज हो गई है।

कानूनी प्रक्रिया से डरे घुसपैठिए

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑपरेशन पुश-बैक के अभियान में भारतीय सुरक्षा का साथ बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स (BGB) भी दे रहा है है। अवैध रूप से भारत में घुसे बांग्लादेशियों के पकड़े जाने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। कानूनी प्रक्रिया से बचने के लिए अब तक 2000 लोग वतन वापसी के लिए बॉर्डर पर अपनी मर्जी से पहुँचे हैं।

सुरक्षा एजेंसियाँ अब घुसपैठियों की जानकारी बॉयोमेट्रिक के जरिए भी सहेज रही है। इसे राष्ट्रीय डेटाबेस से भी जोड़ा जाएगा। इससे दोबारा देश में घुसपैठियों के घुसने पर जानकारी निकालना और कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सीमा पर पहुँचने वाले लोगों में ज्यादातर गरीब या निचले तबके से जुड़े लोग हैं। उन्हें पता है कि पकड़े जाने पर उन्हें जेल जाना पड़ सकता है और कानूनी प्रक्रिया में काफी समय और पैसा खर्च होगा। ऐसे में चुपचाप वापस जाने में ही अपनी भलाई समझी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि ये संख्या इस हफ्ते तक 10 से 20 हजार तक पहुँचेगी। इसके बाद बांग्लादेश सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

ऑपरेशन पुश-बैक क्या है?

‘ऑपरेशन पुश-बैक’ अप्रैल 2025 से चल रहा है। ये भारत सरकार की एक नई रणनीति है, जिसका उद्देश्य अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं से त्वरित रूप से निपटना है। ये वे लोग हैं जो कई वर्षों से अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। 

इस ऑपरेशन के तहत अब पुलिस को सौंपना, FIR दर्ज करना, अदालत में पेश करना, मुकदमा चलाना और फिर निर्वासन प्रोटोकॉल की लंबी प्रक्रिया से भारत सरकार ने किनारा कर लिया है।

भारत के गृह मंत्रालय (MHA) ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की है। इसके बाद भारतीय सुरक्षाबल घुसपैठियों को तुरंत सीमा पार बांग्लादेश की ओर धकेल रहे हैं।

भारत में 2 करोड़ से अधिक बांग्लादेशी

भारत-बांग्लादेश की खुली सीमा से अवैध घुसपैठ लगातार जारी है। इसमें भारत के अंदर बैठे एजेंटों और दलालों की भी उन्हें मदद मिलती है। 2016  के आँकड़ों के अनुसार, भारत में 2 करोड़ से अधिक बांग्लादेशी नागरिक अवैध रूप से रह रहे हैं।

बांग्लादेश के विदेश मंत्री ने 8 मई, 2025 को भारत को पत्र लिखकर देश में अवैध रूप से प्रवेश कर रहे लोगों को वापस धकेलने पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने 22 मई, 2025 को एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा था कि भारत में वर्तमान बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक मौजूद हैं।

देश ने बांग्लादेश से इन लोगों की राष्ट्रीयता की पुष्टि करने का अनुरोध किया है। वर्तमान में 2360 से अधिक ऐसे मामलों की सूची लंबित है। राष्ट्रीयता की पुष्टि की प्रक्रिया कई मामलों में 2020 से लंबित है।

जिस साकिब नाचन के ठिकानों से मिले थे 44 ड्रोन, उसके घर पर ATS ने मारा छापा: ठाणे के गाँव को बना दिया था ‘अल शाम’, ISIS का सरगना बन दिलाई थी ‘बैयत’ की कसम

महाराष्ट्र के आतंकवादी निरोधी दस्ते (ATS) ने ठाणे के पडघा गाँव में छापेमारी की है। यह छापेमारी आतंकी साकिब नाचन के ठिकानों पर हुई है। ATS की यह छापेमारी आतंक से जुड़े एक मामले में हुई है। साकिब नाचन के कई ठिकानों की पुलिस और ATS तलाशी ले रही है।

ATS और महाराष्ट्र पुलिस की यह कार्रवाई सोमवार (2 जून, 2025) को की गई है। नाचन के घर समेत कई ठिकानों पर जाँच की गई है। आतंक से जुड़े कुछ और लोगों पर ATS यह तलाशी ले रही है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि उन्हें कुछ सूचनाएँ मिली थीं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

साकिब नाचन के ऊपर पहले छापेमारी में ड्रोन मिले थे। सुरक्षा एजेंसियों को 44 ड्रोन मिले थे। यह नई छापेमारी भी ऐसे समय में सामने आई है, जब रूस के भीतर यूक्रेन ने ऐसे ही ड्रोन से हमला किया है।

कौन है साकिब नाचन ?

गौरतलब है कि जिस साकिब नाचन के ऊपर यह कार्रवाई चल रही है, उस पर NIA के छापे भी 2023 में पड़ चुके हैं। उसे इस दौरान गिरफ्तार भी किया गया था। 63 वर्षीय साकिब मूल रूप से मुंबई के ठाणे जिले के बोरीवली का रहने वाला है। नाचन 3 बच्चों का अब्बा है, जिसमें 2 बेटे और एक बेटी शामिल हैं।

साकिब प्रतिबंधित आतंकी संगठन SIMI (सिमी) का सचिव भी रह चुका है। साकिब का कनेक्शन भगोड़े आतंकी जाकिर नाइक से भी है। वह युवाओं को जिहाद के लिए उकसाता था और खलीफा का राज लाने के लिए ‘बैयत’ (कसम) दिलाता था।

उस पर आतंकवाद से जुड़े दर्जनों केस दर्ज हैं, जिसमें से 2 में उसे अदालत से भी सजा मिल चुकी है। साकिब को साल 1997 में भारत में आतंकी वारदातों की साजिश रचने के आरोप में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराया गया था। तब साकिब का खालिस्तानी आतंकियों से भी कनेक्शन सामने आया था।

साकिब को मुंबई में साल 2002-03 के दौरान हुए 3 बम धमाकों में पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर आरोपित बनाया था। एक दर्जन लोगों की जान लेने वाले ये धमाके मुंबई सेंट्रल, विलेपार्ले और मूलुंड में हुए थे। धमाकों में 100 से अधिक लोग घायल भी हुए थे।

इस मामले में भी साल 2016 में साकिब को अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई। पहली और दूसरी सजाएँ एक साथ चलने की वजह से साकिब 2017 में जेल से रिहा हो गया। साकिब बम बनाने में माहिर माना जाता है। वह अन्य युवाओं को न सिर्फ बम बनाने बल्कि उसका परीक्षण और भीड़भाड़ वाली जगहों पर ब्लास्ट करने की भी ट्रेनिंग देता है। 

शामिल और उसका अब्बा साकिब ने अपने मुंबई बोरीवली स्थित घर को आतंकवाद की ट्रेनिंग के लिए एक सेंटर पॉइंट के तौर पर प्रयोग किया था। शामिल नाचन जुल्फिकार अली बड़ोड़ावाला, मोहम्मद इमरान खान, मोहम्मद यूनुस साकी, सिमाब नसीरुद्दीन काजी और अब्दुल कादिर पठान और कुछ अन्य संदिग्धों के साथ मिल कर ISIS मॉड्यूल खड़ा कर रहा था।

ठाणे के गाँव को बना रहा था अल शाम

नाचन ISIS का पूरा मॉड्यूल चला रहा था। NIA ने इस मामले में उसे मुख्य आरोपित बनाया था। नाचन समेत बाकी आरोपितों ने महाराष्ट्र के ठाणे के एक गाँव को ‘अल शाम’ यानी इस्लामिक शासन वाला आजाद क्षेत्र घोषित कर दिया था। ये भारत में शरिया के तहत इस्लाम का शासन स्थापित और आतंकी हमलों को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

NIA ने नाचन के अलावा हसीब जुबेर मुल्ला, काशिफ अब्दुल सत्तार बालेरे, सैफ अतीक नचन, रेहान अशफाक सुस, शगफ साफीक दिवकर, फिरोज दास्तगीर कुआरी को पकड़ा था। इस मामले में अन्य कई जगह से भी आतंकी पकड़े थे।

साकिब नचान ने कुख्यात आतंकी संगठन ISIS को आतंकी संगठन घोषित करने के खिलाने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।  ISIS के सरगना रहे नाचन ने इस्लामिक स्टेट और अन्य समूहों को आतंकवादी संगठन घोषित करने वाली सरकारी अधिसूचना को रद्द करने की माँग की थी।

 

जुबैर ने महिला टीचर को मदरसे में बुलाकर किया रेप, बेसुध छोड़कर भागा: पुलिस ने किया गिरफ्तार, मुजफ्फरनगर में तालीम लेने आई बच्ची से मौलवी सद्दाम ने की दरिंदगी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में मदरसा संचालक जुबैर ने जुमे के दिन टीचर को मदरसा बुलाया और रेप किया। टीचर बेसुध हालत में मदरसे में पड़ी रही। पुलिस ने जुबैर को गिरफ्तार कर लिया है। इसी तरह की घटना मुजफ्फरनगर से भी सामने आई है। यहाँ मौलवी ने 15 साल की छात्रा के साथ रेप किया।

बरेली के मीरगंज थाना क्षेत्र में शुक्रवार (30 जून 2025) जुमे के दिन छुट्टी के बाद भी मदरसा संचालक जुबैर ने एक महिला टीचर को मदरसा बुलाया। टीचर अपने भाई के साथ मदरसा पहुँची, भाई बाहर गेट पर छोड़कर वापस चला गया। टीचर अंदर पहुँची तो वहाँ कोई भी बच्चा नहीं था। इस पर टीचर को थोड़ा शक हुआ।

अचानक जुबैर भीतर से आया और टीचर को एक क्लासरूम में ले गया। वहाँ कमरे में जाकर बोला कि तुम्हें देखना है और टीचर के साथ दरिंदगी की। टीचर की हालत बिगड़ी तो जुबैर वहाँ से भाग निकला।

उधर, काफी देर तक घर वापस न आने पर टीचर के परिजन मदरसा पहुँचे। जहाँ टीचर बेसुध अवस्था में थी और उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे। परिजन पीड़िता को लेकर तुरंत अस्पताल पहुँचे। जहाँ शाम तक पीड़िता को होश आया और परिजन को सारी आपबीती सुनाई। इसके बाद परिजन ने पुलिस को शिकायत दी।

पुलिस ने रविवार (01 जून 2025) को आरोपित जुबैर को गिरफ्तार कर लिया। थाना इंचार्ज प्रदीप चतुर्वेदी ने बताया कि पीड़िता का मेडिकल परिक्षण कराया गया है। जुबैर से पूछताछ की जा रही है।

मुजफ्फरनगर में भी नाबालिग से रेप

बरेली जैसा ही मामला मुजफ्फरनगर जिले से भी सामने आया है। यहाँ रविवार (01 जून 2025) को मदरसे में एक नाबालिग छात्रा को डाउट क्लियर करने व पढ़ाने के बहाने बुलाया गया। फिर मौलवी सद्दाम हुसैन ने 15 वर्षीय छात्रा के साथ बलात्कार किया। पीड़िता चीखती-चिल्लाती रही।

पीड़िता छात्रा ने घर पहुँचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद छात्रा के परिजन उसे थाने लेकर गए और मामला दर्ज कराया। सीओ रुपाली राव ने बताया कि पुलिस ने सद्दाम हुसैन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपित को नई मंडी थाने से गिरफ्तार कर लिया गया है।

अन्ना यूनिवर्सिटी की छात्रा से रेप के दोषी को 30 साल की सजा, कोर्ट ने ₹90 हजार का जुर्माना भी ठोंका: बिरयानी बेचता था ‘रेपिस्ट’ ज्ञानसेकरन, DMK के नेताओं के साथ थी फोटो

चेन्नई की अन्ना यूनिवर्सिटी में 19 वर्ष की एक छात्रा से रेप करने के आरोपित ज्ञानसेकरन को 30 वर्ष की सजा सुनाई गई है। उसके ऊपर ₹90 हजार का जुर्माना भी ठोंका गया है। ज्ञानसेकरन ने इस छात्रा की अश्लील वीडियो भी बनाई थी। विपक्षी दलों न आरोप लगाए थे कि ज्ञानसेकरन के DMK नेताओं से लिंक हैं।

चेन्नई की एक कोर्ट ने यह सजा सोमवार (2 जून, 2025) को सुनाई है। दोषी ज्ञानसेकरन को 30 वर्ष बिना किसी माफ़ी के जेल दी गई है। ज्ञानसेकरन के खिलाफ लगाए गए सभी 11 आरोप सिद्ध हो गए थे। इन सभी मामलों में उसे सजा दी गई है।

ज्ञानसेकरन के वकील ने कहा है कि वह इस मामले में इस अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट जाएँगे। इस मामले में न्यायालय ने सुनवाई 6 महीने में पूरी की है और सजा दी है। अन्ना यूनिवर्सिटी में हुए इस रेप मामले में राज्य की DMK सरकार की काफी फजीहत हुई थी।

इस मामले में पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप भी पुलिस पर लगा था। आरोपित ज्ञानसेकरन के भी DMK नेताओं से लिंक के आरोप भाजपा समेत विपक्ष ने लगाए थे। इसको लेकर राज्य भर में प्रदर्शन हुए थे। मद्रास हाई कोर्ट ने पुलिस समेत बाकी अधिकारीयों को लताड़ा था।

क्या था मामला?

अन्ना यूनिवर्सिटी में 23 दिसम्बर, 2024 को यह घटना हुई थी। यूनिवर्सिटी के भीतर ही इंजीनियरिंग की एक 19 वर्षीय छात्रा से ठेले वाले ज्ञानसेकरन ने रेप किया था। पीड़िता एक जगह अपने एक दोस्त से मिलने गई थी। इसी बीच ज्ञानसेकरन ने उसका एक वीडियो बना लिया।

इसके बाद वीडियो के आधार पर उसने लड़की को धमकाया और उसके साथ मौजूद दोस्त को भी मारपीट कर भगा दिया। इसके बाद लड़की के साथ रेप किया और फोन नम्बर लेकर कहा कि जब जहाँ बुलाए वहाँ वह लड़की आ जाए। लड़की ने जब इस घटना की रिपोर्ट दर्ज करवाई तब यह मामला खुला।

ज्ञानशेखरन ने 2011 में एक ऐसी ही घटना को अंजाम दिया था। उस पर 15 मामले दर्ज हैं। भाजपा को आरोप है कि ज्ञानशेखरन कार्रवाई से इसलिए बचता रहा क्योंकि उसे DMK का वरदहस्त प्राप्त था।

हत्यारा ‘पगला’ था, सेना सिखाती है कमजोर हो तो भाग जाओ : बक्सर ट्रिपल मर्डर केस में 8 दिन बाद पीड़ितों के पास पहुँचे RJD सांसद और MLA, बातें सुन परिजनों ने दरवाजे पर ही किया जलील

बिहार के बक्सर में 24 मई 2025 को आपसी रंजिश के चलते एक ही परिवार के पाँच लोगों पर गोलियाँ बरसाई गईं। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। इस पूरी घटना के 8 दिन बाद RJD सांसद सुधाकर सिंह और विधायक विजेंद्र यादव पीड़ितों के घर उनसे मिलने पहुँचे।

इस दौरान पीड़ितों और ग्रामीणों ने उन्हें जमकर लताड़ा। उनसे पूछा कि 8 दिन तक यहाँ अलग-अलग पार्टियों के नेता आए, लेकिन आप लोग क्यों नहीं है आए? इस पर सांसद सुधाकर सिंह प्रशासन का दबाव और सीमित संसाधनों का बहाना बनाने लगे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि पहले प्रशासन ने आने नहीं दिया और उसके बाद वह तमिलनाडु चले गए थे। इसलिए उन्हें आने में देर हो गई।

आक्रोशित लोगों ने पूरे मामले पर अब तक कोई भी अपडेट न करने पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी के चलते वह सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं रह पाते हैं।

MLA बोले- आरोपित पगला

इसके अलावा विधायक विजेंद्र यादव ने तो आरोपित को पगला ही बता दिया। विजेंद्र यादव ने कहा कि मनोज, जो हत्याकांड में एक नामजद आरोपित है, एक ‘पगला’ और ‘सनकी’ आदमी है।

इसके अलावा वे सेना के लिए भी अनाप-शनाप कहने से बाज नहीं आए। उन्होंने कहा, “सेना भी यह सिखाती है कि जब गोलियाँ चलने लगे और आप कमजोर हों तो वहाँ से भाग जाओ। भले ही बाद में मजबूत होकर आओ।”

उनकी इस तरह की बातों पर ग्रामीणों में जमकर आक्रोश दिखा। पीड़ित परिवार ने सांसद सुधाकर सिंह से कहा कि हमने अपना परिवार खोया है। हमें न्याय चाहिए।

क्या था मामला

बक्सर के आहियापुर में बालू के विवाद में एक ही परिवार के तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों परिवारों के बीच कई दिनों से विवाद चल रहा था।

शनिवार (24 मई 2025) की सुबह टहलने निकले परिवार को नहर के पास दो स्कॉर्पियो में भर कर आए लोगों ने गोली मार दी। इनमें से विनोद, सुनील और वीरेंद्र सिंह की मौके पर मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में एक व्यक्ति को गंभीर चोट लगने के कारण उसका पैर काटना पड़ गया।

पीड़ित पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने 19 लोगों को नामजद किया है। इनमें से दो लोग संतोष यादव और मनोज यादव के राजनीतिक संबंध सामने आए हैं। इस हत्याकांड के बाद बक्सर में सियासी हलचल बढ़ गई है।

JDU के नेता इसे ‘विपक्ष की ओर से की गई हिंसा’ बता रहे हैं। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने हत्याकांड से जुड़े आरोपित संतोष यादव की RJD नेता तेजस्वी यादव और सांसद सुधाकर सिंह के साथ की तस्वीरें साझा की और कहा कि ये प्रायोजित तरीके से की गई हिंसा है।

काली और दुर्गा तो न#% होती हैं… हिंदू देवियों पर भद्दा कमेंट करने वाली हबीबा खातून गिरफ्तार, हेकड़ी निकली तो बोली- अब से नहीं फैलाऊँगी नफरत

असम की कछार पुलिस ने हीबा नूर (कुछ जगह हबीबा खातून) नाम की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि वो अपने अकॉउंट से हिंदू घृणा से सने पोस्ट डालती थी। साथ ही साथ हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी भी करती थी। हाल में जब उसकी प्रोफाइल और उसपर डाले कंटेंट सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू हुए तो लोगों ने उसे अरेस्ट करने की माँग उठाई।

वायरल स्क्रीनशॉट में दिखाई दे रहा है कि हीबा खातून कमेंट पर माँ काली के लिए अभद्र शब्द बोलती थी। उसने लिखा था- वैसे काली और दुर्गा तो नं$% होती हैं इसका मतलब ये सब नंगी रहना चाहती हैं।

आगे स्क्रीनशॉट में उसने लिखा- हमें किसी के धर्म से कोई मतलब नहीं। हम आगे से किसी को गाली नहीं देते, लेकिन अगर हमें छेड़ोगे तो हम उसका जवाब जरूर देंगे।

उसके स्क्रीनशॉट वायरल होने के बाद कछार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। कछार पुलिस ने 1 जून को ट्वीट करके बताया कि हीबा खातून गिरफ्तार है। उसे कोर्ट के आगे पेश किया गया था। पुलिस ने कहा कि एक वीडियो सोशल मीडिया पर आई थी जिसमें हबीबा खातून जो सिलचर के तुकेग्राम की है। उसे माँ काली पर अश्लील टिप्पणी करते देखा गया। पुलिस उसे पकड़ चुकी है।

बता दें कि सोशल मीडिया पर हिंदू घृणा फैलाने वाली हीबा के खिलाफ जैसे ही सोशल मीडिया पर शिकायत हुई उसी के बाद हीबा का एक पोस्ट आया जिसमें उसने लिखा था- “आज से मैं रोस्टिंग वीडियो और हिंदू-मुस्लिम नफरत फैलाने वाला, जो भी कंटेंट होगा वो मैं नहीं बनाऊँगी और कुछ ऐसा कमेंट भी नहीं करूँगी।” इसके अलावा अब 19 हजार फॉलोवर वाली हीबा के सोशल मीडियासे सारे पोस्ट भी डिलीट किए जा चुके हैं।

ऐसे मामले पहले भी बहुत बार आए हैं। कुछ समय पहले खुद को फेमिनिस्ट समझने वाली प्रियंका पॉल की आईडी वायरल हुई थी जिसमें उसने न केवल हिंदुओं के लिए, बल्कि हिंदू देवी-देवताओं के लिए अश्लील बातें की हुई थीं। पोस्ट वायरल होने के बाद उसके खिलाफ भी शिकायत हुई थी।

जैसे यूक्रेन ने उड़ाए रूस के 40 विमान, वैसा ही हमला भारत में करने की फिराक में थे ISIS के आतंकी : 44 ड्रोन किए थे तैयार, NIA ने ध्वस्त किए थे इरादे

रविवार (1 जून 2025) की तारीख रूस के लिए एक काला दिन बनकर इतिहास में दर्ज हो गया। यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया, जिसमें कई रूसी हवाई अड्डों को निशाना बनाते हुए कम से कम 40 लड़ाकू विमानों-बमबर्षकों और मल्टीरोल फाइटर जेट्स को हवा में उड़ने से पहले जमीन पर ही ढेर कर दिया गया।इस हमले में यूक्रेन ने FPV (फर्स्ट पर्सन व्यू) ड्रोन स्वार्म्स का इस्तेमाल किया, जिन्हें पहले से ही रूस के अंदर तैनात कर दिया गया था।

ये हमले रूस की सीमा में 4000 से 5000 किमी अंदर तक किए गए हैं। विशेषज्ञ इन हमलों को अभूतपूर्व बता रहे हैं। हालाँकि लोगों को कम ही पता है कि ऐसे हमले की कोशिश भारत के खिलाफ हो चुकी है, लेकिन भारत उन हमलों को विफल कर चुका है।

यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 40 से ज्यादा रूसी विमानों को नुकसान पहुँचाया गया या नष्ट कर दिया गया, जिसमें Tu-95 और Tu-22M3 जैसे स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स और कम से कम एक A-50 एयरबोर्न अर्ली वॉर्निंग विमान शामिल हैं। हमले का निशाना चार प्रमुख रूसी हवाई अड्डे थे – बेलाया, डायघिलेवो, ओलेन्या और इवानोवो… जो रूस के सुदूर उत्तर तक स्थित हैं। इन हमलों के लिए न तो रूस तैयार था और न ही उसकी सुरक्षा एजेंसियाँ, क्योंकि रूस के सुदूर उत्तर यानी 4000 से 5000 किमी अंदर उसे किसी हमले की अंशमात्र भी आशंका नहीं थी।

यह हमला अपने आप में एक सैन्य मास्टरस्ट्रोक था। यूक्रेन ने इन ड्रोन्स को रूस के अंदर तस्करी करके पहले से ही हवाई अड्डों के पास तैनात कर दिया था, जिससे वे सटीकता के साथ विमानों को निशाना बना सके। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियोज में रूसी हवाई अड्डों पर जलते हुए विमान और धुएँ के गुबार दिखाई दे रहे हैं। रूसी ब्लॉगर्स ने इसे ‘रूसी पर्ल हार्बर’ करार दिया है, जो इस हमले की भयावहता को दर्शाता है।

यूक्रेन की सिक्योरिटी सर्विस (SBU) के एक अधिकारी ने इसे ‘दुश्मन के पीछे तक पहुँचने’ की शुरुआत बताते हुए कहा कि अब रूसी विमानों की वह ‘अनछुई’ स्थिति खत्म हो गई है, जो यूक्रेनी नागरिकों पर बमबारी करते थे। क्योंकि यूक्रेन के पास न तो इन्हें इंटरसेप्ट करने की क्षमता थी और न ही इन्हें मार गिराने की। ऐसे में रूसी बॉम्बर, अटैक फाइटर जेट आते… यूक्रेन की पहुँच से बाहर रहकर मिसाइलों से हमला करते और दूर-से-दूर ही और भी दूर निकल जाते।

भारत पर भी हो चुकी है ऐसे हमले की कोशिश

लेकिन इस घटना को देखते हुए एक सवाल उठता है – क्या इस तरह की रणनीति पहले भी कहीं देखी या कोशिश की गई है? जवाब हाँ है… और वह जगह है भारत। भारत में भी कुछ ऐसी ही कोशिश की गई थी, लेकिन भारतीय एजेंसियों ने इसे समय रहते नाकाम कर दिया। यह घटना मुंबई के पास पडघा गाँव में हुई थी, जो 2023 में एक बड़े आतंकी साजिश का केंद्र बन गया था। आइए, इस घटना को विस्तार से समझते हैं और इसे यूक्रेन-रूस घटनाक्रम से जोड़कर देखते हैं।

मुंबई से महज 50 किलोमीटर दूर पडघा एक छोटा सा गाँव है। उसे साल 2023 तक भारत में ISIS का एक प्रमुख केंद्र बनाया जा चुका था। इस गाँव को कुख्यात आतंकी साकिब नाचन ने ‘अल-शाम’ नाम दिया और इसे अलग शरिया कानूनों के तहत चलाने की कोशिश की जा रही थी। यहाँ शरिया ही लागू कर दिया गया था।

इसकी कमान संभालने वाला कुख्यात आतंकी साकिब नाचन पहले SIMI (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) जैसे आतंकी संगठन से जुड़कर मुंबई में कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका था। इनमें मुख्य थे- साल 2002 में मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर हुए बम धमाके, जिनमें 25 लोग घायल हुए… तो साल 2003 में विले पार्ले और मुलुंड स्टेशन पर हुए धमाकों में कई लोगों की जान गई थी। इन हमलों के बाद नाचन को गिरफ्तार किया गया, लेकिन 2017 में वह जेल से बाहर आ गया और उसने पडघा को अपने आतंकी मंसूबों का अड्डा बना लिया।

एनआईए ने फेल किए थे दुश्मनों के खतरनाक इरादे

साल 2023 में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने पडघा में एक बड़ा ऑपरेशन चलाया। इस छापेमारी में 44 ड्रोन बरामद किए गए, जो मुंबई पर हमले के लिए तैयार किए गए थे। इसके अलावा, भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और कट्टरपंथी साहित्य भी मिला। हैरानी की बात यह थी कि वहाँ से इजरायली झंडे भी बरामद हुए, जिससे संकेत मिलता है कि इस साजिश के पीछे बड़े और जटिल मकसद थे। यह साफ था कि आतंकी संगठन मुंबई में एक बड़े हमले की योजना बना रहे थे, शायद 26/11 जैसे हमले से भी बड़ा।

दोनों ही मामलों में ड्रोन्स बने मुख्य हथियार

पडघा की यह घटना और यूक्रेन का रूस पर ड्रोन हमला एक-दूसरे से कई मायनों में जुड़े हुए हैं। दोनों ही मामलों में ड्रोन्स का इस्तेमाल एक प्रमुख हथियार के रूप में किया गया। यूक्रेन ने रूस के हवाई अड्डों को निशाना बनाने के लिए ड्रोन्स को पहले से तैनात कर दिया था, ठीक वैसे ही जैसे पडघा में आतंकियों ने ड्रोन्स को मुंबई पर हमले के लिए तैयार रखा था। दोनों ही घटनाओं में रणनीति एक जैसी थी – दुश्मन की सीमा के अंदर घुसकर, उनकी सुरक्षा को भेदकर, उनके ही क्षेत्र में हमला करना। लेकिन जहाँ यूक्रेन अपने मकसद में कामयाब रहा, वहीं भारत ने इस साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया।

यहाँ एक और समानता है – दोनों ही मामलों में हमलावरों ने दूसरे पक्ष की कमजोरियों का फायदा उठाया। यूक्रेन ने रूस के हवाई अड्डों की सुरक्षा में सेंध लगाई, जो शायद रूस को अजेय लगते थे। वहीं, पडघा में आतंकियों ने एक शांत गाँव को अपना अड्डा बनाकर भारत की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने की कोशिश की। लेकिन भारतीय एजेंसियों की सतर्कता ने इस साजिश को विफल कर दिया और मुंबई को एक बड़े हमले से बचा लिया गया।

रूस पर हमला भारत के लिए बड़ा सबक

यूक्रेन की घटना से यह साफ होता है कि आधुनिक दौर के युद्ध में ड्रोन तकनीक कितनी अहम हो गई है। लेकिन पडघा की घटना हमें यह भी याद दिलाती है कि इस तकनीक का दुरुपयोग आतंकी संगठन भी कर सकते हैं। भारत में जो हुआ, वह एक चेतावनी थी कि हमें अपनी सुरक्षा को और मजबूत करना होगा, खासकर ऐसे समय में जब तकनीक तेजी से बदल रही है। यूक्रेन ने रूस को जो सबक सिखाया, वह भारत के लिए भी एक सबक है – हमें हर समय सतर्क रहना होगा, क्योंकि दुश्मन किसी भी रूप में, कहीं से भी हमला कर सकता है।

बृजभूषण सिंह POCSO मामले में बरी, उनका विरोध कर एक बनी MLA… दूसरा किसान मोर्चा का अध्यक्ष: लेकिन उन महिलाओं की लड़ाई हो गई कठिन, जो सही में बनीं यौन उत्पीड़न का शिकार

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 18 जनवरी, 2023 को लगभग 30 एथलीट्स कुश्ती संघ अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के आरोप लगाते हुए धरने पर बैठते हैं। इस धरने की अगुवाई करते हैं पहलवान बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक। यह वो चेहरे हैं जो अब तक भारत का प्रतिनिधित्व वैश्विक स्तर पर करते रहे हैं।

खेल के माध्यम से देश का नाम ऊँचा करने वाले यह एथलीट बृजभूषण शरण सिंह पर कड़ी कार्रवाई की माँग करते हैं। इनका साथ देने वालों में धीमे-धीमे कॉन्ग्रेस नेताओं से लेकर एंटी- भाजपा लॉबी जुड़ जाती है। यौन शोषण मामले में FIR करवाने के साथ ही बृजभूषण शरण सिंह पर 100 तरह के आरोप लगाए जाते हैं।

लेकिन मई, 2025 में इनमें से POCSO वाले मामले में बृजभूषण शरण सिंह निर्दोष साबित होते हैं। धरने की शुरुआत से लेकर धरने के परिणाम तक पर नजर डाले तो दिखाई देता है कि इस पूरे आंदोलन ने सभी आंदोलनकारियों को सेटल कर दिया, किसी को राजनीति में तो किसी को वापस कुश्ती में।

लेकिन इससे एक सवाल जरूर उठ गया। सवाल है कि क्या भविष्य में इस निराधार लड़ाई का खामियाजा सत्य आधार पर लड़ने वाली महिलाओं को भुगतना पड़ेगा? क्या अब उनके लिए कोई लड़ने आएगा? क्या किसी बड़ी शख्सियत पर लगाए आरोपों को कोई तुरंत स्वीकार कर पाएगा?

क्या था पूरा मामला ?

बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरने पर बैठे पहलवानों का आरोप था कि बृजभूषण शरण सिंह कुश्ती संघ को गलत तरीके से चला रहें हैं और महिला पहलवानों के साथ यौन शोषण को अंजाम दिया जा रहा है। वहीं बृजभूषण धरने और आरोप दोनों को बेबुनियाद बताते हुए खुद को निर्दोष होने की बात कहते हैं।

धरने को बढ़ता देख खेल मंत्री अनुराग ठाकुर पहलवानों से मिलते हैं, जिसके बाद 21 जनवरी 2023 को धरना समाप्त किया जाता है। 23 जनवरी 2023 को पहलवानों की माँग के अनुसार जाँच के लिए समिति बनाई जाती है। इसके बाद सूत्रों से पता चलता है कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं।

23 अप्रैल को जाँच से नाखुश पहलवान वापस धरने पर बैठते हैं। अबकी बार इन्हें तमाम बड़े राजनीतिक हस्तियों का साथ मिलता है। अंत में नाबालिग लड़की के आरोप पर POCSO एक्ट के तहत बृजभूषण पर FIR पर दर्ज की जाती है। और एक अन्य FIR बाकी पहलवानों के आरोपों पर भी दर्ज होती है।

आरोप-प्रत्यारोप, नारेबाजी और ड्रामा

अगला आरोप पहलवानों ने दिल्ली पुलिस पर लगाया और कहा कि पुलिस उनके धरने में बाधा डाल रही है। आरोप ये भी था कि प्रदर्शन स्थल की बिजली और पानी की आपूर्ति भी बाधित की जा रही है। 28 मई 2023 को पहलवान विरोध प्रदर्शन करने के लिए नए संसद भवन की तरफ जा रहे थे।

इस दौरान पुलिस और पहलवानों के बीच झड़प हुई और दिल्ली पुलिस ने धरना कर रहे पहलवानों को हिरासत में ले लिया, लेकिन 28 मई की रात तक सभी को छोड़ दिया गया। इसके बाद अगले कदम के तहत विनेश फोगाट, साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया जीतकर प्राप्त मेडल को गंगा में प्रवाहित करने हरिद्वार की यात्रा पर निकल गए।

यहाँ भारतीय किसान यूनियन टिकैत के राष्ट्रीय प्रवक्ता नरेश टिकैत ने पहलवानों को बढ़ावा दिया। पहलवानों ने अपने इस समर्थक को ही अपना मेडल भी सौंप दिया और आगे बढ़े। 7 जून 2023 को केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर अपने आवास पर पहलवानों के साथ फिर बैठक करते हैं।

छह घंटे की इस बैठक के बाद अनुराग ठाकुर का बयान आता है। वह कहते हैं, “पहलवानों के साथ सकरात्मक बातचीत बहुत संवेदनशील मुद्दे पर हुई है। लगभग छह घंटे चली इस बैठक में जिन मुद्दे पर चर्चा हुई है उसमें जो आरोप लगाए गए हैं उन आरोपों की जाँच पूरी करके 15 जून तक चार्जशीट दायर की जाए और रेसलिंग फेडरेशन का चुनाव 30 जून तक किया जाए। रेसलिंग फेडरेशन की आंतरिक शिकायत समिति बनाई जाए और उसकी अध्यक्षता कोई महिला करे।”

कोर्ट का फैसला और कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल

15 जून 2023 को पुलिस की तरफ से राउज एवेन्यू के जिला अदालत में 1000 पन्ने की चार्जशीट दाखिल की गई। इसी दिन दिल्ली पुलिस नाबालिग पहलवान के मामले में पटियाला हाउस के जिला अदालत में आरोपों को निराधार और झूठा बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल करती है।

18 जुलाई 2023 को बृजभूषण को अंतरिम जमानत मिल जाती है। आरोप प्रत्यारोप का ये सिलसिला तब खतम हुआ, जब कोर्ट ने 26 मई 2025 को पुलिस द्वारा दी गई क्लोजर रिपोर्ट के बाद मामले को बंद कर दिया।

पहलवानों को मिली लाइमलाइट तो खेल छोड़ शुरू की नेतागिरी –

इस पूरे आंदोलन को हवा देने वाली कॉन्ग्रेस से पहलवानों को खूब लाइमलाईट मिली। भले ही यह आरोप साबित ना हो पाए हों लेकिन इस बीच कॉन्ग्रेस ने इस मुद्दे को भुनाने का पूरा प्रयास हरियाणा विधानसभा चुनाव में किया।

कॉन्ग्रेस ने हरियाणा विधानसभा चुनाव में जुलाना सीट से विनेश फोगाट को टिकट दिया और प्रतिद्वंदी योगेश बैरागी को 6015 वोटों से हराते हुए वह जीत गई। इसी तरह बजरंग पुनिया ने भी खेल से अधिक रुचि राजनीति करने में दिखाई, तो उन्हें भी भारतीय किसान कॉन्ग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।

सवाल हर स्त्री का

बृजभूषण शरण सिंह पर लगाया नाबालिग का आरोप नहीं साबित हो सका। इस बीच बृजभूषण के बेटे करण भूषण सांसद हो गए। बृज भूषण के करीबी संजय सिंह कुश्ती संघ के नए मुखिया हो गए। विनेश और बाकी पहलवान राजनीति में सेटल हो गए तो बाकी अपने खेल की तरफ लौट गए। लेकिन सब एक सवाल छोड़ गए।

बड़े पदों को पाने के बाद इन लोगों का उस नाबालिग बच्ची से भी मतलब नहीं रह गया, जिसके कैरियर का अभी आगाज भी नहीं हुआ था। कोर्ट में नाबालिग बच्ची के पिता ने अपना बयान कुछ ही महीनों के बाद बदल लिया था। लड़की के पिता ने गलत बयान देने की बात कोर्ट में कही थी।

सवाल उठता है कि POCSO का यह मामला गलत साबित होने के बाद उन महिलाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा, जिनके साथ सच में यौन शोषण की घटनाएँ होती हैं। अगर उस पीड़ित महिला का हर आरोप सत्य होगा फिर भी ये तो जरूर याद रखा जाएगा कि किस तरह इस मामले में आरोपों को इस्तेमाल किया गया।

साथ ही, वह बच्ची अब अपने साथियों और खेल जगत समेत बाकी जगह कैसे लोगों का सामना करेगी। कैसे वह पिता लोगों को बताएगा कि उसने यह आरोप शुरू में क्यों लगाए और बाद में वापस क्यों लिए?