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राजस्थान सरकार ने जिन 25 जिलों में बताई 3918 मौतें, वहाँ उठी 14482 अर्थियाँ: कोरोना के आँकड़ों में बड़ा घालमेल

राजस्थान में न सिर्फ कोरोना संक्रमण के कारण हालात बेकाबू हैं, बल्कि वहाँ मौत के आँकड़े भी छिपाए जा रहे हैं। पहले भी यहाँ संक्रमितों और कोरोना के कारण हुई मौतों के आँकड़े संदेह के घेरे में रहे हैं। अगर 1 अप्रैल से लेकर 20 मई तक की बात करें तो जिन 25 ग्रामीण जिलों में सरकारी आँकड़ों के हिसाब से 3918 मौतें हुई हैं, वहाँ के 512 प्रखंडों में इस अवधि में 14,482 लोगों के अंतिम संस्कार हुए।

‘दैनिक भास्कर’ ने अपनी एक पड़ताल में इसका खुलासा किया है। इस खबर की मानें तो सामान्य दिनों में यहाँ डेढ़ महीने में औसतन 7 गुना कम, यानी 2705 मौतें होती हैं, इसीलिए गाँवों में मौतों के इस आँकड़े को सामान्य कह कह कर खारिज नहीं किया जा सकता। गाँवों में कोरोना प्रोटोकॉल से अंतिम संस्कार नहीं किए जा रहे, लेकिन मृतकों मे अधिकतर कोरोना के ही मरीज थे। बूँदी जिले की बात करें तो यहाँ 42 दिन में 314 मौतें हुईं, लेकिन सरकारी आँकड़ा मात्र 18 है।

3034 गाँवों वाले श्रीगंगानागर में प्रशासन के हिसाब से मात्र 48 मौतें ही हुई हैं, लेकिन जबकि खबर की मानें तो यहाँ के मात्र 28 गाँवों में ही 50 दिनों में 517 लोगों के अंतिम संस्कार हुए हैं। ‘दैनिक भास्कर’ ने कहा है कि उसने अपनी ग्राउन्ड रिपोर्ट से ये आँकड़े जुटाए और स्थानीय ग्रामीण जनप्रतिनिधियों से इसकी पुष्टि भी कराई। उनका भी आरोप है कि गाँवों में स्वास्थ्य सुविधाएँ एकदम बेहाल हैं और प्रशासन का सहयोग नहीं मिल रहा।

झालावाड़ की एक घटना का जिक्र किया गया है, जहाँ एक महिला की कोरोना से मौत के बाद उसके बेटों ने अस्पताल और प्रशासन से मदद माँगी, लेकिन कोई सुनवाई न होने पर खुद ही PPE किट पहन कर जाकर अंतिम संस्कार किया। शव को ठेले से श्मशान ले जाना पड़ा। दौसा के हापावास ग्राम पंचायत के बंदड़ी गाँव के एक मरीज को खाली सिलिंडर वाला मास्क ही लगा दिया गया, जिससे दम घुटने से उसकी मौत हो गई।

अलवर के विलासपुर में 37 और 42 वर्ष की उम्र के 2 सगे भाई ‘वर्क फ्रॉम होम’ कर रहे थे, लेकिन मात्र आधे घंटे के भीतर उनकी मौत हो गई। दोनों वेब डिजाइनर थे। चौमूं के मोरीजा रोड स्थित श्मशान भूमि में 50 अंतिम संस्कारों के लिए लकड़ियों का इंतजाम किया गया, लेकिन ये सभी तुरंत ही खत्म हो गई। देवली में आवां के चंदेल परिवार में 5 दिन के भीतर दो भाई नहीं रहे। तीसरे की दो महीने पहले हत्या कर दी गई थी।

अजमेर जिले की मसूदा पंचायत समिति के केसरपुरा गाँव में लोग प्रशासन से गारंटी माँगने लगे कि टीकाकरण के बाद मौतें नहीं होंगी। गाँव में मात्र एक महिला ने वैक्सीन ली। उससे पहले मात्र 10 दिनों में 15 लोगों की जान चली गई थी। जोधपुर के भावी में एक महीने मे 40 मौतें हुई हैं। जालौर जिले में सरकार ने 18 मौतें ही बताईं, जबकि यहाँ के सिर्फ 42 गाँवों में ही 190 लोगों की अंत्येष्टि हुई। ऐसे कई जिलों के आँकड़ों में घालमेल है।

राजसमंद मे पिछले 13 माह में कोरोना से राजसमंद जिले भर में 65 मौतें हुई थी। सरकारी आँकड़ों की मानें तो इस बार मई माह के 19 दिनों में ही 57 मौतें हो गई। लेकिन, नगर परिषद ने महज 19 दिनों में 114 डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिए हैं जो स्वास्थ्य विभाग की झूठ की पोल खोलता है। अकेले नगर परिषद राजसमंद ने 19 दिनों में 41 शवों का अंतिम संस्कार करवाया, जबकि प्रशासन 57 में से 29 को बाहरी बता रहा है।

2000 फोटो-मैसेज भेजे पाकिस्तान, 8 नंबरों पर होती थी बात: जासूस बहनों कौसर और हिना के खुल रहे राज

मध्य प्रदेश ​के इंदौर जिले के सैनिक छावनी महू इलाके से दो सगी बहनों हिना और कौसर को जासूसी के शक में रविवार (23 मई 2021) को गिरफ्तार किया गया था। महू में अपने घर में नजरबंद दोनों बहनों से अभी भी पूछताछ जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईएसआई एजेंट के जाल में फँसी हिना और कौसर अब तक 2000 से अधिक मैसेज और फोटो पाकिस्तान भेज चुकी हैं। युवतियों ने पूछताछ में बताया कि पाकिस्तान के दिलावर ने भी उनसे फोटो मँगवाए थे। वहीं दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक गिरफ्तार लड़कियों के नाम हिना और यास्मीन हैं जबकि कौसर उनकी बड़ी बहन है जिसकी शादी हो चुकी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हिना और कौसर डेढ़ साल से पाकिस्तानियों के संपर्क में हैं। उन्होंने ने बताया कि वह शादी करना चाहती थी और इसी संबंध में बातचीत कर रही थीं। इनमें से एक बहन ने पाकिस्तान जाने के लिए भी हाँ कर दी थी। दोनों बहनों ने सभी डाटा डिलीट कर दिया था, जिसे रिकवर किया जा रहा है।

ISI के जासूसी दूल्हे की रणनीति में फँसी थीं दोनों बहनें?

इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि इन दोनों बहनों की पाकिस्तान के 8 नंबरों पर बातचीत होती थी। 8 नंबर की छानबीन में एजेंसियों को यह अहम जानकारी मिली है कि ये पाक आर्मी और आईएसआई के लिए चलने वाले कॉल सेंटर के युवकों से बात करती थी। ऐसे में संदेह है कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी नए तरीके से वहाँ के कॉल सेंटर के जरिए भारत में बैठी महिलाओं को शादी व अन्य तरीके से अपने जाल में फँसाती है।

वहीं, एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियाँ अब इस पर भी जाँच कर रही हैं कि क्या दोनों बहनें आईएसआई के ‘जासूस दूल्हे’ की रणनीति का शिकार हुई थीं। या फिर कोई और वजह है। दरअसल, महू की दोनों बहनों की उम्र 27 और 32 साल है। इन्होंने दावा किया है कि पाकिस्तानियों के साथ इनकी बातचीत शादी को लेकर होती थी, लेकिन जाँच एजेंसियाँ इससे सहमत नहीं हैं क्योंकि उनका मानना है कि वे सीमा पार पाकिस्तान में दूल्हा क्यों तलाश कर रही थी, इसी सवाल से उन पर शक और गहरा गया है।

मालूम हो कि आईबी की सूचना के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने कुछ दिन पहले गवली पलासिया में रहने वाले सेना से रिटायर्ड नायक की बेटियों यास्मीन, हिना को उनके घर में नजरबंद किया था। उनकी बड़ी बहन कौसर, जीजा और बहन का बेटा भी घर में थे।

बता दें कि दोनों युवतियाँ सैन्य छावनी क्षेत्र की जानकारी पाकिस्तान पहुँचा रही थी। कुछ दिन पहले ये रोड पर चलते हुए फोन से पाकिस्तान बात कर रही थीं। इसी दौरान सेना के गोपनीय विभाग ने उसके फोन की फ्रीक्वेंसी पकड़ ली थी। तभी से इन पर नजर रखी जा रही थी। इसके अलावा इन युवतियों को कुछ समय पहले महू में आर्मी की इमारतों और ट्रेनिंग सेंटर के आसपास फोटोग्राफी करते हुए देखा गया था और इसके बाद से ही इन पर नजर रखी जा रही थी।

सुशील कुमार रेलवे की नौकरी से हुए सस्पेंड, मददगार महिला हैंडबॉल खिलाड़ी से भी होगी पूछताछ; सामने आया दुबई कनेक्शन

देश के लिए ओलंपिक मेडल लाने वाले पहलवान और भारतीय रेलवे यातायात सेवा (IRTS) के अधिकारी सुशील कुमार रेलवे की नौकरी से सस्पेंड हो गए हैं। उत्तर रेलवे के सीपीआरओ दीपक कुमार ने इसकी जानकारी दी है। बता दें कि सुशील कुमार पर एक पहलवान की हत्या में संलिप्तता का आरोप है, जिसकी जाँच चल रही है। इस समय सुशील कुमार पुलिस रिमांड पर हैं। उत्तर रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार सुशील कुमार (Sushil Kumar) जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (JAG) के अधिकारी थे। 

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक छत्रसाल स्टेडियम में पहलवान सागर धनकड़ की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और उसके साथी अजय उर्फ सुनील की मदद राष्ट्रीय स्तर की एक महिला खिलाड़ी ने की थी। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि रविवार (मई 23, 2021) को गिरफ्तारी के समय सुशील व अजय के पास से बरामद स्कूटी इसी महिला खिलाड़ी के नाम पर रजिस्टर्ड है।

पूछताछ में बार-बार बयान बदलते रहे सुशील कुमार

शनिवार (मई 22, 2021) शाम को सुशील व अजय इसी महिला खिलाड़ी के पश्चिम दिल्ली के हरि नगर स्थित घर पर रुके। रविवार को इस खिलाड़ी की स्कूटी लेकर दोनों मुंडका में किसी से रुपए लेने जा रहे थे। उसी समय पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस महिला खिलाड़ी को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। महिला हैंडबॉल की प्लेयर है और दो बार एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी है।

अब सुशील कुमार का दिल्ली के वांटेड अपराधियों के साथ क्राइम कनेक्शन सामने आ रहा है। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक आरोप है कि सुशील दिल्ली-एनसीआर के उस क्रिमिनल ग्रुप के साथ काम कर रहे थे, जिसकी दुश्मनी दुबई में बैठे बड़े गैंगस्टर से थी। जिस रात सुशील पर छत्रसाल स्टेडियम में सागर से मारपीट के आरोप लगे हैं, उस वारदात के वक्त भी कुख्यात अपराधी नीरज बवानिया गैंग से जुड़े लोग वहाँ मौज़ूद थे। दिल्ली पुलिस ने छत्रसाल स्टेडियम के बाहर से एक स्कॉर्पियो बरामद की है, जो नीरज बवानिया के गुर्गो की बताई जा रही है। इस कार से हथियार भी मिले हैं। अब क्राइम ब्रांच इस बात की जाँच कर रही है कि सुशील कुमार के गैंगस्टर नीरज बवानिया से क्या संबंध थे।

इसके अलावा बताया गया कि भगोड़े गैंगस्‍टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी ने केबल के एक व्‍यापारी से 1 करोड़ रुपए की रंगदारी माँगी थी। फोन एक अंतरराष्‍ट्रीय नंबर से किया गया था। जाँच में पता चला कि इस रंगदारी के पीछे सुशील कुमार था। जठेड़ी उत्तर भारत के मोस्‍ट वॉन्‍टेड गैंगस्‍टर्स में से एक है। इस समय उसके दुबई में होने का शक है।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एक टीम ने पहलवान सागर की हत्या के मुख्य आरोपित ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और उनके सहयोगी अजय बक्करवाला से दिल्ली के तीन स्थानों- मॉडल टाउन, शालीमार बाग और छत्रसाल स्टेडियम की घटनाओं के बारे में पूछताछ कर रही है। दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पुलिस जब इन जगहों पर सुशील से पूछताछ कर रही थी तो वह घबराए हुए लग रहे थे और बार-बार अपने बयान बदल रहे थे

सूत्रों ने बताया कि सुशील ने छत्रसाल स्टेडियम में होने की बात कबूल की और कहा कि उसने उन दो गुटों के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश की थी जो वहाँ लड़ रहे थे। हालाँकि, सुशील ने सागर और सोनू को मॉडल टाउन फ्लैट से लाने की बात कबूल नहीं की। जब पुलिस सुशील से इन जगहों पर पूछताछ कर रही थी तो वह घबरा रहे थे और बार-बार अपना बयान बदल रहे थे। 

चार मई की रात की गई थी सागर पहलवान की हत्या

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में चार मई की रात सागर पहलवान की हत्या हुई थी। हत्या का आरोप सुशील कुमार और उसके साथियों पर लगा था। इसके बाद से सुशील कुमार अपने साथी अजय के साथ फरार चल रहा था। दिल्ली पुलिस ने सुशील कुमार पर एक लाख व उसके साथी अजय पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। रविवार (23 मई 2021) को दोनों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया

‘इंटरव्यू रिलीज किया तो SC/ST एक्ट लगा दूँगा’: कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने पत्रकार को धमकाया, सवाल पर फँसे तो खेला ‘दलित कार्ड’

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने एक पत्रकार को अपना इंटरव्यू प्रकाशित करने से रोक दिया। उन्होंने धमकी दी कि अगर उसने उनका इंटरव्यू प्रकाशित किया तो वो SC/ST एक्ट के तहत उस पर मुकदमा दर्ज करा देंगे। चूँकि, उस पत्रकार ने उनसे कुछ कठिन सवाल पूछे थे, इसलिए उदित राज ने उसे जेल भिजवाने तक की धमकी दे डाली। उक्त पत्रकार ने ऑपइंडिया से बात करते हुए अपने इस आरोप की पुष्टि की।

पत्रकार ने कहा कि इस इंटरव्यू के कुछ हिस्सों में देखा जा सकता है कि उदित राज उसे धमकी दे रहे हैं। खुद को ‘सबसे बड़ा दलित नेता’ बताने वाले उदित राज उक्त पत्रकार को प्रताड़ित कर सकते हैं, इसीलिए फ़िलहाल हम उसकी पहचान उजागर नहीं कर रहे। दरअसल, एक सवाल से उदित राज इतना क्रोधित हो गए कि उन्होंने SC/ST एक्ट लगाने की धमकी दे डाली। पत्रकार के अनुसार, “उदित राज ने कहा कि इंटरव्यू रिलीज करवा कर दिखाओ, SC/ST एक्ट में अंदर करवा दूँगा।”

उदित राज पर पत्रकार ने लगाया धमकी देने का आरोप

पत्रकार ने ऑपइंडिया को बताया, “किसान आंदोलन की टूलकिट पर मैंने कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व सांसद उदित राज से सवाल पूछा था। उन्होंने बोला कि भाजपा के ‘प्रचंड मूर्खों’ ने उसे तूल दिया। मैंने काउंटर सवाल किया कि उनके साथ आप भी मूर्खता में शामिल होकर मूर्ख क्यों बन गए? इस बात पर उदित राज ने कहा कि दलित होने के कारण मूर्ख बोल रहे हो… SC/ST एक्ट लगा दूँगा। इसे रिलीज कर के दिखाओ।”

उक्त पत्रकार ने बताया कि उसने पास इंटरव्यू का पूरा वीडियो है लेकिन वो रिलीज नहीं कर पा रहा है। बता दें कि उदित राज ‘अनुसूचित जाति/जनजाति संगठनों का अखिल भारतीय परिसंघ (All India Confederation Of SC/ST Organisations)’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। साथ ही वो कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ता भी हैं। ऑपइंडिया ने इस मामले के मद्देनजर वकीलों से पूछा कि क्या दलित नेता अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए SC/ST एक्ट का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं?

‘किसान आंदोलन’ टूलकिट पर सवाल से जुड़ा है मामला

क्या ऐसा कर के वो अपना इंटरव्यू रिलीज होने से रोक सकते हैं? वकील रवि शर्मा ने कहा कि ये एक्ट तभी लगाया जाता है जब किसी दलित व्यक्ति को उसकी जाति की वजह से अपमानित किया जाए या उसके साथ हिंसा की जाए। उन्होंने कहा कि अपराध जाति के कारण निशाना बना कर हो, तभी ये एक्ट लगाया जाता है। वकील विश्वनाथ वेंकटेश ने कहा कि इस बातचीत के आधार पर ये एक्ट नहीं लगाया जा सकते लेकिन किसी के खिलाफ लगातार घृणित हरकतों का इतिहास दिखाया जाए या ऐसा आरोप लगाया जाए, तब ये संभव है।

इससे पहले भी इस एक्ट के दुरूपयोग के कई मामले सामने आते रहे हैं। राजस्थान पुलिस ने बताया था कि 2020 में SC/ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों % झूठे निकले। 2020 में उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में फेक SC/ST एक्ट वाले मुकदमों के डर से लोगों ने पलायन किया। कुछ महीनों पहले विष्णु तिवारी नामक एक व्यक्ति 20 साल झूठे SC/ST केस में जेल में रह कर निकले। उन्हें अंततः अदालत ने निर्दोष साबित किया।

विवादों से उदित राज का नाता नया नहीं है। हाल ही में उन्होंने कुंभ को लेकर फेक खबर फैलाई थी। उदित राज ने 2019 की पुरानी तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा था, “1500 तबलिगी जमात भारत में कोरोना जेहाद कर रहे थे और अब लाखों साधू जुटे कुम्भ में उस जेहाद और कोरोना से निपटने के लिए।” पोल खुलने पर उन्होंने अपने ट्वीट डिलीट कर लिया। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसके लिए उनकी आलोचना भी की थी।

इधर बाबा रामदेव ने पूछे 25 सवाल, उधर IMA उत्तराखंड ने CM को लिखा- जल्द और सख्त कार्रवाई करिए

बाबा रामदेव के पिछले कई दिनों से ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं जिसमें वो एलोपैथी डॉक्टरों पर टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। अब उनके वायरल टिप्पणी से नाराज आईएमए की उत्तराखंड राज्य शाखा ने सरकार से बाबा रामदेव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

कोरोना संक्रमण में इलाज के बावजूद हो रही मौतों पर बाबा रामदेव का एक वीडियो वायरल होने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के मुख्य ब्रांच भी ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है। वायरल वीडियो में रामदेव कहते हैं कि एलोपैथी दवाएँ खाने से लाखों लोगों की मौत हुई। इसको लेकर आईएमए ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर रामदेव के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की थी। जिसपर बाबा रामदेव ने माफ़ी माँगते हुए भी कई सवाल खड़ा किए थे।

आईएमए ने इस संदर्भ में मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और मुख्य सचिव ओम प्रकाश को पत्र भेजा है। आईएमए की राज्य शाखा के सचिव डॉ. अजय खन्ना की ओर से सोमवार को मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया। इसके साथ ही मुख्य सचिव को बाबा रामदेव के वायरल वीडियो भी वाट्सएप किए गए हैं।

डॉ. अजय खन्ना ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए अपने पत्र में लिखा है कि बाबा रामदेव के बयान से आईएमए के डॉक्टरों में खासी नाराजगी है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भी बाबा रामदेव के बयान को गलत माना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार बाबा रामदेव के खिलाफ तत्काल सख्त से सख्त कार्रवाई करे।

इधर, आईएमए की ओर से बाबा रामदेव को मानहानि का नोटिस भी भेजा जा रहा है। डॉ. अजय खन्ना ने बताया कि अभी नोटिस तैयार किया जा रहा है और मंगलवार को नोटिस बाबा रामदेव को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में मानहानि के दावे के अलावा एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। उत्तराखंड सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई न होने पर आईएमए रणनीति बनाएगा।

बता दें कि हाल ही में एलोपैथी दवाओं को लेकर बाबा रामदेव का एक वीडियो वायरल होने के बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया। इसको लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन ने भी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद रामदेव ने अपने बयान पर डॉक्टरों से माफी माँग ली। हालाँकि, यह विवाद अभी थमा नहीं है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार के सख्त रुख के बाद एलोपैथी चिकित्सा पद्धति पर दिए गए बयान को वापस लेने के बाद बाबा रामदेव सोमवार को एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति और फार्मा कंपनियों पर हमलावर हो गए।

योग गुरु ने सोमवार (24 मई 2021) को एक और ट्वीट किया, जिसके बाद यह मामला फिर से गर्माता दिख रहा है। रामदेव ने ट्वीट कर डॉक्टरों के संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और दवा कंपनियों से 25 सवाल पूछे हैं। उन्होंने हाइपरटेंशन, टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज जैसे कई बीमारियों के स्थायी समाधान के बारे में भी सवाल पूछा है।

बाबा रामदेव ने एक पत्र जारी कर IMA और फार्मा कंपनियों से 25 सवाल पूछे थे। उन्होंने अपने पत्र में पूछा कि एक आदमी का कम से कम एक किलो वजन कम हो जाए। बिना सर्जरी के बैरियाट्रिक सर्जरी और लाइपोसेक्शन के, बिना किसी छेड़छाड़ के, दवाई खाएँ और वजन घट जाए, क्या फार्मा इंडस्ट्री में ऐसी कोई दवाई है? सोरायसिस, सोरायटिक अर्थरायटिस और सफेद दाग का कोई बिना साइड इफेक्ट के स्थायी समाधान बताएँ।

ऐसे ही बाबा रामदेव ने अपने पत्र में IMA से सवाल किया है कि एलोपैथी के पास पार्किंसन का निर्दोष स्थायी समाधान क्या है? बाबा ने यह भी कहा कि कब्ज, गैस, एसीडिटी का फार्मा इंडस्ट्री के पास स्थायी समाधान क्या है? अनिद्रा, लोगों को नींद नहीं आती है, क्योंकि आपकी दवा 4-6 घंटे ही असर करती हैं, वह भी साइड इफेक्ट के साथ। क्या इन सबका कोई स्थायी समाधान है क्या?

‘अब छत्तीसगढ़ में होगी कार्रवाई’: टूलकिट मामले में नोटिस के बाद दिल्ली पुलिस से नाराज़ हुई कॉन्ग्रेस, वापस ली शिकायत

टूलकिट मामले में दिल्ली पुलिस के पास कराई गई अपनी शिकायत को कॉन्ग्रेस ने वापस ले लिया है। कॉन्ग्रेस का कहना है कि वह इस मामले को छत्तीसगढ़ से आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने दिल्ली पुलिस के रवैये से नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी शिकायत वापस ली और कहा कि उन्होंने रायपुर में एक एफआईआर की है। वहीं से मामले में आगे कार्रवाई होगी।

इस केस में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी ट्विटर को कॉन्ग्रेस कमेटी की ओर से पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि जल्द से जल्द भाजपा नेताओं के ट्विट्स को मैनिपुलेटिव मीडिया टैग के साथ जोड़ा जाए, जिनसे भाजपा नेता अपना फर्जी प्रोपगेंडा चला रहे हैं। ट्विटर की सहूलियत के लिए अपने पत्र में सुरजेवाला ने बकायदा हर भाजपा नेता का ट्वीट, उसका यूआरएल समेत दिया।

इस पत्र में ट्विटर से कहा गया कि उनके नेता राजीव गौड़ा ने पहली भी ट्विटर को बताया था कि टूलकिट दस्तावेज कुछ भाजपा नेताओं ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए बनाकर उसे कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ प्रसारित किया। सुरजेवाला ने अपने पत्र में कई भाजपा नेताओं के ट्वीट शेयर करते हुए कहा कि मोदी सरकार के कई मंत्री इस दस्तावेज को शेयर करके झूठा प्रोपगेंडा फैला रहे हैं। इसलिए इन ट्वीट्स के साथ manipulative media का टैग जोड़ा जाए जिससे पता चले कि ये दस्तावेज केवल बरगलाने के लिए तैयार हुआ है।

बता दें कि इससे दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने ‘टूलकिट’ मामले की जाँच को आगे बढ़ाते हुए कॉन्ग्रेस के दो नेताओं को भी नोटिस भेजा था। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि ’टूलकिट’ मामले में कॉन्ग्रेस नेताओं को समन कर इस पूरे घटनाक्रम का विवरण माँगा जाएगा। संबित पात्रा से भी पूछताछ हो सकती है। 

दिल्ली पुलिस के PRO चिन्मय बिस्वाल ने कहा कि ये एक रूटीन प्रक्रिया का ही हिस्सा है। उन्होंने बताया कि ‘ट्विटर इंडिया’ के MD की तरफ से जो नोटिस आया है वो अस्पष्ट है। इस मामले की शिकायतकर्ता कॉन्ग्रेस पार्टी ही है, जिसके नेताओं ने पात्रा व अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ पुलिस व ट्विटर को नोटिस भेजा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इसी समन के बाद कॉन्ग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “हमने दिल्‍ली पुलिस को कह दिया है कि हमारी शिकायत की जाँच छत्‍तीसगढ़ में चल रही है। ऐसे में हम इस मामले को उधर ही देखेंगे।”

AAP का ‘नया पाखंड’: गाजीपुर में ट्रैक्टर पर रख अंतिम संस्कार के लिए बाँट रही लकड़ी, पर पोस्टर के नंबर में निकला ‘झोल’

आम आदमी पार्टी (AAP) को ऑक्सीजन जाँच के लिए ऑक्सीमीटर से लेकर दाह संस्कार के लिए ‘मुफ्त’ में लकड़ियाँ उपलब्ध करवाने के प्रचार में महारत हासिल है। हाल ही में सोशल मीडिया में एक तस्वीर वायरल हुई जिसमें एक ट्रैक्टर पर अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियाँ रखी नजर आ रही है और उस पर लगे पोस्टर में लिखा है कि इन लकड़ियों का इंतजाम आम आदमी पार्टी ने कोविड से जान गँवाने वालों के अंतिम संस्कार के लिए किया है।

इस पोस्टर में बताया गया है कि दाह संस्कार की इन लकड़ियों का इंतजाम उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के लिए किया गया है।

नेटिजंस को पहली नजर में लगा कि ये जरूर ही फेक होगा क्योंकि ये सच नहीं हो सकता है कि कोई राजनीतिक पार्टी मृतकों के दाह संस्कार के लिए लकड़ियों के इंतजाम का प्रचार करे। ये इसलिए भी अजीब लगा क्योंकि ये प्रचार उत्तर प्रदेश के गाजीपुर का था, जहाँ आदमी आदमी पार्टी की कोई मौजूदगी तक नहीं है। हालाँकि गाजीपुर यूपी के उन स्थानों में शामिल है जिसकी सीमा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से लगती है। लाखों ‘किसान’ नए कृषि कानूनों के विरोध में गाजीपुर सीमा पर ही विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ‘किसानों’ को प्रदर्शन के लिए सभी सुविधाएँ भी मुहैया करवाई हैं।

इस वायरल तस्वीर को देखने के बाद, हमें भी उत्सुकता हुई और देखिए OpIndia को इसकी पड़ताल में क्या मिला।

गाजीपुर में दाह संस्कार के लिए लकड़ियाँ ले जाने वाला उपरोक्त ट्रैक्टर की तस्वीर असली है। वास्तव में आम आदमी पार्टी ने दाह संस्कार की लकड़ियों का विज्ञापन खुद अपने आधिकारिक अकाउंट से शेयर किया है।

दाह संस्कार के लिए लकड़ियाँ ले जाने वाले ट्रैक्टरों को आप सुप्रीमो और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के चेहरे वाले झंडों के साथ बहुत धूमधाम से रवाना किया गया।

आप विधायक दिलीप पांडे की पहल

उपरोक्त पहल का समर्थन आम आदमी पार्टी के नेता और तिमारपुर से विधायक दिलीप पांडेय ने किया है। ऑपइंडिया से बात करते हुए आप के ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि इस परियोजना का भुगतान दिलीप पांडे ने किया है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि यह उनकी निजी परियोजना है या इसके लिए पैसा दिल्ली के करदाताओं के पैसे या केवल पार्टी फंड से दिया गया है।

न केवल दिलीप पांडेय बल्कि इस परियोजना का नेतृत्व वास्तव में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने किया।

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व ओएसडी अभिनव राय ने रविवार को दाह संस्कार के लिए लकड़ियों का उपरोक्त विज्ञापन साझा करने के लिए ट्विटर का सहारा लिया।

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में यह भी बताया कि संजय सिंह गंगा नदी में शवों को तैरते देखकर भावुक हो गए और हिंदुओं को सम्मानजनक अंतिम संस्कार करने के लिए दाह संस्कार के लिए लकड़ियों की व्यवस्था की है।

उन्होंने कहा कि सिंह ने अपना पूरा वेतन दाह संस्कार के लिए लकड़ियों का भुगतान करने के लिए दे दिया है। इस बात की काफी संभावनाएँ हैं कि 2022 विधानसभा चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश में आप के प्रचार के लिए करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल अरविंद केजरीवाल द्वारा किया गया हो। ध्यान देने वाली बात ये है ये खुद संजय सिंह ही थे जिन्होंने पिछले साल यूपी में अजीब ‘फ्री ऑक्सीजन चेक’ शुरू किया था, जब​​कि दिल्ली कोविड संकट से जूझ रही थी।

आप के पोस्टर में है एक ‘समस्या’

दाह संस्कार के लिए मुफ्त लकड़ियों के विज्ञापन वाले पोस्टर पर दिया गया नंबर 9935391246 है। हालाँकि, जब ऑपइंडिया ने इस नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की, तो कॉल एक अनजान महिला तक पहुँच गई, जिसे पता तक नहीं था कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं। हालाँकि, जब आप राय के ट्वीट को देखते हैं, तो आप देख सकते हैं कि दाह संस्कार के लिए मुफ्त लकड़ियों के लिए वास्तविक नंबर 9935931246 है। ऑपइंडिया से इस बात की पुष्टि करते हुए, आप नेता ने कहा कि पोस्टर पर छपा नंबर गलत था, लेकिन अब इसे सही कर दिया गया है। दो ‘बेहद गरीब’ लोगों को अब तक दाह संस्कार के लिए मुफ्त लकड़ियाँ दी जा चुकी हैं।

‘क्यों %$# की तरह आकर खड़ी हो जाती हूँ’: जातिसूचक कमेंट कर फँसी युविका चौधरी

टीवी एक्सट्रेस मुनमुन दत्ता के बाद अब ओम शांति ओम जैसी बॉलीवुड फिल्म में काम कर चुकीं अभिनेत्री युविका चौधरी ने जाति विशेष के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने अपने पति प्रिंस नरूला का वीडियो बनाते हुए जाति विशेष के लिए गलत शब्द बोले। इसके बाद ट्विटर पर #ArrestYuvikaChoudhary ट्रेंड करने लगा।

वीडियो में देख सकते हैं कि युविका के पति प्रिंस नरूला अपने बाल कटवा रहे हैं और वह वीडियो में कहती हैं, “ये देखिए। हमेशा जब भी मैं व्लॉग बनाती हूँ क्यों मैं %$# की तरह आकर खड़ी हो जाती हूँ। मुझे इतना टाइम नहीं मिलता…।”

इस 9 सेकेंड के क्लिप के वायरल होने के बाद से ट्विटर पर उनकी गिरफ्तारी की माँग हो रही है। एक यूजर का कहना है, “हम तो समझते थे कि पढ़ी-लिखी लडकियाँ समाज के पुराने संस्कारों से ऊपर उठकर होंगी। लेकिन तुम्हारे दिमाग में समाज की कुछ जाति के लिए गोबर भरा है। जो संस्कार घर मे दिए जाते हैं बच्चे आगे चलकर उन्हीं संस्कारों से अवगत कराते हैं।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर गिरफ्तारी की माँग उठने के बाद युविका ने वीडियो में इस्तेमाल किए गए शब्द पर माफी माँग ली है। उन्होंने कहा है, “मैंने मेरे लास्ट व्लॉग में जिस शब्द का इस्तेमाल किया उसका मुझे मलतब नहीं पता था। मेरा मतलब किसी को हर्ट करना नहीं था और मैं किसी को हर्ट करने के लिए ऐसा कभी नहीं कर सकती। मैं हर एक से माफी माँगती हूँ। मुझे आशा है कि आप समझेंगे। सभी को प्यार।”

ओम शांति ओम जैसी कुछ बॉलीवुड फिल्मों के अलावा युविका चौधरी कुमकुम भाग्य, अम्मा, नच बलिए 9, बिगबॉस 9 जैसे कई टीवी सीरियल्स में काम कर चुकी हैं। वह एमटीवी रोडीज विनर प्रिंस नरूला की पत्नी हैं। दोनों की वीडियोज सोशल मीडिया पर आती रहती हैं।

युविका से पहले इसी तरह के शब्द का इस्तेमाल करने को लेकर मुनमुन दत्ता विवादों में आई थीं। वीडियो में उन्होंने जाति विशेष पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वह *&^ नहीं दिखना चाहतीं। इसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके खिलाफ़ गुस्सा जाहिर किया था और उनकी गिरफ्तारी की माँग की थी। बाद में उनके विरुद्ध एससी/एसटी एक्ट के तहत केस भी दर्ज हो गया था।

टूलकिट मामले में कॉन्ग्रेस के 2 नेताओं को नोटिस, ट्विटर HQ में हड़कंप: FBI के पूर्व अधिकारी को काम पर लगाया

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने ‘टूलकिट’ मामले की जाँच को आगे बढ़ाते हुए कॉन्ग्रेस के दो नेताओं को भी नोटिस भेजा है। मंगलवार (मई 25, 2021) को कॉन्ग्रेस पार्टी की आईटी सेल के मुखिया रोहन गुप्ता और पार्टी के प्रवक्ता MV राजीव गौड़ा को नोटिस भेजी गई। कहा जा रहा है कि इस मामले में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा को भी समन भेजा जा सकता है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस पर ‘टूलकिट’ के जरिए देश, हिन्दू धर्म और कुंभ को बदनाम करने के आरोप लगाए थे।

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली और गुरुग्राम स्थित ‘ट्विटर इंडिया’ के दफ्तरों में जाकर नोटिस दिया। ट्विटर ने सोशल मीडिया पर कुछ हैंडल्स द्वारा शेयर किए गए पोस्ट्स को ‘छेड़छाड़ किया हुआ मीडिया’ बता दिया था। दिल्ली पुलिस ने शारीरिक रूप से जाकर ट्विटर के दोनों दफ्तरों को नोटिस दिया। इससे पहले केंद्र सरकार ने ट्विटर द्वारा टूलकिट वाली ट्वीट्स पर भ्रामक का ठप्पा लगाए जाने पर आपत्ति जताई थी।

इनमें से एक ट्वीट संबित पात्रा का भी है। दिल्ली पुलिस ने अब तक इस मामले की FIR दर्ज नहीं की है लेकिन सभी पक्षों को समन कर के उनका बयान दर्ज किए जाने के बाद FIR दर्ज की जा सकती है। अभी इससे जुड़े संगठनों और व्यक्तियों को समन कर शुरुआती जाँच की जा रही है। दिल्ली पुलिस ने Twitter से पूछा है कि उसने पास इस टूलकिट को लेकर क्या सूचनाएँ हैं और किन तथ्यों के आधार पर उसने इन्हें ‘छेड़छाड़ किया हुआ’ करार दिया।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि’टूलकिट मामले में कॉन्ग्रेस नेताओं को समन कर इस पूरे घटनाक्रम का विवरण माँगा जाएगा। संबित पात्रा से भी पूछताछ हो सकती है। दिल्ली पुलिस के PRO चिन्मय बिस्वाल ने कहा कि ये एक रूटीन प्रक्रिया का ही हिस्सा है। उन्होंने बताया कि ‘ट्विटर इंडिया’ के MD की तरफ से जो नोटिस आया है वो अस्पष्ट है। इस मामले की शिकायतकर्ता कॉन्ग्रेस पार्टी ही है, जिसके नेताओं ने पात्रा व अन्य भाजपा नेताओं के खिलाफ पुलिस व ट्विटर को नोटिस भेजा।

TOI की खबर के अनुसार, इससे अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित ट्विटर के मुख्यालय में भी हड़कंप मच गया है और कंपनी के डिप्टी जनरल काउंसल व VP जिम बेकर को पूरे मामले को संभालने के लिए लगाया गया है, जो पूर्व में अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी FBI के अधिकारी भी रहे हैं। TOI के सूत्रों का कहना है कंपनी बायडेन प्रशासन से भी मदद माँग सकती है। ट्विटर में पैनिक का माहौल है और अब नजरें बेकर के अगले कदमों पर है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस पार्टी ने बुधवार (19 मई, 2021) को ट्विटर को एक ईमेल भेज कर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रवक्ता संबित पात्रा, केंद्रीय कपड़ा और महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी, राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष समेत कई पार्टी पदाधिकारियों के हैंडल्स को सस्पेंड करने को कहा था। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि जिस दस्तावेज को उसका टूलकिट बता कर शेयर किया जा रहा है, वो फर्जी है।

‘मुझे इस जगह रहने से नफरत है’: पाकिस्तान में मिया खलीफा का TikTok बंद, इमरान सरकार पर भड़के अपने ही नागरिक

पाकिस्तान सरकार ने मिया खलीफा का टिकटॉक (TikTok) अकाउंट बैन कर दिया है। इसके बाद पूर्व पोर्न स्टार ने पाकिस्तानी यूजर्स तक अपनी वीडियो पहुँचाने का नया तरीका खोजा है। मिया ने पाकिस्तान में टिकटॉक अकाउंट बैन किए जाने के बाद ऐलान किया है कि वह पाकिस्तानी प्रशंसकों के लिए ट्विटर पर अपनी छोटी वीडियो उपलब्ध कराएँगी। 

खलीफा ने 23 मई की देर रात 2 बजे ट्वीट किया, “मैं अब से अपने सारे टिकटॉक (वीडियो) ट्विटर पर दोबारा पोस्ट कर रही हूँ। ये मेरे उन पाकिस्तानी फैन्स के लिए है जो फासीवाद को मिटाना चाहते हैं।”

इस ट्वीट के बाद कई पाकिस्तानी यूजर्स खलीफा के समर्थन में आए। अम्मार नावेद ने लिखा, “हम तुमको तुम्हारे अतीत के लिए नहीं प्यार करते हैं, आपने अपना पास्ट छोड़ दिया है, हम भी इसे भूल गए हैं। हम आपके साहस के लिए आपसे प्यार करते हैं कि आपने बच्चों और आतंकी राज्य द्वारा सताए गए लोगों के लिए आवाज उठाई। पाकिस्तान से प्यार और दुआएँ स्वीकार करें।”

तहला बिन आजाद ने इमरान सरकार के इस कदम की निंदा की और उनके अलावा कई यूजर्स ने कहा कि Pak सरकार को शर्म आनी चाहिए कि उन्होंने मिया खलीफा के बदलने के बाद भी उसके साथ ऐसा किया। पाकिस्तानियों ने खलीफा को आश्वासन दिया कि वे उनके साथ हैं।

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान टेलीकॉम्यूनिकेशन अथॉरिटी (पीटीए) ने मिया का अकाउंट को बैन करने पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। न ही इस फैसले के पीछे की वजह बताई है। मिया को भी अकाउंट बैन करने की जानकारी यूजर से ही मिली थी। इसके बाद वह उन्होंने ट्विटर पर पाकिस्तानी सरकार को जमकर सुनाई।  

टिकटॉक पर मिया खलीफा के 22 मिलियन फॉलोवर्स हैं और उन्हें इस प्लेटफॉर्म पर 270 मिलियन लाइक मिले हुए हैं। पाकिस्तानी भी उन्हें काफी फॉलो करते हैं।  एक यूजर ने तो इस खबर को सुनने के बाद कहा कि मिया खलीफा को बैन करना घृणा के अतिरिक्त कुछ और नहीं है। उसने कहा, “मुझे इस जगह रहने से नफरत है।”

बता दें कि मिया खलीफा एक पूर्व पॉर्न स्टार हैं। उनकी सोशल मीडिया पर बड़ी फैन फॉलोइंग हैं। इसके अलावा वह अपना यूट्यूब चैनल भी चलाती हैं। हाल की बात करें तो वह सोशल मीडिया पर इजरायल की निंदा करने के कारण चर्चा में आई थीं। उन्होंने बिना एडिट किया हुआ ट्वीट पोस्ट किया था जिसके बाद ये बातें शुरू हो गई थीं कि वह इजरायल विरोधी अभियान का हिस्सा हो सकती हैं। 

इससे पहले वह भारत के तथाकथित किसान प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त करने के लिए अमेकिन पॉप सिंगर रिहाना और पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग के साथ सोशल मीडिया पर सामने आई थीं। उन्होंने किसान आंदोलन के समर्थन में ट्वीट किए थे और सरकार के विरुद्ध सोशल मीडिया पर जमकर रिएक्शन दिया था, जिसको लेकर एक्टिव यूजर्स ने जोरदार प्रतिक्रिया व्यक्त की थी।