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फराह खान ने खुलेआम की मोदी समर्थकों की मौत की कामना- माँगी दुआ, पहले भी कर चुकी हैं RSS की ISIS से तुलना

कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच रविवार (मई 9, 2021) को ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली ने ट्विटर पर मोदी समर्थकों और उनके परिजनों के लिए मृत्यु की कामना की। मोदी सरकार की बुराई न करने वालों पर अपना गुस्सा निकालते हुए फराह खान ने कहा कि वह दुआ करती हैं कि भक्तों का कोई परिजन मरे ताकि उनका भी खून सरकार के विरुद्ध खौल सके।

अपने ट्वीट में फराह खान ने लिखा, “कोरोना वायरस महामारी से निपटने में पीएम की विफलता के मद्देनजर हर भक्त के लिए, मैं दुआ करती हूँ कि तुम्हारा कोई परिजन मरे ताकि तुम्हें वो गुस्सा महसूस हो जो कुप्रबंधन और सत्ता की भूखे एजेंडे के कारण अपनों को न बचा पाने की वजह से पैदा होता है।”

बता दें कि ट्विटर पर 7 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स वाली फराह अली खान उन्हीं संजय खान की बेटी हैं, जिन्होंने एक टीवी सीरिज में टीपू सुल्तान की भूमिका निभाई। वह फिरोज खान की भतीजी और ऋतिक रौशन की पूर्व पत्नी सुजैन खान की बहन हैं।

लोगों का इस ट्वीट को देखकर कहना है कि जब मोदी सरकार से भरोसा उठने लगता है वैसे ही ऐसे लोग आकर ऐसी बातें कर देते हैं कि दोबारा उनपर विश्वास बन जाता है। एक यूजर ने फराह खान के साथ ट्वीट पर हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट शेयर किए हैं।

वघीशा नाम की ट्विटर यूजर का कहना है कि इस बातचीत के बाद ही फराह ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। इस ट्वीट में वघीशा ने पूछा था कि आखिर वो ऐसी दुआ कैसे कर सकती हैं जो कोई दुश्मनों के लिए भी न करें।

फराह ने वघीशा के ट्वीट के जवाब में लिखा, “जब मैंने ट्वीट किया मैं बहुत ज्यादा परेशान थी क्योंकि कई लोग हैं जिन्हें मैं जानती थी और खो दिया। मुझे अफसोस है कि मैंने क्या ट्वीट किया और ये स्पष्ट भी किया है कि किसी की मौत की कामना नहीं करनी चाहिए। मैंने जो भी कहा वो गुस्से और पीड़ा में कहा।”

उल्लेखनीय है कि कोरोना के कारण मोदी समर्थकों या फिर संघियों की मौत की कामना पहली बार नहीं की गई। इससे पहले बंगाल में हिंसा के वक्त कई लोगों ने भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत या फिर संघियों पर हो रही बर्बरता पर अपनी खुशी खुलकर मनाई थी। अब भी कई लिबरल आज अपनी कुंठा संवेदनाओं की आड़ में निकाल रहे हैं और खुलेआम उन लोगों की मृत्यु की कामना कर रहे हैं जिन्हें वह जानते तक नहीं।

जाहिर है कि कोई इस बात से इंकार नहीं कर सकता कि हमारा प्रशासन कोविड की दूसरी लहर को संभालने में असमर्थ रहा और स्वास्थ्य असुविधाओं के कारण असमय लोगों की जानें गईं। लेकिन, इस दौरान ऐसे संदेश जिनमें संघियों और उनके प्रियजनों की मौत की कामना की गई हो, वह भी कहीं से कहीं तक इंसानियत की मिसाल पेश नहीं कर रहे। किसी की जान जाने पर खुशी मनाना या फिर किसी की मरने की ही कामना कर लेना, इस बात को बताता है कि महामारी के समय भी एक निश्चित विचाराधारा के प्रति लिबरलों, वामपंथियों और कट्टरपंथियों में गुस्सा उतना भरा हुआ है जितना की इस महामारी से पहले था।

फराह खान अली के बारे में मालूम हो कि वह पहले भी आरएसएस की ISIS आतंकी संगठन के साथ तुलना कर चुकी हैं। इसके अलावा वह महाराष्ट्र की बदहाली के बावजूद उद्धव सरकार की तारीफ करती रही हैं।

ओलंपियन सुशील कुमार के खिलाफ ‘लुक आउट नोटिस’ जारी, नेशनल जूनियर चैंपियन रहे पहलवान की हत्या के मामले में तलाश

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में हुई मारपीट और 23 साल के एक पहलवान की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने ओलंपियन सुशील कुमार के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया है। पुलिस का कहना है कि छत्रसाल स्टेडियम में हुई मारपीट में 23 वर्षीय रेसलर सागर राणा की मौत के बाद से सुशील कुमार फरार हैं।

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम से 4 मई 2021 को मारपीट की खबर आई थी। इस दौरान मारपीट में सागर राणा की मौत हो गई थी। वह जूनियर नेशनल चैंपियनशिप विजेता थे और उनके पिता दिल्ली पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल हैं।

इस मामले में एडिशनल DCP (नॉर्थ-वेस्ट) डॉक्टर गुरइकबाल सिंह सिद्धू ने बताया था कि इस मारपीट में कई पहलवान जख्मी हुए थे और पुलिस ओलंपियन सुशील कुमार के घर भी गई थी, लेकिन वो वहाँ से नदारद थे। फिलहाल उनकी तलाश की जा रही है।

एक आरोपी हो चुका है गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में 24 साल के प्रिंस दलाल को गिरफ्तार किया गया है। वह हरियाणा के झज्जर का रहने वाला है। छत्रसाल स्टेडियम में हुई झड़प के दौरान फायरिंग भी हुई थी। दलाल को डबल बैरेल लोडेड बंदूक के साथ दबोचा गया। मामले के एक अन्य आरोपित सोनू महल के बारे में पता चला है कि वो गैंगस्टर काला जठेड़ी का करीबी है। वह इससे पहले भी हत्या और डकैती के मामलों में जेल जा चुका है।

सिद्धू के मुताबिक पुलिस को पता चला है कि सुशील कुमार, अजय, प्रिंस, सोनू, सागर, अमित और अन्‍य लोगों के बीच स्‍टेडियम के पार्किंग क्षेत्र में झगड़ा हुआ था। मॉडल टाउन पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई है। FSL (फॉरेंसिक साइंस लैब) रोहिणी के विशेषज्ञों ने घटनास्थल से फोरेंसिक सबूत भी जुटाए हैं।

फिलहाल, इस मामले में सुशील कुमार समेत अन्य लोगों के खिलाफ दिल्ली के मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। एडिशनल डीसीपी सिद्धू ने कहा है कि इस घटना में हम सुशील कुमार की भूमिका की जाँच कर रहे हैं।

सुशील कुमार ने खुद को बताया था निर्दोष

इस घटना को लेकर बुधवार (5 मई 2021) को सुशील कुमार ने कहा था कि इस मामले से उनके पहलवानों का कोई लेना-देना नहीं है। इसके लिए बाहरी लोग जिम्मेदार हैं। उनका दावा है कि उन्होंने इसके बारे में पुलिस को बताया था कि कुछ बाहरी लोग उनके इलाके में घुस आए थे और उन्होंने मारपीट की थी।

गौरतलब है कि रेसलर सुशील कुमार ने वर्ष 2012 में लंदन ओलंपिक में रेसलिंग में सिल्वर मेडल जीता था। इससे पहले उन्होंने बीजिंग ओलंपिक 2008 में कांस्य पदक जीता था।

असम में 13 मंत्रियों संग हिमंत बिस्वा सरमा ने ली CM पद की शपथ, बंगाल में ममता ने बनाए 43 मंत्री

हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार (10 मई 2021) असम के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। उन्होंने सर्बानंद सोनोवाल की जगह ली है। असम विधानसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के शिल्पकार रहे सरमा को राज्यपाल जगदीश मुखी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उनके साथ 13 मंत्रियों ने भी शपथ ली।

शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, असम के पूर्व सीएम सर्बानंद सोनोवाल, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लव देव, मेघालय के सीएम कोनराड संगमा, मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह और नगालैंड के सीएम निफिउ रियो भी मौजूद थे।

सरमा को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में दिल्ली में रविवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में असम में पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया था। बीजेपी ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल करते हुए सत्ता में वापसी की थी और इस जीत में उनकी भूमिका काफी अहम रही थी।

सरमा को उत्तर-पूर्व राज्यों में बीजेपी की मजबूत होती स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने 2015 में कॉन्गेस में नजरअंदाज किए जाने के बाद पार्टी छोड़ दी थी, जबकि उन्हें सीएम तरुण गोगोई का करीबी माना जाता था।

वहीं 5 मई को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के तौर पर लगातार तीसरी बार शपथ लेने वाली ममता बनर्जी सरकार के कैबिनेट के 43 मंत्रियों ने सोमवार (10 मई) को मंत्री पद की शपथ ली। हालांकि मंत्रियों के विभागों के बँटवारे की घोषणा अभी नहीं हुई और इसका ऐलान जल्द किया जाएगा।

योगेंद्र यादव को पता था कि ‘किसानों’ के टेंट में हुआ है गैंगरेप, AAP के दो नेता भी आरोपित: टिकरी बॉर्डर पर हुई थी घटना

दिल्ली के टिकरी बॉर्डर स्थित ‘किसानों’ के प्रदर्शन स्थल पर बंगाल से आई युवती की कोरोना से मृत्यु के बाद मामले में नया मोड़ आया है। युवती के पिता का कहना है कि उन्हें उनकी बेटी ने खुद फोन पर कहा था कि उसका शारीरिक शोषण किया गया था।

गैंगरेप के इस मामले के आरोपितों में से दो आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता हैं। इतना ही नहीं, दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में दावा किया गया है योगेंद्र यादव को किसानों के टेंट में हुई इस घटना के बारे में पता था।

पिता की शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 120बी, 342, 354,365, 376D और 506 के तहत 6 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया है। इनमें किसान नेता और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि घटना की जानकारी योगेंद्र यादव तक को थी। लेकिन उन्होंने पीड़िता की मृत्यु के बाद भी इसे पुलिस से साझा नहीं किया।

30 अप्रैल को झज्जर के अस्पताल में युवती की मृत्यु के बाद उसके पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। अब पुलिस मामले में जाँच कर रही है। बहादुरगढ़ थाने के पुलिस अधिकारी विजय कुमार का कहना है,”युवती की मृत्यु कोरोना से हुई। उसका उपचार कोरोना मरीजों की तरह किया गया। हमने दस्तावेजों के लिए अप्लाई किया है। जैसे ही कुछ डॉक्यूमेंट हमें मिलते हैं हम तभी पुष्टि कर पाएँगे कि ये मौत कोरोना संबंधी थी।”

पीड़िता के पिता की शिकायत

मृतका के पिता ने अपनी शिकायत में 6 लोगों का नाम लिया। इनकी पहचान अनिल मलिक, अनूप सिंह छनौत, अंकुर सांगवान, कविता आर्या, जगदीश ब्रार और योगिता सुहाग के तौर पर हुई है। ये सारे लोग संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बंगाल गए थे। वहीं इनकी मुलाकात लड़की और उसके पिता से हुई थी। लड़की ने इनके सामने प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जताई। इसके बाद वह उनके साथ 11 अप्रैल को हावड़ा से रवाना हो गई।

पीड़िता के पिता की शिकायत

शिकायत के अनुसार, युवती ने पिता को बताया कि अनिल और अनूप अच्छे लोग नहीं हैं। यात्रा के दौरान जब सब सो रहे थे तब उनमें से अनिल ने पास आकर उसे जबरन चूमा। उसने हड़बड़ी में उसे अपने से दूर होने को कहा और दोबारा हरकत न दोहराने की चेतावनी दी। मगर, इसके बाद अनिल और अनूप उसे ब्लैकमेल करने लगे, उस पर प्रेशर बनाने लगे।

पिता के मुताबिक, उनकी बेटी के साथ ट्रेन में भी जबरदस्ती हुई और बाद में प्रदर्शनस्थल पर भी उसे आरोपितों के साथ जबरदस्ती टेंट शेयर करने को कहा गया। युवती ने जब सारी आपबीती पिता को बताई तो उन्होंने उसे सलाह दी कि वह कुछ महिलाओं को विश्वास में लेकर अपनी बातें बताए।

16 अप्रैल को उसने योगिता और जगदीश को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद उसका बयान वीडियो में कैद किया गया। पिता ने फोन कर ये वीडियो माँगी। 17 अप्रैल को बताया गया कि युवती को यूरीन के साथ खून आया है। इसके बाद 18 अप्रैल को उसे महिलाओं के साथ टेंट में शिफ्ट कर दिया गया। 21 अप्रैल को उसमें कोविड के लक्षण दिखने लगे और हल्का बुखार भी आया। 24 अप्रैल उसे साँस लेने में दिक्कत हुई और 26 अप्रैल उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

AAP से आरोपितों का लिंक

रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में आरोपित बनाया गया अनूप सिंह हिसार क्षेत्र में AAP का सक्रिय कार्यकर्ता है। वहीं अनिल मलिक दिल्ली में AAP का कार्यकर्ता है। आप विधायक सुशील कुमार का इस मामले में कहना है कि उन्हें इस घटना का कुछ नहीं पता लेकिन ये दोनों किसान प्रदर्शनस्थल पर सक्रिय थे। किसान सोशल बैनर आर्मी के बैनर तले ये साइट पर काम कर रहे थे। लेकिन जब से युवती की मृत्यु हुई, तभी से अनूप प्रदर्शनस्थल से फरार है। 

योगेंद्र यादव को थी सारी जानकारी

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, युवती की मृत्यु के बाद उसके पिता द्वारा कराई गई एफआईआर में संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव का नाम भी सामने आया है। पिता का कहना है कि योगेंद्र यादव को इस बात की जानकारी थी कि किसान नेता युवती के साथ गलत कर रहे हैं। वह 24 अप्रैल से युवती के संपर्क में रहे, लेकिन उसकी मौत से पहले या बाद में पुलिस को पूरे घटनाक्रम की सूचना नहीं दी।

दैनिक भास्कर के रोहतक संस्करण में 10 मई 2021 को प्रकाशित संबंधित खबर

संयुक्त किसान मोर्चा का बयान

बता दें कि कोरोना संक्रमण के चलते युवती की 30 अप्रैल को मौत हो गई थी। इसके बाद किसान नेताओं ने सभी कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए उसे शहीद करार दिया और उसका शव खुली जीप में रखकर घुमाया। हालाँकि, बाद में युवती के साथ रेप वाला एंगल उजागर हुआ, जिसके बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने इस संबंध में बयान जारी किया।

बयान में कहा गया कि वह आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे। उन्होंने किसान सोशल आर्मी का टेंट भी कथित तौर पर प्रदर्शनस्थल से हटा दिया है। पंजाब किसान यूनियन के नेता ने कहा, “ये गंभीर चिंता का विषय है जिस पर बात होनी चाहिए। यहाँ प्रदर्शन पर पुरुष और महिलाओं में कोई अंतर नहीं है। महिलाएँ बड़े तादाद में भाग ले रही हैं। किसान मामले में पड़ताल कर रहे हैं और सुनिश्चित कर रहे हैं कि दोबारा ऐसा न हो।”

मालूम हो कि यौन उत्पीड़न का पहला मामला किसान आंदोलन के बीच प्रदर्शनस्थल से नहीं आया है। इससे पहले मोहम्मद जुबेर, वरुण चौहान, अंतरप्रीत सिंह और मनीष कुमार का नाम भी यौन उत्पीड़न केस में उछला था। इन लोगों ने कथित तौर पर कई पीड़िताओं का शोषण किया था।

‘खान चाचा’: नवनीत कालरा के खिलाफ दिल्ली पुलिस का लुक आउट नोटिस, अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट पहुँचा

ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर की कालाबाजारी के आरोपित बिजनेसमैन नवनीत कालरा के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने लुक आउट नोटिस जारी किया है। दूसरी ओर कालरा ने दिल्ली की साकेत कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। कोर्ट मंगलवार (11 मई 2021) को इस पर सुनवाई करेगा। कालरा की याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा गया है। साथ ही उसे किसी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार किया।

इससे पहले पुलिस के हाथ कालरा की ऑडियो क्लिप लगी थी, जिसमें वह खान मार्केट के अपने दोस्तों के साथ ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर को लेकर बात करते सुना गया था।

नवनीत कालरा को यह कहते सुना गया था कि उसके ऊपर ‘बहुत अधिक दबाव’ है और वह सभी कॉल्स का जवाब नहीं दे सकता। वह कहता है, “मेरे पास 2 लाख कॉल्स हैं। इसलिए मैं हर किसी के पर्सनल सवालों का जवाब नहीं दे सकता हूँ। आपको कौन सा मॉडल (ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर) भेजा गया है, इसकी डिटेल्स मैसेज में दी गई है। मैं खान मार्केट के लोगों को उनके उपयोग के लिए प्रति व्यक्ति एक मशीन दे सकता हूँ।”

कालरा के दिल्ली में तीन रेस्टोरेंट हैं, जहाँ शुक्रवार (7 मई 2021) को छापा मारकर पुलिस ने 524 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए थे। दिल्ली पुलिस ने रविवार (9 मई 2021) को जानकारी दी थी कि बिजनेसमैन नवनीत कालरा गिरफ्तारी के डर से फरार हो गया है। उसने अपने मोबाइल बंद कर रखा है। ‘खान चाचा’ रेस्टोरेंटट की 96 ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर बरामद किए जाने के बाद सील कर दिया गया था। बीजेपी ने आरोप लगाया था कि इस रेस्टोरेंट का मालिक कालरा है।

केजरीवाल ने ‘दिल्ली का निर्माता’ कहा था

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में अरविंद केजरीवाल ने सीएम पद की शपथ लेते हुए 48 लोगों को “दिल्ली के निर्माता” के तौर पर सम्मानित किया था। नवनीत कालरा उन्हीं 48 लोगों में शामिल था। हालाँकि, अब दिल्ली के इस कथित निर्माता पर कोरोना संक्रमण से पैदा हालात का फायदा उठाते हुए कालाबाजारी का आरोप है।

ममता बनर्जी को कोविड के नाम पर चाहिए वो ‘छूट’ जो पहले ही केंद्र दे चुकी है, निर्मला सीतारमण ने हकीकत से कराया साक्षात्कार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डोनर्स के अनुरोध पर केंद्र सरकार से ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर, सिलेंडर और कोरोना से जुड़ी दवाओं पर जीएसटी/सीमा शुल्क समेत अन्य ऐसे करों में छूट देने की माँग की है। इसको लेकर उन्होंने 9 मई, 2021 को पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था।

पत्र में ममता ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर के बीच माँग और आपूर्ति के अंतर को कम करने के लिए बड़ी संख्या में संगठन, व्यक्ति और एजेंसियाँ जरूरी मेडिकल सेवाओं की आपूर्ति के लिए आगे आए हैं। इन दानदाताओं ने राज्य से एसजीएसटी/सीजीएसटी/आईजीएसटी और कस्टम में छूट देने की माँग की है।

ममता द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र

हालाँकि, सीएम के पत्र से ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें केंद्र की योजनाओं के बारे में जानकारी ही नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि जिस छूट की माँग वो केंद्र से कर रही हैं वो पहले से ही राज्यों को दी गई हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा की गई माँग को सार्वजनिक किए जाने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उन्हें जवाब दिया। वित्त मंत्री ने ट्विटर पर नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जानकारी दी कि कोविड-19 राहत वस्तुओं की सूची को आयात के लिए IGST से छूट 3 मई को ही दी गई थी जबकि सीमा शुल्क/हेल्थ सेस से छूट बहुत पहले दी गई थी।

सीतारमण ने ममता बनर्जी से उस लिस्ट को दोबारा चेक करने का आग्रह किया है, क्योंकि सूची में जिन सामानों का जिक्र है उनमें पहले से ही छूट दी गई थी।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने ममता को इस बात की भी जानकारी दी कि भारतीय रेड क्रॉस द्वारा देश में बिल्कुल मुफ्त वितरण के लिए आयात की गईं सभी कोरोना राहत सामग्री को IGST समेत सभी प्रकार के टैक्स से छूट दी गई थी।

केंद्र द्वारा बनाए गए प्रावधानों के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए सीतारमण ने स्पष्ट किया कि परीक्षण किटों, ऑक्सीजन उपकरणों, महत्वपूर्ण दवाओं इत्यादि विभिन्न वस्तुओं पर टैक्स छूट तब लागू होती है जब किसी भी संस्था, राज्य सरकार, राहत एजेंसी, या स्वायत्त निकाय द्वारा किसी भी राज्य सरकार द्वारा जारी प्रमाण पत्र के आधार पर देश में मुफ्त वितरण के लिए नि: शुल्क आयात किया जाता है।

वैक्सीन पर टैक्स स्लैब को स्पष्ट करते हुए, वित्त मंत्री ने मूल्य निर्धारण, टैक्सेशन और छूट का एक विस्तृत ब्यौरा दिया, जिसमें बताया गया कि क्यों वैक्सीन पर जीएसटी की पूरी छूट संभव नहीं है।

पश्चिम बंगाल में बीते 24 घंटों में लगभग कोरोना वायरस के 20,000 नए संक्रमित मिले। वहीं एक दिन में सर्वाधिक 127 मरीजों की मौत भी हुई है।

डॉक्टर के साथ मिल रेमडेसिविर की कालाबाजारी कर रहा था वेल्डर शाहरुख: इंदौर से 3 गिरफ्तार

कोरोना संकट के बीच कहीं ऑक्सीजन सिलिंडर की ब्लैक मार्केंटिंग पकड़ी जा रही है तो कहीं जरूरी दवाइयाँ मनमानी कीमतों पर बिक रही हैं। इसी क्रम में एक नया मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से उजागर हुआ। यहाँ रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी में 3 आरोपित गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से 4 इंजेक्शन बरामद हुए, जिसे यह 30 हजार रुपए में बेच रहे थे।

आरोपितों की पहचान डॉ. राकेश मालवीय, मेडिकल स्टोर चलाने वाले अमन ताज और वेल्डिंग का काम करने वाले शाहरुख खान के तौर पर हुई। बाणगंगा टीआई राजेंद्र सोनी ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुछ लोग कार में रेमडेसिविर इंजेक्शन रखे हुए हैं और ग्राहक ढूँढ रहे हैं। इस सूचना के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम बनाई गई और आरोपितों की घेराबंदी कर उन्हें पकड़ा गया।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, टीआई ने बताया कि अमन का सांवेर में मेडिकल स्टोर है। अमन और डॉ. राकेश मालवीय की पुरानी पहचान है। वहीं आरोपित शाहरुख वेल्डिंग का काम करता है। अब तक क्राइम ब्रांच 18 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनके पास से 417 रेमडेसिविर इंजेक्शन भी जब्त हुए हैं।

बता दें कि मध्यप्रदेश में कोरोना की रफ्तार बढ़ने से धोखाधड़ी करने वाले खुलेआम लोगों को लूटने का काम करने लगे हैं। पिछले दिनों इंदौर में ही ऑक्सी फ्लोमीटर की ब्लैक मार्केंटिंग करते हुए कॉन्ग्रेस के मंडल अध्यक्ष यतींद्र वर्मा को राजेंद्र नगर टीआई ने एक फोन कॉल से पकड़ा था।

राजेंद्र नगर टीआई अमृता सोलंकी ने वर्मा को पकड़ने के लिए एक मरीज की परिजन बनकर उससे संपर्क किया और उसे मनगढ़ंत कहानी में फँसाकर सबूतों के साथ धर दबोचा। इसके बाद सख्ती से पूछताछ में यतींद्र ने सारी सच्चाई उगल दी। उसने बताया कि अरबिंदो अस्पताल के पास उसका किराए का मकान है। उसने वहीं ऑक्सी फ्लोमीटर रखे हुए हैं। जब पुलिस टीम बताई जगह पर पहुँची तो ऑक्सी फ्लोमीटर बरामद हो गए। 

इसके अलावा इंदौर के विजय नगर में रेमडेसिविर की कालाबाजरी में 11 अन्य लोग गिरफ्तार हुए हैं। ये सारे लोग कोरोना संक्रमण में उपयोगी जीवनरक्षक दवा टोसी और रेमडेसिविर इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग कर रहे थे। पुलिस ने सबको 4 अलग-अलग जगह से पकड़ा। इनके पास से 14 इंजेक्शन और 5 डिब्बे फेबी फ्लू के जब्त हुए। इस गैंग के सरगना सुनील मिश्रा को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस को संदेह है कि सुनील मिश्रा गुजरात की नकली रेमडेसिविर फैक्ट्री से जुड़ा हो सकता है। ये लोग सोशल मीडिया के जरिए जरूरतमंदों से संपर्क करके उन्हें महंगे दामों में इन्जेक्शन बेचते थे।

उत्तर प्रदेश: ग्राम प्रधानी जीतने वाले रकमुद्दीन समेत 5 गौहत्या में गिरफ्तार, चुनावी जीत पर ‘बीफ’ पार्टी का किया था वादा

उत्तर प्रदेश में हाल ही में पंचायत चुनाव संपन्न हुए हैं। इन चुनावों में जीत हासिल करने वाले सोनभद्र जिले के बरवाखड़ गाँव के नवनिर्वाचित प्रधान रकमुद्दीन को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। एक अधिकारी के अनुसार रकमुद्दीन के अलावा चार अन्य लोग भी गौहत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं।

स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, उसने कथित तौर पर चुनाव जीतने पर मतदाताओं को बीफ पार्टी देने का वादा किया था। गुरुवार (6 मई 2021) की देर रात बीफ पार्टी और गौहत्या की खबर जैसे ही ग्रामीणों को लगी तो उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। एक पुलिस अधिकारी ने बताया है कि गौहत्या के आरोप में ग्राम प्रधान को चार अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया।

जिले के एसपी अमरेन्द्र प्रसाद सिंह ने बताया कि पुलिस ने घटनास्थल से संदिग्ध माँस, जानवरों की खाल और कत्ल के सामानों को बरामद किया गया है। पाँच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। ग्राम प्रधान के अलावा अकरम अली, साहेब जान, नजमुल और रहीस चार अन्य आरोपित हैं।

इस घटना के बाद से ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। वहीं गौहत्या की जानकारी मिलने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं सहित बजरंग दल, विश्व हिंदू महासंघ और विश्व हिंदू परिषद के कुछ नेता भी अपना विरोध दर्ज कराने के लिए मौके पर पहुँचे थे। जानकारी के मुताबिक, गाँव का माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के नतीजे आने के बाद दो जगहों से कथित तौर पर खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में नारे सुनाई देने का मामला सामने आया था। रिपोर्टों के मुताबिक एक मामला सीतापुर के थानगाँव के बेलौता का है। वहीं अमेठी के रामगंज के मंगरा से एक वीडियो सामने आया था जिसमें देशविरोधी गाने तेज आवाज में बजते सुनाई दिए। इन दोनों घटनाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने केस दर्ज करके पड़ताल शुरू की थी।

विमान बनाने वाली ‘बोइंग’ गोरखपुर में बनाएगी कोविड हॉस्पिटल, CM योगी आदित्यनाथ ने जगह का किया निरीक्षण

विमान निर्माता कंपनी बोइंग ने कोविड के खिलाफ लड़ाई में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 200 बेड वाला कोविड अस्पताल बनाने का फैसला किया है। बोइंग ने यह कदम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर उठाया है। इससे पहले बोइंग ने हाल ही में कोरोना की दूसरी लहर झेल रहे भारत की मदद के लिए एक करोड़ डॉलर (करीब 74 करोड़ रुपये) देने की घोषणा भी की थी।

यह योगी सरकार द्वारा सरकारी संसाधनों के साथ ही विभिन्न कॉर्पोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ मिलकर चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक और बड़ा कदम है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार (9 मई) को अपने गृह क्षेत्र गोरखपुर का दौरा किया। हाल ही में कोरोना वायरस संक्रमण से उबरने वाले योगी ने जिला प्रशासन के साथ एक समीक्षा बैठक की और एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र का भी निरीक्षण किया। सीएम योगी ने इन नियंत्रण केंद्रों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जिले में कोविड संकट से प्रभावित रोगियों के लिए किए जा रहे प्रबंधों का निरीक्षण करें।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोइंग ने कोविड के खिलाफ लड़ाई में सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रयासों को देखते हुए राज्य में अस्पताल बनाने का प्रस्ताव दिया था। सीएम योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से चर्चा के बाद गोरखपुर एम्स को कोविड अस्पताल के लिए चुना है।

इस आईसीयू युक्त हॉस्पिटल में वेंटिलेटर से लेकर कोविड मरीजों के लिए आवश्यक सभी सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जाएँगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बोइंग कंपनी द्वारा प्रस्तावित आईसीयू अस्पताल के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने साथ ही अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि कोविड अस्पताल के लिए अन्य विकल्प भी तलाशे जाएँ। उन्होंने कहा कि कि कई बड़ी कॉर्पोरेट और मल्टी-नेशनल कंपनियाँ कोविड अस्पताल निर्माण के लिए आगे आ रही हैं, ऐसे में उन्हें इसके लिए उचित जगह देने के लिए भी विकल्प तैयार रखे जाने चाहिए।

सीएम योगी के ट्विटर हैंडल से साझा संदेश में कहा गया, “कोरोना के विरुद्ध प्रत्येक स्तर पर आमजन की स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु पूरी ऊर्जा और संवेदनशीलता के साथ प्रदेश सरकार कार्य कर रही है। उसी क्रम में आज जनपद गोरखपुर में ‘कोविड हेल्प डेस्क’ एवं कंट्रोल सेन्टर का निरीक्षण किया। मैं पूरी तरह आश्वस्त हूँ कि कोरोना हारेगा, हम जीतेंगे।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को एम्स का निरीक्षण करेंगे। कोविड मामलों में बढ़ोतरी के मद्देनजर वे चिकित्सा सुविधाओं के निरीक्षण के लिए गोरखपुर के बाद अयोध्या भी जाएँगे।

‘सरकारी खजाने से प्रशांत किशोर को वेतन’: प्रधान सलाहकार नियुक्त करने पर SC ने पंजाब सरकार से माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत किशोर को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का ‘प्रधान सलाहकार’ नियुक्त किए जाने के विरोध में दायर याचिका को लेकर गुरुवार (मई 6, 2021) को पंजाब सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में प्रशांत किशोर की नियुक्ति और उन्हें सरकारी खजाने से वेतन तथा सुविधाएँ दिए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

कुछ दिन पहले इसी याचिका को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने ये कहते हुए खारिज कर दिया था कि सीएम को पूरा अधिकार है कि वे जिसे चाहें उसे अपना सलाहकार चुने। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। 

SC में मामले की सुनाई जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की बेंच ने की। पंजाब सरकार समेत सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब माँगा गया है। याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी दलील में कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उनके केस में तथ्यों को ठीक से नहीं सुना और उनकी याचिका खारिज कर दी गई।

याचिका में क्या कहा गया?

इस केस में लभ सिंह और सतिंदर सिंह ने पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में प्रशांत किशोर की प्रधान सलाहकार पद पर नियुक्ति को निरस्त करने की अपील की गई थी।

अपनी याचिका में याचिकाकर्ताओं ने अनुच्छेद 16(1) का हवाला देते हुए कहा था कि राज्य सरकार के कार्यालय में कोई भी अपॉइंटमेंट, इससे (अनुच्छेद में निहित प्रावधानों) अलग नहीं हो सकता। इस आर्टिकल में हर नागरिक को रोजगार में अवसर की समानता और नियुक्ति का अधिकार है। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि राज्य सरकार के लिए ये जरूरी है कि वो ऐसी नियुक्ति के लिए कोई विज्ञापन निकाले, क्योंकि याचिकार्ता समेत भारी तादाद में पढ़े-लिखे समझदार लोग राज्य में बैठे हैं।

याचिका में ये भी कहा गया था कि किशोर की नियुक्ति मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार पद पर होगी। इस तरह उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिल जाएगा। उन्हें वेतन और अन्य सुविधाएँ राज्य के खजाने से दिया जाएगा।

प्रशांत किशोर को क्या मिलेंगी सुविधाएँ?

कुछ समय पहले पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अपने प्रमुख सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया था। पंजाब सरकार की ओर से जारी आदेश में बताया गया था कि प्रशांत किशोर अपनी सैलरी के तौर पर सिर्फ एक रुपया लेंगे। इसके अलावा उन्हें प्राइवेट सेक्रेटरी, पर्सनल असिस्टेंट, डाटा एंट्री ऑपरेटर, एक क्लर्क और दो चपरासी दिए जाएँगे। किशोर को राज्य ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की ओर से वाहन मुहैया कराया जाएगा और उनके आतिथ्य के लिए प्रति माह 5000 रुपए खर्च किए जाएँगे।