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‘₹60 लाख रिश्वत लिया AAP MLA प्रकाश जारवाल ने’ – टैंकर मालिकों का आरोप, डॉक्टर आत्महत्या में पहले से है आरोपित

हाल ही में एक डाक्टर को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दिल्ली से आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जारवाल एक के बाद एक बड़ी मुसीबतों से घिरते चले जा रहे हैं। अब दिल्ली के करीब 20 पानी टैंकर मालिकों ने विधायक पर 60 लाख रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।

जानकारी के मुताबिक जाँच में सामने आया है कि देवली से आप विधायक प्रकाश जारवाल ने पानी टैंकर मालिकों से एक महीने में 60 लाख रुपए की रिश्वत ली है। अपनी शिकायत लेकर सामने आए करीब 20 वाटर टैंकर मालिकों ने विधायक पर पैसे माँगने का आरोप लगाया।

इनमें से चार वाटर टैंक मालिकों ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान दर्ज कराते हुए कहा कि उन्होंने अपनी फाइल को मंजूरी दिलवाने के लिए 20,000 रुपए का भुगतान किया और आपूर्ति के प्रत्येक दौर के लिए 500 रुपए दिए।

ऐसे में 60 टैंकरों का संचालन होता है। इसके हिसाब से यह राशि 60 लाख रुपए प्रति माह होती है, जोकि नियमित रूप से विधायक के पास जाती थी। इतना ही नहीं टैंकर मालिकों ने आरोप लगाया कि पैसे न देने पर विधायक द्वारा सप्लाई को रोक दिया जाता था। साथ ही उन्हें दिल्ली जल बोर्ड कार्यालय से पानी भरने की अनुमति दी जाती थी।

मृतक डॉक्टर राजेन्द्र के लड़के हेमंत ने बताया कि हमने अपने टैंकरों को जल बोर्ड में रखने के लिए पिछले पाँच साल में विधायक को 50 लाख रुपए का भुगतान किया था। इतना ही नहीं हेमंत ने बताया कि उनके पिता जी की मौत से दो दिन पहले ही विधायक को 60000 रुपए दिए गए थे। इसके बाद विधायक ने कहा था कि उनका कोई भी टैंक हटाया नहीं जाएगा।

वहीं डॉक्टर की पत्नी ब्रह्मवती ने बताया कि विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने अपने गहने बेचकर 1 लाख रुपए दिए थे, जिससे कि फिर से टैंकरों को लगाया जा सके। उनके पास ड्राइवर और क्लीनर को देने के लिए भी पैसे नहीं थे। हालाँकि इस मामले को लेकर अब दिल्ली पुलिस दिल्ली जल बोर्ड के कर्मचारियों से पूछताछ करेगी।

डॉक्टर का सुसाइड नोट

आपको बता दें कि पिछले महीने 18 अप्रैल को दिल्ली के नेब सराय इलाके में 52 वर्षीय डॉक्टर राजेन्द्र सिंह ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक के पास से एक 2 पेज का सुसाइड नोट मिला था, जिसमें उन्होंने आत्महत्या के लिए इलाके के विधायक प्रकाश जरवाल और उनके सहयोगी कपिल को जिम्मेदार ठहराया था।

इसके अतिरिक्त पुलिस ने एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें लिखा था, “मेरा इस इलाके में एक क्लीनिक है और मेरे कुछ वाटर टैंकर दिल्ली जल बोर्ड में किराए पर चलते थे, लेकिन एमएलए प्रकाश जारवाल और उसके सहयोगी कपिल नागर मुझसे हर टैंकर के हिसाब से पैसे माँगने लगे। कुछ पैसे दिए भी गए लेकिन बाद में मेरे सभी टैंकरों को प्रकाश जरवाल ने दिल्ली जल बोर्ड से हटवा दिया।”

सुसाइड नोट में लिखा था, “टैंकरों को दिल्ली जल बोर्ड से हटवाने के बाद जब उन्हें ओखला के दिल्ली जल बोर्ड पर लगवाया गया तो टैंकरों को वहाँ से भी प्रकाश जरवाल द्वारा हटवा दिया गया।” नोट के अनुसार प्रकाश जरवाल और उसके सहयोगी से उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिल रही थी और धमकियों के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया था।

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर आप विधायक प्रकाश जारवाल, कपिल नगर और अन्य के खिलाफ जबरन वसूली और आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया था। इस पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस ने 9 मई, 2020 को दिल्ली के देवली से विधायक प्रकाश जारवाल और कपिल नागर को गिरफ्तार कर लिया था।

भारत माता का हुआ पूजन, ग्रामीणों ने लहराया तिरंगा: कन्याकुमारी में मिशनरियों का एजेंडा फेल

तमिलनाडु के कन्याकुमारी में भारत माता की प्रतिमा को लेकर चल रहे विवाद में आए फैसले ने ग्रामीणों के चेहरों पर एक खुशी दी है। कन्याकुमारी के कलक्टर द्वारा प्रतिमा से कवर हटाने का आदेश देने के बाद ग्रामीणों ने ‘भारत माता पूजन’ कार्यक्रम का आयोजन किया, इस कार्यक्रम में पूरे हर्ष-उल्लास के साथ ग्रामीणों ने भारत माता की पूजा अर्चना की।

मंदिर में भारत माता की पूजा होते ही ईसाई मिशनरियों की मंशा फेल हो गई। कन्याकुमारी की पुलिस को आखिरकार देशभक्त ग्रामीणों के सामने झुकना पड़ा। पूर्व सांसद तरुण विजय ने ट्वीट करते हुए लिखा कि ग्रामीणों की मदद से फिर से भारत माता के उसी सम्मान को वापस लाया गया।

उन्होंने पूछा कि क्या देश के सभी शहरों में भारत माता की प्रतिमा नहीं होंनी चाहिए? साथ ही उन्होंने सवाल दागा कि आखिर भारत माता की प्रतिमा का विरोध किया ही क्यों गया?


दरअसल, ग्रामीणों का कहना है कि देश और देश के सैनिकों को सलाम करने के लिए उन्होंने ये अभियान शुरू किया था, लेकिन कुछ मिशनरियों के दबाव में आकर जिला प्रशासन द्वारा भारत माता की प्रतिमा को ढक दिया गया था।

वहीं भारत माता की प्रतिमा को ढके जाने के बाद उसे कपड़े से मुक्त करने की माँग करने वालों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। अब इसे लेकर एडवोकेट आशुतोष जे दुबे ने कन्याकुमारी, तमिलनाडु पुलिस को लीगल नोटिस जारी किया है।

साथ ही सवाल किया है कि आखिर किस संविधान के तहत भारत माता की प्रतिमा को ढका गया था। इस बात की जानकारी खुद आशुतोष ने ट्वीट करते दी है।

आपको बता दें कि ईसाई मिशनरियों के दवाब में आकर इस्साकि अम्मान मंदिर में मौजूद भारत माता की प्रतिमा को जिला प्रशासन द्वारा ढकने की बात कही जा रही थी। चेन्नई में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए ‘इंदु मक्कल कच्ची’ ने भारत माता की तस्वीरों का वितरण किया गया था।

इसके बाद कन्याकुमारी के कलक्टर ने प्रतिमा के कवर को हटाने का आदेश दिया है। इसे हिंदुओं की जीत के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं बीजेपी नेता तरुण विजय ने इससे पहले कहा था कि भारत माता के लिए लड़े जा रहे युद्ध को हमने जीत लिया है।

संस्था के अध्यक्ष अर्जुन सम्पत ने कहा कि भारत माता सम्पूर्ण देशवासियों की माँ है। उन्होंने ईसाईयों पर राष्ट्रहित के मुद्दों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से भाजपा नेताओं सहित कई संस्थाओं ने अपील की थी, जिसके बाद इसे अनकवर करने का फ़ैसला लिया गया।

उस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि वो 200 वर्ष पुराना है। वो ज़मीन एक प्राइवेट प्रॉपर्टी है और वहाँ तिरंगे की साड़ी में लिपटी भारत माँ की प्रतिमा स्थापित की गई थी।

मुंबई पुलिस ने सोशल मीडिया पर संदेशों के खिलाफ जारी किया आदेश: उद्धव सरकार की आलोचना पर भी अंकुश

मुंबई पुलिस आयुक्त ने 23 मई 2020 को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CRPC) की धारा 144 के तहत आदेश जारी किया। यह प्रतिबंधात्मक आदेश 25 मई 2020 को 12:15 बजे से लागू है और 8 जून 2020 तक जारी रहेगा।

यह आदेश लोगों को विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे व्हाट्सएप, ट्विटर, फेसबुक, टिकटॉक, इंस्टाग्राम आदि के माध्यम से किसी भी तरह के ‘ऑनलाइन नफरत’ को प्रसारित करने से रोकता है।

असल में यह आदेश परोक्ष रूप से उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार की सभी आलोचनाओं पर भी प्रतिबंध लगाता है, क्योंकि निषेधाज्ञा आदेश में एक खंड कहता है, “सरकारी कार्यकारियों के प्रति अविश्वास और कोविड-19 को नियंत्रित करने के लिए किए गए उनके कार्यों के विरुद्ध टिप्पणी करने वालों” के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस उपायुक्त प्रणय अशोक द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि मुंबई पुलिस सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म के किसी भी ग्रुप में इस तरह की शेयर किए जाने पर उस ग्रुप के एडमिन को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहराएगी और उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।

मुंबई पुलिस द्वारा 23 मई 2020 को जारी आदेश
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मुंबई पुलिस द्वारा जारी आदेश में चेतावनी दी गई है कि इस आदेश का उल्लंघन करने वाला कोई भी व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडनीय होगा। यह खंड स्पष्ट करता है कि व्हाट्सएप समेत किसी भी सोशल मीडिया पर कोरोना वायरस से निपटने में महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने पर उसे आदेश के तहत जिम्मेदार ठहराया जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।

आदेश में कहा गया कि चूँकि यह आदेश व्यक्तिगत रूप से नहीं दिया जा सकता है, इसलिए इसे पूर्व में जारी किया गया था।

ऑपइंडिया ने इसकी पुष्टि करने के लिए पुलिस उपायुक्त से संपर्क किया कि यदि आदेश उस समय से प्रामाणिक था, तो फिर यह आदेश मुंबई पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड क्यों नहीं किया गया था। मुंबई पुलिस के प्रवक्ता, डीसीपी प्रणय अशोक ने पुष्टि की कि दिनांक 23 मई का आदेश वास्तव में प्रामाणिक था और यह एक ‘नियमित आदेश’ था, जो पारित हो गया है।

गौरतलब है कि अप्रैल में भी, मुंबई पुलिस ने इसी तरह का आदेश जारी किया था, जिसमें सोशल मीडिया पर चार प्रकार की सामग्रियों के प्रसार पर रोक लगाई गई थी:

  • जो तथ्यात्मक रुप से गलत और विकृत पाया जाए
  • जो किसी विशेष के प्रति अपमानजनक या भेदभावपूर्ण हो
  • जिसके कारण लोगों में घबराहट और भ्रम होता हो
  • जो सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अविश्वास या कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए उनके कृत्यों को दिखाता हो

इस संबंध में पुलिस ने 73 मामले दर्ज किए और 23 मार्च से अब तक 39 आरोपितों को गिरफ्तार किया।

यह बेहद ही गंभीर और परेशान करने वाली बात है कि महाराष्ट्र में कोरोना के आँकड़े 50000 के पार हो चुके हैं और देश के कुल मामलों में सबसे बड़ा योगदान महाराष्ट्र का ही है। ऐसी स्थिति में राज्य प्रशासन बजाय ये सोचने की कि किस तरह से कोरोना संक्रमण से निपटा जाए, कैसे इस पर लगाम लगाया जाए, वो अपना सारा प्रयास सोशल मीडिया के दोषियों को दंडित करने में लगा रही है।

विधायक आदित्य ठाकरे के लिए भी, महाराष्ट्र में महामारी का सबसे चिंताजनक पहलू कथित रूप से सोशल मीडिया पर ‘घृणा’ है। NDTV को दिए एक इंटरव्यू में, शिवसेना ने आज ‘ऑनलाइन घृणा’ के बारे में अधिक चिंता व्यक्त की है।

‘महाराष्ट्र में मजदूरों को एंट्री के लिए लेनी होगी अनुमति’ – राज ठाकरे ने शुरू की हिंदी-मराठी राजनीति

कोरोना संकट के बीच महाराष्ट्र में क्षेत्रीय राजनीति का गंदा खेल फिर शुरू हो चुका है। दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘माइग्रेशन कमीशन’ के फैसले पर मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अपना बयान जारी किया है।

एक ओर जहाँ सीएम योगी ने अपने राज्य के मजदूरों की दुर्दशा देखते हुए सकारात्मक दृष्टि में आयोग गठन का फैसला किया है। वहीं, राज ठाकरे ने बदले की भावना से इस पर मराठी और गैर मराठी जैसी राजनीति को आरंभ कर दिया है।

खबरों के अनुसार, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के चीफ राज ठाकरे ने कहा है कि अगर योगी आदित्यनाथ ने ऐसा नियम बनाया है तो अब हम भी यह कहना चाहते हैं कि किसी भी मजदूर को महाराष्ट्र आने से पहले अब हमारी सरकार, पुलिस और प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। ऐसा ना करने पर किसी को महाराष्ट्र में एंट्री नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा, “यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि अगर किसी को यूपी के मजदूरों की सेवाएँ चाहिए तो उसे UP सरकार से अप्रूवल लेना जरूरी होगा। अगर ऐसा है तो अब महाराष्ट्र में घुसने वाले किसी भी मजदूर को हमसे, हमारी सरकार से और हमारी पुलिस से अनुमति लेनी होगी। योगी आदित्यनाथ को इसका ध्यान रखना चाहिए।”

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए और पुलिस स्टेशन में प्रवासी मजदूरों के रिकॉर्ड को बनाना चाहिए, जिसमें उनकी तस्वीर भी हो।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले योगी आदित्यनाथ ने अपने ट्विटर हैंडल से प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रवासी आयोग बनाने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा था, “उत्तर प्रदेश में आने वाले हर प्रवासी कामगार और श्रमिकों को रोजगार मिले, उनकी बराबर सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित हो। इसके लिए माइग्रेशन कमीशन का गठन किया जा रहा है। हम इन सभी को राज्य के भीतर रोजगार के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ”प्रवासी कामगारों को राज्य स्तर पर बीमा का लाभ देने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, ऐसी कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है, जिससे इन लोगों की जॉब सिक्यॉरिटी प्रदेश में ही सुनिश्चित की जा सके और इन्हें मजबूर हो कर अपने घर-परिवार से दूर नौकरी की तलाश में पलायन न करना पड़े।”

इसके अलावा समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, योगी आदित्यनाथ ने ये भी कहा कि जो भी राज्य चाहता है कि प्रदेश के प्रवासी कामगार उनके यहाँ वापस आएँ, उन्हें राज्य सरकार से इसकी इजाजत लेनी होगी और उन कामगारों के सामाजिक, कानूनी और आर्थिक अधिकार सुनिश्चित करने होंगे। क्योंकि अन्य राज्यों में उनके साथ दुर्व्यवहार की कई खबरें सामने आई हैं।

उन्होंने आगे कहा, “हम उन्हें उत्तर प्रदेश में रोजगार देंगे और उन्हें रोजगार मुहैया करवाने के लिए एक आयोग गठित करेगी। साथ ही कामगारों व श्रमिकों की स्किल मैपिंग की जाए और उनका सारा ब्यौरा इकट्ठा किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें रोजगार देकर मानदेय दिया जाएगा।”

कॉन्ग्रेस का सन्देश है कि जो गाँधी परिवार के खिलाफ बोलेगा उसे प्रताड़ित किया जाएगा: तजिंदर बग्गा

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर बग्गा ने एक बार फिर से ये कह कर तूफान खड़ा कर दिया है कि 1984 मे हुए सिख नरसंहार में हजारों सिखों के कत्लेआम के पीछे राजीव गाँधी का हाथ था। सोमवार (मई 24, 2020) को बग्गा ने ट्विटर पर एक पुराना वीडियो क्लिप शेयर किया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ये कह कर सिखों के नरसंहार को जायज ठहरा रहे हैं कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है।

यहाँ ‘बड़े पेड़’ से उनका आशय उनकी माँ और देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी से था, जिनकी उनके दो सिख अंगरक्षकों ने हत्या कर दी थी। इसके बाद से ही पूरे देश में, खासकर उत्तर प्रदेश में सिखों का नरसंहार शुरू हो गया था। ताज़ा प्रकरण को लेकर ऑपइंडिया से बात करते हुए दिल्ली के हरि नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी रहे तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने कहा:

“कॉन्ग्रेस देश को ये संदेश देना चाहती है कि जो कोई भी गाँधी परिवार के खिलाफ बोलने कि हिमाकत करेगा, उसे चुप करा दिया जाएगा। ये सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से किया जा रहा है। अर्नब गोस्वामी, सुधीर चौधरी और सम्बित पात्रा के बाद अब मेरे पर एफआईआर दर्ज किया गया है। एक महीने के भीतर 4 लोगों पर इस तरह से एफआईआर हुए, वो भी कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में, या फिर कॉन्ग्रेस के साथी दलों द्वारा शासित राज्यों में। जैसे, महाराष्ट्र में। पार्टी का सीधा संदेश है कि अगर एक परिवार के विरुद्ध मुँह खोलोगे तो तुम्हें प्रताड़ित किया जाएगा, तुम्हारे खिलाफ केस दायर किया जाएगा। “

जब तजिंदर बग्गा से हमनें पूछा कि आखिर 35 साल बाद गड़े मुर्दे उखाड़ने कि क्या जरूरत है और इतनी पुरानी घटना को आज याद करने कि प्रसंगिकता क्या है, तो उन्होंने जवाब दिया कि ऐसा करना इसीलिए आवश्यक है क्योंकि जिन्होंने सिखों का नरसंहार किया था वो आज भी जिंदा हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि आज जब नैतिकता कि सारी हदें पार करते हुए पीएम मोदी के लिए ‘मौत का सौदागर’ और ‘कॉकरोच’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है, लोगों को ये बताना जरूरी है कि जिन्हें दशकों से नायक के रूप मे प्रचारित किया गया, उनकी सच्चाई क्या थी।

बग्गा ने मणिशंकर अय्यर जैसों का नाम लिए बिना कहा कि वो लोग तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपदस्थ करने के लिए पाकिस्तान के पास भी मदद माँगने जाते हैं। बग्गा ने कहा कि देश के किसी भी सिख परिवार से पूछ लो कि 1984 नरसंहार के लिए कौन जिम्मेदार था, सभी एक ही नाम बताएँगे। उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी के तथाकथित चैंपियंस के बारे मे कहा कि वो लोग तब हमेशा चुप रहते हैं, जब कॉन्ग्रेस उन्हें चुप कराने की कोशिश करती है, जिन्होंने गाँधी परिवार की आलोचना की हो।

बग्गा ने कहा कि जब भी भरत के टुकड़े-टुकड़े करने का नारा लगाने वाले कन्हैया कुमार और हिन्दुत्व की कब्र खोदने की बात करने वालों के खिलाफ कुछ एक्शन लिया जाता है, अभिव्यक्ति की आजादी के ठेकदार अपना झुनझुना लेकर आ जाते हैं। वहीं, जब राजीव गाँधी के बारे मे कुछ बोलने पर किसी को चुप कराया जाता है तो वो बिल मे छिप जाते हैं। तजिंदर बग्गा ने ऐसे लोगों को सबसे बड़ा दोहरे रवैये वाला बताया।

हालिया एफआईआर से निपटने के लिए उठाए गए कानूनी कदमों के बारे मे जानकारी देते हुए बग्गा ने बताया कि इस मामले को कोर्ट मे वकील देखेंगे लेकिन वो अभी भी अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने पूछा कि अगर राजीव गाँधी का सिख नरसंहार मे हाथ नहीं होता तो जगदीश टाईटलर और सज्जन कुमार जैसों के पास इतनी ताकत कहाँ से आती? उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नेताओं को सिख नरसंहार के बाद मंत्रिपद देकर नवाजा गया।

बता दें कि सज्जन कुमार फिलहाल सिख नरसंहार मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। वहीं जगदीश टाईटलर पर कई आरोप हैं लेकिन वो दोषी नहीं पाए गए। रकाबगंज गुरुद्वारा में सिखों को जिंदा जलाने के मामले में कमलनाथ पर भी आरोप थे लेकिन अब तक ये कोर्ट मे साबित नहीं हो सका है।

कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि बग्गा ने राजीव गाँधी पर अपमानजनक टिप्पणी की है और साथ ही सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास किया है। कॉन्ग्रेस यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पंकज वाधवानी ने तजिंदर बग्गा के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। इसकी सूचना ‘यूथ कॉन्ग्रेस’ ने सोशल मीडिया के माध्यम से दी। कॉन्ग्रेस ने साथ ही उन्हें ‘नफरत का वायरस’ करार दिया और कहा कि ऐसे किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

बता दें कि तजिंदर बग्गा हरि नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी रह चुके हैं। हारने के बावजूद उन्होंने अपने घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करने का संकल्प लिया था। जहाँ क्षेत्र के वर्तमान विधायक से लोग निराश हैं, बग्गा कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच उनकी मदद कर रहे हैं। देश के विभिन्न इलाक़ों में लोगों तक राशन पहुँचाने के लिए उन्होंने दिन-रात एक कर दिया। इससे उनकी ख़ूब वाहवाही हुई है। उन्होंने दिल्ली दंगा के पीड़ितों की भी मदद के लिए रुपए जुटाए थे।

उद्धव सरकार की वजह से खाली लौट रही ट्रेनें, देर रात तक जानकारी माँगते रहे पीयूष गोयल, नहीं मिली पैसेंजरों की लिस्ट

महाराष्ट्र सरकार ने रविवार (मई 24, 2020) को बयान दिया कि केंद्र सरकार महाराष्ट्र के प्रवासियों को घर पहुँचाने के लिए पर्याप्त ट्रेन उपलब्ध नहीं करा रही है। उद्धव ठाकरे सरकार ने दावा किया था कि उन्होंने रेलवे को 200 ट्रेनों की सूची दी थी, लेकिन अभी तक ट्रेनें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।

उद्धव सरकार के इस दावे का खुलासा करने के लिए रेल मंत्री पीयूष गोयल ने ट्विटर का सहारा लिया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “उद्धव जी, आशा है आप स्वस्थ हैं। आपके अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभेच्छा। कल हम महाराष्ट्र से 125 श्रमिक स्पेशल ट्रेन देने के लिए तैयार है। आपने बताया कि आपके पास श्रमिकों की लिस्ट तैयार है।”

आगे लिखा, “इसलिए आपसे अनुरोध है कि सभी निर्धारित जानकारी जैसे, कहाँ से ट्रेन चलेगी, यात्रियों की ट्रेनों के हिसाब से सूची, उनका मेडिकल सर्टिफ़िकेट और कहाँ ट्रेन जानी है, यह सब सूचना अगले एक घंटे में मध्य रेलवे के महाप्रबंधक को पहुँचाने की कृपा करे, जिससे हम ट्रेनों की योजना समय पर कर सकें।”

एक अन्य ट्वीट में गोयल ने लिखा, “उम्मीद है कि पहले की तरह ट्रेन स्टेशन पर आने के बाद, वापस खाली न जाना पड़े। आपको आश्वस्त करना चाहूँगा कि आपको जितनी ट्रेन चाहिए उतनी उपलब्ध होंगी। मैं आशा करता हूँ की महाराष्ट्र सरकार हमारे इन श्रमिकों के लाभ के लिए किए गए प्रयास में पूरा सहयोग करेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि यात्रियों और गंतव्यों के विवरण प्रदान करने में महाराष्ट्र सरकार की विफलता के कारण, रेलवे को ट्रेनों की व्यवस्था करनी पड़ी और फिर रद्द करनी पड़ी।

गोयल द्वारा शेयर किए गए रेलवे के एक बयान में कहा गया कि महाराष्ट्र सरकार के पर्याप्त तैयारी नहीं करने की वजह से 65 ट्रेनों को रद्द करना पड़ा। इसमें कहा गया है कि केरल, पश्चिम बंगाल, ओडिशा जैसे कुछ राज्यों ने चक्रवात अम्फान के कारण ट्रेन रद्द करने के बारे में रेलवे से विशेष अनुरोध किया है। मगर सरकार की ओर से अमरावती, धुले, नासिक, चद्रपौर और अकोला जैसे जिलों के लिए विशेष ट्रेनें चलाने के लिए इस तरह के अनुरोध नहीं किए गए हैं।

बयान में यह भी कहा गया कि रेलवे के नोडल अधिकारी लगातार महाराष्ट्र सरकार के नोडल अधिकारियों के संपर्क में थे। लेकिन रात 12 बजे यानि 25 मई शुरू होने तक महाराष्ट्र सरकार की तरफ से कोई भी लिस्ट रेल मंत्रालय के पास नहीं आई।

पीयूष गोयल ने लिखा, “दुख की बात हैं की 1.5 घंटे हो गए है पर महाराष्ट्र सरकार ने रेलवे के GM मध्य रेल को, कल की 125 ट्रेनों की निर्धारित जानकारी नही दी है। ट्रेन प्लान करने में समय लगता है और हम नही चाहते की ट्रेनें स्टेशन पर आ कर खाली खड़ी रहे इसलिए पूरी जानकारी के बिना प्लान करना असंभव है।”

पीयूष गोयल ने देर रात ट्वीट करते हुए लिखा, “रात के 12 बज चुके हैं और 5 घंटे बाद भी हमारे पास महाराष्ट्र सरकार से कल की 125 ट्रेनों की डिटेल्स और पैसेंजर लिस्टें नही आई है। मैंने अधिकारियों को आदेश दिया है फिर भी प्रतीक्षा करें और तैयारियाँ जारी रखें। मेरा अनुरोध है कि महाराष्ट्र सरकार अभी भी अगले एक घंटे में कितनी ट्रेन, कहाँ तक और पैसेंजर लिस्टें हमें भेज दें। हम प्रतीक्षा कर रहे है और पूरी रात काम कर कल की ट्रेनों की तैयारी करेंगे। कृपया पैसेंजर लिस्टें अगले एक घंटे में भेज दें। ”

उसके बाद लिस्ट फिर भी नहीं आई तो रात 2 बजे पीयूष गोयल ने फिर ट्वीट किया और कहा, “महाराष्ट्र से चलने वाली 125 ट्रेनों की लिस्ट कहाँ है? रात 2 बज चुके हैं और अब तक हमें केवल 46 ट्रेनों की लिस्ट मिली है जिसमें से पाँच बंगाल और ओडिशा की हैं। इनमें से अम्फान तूफान के कारण बंगाल और ओडिशा में ट्रेन नहीं चलाई जा सकती। हम 125 ट्रेन के लिए तैयार थे फिर भी हम 41 ट्रेन नोटिफाई कर रहे हैं।”

रेलवे ने 1 मई से 23 मई तक 520 ट्रेन रोजाना चला के 7,32,166 प्रवासी मजदूरों को अपने घर पहुँचाया है।

घर लौटे श्रमिकों को उत्तर प्रदेश में देंगे रोजगार, बीमा सहित सामाजिक सुरक्षा होगी सुनिश्चित: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोनोवायरस लॉकडाउन के बाद अन्य राज्यों से घर लौट आए प्रवासी मजदूरों को रोजगार प्रदान करने के लिए माइग्रेशन कमीशन (प्रवासी आयोग) बनाया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया, “अब तक उत्तर प्रदेश में मेहनत कर अपनी जीविका चलाने वाले 23 लाख श्रमिक बहनों-भाइयों और उनके परिजनों को वापस लाया गया है। सभी का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उपयुक्त रूप से क्वारंटाइन करने, खाद्यान्न किट देने के साथ राशन कार्ड बनवाने और 1,000₹ भरण-पोषण राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी।”

उन्होंने आगे कहा, “उत्तर प्रदेश में आने वाले हर प्रवासी कामगार और श्रमिकों को रोजगार मिले, उनकी बराबर सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित हो। इसके लिए माइग्रेशन कमीशन का गठन किया जा रहा है। हम इन सभी को राज्य के भीतर रोजगार के साथ-साथ सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

मुख्यमंत्री ने ट्वीट किया, ”प्रवासी कामगारों को राज्य स्तर पर बीमा का लाभ देने की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही, ऐसी कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है, जिससे इन लोगों की जॉब सिक्योरिटी प्रदेश में ही सुनिश्चित की जा सके और इन्हें मजबूर हो कर अपने घर-परिवार से दूर नौकरी की तलाश में पलायन न करना पड़े।”

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो भी राज्य चाहता है कि प्रदेश के प्रवासी कामगार उनके यहाँ वापस आएँ, उन्हें राज्य सरकार से इसकी इजाजत लेनी होगी और उन कामगारों के सामाजिक, कानूनी और आर्थिक अधिकार सुनिश्चित करने होंगे। क्योंकि अन्य राज्यों में उनके साथ दुर्व्यवहार की कई खबरें सामने आई है।

उन्होंने आगे कहा कि हम उन्हें उत्तर प्रदेश में रोजगार देंगे और उन्हें रोजगार मुहैया करवाने के लिए एक आयोग गठित होगी। साथ ही कामगारों व श्रमिकों की स्किल मैपिंग की जाए और उनका सारा ब्यौरा इकट्ठा किया जाए जिसके बाद उन्हें रोजगार देकर मानदेय दिया जाएगा।

…वो 5 करीबी, जिनसे पूछकर मौलाना साद लेता था फैसले, सबके पासपोर्ट जब्त: पहले से दर्ज थी FIR

दिल्ली निजामुद्दीन मरकज मामले में क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद के 5 करीबियों का पासपोर्ट जब्त कर लिया है। ये पाँचों वे लोग हैं जिन पर पहले से इस मामले के संबंध में एफआईआर दर्ज है।

इन पाँचों आरोपितों को लेकर कहा जा रहा है कि मरकज से जुड़े हर फैसले इनसे पूछकर लिए जाते थे। ऐसे में पासपोर्ट जब्त होने के बाद अब इनमें से कोई भी मामले की जाँच पूरी होने तक देश के बाहर नहीं जा सकता।

इसके अलावा, दिल्ली पुलिस विदेशी जमातियों पर भी अपना शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। खबर है कि 900 विदेशी जमातियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर हो सकती है। क्यूँकि इन सभी पर वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप है, जिसके कारण इन सभी के पासपोर्ट और दूसरे दस्तावेज जब्त कर लिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली मरकज मामले के संबंध में पुलिस ने मौलाना साद के बेटों और रिश्तेदारों समेत कुल 166 जमातियों से पूछताछ कर चुकी है। इनमें ज्यादातर जमातियों ने क्राइम ब्रांच को दिए अपने बयान में माना था कि 20 मार्च के बाद मरकज में रुकने के लिए मौलाना साद ने ही बोला था।

वहीं, ज्यादातर जमातियों ने क्राइम ब्रांच को बताया कि वो खुद से मरकज से निकलना चाहते थे लेकिन मौलाना साद ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया था।

यहाँ, याद दिला दें कि मरकज मामला खुलने के बाद मौलाना साद का एक ऑडियो वायरल हुआ था। उस ऑडियो में साद जमातियों को मरकज में रुकने का दबाव बना रहा था और कह रहा था कि मरने के लिए मस्जिद से बेहतर कोई जगह नहीं है।

इस ऑडियो में उसे जमातियों को ये कहते स्पष्ट सुना गया था कि अल्लाह पर भरोसा करो, अल्लाह कोई मुसीबत इसलिए ही लाता है कि देख सके कि इसमें मेरा बंदा क्या करता है।

इसके बाद मौलाना साद पर कार्रवाई करने का सिलसिला जोर पकड़ा था और क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद समेत 7 लोगों को नोटिस भेजा था। मगर, उस समय मौलाना साद खुद को क्वारंटाइन करने की आड़ में गायब हो गया और जब पुलिस ने छानबीन शुरू की, तब भी भी निकलकर सामने नहीं आया। हालात ये हैं कि उसका क्वारंटाइन पीरियड पूरा होने के बाद भी पुलिस को उसे पकड़ने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

साद न तो पुलिस के सामने आ रहा है और न ही अपनी कोरोना जाँच करवा रहा है। उसके बदले मीडिया व पुलिस से डील उसका वकील अय्यूबी करता है। जिन्होंने पिछले दिनों साद के ऊपर पूछे गए सवालों पर जवाब दिया था कि पुलिस को जो भी कार्रवाई करनी थी, वो कर चुकी है। पुलिस की तरफ से उन्हें 2 नोटिस मिले हैं। जिसका उन्होंने जवाब दे दिया है। इसके अलावा उनसे कोरोना टेस्ट करवाने के लिए बोला गया था, उन्होंने वह भी करवा लिया है। मौलाना के वकील का ये भी कहना था कि वे अधिकारियों से बात भी लगातार कर रहे हैं।

विष्णुदत्त विश्नाेई सुसाइड नहीं कर सकते, CBI जाँच कर हत्या का करे खुलासा: कॉन्ग्रेस MLA का गहलाेत काे खत

राजस्थान के राजगढ़ में थाना प्रभारी विष्णुदत्त विश्नोई के ‘आत्महत्या’ का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। कोई ये मानने को तैयार ही नहीं है कि अपराधियों के छक्के छुड़ाने वाले एक दबंग और ईमानदार पुलिस अधिकारी ने इस तरह आत्महत्या की होगी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता कुलदीप विश्नोई ने भी आशंका जताई है कि ये आत्महत्या नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस सम्बन्ध में पत्र भी लिखा है।

कुलदीप विश्नोई ने अपने पत्र में लिखा है कि विष्णुदत्त विश्नोई की ‘कथित आत्महत्या’ की सीबीआई जाँच कराई जाए। उन्होंने विष्णुदत्त को ईमानदार, कर्तव्यपरायण और जाँबाज पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि 1997 में नियुक्ति के बाद वो जहाँ भी रहे, अपनी कर्त्तव्य निष्ठा से आमजनों और पुलिस विभाग के प्रति हमेशा से जवाबदेह रहे। उन्होंने कहा कि वो मान ही नहीं सकते कि विष्णुदत्त जैसे ऑफिसर ने आत्महत्या की है। उन्होंने लिखा:

“उन्होंने क़ानूनी रूप से आमजनों को न्याय दिलाने, सभी वर्गों के बीच सौहार्द कायम करने, और अपराधियों, सट्टेबाजों और नशाखोरों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई को हमेशा से अपनी प्रथम प्राथमिकता माना। उन्होंने लोगों के मन में क़ानून के प्रति विश्वास उत्पन्न किया। उन्होंने विकास कार्यों में जन भागीदारी सुनिश्चित की। बीकानेर के जिन भी क्षेत्रों में वो पदस्थापित रहे, वहाँ उन्होंने अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाने के लिए अपनी जान लगा दी।”

उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से गुहार लगाई कि अगर इस मामले में सीबीआई जाँच नहीं होती है तो सच्चाई सामने नहीं आए पाएगी। विश्नोई ने लिखा कि अगर विष्णुदत्त ने आत्महत्या की है, तो इसके पीछे किसका दबाव था और कौन से कारण थे, इसका पता लगाने के लिए निष्पक्ष जाँच आवश्यक है। उन्होंने इस हत्या प्रकरण के खुलासे के लिए सीबीआई जाँच की माँग की।

कुलदीप विश्नोई का राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र

बता दें कि इस मामले में एथलीट से कॉन्ग्रेस विधायक बनीं कृष्णा पूनिया पर आरोप लग रहे हैं। अपने वकील मित्र के साथ व्हाट्सअप पर बात करते हुए विष्णुदत्त विश्नोई ने विधायक को बकवास बताया था। जबकि विधायक कृष्णा पूनिया ने उनकी मौत पर दुःख जताते हुए कहा है कि वो कभी उनसे अकेले में मिली ही नहीं। नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का कहना है कि राजनीतिक-आपराधिक गठजोड़ का साथ न देने की क़ीमत विष्णुदत्त विश्नोई को चुकानी पड़ी

राठौड़ ने कहा कि पुलिस के आला अधिकारी भी संवेदनहीन होकर इस हत्याकांड की सच्चाई पर पर्दा डालने में लगे हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शव को 12 घंटों तक फंदे से लटकते हुए ही छोड़े रखा गया। राठौड़ ने साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार को भी TV पर विश्नोई की मौत की सूचना मिली। राठौड़ ने कहा कि सुसाइड नोट के 3 पन्ने के होने की बात कही जा रही थी लेकिन अंत में दो पन्ने ही बताए गए।

विष्णुदत्त विश्नोई की लोकप्रियता का आलम ये था कि पूरे राजगढ़ में उनकी आत्महत्या के बाद गम का माहौल है। पुलिस विभाग के लोग सड़कों पर ड्यूटी के दौरान ही रोते हुए दिखे। अब पूरा राजगढ़ थाना ही तबादला माँग रहा है। पुलिसकर्मियों ने कॉन्स्टेबलों के तबादले की बात करते हुए कहा कि उनका मनोबल टूट गया है। आईजी को लिखे पत्र में 39 पुलिसकर्मियों ने कहा कि विधायक द्वारा छोटी-छोटी बातों पर उच्चाधिकारियों से उनकी झूठी शिकायत कर दी जाती है।

सवाल उसी तरह के हैं, जिनसे 2011 में राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार और उसके नेताओं को जूझना पड़ा था। 2011 में भंवरी देवी नाम की एक नर्स के गायब होने से राजस्थान की सियासत गरम हो गई थी। ठीक उसी तरह जैसे आज विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या पर सियासी उफान दिख रहा है। डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने कहा था कि उनकी नज़र में विष्णुदत्त राज्य के शीर्ष 10 एसएचओ में शामिल थे।

राहुल गाँधी को आड़े हाथों लेने पर कॉन्ग्रेस ने साधा मायावती पर निशाना, कहा- भाजपा में हो सकती हैं शामिल

उत्तर प्रदेश में प्रवासियों को उनके गृह राज्य भिजवाने के नाम पर कॉन्ग्रेस ने पिछले दिनों खूब राजनीति की। जिसे देखकर बसपा प्रमुख मायावती उनपर कई बार हमलावर हुईं। अब इसी कड़ी में कॉन्ग्रेस ने मायावती पर निशाना साधा है और उन्हें ट्विटर बहनजी कहते हुए उनपर आरोप लगाया है कि वे भाजपा के साथ जुड़ सकती हैं।

दरअसल, दलित कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश के ट्विटर अकॉउंट पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पी एल पुनिया की एक वीडियो शेयर की गई है। जिसके साथ ट्वीट में लिखा गया, “BJP से मायावती जी डर व घबरा गई हैं। मायावती जी महात्मा गाँधी जी के हत्यारे गोडसे को मानने वाली भाजपा का साथ दे रही हैं, जिनकी सोच हमेशा से दलित विरोधी रही है। अब वक्त आ गया है, जनता को पता लगना चाहिए कि कौन दलित विरोधी है और कौन दलित हितैशी।” 

खबरों के अनुसार, कॉन्ग्रेस नेता ने इस संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मायावती को ‘ट्विटर बहनजी’ कहा और उनकी ओर इशारा करते हुए कहा कि वे साफ-साफ बताएँ कि उनके ऊपर भाजपा की तरफ से दबाव है, वे उनसे डरी हुई हैं, घबराई हुई हैं, या आगे जाकर उनके साथ गठबंधन करना चाहती हैं। 

वीडियो में पुनिया ने भाजपा पर राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की हत्या का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ये लोग नाथूराम गोडसे को आदर्श मानकर उनकी प्रशंसा करते हैं, उनकी पूजा करते हैं और कई जगह उनका मंदिर बनाने का भी प्रयास किया है।

पुनिया ने मायावती पर भाजपा का साथ देने का आरोप लगाते हुए भाजपा के लिए जमकर जहर उगला। पुनिया ने कहा, जो जगह-जगह पर दलित विरोधी और उत्पीड़न की घटनाएँ हुई हैं। उसमें भाजपा के लोग सम्मिलित पाए जाते हैं, उनपर कोई कार्रवाई नहीं होती। वो मायावती को बुराई नहीं लगती और कॉन्ग्रेस पार्टी जो हमेशा दलित उत्थान के लिए काम करती है, वो इनको खराब लगते हैं। इसलिए ये बात स्पष्ट है कि वो अपना रास्ता भूल चुकी हैं। उससे भटक चुकी हैं।

पुनिया ने दावा किया कि उनकी पार्टी दलित उत्पीड़न के मुद्दे को उठा रही है लेकिन स्वघोषित दलितों की नेता मायावती चुप हैं। उनके हिसाब से मौजूदा सरकार में दलित समाज पर राज्य संरक्षण में हमले बढ़े हैं और प्रियंका गाँधी की सक्रियता मायावती को खलती है। इसलिए ट्विटर पर बहन जी भाजपा का प्रेस नोट ट्वीट करती हैं।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस के इस हमले से पहले बसपा सुप्रीमो ने यूपी सरकार से बसों का किराया माँगने पर राजस्थान सरकार को निशाने पर लिया था। इसके अलावा बसपा प्रमुख मायावती ने राहुल गाँधी की एक वीडियो शेयर करते हुए उसे नाटक करार दिया था। उन्होंने प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा के लिए कॉन्ग्रेस को ही कसूरवार ठहराया है।