Home Blog Page 4846

‘जैन बेकरी में कोई मुस्लिम स्टाफ नहीं’ – रिजवान पर FIR, फोटोशॉप की गई तस्वीर किया था शेयर, भड़काया था माहौल

बीते दिनों जैन बेकर्स एंड कन्फेक्शनरी के एक विज्ञापन के कारण सोशल मीडिया पर बहुत बवाल मचा। स्थिति ऐसी बन गई कि चेन्नई के टी नगर में बेकरी के मालिक प्रशांत को ‘धार्मिक भेदभाव’ करने के मामले में गिरफ्तार करना पड़ा, पर अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है।

दरअसल, ताजा जानकारी के अनुसार मालूम चला है कि जिस तस्वीर पर विवाद बढ़ा, वो तस्वीर फोटोशॉप की गई थी। जिसे रिजवान निजामी, बेकरी की छवि बिगाड़ने के लिहाज से सर्कुलेट कर रहे थे। मगर, अब सच्चाई का खुलासा होते ही रिजवान के ऊपर एफआईआर दर्ज करवा दी गई है।

ट्विटर पर एडवोकेट चांदनी शाह ने इसकी जानकारी दी है। चांदनी ने इन तस्वीरों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वास्तविकता में बेकरी के असल विज्ञापन में ऐसा कुछ नहीं है। जैसा कि फैलाया जा रहा है। इसलिए उन्होंने रिजवान पर एफआईआर कर दी है। यह FIR स्वीकार भी कर ली गई है।

चांदनी अपने ट्वीट में लिखती हैं, “बेकरी के कर्मचारियों ने स्पष्ट कहा है कि ये तस्वीर व्हॉट्सअप पर इसलिए भेजी गई थी क्योंकि कुछ लोग लगातार उनसे पूछ रहे थे कि उनकी बेकरी में खाना कहीं स्पेशल कम्यूनिटी वाले तो नहीं बनाते? मगर रिजवान निजामी ने फोटोशॉप तस्वीर को फैलाया ताकि बेकरी को बदनाम कर सके। मैंने इस उद्दंडता पर एफआईआर दर्ज कर दी है।”

गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के समय में सोशल मीडिया पर ऐसी बहुत सी वीडियो वायरल हुई, जिनमें विशेष समुदाय के लोग खाने-पीने वाली चीजों पर थूकते या उन्हें चाटते नजर आए। जिसके कारण समाज के अन्य लोग सुरक्षा लिहाज से सतर्क हो गए और ऐसे सवाल जगह-जगह से उठने लगे।

मगर, बावजूद इस सच्चाई के, बीते दिनों कई ऐसे मामले सामने आए जब ग्राहक को अपनी ओर से स्पष्टीकरण देने पर पुलिस ने कई दुकानदारों ख़़िलाफ़ मामला दर्ज किया।

पहला उदाहरण तो जैन बेकरी के प्रशांत का ही है। जिनके ख़िलाफ़ धार्मिक भेदभाव’ वाले विज्ञापन छपवाने को लेकर आईपीसी की धाराओं 153, 153A, 505 और 295A के तहत मामला दर्ज किया गया।

इसके अलावा एक मामला झारखंड के जमशेदपुर से सामने आया था। वहाँ पुलिस ने कुछ ऐसे फल दुकानदारों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए थे, जिन्होंने ‘विश्व हिंदू परिषद द्वारा अनुमोदित फल दुकान’ के बैनर लगाए थे।

जमशेदपुर पुलिस का कहना था कि दुकानदारों पर ‘हिंदू’ शब्द लिखने के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं, क्योंकि यह सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की एक कोशिश है। इसी तरह बिहार के नालंदा में भी सब्जियों की दुकान पर भगवा झंडा लगाने को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।

इन मामलों में सबसे हैरानी की बात ये थी कि अभी तक हम अपने आस पास खुलेआम मुस्लिम होटल और हलाल मीट शॉप लिखा देखते थे। मगर, जैसे ही फल वालों ने अपनी दुकान पर ‘विश्व हिंदू परिषद द्वारा अनुमोदित फल दुकान’ के बैनर लगाए, वैसे ही सभी धार्मिक भावनाएँ आहत हो गई और फल बेचने वालों पर मामला दर्ज हो गया।

वृंदावन: साधु तमाल दास के साथ हुई मारपीट को पुलिस ने कहा आपसी झगड़ा, एक गिरफ्तार, बाकी की खोज जारी

मथुरा के वृन्दावन में साधु तमाल कृष्ण दास के साथ मारपीट कर उन्हें बुरी तरह जख्मी करने के मामले में यूपी पुलिस का बयान आया है। पुलिस के अनुसार, मठ की आपसी लड़ाई में ये घटना हुई।

वृन्दावन थाना क्षेत्र के इमली तला स्थित गौड़ीय मठ में हुए इस घटना पर बयान देते हुए क्षेत्राधिकारी सदर ने कहा कि जिस साधु के साथ मारपीट हुई, वो इस मठ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वर्तमान में इस मठ के अध्यक्ष बीपी साधु हैं, जो फिलहाल बाहर गए हुए हैं। पुलिस ने बताया कि बीपी साधु के अनुयायियों और शिष्यों ने ही तमाल दास के साथ मारपीट की थी।

क्षेत्राधिकारी ने बताया कि इस कांड के मुख्य अभियुक्त सच्चिदानंद को पकड़ लिया गया है, जबकि गोविंदा और जगन्नाथ फरार हैं। पुलिस ने कहा कि फिलहाल इस मामले में कोई तहरीर नहीं आई है। बताया गया है कि तहरीर आने के बाद पुलिस इसकी जानकारी देगी।

मठ के सिक्यूरिटी गार्ड रोबिन सिंह द्वारा भी मारपीट किए जाने की ख़बर है। मथुरा पुलिस ने उस ट्वीट को कोट कर के जवाब दिया, जिसमें इन साधुओं की हत्या वाली खबर थी। उस ट्वीट में आरती अग्रवाल नामक महिला ने लिखा था कि एक वृद्ध वैष्णव साधु तमाल दास के साथ मारपीट हुई है, जो साधुओं के साथ देश भर में हो रही क्रूर घटनाओं की श्रेणी में आता है।

आरती अग्रवाल ने दावा किया था कि इनमें से 2 आरोपित बंगलादेशी हैं और बाकी फरार हैं। साथ ही इस ट्वीट में ये भी लिखा गया था कि पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। इसी ट्वीट का जवाब देते हुए मथुरा पुलिस ने क्षेत्राधिकारी के बयान वाला वीडियो शेयर किया।

बता दें कि सोमवार (मई 11, 2020) की रात दस बजे एक फेसबुक पेज के माध्यम से वृंदावन के साधु तमाल कृष्ण दास पर हमले की खबर शेयर की गई थी। फेसबुक पेज ‘Vrindavan Homeless Cows Seva And Care’ ने साधु तमाल कृष्ण दास की तस्वीरों के साथ एक छोटा सा पोस्ट लिखा था

पोस्ट में लिखा गया, “वृंदावन के पुजारी पर क्रूर हमला: वृंदावन के इमलीताला मंदिर के मुख्य पुजारियों में से एक, बुजुर्ग वैष्णव संत श्री तमाल कृष्ण दास पर गुंजों ने निर्दयता से हमला किया। दो गुंडों के बारे में कहा जा रहा है कि वो बांग्लादेशी थे, बाकी बाहरी लोग। सारे गुंडे फरार हैं। मथुरा पुलिस इस मामले को रफा-दफा करना चाहती है। कृपया इसे शेयर करें।”

पोस्ट के साथ जो तस्वीरे शेयर की गई थीं, वो क्रूरता की एक कहानी समेटे हुए है। एक फोटो में साधु तमाल कृष्ण दास के सर पर चोट है और रक्त बह रहा है। दूसरे में वो असहाय से बैठे हुए हैं और उनके कुछ सामान (चश्मा आदि) कक्ष में रखे हुए हैं। तीसरी तस्वीर में उनके चेहरे पर हमले के भयावह निशान हैं, और वो इतने क्रूर हैं कि देख कर सिहरन होती है।

अब वृंदावन के साधु पर क्रूर हमला… इमलीताला मंदिर के संत तमाल कृष्ण दास को बुरी तरह पीटा

सोमवार (मई 11, 2020) की रात दस बजे एक फेसबुक पेज के माध्यम से वृंदावन के साधु तमाल कृष्ण दास पर हमले की खबर शेयर की गई। फेसबुक पेज ‘Vrindavan Homeless Cows Seva And Care’ ने साधु तमाल कृष्ण दास की तस्वीरों के साथ एक छोटा सा पोस्ट लिखा।

अपडेट: वृंदावन: साधु तमाल दास के साथ हुई मारपीट को पुलिस ने कहा आपसी झगड़ा, एक गिरफ्तार, बाकी की खोज जारी

पोस्ट में लिखा गया, “वृंदावन के पुजारी पर क्रूर हमला: वृंदावन के इमलीताला मंदिर के मुख्य पुजारियों में से एक, बुजुर्ग वैष्णव संत श्री तमाल कृष्ण दास पर गुंजों ने निर्दयता से हमला किया। दो गुंडों के बारे में कहा जा रहा है कि वो बांग्लादेशी थे, बाकी बाहरी लोग। सारे गुंडे फरार हैं। मथुरा पुलिस इस मामले को रफा-दफा करना चाहती है। कृपया इसे शेयर करें।”

पोस्ट के साथ जो तस्वीरे शेयर की गई हैं वो क्रूरता की एक कहानी समेटे हुए हैं। एक फोटो में साधु तमाल कृष्ण दास के सर पर चोट है और रक्त बह रहा है। दूसरे में वो असहाय से बैठे हुए हैं और उनके कुछ सामान (चश्मा आदि) कक्ष में रखे हुए हैं। तीसरी तस्वीर में उनके चेहरे पर हमले के भयावह निशान हैं, और वो इतने क्रूर हैं कि देख कर सिहरन होती है।

संत तमाल कृष्ण दास के चेहरे पर गहरी चोटें हैं

बाकी तस्वीरें भी मानवीय क्रूरता की कहानी कहती हैं। फेसबुक एवम् ट्विटर इन तस्वीरों को शेयर किया जा रहा है। वृंदावन वाले फेसबुक पेज पर इसे लगभग 2.5 हजार बार शेयर किया जा चुका है और लोगों ने इस खबर को पढ़ कर निराशा जताई है।

ऐसी तस्वीरें इसलिए किसी भी संवेदनशील व्यक्ति के हृदय पर चोट करते हैं क्योंकि पीड़ित एक साधु है जो किसी का कुछ नहीं बिगाड़ता। आखिर कैसे निम्न कोटि के गुंडे रहे होंगे जो साधुओं पर हमला बोलते हैं? एक बुजुर्ग पुजारी किसी व्यक्ति को किस तरह का नुकसान पहुँचा रहा होगा कि उन्हें इस तरह से पीटा गया?

हाल ही में, पालघर में दो साधुओं एवम् उनके ड्राइवर की हत्या का घाव हिन्दुओं के हृदय से गया नहीं था कि अब यह घटना सामने आई है। पालघर वाली साधुओं की लिंचिंग के बाद मेवात में महंत रामदास पर हमला हुआ था। साथ ही, बुलंदशहर में भी उन्हीं दिनों में दो सोते साधुओं की हत्या कर दी गई थी।

इस मामले में पुलिस आदि की प्रतिक्रिया खबर के लिखे जाने तक नहीं ली जा सकी है, परंतु हमारे पास जैसे-जैसे सूचनाएँ उपलब्ध होंगी, हम इसे अपडेट करते रहेंगे।

घात लगाए नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुआ CRPF जवान, घने जंगलों का फायदा उठाकर बच निकले नक्सली

छत्तीसगढ़ में एक बार फिर नक्सलियों के साथ हुई पुलिस और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में सीआरपीएफ का एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया। दरअसल, पुलिस बीते दिनों हुई मुठभेड़ को लेकर इलाके में सर्च अभियान चला रही थी। इस दौरान जंगलों में छिपे नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी।

जानकारी के मुताबिक बीजापुर जिले में सोमवार (11 मई, 2020) दोपहर को छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्स, डीआरजी और सीआरपीएफ की कुछ टीमें जंगल में नक्लियों के खिलाफ सर्च अभियान चला रही थी। इसी बीच उरीपाल गाँव के पास जंगलों में छिपे नक्सलियों ने जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में सीआरपीएफ के जवान मुन्ना यादव वीरगति को प्राप्त हो गए। सुरक्षाबल के जवान इसका मुँहतोड़ जवाब दे पाते इससे पहले ही नक्सली घने जंगलों का फायदा उठाकर मौके से बच निकले।

वहीं बिलासपुर के आईजी दीपांशु काबरा ने ट्वीट करते हुए लिखा कि सीआरपीएफ की 170वीं बटालियन के जवान मुन्ना यादव वीरगति को प्राप्त हो गए। वे झारखंड के रहने वाले थे। दरअसल, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले की फोर्स मिलकर इन दिनों नक्सल विरोधी अभियान चला रही है। इसी अभियान के तहत ये इलाके में निकले हुए थे।

उधर वीरगति को प्राप्त हुए मुन्ना यादव का पार्थिव शरीर मंगलवार को हेलिकॉप्टर से उनके पैतृक गाँव साहेबगंज भेजा जाएगा। इससे पहले उन्हें रायपुर एयरपोर्ट पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि इससे पहले छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव जिले में शुक्रवार रात (8 मई, 2020) को नक्सलियों और पुलिस के बीच घंटों चली मुठभेड़ में चार नक्सलियों को ढेर कर मदनवाड़ा थाना प्रभारी सब इंस्पेक्टर श्यामकिशोर शर्मा वीरगति को प्राप्त हो थे। पुलिस ने चारों नक्सलियों के शवों को बरामद कर उनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार बरामद किए थे। बरामद किए गए चार नक्सलियों के शवों में दो महिलाओं के शव भी शामिल थे।

पुलिस महानिरीक्षक विवेकानंद सिन्हा के मुताबिक सुरक्षाबलों ने घटनास्थल से दो महिला नक्सलियों समेत चार नक्सलियों के शव, एक एके 47, एक एसएलआर और दो अन्य हथियार बरामद किए थे।

गौरतलब है कि झारखंड में गुमला सहित कई जिलों में आतंक का पर्याय बन चुके उग्रवादी संगठन पीएलएफआई (PLFI) के कमांडर बसंत गोप को एक ग्रामीण निर्भीक आदिवासी महिला विनीता उरांव ने टांगी से काटकर मार डाला था। यह घटना वृंदा नायक टोली में मंगलवार (मई 05, 2020) की रात को हुई थी।

AAP नेता राजेंद्र पाल गौतम के पुरानी वीडियो शेयर कर भारतीय सेना को बदनाम करने की कोशिश की, कड़ी आपत्ति के बाद हटाया

इस समय देश कोरोना वायरस जैसी भयानक महामारी से जूझ रही है। देश के सभी नागरिक बड़े पैमाने पर सरकार द्वारा दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इसमें सेना के जवान भी शामिल हैं, जो कोरोना के खिलाफ लड़ाई में फ्रंट लाइन में खड़े हैं।

इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) विधायक राजेंद्र पाल गौतम जैसे कुछ लोगों ने भारतीय सेना के खिलाफ आपत्तिजनक दावा किया कि भारतीय सेना के जवानों को उनके वरिष्ठों द्वारा जातिसूचक गालियों और टिप्पणियों से अपमानित किया जाता है।

इस घटना की निंदा करते हुए, AAP नेता गौतम ने अपने ट्वीट में पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को टैग किया और उन्हें इस मामले का संज्ञान लेने और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोहराया न जा सके।

इसके कुछ देर बाद AAP नेता राजेंद्र पाल गौतम ने सेना के जवान का एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि उनके वरिष्ठ उनके खिलाफ जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल करते हैं।

जिसके बाद इंडियन आर्मी ने इस पर कड़े शब्दों में स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सेना से सत्यापित किए बिना इस तरह के पुराने वीडियो को सर्कुलेट करना निंदनीय और अफसोसजनक है। भारतीय सेना ने कहा कि उन्हें जाति, मजहब या धर्म के संदर्भ के बिना भारतीय समाज के सभी सैनिकों पर गर्व है।

सेना ने कहा कि वीडियो तीन साल पुराना (2017) है और भारतीय सेना के लिए शत्रुतापूर्ण तत्वों द्वारा सर्कुलेट किया गया है। AAP विधायक गौतम द्वारा आज शेयर किया गया वीडियो जनवरी 2018 के टाइम स्टैम्प के साथ YouTube पर उपलब्ध है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि ये वीडियो पुरानी हो सकती है। सेना ने भी दावा किया है कि यह वीडियो 2017 का है।

भारतीय सेना द्वारा इस वीडियो पर आपत्ति जताए जाने के बाद AAP नेता राजेंद्र पाल गौतम ने वीडियो को यह कहते हुए हटा लिया कि अभी आर्मी के वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें फोन कर बताया कि यह 2-3 साल पुरानी घटना है। इस सैनिक ने आपसी झगड़े के चलते नाराज़गी मे एक वीडियो रिकॉर्ड किया जिसे बाद मे छेड़छाड़ कर दोबारा वायरल किया गया।

मगर इसके साथ ही उन्होंने एक और ट्वीट किया, “हालाँकि आधिकारिक तौर पर इस वीडियो को लेकर अभी तक सूचित नही किया गया लेकिन उन आधिकारी की बात का भरोसा करते हुए अपने इस ट्वीट को हटा रहा हूँ, लेकिन साथ ही साथ मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि आज भी हर रोज जातिगत भेदभाव की घटनाएँ सामने आती रहती है और उन पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की जाती।”

भारतीय सेना के जवान के एक पुराने वीडियो को साझा करने को लेकर हो रही आलोचना को रोकने के लिए, आप नेता गौतम ने ऊना, झज्जर, रोहित वेमुला, पायल तडवी और कई अन्य लोगों की घटनाओं का हवाला दिया, जिसमें जातिगत भेदभाव का आरोप लगाया गया।

AAP नेता ने ट्वीट करते हुए लिखा, “हम राष्ट्रवाद और बाबासाहेब को मानने वाले लोग है, हमे कोई राष्ट्रवाद न सिखाए। हम पक्के देशभक्त हैं। देश के लिए अपनी जान न्योछावर करना जानते हैं। हम देश की सेना का मनोबल को नही गिरने देंगे, न हमारा ऐसा कोई इरादा है।”

ट्वीट में आगे उन्होंने लिखा, “लेकिन हम केंद्र की सरकार से और राज्य सरकारों से निवेदन करते हैं कि वह तुरंत देश से जातिवाद को खत्म करने की दिशा में काम करें और जहाँ भी जातिवाद और अस्पृश्यता की घटना हो उन घटनाओं पर मुकदमा दर्ज करके स्पीडी ट्रायल के जरिए ऐसे लोगों जल्द से जल्द सजा दी जाए, ताकि जातिगत भेदभाव की घटनाएँ रुक सकें।”

रियाज नाइकू के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन ने गाजी हैदर को बनाया कश्मीर में नया कमांडर, सेना ने की अंत की तैयारी

अब तक कश्मीर में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के कंमाडर रहे आतंकी रियाज नायकू के मारे जाने के बाद हिजबुल मुजाहिद्दीन ने गाजी हैदर को कश्मीर का नया कमांडर बनाया है। इसकी जानकारी मिलते ही भारतीय सेना ने इसके अंत की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक गाजी हैदर को कश्मीर का कंमाडर बनाए जाने पर लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने ट्वीट करते हुए लिखा, “कितने गाजी आए और कितने गाजी गए।” दरअसल, लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने पहले श्रीनगर में 15 कोर कमांडर के रूप में काम किया था, उन्होंने कश्मीर घाटी में सभी आतंकवादी रोधी और घुसपैठ रोधी अभियानों को विफल करने में अहम भूमिका निभाई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी संगठन हिजबुल के प्रमुख सैयद सलाहुदीन की अध्यक्षता में हुई बैठक में कश्मीर में नए कमांडर बनाने का फैसला लिया गया है। इस बैठक में गाजी हैदर को कश्मीर कमांडर के साथ जफर-उल-इस्लाम को डिप्टी कमांडर घोषित किया गया है। वहीं अबु तारिक को चीफ मिलिट्री एडवाइजर बनाया गया है।

जानकारी के मुताबिक 26 वर्षीय गाजी हैदर को सैफुल्लाह मीर के नाम से भी जाना जाता है। उसने मेडिकल की पढाई की है। उसे ‘डॉक्टर सैफ’ और मुसाहिब के नाम से भी जाना जाता है। इतना ही नहीं वह अक्सर पुलिस मुठभेड़ों में घायल होने वाले आतंकियों का इलाज भी करता है। बताते है कि गाजी हैदर दक्षिणी कश्मीर में अफीम की अवैध खेती करने वालों से वसूली करके आतंकी संगठन को देता था।

आपको बता दें कि बुरहान वानी की मौत के बाद 17 अक्टूबर 2016 को जम्मू-कश्मीर में जाकिर मूसा को हिजबुल मुजाहिद्दीन का नया कमांडर बनाया गया था। इसके बाद साल 2017 में रियाज नायकू संगठन का कमांडर बनाया गया था। अब उसकी भी मौत के बाद गाजी हैदर को नया कमांडर बनाया गया है। वहीं भारतीय सेना ने गाजी हैदर को टॉप लिस्ट में लेते हुए उसके अंत की तैयारी करना शुरू कर दी है।

रियाज की मौत के बाद सोशल मीडिया पर आई एक वीडियो में संगठन का प्रमुख सैयद सलाउद्दीन कहता हुआ सुनाई दे रहा था, “मुझे बहुत दिली सदमा हुआ है, लेकिन दोस्तों-बुजुर्गों ये शहादत का सिलसिला पहले दिन से ही चला आ रहा है। सिर्फ 1 जनवरी 2020 से अब तक बहुत से मुजाहिद्दीन अपनी शहादत दे चुके हैं। ये सभी पढ़े-लिखे हैं। मुजाहिद्दीन ने भी हालिया, हंदवाड़ा और राजवाड़ की कार्रवाई में दुश्मन का कमर तोड़ दिया है। लेकिन जरूरी यह है कि इस वक्त दुश्मन (भारत) का पलड़ा भारी है।”

गौरतलब है कि हंदवाड़ा में 6 मई को सेना ने हिजबुल मुजाहिद्दीन के सबसे बड़े आतंकी रियाज नायकू को मार गिराया था। इस कार्रवाई को सेना, सीआरपीएफ और राष्ट्रीय राइफल्स ने मिलकर अंजाम दिया था। रियाज ने जुलाई 2016 में अनंतनाग में बुरहान वानी की मौत के बाद हिजबुल की कमान संभाली थी। 33 वर्षीय इस आंतकी पर 12 लाख रुपए का इनाम भी था।

जावेद अख्तर के लाउडस्पीकर पर अजान न देने के बयान पर भड़के देवबंदी उलेमा, कहा- इन्हें क्या परेशानी है

अजान को लेकर देश में एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। गीतकार जावेद अख्तर ने लाउडस्पीकर पर अजान देने का विरोध किया है। कट्टरपंथियों और AIMIM के नेता के बाद अब देवबंदी उलेमा ने इस पर नाराजगी जाहिर किया है।

मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि संविधान इसकी इजाजत देती है तो फिर किसी को बयानबाजी कर सुर्खियाँ बटोरने का कोई मतलब नहीं है।जावेद अख्तर जो माँग कर रहे हैं, यह पहले पहले भी होती आई है। देश के लोगों को इनपर ध्यान नहीं देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अजान से समुदाय के लोगों को मालूम हो जाता है कि नमाज का वक्त हो गया है। वो अपनी इबादत में लग जाते हैं। अजान मात्र चंद मिनटों की होती है। इससे किसी को कोई ऐतराज और परहेज नहीं होना चाहिए। हिंदुस्तान का संविधान भी इसकी इजाजत देता है।

मौलाना कासमी ने कहा कि हर इंसान को अपने मजहब पर अमल करने की पूरी आजादी है। संविधान और इस्लाम की शरीयत की मुखालफत करना छोड़ दे। इस तरह की बयानबाजी सुर्खियों में रहने के लिए कुछ लोग करते हैं।

मौलाना ने आगे कहा कि जावेद अख्तर को यह मालूम होना चाहिए कि इस समय देश के हालात खराब है। पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है। इस पवित्र महीने के अंदर और कुराने पाक की बरकत के चलते लोग दुआ कर रहे हैं कि कोरोना बीमारी का खात्मा करें। ये हालात जावेद अख्तर जैसे लोगों को अपने आप को चमकाने के लिए नहीं है।

बता दें कि इससे पहले जावेद अख्तर के खिलाफ जहर उगलते हुए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता सैयद असीम वकार ने तो यहाँ तक कह दिया था कि जावेद अख्तर मुस्लिम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने बहुत जल्दी दिखा दिया कि इस लंबे से कुर्ते के नीचे जो ज्ञान है, वह खाकी निकर से निकल कर आ रहा है।

उनका कहना था कि जावेद अख्तर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ कनेक्शन हैं और वह मजहब के खिलाफ इसलिए बोल रहे हैं, क्योंकि वह मौजूदा सरकार में राज्यसभा सीट चाहते हैं।

शेख हमजा नाम के एक यूजर ने लिखा था, “वह (जावेद अख्तर) मजहब और इस्लाम पर धब्बा है। जिसे भी अजान से दिक्कत है, उसे इस्लाम से निकाल फेंकना चाहिए। ऐसे इंसान को हम आस्तीन का साँप और गद्दार बोल सकते हैं।”

उल्लेखनीय है कि जावेद अख्तर ने शनिवार (मई 9, 2020) को किए अपने ट्वीट में कहा था, “भारत में तकरीबन 50 साल तक लाउडस्पीकर पर अजान हराम थी। इसके बाद ये हलाल हो गई और इस कदर हलाल हुई कि इसकी कोई सीमा ही नहीं रही। अजान करना ठीक है, लेकिन लाउडस्पीकर पर इसे करना दूसरों के लिए दिक्कत का सबब बन जाता है। मुझे उम्मीद कि कम से कम इस बार वो दूसरों को हो रही परेशानी को समझते हुए लाउडस्पीकर पर अजान देना खुद ही बंद कर देंगे।”

सरकार कोरोना के समुदाय आधारित मैपिंग पर विचार नहीं कर रही: स्वास्थ्य मंत्रालय ने डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट को नकारा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने सोमवार (मई 11, 2020) को उन रिपोर्टों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि केंद्र सरकार देश में कोरोना वायरस प्रकोप को समुदाय के आधार पर मैपिंग करने पर विचार कर रही है।

लव अग्रवाल ने इस खबर को खारिज करने हुए कहा कि यह खबर का बहुत ही गैर जिम्मेदाराना हिस्सा है। कोरोना वायरस किसी की जाति, धर्म या मजहब नहीं देखता है।

कोरोना वायरस के धर्म-आधारित मैपिंग की रिपोर्टों को खारिज करते हुए लव अग्रवाल ने कहा कि सरकारी एजेंसियों द्वारा कुछ समूहों की पहचान की गई है, जहाँ बहुत अधिक संख्या में संक्रमण की सूचना मिली है।

अग्रवाल ने कहा, “हमारे लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि हम कम्युनिटी ट्रांसमिशन के स्टेज तक न पहुँचें। इसके लिए रोकथाम के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।”

देश में कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। लव अग्रवाल ने बताया कि पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना वायरस के 4213 नए मामले सामने आए हैं, जबकि 1559 लोग ठीक भी हुए हैं। इसके साथ ही रिकवरी रेट भी 31.15 प्रतिशत हो चुका है।

वहीं देश की बात करें तो अब तक संक्रमित मामलों की कुल संख्या 67152 है। 20917 लोग ठीक हो चुके हैं और 44029 सक्रिय मरीजों का इलाज चल रहा है।

डेक्कन क्रॉनिकल ने किया था समुदाय आधारित मैपिंग का दावा

गौरतलब है कि ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ ने कल (मई 10, 2020) एक रिपोर्ट में दावा किया था कि सरकार कोरोना वायरस के प्रसार को समुदाय के आधार पर समझने के लिए धर्म, जीवन शैली, आय, दैनिक दिनचर्या और परिवार के आकार आदि को लेकर मैपिंग करने पर विचार कर रही है।

डेक्कन क्रॉनिकल ने रविवार को उच्च ‘सूत्रों’ का हवाला देते हुए एक लेख प्रकाशित किया था। इसमें आरोप लगाया गया था कि उच्चतम स्तर पर समुदाय आधारित मैपिंग के प्रस्ताव पर विचार-विमर्श किया गया।

लेख में कहा गया था कि यदि भविष्य में देश में कोरोना वायरस की स्थिति संयुक्त राज्य अमेरिका की तरह भयावह स्थिति में पहुँच जाएगी तो धर्म आधारित मैपिंग यह पहचानने में मदद करेगा कि किस समुदाय में वायरस फैलने की अधिक संभावना है और उसके हिसाब से उस समुदाय या समूह पर सख्त रोकथाम लगाए जाएँगे।

लेख में यह भी कहा गया था कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान में कोरोना वायरस की धड़ल्ले से बढ़ते केस को देखने के बाद समुदाय आधारिक मैपिंग की योजना बनाई गई।

छेड़खानी के बाद किशोरी को चाकू मारा, आरोपित महफूज अंसारी को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर हमला, पाँच पुलिसकर्मी घायल

बिहार के रोहतास जिले में एक किशोरी से छेड़खानी के आरोपति को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर लोगों ने पथराव कर दिया। इस हमले में थानाध्य्क्ष सहित पाँच पुलिसकर्मी घायल हो गए। इससे पहले आरोपित ने किशोरी से छेड़खानी करते हुए उस पर चाकू से हमला कर दिया था। फिलहाल मामले को लेकर गाँव में तनाव बना हुआ है।

दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक रोहतास जिले के चेनारी थाना क्षेत्र के गाँव पेबंदी में शनिवार (9 मई, 2020) को एक नाबालिग लड़की अपनी माँ के साथ छत पर सो रही थी। इस बीच मौका पाकर पड़ोस का ही महफूज अंसारी कई घरों की छतों को डाककर नाबालिग की छत पर पहुँच गया और लड़की के साथ छेड़खानी शुरू कर दी। जब इसका विरोध नाबालिग ने किया तो आरोपित उसे चाकू मारकर मौके से फरार हो गया।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर की कटिंग

इसकी जानकारी मिलते ही परिजनों ने घायल लड़की को रात में सीएचसी में भर्ती कराया। साथ ही किशोरी की माँ ने आरोपित के खिलाफ थाने जाकर लिखित में शिकायत दर्ज कराई। लिखित में मिली शिकायत के बाद गाँव में आरोपित की गिरफ्तारी के लिए पहुँची पुलिस पर लोगों ने पथराव शुरू कर दिया।

इस हमले में थानाध्यक्ष राकेश कुमार सहित, विमलेश कुमार, दिनेश कुमार, आदि पाँच पुलिसकर्मी घायल हो गए, हालाँकि, कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने आरोपित महफूज अंसारी को गिरफ्तार कर लिया।

शनिवार देर रात हुई इस घटना और आरोपित की गिरफ्तारी के बाद पेबंदी गाँव में रविवार (10 मई, 2020) दोपहर को एक बार फिर तनाव पैदा हो गया और देखते ही देखते दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए। इस दौरान दोनों ओर से जमकर पथराव हुआ। दोनों पक्षों के बीच घटों तक चले पथराव में 12 से अधिक लोग घायल हो गए।

सूचना पर एक बार फिर पुलिस फोर्स गाँव में पहुँच गया, लेकिन लोगों ने पुलिस पर फिर से पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद गाँव में कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ पहुँचे आला अधिकारियों ने हालात पर काबू पाया। वहीं गाँव के तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए रोहतास जिले के डीएम पंकज दीक्षित और एसपी सत्यवीर सिंह गाँव में पहुँच गए।

दोनों अधिकारियों ने दोनों पक्ष के लोगों को समझाकर मामले में समझौता कराने की पहल की, लेकिन अधिकारियों की यह पहल नाकाम रही। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों पक्षों के 12 से अधिक लोगों को पुलिस हिरासत में ले लिया। वहीं गाँव में फिलहाल माहौल तनावपूर्ण देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात किया गया है।

भोपाल के जहाँगीराबाद में मिले 200 कोरोना संक्रमित, कम्युनिटी संक्रमण की आशंका ने उड़ाए प्रशासन के होश

देश में लगातार बढ़ती कोरोना मरीजों की संख्या के बीच मध्य प्रदेश के भोपाल शहर में एक ही स्थान पर 200 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इसके बाद प्रशासन ने इलाके में ‘कंटेंनमेन्ट एरिया’ का बैनर लगाकर उसे पूरी तरह से सील कर दिया है। इतना ही नहीं इसकी चैन को तोड़ने के लिए प्रशासन कुछ परिवारों को होटलों में शिफ्ट करने में जुट गया है।

जानकारी के मुताबिक प्रदेश की राजधानी भोपाल के जहाँगीराबाद इलाके में कोरोना के कम्युनिटी स्प्रेड की आशंका ने जिला प्रशासन के साथ प्रदेश की सरकार को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि जहाँगीराबाद में रहने वाली करीब 2000 की आबादी में 200 से अधिक लोगों में कोरोना का संक्रमण पाया गया है।

इसकी जानकारी मिलते ही प्रशासन ने इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया है और बैरिकेडिंक के साथ कोरोना की चेन को तोड़ने में जुट गया है। इसके लिए अधिकांश परिवारों को होम क्वारंटीन कर दिया गया है। लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सख्त हिदायत दी गई है। वहीं प्रशासन अब पुलिस के साथ सरकारी कर्मचारियों के परिवारों को शहर के दूसरे स्थानों पर मौजूद होटलों में शिफ्ट करने में लगा हुआ है।

पहले चरण में ऐसे लोगों को इलाके से निकाला जा रहा है, जिनकी रिपोर्ट कोरोना नेगिटिव पाई गई है। इसके तहत रविवार (10 मई, 2020) को प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की मदद से 200 लोगों को शिफ्ट कर दिया था। दरअसल, जहाँगीराबाद इलाके में पहला कोरोना पॉजिटिव मरीज 4 अप्रैल को मिला था।

इसके बाद से ही इलाकें में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है, हालाँकि ऐसा पहली बार हुआ है कि जब इलाके में इतनी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित लोग पाए गए हैं।

वहीं कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने भोपाल में होम डिलिवरी करने वाले, सब्जी विक्रेताओं, सरकारी कर्मचारियों के लिए आरोग्य सेतु डाउनलोड करना अनिवार्य कर दिया है। साथ ही पिथोड़े ने लोगों से अपील की है कि वह खुद ही जागरुक समाज की तरह लॉकडाउन के नियमों का पालन करें।

आपको बता दें कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 215, जबकि इससे संक्रमित मरीजों की संख्या 3614 हो गई है। राहत की खबर यह है कि अभी तक 1676 मरीज ठीक होकर अस्पतालों से अपने घर जा चुके हैं।