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किसी से दुश्मनी नहीं, बस बेटे के लिए न्याय चाहिए: रोहित जायसवाल के पिता की गुहार

अपडेट: बिहार के डीजीपी की जॉंच के बाद हम सूचनाओं को अपडेट कर रहे हैं। पीड़ित पिता इस दौरान कई बार अपने बयान से मुकरे हैं। लिहाजा उनकी ओर से किए गए सांप्रदायिक दावों को हम हटा रहे हैं। हमारा मकसद किसी संप्रदाय की भावनाओं का आहत करना नहीं था। केवल पीड़ित पक्ष की बातें सामने रखना था। इस क्रम में किसी की भावनाओं को ठेस पहुॅंची हो तो हमे खेद है।

बिहार के गोपालगंज के कटेया थाना क्षेत्र स्थित बेलाडीह गाँव (बेलहीडीह, पंचायत: बेलही खास) निवासी राजेश जायसवाल ने अपनी पीड़ा से ऑपइंडिया को अवगत कराया था। वायरल हुए वीडियो के आधार पर स्थानीय थानाध्यक्ष अश्विनी तिवारी पर राजेश और उनकी पत्नी के साथ कथित तौर पर अभद्रता करने के आरोप लग रहे हैं। उनके बेटे रोहित की 29 मार्च 2020 को लाश मिली थी। राजेश ने ऑपइंडिया से बात करते हुए आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या की गई है।

ऑपइंडिया की ख़बर के बाद कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि स्थानीय दुश्मनी के कारण थानाध्यक्ष को हटाने के लिए यह पूरा खेल रचा गया है। हमने जब मृतक रोहित के पिता राजेश से इस बाबत पूछा तो उन्होंने कहा, “मेरी दारोगा से कोई दुश्मनी थोड़े थी। मैं एक गरीब आदमी हूँ, पकौड़े बेचता था। मुझे क्या शौक है कि मैं उन लोगों से दुश्मनी मोल लूँ। मैंने तो इस मामले से पहले कभी थाने का मुँह तक नहीं देखा था। मुझे तो अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए।”

राजेश ने आगे कहा, “थानाध्यक्ष ने मुझे गाली दी, मेरी पत्नी को गाली दी और मारपीट की। ऐसा व्यवहार किया जाता है क्या? उन्होंने अपनी पैंट खोल कर अश्लील इशारे किए।”

इससे पहले उन्होंने बताया था कि कुछ बच्चे उनके बेटे रोहित को क्रिकेट खेलने के बहाने बुला कर ले गए थे और बाद में उसकी लाश मिली। एफआईआर के मुताबिक, सभी वयस्क आरोपितों के नाम इस प्रकार हैं- मेराज अंसारी, निजाम अंसारी और बशीर अंसारी। बाकी आरोपित 18 साल से कम आयु के हैं।

रोहित की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

राजेश फिलहाल गाँव छोड़ कर उत्तर प्रदेश में रह रहे हैं। थानाध्यक्ष ने ऑपइंडिया को बताया था कि आरोपितों में से 4 को त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार कर जेल (तीन को जेल, एक को बाल सुधार गृह) भेज दिया गया है।

राजेश पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को खारिज कर देते हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे की हत्या को एक्सीडेंट कह कर आरोपितों को बचाया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि गाँव से उक्त नदी 4 किलोमीटर दूर है, जहाँ से लाश मिली। उन्होंने कहा कि पास की झाड़ी से ही रोहित के कपड़े भी मिले। फिर उन्होंने पूछा, “अगर ये एक्सीडेंट होता तो फिर उसकी लाश पानी में उतने गहरे कैसे मिलती? स्पष्ट है कि उसके ऊपर पत्थर डाला गया ताकि लाश ऊपर न आए। कोई इतनी दूर नहाने क्यों जाएगा? जिस जगह पर लाश मिली है, वहाँ कोई नहाने वैसे भी नहीं जाता।”

ऑपइंडिया ने इस मामले में पुलिस से बातचीत की लेकिन वरीय अधिकारियों का बस इतना ही कहना है कि जाँच के बाद कार्रवाई की जा चुकी है।

इस घटना और राजेश के आरोपों को लेकर हमने बेलाडीह के कुछ ग्रामीणों से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी अश्विनी तिवारी ने 22 दिनों तक मृतक रोहित की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट दबा कर रखी।

केजरीवाल के दावे खोखले: दो दिन से नहीं मिला खाना तो दिल्ली से बिहार के लिए पैदल निकले प्रवासी मजदूर, कहा- यहाँ मर जाएँगे

देश में जारी लॉकडाउन के बीच दिल्ली में फँसे प्रवासी मजदूरों ने एक बार फिर केजरीवाल सरकार की तथाकथित दुरूस्त व्यवस्थाओं की पोल खोल कर रख दी है। दिल्ली से बिहार के लिए पैदल निकले प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वह दो दिनों से भूखे हैं, कोई रोजगार नहीं है तो पैदल घर जा रहे हैं। उनका कहना है कि जब भूखे-प्यासे यहाँ मरना ही है, तो रास्ते में ही मर जाएँगे।

इन तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि ये सालों से दिल्ली में रहे पूर्णिया के वो मजदूर हैं, जो लॉकडाउन से पहले मेहनत करके अपना पेट पालते थे। ये अपने परिवार का सहारा बने हुए थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद दिल्ली में फँसे ये मजदूर आज दो वक्त की रोटी की चिंता में दिल्ली से पैदल ही बिहार के लिए निकल पड़े हैं।

झुंड बनाकर दिल्ली से निकले इन मजदूरों में से किसी ने मुँह पर मास्क तो किसी ने रुमाल या अंगोछा लपेट रखा है। किसी के हाथ में एक थैला तो किसी के पीठ पर बिस्तरों के साथ कुछ जरूरी सामान हैं।

खास बात यह है कि हर किसी की आँखों में दो वक्त की रोटी की चिंता के साथ ही चेहरे पर उस दिल्ली सरकार के खिलाफ गुस्सा है, जिसने मजदूरों को सहारा देने के लिए लाख दावे तो किए, लेकिन ये सभी दावे खोखले साबित हुए।

पूर्णिया के एक प्रवासी मजदूर ने बताया, “हमलोग दिल्ली में वेल्डिंग का काम करते थे। अब यहाँ खाने-पीने, नहाने-धोने सब चीजों की दिक्कत हो रही थी जिसकी वजह से हम लोग पैदल अपने गाँव जा रहे हैं। हमें सरकार द्वारा चलाई जा रही ट्रेनों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”

दिल्ली में पिछले काफी समय से रह रहे पूर्णिया बिहार से दूसरे प्रवासी मजदूर ने बताया, “सारी मजदूरी घर भेज दी थी। हम 2 दिन से भूखे हैं। कोई रोजगार नहीं है, पैदल घर जा रहे हैं। सोचा जब यहाँ भी मरना है भूखे प्यासे, तो रास्ते में मर जाएँगे भूखे प्यासे। हमारे पास न मोबाइल है और न ही पैसे हैं। हमें किसी ट्रेन के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”

बता दें कि इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया था कि दिल्ली में करीब 7 हजार केस हैं, जिनमें से अधिकतर केस कम या बिना लक्षण वाले हैं।

उन्होंने आगे कहा था कि अभी भी प्रवासी मजदूर मजबूरी में दिल्ली छोड़कर जाने की कोशिश कर रहे हैं। ये लोग पैदल निकल रहे हैं। दिल्ली सरकार मजदूरों से विनती करती है कि ये लोग ऐसे दिल्ली छोड़कर न जाएँ सरकार उनके जाने का प्रबंध कर रही है।

कुल मिलाकर एक बात साफ है कि कोरोना वायरस के कारण जारी देशव्यापी लॉकडाउन में फँसे बिहार के मजदूरों के बहाने केजरीवाल सरकार अपने मीडिया मैनेजमेंट में जुटी हुई है।

एक ओर अरविंद केजरीवाल सरकार मीडिया में यह दावा कर रही है कि वह दिल्ली में फँसे मजदूरों का खर्च वहन कर रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि अरविंद केजरीवाल सरकार ने बिहार सरकार से ₹6.5 लाख का खर्च अदा करने के लिए कहा था।

रेलवे स्टेशन पहुँच कॉन्ग्रेस विधायक ने किया प्रचार, मजदूरों को पर्चा थमा कहा- सोनिया गाँधी ने खरीदा है आपका टिकट

पूरा देश इस समय कोरोना वायरस महामारी से लड़ रहा है। लाखों प्रवासी मजदूर इस कोरोना संकट में लॉकडाउन के चलते संकट का सामना कर रहे हैं। अलग-अलग राज्यों में फँसे मजदूर अपने घर जाने को बेताब हैं। मजदूरों की समस्या को देखते हुए सरकार ने श्रमिक ट्रेन चलाने का फैसला लिया है, लेकिन इन ट्रेनों में श्रमिकों के टिकट को लेकर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है।

इस बीच जब कॉन्ग्रेस शासित पंजाब के बठिंडा में रविवार (मई 10, 2020) को जब श्रमिक ट्रेन यात्रियों को लेकर रवाना हो रही थी तो कॉन्ग्रेस के विधायक एक पर्चा तमाम मजदूरों को बाँट रहे थे, जिसमे लिखा था, “आपके टिकट का पैसा सोनिया गाँधी दे रही हैं।”

कॉन्ग्रेस विधायक अमरिंद राजा वारिंग ने रेलवे स्टेशन पर तमाम यात्रियों को यह पर्चा बाँटा। इस दौरान कॉन्ग्रेस के अन्य कार्यकर्ता भी इन यात्रियों को यह पर्चा बाँट कर यह बता रहे थे कि उनके टिकट का पैसा सोनिया गाँधी ने दिया है।

अहम बात यह है कि कॉन्ग्रेस विधायक ने रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के रवाना होने से पहले भाषण भी दिया, ताकि वह इसका राजनीतिक लाभ उठा सकें। कॉन्ग्रेस विधायक ने मजदूरों से कहा, “आपकी टिकट का खर्चा सोनिया गाँधी ने दिया है। कॉन्ग्रेस पार्टी, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, प्रधान सुनील जाखड़ आपको घर भेज रहे हैं। इस पैम्फलेट में सब लिखा हुआ है। आराम से ट्रेन में बैठकर पढ़ लेना।”

दरअसल, सोनिया गाँधी ने ऐलान किया था कि वह हर जरूरतमंद मजदूर के टिकट का पैसा देंगी, जिसके बाद कॉन्ग्रेस विधायक यह चाहते हैं कि वह इसका अधिक से अधिक राजनीतिक लाभ उठा सके।

गौरतलब है कि पिछले दिनों खबरें सामने आई थीं कि मजदूरों से टिकटों के पैसे लिए गए हैं, उसके बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने सभी प्रवासी मजदूरों के टिकट का पैसा का भुगतान करने का ऐलान किया था। हालाँकि केंद्र सरकार का कहना है कि वह 85 फीसदी टिकट का पैसा खुद वहन कर रही है, जबकि 15 फीसदी पैसा ही प्रदेश सरकारों को वहन करना है।

मुंबई, महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में मिले कोरोना के सामुदायिक संक्रमण के संकेत: राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा

महाराष्ट्र में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या बीच राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्हें मुंबई सहित महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में कोरोना के सामुदायिक संक्रमण के सबूत मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की इस रिपोर्ट ने राज्य सरकार को चिंता में डाल दिया है।

महाराष्ट्र डिजीज सर्विलांस ऑफिसर डॉक्टर प्रदीप आवटे ने जानकारी देते हुए बताया कि मुंबई शहर के साथ महाराष्ट्र के भी कुछ हिस्सों में कोरोना के सामुदायिक संक्रमण के सबूत मिले हैं, हालाँकि, उन्होंने कहा कि राज्य में समग्र तस्वीर क्लस्टर मामलों की है। उन्होंने आगे कहा कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से संख्या बढ़ रही है, लेकिन यहाँ के केस देश के दूसरे हिस्सों से भिन्न हैं।

शहर में कोरोना के सामुदायिक संक्रमणों पर चिंता जाहिर करते हुए डॉ. प्रदीप आवटे ने कहा कि शहर में मिलने वाले कोरोना के हर एक केस की गहनता से जाँच करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए हमें हर केस के यात्रा के इतिहास को जानने और उसके संपर्क में आने वाले लोगों को तलाशने की बेहद जरूरत है।

प्रदीप आवटे ने बताया कि मुंबई शहर का जनसंख्या घनत्व दूसरे मैट्रो शहरों की तुलना में अधिक है। आवटे के मुताबिक मुंबई शहर में प्रति वर्ग किलोमीटर में 20 हजार लोग निवास करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मु्ंबई में कोरोना के सबसे अधिक केस मिलने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि यहाँ बड़ी संख्या में लोग लोग रहते हैं।

ऐसे में ये जान लेना बेहद जरूरी है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन या सामुदायिक संक्रमण क्या होता है। दरअसल, इस दौरान किसी व्यक्ति को संक्रमण कैसे हुआ, इसका पता लगाना मुश्किल होता है, जो लोग संक्रमित इलाकों या संक्रमित लोगों के संपर्क में नहीं आए होते, अक्सर उनमें भी संक्रमण पाया जाता है। इस चरण में मामले कई गुना तेजी से बढ़ते हैं और महामारी का रूप ले सकते हैं।

आपको बता दें देश में सबसे अधिक कोरोना से मरने वालों और इससे संक्रमित मरीजों की संख्या महाराष्ट्र राज्य में हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र में कोरोना की चपेट में आने से अब तक 832 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमिल लोगों की संख्या 22000 के पार पहुँच चुकी है। राहत की बात यह कि अब तक राज्य में 4199 मरीज ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं।

अगर बात करें पूरे देश की तो देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 2206, जबकि इससे संक्रमितों की संख्या 67 हजार के पार पहुँच गई है। आँकड़ों के मुताबिक देश में अभी 44,029 एक्टिव केस हैं और 20,916 मरीज ठीक हो चुके हैं। गौरतलब है कि देश में 17 मई तक लॉकडाउन जारी है।

जफरुल इस्लाम पर जल्द गिरेगी गाज, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू

विवादित सोशल मीडिया पोस्ट के चलते जफरुल इस्लाम खान को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष पद से हटाए जाने की प्रकिया शुरू हो चुकी है। इसकी जानकारी सोमवार (मई 11, 2020) को दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में दी।

सोमवार को इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि ज़फरुल इस्लाम को आठ मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

आम आदमी पार्टी सरकार के वकील अनुपम श्रीवास्तव ने बताया कि उपराज्यपाल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर डीएमसी चेयरमैन जफरूल इस्लाम के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है। 

दिल्ली सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि उपराज्यपाल ने यह पत्र 30 अप्रैल को ही लिखा था, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री से कहा था कि वो विभाग को डीएमसी ऐक्ट की धारा 4 के तहत जफरूल के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दें।

जानकारी के मुताबिक यह धारा आयोग के चेयरमैन या सदस्य को पद से हटाए जाने से संबंधित है। इसके बाद कोर्ट ने उपराज्यपाल से इस पर जल्द फैसला लेने के लिए कहा है। इससे पहले दिल्ली पुलिस की स्पशेल सेल की तरफ से नोटिस जारी करते हुए जफरुल को 12 मई तक मोबाइल और लैपटॉप जमा करने के लिए कहा था।

बता दें कि जफरुल इस्लाम खान को उनके पद से हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इसमें कहा गया था कि खान ने अपने सोशल मीडिया पेज पर भड़काऊ और देशद्रोही बयान दिया था। याचिका पर आज सुनवाई हुई।

आलोक श्रीवास्तव द्वारा दायर किए गए याचिका में कहा गया था कि 2 मई को FIR दर्ज होने के बावजूद जफरुल इस्लाम खान ने 3 मई को कहा कि उन्होंने न तो अपना ट्वीट डिलीट किया है और न ही इसके लिए माफी माँगी है। वह अपनी बात पर अब भी कायम हैं। 

साथ ही याचिका में आरोप लगाया गया कि स्पष्ट है कि वे जान-बूझकर भड़काऊ और देशद्रोही बयान दे समाज में असंतोष और दरार पैदा करना चाहते हैं। इसमें दावा किया गया कि जफरुल इस्लाम, जो कि एक जिम्मेदार पद पर आसीन है, ने ऐसा घृणित बयान देकर देश की एकता और अखंडता को खतरे में डाल दिया है।

इन्होंने भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को धूमिल करने और दो समुदायों के बीच नफरत फैलाने की कोशिश की है। जफरुल खान का बयान तथ्यात्मक रूप से गलत, अपमानजनक और देश विरोधी है।

गौरतलब है कि 28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के समुदाय विशेष ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

जफरुल खान के समर्थन में 8 मई को 20 मौलवियों और नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए उनके खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे को वापस लेने की माँग की थी। इस बयान में उन्होंने दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा दर्ज किए गए FIR की निंदा करते हुए कहा था कि खान को उत्पीड़ितों के लिए बोलने के लिए ‘दंडित’ किया जा रहा है।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन कर परिजनों और पार्टी नेताओं संग फाइल किया MLC नॉमिनेशन

महाराष्ट्र में कोरोना के फैलते प्रकोप के बीच राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर बता दिया कि उनके लिए राजनीति कितनी महत्तवपूर्ण है और सुरक्षा के लिहाज़ से बनाए गए नियम कानून कैसे सिर्फ़ मजाक की बात हैं।

दरअसल, एक ओर जहाँ महाराष्ट्र में कोरोना के आँकड़े हर दिन तेजी से बढ़ रहे हैं। वहीं, उद्धव ठाकरे अपने परिवार व पार्टी नेताओं समेत 21 मई को होने वाले MLC चुनावों के लिए नॉमिनेशन फाइल करने पहुँचे।

इस दौरान उद्धव ठाकरे के साथ उनका बेटा आदित्य ठाकरे, पत्नी रश्मि ठाकरे, छोटा बेटा तेजस ठाकरे, शिवसेना के कार्यकर्ता और महा विकास अघाड़ी सरकार के वरिष्ठ नेता भी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन कर मौक़े पर मौजूद रहे

जानकारी के लिए बता दें कि महाराष्ट्र में कोरोना के मामले धीरे-धीरे करके अब विकाराल रूप ले चुके हैं और वर्तमान में कोरोना केसों की संख्या वहाँ 22 हजार का आँकड़ा पार कर गई है। ऐसे में इतने लोगों के बीच उद्धव ठाकरे की तस्वीर देखकर सोशल मीडिया पर भी लोग उनकी काफी आलोचना कर रहे हैं।

कॉन्ग्रेस को अल्टीमेटम भेज, ठाकरे ने फाइल किया नॉमिनेशन

आने वाले दिनों में राज्य में अपनी कुर्सी बचाने के लिए और राज्य को राजनैतिक संकट से उभारने की खातिर शिव सेना प्रमुख ने हाल ही में एमएलसी की दो सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कॉन्ग्रेस को अल्टीमेटम भेजा था।

इस अल्टीमेटम में सीएम ने कॉन्ग्रेस को उनका निर्णय सुधारने के लिए कहा था। उन्होंने इस बात की भी धमकी दी थी कि अगर कॉन्ग्रेस अपने किसी एक कैंडिडेट का नाम वापस नहीं लेती तो वे एमएलसी इलेक्शन में नॉमिनेशन नहीं भरेंगे।

शिवसेना की इस धमकी के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसपर ध्यान दिया और महागठबंधन सहयोगियों के बीच बैठक के बाद कॉन्ग्रेस प्रमुख बालासाहेब थोराट ने घोषणा की कि उन्होंने इन चुनावों से अपने उम्मीदवार का नाम वापस लेने का फैसला किया है।

थोराट ने कहा, “हमने कैंडिडेट का नाम वापस लेने का निर्णय लिया। ये फैसला मुख्यमंत्री के अनुरोध पर आधारित है, ताकि चुनाव निर्विरोध हो सके। उनके अनुरोध और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि वे चुनाव लड़ रहे हैं। हमने पीछे हटने का फैसला किया है।”

MLC नॉमिनेशन भरना क्यों था जरूरी?

पिछले साल लंबे नाटक के बाद उद्धव ठाकरे 27 नवंबर 2019 को महाराष्ट्र की कुर्सी पर बतौर मुख्यमंत्री बैठे। मगर, उस समय वह राज्य विधानमंडल के किसी सदन के सदस्य नहीं थे, इसलिए उन्हें 6 महीने के भीतर सदस्य बनना अनिवार्य था। पर लॉकडाउन के कारण उनकी कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा था।

ऐसे में महागठबंधन सरकार को राहत देने के लिए, चुनाव आयोग ने राज्यपाल कोश्यारी के अनुरोध पर ध्यान दिया और महाराष्ट्र में विधान परिषद के लिए चुनाव कराने पर सहमत हुए और आज जाकर उद्धव ठाकरे ने चुनावों के लिए नॉमिनेशन फाइल किया।

बता दें, हाल ही में ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राज्य में राजनैतिक संकट पर अनुरोध किया था। जिसके बाद राज्यपाल कोश्यारी ने चुनाव आयोग को अगले दिन पत्र लिखा। उन्होंने अपने पत्र में इस बात पर ध्यान आकर्षित करवाया कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे विधानमंत्री में किसी सदन के सदस्य नहीं है। इसलिए, उन्हें जरूरत है कि वे काउंसिल के लिए 27 मई से पहले निर्वाचित हों।

अदालतों का चक्कर छोड़ उलमा से मसले हल कराओ, सरकार में हिम्मत नहीं शरीयत में दखल दे: AIMIM का भड़काऊ पोस्टर

मुंबई में असदुद्दीन ओवैसी के पार्टी AIMIM का एक बेहद ही भड़काऊ पोस्टर सामने आया है। बीजेपी नेता सुरेंद्र पुनिया ने इस पोस्टर को शेयर करते हुए लिखा है, “वाह,ओवैशी साहब और उनके लोग संविधान और सेक्युलरिज़म बचाने में लगे हुए हैं। आप सब सोते रहना, जागना मना है।”

बीजेपी नेता संबित पात्रा ने भी इस पोस्टर को ट्वीट करते हुए लिखा है, “AIMIM कितनी secular पार्टी है वह इस पोस्टर से पता लगता है।”

दरअसल, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने जो नया पोस्टर जारी किया है, उसमें काफी भड़काऊ और आपत्तिजनक बातें लिखी गई हैं। पोस्टर में लिखा है, “मुस्लिमों अगर तुम अदालतों का चक्कर लगाना छोड़ कर अपने उलमा से ये मसले हल कराओ, तो खुदा की कसम किसी सरकार में इतनी हिम्मत नहीं, कि तुम्हारी शरीअत में दखलअंदाजी कर सके।”

इस पोस्टर पर पार्टी के दो नेताओं इमरान अंधेरीवाला और हाजी रफत हुसैन का भी नाम और मोबाइल नंबर लिखा हुआ है। यह पोस्टर मुंबई के अंधेरी में लगाया गया है। पोस्टर में समुदाय विशेष को भड़काने की साजिश साफ तौर पर दिख रही है। इसमें समुदाय विशेष से AIMIM पार्टी में शामिल होने की अपील भी की गई है।

पुनिया के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा, “कल्पना करिए यदि कोई हिंदूवादी नेता इस तरह का पोस्टर लगाए तब इस देश में क्या होता! जब मुस्लिम अंबेडकर का फोटो लेकर घूमते हैं या जब वह संविधान की बात करते हैं तब बहुत हँसी आती है क्योंकि ये कभी भी भारत के संविधान या अंबेडकर में भरोसा नहीं रखते उन्हें अपनी शरीयत ही सबसे प्यारी है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “ये AIMIM के गुंडे सारे इंडिया के मुस्लिमों को बेइज्जत और शर्मसार कर रहे हैं। ये जाहिल गुंडे, मवाली नेता हम सब मुस्लिम यूथ को जाहिलत और चरमपंथी बनने की दावत दे रहा है।”

अब्दुल कादिर नाम के एक यूजर ने लिखा, “हमेशा संविधान बचाने की बात करने वाले ओवैसी साहब पता नही संविधान बचा रहे हैं कि बिगाड़ रहे हैं। हिंदुस्तान मे रहकर क्या यह संभव है?”

गौरतलब है कि पिछले दिनों AIMIM के नेता अबु फैजल का एक वीडियो सामने आया था। वीडियो में पार्टी नेता संक्रमण के बारे में बात करते हुए समुदाय विशेष अर्थात मुस्लिमों को इसका इलाज कराने से मना कर रहे थे। वीडियो में फैजल दावा कर रहे थे कि उनके पास पर्याप्त सबूत हैं कि कोरोना का तो केवल बहाना है। वास्तविकता में सरकार और डॉक्टर मिलकर मुस्लिम महिलाओं को ऐसा इंजेक्शन दे रहे हैं, जिनसे उनके बच्चे न हों और मुस्लिम आबादी न बढ़े। 

अपनी वीडियो में फैजल ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मुस्लिमों को सख्त तौर पर हिदायत दिया था कि वे किसी तरह का इंजेक्शन न लें और अगर कोई बार-बार बोले तो उसका हाथ तोड़ दें या फिर वो इंजेक्शन पहले उसको लगा दें।

4 दिन पहले ही रेप आरोपित लाया गया था तिहाड़, पीड़िता के कोरोना पॉजिटिव निकलते ही जेल में मचा हड़कंप

कोरोना वायरस फैलने का खतरा अब दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी बढ़ गया है। खबर है यहाँ कुछ दिन पहले एक रेप आरोपित जेल नंबर 2 में बंद किया गया था। लेकिन कुछ ही दिन में उसे आइसोलेट करने की नौबत आ गई।

सूचना के अनुसार, आरोपित के पकड़े जाने के बाद पुलिस को इस बारे में 9 मई को पता चला कि जिस लड़की का कैदी ने रेप किया, उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। जिसके बाद जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया और फौरन आरोपित को आइसोलेट किया गया।

आरोपित की उम्र 29 वर्ष है और उसे 4 दिन पहले ही दुष्कर्म और पॉक्सो के केस में तिहाड़ जेल लाया गया था। संदेह के आधार पर अब प्रशासन ने दो अन्य बंदियों का भी कोरोना टेस्ट करवाया है। अब फिलहाल पुलिस सबकी रिपोर्ट्स का इंतजार कर रही है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, तिहाड़ जेल प्रशासन के डीजी ने कहा, “जेल में आए सभी नए कैदियों को अलग सेल में 14 दिन तक क्‍वारंटाइन में रखा जाता है। इसलिए ज़्यादा परेशानी की कोई बात नहीं है।”

उन्होंने बताया कि तिहाड़ जेल में सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करवाया जा रहा है। यही वजह है कि तिहाड़ अब भी कोरोना से अछूता है।

गौरतलब है कि जेल नम्बर-2 में ही बिहार (Bihar) के बाहुबली माफिया डॉन शहाबुद्दीन और अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन भी बंद हैं। लेकिन, ये किसी के सम्पर्क में नहीं आए हैं। इनका जेल में अलग सेल है।

यहाँ बता दें, अभी तक तिहाड़ जेल से कोरोना का कोई मामला सामने नहीं आया है। वहाँ एहतियातन इस समय दिल्ली की तिहाड़ में कई कैदी जमानत पर छोड़े गए हैं और कइयों को दूसरी जेलों में शिफ्ट कर दिया गया है। जबकि मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में अब तक 184 लोग कोरोना पॉजिटिव आ गए हैं। इनमें कैदी और जेल का स्टाफ दोनों शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो 19 अप्रैल तक तिहाड़ से 2962 कैदियों को परोल पर रिहा किया गया था, इस दौरान जो बंदी अस्वस्थ थे और जिन पर आरोप ज्यादा गंभीर नहीं है, उन्हें प्रशासन ने रिहा करने में प्राथमिकता दी थी।

महाराष्ट्र में कोरोना शवों के साथ हो रहा मरीजों का इलाज, BJP विधायक ने वीडियो ट्वीट कर शिवसेना के दावों की खोली पोल

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। देश में महाराष्ट्र कोरोना संक्रमितों के लिहाज से सबसे आगे खड़ा है। यहाँ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा मरीज है। ऐसे में राज्य में कोरोना के मरीजों के साथ लापरवाही की बातें सामने आ रही हैं। इसी बीच महाराष्ट्र के भाजपा विधायक ने एक और वीडियो ट्वीट किया है। जिसमें भी कोरोना मरीजों के साथ लापरवाही बरती गई है।

महाराष्ट्र भाजपा विधायक नीतेश राणे ने ट्वीट किया है कि मुंबई के केईएम अस्पताल में कोरोना मरीजों को कोरोना पॉजिटिव शवों के साथ लिटाया जा रहा है। जिस वार्ड में मरीजों का इलाज चल रहा है वहीं बगल में कोरोना पॉजिटिव शव भी रखे गए हैं। अस्पताल में मरीजों के पास बॉडी बैग्स रखे हुए दिखाई दे रहे हैं।

राणे ने ट्वीट में बीएमसी को टैग करते हुए लिखा है, “आज सुबह 7 बजे केईएम अस्पताल! मुझे लगता है बीएमसी चाहता है कि उपचार के दौरान हमें अपने आस-पास शवों को देखने की आदत हो जाए, क्योंकि वो इसमें सुधार नहीं करना चाहते हैं! स्वास्थ्य कर्मी भी बुरा महसूस करें जो ऐसी परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। क्या कोई उम्मीद है?”

इस पूरी घटना पर अभी तक अस्पताल प्रशासन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। हालाँकि, इस पर शिवसेना नेता अनिल देसाई ने सफाई दी है।

उन्होंने कहा कि मरीजों की काफी अच्छी तरह से देखभाल की जा रही है। अगर इस तरह का कोई भी वीडियो (केईएम अस्पताल) सोशल मीडिया पर वायरल होता है, तो यह उसी क्षण हुआ होगा लेकिन सुधारात्मक उपाय तुरंत किए गए होंगे। सभी अधिकारी कुशलता से काम कर रहे हैं। किसी को बदनाम करने की जरूरत नहीं है।

गौरतलब है कि ये पहली बार नहीं है, जब मुंबई में इस तरह की लापरवाही सामने आई है। इससे पहले भी मुंबई के सायन अस्पताल में कोरोना के मरीजों के मामले में एक बड़ी लापरवाही सामने आई थी। यहाँ के इमरजेंसी वॉर्ड में मरीजों के पास संक्रमण में मारे गए लोगों के शव भी रखे जा रहे थे।

मरीज और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत भी की, लेकिन इस मामले ने तब तूल पकड़ा था, जब वीडियो वायरल हो गया। नीतेश राणे ने भी वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा था, “सायन अस्पताल में शवों के बीच मरीज भी सो रहे हैं। यह शर्मनाक है।”

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने इस पर कहा था कि मृतकों के परिजन 30 मिनट के भीतर बॉडी ले जाते हैं। लेकिन, कई बार वे हिचकिचाते हैं। इसके बाद शव मॉर्चुरी में भेज दिया जाता है। सभी प्रोसीजर पूरे करने में वक्त लगता है। 

वायरल वीडियो में दिख रहा था कि अस्पताल के वॉर्ड में कई मरीज बेड पर लेटे हैं। मरीजों के बीच में काले प्लास्टिक के बैगों में कोरोना से जान गँवाने वाले लोगों के शव भी बेड पर रखे हैं। कुछ शवों को कपड़ों से तो कुछ को कंबल से ढका गया था। पिछले दिनों इसी अस्पताल से एक कोरोना पॉजिटिव ने भागने की कोशिश की थी।

गोपालगंज: रोहित जायसवाल मामले में 4 आरोपितों को पकड़ चुकी है पुलिस

अपडेट: बिहार के डीजीपी की जॉंच के बाद हम सूचनाओं को अपडेट कर रहे हैं। पीड़ित पिता इस दौरान कई बार अपने बयान से मुकरे हैं। लिहाजा उनकी ओर से किए गए सांप्रदायिक दावों को हम हटा रहे हैं। हमारा मकसद किसी संप्रदाय की भावनाओं का आहत करना नहीं था। केवल पीड़ित पक्ष की बातें सामने रखना था। इस क्रम में किसी की भावनाओं को ठेस पहुॅंची हो तो हमे खेद है।

गोपालगंज स्थित कटेया थाना क्षेत्र के बेलाडीह स्थित गाँव (बेलहीडीह, पंचायत: बेलही खास) में रोहित जायसवाल की लाश मिली थी। इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।

बेलाडीह के कुछ ग्रामीणों से हमने बातचीत की। उन्होंने बताया कि थाना प्रभारी अश्विनी तिवारी ने 22 दिनों तक मृतक रोहित की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट दबा कर रखी। ऑपइंडिया ने जब थाना प्रभारी अश्विनी तिवारी से बात की तो उन्होंने बताया कि इस मामले में 4 लोगों को त्वरित कार्रवाई करते हुए जेल भेजा जा चुका है और एक व्यक्ति की तलाश जारी है। साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार के आरोपों पर बात करने से इनकार कर दिया और ख़ुद को कोरोना सम्बंधित ड्यूटी में व्यस्त बताया।

बता दें कि रोहित के पिता राजेश जायसवाल बेलाडीह में पकौड़े बेच कर अपना गुजर-बसर करता था। उनके आरोपों के अनुसार 28 मार्च 2020 को कुछ लड़के आए और उनके नाबालिग बच्चे को क्रिकेट खेलने के बहाने बुलाकर ले गए। बाद में उसकी लाश मिली।

राजेश अपनी पत्नी को लेकर थानाध्यक्ष के पास गए। जहाँ अश्विनी तिवारी ने उन्हें कथित तौर पर गन्दी-गन्दी गालियाँ दीं।

ऑपइंडिया ने गोपालगंज पुलिस के वरीय अधिकारियों से सम्पर्क कर इस बाबत पूछा तो उन्होंने बताया कि मामले में जाँच के बाद कार्रवाई की जा चुकी है।