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अर्नब गोस्वामी के खिलाफ बात ‘जाँच’ की नहीं, ‘प्रतिशोध’ की है: कपिल सिब्बल ने कोर्ट में माना

पालघर में साधुओं की लिंचिंग मामले में सोनिया गाँधी की चुप्पी पर प्रश्न उठाए जाने के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी, रिपब्लिक टीवी प्रमुख अर्नब गोस्वामी पर लगातार हमलावर रही। पार्टी ने सोनिया गाँधी पर सवालों को उठता देख पहले अर्नब को ‘साम्प्रदायिक घृणा’ फैलाने का आरोपित करार दिया और अब कोर्ट में कपिल सिब्बल ने इस बात को अप्रत्यक्ष रूप से मान भी लिया कि गोस्वामी पर दायर किया गया पूरा मामला जाँच संबंधी नहीं, बल्कि प्रतिशोध संबंधी है।

दरअसल, अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ दायर मुकदमों की सूची में एक मामला रजा अकादमी की ओर से भी दर्ज किया गया है। अकादमी ने अपनी शिकायत में रिपब्लिक टीवी के प्रमुख पर आरोप लगाया है कि उन्होंने साम्प्रदायिकता फैलाने का प्रयास किया।

अब इसी मामले की गंभीरता को परखते हुए अर्नब के वकील हरीश साल्वे ने कोर्ट में कहा कि उन्हें इस मामले में जाँच कराने में कोई परेशानी नहीं है। अगर, ये मामला सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया जाए।

उल्लेखनीय है कि सीबीआई भारत की एक प्रमुख जाँच एजेंसी है। बावजूद इस तथ्य के एक वकील होने के बाद भी रजा अकादमी की ओर से उनका केस लड़ रहे कपिल सिब्बल ने हरीश साल्वे की माँग पर एक अजीबोगरीब रिप्लाई दिया।

सिब्बल ने साल्वे की बात सुनते ही इस पर आपत्ति जताई और कहा, “सीबीआई को केस देने का मतलब है कि केस तुम्हारे हाथ में दे देना।”

सोचने वाली बात है कि सिब्बल ने ऐसा क्यों कहा? क्या सिब्बल ये कहना चाहते थे कि अर्नब गोस्वामी पर लगे आरोपों की जाँच कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा करवाई जानी चाहिए या फिर ये कहना चाहते थे कि इस केस को कॉन्ग्रेस की मशीनरी द्वारा ही हैंडल किया जाना चाहिए?

कोर्ट में रजा अकादमी के वकील की प्रतिक्रिया देखकर हरीश साल्वे ने सुनवाई के दौरान कहा भी कि कपिल सिब्बल का ये बयान साबित करता है कि अर्नब के ख़िलाफ़ जाँच राजनीति से प्रेरित होने के अलावा कुछ भी नही है। इसीलिए तो वे लोग चाहते है कि उनके लोग ही अर्नब से पूछताछ करें।

हरीश साल्वे ने कहा, “सिब्बल का बयान दर्शाता है कि इस मामले में सीबीआई की जरूरत है। ये राज्य और केंद्र की राजनैतिक समस्या है और अर्नब इसमें बीच में फँस गए हैं।”

गौरतलब है कि अब तक इस पूरे मामले में मुंबई पुलिस द्वारा अर्नब गोस्वामी से पूछताछ का तरीका काफी संदिग्धता पैदा करता है। सबसे पहले तो इस बात पर अब तक कोई सफाई नहीं दी गई कि आखिर अर्नब गोस्वामी से 12 घंटे पूछताछ क्यों की गई? इसके बाद ये सवाल कि जब अर्नब पर देर रात हमला करने वालों ने खुद स्वीकारा कि वे युवा कॉन्ग्रेस के सदस्य हैं, तो भी शिकायत में इस बात को लिखने से गुरेज क्यों किया जाता रहा कि अर्नब व उनकी पत्नी पर हमला करने वाले युवा कॉन्ग्रेस से थे?

बता दें, आज इस मामले में कोर्ट की सुनवाई के बाद स्पष्ट हो गया है कि कॉन्ग्रेस के लिए सोनिया गाँधी पर सवाल उठाने का सीधा मतलब देश में हिंसा फैलाने से हैं और सीबीआई का मतलब उनके लिए केंद्र सरकार से है। वे मानते हैं कि अगर सीबीआई के हाथ में मामला गया तो फिर वे उस आधार पर जाँच नहीं करेंगे, जिसपर कॉन्ग्रेस की मशीनरी कर पाएगी।

आज इस वाकए ने एक बार फिर साबित किया है कि कॉन्ग्रेस ऐसा मान चुकी है कि सोनिया गाँधी के लिए मीडिया के सवाल नहीं बने हैं। पर अगर, फिर भी कोई पत्रकार ऐसी जुर्रत करता है, तो उसको पार्टी द्वारा ऐसे ही निशाना बनाया जाएगा जैसे अर्नब को बनाया जा रहा है। कभी 12 घंटे पूछताछ करके, तो कभी 2018 के मामले को दोबारा उठाके।

ये सोच रहे कि केजरीवाल उनके कपड़े धोएँ, नेट पैक डलवा सकते हैं तो पानी नहीं मँगा सकते क्या: AAP नेता ने डॉक्टरों को दी गाली

भाजपा नेता तजिंदर बग्गा ने आम आदमी पार्टी (AAP) के एक नेता का स्क्रीनशॉट सामने लाया है, जिसमें वो डॉक्टरों के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुआ दिख रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के हरि नगर विधानसभा क्षेत्र के नेता राकेश सोनारिया ने डॉक्टरों को गाली देते हुए कहा कि ये सोच रहे हैं कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल आकर इनके कपड़े धोएँ। सोनारिया हरि नगर विधानसभा में अपनी पार्टी के सोशल मीडिया एकाउंट्स हैंडल करता है।

उसने पूछा कि इन डॉक्टरों के सीनियर ऑफिसर्स कहाँ हैं? क्या इन्हें शर्म नहीं आती? उसने कहा कि इन डॉक्टरों को लगता है कि सब कुछ उनके हाथ पर ही रख दिया जाए। सोनारिया ने आगे लिखा:

” ये #%मी हैं। इतना बड़ा हॉस्पिटल है। इन्हें वहाँ पानी ही नहीं नज़र आ रहा है। विडियो बना कर शेयर करने के लिए ये डेटा पैक डलवा सकते हैं लेकिन दो लिटर की बोतल नहीं मँगा सकते। क्या बात है!”

जिस व्यक्ति ने उक्त डॉक्टरों वाला विडियो सोनारिया को भेजा था, उसने उसकी भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि ये शर्म की बात है जो वो इस तरह की बातें कर रहे हैं। उसने कहा कि डॉक्टर परेशान हैं, तभी तो विडियो बना कर अपनी बात को सबके समक्ष रख रहे हैं। तजिंदर बग्गा ने इस स्क्रीनशॉट को ट्वीट करते हुए लिखा कि 2 दिन पहले आए दिल्ली के डॉक्टर्स के वीडियो ने जहाँ पूरे देश को झकझोर दिया, वहीं आम आदमी पार्टी के नेता व हरि नगर विधानसभा के सोशल मीडिया चलाने वाले राकेश कुमार सोनारिया की भाषा इस पार्टी की मानसिकता बताती है।

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता बग्गा ने कहा कि ऐसे लोगों पर धिक्कार है। इससे पहले जब स्थानीय विधायक राजकुमारी ढिल्लों तक राशन न पाने वाले ग़रीबों का मैसेज पहुॅंचा था तो उन्होंने टके सा जवाब दिया– राशन है ही नहीं तो कहॉं से दें। ढिल्लों सत्ताधारी आम आदमी पार्टी की विधायक हैं। ऐसे गाढ़े वक्त में पीड़ित भगवती और रेखा के परिवार के काम आए तजिंदर बग्गा। उन्होंने दोनों परिवार तक राशन पहुॅंचाया था। बग्गा चुनाव हारने के बावजूद लोगों की लगातार मदद कर रहे हैं और अपना चुनावी वादा भी निभा रहे हैं।

4000 मदरसे, 60000 बच्चे 1000 करोड़ का सालाना खर्च: तेलंगाना में मदरसों का संचालन मुश्किल में, अब सरकार से अनुदान की माँग

कोरोना वायरस के बीच लागू किए गए लॉकडाउन का बड़ा असर तेलंगाना के 4000 मदरसों पर देखने को मिला है। खबर है कि वहाँ कोरोना प्रभाव के कारण रमजान के महीने में मदरसों को मिलने वाली डोनेशन और चैरिटी में भारी गिरावट आई है, जिसके कारण उन्हें संचालित करना मुश्किल हो गया है।

डेक्कन क्रॉनिकल के अनुसार, तेलंगाना में 4000 मदरसे हैं जिनमें करीब 60,000 बच्चों को इस्लाम की शिक्षा दी जाती है और इन्हें निर्बाध सभी सुविधाओं सहित चलाने में सालाना 1000 करोड़ रुपए का खर्चा आता है। 

मगर, अब लॉकडाउन के कारण ये सभी मदरसे बंद होने की कगार पर है। प्रबंधन भी मदरसों के परिचालन को जारी रखने के लिए आवश्यक धन जुटाने में असमर्थ है। इसलिए कहा जा रहा है कि अगर ये लॉकडाउन कुछ और दिन बढ़ता है तो ये भी हो सकता है कि अभिवाहक अपने बच्चों को इन संस्थानों में भेजने से मना कर दें।

राज्य में दीनी शिक्षा प्रदान करने वाला सबसे बड़ा संस्थान जामिया निजामिया है। जहाँ 1000 बच्चे पढ़ते हैं और इसको चलाने में सालाना खर्च 6 करोड़ रुपए का आता है। ऐसे में इन मदरसों के पास कोई नियमित आय का स्रोत नहीं है। इसलिए सरकार की सहायता न मिलने के कारण वे केवल समुदाय द्वारा मिलने वाले चंदे पर ही निर्भर हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, जमियत उल डॉ मुफ्तिया रिजवाना परवीन बताती हैं कि लड़कियों और महिलाओं के लिए बना उनका संस्थान सिर्फ़ समुदाय द्वारा दी जाने वाली आर्थिक मदद पर चलता है। समृद्ध मुस्लिम रमजान के माह में जकात देते हैं, जिससे उनका 80 प्रतिशत खर्चा निकल जाता है।

इसके अलावा जकात और दान एकत्रित करने के लिए ये संस्थान अपने कुछ प्रतिनिधियों को अलग-अलग जगह भेजते हैं। वे प्रतिनिधि मस्जिदों के सामने काउंटर लगाते हैं और दान इकट्ठा करते हैं। पर, अब लॉकडाउन के कारण ये प्रक्रिया फॉलो नहीं हो पा रही है।

संस्थान प्रमुख बताती हैं कि, इस लॉकडाउन के कारण अमीर लोगों का ध्यान मदरसों को पैसा डोनेट करने से ज्यादा गरीबों को खाना खिलाने पर घूम गया है।  इसलिए, उनका कहना है कि अब जब लॉकडाउन खत्म होगा, तभी वे अपने व्यापार को चालू करने के लिए कुछ इंतजाम करेंगे।

बता दें, तेलंगाना में इस समय वित्तीय सहायता के अभाव में दीनी शिक्षा प्रदान करने वाले कुछ मदरसे अब बंद होने की कगार पर आ चुके हैं। इसलिए डॉ मुफ्तिया रिजवाना परवीन ने मदरसों के अस्तित्व को बचाने के लिए इस महामारी के समय में भी सरकार से अनुदान और अन्य प्रलोभनों की माँग की है। ताकि उनसे उनके मदरसे चल सकें।

अर्नब गोस्वामी से पूछताछ करने वाला पुलिसकर्मी कोरोना+, सुप्रीम कोर्ट से मिली 3 हफ्ते के लिए राहत

पत्रकार अर्नब गोस्वामी पर आरोप है कि उन्होंने मुंबई के बांद्रा में जमा हुई मजदूरों की भीड़ को सांप्रदायिक रंग दिया। महाराष्ट्र पुलिस ने अपनी एफआईआर में ये आरोप लगाया है। सोमवार (मई 11, 2020) को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई।

अर्नब गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट से दरख्वास्त की है कि बांद्रा मामले में उन पर दर्ज एफआईआर रद्द की जाए। महाराष्ट्र सरकार का कहना है कि ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी जाँच में हस्तक्षेप कर रहे हैं, ऐसा करने से उन्हें रोका जाए।

अर्नब गोस्वामी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे पेश हुए। ये एफआईआर ‘रजा एजुकेशन वेलफेयर सोसाइटी’ के अबू बकर शेख ने दायर की थी। उनका कहना है कि अर्नब गोस्वामी ने बांद्रा में मजदूरों के जुटान पर सांप्रदायिक डिस्टर्बेंस उत्पन्न करने की कोशिश की।

ये घटना अप्रैल 16 की है, जिसके बाद अर्नब के खिलाफ कई और एफआईआर भी दर्ज कराए गए। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह ने इस मामले की सुनवाई की। हरीश साल्वे ने इस मामले में जमानत की माँग की। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अर्नब को जिस तरह से नोटिस देकर बुलाया, उससे लगता है कि वो उन्हें जानबूझ कर परेशान कर रही है। उनके साथ 12 घंटों तक पूछताछ हुई

वकील साल्वे ने कोर्ट से कहा कि अर्नब से पूछताछ के दौरान भी जो सब पूछा गया, वो चिंताजनक है। उन्होंने पूछा कि पुलिस ऐसा क्यों आरोप लगा रही है कि अर्नब गोस्वामी ने कुछ लोगों की मानहानि की है? जिन दो पुलिसकर्मियों ने अर्नब गोस्वामी से पूछताछ की, उनमें कोरोना के लक्षण थे। उनमें से एक तो कोरोना पॉजिटिव भी पाया गया है।

हरीश साल्वे ने कहा कि एक न्यूज़ चैनल को ख़बर दिखाने का अधिकार है और इससे दंगे हो जाएँगे, ये बातें गलत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अर्नब गोस्वामी इन एफआईआर को रद्द करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसने इसीलिए हस्तक्षेप किया था क्योंकि देश भर में कई एफआईआर हो गए थे।

वकील साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट बेंच से कहा कि उन एफआईआर को देख कर क्या ऐसा लगता है कि अर्नब से 12 घंटों तक पूछताछ होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि पालघर में जिस तरह की बातें सामने आई है, ये मामला सीबीआई को दिया जाता है तो इसमें कोई समस्या नहीं है।

इस बात से विपक्षी वकील कपिल सिब्बल भड़क गए। उन्होंने कहा कि सीबीआई को मामला सौंपने का मतलब तो ये होगा कि आपके हाथ में ही जाँच दे देना। सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सिब्बल के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई। अर्नब गोस्वामी की तरफ से दलील पेश की गई कि सिब्बल का बयान ही ये साबित करता है कि ये केंद्र और राज्य सरकारों की लड़ाई है, जिसमें उन्हें फँसा दिया गया है। इसीलिए, सीबीआई को मामला दिया ही जाना चाहिए।

हरीश साल्वे ने कहा कि कम्पनी के सीईओ से पूछताछ की गई। उनसे पूछा गया कि गेस्ट लिस्ट कौन डिसाइड करता है, कम्पनी की आय-व्यय को लेकर सवाल किए गए। साल्वे ने पूछा कि इस मामले से सीईओ का क्या लेना-देना है? सुप्रीम कोर्ट ने अंत में अर्नब गोस्वामी पर किए गए एफआईआर पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई से 3 हफ्ते के लिए राहत प्रदान की और उन्हें ट्रायल कोर्ट या हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दाखिल करने का निर्देश दिया।

डॉ राजेन्द्र सिंह सुसाइड केस: 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजे गए आप MLA प्रकाश जरवाल, अदालत ने कहा- पूछताछ जरूरी

आप नेता प्रकाश जरवाल को डॉक्टर राजेन्द्र सिंह के सुसाइड केस में उनके साथी कपिल नागर समेत शनिवार (मई 9, 2020) को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद दिल्ली की कोर्ट ने उन्हें रविवार को 4 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया।

कोर्ट में जरवाल की पेशी के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों आरोपितों से पूछताछ के लिए 10 दिन की रिमांड माँगी। जिसके बाद, विधायक के वकील इरशाद ने याचिका का विरोध किया।

इरशाद ने कहा कि इस मामले में आप नेता को जानबूझकर फँसाया गया है और वे जरूरत पड़ने पर पुलिस का सहयोग करने के लिए तैयार हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने जरवाल के ऊपर लगे इल्जामों को संगीन बताया और कहा कि मामले में जाँच अपने प्राथमिक चरण पर है और दोनों आरोपितों से पूछताछ करना बाकी है।

दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ड्यूटी मजिस्ट्रेट नितिका कपूर ने इस दौरान पुलिस की याचिका को मंजूर करते हुए आरोपितों को 4 दिन पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया।

इस मामले के संबंध में अदालत ने कहा कि आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया जाना जरूरी है। मजिस्ट्रेट ने कहा, “जाँच शुरुआती चरण में है और आरोपितों से जबरन वसूली के दस्तावेजों की बरामदगी और टैंकर माफिया की भूमिका सुनिश्चित होनी अभी बाकी है।”

बता दें, इससे पहले इस मामले में कोर्ट ने जरवाल और नागर के खिलाफ आठ मई को गैर जमानती वारंट जारी किया था और दोनों के गायब होने के कारण परिजनों से पूछताछ की जा रही थी।

डॉक्टर का सुसाइड नोट

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने 18 अप्रैल को दिल्ली के नेब सराय इलाके में 52 वर्षीय डॉक्टर राजेन्द्र सिंह ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक के पास से एक 2 पेज का सुसाइड नोट मिला था जिसमें उन्होंने आत्महत्या के लिए इलाके के विधायक प्रकाश जरवाल और उनके सहयोगी कपिल को जिम्मेदार ठहराया था।

इसके अतिरिक्त पुलिस ने एक डायरी भी बरामद की थी, जिसमें लिखा था, “मेरा इस इलाके में एक क्लीनिक है और मेरे कुछ वाटर टैंकर दिल्ली जल बोर्ड में किराए पर चलते थे, लेकिन एमएलए प्रकाश जरवाल और उसका सहयोगी कपिल नागर मुझसे हर टैंकर के हिसाब से पैसे माँगने लगे। कुछ पैसे दिए भी गए लेकिन बाद में मेरे सभी टैंकर प्रकाश जरवाल ने दिल्ली जल बोर्ड से हटवा दिया।”

सुसाइड नोट में लिखा था, “टैंकरों को दिल्ली जल बोर्ड से हटवाने के बाद जब उन्हें ओखला के दिल्ली जल बोर्ड में लगवाया गया तो टैंकरों को वहाँ से भी प्रकाश जरवाल द्वारा हटवा दिया गया।” सुसाइड नोट के अनुसार प्रकाश जरवाल और उसके सहयोगी से उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिल रही थी और धमकियों के कारण उनका जीना मुश्किल हो गया था।

लड़का बन ‘वो’ करती थी चैट, खुद के गैंगरेप की बात से Bois Locker Room का किया पर्दाफाश – मीडिया रिपोर्ट

पिछले कई दिनों से चर्चा के साथ विवाद का विषय बने बॉयज लॉकर रूम (Boys Locker Room/Bois Locker Room) मामले में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल की टीम ने एक बड़ा खुलासा किया है। पुलिस टीम ने खुलासा किया कि जो स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे, जिनमें एक लड़की के साथ गैंगरेप की योजना बनाने की बात कही गई थी, उसका मास्टरमाइंड कोई लड़का नहीं बल्कि एक नाबालिग लड़की है।

दरअसल लड़की ने एक लड़के के नाम से फर्जी एकाउंट बनाकर और उनके साथ गैंगरेप की योजना के बारे में बात इसलिए की थी, जिससे कि वह उन लड़कों की लड़कियों के प्रति मानसिकता के बारे में पता लगा सके।

ज़ी न्यूज़ के पत्रकार जितेन्द्र शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक बॉयज लॉकर रूम (Boys Locker Room/Bois Locker Room) मामले की जाँच में पता चला है कि लड़की ने सिद्धार्थ नाम के लड़के के नाम से फर्जी ID बनाई और SexualAssault की बात की। जबकि लड़के ने खुद इस बात की जानकारी बाकी लड़कों और जिसके बारे में बात हुई, उसे दी। लड़की ने शिकायत इसलिए नहीं की क्योंकि फर्जी आईडी से बात वही कर रही थी।

जितेन्द्र शर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी में बताया गया है कि लड़की ने सिद्धार्थ नाम के लड़के से एक फर्जी आईडी बनाकर दूसरे लड़कों के साथ चैट की। दरअसल लड़की के चैट करने का उद्देशय अपनी जैसी लड़की के बारे में लड़कों की सोच को जानना था।

पुलिस उपायुक्त (साइबर सेल) एनेश रॉय ने बताया कि इस तरह के संदेश मिलने पर लड़के (संदेश प्राप्त करने वाले) ने बात करने से इनकार कर दिया। फिर उस लड़के ने बातचीत के स्क्रीनशॉट लेकर अपने दूसरे दोस्तों को भेजे, जिसमें वह लड़की भी शामिल थी, जिसने सिद्धार्थ नाम की फर्जी आईडी बनाकर संदेश भेजा था। उन्होंने कहा कि लड़की ने यह जानते हुए भी कि उसे यौन उत्पीड़न की सलाह देने वाला सिद्धार्थ नाम का एकाउंट फर्जी है, उसने किसी को बताना जरूरी नहीं समझा।

हालाँकि इसके बाद लड़की ने फर्जी एकाउंट को डिलीट कर दिया, लेकिन इससे पहले ही बातचीत के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। बॉयज लॉकर रूम (Boys Locker Room/Bois Locker Room) ग्रुप की सारी चैट सोशल मीडिया में पब्लिक प्लेटफॉर्म पर आने के बाद दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर इसकी जाँच शुरू की दी और नोएडा निवासी ग्रुप के एडमिन को गिरफ्तार कर लिया।

दिल्ली साइबर सेल की जाँच में सामने आया कि सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बने बॉयज लॉकर रूम में 20 से ज्यादा सदस्य आपस में चैट कर रहे थे। आपको बता दें कि इस मामले से जुड़े 24 लोगों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है।

मूक-बधिर कोमल का अपहरण: अलीम, बशर, अजीम माँ को भेज रहे नंगी तस्वीरें, Pak पुलिस नहीं सुन रही शिकायत

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार एक आम बात है। अब ख़बर आई है कि लाहौर के संधा में एक ईसाई लड़की का अपहरण कर लिया गया है। लड़की दिव्यांग है। वो गूँगी और बहरी हैं। यौन दासता (Sex Slavery) के लिए उनका अपहरण किया गया है।

पाकिस्तान का ये पीड़ित ईसाई परिवार व्यथित है, कोई उनका दर्द सुनने वाला नहीं है। अपहरणकर्ताओं ने पीड़ित परिजनों को अपहृत लड़की की नंगी तस्वीरें भेजी हैं। परिजन कह रहे हैं कि पुलिस सब कुछ जानते हुए भी कार्रवाई नहीं कर रही।

पुलिस इसीलिए कार्रवाई नहीं कर रही है क्योंकि पीड़ित परिवार ईसाई है, गैर-मुस्लिम है, अर्थात अल्पसंख्यक समुदाय से आता है। अपहृत युवती कोमल की माँ ने बताया कि लड़की को घर से खींच कर ले गए हैं और उन्होंने पुलिस को सब कुछ समझाया लेकिन फिर भी वो कोई एक्शन नहीं ले रही। पीड़ित परिजनों ने अपहरण करने वालों का नाम अलीम, बशर और अजीम बताया है। ये घटना मार्च की ही है।

ये घटना लाहौर के शिबली शहर की है। हालाँकि, इमरान ख़ान सरकार में शिरीन मज़ारी ने ईसाई लड़की के अपहरण वाली इस घटना का संज्ञान लिया है। उन्होंने दावा किया कि इस घटना पर उनकी नज़र है और जल्द ही सारे दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

मजारी ने बताया कि उन्होंने इस मामले की एफ़ाइआर कॉपी भी मँगाई है। उन्होंने इस घटना को डरावना और शर्मनाक करार दिया। स्थानीय इंस्पेक्टर का कहना है कि केस दर्ज हो गया है। डीआईजी ने बताया कि आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए छापेमारी भी हुई है।

इससे पहले पाकिस्तान में 14 साल की एक लड़की को अगवा कर लिया गया था। फिर जबरन धर्म परिवर्तन करवा अपहरणकर्ता के साथ ही उसका निकाह करवा दिया गया। ये घटना पंजाब प्रांत के फैसलाबाद के मदीना टाउन की थी। कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान 12 अप्रैल 2020 को कराची में एक हिंदू परिवार के इस्लाम कबूल करने से इनकार कर देने पर उसके ऊपर हमला किया गया था।

कोरोना लक्षणों के बावजूद मैंने भीड़ में पैकेट्स बाँटे… आप ये गलती न करें: ठीक होने के बाद उद्धव के मंत्री की खुली आँखें

महाराष्ट्र के हाउसिंग मंत्री और एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने कोरोना के लक्षणों के बारे में छिपाया था। उन्होंने ख़ुद इसका खुलासा किया है। कोरोना के शुरुआती लक्षण सामने आने के बावजूद जितेंद्र आव्हाड अपने विधानसभा क्षेत्र मुम्ब्रा में फ़ूड डिस्ट्रीब्यूशन प्रोग्राम में हिस्सा लेते रहे। जितेन्द्र आव्हाड ने बताया कि उन्होंने सोचा था कि उन्हें कुछ नहीं होगा। उन्होंने एक बड़ी भीड़ जुटा कर फ़ूड पैकेट्स बाँटना जारी रखा। अब उन्होंने कहा कि उन्हें इसका पछतावा है और ऐसा नहीं करना चाहिए था।

महाराष्ट्र के मंत्री जितेन्द्र आव्हाड कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो गए हैं। उन्होंने ठीक होने के बाद कहा कि कोरोना को नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए और इससे जुड़ी भ्रांतियों से लड़ने की ज़रूरत है। जितेन्द्र एनसीपी के नेता हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में हमेशा चर्चा में रहते हैं। राज्य के हाउसिंग मंत्री जितेन्द्र मुलुंड के फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती थे, जहाँ से उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया है। कोरोना से रिकवर होने के बाद वो अपने घर में ही क्वारंटाइन में हैं।

उन्हें 23 अप्रैल को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आव्हाड ने बताया कि वो अगले कुछ दिनों तक डॉक्टरों के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अपने घर में ही रहेंगे। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वो कोरोना को लेकर वो गलतियाँ न दोहराएँ, जो उन्होंने की हैं। उन्होंने कहा कि उनकी जान काफ़ी मुश्किल से बची है और कोरोना के लक्षणों को शुरुआत में नज़रंदाज़ करना उनकी ग़लती थी। उन्होंने शुरू में चीजों को गंभीरता से नहीं लिया। मंत्री ने बताया:

“मैंने कोरोना का टेस्ट कराया था। रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद मैं निश्चिंत हो गया। इसके बाद मुखे बुखार आने लगा। मुझे लगा कि ये सब अपने आप ठीक हो जाएगा। ये मेरी वो गलती थी, जिसकी मुझे बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। लोगों को कोविड-19 के लक्षणों को गंभीरता से लेते हुए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए। प्रशासन को अवगत कराना चाहिए। अगर आप इलाज में देरी करेंगे तो आपको भी इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

महाराष्ट्र के मंत्री आव्हाड ने नर्सों, डॉक्टरों और हॉस्पिटल कर्मचारियों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी के मुखिया शरद पवार को उनका हालचाल पूछने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि उद्धव ठाकरे के करीबी मिलिंद नार्वेकर ने उनके इलाज की सारी व्यवस्था की और एक परिवार की तरह देखभाल किया। उन्होंने बताया कि वो अभी भी काफ़ी कमजोरी महसूस कर रहे हैं। उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस रोग से जुड़े सोशल स्टिग्मा से लड़ने की ज़रूरत है क्योंकि कोरोना संक्रमितों को समर्थन की ज़रूरत होती है।

खबर आई थी कि महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री आव्हाड का केवल सुरक्षाकर्मी ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े 16 अन्य लोग भी कोरोना पॉजिटिव हैं। इन 16 लोगों की सूची में जितेंद्र आव्हाड की सुरक्षा में तैनात 5 पुलिसकर्मी थे, कार्यरत रसोइया था, सफाई कामगार, बंगले पर कार्यरत स्टाफ और अन्य कर्मचारी थे। इनके अलावा पॉजिटिव लोगों की सूची में ठाणे मनपा का एक पूर्व नगरसेवक का नाम भी बताया जा रहा था। 

शाहीन बाग में सबको राशन, हिंदू मोहल्ले के लोगों को कीड़ा-मकोड़ा कह भगाया: MLA अमानतुल्लाह के क्षेत्र की हकीकत

कोरोना महामारी के समय में देशव्यापी लॉकडाउन के कारण सबसे अधिक प्रभावित होने वाले गरीब-मजदूर वर्ग पर अब धर्म/मजहब व राजनीति की गाज गिरने लगी है। वाकया राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित ओखला में सरिता विहार इलाके का है। जन-प्रतिनिधित्व की बात करें तो अमानतुल्लाह खान इस इलाके के विधायक हैं।

खबर है कि यहाँ पर शाहीन बाग से सटी बस्तियों में तो चुन-चुनकर लोगों को राशन बाँटा जा रहा है। मगर, वहीं थोड़ी दूर स्थित दूसरी बस्ती (हड्डो मोहल्ला) के लोगों को राशन देने की बजाय कीड़े-मकोड़ा बोलकर भगा दिया जा रहा है और उन्हें उलाहना दी जा रही कि वे लोग उन्हें वोट नहीं देते।

ओखला के हड्डो मोहल्ला में गरीबों से जुड़ी इस कड़वी सच्चाई का खुलासा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रोहित कुमार चौधरी ने किया है। रोहित ओडिशा के निवासी हैं। मगर दिल्ली में रहते हैं क्योंकि वो आईआईटी में पीएचडी स्कॉलर हैं।

रोहित बताते हैं कि लॉकडाउन के समय में असहायों को सहायता पहुँचाने के लिए वे कुछ दोस्तों के साथ मिलकर अपने स्तर पर फंड इकट्ठा करते हैं और आसपास के इलाकों का सर्वे करते हैं। फिर, जो लोग उन्हें ज्यादा जरूरतमंद लगते हैं, वे उनको व्यक्तिगत रूप से राशन मुहैया कराते हैं।

इसी कड़ी में रोहित, सरिता विहार के कई इलाकों का सर्वे कर चुके हैं और कुछ दिन पहले मदनपुर खादर की नहर के दाहिने तरफ स्थित हड्डो मोहल्ले में भी गए थे। जिसके बाद से उन्हें वहाँ से कई बार राशन के लिए फोन आने लगे।

लगातार राशन की माँग को देखते हुए रोहित कल दोबारा हड्डो मोहल्ले में गए और जब उन्होंने लोगों बातचीत की, तो वहाँ के निवासियों ने उक्त हकीकत का खुलासा किया।

लोगों ने रोहित को बताया कि जब वे राशन के लिए दुकानों पर जाते हैं तो उन्हें ये कहकर भगा दिया जाता है, “तुम लोग यहाँ से जाओ, तुम हमें वोट भी नहीं देते, तुम लोग उस तरफ से आते हो, वहाँ के लोग कीड़े-मकोड़े हैं, उन्हें कौन पूछता है।”

रोहित बताते हैं कि उनसे बातचीत के दौरान लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि नहर के बाईं ओर स्थित बस्ती (शाहीन बाग से सटी बस्तियों) में अधिकारी राशन पहुँचाते हैं। मगर, जैसे ही वे राशन की माँग करते हैं तो उन्हें दुत्कार दिया जाता है।

बाएँ- रोहित कुमार चौधरी, दाएँ- मदन खादर के हड्डो मोहल्ले में परेशान निवासी

रोहित का कहना है कि हालाँकि वे दूसरी तरफ की बस्तियों में गए नहीं हैं। लेकिन, हड्डो मोहल्ले के लोग उन्हें बताते हैं कि दूसरी बस्ती के लोग भी उन्हीं जैसे हैं। पर फिर भी राशन बाँटने वाले उन्हीं के साथ भेदभाव करते हैं।

हैरानी की बात है कि सर्वे के दौरान रोहित को लगभग हर जगह से इन बातों का मालूम चला कि वहाँ राशन बाँटने वाले दूसरे मजहब के लोगों की लिस्ट बना-बनाकर उन्हें सहायता पहुँचा रहे हैं। लेकिन अन्य धर्म के लोगों को साइड कर देते हैं।

रोहित ने हड्डो मोहल्ला की सच्चाई का खुलासा करते हुए अपने ट्विटर पर कुछ वीडियोज बतौर प्रमाण डाले हैं। वीडियों मे हम देख सकते हैं कि वहाँ रहने वाले लोग राशन न मिल पाने के कारण कितने परेशान हैं और बता रहे हैं, “हम लोग 3-4 बार गए, हमें एक भी बार राशन नहीं दिया गया। जबकि दूसरी ओर के लोगों को दे दिया गया।”

रोहित ने इन लोगों से पूछा कि जब आप लोग राशन लेने गए तो वहाँ क्या बात हुई? इस पर महिलाएँ बताती हैं, “हमें ब्रह्म सिंह ने बताया था कि तुम लोग जाओ वहाँ, गरीबों को राशन मिल रहा है। जब हम वहाँ गए तो हमें बोला गया कि जाओ पर्ची बनवाकर आओ, जब हम पर्ची बनवाकर आए तो उन्होंने पूछा कि तुम कहाँ से आते हो? हमने बताया हम नहर पार से आते हैं।”

महिलाएँ बताती हैं कि इसे सुनने के बाद उन्हें राशन देने की बजाय कहा गया कि तुम लोगों के लिए राशन नहीं है, तुम लोग हमें वोट नहीं देते हो। जिस पर निवासियों ने कहा, “भैया मुस्लिम भी तुम्हें वोट नहीं देते। पर तुम नहर किनारे वाली बस्तियों में ढो-ढो के राशन दे रहे हो। एक-एक किलो हमें भी दे दो।”

महिला के मुँह से ऐसी बातें सुनकर राशन बाँटने वाले उन पर भड़क गए और महिला पुलिस बुलाने की धमकी देने लगे। जब निवासियों ने ज्यादा जोर दिया तो उन्हें कहा गया कि वे जिस बोतल में पर्ची डालकर गए थे, उसमें आग लगा दी गई है।

मदनपुर खादर में हड्डो मोहल्ला में गुजर-बसर कर रहे इन लोगों का कहना है कि वे क्षेत्र के विधायक अमानतुल्लाह खान के पास दो-तीन बार गए। पर उन्होंने हर बार उन्हें वापस उन्हीं दुकानों पर भेज दिया, जहाँ उन्हें कोई सामान नहीं मिला और लंबी-लंबी लाइन लगवाकर ये कह दिया गया कि वे वापस अपने घर जाएँ।

गौरतलब है कि कोरोना महामारी के समय में देशव्यापी लॉकडाउन के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित देश का गरीब वर्ग हुआ है। जिसके हालात जानते-समझते हुए केंद्र सरकार लॉकडॉउन के पहले चरण से ही इस वर्ग के लोगों की पीड़ा कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मगर, इस संकट की घड़ी में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो मानवता दिखाने की बजाय जगह-जगह अपनी राजनीति कर रहे हैं।

याद दिला दें कि पिछले दिनों ऐसा मामला पाकिस्तान से आया था। जहाँ दूसरे समुदाय को चुन-चुनकर राशन बाँटा जा रहा था और अल्पसंख्यकों को भूख से तड़पने के लिए मजबूर किया जा रहा था। वहाँ भी लोगों की भाषा बिलकुल ऐसी थी, जैसे शाहीन बाग से सटी बस्तियों में राशन बाँटने वाले अधिकारियों की है।

जावेद अख्तर गद्दार है, इस्लाम पर धब्बा है: माइक पर अजान को लेकर आपत्ति जताने के बाद भड़के कट्टरपंथी

माइक पर अजान को लेकर आपत्ति जताने के बाद जावेद अख्तर पर कट्टरपंथी भड़क उठे हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर निशाना बनाया जा रहा है।

उनके इस ट्वीट को लेकर बयानबाजी करते हुए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता सैयद असीम वकार ने तो यहाँ तक कह दिया कि जावेद अख्तर मुस्लिम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अल्लाह ने बहुत जल्दी दिखा दिया कि इस लंबे से कुर्ते के नीचे जो ज्ञान है, वह खाकी निकर से निकल कर आ रहा है।

उनका कहना है कि जावेद अख्तर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ कनेक्शन हैं और वह समुदाय के खिलाफ इसलिए बोल रहे हैं, क्योंकि वह मौजूदा सरकार में राज्यसभा सीट चाहते हैं।

ट्वीट किए गए वीडियो में उन्होंने जावेद अख्तर को मुनफिक (नापाक) कहा और साथ ही समुदाय के लोगों से जावेद अख्तर को लकब से नवाजने की गुजारिश की। AIMIM के नेता ने कहा कि उनकी लोगों से गुजारिश है कि वो अपने-अपने तरीकों से, अपने-अपने अल्फाजों से, जो भी लकब (पदवी) सही लगे, उसका इस्तेमाल करके विरोध करें।

दरअसल जावेद अख्तर ने शनिवार को किए अपने ट्वीट में कहा था, “भारत में तकरीबन 50 साल तक लाउडस्पीकर पर अजान हराम थी। इसके बाद ये हलाल हो गई और इस कदर हलाल हुई कि इसकी कोई सीमा ही नहीं रही। अजान करना ठीक है, लेकिन लाउडस्पीकर पर इसे करना दूसरों के लिए दिक्कत का सबब बन जाता है। मुझे उम्मीद कि कम से कम इस बार वो दूसरों को हो रही परेशानी को समझते हुए लाउडस्पीकर पर अजान देना खुद ही बंद कर देंगे।”

AIMIM नेता द्वारा की गई अपील के बाद कट्टरपंथियों ने भी जावेद अख्तर को निशाने पर लेते हुए गालियाँ देनी शुरू कर दी।

शेख हमजा नाम के एक यूजर ने लिखा, “वह (जावेद अख्तर) मुस्लिम और इस्लाम पर धब्बा है। जिसे भी अजान से दिक्कत है, उसे इस्लाम से निकाल फेंकना चाहिए। ऐसे इंसान को हम आस्तीन का साँप और गद्दार बोल सकते हैं।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “जावेद अख्तर आरएसएस का दलाल और *** है। अल्लाह उसको जल्द से जल्द सजा देगा। आमीन।”

जावेद अख्तर के ट्वीट पर एक यूजर ने लिखा, “आपके बयान से असहमत हूँ। कृपया इस्लाम और उसके विश्वास से जुड़े बयान मत दीजिए। आप जानते हैं कि हम ऊँची आवाज में गाने नहीं चला रहे हैं और ना ही कोई खराब काम कर रहे हैं। अजान प्रार्थना के लिए और सही रास्ते पर चलने के लिए बेहद खूबसूरत पुकार है।”

यूजर ने बयान का जवाब देते हुए जावेद अख्तर ने लिखा, “तो आप ये कह रहे हैं कि वो सभी इस्लामिक जानकार जिन्होंने 50 साल तक लाउडस्पीकर को हराम करार दे रखा था वो गलत थे। उन्हें नहीं पता था कि वो क्या कह रहे हैं? अगर आपको यकीन है तो आप एक बार कहिए। फिर मैं आपको उन जानकारों के नाम भी बताऊँगा।” 

गौरतलब है कि इससे पहले जावेद अख्तर ने कोरोना संकट खत्म होने तक मस्जिदों को बंद रखने की माँग का समर्थन करते हुए कहा था कि अगर काबा और मदीना की मस्जिद बंद की जा सकती है तो भारत की मस्जिदों को क्यों बंद नहीं किया जा सकता?