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आम लोग कपड़े और राशन दे जाते हैं, केजरीवाल ने कोई मदद नहीं की: पाकिस्तानी हिंदू

दिल्ली में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इन दिनों राजनीति की चर्चा हर गली, हर नुक्कड़ पर है। बिजली-पानी-शिक्षा के अलावा इस बार इन चुनावों में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) भी जनता से संपर्क साधने के लिए मुख्य विषय है। इस कानून से लाभान्वित होने वालों का एक बड़ा तबका दिल्ली के मजनू का टीला, सिग्नेचर ब्रिज, मजलिस पार्क, आदर्श नगर जैसे इलाकों में रह रहे हैं। ये लोग भी आने वाली सरकार से बुनियादी सुविधाओं को पूरी करने की आस लगाए बैठे हैं।

इन शरणार्थी कैंपों में रहने वाले लोगों के पास अभी तक मतदान का अधिकार नहीं है। मगर फिर भी दिल्ली के चुनावों पर इनकी पूरी नजर है। ये चाहते हैं कि आने वाली सरकार इनकी मूलभूत जरूरतों का ख्याल रखे और इन्हें बदतर स्थिति से उबारने में मदद करे। हालाँकि, सीएए आने के बाद देश भर में रह रहे हिंदू शरणार्थियों का ये कहना है भला केवल मोदी सरकार कर सकती हैं।

पिछले 5 साल से दिल्ली की सत्ता में काबिज केजरीवाल सरकार को लेकर अधिकांश हिंदू शरणार्थियों का कहना है कि उन्हें सरकार से कोई गिला शिकवा नहीं है, बस उन्हें बिजली-पानी मुहैया करवा दिया जाए। इनकी हालत देखी और दर्द सुना जाए, तो उसमें वर्तमान सरकार के प्रति हताशा साफ नजर आती है। जानकारी के अनुसार पिछले साल मजनू का टीला के पास स्थित इन लोगों की बस्ती सुविधाओं के अभाव के कारण 12 लोगों की मौत हुई थी। इनमें बच्चे-बुजुर्ग दोनों शामिल थे। बावजूद इसके इनकी मदद के लिए राज्य सरकार का कोई नुमाइंदा आगे नहीं आया। न ही इस विषय पर कोई बात हुई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार इस कैंप में रह रहे धर्मदास 2011 में सिंध से हरिद्वार का वीजा लेकर भारत आए थे और अब वे वापस नहीं जाना चाहते। वे बताते हैं, “पाकिस्तान में बहुत प्रताड़ना झेली। मजहब बदलने का दबाव था। कोई रोजगार नहीं था। हरिद्वार के लिए वीजा बनवाया। फिर दिल्ली आ गए। मदद माँगने कई बार केजरीवाल के पास गए। लेकिन, कुछ हासिल नहीं हुआ। आम लोग कभी कपड़े तो कभी राशन दे जाते हैं।”

सोनदास कहते हैं, “साहब, हालात क्या बताएँ। पिछले साल गर्मियों में बस्ती के करीब 12 लोगों की मौत हुई। इनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे। 9 साल पहले भारत आए। कई साल तक तो कोई शौचालय नहीं था। दो साल पहले कुछ बनाए गए हैं। इनका इस्तेमाल महिलाएँ करती हैं। वो पहले रात में डर के चलते बाहर नहीं निकल पातीं थीं। “

गौरतलब है कि ये कहानी केवल मजनू का टीला और सिग्नेचर ब्रिज की नहीं है, बल्कि दिल्ली में स्थित अन्य शरणार्थी कैंपों की भी ऐसी ही हालत है। कुछ समय पहले जहांगीर पुरी के मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के पीछे सेना की जमीन पर रह रहे शर्णार्थियों को तंगहाल में जीने को मजबूर कर दिया गया था। कैंपो के पास नाले बना दिए गए थे, जिनसे जलभराव हो गया। उससे मच्छरों की ब्रीडिंग बढ़ गई थी और डेंगू-मलेरिया का खतरा भी। इसके अलावा कुछ समय तक तो बिजली विभाग के कर्मचारियों ने इनके कैंपों से बिजली का कनेक्शन काट दिया था।

मजलिस पार्क में रह रहे शरणार्थियों की मदद करने वाले समाजसेवी हरिओम के अनुसार कुछ लोगों के सहयोग से इलाके में एक छोटा सा स्कूल खुलवाया गया था, जहाँ अब शर्णार्थियों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है। लेकिन इसके लिए उन्हें किसी तरह का कोई सरकारी सहयोग नहीं मिलता। उनके मुताबिक आम आदमी पार्टी के विधायक पवन कुमार शर्मा ने उन्हें एक बार मदद के नाम पर आश्वासन दिया था। मगर बाद में कोई मदद नहीं मिली।

अमर उजाला की साल 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, मजलिस पार्क मेट्रो स्टेशन के पास करीब पॉंच साल से रह रहे हिंदू शरणार्थियों पर कभी कोई एफआईआर नहीं हुई। वहीं इनके कैंपों से महज कुछ ही दूरी पर बसे बांग्लादेशी और रोहिंग्या शरणार्थी दिल्ली की सुरक्षा के लिए खतरा बने रहते हैं। समय-समय पर उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए हैं।

हालाँकि केजरीवाल सरकार से हताश हो चुके लोगों को मोदी सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। बीते दिनों हमने पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थी गुलशेर की कहानी साझा की थी। जिन्हें अपने बच्चों को शिक्षा दिलाने के लिए केजरीवाल सरकार के आदेश के ख़िलाफ़ कोर्ट तक जाना पड़ा। लेकिन सीएए आने के बाद फूले नहीं समाए।

इसी प्रकार मजनू टीला, सिग्नेचर ब्रिज, आदर्श नगर, मजलिस पार्क में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू एक ही स्वर में मोदी सरकार को दिल्ली में देखना चाहते हैं। यहाँ अधिकतर घरों के ऊपर तिरंगा और दरवाजे पर मोदी सरकार की तस्वीर इलाके में घुसते ही देखी जा सकती है। इन लोगों के मुताबिक मोदी सरकार ने उनके लिए बहुत काम किया है। इसलिए वे चाहते हैं कि वो ही जीतें। बता दें एक परिवार ने तो सीएए आने की खुशी में अपनी बेटी का नाम ही नागरिकता रख दिया था। जिसका जिक्र प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भी किया था।

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हिन्दुओं के घरों को फूँका, CAA समर्थक जुलूस पर हमले के लिए छतों पर जमा कर रखे थे ईंट-पत्थर

झारखण्ड के लोहरदगा में गुरुवार (जनवरी 23, 2020) को सीएए के समर्थन में हुई रैली पर हिंसक भीड़ ने हमला कर दिया। विहिप ने आरोप लगाया कि हथियारबंद इस्लामिक जिहादियों ने रैली पर हमला किया। इसके बाद आलम कुछ यूँ रहा कि पूरे शहर में उपद्रव पसर गया और इलाक़ा रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। सुबह 11:30 बजे ललित नारायण स्टेडियम से निकली विशाल रैली 1 घंटे बाद जैसे ही मस्जिद के पास पहुँची, जुलूस पर पथराव किया जाने लगा। शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे 15,000 लोगों की रैली पर पेट्रोल बम फेंके गए। बम फटा, आगजनी शुरू हो गई और जान बचाने के लिए लोगों में भगदड़ मच गई।

मुस्लिमों ने हिन्दुओं के घरों में आग लगा दिया। चुन-चुन कर हिन्दुओं की गाड़ियों को आग के हवाले किया गया। कई ऐसे घरों को भी फूँक डाला गया, जिनमें अंदर लोग थे। उन्होंने किसी तरह बाहर भाग कर अपनी जान बचाई।लोहरदगा के लोगों का कहना है कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके बीच रहने वाले लोग इस तरह की हरकत कर सकते हैं। पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और क़रीब 100 राउंड फायरिंग की गई। बेख़ौफ़ उपद्रवियों इतने ढीठ थे कि उन्होंने डीसी और एसपी जैसे अधिकारियों तक को नहीं बख्शा। उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया।

क़रीब 100 से ज़्यादा दोपहिया वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। कई चार पहिया वाहन भी धू-धू कर जले। पुलिस लगातार इस्लामी भीड़ को समझा रही थी लेकिन वो मानने को तैयार नहीं थे। रैली में शामिल लोग काफ़ी सहम गए। पथराव, आगजनी, मारपीट, तोड़फोड़ और दुर्व्यवहार की इस घटना के कारण स्थानीय लोगों में ख़ासा आक्रोश है। विहिप सहित अन्य हिन्दू संगठनों ने स्पष्ट कहा है कि अगर 24 घंटों के भीतर दोषियों को पकड़ा नहीं गया तो आंदोलन किया जाएगा।

पूरे वारदात में 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं। दो दर्जन से अधिक लोग लोहरदगा सदर अस्पताल में इलाजरत हैं। एक दर्जन से ज़्यादा घायलों को बेहतर इलाज हेतु राँची रेफर कर दिया गया है।

पथराव करने वालों में 8 से 12 साल तक के मुस्लिम बच्चे भी शामिल थे। लोहरदगा के स्थानीय लोगों का कहना है कि अमला टोली के मुट्ठी भर लोगों ने पूरे शहर को दिन भर एक तरह से बंधक बना कर रखा। ऐसा नहीं है कि शांति-व्यवस्था बना रखने के लिए हिन्दुओं ने कोई पहल नहीं की थी। मुस्लिम समुदाय से और उस इलाक़े के वरिष्ठ जनों व प्रबुद्ध लोगों से बातचीत कर के आश्वासन लिया गया था कि रैली को शांतिपूर्ण तरीके से गुजरने दिया जाएगा। इन सबके बावजूद मुस्लिम समुदाय के लोग हिंसा पर उतर आए। घायलों में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। रैली में बड़ी संख्या में महिलाएँ हिस्सा ले रही थीं, जिन्हें ख़ासी चोटें आई हैं।

पुलिस ने रात भर मुस्लिम समुदाय के लोगों को समझाया था कि वो शांति-व्यवस्था भंग न करें। इसके बावजूद दिन भर डीसी-एसपी भाग-दौड़ करते रहे और उपद्रवी पुलिस पर पथराव करते रहे। शहर में सन्नाटे का माहौल है। लोग डरे हुए हैं। मातम जैसा माहौल है। एक पुलिसकर्मी का माथा फट गया। एसपी के बॉडीगार्ड को चोटें आईं। कुछ घरों व दुकानों की छत पर पहले से ही ईंट-पत्थर इकट्ठे कर के रख लिए थे। रैली के वहाँ पहुँचते ही ईंट-पत्थर चलाए जाने लगे। घायलों में 24 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

दैनिक जागरण के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

अनुमान लगाया जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों के उत्पात के कारण करोड़ों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। इस घटना के बाद मुस्लिम बहुल अथवा मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाक़े में रह रहे हिन्दुओं के अपना ठिकाना बदल लिया है। कई परिवार तो शहर के धर्मशाला व होटलों में रुके हुए हैं। घटना के बाद पूरे जिले में पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। जिले के स्कूल-कॉलेजों को 2 दिन के लिए बंद कर दिया गया है।

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नाबालिग छात्रा से जावेद, मेराज और आरिफ ने किया रेप, कोचिंग के बाथरूम में बेहोश मिली

बिहार के सिवान जिले के सिसवन में 16 साल की एक नाबालिग छात्रा के साथ कोचिंग संचालक ने शिक्षक और छात्र के साथ मिलकर रेप किया। मामले में कोचिंग संचालक मोहम्मद जावेद, कोचिंग के शिक्षक मोहम्मद मेराज और छात्र मोहम्मद आरिफ रजा को नामजद किया गया है। तीनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक सिसवन थाना क्षेत्र की पीड़िता रोज कोचिंग सेंटर में पढ़ने जाती थी। पुलिस ने बताया कि पीड़ित छात्रा जब बुधवार (जनवरी 22, 2019) को कोचिंग में पढ़ने के लिए गई तो संचालक मोहम्मद जावेद ने उसे दबोच लिया और उठाकर कमरे में ले गया। इसके बाद शिक्षक मेराज और छात्र आरिफ के साथ मिलकर तब तक दुष्कर्म किया, जब तक वह बेहोश नहीं हो गई। बेहोश होने के बाद छात्रा को बाथरूम में बंद कर दिया।

देर शाम तक जब छात्रा घर नहीं पहुँची तो परिजनों ने खोजबीन शुरू की। परिवार वालों ने कोचिंग जाकर संचालक से पूछा तो उसने बताया कि वह घर चली गई है। आखिर में परिजनों ने थाने पहुँचकर छात्रा के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की तो वह कोचिंग सेंटर के शौचालय से ही बेहोशी की हालत में मिली। उसकी हालत काफी गंभीर थी, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेडिकल बोर्ड ने नाबालिग का मेडिकल टेस्ट किया और फिर इसके बाद कोर्ट में 164 के तहत बयान दर्ज कराया गया।

दैनिक जागरण के सिवान संस्करण में 24 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर

पुलिस जब कोचिंग पहुँची तो वहाँ दीवार पर अभद्र एवं अश्लील बातें लिखी हुई मिली और साथ ही संस्थान से कई आपत्तिजनक सामान भी बरामद हुए। पुलिस ने शक के आधार पर छात्र आरिफ को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ किया तो उसने सारे घटनाक्रम के बारे में बताया और छात्रा के बाथरूम में होने की बात कही। स्थानीय लोगों के अनुसार कोचिंग में छात्राओं का शोषण होता रहा है, लेकिन बदनामी होने के डर से किसी ने मुँह नहीं खोला। छात्राएँ लोकलज्जा के डर से चुप रह जाती हैं। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है। हालाँकि एसपी अभिनव कुमार ने आरोपितों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन देकर उन्हें शांत कराया है।

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जामिया हिंसा में कॉन्ग्रेस का हाथ? पूर्व MLA आसिफ मोहम्मद ख़ान को क्राइम ब्रांच ने किया तलब

दिल्ली पुलिस ने कॉन्ग्रेस के पूर्व विधायक आसिफ मोहम्मद ख़ान के ख़िलाफ़ सीआरपीसी की धारा-160 के तहत मामला दर्ज किया है। ये मामला हिंसक उपद्रव से संबंधित है। पूर्व कॉन्ग्रेस विधायक से कहा गया है कि वो शुक्रवार (जनवरी 24, 2020) को चाणक्यपुरी स्थित क्राइम ब्रांच के दफ्तर में पेश हों। मामला 15 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर दिल्ली के जामिया नगर में हुई हिंसा से जुड़ा है। आरोप है कि कई लोगों ने वहाँ के छात्रों व स्थानीय लोगों को भड़काया, जिसके बाद कई बसों को आग के हवाले कर दिया गया और पुलिस पर पत्थरबाजी की गई। कुछ वीडियो सामने आये थे जिसमें आप विधायक अमानतुल्लाह ख़ान को भी भीड़ का नेतृत्व करते देखा गया था।

इस बार कॉन्ग्रेस पार्टी ने आसिफ मोहम्मद ख़ान का टिकट काट दिया है। ओखला से पूर्व राज्यसभा सांसद परवेज हाश्मी को टिकट दिया है। इसके बाद आसिफ मोहम्मद ख़ान ने ऐलान किया कि वो निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे। शाहीन बाग़ में चल रहे विरोध प्रदर्शन में भी आसिफ मोहम्मद ख़ान का हाथ है। वकील महमूद पाशा ने आरोप लगया था कि कुछ लोग मामले को शांत कराने के लिए उप राज्यपाल से प्रदर्शनकारी महिलाओं को मिलवा रहे हैं और वो इस विरोध को ठंडा होता देखना चाहते थे। उनके इस बयान पर आसिफ ने कहा कि इसमें उनका कोई रोल नहीं है।

शाहीन बाग़ विरोध प्रदर्शन के साजिशकर्ताओं के बीच भी मतभेद उत्पन्न होने लगा है। एक तरफ महमूद पाशा कह रहे हैं कि किसी भी अधिकारी या नेता से मुलाक़ात हो, प्रदर्शनकारी तब तक नहीं उठेंगे जब तक सीएए को वापस न ले लिया जाए, वहीं दूसरी तरफ़ आसिफ मोहम्मद ख़ान का मानना है कि अधिकारीयों को धरना स्थल पर जाकर लोगों से बातचीत करनी चाहिए ताकि हिंसा की कोई वारदात न हो। शाहीन बाग़ में चल रहे विरोध प्रदर्शन से लाखों लोगों को आवागमन में घंटों देरी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को भी स्कूल आने-जाने में परेशानी हो रही है।

दिल्ली क्राइम ब्रांच ने स्थानीय नेता आशु ख़ान के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज किया है। जामिया नगर में हुई हिंसा में उनका भी नाम सामने आ रहा है। इन दोनों के अलावा जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आइसा के नेता चन्दन कुमार सिंह को भी शुक्रवार 11 बजे क्राइम ब्रांच के समक्ष उपस्थित होने को कहा गया है।

पूर्व विधायक ख़ान ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके पास सबूत है कि वो हिंसा के समय जामिया नगर में नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि वे उस वक़्त शाहीन बाग़ में प्रदर्शनकारियों के साथ थे और इस बात को साबित करने के लिए उनके पास सबूत भी है। उन्होंने कहा कि अगर वहाँ उनके उपस्थित होने का एक सबूत भी मिल जाए तो वो पूरी हिंसा की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं।

6000 साल पुराना फायर टेम्पल, Pak के हिन्दू युवक की आपबीती और जामिया हिंसा का कनेक्शन

जामिया हिंसा पर FIR: कॉन्ग्रेस का पूर्व MLA आसिफ खान भी था शामिल, दंगाइयों के साथ छात्रों ने भी की पत्थरबाजी

जामिया हिंसा में हाथ सेंकने ट्विटर पर लौट आए अनुराग कश्यप, स्वरा भास्कर ने भी उगला जहर

हिंदू कॉलेज में कश्मीरी पंडितों का दर्द बयाँ कर रही थी दीपिका, टूट पड़े वामपंथी गुंडे

दीपिका शर्मा दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिन्दू कॉलेज की छात्रा हैं। आजकल वे वामपंथी गुंडों के निशाने पर हैं। उनका कसूर यह है कि 19 जनवरी को उन्होंने उन कश्मीरी पंडितों की बात की जिन्हें 1990 में अपने ही घर छोड़कर जाने को मजबूर किया गया था। कॉलेज में जब दीपिका ने कश्मीरी पंडितों के विस्थापन दिवस पर इस मुद्दे को उठाने कोशिश की तो वामपंथी गुंडों ने उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया कि वे टूट गईं। फूट-फूट कर रो पड़ीं। हालॉंकि दीपिका तब भी नहीं टूटी। रोते-रोते ही कश्मीरी पंडितों के सम​र्थन में कॉलेज के पुरातन छात्रों की ओर से भेजे गए पत्र को पढ़कर सुनाया।

वामपंथी गुंडों द्वारा दीपिका को प्रताड़ित करने की इस घटना की सोशल मीडिया में भी चर्चा हो रही है। जब यह घटना हुई हिन्दू कॉलेज में तृतीय वर्ष की छात्रा दीपिका अपनी सीनियर रहीं आकृति रैना का पत्र पढ़ रही थीं। इसकी कॉलेज में राजनीति विज्ञान की छात्रा रहीं आकृति कश्मीरी पंडित हैं। दीपिका ने बताया कि आकृति रैना ने इस पत्र में अपने ही परिवार के कश्मीर से विस्थापन की कहानी लिखी थी।

ऑपइंडिया से बातचीत में दीपिका शर्मा ने बताया कि जैसे ही उन्होंने यह पत्र पढ़ना शुरू किया, कॉलेज के ही कुछ वामपंथी छात्र गुटों ने दीपिका के खिलाफ जोर-जोर से नारेबाजी शुरू कर दी। दीपिका ने बताया कि हालाँकि उन्हें यह पहले से ही आभास था कि इसके लिए वामपंथी गुट उन्हें परेशान करेंगे। बावजूद दीपिका ने यह जोखिम उठाया। पत्र पढ़ते वक्त बहुत कम ही सही लेकिन कुछ लोग उनके साथ कॉलेज में खड़े रहे।

दीपिका ने बताया कि आज के समय में खुद को अगर आप लेफ्टिस्ट का तमगा नहीं देते हैं, तो आपको नकार दिया जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें उनकी दक्षिणपंथी होने की वजह से उन्हें ब्राह्मणवादी, पिछड़ा और भी न जाने कितने ही विशेषण दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि वामपंथी विचारधारा के लोग अपने साथ खड़े न होने पर लोगों को किसी भी तरह से पिछड़ा हुआ साबित करने का प्रयास करते हैं और मानसिक प्रताड़ना देते हैं।

ऑपइंडिया के संपादक अजीत भारती से दीपिका शर्मा की बातचीत

दीपिका ने अपना यह भयावह किस्सा शेयर करते हुए कहा कि पत्र पढ़ने से पहले उन्हें भय था कि उनकी इस पहल के बाद शायद कोई भविष्य में इस तरह की गतिविधि में पहल करने से डरेगा। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों के साथ समर्थन व्यक्त करने के लिए उनके खिलाफ ‘इस्लामॉफ़ोबिक’ नारे लगाए गए।

दीपिका ने कहा कि वह बार-बार टारगेट की जा चुकी हैं फिर भी कश्मीरी पंडितों की व्यथा पढ़ते हुए वह भावुक थीं। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ यह नारेबाजी SFI जैसे छात्र संगठनों ने की। दीपिका कॉलेज के वुमन डेवलेपमेंट सेल की अध्यक्ष भी हैं। बातचीत के दौरान दीपिका ने कहा कि कश्मीरी पंडितों की याद में पहली बार इस प्रकार की कोई गतिविधि हुई थी। यदि कोई कश्मीरी पंडितों के अधिकारों की बात कर रहा है तो वह इस्लाम विरोधी क्यों ठहरा दिया जाता है? उन्होंने बताया कि ‘बोल की लब आजाद हैं तेरे’ जैसे नारे लगाने वाले नहीं चाहते कि उनके अलावा कोई दूसरा बोले।

ज्ञात हो कि 19 जनवरी 1990 को कश्मीर के पंडितों को अपना घर छोड़ने का फरमान जारी हुआ था। इस भयावह त्रासदी की बरसी पर हर साल 19 जनवरी को को कश्मीरी पंडित ‘होलोकॉस्ट/एक्सोडस डे’ के तौर पर मनाते हैं।

कश्मीर के हिन्दू नरसंहार की 20 नृशंस कहानियाँ जो हर हिन्दू को याद होनी चाहिए

सूरज ढलते ही गाँव में घुसे 50 आतंकी, लोगों को घरों से निकाला और लगा दी लाशों की ढेर

हमें हिंदू औरतें चाहिए… कश्मीर की हर मस्जिद से 19/1/1990 की रात आ रही थी यही आवाज

सोनभद्र में हिंदू लड़की अगवा: नाराज लोगों ने जमकर किया प्रदर्शन, हालात तनावपूर्ण

सोनभद्र में एक किशोरी का मुस्लिम युवक ने जबरन अपहरण कर लिया। इसके बाद घटना से गुस्साए हिंदूवादी संगठनों ने आरोपित के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया, इतना ही नहीं गुस्साई भीड़ ने बाजार को भी बंद करा दिया। इसे लेकर पुलिस से तीखी नोकझोंक भी हुई। मामले को लेकर क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

सोनभद्र के दुद्धी थाना क्षेत्र निवासी एक किशोरी बुधवार को अपने घर से अचानक से लापता हो गई। इसकी जानकारी जैसे ही घर वालों को हुई तो, उन्होंने कस्बे के ही एक मुस्लिम लड़के पर किशोरी के अपहरण का आरोप लगाया। इतना ही नहीं इससे नाराज परिजनों ने आरोपित के घर के सामने कुछ देर विरोध प्रदर्शन किया। इस बात की सूचना क्षेत्रीय पुलिस को दी गई, तो सूचना पर पहुँची पुलिस ने परिवार को समझा बुझाकर घर भेज दिया था।

इसी बीच घटना के अगले दिन यानी कि गुरुवार को परिवारीजनों ने मामले को लेकर कुछ हिंदूवादी संगठनों के साथ बाजार में नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए, जिसके बाद घटना के विरोध में पूरे बाजार को बंद करा दिया गया। इस बात जी जानकारी क्षेत्रीय पुलिस को हुई तो प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी पुलिस फोर्स के साथ तत्काल मौके पर पहुँच गए। इस दौरान अधिकारियों की विरोध कर रहे लोगों के साथ तीखी नोंकझोंक हो गई। मामला दो अलग-अलग समुदाय से जुड़ा होने के चलते कस्बे में तनाव व्याप्त हो गया।

कस्बे में बढ़ते तनाव को देखते हुए पुलिस ने तत्काल दो लोगों के ख़िलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया, जिसके बाद ही विरोध कर रहे लोग शांत हुए और अपने घरों को लौट गए। इसके बाद बड़ी संख्या में घटना स्थल पर पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया। हालाँकि, इसके बाद भी कस्बे में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। इतना ही नहीं इस घटना के विरोध में पूरे दिन कस्बे का बाजार भी पूरी तरह से बंद रहा।

पीड़ित परिवार ने पुलिस पर गँभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस लड़की को बरामद करने और आरोपी को पकड़ने का प्रयास नहीं कर रही है। मामले में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है। वहीं पुलिस अधीक्षक आशीष श्रीवास्तव का कहना है कि इस मामले में पुलिस ने अपहरण की धारा में मुकदमा आरोपित मुस्लिम युवक और एक अन्य के खिलाफ दर्ज किया गया है। तीन टीमें बनाकर पुलिस अलग-अलग शहरों में छापेमारी कर रही है। जल्दी हम आरोपित लड़के को गिरफ्तार कर लेंगे।

हम उस कौम से हैं कि अग़र बर्बाद करने पर आए तो छोड़ेंगे नहीं: AMU का पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष फ़ैजुल हसन

यह पहला मौक़ा नहीं कि जब एएमयू की घरती पर देश के ख़िलाफ जहर उगला गया हो। एक बार नहीं बल्कि सैकड़ों बार एएमयू की धरती से ‘हिंदुओं की कब्र’ खोदने की बात कही गई। एक बार फिर एएमयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ने कहा कि अग़र बर्बाद करने पर आए तो किसी देश को छोड़ेंगे नहीं, इतना गुस्सा है।

महीनों से सीएए के विरोध में एएमयू अलीगढ़ में चल रहे धरने पर आंदोलनकारी छात्रों को संबोधित करते हुए एएमयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष फ़ैजुल हसन ने कहा कि अमित शाह आएँ और हमारे 12वीं क्लास के स्टूडेंट के साथ सीएए पर डिबेट करें। उम्मीद है कि वो हमारे एएमयू के छात्र से जीत नहीं पाएँगे। वो इस विषय पर हमें संतुष्टी के लिए अग़र पांच प्वाइंट भी दे दें तो मैं उनके साथ खड़ा हो जाऊँगा और सीएए के पक्ष में प्रोटेस्ट करूँगा।

इतना ही नहीं फैजुल हसन ने अपने संबोधन में आगे कहा, “सब्र की अगर सीमा देखना चाहते हैं तो 1947 के बाद 2020 तक हिंदुस्तानी मुस्लिमों के सब्र की सीमा देखिए। कभी कोशिश नहीं की कि हिंदुस्तान टूट जाए, वरना हम उस कौम से हैं कि अग़र बर्बाद करने पर आए तो छोड़ेंगे नहीं किसी देश को इतना गुस्सा है।”

इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने फ़ैजुल को जमकर अपने निशाना पर लिया। एक यूजर ने ट्वीट करते हुए लिखा, “तो ये भारत भी 1947 वाला नही है और हम भी 2020 के हिन्दू हैं। तुम जैसे देश तोड़ने वाले सपोलों को कुचलना अच्छी तरह आता है। 1947 में हमारे पूर्वजों ने रहम दिखा दी थी, हम नही दिखाएँगे।”

दरअसल एएमयू के आंदोलनकारी छात्र विश्वविद्यालय के बाबे सैयद गेट पर पिछले करीब 37 दिनों से सीएए के ख़िलाफ धरने पर बैठे हुए हैं। सीएए के विरोध में धरने पर आए दिन किसी न किसी को बुलाया जाता है। आपको बता दें कि 15 दिसंबर को विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के बाद इसे 5 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया था। इसके बाद 13 जनवरी को विश्वविद्यालय को पूर्ण रूप से खोल दिया गया, लेकिन विश्वविद्यालय के खुलते ही आंदोलनकारी छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया।

इसके बाद एएमयू इंतजामियाँ ने आंदोलनकारी छात्रों के दवाब में आकर सभी कॉलेजों में होने वाली परीक्षाओं को स्थगित कर दिया। इसके बाद भी आंदोलनकारी छात्र सीएए के ख़िलाफ और एएमयू वीसी से इस्तीफा देने की माँग पर डटे हुए हैं। गौरतलब है कि फैज़ुल हसन पहले भी कई बार अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में आ चुके हैं।

CAA का विरोध करने वाले पहुँचे तो समर्थन में हनुमान चालीसा पढ़ रहे 19 लोगों को छत्तीसगढ़ पुलिस ने किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ में सीएए के समर्थन में हनुमान चालीसा पढ़ रहे लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई पुलिस ने उस समय में की, कि जब वहाँ लोग बड़ी संख्या में सीएए के ख़िलाफ रैली निकालते हुए सरकार के ख़िलाफ नारेबाजी कर रहे थे। दोनों ओर से समर्थकों के एक साथ मिलने पर भिड़ंत की आशंका को देखते हुए पुलिस ने 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मामला मंगलवार (21 जनवरी) की रात का है।

देश में एक तरफ सीएए के ख़िलाफ लोगों का जगह-जगह प्रदर्शन जारी है। वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग सीएए के समर्थन में रैलियाँ निकाल रहे हैं। इसी बीच बीते दिनों छत्तीसगढ़ के रिवर व्यू पर बड़ी संख्या में लोग सीएए के समर्थन भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगा रहे थे। बाद में ये सभी लोग एक स्थान पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे। इस दौरान सीएए के खिलाफ रैली निकाल रहे दूसरे पक्ष के लोग भी प्रदर्शन करते हुए वहाँ पहुँच गए और देखते ही देखते दोनों ओर से समर्थन और विरोध में नारे लगाने लगे।

इसकी जानकारी जैसे ही क्षेत्रीय पुलिस मिली, तो वह तत्काल मौके पर पहुँची गई। इतना ही नहीं पुलिस ने चंद मिनटों के भीतर समर्थन में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे लोगों को गिरफ्तार कर लिया। जहाँ से सभी को सिटी कोतवाली थाने लाया गया। इसके बाद पुलिस ने सीएए के समर्थन में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे 19 के खिलाफ धारा 151 के तहत कार्रवाई कर दी, हालाँकि, पुलिस ने सभी को मुचलके पर छोड़ दिया।

एएसपी सिटी ओपी शर्मा का कहना है कि जो लोग समर्थन में आए थे, उन्होंने सभा करने या रैली निकालने की अनुमति नहीं ली थी। इसलिए शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वहीं आरएसएस कार्यकर्ता मनीष राय का कहना था कि एक दिन पहले ही अनुमति लेने का आवेदन दिया था, जिसके बाद मंगलवार को ही एएसपी ओपी शर्मा ने खुद ही दोपहर दो बजे अनुमति मिलने की सूचना दी थी।

भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले की जाँच में महाराष्ट्र सरकार के हस्तक्षेप से पुणे पुलिस नाख़ुश: रिपोर्ट

भीमा कोरेगाँव हिंसा मामले की जॉंच कर रही पुणे पुलिस इस मामले में महाराष्ट्र सरकार के हस्तक्षेप से नाखुश है। रिपब्लिक टीवी की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की महाविकास अघाड़ी सरकार जिस तरीके से जॉंच को लेकर सवाल खड़े कर रही है उससे पुलिस सहज नहीं है।

रिपोर्टों के अनुसार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार और गृह मंत्री अनिल देशमुख ने गुरुवार की सुबह पुणे पुलिस के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान 2018 के भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले से जुड़ी जॉंच की समीक्षा की।

भीमा कोरेगाँव मामले पर डिप्टी सीएम अजीत पवार और गृह मंत्री अनिल देशमुख की समीक्षा बैठक में, जाँच के कई पहलुओं पर सवाल उठाए गए। इस दौरान, पुणे के संयुक्त आयुक्त और महाराष्ट्र के डीजीपी सुबोध जायसवाल ने उन्हें 30 मिनट तक जानकारी दी। महा विकास अघाड़ी सरकार द्वारा पुणे पुलिस पर अपनी जाँच के लिए आकांक्षाओं को बढ़ाने के बाद, पुलिस ने गृह मंत्री द्वारा माँगे गए दस्तावेज़ों को देने के लिए और समय माँगा है।

पुलिस सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि इस मामले में शामिल पुलिस अधिकारी महत्वपूर्ण मामले की जाँच में हस्तक्षेप से ख़ुश नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र में सरकार बदलने के बाद जाँच में लगे अधिकारी हतोत्साहित महसूस कर रहे हैं।

इससे पहले 21 दिसंबर को, एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने एल्गर परिषद (Elgar Parishad) मामले में कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई में एक विशेष जाँच दल (एसआईटी) की माँग की थी। भीमा-कोरेगाँव मामले में जाँच एजेंसियों की भूमिका पर शरद पवार ने कहा था, “हम सीएम उद्धव ठाकरे से इस मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल बनाने के लिए कहेंगे।” इसी तरह एनसीपी विधायक जितेंद्र अव्हाड ने भीमा कोरेगाँव मामले के एक प्रमुख आरोपित सुधीर धवले के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों को हटाने की माँग शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस सरकार से की थी।

18 दिसंबर को पुलिस ने 19 के ख़िलाफ़ आरोप तय किए थे। इनमें सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गडलिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फेरेरा, वर्नोन गोंजाल्वेस, सुधा भारद्वाज और वारवरा राव शामिल थे।

ख़बर के अनुसार, इस मामले को ‘पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या की साज़िश’, ‘सरकार को उखाड़ फेंकना’, ‘भारत सरकार के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ना’ ग़ैर-क़ानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (UPA) के तहत दर्ज किया गया था। दर्ज किए गए मामले में कहा गया था कि कुछ लोग प्रतिबंधित भाकपा-माओवादी पार्टी के सदस्य थे। अगर ‘भारत के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने’ के तहत उन्हें दोषी पाया जाता है, तो उन्हें IPC धारा-121 के अनुसार मौत की सज़ा या आजीवन कारावास का सामना करना पड़ेगा।

चार्जशीट में, पुलिस ने खुलासा किया था कि सभी 19 आरोपित पूर्व पीएम राजीव गाँधी की हत्या के समान रोड शो के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या की साज़िश रच रहे थे। इसके अलावा, चार्जशीट में कहा गया था कि एल्गर परिषद हिंसा आरोपितों द्वारा सरकार को उखाड़ फेंकने और भीम कोरेगाँव में झड़पों के माध्यम से लोगों को उकसाने, उपद्रव करने, भड़काने और आतंकवादी गतिविधियों के लिए कैडर की भर्ती करने समेत अवैध कार्य करना साज़िश का हिस्सा थे।

पुणे पुलिस के अनुसार, 31 दिसंबर, 2017 को शहर में आयोजित एल्गर परिषद कार्यक्रम को सीपीआई (माओवादी) द्वारा वित्त पोषित किया गया था, जो सामाजिक अशांति पैदा करने और सरकार को उखाड़ फेंकने की एक बड़ी साज़िश का हिस्सा थी। पुलिस का कहना है कि भड़काऊ बयानों के कारन 1 जनवरी, 2018 को भीमा कोरेगाँव में हिंसा भड़की थी।

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साबरमती जेल से बाहर आते ही हार्दिक पटेल को अहमदाबाद पुलिस ने दूसरे मामले में किया गिरफ़्तार

कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल को गुजरात पुलिस ने एक बार फिर से गिरफ्तार कर लिया। राजद्रोह के मामले में हार्दिक पटेल जमानत मिलने के बाद साबरमती जेल से जैसे ही बाहर निकले, ऐसे ही गुजरात पुलिस ने पटेल को आचार संहिता उल्लंघन के मामले में गिरफ्तार कर लिया।

कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल की एक के बाद एक मुसीबतें बढ़ती चली जा रही हैं। बीते दिनों 18 जनवरी को राजद्रोह के एक मामले में निचली अदालत में पेश नहीं होने का कारण गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया था। तीन दिन जेल मेें रहने के बाद हार्दिक को गुरुवार को जमानत मिल गई। जैसे ही पटेल जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आए ऐसे ही पुलिस ने उन्हें फिर से 2017 में दर्ज आचार संहिता उल्लंघन मामले में गिरफ्तार कर लिया।

आचार संहिता उल्लंघन के मामले में हुई गिरफ्तारी के बाद अब हार्दिक पटेल से सिद्धपुर और मानसा पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी। इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ़ राजद्रोह मामले में अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया था, जिसके बाद विरमगाँव के पास हासलपुर से पुलिस ने 18 जनवरी को गिरफ्तार किया था। दरअसल इससे पहले हार्दिक पटेल कोर्ट की सुनवाई में लगातार गैर हाजिर हो रहे थे।

आपको बता दें कि हार्दिक पटेल के ख़िलाफ़ अलग-अलग मामलों में 24 केस दर्ज हैं। हार्दिक पटेल को इससे पहले भी गिरफ्तार किया जा चुका है। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद जुलाई 2016 में उन्हें जमानत पर रिहा किया गया था। नवंबर, 2018 में हार्दिक पटेल और अन्य आरोपितों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे, लेकिन इसी बीच पटेल ने 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले ही कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया था।

ग़ौरतलब है कि 25 अगस्त 2015 को अहमदाबाद के जीएमडीसी मैदान में हुई विशाल पाटीदार आरक्षण समर्थक रैली के बाद राज्य में हुई तोड़फोड़ और हिंसा को लेकर यहाँ की क्राइम ब्रांच ने उसी साल अक्टूबर में हार्दिक पटेल सहित कई लोगों पर मुकदमा दर्ज किया था। हिंसा के दौरान आंदोलनकारियों ने कई सरकारी बसों, पुलिस चौकियों और अन्य सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया था, जिसमें एक पुलिसकर्मी सहित लगभग दर्जन भर बेगुनाह लोग मारे गए थे। पुलिस ने आरोप पत्र में हार्दिक और उनके सहयोगियों पर चुनी हुई सरकार को गिराने के लिए और हिंसा फैलाने की साजिश रचने का भी आरोप लगाया था।