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सिख नेता ने परिवार के साथ पाकिस्तान छोड़ा, इस्लामिक कट्टरपंथी दे रहे थे धमकी

इस्लामिक कट्टरपंथियों की धमकी दिए के बाद सिख नेता राधेश सिंह टोनी परिवार समेत पाकिस्तान से चले गए। बुधवार (22 जनवरी) को उन्होंने एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने बताया कि उनका जीवन ख़तरे में था और अपने परिवार और बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्होंने यह क़दम उठाया।

टोनी ने विदेशों में बसे सिख समुदाय के लोगों से अपील की थी कि वे एक ’सुरक्षित स्थान’ पर पुनर्वास में उनकी मदद करें। टोनी खालसा पीस एंड जस्टिस फाउंडेशन के अध्यक्ष और खैबर पख्तूनख्वा के मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्होंने एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में 2018 में पाकिस्तान में आम चुनावों में भी हिस्सा लिया था।

SAD नेता मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा पाकिस्तानी राजनेता के समर्थन में सामने आने के बाद मीडिया का ध्यान उन पर गया था। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी ट्वीट कर पाकिस्तानी सरकार से टोनी की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। उन्होंने सरकार से उनके संरक्षण के लिए “तत्काल क़दम” उठाने का आग्रह किया और इस बात पर ज़ोर दिया कि हाल के दिनों में सिख समुदाय के कई सदस्यों को सताया जा रहा है।

रधेश सिंह टोनी ने बताया कि पाकिस्तान में, सिख, हिन्दू और ईसाई के धार्मिक अल्पसंख्यक लगातार ख़तरों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने बताया था कि इस्लामी कट्टरपंथियो को पाकिस्तान सरकारा का समर्थन प्राप्त है।

ख़बर के अनुसार, टोनी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार के मुखर आलोचक थे। इससे पहले भी उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा धमकी दी गई थी और दो अज्ञात लोगों द्वारा उन पर हमला किया गया था। कट्टरपंथियों ने टोनी को कुछ समय के लिए ट्विटर छोड़ने तक के लिए भी मजबूर किया। इन सब हालातों से तंग आकर रधेश सिंह टोनी अपनी पत्नी और तीन बच्चों समेत अपनी पूरी सम्पत्ति छोड़ने को मजबूर हो गए और वो पेशावर से लाहौर चले गए। एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रीय असेंबली के लिए चुनाव लड़ने से पहले पाकिस्तानी राजनेता खैबर पख्तूनख्वा से अल्पसंख्यक पार्षद थे।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा सिख समुदाय के किसी प्रमुख सदस्य को डराया-धमकाया गया है। पिछले साल, इमरान खान की कैबिनेट के एक पूर्व सदस्य बलदेव सिंह ने भारत में बीमार होने के कारण शरण माँगी थी। एक अन्य सिख नेता चरणजीत सिंह को मई 2018 में पेशावर में गोली मार दी गई थी। हाल ही में, इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा एक नाबालिग सिख लड़की, जगजीत कौर के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले के बाद ननकाना साहिब के पवित्र तीर्थस्थल पर हमला किया गया था।

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तुम कंट्रोवर्सी चाहते हो, देश का सवाल है, ऐसा मत करो: सद्गुरु ने राहुल कँवल की ली क्लास

सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने जब से नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) को लेकर लोगों का भ्रम दूर करने की कोशिश की है तब से पूरा वामपंथी इकोसिस्टम उनके पीछे पड़ा हुआ है। जग्गी वासुदेव ने जितने सरल तरीके से लोगों को सीएए के बारे में बताया, उनका वीडियो सोशल मीडिया पर चहुँओर वायरल हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी यह वीडियो शेयर किया। इसके बाद से ही वामपंथी सद्गुरु से नाराज़ हैं। वामपंथियों ने ‘अब एक साधु बताएगा कि सीएए क्या है’ जैसी बातें कर उनके योगदान को नीचा दिखाना चाहा। उन पर लगातार हमले किए गए।

अब सद्गुरु ने टीवी कैमरा के सामने आकर पत्रकारों को लताड़ लगाई है। राहुल कँवल को दिए गए इंटरव्यू में सद्गुरु ने पूरे प्रोपेगंडा को ध्वस्त करते हुए मीडिया को भी सबक सिखाया। सद्गुरु ने सीएए के बारे में समझाते हुए कहा कि ये क़ानून उनके लिए है जो दिसंबर 2014 तक प्रताड़ना से तंग आकर भारत आ गए है, इसमें नए लोगों को नहीं बुलाया जा रहा है। सद्गुरु ने समझाया कि इससे जनसंख्या पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि जो दिसंबर 2014 के बाद आए या फिर आगे आएँगे, उन्हें तो सीएए के तहत नागरिकता नहीं मिल रही है।

सद्गुरु ने राहुल कँवल से पूछा कि क्या आपने सीएए पढ़ा है? कँवल ने हाँ में जवाब दिया तो सद्गुरु ने सवाल दागा कि क्या ये किसी एक भी भारतीय नागरिक के ख़िलाफ़ है? सद्गुरु का सवाल सुनते ही कँवल बगले झाँकने लगे और उन्होंने कुछ-कुछ बोलना शुरू कर दिया लेकिन जवाब नहीं दिया। सद्गुरु ने कहा कि कँवल सीएए को ग़लत तरीके से देख रहे हैं। सद्गुरु ने ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार राहुल कँवल से कहा:

“मुझे एक ही बात पता चल रही है और वो ये कि तुम अभी सिर्फ़ अपने कैमरे के सामने कंट्रोवर्सी चाहते हो। ऐसा मत करो। ये हमारे देश का सवाल है। ये सिर्फ़ ‘माइनॉरिटी प्रॉसिक्यूशन’ नहीं बल्कि ‘रिलीजियस माइनॉरिटी प्रॉसिक्यूशन’ के लिए है। ये समझने की आवश्यकता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान इस्लामिक मुल्क़ हैं, वो आधिकारिक रूप से सेक्युलर देश नहीं हैं।”

सद्गुरु ने समझाया कि उन सभी लोगों को, जिन्हें धर्म का आधार पर प्रताड़ित किया है और जो भारत में शरण लेकर रह रहे हैं, उन्हें नागरिकता मिल रही है। कँवल बार-बार सवाल पूछते रहे कि भारत सभी को क्यों नहीं बुला रहा, मुस्लिमों को क्यों नहीं बुला रहा? अंत में सद्गुरु ने सवाल किया कि क्या हमारे देश में लोगों की कमी है या जनसंख्या कम है? उन्होंने कहा कि भारत में किसी भी बाहरी व्यक्ति की ज़रूरत नहीं है, चाहे वो कसी भी धर्म का हो। ऐसा इसीलिए, क्योंकि हमारी जनसंख्या पहले से ही काफ़ी ज़्यादा है।

सद्गुरु ने राहुल कँवल से स्पष्ट कहा कि वे कंट्रोवर्सी चाहते हैं और कंट्रोवर्सी पैदा भी करते हैं। सद्गुरु ने कहा कि इसके उलट वे ईमानदारी से अपनी बात रख रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि सीएए से किसी भी भारतीय नागरिक पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। सद्गुरु ने एक उदाहरण दिया। मीडिया न्यूज़ एंकर सीएए के विरोध में बच्चों के साथ प्रदर्शन कर रही महिलाओं से पूछते हैं कि वो क्यों धरने पर बैठी हुई हैं तो महिलाएँ कहती हैं कि भारत सरकार उनकी नागरिकता ले रही है, इसलिए।

सद्गुरु की नाराज़गी इस बात से थी कि मीडिया वाले उन प्रदर्शनकारियों को समझा क्यों नहीं रहे कि उनकी नागरिकता कोई नहीं ले रहा और ये सब झूठ फैलाया जा रहा है। उन्होंने राहुल कँवल से पूछा कि तुम मीडिया वाले ऐसा क्यों कर रहे हो?

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अलवर में 15 साल की बच्ची से रेप कर इमाम फरार, खाना लेकर मस्जिद गई थी पीड़िता

राजस्थान के अलवर जिला के तिजारा थाना क्षेत्र के एक गाँव में मस्जिद के इमाम पर नाबालिग से दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ है। पीड़िता के भाई ने आरोपित सद्दाम के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है। मामला दर्ज करने के बाद पुलिस ने दबिश दी, लेकिन आरोपित वारदात को अंजाम देने के बाद से ही फरार है। गाँव की मस्जिद में नमाज पढ़ाने और तालीम देने वाले इमाम सद्दाम ने 14 जनवरी को गाँव की एक नाबालिग के साथ मस्जिद में दुष्कर्म किया और पीड़िता के शोर मचाने पर वह वहाँ से भाग निकला।

शिकायत में पीड़िता के भाई ने पुलिस को बताया कि उसके गाँव की मस्जिद में सद्दाम नाम का व्यक्ति इमाम के कार्य के साथ ही बच्चों को पढ़ाने और नमाज अता करने का भी कार्य कराता है। सद्दाम के लिए गाँव के हर घर से बारी-बारी कर खाना भेजा जाता था। 14 जनवरी 2020 को रात 8 बजे के करीब पीड़िता उसे खाना देने मस्जिद गई।

पीड़िता के भाई ने बताया कि उसकी बहन जब खाने का टिफिन देकर लौटने लगी तो सद्दाम ने हाथ पकड़कर उसे जबरन मस्जिद के कमरे में खींच लिया। मस्जिद के भीतर ही कमरे में उसके साथ दुष्कर्म किया। साथ ही कहा कि अगर उसने ये बात किसी को बताई को वो उसे जान से मार डालेगा।

राजस्थान पत्रिका के अलवर संस्करण में प्रकाशित खबर

लेकिन, पीड़िता ने कमरे से बाहर आते ही शोर मचा दिया। इससे आसपास की दुकान पर बैठे गाँव के काफी लोग वहाँ जमा हो गए। भीड़ को देखकर सद्दाम मोटरसाइकिल पर बैठ भाग गया। आरोपित और पीड़िता एक ही समुदाय के हैं। घटना के बाद गाँव के लोगों ने पीड़ित परिवार पर दबाव बनाया कि पुलिस को रिपोर्ट दर्ज कराने से कौम और मस्जिद की बदनामी हो जाएगी। कई दिन पशोपेश में रहे परिजनों ने तिजारा पुलिस थाने में पीड़िता को ले जाकर मामला दर्ज कराया।

पीड़िता के भाई ने FIR में बताया कि समुदाय और मस्जिद की बदनामी का हवाला देकर बनाए गए दबाव के चलते उसने कई दिन तक मामला दर्ज नहीं कराया। बाद में बहन को इंसाफ दिलाने के लिए मामला दर्ज कराने थाने पहुँचा। पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर आरोपित सद्दाम की तलाशी शुरू कर दी गई है। जल्द ही आरोपित को पकड़ लिया जाएगा।

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अमित शाह पर राजदीप सरदेसाई ने फैलाया झूठ, फजीहत होने पर दो बार करने पड़े ट्वीट डिलीट

बार-बार अपनी फजीहत कराने वाले पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने एक बार फिर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने की कोशिश की। अमित शाह ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के मद्देनजर गुरुवार (जनवरी 23, 2019) को दिल्ली के मटियाला में एक जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने इस बारे में भी बात की कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल किस तरह से वहाँ की जनता को बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने में असफल रहे।

सभा को संबोधित करते हुए शाह ने यह भी आरोप लगाया कि AAP नेता ने दिल्ली की जनता से जो वादे किए थे, उन्हें भूल गए। उन्होंने कहा, “अगर झूठे वादे करने की देश में कोई प्रतियोगिता होती, तो केजरीवाल को निश्चित रूप से पहला पुरस्कार मिलेगा। मैं केजरीवाल को याद दिलाने के लिए आया हूँ कि आप तो अपने किए गए वादों को भूल गए, लेकिन न तो दिल्ली की जनता और न ही भाजपा कार्यकर्ता भूले हैं। आपके पास शायद इसकी सूची नहीं है, लेकिन मेरे पास है।” 

साथ ही अमित शाह ने केजरीवाल द्वारा किए गए झूठे वादों को सूचीबद्ध करते हुए अशुद्ध पेयजल से लेकर मुफ्त वाईफाई के दावे, नए स्कूल खोलने के दावे, सीसीटीवी कैमरे लगाने की बातें, नौकरी, डीटीसी बसों और आयुष्मान भारत योजना को बंद करने जैसे मुद्दों पर बात की। दरअसल शाह ने अपने इस भाषण में अधिकतर समय लोगों की बुनियादी जरूरतों से संबंधित मुद्दों पर जोर दिया।

राजदीप सरदेसाई का पहला झूठा ट्वीट

मगर राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार ने दावा किया कि गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में एक उग्र भाषण दिया। जहाँ उन्होंने केवल नागरिकता संशोधन कानून (CAA), अनुच्छेद 370 और राम मंदिर पर बात की। इसके बाद राजदीप ने कहा कि अमित शाह ने बिजली, स्कूल या अस्पताल के बुनियादी मुद्दों पर एक शब्द भी नहीं बोला। सरदेसाई ने आगे कहा, “एक पल के लिए, मुझे लगा कि हम अभी भी 2019 के लोकसभा चुनाव मोड में ही थे।”

जैसे ही सोशल मीडिया यूजर्स ने राजदीप सरदेसाई के झूठ का पर्दाफाश किया, उन्होंने अपना विवादास्पद ट्वीट डिलीट कर दिया।

राजदीप सरदेसाई का दूसरा विवादास्पद ट्वीट

इसके बाद पत्रकार ने एक दूसरा ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने पिछले ट्वीट में कुछ बदलाव किया और लिखा कि अमित शाह ने अपने भाषण में आर्टिकल 370, CAA, पाकिस्तान, राम मंदिर जैसे मुद्दों पर जोर डाला और बिजली, आवास एवं शिक्षा के मुद्दों पर बहुत कम बात की। जबकि राजदीप ने अपने पहले ट्वीट में साफ-साफ लिखा था कि अमित शाह ने लोगों की बुनियादी जरूरतों के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला।

हालाँकि, उन्हें अपने दूसरे ट्वीट को भी डिलीट करना पड़ा क्योंकि सोशल मीडिया यूजर्स ने एक बार फिर से उनके झूठ का पर्दाफाश कर दिया। उन्होंने पत्रकार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में काफी सारे बुनियादी मुद्दों पर जोर दिया और दिल्ली सरकार की विफलताओं पर प्रकाश डाला। साथ ही गृह मंत्री ने दिल्ली के 2015 के चुनाव के दौरान केजरीवाल द्वारा किए गए वादों के असफलता के बारे में बताया। 

अमित शाह ने भाषण में कहा था, “आपने कहा था कि आप एक हजार स्कूल बनाओगे, जरा बताएँ कि कितने स्कूल बनाए। 15 लाख सीसीटीवी कैमरा लगाने की बात कही थी और कुछ ही सीसीटीवी लगाकर जनता को बेवकूफ बना रहे हो।”

उन्होंने कहा, “केजरीवाल जी ने 5,000 डीटीसी की बसें लाने की बात कही थी, सिर्फ 300 बसें ही लाए। 8 लाख लोगों को नौकरी देने की बात कही थी, लेकिन पहले के अस्थाई कर्मचारियों को ही स्थाई नहीं किया। आपने कहा था कि यमुना स्वच्छ कर देंगे, लेकिन आपने यमुना स्वच्छ करने की तो दूर की बात है जो हमारे घर में पानी आता था वो गंदा कर दिया। आज पूरे भारत में सबसे खराब पानी दिल्ली की जनता को मिल रहा है। यमुना जी को स्वच्छ करने की आप के बूते की बात नहीं है। मोदी जी और योगी जी ने गंगा स्वच्छ करने का काम किया है और यमुना भी हम ही स्वच्छ करेंगे।”

आगे शाह ने कहा, “केजरीवाल ने नए-नए फ्लाई ओवर बनाने की बात कही थी, वो तो बनाए नहीं और मोदी जी जो फ्लाई ओवर बना रहे हैं, उन पर भी रोड़ा अटका रहे हैं। केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों को हम अधिकृत कर देंगे। लेकिन हमेशा इस काम में अड़ंगा लगाया। नरेन्द्र मोदी जी ने दिल्ली के करीब 1,731 अनाधिकृत कॉलोनियों के लोगों को 5 हजार रुपए में अपने घर का मालिकाना हक देने का काम किया है।” उन्होंने अस्पताल और मेट्रो पर भी बात की।

जैसा कि राजदीप ने अपने ट्वीट में दावा किया था कि अमित शाह ने अपने भाषण में CAA का उल्लेख किया। बता दें कि अमित शाह ने भाषण में CAA का जिक्र जरूर किया था, लेकिन उनके भाषण के अंतिम हिस्से में। उन्होंने प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा, “नरेंद्र मोदी ने देश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने के लिए काम किया है। नरेंद्र मोदी ने दुनिया में देश का सम्मान बढ़ाने का काम किया है। मोदी जी ने अपनी ही धरती पर देश के दुश्मनों को मारने का काम किया है।” इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अगर अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के उत्पीड़ित अल्पसंख्यक यहाँ नहीं आएँगे तो फिर कहाँ जाएँगे? गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा के 70 सीटों पर 8 फरवरी 2020 को चुनाव होंगे। इसके नतीजे 11 फरवरी 2020 को घोषित किए जाएँगे। 

‘CAA का समर्थन करने पर हिंदुओं की पानी सप्लाई रोकी गई’: BJP सांसद पर केरल में FIR

केरल पुलिस ने भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे के खिलाफ धर्म व जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने यह कार्रवाई शोभा के 22 जनवरी को किए गए एक ट्वीट को लेकर की है। उन्होंने ट्वीट कर बताया था कि सीएए का समर्थन करने के कारण कुट्टीपुरम पंचायत के हिंदुओं के यहॉं पानी की सप्लाई रोक दी गई है।

मलप्पुरम के पुलिस प्रमुख अब्दुल करीम ने बताया, “भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 (ए), 120, और 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने भ्रामक और गलत जानकारी फैलाई और सांप्रदायिक सद्भाव को नष्ट करने की कोशिश की। वहाँ पर CAA पास होने से पहले से ही पानी की कमी थी।”

कर्नाटक की भाजपा सांसद ने अपने ट्वीट में दावा किया था कि केरल कश्मीर में तब्दील होता जा रहा है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि केरल दूसरा कश्मीर बनने जा रहा है। शोभा ने ट्वीट में एक तस्वीर शेयर की, जिसमें कुछ महिलाएँ एवं पुरुष पानी लेने के लिए टैंकर के पास खड़े हैं। शोभा का कहना है कि कुट्टीपुरम के हिंदुओं को पानी देने से इनकार कर दिया गया, क्योंकि उन लोगों ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन किया है। उनका कहना है कि सेवा भारती नाम के एक एनजीओ ने निवासियों के साथ हुए अन्याय के बारे में सुनकर कॉलोनी के घरों में पीने का पानी पहुँचाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उन्होंने पूछा कि क्या लुटियन्स मीडिया इस असहिष्णुता को टेलीकास्ट करेगी?

जानकारी के मुताबिक केरल के मलप्पुरम जिले के कुट्टिपुरम में एक कॉलोनी के हिंदू निवासियों को पीने का पानी देने से वंचित कर दिया गया था और साथ ही उन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम पर सरकार का समर्थन करने के लिए मुस्लिम समूहों द्वारा बहिष्कार का भी सामना करना पड़ा था। बताया जा रहा है कि कॉलोनी के पास रहने वाला एक व्यक्ति हिंदू बहुल कॉलोनी के लोगों के लिए पीने के पानी की आपूर्ति करता था। मगर CAA का समर्थन करने के बाद कॉलोनी के हिंदुओं को पानी की आपूर्ति नहीं की गई।

जनगणना के आँकड़ों के मुताबिक जिले के लगभग 70% निवासी मुस्लिम हैं और इस घटना ने इन दावों को और मजबूत कर दिया कि सीएए के विरोध-प्रदर्शनों ने विशेष रूप से उन समाजों में सांप्रदायिक तनाव पैदा किया है जहाँ मुस्लिम समुदाय बहुमत में हैं। ट्विटर पर इस मुद्दे को लेकर आवाज उठाने वाली भाजपा सांसद के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज किया है।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश भर में हो रहे विरोध-प्रदर्शन अब सांप्रदायिकता का रूप ले रहे हैं। जब मुस्लिमों ने देश भर में सड़कों पर हिंसा फैलाने के बावजूद मोदी सरकार पर दबाव बनाने में असफल रहीं, तो उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में किए जा रहे प्रदर्शन में हिंदू विरोधी और भारत विरोधी प्रचार का सहारा ले रहे हैं।

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चुनाव आयोग को न करें बदनाम, जनादेश से बढ़कर कुछ भी नहीं: प्रणब मुखर्जी

देश की मौजूदा स्थिति पर पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी राय रखी है। देश भर में सीएए को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। अधिकतर जगहों पर प्रदर्शन हिंसक रहा है और पुलिस व आम नागरिकों पर पत्थरबाजी की गई। पूर्व राष्ट्रपति ने इस पर अपनी राय रखते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर निकले हैं, ये लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों से लोकतंत्र की जड़ें गहरी होती जाती हैं। प्रणब मुखर्जी ने कहा कि युवा विभिन्न मुद्दे पर खुल कर अपने विचार रख रहे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति ने इस दौरान चुनाव आयोग सहित अन्य संस्थानों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग बेहतर तरीके से अपने काम को अंजाम दे रहा है। बकौल मुखर्जी, चुनाव आयोग को बदनाम करने का कोई भी प्रयास पूरी चुनाव प्रक्रिया को बदनाम कर देगा, इसीलिए इससे बचा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान का कामकाज वहाँ काम कर रहे लोगों से पता चलता है। प्रणब मुखर्जी ने इस दौरान जनादेश का सम्मान किए जाने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनादेश की पवित्रता सर्वोच्च है।

प्रणब मुखर्जी ने ये बातें चुनाव आयोग चुनाव आयोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आरबीआई, कैग, नीति आयोग और यूपीएससी जैसे संस्थानों ने भारत की आर्थिक व राजनीतिक पुनरुत्थान के कार्य में बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि जनादेश की पवित्रता का सम्मान करना चुनाव आयोग का कार्य है और सभी प्रकार की अटकलों को विराम देने के लिए आयोग को ऐसा ही करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र किसी भी संदेह से परे है।

बता दें कि विपक्षी दल लगातार ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं और उसकी निष्पक्षता को सार्वजनिक रूप से सन्देश की दृष्टि से देखते रहे हैं। प्रणब मुखर्जी ने संस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने अपने उद्देश्य के अनुसार देश की अच्छी सेवा की है। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ करा कर बार-बार लगने वाली आचार संहिता से होने वाली समस्याओं के समाधान की बात कही। पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसा संवैधानिक सहमति के बाद किया जाना चाहिए।

पूर्व राष्ट्रपति ने आदर्श आचार संहिता में संशोधन की भी वकालात की। उन्होंने कहा कि इसका ध्यान रखा जाना चाहिए कि लोकसभा व विधानसभा चुनावों के दौरान विकास कार्य प्रभावित न हों। वहीं चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि आयोग सभी पक्षों के प्रबुद्ध जनों की राय सुनने को इच्छुक है।

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दरिंदों को बचाने के लिए पगलाया NewsLaundry, कंगना और निर्भया की माँ को कहा भला-बुरा

क्या आप चाहते हैं कि बलात्कारी दरिंदों के गुनाह माफ कर दिए जाएँ? निर्भया के गुनहगारों के लिए फाँसी आपको बदला लगता है? जो लोग बलात्कारियों से सहानुभूति दिखाने की बात करते हैं, उन्हें माफ करने की वकालत करते हैं, उनकी बातों पर चुप्पी साध ली जाए? ये सवाल इसलिए मौजूॅं हैं क्योंकि वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री यही चाहता है। वह चाहता है कि वामपंथी गैंग का जो विरोध करे उनके मुॅंह पर टेप चिपका दिया जाए।

प्रोपेगेंडा पोर्टल के एक लेख में अभिनेत्री कंगना रनौत के लिए ‘वर्बल डायरिया’, ‘महिलाओं से घृणा करने वाली’ और ‘पागलों की रानी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। यह लेख लिखा भी एक महिला ने है। नाम है राज्यश्री। क्या कंगना रनौत इसलिए महिला विरोधी क्योंकि उन्होंने बलात्कारियों का बचाव करने वालों का विरोध किया? तो फिर बलात्कारियों का बचाव करने वाले क्या हैं? समाज सुधारक?

न्यूज़लॉन्ड्री लिखता है कि कंगना ने ‘ख़ामोशी स्वर्णिम है’ कहावत नहीं सुनी है। लेकिन, न्यूज़लॉन्ड्री ने तो सुन रखी है न? अगर किसी ने इस कहावत को सुन-समझ कर भी ‘इंटेलेक्चुअल प्रदूषण’ फैलाने की हदें पार कर दी हों तो वो तो उससे भी बदतर है, जिसने नहीं सुनी है ये कहावत। लेकिन, फिर बात यही आती है कि कंगना रनौत चुप क्यों रहे? एक महिला को, अपने दम पर हिमाचल की वादियों से निकल कर मुंबई के मायानगरी में झंडा गाड़ने वाली अभिनेत्री को अपनी बात रखने से रोका क्यों जा रहा है?

दरअसल, न्यूज़लॉन्ड्री कंगना रनौत के एक बयान से खफा है। वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की माँ आशा देवी से कहा कि वो निर्भया के बलात्कारियों को माफ़ कर दें। ये कैसा प्रोपेगेंडा है? यहाँ बलात्कारियों की माफ़ी का विरोध करने वाली को महिला-विरोधी कहा जाता है और बलात्कारियों का बचाव करने वालों को पूजा जाता है? क्या वामपंथ की परिभाषा में बलात्कारियों और हत्यारों का समर्थन करना महिलाधिकार के तहत आता है?

न्यूज़लॉन्ड्री की नाराज़गी: कंगना बलात्कारियों के विरोध में क्यों हैं?

इंदिरा जयसिंह ने निर्भया की माँ को सोनिया गाँधी से सीखने की सलाह दी थी। उनका कहना था कि जिस तरह सोनिया ने राजीव के हत्यारों को माफ़ किया, उसी तरह निर्भया की माँ भी करें। सबसे पहली बात तो ये कि उस घटना में राजीव गाँधी समेत 15 लोगों की मौत हुई थी और 45 लोग घायल हुए थे। सोनिया गाँधी कौन होती हैं 60 पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व करने वाली? क्या उन सभी ने दोषियों की माफ़ी की अर्जी दी है?

इंदिरा जयसिंह के बयान का कंगना रनौत ने अच्छा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बलात्कारियों के प्रति सहानुभूति रखने वाली इंदिरा जयसिंह को भी उन्हीं दरिंदों के साथ 4 दिन जेल में रखा जाना चाहिए, उन्हें अपने बयान का मतलब समझ में आ जाएगा। बेबाक बॉलीवुड की ‘Queen’ ने कहा कि इंदिरा जयसिंह जैसी औरतों के कोख से ही बलात्कारी पैदा होते हैं। कंगना रनौत के बयान का निर्भया की माँ आशा देवी ने भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वो कंगना की बयान से सहमत हैं और उनका धन्यवाद करती हैं। बकौल आशा देवी, वो ‘महान’ नहीं बनना चाहतीं और 7 साल पहले उनकी बेटी के साथ जो हुआ, उसके लिए न्याय चाहती हैं।

लेकिन, न्यूज़लॉन्ड्री की नज़र में ये ‘न्याय’ नहीं बल्कि ‘बदला’ है। बलात्कारियों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए, दरिंदों का बचाव करते हुए और हत्यारों के पक्ष में बोलते हुए न्यूज़लॉन्ड्री लिखता है कि निर्भया की माँ उसी तरीके से बदला लेना चाहती हैं, जैसा उनकी बेटी के साथ हुआ। प्रोपेगेंडा पोर्टल लिखता है कि मौत की सज़ा हटा दी जानी चाहिए, क्योंकि निर्भया की माँ का मन नहीं बदला जा सकता।

ऐसा लगता है कि एक जघन्यतम अपराध को अंजाम देने वाले दरिंदों के बचाव में पूरा का पूरा गिरोह विशेष सक्रिय हो उठा है। एक सेल्फ-मेड अभिनेत्री को भला-बुरा इसीलिए कहा जा रहा है, क्योंकि वो पीड़ित परिवार के साथ खड़ी हैं, निर्भया की माँ के दर्द को समझती हैं और बलात्कारियों का विरोध करती हैं। ये अजीब विडम्बना है कि बलात्कारियों का बचाव करने वाले कैंडल लेकर उतर जाएँ तो वो आधुनिकता के प्रतीक बन जाते हैं और जो बलात्कारियों को सज़ा देने की माँग करे, उन्हें ‘महिला विरोधी’ ठहराया जाता है। स्पष्ट बात है, निर्भया की माँ को इन वामपंथियों की सलाह, उपदेश और प्रवचन नहीं चाहिए।

कंगना रनौत से गुस्से का दूसरा कारण क्या है? न्यूज़लॉन्ड्री के इसी लेख से हमें वामपंथियों के मन की बात पता चलती है। हाल ही में सैफ अली ख़ान ने कहा था कि ब्रिटिश के आने से पहले ‘इंडिया’ का कोई कांसेप्ट नहीं था। कंगना ने इसका जवाब दिया और पूछा कि अगर ऐसा था कि हज़ारों वर्ष पहले हुए युद्ध का नाम ‘महाभारत’ क्यों है? उस ग्रन्थ को वेद व्यास ने लिखा और उसमें भारत के सभी राजाओं का जिक्र क्या है? यहाँ वामपंथी गैंग एक बार फिर से सैफ अली ख़ान के बयान और अँग्रेजों के पक्ष में खड़ा हो जाता है। आधे लेख में बलात्कारियों के बचाव में तर्क दे रहा न्यूज़लॉन्ड्री अब अँग्रेजों के पक्ष में खड़ा हो जाता है।

महाभारत में कई बार ‘इतिहास’ शब्द का जिक्र है। लेकिन, उलटा राज्यश्री कंगना को सलाह देती हैं कि वो ‘इतिहास’ और ‘मिथक’ के बीच का अंतर समझें। हमारी सलाह है कि न्यूज़लॉन्ड्री वाले ‘महाभारत’ पढ़ें। महाभारत को ‘मिथक’ बता कर कंगना को चुप रहने की सलाह देना उनकी असहिष्णुता को दिखाता है। वो हर उस व्यक्ति को चुप कराना चाहते हैं, जो उनके विरोधी विचारधारा का हो। कंगना बलात्कारियों का बचाव करे, कंगना महाभारत को झूठ कहे और कंगना अँग्रेजों के पक्ष में बोले- उनकी यही तीन चाहत है। अगर वो ऐसा नहीं करती हैं तो उन्हें ‘पागल’ घोषित कर दिया जाएगा। ये जलन की पराकाष्ठा है।

इसका कारण क्या है? इसका कारण ये है कि किसी भी मुद्दे पर बेधड़क राय रखने वाली कंगना रनौत के मुक़ाबले वामपंथी गैंग को कोई अभिनेत्री ऐसी मिल ही नहीं रही है, जिसे मुद्दों की समझ हो और जो वास्तविकता से अनभिज्ञ न हो। वामपंथी गैंग की तरफ़ से बोलने वालों को सीएए और एनआरसी के बीच का अंतर नहीं पता, राज्य और केंद्रशासित प्रदेश की परिभाषा नहीं मालूम और यहाँ तक कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच के फर्क का भी कोई अंदाज़ा नहीं। इसीलिए, वो बिलबिलाए हुए हैं। वो बलात्कारियों का बचाव कर रहे हैं, अँग्रेजों के पाँव पूज रहे हैं और हिन्दू धर्म-ग्रंथों को अपमानित कर रहे हैं।

कंगना रनौत बोलेंगी। वो झाँसी की महारानी लक्ष्मीबाई का किरदार भी अदा करेंगी और एक आधुनिक महिला के रोल को भी परदे पर बखूबी उतारेंगी। वो भारत की मौजूदा दौर की सबसे लोकप्रिय और ज़्यादा कमाने वाली अभिनेत्रियों में से एक हैं और यही बात न्यूज़लॉन्ड्री को अखरती है। वामपंथी गैंग का सीना चीर कर जो कोई आगे बढ़े, उन्हें ये अपने हिसाब से घटिया विशेषण दागते रहेंगे। कंगना रनौत का एक-एक शब्द इन वामपंथी पोर्टलों पर बिजली की भाँति गिरता रहेगा। एक महिला को चुप कराने का उनका प्रयास कभी सफल नहीं हो पाएगा।

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मोदी-विरोधी लिबरल गैंग की बल्ले-बल्ले, ‘राष्ट्रवाद’ से लड़ने के लिए 100 करोड़ डालर देंगे जॉर्ज सोरोस

हंगरी मूल के अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस ने वैश्विक विश्वविद्यालय की शुरूआत करने के लिए 100 करोड़ डॉलर देने की बात कही है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना “राष्ट्रवादियों से लड़ने” के लिए की जाएगी। उन्होंने “अधिनायकवादी सरकारों” और जलवायु परिवर्तन को अस्तित्व के लिए ख़तरा बताया। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में गुरुवार को जॉर्ज सोरोस ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राष्ट्रीयता के अब मायने ही बदल गए हैं।

वैश्विक नेताओं पर हमला करते हुए, सोरोस ने दुख व्यक्त किया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अधीन दुनिया की सबसे मजबूत शक्तियाँ- अमेरिका, चीन और रूस तानाशाहों के हाथों में हैं और सत्ता पर पकड़ रखने वाले शासकों में इज़ाफ़ा हो रहा है।

मोदी-विरोधी उद्योग के लिए सोरोन की बातें इसलिए खुशी देने वाली हैं क्योंकि अब उन्हें धन जुटाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, सोरोस ने यह भी दावा किया कि “सबसे बड़ा और सबसे भयावह झटका” भारत में था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारत को “एक हिन्दू राष्ट्र बनाने” का आरोप लगाया।”

उन्होंने कहा, “राष्ट्रवाद, जो अब बहुत आगे निकल गया है। सबसे बड़ा और सबसे भयावह झटका भारत को लगा है, क्योंकि वहाँ लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नरेंद्र मोदी भारत को एक हिन्दू राष्ट्रवादी देश बना रहे हैं।” उन्होंने पीएम मोदी पर आरोप लगाया कि वो कश्मीर में सख्ती कर रहे हैं, जो कि एक अर्ध-स्वायत्त मुस्लिम क्षेत्र है और वो लाखों नागरिकों को उनकी नागरिकता से वंचित करने की धमकी दे रहे हैं।

शायद, सोरोस नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) का उल्लेख कर रहे थे, जो मोदी सरकार ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान के तीन पड़ोसी देशों से छ: ग़ैर-मुस्लिम धर्म से संबंधित उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करने के लिए संसद में पारित किया था।

यह दुखद है कि सोरोस ने बिना तथ्यों की सही जानकारी जुटाए यह सब दावे कर दिए। सच्चाई यह है कि पूरे क़ानून (CAA) में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो या तो किसी भारतीय से अपनी नागरिकता साबित करने या अपने दस्तावेज़ जमा करने की माँग करता हो। इसके अलावा, इस क़ानून का उद्देश्य सताए हुए लोगों को नागरिकता प्रदान करना है न कि भारतीय नागरिकों के किसी विशेष समूह, ख़ासतौर पर समुदाय विशेष की नागरिकता को छीनना है। इसके अलावा, अगर सोरोस एनआरसी के बारे में बात कर रहे थे, तो एनआरसी के नियमों को अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है।

दिलचस्प बात यह है कि हंगरी की राष्ट्रवादी सरकार, जो यूरोपीय संघ में शरणार्थियों की आमद का कड़ा विरोध करती है, जॉर्ज सोरोस के साथ काफी समय से युद्ध में है। पिछले साल, हंगरी सरकार ने ग़ैर-सरकारी संगठनों के लिए इसे अनिवार्य कर दिया था, जिन्होंने राज्य से पंजीकरण करने के लिए विदेशों से धन प्राप्त किया था। हंगरी ने अवैध घुसपैठ पर कार्रवाई करते हुए ‘स्टॉप सोरोस’ शीर्षक से क़ानून पारित किया था। इसके अलावा, दिसंबर 2015 में, रूस ने प्रगतिशील यहूदी-अमेरिकी परोपकारी जॉर्ज सोरोस द्वारा वित्त पोषित दो फाउंडेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इनके लिए कहा गया था कि वे “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा” पैदा कर रूसी संविधान को कमज़ोर कर रहे थे। इससे पता चलता है कि सोरोस अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ग़ैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से दुनिया भर के विभिन्न देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हैं।

इस बात पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि जॉर्ज सोरोस एक तरफ़ तो “अधिनायकवादी सत्ता” से लड़ने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने ह्यूस्टन में हाउडी मोदी के आयोजन के बाद आतंक परस्त पाकिस्तान के पीएम इमरान खान से मुलाकात की थी। इससे उनका ख़ुद का दोहरा चरित्र उजागर होता है।

इसके अलावा, दावोस में उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति पर भी निशाना साधा और उन्होंने ट्रम्प को एक “शत्रु और परम संकीर्णतावादी” करार दिया। सोरोस ने यह भी दावा किया कि मानवता एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और आने वाले समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीन के शी जिनपिंग जैसे शासकों के भाग्य का निर्धारण दुनिया ख़ुद करेगी।

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ISIS के तीन आतंकी गिरफ्तार, बच निकला दाऊद: आतंकी संगठन के लिए करते थे भर्तियाँ, जुटाते थे पैसा

तमिलनाडु पुलिस ने ISIS (इस्लामिक स्टेट) के एक मॉड्यूल का भांडाफोड़ किया है। ISIS से संबंध रखने के आरोप में तीन मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार किया है। वे ISIS में युवाओं की भर्ती कर रहे थे। तीनों आरोपितों को तमिलनाडु के रामनाथपुरम से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपित कथित तौर पर ‘जिहादी’ विचारधारा को फैलाने और इस्लामिक मान्यताओं का विरोध करने वालों की हत्या की साजिश में शामिल थे। ऐसा वो इसलिए कर रहे थे ताकि लोगों में डर फैल सके।

मामला राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को स्थानांतरित कर दिया गया है। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बी. मुहम्मद अली, पुरा गनी और आमिर के रूप में हुई है। हालाँकि, एक अन्य आरोपित शेख दाऊद फरार होने में कामयाब रहा। पुलिस के अनुसार, आईएसआईएस से जुड़े चार मुस्लिम युवक रामनाथपुरम जिले के देवीपट्टनम में आईएस के लिए युवाओं की भर्ती करने और आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाने के लिए इकट्ठा हुए थे।

पुलिस को इसकी सूचना मिल गई और वो उस जगह पर पहुँच गई जहाँ वो इकट्ठा हुए थे। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि चौथा संदिग्ध भाग गया। ये चारों NIA की वांटेड लिस्ट में शामिल थे। पुलिस के मुताबिक ये चारों देवीपट्टनम, कीझायंथल और अन्य स्थानों के मदरसों में युवाओं को भर्ती करने और उन्हें ट्रेनिंग देने की योजना बना रहे थे। इसके साथ ही वो उन लोगों को पुरस्कार देने की भी योजना बना रहे थे, जिन्होंने उनके आतंकी संगठन के मंसूबे को सफलतापूर्वक प्रसारित किया।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

पुलिस ने बताया कि जब उन्हें गिरफ्तार किया गया तब वे एक अन्य आरोपित अब्दुल शमीम को धन हस्तांतरित करने की बात कर रहे थे। शमीम केरल सीमा पर स्थित कन्याकुमारी जिले में हुई विल्सन की हत्या का आरोपित है। पुलिस ने तीनों आरोपितों के पास से किताबें और इस्लामिक प्रचार सामग्री जब्त की हैं। उनके पास से ऑडियो क्लिप के रूप में भी जिहादी प्रचार सामग्री मिलीं, जिन्हें वे व्हाट्सएप समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करते थे।

पुलिस ने कहा कि आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए और बी समेत कई अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आरोपित के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी कानून और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी मामले दर्ज किए हैं।

तमिलनाडु में IS का मॉड्यूल: अलावुदीन और सरफुदीन के घर पर NIA ने छापे मारे

हिन्दू नेताओं के हत्या की साज़िश रचने वालों की तलाश में NIA ने तमिलनाडु में की ताबड़तोड़ छापेमारी

दिल्ली के बाद वडोदरा से भी पकड़ा गया ISIS आतंकी, तमिलनाडु का वांटेड है जफर अली

मंदिर की ज़मीन पर बन रहा मदरसा का दफ्तर, ग्रामीणों ने जताई आपत्ति तो बंगाल पुलिस ने पीटा

पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी पार्टी के मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण स्थिति लगातार अराजक हो रही है। नॉर्थ 24 परगना के लक्ष्मीपुर में लोगों ने मंदिर बनाने के लिए ज़मीन दान ली, लेकिन सरकार ने उस पर मदरसा का दफ्तर बनवाना चालू कर दिया। गोबरडांगा पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले इस क्षेत्र में इस फ़ैसले के बाद से ही हिंसा चालू हो गई। स्थानीय लोग आक्रोशित हैं और पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई। सोमवार (जनवरी 20, 2020) को आक्रोशित लोगों ने पुलिस के समक्ष अपने विरोध दर्ज कराया। सरकार मंदिर के लिए दी गई ज़मीन पर मदरसा विभाग का दफ़्तर खोलना चाहती है।

स्थानीय लोगों ने कहा है कि सरकार ने मंदिर के नाम पर ज़मीन लेकर उनके साथ धोखा किया है और यही उनकी नाराज़गी की वजह भी है। इसके बाद उलटा पुलिस ने ग्रामीणों को ही निशाने पर ले लिया। आक्रोशित ग्रामीणों पर लाठीचार्ज किया गया, फायरिंग की गई और आँसू गैस के गोले छोड़े गए। गाँव में पुलिस को तैनात कर दिया गया है। साथ ही रैपिड एक्शन फ़ोर्स को भी मौके पर लगाया गया है।

दरअसल, मामला यूँ है कि एक स्थानीय महिला निर्मला दास ने अपनी तीन बीघा ज़मीन मंदिर के लिए दान दे दी थी। उन्होंने ज़मीन 22 वर्ष पहले दान दी थी। उस समय राज्य में सीपीएम की सरकार थी। दिवंगत विधवा ने मंदिर के साथ-साथ स्कूल और हॉस्पिटल बनाने के लिए भी ज़मीन दान की थी। हाल ही में कुछ दिनों पहले तृणमूल कॉन्ग्रेस की स्थानीय यूनिट ने एक तरह से उस ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया और एक भवन बनवाने लगे। स्थानीय लोगों से झूठ बोला गया कि वहाँ कम्युनिटी भवन बन रहा है।

स्थानीय लोगों के गुस्से का तब कोई ठिकाना न रहा, जब उन्होंने देखा कि निर्माणाधीन बिल्डिंग पर मदरसा विभाग का बोर्ड टँगा हुआ है। बताया गया कि उस बिल्डिंग का नाम ‘करमतीर्थ’ रखा जाएगा और वहाँ अल्पसंख्यक विभाग और मदरसा डिपार्टमेंट का दफ्तर होगा। आक्रोशित लोगों ने उस बोर्ड को देखते ही निर्माण कार्य रोकना शुरू कर दिया। ‘सिंह वाहिनी’ के अध्यक्ष देवदत्त माजी ने कहा कि ममता बनर्जी की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीतियों ने सभी हदों को पार कर दिया है। स्थानीय भाजपा नेता सत्यजीत मलिक ने भी तृणमूल की आलोचना करते हुए कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।

कहा जा रहा है कि राज्य में असदुद्दीन ओवैसी की आहट से सहमी ममता बनर्जी मुस्लिम तुष्टिकरण में कोई कमी नहीं रखना चाहती हैं। राज्य में कॉन्ग्रेस ने भी एक मुस्लिम को विधायक दल का नेता बनाया, इससे वो पहले ही घबराई हुई हैं।

बंगाल: माँ काली की मूर्ति तोड़ बदमाश फरार, 8वीं बार मंदिर में चोरी का प्रयास

आतंकियों से जुड़े हो सकते हैं बंगाल पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के तार, मालिक नूर मोहम्मद गिरफ़्तार

ओवैसी के डर से बंगाल में दंगाइयों को खुली छूट दे रही हैं ममता!