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कश्मीर तो झाँकी है, POK अभी बाकी है: अमेरिका व स्कॉटलैंड में CAA के समर्थन में उतरे लोग, मीडिया ने छिपाया

भारत में कई जगहों पर नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध करते हुए रैली निकाली जा रही है और इसके समर्थन में भी लाखों लोग सड़क पर उतरे हैं। अंतर इतना है कि जहाँ भी सीएए के समर्थन में लोग सरकार की प्रशंसा करते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं, उन्हें विरोधी गुट द्वारा परेशान किया जा रहा है। विदेश में भी कई इस्लामी व वामपंथी गुटों ने सीएए के विरोध में रैली निकाली, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया का अच्छा-ख़ासा कवरेज मिला। लेकिन, मीडिया ने बड़ी चालाकी से कई ऐसी विशाल रैलियों को कवर नहीं किया, जो सीएए के समर्थन में हुए थे।

इसी तरह की एक रैली अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में निकली। गणतंत्र दिवस के दिन रविवार (जनवरी 26, 2020) को हज़ारों लोगों ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए इस क़ानून के समर्थन में रैली निकाली। ये रैली भारतीय काउंसलेट के सामने हुई। दुनिया भर में कई बड़े शहरों में सीएए के समर्थन में रैलियाँ हो रही हैं। एबीपी न्यूज़ के अनुसार, ह्यूस्टन में हुई रैली में ‘कश्मीर तो झाँकी है, पीओके अभी बाकी है’ नारे से पूरा वातावरण गूँज उठा। इस रैली में प्रवासी भारतीय समुदाय के लोग शामिल थे, जो संशोधित नागरिकता क़ानून से ख़ुश थे।

इन लोगों ने हाथों में तख्तियाँ और तिरंगा झंडा लिया हुआ था। इन तख्तियों में लिखा था कि भारत के संविधान और ‘वन्दे मातरम’ का सम्मान करो। इसी रैली में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले फ़ैसले की भी तारीफ की गई। इन तख्तियों में पाकिस्तान के लिए भी सन्देश था। रैली में शामिल लोगों ने कहा कि पाकिस्तान को हिन्दुओं व वहाँ के अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों का सामूहिक हत्याकांड बंद किया जाना चाहिए। पाकिस्तान में ग़ैर-मुस्लिमों पर लगातार हो रहे अत्याचार से लोग नाराज़ दिखे।

लोगों ने विश्व समुदाय से माँग करते हुए कहा कि सीएए को लेकर दुनिया भर में जो भ्रम और अफवाह का माहौल फैलाया गया है, उस पर लगाम लगाया जाना चाहिए। प्रदर्शन के नेतृत्व कर रहे नेताओं में से एक दिनेश राजपुरोहित ने इस दौरान कहा:

“नागरिकता संशोधन कानून भारतीय संसद से पूर्ण बहुमत से पास हुआ है और इसके लिए पूर्णतः वैधानिक और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। ऐसे में सभी भारतीयों को बिना किसी भ्रम या अफवाह में आए नागरिकता संशोधन कानून का पालन करना चाहिए।”

यूरोपियन यूनियन में कुछ पाकिस्तान से सहानुभूति रखने वाले सांसदों ने सीएए के विरोध में प्रस्ताव लाया था। लोगों ने इसके ख़िलाफ़ नाराज़गी जताई। स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में एक ऐसा ही प्रदर्शन हुस जिसमें सीएए की तारीफ की गई। इस विरोध प्रदर्शन में लोगों ने पाकिस्तानियों और खालिस्तानियों को भी निशाना बनाया। सबसे मेनस्ट्रीम मीडिया ने इन रैलियों को जानबूझ कर नज़रअंदाज़ कर दिया।

चेन्नई के मरीना मॉल में अज़ान: आवाज़ उठाने वाले पत्रकार को वामपंथी-इस्लामिस्ट्स ने किया ट्रोल

FirstPost (फ़र्स्टपोस्ट) के पत्रकार संजय पांडे, ने रविवार को एक वीडियो शेयर किया जिसके बैकग्राउंड में अजान की आवाज़ सुनाई दे रही थी। यह वीडियो रविवार (26 जनवरी) को पोस्ट किया। इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि यह चेन्नई का मरीना मॉल (Marina Mall) है। यहाँ अजान की आवाज़ सुनाई दे रही है जोकि बड़ी विचित्र बात है।

इसके आगे उन्होंने कहा,

“यह पागलपन और हास्यास्पद है। मैंने आज तक कभी ऐसा कुछ नहीं सुना; कम से कम भारत में तो बिल्कुल नहीं। मुझे नहीं पता कि यह किस तरह की मानसिकता है। अगली बार जब आप यहाँ आएँगे तो हो सकता है कि आपको बैकग्राउंड में चर्च की प्रेयर या भगवत गीता सुनाई दे।”

अपने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन लिखा, “सेक्युलर भारत में आपका स्वागत है। मरीना मॉल के अंदर म्यूजिक सिस्टम के ज़रिए अज़ान बज रही है। मेरी उत्सुकता यह जानने की है कि क्या इसके लिए क़ानूनी रूप से अनुमति ली गई है?” इसके बाद जल्द ही कुछ ने उन्हें भद्दी गालियाँ देते हुए ‘Get the F**k out’ भी कहा।

ऑपइंडिया ने इस बात की स्पष्ट जानकारी जुटाने के लिए पत्रकार पांडे से सम्पर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वह एक फिल्म देखने के लिए मरीना मॉल गए थे और शो ख़त्म होने के बाद बाहर आने के बाद यह घटना घटी। उन्होंने बताया, “मैं एक पत्रकार हूँ और मैंने देश के हर गली-नुक्कड़ पर यात्रा की है। मैंने चारों महानगरों में काम किया है। मुझे ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ। यह कुछ नया है। और यह एक संकेत है कि हम शायद ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ ऐसी चीजें अब बार-बार होंगी। वे मूल रूप से इसे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने (मुस्लिमों) मस्जिदों से पाँच बार अज़ान को सामान्य कर दिया है, अब कोई भी इस पर आपत्ति दर्ज नहीं करता। और अगर कोई आपत्ति जताता भी है तो फिर उसे सोनू निगम की तरह सिर मुँडवाना होगा। साथ ही लोगों से धमकियाँ भी मिलती हैं। मैंने दुबई के अपने दोस्तों से बात की है, ऐसा तो वहाँ भी नहीं होता है।”

ख़बर के अनुसार, इसके आगे उन्होंने बताया कि वो सोशल मीडिया पर बहुत ज़्यादा एक्टिव नहीं रहते हैं और उन्होंने एक साल से अधिक समय के बाद यह पहला ट्वीट किया था, जिससे लोग इसके बारे में जान सकें। उन्होंने बताया, “एक मॉल कोई धार्मिक मामला नहीं है, यह एक व्यापारिक जगह है। आज के समाज में, एक मॉल शायद सबसे अधिक सेकुलर जगह है।”

ऑपइंडिया को उन्होंने बताया कि इस घटना को उन्होंने तीस सेकंड तक रिकॉर्ड किया। इसके बाद इस बारे में उन्होंने वहाँ के लोगों से पूछताछ की कि क्या ऐसा हमेशा और रोज़ाना होता है? यह सवाल वो मॉल के प्रबंधक से भी करना चाहते थे लेकिन वो (संजय पांडे) उनसे बात नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने कुछ सुरक्षा गार्डों से बात की लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर कोई बात नहीं कर सकते। संजय पांडे ने बताया कि गार्ड्स ने पहले तो इस बात को स्वीकार कर लिया था कि वो अज़ान की धुन थी, लेकिन बाद में बाद में वो अपनी बात से पीछे हट गए।

पत्रकार संजय पांडे द्वारा सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अपलोड करने के बाद से ही कुछ यूज़र्स उनके पीछे पड़ गए और उन्हें बुरा-भला कहने लगे। इस बात से वो पूरी तरह से वाक़िफ़ थे कि इस वीडियो को पोस्ट करने के बाद उन्हें बुरा-भला कहा जाएगा। उन्होंने कहा, “जिस तरह से वामपंथी और क्रिश्चियनस्लैमिस्ट लॉबी व्यवहार करते हैं, यह उनका तरीका है… लेकिन मेरा मानना ​​है कि अगर कुछ ग़लत है, तो उसके लिए मुझे आगे आना होगा। और अगर गालियाँ मेरे रास्ते में आती हैं, तो मैं इसे अपनी प्रगति समझ लूँगा।” उन्होंने कहा कि इससे मुझे ऐसे लोगों की मानसिकता के बारे में पता चलता रहेगा। साथ ही यह भी पता चलता रहेगा कि यह लोग देश के बारे में क्या सोचते हैं।

पत्रकार पांडे ने इस बात पर ज़ोर देकर कहा कि वो संघी नहीं हैं, बावजूद इसके वामपंथी उन पर संघी होने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ भद्दी टिप्पणियाँ कर रहे हैं। वो इस बात को मानते हैं कि खाड़ी देशों से धन की आमद से देश की समावेशी संस्कृति नष्ट हो रही है। उन्होंने कहा, “हमारे देश की समावेशी संस्कृति को कट्टरपंथी इस्लामियों ने बर्बाद कर दिया है। लोगों में बहुत ज़हर है।”

उनका कहना है, “मैं आमतौर पर ट्वीट नहीं करता, लेकिन यह कुछ ऐसा था जिसने मुझे आश्चर्यचकित कर दिया और मैं इसे शेयर करने से ख़ुद को रोक नहीं पाया और दुनिया को इसके बारे में बता दिया। पता नहीं आगे क्या होगा?”

मस्जिदों में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

‘सबरीमाला तो ठीक… लेकिन अजान पर भी तो आया था कोर्ट का फैसला, उसका क्या?’

दुर्गा पूजा पंडाल में आरती के दौरान बजाई गई अजान: शिकायत दर्ज लेकिन चुप है कोलकाता पुलिस

‘हिटलर और मुसोलिनी से जुड़े हुए थे पिता, फिर सोनिया गाँधी को क्यों मिली भारतीय नागरिकता?’

अदनान सामी को केंद्र सरकार द्वारा पद्म श्री अवॉर्ड दिए जाने के बाद विपक्षी पार्टियों ने भाजपा को निशाना बनाया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि अदनान सामी के पिता पाकिस्तानी वायुसेना में थे और उन्होंने भारत के ख़िलाफ़ युद्ध में हिस्सा लिया था, इसीलिए अदनान सामी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित करना सही नहीं है। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का साथ देने की बात कह के दूसरों को घेरने वाली भाजपा ख़ुद पाकिस्तानियों को सम्मानित कर ही है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कॉन्ग्रेस के इन आरोपों का जवाब देते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया।

भाजपा की तरफ़ से प्रेस कॉन्फ़्रेस करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि सोनिया गाँधी के पिता तो मुसोलिनी और हिटलर जैसे तानाशाहों से जुड़े हुए थे, फिर उन्हें भारत की नागरिकता क्यों दी गई? संबित पात्रा के इन आरोपों का अब तक कॉन्ग्रेस ने कोई जवाब नहीं दिया है। कॉन्ग्रेस व उसकी सहयोगी पार्टियों को घेरते हुए कहा कि इन विपक्षी दलों को वही मुस्लिम पसंद आते हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत और भारतीय संस्थाओं के विरोधी होते हैं। पात्रा ने कहा:

ये वही सोनिया गाँधी जी की पार्टी है, जिसने जाकिर नाइक से डोनेशन लिया था। ये पूरा दिखाया गया था और बाद में उन्होंने कहा था कि हमने वापस कर दिया। आज हम कॉन्ग्रेस पार्टी से पूछना चाहते हैं, सोनिया गाँधी से पूछना चाहते हैं कि कपिल सिब्बल ने क्या 77 लाख रुपए लिया था? इंदिरा जयसिंह से पूछना चाहते हैं कि आपने कितना लिया था? इससे एक बात साबित होती है कि ये जो लिबरल्स, आम आदमी पार्टी, कॉन्ग्रेस वाले और तौहीन बाग़ वाले हैं, इन्हें केवल एक ही प्रकार के मुस्लिम पसंद हैं, जो मुस्लिम मोदी जी को, सर्वोच्च न्यायालय को, भारत की सेना और सरकार को गाली दें।”

इस दौरान संबित पात्रा ने अदनान सामी के लोकप्रिय गाने ‘लिफ्ट करा दे’ की तर्ज कर कॉन्ग्रेस पर कुछ यूँ निशाना साधा:

तेरी ऊँची शान है भगवन
मेरी अर्जी मान ले भगवन
तू है सब कुछ जानने वाला
मैं हूँ तेरा मानने वाला
कैसे-कैसों को दिया है
ऐसे वैसों को दिया है
कॉन्ग्रेस की सोच थोड़ी सी लिफ्ट करा दे
सद्बुद्धि उनको जरा गिफ्ट करा दे

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने विपक्षी दलों के हर सवाल का जवाब देते हुए कहा कि देशद्रोहियों के लिए इकरार और अच्छे मुस्लिमों के लिए इनकार अब कॉन्ग्रेस का फलसफा बन चुका है। बकौल पात्रा, जो देशद्रोह का काम करे, यासीन मलिक, याकूब मेमन, अफजल गुरु, बुरहान वानी इन सब के लिए इकरार। इसके उलट जो अच्छे काम करके आगे बढ़े उनके लिए इनकार। संबित ने पूछा कि ये कैसी बात है?

सोनिया की शर्तों पर उद्धव से लिया था लिखित आश्वासन, तब बनी सरकार: पूर्व CM चव्हाण का खुलासा

कॉन्ग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने यूँ ही उद्धव ठाकरे की पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया, इसके लिए शिवसेना सुप्रीमो से लिखित में आश्वासन लिया गया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सोनिया ने अपने शर्तों पर शिवसेना के साथ गठबंधन किया, इसके लिए उनकी तरफ़ से कोई शर्त नहीं आई। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता अशोक चव्हाण उद्धव कैबिनेट में मंत्री भी हैं। बताया जाता है कि कॉन्ग्रेस के कई विधायक भी राज्य में सत्ता के लिए लालायित थे और उन्होंने सोनिया को गठबंधन के लिए मनाया।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के संगठन से लेकर सरकार तक विभिन्न पदों पर काबिज रहे अशोक चव्हाण ने बताया कि सोनिया गाँधी ने उद्धव ठाकरे से कहा था कि वो संविधान की प्रस्तावना के अनुरूप कार्य करेंगे और मुख्यमंत्री रहते वो ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे, जिससे संविधान का उल्लंघन होता हो। सोनिया गाँधी ने गठबंधन के लिए दिशा-निर्देश तय किए था उन पर उद्धव का लिखित आश्वासन लिया गया था।

महाराष्ट्र के पीडब्ल्यूडी मंत्री चव्हाण ने ये बातें महाराष्ट्र के नांदेड़ में कही। उन्होंने बताया कि सोनिया गाँधी ने महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस को आदेश दिया था कि वो सबसे पहले उद्धव से लिखित आश्वासन लें। इसके बाद ही गठबंधन के लिए पार्टी आलाकमान ने हामी भरी। सोनिया ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट कह दिया था कि जब भी ऐसा लगे कि सरकार कॉन्ग्रेस के बनाए दिशानिर्देशों के अनुरूप काम नहीं कर रही है, पार्टी शिवसेना से अपना समर्थन वापस ले लेगी।

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने ठाकरे तक सोनिया का सन्देश पहुँचाया। उनके राजी होने के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। वहीं महाराष्ट्र में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य में ‘महा विकास अघाड़ी’ की सरकार बनने के लिए शिवसेना और कॉन्ग्रेस में क्या डील हुई थी, इसका खुलासा होना चाहिए। उन्होंने पूछा कि जब गठबंधन के सहयोगियों को शिवसेना पर विश्वास ही नहीं है, फिर ठाकरे की पार्टी सरकार में बनी ही क्यों हुई है?

बीजेपी नेता की दरांती से काटकर सरेआम हत्या: जाँच शुरू, खंगाली जा रही है CCTV फुटेज

तमिलनाडु के त्रिची में 40 वर्षीय भाजपा नेता विजयाराकू की सोमवार (27 जनवरी) को तड़के पर हत्या कर दी गई। हत्या की इस वारदात को आज सुबह क़रीब 5:30 बजे अंजाम दिया गया।

ख़बर के अनुसार, विजयाराकू एक चाय की दुकान पर गए थे, जहाँ तीन हमलावरों ने उन पर दरांती से हमला कर दिया। हमले के बाद वहाँ मौजूद लोगों के बीच अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया।

बीजेपी तमिलनाडु ने हत्या के सन्दर्भ में अपने ट्विटर हैंडल से बताया कि भाजपा मंडल सचिव विजयराकू को इस्लामिक आतंकवादियों ने मार डाला। साथ ही यह भी लिखा गया कि अलगाववादी राजनीति को रोका जाना चाहिए और सभी लोगों को एकजुट होना चाहिए।

फ़िलहाल, पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है। बीजेपी नेता रघु तमिलनाडु के पलकराई में पार्टी के जोनल सेक्रेटरी थे। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने त्रिची के सरकारी अस्पताल के बाहर हत्या के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करते हुए आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की। हालाँकि, पुलिस के आश्वासन पर आंदोलनकारियों ने विरोध-प्रदर्शन वापस ले लिया।

ANI की ख़बर के अनुसार, गाँधी नगर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। ग़ौरतलब है कि हत्या से पहले विजयाराकू ने गाँधी नगर पुलिस में एक मुकदमा दर्ज करवाया था, जिसमें उन्होंने मोबाइल चोरी होने की बात कही थी, हालाँकि, बाद में उन्होंने यह मुकदमा वापस ले लिया था।

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केरल, राजस्थान और पंजाब की कतार में आया पश्चिम बंगाल, CAA के खिलाफ प्रस्ताव पास

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सोमवार (जनवरी 27, 2020) को पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी प्रस्ताव पास हो गया। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल अब चौथा राज्‍य बन गया है, जहाँ CAA के खिलाफ प्रस्ताव पास हो चुका है। इससे पहले केरल, पंजाब और राजस्‍थान विधानसभा में सीएए विरोधी प्रस्‍ताव पास किया जा चुका है। संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने यह प्रस्ताव पश्चिम बंगाल विधानसभा में रखा।

इस मौके पर सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। विधानसभा में ममता बनर्जी ने कहा, “यह विरोध केवल अल्पसंख्यकों का ही नहीं है। मैं अपने हिंदू भाइयों को इस विरोध को आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद देती हूँ। बंगाल में हम CAA, NPR और NRC की अनुमति नहीं देंगे। हम शांतिपूर्वक लड़ाई जारी रखेंगे।”

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पास किए गए इस प्रस्ताव का कॉन्ग्रेस और लेफ्ट दोनों ही दल समर्थन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा कि संशोधित नागरिकता कानून लोगों के विरुद्ध है और यह कानून तुरंत निरस्त किया जाए। ममता बनर्जी ने केन्द्र सरकार को चुनौती भी दी कि वह उनकी सरकार को बर्खास्त करके दिखाएँ। पश्चिम बंगाल की सीएम ने प्रस्ताव के दौरान विधानसभा में कहा कि दिल्ली में हुई NPR की बैठक में शामिल नहीं होने की भी ताकत बंगाल में है। अब समय आ गया है कि हम अपने मतभेद भुलाकर साथ आएँ और देश को बचाने के लिए लड़ें। यही नहीं इस मामले पर ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का भी बन बनाया है।

गौरतलब है कि 22 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता व सिलीगुड़ी के हिल्स इलाके में महाजुलूस निकाल कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसी क्रम में दार्जिलिंग शहर में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में महाजुलूस भी निकाला गया था। यह जुलूस रार्बट्सन रोड से गाँधी रोड, डीबी गिरि रोड, एनएच 55 होते हुए दार्जिलिंग मोटर स्टैंड तक गया था और बाद में सभा में तब्दील हो गया था।

शरजील को जेल भेजने के पक्ष में हो? शाह ने केजरीवाल को घेरा, बताया ओछी व नीची राजनीति करने वाला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में एक रैली में अरविन्द केजरीवाल को निशाने पर लिया। शाह ने कहा कि उन्होंने अपने दशकों पुराने राजनीतिक करियर में कई राजेनता देखे हैं लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल जैसा ओछी और नीची राजनीति करने वाला आज तक नहीं देखा। पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली के करोड़ों गरीबों को 5 लाख की योजना से केजरीवाल ने अलग-थलग कर दिया। गृह मंत्री ने केजरीवाल से पूछा कि दिल्ली के गरीबों का क्या दोष था कि आपने जो 5 लाख रुपये की सहायता मोदी जी उनको देना चाहते थे, उसे उनसे छीन लिया?

दिल्ली के रिठाला में एक चुनावी जनसभा को सम्बोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल ने चुनाव से पहले कहा था कि सत्ता में आए तो सरकारी बंगला, सरकारी गाड़ी नहीं लेंगे। लेकिन, शपथ लेने के बाद सरकारी गाड़ी, सरकारी बंगला लिया। अमित शाह ने आगे कहा:

“2015 में मोदी जी ने एक पत्र लिखा और उसमें कहा कि दिल्ली की 1731 अनधिकृत कॉलोनियों को आप मुझे दे दो, मैं उन्हें अधिकृत बनाऊँगा। इन्होंने कहा कि अभी नक़्शे बन रहे हैं, 2 साल लगेंगे। फिर 2017 में मोदी जी ने पत्र लिखा तब भी केजरीवाल सरकार ने कहा कि अभी 2 साल और लगेंगे। दिल्लीवासियों, 8 तारीख को ये सरकार बदल दो, मैं आपसे कह कर जाता हूँ कि जहाँ झुग्गी है, वहीं मकान देने का काम मोदी सरकार करने वाली है। केजरीवाल ने पूरी दिल्ली में फ्री वाई-फाई देने का वादा किया था। आप लोग बताइए कि आपको फ्री वाई-फाई मिलता है क्या?”

अमित शाह ने रैली के दौरान न सिर्फ़ मोदी सरकार के कामकाज को गिनाया बल्कि केजरीवाल सरकार की नाकामियों को भी जनता के समक्ष रखा। शाह ने दिल्ली के सीएम से पूछा कि वो भारत माता के टुकड़े करने वाले टुकड़े-टुकड़े गैंग को जेल में डालने की परमिशन दे रहे हैं या नहीं? उन्होंने केजरीवाल को चुनौती दी कि वो उनके आरोपों का जवाब देते हुए एक ट्वीट कर दें। शाह ने कहा कि मोदी जी के शासन में ये अधिकार सबको है, केजरीवाल को भी है, गाली देनी है तो हमें दे दो या भाजपा को दे दो। बकौल शाह, अगर कोई भारत माता के टुकड़े करने की बात करेगा, तो उसे जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा।

अमित शाह दिल्ली में कई नुक्कड़ सभाएँ भी कर रहे हैं और कार्यतकर्ताओं के घर जाकर खाना खा रहे हैं। ऐसे में पार्टी का जोश भी अभी हाई है। शाह ने अपने कैडर में और जोश भरते हुए कहा कि कुछ समय पहले जेएनयू में ‘भारत तेरे टुकड़े हो एक हजार’ जैसे नारे लगे, जिसके बाद मोदी जी ने इन नारे लगाने वालों को उठाकर जेल में डाल दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बताते हैं और उनका बचाव करते हैं।

अमित शाह ने इस दौरान भारत से नॉर्थ-ईस्ट को लाग करने की बात करने वाले शरजील इमाम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उसके ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह का मामला दर्ज किया है और उसकी तलाश की जा रही है। शाह ने केजरीवाल से पूछा कि क्या वो शरजील को पकड़ने के पक्ष में हैं?

शाहीन बाग पर कुमार विश्वास का केजरीवाल पर हमला, ‘खुद भेजते हो अमानती गुंडे, दूसरे को बोलते हो हटाओ’

आम लोग कपड़े और राशन दे जाते हैं, केजरीवाल ने कोई मदद नहीं की: पाकिस्तानी हिंदू

बीवी को कुत्ते से कटवाने से लेकर साली के शोषण व कार्यकर्ता के बलात्कार तक: केजरीवाल के साथ दागियों की फौज

इस बार हम डरने के इरादे से मैदान में नहीं हैं: इमरान प्रतापगढ़ी

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर जगह-जगह हो रहे उपद्रवों में कुछ चेहरे हैं जो घूम-घूम कर लोगों को भड़काने में लगे हैं। इनमें से एक चेहरा शायर इमरान प्रतापगढ़ी का भी है। इमरान गणतंत्र दिवस के दिन रविवार (जनवरी 26, 2020) को लखनऊ के घंटाघर के पास जमा हुए प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करने पहुँचे। वहाँ कई महिलाएँ धरने पर बैठी हुई हैं। इमरान लगातार घूम-घूम कर लोगों को बता रहे हैं कि उन पर जुल्म हो रहा है और सरकार छात्रों एवं महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। इमरान कहते हैं कि वो कुवैत में मुशायरे का ऑफर छोड़ कर सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शन में घूम रहे हैं।

इमरान की एक शेर की एक पंक्ति देखिए- “मोदी जी आपकी हुकूमत पर, एक शाहीन बाग़ भारी है।” इस पंक्ति से सीधा पता चलता है कि कुछ मजहबी नाम वाले शायर हैं, वो देश भर में अराजकता फैलाने में लगे हैं। इमरान बार-बार ‘काग़ज़ नहीं दिखाएँगे‘ भी दोहराते हैं, जो सीएए विरोधियों का फेवरिट तकिया कलाम बन गया है। शायरों के इस गैंग का नेतृत्व मुनव्वर राणा और राहत इंदौरी कर रहे हैं और इमरान जैसे लोग घूम-घूम कर उसे फैला रहे हैं। इमरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के गृह मंत्री अमित शाह के बारे में कहते हैं कि वो गुंडों की भाषा में बात करते हैं।

मोदी सरकार को इमरान ने भारत के संविधान का ‘कातिल’ करार दिया। जबकि, जिस शाहीन बाग़ की ब्रांडिंग में वो लगे हैं, उसी विरोध प्रदर्शन का मुख्य साज़िशकर्ता संविधान के बारे में कहता है कि इस पर से समुदाय का भरोसा उठ चुका है। शरजील इमाम ने कहा कि न्यायपालिका पर से समुदाय का भरोसा उठ चुका है। संसद ने उसी संविधान की प्रक्रिया का पालन करते हुए एक क़ानून पारित किया और शरजील उसे ‘काला क़ानून’ बताता हैं, संविधान को गाली देते हैं और बाद में उसी संविधान का कातिल सरकार को बताते हैं। इमरान कहते हैं:

“आधार कार्ड माँगेंगे। पैन कार्ड माँगेंगे? मैं तो उनकी छाती पर खड़े होकर दिल्ली में ऐलान करता हूँ कि आगरा में जाकर देखिए ताजमहल। वही है हमारा आधार कार्ड। आप जहाँ रहते हैं, वहाँ से मात्र ढाई किलोमीटर की दूरी पर खड़ा है कुतुबमीनार। वही है हमारा पैन कार्ड। जाकर देखिए। अगर आपको हमारा जन्म प्रमाण पत्र चाहिए तो जाइए लाल किले को देखिए। वही है हमारा बर्थ सर्टिफिकेट। हमसे हमारा बर्थ प्लेस पूछा जाता है। मोदी जी और अमित शाह जी, जामा मस्जिद की जो सीढियाँ हैं, वही है हमारा जन्मस्थान। जाइए, देख लीजिए। इस बार हम डरने के इरादे से मैदान में नहीं हैं।”

इमरान की मजहबी कट्टरवादी भाषा पर गौर कीजिए। भारत को सेक्युलर बताने वाले इन लोगों के कथित रहनुमाओं को लगता है कि लाल किला, ताज महल, जामा मस्जिद और क़ुतुब मीनार ‘इनका’ है, और इनके पूर्वजों ने बनाया है। ये नहीं मानते हैं कि ये सब राष्ट्र की संपत्ति है। ये इन चीजों को कौमी नज़र से देखते हैं। मजहबी एक्टिविस्ट्स को शायद पता नहीं है कि बाबरी मस्जिद जैसी अनगिनत ऐसी इस्लामी इमारते हैं, जिनके नीचे कई मंदिर दफ़न हैं। हिन्दुओं के ढाँचों को तोड़ कर, वहाँ रह रहे हिन्दू श्रद्धालुओं को मार कर, कइयों को जबरन इस्लाम कबूल करवा कर और ख़ून बहा कर- ऐसे खड़ी हुई है अधिकतर इस्लामी इमारतें।

जामा मस्जिद। वही जामा मस्जिद, जिसकी सीढ़ियों के नीचे कई हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों के दफ़न होने की बात कही जाती है। औरंगजेब के आदेश के बाद उन्हीं सीढ़ियों के नीचे उज्जैन से लूट कर लाइ गई हिन्दू प्रतिमाओं को दफ़न कर दिया गया था, ऐसा औरंगजेब की जीवनी ‘मसीर-ई-आलमगीरी’ में लिखा हुआ है, जिसे साकी मुस्ताक ने लिखा था। इमरान को हमारी सलाह है कि वो इतिहास खँगालें और देखें कि रविवार (मई 24-25, 1689) को जामा मस्जिद में क्या हुआ था। बहादुर ख़ान ने ऐसा क्या किया था, जिससे मुग़ल बादशाह ख़ुश हुआ था और उसे इनाम दिया गया था?

लाल किला, ताज महल, क़ुतुब मीनार और जामा मस्जिद के निर्माण के लिए अरब से रुपए नहीं आए थे। इसी देश की संपत्ति से बनाया गया है इन्हें। विक्टर इस्लामी इमारतों को क्रूर आक्रांताओं ने हिन्दुओं से लूटे हुए धन से ही बनवाया है। क्या बाबर अपने साथ उज्बेकिस्तान से धन लेकर आया था? मुगलों ने इसी धरती को लूट कर यहाँ वो इमारतें खड़ी की, जिन्हें अपने कौम की निशानी बता कर इमरान अपना सीना गर्व से चौड़ा कर रहे हैं। इन्हें गम है इस बात का कि ये इमारतें राष्ट्र की संपत्ति क्यों है। इनका दिवास्वप्न है कि जामा मस्जिद से खलीफा हरा रंग का झंडा फहराए और ये ‘जय हिन्द’ की जगह ‘नारा-ए-तकबीर’ लगाएँ।

शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने लखनऊ में मुस्लिमों को जम कर भड़काया

हमने देखा था कि कैसे कमलेश तिवारी की हत्या के बाद हत्यारों ने अपनी बीवी व परिजनों से बात की थी तो सभी इस घृणित कृत्य का समर्थन कर रहे थे। एक लीक हुए फोन कॉल से पता चला कि हत्यारों की बीवियों ने भी इस करतूत का समर्थन किया था। हाल ही में सड़कों पर उतरीं महिलाओं को देखें तो हमें इस मानसिकता के बारे में और भी बहुत कुछ पता चलता है। इमरान की ख़ुद की जुबानी सुनाई गई एक कहानी में इसके बारे में और कुछ पता चलता है। बकौल इमरान, जब वो दिल्ली में जामिया के कथित घायल छात्रों को देखने एम्स जा रहे थे तब उनकी अम्मी ने उन्हें कॉल किया।

इमरान की अम्मी ने फोन पर अपने बेटे से कहा कि अगर उसका ख़ून ठंडा नहीं हुआ है तो उसे जामिया वालों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। ग्रामीण परिवेश से आने वाली इमरान की अम्मी ने इस तरह की भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया, ऐसा ख़ुद इमरान की कहानी से पता चलता है। ऐसे में कमलेश तिवारी के हत्यारों के परिजनों द्वारा हत्या का समर्थन करना और शाहीन बाग़ में रुपए लेकर अराजकता फैलाना भी इसी मानसिकता का एक हिस्सा है। इमरान कहते हैं कि एक भी मुकदमा हो तो उसे इनाम के रूप में लेना चाहिए। क्या इस भड़काऊ बयान को समुदाय के युवाओं के करियर बर्बाद करने वाला नहीं माना जाना चाहिए?

क्या मजहबी युवा अपने ऊपर जानबूझ कर मुकदमों का पहाड़ लाद ले, जिससे उसे प्राइवेट व सरकारी नौकरियों के लिए दर-दर भटकना पड़े? बाद में फिर यही इमरान जॉब न मिलने का बहाना लेकर आएँगे। इमरान अपने पूर्वजों की बात करते हुए कहते हैं कि उन्होंने अपने घोड़ों की टापों से दुनिया नापी है। जहाँ एक तरफ भारत अपनी इस संस्कृति पर गर्व करता है कि हमारे देश ने किसी भी विदेशी राज्य पर हमला तक नहीं किया, इमरान विदेशी आक्रांताओं को अपना पूर्वज बता कर लोगों को भड़का रहे हैं। कौन हैं उनके पूर्वज? जिन्होंने कभी दूसरे राज्यों पर पहले हाथ नहीं उठाया वो, या फिर जिन्होंने दुनिया भर में ख़ून-ख़राबा मचाया वो?

इमरान प्रतापगढ़ी पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी को ‘शेरनी’ बताते हैं और उन्हें ‘दुर्गा’ कहते हैं। झारखण्ड में भाजपा की हार पर इमरान ख़ुश होते हैं। वो दिल्ली में भाजपा की हार की भविष्यवाणी करते हैं। साथ ही वो ये भी कहते हैं कि एक दिन केंद्र से भी भाजपा चली जाएगी। इसके बाद वो फैज़ अहमद फैज़ की नज्म ‘हम देखेंगे’ गाते हैं। उसी फैज की कविता, जो मानता ही नहीं था कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश प्राचीन काल में एक ही संस्कृति का हिस्सा थे। वही फैज़, जो पाकिस्तान की ‘हज़ारों वर्ष पुरानी’ संस्कृति की बातें करता था।

इमरान प्रतापगढ़ी हिटलर के बारे में बात करते हुए लखनऊ में कहते हैं कि एक दिन वो अपने कमरे में मरा हुआ पाया गया था, उसने आत्महत्या कर ली थी। इमरान का कहना है कि सभी तानाशाहों का अंत ऐसा ही होता है। वो आज के दौर में किसे तानाशाह कह रहे हैं और किसकी मौत की दुआ कर रहे हैं, ये आप सोचिए। वैसे इमरान ने फैज़ की इन पंक्तियों के साथ अपने सम्बोधन का अंत किया, जिनका अर्थ आप भलीभाँति समझते हैं:

जब अर्ज़-ए-ख़ुदा के काबे से सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा मरदूद-ए-हरम मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का

NOTA को मिला 5 वोट, कॉन्ग्रेस कैंडिडेट को 0 वोट: निर्दलीय उम्मीदवार की जीत, पूरे राज्य में उड़ा कॉन्ग्रेस का मजाक

तेलंगाना में हाल ही में हुए निकाय चुनावों में एक अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला। जहाँ एक तरफ राज्य में कॉन्ग्रेस पार्टी पहले से ही अस्तित्व की लड़ाई का सामना कर रही है, उसके एक उम्मीदवार को शून्य वोट मिलना चर्चा का विषय बन गया। जी हाँ, वेमुलावाड़ा नगरपालिका वॉर्ड नंबर 17 से कॉन्ग्रेस के कैंडिडेट का खाता तक नहीं खुल पाया। हालाँकि, कॉन्ग्रेस उम्मीदवार का कहना है कि उन्होंने और उनके परिजनों ने उन्हें वोट नहीं डाला क्योंकि वो लोग वार्ड 12 के निवासी हैं। पूरे राज्य में इस ख़बर के कारण कांग्रेस का मजाक बना।

कॉन्ग्रेस पार्टी के तेलंगाना यूनिट ने कहा है कि वो इस मामले की जाँच कराएगी। अपने उम्मीदवार नागरानी ईसरावेल्ली को शून्य वोट मिलने के पीछे पार्टी ने किसी साज़िश की ओर इशारा किया है। उस क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार 671 वोटों के साथ दिव्या चिंतापणि ने वॉर्ड से जीत दर्ज की। बता दें कि चिंतापणि सत्तारूढ़ दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की बागी नेता हैं। वहीं दूसरे नंबर पर टीआरएस नेता ने 443 वोट हासिल किए। कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को एक भी वोट नहीं मिला।

यहाँ तक कि उक्त वार्ड से नोटा को भी 5 लोगों का वोट मिला। 14 लोगों के मतों को अमान्य करार दिया गया। यानी कॉन्ग्रेस से ज्यादा वोट नोटा को मिले और उससे भी ज्यादा वोट अमान्य करार दिए गए। एक अन्य उम्मीदवार गुंती भवानी को सिर्फ 1 वोट मिला। इसमें सिर्फ उनका वोट शामिल था। यानी, उन्हें ख़ुद के अलावा किसी और ने वोट दिया ही नहीं।

तेलंगाना कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पूनम प्रभाकर ने कहा कि वो इस मतगणना के परिणामों से हैरान हैं। नाराज अध्यक्ष ने पूरी चुनावी प्रक्रिया पर ही संदेह जाहिर किया। उन्होंने कहा कि मामले की आंतरिक जाँच करवाई जाएगी और जिला निर्वाचन अधिकारी से भी चुनाव प्रक्रिया की जाँच किए जाने की माँग की जाएगी। अगर पूरे चुनाव की बात करें तो तेलंगाना नगर निकाय में टीआएरस ने बड़ी जीत दर्ज की है। टीआरएस ने 120 नगरपालिकाओं में से 100 और नौ नगर निगम में से 7 पर जीत की पताका लहराई।

NPR की प्रक्रिया पर रोक लगाने से SC का इनकार, जनहित याचिकाओं की सुनवाई पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (27 जनवरी, 2020) को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। हालाँकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इन प्रक्रियाओं पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही सभी नई याचिकाओं को नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) की अन्य याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध कर दिया। इन पर पाँच सदस्यीय संविधान पीठ क़रीब तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।

दरअसल, याचिका में डेटा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाया गया था। एक याचिकाकर्ता ने कहा था कि नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003 के तहत एकत्र की जा रही जानकारी के तहत दुरुपयोग से किसी भी सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

इसके आगे याचिका में आगे कहा गया कि यह आधार या जनगणना के लिए इकट्ठा की गई जानकारी से काफी अलग है, जिसमें एकत्र की गई सूचना/ डेटा को क़ानून के अनुसार सुरक्षा और सुरक्षा की गारंटी दी जाती है। याचिका में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि इकट्टा किए डेटा के कारण नागरिकों की निगरानी हो सकती है। हालाँकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता की सुनवाई पर NPR प्रक्रिया में तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया।

ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 22 जनवरी को स्पष्ट किया था कि वो केंद्र सरकार का पक्ष जाने बगैर कोई निर्णय नहीं लेगा। तब कोर्ट ने इस क़ानून के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया, जिसकी सुनवाई पाँच सदस्यीय संविधान पीठ करेगी।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश एस अब्दुल नज़ीर और न्यायाधीश संजीव खन्ना की पीठ ने इस कानून को चुनौती देने वाली दर्जनों याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया। हालाँकि, पीठ ने साफ़ किया त्रिपुरा और असम से संबंधित याचिकाओं पर अलग से विचार किया जाएगा क्योंकि इन राज्यों की नए नागरिकता क़ानून को लेकर परेशानी देश के अन्य हिस्सों से अलग है।

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