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सब-इंस्पेक्टर के मर्डर से ज्यादा बड़ी प्लानिंग थी आतंकी शमीम और तौफिक की, NIA करेगी अब केस की जाँच!

तमिलनाडु सरकार ने केरल की सीमावर्ती कन्याकुमारी ज़िले में 8 जनवरी 2020 को एक वरिष्ठ सब-इंस्पेक्टर की रहस्यमयी तरीक़े से हत्या मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) द्वारा कराए जाने की सिफ़ारिश की है। इस मामले में जाँचकर्ताओं ने दोनों आरोपितों की पहचान अब्दुल शमीम (25 वर्षीय) और तौफिक (27 वर्षीय) के रूप में की थी। राज्य सरकार की सिफ़ारिश पर दोनों आरोपितों की गिरफ़्तारी से संबंधित दस्तावेज़ बुधवार (22 जनवरी) को गृह मंत्रालय को सौंप दिए।

दरअसल, सब-इंस्पेक्टर विल्सन (57 वर्ष) की बुधवार (8 जनवरी) को सुबह साढ़े नौ बजे के क़रीब तमिलनाडु के कालियाक्कविलाई के पास एक चेकपोस्ट पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा, उनके शरीर पर चोट के भी निशान थे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज से आरोपित की पहचान कन्याकुमारी के शमीम और तौफिक के रूप में की थी। दोनों को 14 जनवरी को कर्नाटक के उडुपी रेलवे स्टेशन से गिरफ़्तार किया गया था। ज़िला पुलिस ने दोनों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या की सज़ा) और शस्त्र अधिनियम के तहत FIR दर्ज की थी।

ख़बर के अनुसार, आरोपितों को अदालत में पेश किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। फ़िलहाल, दोनों तिरुनेलवेली ज़िले की पलियामकोट्टई जेल में बंद हैं।

कन्याकुमारी के पुलिस अधीक्षक एन श्रीनाथ ने पहले मीडिया को बताया था कि दोनों आरोपित अपने सहयोगी आतंकियों की गिरफ़्तारी से परेशान थे और इसलिए पुलिस से बदला लेने के लिए उन्होंने विल्सन की हत्या कर दी थी। दोनों आरोपितों ने इस सन्दर्भ में अपना अपराध क़बूल कर लिया है। एसपी ने बताया कि कथित तौर पर उन्होंने 26 जनवरी को आत्मघाती हमले की योजना भी बना रखी थी।

इससे पहले पुलिस ने बताया था कि शमीम 2014 में एक हिन्दू मुन्नानी नेता सुरेश कुमार की हत्या के मामले में पिछले महीने ज़मानत मिलने के बाद से फ़रार था। एक पुलिस अधिकारी ने बताया, “उसके आत्मसमर्पण करने की संभावना नहीं है। वह एक ऐसा व्यक्ति है, जिसे अगर मौक़ा मिला तो वो गिरफ़्तारी से पहले आत्महत्या कर लेगा।”

हिन्दू नेता सुरेश कुमार की हत्या के अलावा, मोईदीन का हाजा फकरुदीन (42) के साथ भी गहरा रिश्ता था। उसके सम्पर्क में आने के बाद वो आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में कथित तौर पर युवाओं को भर्ती करने का काम करता था।

2017 में, NIA ने मोईदीन, फकरुदीन और अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था और 13 मार्च, 2018 को एक आरोप पत्र भी दायर किया था। इसमें आरोप लगाया गया कि था कि मोईदीन ने “जनवरी, 2014 के दौरान सीरिया में ISIS/ ISIL/ Daish में शामिल होने के लिए हाजा फकरुदीन की असलियत जानते हुए उसकी सहायता की।” 12 दिसंबर, 2019 को ज़मानत पर छूटने के बाद, मोईदीन पर आरोप है कि उसने संभावित भर्तियों को जारी रखने के लिए दक्षिण बेंगलुरु क्षेत्र में कई बैठकें कीं। बेंगलुरु में आयोजित बैठकों का हिस्सा आरोपित शमीम और तौफ़िक भी होते थे, इसमें मोइदीन हिस्सा लेता था।

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‘एहसान फरामोश नसीर! इसी देश ने आपको पैसा और शोहरत दिया, बेहतर अभिनेता की गलतफहमी मत पालिए’

मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल ने नसीरुद्दीन शाह को जम कर लताड़ लगाई है। कौशल ने नसीरुद्दीन शाह को सलाह दी कि जिस देश ने उन्हें इतना कुछ दिया है, उस देश के प्रति वो कृतघ्नता न दिखाएँ, कृतज्ञ बनें। स्वराज कौशल ने नसीरुद्दीन शाह द्वारा अनुपम खेर को ‘जोकर’ और ‘मनोरोगी’ कहने पर भी आपत्ति जताई। अनुपम खेर के बारे में चर्चा करते हुए स्वराज कौशल ने कहा कि वो वरिष्ठ अभिनेता से पिछले 47 वर्षों से परिचित हैं। ये बात तब की है, जब वो क़ानून की पढ़ाई कर रहे थे और उस वक़्त अनुपम व किरण दिग्गज थिएटर निर्देशक बलवंत गार्गी के संरक्षण में अभिनय का प्रशिक्षण ले रहे थे।

बता दें कि यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन में पढ़ाने वाले बलवंत गार्गी ने चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी में ‘इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट’ की स्थापना की थी। उनके अन्य छात्रों में पूनम ढिल्लों और सतीश कौशिक शामिल हैं। स्वराज कौशल ने कहा कि वो अनुपम व किरण को तभी से जानते हैं, जब वो बलवंत के छात्र थे। उन्होंने बताया कि अनुपम खेर एक ईमानदार और सच्चे व्यक्ति हैं, जिन्होंने ख़ुद ही सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ी हैं। स्वराज कौशल ने किरण को पहली बार तब देखा था, जब वो 1971 में ‘Desire Under The Elms’ नामक नाटक का मंचन कर रही थीं।

स्वराज कौशल ने जानकारी दी कि किरण एक बहुत अच्छी बैडमिंटन की खिलाड़ी थीं। उन्होंने बताया कि अगर वो ग़लत नहीं हैं तो किरण बैडमिंटन के मामले में इंडिया चैंपियन थीं। किरण ने अंग्रेजी साहित्य में फर्स्ट डिवीजन से एमए का कोर्स पूरा किया। उनकी ही तरह उनकी बहन कँवल ठाकुर सिंह भी काफ़ी प्रतिभावान थीं। स्वराज कौशल ने बताया कि किरण के पिता सेना के सम्मानित अधिकारी थे। उनका परिवार शहर के सबसे लोकप्रिय व धनाढ्य परिवारों में से एक था। स्वराज ने बताया कि किरण को पूरा शहर जनता था और लोग उनकी ख़ूब तारीफ़ करते थे। अनुपम खेर के बारे में कौशल ने आगे बताया:

“अनुपम खेर थिएटर के एक पारंगत अभिनेता हुआ करते थे- कुशल और दक्ष। जब वो मंच संभालते तो दर्शक किसी दूसरी ही दुनिया में खो जाया करते थे। वो एक स्टार बन गए थे लेकिन उन्होंने अपनी जड़ों को कभी नहीं भुलाया। मैं उस वक़्त के कई सितारों को जानता हूँ। अनुपम खेर के सिर उनका स्टारडम कभी नहीं चढ़ा। वो डाउन टू अर्थ बने रहे। उन्होंने अपनों को कभी नहीं त्यागा। उनका श्रीनगर में भी एक घर है लेकिन कश्मीरी पंडितों के नरसंहार और पलायन के बाद वो वहाँ नहीं रह सकते हैं।”

स्वराज कौशल ने पूछा कि क्या एक कश्मीरी पंडित होने के नाते अनुपम खेर को अपनी व्यथा बताने और अपना दर्द बयान करने का अधिकार नहीं है? उन्होंने नसीरुद्दीन शाह से पूछा कि उनके पास ऐसा क्या है, जो अनुपम खेर ने नहीं प्राप्त किया हो? स्वराज कौशल ने कहा कि अगर नसीरुद्दीन शाह समझते हैं कि वो अनुपम खेर से बेहतर अभिनेता हैं तो वो ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं। स्वराज कौशल ने नसीर को कृतघ्न बताते हुए कहा कि इस देश ने उन्हें नाम, पैसा और शोहरत सब कुछ दिया लेकिन वो जबरन हताशा में जी रहे हैं।

स्वराज कौशल ने याद दिलाया कि नसीरुद्दीन शाह ने अपनी क़ौम से बाहर जाकर शादी की लेकिन किसी ने उन्हें एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने ये भी याद दिलाया कि नसीर के भाई सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल रहे। उन्होंने पूछा कि इस देश से उन्हें और क्या चाहिए? उन्होंने आश्चर्य जताया कि यही नसीरुद्दीन आज भेदभाव और निष्ठुरता की बात करते हैं। स्वराज कौशल ने लताड़ लगाते हुए कहा कि जब नसीरुद्दीन प्रलाप करते हैं तो ये उनका विवेकपूर्ण विचार बन जाता है जबकि अनुपम खेर अपने ही देश में शरणार्थी बना दिए गए लेकिन जब वो कश्मीरी पंडितों की बात करते हैं तो उन्हें मानसिक रूप से विक्षिप्त कहा जाता है।

स्वराज कौशल ने नसीरुद्दीन शाह को लेकर कहा कि जिस देश ने उन्हें सब कुछ दिया, आज वो उसी देश के प्रति कृतघ्न बन रहे हैं। उन्होंने अनुपम खेर की सधी हुई प्रतिक्रिया की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने काफ़ी सभ्य भाषा में जवाब दिया है। उन्होंने किरण खेर के चंडीगढ़ से लगातार 2 बार सांसद चुने जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नसीर एक तुच्छ और नीचतापूर्ण तरीके से प्रलाप कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नसीरुद्दीन शाह का गुस्सा उनकी कुंठा को दिखाता है।

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‘…खुद को साबित किया मुस्लिम, तब बची जान’: NRC का सर्वे करने वाली समझकर कट्टरपंथी भीड़ ने किया हमला

देश भर में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) का फर्जी विरोध हो रहा है, भ्रम फैलाया जा रहा है। सरकार द्वारा आश्वस्त किए जाने के बावजूद डर का एक ऐसा माहौल बना हुआ है, जिसका खामियाज़ा दो महिलाओं को भुगतना पड़ गया। दरअसल, राजस्थान और पश्चिम बंगाल में दो महिलाओं को CAA और NRC से संबंधित आँकड़े जुटाने वाली समझकर भीड़ ने उन पर हमला कर दिया।

राजस्थान के कोटा में, राष्ट्रीय आर्थिक जनगणना विभाग में काम करने वाली नज़ीरान बानो पर मुस्लिम भीड़ ने उस समय हमला किया, जब वह बृजधाम क्षेत्र में राष्ट्रीय अर्थशास्त्र जनगणना 2019-2020 के लिए डेटा इकट्ठा कर रही थीं। जब उन्होंने भीड़ को यकीन दिलाया कि वह उनकी तरह मुस्लिम हैं, तब कही जाकर उन्हें छोड़ा गया। पुलिस ने बाद में हमले के लिए एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के अनुसार, बोरखेड्स एसएचओ महेश सिंह ने बताया कि महिला का मोबाइल फोन छीनकर उसमें एप पर मौजूद आर्थिक जनगणना से संबंधित डेटा को डिलीट किया गया। भीड़ चाहती थी कि वह कुरान की एक आयत सुनाकर खुद को मुस्लिम साबित करें। जिसके बाद उन्होंने अपने पर्स से आयत-अल-कुर्सी का कार्ड दिखाकर उन्हें शांत किया।

बानो ने पत्रकारों को बताया कि बृजधाम क्षेत्र के निवासियों ने शुरुआत में आवश्यक डेटा दे दिया लेकिन बाद में चार-पाँच परिवारों ने उन्हें बुलाया और कहा कि वह सारे डेटा को डिलीट कर दें क्योंकि वह परिवार की किसी भी जानकारी को साझा नहीं करना चाहते हैं। बानो ने बताया:

“मैंने उन्हें बताया कि डेटा आर्थिक जनगणना के लिए है और इसे पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन वह नहीं माने और मेरे साथ बदतमीजी करनी शुरू कर दी।”

वहीं, पश्चिम बंगाल के बीरभूम में, गूगल इंडिया और टाटा ट्रस्ट के लिए काम करने वाली 20 साल की चुमकी खातून पर गाँव वालों ने हमला कर दिया।

गाँव वालों को लगा कि वह NRC के लिए डेटा इकट्ठा कर रही हैं। गौरबाजार गाँव में स्थित खातून के घर को लोगों ने आग के हवाले कर दिया और उनके परिवार को मजबूरी में स्थानीय पुलिस थाने में शरण लेनी पड़ी। इस मामले में फ़िलहाल किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि स्थानीय लोग खातून के दावे से सहमत नहीं थे और न ही उन्होंने प्रशासन की दलीलों पर ध्यान दिया।

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जहाँ जाना है जाओ: बागियों को CM नीतीश का अल्टीमेटम, प्रशांत और पवन पर होगी बड़ी कार्रवाई!

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू में अपने विरोधियों को किनारे करना शुरू कर दिया है। सीएए और दिल्ली चुनाव को लेकर नीतीश कुमार ने भाजपा का साथ दिया है और जदयू के कई नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई थी। पार्टी महासचिव पवन वर्मा ने एक लम्बा-चौड़ा पत्र लिख कर नीतीश से जवाब माँगा था। नीतीश कुमार ने पवन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वो जिस पार्टी में जाना चाहते हैं जाएँ क्योंकि इस तरह की सार्वजनिक बयानबाजी सही नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पवन वर्मा फ़ैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

प्रशांत किशोर ने भी नीतीश कुमार की आलोचना की थी और कहा था कि सीएए का समर्थन करना जदयू का सही निर्णय नहीं है। पार्टी में उन्हें भी किनारे लगाए जाने की कवायद शुरू हो गई है। तभी दिल्ली के लिए जदयू की जो स्टार प्रचारकों की सूची आई, उसमें प्रशांत किशोर का नाम कहीं भी नहीं था। उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि प्रशांत किशोर गठबंधन तोड़ने का बहाना खोज रहे हैं। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा है कि अगली बैठक में पवन वर्मा और प्रशांत किशोर के ख़िलाफ़ बड़ी कार्रवाई की सिफारिश की जा सकती है।

नीतीश ने अब बागियों को अल्टीमेटम दे दिया है। मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा कि कुछ लोगों के बयान के आधार पर हंगामा मचाना ठीक नहीं है क्योंकि जदयू ने अपना रुख साफ़ कर दिया है। जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार ने कहा कि वो किसी के भी बयान से प्रभावित होने वाले नहीं हैं। पवन वर्मा ने जदयू में वैचारिक स्पष्टता की कमी की बात करते हुए भाजपा से गठबंधन पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने सीएए, एनआरसी और एनपीआर पर ‘राष्ट्रव्यापी आक्रोश’ की बात करते हुए नीतीश को पत्र लिखा था।

सियासी हलकों में चर्चा है कि जदयू में प्रशांत किशोर की एंट्री और उनका क़द बढ़ाने को लेकर कई नेता आशंकित थे लेकिन उस वक़्त पवन वर्मा ने उनका साथ दिया था। पवन और प्रशांत के एक सुर में बोलने के पीछे दोनों की इसी जुगलबंदी को देखा जा रहा है। प्रशांत किशोर जदयू में हाशिए पर ढकेले जाने के बाद दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल के चुनावी प्रचार की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश की पार्टी पहले ही कह चुकी है कि दोनों जिस भी पार्टी में जाएँ, इससे जदयू पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा।

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष व वरिष्ठ नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने कहा कि पार्टी के निर्माण में पवन वर्मा की कोई भूमिका न होने के बावजूद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। उन्होंने अनुमान लगाया कि दोनों नेता किसी और दल के संपर्क में हैं क्योंकि आदमी ऐसी भाषा का प्रयोग तभी करता है।

पवन वर्मा ने नीतीश कुमार के बयान के बाद अपने तेवर ढीले कर लिए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी सुप्रीमो को ठेस पहुँचाने का उनका कोई इरादा नहीं था। वर्मा ने कहा कि नीतीश ने वैचारिक बहस की बात कही है, जो अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि उनके पत्र का जवाब आने का बाद वो आगे के बारे में सोचेंगे।

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‘ईसाई हमसे दूर रहें, वे हमारे धर्म को बदलने की कोशिश करते हैं’ – ऑस्ट्रेलिया में आदिवासियों का आंदोलन

पश्चिमी ऑस्ट्रेलियाई के रिमोट एरिया में रहने वाले आदिवासी बुजुर्ग अपने क्षेत्र में ईसाइयों पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं। इस समुदाय के बुजुर्गों का आरोप है कि ईसाई उनके धर्म को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही उन्हें उनकी पारंपरिक सभ्यता से भी दूर ले जा रहे हैं। जिसके कारण इन बुजुर्गों ने ईसाई लोगों के ख़िलाफ़ एक आंदोलन भी छेड़ा है।

समुदाय के वरिष्ठ सदस्य चाहते हैं कि ईसाई उनके क्षेत्र से दूर रहें, ताकि उनका समुदाय और उनके मूल्य सदैव संरक्षित रहें। इसी क्रम में इन बुजुर्गों ने एक सामाजिक भेदभाव पर नजर रखने वाली संस्था से भी बात की है। इन लोगों ने पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की संस्था से पूछा है कि क्या वे इन लोगों को ऐसा करने से मना कर रह सकते हैं और या फिर इस अज्ञात ईसाई समूह को उनके समुदाय में मिलने से रोक सकते हैं।

बता दें कि आदिवासी समूह की परेशानी सुनकर इक्वल ऑपर्ट्यूनिटी आयुक्त ने कहा है कि इस मामले में आदिवासी समूह के बुजुर्ग की जीत होगी क्योंकि धार्मिक विश्वास किसी स्थान विशेष पर लागू नहीं होता है। आदिवासी लोगों को तय करने का पूरा अधिकार है कि उनकी धरती पर कौन आएगा। वो कानून के तहत कह सकते हैं कि कृपया आप हमारे क्षेत्र में न आएँ। क्योंकि हम आपकों नहीं देखना चाहते। उनके अनुसार ,”विभिन्न प्रकार के खतरों के खिलाफ अपनी संस्कृति को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।”

गौरतलब है कि ईसाई समूहों के बारे में ये धारणा हर जगह विख्यात है कि वे रिमोट एरिया में जा जाकर लोगों को धर्म परिवर्तन कराते हैं। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में Kingdom Aviation Ministries and Chariots of Fire Ministries भी आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक किंगडम एविएशन मिनिस्ट्री के समूह सदस्य तो अपनी पहुँच बढ़ाने के लिए हर हफ्ते आदिवासी समूह के पास जाते हैं। कैम की वेबसाइट पर भी इस बात का उल्लेख है कि वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के कई इलाके रिमोट क्षेत्र हैं और जहाँ ईसा मसीह का अनुसरण नहीं किया जाता।

धर्मान्तरण का ‘ईसाई’ आतंक: यूपी के मऊ में तीन पादरी गिरफ्तार, बीमारी ठीक होने के नाम पर किया सहमत

‘इमारत में गुंबद तो मस्जिद, लंबी-सीधी तो चर्च और अगर गंदी मूर्तियाँ/गुड़ियाँ हैं तो वह एक मंदिर’

मुस्लिम से पादरी बना शमीर हुआ अरेस्ट: जिन लड़कियों को आधी रात छेड़ा, वो थीं पुलिसवाली

ईसाई पादरियों द्वारा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने और उनका यौन शोषण करने की ख़बरें आम हो चुकी हैं। स्थिति ये है कि चर्च में काम कर चुकी कई महिलाओं ने इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है। इसी क्रम में केरल के एक पादरी शमीर पर आरोप लगा है कि उसने दो महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। ये घटना केरल के कोल्लम (ईस्ट) की है। शमीर को महिअलों के साथ बदतमीजी करने और उनके साथ छेड़खानी करने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है।

शमीर को बुधवार (जनवरी 22, 2020) की सुबह गिरफ़्तार किया गया। ‘ईस्ट कोस्ट डेली’ की ख़बर के अनुसार, पादरी को गिरफ़्तार किए जाने के बाद पुलिस को विदेश से कई फोन कॉल आए, जिनमें उसे छोड़ने को कहा गया। ये दिखाता है कि भारत में ईसाई पादरियों व चर्चों के नेक्सस की कितनी बड़ी पहुँच है। दरअसल, हुआ यूँ कि पादरी शमीर तिरुवनंतपुरम में कहीं पर प्रवचन देकर वापस लौट रहा था। तभी उसने कोल्लम में संत जोसेफ स्कूल के सामने दो युवतियों को देखा। वो आधी रात का समय था।

इसके बाद पादरी शमीर ने अपनी गाड़ी रोकी और उन युवतियों से छेड़खानी करने लगा। उसने महिलाओं से पूछा कि क्या वो रात को उसके होटल के कमरे में रुक सकती हैं? पादरी को ये बात नहीं पता थी कि जिन महिलाओं को वह अपने होटल रूम में रुकने बोल रहा है और जिनके साथ छेड़खानी कर रहा है, वो पुलिस की जवान हैं। इसके बाद पुलिस थाने को वायरलेस से पादरी की करतूत की सूचना दी गई।

पुलिस ने उसके कार का नंबर पहले ही नोट कर लिया था। इसी आधार पर सुबह उसे गिरफ़्तार किया गया। बाद में उसने व उसके साथियों ने दावा किया कि पादरी रात को महिलाओं को देख कर उनकी सुरक्षा की चिंता कर रहा था और लिफ्ट देने की पेशकश कर रहा था। पादरी ने पुलिस थाने में केस को ‘सेटल करने’ और ‘कोम्प्रोमाईज़ करने’ की बात की लेकिन पुलिस ने कहा कि केस दर्ज किया जा चुका है।

पादरी पर महिलाओं के साथ छेड़खानी, यौन शिक्षण और महिलाओं को प्रताड़ित करने के आरोप के तहत मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि,गिरफ़्तारी के बाद उसे जमानत पर रिहा भी कर दिया गया। उसके अनुयायियों ने पादरी का बचाव किया है। शमीर के बारे में जानने लायक बात यह है कि वो पहले मुस्लिम था। बाद में धर्मान्तरण कर के वो ईसाई बन गया।

11 साल का बच्चा, 1000 से अधिक बार यौन शोषण… अपने ‘कनेक्शन’ वाले पादरी को मदर टेरेसा ने ऐसे बचाया

यौन उत्पीड़न करने वाले पादरी के गले में क्रॉस घुसेड़कर पीड़ित 19 वर्षीय किशोर ने मार डाला

मैंने मूर्तियों पर लात मारी, मुझे बहुत ख़ुशी मिली, अब तक सैकड़ों क्राइस्ट गाँव बनाए: पादरी का क़बूलनामा

नेहरू से पहले ही बोस बन गए थे प्रधानमंत्री, सिंगापुर की सरकारी वेबसाइट पर है पूरा ब्यौरा

क्या आपको पता है कि ‘स्वतंत्र भारत’ की पहली सरकार जवाहरलाल नेहरू ने नहीं बनाई थी। एक सरकार ऐसी भी थी, जिसके 9 देशों के साथ कूटनीतिक सम्बन्ध थे, जापान का खुला समर्थन प्राप्त था और सुभाष चंद्र बोस उसके प्रधानमंत्री थे। सिंगापुर में अक्टूबर 21, 1943 को इस सरकार की स्थापना हुई थी और इसे ‘आज़ाद हिन्द सरकार’ नाम दिया गया था। जापान ने इस सरकार की स्थापना में वित्तीय, सैन्य व कूटनीतिक मदद उपलब्ध कराई थी। ये वो समय था, जब कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे बोस को पार्टी से मोह भांग हो चुका था और वो देश-विदेश में घूम कर भारत को आज़ादी का बिगुल बजा रहे थे।

इसे एक तरह से ‘Government In Exile’ माना गया, जिसे विदेश से चलाया जा रहा था। बोस के नेतृत्व में चलने वाली सरकार के जर्मनी, जापान, फिलीपींस, कोरिया, इटली, क्रोएशिया, तत्कालीन चीन, बर्मा, थाईलैंड और मंचूरिया के साथ कूटनीतिक रिश्ते थे। जापान ने सरकार चलाने के लिए अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह उपलब्ध कराए, जिनका नामकरण शहीद और स्वराज द्वीप समूह के रूप में किया गया। इसकी अपनी एक सेना थी, जिसका नाम ‘आज़ाद हिन्द फौज’ था और अपना अलग बैंक भी था, जिसे ‘आज़ाद हिन्द बैंक’ के नाम से जाना गया।

अगर आप सिंगापुर की सरकारी वेबसाइट पर जाएँगे तो आपको आज भी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में चलने वाली उस सरकार का पूरा ब्यौरा मिल जाएगा। सिंगापुर ने अपनी सरकारी वेबसाइट पर बताया है कि वो बोस ही थे, जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए पूर्वी एशिया में रह रहे भारतीयों को भी स्वतन्त्रता संग्राम से जोड़ा। सिंगापुर के ऐतिहासिक कैथे बिल्डिंग से बोस ने इस सरकार के गठन की घोषणा की थी। वहाँ की सरकारी वेबसाइट पर इस ऐतिहासिक पल का चित्र भी मौजूद है। सिंगापुर मानता है कि उस सरकार को कई देशों की मान्यता प्राप्त थी। उस समय बोस ने कहा था:

“अब समय आ गया है जब पूर्वी एशिया में रह रहे 30 लाख भारतीय सभी उपलब्ध संसाधनों को एकत्रित कर के एक साथ इकट्ठे हों। आधे-अधूरे संसाधनों से काम नहीं चलेगा। वित्त भी चाहिए और मानव संसाधन भी हमारी ज़रूरत है। मैं 3 लाख सैनिकों को अपने साथ देखना चाहता हूँ और 3 करोड़ डॉलर भी।”

बोस ने जुलाई 9, 1943 को ये बात कही थी। सिंगापुर की वेबसाइट पर आगे बताया गया है कि इस सम्बोधन के साथ ही पूरे पूर्वी एशिया में भारतीय समुदाय के बीच आज़ादी की ज्वाला जलने लगी। थाईलैंड, बर्मा और मलेशिया के एक-एक भारतीय लोगों ने उम्मीद के अनुसार प्रतिक्रिया दी। आईएनए के फंड में रुपए और सोने दान किए गए। महिलाओं की भागीदारी का आलम ये था कि उन्होंने ख़ुशी-ख़ुशी अपने आभूषण आज़ादी के इस महायज्ञ में दानस्वरूप दे दिया।

कई धनाढ्य परिवार के लोगों ने भी बोस की रैलियों और बैठकों में हिस्सा लेने के बाद बड़ी मात्रा में वित्तीय मदद उपलब्ध कराए। आईएनए को कपड़े-लत्तों से लेकर भोजन-पानी व अन्य वस्तुएँ भी भारी मात्रा में दान में मिलीं। अगस्त 5, 1943 में इंडोनेशिया के पश्चिमी सुमात्रा प्रान्त में स्थित पडांग में बोस की विशाल रैली हुई, जिसमें उन्होंने सैनिकों से ‘चलो दिल्ली’ और ‘जय हिन्द’ से उनके भावनात्मक जुड़ाव पर सवाल पूछे। वहाँ उपस्थित लोगों ने इतनी जोर से जवाब दिया कि ब्रिटिश साम्राज्य को अपनी चूलें हिलती हुई नज़र आने लगी। सिंगापुर की सरकारी वेबसाइट पर आपको वो चित्र भी मिल जाएगा, जिसमें बोस सेना की परेड का निरीक्षण करते दिख रहे हैं।

अक्टूबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आज़ाद हिन्द सरकार’ की 75वीं वर्षगाँठ पर लाल किले की प्राचीर से झंडा फहरा कर बोस को याद किया था। इस दौरान उन्होंने ‘आज़ाद हिन्द फ़ौज’ के कुछ वयोवृद्ध सेनानियों को सम्मानित भी किया था। मोदी ने आरोप लगाया था कि बाबासाहब आंबेडकर और सरदार पटेल की तरह ही नेताजी बोस के भी योगदान को भुलाने का भरसक प्रयास किया गया लेकिन देश इन्हें कभी नहीं भूल सकता। पीएम ने याद किया था कि कैसे नेताजी ने पूर्वी भारत को आज़ादी का गेटवे बनाया और अप्रैल 1944 में कर्नल शौकम मलिक की अगुवाई में मणिपुर के मोयरांग में ‘आजाद हिंद फौज’ ने तिरंगा झंडा फहराया था।

सुभाष चंद्र बोस के निधन के साथ ही ‘आज़ाद हिन्द सरकार’ भी कमजोर हो गई और एक तरह से इसका अवसान हो गया। ‘एक्सिस पावर’ की हार के साथ ही इस सरकार के कई शक्तिशाली समर्थकों की शक्ति भी कमज़ोर पड़ गई। लेकिन हाँ, भारतीयों को एकजुट करने वाले नेताजी वो कर के चले गए, जिसके कारण अगले कई दक्षों तक अँग्रेज उनके नाम से काँपते रहे। भारत आज़ाद हुआ, नेताजी का स्वप्न पूरा हुआ लेकिन इसी भारत में कॉन्ग्रेस की सरकारों उनके योगदान को कमतर आँकने के आरोप भी लगे।

आज जब भी बोस की बात होती है तो यही चर्चा होती है कि उनकी मृत्यु कब हुई, क्या वो 1945 के बाद भी ज़िंदा थे और उनकी मृत्यु के पीछे का रहस्य कब खुलेगा? अब समय आ गया है जब इन सभी चर्चाओं से ऊपर उठ कर उनके योगदान के बारे में बात की जाए।

यहाँ इस बात का जिक्र करना आवश्यक है की नेताजी से भी पहले 1915 में राजा महेंद्र प्रताप ने काबुल में भारत के पहले ‘प्रोविजनल सरकार’ की स्थापना की थी। इसे ‘हुकूमत-ए-मोख्तार-ए-हिन्द’ नाम दिया गया था। इस हिसाब ने नेताजी की सरकार दूसरी सरकार थी, जो विदेश से चली। मौलाना बरकतुल्लाह उस सरकार के राष्ट्रपति थे, वहीं ख़ुद महेंद्र प्रताप पीएम बने। उस सरकार को अफ़ग़ान का आमीर, तुर्की और जापान का समर्थन प्राप्त था। महेंद्र प्रताप ने एएमयू से पढ़ाई की थी और वे हाथरस के राजकुमार थे।

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मोहम्मद अजहरुद्दीन फिर फँसे: 20 लाख रुपए की धोखाधड़ी का आरोप, FIR दर्ज

भारत के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन समेत 3 लोगों के ख़िलाफ़ एक ट्रैवल कंपनी से 20 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। औरंगाबाद के सिटी चौक पुलिस थाने में इनके ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई गई है। हालाँकि, पुलिस का कहना है कि मामले में जाँच जारी है। लेकिन,
मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इन आरोपों का खंडन कर इसे महज पब्लिसिटी स्टंट बताया है और कहा है कि वे इस मामले में मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे।

जानकारी के मुताबिक, ये पूरा मामला ‘दानिश टूर एंड ट्रैवल्स’ के मालिक मोहम्मद शादाब की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के मुताबिक 9 नवंबर से 12 नवंबर, 2019 के बीच अविकल ने अजहरुद्दीन और खुद के लिए कई विदेशी शहरों जैसे दुबई, पेरिस, ट्यूरिन, एम्सटर्डम, म्यूनिख, कोपेनहेगन, मैनचेस्टर और जगरेब के लिए टॉप एयरलाइंस से टिकट बुक और बाद में रद्द कराई थी। अविकल ने इस ट्रेवल एजेंसी के मालिक से मुलाकात कर कहा था कि उन्हें आवश्यक कार्य से जाना है लेकिन अभी उनके पास इतने पैसे नहीं है। ट्रेवल एजेंसी ने अजहरुद्दीन के सचिव मुजीब खान से बात करने के बाद टिकट बुक किए। लेकिन इसके बावजूद उन्हें अभी तक पैसे नहीं मिले। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले की जांँच कर रहे पुलिस अधिकारी एडी नागरे ने बताया कि प्रथम सूचना के आधार पर औरंगाबाद निवासी मुजीब खान, केरल निवासी सुधीश अविकल और पूर्व क्रिकेटर एवं हैदराबाद निवासी मोहम्मद अजहरुद्दीन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मगर, अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। बता दें कि शिकायत करने वाले शादब एयरवेज़ के पूर्व एक्जीक्यूटिव भी रह चुके है।

गौरतलब है कि रिपोर्ट में कहा गया कि अविकल ने क्रोएशियन नेशनल बैंक के अपने अकाउंट से 13500 यूरो (1060000 रुपए) की एक किस्त देने का वादा किया था। जब मोहम्मद ने इस बारे में बैंक से बात की तो पता चला कि कोई पेमेंट नहीं किया गया है।। उन्होंने इसके बाद अजहर और खान से बात करने की कोशिश की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जब अविकल से 24 नवंबर को बात की गई तो उन्होंने दानिश टूर्स एंड ट्रेवल्स के पक्ष में किए गए चेक की कॉपी भेज दी लेकिन कोई भुगतान नहीं हुआ। रिपोर्ट के अनुसार कई बार वादा किए जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया इसके बाद 22 जनवरी को FIR दर्ज की गई।

‘इन जैसी कोख से पैदा होते हैं रेपिस्ट, इन्हें 4 दिन बलात्कारियों के साथ रखो’- SC की वकील पर कंगना का गुस्सा

अपने बेबाक बयानों के लिए पहचानी जाने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत का गुस्सा इस बार निर्भया गैंगरेप और मर्डर के दोषियों सहित उनकी पैरवी करने वाली वकील इंदिरा जय सिंह पर फूटा है। निर्भया के दोषियों को लेकर उनका कहना है कि ऐसे लोगों को सबके सामने फाँसी पर लटका देना चाहिए। जबकि इंदिरा जय सिंह के बयान पर उनका कहना है कि ऐसी औरतों को 4 दिन बलात्कारियों के साथ रखना चाहिए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वकील पर निशाना साधते हुए कंगना ने कहा, “इंदिरा जयसिंह जैसी औरतों की कोख से बलात्कारी पैदा होते हैं। ऐसी औरतों को बलात्कारियों के साथ 4 दिन जेल में रखना चाहिए।”

बुधवार (जनवरी 22, 2020) की शाम कंगना मुंबई में फिल्म ‘पंगा’ की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए मौजूद थीं। जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनसे निर्भया गैंगरेप और मर्डर मामले में सवाल किया गया तो बिना किसी लीपा-पोती के उन्होंने इस मामले में हो रही देरी पर गुस्सा जाहिर किया।

कंगना ने कहा कि इतने साल से जो कुछ भी निर्भया के माता-पिता झेल रहे हैं, उनकी पूरी फैमिली की क्या हालत हो गई होगी। कहाँ जाएँगे वे इतना संघर्ष करके, ये कैसा समाज है? चुपचाप मारने का क्या फायदा यदि आप कोई उदाहरण ही सेट नहीं कर पा रहे हैं। उनको चौराहे पर मारना चाहिए, लटका देना चाहिए। कंगना रनौत इस मामले में काफी गुस्से में नजर आईं। साथ ही इंदिरा सिंह पर भी जमकर गुस्सा निकाला।

कंगना रनौत ने निर्भया के दोषी के नाबालिग होने वाली बात पर कहा, “इस घटना में एक दोषी नाबालिग था, जो रेप करता है। जो रेप करने के काबिल है उसे किस हिसाब से नाबालिग बताया जा सकता है। ऐसे लोगों को चौराहे पर फाँसी दे देनी चाहिए। ऐसे दोषियों को पता होना चाहिए कि रेप क्या होता है और इसकी सजा क्या होती है।”

उल्लेखनीय है कि इंदिरा जयसिंह ने कुछ दिन पहले ही निर्भया की माँ आशा देवी से अपील की थी कि उन्हें सोनिया गाँधी की तरह ही दोषियों को माफ कर देना चाहिए। हालाँकि, निर्भया की माँ ने इंदिरा जयसिंह के इस बयान पर नाराजगी जाहिर की थी।

निर्भया की माँ ने उस समय इंदिरा जयसिंह के बयान पर कहा था कि इस तरह का सुझाव देने की उनकी हिम्मत कैसे हुई? उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट में उनसे कई बार मिलीं, लेकिन उन्होंने एक बार भी उनका हाल-चाल नहीं पूछा। आज वो दोषियों के हक में बोल रही हैं। आशा देवी ने इंदिरा सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि ऐसे लोग बलात्कारियों को सपोर्ट कर अपनी रोजी रोटी चलाते हैं, इसलिए पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिलता है।

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5 साल से डरे हुए हैं मुस्लिम, CAA वापस लो: पूर्व LG नजीब जंग ने किया ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ का बचाव

दिल्ली के पूर्व उप-राजयपाल नजीब जंग नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध कर रहे लोगों के समर्थन में उतर आए हैं। हाल ही में उन्होंने जामिया में सीएए विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा लेते हुए पुलिस की कार्रवाई को बर्बर बताया था और इस क़ानून में बदलाव की माँग की थी। अब वो इस्लामी नारे ‘ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मद रसूलल्लाह’ के बचाव में उतर आए हैं। बता दें कि सीएए विरोधी प्रदर्शनों में ‘तेरा-मेरा रिश्ता क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे लगे थे। इसके बाद आरोप लगा था कि ये प्रदर्शन इस्लामी कट्टरपंथियों के कब्जे में जा चुका है। लेकिन, कई बुद्धिजीवी इसके बचाव में उतर आए।

दिल्ली के पूर्व एलजी ने कहा कि जब तक सीएए को वापस नहीं लिया जाता, ये आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने शाहीन बाग़ में धरने पर बैठी उन महिलाओं का भी समर्थन किया, जिनके ‘पिकनिक’ के कारण पूरे क्षेत्र में अफरातफरी का माहौल है और भारी ट्रैफिक जाम लग रहा है। पूर्व एलजी ने आरोप लगाया कि पुलिस की पिटाई से जामिया के 250 छात्र घायल हुए हैं। उन्होंने माना कि आज मुस्लिमों में नेतृत्व का अभाव है, लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात पर ख़ुशी जताई कि मुस्लिम सामूहिक नेतृत्व में सड़क पर निकल कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

दिल्ली के पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर ने कहा कि सीएए के विरोध में चल रहा प्रदर्शन असाधारण है और 21वीं सदी में ऐसा आंदोलन कहीं देखने को नहीं मिला है। उन्होंने इस आंदोलन की तुलना हॉन्गकॉन्ग में चल रहे आंदोलन से की। पूर्व एलजी ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर- तीनों के ख़िलाफ़ विरोध जताया। ‘न्यूज़ 18’ को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा:

“इस आंदोलन से सिर्फ़ मुस्लिम ही नहीं जुड़े हुए हैं और न ही कोई विपक्षी राजनीतिक दल उसे चला रहा है। जामिया के आंदोलन में कोई राजनेता नहीं दिखा। अगर विपक्ष इतना ही मजबूत होता तो ये क़ानून संसद में पास ही नहीं हो पाता। आज हमारी तुलना पाकिस्तान से हो रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। लोग कह रहे हैं कि हमारा देश पाकिस्तान बन गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की नकारात्मक छवि बन रही है।

हालाँकि, पूर्व उप-राजयपाल ने माना कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की छवि सुधारने के लिए पिछले 5 वर्षों में काफ़ी मेहनत की है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया के मन में ये भाव बन रहा है कि मोदी सरकार अल्पसंख्यकों के विरुद्ध काम कर रही है। जंग ने इस दौरान अल्लामा इक़बाल के शेर का भी जिक्र किया। जंग ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की भी तारीफ़ की। बता दें कि उनके कार्यकाल के दौरान दोनों में ख़ासा टकराव चलता था और केजरीवाल उन्हें ‘भाजपा का एजेंट’ भी बताते थे। जंग ने दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की तारीफों के भी पुल बाँधे।

पूर्व एलजी ने दावा किया कि पिछले 5 वर्षों में मुस्लिमों व ईसाईयों के मन में डर का भाव बढ़ता ही जा रहा है। तीन तलाक़ हटाना अच्छा हो या बुरा, मुस्लिमों को लगा कि इसके द्वारा उनके समाज में हस्तक्षेप किया जा रहा है।जंग ने कहा कि महाराष्ट्र में शिवसेना ने मुस्लिमों को टिकट दिया, जो अच्छी बात है। उन्होंने कहा कि सीएए के विरोध में आज मुस्लिम ‘वन्दे मातरम’ गा रहे हैं और उन्हें पता चल रहा है कि इसमें कुछ भी बुरा नहीं है, ये अच्छी बात है।

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