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’70 साल तक आपका पानी पाकिस्तान जाता रहा, ये मोदी उसे रोकेगा, काम शुरू हो चुका है’

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में चुनावी रैली के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के लोगों के सामने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बता दिया अब उनका अगला इरादा पाकिस्तान की ओर 70 सालों से जाते पानी को रोककर हरियाणा के घर-घर और किसानों के खेतों तक पहुँचाना है।

उन्होंने आज चरखी दादरी में बबीता फोगाट के समर्थन में चुनावी रैली में जनता को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हिन्दुस्तान और हरियाणा के किसानों के हक का पानी 70 साल तक पाकिस्तान तक जाता रहा। ये मोदी पानी को रोकेगा और आपके घर तक लाएगा। इस पानी पर हक हिन्दुस्तान का है। हरियाणा के किसान का हैं।”

इस दौरान उन्होंने बबीता फोगाट को जिताने के लिए लोगों से अपील भी की। उन्हें आश्वासन दिया कि अगर हरियाणा की बेटी बबीता फोगात चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँची, तो वह उन सभी लोगों की आवाज बनेगी। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने हर किसान के खाते में सीधी मदद पहुँचाने की बात कही।

प्रधानमंत्री ने जनता को जानकारी दी कि 70 वर्षो तक नदियों के माध्यम से पाकिस्तान में पानी जाता रहा। लेकिन अब वह इसपर रोक लगाएँगे। ये पानी हरियाणा के घर-घर और किसानों के खेत तक लाएँगे। जिसके लिए उन्होंने इस दिशा में काम भी शुरु कर दिया है।

अपने भाषण में नरेंद्र मोदी ने हरियाणा में विधानसभाा चुनाव के दौरान बदली फिजा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह लगभग दो दिनों से राज्य के अलग-अलग जगहों पर जा रहे हैं और उन्हें हरियाणा के रुख का मालूम चल रहा है। उनके अनुसार एक समय में 2 से 3 सीटों में सिमट जाने वाली भाजपा अब राज्य में दूसरी बार सरकार बनाने की तैयारी कर रही है।

इसके बाद पीएम मोदी ने हरियाणा की जनता को लोकसभा चुनाव में दसों सीटों पर जीत दिलाने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने करतारपुर प्रोजेक्ट के लगभग पूरे होने पर भी अपनी खुशी व्यक्ति की और कहा कि वे भाग्यशाली हैं जो उन्हें 70 साल पहले के मुद्दे को सुलझाने का मौक़ा मिला।

राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, राजनीति चलती रहेगी। चुनाव आएँगे-जाएँगे, जीत-हार होती रहेगी, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि रहनी चाहिए?

इसके अलावा उन्होंने दशहरे के अवसर पर भारत को मिले पहले राफेल का भी जिक्र किया। उन्होंने पूछा कि क्या इससे उन्हें खुशी नहीं मिली? उन्होंने कहा, हमें गर्व है और खुशी है कि हमारा देश शक्तिशाली हो रहा है, लेकिन पता नहीं कॉन्ग्रेस क्यों इतनी नकारात्मक हो रही है।

उल्लेखनीय है कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मनोहर लाल खट्टर की उपलब्धियाँ भी गिनवाईं। उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का जिक्र किया और कहा, “हरियाणा के लोगों ने देश को दिखाया हैं कि जन-भागीदारी कैसे सफल होती है। सरकार ने जब बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की शुरुआत की, तब हरियाणा ने भी देश को सामाजिक परिवर्तन दिखाने की ठान ली। हरियाणा की यह माटी हमारे लिए सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं है, इसमें हमारे किसानों का खून-पसीना मिला हुआ है।”

जब कलाम को बुद्धिजीवियों द्वारा ‘सिर्फ नाम का मुस्लिम’ कहा गया, वजह वही ‘लिबरल’ ढोंग

भारत के अन्तरिक्ष प्रोग्राम में अहम् भूमिका निभाने से लेकर भारत को परमाणु संपन्न बनाने तक का श्रेय हासिल करने वाले अबुल पाकीर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम जिन्हें देश एपीजे अब्दुल कलाम के नाम जानता है। उन्होंने बड़ी कम उम्र से ही मेहनत कर संसाधनों के अभाव में जीवन बिताया, बड़े हुए तो वैज्ञानिक बनकर देश सेवा में जुट गए। इसी का नतीजा है कि भारत की बड़ी उपलब्धियों में कलाम ने निर्णायक भूमिका निभाई। भविष्य में अब्दुल कलाम भारत के राष्ट्रपति बने जो आज तक सबसे ज्यादा लोकप्रिय राष्ट्रपति के रूप में जाने जाते हैं मगर यह भी सच है कि इतना परिश्रम कर देश की सेवा में समर्पित रहने वाले कलाम भी एक बार मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर आए थे। हिन्दुस्तान की माटी के सपूत कलाम एक ऐसी शख्सियत के तौर पर जाने जाते हैं जिनके देश सेवा में योगदान को लेकर जितना कहा जाए उतना कम होगा मगर देश सेवा के लिए सदा-समर्पित एपीजे अब्दुल कलाम कई लिबरल बुद्धिजीवियों के लिए सच्चे मुस्लिम नहीं थे।

15 अक्टूबर 1931 को जन्मे कलाम ने जब देश के ग्यारहवें राष्ट्रपति के रूप में पद संभाला तो कई इस्लामिक चिंतकों, बुद्धिजीवियों और उनके चमचों ने ऐसे विचारों के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना शुरू कर दिया जिनसे एपीजे अब्दुल कलाम की छवि को क्षति पहुँचाई जा सके। नाम के आगे ‘डॉ’ लगाने वाले रफीक ज़कारिया ने देश की धरोहर रहे अब्दुल कलाम पर लिखे अपने एक लेख में कहा था कि ‘वे एक पर्याप्त मुस्लिम नहीं हैं ‘

बता दें कि स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस के साथ रह चुके रफीक ज़कारिया दकियानूसी इस्लामिक मान्यताओं के प्रति झुकाव और उसकी वकालत करने के लिए जाने जाते थे जिनका 2005 में निधन हो गया। एक इस्लामिक बुद्धिजीवी के तौर पर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को विशेष सम्मान दिए जाने पर भी ज़कारिया इसके खिलाफ थे। एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक के रूप में कलाम द्वारा देश की सेवा को यदा-कदा सराहने के बावजूद ज़कारिया ने उन्हें कुरान में कही गई कट्टर इस्लामिक मान्यताओं से उनकी दूरी के लिए ‘सिर्फ नाम का मुस्लिम’ कहा था।

पैगम्बर मोहम्मद के जन्मदिन पर कलाम द्वारा भाषण देने से इनकार करने को लेकर ज़कारिया ने कलाम पर निशाना साधा था, मगर अपनी बात को सांप्रदायिक ठप्पा लगने से बचाने के लिए हिन्दू-मुस्लिम एकता के भाव का उपयोग करने की कोशिश करते हुए उन्होंने कहा था-

“कलाम मुस्लिमों से ज्यादा हिन्दुओं के साथ सहज होते हैं, उनके कई हिन्दू दोस्त हैं जिनके साथ उनका अधिकतर समय बीतता है उन्ही से जानने को मिलता है कि कलाम इस्लाम से ज्यादा हिंदुत्व की ओर झुकाव रखते हैं; मैं इसमें कुछ गलत नहीं मानता लेकिन खुदा के वास्ते उन्हें एक मुस्लिम राष्ट्रपति कहकर हम मुस्लिमों को सम्मान दिलाने और उनपर कृपा करने का श्रेय मत लेने दीजिए। कलाम कभी कुरान नहीं पढ़ते मगर हर उनकी सुबह गीता के पाठ से शुरू होती है, उन्हें कृष्ण के प्रति समर्पित देखा जा सकता है, वे अक्सर मंत्रोच्चार भी करते हैं। नमाज़ उन्हें भाए ऐसा है नहीं! न ही वो रमजान में उपवास रखते हैं। वह तो ता- उम्र ब्रह्मचारी रहने वाले पक्के शाकाहारी हैं, मुझे लगता है उनकी जड़ें ही हिंदुत्व की हैं क्योंकि उन्हें सबसे ज्यादा सभी हिन्दू ग्रंथों में बड़ी दिलचस्पी है लिहाज़ा सम्प्रदाय की दृष्टि से उनके उत्थान का श्रेय हमें नहीं बल्कि हिन्दुओं को दिया जाना चाहिए। कलाम खुद भी कभी खुदको मुस्लिम राष्ट्रपति कहे जाने के पक्ष में नहीं रहे, कलाम के मुताबिक उनको ख़ुशी होगी अगर उनका नाम जाकिर हुसैन या फखरुद्दीन अली अहमद के साथ न जोड़ा जाए।”

ज़कारिया के लाख बार यह जता देने के बावजूद कि ‘वे कलाम को कुरान मानने वाले किसी भी राष्ट्रपति से कम नहीं मानते’, कलाम से उनका द्वेष और घृणा जगज़ाहिर है। इसमें कोई दो राय नहीं। 2002 में 21 जून को मशहूर लेखिका वर्षा भोगले ने अपने एक लेख में लिखा था कि अब्दुल कलाम मोईनुद्दीन चिश्ती के अनन्य भक्त थे और अक्सर उनकी दरगाह जाया करते थे। अपने एक विश्लेषण में उन्होंने लिखा –

“मुस्लिम कहलाने के लिए कलाम का दरगाह जाने की अनिवार्यता से जोड़ना और उसे जताना एक सनक मात्र है, जबकि वे न सिर्फ दरगाह पर जाते हैं बल्कि वहाँ चादर भी चढ़ातें हैं मगर हमारे देश में ‘सेक्युलर’ हवा कुछ ऐसी है कि सार्वजानिक जीवन वाले एक व्यक्ति से दोनों धर्मों का सम्मान करने के बावजूद सवाल किया जाता है मगर इसी स्थिति में कोई मुस्लिम है तो उसे खुलकर अपने मज़हब का प्रदर्शन करना चाहिए चाहे दूसरे धर्म का सम्मान वह करे या न करे मगर यही स्थिति जब किसी हिन्दू के साथ आती है, तो हिन्दू रीति-रिवाजों और सभ्यताओं का सम्मान करने वालों को ‘सेक्युलर’ होने के लिए इफ्तारी से लेकर कई तरह की वाहियात काम तक करना पड़ता है।”

गौरतलब है कि ज़कारिया का लिखा वह लेख पीटीआई की उस रिपोर्ट के जवाब में था जिसमें लिखा गया था कि कलाम चिश्ती के अनुयायी हैं और अक्सर उनकी दरगाह जाते हैं। डॉ ज़कारिया से लेकर वर्षा भोगले तक के लेखों में यह स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि कोई भी मुस्लिम हिन्दू मंदिरों और हिन्दुओं से भाईचारे का परित्याग करके ही कट्टर मुस्लिम कहलाता है जबकि कलाम जैसे व्यक्ति का यह कहकर मजाक तक उड़ाया जाता है कि ‘वे मुस्लिम थे ही नहीं’ हालाँकि, इसमें कोई दो राय नहीं कि धर्म पूछे जाने को लेकर कलाम बेहद प्रतिकूल थे, एक बार एक लड़की ने डॉ कलाम से पूछा था कि वे वैज्ञानिक हैं? या एक टेक्नोलॉजिस्ट या एक फिर मुस्लिम? तब कलाम ने जवाब दिया था कि पहले हमें एक अच्छा इन्सान होना चाहिए उसके बाद ही यह सारे तत्व आपके अन्दर आते हैं।

2002 में सागरिका घोष ने किसी भद्द्दे मज़ाक की तरह डॉ कलाम को बम-डैडी तक कह दिया था, अपने नफरत भरे लेख में घोष ने कलाम को सबक सिखाने की बात तक लिखी थी और देशसेवा में काम करने वाले वैज्ञानिकों को मिलने वाले VIP ट्रीटमेंट पर आपत्ति जताते हुए ‘हड़काने की ज़रूरत’ जैसी भाषा का प्रयोग भी किया था। अपने इस पूर्वग्रह और द्वेष भरे लेखन में घोष ने भारतीयों को विज्ञान के प्रति उनके सम्मोहन पर भी अपनी आपत्ति ज़ाहिर की थी। सागरिका ने विज्ञान से करीबी को लेकर यह तक कहा था कि इसका सीधा जुड़ाव जातिवाद, हिन्दू कट्टरवाद और लिंगभेद से है।

डॉ कलाम जैसे प्रसिद्द वैज्ञानिक को लेकर जब सेक्युलरों में चर्चा छिड़ जाती है तो यह स्वाभाविक होता है कि इस बहाने हिन्दू सभ्यता पर निशाना साधने की कोशिश की जाएगी क्योंकि कलाम कट्टर इस्लामी प्रवृत्ति के नहीं थे इसीलिए मुस्लिम कट्टरपंथी उन्हें हिन्दुओं के करीब मानते हुए अपनाने से झिझकते रहे हैं और इसीलिए इन कठमुल्लाओं द्वारा हिन्दुओं को निशाना बनाना स्वाभाविक हो जाता है।

इस्लामिक कट्टरता नफरत और डर फ़ैलाने के लिए मशहूर द वायर की आरफा खानम शेरवानी ने अपने ही कहे एक कथन को महत्वहीन कर डाला जब उन्होंने हाल ही में सोशल मीडिया पर लिखा था कि क्यों एपीजे अब्दुल कलाम की इतनी प्रशंसा की जाती है मगर जब हामिद अंसारी की बात आती है तो उन्हें ‘दानव’ जैसा पेश किया जाता है। बता दें कि कुछ ही समय पहले शेरवानी ने खुद ही यह लिखा था कि कलाम हिन्दू दर्शन से जीवन जीने को महत्ता देते थे इसीलिए उनका सम्मान किया जाता है जबकि हामिद अंसारी ऐसा नहीं करते इसीलिए उन्हें ऐसा कोई सम्मान नहीं मिलता, मगर सोशल मीडिया पर सवालिया अंदाज़ में लिखने के बाद तो जैसे शेरवानी ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली क्योंकि इसके बाद उनका खुद का दिया बयान ही महत्वहीन हो गया।

जब कलाम की एक प्रतिमा का अनावरण हुआ जिसमे उनके हाथ में वीणा, गीता, कुरान और बाइबिल थी, तब कई इस्लामिक संगठन इसका विरोध करने पर उतारू हो गए थे, उनका कहना था कि कलाम कोई मुस्लिम नहीं थे क्योंकि वे मूर्ती पूजा में विश्वास रखते थे और गुरुओं का सम्मान करते थे। प्रत्यक्षरूप से यह सर्वविदित है कि पूरा जीवन विरोध झेलने के बावजूद दिवंगत कलाम को अब भी इस्लामिक कट्टरपंथियों की दकियानूसी सोच का खौफनाक चेहरा देखना पड़ता है।

परंपरागत इस्लामिक ढाँचे से इतर चलने वाला कोई मुस्लिम हमेशा मुस्लिम कट्टरपंथियों के निशाने पर रहता है जिन्होंने बिना किसी तथ्य और तर्क के कलाम तक को अपने आरोपों की कीचड़ से नहीं बख़्शा। ऐसे धूर्त और रूढ़िवादी मौलाना और अयातुल्लाहों को आरिफ मोहम्मद खान मुंहतोड़ जवाब देने में माहिर हैं, जिन्होंने तीन तलाक को गैर-कानूनी और आपराधिक बताया था साथ ही डरा हुआ मुस्लिम जैसी बात को सिरे से खारिज तक कर दिया।

मौलानाओं के अनुसार अगर कोई इस्लामिक कट्टरपंथियों के मनमुताबिक नहीं बोलता, हिन्दुओं के खिलाफ नफरत भरी ज़हर नहीं उगलता तो उनके अनुसार उसे मुस्लिम कहलाने का अधिकार ही नहीं है। ‘एक साधारण मुस्लिम’ होने की अवधारणा की माँग ही यही है कि वह लोग जो इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों का पालन नहीं करते, या उसको लेकर कट्टर न हों, वह मुस्लिम हीं हैं और डॉ कलाम ऐसे ही एक व्यक्ति थे।

डी-कंपनी के बाद अब PMC घोटाले से जुड़ रहे प्रफुल्ल पटेल के तार: मीडिया रिपोर्ट्स

अंग्रेजी चैनल टाइम्स नाउ ने दावा किया है कि पूर्व केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेता प्रफुल्ल पटेल के संबंध कथित PMC घोटाले के अभियुक्त हैं। टाइम्स नाउ का दावा है कि उसने ऐसे दस्तावेज़ देखे हैं जिनसे पता चलता है कि घोटाले के आरोपित वधावन परिवार के हवाई जहाज़ पर प्रफुल्ल पटेल एक चार्टर्ड फ्लाइट में सवार थे। और करेले पर नीम चढ़ा यह कि प्रफुल्ल पटेल पहले ही डी-कंपनी और इक़बाल मिर्ची से जुड़े लोगों के साथ आर्थिक संबंध के लिए विरोधियों के निशाने पर हैं। ऐसे में उनकी मुश्किलें बढ़ना तय है।

एक नहीं, कई बार- जब ‘मंत्री जी’ थे पटेल

टाइम्स नाउ के चैनल प्रसारण पर दिखाए गए दस्तावज़ों के अनुसार प्रफुल्ल पटेल और उनकी पत्नी वर्षा ने एक नहीं, कई-कई बार प्रिविलेज एयरवेज़ प्राइवेट लिमिटेड के चार्टर्ड विमान पर सफ़र किया था। यह सभी उड़ानें मार्च से जून 2012 के बीच की थीं, जब पटेल डॉ. मनमोहन सिंह की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रभारी मंत्री थे। टाइम्स नाउ का दावा है कि यात्री सूची (passenger manifests) में पटेल का ज़िक़्र ‘Honourable Minister’ (माननीय मंत्री महोदय) के तौर पर है।

उनके साथ कई बार सफ़र करने वाले होते थे राकेश वधावन, जो PMC घोटाले के आरोपित हैं। पंजाब एंड महाराष्ट्र बैंक घोटाले के मुख्य आरोपित और एचडीआईएल के मालिक राकेश वधावन और उनके बेटे सारंग वधावन के पास से ₹3500 करोड़ की 2100 एकड़ जमीन ED ज़ब्त करने की तैयारी में है।

पहले ही डी-कंपनी के झंझावात में

पटेल पहले ही मुंबई ब्लास्ट के आरोपित और दाऊद के क़रीबी इक़बाल मिर्ची के साथ जमीन सौदे को लेकर विरोधियों के निशाने पर हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने टाइम्स नाउ को हाल ही में दिए इंटरव्यू में इसे ‘देशद्रोह से कम नहीं’ करार दिया था। उन्होंने पूछा कि आखिर प्रफुल्ल पटेल की ऐसी क्या मज़बूरी थी कि उन्हें हाजरा बीबी के साथ डील करना पड़ा?

अमित शाह ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा था, “इस मामले में जाँच चल रही है। आप और हम यहाँ बैठकर निर्णय नहीं कर सकते हैं। ईडी मामले की बारीकियाँ जुटा रही है। एक बार जाँच पूरी हो जाए और विश्लेषण हो जाए तभी हम टिप्पणी कर सकते हैं कि इसमें कोई आतंक से सम्बंधित ऐंगल है या नहीं। लेकिन, पहली नजर में इकबाल मिर्ची की पत्नी के साथ करार करना ‘देशद्रोह’ जैसा ही लगता है।”

चिदंबरम को फिर लगा झटका: ED को मिली पूछताछ की इजाजत, ज़रूरत पड़ने पर कर सकती है गिरफ्तार

दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम को बड़ा झटका दिया है। राउज एवेन्यू अदालत ने आईएनएक्स मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को गिरफ्तार करने और पूछताछ करने की अनुमति दे दी है। 

अदालत ने ईडी को पी चिदंबरम को हिरासत में लेकर 30 मिनट तक पूछताछ करने की अनुमति दी है। ईडी बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को दिल्ली की तिहाड़ जेल में उनसे पूछताछ करेगी। यह पूछताछ अधितकम 30 मिनट तक चल सकती है। इसके अलावा कोर्ट ने ईडी को जरूरत लगने पर चिदंबरम को गिरफ्तार करने की भी इजाजत दे दी है।

बता दें कि आईएनएक्स मीडिया मामले में कार्रवाई की सामना कर रहे कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के लिए ईडी की एप्लीकेशन पर दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने सोमवार (अक्टूबर 14, 2019) को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट के समक्ष चिदंबरम की गिरफ्तारी की अनुमति माँगते हुए कहा था कि आईएनएक्स मामले में मनी लॉन्ड्रिंग, सीबीआई के केस से अलग है और इसमें उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ करने की जरूरत है। 

आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में जेल में बंद पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने इससे पहले जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी। चिदंबरम ने कहा कि सीबीआई उन्हें नीचा दिखाने (अपमानित करने) के लिए जेल में रखना चाहती है। चिदंबरम की तरफ से सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी।

बुद्ध-सारिपुत्र संवाद: राहुल गाँधी की विचित्र स्पीच, मायावती की बौद्ध बनने की धमकी और सत्य की खोज

बुद्ध अपने एक शिष्य, सारिपुत्र, के साथ बरिस्ता में बैठे थे। जब तक बुद्ध ऑर्डर देने गए, सारिपुत्र ने उनका आइपैड निकाला और ट्विटर खँगालने लगा। वहाँ राहुल गाँधी और मायावती ट्रेंड कर रहा था। चुनाव का समय था तो ट्रेंड करना नैसर्गिक था। सारिपुत्र ने गूगल किया तो पाया कि श्रीयुत राहुल गाँधी ने धारावी के लोगों को बताया है कि वहाँ 50,000 उद्योग-धंधे बंद हो गए, और यह भी कि धारावी के लोगों के साथ अन्याय हुआ है। साथ ही, मायावती ने भी एक अजीब ऐलान कर दिया था, जिससे सारिपुत्र उद्विग्न महसूस करने लगे। तब तक गौतम वापस आ रहे थे, तो तुरंत ही आईपैड को झोले में डाल दिया।

“हे तथागत! इस राहुल गाँधी नामक जीव पर आपके क्या विचार हैं? आखिर यह व्यक्ति करोड़ों लोगों की उम्मीद कैसे बाँध देता है? एक हिस्सा इसे विदूषक कहता है, दूसरा इसे दो डिम्पलों वाला क्यूट प्राणी जिसमें भारत भूमि के नेतृत्व की प्राकृतिक क्षमता है क्योंकि इसके माता-पिता, दादी, परनाना आदि ने राष्ट्र के लिए बलिदान दिया दिया था। मीडिया भी उसी तरह से दो हिस्सों में बँटा हुआ है। क्या सही है, क्या गलत, कैसे विवेचना की जाए?” सारिपुत्र ने पूछा।

“मत-मतान्तर-वैभिन्य के कारण कहा-सुनी स्वीकार मत करो, गूगल को स्वीकार मत करो, अधीरता में यह ना मान लो कि यह ऐसा ही है, किसी कथन को इसीलिए सत्य ना मानो कि वह किसी वेवसाइट पर है, किसी ने कहा है, ना ही इसलिए की यह गुरू का वाक्य है,” बुद्ध ने समझाते हुए कहा। तब तक वेटर कॉफ़ी लेकर आ गया था, “कृपया ये व्हाइट शुगर ले जाइए, मैं सिर्फ ब्राउन लेना पसंद करता हूँ।” बुद्ध ने आग्रह किया तो वेटर ब्राउन शुगर लाने चला गया।

वेटर के जाते ही सारिपुत्र ने हैरत से कहा, “तो क्या वो भी ना मानूँ जो आप कहते हैं? आप तो स्वयं इतना घूम चुके हैं, हज़ारों लोग आपको मानते हैं। आपको मानने में क्या बुराई है?”

“देखो सारिपुत्र, मैं जो कहता हूँ वो मेरा सत्य है। लेकिन वो तुम्हारे लिए बिना अन्वेषण के ना तो परम सत्य है ना ही झूठ। सच और झूठ व्यक्ति-विशेष के दृष्टिकोण भर हैं। सबको पता है कि राहुल… राहुल तो वैसे मेरे पुत्र का भी नाम है लेकिन अब क्या कर सकते हैं, भूत में जा कर नाम परिवर्तन तो संभव नहीं… हाँ, मैं कह रहा था कि मीडिया में क्या चल रहा है, उसे सत्य मत मानो। उस जीव को सुनो कि वो कहना क्या चाहता है, उससे अर्थ का दोहन करो, उसके शब्दों को निचोड़ कर देखो कि सारतत्व क्या है?”

“परंतु भगवन!” सारिपुत्र ने काउंटर क्वेश्चन किया, “राहुल गाँधी के भाषणों से अर्थ निकालना तो थार के शुष्क बालू से जल की चाह रखने जैसा है! जिस व्यक्ति को स्वयं ही अपने शब्दों का सार पता न हो, जो पिछले साल से ही एक ही स्पीच लिए घूम रहा है, जिसमें वो जगह का नाम बदल कर, हर जगह के लोगों के साथ अन्याय होता बता देता है, जो हर जगह मेड इन दिस, मेड इन दैट की बातें करता है, ऐसी तथ्यहीन बातें करता है जिसे हास्यास्पद कहना भी उस मनोभाव का अपमान है, उस जीव को सुन कर भला कैसा सार ग्रहण करूँ स्वामी?”

“देअर यू आर!” तथागत ने सारिपुत्र की तरफ देखते हुए कहा, “तुमने यह कहाँ से जाना कि राहुल निरा मूर्ख, मंदबुद्धि या मूढ़मति है?”

“लोग कहते हैं…”

“यहीं फिर से तुम्हारा कथन त्रुटिपूर्ण है। लोग जो कहते हैं वो लोग कहते हैं, उसे सत्य मत मानो। उसे अपनी विवेचना का आधार मत बनाओ। तथागत स्वयं, यानी मैं, ये दावा अगर करें भी कि मुझे सब पता है तो वो बकवास माना जाना चाहिए। ये दावा तुमसे कोई भी करे तो ये मान लो कि वो सफ़ेद झूठ बोल रहा है। ये संभव नहीं कि तथागत सब बातें जान लें। आप खुद को जान लें, और खुद को संतुष्ट कर सकें वही समाज के लिए बहुत है।” तथागत ने कॉफ़ी का सिप लेते हुए सारिपुत्र को पीने का इशारा किया, “यॉर कॉफी इज़ गेटिंग कोल्ड ब्रो!”

भावविभोर होकर सारिपुत्र ने एक घूँट लिया और कहा, “हे प्रभु! मेरा मत है कि आपसे बुद्धिमान महात्मा न हुआ है, न है, न होगा।”

बुद्ध ने उत्तर में कहा, “निस्सन्देह सारिपुत्र, तो तुमने इसके पूर्व के समस्त बुद्धों को जान लिया होगा।”

“नहीं, स्वामी,” सारिपुत्र ने कहा, तो बुद्ध ने फिर पूछा, “तब क्या भविष्य के बुद्धों को जानते हो?”

“नहीं, महाराज,” सारिपुत्र ने फिर अपनी अनभिज्ञता दिखाई तो बुद्ध ने पुनः पूछा, “तब कम से कम मुझे जानते हो और मेरे मन को सम्पूर्णतया परख चुके हो?”

सारिपुत्र ने पुनः कहा, “वह भी नहीं स्वामी!”

फिर बुद्ध ने उन्हें देखते हुए पूछा, “तब सारिपुत्र, तुम्हारा कथन इतना पुष्पित और साहसपूर्ण क्यों है?”

अब सारिपुत्र के लिए गर्दन झुका कर कॉफी पीने के अलावा कोई रास्ता न था। बुद्ध बोलने लगे, “तुमने स्वयं ही अभी कहा कि राहुल गाँधी हर जगह एक ही बात बोलते हैं, जिस भी जगह रैली करते हैं उस जगह को बौद्धिक ज्ञान का केन्द्र कहते हैं, तथ्यहीन बातें करते हैं, स्वयं के ही सरकार द्वारा लाई गई बर्बादी को ऐसे बताते हैं मानो सत्तर सालों से कोई और सत्ता में था। इसका अर्थ यह हुआ कि तुमने स्वयं उस भाषण को सुना और अपनी सामान्य बुद्धि पर तौला। इसीलिए, दूसरे क्या कहते हैं, नैरेटिव क्या चल रहा है, काउंटर नैरेटिव क्या है, उसे त्याज्य मानो। स्वयं की बुद्धि की कसौटी पर जो सत्य जान पड़े, उसे ही सत्य मानो। लेकिन हाँ, मस्तिष्क को इतना खुला अवश्य रखो कि अगर कोई अलग तरह की बात कर रहा है, तो उसे सुन सको, और आवश्यकतानुसार स्वयं में सुधार ला सको। जैसे राहुल को ही देखो, रैली की जगह के हिसाब से स्पीच में उस जगह का नाम सुधार लेता है।”

“आपके वचनों को सुन कर मैं धन्य हुआ तात!” सारिपुत्र ने कृतज्ञ नयनों से गौतम को देखा और उनके तेजोमय आनन को देख कर स्वतः दूसरा प्रश्न पूछ बैठा, “तात! सुश्री मायावती का नाम तो आपने सुना ही होगा? उन्होंने आपकी पूज्य माता महारानी महामाया के नाम का सेतु भी बनवाया है और स्वयं उनका नाम भी माया ही है। वो भी आज कल ट्विटर आदि पर ट्रेंड कर रही हैं।

“चुनाव आने वाले हैं सारिपुत्र, अभी तो और भी विचित्र बातें होंगी। देवी माया ने वो सेतु हमारी माता की स्मृति में बनाया या स्वयं की, ये तो काल तय करेगा, परंतु यह संयोग तो देखो कि आज हमारी बातचीत के विषय में एक का नाम मेरे पुत्र का है, दूसरे का मेरी माता का… व्हाट अ टाइम टू बी अलाइव सारिपुत्र!”

“बात मात्र नामों तक ही नहीं है महात्मन! आज एक खबर है कि सुश्री मायावती सनातन धर्म को छोड़ कर बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की तरह बौद्ध मत को स्वीकार कर लेंगी। साथ ही, उन्होंने यह भी बताया है कि उनके साथ लाखों लोग ऐसा करेंगे। इस पर आपकी क्या राय है?” सारिपुत्र ने पूछा।

“ऐसी दुर्घटनाओं पर क्या मत रखे जाएँ! अगर कोई अंबेडकर की तरह नीला रंग अपना कर वैसा बनने की सोचे तो वो मूर्खता ही है। गाँधी, बोस, भगत सिंह जैसा दिखने और बनने में अंतर है। दिखने के लिए तो बहुत बहुरूपिए हैं जो मनचाहा वेश धारण कर लेते हैं। कइयों का पूरा इतिहास, निजी और खानदानी, धूर्त संवादों, भ्रष्ट आचरण, आम नागरिकों के हिस्से की निधि लूटने, सत्ता के दुरुपयोग, निजी हितों को साधने में गया है लेकिन नाम में गाँधी लगाए फिरते हैं। ऐसे गाँधी अपने परिवार की लूट को पीछे रख कर, हमेशा राफेल-राफेल चिल्लाते हैं। कई बार, अपनी ही मूर्खता में, दूसरों पर दोष मढ़ते हुए स्वयं ही सत्य बता देते हैं।”

“ऐसे लोगों के लिए हिन्दी में एक शब्द है महात्मन!”
“उस शब्द का प्रयोग शास्त्रों में वर्जित माना गया है सारिपुत्र!”

“खैर, उस जीव को रहने दो,” बुद्ध बोलते रहे, “अब इस मायावती नामक जीव को ही देखो। जब तक एक जाति को दूसरे से लड़ा कर, भटका कर, झूठे वादों पर विश्वास दिला कर इनका काम निकलता रहा, तब तक ठीक था। आंदोलनों के नाम पर हिंसा और आगजनी से इनका इतिहास पटा पड़ा है। नाम मेरा लेते हैं और दूसरी ही पंक्ति में कहते हैं कि गरीब प्रतिकार कर रहा है तो फलाँ जाति को पीड़ा हो रही है। मैंने कब बताया कि प्रतिकार का दायरा इतना व्यापक कर दो कि उसमें दूसरों की हत्या भी एक आवश्यक तत्व मान लिया जाए? आज ये बौद्ध बनने जा रही हैं, बेशक बन जाएँ, भले ही मैंने स्वयं किसी को ऐसा करने को नहीं कहा। लेकिन ये बौद्ध दिखेंगी, बन नहीं पाएँगी। उसके लिए काष्ठ पात्र ले कर भिक्षाटन करना होता है। बौद्ध व्यक्ति भिक्षु होता है, उसे हजारों जोड़ी चप्पलें, लाखों के कपड़े, अपनी ही मूर्ति वाले करोड़ों के बगीचे और अरबों की संपत्ति नहीं चाहिए। बौद्ध बनना है तो सब त्याग दो, बौद्ध दिखना है तो वेल! दैट्स अनदर थिंग।”

“तो क्या आपको इस बात से तनिक भी प्रसन्नता नहीं है कि आपके अनुयायियों में लाखों की वृद्धि हो रही है? लोग तो संख्या ही गिनते हैं आज कल। क्या आपका जीवन, आपकी बातें सब मानने लायक नहीं? क्या महापुरुषों का अनुकरण ज़रूरी नहीं है क्योंकि ‘महाजनो येन गतः स पंथाः’ कहा गया है?” सारिपुत्र ने शंका प्रकट की।

“देखो सारिपुत्र, प्रथमतया मैं ‘लोग’ नहीं हूँ, न ही ‘लोग’ क्या करते हैं उनसे मैं प्रभावित होता हूँ। लोग तो एक पार्टी में चोर और दूसरी में साधु भी बन जाते हैं। ऐसे लोगों का क्या किया जाए! महापुरुष अनुकरणीय होते हैं लेकिन अंधानुकरण मत करो। कोई महापुरूष क्यों है, उसने ऐसा क्या किया ये सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है इससे पहले कि तुम बाल मुँडवा कर उसके पीछे हो लो। ये जो धमकी दे कर दल या मत बदलने वाले लोग होते हैं ना, वो ‘महाजनो येन गतः स पंथाः’ वाले नहीं है। उनको न तो अपने महापुरूष का सत्य मालूम है, ना स्वयं अपना। वो अंधे हैं। उनके दोनों नेत्रों के साथ साथ, उनके ज्ञान चक्षु भी बंद पड़े हैं,” बुद्ध लगातार बोल रहे थे। उनकी कॉफ़ी ठंढी हो रही थी।

“जो सुप्तावस्था में हैं, जो व्हाट्सएप्प पर मैसेज पढ़ कर भीड़ की शक्ल में सड़कों पर मार-काट मचाने निकल जाते हैं, वो अपनी नींद में दूसरों के द्वारा संचालित हो रहे होते हैं। ये अनुकरण नहीं है। भीड़ को कहीं आना है, इसलिए वो वहाँ पहुँचा दी जाती है। उसे कह दो कि धारावी के साथ अन्याय हुआ है, वो मान लेती है। उसे कह दो यहाँ पचास हजार फैक्ट्रियाँ बंद हो गईं वो मान लेंगे। जब तंद्रा टूटेगी तो याद करेंगे कि आखिर वो पचास हजार फ़ैक्ट्रियाँ धारावी के किस इलाके में थीं, और कब, तो उन्हें याद नहीं आएगा।”

“मायावती बौद्ध बन जाएँ, जैन बन जाएँ, हज पर निकल लें या मानसरोवर जा कर धरने पर बैठ जाएँ, उससे उन्हें कोई फायदा नहीं होता दिखता, चाहे वैयक्तिक हो या राजनैतिक। क्योंकि जिन मुद्दों पर सुश्री मायावती जी ने इन गरीब, अशक्त, शोषित लोगों की भीड़ को सत्ता पाने के बावजूद गरीब, अशक्त और शोषित बनाए रखना ही सही समझा, उनकी गरीबी को कोई और दूर कर रहा है, उन्हें सुविधाजनक चिकित्सा कोई और दिला रहा है, उन्हें शोषण के कुचक्र से बाहर निकालने के लिए उनके सशक्तिकरण की कोशिश मायावती तो नहीं ही कर रही।”

“इसलिए, हे सारिपुत्र,” बुद्ध बोलते रहे, “ये जो मायाजाल रचा जा रहा है, वो ठगने के लिए है। माया पर तो कबीर ने भी लिखा है कि ‘माया महाठगिनी हम जानी, तिरगुन फाँस लिए कर डोले, बोले मधुरी बानी’। ये सब बस मधुर बातें करते हुए, गरीबों को उनकी गरीबी के कारण मूर्ख समझने की पुरानी कहानी है।”

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बुद्ध ने अपनी बात और कॉफी खत्म की, सारिपुत्र को भीम एप्प से भुगतान करने को कहा और झोला उठा कर यात्रा पर निकल गए।

हत्या या आत्महत्या?: #NoBra कैंपेन शुरू करने वाली 25 वर्षीय एक्ट्रेस की घर में मिली लाश

सोशल मीडिया पर #NoBra मुहिम चलाने वालीं दक्षिण कोरिया की इंटरनेशनल पॉप स्टार सुली की मौत हो गई। पॉप स्टार और एक्ट्रेस सुली का शव सोमवार (अक्टूबर 14, 2019) को साउथ कोरिया के सोल स्थित उनके घर में पाया गया। उनकी उम्र महज 25 वर्ष थी और उन्होंने एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। सुली के मैनेजर ने बताया कि वह काफी देर से उनका फोन ट्राई कर रहे थे, लेकिन जवाब न मिलने पर जब वह घर पहुँचे तो उन्हें मृत पाया। जिसके बाद उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी दी।

बताया जा रहा है कि सुली डिप्रेशन की भी शिकार थीं। उनकी लाश के पास से एक नोट भी मिला है। हालाँकि, फिलहाल इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि सुसाइड नोट में क्या लिखा हुआ है। पुलिस मौत के कारणों की जाँच कर रही है।

बता दें दक्षिण कोरिया की पॉप स्टार सुली ने नो ब्रा कैंपेन शुरू कर पूरी दुनिया में सुर्खियाँ बटोरी थी। जिसके बाद महिलाएँ बिना ब्रा के कपड़े पहनकर अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर करने लगी। सुली के इस कैंपेन की जहाँ कुछ लोगों ने काफी तारीफ की तो बहुत से लोगों ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करना भी शुरू कर दिया था। सुली के खिलाफ सोशल मीडिया पर काफी भद्दे कॉमेंट किए जा रहे थे, जिसकी वजह से सुली कुछ समय से डिप्रेशन का शिकार हो गई थी।

घर में लाश मिलने को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से भी जोड़कर देखा जा रहा है। वैसे फिलहाल पुलिस कुछ भी पुख्ता तौर पर कहने से बच रही है। सुली की हत्या हुई है या उन्होंने आत्महत्या की है, इसकी छानबीन की जा रही है। हालॉंकि सीसीटीवी कैमरे में उनके घर में किसी को घुसते या बाहर आते नहीं देखा गया है।

गौरतलब है कि सुली सिंगिग के साथ ही गाने भी लिखती थीं। साल 2009 में उन्होंने साउथ कोरियन गर्ल बैंड f(x) से सिंगिंग डेब्यू किया था। कुछ ही समय में वह दक्षिण कोरिया की सबसे पॉपुलर सिंगर हो गईं और साथ ही उनका बैंड भी दुनिया भर में फेमस हो गया। साल 2015 में सुली बैंड से अलग हो गईं और उन्होंने सोलो सिंगर और एक्ट्रेस के रूप में करियर शुरू किया था।

अब मैं रो दूँगा: ममता की भरी सभा में अपमानित होने के बाद काँपने लगी महामहिम की आवाज़

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने आरोप लगाया है कि कोलकता में दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान उन्हें अपमानित किया गया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की उपस्थिति में उन्हें सरेआम अपमानित किया गया, जिससे वह व्यथित हैं और इसका उन्हें बहुत दुःख हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्हें पूजा महोत्सव के दौरान न तो मंच पर जगह दी गई और न ही टीवी पर एक सेकंड के लिए भी दिखाया गया। कार्यक्रम में पूरी कोशिश की गई कि उन्हें कैमरा फुटेज न मिले। जबकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अन्य नेताओं व अधिकारियों के साथ मंचासीन थीं।

यह कार्यक्रम दुर्गा पूजा महोत्सव के दौरान पश्चिम बंगाल के 10 सबसे भव्य पंडालों को प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया गया था। शुक्रवार (अक्टूबर 11, 2019) को आयोजित इस कार्यक्रम में मल्टी-फुटेज कैमरा से रिकॉर्डिंग की गई थी लेकिन राज्यपाल जगदीप धनखड़ को इस पूरे वीडियो में एक बार भी नहीं दिखाया गया। मल्टी-कैमरा को एक एजेंसी द्वारा ऑपरेट किया जा रहा है, जिसे तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार ने चुना था।

हालाँकि, राज्यपाल धनखड़ ने किसी का प्रत्यक्ष रूप से नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा साफ़ था कि पश्चिम बंगाल में सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में चल रही तृणमूल कॉन्ग्रेस की सरकार ने उनके साथ औपचारिक शिष्टता तक भी नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ उनका ही अपमान नहीं है बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल की जनता का अपमान है। उन्होंने कहा कि जनता कभी भी इस अपमान को पचा नहीं पाएगी। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि वो जनता के सेवक हैं और उन्हें उनका संवैधानिक कर्तव्य पूरा करने से कोई भी नहीं रोक सकता।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने काँपती हुई आवाज़ में कहा कि वो आहत दिल से अपने इस अपमान का जिक्र कर रहे हैं और उन्हें अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर रोना भी आ रहा है। उन्होंने बताया कि इस अपमान की पीड़ा से बाहर निकलने के लिए उन्हें 3 दिन लगे। उन्होंने बताया कि वो अपमान के बावजूद वहाँ पर कार्यक्रम में बने रहे क्योंकि वो पश्चिम बंगाल की जनता के टैलेंट को देखना चाहते थे। उन्होंने कहा कि अगर बंगाल की जनता के लिए उन्हें दर्द सहना है तो वो सहते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि उनकी इस पीड़ा के कारण वो लोग हैं, जिनके पास बंगाल की जनता की तरह अच्छी सोच और बड़ा दिल नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि वो बंगाल सरकार द्वारा राज्य के प्रथम सेवक के साथ इस तरह के व्यवहार की तारीफ़ करते हैं क्योंकि बंगाल की जनता सब देख रही है। बता दें कि कुछ दिनों पहले जब जाधवपुर यूनिवर्सिटी में केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो को घेर कर छात्रों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया था, तब राज्यपाल धनखड़ ने उन्हें पुलिस बल के साथ जाकर वहाँ से निकाला था।

वर्ल्ड कप की फजीहत के बाद ICC ने अब बदला यह नियम, कीवी क्रिकेटरों ने ली क्लास

न्यूज़ीलैंड के क्रिकेटरों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की आलोचना और उस पर तंज़ कसना ट्विटर पर शुरू कर दिया है, और कारण बिलकुल जायज़ है। इस साल के विश्व कप में जिस ‘गलत’ नियम के चलते न्यूज़ीलैंड को पूरे विश्व कप में पसीना बहाने के बाद इंग्लैंड के खिलाफ खिताबी मुकाबले में हार का मुँह देखना पड़ा, अब जाकर ICC उस नियम को बदलने जा रहा है। ऐसे में कीवी खिलाड़ियों का गुस्सा बिलकुल समझा जा सकता है।

ICC ने हाल ही में यह नियम आख़िरकार बनाया कि सेमी फाइनल और फाइनल मैचों में सुपर ओवर टाई रहने पर मैच का फ़ैसला और एक सुपर ओवर, और एक सुपर ओवर, और एक सुपर ओवर की तर्ज पर किया जाएगा। यानि एक-एक कर सुपर ओवर तब तक कराए जाते रहेंगे, जब तक कि कोई एक टीम किसी सुपर ओवर में दूसरी टीम से अधिक रन न बना ले। सेमी फाइनल से पहले के मुकाबलों में सुपर ओवर टाई रहने पर मैच टाई ही माना जाएगा।

अपनी एक प्रेस विज्ञिप्ति में ICC ने कहा, “यह नियम उस मूल सिद्धांत के अनुसार होगा कि मैच जीतने के लिए आपको विपक्षी टीम से अधिक रन बनाने हैं।”

भूतपूर्व कीवी क्रिकेटर क्षुब्ध हैं कि क्या यह नियम उनकी विश्व कप हार के पहले नहीं आ सकता था।

दिल तोड़ने वाली हार

इस विश्व कप तक ICC का ‘टाई’ (50-50 ओवरों की समाप्ति पर दोनों टीमों के रन बराबर रहना) को लेकर नियम था कि खेल सुपर-ओवर में जाएगा, जहाँ दोनों टीमों के दो-दो बल्लेबाजों को 6-6 बॉलों (1-1 ओवर) पर रन बनाने होंगे। 6 गेंदों में अधिकतम रन बनाने वाली टीम विजेता होगी। लेकिन अगर सुपर ओवर भी टाई रहे (जैसा कि न्यूज़ीलैंड-इंग्लैंड के विश्व कप, 2019 फाइनल में हुआ), तो ICC का नियम इसको लेकर बहुत पेचीदा था।

बजाय ‘कॉमन सेंस’ के उपाय के, कि सुपर ओवर तब तक जारी रखा जाए जब तक कि कोई एक टीम दूसरे से अधिक रन न बना ले, ICC का नियम था कि दोनों टीमों की मैच में बाउंड्रियाँ गिनी जाएँ! इसी अजीब नियम के चलते लगभग पूरे मैच में इंग्लैंड पर इक्कीस पड़ने वाली और टूर्नामेंट में सबका दिल जीतने वाली न्यूज़ीलैंड की टीम सुपर ओवर टाई रहने के बाद हार गई। मैच में चौके-छक्के मिलाकर उसके बल्लेबाज़ों ने 17 बाउंड्रियाँ लगाईं थीं, जबकि इंग्लैंड ने 22.

Martin Guptill at the Cricket World Cup final won by England after a super over.

कीवी कप्तान केन विलियमसन ने उस समय ‘प्लेयर ऑफ़ द टूर्नामेंट’ चुने जाते समय कहा था कि वे यह ख़िताब उस एक रन से बदलने के लिए प्रस्तुत हैं, जो उनकी टीम को जीत दिला दे। न्यूज़ीलैंड के धाकड़ बल्लेबाज मार्टिन गुप्टिल इस हार के बाद मैदान पर ही इतने हताश हो गए कि उनकी टीम के साथियों के साथ ही इंग्लिश ऑल-राउंडर क्रिस वोक्स को भी उन्हें सांत्वना देने आगे आना पड़ा था। उस समय न्यूज़ीलैंड ही नहीं, दुनिया भर के कई पूर्व खिलाड़ियों ने इस नियम को “बेहूदा”, “अनर्गल”, “ऊटपटांग”, “बेतुका” आदि कहा था।

‘टाइटैनिक वालों के लिए दूरबीन भी ले आओ’

न्यूज़ीलैंड की विश्व कप 2019 टीम का हिस्सा रहे बल्लेबाज जेम्स नीशम ने इस खबर को शेयर करते हुए ट्वीट किया, “एजेंडे में अगली चीज़: टाइटैनिक (जहाज़) पर बर्फ़ देखने के लिए तैनात रहे लोगों को बेहतर दूरबीनें देना।” नीशम मैच के बाद गुप्टिल को ढाँढ़स बंधाने वाले खिलाड़ियों में भी थे।

न्यूज़ीलैंड के पूर्व कोच और खिलाड़ी क्रेग मैकमिलन ने भी इस निर्णय में देरी की आलोचना की।

VVIP हेलीकॉप्टर केस: गौतम खेतान को झटका, हाई कोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक

3600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाला के आरोपी गौतम खेतान को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए आज (अक्टूबर 15, 2019) इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के स्थगनादेश को निरस्त कर दिया। हाईकोर्ट ने खेतान के खिलाफ काला धन मामले में कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने HC से दोबारा गौतम खेतान की याचिका पर सुनवाई करने के लिए कहा है।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार की याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले को निरस्त करके पूरे मामले में नए सिरे से सुनवाई करने को कहा।

उल्लेखनीय है कि शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के 16 मई के आदेश के ख़िलाफ़ केंद्र की अपील पर यह फैसला दिया। उच्च न्यायालय ने कहा था कि काला धन और कर अधिरोपण कानून अप्रैल 2016 से पहले लागू नहीं होगा। इस आधार पर आयकर विभाग को खेतान के खिलाफ कार्रवाई करने से रोक दिया था। उनके खिलाफ काला धन रखने का मामला दर्ज किया गया था।

दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए केंद्र सरकार ने दलील दी थी कि इस फैसले से हर मामले पर बुरा असर पड़ेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान केन्द्र ने काला धन संबंधी कानून 2015 के प्रावधानों का उल्लेख किया था और कहा था कि खेतान के खिलाफ कथित अपराध ‘सतत् अपराध’ है।

कॉन्ग्रेस नेता शिवकुमार को तिहाड़ जेल में मिलेगी कुर्सी, देख सकेंगे TV, 25 अक्टूबर तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपित कर्नाटक कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता डीके शिव कुमार की न्यायिक हिरासत 25 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की माँग पर अदालत ने यह आदेश दिया है।

वहीं, दिल्ली की कोर्ट ने मंगलवार (अक्टूबर 15, 2019) को ही सुनवाई के दौरान तिहाड़ जेल प्रशासन को आदेश दिया है कि डीके शिवकुमार को टेलीविजन और कुर्सी मुहैया कराई जाए। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि यह सब जेल मैनुअल के हिसाब से ही हो।

दरअसल, डीके शिव कुमार के वकील ने कोर्ट में अर्जी देकर शिकायत की थी कि उनके मुवक्किल को जेल में बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं उपलब्ध करवाई जा रही है, जिसकी वजह से वो पीठ दर्द की समस्या से जूझ रहे हैं। साथ ही शिव कुमार के वकील ने यह भी आरोप लगाया कि शिवकुमार से जेल के अधिकारी एकसमान व्यवहार नहीं कर रहे हैं।

बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग के केस में शिवकुमार की हिरासत की अवधि समाप्त होने पर ईडी ने उन्हें कोर्ट में पेश करते हुए हिरासत बढ़ाए जाने की माँग की थी। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले सीनियर लीडर डीके शिवकुमार को पिछले महीने मनी लॉन्ड्रिंग के एक केस में गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 1 अक्टूबर को उनकी न्यायिक हिरासत पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनकी हिरासत 15 तारीख तक के लिए बढ़ा दी थी। तिहाड़ में न्यायिक हिरासत के दौरान पूछताछ की माँग किए जाने पर एक बार फिर से कोर्ट ने हिरासत की अवधि में इजाफा किया है।

इसके साथ ही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए शिवकुमार की माँ व पत्नी को भी ईडी ने समन भेजा है। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार (अक्टूबर 14, 2019) को मीडिया को बताया, “हमने मामले के संबंध में पूछताछ के लिए 50 से अधिक लोगों को समन जारी किया है। हमने शिवकुमार की पत्नी व उनकी माँ को 17 अक्टूबर को नई दिल्ली में बुलाया है।” बता दें कि ईडी इस मामले में डीके शिवकुमार की बेटी ऐश्वर्या और बेटे डीके सुरेश से पहले ही पूछताछ कर चुकी है।